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अल्मोड़ा नहीं पहुंच सके राहुल गांधी, हेलीकॉप्टर उतारना पड़ा; मोबाइल से किया संबोधन

पंतनगर  आज गुरुवार से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी का उत्तराखंड दौरा शुरू हुआ है. उत्तराखंड पहुंचते ही राहुल गांधी को मौसम के बिगड़े मूड से जूझना पड़ा. दिल्ली से उड़ा राहुल गांधी का विमान अल्मोड़ा पहुंचने वाला था कि वहां मौसम खराब हो गया. इसके बाद उनके विमान को वापस लौटकर पंतनगर एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी।  राहुल गांधी के विमान की पंतनगर में इमरजेंसी लैंडिग: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर पहुंच गए हैं. राहुल गांधी के दौरे पर थोड़ी देर के लिए मौसम ने अड़ंगा डाला. राहुल का विमान दिल्ली से अल्मोड़ा के लिए उड़ा था. अल्मोड़ा में मौसम खराब होने के कारण विमान को वापस लाया गया और पंतनगर एयरपोर्ट पर उसकी इमरजेंसी लैंडिंग हुई. इसका फायदा स्थानीय नेताओं को हुआ।  राहुल गांधी के हेलीकॉप्टर की खराब मौसम के कारण पंतनगर में लैंडिंग करानी पड़ी  कांग्रेस नेताओं ने किया राहुल गांधी का स्वागत: पंतनगर एयरपोर्ट पहुंचे राहुल गांधी का कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने जोरदार स्वागत किया. एयरपोर्ट पर किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़, कांग्रेस जिलाध्यक्ष हिमांशु गाबा और महानगर अध्यक्ष ममता रानी ने उन्हें बुके भेंट कर स्वागत किया. इसके बाद राहुल गांधी अल्मोड़ा नहीं जा सके. उन्हें पूर्व सैनिकों के एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में हिस्सा लेना था।  राहुल गांधी दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर हैं: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी गुरुवार को अपने दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे के तहत पंतनगर एयरपोर्ट पहुंचे. दिल्ली से विशेष विमान के माध्यम से पहुंचे राहुल गांधी का एयरपोर्ट पर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी से स्वागत किया. उनके आगमन को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला।  कांग्रेस नेताओं ने किया राहुल गांधी का स्वागत: पंतनगर एयरपोर्ट पहुंचे राहुल गांधी का कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने जोरदार स्वागत किया. एयरपोर्ट पर किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़, कांग्रेस जिलाध्यक्ष हिमांशु गाबा और महानगर अध्यक्ष ममता रानी ने उन्हें बुके भेंट कर स्वागत किया. इसके बाद राहुल गांधी अल्मोड़ा नहीं जा सके. उन्हें पूर्व सैनिकों के एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में हिस्सा लेना था।  राहुल गांधी दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर हैं: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी गुरुवार को अपने दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे के तहत पंतनगर एयरपोर्ट पहुंचे. दिल्ली से विशेष विमान के माध्यम से पहुंचे राहुल गांधी का एयरपोर्ट पर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी से स्वागत किया. उनके आगमन को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला।  दो दिवसीय दौरे पर उत्तराखंड पहुंचे राहुल गांधी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राहुल के समर्थन में नारे लगाए: पंतनगर एयरपोर्ट पर किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़, कांग्रेस जिलाध्यक्ष हिमांशु गावा और महानगर अध्यक्ष ममता रानी ने राहुल गांधी को बुके भेंट कर उनका स्वागत किया. इस दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता भी मौजूद रहे, जिन्होंने राहुल गांधी के समर्थन में नारे लगाए और उनका अभिवादन किया।  पंतनगर से मोबाइल से किया संबोधन: स्वागत कार्यक्रम के बाद राहुल गांधी ने अल्मोड़ा में आयोजित पूर्व सैनिकों के एक विशेष कार्यक्रम को मोबाइल से ही संबोधित किया. राहुल गांधी पूर्व सैनिकों से पंतनगर से ही मोबाइल पर संवाद किया और उनकी समस्याओं एवं सुझावों को सुना. माना जा रहा है कि इस कार्यक्रम के माध्यम से कांग्रेस पूर्व सैनिक समुदाय के साथ अपने संवाद को और मजबूत करने का प्रयास करेगी।  राहुल का दौरा राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण: राहुल गांधी का यह दौरा राजनीतिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. उत्तराखंड में आगामी राजनीतिक गतिविधियों और संगठनात्मक मजबूती के मद्देनजर कांग्रेस नेतृत्व लगातार राज्य में सक्रिय नजर आ रहा है. राहुल गांधी के इस दौरे को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।  दो दिन का है राहुल का दौरा: दो दिन के इस प्रवास के दौरान राहुल गांधी विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के साथ-साथ पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से भी मुलाकात कर सकते हैं. उनके दौरे को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है और पार्टी इसे संगठन को मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रही है। 

ट्विशा मौत मामले के आरोपी समर्थ सिंह की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में पुलिस निगरानी बढ़ाई गई

भोपाल  भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा डेथ केस में आरोपी सास, रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह न्यायिक हिरासत में भोपाल सेंट्रल जेल में हैं। जेल में पहले दिन गिरिबाला सिंह ज्यादातर खामोश रहीं। उन्होंने पीने को साफ पानी मांगा। इधर समर्थ सिंह को इलाज के लिए मेडिकल वार्ड में भर्ती किया गया है। उसके पैर में चोट है जिसका इलाज चल रहा है। वार्ड की सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी की गई है। चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में अब भोपाल पुलिस की कथित लापरवाही भी जांच के दायरे में आ गई है। सीबीआइ ने लिगेचर से संबंधित पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए हैं। गिरि बाला सिंह ने भोपाल सेंट्रल जेल में अपना पहला दिन शांत और सामान्य तरीके से बिताया जेल सूत्रों के अनुसार ट्विशा केस में आरोपी सास, रिटायर्ड जिला जज गिरि बाला सिंह ने भोपाल सेंट्रल जेल में अपना पहला दिन शांत और सामान्य तरीके से बिताया। वे जेल में आम कैदियों की तरह रहीं। रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह को मंगलवार शाम को यहां लाया गया था। अपनी बैरक में गिरिबाला सिंह ने कढ़ी-पकौड़े और रोटियां खाईं। पूरे समय संयमित, सहयोगी और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ नजर आईं जेल अधिकारियों के अनुसार गिरिबाला सिंह पूरे समय संयमित, सहयोगी और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ नजर आईं। उन्होंने साफ पानी की मांग भी की। विचाराधीन बंदियों को मिलने वाली सुविधाएं और भोजन उपलब्ध कराया जा रहा एक्ट्रेस-मॉडल ट्विशा शर्मा डेथ केस की संवेदनशीलता को देखते हुए गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को अलग- अलग रखा गया है। जेल अधिकारियों के अनुसार शाम दोनों को जेल लाने के बाद से ही उन्हें विचाराधीन बंदियों को मिलने वाली सामान्य सुविधाएं और भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्य आरोपी समर्थ सिंह को इलाज के लिए जेल के अस्पताल में भर्ती कराया गया न्यायिक हिरासत में पूर्व जज गिरिबाला सिंह को महिला वार्ड में रखा गया है। मुख्य आरोपी समर्थ सिंह को इलाज के लिए जेल के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनके पैर में चोट लग गई थी जिसके कारण खंड-बी स्थित मेडिकल वार्ड में भर्ती कराकर इलाज किया जा रहा है। समर्थ सिंह, कड़ी निगरानी में है। उन्हें भी आम बंदियों के समान नाश्ते के रूप में सुबह दलिया और नमकीन के साथ चाय भी दी गई। 14 दिन की न्यायिक हिरासत जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को 16 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया. सेशन जज शोभना भालवी की अदालत ने यह फैसला दिया. इससे पहले 29 जून को कोर्ट ने दोनों को 5 दिन की सीबीआई हिरासत में भेजा था. आज यानी 2 जून को दोनों की रिमांड खत्म हो रही थी।  27 मई को हुई थी गिरिबाला की गिरफ्तारी सीबीआई ने गुरुवार (27 मई) को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में गिरिबाला सिंह के घर पर सात घंटे से ज्यादा की पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार किया था. गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी गुरुवार (27 मई) को तब हुई, जब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने उनकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी. समर्थ सिंह को 12 मई को ट्विशा शर्मा की मौत के बाद, लगभग एक सप्ताह तक लापता रहने के बाद, भोपाल पुलिस ने 22 मई को जबलपुर से गिरफ्तार किया था।  समर्थ सिंह को सबसे पहले 23 मई को भोपाल में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास की अदालत में पेश किया गया था. इसके बाद अदालत ने उन्हें 29 मई तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया था. मध्य प्रदेश सरकार की सिफारिश पर जांच का जिम्मा संभालने के बाद सीबीआई ने आगे की पूछताछ के लिए समर्थ की हिरासत की मांग की थी. कोर्ट के आदेश के बाद वह 16 जून तक हिरासत में रहेंगे।  कथित तौर पर ट्विशा शर्मा अपने ससुराल कटारा हिल्स में फंदे से लटकी हुई मिली थीं. बाद में उनके परिवार ने उनके पति और ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाया, जिसके बाद मामले की विस्तृत जांच की मांग उठी थी. मामले की जांच सीबीआई कर रही है. रिमांड के दौरान सीबीआई समर्थ को कथित अपराध स्थल पर ले गई और विस्तृत फॉरेंसिक जांच की. सीबीआई टीम ने कटारा हिल्स स्थित घर पर कई घंटे बिताए. इस दौरान उन्होंने फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी की और सबूत इकट्ठा किए, साथ ही समर्थ से 12 मई की रात की घटनाओं के बारे में पूछताछ भी की। 

कराटे में विंध्य की बेटी का कमाल, राज्य स्तर पर सफलता के बाद राष्ट्रीय मंच पर चुनौती

शहडोल खेल की बात हो और शहडोल का नाम ना आए ऐसा हो नहीं सकता है. शहडोल जिले में क्रिकेट ही नहीं बल्कि और भी खेलों के गजब टैलेंट है. अभी हाल ही में शहडोल से काव्या सिंह वैश्य कराटे के खेल में नेशनल खेलने देहरादून गई हुई हैं, जिनसे गोल्ड मेडल की आस है. 4 जून से 7 जून तक उत्तराखंड के देहरादून में कराटे का नेशनल होना है।  ये फेडरेशन नेशनल है, जिसे बहुत ही अहम चैंपियनशिप माना जा रहा है. इस नेशनल गेम्स में काव्या सिंह वैश्य से गोल्ड मेडल की उम्मीद जताई जा रही है. उनके कोच रामकिशोर चौरसिया का मानना है कि, काव्या की तैयारी पूरी है और जिस तरह से उसने स्टेट में गोल्ड मेडल जीता है, ठीक उसी तरह से नेशनल में भी इससे बेहतर की उम्मीद है।  कौन हैं काव्या सिंह वैश्य? काव्या सिंह वैश्य शहडोल जिले की उभरती हुई युवा कराटे खिलाड़ी हैं. जिनकी उम्र अभी लगभग 15 साल के करीब है. हाल ही में देहरादून में होने वाले नेशनल गेम्स में 14 से 15 कैडेट वर्ग में हिस्सा लेंगी. जिसमें 61 किलोग्राम वर्ग में खेलेंगी. ये नेशनल फेडरेशन उनके करियर के लिए अहम मानी जा रही है. काव्या सिंह वैश्य बताती हैं कि, ''वो पिछले 5 साल से कराटे सीख रही हैं. अब तक तीन स्टेट और दो नेशनल खेल चुकी हैं. जिसमें नेशनल में एक गोल्ड मेडल और एक सिल्वर मेडल है।  काव्या सिंह कहती हैं कि, ''वो कराटे में शुरुआत से ही अपना 100 परसेंट दे रही हैं. उनके जीवन का लक्ष्य बेस्ट कराटे प्लेयर बनना है और देश का नाम रोशन करना है.'' वो कहती है कि, ''उनकी प्रैक्टिस बहुत ही अच्छी चल रही है. किसी भी खिलाड़ी के करियर में सबसे बड़ा सपोर्ट उनकी फैमिली का होता है और उनकी फैमिली इस खेल के लिए उनका पूरा सपोर्ट कर रही है. इसीलिए वह चाहती है कि इस खेल में वह कुछ बेहतर करके दिखाएं, जिससे उनकी फैमिली और देश का नाम रोशन हो सके।  कई सालों से कर रहीं कोचिंग काव्या सिंह के कोच रामकिशोर चौरसिया बताते हैं कि, ''काव्या उनके पास चार-पांच साल पहले आई थी और जब से आई है तब से बड़े ही डिसिप्लिन तरीके से कोचिंग कर रही है. उसमें खास बात यह है कि वह मेहनत करती हैं और उससे भागती नहीं है. ज्यादातर बच्चों में देखने को आता है कि जब वह ट्रेनिंग करने आते हैं जब तक ध्यान न दो प्रैक्टिस नहीं करते. लेकिन काव्या के साथ ऐसा नहीं है. अगर उसे कोई टास्क दिया गया है तो उसे वो ईमानदारी से पूरा करती है और यही उसकी सफलता का राज है। 

IND vs AFG: हैमस्ट्रिंग इंजरी ने बढ़ाई टीम इंडिया की चिंता, वनडे सीरीज नहीं खेलेंगे विराट कोहली

मुंबई   टीम इंडिया को अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज शुरू होने से पहले बड़ा झटका लगा है. न्यूज एजेंसी पीटीआई ने रिपोर्ट किया है कि स्टार बल्लेबाज विराट कोहली हैमस्ट्रिंग में चोट लगने के कारण इस तीन मैचों की सीरीज से बाहर हो गए हैं. हालांकि BCCI ने अभी तक इस सीरीज के लिए कोहली के रिप्लेसमेंट की पुष्टि नहीं की है।  कोहली को कब लगी थी चोट? कोहली को यह चोट IPL 2026 के फाइनल के दौरान लगी थी, जब उन्होंने RCB को गुजरात टाइटन्स के खिलाफ 156 रनों का लक्ष्य हासिल करते समय नाबाद 75 रनों की शानदार पारी खेली थी. मैच के दौरान कोहली को रन बनाते समय कुछ परेशानी का सामना करना पड़ रहा था, जिसकी वजह से उन्हें कई बार मेडिकल टीम से भी मदद लेनी पड़ी थी।  बता दें कि अफगानिस्तान एक टेस्ट और तीन वनडे मैच खेलने के लिए भारत के दौरे पर है. टेस्ट मैच 6-10 जून तक न्यू चंडीगढ़ में खेला जाएगा. जबकि तीन वनडे मैच 13 जून से 20 जून तक खेले जाएंगे. इसके बाद टीम इंडिया इंग्लैंड के दौरे पर जाएगी, जहां उसे 14 जुलाई से 19 जुलाई के बीच तीन वनडे मैच खेलने हैं।  गलत समय पर लगी चोट यह चोट इस स्टार बल्लेबाज के लिए बिल्कुल गलत समय पर आई है. विराट कोहली टी20 इंटरनेशनल और टेस्ट से संन्यास लेने के बाद सिर्फ वनडे फॉर्मेट ही खेल रहे हैं, और वो इस समय इस फॉर्मेट में अपने सबसे शानदार फॉर्म से भी गुजर रहे हैं. 2025 में इस फॉर्मेट में कोहली 13 मैचों में 651 रन बनाकर भारत के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बने थे, जिसमें तीन शतक और चार अर्धशतक शामिल थे. उन्होंने इस फॉर्म को 2026 में भी जारी रखा और न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन मैचों की सीरीज में 240 रन बनाए, जिसमें एक शतक और एक अर्धशतक शामिल था।  विराट फैंस को बड़ा झटका विराट कोहली के करोड़ों फैंस चाह रहे हैं कि ये स्टार बल्लेबाज 2027 वनडे वर्ल्ड कप खेले और सेंचुरी की सेंचुरी भी पूरी करे, जिससे वो सिर्फ 15 शतक दूर हैं. कोहली के टेस्ट में 30 वनडे में 54 और टी20 इंटरनेशनल में 1 शतक हैं. अगर कोहली वनडे में अपनी शानदार फॉर्म को बरकरार रख पाते हैं तो फिर वो सचिन तेंदुलकर के सेंचुरी की सेंचुरी के रिकॉर्ड को भी तोड़ सकते हैं।  अफगानिस्तान सीरीज के लिए टीम इंडिया का वनडे स्क्वाड शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, श्रेयस अय्यर (उप-कप्तान), केएल राहुल (विकेटकीपर), ईशान किशन (विकेटकीपर), हार्दिक पांड्या, नीतीश कुमार रेड्डी, वॉशिंगटन सुंदर, कुलदीप यादव, अर्शदीप सिंह, प्रसिद्ध कृष्णा, प्रिंस यादव, गुरनूर बरार, हर्ष दुबे।  इस स्क्वाड में से रोहित शर्मा और हार्दिक पांड्या को सब्जेक्टेड टू फिटनेस की कैटेगरी में रखा गया है. जिसका मतलब साफ है कि इन दोनों स्टार खिलाड़ियों को सीरीज शुरू होने अपनी फिटनेस साबित करनी होगी। 

संस्कृत शिक्षकों की सेवा समाप्ति पर कोर्ट की नाराजगी, हरियाणा सरकार को नोटिस जारी

चंडीगढ़. हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग द्वारा टीजीटी संस्कृत भर्ती के संशोधित परिणाम जारी किए जाने के बाद चयन सूची से बाहर हुई कई शिक्षकों ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सिरसा जिले की लक्ष्मी व अन्यों ने याचिका दाखिल कर मांग की है कि लगभग दो वर्ष से सेवाएं दे रहे टीचर्स को नौकरी से हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए और उनको सेवा में बनाए रखने के आदेश दिए जाएं। याचिका के अनुसार लक्ष्मी व अन्यों ने वर्ष 2023 में हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की ओर से जारी टीजीटी संस्कृत भर्ती विज्ञापन के तहत आवेदन किया था। वह आवश्यक शैक्षणिक योग्यता और एचटेट पात्रता रखती हैं। भर्ती प्रक्रिया के बाद अंतिम परिणाम भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद आयोग ने 27 जुलाई 2024 को अंतिम परिणाम घोषित किया, जिसमें उनका चयन मेवात कैडर के लिए हुआ। इसके बाद जिला शिक्षा विभाग ने उन्हें नियुक्ति पत्र जारी किया और उन्होंने 14 अगस्त 2024 को नूंह जिले के एक सरकारी विद्यालय में टीजीटी संस्कृत के पद पर कार्यभार ग्रहण कर लिया। याचिका में कहा गया कि बाद में विभिन्न न्यायिक आदेशों के अनुपालन में आयोग ने 28 मई 2026 को संशोधित परिणाम जारी किया। इस संशोधित परिणाम में याची लक्ष्मी चयन सूची से बाहर हो गईं, जबकि वह लगभग दो वर्षों से नियमित रूप से सेवाएं दे रही हैं। उनका कहना है कि चयन प्रक्रिया में उनकी ओर से किसी प्रकार की धोखाधड़ी, तथ्य छिपाने या गलत जानकारी देने का आरोप नहीं है। नियुक्ति के बाद केवल संशोधित परिणाम के आधार पर सेवा समाप्त करना कानून और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत होगा। हाईकोर्ट के सामने क्या दलील? याचिकाकर्ता वकील जसबीर मोर ने हाई कोर्ट के समक्ष दलील दी है कि सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों ने कई मामलों में यह माना है कि यदि किसी कर्मचारी की नियुक्ति उसकी किसी गलती के बिना हुई हो और वह लंबे समय से सेवा दे रहा हो, तो उसे अचानक नौकरी से नहीं हटाया जा सकता। याचिका में यह भी कहा गया कि राज्य में टीजीटी संस्कृत के अनेक पद अभी भी रिक्त हैं, इसलिए सेवा में कार्यरत उम्मीदवारों को हटाने के बजाय समायोजन जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि हाल ही में इसी प्रकार के मामलों में हाई कोर्ट ने कुछ अन्य शिक्षकों को अंतरिम राहत देते हुए यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। लक्ष्मी ने भी समान आधार पर संरक्षण की मांग की है। हाईकोर्ट से आग्रह किया गया कि अंतिम सुनवाई तक उनकी सेवाएं समाप्त करने पर रोक लगाई जाए और नियुक्ति की स्थिति यथावत रखी जाए। सभी पक्षों को सुनने का बाद कोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर पूछा कि क्यों न कोर्ट सरकार के आदेश पर रोक लगा दे।

नियमितीकरण पर फिलहाल ब्रेक, हाईकोर्ट के आदेश से PRTC कर्मचारियों की बढ़ी चिंता

चंडीगढ़. पंजाब रोडवेज एवं पीईपीएसयू रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (पीआरटीसी) के कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने के एकल पीठ के आदेश पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने मामले में नोटिस जारी करते हुए 31 अगस्त 2026 की तारीख निर्धारित की है और तब तक संबंधित कर्मचारियों की सेवाओं के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। डिवीजन बेंच के समक्ष पीआरटीसी की ओर से अपील में 22 अप्रैल 2026 को पारित उस फैसले को चुनौती दी गई, जिसमें एकल पीठ ने कर्मचारियों की याचिका स्वीकार करते हुए निगम को छह सप्ताह के भीतर उन्हें नियमित करने का निर्देश दिया था। एकल पीठ ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि निर्धारित अवधि में आदेश का पालन नहीं किया गया तो संबंधित कर्मचारियों को नियमित माना जाएगा। 21 मई के आदेशों का दिया गया हवाला सुनवाई के दौरान पीआरटीसी की ओर से पेश वकीलों ने अदालत को बताया कि नियमितीकरण से जुड़ा समान कानूनी प्रश्न पहले से ही एक अन्य मामले में हाई कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है। उन्होंने 21 मई 2026 को पारित एक अंतरिम आदेश का हवाला देते हुए कहा कि पीईपीएसयू रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन बनाम जसदीप सिंह व अन्य मामले में भी यही मुद्दा लंबित है और उस प्रकरण की सुनवाई 31 अगस्त 2026 को निर्धारित है। दलीलों पर विचार करने के बाद डिवीजन बेंच ने मामले में नोटिस जारी कर दिया और वर्तमान अपील को भी उसी तारीख पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया, जिस दिन समान प्रकृति का दूसरा मामला सुना जाएगा। अदालत ने आदेश दिया कि इस अपील को एलपीए-1410-2026 के साथ सुना जाएगा ताकि नियमितीकरण के मुद्दे पर एक समान दृष्टिकोण अपनाया जा सके। यथास्थिति बनाए रखने के दिए आदेश सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए कहा कि निजी प्रतिवादियों यानी कर्मचारियों की सेवाओं के संबंध में संबंधित विभाग यथास्थिति बनाए रखे। इसका अर्थ यह है कि फिलहाल न तो कर्मचारियों को नियमित किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और न ही उनकी मौजूदा सेवा स्थिति में कोई बदलाव किया जाएगा। फिलहाल अदालत के अंतरिम आदेश से एकल पीठ के नियमितीकरण संबंधी निर्देशों के क्रियान्वयन पर रोक लग गई है और अंतिम निर्णय आने तक स्थिति यथावत बनी रहेगी।

बिरहोर जननायक पुस्तक का विमोचन: मंत्री टंक राम वर्मा को लेखक डॉ. लोकेश पटेल ने भेंट की प्रति

पद्मजागेश्वर यादव का जीवन सेवा, समर्पण और मानवता का उच्चतम आदर्श — मंत्री टंक राम वर्मा बिरहोर जननायक पुस्तक का विमोचन: मंत्री टंक राम वर्मा को लेखक डॉ. लोकेश पटेल ने भेंट की प्रति ​रायपुर     राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा से लेखक डॉ. लोकेश पटेल ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर डॉ. पटेल ने मंत्री वर्मा को पद्मजागेश्वर यादव जी के प्रेरणादायी जीवन और संघर्षों पर आधारित अपनी नवनिर्मित पुस्तक ‘बिरहोर जननायक’ की प्रति सप्रेम भेंट की। इस गौरवमयी अवसर पर स्वयं पद्मजागेश्वर यादव जी भी उपस्थित रहे और उन्होंने मंत्री  वर्मा के साथ अपने सामाजिक जीवन के गहरे अनुभवों को साझा किया। ​पुस्तक में बिरहोर समुदाय के उत्थान की अद्भुत गाथा            मुलाकात के दौरान मंत्री टंकराम वर्मा ने पुस्तक का अवलोकन किया और इसके प्रकाशन पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने जशपुर जिले में ‘बिरहोर के भाई’ के नाम से विख्यात पद्मजागेश्वर यादव जी द्वारा विशेष पिछड़ी जनजातियों, विशेषकर बिरहोर समुदाय के उत्थान के लिए किए गए कार्यों की सराहना की। मंत्री वर्मा ने कहा कि उनका पूरा जीवन समाज के लिए अत्यंत प्रेरणादायी है। पद्मजागेश्वर यादव का योगदान छत्तीसगढ़ की विशेष पिछड़ी जनजातियों के उत्थान के लिए सदैव स्मरणीय रहेगा।उनका व्यक्तित्व सेवा, करुणा, समर्पण और मानवता के उच्चतम आदर्शों का प्रतीक है। उनका जीवन समाज सेवा के क्षेत्र में कार्य करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणास्रोत है। ​1980 से निरंतर जारी है जागेश्वर यादव का संघर्ष      ​गौरतलब है कि पद्मजागेश्वर यादव वर्ष 1980 से ही विशेष पिछड़ी जनजाति बिरहोर समुदाय की शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, सामाजिक जागरूकता एवं मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए निरंतर धरातल पर कार्यरत हैं। उनके इन्हीं अथक प्रयासों का परिणाम है कि आज बिरहोर समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है, स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुँच सुनिश्चित हुई है और अनेक परिवार आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ​युवाओं और शोधार्थियों के लिए मार्गदर्शक बनेगी कृति       ​लेखक डॉ. लोकेश पटेल की यह कृति केवल एक जीवनी नहीं है, बल्कि सेवा, संवेदनशीलता, मानवता और सामाजिक उत्तरदायित्व का एक प्रेरक दस्तावेज है। यह पुस्तक पाठकों को संदेश देती है कि दृढ़ संकल्प, नि:स्वार्थ सेवा और समाज के प्रति समर्पण के माध्यम से बड़ा सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। यह कृति विशेष रूप से युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो उन्हें समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों के प्रति संवेदनशील बनने तथा राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करती है।      ​मंत्री टंक राम वर्मा ने इस महत्वपूर्ण, शोधपरक एवं प्रेरणादायी कृति के सृजन के लिए लेखक डॉ. लोकेश पटेल को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पुस्तक समाज के विभिन्न वर्गों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का एक महत्वपूर्ण स्रोत सिद्ध होगी।

रट्टू ज्ञान की जगह कौशल विकास पर ध्यान देने की जरूरत-उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा

​NEP के सपनों को साकार करेगी व्यावहारिक शिक्षा रट्टू ज्ञान की जगह कौशल विकास पर ध्यान देने की जरूरत-उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा नई पुस्तक 'मानचित्र निर्माण के सिद्धांत',पद्मजागेश्वर यादव भी रहे साक्षी ​रायपुर     राजस्व एवं  उच्च शिक्षा मंत्री माननीय टंक राम वर्मा ने आज राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अद्यतन पाठ्यक्रम पर आधारित एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं दूरगामी पुस्तक 'मानचित्र निर्माण के सिद्धांत' का विमोचन किया। उच्च शिक्षा एवं भूगोल के विद्यार्थियों के लिए मील का पत्थर साबित होने वाली इस बेहद उपयोगी पुस्तक का लेखन प्रदेश के सुप्रसिद्ध शिक्षाविद् डॉ. राजू चंद्राकर और डॉ. लोकेश पटेल द्वारा किया गया है।     ​विमोचन के दौरान उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने दोनों विद्वान लेखकों को उनके इस उत्कृष्ट अकादमिक कार्य के लिए हार्दिक बधाई दी। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव का आह्वान करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान देना नहीं है, बल्कि उन्हें व्यावहारिक और कौशल आधारित शिक्षा प्रदान करना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पुस्तक विद्यार्थियों को मानचित्र कला (Cartography) जैसी महत्वपूर्ण विधा के सैद्धांतिक और व्यावहारिक पहलुओं को सरलता से समझने में अत्यंत सहायक और उपयोगी सिद्ध होगी।       उच्च शिक्षा विभाग की ओर से ऐसे प्रयासों की सराहना करते हुए मंत्री वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के स्तर को उन्नत बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है और मातृभाषा व सरल भाषा में ऐसी उच्च स्तरीय अकादमिक पुस्तकों का आना एक सराहनीय कदम है। ​युवा पीढ़ी को मिलेगी नई दिशा: पद्मजागेश्वर यादव    ​इस अवसर पर उपस्थित प्रख्यात समाजसेवी एवं पद्मसे सम्मानित जागेश्वर यादव  ने भी इस उत्कृष्ट अकादमिक कार्य के लिए दोनों लेखकों को अपनी आत्मीय शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लेखकों के भगीरथ प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा, ज्ञान और साहित्य के क्षेत्र में किए गए ऐसे रचनात्मक प्रयास समाज और विशेषकर युवा पीढ़ी को एक नई, सकारात्मक और प्रगतिशील दिशा प्रदान करते हैं।     ​पुस्तक के लेखक डॉ. राजू चंद्राकर और डॉ. लोकेश पटेल ने इस अवसर पर बताया कि इस पुस्तक को विशेष रूप से नई शिक्षा नीति (NEP) के मापदंडों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। भूगोल और मानचित्रण के जटिल व तकनीकी सिद्धांतों को बहुत ही सरल और रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक में आधुनिक मानचित्र निर्माण की तकनीकों,अक्षांश-देशांतर के व्यावहारिक उपयोग और भौगोलिक आंकड़ों के सटीक प्रस्तुतीकरण पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है। ​

ब्लड की कमी बनी मौत की वजह? अस्पताल पहुंची जांच टीम, कर्मचारियों से पूछे सवाल

दुर्ग. जिला अस्पताल दुर्ग में भर्ती सिकलिन पीड़ित 22 वर्षीय युवती दीपिका गाड़ा के इलाज के दौरान सोमवार को हुई मौत को लेकर कलेक्टर अभिजीत सिंह 2 सदस्यीय टीम गठित कर दी है। जांच टीम में अपर कलेक्टर योगिता देवांगन तथा सीएमएचओ डॉ. मनोज दानी शामिल है। दोनों बुधवार को सुबह 10 बजे जिला अस्पताल पहुंच गए। शाम 5.30 बजे तक उन्होंने घटना के सभी पहलुओं जांचा परखा। सिविल सर्जन के कक्ष में मामले में कथित रूप से जिम्मेदार चिकित्सक, स्टाफ नर्स तथा कर्मचारियों के बारी बारी से बयान लिए। यानी करीब 8 घंटे तक पूछताछ की गई। सभी से बयान लेने के बाद जांच टीम द्वारा रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दिया जाएगा। वहीं दूसरी ओर इस मामले को लेकर कांग्रेस ने जिला अस्पताल में प्रदर्शन करते हुए सिविल सर्जन आशीषन मिंज को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने मामले में दोषी चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। परिजनों ने दीपिका की मौत के लिए जिला अस्पताल दुर्ग के चिकित्सकों तथा स्टाफ नर्स की लापरवाही बताया। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी में दीपिका को ब्लड चढ़ाया जाना था, इसके उलट परिजनों को ही ब्लड का इंतजाम करने कहा गया। ब्लड का इंतजाम करने में हुई देरी की वजह से दीपिका की मौत हो गई। मामले में ब्लड बैंक के अधिकारियों ने चौंकाने वाली बात सामने रखी है कि जब परिजनों को ब्लड के लिए कहा गया, तो महिला मेडिसिन वार्ड से ब्लड सैंपल तथा मांग पत्र भेजा जाना था। ऐसा नहीं किया गया। केवल आवेदन लेकर ब्लड बैंक भेज दिया गया। वहीं दूसरी ओर लाइफ़ सेविंग की स्थिति निर्मित होती है, तो बिना डोनेटर के ब्लड उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ के अनुसार सिकलिन मरीजों को भी बिना देरी किए ब्लड दिया जाता है। ऐसा लगता है कि दीपिका के मामले में ब्लड इंतजाम करने के इस तरह के प्रयास ही नहीं किए गए। परिजनों की शिकायत पर जांच कमेटी मृतक दीपिका की माता नीमा बाई गाड़ा पति मन्नू राम गाड़ा का निवास एचएचसीएल कॉलोनी, वार्ड नं. 17 स्टेशन मड़ोदा भिलाई है। दीपिका की तबीयत खराब होने पर उसे 30 मई को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान 1 जून को उसकी मौत हो गई। परिजनों ने चिकित्सकों पर इलाज में लापरवाही पर रखने का आरोप लगाया। कलेक्टर से इसकी शिकायत की गई, जिसे संज्ञान में लेते हुए कलेक्टर ने जांच करने समिति बैठाई । कलेक्टर को सौंपी जाएगी रिपोर्ट : जांच टीम के सदस्य अपर कलेक्टर योगिता देवांगन तथा सीएमएचओ डॉ. मनोज दानी ने बताया कि दीपिका की मौत के मामले को लेकर अलग-अलग विभागों के चिकित्सकों तथा कर्मचारियों के बयान लिए गए हैं। इसके बाद जांच प्रतिवेदन तैयार किया जाएगा, जिसे कलेक्टर को सौंपा जाएगा।

देश ने खोया संवैधानिक मामलों का बड़ा विद्वान, डॉ. सुभाष कश्यप नहीं रहे

नई दिल्ली देश के जाने-माने संविधान विशेषज्ञ और पूर्व लोकसभा महासचिव डॉ. सुभाष सी. कश्यप का निधन हो गया है। अपने निवास स्थान पर उन्होंने 97 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। जानकारी के अनुसार डॉ. सुभाष कश्यप का निधन कार्डियो-पल्मोनरी अरेस्ट (हृदय और फेफड़ों की गति रुक जाने) के कारण हुआ है।  नेहरू के दौर से नौवीं लोकसभा तक डॉ. सुभाष सी. कश्यप का संसदीय करियर अपने आप में एक जीवंत इतिहास रहा है। उन्होंने देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल वाली पहली लोकसभा से लेकर नौवीं लोकसभा तक, कुल 37 वर्षों से भी अधिक समय तक भारतीय संसद की अनवरत और निष्पक्ष सेवा की। इस सुदीर्घ सेवाकाल के दौरान उन्होंने न केवल विधायी प्रक्रियाओं का संचालन किया, बल्कि देश के कई ऐतिहासिक फैसलों और कानून निर्माण की प्रक्रियाओं के वे प्रत्यक्ष गवाह भी रहे। उनके इस अद्वितीय अनुभव और ज्ञान के कारण देश के शीर्ष राजनेता और कानूनविद समय-समय पर संवैधानिक संकटों के समाधान के लिए उनका मार्गदर्शन प्राप्त करते थे। क्रांतिकारी छात्र जीवन और स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी डॉ. कश्यप का जन्म वर्ष 1929 में तत्कालीन संयुक्त प्रांत (जो वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के नाम से जाना जाता है) के बिजनौर जिले के चांदपुर नामक स्थान पर एक प्रतिष्ठित स्वतंत्रता सेनानी परिवार में हुआ था। देशभक्ति के माहौल में पले-बढ़े होने के कारण उनके भीतर बचपन से ही राष्ट्र सेवा का जज्बा कूट-कूट कर भरा था। यही वजह रही कि उन्होंने अपनी किशोरावस्था में ही भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेना शुरू कर दिया था। अपने छात्र जीवन के दौरान उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ पहले बिजनौर और बाद में मेरठ में कई बड़े और ऐतिहासिक छात्र आंदोलनों का अत्यंत कुशलतापूर्वक नेतृत्व किया था। कालजयी कृतियों के रचनाकार एक प्रशासनिक अधिकारी और स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ-साथ डॉ. सुभाष सी. कश्यप एक अत्यंत प्रखर लेखक, विचारक और शिक्षक भी थे। उन्होंने संविधान, संसद और राजनीतिक व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर शोध करते हुए 100 से अधिक प्रामाणिक पुस्तकों की रचना की। उनकी लिखी पुस्तकें आज भी देश-विदेश के विश्वविद्यालयों में राजनीति विज्ञान और कानून के विद्यार्थियों के लिए संदर्भ ग्रंथ का काम करती हैं। उनकी सबसे प्रसिद्ध और कालजयी कृतियों में ‘आवर पार्लियामेंट’ (हमारी संसद) और ‘आवर कॉन्स्टिट्यूशन’ (हमारा संविधान) जैसी पुस्तकें शामिल हैं, जिन्होंने आम नागरिकों तक भी देश की जटिल संवैधानिक व्यवस्था को बेहद सरल भाषा में पहुंचाने का अद्भुत कार्य किया। पद्म भूषण से सम्मानित और राष्ट्र के प्रति उनका अमर योगदान भारतीय संविधान, विधायी प्रक्रियाओं और संसदीय लोकतंत्र के विकास में दिए गए उनके असाधारण, अतुलनीय और जीवनपर्यंत योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान ‘पद्म भूषण’ से नवाजा था। डॉ. कश्यप का पूरा जीवन देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को सहेजने और उन्हें मजबूत करने के प्रति समर्पित रहा। उनका निधन देश के बौद्धिक जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। वे भले ही आज हमारे बीच भौतिक रूप से मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनकी लिखी पुस्तकें, उनके विचार और संसदीय प्रक्रियाओं में किए गए उनके सुधार हमेशा भारतीय लोकतंत्र और आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे।