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हेमंत सोरेन को मिलेगी राहत या बढ़ेंगी मुश्किलें? जमीन घोटाले में 8 जून को आएगा कोर्ट का फैसला

रांची. ईडी के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत में बड़गाई अंचल के 8.46 एकड़ जमीन घोटाले से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में हेमंत सोरेन की ओर से दाखिल डिस्चार्ज याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया। अदालत अपना निर्णय आठ जून को सुनाएगी। मामले में अपने आप को निर्दोष बताते हुए हेमंत सोरेन ने पांच दिसंबर को डिस्चार्ज याचिका दाखिल की है। हेमंत सोरेन की ओर से डिस्चार्ज याचिका दाखिल कर कहा गया था कि वह इस मामले में निर्दोष है। उनके खिलाफ लगे सभी आरोप निराधार हैं। मामले में हेमंत सोरेन सहित 18 आरोपितों के खिलाफ ईडी ने चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। जिस पर अदालत ने संज्ञान लेते हुए सभी आरोपितों को पुलिस पेपर सौंप दिया गया है। अगली न्यायिक प्रक्रिया के तहत आरोप तय किया जाना है। समय / वर्ष     घटनाक्रम वर्ष 2024     बड़गाई अंचल की 8.46 एकड़ जमीन मामले में ईडी ने जांच तेज की और हेमंत सोरेन को गिरफ्तार किया था (बाद में उन्हें जमानत मिली)। 5 दिसंबर 2025     हेमंत सोरेन ने विशेष अदालत में डिस्चार्ज याचिका दाखिल कर खुद को निर्दोष बताया। 3 जून 2026     ईडी की विशेष अदालत में दोनों पक्षों (हेमंत सोरेन के वकील और ईडी) की ओर से लंबी बहस पूरी हुई। 8 जून 2026     विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत इस डिस्चार्ज याचिका पर अपना फैसला सुनाएगी। न्यायालय के इस फैसले के बाद केस में आगे क्या होगा- यदि डिस्चार्ज याचिका स्वीकार होती है: अगर अदालत हेमंत सोरेन की दलीलें मान लेती है, तो उन्हें इस मामले से बरी किया जा सकता है (यानी उन पर ट्रायल नहीं चलेगा)। यदि डिस्चार्ज याचिका खारिज होती है: अगर अदालत याचिका खारिज कर देती है, तो अगली न्यायिक प्रक्रिया के तहत हेमंत सोरेन और अन्य सभी 18 आरोपितों पर कोर्ट में औपचारिक रूप से आरोप तय (Frame of Charges) किए जाएंगे और नियमित ट्रायल शुरू होगा। बड़गाई जमीन घोटाला: जानिए 4 बड़ी बातें मुख्य आरोप: यह पूरा मामला रांची के बड़गाई अंचल स्थित 8.46 एकड़ जमीन के अवैध कब्जे और फर्जी दस्तावेज तैयार कर हेरफेर करने से जुड़ा है। ईडी इसे मनी लांड्रिंग का मामला मानकर जांच कर रही है। डिस्चार्ज याचिका क्या है: जब किसी आरोपी को लगता है कि जांच एजेंसी द्वारा दाखिल चार्जशीट में उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं और आरोप निराधार हैं, तो वह अदालत से केस से बरी करने (डिस्चार्ज) की गुहार लगाता है। हेमंत सोरेन का पक्ष: पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 5 दिसंबर को याचिका दायर कर खुद को पूरी तरह निर्दोष बताया है और कहा है कि इस मामले से उनका कोई जुड़ाव नहीं है। अब तक की कार्रवाई: इस हाई-प्रोफाइल मामले में ईडी अब तक  18 आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल कर चुकी है।

यादों को गहनों में संजोने का नया ट्रेंड, पंजाब में DNA ज्वेलरी की बढ़ी मांग

जालंधर. पंजाब में अब रिश्तों और यादों को सहेजने का तरीका बदल रहा है। सोने-चांदी की पारंपरिक ज्वेलरी की जगह अब लोग डीएनए ज्वेलरी को तवज्जो दे रहे हैं। खास बात यह है कि इस ज्वेलरी में अपनों के खून, बाल या दूध के नमूने को ब्लू रेजिन में प्रिजर्व कर लाकेट, अंगूठी और ब्रेसलेट तैयार किए जा रहे हैं। जालंधर के सर्राफा बाजार के ज्वेलर्स की मानें तो बीते 6-8 महीनों में डीएनए ज्वेलरी के आर्डर में व्यापक स्तर पर इजाफा हुआ है। नवजात के जन्म, शादी की सालगिरह, माता-पिता की याद या किसी अपने के बिछड़ने पर लोग भावनात्मक जुड़ाव के लिए ऐसी ज्वेलरी बनवा रहे हैं। एक ग्राहक ने तो अपने दिवंगत पिता के खून की बूंद को लाकेट में हमेशा के लिए सहेज लिया है। फिलहाल जालंधर के अलावा लुधियाना और अमृतसर में भी कुछ चुनिंदा ज्वेलर्स ने यह काम शुरू किया है। कारोबारियों को उम्मीद है कि आने वाले त्योहारी सीजन में डीएनए ज्वेलरी की मांग और बढ़ेगी। ऐसे तैयार होती है डीएनए ज्वेलरी स्वर्णकार संघ जालंधर के अध्यक्ष दीपक निश्चल ने बताया कि ग्राहक से खून का नमूना लिया जाता है। खून को जमने से बचाने के लिए खास ईडीटीए ट्यूब में रसायनों से ट्रीट किया जाता है। इसके बाद ब्लू रेजिन में उस नमूने को डालकर हाई टेम्प्रेचर पर प्रिजर्व किया जाता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक है और नमूना खराब नहीं होता। तैयार जेम को सोने या चांदी की बेस ज्वेलरी में फिट कर दिया जाता है। एक लाकेट तैयार करने में 7 से 10 दिन का समय लगता है। कीमत 8 हजार रुपये से शुरू होकर डिजाइन के हिसाब से तय की है। युवाओं में भारी क्रेज सराफा बाजार के कारोबारी केशव ज्वेलर्स के मालिक वरुण चोपड़ा का कहना है कि पहले लोग फोटो फ्रेम या टैटू से यादों को सहेजते थे, लेकिन अब डीएनए ज्वेलरी नया ट्रेंड बन गया है। खासकर 25 से 40 साल के युवा वर्ग में इसे लेकर क्रेज देखा जा रहा है। कई एनआरआई परिवार भी विदेश से फोन कर आर्डर बुक करवा रहे हैं। डा. मुनीष मेहता के मुताबिक रेजिन में प्रिजर्व करने के बाद डीएनए का नमूना दशकों तक सुरक्षित रहता है। हालांकि ज्वेलर्स को नमूना लेते समय हाइजीन और मेडिकल प्रोटोकाल का पूरा ध्यान रखना जरूरी होता है। लिहाजा, स्वास्थ्य संबंधी नियमों की पालना करने के बाद इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

लंबे समय से एक ही जगह तैनात 80 पुलिसकर्मी बदले गए, जांजगीर-चांपा में तबादला सूची जारी

जांजगीर-चांपा. जिले में कानून व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय (IPS) ने व्यापक स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल किया है। जारी आदेश के अनुसार कुल 80 प्रधान आरक्षक एवं आरक्षकों का स्थानांतरण किया गया है। स्थानांतरण आदेश के तहत ऐसे पुलिस कर्मचारियों का प्राथमिकता से तबादला किया गया है, जो तीन वर्ष अथवा उससे अधिक समय से एक ही स्थान पर पदस्थ थे। इस कदम का उद्देश्य कार्य में पारदर्शिता, दक्षता एवं प्रशासनिक संतुलन बनाए रखना है। यातायात शाखा के कर्मचारियों की थानों में हुई पदस्थापना पुलिस अधीक्षक ने यातायात शाखा में पदस्थ कर्मचारियों को विभिन्न थानों में पदस्थ किया है। इससे थाना स्तर पर पुलिस बल की उपलब्धता बढ़ेगी तथा कानून- व्यवस्था संबंधी कार्यों में और अधिक मजबूती आएगी। वहीं थाना चौकी में पदस्थ कर्मचारियों को यातायात शाखा में पदस्थ किया गया है। करही में पुलिस सहायता के लिए अलग से व्यवस्था ग्राम करही में 05 जून को पुलिस सहायता केंद्र का शुभारंभ किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर पुलिस सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ग्राम करही में पृथक रूप से पुलिस कर्मचारियों की पदस्थापना की गई है। इससे क्षेत्र के नागरिकों को त्वरित पुलिस सहायता एवं सुरक्षा सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

वैश्विक निवेश हब बनने की ओर मध्यप्रदेश का बड़ा कदम, विकास को मिलेगी नई रफ्तार

मध्यप्रदेश को वैश्विक निवेश केंद्र बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम इंदौर में 6 जून को होगा भारत-लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन व्यापार एवं निवेश फोरम 2026 लैटिन अमेरिका एवं 15कैरिबियन देशों के राजनयिक और प्रतिनिधि होंगे शामिल मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे शुभारंभ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश लगातार वैश्विक निवेशकों, उद्योग जगत और अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक समुदाय के लिए आकर्षक निवेश स्थल के रूप में उभर रहा है। इसी क्रम में निवेश, निर्यात और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक साझेदारियों को नई गति देने के उद्देश्य से 6 जून को इंदौर में भारत-लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन (LAC) व्यापार एवं निवेश फोरम-2026 की बैठक होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मौजूदगी में राज्य सरकार के सहयोग से ग्लोबल इंडिया बिज़नेस फोरम (GIBF) द्वारा आयोजित इस महत्वपूर्ण फोरम का आयोजन मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (MPIDC) के सहयोग से रेडिसन ब्लू, इंदौर में होगा। फोरम में लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन क्षेत्र के 15 देशों के वरिष्ठ राजनयिक प्रतिनिधि शामिल होंगे। इनमें विभिन्न देशों के राजदूत, एक उच्चायुक्त और एक महावाणिज्यदूत शामिल होंगे। इनके साथ निवेशक, निर्यातक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, व्यापार आयुक्त, एमएसएमई क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि और वरिष्ठ शासकीय अधिकारी सहित 350 से अधिक प्रतिनिधि सहभागिता करेंगे। चार प्रमुख वाणिज्य एवं उद्योग मंडल भी इसमें सहभागिता करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा निवेश संवर्धन और वैश्विक सहभागिता को लेकर किए जा रहे सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के बीच अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। राज्य सरकार उद्योगों के लिए अनुकूल नीतियों, बेहतर अधोसंरचना, तेज निर्णय प्रक्रिया और निवेशक हितैषी वातावरण के माध्यम से नए वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है। इसी दिशा में यह फोरम भारत और लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन क्षेत्र के देशों के बीच व्यापार एवं निवेश सहयोग को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण साबित होगा। मध्यप्रदेश का निर्यात प्रदर्शन भी लगातार मजबूत हुआ है। वर्ष 2025-26 में राज्य से लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन क्षेत्र को लगभग 4,186 करोड़ रूपये का निर्यात दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 12.6 प्रतिशत अधिक है। इस निर्यात में फार्मा क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ब्राज़ील, मैक्सिको और चिली, राज्य के प्रमुख निर्यात बाजारों में शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश की औद्योगिक प्रगति, निवेश संभावनाओं और वैश्विक साझेदारियों को लेकर फोरम को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम में भारत एलएसी विशेष संस्करण का विमोचन भी किया जाएगा। मध्यप्रदेश की निवेश क्षमताओं और औद्योगिक अवसरों पर विशेष प्रस्तुति दी जाएगी। विभिन्न देशों के प्रतिनिधिमंडलों द्वारा निवेश प्रस्तुतियां दी जाएंगी। साथ ही व्यापार एवं निवेश के अवसरों, विनिर्माण क्षेत्र में सहयोग तथा सेवा क्षेत्र में निवेश संभावनाओं पर केंद्रित पैनल होंगे। विनिर्माण क्षेत्र से संबंधित चर्चा में औषधि, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल तथा खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र शामिल रहेंगे, जबकि सेवा क्षेत्र की चर्चा में सूचना-प्रौद्योगिकी, पर्यटन, फिनटेक तथा शिक्षा क्षेत्र में सहयोग और निवेश की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा। फोरम में उद्योगों और निवेशकों के बीच प्रत्यक्ष संवाद को बढ़ावा देने के लिए बी2बी और बी2जी बैठकों का भी आयोजन किया जाएगा, जिससे नए व्यापारिक अवसरों और निवेश साझेदारियों को गति मिलेगी। भारत-लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन व्यापार एवं निवेश फोरम-2026 मध्यप्रदेश की बढ़ती वैश्विक आर्थिक उपस्थिति, निवेश आकर्षण और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक साझेदारियों को नई दिशा देगा।  

वेतन बढ़ोतरी के साथ नई सौगात, छुट्टी के दिन का भी मिलेगा भुगतान; 8 घंटे की ड्यूटी तय

चंडीगढ़  चंडीगढ़ से बड़ी खबर सामने आ रही है। चंडीगढ़ के कर्मचारियों के लिए प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। चंडीगढ़ में कर्मचारियों की सैलरी 6% से 10% तक की बढ़ोतरी कर दी गई है। इससे चंडीगढ़ प्रशासन के अधीन नियमित सैलरी और आउटसोर्सिंग के जरिए काम कर रहे 20 हजार कर्मचारियों कोबड़ा लाभ मिलने वाला हैं। इसके लिए प्रशासन ने 2026-27 के लिए नई DC रेट जारी कर दिए हैं। ये नए आदेश 1 अप्रैल 2026 से लागू हो गए हैं, जो 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेंगे। प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक मंथली बेसिस पर रखे कर्मचारियों को सरकारी छुट्टियों के दिनों का भी पूरा वेतन मिलेगा। इसके अलावा, पांच साल से काम कर रहे कर्मचारियों को मूल DC रेट पर 2% अतिरिक्त वेतन दिया जाएगा। Chandigarh  ऐसे में अब सबसे कम सैलरी वॉच रूम ड्यूटी ऑपरेटर की 18,058 रुपए और सबसे अधिक साइकियाट्रिस्ट की 86,703 रुपए मासिक तय की गई है। इसके अलावा ड्यूटी का टाइम 8 घंटे का रहेगा। 5 साल पूरा करने वालों को ऐसे मिलेगा फायदा प्रशासन की तरफ से ये दरें संशोधित कर 560 से अधिक श्रेणियों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए बढ़ाई गई हैं। नोटिफिकेशन के मुताबिक, जो कर्मचारी 31 मार्च 2026 तक अपने पद पर 5 साल की निरंतर सेवा पूरी कर चुके हैं, उन्हें मूल डीसी रेट पर 2% अतिरिक्त वेतन दिया जाएगा। खास बात यह है कि यदि इस दौरान उनका ठेकेदार या एजेंसी बदली भी है, तो भी उनकी नौकरी को निरंतर माना जाएगा। इस अतिरिक्त 2% लाभ की गणना वित्तीय वर्ष 2025-26 के वेतन के आधार पर की जाएगी। ऐसे मिलेगा फायदा प्रशासन की तरफ से मिली जानकारी के अनुसार, ये दरें संशोधित कर 560 से अधिक श्रेणियों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए बढ़ाई गई हैं। नोटिफिकेशन के मुताबिक, जो कर्मचारी 31 मार्च 2026 तक अपने पद पर 5 साल की निरंतर सेवा पूरी कर चुके हैं, उन्हें मूल डीसी रेट पर 2% अतिरिक्त वेतन दिया जाएगा। जानकारी के मुताबिक, यदि इस दौरान उनका ठेकेदार या एजेंसी बदली भी है, तो भी उनकी नौकरी को निरंतर माना जाएगा। इस अतिरिक्त 2% लाभ की गणना वित्तीय वर्ष 2025-26 के वेतन के आधार पर की जाएगी। नहीं बढ़ा वेतन आदेश के मुताबिक, कुछ श्रेणियां ऐसी भी हैं जिनके वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। इनमें असिस्टेंट लेक्चरर, बेयरर, क्लॉक रूम अटेंडेंट, कंसल्टेंट, डेस्क हेल्पर, गेस्ट ट्रेनर और टैक्स कलेक्टर जैसे पद शामिल हैं। Chandigarh News प्रशासन का कहना है कि इनका ग्रेड पे 7वें वेतन आयोग में उपलब्ध नहीं होने और संबंधित विभागों से कोई सिफारिश न आने के कारण फिलहाल इनके रेट पुराने (वित्तीय वर्ष 2025-26) वाले ही रखे गए हैं। इन कर्मचारियों का नहीं बढ़ा वेतन आदेश के मुताबिक, कुछ श्रेणियां ऐसी भी हैं जिनके वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। इनमें असिस्टेंट लेक्चरर, बेयरर, क्लॉक रूम अटेंडेंट, कंसल्टेंट, डेस्क हेल्पर, गेस्ट ट्रेनर और टैक्स कलेक्टर जैसे पद शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि इनका ग्रेड पे 7वें वेतन आयोग में उपलब्ध नहीं होने और संबंधित विभागों से कोई सिफारिश न आने के कारण फिलहाल इनके रेट पुराने (वित्तीय वर्ष 2025-26) वाले ही रखे गए हैं। हालांकि, विभाग से ब्योरा मिलने पर इनकी समीक्षा की जा सकती है। पंजाब सरकार आउटसोर्स मुलाजिम करेगी पक्के पंजाब सरकार ने ग्रुप सी और ग्रुप डी की नौकरियों में (आउटसोर्सिंग) व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त करने जा रही है। सरकार इसके लिए दो कानून 'पंजाब राज्य आउटसोर्स्ड पर्सनल विधेयक-2026' और 'पंजाब कॉन्ट्रैक्चुअल पर्सनल विधेयक-2026' को मंजूरी दी है। इससे रज्य के 65,000 कर्मचारियों को लाभ होगा। राज्य के 51 सरकारी विभागों में काम कर रहे कच्चे और आउटसोर्स कर्मचारियों को सीधे सरकारी अनुबंध के दायरे में लाया जाएगा। इससे अब वेतन किसी तीसरे ठेकेदार के बजाय सीधे कर्मचारियों के बैंक खाते में आएगा, जिससे कमीशनखोरी और शोषण बंद होगा। भविष्य में इन पदों पर कोई भी भर्ती ठेके पर नहीं होगी। सीवरमैन, फायरमैन और सफाई सेवक जैसे जोखिम भरे पदों के कर्मचारी 3 वर्ष और अन्य श्रेणियों के कर्मचारी 5 वर्ष की सेवा के बाद सीधे सरकारी अनुबंध के पात्र होंगे। इस अनुबंध पर 10 वर्ष पूरे करने के बाद उन्हें स्थायी (नियमित) किया जाएगा। इन कर्मचारियों को अब मातृत्व लाभ और हर साल 10 दिनों की कैजुअल लीव मिलगी।

हवारा की पैरोल याचिका पर सुनवाई, अदालत ने दिल्ली और NCT प्रशासन से मांगा जवाब

चंडीगढ़  पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड में दोषी करार दिए गए जगतार सिंह हवारा की पैरोल याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीटी) दिल्ली के डायरेक्टर जनरल (प्रिज़न) को नए सिरे से नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि पूर्व में जारी नोटिस के बावजूद दिल्ली जेल प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि चंडीगढ़ प्रशासन और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) पहले ही अपना-अपना जवाब दाखिल कर चुके हैं। वहीं, दिल्ली जेल प्रशासन की ओर से जवाब न आने पर अदालत ने दोबारा नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 6 जुलाई के लिए निर्धारित कर दी। दोबारा आतंकी संगठन से जुड़ सकते हैं हवारा इससे पहले सीबीआई ने जगतार सिंह हवारा की पैरोल याचिका पर जवाब दाखिल करते हुए उसकी रिहाई का विरोध किया। एजेंसी ने कहा कि यदि हवारा को पैरोल दी जाती है तो उसके फरार होने और दोबारा आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जुड़ने की आशंका है। सीबीआई ने कहा कि वह पहले भी जेल से फरार हो चुका है। वर्ष 2004 में हवारा और उसके साथियों ने सुरंग खोदकर बुरैल जेल से फरार होने में सफलता हासिल की थी। हवारा का बब्बर खालसा जैसे आतंकी संगठनों से संबंध हालांकि उसे करीब एक साल बाद दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया था। हवारा का संबंध बब्बर खालसा इंटरनेशनल जैसे आतंकी संगठनों से रहा है। उसके आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए उसे किसी भी सूरत में पैरोल नहीं दी जानी चाहिए। हवारा ने मां की सेवा के लिए मांगी पैरोल हवारा ने अपनी वृद्ध और बीमार मां की देखभाल के लिए चार सप्ताह की पैरोल देने की मांग की है। याचिका में उसका कहना है कि वह पिछले लगभग 28 वर्ष 9 माह से जेल में बंद है और इस दौरान उसने कभी पैरोल की मांग नहीं की। उसने यह भी दावा किया कि उसके पैतृक गांव हवारा कलां (जिला फतेहगढ़ साहिब) की पंचायत ने भी पैरोल दिए जाने के पक्ष में सहमति व्यक्त की है। ऐसे में मानवीय आधार पर उसे अस्थायी रिहाई प्रदान की जानी चाहिए।  सीबीआई ने जताया विरोध हालांकि सीबीआई ने हाई कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में हवारा की पैरोल का जोरदार विरोध किया है। जांच एजेंसी का कहना है कि यदि उसे पैरोल दी जाती है तो उसके फरार होने की गंभीर आशंका है। सीबीआई ने अदालत को बताया कि हवारा वर्ष 2004 में चंडीगढ़ की बुडैल जेल से अपने साथियों के साथ सुरंग बनाकर फरार हो चुका है। बाद में उसे लगभग एक वर्ष बाद दोबारा गिरफ्तार किया गया था। ऐसे में उसके पिछले आचरण को देखते हुए उसे पैरोल देना सुरक्षा के लिहाज से उचित नहीं होगा। सीबीआई ने यह भी कहा कि हवारा का संबंध प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल से रहा है। एजेंसी के अनुसार पैरोल मिलने की स्थिति में उसके दोबारा अलगाववादी और आतंकवादी तत्वों के संपर्क में आने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उसके आपराधिक रिकॉर्ड और सुरक्षा संबंधी जोखिमों को देखते हुए किसी भी परिस्थिति में पैरोल नहीं दी जानी चाहिए। 6 जुलाई को होग अगली सुनवाई दूसरी ओर, चंडीगढ़ प्रशासन ने अपने जवाब में स्पष्ट किया है कि हवारा वर्तमान में दिल्ली की मंडोली जेल में बंद है। इसलिए पैरोल से संबंधित किसी भी मांग पर विचार करने का अधिकार क्षेत्र दिल्ली प्रशासन और वहां की जेल अथॉरिटी के पास है। प्रशासन ने कहा कि हवारा को अपनी पैरोल संबंधी मांग संबंधित सक्षम प्राधिकारी के समक्ष उठानी चाहिए। अब इस मामले में सभी पक्षों के जवाब आने के बाद हाई कोर्ट 6 जुलाई को अगली सुनवाई में पैरोल याचिका पर आगे विचार करेगा।  

पूजा सिंघल दंपती ने कोर्ट के निर्देश पर सरेंडर किए पासपोर्ट, विदेश यात्रा से लौटने के बाद कार्रवाई

रांची ईडी कोर्ट में मनी लांड्रिंग में आरोपित आइएएस पूजा सिंघल और उनके पति अभिषेक झा ने बुधवार को अपना पासपोर्ट जमा कर दिया। दोनों हाल ही में सिंगापुर से लौटे हैं, जहां वे अपनी बेटी के इलाज के लिए गए थे। इससे पहले पूजा सिंघल और अभिषेक झा ने अदालत में याचिका दाखिल कर पासपोर्ट रिलीज करने तथा विदेश यात्रा की अनुमति मांगी थी। याचिका में बताया गया था कि उनकी बेटी गंभीर न्यूरोलाजिकल बीमारी से पीड़ित है और उसके इलाज के लिए सिंगापुर जाना आवश्यक है। अदालत ने उन्हें विदेश यात्रा की अनुमति देते हुए शर्त रखी थी कि वे 31 मई तक रांची लौट आएंगे और वापसी के एक सप्ताह के भीतर अपना पासपोर्ट अदालत में जमा करेंगे। अदालत के आदेश का अनुपालन करते हुए दोनों बुधवार को अपना पासपोर्ट जमा कर दिया। चिल्ड्रेन कोर्ट से हत्या के मामले में नाबालिग बरी चिल्ड्रेन कोर्ट ने हत्या के मामले के नाबालिग आरोपित को बुधवार को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपित के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं हो सका। इसलिए उसे संदेह का लाभ दिया जाता है। घटना को लेकर युवती के पिता ने 23 मई 2024 को लापुंग थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। आरोप लगाया गया था कि बेटी नाबालिग लड़के से बातचीत करती थी। 15 मई 2024 को घर से सहेली के मिलने के निकली, लेकिन वापस नहीं आई। पिता ने हत्या करने का आरोप लगाते हुए नाबालिग के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। घटना के समय उसकी उम्र करीब 17 वर्ष पाई गई, जिसके कारण उसका मामला अलग कर चिल्ड्रेन कोर्ट में चलाया गया। बैटरी चोरी के मामले में पांच आरोपित बरी न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी मयंक मलियाज की अदालत ने टेलीकाम टावर से बैटरी चोरी के मामले में लगभग दो वर्ष तक चली सुनवाई के बाद पांच आरोपितों को बरी कर दिया है। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष एक भी गवाह पेश नहीं कर सका। मामले से शहनवाज, साजिद अंसारी, रिजवान, आर्यन खान तथा नायर आलम को बरी किया गया। मामला नामकुम (खरसीदाग ओपी) थाना से जुड़ा था। प्राथमिकी के अनुसार 26 जुलाई 2024 की रात करीब 2:30 बजे एक टेलीकाम टावर के शेल्टर का ताला तोड़ कर वहां रखी 48 बैटरियों में से 24 एक्साइड बैटरियां अज्ञात चोरों द्वारा चोरी कर ली गई थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष को गवाह प्रस्तुत करने के लिए कई अवसर दिए गए। अदालत ने समन, वारंट, एसएसपी को पत्र और अंतिम अवसर तक प्रदान किया, लेकिन इसके बाद एक भी गवाह अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि यह नो एविडेंस का मामला है। दहेज उत्पीड़न मामले में पुनरीक्षण याचिका खारिज न्यायायुक्त की अदालत ने वैवाहिक प्रताड़ना और दहेज उत्पीड़न के मामले में पत्नी की ओर से दाखिल पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने निचली अदालत के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें केवल पति सुखराम हजाम के संज्ञान लिया गया था। यह मामला शिकायतवाद से जुड़ा है। मामले में शिकायतकर्ता सुरेखा प्रमाणिक ने आरोप लगाया था कि पति के साथ-साथ सास-ससुर एवं अन्य ससुराल वालों ने भी उसे प्रताड़ित किया और पांच लाख रुपये की मांग की। शिकायतकर्ता ने दलील दी थी कि जांच के दौरान गवाहों ने सभी आरोपितों की भूमिका की पुष्टि की है। इसलिए उनके खिलाफ भी संज्ञान लिया जाना चाहिए था। लेकिन अदालत ने याचिका खारिज कर दी।

खाद वितरण के नियम बदले, हरियाणा के किसानों को अब आधार वैरिफिकेशन कराना होगा जरूरी

पंचकूला. पश्चिम एशिया में छाए युद्ध संकट को देखते हुए किसानों को दी जाने डीएपी और यूरिया तथा अन्य उर्वरक की वितरण प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रही है। कालाबाजारी नहीं हो इसके लिए नई प्रणाली में क्यूआर कोड और आधार सत्यापन को अनिवार्य किया जा रहा है। हरियाणा में यह योजना उत्तर प्रदेश से सटे यमुना नगर तथा राजस्थान से सटे रेवाड़ी तथा महेंद्रगढ़ में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जा रहा है। इसके लिए किसानों तथा कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों खाद विक्रेताओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। पहले इन जिलों को इसलिए चुनाव किया गया कि डीएपी और यूरिया वितरण करनें में शिकायत अधिक आ रही थी। दस्तावेज हरियाणा के किसानों के लगाकर राजस्थान और उत्तर प्रदेश में डीएपी यूरिया बेंच दी जाती थी। प्रदेश सरकार यही व्यवस्था अगले चरण् में पूरे राज्य में लागू करने की तैयारी में है। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय तथा कृषि एवं कल्याण ने फ्रेम वर्क फार फर्टिलाइजर सेल के नाम से नई डिजिटल खाद प्रणाली तैयार की है। इसके ही तहत हरियाणा के तीन जिला चुने गए हैं। यह कदम युद्ध संकट के चलते उर्वरक का आयात प्रभावित होने के चलते किया गया है। नई व्यवस्था आरंभ होने पर किसानों को पहले अपने मोबाइल एप के जरिए अग्रिम बुकिंग करनी होगी। किसान को अपनी फसल और जमीन की जानकारी दर्ज करनी होगी। बुकिंग पूरी होने पर किसान को क्यूआर कोड आधारित टोकन जारी होगा। जब किसान खाद लेने जाएगा तो डीलर पीओएस मशीन से क्यूआर कोड को स्कैन करेगा। इसके बाद आधार कार्ड आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन होने पर ही खाद देगा। प्रदेश के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा पहले ही यह कह चुके हैं कि कालाबाजारी रोकने के लिए नया सिस्टम अपनाया जा रहा है। इस योजना के लिए भी जल्द गाइडलाइन जारी कर दी जाएगी। इस व्यवस्था से किसानों को भटकना नहीं पड़ेगा और डीलर के पास मौजूदा स्टाक की रियल टाइम मानिटरिंग भी हो जाएगी। कोड स्कैन नहीं होने पर किसान को आइडी आधार नंबर और आवेदन नंबर के जरिए भी यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी। नई व्यवस्था में यह विकल्प इसलिए दिया गया है कि किसानों को किसी तरह की परेशानी नही हो।

बिजली बिल को नियंत्रण करने की चाबी अब आपके हाथ में, जानिए कैसे करें बचत

बिल को नियत्रंण करने की चाबी अब आपके पास भोपाल अधिकतर उपभोक्ता बिजली का बिल ज्यादा आने पर स्मार्ट मीटरों या बिजली कंपनी को शिकायत हैं जबकि वास्तविकता यह है कि उपकरणों के ज्यादा उपयोग से बिजली का बिल ज्यादा आता है। यदि आप थोड़ी सी सावधानी बरतें तो बिल ज्यादा आने की आपकी चिंता बढ़ेगी नहीं। आप चाहें तो अपने बढ़ते बिल को नियंत्रण में रख सकते हैं। बस आपको अपनी आदतों में बदलाव करना होगा। एक आंकलन के अनुसार अधिकांश शहरवासी रिमोट चलित विद्युत उपकरणों को ‘‘स्टैंडबाय’’ मोड पर छोड़़ देते हैं, जिससे उपकरण तो बंद हो जाते हैं परन्तु इनमें सतत् विद्युत प्रवाहित होती रहती है। यदि आप रिमोट से चलने वाले उपकरणों को स्विच ऑफ नहीं करते है और रिमोट से बंद करके उपकरणों को छोड़ देते हैं तो बिजली की खपत बढ़ जाती है, जिससे बिल बढ़ जाता है। एक सर्वे के अनुसार 70 फीसदी लोग टी.वी. को मैन स्विच से ऑन-ऑफ न करके रिमोट से ऑन-ऑफ करते हैं। इससे टी.वी.ऑफ होने के बावजूद भी पॉवर सप्लाई चालू रहती है। इससे 21 इंच के टी.वी. में 15 वाट का करंट निरन्तर प्रवाहित होता रहता है एवं आपके मीटर को आगे बढ़ाता रहता है, जिसके कारण इन 70 फीसदी लोगों को हर महीने लगभग 200 रूपये और हर साल 1500 रूपये का अतिरिक्त भार सहना पड़ता है। इलेक्ट्रीशियन की सलाह के अनुसार एक व्यवसायी द्वारा 1200 वॉट क्षमता के एलईडी बल्ब अपने घर में लगाने के लिए खरीद लिए गए। इसी प्रकार एलईडी ट्यूबलाईट एवं ऊर्जा दक्ष पंखे लगा लिए तो उनके घर में बिजली की 30 प्रतिशत तक बिजली बचत हुई। बिजली विशेषज्ञों के अनुसार अब तो एल.ई.डी. जैसे उपकरण बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं, उनके उपयोग से और अधिक बिजली की बचत और ज्यादा रोशनी प्राप्त हो सकती है। हर महीने लगभग 75 रूपये की चपत  म्यूजिक सिस्टम, टी.वी., ए.सी., कम्प्यूटर आदि स्टैंडबाय मोड पर 5 से 15 वॉट तक बिजली की खपत करते हैं। अगर महीने भर भी टी.वी. बंद रहे जब भी 15 वॉट के हिसाब से एक दिन में 0.36 यूनिट व 30 दिन में 10.8 यूनिट बिजली खर्च होती है। कम्प्यूटर  कम्यूटर के मॉनिटर एवं कापीअर्स को स्लीप मोड में रखने से लगभग 40 प्रतिशत ऊर्जा की बचत होती है। एलईडी मॉनिटर का प्रयोग करें यह पारंपरिक सी.आर.टी. मॉनिटर की तुलना में कम ऊर्जा खर्च करता है। यदि कम्प्यूटर को चालू रखना आवश्यक हो तो मॉनिटर अवश्य बंद रखें जो कि कुल ऊर्जा का 50 प्रतिशत से अधिक खर्च करता है। यदि एक कम्प्यूटर 24 घंटे चालू रखा जाए तो यह एक ऊर्जा दक्ष फ्रिज से अधिक विद्युत खर्च करता है। अतः उपयोग न होने पर कम्प्यूटर बंद रखें। एलईडी बल्ब वर्तमान में एलईडी बल्ब ऊर्जा बचत हेतु अतिउत्तम विकल्प है क्योंकि इनका उपयोग करके हम बिजली की बचत कर सकते हैं। एलईडी बल्ब बार-बार चालू/बंद करने से उनकी उम्र पर असर नहीं पड़ता है जबकि साधारण बल्ब जल्दी ही फ्यूज हो जाता है। एक 40 वाट के साधारण बल्ब के प्रकाश के बराबर के प्रकाश के लिए 4 से 5 वाट क्षमता के एलईडी बल्ब की आवश्यकता होती है। एलईडी बल्ब परंपरागत बल्ब की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक प्रकाश देते हैं एवं इनकी टिकाऊ होने की अवधि सामान्य बल्ब की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक है। यह कम ऊर्जा ग्रहण करते हैं और ज्यादा गर्म भी नहीं होते हैं। सीलिंग फैन वर्तमान में नियमित पंखों के स्थान पर बीईई फाईव स्टार रेटेड पंखे एवं उच्च दक्षता के पंखे उपलब्ध हैं जो कि ऊर्जा की बचत करने में सहायक होते हैं। फ्रिज  फ्रिज को दीवार, सीधे सूर्य का प्रकाश अथवा अन्य ऊष्मा देने वाले उपकरणों के पास न रखें। फ्रिज के पीछे कंडेंसर क्वाईल पर जमी धूल के कारण मोटर को अधिक कार्य करना पड़ता है एवं बिजली ज्यादा लगती है, अतः क्वाइल्स को नियमित साफ करें। फ्रीजर की नियमित डीफ्रास्टिंग आवश्यक है जिससे कूलिंग करने हेतु फ्रिज को अधिक कार्य करना पड़ता है एवं इससे अधिक ऊर्जा का अपव्यय होता है। इसके अंदर के स्थान का पूर्ण उपयोग आवश्यक है किंतु भीतर खुली हवा के सरकुलेशन के लिए जगह छोड़ना जरूरी है। इससे ऊर्जा की बचत होती है। फ्रिज के दरवाजे की गास्केट में लीकेज नहीं होना चाहिए, जिसके कारण फ्रिज हमेशा अधिक ऊर्जा खर्च करता है एवं बिजली का बिल अधिक आता है। एयर कंडीशनर्स (एसी)  26 डिग्री सेंटीग्रेड की सेटिंग पर न्यूनतम खर्च में अधिकतम समुचित आरामदेह वातानुकूलन प्राप्त होता है। पुराने एवं रिपेयर किए हुए एसी की दक्षता कम होती है। इसकी तुलना में नए ऊर्जा दक्ष एसी खरीदना बेहतर एवं किफायती है। एक अच्छा एसी लगभग 30 मिनट में एक कमरे को ठण्डक प्रदान कर देता है अतः टाइमर का प्रयोग कर एसी कुछ समय के लिए बंद कर दिया जा सकता है। इसके एयर फिल्टर्स में धूल जमा होने पर हवा का बहाव कम हो जाता है जबकि साफ फिल्टर्स से शीतलता शीघ्र प्राप्त होती है एवं बहुमूल्य ऊर्जा की बचत होती है। घर के आसपास हरियाली पेड़-पौधों की छांव रहने पर एसी द्वारा विद्युत की खपत में 40 प्रतिशत तक ऊर्जा की बचत की जा सकती है।  

अकाल तख्त साहिब में धार्मिक आयोजन का आगाज, ब्लू स्टार बरसी से पहले श्रद्धालुओं ने किया अखंड पाठ आरंभ

अमृतसर. ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी के अवसर पर 6 जून को आयोजित होने वाले श्रद्धांजलि समागम की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसी क्रम में वीरवार को श्री अकाल तख्त साहिब में श्री अखंड पाठ साहिब का आरंभ किया गया। यह पाठ जून 1984 में श्री हरिमंदिर साहिब और श्री अकाल तख्त साहिब परिसर में सैन्य अभियान के दौरान मारे गए लोगों की स्मृति को समर्पित है। श्री अखंड पाठ साहिब के आरंभ अवसर पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी, तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह सहित कई धार्मिक और प्रबंधकीय हस्तियां मौजूद रहीं। इस दौरान बड़ी संख्या में संगत ने भी हाजिरी लगाई और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। धामी ने सप्ताह को बताया पीड़ादायक एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि जून का पहला सप्ताह सिख समुदाय के इतिहास का अत्यंत संवेदनशील और पीड़ादायक दौर माना जाता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1984 में तत्कालीन केंद्र सरकार द्वारा श्री हरिमंदिर साहिब, श्री अकाल तख्त साहिब और अन्य गुरुद्वारा साहिबानों में की गई सैन्य कार्रवाई ने सिख समुदाय को गहरे घाव दिए थे। उन्होंने कहा कि इस घटना की यादें आज भी सिख मन में जीवित हैं और इन्हें भुलाया नहीं जा सकता। धामी ने कहा कि उस सैन्य अभियान के दौरान अनेक लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। उन्होंने यह भी कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूपों को भी गोलियां लगने से नुकसान पहुंचा था। यही कारण है कि हर वर्ष इस अवधि के दौरान विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित कर शहीदों और पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी जाती है। बंदी सिखों की रिहाई का मुद्दा उठाया एसजीपीसी अध्यक्ष ने इस अवसर पर बंदी सिखों की रिहाई का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि कई सिख लंबे समय से विभिन्न जेलों में बंद हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि मानवीय आधार पर ऐसे मामलों पर विचार कर उचित निर्णय लिया जाए। इस मौके पर श्री अकाल तख्त साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी मलकीत सिंह, मुख्य सचिव कुलवंत सिंह मन्नन, सदस्य जत्थेदार मंगविंदर सिंह खापड़खेड़ी, सदस्य गुरचरण सिंह ग्रेवाल, मनजीत सिंह, सचिव बलविंदर सिंह काहलवां समेत एसजीपीसी के अनेक पदाधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। जून 1984 की घटनाओं पर विशेष प्रदर्शनी बरसी कार्यक्रम के साथ-साथ जून 1984 की घटनाओं और उस दौरान हुए नुकसान को दर्शाने वाली एक विशेष फोटो प्रदर्शनी भी शुरू की गई है। गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब दीवान हाल के बाहर लगाई गई इस प्रदर्शनी में उस समय की दुर्लभ तस्वीरों को प्रदर्शित किया गया है। इनमें श्री अकाल तख्त साहिब को पहुंचे नुकसान और उस दौर की परिस्थितियों को दर्शाया गया है। एसजीपीसी के अनुसार यह प्रदर्शनी 6 जून तक जारी रहेगी। संगत सुबह से शाम तक इसे देख सकेगी और इतिहास के उस महत्वपूर्ण अध्याय से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकेगी। श्रद्धांजलि समागम को लेकर धार्मिक परिसर में विशेष तैयारियां भी की जा रही हैं और बड़ी संख्या में संगत के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।