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पश्चिम बंगाल कार्रवाई के बाद सीमावर्ती बिहार में चौकसी सख्त, वाहनों की गहन जांच जारी

किशनगंज पश्चिम बंगाल में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों और फर्जी दस्तावेजों के सहारे निवास कर रहे लोगों के खिलाफ तेज हुई कार्रवाई का असर अब सीमावर्ती बिहार-नेपाल क्षेत्र में भी दिखाई देने लगा है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि कार्रवाई के दबाव में कुछ संदिग्ध तत्व सीमावर्ती रास्तों का उपयोग कर बिहार और नेपाल की ओर रुख कर सकते हैं। इस संभावना को देखते हुए किशनगंज जिले से सटे भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व रूप से मजबूत किया गया है। सीमा सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रही सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने किशनगंज के लगभग 122 किलोमीटर लंबे भारत-नेपाल बॉर्डर पर अलर्ट जारी कर दिया है। सीमा पर तैनात जवानों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। सीमा चौकियों पर निगरानी बढ़ाने के साथ-साथ संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जा रही है। संवेदनशील इलाकों में वाहनों और यात्रियों की हो रही जांच दिघलबैंक, ठाकुरगंज, गलगलिया, खानीबाड़ी और फतेहपुर सहित कई संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियां लगातार अभियान चला रही हैं। सीमा से होकर गुजरने वाले वाहनों की सघन तलाशी ली जा रही है, जबकि यात्रियों की पहचान का सत्यापन भी किया जा रहा है। सीमा चौकियों के अलावा वैकल्पिक रास्तों और पगडंडियों पर भी सुरक्षा बलों की निगरानी बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी प्रकार की अवैध आवाजाही को रोका जा सके। सीमा पार करने के नियम हुए सख्त सुरक्षा कारणों से सीमा पार करने की प्रक्रिया को भी अधिक कड़ा कर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, अब केवल आधार कार्ड के आधार पर सीमा पार करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। यात्रियों को वोटर पहचान पत्र, पासपोर्ट अथवा अन्य वैध सरकारी पहचान पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है। वहीं, बच्चों के लिए जन्म प्रमाण पत्र या स्कूल पहचान पत्र दिखाना जरूरी होगा। घुसपैठ और तस्करी रोकना प्राथमिकता सीमावर्ती इलाका लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए संवेदनशील माना जाता रहा है। खुली भारत-नेपाल सीमा का लाभ उठाकर घुसपैठ, मानव तस्करी, मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों की आशंका बनी रहती है। ऐसे में मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के पक्ष में नहीं हैं। एसएसबी के सहायक कमांडेंट प्रियरंजन चकमा ने बताया कि सीमा क्षेत्र में गश्त और निगरानी को और मजबूत किया गया है। जवानों को हर गतिविधि पर पैनी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अवैध घुसपैठ, तस्करी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए सीमा पर चौकसी बढ़ाई गई है तथा संदिग्ध व्यक्तियों की गहन जांच की जा रही है। आम लोगों से भी सहयोग की अपील सुरक्षा एजेंसियों ने सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों से भी सतर्क रहने और किसी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की जानकारी तत्काल प्रशासन अथवा सुरक्षा बलों को देने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि सीमा सुरक्षा केवल सुरक्षा बलों की ही नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों की सतर्कता से भी मजबूत होती है।  

अब ईवी से करेंगे यात्रा

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को ईंधन की बचत और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित करते हुए एक महत्वपूर्ण पहल की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को मुख्यमंत्री निवास से स्टेट हैंगर भोपाल तक पेट्रोल से चलने चार पहिया वाहन के स्थान पर इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) से यात्रा की। यह ईवी मुख्यमंत्री सुरक्षा से जुड़े सभी मानकों पर खरा उतरने, फीचर्स की विधिवत् जांच एवं अन्य जरूरी प्रक्रियाओं का बारिकी से पालन करने के बाद मुख्यमंत्री के लघु कारकेड में बुधवार से शामिल कर ली गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव अब राजधानी (भोपाल) में नियमित रूप से ईवी कार से ही यात्रा करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों को ईंधन की अधिकतम बचत करने और मितव्यतापूर्ण यात्रा के साधन अपनाने का संदेश दिया है। इससे देश एवं प्रदेश में ईंधन की बचत को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम सभी का यह दायित्व है कि ऊर्जा एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए सार्थक प्रयास करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहित कर रही है। ये ईवी न केवल ईंधन की बचत करते हैं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी अत्यंत लाभकारी साबित होते हैं। इन वाहनों से वायु प्रदूषण भी नहीं होता, शोर नगण्य होता है और इन वाहनों की संधारण लागत भी पारम्परिक ईंधन वाले वाहनों की तुलना में काफी कम होती है। उन्होंने कहा कि ईंधन बचाने और पर्यावरण की रक्षा के लिए ईवी का उपयोग हम सभी के लिए हितकारी है। यह हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ईवी वाहनों के उपयोग से पारम्परिक ईंधन पर हमारी निर्भरता कम होगी, प्रदूषण घटेगा और देश-प्रदेश में हरित विकास को भी नई गति मिलेगी।  

तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से आगे निकला उत्तर प्रदेश

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बिजली व्यवस्था लगातार मजबूत बनी हुई है। भीषण गर्मी के बीच प्रदेशवासियों को निर्बाध और पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता का असर अब राष्ट्रीय स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। डिमांड के अनुरूप बिजली आपूर्ति के मामले में उत्तर प्रदेश ने तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश सहित कई राज्यों को पीछे छोड़ दिया है और लगातार डिमांड बिजली आपूर्ति कर रहा है। फिलहाल प्रदेश में बढ़ती बिजली मांग के बावजूद उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) उपभोक्ताओं को पर्याप्त बिजली उपलब्ध करा रहा है।  प्रदेश में 2-3 जून की रात को 12:21 बजे 28,770 मेगावाट डिमांड बिजली आपूर्ति की गई। इसी तरह रात 1 बजे 28,321 मेगावाट, 3 बजे 26,830 मेगावाट डिमांड बिजली आपूर्ति की गई है। 3 जून की सुबह 6 बजे 23,459 मेगावाट, सुबह 9 बजे 22,452 मेगावाट, 10 बजे 24,074 मेगावाट, 11 बजे 24,897 मेगावाट और दोपहर 12 बजे 25,076 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई है। यूपी में लगातार डिमांड बिजली आपूर्ति की जा रही आंकड़ों के अनुसार 2 जून को उत्तर प्रदेश में 27,976 मेगावाट डिमांड बिजली आपूर्ति की गई थी। यह आंकड़ा कई बड़े राज्यों की तुलना में कहीं अधिक था। इसी दिन तमिलनाडु में 19,198 मेगावाट, कर्नाटक में 13,848 मेगावाट और आंध्र प्रदेश में 13,018 मेगावाट डिमांड बिजली आपूर्ति दर्ज की गई थी। वहीं केवल एक दिन ही नहीं बल्कि लगातार कई दिनों से उत्तर प्रदेश बिजली आपूर्ति के मामले में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। 1 जून को भी प्रदेश में 27,260 मेगावाट और 31 मई को 24,610 मेगावाट की डिमांड के अनुरूप बिजली उपलब्ध कराई गई थी।  किसान, व्यापारी और औद्योगिक इकाइयों को बड़ी राहत बढ़ती गर्मी और एयर कंडीशनर, कूलर व अन्य विद्युत उपकरणों के बढ़ते उपयोग के बावजूद प्रदेश की बिजली व्यवस्था स्थिर बनी हुई है। इससे आम उपभोक्ताओं, किसानों, व्यापारियों और औद्योगिक इकाइयों को बड़ी राहत मिल रही है। हालांकि हाल ही में प्रदेश के कई हिस्सों में आए आंधी-तूफान और बारिश के कारण कुछ स्थानों पर विद्युत व्यवस्था प्रभावित हुई थी। इसके बावजूद बिजली विभाग ने तेजी से काम करते हुए अधिकांश क्षेत्रों में आपूर्ति बहाल कर दी है। जबकि मऊ, गाजीपुर और सोनभद्र के कुछ इलाकों में अभी भी प्रभावित स्थलों पर मरम्मत और रखरखाव का कार्य जारी है।  आपूर्ति प्रभावित होने की जानकारी मीडिया और उपभोक्ता को दी जाए विभागीय टीमें लगातार फील्ड में मौजूद रहकर बिजली व्यवस्था को पूरी तरह सामान्य बनाने में जुटी हुईं हैं। अपर मुख्य सचिव ऊर्जा और उप्र. पावर कारपोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जहां भी बिजली आपूर्ति प्रभावित हो, उसकी सूचना तत्काल मीडिया और उपभोक्ताओं तक पहुंचाई जाए। सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। डॉ. गोयल ने यह भी निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में रात्रि के समय अचानक लोड बढ़ जाता है, वहां विशेष जांच अभियान चलाया जाए, ताकि किसी प्रकार की तकनीकी बाधा उत्पन्न न हो। 1912 पर आने वाली शिकायतों का त्वरित निस्तारण हो। बिजली आपूर्ति के लिए यूपीपीसीएल पूरी तत्परता के साथ काम कर रहा- निदेशक वितरण यूपीपीसीएल के निदेशक (वितरण) ज्ञानेंद्र धर द्विवेदी ने कहा कि उपभोक्ताओं को निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पावर कारपोरेशन पूरी तत्परता के साथ कार्य कर रहा है। बढ़ती गर्मी के बावजूद लगातार डिमांड के अनुरूप बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। जहां कहीं भी आंधी-तूफान की वजह से आपूर्ति प्रभावित है, वहां हमारी टीमें लगातार फील्ड में मौजूद रहकर मरम्मत एवं बहाली कार्य कर रही हैं। पावर कारपोरेशन का प्रयास है कि प्रदेश के प्रत्येक उपभोक्ता को निर्धारित शेड्यूल के अनुसार निर्बाध, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराई जाए।

हरियाणा की ऐतिहासिक धरोहर को नया ठिकाना, तिगड़ाना में बनेगा मॉडर्न म्यूजियम

भिवानी. हरियाणा की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग ने तिगड़ाना में प्रस्तावित संग्रहालय और पर्यटन केंद्र की दिशा में कार्रवाई शुरू कर दी है। विभाग के डिप्टी डायरेक्टर ड. नरेंद्र परमार सात सदस्यीय टीम के साथ मंगलवार को तिगड़ाना पहुंचे और सजरा प्लान के आधार पर करीब 20 एकड़ क्षेत्र की निशानदेही व पैमाइश करवाई। पुरातत्व विभाग ने खेड़े की सुरक्षा के लिए बनने वाली चारदीवारी के लिए दो करोड़ 22 लाख 63 हजार रुपये लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को जमा करा दिए हैं। टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अगले एक माह के भीतर निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है। चारदीवारी बनने के बाद पूरे पुरातात्विक स्थल को संरक्षित क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा। सरस्वती-सिंधु सभ्यता कॉरिडोर का महत्वपूर्ण पड़ाव डिप्टी डायरेक्टर के अनुसार प्रस्तावित पुरातात्विक कारिडोर में तिगड़ाना के साथ-साथ राखीगढ़ी (हांसी), खरड़अलीपुर (हिसार), भिरड़ाना (फतेहाबाद), बनावली (फतेहाबाद), कुनाल (फतेहाबाद) और बालू (कैथल) जैसी ऐतिहासिक साइटों को जोड़ा जाएगा। आधुनिक संग्रहालय विकसित किया जाएगा – तिगड़ाना खेड़े की सुरक्षा और संरक्षण के लिए चहारदीवारी निर्माण को लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सबसे पहले सजरा प्लान के तहत पैमाइश करवाई है। टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। भविष्य में यहां आधुनिक संग्रहालय विकसित किया जाएगा, जहां खोदाई में प्राप्त पुरावशेषों को प्रदर्शित किया जाएगा। – डॉ. नरेंद्र परमार, डिप्टी डायरेक्टर, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग चंडीगढ़

जनता दर्शन में भूमि संबंधी शिकायतों पर मुख्यमंत्री ने डीएम को दिए निर्देश

गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता दर्शन में भूमि संबंधी शिकायतों पर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने डीएम को निर्देशित किया कि भूमि संबंधी शिकायतों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए। प्रकरण की गंभीरता के अनुसार संबंधित के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाए। किसी भी स्तर पर शिथिलता या लापरवाही कतई क्षम्य नहीं है। मुख्यमंत्री ने गोरखपुर प्रवास के दौरान लगातार दूसरे दिन बुधवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन में लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। कुछ लोगों ने जमीन से जुड़े मामलों में राजस्व कर्मियों की तरफ से लापरवाही किए जाने की शिकायत की तो उन्होंने डीएम को तत्काल कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। इस अवसर पर इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लेकर पहुंचे लोगों से उन्होंने कहा कि सरकार इलाज में पूरी मदद करेगी। इसके लिए जरूरतमंद लोगों का आयुष्मान कार्ड बनवाया जाएगा और इसके बाद भी जरूरत पड़ी तो विवेकाधीन कोष से सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री ने मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर जरूरतमंद, पात्र व्यक्ति का आयुष्मान कार्ड बनवाना सुनिश्चित किया जाए, ताकि उन्हें इलाज के लिए परेशान न होना पड़े। गोरखनाथ मंदिर परिसर में महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के बाहर आयोजित जनता दर्शन के दौरान सीएम योगी करीब 150 लोगों से मिले। उनके पास जाकर उनकी समस्याएं सुनीं। उनके प्रार्थना पत्रों का अवलोकन कर समस्या, शिकायत का संज्ञान लिया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने लोगों को भरोसा दिया कि किसी को परेशान होने की जरूरत नहीं है, सरकार हर जरूरतमंद के साथ खड़ी है। एक महिला ने कुछ लोगों द्वारा मकान से बेदखल किए जाने की शिकायत की। इस पर मुख्यमंत्री ने अफसरों से कहा कि मकान पर महिला का कब्जा दिलाया जाए। उन्होंने अलग-अलग मामलों के निस्तारण के लिए संबंधित प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को प्रार्थना पत्र संदर्भित करते हुए निर्देशित किया कि सभी समस्याओं का निस्तारण समयबद्ध, निष्पक्ष और संतुष्टिप्रद होना चाहिए।  जनता दर्शन में एक महिला ने मां के इलाज के लिए सहायता देने का निवेदन किया। मुख्यमंत्री ने आयुष्मान कार्ड के बारे में पूछा। महिला ने बताया कि उसके पास आयुष्मान कार्ड नहीं है। इस पर सीएम ने मौके पर मौजूद अफसरों को निर्देशित किया कि जल्द से जल्द इनका आयुष्मान कार्ड बनवाया जाए। अधिकारी हर जरूरतमंद का आयुष्मान कार्ड बनवाएं, ताकि उन्हें इलाज के लिए परेशान न होना पड़े। गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लेकर आए लोगों को मुख्यमंत्री ने भरोसा दिया कि उन्हें विवेकाधीन कोष से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।  गोसेवा की और बच्चों पर प्यार लुटाया सीएम योगी ने गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान बुधवार सुबह भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिनचर्या परंपरागत रही। प्रातःकाल गुरु गोरखनाथ और अपने ब्रह्मलीन गुरुदेव महंत अवेद्यनाथ जी का आशीर्वाद लेने के बाद सीएम योगी ने मंदिर की गोशाला में गोसेवा की। गोवंश को अपने हाथ से गुड़-रोटी खिलाकर उन पर स्नेह बरसाया। इसी क्रम में मंदिर परिसर का भ्रमण करते हुए उन्होंने परिजनों के साथ आए बच्चों को पास बुलाकर उन्हें दुलराया। चॉकलेट दीं और उनसे पढ़ाई के बारे में बातचीत की। सीएम ने बच्चों को खूब पढ़ने-आगे बढ़ने का आशीर्वाद भी दिया।

उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा करने वाले विश्वविद्यालयों को जल्द मिलेगा वेतन-पेंशन का भुगतान

पटना  राज्यपाल सैयद अता हसनैन की सख्ती के बाद राज्य के पांच विश्वविद्यालयों ने पूर्वमें खर्च राशि का हिसाब और उपयोगिता प्रमाण पत्र उच्च शिक्षा विभाग को सौंप दिया है। बीआर आंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय, मुंगेर विश्वविद्यालय, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय और पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय ने 213 करोड़ 34 लाख रुपये का हिसाब नहीं दिया था। तब राज्यपाल ने इस मामले में कुलसचिवों पर कार्रवाई करने की चेतावनी दी थी। इन विश्वविद्यालयों ने अपना हिसाब क्लियर करते हुए पूरी रिपोर्ट विभाग को सौंप दी है। विश्वविद्यालयों को वेतन-पेंशन में 434.86 करोड़ जल्द मिलेगा इसे महालेखाकार कार्यालय को उपलब्ध करा दिया गया है क्योंकि इस मामले में महालेखाकार कार्यालय से वित्तीय अनियमितता का संदेह जताया था। हालांकि, उच्च शिक्षा विभाग ने संबंधित विश्वविद्यालयों की आडिट में कमियों काे भी चिन्हित किया है जिस पर स्पष्टीकरण कुलसचिवों से मांगा गया है। वहीं विभाग द्वारा अगले सप्ताह तक विश्वविद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों तथा सेवानिवृत्त शिक्षकों व कर्मियों के पेंशन मद में तीन माह का वेतन एकमुश्त राशि 434 करोड़ 86 लाख रुपये जारी करने की तैयारी हो रही है। उच्च शिक्षा निदेशक प्रो.एनके अग्रवाल ने अन्य विश्वविद्यालयों से भी खर्च राशि का आडिट रिपोर्ट के साथ उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा करने को कहा है। विभाग के स्तर से महालेखाकार कार्यालय को भेजी गई आडिट रिपोर्ट उन्होंने अक्टूबर, 2021 से नवंबर, 2022 के बीच महालेखाकार द्वारा किए गए आडिट में पायी गयी कमियों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की है। उन्होंने कहा है कि जिस तरह पांच विश्वविद्यालयों ने सभी उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा किया है उसी तरह अन्य विश्वविद्यालयों द्वारा भी उपयोगिता प्रमाण पत्र जल्द जमा किया जाना चाहिए। उन विश्वविद्यालयों के लिए वेतन और पेंशन के भुगतान के संबंध में, जितनी जल्दी संभव हो, निर्णय लिया जा सकता है, जिनकी उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा करने में लंबित मामलों की दर शून्य प्रतिशत है।

अभिभावकों को राहत: पंजाब में प्राइवेट स्कूलों की फीस वृद्धि पर लगा 5 फीसदी का कैप

चंडीगढ़. पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों की फीस वृद्धि को लेकर बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने घोषणा की है कि अब राज्य के निजी शिक्षण संस्थान एक वर्ष में 5 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। सरकार इस फैसले को कानूनी रूप देने के लिए जल्द ही अध्यादेश लाने जा रही है, जिसे आगामी विधानसभा सत्र में विधेयक के रूप में पेश कर कानून बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय से अभिभावक निजी स्कूलों द्वारा लगातार बढ़ाई जा रही फीस को लेकर चिंता जता रहे थे। कई परिवारों पर बढ़ती शैक्षणिक लागत का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा था। सरकार ने इन शिकायतों और जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया है ताकि अभिभावकों को राहत मिल सके और फीस वृद्धि पर नियंत्रण रखा जा सके। अधिक फीस करनी होगी वापस मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने स्पष्ट किया कि पांच प्रतिशत की यह सीमा केवल ट्यूशन फीस तक सीमित नहीं होगी, बल्कि स्कूलों द्वारा विद्यार्थियों से वसूली जाने वाली अन्य अनिवार्य फीस भी इसमें शामिल मानी जाएगी। यानी स्कूल किसी अन्य मद के नाम पर अतिरिक्त शुल्क लगाकर नियमों को दरकिनार नहीं कर सकेंगे। सरकार ने यह भी तय किया है कि जिन निजी स्कूलों ने पिछले तीन वर्षों के दौरान 15 फीसदी से अधिक फीस बढ़ाई है, उन्हें अतिरिक्त वसूली गई राशि अभिभावकों को वापस करनी होगी। सरकार इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अभिभावकों के हितों की रक्षा हो। अमृतसर की घटना पर जताया दुख मुख्यमंत्री ने इस फैसले को हाल ही में अमृतसर में सामने आए एक दुखद मामले से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि एक होनहार छात्रा द्वारा कथित रूप से स्कूल में प्रताड़ना से परेशान होकर आत्महत्या किए जाने की घटना ने पूरे समाज को झकझोर दिया था। इसके बाद सरकार ने निजी शिक्षण संस्थानों की कार्यप्रणाली और फीस संरचना की समीक्षा शुरू की। मान ने कहा कि शिक्षा किसी भी परिवार के लिए सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है और इसे व्यवसाय का माध्यम नहीं बनने दिया जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकार विद्यार्थियों और अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है तथा शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।

लोकभवन में तीन दिवसीय मेडिटेशन शिविर का आयोजन

रायपुर राज्यपाल  रमेन डेका की पहल पर लोकभवन में अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए तीन दिवसीय (3 जून से 5 जून तक) मेडिटेशन (ध्यान) शिविर का आयोजन किया गया है। शिविर का उद्देश्य अधिकारियों और कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य, एकाग्रता, कार्यक्षमता तथा तनाव प्रबंधन को सुदृढ़ बनाना है।             हार्टफुलनेस संस्था, अमलेश्वर के सहयोग से आयोजित इस शिविर के प्रथम दिन ध्यान के महत्व और उसके व्यावहारिक लाभों पर विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने बताया कि नियमित ध्यान से मानसिक शांति, सकारात्मक सोच, निर्णय क्षमता और कार्य के प्रति एकाग्रता में वृद्धि होती है, जिससे शासकीय कार्यों के निष्पादन में भी बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं।            शिविर के दौरान लोकभवन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए एक घंटे का विशेष ध्यान सत्र आयोजित किया गया, जिसमें सचिवालय के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए। प्रतिभागियों को ध्यान की विभिन्न विधियों का अभ्यास कराया गया तथा दैनिक जीवन में ध्यान को अपनाने के तरीकों की जानकारी दी गई।           हार्टफुलनेस संस्था के प्रशिक्षक विकास पाठक एवं  डी.एम. शर्मा ने प्रशिक्षण प्रदान करते हुए ध्यान को स्वस्थ, संतुलित और तनावमुक्त जीवन की प्रभावी साधना बताया। उन्होंने कहा कि नियमित मेडिटेशन व्यक्ति को आंतरिक शांति प्रदान करने के साथ-साथ कार्यस्थल पर उसकी उत्पादकता और सकारात्मकता को भी बढ़ाता है। तीन दिवसीय इस शिविर में आगामी दिनों में ध्यान, आत्म-जागरूकता, भावनात्मक संतुलन एवं तनाव प्रबंधन से संबंधित विभिन्न सत्र आयोजित किए

दिल्ली अग्निकांड पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जताया गहरा शोक

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली के मालवीय नगर क्षेत्र में हुई भीषण अग्नि दुर्घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने इस हादसे में हुई जनहानि को अत्यंत दुःखद एवं हृदय विदारक बताते हुए शोकाकुल परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट की है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने संदेश में कहा कि दिल्ली में दुर्भाग्यपूर्ण भीषण अग्नि दुर्घटना में हुई जनहानि अत्यंत दुःखद एवं हृदय विदारक है। मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं। प्रभु राम से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्माओं को शांति तथा घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्रदान करें। मुख्यमंत्री ने ईश्वर से शोक संतप्त परिवारों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की भी प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में उनकी संवेदनाएं सभी प्रभावित परिवारों के साथ हैं।

महिलाओं को मिली बड़ी राहत, साय सरकार की नीति से बढ़ीं महिला नामांतरण रजिस्ट्रियां

रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण की दिशा में उठाए गए कदमों के जमीन पर सकारात्मक परिणाम दिखने लगे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर महिलाओं के नाम होने वाली भूमि व संपत्ति की रजिस्ट्री (पंजीयन) शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट देने और 12 प्रतिशत उपकर (Cess) को पूरी तरह समाप्त करने के निर्णय से बड़ा बदलाव आया है। शासन की इस बड़ी रियायत के चलते बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में महिलाओं के नाम पर संपत्ति खरीदने और पंजीयन कराने की होड़ सी मच गई है। आंकड़ों के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। एक महीने में रजिस्ट्री मामलों में 70 प्रतिशत की भारी वृद्धि जिला पंजीयक कार्यालय से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यह छूट लागू होने के बाद मात्र एक महीने के भीतर महिलाओं के पक्ष में होने वाली रजिस्ट्रियों में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। अप्रैल 2026 जिले के पांचों उप पंजीयक कार्यालयों में महिलाओं के नाम पर कुल 309 दस्तावेज पंजीकृत हुए थे। मई 2026 यह संख्या बढ़कर 445 पहुंच गई, जो अप्रैल की तुलना में लगभग 70 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी को दर्शाती है।   ब्लॉकवार आंकड़ों पर एक नजर (अप्रैल बनाम मई 2026) रजिस्ट्री शुल्क में कटौती का लाभ उठाने में जिले के सभी क्षेत्र आगे रहे हैं, जिनमें शहरी इलाकों का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा। उप पंजीयक कार्यालय केवल बलौदाबाजार में अप्रैल 2026 में 78 और मई 2026 में बढ़कर 119 हो गया। इसी प्रकार पलारी में अप्रैल 2026 में 40  दस्तावेज बढ़कर मई 2026 में 56, सिमगा में 56 से बढ़कर 99, कसडोल में 24से बढ़कर 50 तथा भाटापारा में 111 से बढ़कर 121 दस्तावेज हो गए। यह वृद्धि दर्शाती है कि महिलाओं को दी गई पंजीयन शुल्क छूट का लाभ बड़ी संख्या में परिवार उठा रहे हैं। शहरी क्षेत्र बलौदाबाजार और भाटपारा के आकड़ों में अधिक वृद्धि देखी गई है। जिला पंजीयक विनोद कोचे ने बताया कि राज्य शासन की इस नीति का सीधा और त्वरित लाभ महिलाओं को मिल रहा है। संपत्ति खरीद की लागत काफी कम हो जाने से अब परिवार स्वेच्छा से महिलाओं के नाम पर जमीन और मकान पंजीकृत कराने के लिए प्रोत्साहित हो रहे हैं। इससे महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। वहीं, बलौदाबाजार के उप पंजीयक श्री विपुल श्रीवास्तव के अनुसार, अप्रैल 2026 से 12 प्रतिशत उपकर समाप्त होने से इस प्रक्रिया में और तेजी आई है। अकेले बलौदाबाजार कार्यालय में पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अब तक 107 अधिक दस्तावेजों का पंजीयन हो चुका है। खास बात यह है कि इससे जहां एक तरफ आम जनता को बड़ी आर्थिक राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ रजिस्ट्री की संख्या बढ़ने से शासन के राजस्व में भी वृद्धि हो रही है। अब महिलाओं के नाम संपत्ति खरीदना हुआ आसान योजना की लाभार्थी नमिता साहू ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए बताया कि महिलाओं के नाम रजिस्ट्री पर मिलने वाली इस छूट से उनके परिवार को बड़ा आर्थिक लाभ हुआ है। पहले रजिस्ट्री में भारी-भरकम खर्च देखकर लोग कतराते थे, लेकिन अब खर्च आधा होने से यह बेहद आसान हो गया है। इससे महिलाओं को न सिर्फ आर्थिक सुरक्षा मिल रही है, बल्कि संपत्ति पर उनका कानूनी अधिकार भी मजबूत हो रहा है। महिला सशक्तिकरण का नया अध्याय गौरतलब है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा के मार्गदर्शन में लिया गया यह फैसला प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक युगांतरकारी कदम साबित हो रहा है।