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पिछ्ली सरकारों में ताल-पोखरों पर होता था कब्जा, हम कर रहे संरक्षण: सीएम योगी

चिलुआताल बनेगा ईको टूरिज्म और वाटर स्पोर्ट्स का बेहतरीन केंद्र: सीएम योगी पिछ्ली सरकारों में ताल-पोखरों पर होता था कब्जा, हम कर रहे संरक्षण: सीएम योगी मुख्यमंत्री ने किया चिलुआताल के पर्यटन विकास कार्यों का लोकार्पण 20 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निखारा गया है चिलुआताल को गोरखपुर,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि चिलुआताल पर्यटन विकास परियोजना के अगले चरणों में चिलुआताल को रामगढ़ताल की तर्ज पर ईको टूरिज्म और वाटर स्पोर्ट्स के बेहतरीन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। पिछली सरकारों में ताल-पोखरों पर कब्जा होता था। अपनी बपौती समझकर कुछ लोग इस पर हवेली बनवा लेते थे। जिन ताल-पोखरों पर कब्जा नहीं हो पाता था, वे गंदगी और अपराध के गढ़ बन जाते थे। डबल इंजन सरकार ताल-पोखरों पर कब्जा नहीं होने देती, बल्कि प्रकृति संरक्षण के दायित्वों का निर्वहन करती है। उन्हें बेहतरीन पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित कर समाज को प्राकृतिक वातावरण में आनंदित होने का मंच देती है।  सीएम योगी मंगलवार शाम गोरखपुर के उत्तरी छोर पर स्थित प्राकृतिक झील चिलुआताल के पर्यटन विकास कार्यों का लोकार्पण करने के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। 20 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निखारे गए इस पर्यटन स्थल को जनता को समर्पित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अच्छी सरकारें, अच्छी चीजें लेकर आती हैं। चिलुआताल में होगा 20 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन सीएम योगी ने कहा कि चिलुआताल में कोल इंडिया लिमिटेड के साथ मिलकर फ्लोटिंग सोलर प्लांट लगाने की कार्यवाही को आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे चिलुआताल में 20 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन होगा। पूरे शहर की बिजली आपूर्ति यहां से संभव हो सकेगी। सोलर एनर्जी ग्रीन एनर्जी होती है, इससे किसी तरह का कार्बन उत्सर्जन नहीं होता। चिलुआताल में लगने वाला फ्लोटिंग सोलर प्लांट नेट जीरो के लक्ष्य को प्राप्त करने में भी सहयोग करेगा।  नेचुरल है चिलुआताल का पानी सीएम योगी ने कहा अभी तक गोरखपुर में ईको टूरिज्म का प्रमुख केंद्र रामगढ़ताल ही था। पर, उसमें ड्रेनेज का पानी जाता था। रामगढ़ताल की सफाई कराई गई, ताल को डीसिल्ट किया गया। वहां आज भी पानी ट्रीटमेंट के बाद ही जाता है। यानी रामगढ़ताल का पानी पूरी तरह नेचुरल नहीं है, जबकि चिलुआताल का पानी नेचुरल है जो जंगलों से होकर आता है। खाद कारखाने के निर्माण में चिलुआताल को डीसिल्ट कर यहां से पानी दिया गया। सिल्ट का उपयोग निचले इलाकों के भराव में किया गया।  चिलुआताल में वाटर स्पोर्ट्स की असीम संभावनाएं  मुख्यमंत्री ने कहा कि रामगढ़ताल की तरह चिलुआताल में भी वाटर स्पोर्ट्स की असीम संभावनाएं हैं। कुछ दिनों पहले रामगढ़ताल में नेशनल जूनियर रोइंग चैंपियनशिप का सफल आयोजन हुआ। इसमें 22 राज्यों के 200 से अधिक खिलाड़ी आए। सबने रामगढ़ताल की खूब सराहना की। अब जब लोग चिलुआताल को देखेंगे तो यह और भी अच्छा लगेगा। उन्होंने चिलुआताल के प्राकृतिक वातावरण की तारीफ करते हुए कहा कि चिलुआताल के किनारे लहरों से होकर आ रही हवा तापमान को कम कर सुखद एहसास करा रही है। यहां पर लोग परिवार के साथ आकर घूम सकते हैं। स्वास्थ्य लाभ ले सकते हैं। यहां न प्रदूषण है और न ही किसी प्रकार की अव्यवस्था। अच्छे सिटी डेवपलमेंन्ट प्लान से बनती है अच्छी धारणा मुख्यमंत्री ने कहा कि अच्छे सिटी डेवपलमेंन्ट प्लान से लोगों के मन में शहर की अच्छी धारणा बनती है। हमें गोरखपुर को सेफ और स्मार्ट सिटी के साथ ही सस्टेनेबल डेवलपमेंट वाली सिटी बनाना है। विकास की प्रक्रिया सतत बढ़ती रहेगी, लेकिन इसके संरक्षण की जिम्मेदारी नागरिकों की है। उन्होंने आमजन से विकास का संरक्षण करने, सार्वजनिक संपति का नुकसान न करने, ऐसा करने वालों को जेल भिजवाने और गंदगी न करने की अपील की। उन्होंने रामगढ़ताल की सफाई के दौरान 56 बोरी प्लास्टिक मिलने का जिक्र करते हुए आह्वान किया कि गोरखपुर को प्लास्टिक मुक्त और स्वच्छ-सुंदर शहर बनाने का संकल्प लेना होगा।  5 से 21 जून तक स्वच्छता, पौधरोपण और योग शिविर के आयोजन का दिया निर्देश मुख्यमंत्री ने भाजपा कार्यकर्ताओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्ष के सफलतम कार्यकाल के उपलक्ष्य में विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून से लेकर विश्व योग दिवस 21 जून तक स्वच्छता, पौधरोपण और योग शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि 5 जून को महानगर के दो मंडल सांसद व ग्रामीण विधायक के नेतृत्व में रामगढ़ताल और पांच मंडल चिलुआताल के किनारे 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत पौधरोपण का वृहद अभियान चलाएं। इसके पहले 4 जून को स्वच्छता का वृहद अभियान चलाया जाए। 21 जून को विश्व योग दिवस पर 'करो योग रहो निरोग' के संकल्प के साथ रामगढ़ताल और चिलुआताल पर विशाल योग शिविरों का आयोजन किया जाए। एसएसबी नहीं होती तो बंद खाद कारखाने का स्क्रैप भी नहीं बचता सीएम ने कहा कि 31 वर्ष तक गोरखपुर का खाद कारखाना बंद पड़ा था। यहां एसएसबी नहीं होती तो कारखाने का स्क्रैप भी नहीं बचता। अब खाद कारखाना शुरू हो गया है। यहां एसएसबी है, केंद्रीय विद्यालय भी है, सैनिक स्कूल खुल गया है और चिलुआताल का पर्यटन विकास भी हो रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्रीय विद्यालय के नए भवन के लिए धनराशि स्वीकृत कर दी गई है। सीएम योगी के विजन से खूबसूरत चित्र सा निखर गया है गोरखपुर: रविकिशन इस अवसर पर सांसद रविकिशन शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शिता बेमिसाल है। उनके विजन से गोरखपुर खूबसूरत चित्र सा निखर गया है। मुख्यमंत्री जी के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में गोरखपुर विकास के लिहाज से पूरे देश मे नजीर पेश कर रहा है। रामगढ़ताल के बाद अब चिलुआताल भी फिल्मों की शूटिंग का केंद्र बनेगा। सांसद रविकिशन ने चिलुआताल पर लिखा अपना एक गीत भी सुनाया।  सीएम योगी के नेतृत्व में गोरखपुर का कोई भी कोना विकास से अछूता नहीं: महापौर लोकार्पण समारोह में मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने कहा कि सीएम योगी के नेतृत्व में गोरखपुर का कोई भी कोना विकास से अछूता नहीं रह गया है। यह मुख्यमंत्री जी का ही विजन है कि उन्होंने उपेक्षित रहे चिलुआताल को खूबसूरत पर्यटन स्थल बनवा दिया।   कार्यक्रम में एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक फतेह … Read more

गोवर्धन से गिरफ्तारी के बाद अभिषेक मिश्रा केस में नए खुलासे, डिजिटल रिकॉर्ड बने अहम सबूत

माथुरा मथुरा के गोवर्धन से गिरफ्तार IIT रुड़की से इंजीनियरिंग कर चुके अभिषेक मिश्रा को लेकर जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे सामने आ रहे हैं. ऑनलाइन गीता प्रवचन के जरिए अपनी पहचान बनाने वाले अभिषेक के मोबाइल फोन और डिजिटल रिकॉर्ड अब पुलिस जांच का अहम हिस्सा बन चुके हैं. जांच अधिकारियों के मुताबिक कुछ फोटो और वीडियो ऐसे मिले हैं, जिन्होंने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है. पुलिस के अनुसार, अभिषेक मिश्रा के संपर्क में आने वाली कई युवतियां उच्च शिक्षित थीं. इनमें बीटेक, एमटेक और MBA जैसी पढ़ाई कर चुकी युवतियों के नाम भी सामने आए हैं. आरोप है कि धार्मिक और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के नाम पर शुरू हुआ संपर्क धीरे-धीरे भरोसे, भावनात्मक निर्भरता और कथित शोषण में बदलता चला गया. जांच में जुटी टीम मोबाइल फोन, चैट रिकॉर्ड, फोटो, वीडियो और आर्थिक लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल कर रही है. मोबाइल से मिले फोटो-वीडियो क्यों बने जांच का केंद्र मामले की जांच कर रहे अधिकारियों का कहना है कि परिजनों की ओर से कुछ ऐसे फोटो उपलब्ध कराए गए हैं जिनमें आरोपी युवतियों के साथ अंतरंग स्थिति में दिखाई दे रहा है. इन तस्वीरों और वीडियो की सत्यता की जांच की जा रही है. पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ये सामग्री कब रिकॉर्ड की गई और इसके पीछे की परिस्थितियां क्या थीं. सूत्रों के अनुसार, मोबाइल फोन से मिले डिजिटल डेटा की फोरेंसिक जांच भी कराई जा सकती है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आरोपी किन-किन लोगों के संपर्क में था और उसका नेटवर्क कितना बड़ा था. IIT की डिग्री और आध्यात्मिक छवि का असर जांच के दौरान सामने आया है कि अभिषेक मिश्रा ने IIT रुड़की से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी. पुलिस अधिकारियों का मानना है कि उसकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और बोलने की शैली ने कई युवाओं को प्रभावित किया. वह ऑनलाइन माध्यम से भगवद्गीता और आध्यात्मिक विषयों पर चर्चा करता था, जिससे देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग उससे जुड़ते गए. आरोप है कि इसी भरोसे का इस्तेमाल कर वह कुछ लोगों को अपने करीब लाने में सफल रहा. पुलिस का कहना है कि इस पहलू की भी जांच की जा रही है कि आखिर किन परिस्थितियों में पढ़ी-लिखी युवतियां उसके साथ रहने के लिए गोवर्धन पहुंचीं. गंधर्व विवाह का दावा और गंभीर आरोप मामले में दर्ज एफआईआर के अनुसार, एक पीड़िता ने आरोप लगाया है कि अभिषेक मिश्रा ने उसे यह विश्वास दिलाया कि दोनों का 'गंधर्व विवाह' हो चुका है. पुलिस के मुताबिक इसी आधार पर शारीरिक संबंध बनाए जाने का आरोप लगाया गया है. पीड़िता के बयान के बाद आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज किया गया और बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इसी तरह के दावे अन्य लोगों के सामने भी किए गए थे. परिवारों से पैसे मंगवाने के आरोप पुलिस जांच में एक और पहलू सामने आया है. अधिकारियों के मुताबिक कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि समूह में रहने वाले युवक-युवतियों के परिवारों से आर्थिक मदद मंगवाई जाती थी. यह भी जांच का विषय है कि क्या भावनात्मक दबाव बनाकर पैसे मंगवाए गए थे. फिलहाल पुलिस बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजेक्शन और अन्य आर्थिक गतिविधियों की भी पड़ताल कर रही है. पहले भी पहुंच चुके थे परिजन जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि करीब छह महीने पहले कुछ परिजन अपनी बेटी को वहां से वापस ले जाने पहुंचे थे. उस समय भी विवाद की स्थिति बनी थी. हालांकि मामला ज्यादा आगे नहीं बढ़ा, लेकिन अब पुलिस उस पूरे घटनाक्रम को भी दोबारा खंगाल रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि एक समय वहां दो दर्जन से ज्यादा युवक-युवतियां आते-जाते थे. बाद में अधिकांश लोग वहां से अलग हो गए. पुलिस अब यह समझने का प्रयास कर रही है कि आखिर इसके पीछे क्या वजह थी. पुलिस कार्रवाई के दौरान दो युवतियों और एक युवक को वहां से रेस्क्यू किया गया था. बाद में उन्हें उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया. अधिकारियों का कहना है कि सभी की काउंसलिंग कराई जा रही है ताकि वे सामान्य जीवन में लौट सकें. अभी कई सवालों के जवाब बाकी अभिषेक मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ऑनलाइन प्रवचन से शुरू हुई यह कहानी इतने गंभीर आरोपों तक कैसे पहुंची. मोबाइल फोन से मिले डेटा, फोटो-वीडियो, कथित आर्थिक लेन-देन और पीड़ितों के बयानों के आधार पर पुलिस पूरे मामले की तह तक जाने का दावा कर रही है. फिलहाल जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि विवेचना में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

महंगा नारियल पानी नहीं! गर्मी में ये 5 सस्ते देसी ड्रिंक्स रखेंगे शरीर को हाइड्रेट

गर्मी बढ़ते ही तेज धूप, पसीना और उमस की वजह से शरीर में पानी की कमी होने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में लोग ठंडी-ठंडी ड्रिंक्स से अपने आपको कूल और फ्रेश रखने की कोशिश करते हैं. चिलचिलाती गर्मी में अगर कोई ड्रिंक लोगों को खूब पसंद आती है तो वो नारियल पानी होता है. एक्सपर्ट्स से लेकर डॉक्टर्स तक गर्मियों में नारियल पानी पीने की सलाह देते हैं. ऐसे में ज्यादातर लोग खुद को हाइड्रेट रखने के लिए नारियल पानी पीना पसंद करते हैं. इसमें मौजूद इलेक्ट्रोलाइट्स शरीर में पानी की कमी नहीं होने देते और थकान भी दूर करते हैं. हालांकि, पिछले कुछ समय में नारियल पानी की कीमत काफी बढ़ गई हैं. कई शहरों में एक नारियल पानी के लिए 80 से 100 रुपये या उससे भी ज्यादा खर्च करने पड़ सकते हैं. ऐसे में बहुत से लोगों के लिए इसे रोजाना खरीदना मुश्किल होता है. अगर आपको भी रोजाना नारियल पानी खरीदना भारी पड़ता है तो परेशान ना हों. गर्मियों में शरीर को ठंडा और हाइड्रेट रखने के लिए सिर्फ नारियल पानी पर ही निर्भर रहने की जरूरत नहीं है. आज हम आपको कई देसी और सस्ती ड्रिंक्स बताने वाले हैं, जिनमें भरपूर पानी, विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं. आइए जानते हैं ऐसे 5 सस्ते और हेल्दी ऑप्शंस के बारे में, जो नारियल पानी की जगह आपकी डाइट का हिस्सा बन सकते हैं. 1. तरबूज का जूस: लिस्ट में सबसे पहला नाम तरबूज के जूस का आता है. गर्मी के मौसम में तरबूज सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले फलों में से एक है. इसका जूस शरीर में पानी की कमी पूरी करने में मदद करता है. इसमें नारियल पानी की तरह ही भरपूर मात्रा में पोटैशियम, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स भी होते हैं, जो शरीर को तरोताजा बनाए रखते हैं. 2. लौकी का जूस: भले ही कई लोगों को लौकी पसंद न हो, लेकिन इस बात में कोई शक नहीं है कि सेहत के मामले में ये किसी सुपरफूड से कम नहीं है. लौकी में 92% पानी होता है. साथ ही इसमें कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम और फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को गर्मी में हाइड्रेट रखने के साथ ही एनर्जी देने में भी मदद करते हैं. 3. सफेद पेठे का जूस: सफेद पेठा का जूस भी गर्मियों में नारियल पानी की जगह पीने के लिए बढ़िया ऑप्शन है. सफेद पेठे में 96% पानी होता है. ऐसे में ये शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. इसमें भरपूर पानी के साथ कैल्शियम, जिंक और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं. ये शरीर को ठंडक देने और हाइड्रेशन बनाए रखने में मदद करता है. 4. केले के तने का जूस: केले के फल के साथ उसका तना भी पोषण का खजाना माना जाता है. इसके जूस में विटामिन बी6, पोटैशियम, आयरन और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व होते हैं. ये शरीर को एनर्जी देने के साथ-साथ कई बीमारियों से बचाने में भी मदद कर सकता है. इतना ही नहीं ये शरीर को अंदरूनी ठंडक भी देता है. 5. स्नेक गॉर्ड का जूस: स्नेक गॉर्ड (चिचिंडा) का जूस भी शरीर के लिए फायदेमंद माना जाता है. इसमें फाइबर, मैग्नीशियम, जिंक और कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं. ये शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ अंदर से साफ रखने में भी मदद कर सकता है.

राज्यपाल रमेन डेका से मुख्य सचिव ने सौजन्य भेंट की

राज्यपाल रमेन डेका से मुख्य सचिव ने सौजन्य भेंट की रायपुर राज्यपाल रमेन डेका से आज यहां लोकभवन में प्रदेश के मुख्य सचिव विकास शील ने सौजन्य भेंट की। भेंट के दौरान मुख्य सचिव ने राज्य में संचालित विभिन्न योजनाओं एवं विकास कार्याे की प्रगति से राज्यपाल को अवगत कराया।

नर्सिंग स्टाफ की भर्ती जल्द, सीएम ने स्वास्थ्य सेवाओं में तेजी लाने को कहा

रांची मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने राज्य में खाली पड़े नर्सिंग स्टाफ और स्पेशलिस्ट समेत चिकित्सकों के पदों पर शीघ्र नियुक्ति करने का निर्देश दिया। बता दें राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों में 21578 नर्सिंग स्टाफ के पद स्वीकृत हैं जिसमें 7609 पद रिक्त हैं। बैठक में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की सोच है कि हम सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा दें। इसके लिए उन्होंने उन्होंने राज्य सभी लोगों का हेल्थ प्रोफाइल सिस्टम तैयार करने का निर्देश दिया। साथ ही उन्होंने पूरे राज्य में बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्घ कराने के लिए शहरी एवं ग्रामीण में बांटकर कार्ययोजना बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि झारखंड के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं अलग-अलग हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के संचालन के लिए अध्ययन करें। कैंसर, हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक, शुगर आदि से संबंधित आपातकालीन सेवाओं के लिए अलग व्यवस्था बनाएं। बैठक में सीएम ने सरकारी अस्पतालों की बुनियादी ढांचे, दवाओं की उपलब्धता, स्वास्थ्य सेवाओं की डिजिटल मॉनिटरिंग और विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के संचालन की विस्तृत जानकारी ली। बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य अजय कुमार सिंह, विशेष सचिव, स्वास्थ्य नेहा अरोड़ा, एमडी एनएचएम शशि प्रकाश झा आदि मौजूद थे। एंबुलेंस सेवा की मॉनिटरिंग को एआई कंट्रोल रूम बनाएं मुख्यमंत्री ने एंबुलेंस सेवाओं को लेकर नाराजगी जताई। साथ ही एंबुलेंसों की मॉनिटरिंग के लिए एआई कंट्रोल रूम स्थापित करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों से टैग एंबुलेंस क्रियाशील हों, यह सुनिश्चित करें। लापरवाही पर संबंधित लोगों पर कार्रवाई करें। सीएम ने आपातकालीन स्थिति में मरीज को त्वरित अस्पताल पहुंचाने को लेकर उबर कॉन्सेप्ट का अध्ययन कर भविष्य में उसी तर्ज पर एंबुलेंस सेवा के विस्तार करने का निर्देश दिया। पैरालाइसिस, ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों के लिए अच्छी व्यवस्था हो मुख्यमंत्री ने राज्य में पैरालाइसिस अटैक, ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों के लिए मेडिकल कॉलेज में अच्छी व्यवस्था करने का निर्देश दिया। सीएम ने कोडरमा, बोकारो, चाईबासा, दुमका, जमशेदपुर, हजारीबाग आदि जिलों में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों के निर्माण कार्यो में तेजी लाकर शीघ्र पूर्ण करने का निर्देश दिया। राज्य में खुलेगा अबुआ दवाखाना राज्य सरकार द्वारा राज्य में मुख्यमंत्री अबुआ दवाखाना की स्थापना एवं संचालन की जायेगी। यह एकीकृत औषधि केन्द्र होगा, जिसका संचालन आयुष्मान आरोग्य मंदिर में होगा। अबुआ दवाखाना से ग्रामीण जनता को एलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी एवं सिद्ध प्रणाली की आवश्यक औषधियां एक ही स्थान पर सुलभता पूर्वक नि:शुल्क उपलब्ध कराई जायेंगी। अंगदान के लिए करें जागरूक मुख्यमंत्री ने किडनी, लीवर, कॉर्निया आदि अंगदान के लिए लोगों को जागरूक करने और इसके लिए अस्पताल में व्यवस्था सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने मेडिकल कॉलेजों में कार्यशाला का आयोजन कर चिकित्सकों का ज्ञान विकसित कराने का निर्देश दिया। साथ ही ब्लड बैंक की व्यवस्था को दुरुस्त करने को कहा। उन्होंने अस्पतालों को एयर कूल बनाने की कार्य योजना बनाने और बर्न यूनिट दुरूस्त करने का निर्देश दिया।

सफलता का रास्ता संघर्ष और त्याग से होकर गुजरता है, जानें क्यों जरूरी है यह प्रक्रिया

जीवन में तरक्की कोई लक (luck) नहीं, बल्कि एक तय प्रक्रिया है. अगर आप सफलता के शिखर तक पहुंचना चाहते हैं, तो संघर्ष और त्याग को अपने करियर और लाइफ का हिस्सा बनाना ही होगा. संघर्ष: मुश्किलों से लड़ने का हुनर तरक्की का रास्ता कभी भी सीधा नहीं होता.  अगर आप चुनौती से भाग रहे हैं, तो आप अपनी प्रोग्रेस खुद रोक रहे हैं.  संघर्ष का मतलब सिर्फ मेहनत करना नहीं, बल्कि खराब हालातों में भी अपना फोकस बनाए रखना है. जो लोग मुश्किलों में रास्ता ढूंढना जानते हैं, वही आगे चलकर बड़े पदों और जिम्मेदारियों के काबिल बनते हैं. याद रखें, प्रेशर में ही हीरा तराशा जाता है. त्याग: सही चीजों को चुनने की समझ प्रोफेशनल लाइफ हो या पर्सनल, तरक्की पाने के लिए कुछ चीजों का त्याग करना पड़ता है. यहां त्याग का मतलब खुद को दुखी करना नहीं, बल्कि डिस्ट्रैक्शंस (distractions) को हटाना है. कंफर्ट जोन का त्याग: नई चीजें सीखने के लिए पुराने ढर्रे को छोड़ना. आलस और फिजूलखर्ची का त्याग: समय की बर्बादी को रोककर अपने लक्ष्यों को प्रायोरिटी देना. निष्कर्ष सरल शब्दों में कहें तो, सफलता उन्हीं को मिलती है जो रिस्क लेना जानते हैं (संघर्ष) और जो अपने बड़े गोल के लिए छोटी सुख-सुविधाओं को छोड़ने का दम रखते हैं (त्याग).  अगर आप शॉर्टकट ढूंढ रहे हैं, तो तरक्की हमेशा आपसे एक कदम दूर रहेगी. लेकिन अगर आप इस संघर्ष और त्याग की प्रक्रिया को अपना लेते हैं, तो सफलता मिलना तय है.

रोटी बनाते समय इन वास्तु नियमों का रखें ध्यान, घर में बनी रहेगी सकारात्मक ऊर्जा

 क्या आप रोज रोटियां बनाते समय यह सोचते हैं कि यह बस एक सामान्य काम है? क्या आपने कभी सोचा है कि इस छोटे से कार्य का आपके घर की ऊर्जा, सुख-शांति और समृद्धि पर कितना गहरा असर पड़ता है? अगर नहीं, तो अब जान लें कि भारतीय संस्कृति में रसोई सिर्फ भोजन बनाने की जगह नहीं, बल्कि ऊर्जा का केंद्र भी मानी जाती है. यहां तैयार होने वाला भोजन न सिर्फ शरीर को पोषण देता है, बल्कि घर के वातावरण को भी प्रभावित करता है. खासकर रोटी, जिसे परंपरा में सूर्य से जुड़ा माना गया है. रोटी बनाते समय की गई छोटी-छोटी गलतियां भी बड़े वास्तु दोष का कारण बन सकती हैं. आइए जानते हैं कि रोटियां बनाते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है, ताकि घर में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और समृद्धि बनी रहे. रोटियां गिनकर बनाना क्यों माना जाता है गलत? वास्तु के अनुसार ऐसा करना अशुभ माना जाता है. मान्यता है कि रोटियों को गिनना सूर्यदेव का अपमान होता है, जिससे आर्थिक समस्याएं, नौकरी या व्यापार में रुकावटें आ सकती हैं. बेहतर है कि हमेशा अनुमान से थोड़ी अधिक रोटियां बनाएं, ताकि कोई अतिथि भूखा न जाए और घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे. पहली और आखिरी रोटी का महत्व वास्तु शास्त्र में पहली रोटी गाय के लिए और आखिरी रोटी कुत्ते के लिए निकालने की परंपरा है. यह न केवल पुण्य का काम माना जाता है, बल्कि इससे घर में लक्ष्मी का वास और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा भी होती है. अगर आसपास गाय न हो, तो पहली रोटी किसी जरूरतमंद को देना भी शुभ माना गया है. हमेशा ताजा आटा ही इस्तेमाल करें बासी आटा राहु का प्रतीक माना जाता है, जो नकारात्मकता को बढ़ाता है. इसलिए रोटियों के लिए हमेशा ताजा आटा गूंथें और बचे हुए आटे का अगले दिन इस्तेमाल न करें. इससे घर में अशांति और आर्थिक परेशानियों से बचाव होता है. चूल्हे की दिशा का रखें ध्यान वास्तु के अनुसार, रसोई का चूल्हा दक्षिण-पूर्व दिशा में होना चाहिए. रोटी बनाते समय रसोई का मुख पूर्व दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है. इससे भोजन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और घर में मानसिक व शारीरिक संतुलन बना रहता है. तवा और कढ़ाई को जूठा न छोड़ें रात में तवा या कढ़ाई जूठी छोड़ देना वास्तु दोष को बढ़ाता है और राहु की अशुभता ला सकता है. इन्हें हमेशा साफ करके सूखी जगह पर रखें. रोटी बनाने से पहले तवे को हल्का गरम कर उस पर एक चुटकी नमक डालना भी शुभ माना जाता है. चकला-बेलन की सफाई और सही उपयोग चकला-बेलन को हर बार इस्तेमाल के बाद अच्छी तरह साफ करना चाहिए. अगर इससे आवाज आती हो, तो नीचे कपड़ा रख लें. गंदे या गलत स्थान पर रखे चकला-बेलन घर में दरिद्रता और कलह का कारण बन सकते हैं. अंतिम बात कहा जाता है कि ईश्वर हर घर में रसोई के माध्यम से प्रवेश करते हैं. रोटियां सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि घर की ऊर्जा का केंद्र होती हैं. अगर आप इन छोटे-छोटे वास्तु नियमों का ध्यान रखते हैं, तो घर में सकारात्मकता, संतुलन और समृद्धि अपने आप बनी रहती है. रोटियां बनाने को हमेशा पवित्र कर्म समझें, जो पूरे परिवार की खुशहाली की नींव रखता है.

गर्मी से राहत का देसी सुपरड्रिंक: सत्तू शरबत की आसान रेसिपी

गर्मियों के मौसम में सूरज की तपिश और चिलचिलाती धूप शरीर का सारी एनर्जी सोख लेती है. ऐसे में खुद को हाइड्रेटेड और ऊर्जावान रखना एक बड़ी चुनौती बन जाता है. अगर आप भी इस चिलचिलाती गर्मी से परेशान हैं और सुबह-सुबह कुछ ऐसा चाहते हैं जो पेट को ठंडक दे और दिनभर एक्टिव रखे तो सत्तू का ठंडा-ठंडा शरबत आपके लिए सबसे बेस्ट ऑप्शन है. इसे देसी एनर्जी ड्रिंक भी कहा जाता है. प्रोटीन, फाइबर और आयरन से भरपूर सत्तू न सिर्फ पेट की गर्मी को शांत करता है, बल्कि डाइजेशन को सुधारकर आपको लू की चपेट में आने से भी बचाता है. रोज़ सुबह नाश्ते में एक गिलास सत्तू का शरबत पीने से आपका पेट लंबे समय तक भरा रहता है और आप दिनभर तरोताजा महसूस करते हैं. आइए जानते हैं इसे बनाने की आसान और क्विक रेसिपी. सामग्री: चना सत्तू: 4 बड़े चम्मच ठंडा पानी: 2 गिलास भुना जीरा पाउडर: 1 छोटा चम्मच काला नमक: स्वादानुसार नींबू का रस: 1 बड़ा चम्मच बारीक कटा प्याज: 1 चम्मच (वैकल्पिक) बारीक कटी हरी मिर्च व हरा धनिया: थोड़ी सी बर्फ के टुकड़े सत्तू का नमकीन शरबत बनाने की विधि एक बड़े बर्तन या जग में 4 चम्मच चने का सत्तू डालें. अब इसमें थोड़ा सा ठंडा पानी डालकर चम्मच या मथनी की मदद से अच्छे से मिलाएं ताकि कोई गांठ (lumps) न रहे. जब सत्तू अच्छे से घुल जाए, तो बचा हुआ पूरा ठंडा पानी इसमें डाल दें. इसके बाद भुना जीरा पाउडर, काला नमक और नींबू का रस डालकर अच्छी तरह मिक्स करें. अगर आपको पसंद हो, तो इसमें बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च और हरा धनिया मिला लें. इससे इसका स्वाद दोगुना हो जाता है. शरबत को गिलासों में निकालें, ऊपर से आइस क्यूब्स डालें और ठंडा-ठंडा सर्व करें.

अमृतसर बॉर्डर पर BSF का बड़ा एक्शन, 17 किलो हेरोइन जब्त

अमृतसर   बीएसएफ अमृतसर सेक्टर की टीम ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए दो अलग-अलग केसों में सीमावर्ती गांव चक अल्लाह बख्श और गांव कक्कड़ के इलाके से 17 किलो हीरोइन जब्त है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कीमत 85 करोड रुपए के लगभग आकी जा रही है। जानकारी के अनुसार गांव चक अल्लाह बख्श में 11 किलो का एक बड़ा पैकेट ड्रोन से फेंका गया मिला, जबकि कक्कड़ के इलाके में 6 किलो के लगभग हीरोइन का एक बड़ा पैकेट मिला जिसमें छोटे-छोटे अन्य पैकेट थे। फिलहाल मामले की जांच शुरू कर दी गई है। इस रिकवरी से यह भी साबित हो चुका है कि तस्करों की तरफ से इन दोनों बड़े हेक्साकॉप्टर ड्रोन उड़ाये जा रहे हैं जो 10 किलो से लेकर 20 किलो तक का वजन उठाने में सक्षम हैं, जबकि दूसरी तरफ सरकार की तरफ से दावा किया जा रहा है कि नशे की आमद और बिक्री पर लगाम लगाई जा चुकी है। 

हरियाणा में स्मार्ट मीटर योजना पर नया प्लान, विरोध से बचने के लिए होगी चरणों में शुरुआत

चंडीगढ़. उत्तर प्रदेश में लोगों द्वारा अपने घरों के बाहर लगाए जाने वाले स्मार्ट मीटरों का प्रबल विरोध करने के बाद केंद्र सरकार हरियाणा में नया प्रयोग करने की तैयारी में है। केंद्र सरकार ने हरियाणा में प्रीपेड स्मार्ट मीटरिंग प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का निर्णय लिया है। प्रथम चरण में सरकारी कार्यालयों, सरकारी भवनों और सरकारी कर्मचारियों के परिसरों में बिजली के प्रीपेड मीटर लगाए जाएंगे। इसके पश्चात 10 किलोवाट से अधिक भार वाले उपभोक्ताओं तथा अन्य श्रेणियों के उपभोक्ताओं को इस प्रणाली से जोड़ा जाएगा। इसके पीछे केंद्र व राज्य सरकार की सोच है कि लोगों में इन स्मार्ट प्रीपेड मीटरों के प्रति भरोसा जागेगा। सरकारी कार्यालयों में पहले प्रीपेड मीटर लगने से लोगों में यह संदेश जाएगा कि इन प्रीपेड मीटरों में किसी तरह की कोई खराबी नहीं है, क्योंकि सरकार स्वयं इन्हें अपने कार्यालयों में लगाने की पहल कर रही है। उत्तर प्रदेश में व्यापक स्तर पर लोगों ने इस व्यवस्थछा का विरोध किया था। चंडीगढ़ में हुई समीक्षा बैठक में क्या बोले केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने बिजली निगमों तथा केंद्र प्रायोजित विभिन्न योजनाओं की चंडीगढ़ में हुई समीक्षा बैठक में कहा कि स्मार्ट मीटरों से बिजली हानियों को कम करने में सहायता मिलेगी। इस पर हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि भविष्य में प्रदेश के सभी नए उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर उपलब्ध कराए जाएंगे। स्मार्ट मीटर आधुनिक तकनीक से युक्त हैं तथा सौर ऊर्जा प्रणालियों के साथ एकीकृत होने की क्षमता रखते हैं। मनोहर लाल ने कहा कि बिजली निगमों को नई तकनीकों को अपनाते हुए लक्ष्य आधारित योजनाओं एवं परियोजनाओं पर तेजी से कार्य करना होगा, ताकि उपभोक्ताओं को निर्बाध, गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराई जा सके। बिजली बिलिंग और वास्तविक आपूर्ति के बीच के अंतर को न्यूनतम करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2013-14 में बिजली निगमों का कुल लाइन लास लगभग 34 प्रतिशत था, जिसमें अब उल्लेखनीय कमी आई है। इस पर केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने संतोष व्यक्त करते हुए सुधार की गति को और तेज करने के निर्देश दिए। राज्य में लाइन लास 10 प्रतिशत के आसपास है, जिसमें रिकार्ड कमी आई है। बिजली मंत्री अनिल विज ने ‘म्हारा गांव-जगमग गांव’ योजना का जिक्र करते हुए कहा कि वर्तमान में प्रदेश के 6,117 गांवों को 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। गुरुग्राम और फरीदाबाद में संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत चल रहे लंबित कार्यों को निर्धारित समयावधि में पूरा किया जाएगा। बता दें कि मुख्यमंत्री रहते मनोहर लाल के पास बिजली मंत्रालय भी था, जिसमें उन्होंने अपने कार्यकाल में बहुत सुधार किए थे। हरियाणा में मांग से अधिक बिजली उपलब्ध हरियाणा के पास वर्तमान में 16,552 मेगावाट से अधिक अनुबंधित बिजली क्षमता उपलब्ध है। इसमें लगभग 9,929.92 मेगावाट क्षमता तापीय, परमाणु और गैस आधारित स्रोतों से तथा 6,622.58 मेगावाट क्षमता जलविद्युत, सौर, पवन, बायोमास और अन्य नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त हो रही है। चालू वर्ष में हरियाणा में अधिकतम बिजली मांग लगभग 16,454 मेगावाट तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि राज्य के पास इससे अधिक बिजली उपलब्ध है। वर्ष 2029-30 तक प्रदेश में अधिकतम बिजली मांग बढ़कर लगभग 19,481 मेगावाट तक पहुंच सकती है, जिसके मद्देनजर दीर्घकालिक ऊर्जा योजना पर कार्य किया जा रहा है। हरियाणा में चालू वर्ष में 2.20 लाख रूफटाप सोलर सिस्टम स्थापित करने का लक्ष्य है। अब तक लगभग 86 हजार सोलर सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं।