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जेडीए की अभिनव पहल ‘संवाद’: जनभागीदारी और पारदर्शिता से मई माह में कुल 65 ले-आउट एवं बिल्डिंग प्लान को मिली त्वरित स्वीकृति

जयपुर जयपुर विकास प्राधिकरण शहर के सुनियोजित विकास के साथ-साथ अपनी कार्यप्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता और जनभागीदारी सुनिश्चित कर रहा है। जयपुर विकास आयुक्त श्री सिद्धार्थ महाजन ने बताया कि जेडीए द्वारा एक अभिनव पहल करते हुए अब बैठकों में संबंधित आवेदकों और हितधारकों को भी आमंत्रित किया जा रहा है। संवाद कार्यक्रम के तहत आवेदकों को बुलाकर उनकी आपत्तियों, समस्याओं और सुझावों को आमने-सामने सुनकर हाथों-हाथ निस्तारण किया जा रहा है। इसी पारदर्शी और जन-हितैषी कार्यप्रणाली के सकारात्मक प्रभाव से जेडीए ने मई-2026 माह में ले-आउट और बिल्डिंग प्लान के कुल 65 प्रकरणों एवं परियोजनाओं को त्वरित गति से स्वीकृति प्रदान की है। बीपीसी-एलपी समिति द्वारा 48 प्रकरणों का अनुमोदन जेडीए की बीपीसी-एलपी समिति की मई-2026 माह में आयोजित की गई बैठकों में कुल 58 प्रकरण समिति के समक्ष प्रस्तुत किये गए, जिनमें से 48 प्रकरणों में बीपीसी-एलपी समिति द्वारा त्वरित अनुमोदन की कार्यवाही की गई जिसमे पुनर्गठन / उपविभाजन के 13 प्रकरण,आवासीय एकल भूखंड के 11 प्रकरण ,आवासीय योजनाओं के 7 प्रकरण, गैर-आवासीय एकल भूखंड के 4 प्रकरण एवं अन्य प्रकार के 13 प्रकरण शामिल हैं । बीपीसी-बीपी समिति द्वारा 17 परियोजनाओं को स्वीकृति शहर में विभिन्न आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं के निर्माण को सुगम बनाने के लिए बीपीसी-बीपी समिति द्वारा मई 2026 में कुल 17 परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है: आवासीय: 08 परियोजनाएं संस्थागत: 04 परियोजनाएं मिश्रित-उपयोग: 02 परियोजनाएं व्यावसायिक: 01 परियोजना होटल: 01 परियोजना रिसॉर्ट: 01 परियोजना जेडीए द्वारा 'संवाद' के माध्यम से प्रक्रियाओं को और अधिक सरल बनाने का यह प्रयास निरंतर जारी रहेगा, ताकि आमजन को समयबद्ध तरीके से राहत मिल सके और जयपुर के विकास को नई ऊंचाइयां मिलें।

काठमांडू ने भारत को बताया उभरती आर्थिक महाशक्ति, कनेक्टिविटी और डिजिटल पेमेंट पर चर्चा

नई दिल्ली  नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने रविवार को भारत के साथ विकास-केंद्रित साझेदारी की बात कही। उन्होंने कहा कि काठमांडू एक "उभरते हुए भारत" के साथ मिलकर काम करने का इच्छुक है, जिसने खुद को एक बड़ी आर्थिक और तकनीकी ताकत के रूप में स्थापित किया है। भारत की अपनी आधिकारिक यात्रा के दौरान एक मीडिया ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए खनाल ने दोनों देशों को जोड़ने वाले गहरे सभ्यतागत और सांस्कृतिक संबंधों पर जोर दिया और कहा कि यह रिश्ता केवल भौगोलिक सीमाओं से कहीं आगे का है। 'हम एक नदियों के संतानें' खनाल ने कहा, "हम सिर्फ नक्शे पर पड़ोसी नहीं हैं, बल्कि एक ही नदियों की संतानें हैं।" उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि दोनों देशों के आपसी संबंधों के बारे में जनता की समझ बनाने में प्रेस अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा, "हमारे जैसे जीवंत और विविधतापूर्ण लोकतंत्रों में मीडिया ही हमारी यात्राओं के नैरेटिव का मुख्य संरक्षक है।" मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि नेपाल का मौजूदा राजनीतिक नेतृत्व पारंपरिक भू-राजनीतिक तनाव से आगे बढ़कर प्रगतिशील विकास, बेहतर कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास पर ध्यान केंद्रित करना चाहता है। 'हम उम्मीदों वाले भारत से जुड़ना चाहते हैं' खनाल ने कहा, "जब हम सीमा के उस पार देखते हैं, तो हमें भारत एक आर्थिक महाशक्ति के तौर पर दिखाई देता है।" उन्होंने आगे कहा, "हम एक ऐसे उभरते हुए भारत को देखते हैं जिसने वैश्विक मंच पर खुद को एक गतिशील, तेजी से बढ़ती टेक्नोलॉजी और आर्थिक शक्ति के रूप में नई पहचान दी है। हम उम्मीदों, इनोवेशन और काम को अंजाम देने की क्षमता वाले इस भारत के साथ जुड़ना चाहते हैं।" दिल्ली में अपनी उच्च-स्तरीय राजनयिक मुलाकातों का ब्योरा देते हुए खनाल ने बताया कि उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय सहयोग से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की। उन्होंने कहा, "हमारी बातचीत में नेपाल-भारत संबंधों के सभी पहलुओं पर चर्चा हुई, जिनमें व्यापार, सीमा-पार कनेक्टिविटी, ऊर्जा साझेदारी, जल संसाधन प्रबंधन और लोगों के बीच आपसी संबंध शामिल हैं।" 'आर्थिक बदलाव सबसे अहम' मंत्री ने फिर से कहा कि नेपाल भारत के साथ अपने संबंधों में आर्थिक बदलाव को सबसे अहम मानता है और पुराने भू-राजनीतिक टकरावों के नजरिए से दोनों देशों के रिश्तों को देखने की सोच को पूरी तरह खारिज करता है। दोनों देशों के बीच सहयोग में हाल की अहम उपलब्धियों का जिक्र करते हुए खनाल ने नेपाल की NCHL और भारत की NPCI के बीच हुए समझौते के तहत सीमा-पार डिजिटल पेमेंट ट्रांजैक्शन शुरू करने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि इस पहल से दोनों देशों के पेमेंट सिस्टम सफलतापूर्वक जुड़ जाएंगे और UPI-जैसे क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजैक्शन संभव हो सकेंगे, जिससे सीमा के दोनों ओर के उद्यमियों, पर्यटकों और आम नागरिकों को सीधे फायदा होगा। विकास के क्षेत्र में मजबूत साझेदारी को और आगे बढ़ाते हुए खनाल ने नेपाल में स्वास्थ्य क्षेत्र की 72 परियोजनाओं और सांस्कृतिक क्षेत्र की पुनर्निर्माण से जुड़ी 12 परियोजनाओं को औपचारिक रूप से सौंपने की घोषणा की। ये परियोजनाएं 2015 के भूकंप के बाद भारत की मदद से पूरी की गई थीं।  

CM भजनलाल शर्मा की पहल रंग लाई, गर्मी के बीच राजस्थान में पेयजल आपूर्ति हुई सुदृढ़

विशेष राज्यव्यापी अभियानों से 19 हजार से अधिक पेयजल समस्याओं का समाधान, हजारों परिवारों को मिली राहत जयपुर भीषण गर्मी के बीच प्रदेशवासियों को स्वच्छ, पर्याप्त एवं निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के संवेदनशील नेतृत्व एवं दूरदर्शी निर्देशों का सकारात्मक असर पूरे राजस्थान में दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता के अनुरूप जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) द्वारा संचालित विशेष राज्यव्यापी अभियानों ने पेयजल व्यवस्थाओं को नई मजबूती प्रदान की है तथा हजारों परिवारों को राहत पहुंचाई है। सात विशेष अभियानों में 19 हजार से अधिक कार्य, पेयजल व्यवस्थाओं में ऐतिहासिक सुधार 5 अप्रैल से 6 जून तक आयोजित सात विशेष राज्यव्यापी अभियानों के दौरान प्रदेशभर में कुल 19,072 पेयजल संबंधी कार्य सफलतापूर्वक पूरे किए गए। इनमें 3,766 हैंडपंपों की मरम्मत, 2,236 पाइपलाइन लीकेज की दुरुस्ती, 1,219 प्रेशर संबंधी समस्याओं का समाधान, 1,390 बाधित जलापूर्ति मामलों का निस्तारण, 290 कम अवधि की जलापूर्ति, 688 कम सप्लाई, 181 प्रदूषित जल तथा 29 समय-सारणी संबंधी शिकायतों का समाधान शामिल है। इसके अतिरिक्त 7,466 अन्य सुधारात्मक कार्यों के माध्यम से पेयजल व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया गया। एक दिन में 3 हजार से अधिक कार्य, विशेष टीमों ने दिखाई तत्परता शनिवार को आयोजित सातवें विशेष अभियान के दौरान विभागीय विशेष टीमों ने जिलों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों, पाइपलाइन नेटवर्क और जलापूर्ति व्यवस्थाओं का व्यापक निरीक्षण कर समस्याओं का मौके पर ही समाधान सुनिश्चित किया। अभियान के तहत 689 खराब हैंडपंप पुनः चालू किए गए, 592 पाइपलाइन लीकेज दुरुस्त किए गए, 241 प्रेशर संबंधी समस्याओं का समाधान किया गया तथा 246 क्षेत्रों में बाधित जलापूर्ति बहाल की गई। इसके अलावा 60 कम अवधि की जलापूर्ति, 144 कम सप्लाई और 60 प्रदूषित जल संबंधी शिकायतों का भी त्वरित निस्तारण किया गया। कुल मिलाकर एक ही दिन में 3,077 पेयजल संबंधी कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किए गए। अवैध जल कनेक्शनों पर सख्त कार्रवाई, जल संरक्षण को मिला नया बल जल संसाधनों के संरक्षण एवं प्रभावी प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए विभाग ने अवैध जल उपयोग के खिलाफ भी व्यापक कार्रवाई की। सातवें अभियान के दौरान 426 अवैध जल कनेक्शन हटाए गए, जिनमें होटल, ढाबे, सरस डेयरी बूथ एवं कृषि कार्यों में उपयोग किए जा रहे अवैध कनेक्शन शामिल थे। गौरतलब है कि सात अभियानों के दौरान अब तक कुल 1,827 अवैध जल कनेक्शन हटाए जा चुके हैं, जिससे जल की बर्बादी पर प्रभावी अंकुश लगा है और आमजन के लिए उपलब्ध पेयजल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति व्यवस्था को मिली नई मजबूती हैंडपंपों एवं पाइपलाइनों की मरम्मत के साथ-साथ 619 अन्य पेयजल सुधार कार्यों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया गया है। इन प्रयासों से हजारों परिवारों को गर्मी के इस कठिन दौर में राहत मिली है और पेयजल आपूर्ति की गुणवत्ता एवं उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। 30 जून तक जारी रहेंगे विशेष अभियान उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार प्रदेशभर में पेयजल व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाए रखने के लिए विशेष राज्यव्यापी अभियान लगातार संचालित किए जा रहे हैं। आमजन को बेहतर पेयजल सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा गर्मी के मौसम में जलापूर्ति व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से ये अभियान 30 जून तक निरंतर जारी रहेंगे।

रसोई गैस पर महंगाई का वार, सालभर में LPG सिलेंडर 89 रुपये तक महंगा

जयपुर राजस्थान में आम जनता की रसोई पर महंगाई का एक और बड़ा बोझ आ गया है। तेल और गैस कंपनियों ने देर रात 12 बजे घरेलू उपयोग के एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला किया है, जिसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। कंपनियों द्वारा की गई इस मासिक समीक्षा (रिव्यू) के तहत आज 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में 29 रुपए प्रति सिलेंडर का इजाफा किया गया है। जयपुर में अब कितने का सिलेंडर राजस्थान एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन ने कीमतों में बढ़ोतरी की पुष्टि करते हुए नई रेट लिस्ट जारी की है। इस नई सूची के अनुसार, राजधानी जयपुर में अब 14.2 किलोग्राम वाला रसोई गैस सिलेंडर 916.50 रुपए के स्थान पर 945.50 रुपए में मिलेगा। केवल बड़ा सिलेंडर ही नहीं, बल्कि छोटे और मध्यम सिलेंडरों के दाम भी बढ़ाए गए हैं। अब 5 किलोग्राम वाला छोटा घरेलू सिलेंडर 341.50 रुपए के बजाय 352 रुपए में मिलेगा, जबकि 10 किलोग्राम वाला कम्पोजिट सिलेंडर (पारदर्शी प्लास्टिक बॉडी वाला) 655 रुपए से बढ़कर 675 रुपए का हो गया है। इस साल अब तक ₹89 की भारी बढ़ोतरी आम उपभोक्ताओं के लिए यह बढ़ोतरी इसलिए भी परेशान करने वाली है क्योंकि तेल कंपनियों ने इससे पहले 7 मार्च को भी घरेलू सिलेंडरों के दाम में ₹60 की बड़ी बढ़ोतरी की थी। इस तरह देखा जाए तो चालू वर्ष के भीतर ही घरेलू रसोई गैस के दाम कुल मिलाकर 89 रुपए तक बढ़ चुके हैं। हालांकि बाजार विशेषज्ञों और अधिकारियों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध और तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में लगातार तेजी आ रही है। इसी अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण घरेलू बाजार में भी लगातार कीमतें बढ़ रही हैं। पहले बढ़ी थी कमर्शियल सिलेंडर की रेट इसके अलावा, कंपनियों ने महज 7 दिन पहले ही कॉमर्शियल (व्यावसायिक) उपयोग वाले सिलेंडरों की कीमतों में भी 42 रुपए का इजाफा किया था। वैश्विक संकट के कारण इस साल के भीतर कॉमर्शियल उपयोग का सिलेंडर रिकॉर्ड 1532 रुपए तक महंगा हो चुका है, जिससे अब घरेलू बजट भी पूरी तरह बिगड़ गया है।  

सेवानिवृत्ति से एक साल पहले होगा रिकॉर्ड सत्यापन, खत्म होगी भुगतान में देरी

धनबाद  कोयला कर्मियों को सेवानिवृत्ति के दिन ही भविष्य निधि (पीएफ) और पेंशन का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए कोयला खान भविष्य निधि संगठन (सीएमपीएफ) ने बड़ी पहल शुरू की है। इसके तहत अब कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने से एक वर्ष पहले ही उनके पीएफ एवं पेंशन संबंधी सभी अभिलेखों का सत्यापन और अद्यतन कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इस संबंध में सीएमपीएफ मुख्यालय ने देशभर के अपने 23 क्षेत्रीय कार्यालयों के क्षेत्रीय आयुक्तों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सीएमपीएफ का कार्यालय कन्याकुमारी से लेकर जम्मू और कश्मीर तक फैला है। इसकी पुष्टि सीएमपीएफ के आयुक्त सजिश कुमार एन ने भी की। कहा कि इससे कई तरह के लाभ उन्हें मिलेगा। साथ ही लोगों को परेशानी भी कम होगी। आपको बता दें कि सीएमपीएफ में कोल इंडिया के साथ टाटा, सेल, अडानी सहित कोयला खनन करने वाली सरकारी व गैर सरकारी कंपनी केे कर्मियों को पीएफ व पेंशन कार्य संचालित होता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद हर वर्ष सेवानिवृत्त होने वाले करीब 17 हजार कोयला कर्मियों को पीएफ और पेंशन भुगतान के लिए अनावश्यक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी। संगठन का उद्देश्य है कि कर्मचारी के सेवा निवृत्त होते ही उसका दावा पहले से तैयार रहे और उसे समय पर सभी देय लाभ प्राप्त हो सकें। सीएमपीएफ अधिकारियों के अनुसार, कोयला उद्योग में कार्यरत कर्मचारियों का सेवा काल लंबा होता है और इस दौरान उनका कई बार एक परियोजना, क्षेत्र या कंपनी से दूसरी इकाई में तबादला होता रहता है। ऐसे मामलों में सेवा अभिलेख, अंशदान विवरण और नामांकन संबंधी सूचनाओं के मिलान में समय लगता है, जिसके कारण कई बार सेवानिवृत्ति के बाद पीएफ एवं पेंशन भुगतान में विलंब की शिकायतें सामने आती रही हैं। नई व्यवस्था के तहत सेवानिवृत्ति से 12 माह पूर्व संबंधित कर्मचारी की पूरी सेवा पुस्तिका, अंशदान रिकार्ड, नामांकन, परिवार विवरण और पेंशन पात्रता की जांच की जाएगी। किसी प्रकार की त्रुटि मिलने पर उसे समय रहते दूर कर लिया जाएगा। इससे अंतिम समय में दस्तावेजों की कमी, सेवा अवधि के मिलान अथवा तबादलों से जुड़े विवादों का समाधान पहले ही हो सकेगा। सीएमपीएफ के इस कदम से देशभर के लगभग साढ़े तीन लाख कोयला कर्मियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। ये सभी कर्मचारी नियमित रूप से सीएमपीएफ में अंशदान करते हैं और सेवानिवृत्ति के बाद इसी कोष से उन्हें पीएफ तथा पेंशन का लाभ प्राप्त होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि रिकार्ड के पूर्व सत्यापन और डिजिटलीकृत निगरानी व्यवस्था से न केवल भुगतान प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि कर्मचारियों का संगठन पर भरोसा भी और मजबूत होगा।

एमएलसी टिकट विवाद के बाद बिहार की सियासत में बढ़ी हलचल, दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर सवाल

पटना बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर मची सियासी हलचल के बीच राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) और इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा इस समय जबरदस्त चर्चाओं में हैं। दरअसल, चर्चाओं की सबसे बड़ी वजह यह है कि उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश वर्तमान में सरकार में मंत्री हैं, लेकिन इस बार एमएलसी चुनाव में एनडीए (NDA) गठबंधन ने उन्हें अपना उम्मीदवार नहीं बनाया है। टिकट न मिलने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में यह बात तेजी से फैल रही है कि दीपक प्रकाश को जल्द ही अपने मंत्री पद से इस्तीफा देना होगा या उन्हें पद से हटना पड़ेगा। इन तमाम विपरीत चर्चाओं और झटकों के बावजूद उपेंद्र कुशवाहा ने रविवार को पटना में एक बड़ा राजनीतिक दावा ठोक दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि रालोमो बिहार में सत्ता की मजबूत हिस्सेदार है और आगे भी सरकार में उनकी यह हिस्सेदारी पूरी मजबूती के साथ बनी रहेगी। हालांकि, बिहार सरकार के मंत्री दीपक प्रकाश अभी बिहार विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं हैं। नियम के मुताबिक, मंत्री पद पर बने रहने के लिए उन्हें शपथ लेने के छह महीने के अंदर किसी भी सदन का सदस्य बनना जरुरी है। लेकिन अब एमएलसी चुनाव में एनडीए ने उन्हें सीट ही नहीं दी है। इसके बाद निकट भविष्य में चुनाव भी नहीं है। जाहिर है ऐसे में दीपक प्रकाश का मंत्री पद पर बने रहना मुश्किल है। पटना महाधिवेशन में विधायक आलोक कुमार सिंह बने नए प्रदेश चीफ उपेंद्र कुशवाहा रविवार को पटना के रवींद्र भवन में आयोजित पार्टी के राज्य महाधिवेशन को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने गठबंधन और सत्ता में बने रहने के दावे के साथ-साथ संगठन को लेकर भी एक बहुत बड़ी घोषणा की। उपेंद्र कुशवाहा ने सार्वजनिक मंच से पार्टी के नए बिहार प्रदेश अध्यक्ष के रूप में विधायक आलोक कुमार सिंह के नाम का औपचारिक ऐलान किया। आलोक कुमार सिंह को बिहार संगठन की कमान सौंपते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी अब नए तेवर और कलेवर के साथ सूबे के कोने-कोने में अपनी पकड़ मजबूत करेगी। स्वास्थ्य मंत्री निशांत को मिले डिप्टी सीएम की कमान:उपेंद्र कुशवाहा इसी महाधिवेशन के दौरान उपेंद्र कुशवाहा ने बिहार सरकार के आंतरिक समीकरणों को लेकर भी एक बड़ा और दिलचस्प बयान देकर राजनीतिक सरगर्मी को और बढ़ा दिया है। उपेंद्र कुशवाहा ने जेडीयू नेतृत्व को एक बड़ी सलाह देते हुए कहा कि वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री निशांत को बिहार का उपमुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए था। उन्होंने पुरजोर तरीके से पैरवी करते हुए कहा कि अगर निशांत को डिप्टी सीएम की कमान सौंपी जाती, तो यह पूरी तरह से खुद जेडीयू के राजनीतिक हित की बात होती। गौरतलब है कि स्वास्थ्य मंत्री निशांत को डिप्टी सीएम बनाए जाने की मांग बिहार की सियासत में पहली बार नहीं उठी है, बल्कि इससे पहले भी जेडीयू के ही कई जमीनी कार्यकर्ता और वरिष्ठ नेता लगातार उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी देने की वकालत करते रहे हैं।

पंजाब के पूर्व CM हरचरण सिंह बराड़ को लाहौर में मिला सम्मान, कॉलेज ने रखा क्लासरूम का नाम

श्री मुक्तसर साहिब. लाहौर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान एचिसन काॅलेज में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री हरचरण सिंह बराड़ के नाम पर एक क्लासरूम का नाम रखा गया है। इस फैसले ने भारत-पाक सीमा के दोनों ओर लोगों का ध्यान खींचा है। बराड़ ने 1936 से 1943 तक इसी कालेज में पढ़ाई की थी। पढ़ाई के दौरान वे स्कूल प्रिफेक्ट रहे और उन्हें प्रतिष्ठित 'रिवाज गोल्ड मेडल' से भी सम्मानित किया गया था। इस पहल की पुष्टि करते हुए बराड़ की बहू और मुक्तसर से पूर्व विधायक करण कौर बराड़ ने बताया कि यह सम्मान उनके ससुर के बचपन के दोस्त और पाकिस्तान के नामी उद्योगपति सैय्यद बाबर अली दे रहे हैं। दशकों पहले हरचरण जी ने इस कालेज की लाइब्रेरी का उद्घाटन भी किया था‌। बाबर अली का 100वां जन्मदिन 30 जून को है, लेकिन मुहर्रम के कारण इसका जश्न सात जून को मना रहे हैं। इसी मौके पर क्लासरूम समर्पित हुआ है। करण कौर ने कहा कि हरचरण जी और बाबर साहब का रिश्ता भाइयों जैसा था।उन्होंने बताया कि हरचरण जी को लाहौर के उक्त कालेज से बहुत लगाव था। बेटी बबली बराड़ पाकिस्तान पहुंची इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बराड़ की बेटी बबली बराड़ पहले ही पाकिस्तान पहुंच चुकी हैं। यह कदम खास इसलिए भी है क्योंकि किसी पाकिस्तानी संस्थान में भारतीय राजनेता को सम्मान मिलना दुर्लभ है। यह उन निजी रिश्तों की मिसाल है जो विभाजन की त्रासदी झेलकर भी दशकों तक कायम रहे। हरचरण सिंह बराड़ का निधन सितंबर 2009 में हुआ था। उल्लेखनीय है कि मुक्तसर जिले के सरायनागा गांव के रहने वाले हरचरण सिंह बराड़ अगस्त 1995 से नवंबर 1996 तक पंजाब के मुख्यमंत्री रहे। इससे पहले 1977 में वे उड़ीसा और हरियाणा के राज्यपाल का पद भी संभाल चुके थे। यही नहीं सात नवंबर 1995 को मुक्तसर और 24 नवंबर 1995 को मोगा को जिला बनाने का श्रेय भी बराड़ को जाता है। बाबर अली ने सुनाए दोस्ती के किस्से बाबर अली ने पाक में एक वीडियो इंटरव्यू में दोस्ती के किस्से साझा किए। उन्होंने बताया कि तीसरी कक्षा में वे अलग सेक्शन में थे, लेकिन चौथी में साथ आने पर बराड़ से उसकी पक्की दोस्ती हो गई। हरचरण पढ़ाई में अच्छे थे, मैं भी कम नहीं था। हमारी सोच मिलती थी। वह गुरुद्वारे जाते, मैं मस्जिद, पर धर्म कभी बीच में नहीं आया। बाबर अली ने कहा कि दोनों साथ पढ़ते, पंजाबी में बात करते और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा रखते थे। फिरोजपुर के बॉर्डर पर हुई थी मुलाकात उन्होंने यह भी याद किया कि बराड़ को उर्दू से खास लगाव था और वे अपनी मां को उर्दू में ही चिट्ठियां लिखते थे। उन्होंने बताया कि विभाजन के बाद जब मैं अमेरिका से लौटा तो बराड़ को मैं फिरोजपुर बार्डर पर मिला था। वह मेरे लिए केले लेकर आया था और मैं डाइट। लेकिन सुरक्षा के लिहाज से हम दोनों एक दूसरे को कुछ नहीं दे सके। विभाजन से पहले एचिसन कालेज पाकिस्तान का सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान माना जाता था, जिसने कई बड़े राजनेता और अफसर दिए।

गैंगरेप केस में पुलिस महकमे पर गिरी गाज, SP ने चौकी प्रभारी को किया सस्पेंड

धरसीवां. नाबालिग से कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले में उठे राजनीतिक बवाल और लगातार बढ़ते दबाव के बीच पुलिस विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले की जांच में लापरवाही बरतने के आरोप में सिलयारी चौकी प्रभारी उप निरीक्षक जितेंद्र दुबे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई रायपुर ग्रामीण एसपी श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा ने की है। जारी आदेश के अनुसार, चौकी सिलयारी थाना धरसीवां में दर्ज अपराध की जांच में घोर लापरवाही बरतने के कारण चौकी प्रभारी जितेंद्र दुबे को निलंबित कर पुलिस अधीक्षक रायपुर (ग्रामीण) कार्यालय संबद्ध किया गया है। निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। वहीं, मामले की प्रारंभिक जांच कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने उठाया था मुद्दा नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के आरोपों को लेकर पिछले कई दिनों से राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ था। इस मामले को पूर्व विधायक देवजी भाई पटेल, जिला पंचायत सभापति सरोज चंद्रवंशी और भाजपा नेता दिनेश अग्रवाल ने प्रमुखता से उठाते हुए पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग की थी। भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने ग्रामीण एसपी कार्यालय पहुंचकर मामले में कार्रवाई की मांग की थी। वहीं, कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को लेकर धरसीवां और आसपास के क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन किया था। पूर्व विधायक अनिता योगेंद्र शर्मा, जिला ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष पप्पू राजेंद्र बंजारे, उधोराम वर्मा, पीसीसी के कार्यकारी अध्यक्ष भावेश बघेल, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष आशीष वर्मा समेत कई नेताओं ने प्रदर्शन कर माना सीएसपी को ज्ञापन सौंपा था। कांग्रेस ने दिया था 12 घंटे का अल्टीमेटम कांग्रेस नेताओं ने आरोपियों की गिरफ्तारी, पॉक्सो एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई और सिलयारी चौकी प्रभारी के निलंबन की मांग करते हुए पुलिस को 12 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। मांगें पूरी नहीं होने पर 9 जून को चक्काजाम और उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी गई थी। अब चौकी प्रभारी के निलंबन के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। हालांकि, पीड़िता को न्याय दिलाने और आरोपियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर राजनीतिक दलों का दबाव अभी भी बना हुआ है।

असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परिणाम का रास्ता साफ, MP हाईकोर्ट से PSC को सशर्त अनुमति

जबलपुर. कम्प्यूटर विज्ञान के असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती 2024 का रिजल्ट जल्द आएगा। जबलपुर हाई कोर्ट से रिजल्ट पर लगी रोक हटा दी गई है। कोर्ट ने पीएससी को सशर्त रिजल्ट जारी करने की मंजूरी दी है। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के जस्टिस प्रणय वर्मा और जस्टिस जेके पिल्लई की डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में कहा है कि याचिकाकर्ताओं के रिजल्ट सीबंद लिफाफे में सुरक्षित रखे जाएं, ताकि जरूरत पड़ने पर उसे कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किए जा सके। मामले की सुनवाई दो सप्ताह के बाद निर्धारित की गई है। अनुभव के लिए 25 अंक पर उठाए सवाल एमपीपीएससी द्वारा 24 और 30 दिसंबर 2024 को कम्प्यूटर विज्ञान के असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया था। इसमें अनुभव के लिए 25 अंक निर्धारित थे। जिस पर छतरपुर के हरचंडी अहिरवार सहित अन्य कैंडिडेट्स ने सवाल उठाया था। उनका आरोप था कि उन्हें आरक्षण के लाभों से वंचित किया जा रहा है। याचिका लगाने पर इस परीक्षा के रिजल्ट पर रोक लगा दी गई। MPPSC ने रिजल्ट पर रोक हटाने की मांग की हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान जजों की बेंच ने लिखित परीक्षा पास कर चुके कैंडिडेट्स के साक्षात्कार को 17 मार्च 2026 को अनुमति दी थी, लेकिन इसके परिणाम जारी करने पर रोक लगा दी थी। एमपीपीएससी की ओर से कोर्ट में आवेदन दिया गया। जिसमें उन्होंने रिजल्ट पर लगी रोक हटाने की मांग की। अधिवक्ताओं ने कोर्ट के समक्ष दिए ये तर्क राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी और एमपीपीएससी के अधिवक्ता आदित्य पचौरी ने कोर्ट के समक्ष अपने तर्क दिए। जिसके बाद डिवीजन बेंच ने रिजल्ट घोषित करने की सशर्त अनुमति जारी की।

काशी में बदलाव की तैयारी: मीट-मांस बाजार अब शहर की सीमा से बाहर ले जाने की योजना

 वाराणसी यूपी की धार्मिक नगर वाराणसी में अब शहर के भीतर हर गली-मोहल्ले में मीट-मांस और मछली की बिक्री जल्द ही पुरानी बात हो जाएगी। दरअसल, वाराणसी नगर निगम ने शहर को व्यवस्थित और स्वच्छ रखने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। जिसके तहत अब मीट-मांस व मछली की सभी दुकानें शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित की जाएंगी। महापौर अशोक कुमार तिवारी की अध्यक्षता में शनिवार को मैदागिन स्थित टाउन हॉल भवन में आयोजित सदन की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगाते हुए रूपरेखा स्पष्ट कर दी गई। बैठक में शहर के चतुर्दिक विकास, अतिक्रमण और जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। जिसमें मीट-मछली के बाजारों को शहर के बाहरी छोर पर व्यवस्थित करने का निर्णय सबसे प्रमुख रहा। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने सदन को बताया कि इस योजना के प्रथम चरण में पांच स्थानों का चयन किया जा चुका है। ये सभी स्थान शहर की बाहरी सीमाओं के करीब स्थित हैं, जिससे आम जनता को कोई असुविधा न हो। नगर आयुक्त के मुताबिक आगामी दिनों में शहर के भीतर संचालित मीट-मछली की दुकानों को रामनगर, सूजाबाद, गणेशपुर, अवलेशपुर और शिवपुर क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जाएगा। सदन में पार्षद गुलशन अली ने यह मामला उठाते हुए कहा कि करीब एक वर्ष पूर्व मीट-मांस और मछली की दुकानों को शहर से बाहर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन उस पर अब तक प्रभावी अमल नहीं हो सका है। उन्होंने व्यवसायियों की पीड़ा को साझा करते हुए कहा कि सावन महीने में शहर की सभी दुकानें बंद करने के आदेश से मीट व्यवसायियों का रोजगार बुरी तरह प्रभावित होता है। इस पर नगर आयुक्त ने आश्वस्त किया कि शहर की बाहरी सीमा में जगह चिह्नित कर ली गई है और जल्द ही इस प्रस्ताव को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।