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मानसून ने पकड़ी रफ्तार, देश में बारिश की शुरुआत; यूपी और बिहार के लिए बड़ा अपडेट

तिरुवनन्तपुरम झुलसाती गर्मी, तपती सड़कें और उमस भरी हवाओं के बीच आखिरकार वह खबर आ गई जिसका पूरे देश को इंतजार था. दक्षिण-पश्चिम मानसून ने केरल में आधिकारिक तौर पर दस्तक दे दी है. इसके साथ ही भारत में बारिश के सबसे बड़े मौसम की शुरुआत हो चुकी है. मौसम विभाग (IMD) की घोषणा के बाद केरल के कई इलाकों में तेज बारिश शुरू हो गई है और आसमान में घने बादलों ने गर्मी की तपिश को काफी हद तक कम कर दिया है. हर साल की तरह इस बार भी मानसून की एंट्री सिर्फ मौसम की खबर नहीं है, बल्कि करोड़ों किसानों, व्यापारियों और आम लोगों के लिए राहत और उम्मीद का संकेत है. खेतों से लेकर शहरों तक अब नजरें बारिश के अगले दौर पर टिक गई हैं. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले दिनों में मानसून तेजी से आगे बढ़ेगा और देश के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लेगा. ऐसे में अब छाता और रेनकोट निकालने का वक्त आ गया है।  IMD ने गुरुवार को पुष्टि की कि दक्षिण-पश्चिम मानसून ने केरल में आधिकारिक रूप से प्रवेश कर लिया है. इसके साथ ही लक्षद्वीप और तटीय इलाकों में भी बारिश की गतिविधियां तेज हो गई हैं. मौसम विभाग ने 4 जून से 9 जून के बीच केरल में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है. कई जगहों पर 7 सेंटीमीटर से 20 सेंटीमीटर तक बारिश होने की संभावना जताई गई है. IMD के मुताबिक, तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पथानामथिट्टा, अलाप्पुझा, कोट्टायम, इडुक्की, एर्नाकुलम और त्रिशूर जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. विभाग ने कहा है कि इन इलाकों में तेज बारिश के साथ जलभराव और जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है।  मानसून की एंट्री के साथ बदला मौसम का मिजाज     केरल में मानसून की एंट्री के बाद मौसम पूरी तरह बदल गया है. कई जिलों में लगातार बारिश हो रही है और तापमान में गिरावट दर्ज की गई है. मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में उत्तर केरल के कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड जिलों में भी भारी बारिश का दौर शुरू हो सकता है. जैसे-जैसे मानसून मजबूत होगा, वैसे-वैसे बारिश का दायरा बढ़ता जाएगा।      IMD ने अपने बयान में कहा कि ‘दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल में प्रवेश कर चुका है और अगले कुछ दिनों में इसके तेजी से आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं.’ विभाग के मुताबिक, अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में भी मानसून सक्रिय हो रहा है।      मानसून की यह शुरुआत देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहद अहम मानी जाती है. भारत की लगभग आधी आबादी किसी न किसी रूप में खेती पर निर्भर है. कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश की करीब 51 प्रतिशत खेती बारिश पर आधारित है. ऐसे में मानसून अच्छा रहने का मतलब है बेहतर फसल, मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बाजार में सकारात्मक असर।      पिछले कुछ दिनों से मानसून की रफ्तार थोड़ी धीमी मानी जा रही थी. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पश्चिमी प्रशांत महासागर में विकसित हो रहे एक टाइफून और लक्षद्वीप के पास बने चक्रवाती परिसंचरण की वजह से अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी खिंच गई थी. इसी कारण मानसून की शुरुआती प्रगति कमजोर पड़ी. हालांकि अब परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हो चुकी हैं और मानसून तेजी पकड़ रहा है।  UP-बिहार में कब आएगा मानसून? मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार बिहार में दक्षिण-पश्चिम मानसून की दस्तक 12 से 15 जून के बीच हो सकती है, हालांकि राज्य के कुछ इलाकों में यह थोड़ा पहले भी पहुंच सकता है. मानसून के पूरे बिहार में सक्रिय होने में इसके बाद करीब 2 से 3 दिन का समय लग सकता है. वहीं उत्तर प्रदेश में मानसून चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगा।   पूर्वी उत्तर प्रदेश में मानसून 15 से 20 जून के बीच पहुंचने की संभावना है, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इसकी एंट्री 20 से 25 जून तक हो सकती है. मानसून के पहुंचने के साथ दोनों राज्यों में बारिश की गतिविधियां तेज होने और लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।  कई राज्यों में आंधी-तूफान और तेज बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने सिर्फ केरल ही नहीं बल्कि देश के कई हिस्सों के लिए भी अलर्ट जारी किया है. IMD के अनुसार, उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्वी और दक्षिण भारत के कई क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं. कई जगहों पर 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है।  विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के आगे बढ़ने के साथ दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और पूर्वोत्तर राज्यों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं. इससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलेगी।  मौसम विभाग ने सिर्फ केरल ही नहीं बल्कि देश के कई हिस्सों के लिए भी अलर्ट जारी किया है।  किसानों और आम लोगों के लिए क्यों अहम है मानसून? भारत में मानसून सिर्फ मौसम नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था की धड़कन माना जाता है. अच्छी बारिश होने पर खेती बेहतर होती है, जलाशयों में पानी भरता है और बिजली उत्पादन पर भी सकारात्मक असर पड़ता है. ग्रामीण बाजारों में मांग बढ़ती है और इसका असर पूरे आर्थिक ढांचे पर दिखाई देता है।  यही वजह है कि हर साल मानसून की एंट्री पर पूरे देश की नजर रहती है. इस बार भी मानसून की शुरुआत को राहत भरी खबर माना जा रहा है. हालांकि मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की भी सलाह दी है क्योंकि भारी बारिश वाले इलाकों में जलभराव और भूस्खलन जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।  आने वाले दिनों में तेजी से आगे बढ़ेगा मानसून मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अब मानसून तेजी से आगे बढ़ेगा और जुलाई के मध्य तक देश के ज्यादातर हिस्सों को कवर कर लेगा. अगले कुछ दिनों में कर्नाटक, तमिलनाडु, गोवा और महाराष्ट्र के कई इलाकों में भी तेज बारिश शुरू हो सकती है. फिलहाल केरल में मानसून की धमाकेदार एंट्री ने गर्मी से परेशान लोगों को बड़ी राहत दी है. अब पूरे देश की नजर इस बात पर है कि मानसून की रफ्तार आगे कैसी … Read more

Cyber Fraud का बढ़ता जाल: पंजाब में करोड़ों की ठगी, निवेश और वीजा के नाम पर लोगों को बनाया शिकार

चंडीगढ़   पंजाब में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहा है। पिछले चार महीनों के दौरान मोहाली और राज्य के विभिन्न जिलों में साइबर ठगों ने 30.14 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी को अंजाम दिया है। इस अवधि में ऑनलाइन धोखाधड़ी के 13 बड़े मामले सामने आए हैं, जिनमें निवेश, वीजा, नौकरी, प्रॉपर्टी और हनी ट्रैप जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बनाया गया। मामलों की शिकायत मिलने के बाद मोहाली साइबर क्राइम थाना, स्टेट क्राइम और स्टेट साइबर क्राइम पुलिस थानों में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। साइबर अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए विशेषज्ञ टीमों को लगाया गया है। क्रिप्टो निवेश के नाम पर 19.84 करोड़ की ठगी सबसे बड़ा मामला लुधियाना के व्यवसायी जगदीप सिंघाल से जुड़ा है। साइबर ठगों ने उन्हें क्रिप्टोकरेंसी में निवेश पर भारी मुनाफे का लालच देकर 19.84 करोड़ रुपये की ठगी का शिकार बनाया। आरोपियों ने सोशल मीडिया के जरिए संपर्क कर उनका विश्वास जीता और एक फर्जी ट्रेडिंग वेबसाइट के माध्यम से निवेश करवाया। जांच में पता चला है कि ठगी की रकम 15 अलग-अलग बैंकों के 75 फर्जी खातों के जरिए निकाली गई। फर्जी निवेश कंपनी बनाकर 3.62 करोड़ की धोखाधड़ी होशियारपुर निवासी तरनजीत सिंह भल्ला से भी निवेश के नाम पर 3.62 करोड़ रुपये ठग लिए गए। आरोपियों ने ‘अटालिया’ नामक कंपनी में निवेश कराने के लिए सेबी और आरबीआई के कथित दस्तावेज दिखाए तथा हर महीने 3 प्रतिशत और सालाना 36 प्रतिशत रिटर्न का झांसा दिया। जब पीड़ित ने अपनी रकम वापस मांगी तो उसे जान से मारने की धमकियां भी दी गईं। नौकरी, वीजा और हनी ट्रैप के जरिए भी ठगी साइबर ठगों ने रेलवे में टिकट कलेक्टर की नौकरी दिलाने, बैंक ऋण से राहत दिलाने और पैसे दोगुने करने के नाम पर भी लोगों से लाखों रुपये ऐंठे। हनी ट्रैप के मामलों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एक युवक को इंस्टाग्राम पर फर्जी महिला प्रोफाइल के जरिए जाल में फंसाया गया और अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उससे 4.50 लाख रुपये वसूल लिए गए। वहीं, एक महिला को इंस्टाग्राम लिंक भेजकर निवेश का झांसा दिया गया और उससे 70 हजार रुपये की ठगी कर ली गई। प्रॉपर्टी और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म फ्रॉड भी सामने आए खरड़ में एक दंपती ने सोशल मीडिया पर कोठी बेचने का विज्ञापन देकर छह लोगों से करीब 1.5 करोड़ रुपये का बयाना लिया। बाद में संपत्ति किसी अन्य व्यक्ति के नाम रजिस्ट्री करवा दी गई। इसी तरह एचएसबीएस कैपिटल नामक फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए चार लोगों से 27.88 लाख रुपये की ठगी की गई। शुरुआत में कुछ लाभ दिखाकर विश्वास जीता गया और बाद में निवेशकों की रकम ब्लॉक कर दी गई। विदेश भेजने के नाम पर भी ठगी जॉर्जिया, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के वर्क वीजा दिलाने के नाम पर भी कई लोगों को निशाना बनाया गया। आरोपियों ने दर्जनों युवाओं से लाखों रुपये वसूल लिए, लेकिन न तो वीजा मिला और न ही रकम वापस की गई। पुलिस ने जारी की एडवाइजरी पुलिस अधिकारियों ने लोगों से ऑनलाइन निवेश, सोशल मीडिया ऑफर और डिजिटल लेन-देन के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले संबंधित कंपनी की वैधता की जांच अवश्य करें और असामान्य रूप से अधिक रिटर्न के दावों पर भरोसा न करें। पुलिस ने यह भी सलाह दी है कि साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल या नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

ट्रायल्स से बाहर होने के बावजूद WFI की जिद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, विनेश फोगाट केस में अहम टिप्पणी

सोनीपत  सुप्रीम कोर्ट ने पहलवान विनेश फोगाट के एशियन गेम्स के ट्रायल्स में हिस्सा लेने के खिलाफ कुश्ती संघ की याचिका पर सुनवाई गुरुवार (4 जून, 2026) को बंद कर दी है. कोर्ट को बताया गया कि विनेश ट्रायल्स में हिस्सा ले चुकी हैं और हारकर बाहर भी हो चुकी हैं. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आगे सुनवाई को गैरजरूरी बताया।  कुश्ती संघ (WFI) ने हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें विनेश को ट्रायल्स में जाने की अनुमति दी गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले से जुड़े कानूनी सवाल खुले हैं. हाईकोर्ट चाहे तो उन पर विचार कर सकता है।  बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार कुश्ती संघ ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की है. कुश्ती संघ की तरफ से सीनियर एडवोकेट डीएन गोवर्धन ने कोर्ट से अनुरोध किया है कि पैरा नंबर 31 से आगे का हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया जाना चाहिए, क्योंकि इसमें तो यहां तक कह दिया गया है कि डब्ल्यूएफआई की कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण और निंदनीय है. हालांकि, कोर्ट ने आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।  सुप्रीम कोर्ट ने कुश्ती संघ से कहा है कि हाईकोर्ट की इन टिप्पणियों का सिंगल बेंच के पास लंबित मामले की सुनवाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा. कोर्ट ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट के निष्कर्षों को सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दोहराया है और मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं।  यह मुद्दा विनेश फोगाट को एशियन गेम्स के ट्रायल्स में शामिल होने के लिए इजाजत देने से जुड़ा है. पहले हाईकोर्ट ने विनेश फोगाट को ट्रायल्स में जाने की अनुमति दे दी थी और फिर 29 मई को सुप्रीम कोर्ट ने भी फैसले को बरकरार रखा. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने विनेश को इजाजत देने के लिए हाईकोर्ट की तरफ से अपनाए गए दृष्टिकोण पर विचार करने के लिए मामले को लंबित रखा था।  कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने आदेश में मातृत्व पर पन्ने दर पन्ने खर्च कर दिए, जबकि असली मुद्दा इंटरनेशनल टेस्टिंग एजेंसी (ITA) के मानदंडों से जुड़ा है क्योंकि विनेश फोगाट डोपिंग टेस्ट में शामिल नहीं हुईं।  सुप्रीम कोर्ट ने विनेश को फटकार भी लगाई थी कि वह 2024 से गायब हैं, कभी मातृत्व और कभी  बतौर विधायक हरियाणा विधनासभा की कार्यवाही में व्यस्त होने का हवाला दिया. 2026 के डोपिंग टेस्ट में भी शामिल नहीं हुईं. कोर्ट ने उनसे कहा था कि हमें समझना होगा कि भारतीय खेल, विश्व खेलों से जुड़े हुए हैं. खिलाड़ी की उपलब्धियों का सम्मान होना चाहिए, लेकिन देश हर बात से पहले है. हाईकोर्ट ने विनेश फोगाट को घरेलू प्रतियोगिताओं और 2026 के एशियन गेम्स के ट्रायल्स के लिए अयोग्य ठहराए जाने की डब्ल्यूएफआई की कार्रवाई को निंदनीय और बदले की भावना से प्रेरित बताया था. उन्होंने कहा था कि मातृत्व अवकाश के बाद वापसी कर रही खिलाड़ी से ऐसा व्यवहार अस्वीकार्य है। 

जनभागीदारी के दम पर हरियाली की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़, पर्यावरण संरक्षण को मिली नई दिशा

विश्व पर्यावरण दिवस 2026 हरित विकास, जल संरक्षण और जनभागीदारी से पर्यावरणीय समृद्धि की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़ रायपुर,    प्रकृति केवल हमारे जीवन का आधार नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और भविष्य की संरक्षक भी है। स्वच्छ वायु, निर्मल जल, घने वन और समृद्ध जैव विविधता किसी भी सभ्य समाज की अमूल्य धरोहर होते हैं। तेजी से बढ़ते शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के इस दौर में पर्यावरण संरक्षण केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व की अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है। इसी उद्देश्य से प्रतिवर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है, जो हमें प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराता है। प्राकृतिक संपदा से समृद्ध छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल है, जहां पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य के विशाल वन क्षेत्र, समृद्ध जैव विविधता और जल संसाधन इसकी पर्यावरणीय पहचान हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार हरित विकास, जल संरक्षण और जनभागीदारी को केंद्र में रखकर अनेक योजनाओं का सफल संचालन कर रही है। हरियाली से समृद्धि की ओर छत्तीसगढ़ में वृक्षारोपण को केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय से भी जोड़ा गया है। ’हरियाली प्रसार योजना’ और ’किसान वृक्ष मित्र योजना’ के माध्यम से किसानों को कृषि वानिकी के लिए पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं तथा उन्हें अपनी भूमि पर वृक्ष लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे एक ओर हरित क्षेत्र का विस्तार हो रहा है तो दूसरी ओर किसानों को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ भी प्राप्त हो रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर संचालित ”एक पेड़ मां के नाम“ अभियान ने पर्यावरण संरक्षण को जनभावनाओं से जोड़ने का कार्य किया है। इस अभियान के माध्यम से लाखों नागरिक अपनी मां के सम्मान में पौधारोपण कर प्रकृति संरक्षण का संदेश दे रहे हैं। यह पहल पर्यावरणीय जिम्मेदारी को सामाजिक आंदोलन का स्वरूप प्रदान कर रही है। शहरों को मिल रही हरित पहचान तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। इस दिशा में ’ऑक्सीवन योजना’ के तहत शहरों में ऑक्सीजन पार्क और हरित क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं। वहीं पर्यावरण वानिकी योजना’ के माध्यम से सड़क किनारे वृक्षारोपण, पर्यावरण पार्कों का निर्माण तथा सार्वजनिक स्थलों का हरित विकास किया जा रहा है। ये प्रयास न केवल प्रदूषण नियंत्रण में सहायक हैं, बल्कि नागरिकों को बेहतर जीवन गुणवत्ता भी प्रदान कर रहे हैं। जल संरक्षण बना जनआंदोलन जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए जल संरक्षण आज सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस दिशा में कई अभिनव पहलें की हैं। ’मोर गांव मोर पानी’ और ’मोर गांव मोर तरिया’ जैसे अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण की नई चेतना पैदा कर रहे हैं। परंपरागत तालाबों का पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन, चेक डैम निर्माण और जल पुनर्भरण संरचनाओं के विकास से भूजल स्तर में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य में ’भूजल एवं जल संरक्षण कार्यक्रमों’ के तहत जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन पर विशेष बल दिया जा रहा है। जल सुरक्षा की यह सोच आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित भविष्य की नींव रख रही है। नदियों और आर्द्रभूमियों का संरक्षण प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने के लिए ’नदी तट वृक्षारोपण योजना’ के अंतर्गत नदी किनारों पर बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जा रहा है। इससे मिट्टी के कटाव पर नियंत्रण, भूजल संवर्धन और जैव विविधता संरक्षण में मदद मिल रही है। इसी प्रकार आर्द्र भूमि (वेटलैंड) जलवायु अनुकूलन परियोजना के तहत महानदी जलग्रहण क्षेत्र में आर्द्रभूमियों के संरक्षण और पुनर्जीवन का कार्य किया जा रहा है। यह पहल जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और प्राकृतिक जल तंत्र को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। नई पीढ़ी को पर्यावरण का प्रहरी बनाने की पहल पर्यावरण संरक्षण की सफलता जन-जागरूकता और जनभागीदारी पर निर्भर करती है। इसी उद्देश्य से ’राष्ट्रीय हरित कोर योजना (नेशनल ग्रीन कॉर्प्स)’ तथा ’ईको-क्लब कार्यक्रमों’ के माध्यम से स्कूलों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को पर्यावरणीय गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, जल संरक्षण और जैव विविधता संरक्षण संबंधी कार्यक्रमों के जरिए बच्चों और युवाओं में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित की जा रही है। पर्यावरण संरक्षण : सरकार और समाज की साझा जिम्मेदारी पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है। इसके लिए प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। एक पौधा लगाना, जल की बचत करना, प्लास्टिक का कम उपयोग करना, प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना और स्वच्छता बनाए रखना ऐसे छोटे-छोटे कदम हैं जो बड़े परिवर्तन का आधार बन सकते हैं। विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह संदेश देता है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। छत्तीसगढ़ आज हरियाली, जल संरक्षण और जनभागीदारी आधारित विकास मॉडल के माध्यम से इसी संतुलित दृष्टिकोण को साकार कर रहा है। यदि हम सभी प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों को समझें और पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाएं, तो आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ, हरित और सुरक्षित पृथ्वी सौंप सकेंगे। धरती हमें विरासत में नहीं मिली है, बल्कि हमने इसे आने वाली पीढ़ियों से उधार लिया है। इसलिए पर्यावरण की रक्षा करना हम सभी का नैतिक दायित्व है। •  डॉ. दानेश्वरी संभाकर     उपसंचालक, जनसंपर्क  

हरियाणा में यमुनानगर का ग्रीन रिकॉर्ड, 60 लाख से अधिक पौधारोपण के साथ शीर्ष पर पहुंचा

यमुना नगर. विश्व पर्यावरण दिवस पर हरियाणा की हरियाली की तस्वीर में यमुनानगर सबसे आगे दिखाई देता है। वन विभाग की डिजिटल वृक्ष गणना में जंगलों से बाहर हरियाणा में 60.94 लाख पेड़ दर्ज किए गए, जो पूरे प्रदेश में सबसे अधिक हैं। प्रदेश के 4.01 करोड़ पेड़ों में 14.86 प्रतिशत पेड़ अकेले यमुना नगर में हैं, यानी प्रदेश के कुल पेडों में हर सातवां पेड़ यमुनानगर जिले का है। वन क्षेत्र मामले में भी जिला दूसरे स्थान पर है। हालांकि बढ़ता प्रदूषण, गिरता भूजल, अवैध खनन व वनों पर बढ़ती तस्करी भविष्य की चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं, पर इस बीच भी कलेसर नेशनल पार्क, वन्यजीव अभयारण्य व किसानों की कृषि वानिकी यमुनानगर को हरियाणा की हरित पहचान बना रहे हैं। कलेसर व किसानों ने दिलाई पहचान वन विभाग द्वारा कराई गई डिजिटल वृक्ष गणना के अनुसार प्रदेश में जंगलों से बाहर 4.01 करोड़ पेड़ हैं। इनमें सबसे अधिक 60 लाख 94 हजार 153 पेड़ यमुनानगर में दर्ज किए गए हैं। इसके बाद अंबाला में 34,08,972, सिरसा में 33,18,033 और फरीदाबाद में 5,72,416 पेड़ हैं। इसके बाद कुरुक्षेत्र, पलवल और गुरुग्राम का स्थान है। पेड़ों की संख्या में यमुनानगर के आगे रहने की उपलब्धि के पीछे 25 हजार एकड़ में फैला कलेसर नेशनल पार्क व वन्यजीव अभयारण्य बड़ी वजह हैं। शिवालिक की तलहटी स्थित यह क्षेत्र हरियाणा की सबसे समृद्ध जैव विविधता वाला वन क्षेत्र है। दूसरी ओर किसानों ने निजी भूमि पर पापलर, सफेदा व शीशम के बड़े स्तर पर रोपण कर कृषि वानिकी को नई ऊंचाई दी है। यही कारण है कि यमुनानगर को देश की प्लाईवुड राजधानी के रूप में पहचान मिली। किसान संघ के महामंत्री रामबीर चौहान का कहना है कि किसानों की भागीदारी के बिना यह उपलब्धि संभव नहीं थी। 10.94% वन क्षेत्र से प्रदेश में दूसरा नंबर भारतीय वन सर्वेक्षण की इंडिया स्टेट आफ फारेस्ट रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा का कुल वन क्षेत्र 1559 वर्ग किलोमीटर है, जो राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 3.53 प्रतिशत है। वन क्षेत्र के मामले में पंचकूला 47.4 प्रतिशत वन क्षेत्र के साथ पहले स्थान पर है। यमुनानगर 10.94 प्रतिशत वन क्षेत्र के साथ दूसरे स्थान पर है। प्रदेश में हर वर्ष बड़े स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाए जाते हैं। विभिन्न योजनाओं के तहत हर साल 2.2 से 2.5 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा जाता है। हालांकि पौधों को जीवित रखना अभी भी चुनौती बना हुआ है। औसतन 65 से 70 प्रतिशत पौधे ही जीवित रह पाते हैं। सड़कों व नहरों किनारे यह दर कई बार 50 से 55 प्रतिशत तक सिमट जाती है। इसी कारण पौधरोपण करने वाली एजेंसियों को पांच वर्ष तक रखरखाव की जिम्मेदारी दी जा रही है। बढ़ रहे वाहन और गिर रहा भूजल स्तर प्रदेश में हर साल सात से आठ लाख नए वाहन पंजीकृत हो रहे हैं। कुल वाहनों की संख्या एक करोड़ से अधिक हो चुकी है। सर्दियों में जींद, बहादुरगढ़, धारूहेड़ा व गुरुग्राम जैसे शहर गंभीर वायु प्रदूषण का सामना करते हैं। दूसरी ओर प्रदेश में 19,487 तालाब होने के बावजूद भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। राज्य के 143 ब्लाकों में 85 से 88 ब्लाक ओवर एक्सप्लाइटेड श्रेणी में पहुंच चुके हैं। महेंद्रगढ़ में भूजल स्तर 52 मीटर से अधिक गहराई तक पहुंच चुका है। यमुनानगर की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। जिले में औसत भूजल स्तर 14 से 16 मीटर के बीच है, पर यहां भी लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। विशेषज्ञ बोले- उपलब्धि बड़ी, खतरे गंभीर पर्यावरणविद् डा. रविश चौहान ने कहा कि यमुनानगर का पेड़ों की संख्या में प्रदेश में पहले स्थान पर होना एक आंकड़ा नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि है। कलेसर के जंगल व किसानों की कृषि वानिकी ने जिले को विशेष पहचान दी है। लेकिन अवैध खनन, खैर कटान, भूजल दोहन व बढ़ता प्रदूषण चिंता का विषय हैं। यदि संरक्षण व संवर्धन साथ-साथ नहीं चले तो आने वाले वर्षों में पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो सकता है। श्रेणी / सूचक    आंकड़े और महत्वपूर्ण जानकारी प्रदेश में कुल पेड़ (जंगलों से बाहर)            4.01 करोड़ यमुना नगर में कुल पेड़ (जंगलों से बाहर)     60.94 लाख (प्रदेश के कुल पेड़ों का बड़ा हिस्सा) वन क्षेत्र (Forest Area) में पहला स्थान        पंचकूला वन क्षेत्र (Forest Area) में दूसरा स्थान        यमुनानगर यमुनानगर का कुल वन क्षेत्र प्रतिशत            10.94% हरियाणा का कुल वन क्षेत्र                           1,559 वर्ग किमी हर साल पौधारोपण का लक्ष्य                        2.2 से 2.5 करोड़ पौधे पौधों के जीवित रहने की दर                         65% से 70% प्रदेश में कुल तालाबों की संख्या                    19,487 ओवर एक्सप्लाइटेड ब्लॉक (अति-दोहित क्षेत्र)   85 – 88 ब्लॉक महेंद्रगढ़ में भूजल स्तर                                  52 मीटर से अधिक गहरा सालाना पंजीकृत होने वाले नए वाहन                7 से 8 लाख

बेटियों के सपनों को मिली उड़ान, लाड़ली लक्ष्मी योजना बनी उच्च शिक्षा का मजबूत सहारा

बेटियों के टूटने नहीं दिए ख्वाब: मध्यप्रदेश की लाड़ली लक्ष्मी योजना बनी उच्च शिक्षा का संबल भोपाल अगर सरकार से यह मदद न मिलती, तो गरीबी के आगे मेरे घुटने टिक जाते और मेरी पढ़ाई हमेशा के लिए बंद हो जाती। आज मैं कॉलेज जा रही हूँ, तो सिर्फ इसलिए क्योंकि मेरे सिर पर 'लाड़ली लक्ष्मी योजना' का हाथ है।" यह भावुक कर देने वाले शब्द मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले की प्रतिभा बुरेडिया के हैं। यह महज एक बच्ची की जुबानी नहीं है, बल्कि मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी 'लाड़ली लक्ष्मी योजना' की सफलता की वह जीवंत कहानी है, जो आज प्रदेश की लाखों बेटियों की जिंदगी में रोशनी बिखेर रही है। आर्थिक तंगहाली और मजबूरियों के अंधेरे को चीरकर अपनी किस्मत खुद लिखने वाली दो बेटियों-प्रतिभा बुरेडिया और ओशीन खान की दास्तान आज राष्ट्रीय पटल पर उन सभी परिवारों के लिए एक मिसाल है, जो तंगहाली के कारण बेटियों की पढ़ाई बीच में ही छुड़वा देते हैं। मजदूर की बेटियों को मिला हौसलों का आसमान अशोकनगर के वार्ड क्रमांक 21 की रहने वाली प्रतिभा के पिता राजेंद्र रजक मजदूरी करते हैं। गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले इस परिवार के लिए दो वक्त की रोटी के साथ बच्चों को पढ़ाना एक बड़े पहाड़ जैसा था। प्रतिभा बताती हैं कि जब वह कक्षा 12वीं में थीं, तो घर की माली हालत देखकर उन्हें लगा कि अब पढ़ाई का सफर यहीं थम जाएगा। ठीक ऐसी ही कहानी वार्ड क्रमांक 18 की ओशीन खान की भी है। मध्यमवर्गीय मजदूर परिवार से आने वाली ओशीन के पिता अमजद खान पर पूरे परिवार और बच्चों की शिक्षा का भारी बोझ था। लेकिन, दोनों ही बेटियों के सपनों के आड़े गरीबी नहीं आ सकी, क्योंकि बचपन में ही आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से उनका पंजीयन लाड़ली लक्ष्मी योजना में हो चुका था। कदम-कदम पर मिली आर्थिक सुरक्षा की गारंटी योजना के तहत इन बेटियों को स्कूल से लेकर कॉलेज तक हर मोड़ पर वित्तीय सहारा मिला। प्रतिभा को कक्षा 6वीं में ₹2,000 की राशि, कक्षा 9वीं में ₹4,000, कक्षा 11वीं में ₹6,000 और कक्षा 12वीं (वर्ष 2025) में ₹6,000 की छात्रवृत्ति मिली। इस वित्तीय सहायता के दम पर दोनों बेटियों ने साल 2025 में न सिर्फ 12वीं की परीक्षा शानदार अंकों से उत्तीर्ण की, बल्कि कॉलेज की दहलीज पर भी कदम रख दिया। वर्तमान में प्रतिभा को कॉलेज के प्रथम वर्ष के लिए ₹12,500 की किश्त मिल चुकी है, वहीं ओशीन को स्नातक स्तर पर दो किश्तों में कुल ₹25,000 की सहायता मिल रही है। ₹1.43 लाख की वित्तीय सुरक्षा: बाल विवाह पर लगाम, शिक्षा को उड़ान मध्यप्रदेश सरकार की यह योजना केवल एक आर्थिक मदद नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का एक बड़ा आंदोलन बन चुकी है। योजना के अंतर्गत पात्र बालिकाओं को जन्म से लेकर 21 वर्ष की आयु पूरा होने तक कुल 1,43,000 रूपये की वित्तीय सहायता राशि चरणबद्ध तरीके से प्रदान की जाती है। बेटियों के जन्म के प्रति रूढ़िवादी समाज की सोच को बदलकर उसे प्रोत्साहित करना। बालिकाओं की शिक्षा को बिना किसी बाधा के उच्च स्तर तक ले जाना। बाल विवाह जैसी कुप्रथा पर पूरी तरह रोक लगाना (क्योंकि योजना का लाभ तभी मिलता है जब बेटी की शादी 18 वर्ष से कम उम्र में न हुई हो)। मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार आज जब ये बेटियाँ हाथ में कॉलेज की किताबें लेकर आगे बढ़ रही हैं, तो उनके चेहरों पर एक नया आत्मविश्वास है। प्रतिभा और ओशीन कहती हैं, "यह योजना हमारे लिए किसी वरदान से कम नहीं है। बेटियों को बोझ समझने वाली सोच को इस योजना ने जड़ से खत्म कर दिया है। हम माननीय मुख्यमंत्री जी का तहे दिल से आभार व्यक्त करती हैं, जिन्होंने हमारे सपनों को मरने नहीं दिया।" मध्यप्रदेश से निकलकर आ रही ये सफलता की कहानियाँ इस बात का पुख्ता प्रमाण हैं कि अगर सरकारें संवेदनशील हों और नीतियां जमीन पर सही ढंग से लागू हों, तो देश की कोई भी 'लाड़ली' अपनी उड़ान भरने से वंचित नहीं रह सकती।  

16 जून से 15 अगस्त तक मत्स्याखेट पर रोक, छोटे असंबद्ध तालाबों को मिलेगी छूट

16 जून से 15 अगस्त तक मत्स्याखेट पर प्रतिबंध, नदियों से असंबद्ध छोटे तालाबों को छूट नदियों और उससे जुड़े जलाशयों में मछली पकड़ने पर रोक, उल्लंघन पर होगी कार्रवाई भोपाल  मध्यप्रदेश में मछलियों के प्राकृतिक प्रजनन को बढ़ावा देने और जलीय पारिस्थितिकी के संरक्षण के लिए 16 जून से 15 अगस्त 2026 तक की अवधि को 'बंद ऋतु' (क्लोज सीजन) घोषित किया गया है। इन दो महीने की अवधि में प्रदेश की समस्त नदियों और उनसे जुड़े जलाशयों में मत्स्याखेट पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। गुरुवार को संचालनालय मत्स्योद्योग ने इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस अवधि में यदि कोई भी व्यक्ति नियमों का उल्लंघन कर अवैध रूप से मत्स्याखेट या परिवहन करते हुए पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। प्रतिबंध से ऐसे छोटे तालाब या अन्य जल स्रोत जिनका किसी भी नदी से कोई संबंध नहीं है और जिन्हें 'निर्दिष्ट जल' की परिभाषा के अंतर्गत नहीं लाया गया है, उन पर यह नियम लागू नहीं होंगे। इन निजी या स्थानीय छोटे तालाबों में सामान्य दिनों की तरह मत्स्य पालन और आखेट किया जा सकेगा। मछुआ समुदाय को समय रहते जानकारी मिलने से मछुआरे अनजाने में होने वाली किसी भी परेशानी से बच सकेंगे और नियमों का पालन कर प्राकृतिक रूप से मत्स्य बीज उत्पादन में सहयोग कर सकेंगे।  

खाने-पीने की चीजों में गड़बड़ी! दूध और पनीर के 8 सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे

अमृतसर. अमृतसर में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा चलाए गए विशेष अभियान के दौरान विभिन्न डेयरियों से लिए गए दूध और दुग्ध उत्पादों के नमूनों की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार कुल 12 नमूनों में से 8 नमूने निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। इतना ही नहीं, इनमें दो नमूने मानव उपभोग के लिए असुरक्षित पाए गए, जबकि छह नमूने गुणवत्ता के निर्धारित मानकों से कम पाए गए हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित डेयरियों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है। विभाग का कहना है कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। 21 मई को लिए गए थे सेंपल सहायक आयुक्त खाद्य डॉ. जी.एस. पन्नू ने बताया कि पंजाब खाद्य एवं औषधि प्रशासन के निर्देशों पर 21 मई को शहर की विभिन्न डेयरियों से दूध, पनीर, दही और अन्य दुग्ध उत्पादों के कुल 12 नमूने एकत्र किए गए थे। इन नमूनों को जांच के लिए खरड़ स्थित प्रयोगशाला भेजा गया था। जांच रिपोर्ट आने के बाद पता चला कि केवल चार नमूने ही निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाए गए। जानें किनके सेंपल हुए पास व फेल रिपोर्ट के अनुसार रामतीर्थ मार्ग स्थित गिल डेयरी से लिए गए पनीर के दो नमूनों में से एक नमूना मानव उपभोग के लिए असुरक्षित पाया गया, जबकि दूसरा निम्न गुणवत्ता का निकला। पुतलीघर स्थित गुरु नानक डेयरी से लिया गया दूध का नमूना भी गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरा। इसी तरह गुरु डेयरी से लिए गए दूध और पनीर के नमूने भी निर्धारित स्तर से नीचे पाए गए। जांच में शर्मा डेयरी का दही तथा छाबड़ा डेयरी का पनीर भी निम्न गुणवत्ता का पाया गया। इसके अलावा इंडिया गेट क्षेत्र स्थित ढिल्लों डेयरी से लिया गया पनीर का नमूना मानव उपभोग के लिए असुरक्षित घोषित किया गया है। यह तथ्य सबसे अधिक चिंताजनक माना जा रहा है क्योंकि ऐसे उत्पादों के सेवन से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। कानूनी कार्रवाई करेगा सेहत विभाग खाद्य सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन डेयरियों के नमूने फेल पाए गए हैं, उनके खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि खाद्य पदार्थों में मिलावट या गुणवत्ता से समझौते को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। डॉ. पन्नू ने उपभोक्ताओं से भी सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि दूध, पनीर, दही और अन्य खाद्य पदार्थ खरीदते समय गुणवत्ता, स्वच्छता और विश्वसनीयता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। लोगों को केवल भरोसेमंद विक्रेताओं से ही खाद्य सामग्री खरीदनी चाहिए। खाद्य सुरक्षा विभाग का यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि समय-समय पर बाजार से नमूने लेकर जांच की जाएगी ताकि लोगों तक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ पहुंच सकें।

सुशासन तिहार में जनता की बड़ी भागीदारी, 1210 आवेदन प्राप्त, 50 लोगों को मिला लाभ

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशन में आयोजित ‘सुशासन तिहार 2026’ के अंतर्गत सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड के ग्राम बेलदगी में जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में क्लस्टर की 20 ग्राम पंचायतों से बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए और शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त करते हुए अपनी मांगों एवं शिकायतों से संबंधित आवेदन प्रस्तुत किए। ग्रामीणों से सीधे संवाद कर सुनी समस्याएं शिविर में लुण्ड्रा विधायक श्री प्रबोध मिंज ने सहभागिता करते हुए ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। उन्होंने आमजन की मांगों, समस्याओं और शिकायतों को गंभीरता से सुना तथा संबंधित अधिकारियों को प्राप्त आवेदनों का समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित कर आवेदकों को सूचना देने के निर्देश दिए। विधायक श्री मिंज ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर आयोजित सुशासन तिहार का उद्देश्य शासन और जनता के बीच की दूरी को समाप्त करना है। उन्होंने ग्रामीणों से अपनी समस्याएं और आवश्यकताएं खुलकर रखने का आग्रह करते हुए कहा कि प्रशासन उनके समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। जनहित के मुद्दों पर दिया गया विशेष जोर जिला पंचायत सीईओ श्री विनय कुमार अग्रवाल ने बताया कि सुशासन तिहार के अंतर्गत 15 से 25 गांवों के समूहों में समाधान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिविरों में प्राप्त आवेदनों का त्वरित निराकरण किया जाएगा तथा आवश्यक प्रकरण शासन स्तर पर भेजे जाएंगे। उन्होंने राजस्व विभाग को शिकायतों के निराकरण में विशेष संवेदनशीलता बरतने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य विभाग द्वारा एचपीवी टीकाकरण अभियान की जानकारी देते हुए पात्र बालिकाओं का टीकाकरण सुनिश्चित करने की अपील की गई। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाली विशेष ग्राम सभाओं की जानकारी देते हुए उन्होंने जल संरक्षण, तालाब गहरीकरण, कुओं एवं अन्य जल संरचनाओं के संरक्षण तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देने पर जोर दिया। साथ ही नल-जल योजनाओं के बेहतर संचालन एवं रखरखाव के लिए ग्राम पंचायतों को जलकर संग्रहण करने की सलाह दी। 1210 आवेदन प्राप्त, 50 हितग्राही लाभान्वित शिविर में कुल 1210 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें 1151 मांग संबंधी तथा 59 शिकायत संबंधी आवेदन शामिल रहे। शिविर में लगभग 26 विभागों द्वारा स्टॉल लगाकर विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई तथा पात्र हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया। आधार कार्ड एवं आयुष्मान कार्ड निर्माण के लिए विशेष सुविधा उपलब्ध कराई गई। स्वास्थ्य विभाग द्वारा टीबी मुक्त सरगुजा अभियान के तहत स्वास्थ्य परीक्षण एवं टीबी स्क्रीनिंग की गई। वहीं, बिहान बाजार के माध्यम से स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों का प्रदर्शन कर ग्रामीण आजीविका गतिविधियों को प्रोत्साहित किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा गोदभराई एवं अन्नप्राशन कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। शिविर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास की चाबी, किसान क्रेडिट कार्ड, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, आयुष्मान कार्ड, स्वास्थ्य कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड तथा राशन कार्ड सहित विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत 50 हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया। इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य मोनिका पैकरा, जनपद पंचायत अध्यक्ष शशिकला सिंह, उपाध्यक्ष कामेश्वर राजवाड़े, जनपद सदस्यगण, सभी ग्राम पंचायतों के सरपंच, एसडीएम रामराज सिंह, जनपद पंचायत सीईओ, जिला एवं विकासखंड स्तरीय अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

कार पूलिंग कर बैठक में पहुंचे शिवराज, बोले- सार्वजनिक परिवहन अपनाएं; वीडियो हुआ वायरल

भोपाल केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान जब-तब अपने अलग अंदाज और बातचीत को लेकर सुर्खियों में छाए रहते हैं। उनका एक और वीडियो सामने आया जिसमें वे दो अन्य केंद्रीय मंत्रियों के साथ कार पूलिंग करते नजर आए। यह मामला इसलिए चर्चा में आ गया, क्योंकि काफिला कम करने को लेकर तो खबरें खूब सामने आएं, लेकिन सेंट्रल मिनिस्टर्स द्वारा कार पूलिंग का संभवत: यह पहला मामला है। ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा पेट्रोलियम की बचत को लेकर की गई अपील के बाद नेताओं, अधिकारियों और मंत्रियों के काफिला कम करने को लेकर वीडियो सामने आ रहे हैं। बुधवार को केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान दो अन्य केंद्रीय मंत्रियों संग सफर करते दिखे। शिवराज सिंह ने बताया कि पेट्रोल-डीजल बचाने केंद्रीय मंत्री चंद्रकांत रघुनाथ पाटिल और जी. किशन रेड्डी के साथ पूलिंग कर रहे हैं। एक ही कार से तीनों मंत्री कैबिनेट बैठक में शामिल होने पहुंचे। शिवराज सिंह चौहान मीडिया को बताया कि आज मैं, पाटिल जी और किशन जी कार पूलिंग करके जा रहे हैं। हमारे पीएम ने देश का आह्वान किया है। उनकी अपील के बाद पेट्रोल—डीजल की खपत बचाने के लिए पूरा देश उठ खड़ा हुआ है। हम लोग तो उनके मंत्रिमंडल में सहयोगी हैं। इसलिए हमने सोचा कि हम लोग भी कार पूल करके जाएं। शिवराज ने बताया कि आज हम तीनों कार पूलिंग कर जा रहे है।  चौहान ने क्या बताया? इस मौके पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल और डीजल की अनावश्यक खपत कम करने की अपील की है, जिसे देशभर में सकारात्मक समर्थन मिल रहा है। उन्होंने बताया कि तीनों मंत्री कैबिनेट सहयोगी हैं, इसलिए उन्होंने भी कारपूलिंग के माध्यम से इस अभियान में अपना योगदान देने का फैसला किया। चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की सोच दूरदर्शी है और मौजूदा समय में तेल, डीजल व पेट्रोल के अनावश्यक उपयोग को कम करना बेहद जरूरी है। उन्होंने नागरिकों से भी ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण के लिए ऐसे प्रयासों में सक्रिय भागीदारी करने की अपील की।  सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना चाहिए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, सभी को पेट्रोल-डीजल बचाने की दिशा में काम करना चाहिए। जितना संभव हो सके, सभी को सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना चाहिए। इससे लोगों में सकारात्मक संदेश भी जाएगा।केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज सी.आर. पाटिल, जी. किशन रेड्डी और मैं कार पूलिंग करके जा रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश का आह्वान किया है और उनके आह्वान पर अनावश्यक पेट्रोल और डीजल की खपत बचाने के लिए पूरा देश उठ खड़ा हुआ है और उस पर अमल कर रहा है. हम तो मंत्रिमंडल के सहयोगी हैं. हमने भी सोचा कि कार पूलिंग करके हम लोग यात्रा करें. आज की परिस्थितियों में ये आवश्यक है कि हम अनावश्यक पेट्रोल और डीजल की खपत को कम करें. जितना संभव है सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना चाहिए।