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अतिक्रमणकारियों पर सख्त एक्शन, वन क्षेत्र में बने 34 अवैध मकान किए गए ध्वस्त

बलरामपुर. जिले में वन भूमि पर किए गए अवैध कब्जों के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चलाया। संयुक्त टीम ने अभियान चलाकर वन भूमि पर बने 34 अवैध मकानों को ध्वस्त कर अतिक्रमण हटाया। कार्रवाई के दौरान भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। प्रशासन की इस कार्रवाई को वन भूमि संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार, वन भूमि पर वर्षों से अवैध कब्जे की शिकायतें मिल रही थी। प्रशासन द्वारा पहले संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर भूमि खाली करने के निर्देश दिए गए थे। निर्धारित समय सीमा के बाद भी कब्जा नहीं हटाए जाने पर वन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की। अधिकारियों की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर 34 मकानों को हटाया गया। कार्रवाई के दौरान पूरे क्षेत्र में तनाव की स्थिति रही। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी और वन भूमि पर किसी भी प्रकार के अवैध कब्जे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।अधिकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अतिक्रमण के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बंगाल की राजनीति में तीखा वार, स्वपन दासगुप्ता ने TMC को लेकर BJP को किया आगाह

कलकत्ता तृणमूल कांग्रेस आंतरिक कलह के कारण बिखर रही है. ममता बनर्जी के हाथ से पार्टी फिसलती हुई दिख रही है. इस बीच सीएम शुभेंदु सरकार में मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने अपनी ही पार्टी को चेतावनी दी है. स्वपन दास गुप्ता ने टीएमसी के वैसे नेताओं की ओर इशारा किया है जो बीजेपी के करीब आने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा है कि उन्हें यही उम्मीद है कि तोड़-फोड़ करने वालों की राजनीतिक संस्कृति पश्चिम बंगाल BJP को दूषित न करे. उन्होंने कहा है कि वे TMC के विनाश पर कोई भी आंसू नहीं बहा रहे हैं।  TMC के 58 विधायकों के ऐसे गुट के नेता को प्रतिपक्ष की मान्यता मिल गई है, जिसे ममता बनर्जी का समर्थन प्राप्त नहीं है. इस गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी हैं. स्पीकर ने ऋतब्रत बनर्जी को पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष की मान्यता दी है।  कोलकाता के रासबिहारी से विधायक स्वपन दासगुप्ता ने एक्स पर लिखा, "TMC के आत्म-विनाश पर मैं कोई आंसू नहीं बहा रहा हूं. मेरी एकमात्र आशा यही है कि इन तोड़-फोड़ करने वालों की राजनीतिक संस्कृति पश्चिम बंगाल BJP को दूषित न करे।  बंगाल बीजेपी को आगाह करते हुए स्वपन दासगुप्ता ने लिखा, "हमें झूठे दोस्तों से हमेशा सावधान रहना होगा जो आज हमारे करीब आ रहे हैं क्योंकि उन्हें अपने पिछले पाप धोने की जरूरत है।  मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने लिखा, "बंगाल की शुद्धिकरण प्रक्रिया अधूरी नहीं छोड़ी जा सकती। पत्रकार के रूप में सक्रिय रहने वाले स्वपन दासगुप्ता को सीएम शुभेंदु अधिकारी ने अपनी सरकार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया है।  TMC में इतिहास की सबसे बड़ी टूट 3 जून 2026 को पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा भूकंप आया. तृणमूल कांग्रेस के इतिहास में पहली बड़ी टूट हुई. विधानसभा स्पीकर रथींद्रनाथ बोस ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दे दी।   ऋतब्रत को ममता ने हाल ही में पार्टी से निष्कासित किया था. उन्होंने अपने पास 58 TMC विधायकों का हस्ताक्षर दिखाया और उन्हें नेता प्रतिपक्ष का दर्जा दिया. स्पीकर ने अभिषेक बनर्जी द्वारा नामित शोभनदेब चट्टोपाध्याय के दावे को खारिज कर दिया।  ऋतब्रत ने खुद को 'असली TMC' का प्रतिनिधि बताया और ममता बनर्जी को मुख्य सलाहकार बनाने का प्रस्ताव रखा और कहा कि वे रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाएंगे. उनके गुट में संदीपन साहा, जावेद खान, शिउली साहा समेत कई प्रमुख विधायक शामिल हैं।  इस घटनाक्रम से TMC में गहरा संकट पैदा हो गया है. ममता-अभिषेक गुट ने सभी पार्टी कमेटियों को भंग कर दिया है।   

सिकल सेल उन्मूलन अभियान को दें नई गति, राज्यपाल पटेल ने दिए सघन प्रयासों के निर्देश

सिकल सेल उन्मूलन प्रयासों को दें सघनता : राज्यपाल पटेल प्रत्येक मंगलवार को आंगनवाड़ी केन्द्र में सिकल सेल की जानकारी दें लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण एवं आयुष विभाग की समीक्षा भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा की 19 जून को विश्व सिकल सेल दिवस है। उन्होंने लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और आयुष विभाग को विश्व सिकल सेल दिवस के तारतम्य में सिकल सेल उन्मूलन गतिविधियों को सघनता के साथ संचालित करने के निर्देश दिये है। उन्होने कहा कि स्क्रीनिंग, उपचार, कार्ड और दवा वितरण प्रयासों के साथ ही रोग की जागरूकता के कार्यक्रम भी आयोजित किये जाने चाहिए। राज्यपाल पटेल ने कहा कि सिकल सेल उन्मूलन के संकल्प को पूरा करने तक हमें थकना और रूकना नहीं है। इसलिए उन्मूलन और उपचार की नियमितता की जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र में विशेष निगरानी की जाना जरूरी है। राज्यपाल पटेल गुरुवार को लोक भवन में लोक स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और आयुष विभाग के साथ चर्चा कर रहे थे। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार भी मौजूद थे। राज्यपाल पटेल ने प्रत्येक मंगलवार को आंगनवाड़ी केन्द्र में माता और बच्चों को सिकल सेल एनीमिया के कारण, लक्षण और उपचार से संबंधित जानकारी प्रदान करने के निर्देश दिये है। उन्होंने स्वास्थ्य और आयुष विभाग के सिकल सेल उन्मूलन प्रयासों पर जिलेवार चर्चा की। राज्यपाल पटेल को स्वास्थ्य विभाग द्वारा सिकल सेल स्क्रीनिंग, दवा और कार्ड वितरण आदि की विस्तार से जिलेवार जानकारी दी गई। आयुष विभाग द्वारा भी जिलेवार दवाई वितरण, परामर्श, उपचार और रोगियों से सतत संवाद के द्वारा उपचार गतिविधियों की जानकारी दी गई। राज्यपाल पटेल ने आयुष विभाग को सिकल सेल उपचार प्रयासों का रोगियों से फीडबैक प्राप्त करने के निर्देश दिए। राज्यपाल पटेल ने कहा कि राज्य सरकार, सिकल सेल उन्मूलन के लिए संकल्पित है। मध्यप्रदेश सिकल सेल उन्मूलन के राष्ट्रीय स्तर के प्रयासों में अग्रणी है। यह संबंधित विभागों द्वारा सिकल सेल उन्मूलन प्रयासों की सही दिशा में सार्थक कार्यों का परिणाम है। उन्होंने स्वास्थ्य और आयुष विभाग के सिकल सेल उन्मूलन कार्यों और गतिविधियों की सराहना की। सिकल सेल उन्मूलन प्रयासों से जुड़े सभी वरिष्ठ अधिकारियों सहित मैदानी अमले को बधाई दी। राज्यपाल को अपर मुख्य सचिव अशोक कुमार बर्णवाल ने विश्व सिकल सेल दिवस पर खंडवा जिले में प्रस्तावित कार्यक्रम के संबंध में अवगत कराया। बैठक में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, आयुष विभाग के प्रमुख सचिव शोभित जैन, जनजातीय प्रकोष्ठ की सचिव श्रीमती मीनाक्षी सिंह, लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण एवं आयुष विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और लोक भवन के अधिकारी मौजूद थे।   

आशा, संतोष और आत्मसम्मान से बदली जिंदगी, वर्षों बाद पूरी हुई बड़ी तमन्ना

बरसों का सपना हुआ पूरा अब मन में भविष्य की चिंता नहीं, आशा, संतोष और आत्मसम्मान रायपुर  एक सुरक्षित और पक्का घर हर परिवार का सपना होता है। यह सपना केवल चार दीवारों का नहीं, बल्कि सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का भी होता है। दुर्ग नगर निगम के उरला वार्ड की श्रीमती कुंती जगने के मन में भी वर्षों से खुद के पक्के घर का सपना पल रहा था, जो अब प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 से साकार हो गया है। श्रीमती कुंती जगने मजदूर हैं। उनके पति श्री प्रभुदास जगने मोची का काम करते हैं। सीमित आय में परिवार का भरण-पोषण करना ही उनके लिए बड़ी चुनौती थी। ऐसे में घर बनाना उनके लिए दूर की कौड़ी थी। कई वर्षों तक उनका परिवार किराये के मकान में रहा, जहां उन्हें अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। बरसात में मकान की छत से पानी टपकता था, जिससे परिवार की चिंता और परेशानी बढ़ जाती थी। बच्चों की सुरक्षा के लिए रातभर जागना पड़ता था। गर्मियों में कमरा इतना गर्म हो जाता था कि आराम से रहना और सोना भी मुश्किल हो जाता था। इन परिस्थितियों के बीच उनका परिवार हमेशा एक ऐसे घर का सपना देखता था, जहां वे सुरक्षित और सम्मानपूर्वक रह सकें। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत आवास की स्वीकृति के साथ कुंती के खुद के आशियाने के सपने को पंख मिला। दुर्ग नगर निगम के सहयोग और योजना से मिली राशि से आवास निर्माण का काम शुरू हुआ और उनके बरसों पुराने सपने को नई उड़ान मिली। मकान पूर्ण होते ही कुंती का सपना हकीकत में बदल गया। आज कुंती अपने परिवार के साथ अपने नए पक्के घर में सुखपूर्वक रह रही हैं। खुद का घर, सुरक्षित वातावरण और स्थायित्व के अहसास ने उन्हें नया आत्मविश्वास दिया है। मन में हमेशा रहने वाली भविष्य की चिंता की जगह अब आशा, संतोष और आत्मसम्मान ने ले ली है। कुंती कहती हैं, “यह केवल ईंट, सीमेंट और दीवारों से बना मकान नहीं है, बल्कि उनके संघर्ष, मेहनत और सपनों का साकार रूप है। प्रधानमंत्री आवास योजना ने उनके परिवार को न केवल पक्का घर दिया है, बल्कि सम्मान और सुरक्षित जीवन भी सुनिश्चित किया है।“ कुंती के सपने का हकीकत में बदलना प्रमाण है कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं और स्थानीय निकायों द्वारा उसका प्रभावी क्रियान्वयन गरीब परिवारों के जीवन में किस तरह सकारात्मक बदलाव ला सकता है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) ने कुंती की ही तरह अनेक परिवारों के खुद के पक्के घर के सपने को साकार कर बेहतर, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन दिया है।

नैनो उर्वरकों से बढ़ रहा किसानों का मुनाफा, कम लागत में बेहतर उत्पादन का नया मॉडल

नैनो उर्वरकों से खेती बन रही अधिक लाभकारी, किसान अपना रहे ‘कम लागत, अधिक मुनाफा’ का मॉडल नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग से बढ़ रही उत्पादन क्षमता, मिट्टी की सेहत को भी मिल रहा संरक्षण रायपुर छत्तीसगढ़ में आधुनिक कृषि तकनीकों और नवाचार आधारित खेती को बढ़ावा मिलने से किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने की दिशा में सफल कदम बढ़ा रहे हैं। नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे उन्नत उर्वरकों का उपयोग किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इससे खेती की लागत में कमी आने के साथ-साथ फसलों को बेहतर पोषण और मिट्टी की गुणवत्ता के संरक्षण में भी मदद मिल रही है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में किसान नैनो उर्वरकों के सकारात्मक परिणामों का अनुभव कर रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नैनो तकनीक आधारित उर्वरक पौधों तक पोषक तत्वों की प्रभावी आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं, जिससे उर्वरकों की उपयोग दक्षता बढ़ती है और फसलों का विकास बेहतर होता है। साथ ही पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में इनके परिवहन, भंडारण और उपयोग में भी अधिक सुविधा होती है। सरगुजा जिले के प्रगतिशील किसान श्री सत्यम कुमार ने पिछले तीन वर्षों से अपनी कृषि भूमि में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उपयोग कर सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए हैं। उनके अनुभव बताते हैं कि नैनो उर्वरकों के उपयोग से फसलों की वृद्धि बेहतर हुई है तथा खेती की लागत में भी उल्लेखनीय कमी आई है। धान, गेहूं, सब्जियों और बाड़ी फसलों सहित विभिन्न कृषि गतिविधियों में इन उर्वरकों का सफल उपयोग किया जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि नैनो उर्वरकों का छिड़काव सीधे पौधों पर किया जाता है, जिससे पोषक तत्वों का अवशोषण अधिक प्रभावी ढंग से होता है। इससे उर्वरकों की बर्बादी कम होती है और फसल को आवश्यक पोषण समय पर उपलब्ध होता है। यही कारण है कि किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। नैनो उर्वरकों का उपयोग पर्यावरणीय दृष्टि से भी लाभकारी माना जा रहा है। इनके उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में सहायता मिलती है तथा रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है। इससे टिकाऊ एवं संतुलित कृषि प्रणाली को बढ़ावा मिल रहा है। राज्य सरकार और कृषि विभाग किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। प्रशिक्षण, प्रदर्शन एवं जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को नैनो उर्वरकों के उपयोग और उनके लाभों की जानकारी दी जा रही है। इसका परिणाम है कि प्रदेश में अधिक से अधिक किसान आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर अपनी आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

3 बिल्डरों को पीछे छोड़ BJP ने जीती बोली, 45 करोड़ में खरीदी बहुमूल्य जमीन

लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भाजपा के आलीशान दफ्तर के बाद प्रदेश मुख्यालय बनने का रास्ता साफ हो गया है। यूपी भाजपा ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की नीलामी में तीन बिल्डरों को पछाड़कर 45 करोड़ की बोली लगाई और जीजामई में 5500 वर्ग मीटर की जमीन खरीद ली। एलडीए ने यह जमीन पिछले महीने लखनऊ नगर निगम से 29 करोड़ में ली थी, जिसे बीजेपी ने 45 करोड़ की सबसे ऊंची बोली के साथ खरीद लिया है। एलडीए को इस सौदे से 19 करोड़ का फायदा एक महीने में हो गया। इस नीलामी में तीन बड़े बिल्डर समूहों के साथ भारतीय जनता पार्टी भी शामिल थी। ऑनलाइन नीलामी में भाजपा ने सबसे अधिक कीमत लगाकर भूखंड अपने नाम कर लिया। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जुलाई में यहां दफ्तर बनाने के काम की शुरुआत कर सकते हैं। पार्टी इस भूखंड पर अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त छह मंजिला प्रदेश मुख्यालय बनाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित भवन में प्रशासनिक कार्यालय, बैठक कक्ष, सम्मेलन सुविधाएं और अन्य आधुनिक व्यवस्थाएं होंगी। सूत्रों के अनुसार, भवन की सबसे ऊपरी मंजिल पर हेलीपैड भी विकसित करने की योजना है। ताकि राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की आवाजाही सुगम हो सके। जमीन वापसी के बाद बदली पूरी रणनीति यह भूखंड पहले नगर निगम ने दीनदयाल उपाध्याय सेवा न्यास को आवंटित किया था। वर्ष 2020 में नगर निगम ने करीब 5500 वर्गमीटर जमीन 90 वर्ष की लीज पर न्यास को दी थी। बाद में इसे फ्रीहोल्ड करने का प्रस्ताव पारित हुआ था, ताकि यहां भाजपा का प्रदेश मुख्यालय बनाया जा सके। लेकिन 7 अप्रैल को न्यास के सदस्य कृष्ण कुमार दीक्षित ने नगर निगम को पत्र भेजकर बजट की कमी का हवाला देते हुए जमीन वापस करने का निर्णय लिया। इसके बाद पूरी प्रक्रिया ने नया मोड़ ले लिया। एलडीए ने डीएम सर्किल रेट के दोगुने पर खरीदी जमीन एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने नगर आयुक्त गौरव कुमार को पत्र भेजकर भूखंड को सर्किल रेट के दोगुने दर पर एलडीए को देने को कहा था। नगर निगम सदन ने भी जमीन एलडीए को देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके बाद एलडीए ने जमीन अपने अधिकार में लेकर नीलामी की प्रक्रिया शुरू की। एलडीए की रणनीति से बढ़ा राजस्व प्रत्यक्ष हस्तांतरण की बजाय नीलामी का रास्ता अपनाने से एलडीए को बड़ा आर्थिक लाभ हुआ। 29 करोड़ रुपये में खरीदी गई जमीन 45 करोड़ रुपये में बिकने से प्राधिकरण को 16 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिला। अधिकारियों का मानना है कि खुली नीलामी प्रक्रिया अपनाने से भविष्य में किसी कानूनी या प्रशासनिक विवाद की संभावना भी कम होगी। अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष के आने की चर्चा भाजपा सूत्रों के अनुसार नए प्रदेश मुख्यालय के शिलान्यास और निर्माण प्रक्रिया को लेकर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व भी गंभीर है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के जुलाई में इसका शिलान्यास करने की बात कही जा रही है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। खसरा संख्या 196 राजनीतिक गतिविधियों का नया केंद्र जियामऊ स्थित खसरा संख्या 196 का यह भूखंड अब प्रदेश की राजनीति का नया केंद्र बनने जा रहा है। मुख्यालय बनने के बाद यहां से भाजपा की संगठनात्मक और राजनीतिक गतिविधियों का संचालन होगा, जिससे यह परिसर राजधानी के सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक परिसरों में शामिल हो जाएगा।

हाई कोर्ट की राज्य सरकार से जवाब-तलब, पंचायत चुनाव पर OBC आयोग की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश

 लखनऊ  पंचायत चुनाव और वर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किए जाने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से महत्वपूर्ण जानकारी तलब की है।अदालत ने पंचायत चुनावों से संबंधित पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है। साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग से संभावित चुनाव कार्यक्रम के बारे में स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति एके चौधरी की अवकाशकालीन पीठ ने स्थानीय अधिवक्ता ओम प्रकाश प्रजापति की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी। याचिका में राज्य सरकार के 25 मई के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत वर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम की धारा-12 के अनुसार ग्राम प्रधान का कार्यकाल शपथ ग्रहण की तिथि से केवल पांच वर्ष का होता है। इसके बावजूद समय पर पंचायत चुनाव न कराकर मौजूदा प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त कर दिया गया, जिससे उनका कार्यकाल अनिश्चितकाल तक बढ़ गया है। यह व्यवस्था कानून के विपरीत है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि यदि किसी कारण से समय पर पंचायत चुनाव नहीं कराए जा सकते, तो पूर्व व्यवस्था के अनुसार एडीओ पंचायत या किसी अन्य सरकारी अधिकारी को प्रशासक नियुक्त किया जाए। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने चुनाव तैयारियों और आरक्षण प्रक्रिया की स्थिति जानने के लिए ओबीसी आयोग की रिपोर्ट तलब की तथा निर्वाचन आयोग से संभावित चुनाव कार्यक्रम पर स्पष्ट जवाब मांगा है।

मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड में 95 वर्षीय राधा की बहादुरी, समय रहते लोगों को किया सतर्क

मुजफ्फरपुर. प्रसाद हॉस्पिटल में हुए दर्दनाक हादसे के बीच मुशहरी प्रखंड के छपरा मेघ गांव की रहने वाली 95 वर्षीय बुजुर्ग महिला राधा देवी की जांबाजी और सूझबूझ की कहानी हर किसी की जुबान पर है। बीपी और सांस लेने में तकलीफ के बाद उन्हें अस्पताल के आईसीयू (ICU) में भर्ती कराया गया था। गुरुवार की सुबह जब वह जागी हुई थीं, तभी अचानक आईसीयू में शॉर्ट सर्किट से गाढ़ा धुआं फैलने लगा। ऐसे खौफनाक मंजर में जहां अच्छे-अच्छों के होश उड़ जाते हैं, वहां 95 साल की इस बहादुर दादी ने अद्भुत हिम्मत दिखाई। उन्होंने बिना डरे तुरंत अपने मुंह से ऑक्सीजन मास्क हटाया, हाथ में लगी सलाइन (ग्लूकोज) की सुई खुद ही खींचकर निकाल दी और स्ट्रेचर से उठकर बाहर की तरफ भाग पड़ीं। ऑन ड्यूटी नर्स को दी घटना की जानकारी चलने-फिरने में असमर्थ होने के बावजूद राधा देवी गिरते-पड़ते आईसीयू से बाहर निकलीं और वहां ड्यूटी पर मौजूद नर्स (मैडम) को अंदर आग लगने की सूचना दी। राधा देवी की इसी चेतावनी के बाद अस्पताल प्रशासन तुरंत हरकत में आया, आनन-फानन में अन्य मरीजों को बाहर निकाला गया और फायर ब्रिगेड को सूचित किया गया। अगर दादी ने सही समय पर हिम्मत दिखाकर स्टाफ को न जगाया होता, तो हादसा और भी भयावह हो सकता था। बाहर निकलली और मैडम के बतइली "आग लगते ही पूरा अंधेरा हो गइलई। आग कइसे लगलई इ हम कईसे बताऊं? धुआं फैलते हम बाहर निकलली और मैडम के बतइली, तब मैडम अंदर जाकर देखलई।" 3 घंटे तक मां को ढूंढता रहा बेटा घटना के बाद अस्पताल में मची भगदड़ के बीच राधा देवी खुद को बचाते हुए अस्पताल के ही एक दूसरे सुरक्षित कमरे में जाकर बैठ गईं। इधर, बाहर मौजूद उनका बेटा और परिजन इस आशंका से बुरी तरह रोते-बिलखते रहे कि कहीं मां आग की चपेट में न आ गई हों। करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत और खोजबीन के बाद जब परिजनों ने राधा देवी को सुरक्षित बैठे देखा, तब जाकर उनकी जान में जान आई। इसके बाद स्वजन उन्हें सुरक्षित घर ले गए। भीषण आग के बाद मची चीख-पुकार यह पूरी घटना शहर के ब्रह्मपुर स्थित नामी-गिरामी प्रसाद हॉस्पिटल की है, जहां गुरुवार की सुबह करीब साढ़े तीन बजे अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर स्थित आईसीयू में शॉर्ट सर्किट के कारण भीषण आग लग गई। आग लगते ही पूरे अस्पताल परिसर में चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया। गंभीर रूप से बीमार मरीजों को शहर के अन्य विभिन्न अस्पतालों में शिफ्ट करने के लिए एंबुलेंस लगातार सड़कों पर दौड़ती रहीं। हादसे में अब तक 5 मरीजों की मौत इस भीषण अग्निकांड में दम घुटने और झुलसने के कारण अब तक कुल 5 मरीजों की मौत हो चुकी है। पहले चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी, लेकिन बाद में गंभीर रूप से झुलसी महिला मरीज चंचला देवी को आसव (ASAV) अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। हादसे में जान गंवाने वाले सभी 5 मृतकों की पहचान इस प्रकार हुई है: 1. मृतका चंचला देवी: हादसे के बाद बेहद गंभीर हालत में इन्हें शहर के आसव (ASAV) अस्पताल में शिफ्ट कराया गया था, जहां इन्होंने अंतिम सांस ली। 2. मृतक उदय कुमार (विशंभरपुर, शिवहर): पेशे से एलआईसी (LIC) एजेंट उदय कुमार की हाल ही में ब्रेन सर्जरी हुई थी। शोर सुनकर जब ग्राउंड फ्लोर पर मौजूद उनका परिवार ऊपर भागा, तब तक वे दम तोड़ चुके थे। 3. मृतका गीता देवी (दिस्तौलिया, कथैया): शुगर, बीपी और डायलिसिस की मरीज गीता देवी 1 जून को ही अस्पताल में भर्ती हुई थीं। 4. मृतक शशांक (रतनपुरा, औराई): संजय चौधरी के पुत्र शशांक भी आईसीयू में जिंदगी की जंग लड़ रहे थे, लेकिन आग की भेंट चढ़ गए। 5. मृतक कृष्णनंदन सिंह (78 वर्ष, गोरिगमा डीह, मीनापुर): फेफड़े में पानी की शिकायत के बाद 22 मई से डॉ. संजीव की यूनिट में इलाजरत थे। 4-4 लाख मुआवजे का ऐलान हादसे की भयावहता को देखते हुए जिलाधिकारी (DM) सुब्रत कुमार सेन और पुलिस अधीक्षक (SP) समेत तमाम आला अधिकारी, सभी डीएसपी और फायर ऑफिसर दलबल के साथ मौके पर पहुंचे और राहत कार्य की निगरानी की। अस्पताल में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। डीएम सुब्रत कुमार सेन ने सभी 5 मृतकों के आश्रितों को सरकारी नियम के तहत 4-4 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता राशि देने की घोषणा की है। साथ ही, अन्य अस्पतालों में शिफ्ट किए गए सभी मरीजों का इलाज सरकारी खर्च पर कराने और अस्पताल की बिजली वायरिंग व फायर सेफ्टी मानकों की जांच के कड़े निर्देश दिए हैं। बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता विजय कुमार भी टीम के साथ लोड और वायरिंग का जायजा लेने पहुंचे हैं।

किरायेदार को नहीं मिली राहत, मकान मालिक की आवश्यकता को मानते हुए हाईकोर्ट ने आदेश रखा बरकरार

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए किरायेदार को दुकान खाली करने के आदेश दे दिए हैं। साथ ही किया कि किरायेदार यह तय नहीं कर सकता कि मकान मालिक अपनी जरूरतों को किस प्रकार पूरा करे। यदि मकान मालिक की आवश्यकता वास्तविक और सद्भावनापूर्ण है तो किरायेदार उसे वैकल्पिक व्यवस्था सुझाकर किराये की संपत्ति खाली कराने की मांग को विफल नहीं कर सकता। अदालत ने इसी सिद्धांत को दोहराते हुए लुधियाना स्थित एक दुकान के किरायेदार की बेदखली को बरकरार रखा है। जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि किराया नियंत्रक को यह मानकर चलना चाहिए कि मकान मालिक की आवश्यकता वास्तविक है। ऐसे मामलों में किरायेदार यह निर्देश नहीं दे सकता कि मकान मालिक बिना किराये की संपत्ति का कब्जा प्राप्त किए अपनी जरूरतों को अन्य तरीके से पूरा कर ले। लुधियाना का मामला पहुंचा था हाई कोर्ट मामला लुधियाना के ब्राउन रोड स्थित एक दुकान से जुड़ा था। मकान मालिक ने दुकान खाली कराने की मांग यह कहते हुए की थी कि उसका विवाहित पुत्र स्वतंत्र रूप से स्पेयर पार्ट्स का कारोबार शुरू करना चाहता है और इसके लिए उक्त दुकान की आवश्यकता है। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि पुत्र के पास न तो अपनी कोई अन्य दुकान है और न ही वह किसी अन्य व्यावसायिक परिसर पर कब्जा रखता है। ऐसे में उसकी जरूरत वास्तविक और उचित है। किरायेदार ने दी थी बेदखली आदेश को चुनौती दूसरी ओर किरायेदार ने बेदखली आदेश को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि याचिकाकर्ता स्वयं को संपत्ति का मालिक साबित करने में विफल रहा है, इसलिए उसे बेदखली याचिका दायर करने का अधिकार नहीं है। हालांकि हाई कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों का हवाला देते हुए कहा कि संपत्ति पहले एक पारिवारिक ट्रस्ट के अधीन थी, लेकिन वर्तमान में उसका स्वामित्व पूरी तरह संबंधित मकान मालिक के पास है। दस्तावेजों और जिरह के दौरान दिए गए बयानों से उसके मालिकाना अधिकार पर्याप्त रूप से सिद्ध होते हैं। इसलिए वह किराया प्राप्त करने और किरायेदार के खिलाफ बेदखली की कार्यवाही शुरू करने का हकदार है। ईस्ट पंजाब अर्बन रेंट रेस्ट्रिक्शन एक्ट, 1949 का हुआ उल्लेख हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि स्वामित्व संबंधी विवाद को अलग भी रख दिया जाए, तब भी किरायेदार का मामला टिक नहीं सकता। अदालत ने ईस्ट पंजाब अर्बन रेंट रेस्ट्रिक्शन एक्ट, 1949 का उल्लेख कर कहा कि कानून में "मकान मालिक" की परिभाषा में ट्रस्टी भी शामिल है। इसलिए किराया प्राप्त करने वाला ट्रस्टी भी बेदखली याचिका दायर कर सकता है। बेटे की जरूरत को वास्तविक बताया कोर्ट ने अपने आदेश में सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि "स्वयं के उपयोग" का अर्थ केवल मकान मालिक के व्यक्तिगत उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके आश्रित परिवार के सदस्यों की आवश्यकताओं को भी इसमें शामिल माना जाएगा। अदालत ने माना कि बेटे के स्वतंत्र व्यवसाय के लिए दुकान की आवश्यकता पूरी तरह वास्तविक है और इसमें किसी प्रकार का दुर्भावनापूर्ण उद्देश्य नहीं दिखता। इन टिप्पणियों के साथ हाई कोर्ट ने 19 मई 2025 के अपीलीय आदेश में किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि न पाते हुए किरायेदार की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी और बेदखली के आदेश को बरकरार रखा। साथ ही लंबित सभी अन्य आवेदन भी निस्तारित कर दिए गए।

दुर्ग पुलिस में बड़ा एक्शन, NDPS मामले में रिश्वत मांगने पर दो सब-इंस्पेक्टर सस्पेंड

दुर्ग. जिले में रिश्वत मांगने के आरोप में दो पुलिस अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल ने एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में आरोपी पक्ष से कथित रूप से पैसों की मांग करने के आरोप में दो सब इंस्पेक्टरों को निलंबित कर दिया है। निलंबित अधिकारियों में पुरानी भिलाई थाना में पदस्थ एसआई तुलसीराम साहू और खुर्सीपार थाना में पदस्थ एसआई देव लाल साहू शामिल हैं। दोनों को निलंबित कर रक्षित केंद्र दुर्ग अटैच किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी ने छावनी सीएसपी प्रशांत पैकरा को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें तीन दिनों के भीतर प्रारंभिक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। महिला को छोड़ने के बदले मांगे थे 50 हजार रुपए जानकारी के अनुसार पुरानी भिलाई थाना क्षेत्र में एसआई तुलसीराम साहू ने रज्जी कौर नामक महिला को 5.80 ग्राम चिट्टा (मादक पदार्थ) के साथ गिरफ्तार किया था। आरोप है कि महिला को छोड़ने के एवज में उसकी बेटी से 50 हजार रुपए की मांग की गई थी। महिला की बेटी जसबीर का आरोप है कि उसने पहली बार में 20 हजार रुपए देने की बात स्वीकार की थी और राशि भी दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद उसकी मां को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद भी पैसों की मांग जारी रही। इसी दौरान हुई बातचीत का ऑडियो रिकॉर्ड हो गया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। ऑडियो वायरल होने के बाद हुई कार्रवाई ऑडियो वायरल होने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। प्रारंभिक जांच में ऑडियो को गंभीर मानते हुए एसएसपी विजय अग्रवाल ने तत्काल कार्रवाई करते हुए एसआई तुलसीराम साहू और उनके सहयोगी बताए जा रहे खुर्सीपार थाना में पदस्थ एसआई देव लाल साहू को निलंबित कर दिया। दुर्ग शहर एएसपी सुखनंद राठौर ने बताया कि पुरानी भिलाई थाना में दर्ज एनडीपीएस प्रकरण से जुड़े मामले में आरोपी पक्ष से कथित रूप से पैसों की मांग का ऑडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था। शुरुआती जांच में वायरल ऑडियो के आधार पर दोनों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। विभागीय नियमों के विपरीत आचरण पाए जाने पर निलंबन की कार्रवाई की गई। साइबर क्राइम कर्मियों पर भी लगाए आरोप आरोपी महिला की बेटी जसबीर ने यह भी आरोप लगाया है कि साइबर क्राइम से जुड़े कुछ लोगों ने भी उससे 2 लाख रुपए की मांग की थी। उसने दावा किया कि एसआई के साथ हुई बातचीत की पूरी रिकॉर्डिंग उसके पास सुरक्षित है। जसबीर ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि जब्ती, गिरफ्तारी और पूछताछ से जुड़े सभी स्थानों के सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई जाए। उसका आरोप है कि बरामद किए गए चिट्टे की मात्रा वास्तविक मात्रा से अधिक दर्शाई गई है। तीन दिन में सौंपी जाएगी जांच रिपोर्ट दुर्ग पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। छावनी नगर पुलिस अधीक्षक प्रशांत पैकरा को तीन दिनों के भीतर प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।