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डॉ. व्यास ने पुरातत्व क्षेत्र में किए गए कार्य की जानकारी दी

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. यादव मोहन से वर्ष 2012 में पद्म से सम्मानित शास्त्रीय गायक  उमाकांत गुंदेचा और वर्ष 2026 के लिए पुरातत्व विज्ञान क्षेत्र में पद्म से सम्मानित डॉ. नारायण व्यास ने सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को भेंट के दौरान डॉ. व्यास ने बताया कि उन्होंने पद्म डॉ. विष्णु धर वाकणकर के साथ भोपाल के निकट रायसेन जिले के प्रख्यात शैल चित्रकला स्थल भीमबैठका से संबंधित अनुसंधान के अलावा गुजरात में अहमदाबाद के पास रानी की वाव की ऐतिहासिक बावड़ी से संबंधित अनुसंधान में भी योगदान दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को पुरातत्व क्षेत्र में किए गए अपने कार्यों से संबंधित प्रकाशन भी भेंट किए। इस वर्ष प्राप्त पद्म सम्मान और प्रशस्त्रि-पत्र से भी अवगत करवाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  गुंदेचा से शास्त्रीय गायन की प्रस्तुतियों पर भी चर्चा की।  

68.54 लाख महिलाओं के खातों में अंतरित हुए 642.27 करोड़ रुपये

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज बिलासपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में महतारी वंदन योजना की 28वीं किस्त जारी करते हुए प्रदेश की 68 लाख 54 हजार महिलाओं के बैंक खातों में 642 करोड़ 27 लाख 77 हजार 950 रुपये की राशि अंतरित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं का सम्मान, सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है तथा महतारी वंदन योजना इस दिशा में एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी पहल के रूप में सामने आई है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि किसी भी समाज और राज्य की प्रगति तब तक पूर्ण नहीं हो सकती, जब तक महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और सामाजिक रूप से सम्मानित न किया जाए। महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को भी मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा कि यह योजना प्रदेश की माताओं और बहनों के जीवन में सकारात्मक बदलाव का आधार बन रही है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में 1 मार्च 2024 से प्रारंभ हुई महतारी वंदन योजना के अंतर्गत पात्र विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। योजना से प्राप्त राशि का उपयोग महिलाएं परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, पोषण तथा छोटे-छोटे स्वरोजगार कार्यों में कर रही हैं। इससे परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ महिलाओं की सामाजिक भागीदारी भी बढ़ी है। जून 2026 में जारी 28वीं किस्त के साथ ही योजना के अंतर्गत अब तक प्रदेश की महिलाओं को कुल 18 हजार 165 करोड़ 19 लाख रुपये से अधिक की सहायता राशि प्रदान की जा चुकी है। यह राशि महिलाओं के जीवन में आर्थिक स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इसी सोच के अनुरूप सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, कांकेर और नारायणपुर में संचालित नियद नेल्लानार अभियान के माध्यम से 7 हजार 770 नई महिलाओं को महतारी वंदन योजना से जोड़ा गया है। इससे दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों की महिलाओं को भी आर्थिक सहायता और सामाजिक सुरक्षा का लाभ प्राप्त हो रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना आज केवल आर्थिक सहायता प्रदान करने वाली योजना नहीं रह गई है, बल्कि यह महिलाओं के सम्मान, विश्वास और आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रतीक बन चुकी है। योजना से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे परिवार तथा समाज में अधिक सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महिलाओं की सहभागिता सबसे महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि प्रदेश की हर महिला सशक्त, स्वावलंबी और सम्मानपूर्ण जीवन जी सके। महतारी वंदन योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की नई धारा प्रवाहित हुई है और लाखों परिवारों के जीवन में खुशहाली तथा आर्थिक स्थिरता का नया अध्याय जुड़ा है।

पर्यावरण दिवस से योग दिवस तक डबल इंजन सरकार की उपलब्धियां लेकर जनता के बीच जाएंगे मंत्रिगण

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार देर शाम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश की कानून-व्यवस्था, आगामी आरक्षी नागरिक पुलिस भर्ती परीक्षा तथा केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले जनभागीदारी आधारित कार्यक्रमों की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनसेवा, सुशासन, पर्यावरण संरक्षण, युवाओं के हित और जनकल्याण से जुड़े प्रत्येक कार्यक्रम का क्रियान्वयन संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जनसहभागिता के साथ सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर विश्व पर्यावरण दिवस से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस तक आयोजित होने वाले कार्यक्रम केवल औपचारिक आयोजन न होकर जनभागीदारी और जनजागरण का व्यापक अभियान बनें। उन्होंने कहा कि 05 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के अंतर्गत न्यूनतम 05 करोड़ पौधों का रोपण किया जाए। यह अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मातृत्व के सम्मान और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का भी प्रतीक बने। उन्होंने निर्देश दिए कि पौधों की पर्याप्त उपलब्धता, जियो टैगिंग तथा उनके संरक्षण की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।  मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत एवं नगरीय निकाय को सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त बनाने का लक्ष्य लेकर कार्य किया जाए तथा इसमें समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि 05 से 21 जून तक की अवधि विकसित भारत एवं विकसित उत्तर प्रदेश के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर है। प्रभारी मंत्रियों एवं जनप्रतिनिधियों के मार्गदर्शन में समाज के प्रबुद्ध वर्ग, शिक्षाविदों, चिकित्सकों, अभियंताओं, उद्योगपतियों, अधिवक्ताओं, युवा उद्यमियों तथा स्टार्टअप इनोवेटरों के साथ संवाद स्थापित किया जाए। विगत वर्षों में देश और प्रदेश में हुए सकारात्मक परिवर्तनों, सुशासन, आधारभूत संरचना, निवेश, रोजगार और जनकल्याण के क्षेत्रों में प्राप्त उपलब्धियों पर चर्चा की जाए तथा समाज के विभिन्न वर्गों के सुझावों और अपेक्षाओं को भी गंभीरता से सुना जाए। उन्होंने कहा कि यह संवाद विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण में जनसहभागिता को और मजबूत करेगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस अवधि में स्वच्छता को विशेष जनअभियान के रूप में संचालित किया जाए तथा अधिकारीगण स्वयं इसमें सहभागी बनकर समाज को प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि 14 से 16 जून तक विकास खंड स्तर पर आयोजित होने वाले जनकल्याण शिविरों एवं स्वास्थ्य मेलों के माध्यम से पात्र लेकिन वंचित लाभार्थियों को सरकार की योजनाओं से जोड़ा जाए। साथ ही प्रत्येक जनपद की विशिष्ट पहचान, उपलब्धियों और आधारभूत संरचना विकास को प्रदर्शित करने वाली प्रदर्शनियां भी आयोजित की जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत संकल्प सम्मेलन के माध्यम से प्रबुद्ध नागरिकों और विषय विशेषज्ञों को जोड़ते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों पर सार्थक विमर्श किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि चौपालों का आयोजन कर जनसमस्याओं के समाधान, योजनाओं की समीक्षा तथा शिकायतों के निस्तारण की प्रभावी व्यवस्था की जाए। नामित मंत्रीगण, जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि प्रवास भी करें, ताकि स्थानीय आवश्यकताओं और चुनौतियों को निकटता से समझकर त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सके। बैठक में पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के महानिदेशक ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों की भर्ती परीक्षा 08, 09 एवं 10 जून को प्रतिदिन दो पालियों में आयोजित की जाएगी। परीक्षा में लगभग 29 लाख अभ्यर्थियों के सम्मिलित होने की संभावना है। उन्होंने प्रश्नपत्रों के सुरक्षित परिवहन, परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी तंत्र तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि भर्ती परीक्षा की शुचिता, निष्पक्षता और गोपनीयता के साथ किसी भी स्तर पर समझौता न होने पाए। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की सहभागिता को देखते हुए स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप यातायात प्रबंधन की प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि आमजन को अनावश्यक असुविधा न हो। उन्होंने परीक्षा प्रारंभ होने से पूर्व सभी परीक्षा केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सेक्टर मजिस्ट्रेट, स्टेटिक मजिस्ट्रेट एवं केंद्र व्यवस्थापकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए सभी अधिकारी पूरी सतर्कता और जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें। उन्होंने 06 जून को परीक्षा आयोजन का पूर्वाभ्यास कराने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षा के दौरान कुछ असामाजिक तत्व सोशल मीडिया के माध्यम से अफवाहें फैलाने अथवा भ्रामक एवं असत्य सूचनाएं प्रसारित करने का प्रयास कर सकते हैं। ऐसी गतिविधियों की सतत और गहन निगरानी की जाए तथा दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।  मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परीक्षा प्रदेश के लाखों युवाओं की आकांक्षाओं और भविष्य से जुड़ी हुई है। इसलिए यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी अभ्यर्थी को अनावश्यक कठिनाई या परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि एक भी अभ्यर्थी को धूप में खड़ा न रहना पड़े तथा परीक्षा केंद्रों पर सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए परिवहन विभाग द्वारा रियायती किराये पर अंतर्जनपदीय विशेष बसों का संचालन किया जाए। साथ ही सभी परीक्षा केंद्रों पर निर्बाध विद्युत आपूर्ति तथा वैकल्पिक बिजली व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी जिलाधिकारी एवं पुलिस अधिकारी संवेदनशीलता के साथ व्यवस्थाओं की निगरानी करें और अभ्यर्थियों को सुगम, सुरक्षित एवं सकारात्मक परीक्षा वातावरण उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि परीक्षा देने वाले प्रत्येक युवा के मन में व्यवस्था के प्रति संतोष और विश्वास का भाव उत्पन्न हो, यह सभी संबंधित अधिकारियों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

अतिक्रमणकारियों पर चला बुलडोजर, शासकीय भूमि को कराया गया खाली

रायपुर  जल संसाधनों के संरक्षण तथा सार्वजनिक परिसंपत्तियों के सुरक्षित उपयोग को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दुर्ग जिले में हनोदा माइनर नहर क्षेत्र में विशेष अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। कलेक्टर  अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में जल संसाधन विभाग एवं नगर पालिक निगम रिसाली की संयुक्त टीम ने नहर क्षेत्र एवं विभागीय स्वामित्वाधीन शासकीय भूमि पर वर्षों से किए गए अवैध अतिक्रमणों को हटाकर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया।         हनोदा माइनर नहर डी.पी.एस. स्कूल से वी.आई.पी. नगर तक नगर पालिक निगम रिसाली क्षेत्र से होकर गुजरती है। यह नहर क्षेत्र जल प्रबंधन और सिंचाई व्यवस्था की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि नहरों एवं उनसे संबद्ध शासकीय भूमि का संरक्षण जनहित से जुड़ा विषय है। इन क्षेत्रों में किए गए अतिक्रमण न केवल शासकीय भूमि पर अनधिकृत कब्जे की श्रेणी में आते हैं, बल्कि नहरों के अनुरक्षण, निरीक्षण एवं मरम्मत कार्यों में भी बाधा उत्पन्न करते हैं।         प्रशासन द्वारा कार्रवाई से पूर्व संबंधित अतिक्रमणकर्ताओं को स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाने का पर्याप्त अवसर दिया गया था। निर्धारित समयावधि समाप्त होने के बाद विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन करते हुए संयुक्त दल ने मौके पर पहुंचकर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की।            अभियान के दौरान नगर पालिक निगम रिसाली एवं जल संसाधन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। कार्रवाई को सुव्यवस्थित एवं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया गया, जिससे नहर क्षेत्र को उसके मूल स्वरूप में पुनर्स्थापित किया जा सका।         कार्यपालन अभियंता  आशुतोष सारश्वत ने बताया कि जल संसाधन विभाग के अधीन नहरों, जल संरचनाओं, अनुरक्षण मार्गों तथा शासकीय भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध अतिक्रमण स्वीकार्य नहीं है। ऐसे मामलों में नियमानुसार कठोर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। विभाग द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र की सभी नहरों एवं शासकीय परिसंपत्तियों की सतत निगरानी की जा रही है और जहां भी अतिक्रमण पाया जाएगा, वहां बिना किसी भेदभाव के वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।      उन्होंने कहा कि शासकीय भूमि एवं जल संरचनाएं सार्वजनिक संपत्ति हैं, जिनका संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है। इन परिसंपत्तियों का सुरक्षित एवं उद्देश्यपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।             जल संसाधन विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे नहरों, शासकीय भूमि तथा अन्य सार्वजनिक उपयोगिता की संरचनाओं पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण न करें और इनके संरक्षण में प्रशासन का सहयोग करें। सार्वजनिक परिसंपत्तियों की सुरक्षा और संरक्षण से ही जनहित एवं विकास कार्यों की निरंतरता सुनिश्चित की जा सकती है।

प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना की

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज सुशासन तिहार के अंतर्गत सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम भिखमपुरा पहुंचकर स्वामी शिवानंद विद्यापीठ एवं गौसेवा आश्रम परिसर स्थित  पंचमुखी दक्षिणाभिमुख सिद्ध हनुमान मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली, उत्तम स्वास्थ्य और राज्य की निरंतर प्रगति की कामना करते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्धि, जनकल्याण और सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की मंगलकामना की। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय इन दिनों सुशासन तिहार के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों के ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों का सतत दौरा कर रहे हैं। इस अभियान के माध्यम से वे सीधे आमजन से संवाद स्थापित कर शासन की योजनाओं और सेवाओं के जमीनी क्रियान्वयन की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं तथा समस्याओं के त्वरित निराकरण की दिशा में आवश्यक निर्देश भी दे रहे हैं। भिखमपुरा प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने गौसेवा आश्रम परिसर में आयोजित चौपाल में ग्रामीणों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं, सुझाव और अपेक्षाएं सुनीं तथा विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से उन्हें मिल रहे लाभों की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन तिहार शासन और जनता के बीच विश्वास को और मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, जिसके जरिए प्रशासन सीधे लोगों तक पहुंचकर उनकी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित कर रहा है। इस अवसर पर वित्त मंत्री  ओ पी चौधरी  सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, स्थानीय नागरिक, आश्रम से जुड़े सदस्य तथा जिला प्रशासन के अधिकारी उपस्थित थे।

पंजाब की राजनीति में नई हलचल, कांग्रेस के संपर्क में कैप्टन अमरिंदर; BJP से नाराजगी की चर्चा

चंडीगढ़  पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्‌डा ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह हमारे संपर्क में हैं। वह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे हैं और हमारे वरिष्ठ साथी हैं। गौरतलब है कि कैप्टन और हुड्‌डा अच्छे दोस्त हैं। ऐसे में यह भी हो सकता है कि हुड्‌डा ही कैप्टन अमरिंदर सिंह की कांग्रेस में वापसी के वाहक बनें। वहीं, हुड्डा के इस दावे पर पंजाब भाजपा ने भी रिएक्शन दिया है। पंजाब भाजपा के प्रवक्ता प्रितपाल सिंह बलियावाल ने कहा कि संपर्क में होना कोई बड़ी बात नहीं है। रणदीप सुरजेवाला और कुमारी सैलजा तो कहती हैं कि हुड्‌डा किसी के संपर्क में नहीं रहते। हुड्‌डा ने सिर्फ संपर्क में होने की बात कही, इसके कोई और मायने नहीं निकाले जाने चाहिए। कैप्टन और हुड्‌डा अच्छे दोस्त माने जाते हैं। इस वजह से कयास लगने लगे हैं कि कहीं हुड्‌डा कैप्टन की कांग्रेस में वापसी की कोशिश तो नहीं कर रहे। कैप्टन के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा इसलिए तेज हुई कि वह लगातार कांग्रेस की तारीफ कर रहे हैं। वहीं इस मामले में पंजाब भाजपा के प्रवक्ता प्रितपाल सिंह बलियेवाल ने कहा कि संपर्क में होना कोई बड़ी बात नहीं है। रणदीप सुरजेवाला और कुमारी सैलजा तो कहती हैं कि हुड्‌डा किसी के संपर्क में नहीं रहते। हुड्‌डा ने सिर्फ संपर्क में होने की बात कही, इसके कोई और मायने नहीं निकाले जाने चाहिए। भाजपा में पूछ नहीं होने से नाराज हैं कैप्टन कैप्टन के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा को इसलिए भी बल मिला है क्योंकि वह लगातार कांग्रेस की तारीफ कर रहे हैं। कैप्टन का कहना है कि कांग्रेस में पंजाब को लेकर उनसे पूछा जाता था, लेकिन भाजपा सीधे ऊपर से फैसले लेती है। मैं कांग्रेस में तीन बार अध्यक्ष रहा और वहां हमेशा मुझसे सलाह ली जाती थी। लेकिन भाजपा में पूरी तरह अलग संस्कृति है। कैप्टन ने केवल ढिल्लों को पंजाब भाजपा का नया प्रधान बनाने का विरोध किया था। इस मामले में भाजपा ने उन से कोई राय नहीं ली गई थी। कैप्टन की BJP से नाराजगी की वजहें:-     प्रधान बनाने से पहले राय नहीं ली: कैप्टन ने केवल ढिल्लों को पंजाब BJP का नया प्रधान बनाने का विरोध किया था। कैप्टन ने कहा था कि जब वे मुख्यमंत्री थे, तब ढिल्लों सक्रिय जरूर थे, लेकिन जमीन (फील्ड) पर उनका प्रदर्शन वैसा नहीं रहा, जैसा होना चाहिए था। इस मामले में भाजपा ने मुझसे कोई राय नहीं ली।     कांग्रेस सलाह लेती, BJP में फैसला ऊपर से: कांग्रेस और भाजपा की कार्य नीति की तुलना करते हुए कैप्टन ने कहा कि मैं कांग्रेस में तीन बार अध्यक्ष रहा और वहां हमेशा मुझसे सलाह ली जाती थी। लेकिन भाजपा में पूरी तरह अलग संस्कृति है। यहां बस फैसला ऊपर से आता है, किसी से पूछा नहीं जाता।     गठबंधन की बात नहीं मान रही भाजपा: कैप्टन अमरिंदर पंजाब में चुनाव को लेकर अकाली दल से गठबंधन के पक्ष में हैं। वह खुलकर इसकी पैरवी करते हैं। इसके उलट भाजपा के नेता बार-बार कह रहे हैं कि हम सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेंगे।     भाजपा में बड़े नेताओं से मुलाकात में दिक्कत: कैप्टन ने कुछ समय पहले कहा था कि मैं आज भी कांग्रेस को मिस करता हूं। कांग्रेस एक फैमिली की तरह है। मैं जब भी फोन करता था, तो वह मुझसे मिल लेते थे। मगर, BJP में ये सिस्टम नहीं है।     भाजपा ने संवेदना तक व्यक्त नहीं की: कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा था- मेरे जन्मदिन पर राहुल गांधी ने बधाई संदेश भेजा था। हाल ही में मेरे भाई रणधीर के निधन पर भी उनका शोक संदेश आया, लेकिन भाजपा से किसी ने भी संवेदना व्यक्त नहीं की। कैप्टन ने कहा था, कांग्रेस को मिस करता हूं कैप्टन ने कुछ समय पहले कहा था कि मैं आज भी कांग्रेस को मिस करता हूं। कांग्रेस एक परिवार की तरह है। मैं जब भी फोन करता था, तो वह मुझसे मिल लेते थे। मगर, भाजपा में ये सिस्टम नहीं है। मेरे जन्मदिन पर राहुल गांधी ने बधाई संदेश भेजा था। हाल ही में मेरे भाई रणधीर के निधन पर भी उनका शोक संदेश आया, लेकिन भाजपा से किसी ने भी संवेदना व्यक्त नहीं की। कैप्टन आए तो कांग्रेस को क्या फायदा? पंजाब कांग्रेस में अभी नेतृत्व को लेकर कलह चल रही है। मौजूदा प्रधान राजा वड़िंग, पूर्व सीएम चरणजीत चन्नी, नेता विपक्ष प्रताप बाजवा समेत कई नेताओं के गुट बने हुए हैं। कांग्रेस हाईकमान चुनाव से पहले पंजाब में नेतृत्व परिवर्तन की भी सोच रहा है। ऐसे में अगर कैप्टन की वापसी होगी, तो कांग्रेस को फायदा हो सकता है। कैप्टन के अधीन ये सारे नेता पहले भी काम कर चुके हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब की राजनीति का दिग्गज चेहरा हैं। 2002 हो या फिर 2017, वे अपने चेहरे के बूते ही कांग्रेस को सत्ता में लाए। यह बात कांग्रेस के भीतर उनके विरोधी भी मानते हैं। पंजाब के गांवों में कैप्टन के आक्रामक रुख को पसंद किया जाता है। वहीं, सामुदायिक सौहार्द के लिए वे शहरी तबके की पहली पसंद हैं। इसके अलावा कांग्रेस में रहते कैप्टन की सियासी पकड़ भी मजबूत थी। 2014 में जब पूरे देश में मोदी लहर चल रही थी, तब भाजपा ने अमृतसर से अपने बड़े नेता अरुण जेटली को लोकसभा चुनाव लड़ने भेजा। कैप्टन वहां उनसे भिड़ने चले गए। कैप्टन को प्रचार के लिए एक महीने का ही वक्त मिला था, लेकिन जेटली हारकर दिल्ली लौटे। ऐसे वक्त में जब भाजपा के कई नेता मोदी के नाम पर जीत गए, कैप्टन ने दिखाया कि पंजाब की राजनीति में उनसे बड़ा सूरमा कोई नहीं है। इसके अलावा पंजाब में बादल परिवार की सत्ता उखाड़ने का काम कैप्टन अमरिंदर ने ही किया है। सांसद पहले ही कह चुके- कैप्टन का वेलकम गुरदासपुर से कांग्रेस सांसद सुखजिंदर रंधावा कैप्टन की कांग्रेस में वापसी के हक में हैं। वह चर्चाओं के बारे में पूछे जाने पर कह चुके हैं कि अगर कैप्टन अमरिंदर सिंह कांग्रेस में आएं तो उनका वेलकम है। कैप्टन ने खुद कांग्रेस में … Read more

13 दिनों में बदल गई बंगाल की राजनीति, एक मुलाकात के बाद TMC में बढ़ा सत्ता संघर्ष

कोलकाता दिल्ली में 'संयोगवश' हुई एक मुलाकात, हस्ताक्षर जालसाजी के आरोप, तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी की भूमिका को लेकर बढ़ता असंतोष और उत्तराधिकार की लड़ाई जैसी महज 13 दिन के भीतर तेजी से घटी इन सिलसिलेवार घटनाओं ने 28 वर्ष पुरानी पार्टी को उसके पहले विभाजन की दहलीज पर ला खड़ा किया। बंग भवन में 22 मई को तृणमूल के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के बीच कथित तौर पर हुई 'संयोगवश' मुलाकात से शुरू हुआ घटनाक्रम बुधवार को उस समय निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया, जब 58 विधायकों ने पार्टी के विधायक दल पर नियंत्रण स्थापित कर लिया। विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुन लिया और विधानसभा अध्यक्ष से भी इसकी मान्यता हासिल कर ली। इस बगावत ने औपचारिक रूप से उस पार्टी में विभाजन की रेखा खींच दी, जिसकी स्थापना ममता बनर्जी ने एक जनवरी, 1998 को कांग्रेस से अलग होकर की थी। हालांकि, विद्रोह के बीज काफी पहले ही पड़ चुके थे। हार के बाद उभरने लगी थी कलह विधानसभा चुनाव में चार मई को भाजपा के हाथों मिली हार के बाद पार्टी के भीतर कलह उभरने लगी थी। पार्टी के कुछ विधायकों को लगने लगा था कि संगठन और निर्णय प्रक्रिया में पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के भतीजे एवं सांसद अभिषेक बनर्जी का दखल लगातार बढ़ रहा है, जिससे असंतोष धीरे-धीरे गहराता चला गया। नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक में छह मई को ममता बनर्जी ने कथित तौर पर विधायकों से चुनाव अभियान में अभिषेक बनर्जी की भूमिका के लिए खड़े होकर उनका अभिनंदन करने को कहा। हालांकि इसका उद्देश्य उनके योगदान को स्वीकारना था, लेकिन पार्टी के एक वर्ग में इस कदम को लेकर फुसफुसाहट शुरू हो गई। कुछ विधायकों को लगने लगा कि पार्टी का केंद्र धीरे-धीरे एक ही परिवार के इर्द-गिर्द सिमटता जा रहा है। जहांगीर को अभिषेक ने क्यों नहीं किया निष्कासित? पार्टी में असंतोष पहली बार खुले तौर पर 19 मई को सामने आया। एक अन्य बैठक में ऋतब्रत बनर्जी और इंटाल्ली के विधायक संदीपन साहा ने सवाल उठाया कि फालटा विधायक जहांगीर खान द्वारा पुन: चुनाव से हटने की सार्वजनिक घोषणा किए जाने के बावजूद पार्टी ने उन्हें निष्कासित क्यों नहीं किया। चूंकि जहांगीर को अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता था, इसलिए इस आलोचना को व्यापक तौर पर तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव को सीधी चुनौती के रूप में देखा गया। 22 मई को ऋतब्रत ने की शुभेंदु से मुलाकात वरिष्ठ विधायक कुणाल घोष ने भी इसी तरह की चिंताएं जताईं, हालांकि बाद में उन्होंने खुद को बागी खेमे से अलग कर लिया। घटनाक्रम ने तीन दिन बाद निर्णायक मोड़ लिया। ऋतब्रत बनर्जी राज्यसभा सदस्य के रूप में अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद की औपचारिकताएं पूरी करने के लिए 22 मई को दिल्ली गए हुए थे तभी वह दोपहर के भोजन के लिए बंग भवन पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से हो गई। इसके बाद ऋतब्रत ने सार्वजनिक रूप से विपक्षी विधायकों और सांसदों को प्रशासनिक समीक्षा बैठकों में आमंत्रित करने के शुभेंदु अधिकारी के फैसले का स्वागत किया और इसे स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा बताया। उनके इस बयान ने तत्काल राजनीतिक हलकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। पहले से सुलग रहे असंतोष को और हवा दे दी हालांकि, कुछ ही दिन में तृणमूल एक अलग विवाद में घिर गई। 25 मई को आरोप सामने आए कि विधानसभा में विधायक दल के नेतृत्व ढांचे से जुड़े दस्तावेजों पर कई विधायकों के जाली हस्ताक्षर कर विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे गए थे। इस आरोप ने पहले से सुलग रहे असंतोष को और हवा दे दी तथा पार्टी के भीतर जारी खींचतान को खुले टकराव में बदल दिया। इस विवाद ने 27 मई को कानूनी मोड़ ले लिया जब ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने विधानसभा अध्यक्ष से औपचारिक शिकायत कर हस्ताक्षरों की जालसाजी का आरोप लगाया। इसके बाद विधानसभा सचिवालय ने मामले को पुलिस के संज्ञान में दिया, जिसके साथ ही अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) की ओर से जांच शुरू हो गई। अभिषेक बनर्जी पर हुआ हमला अगले दो दिन के दौरान जब जांचकर्ताओं ने विधायकों से पूछताछ शुरू की, तो मामला महज एक प्रक्रियागत विवाद तक सीमित नहीं रहा बल्कि तेजी से राजनीतिक संघर्ष में बदल गया। यह राजनीतिक सकंट 30 मई को उस समय और गहरा गया, जब अभिषेक बनर्जी पर सोनारपुर दौरे के दौरान भीड़ ने हमला कर दिया। यद्यपि सभी राजनीतिक दलों ने इस घटना की निंदा की, लेकिन तृणमूल के कई नेताओं ने निजी तौर पर संगठन और विधायक दल के कुछ वर्गों की अपेक्षाकृत फीकी प्रतिक्रिया पर ध्यान दिलाया। उनके अनुसार, यह नेतृत्व और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के एक हिस्से के बीच बढ़ती दूरी का संकेत था। ममता की बैठक में पहुंचे कम विधायक इसके बाद 31 मई तक नेतृत्व की पकड़ कमजोर पड़ती साफ दिखाई देने लगी। ममता बनर्जी ने अपने कालीघाट स्थित आवास पर नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक बुलाई, लेकिन उसमें अपेक्षा से कम उपस्थिति रही। निर्णायक रूप से विभाजन एक जून को मुख्यमंत्री शुभेंदु द्वारा सार्वजनिक रूप से यह खुलासा किए जाने के कुछ ही घंटे बाद सामने आया कि सीआईडी जांच रिताब्रता बनर्जी और संदीपन साहा की शिकायतों के आधार पर शुरू हुई है। तृणमूल कांग्रेस ने दोनों नेताओं को पार्टी से निष्कासित कर दिया। लेकिन संकट को थामने के बजाय इस कदम ने बगावत को और तेज कर दिया। 'ऑपरेशन क्राउन प्रिंस' देखते ही देखते बागी खेमे के भीतर इस मुहिम को एक नाम भी मिल गया-'ऑपरेशन क्राउन प्रिंस'। यह राजनीतिक नाटक बुधवार को चरम पर पहुंच गया जब 58 विधायकों के एक समूह ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपकर ऋतब्रत बनर्जी को विधायक दल का नेता चुने जाने और नई टीम के गठन की जानकारी दी। विधानसभा अध्यक्ष ने इस दावे को स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही बागी गुट को तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक विधायक दल के रूप में मान्यता मिल गई। कुछ ही मिनट बाद इन्हीं में से कई विधायक राज्य सचिवालय 'नबान्न' में शुभेंदु अधिकारी द्वारा बुलाई गई सरकारी समीक्षा बैठक में भी शामिल हुए। अब तक के इतिहास की सबसे बड़ी दरार दिल्ली में शुरू हुई यह बगावत, जिसने हस्ताक्षर जालसाजी के आरोपों, संगठन के भीतर बढ़ते असंतोष … Read more

इंदौर और भोपाल मेट्रो रेल परियोजनाओं के हुए दो तिहाई कार्य पूरे

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में भोपाल और इंदौर में मेट्रो रेल संचालन के प्रथम चरण के कार्य पूर्ण होने के बाद परियोजना के आगामी चरणों के कार्य समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं। सघन आबादी के क्षेत्रों और कामकाजी नागरिकों की सुगम आवाजाही के लिए मेट्रो रेल व्यवस्था एक वरदान है। प्रदेश की राजधानी भोपाल और प्रमुख व्यवसायिक केन्द्र इंदौर में मेट्रो रेल यात्रियों की संख्या बढ़ाने के लिए पर्यटन विभाग का आवश्यक सहयोग प्राप्त किया जाए। दोनों नगरों की मेट्रो रेल परियोजना के सभी चरणों के सम्पूर्ण कार्यों को तेजी से पूरा किया जा रहा है। समग्र प्रगति की दृष्टि से दोनों परियोजनाओं के दो तिहाई कार्य पूर्ण हो चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय में भोपाल और इंदौर के मेट्रो रेल प्रोजेक्ट कार्यों की समीक्षा कर आवश्यक निर्देश दिए। नगरीय विकास और आवास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय और नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री मती प्रतिमा बागरी, मुख्य सचिव  अनुराग जैन सहित संबंधित वरिष्ठ अधिकारी बैठक में शामिल हुए। विद्यार्थियों की अध्ययन यात्रा से भी जोड़ें मेट्रो परियोजना को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर और भोपाल मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र भी बन रहे हैं। प्रमुख धार्मिक केंद्रों, पर्यटन स्थलों, पुरातात्विक धरोहर स्थलों और टाइगर रिजर्व एवं अभयारण्य की सैर के लिए विद्यार्थियों सहित अन्य नागरिकों के लिए प्रबंध होने से मेट्रो रेल का उपयोग बढ़ेगा। इन प्रयासों में पर्यटन विभाग सहित मध्यप्रदेश विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद (मेपकास्ट) की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।  भोपाल मेट्रो परियोजना बैठक में बताया गया कि भोपाल मेट्रो रेल परियोजना में फेज़-1 में सुभाष नगर से एम्स तक दिसम्बर 2025 से संचालन हो रहा है। इस ट्रेक पर 7.1 किलोमीटर क्षेत्र में 8 एलिवेटेड स्टेशन बनाए गए हैं। फेज़-2 में सुभाष नगर से करोंद चौराहा तक 9.64 से किलोमीटर सेक्शन में कार्य हो रहा है, जो जून 2028 तक पूर्ण होना प्रस्तावित है। इस सेक्शन में 6 एलिवेटेड और दो भूमिगत स्टेशन होंगे। इसी तरह फेज़-3 में भदभदा चौराहा से रत्नागिरी चौराहे तक 14.16 लम्बाई के सेक्शन में कार्य हो रहा है। इस सेक्शन में 13 एलिवेटेड स्टेशन होंगे। यह कार्य भी आने वाले 2 वर्ष में पूर्ण होगा। इंदौर मेट्रो परियोजना बैठक में बताया गया कि इंदौर मेट्रो रेल परियोजना में फेज-1 के रीच वन में गांधी नगर से सुपर कॉरिडोर 3 तक 5.26 किलोमीटर के सेक्शन का शुभारंभ मई 20 25 में हो चुका है। फेज-1 के रीच-2 में सुपर कॉरिडोर 3 से मालवीय नगर चौराहे तक 11.43 किलोमीटर के सेक्शन के कार्य लगभग पूर्ण हो चुके हैं। फेज-2 के अंतर्गत रीच-1 में शहीद बगीचा से खजराना चौराहा तक 1.77 किलोमीटर सेक्शन के कार्य और फेज-2 के ही रीच-2 के एयर पोर्ट से गांधी नगर तक 1.5 किलोमीटर सेक्शन के कार्य जून 2028 तक पूर्ण होंगे। फेज-3 में खजराना चौराहा से एयरपोर्ट के 11.59 किलोमीटर लम्बाई के सेक्शन के कार्य होंगे। बैठक में नगरों में भविष्य में क्रियान्वित किए जाने वाले फ्लाई ओवर निर्माण, मेट्रो रेल और सड़क निर्माण के कार्यों के संबंध में भी चर्चा हुई।  

ड्रोन निगरानी, स्मार्ट मॉनिटरिंग और हरित विकास की दिशा में छत्तीसगढ़ की नई पहल

विश्व पर्यावरण दिवस विशेष तकनीकी नवाचार से सशक्त हो रहा पर्यावरण संरक्षण ड्रोन निगरानी, स्मार्ट मॉनिटरिंग और हरित विकास की दिशा में छत्तीसगढ़ की नई पहल विज्ञान, तकनीक और जनभागीदारी के समन्वय से आकार ले रहा है स्वच्छ, सुरक्षित और टिकाऊ भविष्य प्रकृति का संरक्षण: वर्तमान की आवश्यकता, भविष्य की जिम्मेदारी रायपुर, धरती केवल हमारे रहने का स्थान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की अमूल्य धरोहर है। स्वच्छ हवा, निर्मल जल, हरे-भरे वन और समृद्ध जैव विविधता ही मानव सभ्यता के अस्तित्व का आधार हैं। लेकिन आज जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के अनियंत्रित दोहन ने पूरी दुनिया के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। विकास की दौड़ में प्रकृति की अनदेखी अंततः मानव जीवन के लिए ही खतरा बन सकती है। इसलिए आज आवश्यकता ऐसी विकास नीति की है जो समृद्धि के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन को भी सुरक्षित रखे।          मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार इसी संतुलित विकास की अवधारणा को आगे बढ़ा रही है। राज्य में पर्यावरणीय शासन को आधुनिक तकनीकों से जोड़ते हुए प्रदूषण नियंत्रण, संसाधन संरक्षण और सतत विकास की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। पर्यावरण संरक्षण में तकनीकी क्रांति:  ड्रोन आधारित निगरानी प्रणाली          21वीं सदी में तकनीक केवल सुविधा का माध्यम नहीं, बल्कि सुशासन और संसाधन संरक्षण का प्रभावी उपकरण बन चुकी है। पर्यावरणीय निगरानी के क्षेत्र में ड्रोन आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम इसी परिवर्तन का प्रतीक है। पहले जिन क्षेत्रों तक पहुँचना कठिन था, जहाँ प्रदूषण के स्रोतों की सटीक पहचान में समय लगता था, वहाँ अब अत्याधुनिक सेंसरों से लैस ड्रोन कुछ ही मिनटों में विस्तृत जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं। ड्रोन तकनीक के माध्यम से-           ड्रोन तकनीक के माध्यम से PM2.5 एवं PM10 जैसे सूक्ष्म कणों की निगरानी, सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) एवं नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) जैसे गैसीय प्रदूषकों का विश्लेषण, औद्योगिक चिमनियों से निकलने वाले उत्सर्जन की ऊँचाई पर निगरानी, नदियों एवं जलाशयों की जल गुणवत्ता का परीक्षण, अवैध अपशिष्ट निस्तारण की पहचान तथा प्रदूषण प्रभावित हॉटस्पॉट क्षेत्रों की सटीक मैपिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रभावी ढंग से किए जा रहे हैं। इससे प्रदूषण स्रोतों की शीघ्र पहचान, वैज्ञानिक विश्लेषण तथा त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई संभव हो रही है। स्मार्ट पर्यावरणीय शासन की दिशा में अग्रसर छत्तीसगढ़            पर्यावरणीय चुनौतियाँ लगातार बदल रही हैं। ऐसे में पारंपरिक निगरानी व्यवस्था को आधुनिक तकनीकों से सशक्त बनाना समय की मांग है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इसी दृष्टिकोण के साथ तकनीक आधारित पर्यावरणीय शासन को प्राथमिकता दी है। 24 घंटे वायु गुणवत्ता पर निगरानी           राज्य में कंटीन्यूअस एम्बिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम (CAAQMS) का विस्तार किया जा रहा है। यह प्रणाली चौबीसों घंटे वायु की गुणवत्ता का विश्लेषण कर वास्तविक समय में आंकड़े उपलब्ध कराती है। इससे प्रदूषण की स्थिति का वैज्ञानिक आकलन संभव हो रहा है तथा नागरिकों को भी वायु गुणवत्ता संबंधी जानकारी प्राप्त हो रही है। उद्योगों में प्रदूषण नियंत्रण को मिली नई मजबूती           औद्योगिक विकास राज्य की आर्थिक प्रगति का आधार है, लेकिन यह पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप हो, यह सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। इसी उद्देश्य से उद्योगों में कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम (CEMS) लागू किया गया है। यह प्रणाली उद्योगों के उत्सर्जन की निरंतर निगरानी करती है और किसी भी मानक उल्लंघन की स्थिति में तत्काल जानकारी उपलब्ध कराती है। इससे प्रदूषण नियंत्रण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनी है। GPS ट्रैकिंग से खतरनाक अपशिष्टों पर नियंत्रण          औद्योगिक अपशिष्टों का वैज्ञानिक प्रबंधन पर्यावरण संरक्षण की महत्वपूर्ण कड़ी है। छत्तीसगढ़ सरकार ने खतरनाक अपशिष्टों के परिवहन एवं निपटान की निगरानी के लिए GPS आधारित ट्रैकिंग प्रणाली लागू की है। इस व्यवस्था से अपशिष्ट के उत्पन्न होने से लेकर उसके अंतिम निस्तारण तक की सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध रहती है। इससे अवैध डंपिंग और पर्यावरणीय क्षति की संभावनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है। अत्याधुनिक पर्यावरण प्रयोगशालाएँ : वैज्ञानिक निर्णयों का आधार          सटीक आंकड़े और वैज्ञानिक विश्लेषण किसी भी प्रभावी पर्यावरणीय नीति की आधारशिला होते हैं। राज्य में स्थापित अत्याधुनिक केंद्रीय पर्यावरण प्रयोगशाला वायु, जल, मिट्टी और अपशिष्ट नमूनों का उच्च स्तरीय परीक्षण कर रही है। इसके अतिरिक्त मोबाइल पर्यावरण प्रयोगशालाएँ भी आकस्मिक निरीक्षण और त्वरित परीक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इन सुविधाओं के माध्यम से प्रदूषण की घटनाओं का शीघ्र पता लगाया जा सकता है और आवश्यक कार्रवाई समय पर सुनिश्चित की जा सकती है। पर्यावरण संरक्षण और उद्योगों के बीच संतुलन         प्रदेश सरकार ने पर्यावरणीय मानकों से समझौता किए बिना उद्योगों के लिए प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाया है।स्थापना अनुमति (CTE) और संचालन अनुमति (CTO) की प्रक्रियाओं को समयबद्ध एवं डिजिटल बनाया गया है। अनेक श्रेणियों में स्व-प्रमाणन आधारित नवीनीकरण की सुविधा प्रदान कर उद्योगों को राहत दी गई है। यह पहल इस बात का उदाहरण है कि पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं। जनभागीदारी: हरित भविष्य की सबसे बड़ी शक्ति           पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है। यह तब सफल होगा जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति इसकी जिम्मेदारी को समझे और निभाए। इसी उद्देश्य से राज्य में ईको-क्लब कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। विद्यालयों और महाविद्यालयों के हजारों विद्यार्थी वृक्षारोपण, जल संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त अभियान, स्वच्छता कार्यक्रम तथा जैव विविधता संरक्षण गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। युवा पीढ़ी में पर्यावरणीय चेतना का विकास भविष्य के हरित भारत की मजबूत नींव तैयार कर रहा है। भविष्य की दृष्टि 2030ः हरित विकास का रोडमैप            आने वाले वर्षों में पर्यावरणीय शासन पूरी तरह डेटा-आधारित, पारदर्शी और तकनीक-संचालित होगा। "भविष्य की दृष्टि 2030" के अंतर्गत राज्य में स्मार्ट मॉनिटरिंग, डिजिटल पर्यावरणीय प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण की उन्नत प्रणालियाँ तथा जनसहभागिता आधारित संरक्षण मॉडल विकसित किए जा रहे हैं। यह दृष्टिकोण केवल प्रदूषण नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य, स्वच्छ पर्यावरण और उच्च जीवन गुणवत्ता … Read more

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक सम्पन्न

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सम्पन्न रायपुर मुख्य सचिव विकासशील ने एसएलबीसी के बैंक अधिकारियों को निर्देश दिए है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र हितग्राहियों को उनके हिस्से की राशि के लिए ऋण देने की प्रक्रिया का सरलीकरण करें, जिससे हितग्राही आवास शीघ्रता से बना सकें। मुख्य सचिव ने नगरीय-प्रशासन विभाग के अधिकारियों को भी निर्देश दिए है कि प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के अंतर्गत जिन हितग्राहियों को आवास स्वीकृत हुए हैं, उनके लिए एक विशेष शिविर लगाकर बैंकर्स से ऋण दिलवाये। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत केन्द्रांश एवं राज्यांश की राशि हितग्राहियों को दी जाती है।           मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 तथा प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत गठित राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के लाभार्थी आधारित निर्माण (बीएलसी) घटक के अंतर्गत परियोजनाओं की स्वीकृति के लिए विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। इसी तरह से प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के घटक भागीदारी में किफायती आवास निर्माण के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं में भारत सरकार के एमआईएस पोर्टल पर दर्ज हितग्राहियों की प्रविष्टी में आवश्यक संशोधन की स्वीकृति के संबंध में भी विस्तार से चर्चा हुई।            बैठक में अधिकारियों ने बताया कि योजना के अंतर्गत हितग्राहियों को आवास निर्माण हेतु भौतिक प्रगति अनुसार केन्द्रांश राशि एक लाख 50 हजार रूपए तथा अनिवार्य राज्यांश की राशि एक लाख रूपए दी जाती है। हितग्राही द्वारा निर्धारित समयावधि में आवास पूर्ण करते हुए गृह प्रवेश करने पर राज्य शासन द्वारा मुख्यमंत्री गृह प्रवेश सम्मान योजना के अंतर्गत प्रति आवास 32 हजार 850 रूपए पृथक से हितग्राही के खाते में हस्तांतरित की जायेगी। प्रति आवास डीपीआर और पीएमसी शुल्क की राशि 6 हजार 150 रूपए राज्य शासन द्वारा दिया जाता है।           अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 के लाभार्थी आधारित निर्माण घटक अंतर्गत 10 हजार 549 हितग्राही हेतु नवीन आवास निर्माण के लिए केन्द्रांश राशि 158 करोड़ 23 लाख 50 हजार रूपए तथा राज्यांश 146 करोड़ 63 लाख 11 हजार रूपए एवं हितग्राही अंशदान राशि 105 करोड़ 49 लाख शामिल करते हुए 144 नगरीय निकायों में 410 करोड़ 35 लाख 61 हजार रूपए की लागत की 114 परियोजनाओं को स्वीकृत करने हेतु प्रस्तावित किया गया है। जिस पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव श्रीमती आर.शंगीता, आयुक्त नगर तथा ग्राम निवेश अवनीश कुमार शरण, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की विशेष सचिव सुईफ्फत आरा सहित वित्त, आवास एवं पर्यावरण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, गृह निर्माण मंडल, हुडको एवं राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के संयोजक शामिल हुए।