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QR कोड स्कैन करते ही मिलेगी पूरी जानकारी, अमरनाथ यात्रा में हाई-टेक सुरक्षा व्यवस्था

श्रीनगर इस साल अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से 28 अगस्त तक चलेगी. इस बार दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सुरक्षा के बेहद कड़े और आधुनिक इंतजाम किए हैं. अमरनाथ यात्रा को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए सुरक्षाबलों की भारी तैनाती की जा रही है. इतिहास में पहली बार, अमरनाथ यात्रा मार्ग पर सेवा देने वाले सभी टट्टू वालों (घोड़े वाले), कुलियों, दुकानदारों और टैक्सी ड्राइवरों को एक विशेष 'पहचान' ऐप (Pehchan App) से जोड़ा गया है. 'पहचान' ऐप के तहत, पुलिस वेरिफिकेशन के बाद इन सभी सेवा देने वालों को एक विशेष क्यूआर कोड जारी किया जा रहा है. यात्रा पर आने वाला कोई भी श्रद्धालु अपने मोबाइल से इस कोड को स्कैन करके उस व्यक्ति की सही पहचान कर सकता है. क्या है 'पहचान' ऐप और कैसे करेगा काम? अनंतनाग के SSP आमोद अशोक नागपुरे ने बताया कि इस साल की सुरक्षा व्यवस्था में सबसे अहम बदलाव 'पहचान' ऐप की शुरुआत है. उन्होंने कहा, ये एक बहुत एडवांस और अनोखी पहल है. इसके जरिए यात्रा मार्ग पर काम करने वाले सभी सेवा प्रदाताओं- जैसे घोड़े वाले, पिट्ठू (कुली) और टैक्सी ड्राइवरों का ऐप आधारित वेरिफिकेशन किया जा रहा है. एसएसपी ने आगे कहा, जांच पूरी होने के बाद पुलिस की तरफ से उन्हें एक खास क्यूआर कोड दिया जाता है. इस क्यूआर कोड की सबसे बड़ी खासियत ये है कि कोई भी पर्यटक, श्रद्धालु या सुरक्षाकर्मी अपने साधारण मोबाइल फोन से इसे स्कैन कर सकता है. स्कैन करते ही उस सेवा प्रदाता की पूरी क्रेडेंशियल सामने आ जाएगी. इससे यात्री पूरी तरह आश्वस्त हो सकेंगे कि उनके साथ मौजूद व्यक्ति पुलिस की ओर से वेरिफाइड है. तैनात होंगी केंद्रीय बलों की 140 कंपनियां SSP आमोद अशोक नागपुरे ने सुरक्षा तैयारियों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस साल तीर्थयात्रा की सुरक्षा के लिए अकेले पूरे जिले में CAPF की 140 कंपनियां तैनात की जा रही हैं. इसके साथ ही, सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए कई नए और कड़े कदम भी उठाए गए हैं. श्रद्धालुओं को मिलेगा डर से छुटकारा जम्मू-कश्मीर पुलिस के इस हाई-टेक कदम से अमरनाथ यात्रा पर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा कई गुना बढ़ जाएगी. पहले यात्रा के दौरान अनजान सेवा प्रदाताओं पर भरोसा करना यात्रियों के लिए एक बड़ी चुनौती होता था. लेकिन अब 'पहचान' ऐप और क्यूआर कोड तकनीक के आने से किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की पहचान करना बेहद आसान हो जाएगा. स्थानीय प्रशासन को उम्मीद है कि इस तकनीक की मदद से न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि यात्रियों और स्थानीय सेवा प्रदाताओं के बीच भरोसा भी बढ़ेगा. फिलहाल, प्रशासन यात्रा शुरू होने से पहले सभी दुकानदारों और मजदूरों का वेरिफिकेशन काम तेजी से पूरा करने में जुटा है.

अमेरिका-इजरायल रिश्तों में दरार? ईरान वार्ता को लेकर खुफिया विवाद तेज

नई दिल्ली ईरान पर साथ मिलकर हमला करने वाले अमेरिका और इजरायल अब आपस में ही उलझते हुए नजर आ रहे हैं। यह पूरा मामला अमेरिकी अधिकारियों की जासूसी से जुड़ा हुआ है। अमेरिकी खुफिया विभाग की रिपोर्ट में इस बात के संकेत दिए हैं कि इजरायल ने ईरान और अमेरिका की बातचीत में हिस्सा ले रहे अधिकारियों की निगरानी करनी शुरू कर दी है। बता दें, इजरायल और अमेरिका की खुफिया एजेंसियां आपस में बेहद दोस्ताना रवैया रखती हैं, लेकिन इसके बाद भी ईरान के मुद्दे पर दोनों देशों की सरकार की राय अलग-अलग होने की वजह से परेशानी बढ़ गई है। अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल की खुफिया एजेंसी, ईरान के साथ जारी बातचीत की स्थिति को समझने के लिए अमेरिकी अधिकारियों की जासूसी करने की कोशिश कर रहा है। मामले से परिचित अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, इजरायली जासूसी एजेंसी ने उन लोगों पर ध्यान केंद्रित किया होगा, जो ईरान के साथ शांति वार्ता में प्रमुख रूप से भूमिका निभा रहे हैं। इसमें सबसे पहले ट्रंप के प्रमुख वार्ताकार स्टीव विटकॉफ, पेंटागन के अधिकारी एल्ब्रिुज ए कोल्बी, माइकल पी. डिमिनो शामलि हो सकते हैं गौरतलब है कि आपस में खुफिया जानकारी साझा करने वाले यह दोनों देश इस बात को भली भांति जानते कि वह एक-दूसरे की जासूसी करते हैं। लेकिन ईरान का मुद्दा अलग है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक ईरान के मुद्दे पर जानकारी निकालने के लिए इजरायली जासूस जरूरत से ज्यादा आगे बढ़ रहे हैं। अमेरिका की रक्षा खुफिया एजेंसी (DIA) की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल में तैनात अमेरिकी अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि उनके मोबाइल फोन में निगरानी करने वाला साफ्टवेयर इंस्टॉल किया गया है। इस खबर के बाहर आते ही अमेरिका ने अपने सभी अधिकारियों के कम्युनिकेशन डिवाइसेस की सुरक्षा कड़ी कर दी। अमेरिका की नहीं, ट्रंप की नस पकड़ने की कोशिश में इजरायल अमेरिका और इजरायल आपस में ज्यादातर खुफिया जानकारी साझा करते हैं। दोनों देश साथ में कई युद्ध भी लड़ चुके हैं। ऐसे में अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इजरायल की दिलचस्पी अमेरिका की रणनीति या अधिकारियों की जासूसी में नहीं हैं। इजरायल, इस समय राष्ट्रपति ट्रंप की तरफ से दिए जा रहे संकेतों को समझने की कोशिश कर रहा है कि आखिर ट्रंप ईरान के साथ वार्ता में किस हद तक जा सकते हैं। हालांकि, खुफिया आधार पर सामने आई इस रिपोर्ट को अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यलय ने खारिज किया है। वाइट हाउस की तरफ से बताया गया कि यह रिपोर्ट पूरी तरह से झूठी है। इजरायल अमेरिकी सरकारी अधिकारियों या संस्थानों की जासूसी नहीं करता है। उन्होंने आगे कहा, “इजरायल की खुफिया जानकारी जुटाने की कोशिशें उसके दुश्मनों पर केंद्रित हैं न कि उसके सहयोगियों पर। इसके विपरीत कोई भी दावा या तो गलत जानकारी पर आधारित है या राजनीतिक रूप से प्रेरित है।” वहीं इजरायल की तरफ से भी इन तमाम रिपोर्ट्स को खारिज किया गया है। ईरान पर अलग-अलग क्यों दिख रहे इजरायल और अमेरिका 28 फरवरी को ईरान पर साथ मिलकर हमला करने वाले इजरायल और अमेरिका ने इस युद्ध को कुछ दिनों का सोचा था। लेकिन बाद में हालात ऐसे बिगड़े कि ट्रंप को सीजफायर करना पड़ा। इसी सीजफायर के बाद इजरायल और अमेरिका के बीच में हालात बिगड़ने लगे। अमेरिका चाहता है कि शांति वार्ता हो और ईरान के साथ दोबारा युद्ध शुरू न हो, जबकि गाजा में लंबे युद्ध लड़ चुका इजरायल लगातार ईरान पर हमला करने के प्रयास में है। इतना ही नहीं अमेरिका को सीधे तौर पर हिज्बुल्लाह से कोई परेशानी नहीं। ऐसे में ट्रंप ने नहीं चाहते कि इजरायल लेबनान पर हमला करे। लेकिन नेतन्याहू साफ तौर पर कह चुके हैं कि अगर लेबनान में हिज्बुल्लाह उसे थोड़ा सा भी खतरा समझ आता है, तो वह हमला करेंगे। अभी हाल में ही इसी मुद्दे को लेकर ट्रंप और नेतन्याहू की तीखी बहस भी हो गई थी, जिसमें ट्रंप ने बीबी को अपशब्द तक कह दिए थे।

ग्रामीण सड़कों के विकास पर अटकी योजना, 319 सड़कें जमीन विवाद में फंसीं

 पटना  ग्रामीण इलाके में बनने वाली सड़कें भी राष्ट्रीय उच्च पथ (NH) और स्टेट हाईवे (SH) के निर्माण से जुड़ी आधारभूत समस्या को झेल रही हैं। यह समस्या जमीन की उपलब्धता से संबंधित है। ग्रामीण कार्य विभाग के एक आकलन के अनुसार अगले पांच वर्षों में बिहार के ग्रामीण इलाके में सड़क निर्माण को 3600 करोड़ रुपए अकेले जमीन अधिग्रहण मद में खर्च कर करने होंगे। इस राशि का आकलन प्रति वर्ष 10 प्रतिशत की वृद्धि को जोड़कर किया गया है। 319 सड़कों के लिए जमीन की जरूरत ग्रामीण कार्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में 319 सड़कों का मामला जमीन अधिग्रहण के पेच में फंसा है। इनमें 51 स्थायी पट्टा से संबंधित मामले हैं। इस बारे में ग्रामीण कार्य विभाग का कहना है कि अलग-अलग विभागों से समन्वय कर समस्या का समाधान कराया जाएगा। समस्या समाधान के लिए हर माह संबंधित विभागों के साथ संयुक्त रूप से साइट मीटिंग आयोजित की जाएगी। यह भी योजना बन रही कि जहां तक संभव हो वैसी परियाेजनाएं प्राथमिकता के आधार पर ली जाएं जिसमें किसी तरह के जमीन अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं पड़े। फाॅरेस्ट क्लियरेंस का भी पेच जिस तरह से एनएच और एसएच का निर्माण फारेस्ट क्लियरेंस में अटक जाता है उसी तरह का मामला ग्रामीण कार्य विभाग के भी सामने आ रहा। इस बारे में मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में 47 सड़कों का मामला वन स्वीकृति हासिल नहीं होने की वजह से अटका पड़ा है। बहुत से मामले ऐसे हैं जहां एलायनमेंट के तहत बिजली पोलों को हटाया जाना है। इस बारे में जानकारी दी गई कि बिजली के जाे पोल संबंधित सड़क के एलायनमेंट के बाहर हैं उसके लिए किसी तरह का शुल्क देय नहीं होगा। इसी तरह पुराने जर्जर बिजली पोल के स्थानांतरण के लिए नई दर का भुगतान नहीं होगा। नए प्रोजेक्ट में कमिश्नर व डीएम की अनुशंसा आवश्यक ग्रामीण कार्य विभाग ने तय किया है कि अतिरिक्त परियोजनाओं के समावेशन के प्रस्तावों की गहन जांच और स्क्रीनिंग की जाएगी। प्रमंडलीय आयुक्त और जिलाधिकारी की विधिवत अनुशंसा संबंधित प्रस्ताव पर दर्ज होगी। इसके बाद ही सड़क निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।  

सरकारी फंड घोटाला मामला: CBI ने दिल्ली-NCR सहित 6 ठिकानों पर की कार्रवाई

 चंडीगढ़   हरियाणा और चंडीगढ़ के सरकारी विभागों के 661 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच कर रही सीबीआई  ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए चंडीगढ़, पंचकूला और दिल्ली-एनसीआर में छह जगहों पर छापे मारे। जांच के दायरे में हरियाणा के कुछ वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, बैंक अधिकारी और एक निजी कंपनी भी हैं। सीबीआई के मुताबिक यह मामला हरियाणा सरकार के आठ विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के दो विभागों नगर निगम चंडीगढ़ और क्रेस्ट चंडीगढ़ के सरकारी फंड में गड़बड़ी से जुड़ा है। आरोप है कि सरकारी धन को गलत तरीके से खातों के जरिए दूसरी जगह भेजकर हड़प लिया गया। जांच एजेंसी के मुताबिक हरियाणा कैडर के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के घरों के अलावा नोएडा स्थित वीपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक के ठिकानों पर की गई। जांच में सामने आया है कि कुछ अधिकारियों ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर खाते खुलवाने, सरकारी पैसे के ट्रांसफर और बाद में उसे अन्य खातों में भेजने में मदद की। इसके बदले उन्हें फायदा मिलने के भी आरोप हैं। सीबीआई ने बताया कि वीपम कंसल्टेंसी के खाते में भी कथित तौर पर घोटाले का पैसा पहुंचा था, जिसे बाद में कंपनी के निदेशक के निजी खाते में ट्रांसफर किया गया। तलाशी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और संपत्ति से जुड़े कागजात बरामद किए गए हैं। यह जांच सीबीआई ने हरियाणा विजिलेंस एवं एंटी करप्शन ब्यूरो से एक मामला अपने हाथ में लेने और चंडीगढ़ पुलिस के आर्थिक अपराध थाने में दर्ज दो मामलों को अपने अधीन लेने के बाद शुरू की थी। तीनों मामलों में आपराधिक साजिश, सरकारी धन के गबन और भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच चल रही है। सीबीआई पहले ही इस मामले में पंचकूला की विशेष अदालत में पहली चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इसमें हरियाणा पावर जेनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड और हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद के अधिकारियों की भूमिका का उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसी का कहना है कि सरकारी धन को IDFC फर्स्ट बैंक और AU फाइनेंस बैंक में रखे खातों से सुनियोजित तरीके से दूसरी जगह भेजा गया। सीबीआई का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। मामले में जल्द ही अतिरिक्त चार्जशीट भी दाखिल की जाएगी।

ट्रेनों में अपराधियों पर नजर रखने के लिए पुलिस ने शुरू किया हाई-टेक सिस्टम

 रामपुर प्लेटफार्म के साथ ट्रेनों में सक्रिय अपराधियों की कुंडली अब कंप्यूटर पर एक क्लिक करते ही खुल जाएगी। राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) इन दिनों यक्ष एप में डाटा अपलोड कर अपडेट कर रही है। इस एप में अपराधियों के नाम-पता, फोटो, फिंगर प्रिंट और वॉयस सैंपल के साथ गिरोह का विवरण होगा। रामपुर में जीआरपी थाना प्रभारी ईश्वर चंद ने बताया कि प्रदेश स्तर पर लांच हुआ यक्ष एप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से युक्त है। अनुभाग के सभी अपराधियों के नाम, संपूर्ण पता, थाना, उनकी फोटो (सभी प्रकार से खींची हुई), उनके फिंगर प्रिंट के अलावा उनकी आवाज के सैंपल आदि, इसमें अपडेट किए जा रहे हैं। इससे अपराधी अब कहीं भी अपराध करेगा तो उसकी फोटो अपलोड करते ही उसकी पूरी कुंडली ऑनलाइन सामने आ जाएगी। उन्होंने बताया कि एप के जरिये अपराधियों की निगरानी करना जीआरपी के लिए आसान होगा। बीट पुलिसिंग के जरिये अपराधियों की वर्तमान गतिविधियों को एप पर अपडेट करने का काम अंतिम चरण में है। समय-समय पर अपडेट करनी होगी जानकारी थाना प्रभारी ईश्वर चंद ने बताया कि एप पर दी जाने वाली जानकारी समय-समय पर अपडेट की जाएगी। इसकी भी एप में सुविधा दी गई है। यदि अपराधी की मौत हो जाती है या फिर मामले में वह दोषमुक्त हो जाता है तो तत्काल ऐसे अपराधी का डेटा हटा दिया जाएगा। 358 अपराधी पर रहेगी पूरी निगरानी थाना प्रभारी ने बताया कि यक्ष एप पर अभी 358 अपराधी ऐसे हैं, जिनके बारे में जानकारी का डाटा अपलोड किया गया है। इन सभी की इस यक्ष एप से निगरानी की जाएगी। इसके साथ ही उन अपराधियों के बारे में भी जानकारी एकत्र की जा रही है, जिनके संबंध में कोई जानकारी नहीं मिल रही है। ऐसे अपराधियों को एप पर अनुपस्थित किया गया है। पुलिस लगातार उनकी जानकारी कर रही है। क्या बोले एसपी रेलवे एसपी रेलवे आशुतोष शुक्ला ने बताया कि जीआरपी भी अब यक्ष एप पर अपराधियों का डाटा फीड कर रही है। इससे अपराधियों पर नजर रखी जा सकेगी। इस एप में अपराधियों के नाम-पता, फोटो, फिंगर प्रिंट और वॉयस सैंपल के साथ गिरोह का पूरा विवरण है।

2027 में होगा 21वीं सदी का सबसे लंबा सूर्यग्रहण, 6 मिनट से ज्यादा रहेगा अंधकार

वॉशिंगटन  खगोल वैज्ञानिक और आकाशीय घटनाओं में दिलचस्पी रखने वाले अगस्त 2027 का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जब इस सदी का सबसे लंबा सूर्यग्रहण देखा जा सकेगा। लेकिन उससे पहले इसी साल पूर्ण सूर्यग्रहण की घटना होने जा रही है, जब दिन के कुछ समय के लिए सूरज चंद्रमा के पीछे पूरी तरह से छिप जाएगा। इस दुर्लभ खगोलीय संयोग के चलते दिन में अचानक कुछ समय के लिए अंधेरा छा जाएगा। सूर्यग्रहण उस खगोलीय घटना को कहते है, जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाता है। इसके चलते सूर्य के कोरोना का पूरा या कुछ हिस्सा चंद्रमा के पीछे छिप जाता है, जिससे सूर्य को रोशनी बाधित हो जाती है। पूर्ण सूर्यग्रहण तब होता है, जब चंद्रमा, सूर्य को पूरी तरह से ढंक लेता है। स्पेन में एक सदी बाद दिखाई देगा साल 2026 का पूर्ण सूर्यग्रहण यूरोप के लिए बेहद खास है। यह एक सदी से भी ज्यादा समय में स्पेन की मुख्य भूमि से दिखाई देने वाला पहला सूर्यग्रहण होगा। उत्तरी स्पेन, ग्रीनलैंड, आइसलैंड और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों में लोग पूर्ण ग्रहण का अनुभव करेंगे। यहां सूरज पूरी तरह से छिप जाने के कारण कुछ देर के लिए आसमान में अंधेरा छा जाएगा। ग्रीनलैंड में इसे 2 मिनट से थोड़ा ज्यादा समय तक देखा जा सकेगा। उत्तरी स्पेन में सिर्फ 20 सेकंड तक ही यह दिखाई देगा। इन इलाकों में आंशिक दिखेगा ग्रहण यूरोप, अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका के बड़े इलाकों में आंशिक ग्रहण दिखाई देगा, जहां सूरज का कुछ हिस्सा ही चंद्रमा के पीछे छिपेगा। हालांकि, इसकी छाया भारतीय उपमहाद्वीप से होकर नहीं गुजरेगी, जिसका मतलब है कि भारत में रहने वाले लोग इसे नहीं देख सकेंगे। एक साल बाद सदी का सबसे लंबा सूर्यग्रहण अगस्त 2026 के सूर्यग्रहण के ठीक एक साल बाद 2 अगस्त 2027 को दुनिया 21वीं सदी के सबसे लंबे सूर्यग्रहण का गवाह बनेगी। यह इस सदी में धरती से देखा जाने वाला सबसे लंबा सूर्यग्रहण होगा जो 6 मिनट 23 सेकंड तक चलेगा। इस दौरान दिन के दौरान लगभग अंधेरा हो जाएगा। यह स्पेन से शुरू होगा और अफ्रीका के मोरक्को, अल्जीरिया, मिस्र, सूडान होते हुए मध्य पूर्व तक देखा जाएगा। मिस्र के लक्सर में इसका चरम रूप दिखाई देगा, जहां इसकी अवधि 6.19 सेकंड होगी, जो पूर्णता से थोड़ी ही कम है।  

समुद्री बारूदी सुरंग हटाने वाला MH-53E हेलीकॉप्टर, अमेरिका में रिटायरमेंट की तैयारी

 नई दिल्ली  मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच सामने आया कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंग बिछा रखी हैं, लेकिन अमेरिका ने भी दावा किया कि वो इन बारूदी सुरंगों का लगातार खात्मा कर रहा है और जलमार्ग को सुरक्षित बना रहा है। US नौसेना का इन बारूदी सुरंगों का खात्मा करने वाला ऐसा ही एयरक्राफ्ट इस समय चर्चा में है, जो कि अब अपनी 40 साल की सर्विस के बाद रिटायर किया जा सकता है MH-53E सी ड्रैगन US नेवी का MH-53E सी ड्रैगन एक विशाल हेलीकॉप्टर है, जो कि करीब चार दशकों से 'एयरबोर्न माइन काउंटरमेजर' (हवा से समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने वाले) प्लेटफॉर्म के तौर पर काम कर रहा है। यह हेलीकॉप्टर कमर्शियल शिपिंग और मिलिट्री जहाजों के लिए खतरा बनने वाली समुद्री बारूदी सुरंगों (नेवल माइन्स) का पता लगाने, उन्हें हटाने और बेअसर करने में सक्षम है। यह एयरक्राफ्ट एडवांस्ड सेंसर और माइन काउंटरमेजर सिस्टम का इस्तेमाल करके पानी के नीचे मौजूद माइन्स का पता लगा सकता है और माइनफील्ड्स को साफ कर सकता है और माइन्स को बेअसर करने के ऑपरेशन में मदद कर सकता है। यह हेलीकॉप्टर पानी में बड़े माइन-हंटिंग स्लेज को खींचकर कई समुद्री जहाजों की तुलना में बहुत तेजी से बड़े इलाकों में खोज और सफाई का काम कर सकता है। 'सी ड्रैगन' (Sea Dragon) की इसी क्षमता ने इसे दुनिया के सबसे खास और असरदार एयरबोर्न माइन-क्लियरिंग प्लेटफॉर्म में से एक बना दिया है। क्या-क्या काम कर सकता है ये शक्तिशाली हेलीकॉप्टर? MH-53E अमेरिकी सेना के अब तक के सबसे बड़े हेलीकॉप्टरों में से एक है। इस एयरक्राफ्ट की कुल लंबाई 99 फीट है, जबकि इसकी बॉडी ही 73 फीट से ज्यादा लंबी है। 28 फीट से ज्यादा ऊंचे इस हेलीकॉप्टर का अधिकतम वजन करीब 70,000 पाउंड है। इस हेलीकॉप्टर को तीन जनरल इलेक्ट्रिक T64-GE-419 टर्बोशाफ्ट इंजन से पावर मिलती है, जिनमें से हर एक लगभग 4,750 शाफ्ट हॉर्सपावर पैदा करता है। ये इंजन एयरक्राफ्ट को भारी पेलोड ले जाते समय या खास माइन काउंटरमेजर सिस्टम खींचते समय लगभग 150 नॉट्स (यानी करीब 278 किलोमीटर प्रति घंटा) की रफ्तार से उड़ने में मदद करते हैं। MH-53E सी ड्रैगन माइन वॉरफेयर के अलावा, भारी सामान उठाने और वर्टिकल ऑनबोर्ड डिलीवरी (VOD) जैसे मिशन भी पूरे करता है। यह हेलीकॉप्टर जहाजों और तट पर बने ठिकानों के बीच सैनिकों, गाड़ियों, उपकरणों और जरूरी सामान को लाने-ले जाने में भी सक्षम है। US नेवी क्यों कर रही MH-53E को रिटायर? अपनी खास क्षमताओं के बावजूद, 'सी ड्रैगन' को US नेवी धीरे-धीरे हटाती जा रहा है, क्योंकि नेवी अपनी माइन वॉरफेयर फोर्स (समुद्री बारूदी सुरंगों से निपटने वाली फोर्स) में बड़े बदलाव कर रही है। नेवी की योजना है कि MH-53E जो भी काम करता था, अब इसके कई कामों को MH-60S सीहॉक हेलीकॉप्टर से कराया जाए, जिन्हें एडवांस्ड माइन काउंटरमेजर सिस्टम, बिना क्रू वाले अंडरवॉटर व्हीकल और बिना क्रू वाले सरफेस वेसल का सपोर्ट मिले। US नौसेना में यह बदलाव दिखाता है कि अब सेना ऑटोनॉमस टेक्नोलॉजी और डिस्ट्रिब्यूटेड ऑपरेशन पर ज्यादा ध्यान दे रही है। सी-ड्रैगन को रिटायर करने पर विवाद US नौसेना में इस बदलाव को लेकर भी विवाद सामने आ रहा है। कुछ डिफेंस एनालिस्ट और पुराने ऑपरेटर्स ने सवाल उठाया है कि क्या नए सिस्टम, बड़े संघर्ष के दौरान 'सी ड्रैगन' की तरह तेजी से बड़े माइनफील्ड (बारूदी सुरंगों वाले इलाके) को साफ करने की क्षमता की बराबरी कर पाएंगे या नहीं। रिटायरमेंट के करीब होने के बावजूद, MH-53E अब तक बने सबसे काबिल एयरबोर्न माइन काउंटरमेजर प्लेटफॉर्म में से एक है। अमेरिका के साथ ही बाकी कई देशों के लिए भी होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे जलमार्ग में बिछी नेवल माइन्स (समुद्री बारूदी सुरंगें) ग्लोबल शिपिंग और मिलिट्री ऑपरेशन के लिए गंभीर खतरा बनी हुई हैं।

पंजाब से दो नेताओं को मिल सकती है मंत्रिमंडल में जगह

नई दिल्ली  मोदी कैबिनेट का विस्तार इस महीने के आखिरी में या फिर अगले महीने हो सकता है। केंद्र सरकार के तीसरे कार्यकाल का यह पहला मंत्रिमंडल विस्तार होने जा रहा है। इसमें उन राज्यों पर भी फोकस हो सकता है, जिसमें आने वाले सालों में विधानसभा चुनाव होने हैं। उत्तर प्रदेश, पंजाब जैसे राज्यों में अगले साल ही चुनाव हैं और यूपी में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पार्टी मजबूत स्थिति में है, जबकि पंजाब में अकेले दम पर जीतने की तैयारी कर रही है। इसी वजह से केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को राज्यसभा टिकट नहीं दिया गया और उन्हें संभवत: विधानसभा चुनाव लड़वाया जा सकता है। इसके अलावा भी कई दिग्गज पंजाब के नेताओं को चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी है। वहीं, चर्चाएं हैं कि कैबिनेट विस्तार में पंजाब से दो बड़े नेताओं को जगह मिल सकती है। एक हैं भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और दूसरे अभी हाल ही में आम आदमी पार्टी से आए लोकप्रिय राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा। सूत्रों के अनुसार, इन दोनों नेताओं को पंजाब कोटे से मोदी मंत्रिमंडल में मंत्री बनाया जा सकता है। अमृतसर से आते हैं तरुण चुघ, इस बार MP से जाएंगे राज्यसभा तरुण चुघ की गिनती प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भरोसेमंद नेताओं में होती है। वह पंजाब के अमृतसर जिले से आते हैं और एचआर में एमबीए की डिग्री हासिल की है। वह लंबे समय से आरएसएस से जुड़े रहे हैं और इस समय पार्टी के महासचिव हैं। वहीं, जम्मू-कश्मीर, तेलंगाना, लद्दाख में भाजपा के इनचार्ज हैं। उन्होंने राज्य BJP सचिव और राज्य भाजपा ट्रेनिंग सेल के इंचार्ज के तौर पर काम किया। 1997 में भाजपा युवा विंग पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष और युवा मोर्चा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य के तौर पर भी काम कर चुके हैं। सूत्रों की मानें तो मोदी सरकार में तरुण चुघ को कोई अहम मंत्रालय दिया जा सकता है। युवाओं के मुद्दे उठाने वाले राघव चड्ढा पर भी अटकलें पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट और बड़ी संख्या में युवाओं में लोकप्रिय राघव चड्ढा का भी नाम उन नेताओं में शामिल हैं, जिनके मोदी मंत्रिमंडल में शामिल होने की संभावना है। राघव एक समय आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के करीबी हुआ करते थे, लेकिन पिछले दिनों उन्होंने भाजपा ज्वाइन कर ली। उनको मिलाकर सात आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसदों ने भाजपा का दामन थामा। इसमें हरभजन सिंह, संदीप पाठक, स्वाति मालीवाल समेत तमाम अन्य सांसदों के नाम हैं। राघव लंबे समय से युवाओं पर केंद्रित मुद्दों को सदन में उठाते रहे हैं, जिसकी वजह से सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हुए और इंस्टाग्राम पर उनकी रील्स को लाखों युवाओं ने देखा।  हालांकि, जब आप छोड़ी तो फॉलोवर्स भी कम हुए। हालांकि, अब अगले साल पंजाब विधानसभा चुनाव को देखते हुए और चर्चित चेहरा राघव चड्ढा को अहम मंत्रालय भी मिल सकता है। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को यूपी भाजपा अध्यक्ष बनाया गया है तो ऐसे में उनकी भी मंत्रिमंडल से छुट्टी होना तय है। कयास लगाए जा रहे हैं कि उनकी जगह पर राघव को बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। राघव पढ़े-लिखे और पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और इस मंत्रालय के लिए तमाम योग्य सांसदों में से एक हैं।  

338 गांवों को मिलेगा सिंचाई जल, किसानों को बड़ा लाभ

 जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व एवं जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत के मार्गदर्शन में राज्य सरकार द्वारा ‘अपर हाई लेवल कैनाल परियोजना‘ को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए युद्धस्तर पर कार्य करवाए जा रहे हैं। वागड़ अंचल के किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभर रही इस परियोजना से जनजाति बहुल क्षेत्र में कृषि व्यवस्था एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी। लगभग 2 हजार 500 करोड़ रुपए लागत की परियोजना से बांसवाड़ा जिले की 3 विधानसभा क्षेत्रों (बांसवाड़ा, बागीदौरा एवं कुशलगढ़) की 6 तहसीलों बांसवाड़ा, बागीदौरा, कुशलगढ़, सज्जनगढ़, आनंदपुरी एवं गांगड़तलाई के 338 गांवों की लगभग 42 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को लिफ्ट सिंचाई प्रणाली से जल उपलब्ध होगा। परियोजना से लगभग 3.5 लाख आबादी प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होगी। 102 किमी मुख्य नहर लम्बाई, 22.50 किमी सुरंगें परियोजना में आधुनिक इंजीनियरिंग टेक्नोलाॅजी से नहर नेटवर्क एवं विभिन्न संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। परियोजना की कुल मुख्य नहर लंबाई 102 किलोमीटर है। इसमें 22.50 किलोमीटर लंबाई में सुरंगे/कट एंड कवर संरचनाएं, एक्वाडक्ट तथा नदी को पार करते हुए साइफन निर्मित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही लगभग 230 अन्य नहरी महत्वपूर्ण संरचनाए यथा सुपरपासेज, ड्रेनेज साइफन, रोड ब्रिज, एस्केप कम क्रॉस रेगुलेटर, हेड रेगुलेटर इत्यादि भी परियोजना में शामिल हैं। प्रेशर प्रणाली आधारित कमांड क्षेत्र होगा विकसित परियोजना के तहत अत्याधुनिक प्रेशर प्रणाली आधारित कमांड क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। इससे खेत तक वैज्ञानिक एवं नियंत्रित सिंचाई स्काड़ा प्रणाली से सुनिश्चित हो सकेगी। सिंचित क्षेत्र में प्रत्येक 200 हेक्टेयर के ‘चक स्तर‘ पर लगभग 200 डिग्गियों का निर्माण प्रस्तावित है। मुख्य नहर प्रणाली से इन डिग्गियों तक पानी एमएस व डीआई पाइपलाइन पहुंचाया जाएगा। इसके बाद डिग्गियों से लगभग 5 हजार कि.मी. लंबाई का भूमिगत एचडीपीई पाइपलाइन नेटवर्क विकसित किया जाएगा, जिससे प्रेसराइज्ड इरिगेशन प्रणाली से खेतों तक पानी पहुंचेगा। इस आधुनिक सिंचाई व्यवस्था के अंतर्गत प्रत्येक लगभग 1.25 से 1.50 हेक्टेयर क्षेत्र पर हाइड्रेंट विकसित किए जाएंगे। इन हाइड्रेंट पॉइंट्स तक भूमिगत पाइपलाइन नेटवर्क बिछेगा, जहां से किसान सीधे सिंचाई के लिए जल प्राप्त कर सकेंगे। इस प्रणाली से खेत स्तर तक समान जल वितरण, न्यूनतम जल हानि तथा अधिक दक्ष सिंचाई सुनिश्चित होगी। आधुनिक माइक्रो एवं प्रेसराइज्ड इरिगेशन प्रणाली के जरिए कम पानी में अधिक क्षेत्र की सिंचाई संभव हो सकेगी। किसानों को निरंतर बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। स्काडा प्रणाली से ऑटोमाइज होगी माॅनिटरिंग परियोजना में अत्याधुनिक स्काड़ा (पर्यवेक्षक नियंत्रण और डेटा अधिग्रहण) प्रणाली भी विकसित की जा रही है। इससे सम्पूर्ण प्रेशर प्रणाली आधारित तंत्र का संचालन एवं मॉनिटरिंग पूर्णतः ऑटोमाइज्ड होगी। इस प्रणाली से जल वितरण को समान रूप से सुनिश्चित करने, दबाव एवं प्रवाह को स्वचालित रूप से नियंत्रित करने तथा रियल टाइम डेटा मॉनिटरिंग एवं संचालन नियंत्रण की सुविधा उपलब्ध होगी। इस प्रणाली से पम्पिंग स्टेशन, रिलीफ वाल्व, हाइड्रेंट एवं विभिन्न शाखाओं में जल प्रवाह की सतत निगरानी संभव होगी। वर्तमान में नहर की 42 किलोमीटर में काम किया जा रहा है। इनटेक स्ट्रक्चर एवं स्लूइस बैरल का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है। टनल कार्य, एक्वाडक्ट, साइफन, कट एंड कवर के साथ नहर से डिग्गी तक भूमिगत पाइपलाइन नेटवर्क निर्माण कार्य भी विभिन्न स्थानों पर निरंतर जारी है। नियमित माॅनिटरिंग से मिली गति परियोजना की नियमित रूप से मॉनिटरिंग की जा रही है। समयबद्ध और पारदर्शिता से कार्यों को पूर्ण करने के लिए निर्माण एजेंसियों को विभागीय निर्देश दिए गए हैं। इस परियोजना के लिए 78 गांवों की लगभग 270 हेक्टेयर निजी भूमि का नियमानुसार अधिग्रहण किया जा रहा है। अब तक 67 गांवों की 211 हेक्टेयर भूमि के लिए लगभग 47 करोड़ रुपए राशि के अवार्ड पारित हो चुके हैं। लगभग 15 करोड़ रुपए मुआवजा राशि वितरित की गई है। शेष अधिग्रहण एवं वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रियाएं भी तेजी से हो रही हैं। सिंचाई के लिए वर्षभर मिलेगा जल जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने कहा कि आगामी वर्षों में यह परियोजना बांसवाड़ा जिले की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाली मुख्य सिंचाई परियोजनाओं में शामिल होगी। इसके पूर्ण होने के बाद क्षेत्र के किसानों को वर्षभर सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी। मक्का, गेहूं, दलहन, तिलहन एवं बागवानी फसलों का रकबा बढ़ेगा और किसानों की आय में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि इससे भू-जल स्तर सुधार, जल संरक्षण एवं ग्रामीण क्षेत्र के समग्र विकास को भी मजबूती मिलेगी। साथ ही, यह परियोजना वागड़ क्षेत्र के जनजाति बहुल इलाकों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में मील का पत्थर साबित होगी।

जनसंख्या में बड़ा बदलाव: भारत में प्रजनन दर 1.9, विशेषज्ञों ने जताई नई चुनौती की चेतावनी

नई दिल्ली टेस्ला और स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क (Elon Musk) ने भारत की जनसंख्या संबंधी बदलती तस्वीर पर चिंता जताई है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर हालिया प्रजनन दर के आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए मस्क ने कहा कि भारत की जन्म दर अब रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे पहुंच चुकी है और देश के शिक्षित वर्ग में यह दर कई वर्ष पहले ही इस स्तर से नीचे आ गई थी. मस्क ने अपने पोस्ट में लिखा, 'भारत की जन्म दर रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे गिर चुकी है. सबसे अधिक शिक्षित आबादी में यह दर कई साल पहले ही रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे पहुंच गई थी.' उनकी यह टिप्पणी 2024 के सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) की रिपोर्ट के बाद आई है. रिपोर्ट के मुताबिक भारत की कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate-TFR) घटकर 2.1 से 1.9 बच्चे प्रति महिला रह गई है. क्या होता है रिप्लेसमेंट लेवल? जनसंख्या विशेषज्ञों के अनुसार 2.1 बच्चे प्रति महिला की प्रजनन दर को रिप्लेसमेंट लेवल माना जाता है. इसका अर्थ है कि एक जनरेशन (पीढ़ी) अपनी अगली जनरेशन को बिना माइग्रेशन (प्रवासन) के स्थिर रूप से रिप्लेस कर सके. यदि किसी देश की प्रजनन दर लंबे समय तक रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे बनी रहती है, तो जनसंख्या वृद्धि धीमी पड़ जाती है और भविष्य में नकारात्मक भी हो सकती है. जनसंख्या वृद्धि के नकारात्मक (Negative Population Growth) होने का मतलब है कि किसी देश या क्षेत्र में लोगों की कुल संख्या बढ़ने के बजाय घटने लगे. सरल शब्दों में: यदि जन्म लेने वाले लोगों की संख्या + आने वाले प्रवासी (Immigrants), मरने वाले लोगों की संख्या + बाहर जाने वाले प्रवासी (Emigrants) से कम हो जाए, तो जनसंख्या वृद्धि दर नकारात्मक हो जाती है. नेगेटिव पॉपुलेशन ग्रोथ क्या है? उदाहरण के लिए: एक साल में 10 लाख बच्चे पैदा हुए और 12 लाख लोगों की मृत्यु हो गई. प्रवासन का प्रभाव शून्य रहा. मतलब दूसरे देश से कोई प्रवासी नहीं आया और अपने देश से कोई बाहर नहीं गया तो ऐसी स्थिति में आबादी 2 लाख कम हो जाएगी. इसे नकारात्मक जनसंख्या वृद्धि कहा जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार कम प्रजनन दर से आबादी के बूढ़े होने, वर्क फोर्स कम होने, पेंशन, हेल्थ सर्विस, और सोशल वेलफेयर पर खर्च बढ़ने से अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने जैसी चुनौतियां पैदा हो सकती हैं. कम बच्चे पैदा होने से समाज में बुजुर्गों का अनुपात बढ़ जाता है. युवाओं की संख्या कम होने से उद्योगों और सेवाओं में श्रमिकों की कमी हो सकती है. वर्क फोर्स की कमी का मतलब प्राडक्शन और टैक्स कलेक्शन में कमी आना. अधिक बुजुर्ग आबादी के कारण सरकारों को पेंशन और स्वास्थ्य सेवाओं पर ज्यादा खर्च करना पड़ता है. यानी ऐसी स्थिति में सरकार की आमदनी घटती है और खर्चा बढ़ जाता है. भारत में जनसांख्यिकीय बदलाव संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) की 2025 की 'स्टेट ऑफ वर्ल्ड पॉपुलेशन' रिपोर्ट में भी भारत की प्रजनन दर 1.9 बच्चे प्रति महिला बताई गई है, जो रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 से कम है. हालांकि 1.46 अरब से अधिक आबादी के साथ भारत अब भी दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है, लेकिन नए आंकड़े संकेत देते हैं कि देश अब जनसांख्यिकीय संक्रमण (Demographic Transition) के नए दौर में प्रवेश कर रहा है. इस चरण की पहचान छोटे परिवारों, कम प्रजनन दर और धीमी जनसंख्या वृद्धि से होती है. जन्म दर और प्रजनन दर में अंतर अक्सर जन्म दर (Birth Rate) और प्रजनन दर (Fertility Rate) को एक ही माना जाता है, लेकिन दोनों अलग-अलग संकेतक हैं. जन्म दर (Birth Rate): किसी वर्ष में प्रति 1,000 आबादी पर होने वाले जीवित जन्मों की संख्या. कुल प्रजनन दर (TFR): एक महिला के जीवनकाल में औसतन पैदा होने वाले बच्चों की संख्या है. दोनों संकेतक आपस में जुड़े हुए हैं. जब प्रजनन दर लगातार घटती है तो समय के साथ जन्म दर भी कम होती है, जिससे जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ जाती है और समाज में बुजुर्ग आबादी का अनुपात बढ़ने लगता है. सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में सिर्फ- बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और झारखंड ही ऐसे राज्य हैं जहां प्रजनन दर अब भी रिप्लेसमेंट लेवल से ऊपर बनी हुई है.