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Pending Cases पर बड़ी पहल, बिहार में 21 अगस्त से लगेगी विशेष लोक अदालत, समझौते से होगा समाधान

बिहार. 'पैन इंडिया' के तहत जिले में सुप्रीम कोर्ट में लंबित सुलहनीय मामलों के निपटारे के लिए 'विशेष लोक अदालत समाधान समारोह' का आयोजन किया जाएगा। नई दिल्ली स्थित सुप्रीम कोर्ट के तत्वावधान में 21, 22 और 23 अगस्त 2026 को इसका आयोजन होगा। विभिन्न राज्यों से सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के पक्षकारों के लिए आपसी सुलह के आधार पर अपना विवाद खत्म करने का यह एक सुनहरा अवसर है। ऐसे पक्षकार अपने मुकदमों के निपटारे के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) के माध्यम से गूगल फॉर्म भरकर आवेदन कर सकते हैं, जिसकी अंतिम तिथि बढ़ाकर अब 31 जुलाई कर दी गई है। डीएलएसए के सचिव सह सब-जज राजेश कुमार गौरव ने बताया कि नालंदा जिले के अंतर्गत ऐसे कुल 23 वादों (मामलों) की सूची भेजी गई है, जिसमें पक्षकार अन्य जिलों से भी संबंधित हैं। सभी पक्षकारों को जिला प्राधिकार द्वारा नोटिस के माध्यम से सूचना भेज दी गई है, ताकि वे उपस्थित होकर अपनी बात रख सकें और उभय पक्षों (दोनों पक्षों) के बीच सुलह-वार्ता की प्रक्रिया आगे बढ़ सके। इसी क्रम में अब तक कुल 53 पक्षकार जिला विधिक सेवा प्राधिकार के समक्ष उपस्थित होकर अपनी बात रख चुके हैं। प्राधिकार प्रतिदिन इस समारोह की सफलता के लिए काम कर रहा है, ताकि अधिक से अधिक वादों का निपटारा हो सके। दोनों पक्षों को जोड़ने का भी हरसंभव प्रयास किया जा रहा है, ताकि सुलह-समझौते में पूरी सफलता मिले।

विगत 05 दिनों में लगभग 1 करोड़ 62 लाख रूपये से अधिक मूल्य के मादक पदार्थ जब्त, अनेक तस्कर गिरफ्तार

भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेशभर में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी एवं बिक्री के विरुद्ध लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। विगत 5 दिनों में विभिन्न जिलों की पुलिस ने अलग-अलग मामलों में त्वरित एवं सुनियोजित कार्रवाई करते हुए 1 करोड़ 62 लाख रूपये से अधिक के अवैध मादक पदार्थ गांजा, स्मैक, एमडी ड्रग्स, डोडाचूरा, नशीले इंजेक्शन सहित अन्य सामग्री जब्त कर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आगर मालवा कोतवाली थाना पुलिस ने कंटेनर में बनाए गए विशेष लोहे के गुप्त चैम्बर से 3 क्विंटल 21 किलोग्राम अवैध डोडाचूरा बरामद कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया। कार्रवाई में लगभग 71 लाख रुपये मूल्य का डोडाचूरा एवं कंटेनर जब्त किया गया। शिवपुरी पुलिस ने थाना कोतवाली क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को स्मैक का अवैध विक्रय करते हुए गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 62.28 ग्राम स्मैक, एक कार एवं मोबाइल फोन सहित लगभग 22 लाख मूल्य की संपत्ति जब्त की है। मंदसौर मल्हारगढ़ पुलिस ने बोलेरो वाहन में बनाए गए गुप्त स्थानों से 173 किलो 380 ग्राम डोडाचूरा बरामद कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। एक अन्य कार्रवाई में 400 ग्राम एमडी ड्रग्स के साथ दो आरोपी गिरफ्तार किए। वहीं शामगढ़ पुलिस ने हरियाणा एवं पंजाब के दो तस्करों को गिरफ्तार कर 60 किलोग्राम डोडाचूरा जब्त किया। इस प्रकार तीनों कार्रवाई में मंदसौर पुलिस ने लगभग 17 लाख 66 हजार रुपये मूल्य का मादक पदार्थ एवं अन्य संपत्ति जब्त की है। उज्जैन पुलिस ने मादक पदार्थ तस्करी के विरुद्ध दो अलग-अलग कार्रवाइयों में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की। चिमनगंज मंडी थाना पुलिस ने 1 किलो 15 ग्राम एमडी ड्रग्स (मेफेड्रोन) के साथ दो अंतर्राज्यीय तस्करों को गिरफ्तार कर लगभग 15 लाख रूपये की सामग्री जब्त की है। वहीं बड़नगर पुलिस ने एक अंतर्राज्यीय गांजा तस्कर को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 5 किलो 165 ग्राम अवैध गांजा बरामद किया, जिसकी अनुमानित कीमत 1 लाख 29 हजार रूपये है। दोनों कार्रवाइयों में पुलिस ने 16 लाख 29 हजार रूपये के मादक पदार्थ जब्त किए हैं। जबलपुर पुलिस की बेलबाग, अधारताल एवं क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने ड्रग्स तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया। कार्रवाई के दौरान 6600 नग नशीले इंजेक्शन, 5 मोबाइल फोन एवं घटना में प्रयुक्त ई-रिक्शा जब्त किया गया। जब्त सामग्री की अनुमानित कीमत लगभग 15 लाख रूपये है। रतलाम पुलिस ने मुखबिर सूचना पर कार्रवाई करते हुए बीड़ी के कार्टून में छिपाकर ले जाए जा रहे 56.340 किलोग्राम डोडाचूरा  कीमत 2 लाख 81 हजार 700 रूपये के साथ एक तस्कर को गिरफ्तार किया। वहीं थाना रिंगनोद की माननखेड़ा चौकी पुलिस ने मुखबिर सूचना पर कार्रवाई करते हुए कार सहित 100 किलोग्राम अवैध डोडाचूरा  कीमत लगभग 7 लाख रूपये के साथ 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस प्रकार लगभग 9 लाख 81 हजार रूपये की संपत्ति जब्त की है। गुना मृगवास थाना पुलिस ने राजस्थान से स्मैक तस्करी कर रहे अंतर्राज्यीय तस्कर पति-पत्नी को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 51.10 ग्राम स्मैक एवं तस्करी में प्रयुक्त मोटरसाइकिल सहित लगभग 6 लाख रूपए की संपत्ति जब्त की है। वहीं राघौगढ़ थाना पुलिस ने एक अन्य नशा तस्कर को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 10.4 ग्राम स्मैक एवं मोटरसाइकिल सहित 2 लाख 4 हजार रूपये की संपत्ति जब्त की है। दोनों कार्रवाइयों में पुलिस ने लगभग 8 लाख 4 हजार रूपये की संपत्ति जब्त की है। कटनी पुलिस ने मादक पदार्थो के विरूद्ध कार्रवाई करते हुए 11.06 ग्राम स्मैक बरामद कर एक पुरुष एवं एक महिला को गिरफ्तार कर लगभग 1 लाख 10 हजार रूपये की सामग्री जब्त की है। सागर जिले की मोतीनगर पुलिस ने एमडी ड्रग्स तस्करी नेटवर्क का खुलासा करते हुए एक पुरुष एवं एक महिला आरोपी को गिरफ्तार किया। पुलिस ने उनके कब्जे से 16.45 ग्राम एमडी ड्रग्स (मेफेड्रोन) बरामद की, जिसकी अनुमानित कीमत 75 हजार रूपए है। सीधी सेमरिया थाना पुलिस ने एक मेडिकल स्टोर पर कार्रवाई कर 658 ट्रामाडोल युक्त नशीली गोलियां जब्त कर संचालक को गिरफ्तार किया। वहीं अमिलिया पुलिस ने 26 शीशी कोडीन युक्त ऑनरेक्स कफ सिरप एवं मोटरसाइकिल सहित एक आरोपी को गिरफ्तार कर 80 हजार 400 रूपये की संपत्ति जब्त की है। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई निरंतर जारी है तथा इस प्रकार के अवैध कार्यों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध कठोरतम वैधानिक कार्रवाई भी की जा रही है। मध्यप्रदेश पुलिस आमजन से अपील करती है कि इस प्रकार की किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल नजदीकी थाना अथवा डायल-112 को दें।  

रेलवे की लापरवाही से यात्रियों में भ्रम, अनाउंसमेंट और ट्रेन में निकला अंतर

सतना  रेलवे यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को लेकर चाहे जितने दावे करे, लेकिन बुधवार को सतना रेलवे स्टेशन पर हुई एक बड़ी लापरवाही ने इन दावों की पोल खोल दी। स्टेशन पर उद्घोषणा प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड पर जिस ट्रेन को इंटरसिटी एक्सप्रेस बताया जा रहा था, प्लेटफॉर्म पर उसके स्थान पर महाकौशल एक्सप्रेस पहुंच गई। इस गड़बड़ी से यात्रियों में भारी भ्रम की स्थिति निर्मित हो गई। यह गड़बड़ी उस वक्त हुई जब प्लेटफार्म नंबर एक पर यात्री इंटरसिटी एक्सप्रेस का इंतजार कर रहे थे। स्टेशन पर लगातार इंटरसिटी एक्सप्रेस के आगमन की घोषणा की जा रही थी। इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड पर भी इंटरसिटी का नाम प्रदर्शित हो रहा था। उद्घोषणा और डिस्प्ले पर भरोसा कर बड़ी संख्या में यात्री अपने-अपने सामान के साथ ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। गलत उद्घोषणा से यात्रियों में मची अफरा-तफरी लेकिन जैसे ही ट्रेन प्लेटफॉर्म पर पहुंची तो वह महाकौशल एक्सप्रेस निकली। अचानक हुए इस घटनाक्रम से यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। कई यात्री भ्रमित होकर ट्रेन में चढ़ने और उतरने को लेकर असमंजस में दिखाई दिए। दरअसल रेलवे की उद्घोषणा प्रणाली और डिस्प्ले बोर्ड ही उनकी जानकारी का प्रमुख माध्यम होते हैं। यदि इन्हीं में गलत जानकारी प्रसारित की जाए तो यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है और किसी दिन यह लापरवाही बड़ी दुर्घटना या गंभीर अव्यवस्था का कारण भी बन सकती है। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर स्टेशन प्रबंधन की निगरानी में इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई? क्या उद्घोषणा कक्ष और कंट्रोल सिस्टम के बीच समन्वय का अभाव है या फिर कर्मचारियों की लापरवाही इसका कारण बनी? फिलहाल रेलवे प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।  

Punjab News: नगर निगम कार्यालय में हंगामा, अकाली पार्षद और SE के बीच विवाद ने पकड़ा तूल

लुधियाना. नगर निगम लुधियाना जोन बी कार्यालय में बुधवार को उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब विकास कार्यों से जुड़ी एक फाइल को लेकर पार्षद और नगर निगम अधिकारी के बीच विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि मामला हाथापाई तक पहुंच गया। आरोप है कि वार्ड नंबर 20 से पार्षद कमल अरोड़ा ने सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर प्रवीण सिंगला को उनके कार्यालय में थप्पड़ जड़ दिया। घटना के बाद निगम कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कर्मचारी भी हैरान रह गए। जानकारी के अनुसार पार्षद कमल अरोड़ा अपने वार्ड में चल रहे विकास कार्यों और उनसे संबंधित लंबित फाइलों के मामले को लेकर नगर निगम कार्यालय पहुंचे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी लंबे समय से विकास कार्यों की फाइलों को लंबित रख रहे हैं, जिससे क्षेत्र के लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दोनों पक्षों में बहस के बाद बिगड़ा माहौल पार्षद का कहना है कि वह कई बार अधिकारियों से विकास कार्यों को गति देने और फाइलों को मंजूरी देने की मांग कर चुके हैं, लेकिन उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा था। इसी मुद्दे को लेकर वह सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर से मिलने पहुंचे थे। बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई, जो देखते ही देखते तीखी नोकझोंक में बदल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विवाद इतना बढ़ गया कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। आरोप है कि इसी दौरान पार्षद ने अधिकारी को थप्पड़ मार दिया। कुछ लोगों का यह भी दावा है कि विवाद के दौरान कार्यालय में रखी एक कुर्सी को भी नुकसान पहुंचा। हालांकि घटना को लेकर अलग-अलग पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। घटना के बाद सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर प्रवीण सिंगला कार्यालय से बाहर निकल गए।

भारत मंडपम में आयोजित बैठक में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर भारत मंडपम में आयोजित बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री  मोदी को बधाई देते हुए कहा कि पिछले 12 वर्ष देश के जनजातीय समाज के सम्मान, सशक्तिकरण और विकास के लिए स्वर्णकाल साबित हुए हैं। मुख्यमंत्री  साय ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और प्रभावी रणनीति के कारण छत्तीसगढ़ को दशकों पुरानी नक्सल समस्या से निर्णायक मुक्ति मिली। उन्होंने कहा कि नक्सल हिंसा से सबसे अधिक प्रभावित जनजातीय समुदाय अब शांति, सुरक्षा और विकास के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। बस्तर में ‘नियद नेल्ला नार’ और ‘बस्तर मुन्ने’ जैसे अभियानों के माध्यम से योजनाओं का सैचुरेशन मोड में क्रियान्वयन किया जा रहा है तथा सुरक्षा शिविरों को ‘सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने जनजातीय समाज को नई पहचान और सम्मान दिया है। भगवान बिरसा मुंडा के जन्मदिवस को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत हो या धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान, इन पहलों ने आदिवासी क्षेत्रों के विकास को नई गति दी है। उन्होंने कहा कि देश को पहली जनजातीय महिला राष्ट्रपति के रूप में मती द्रौपदी मुर्मु का नेतृत्व करोड़ों आदिवासियों के सम्मान और स्वाभिमान का प्रतीक है।  साय ने कहा कि पीएम जनमन योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजातियों के दूरस्थ इलाकों तक पहली बार बिजली, सड़क, पेयजल और आवास जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंच रही हैं। वहीं बस्तर में सड़क, रेल और सार्वजनिक परिवहन के विस्तार से कनेक्टिविटी की वर्षों पुरानी चुनौतियां दूर हो रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। नवा रायपुर में ट्राइबल म्यूजियम तथा शहीद वीर नारायण सिंह जनजातीय संग्रहालय का निर्माण कराया गया है। बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों ने दुनिया के सामने बदलते, मुस्कुराते और हिंसा-मुक्त बस्तर की नई तस्वीर प्रस्तुत की है। उन्होंने कहा कि पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, लघु वनोपज की रिकॉर्ड खरीदी, किसानों को धान, दलहन और तिलहन का बेहतर मूल्य तथा कृषक उन्नति योजना जैसी पहलें ग्रामीण और जनजातीय अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही हैं। वहीं प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना के माध्यम से राज्य के 2 करोड़ 45 लाख जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने आदिवासियों को केवल योजनाओं का लाभार्थी नहीं बनाया, बल्कि उन्हें भारत के विकास का सक्रिय सहभागी बनाया है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री के नेतृत्व में विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती रहेगी।

जबलपुर-ग्वालियर समेत कई जिलों में बरसेंगे बादल, मौसम विभाग ने दी चेतावनी

भोपाल  मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक से पहले छतरपुर और छिंदवाड़ा में लू चली। बुधवार को छतरपुर जिले के खजुराहो का पारा 45.0 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ प्रदेश में सबसे गर्म रहा, वहीं नौगांव में भी पारा 44.6 डिग्री दर्ज किया गया। छिंदवाड़ा में दिन का तापमान सामान्य से 4.5 डिग्री अधिक यानी 40.8 डिग्री रिकॉर्ड हुआ, जिससे लोग लू के थपेड़ों से बेहाल रहे। प्रदेश के पश्चिमी इलाकों में अधिकतम तापमान 34.0 से 43.6 डिग्री और पूर्वी क्षेत्रों में 39.0 से 45.0 डिग्री के बीच दर्ज किया गया। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार अगले दो दिनों तक प्रदेश के तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। इसके बाद पारे में 2 से 3 डिग्री गिरावट की संभावना जताई गई है। सिवनी में 3.0 मिलीमीटर हुई वर्षा और 70 किमी की रफ्तार से चली आंधी मौसम केंद्र के अनुसार बुधवार को सिवनी में 3.0 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, डिंडोरी, कटनी, सतना, मैहर, पन्ना और उमरिया में 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चली और बिजली चमकी। वहीं बैतूल, मंडला, अनूपपुर और शहडोल में 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं। शाम होते–होते जबलपुर, छतरपुर, दमोह, उज्जैन, रतलाम सहित कई जिलों में मौसम बदल गया। आज यहां चलेंगी तेज हवाएं, येलो अलर्ट जारी गुरुवार को रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, ग्वालियर, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सागर और छतरपुर सहित करीब 34 जिलों में गरज–चमक के साथ वज्रपात और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने की आशंका जताई गई है। इसके लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। प्रदेश के चार बड़े शहरों का तापमान शहर अधिकतम न्यूनतम भोपाल 40.4 27.6 इंदौर 38.9 25.4 ग्वालियर 43.1 29.4 जबलपुर 40.5 25.0  

Bastar News: तेंदूपत्ता खरीदी ने रचा इतिहास, 50 हजार संग्राहकों की दूरी बनी चिंता का विषय

जगदलपुर. बस्तर संभाग में इस वर्ष तेंदूपत्ता संग्रहण को लेकर रिकॉर्ड आंकड़े सामने आए हैं। वन विभाग ने दावा किया है कि जगदलपुर सर्किल के चार जिलों में 1 लाख 74 हजार मानक बोरा तेंदूपत्ता खरीदा गया है, जिससे करीब 96 करोड़ रुपये की राशि संग्राहकों तक पहुंची है। हालांकि इन दावों के बीच कई ऐसे तथ्य भी सामने आए हैं, जो तेंदूपत्ता कारोबार की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार क्षेत्र में लगभग 1 लाख 75 हजार संग्राहक पंजीकृत हैं, लेकिन तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य में केवल 1 लाख 25 हजार लोग ही शामिल हुए। यानी करीब 50 हजार पंजीकृत संग्राहकों ने इस बार तेंदूपत्ता तोड़ने का काम नहीं किया। इतनी बड़ी संख्या में संग्राहकों के प्रक्रिया से बाहर रहने के पीछे के कारणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय स्तर पर मजदूरी, मौसम और संग्रहण से जुड़ी अन्य चुनौतियों को इसकी एक वजह माना जा रहा है। वन विभाग ने भी माना है कि बेमौसम बारिश का असर संग्रहण पर पड़ा। बारिश के कारण 60 से 70 गांवों में तेंदूपत्ता संग्रहण प्रभावित हुआ। अधिकारियों का कहना है कि यदि मौसम अनुकूल रहता तो खरीदी और संग्रहण का आंकड़ा इससे भी अधिक हो सकता था। इसके अलावा 1702 फड़ों के लक्ष्य के मुकाबले केवल 1600 फड़ों में ही संग्रहण कार्य हो पाया, जिससे कई इलाकों में व्यवस्था संबंधी चुनौतियां भी उजागर हुई हैं। अवैध कारोबार ने भी बढ़ाई प्रशासन की चिंता इस बीच तेंदूपत्ता के अवैध कारोबार ने भी प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। सुकमा-ओडिशा सीमा क्षेत्र में वन विभाग ने 12 अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर लाखों रुपये मूल्य का तेंदूपत्ता जब्त किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि तेंदूपत्ता को अवैध रूप से ओडिशा और तेलंगाना की ओर खपाने की कोशिश की जा रही थी। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से यह संकेत मिल रहा है कि तेंदूपत्ता व्यापार में तस्करी का नेटवर्क अब भी सक्रिय है। बस्तर में तेंदूपत्ता ग्रामीण और वन आश्रित परिवारों की आय का प्रमुख स्रोत माना जाता है। ऐसे में रिकॉर्ड खरीदी और करोड़ों रुपये के भुगतान के दावों के बावजूद आधे लाख संग्राहकों का प्रक्रिया से बाहर रहना, मौसम की मार से प्रभावित गांवों की संख्या और तस्करी की घटनाएं कई सवाल खड़े कर रही हैं। जानकारों का मानना है कि केवल रिकॉर्ड आंकड़े सफलता की पूरी तस्वीर नहीं बताते, बल्कि यह भी जरूरी है कि संग्रहण से जुड़े सभी हितग्राहियों की भागीदारी सुनिश्चित हो और अवैध कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जाए। अब निगाहें इस बात पर हैं कि वन विभाग और सरकार इन चुनौतियों का समाधान किस तरह करती है, ताकि तेंदूपत्ता कारोबार का लाभ वास्तव में अधिक से अधिक वनवासी परिवारों तक पहुंच सके और रिकॉर्ड खरीदी के दावों के साथ जमीनी स्तर पर भी सफलता दिखाई दे।

ऊर्जा सुरक्षा पर भारत का बड़ा दांव, 40 हजार करोड़ की परियोजना से तेल-गैस संकट का मिलेगा समाधान

नई दिल्ली ईरान की अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जंग एक बार फिर जोर पकड़ती दिख रही है. अमेरिका ने अपने अपाचे हेलिकॉप्टर पर हमले पर बदला लेने के लिए होर्मुज के पास ईरान के अहम ठिकानों पर बुधवार तड़के (भारतीय समय) हमला कर दिया. वहीं ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी ने बहरीन स्थित अमेरिका के पांचवें बेड़े को निशाना बनाने का दावा किया है. अमेरिका और ईरान के बीच इस ताजा वार और पलटवार ने होर्मुज स्ट्रेट के जल्द दोबारा खुलने की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. होर्मुज की नाकेबंदी की वजह से मंडराते तेल-गैस के संकट के बीच भारत एक ऐसे मेगा प्रोजेक्ट पर गंभीरता से कदम आगे बढ़ा रहा है, जो आने वाले दशकों के लिए देश की ऊर्जा सुरक्षा की तस्वीर बदल सकता है. ओमान से गुजरात तक अरब सागर के नीचे लगभग 2,000 किलोमीटर लंबी डीप-सी गैस पाइपलाइन बिछाने की योजना को फिर से गति मिली है. करीब 40,000 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को भारत के लिए ‘होर्मुज संकट का स्थायी समाधान’ माना जा रहा है।  भारत अपनी जरूरत का 50 प्रतिशत से ज्यादा प्राकृतिक गैस आयात करता है. इसका बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से एलएनजी (LNG) के रूप में आता है और होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है. यह वही समुद्री रास्ता है, जहां हाल के महीनों में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. अगर किसी वजह से होर्मुज स्ट्रेट बंद होता है या वहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो भारत समेत दुनिया के कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर पड़ सकता है।  ओमान से गुजरात तक पाइपलाइन यही वजह है कि भारत अब ओमान से सीधे गैस लाने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रहा है. प्रस्तावित पाइपलाइन ओमान को सीधे गुजरात से जोड़ेगी और इसके जरिए गैस समुद्र के रास्ते टैंकरों में लाने की बजाय सीधे पाइपलाइन से भारत पहुंचेगी. इससे न केवल सप्लाई अधिक स्थिर होगी बल्कि समुद्री संकटों का असर भी काफी हद तक कम हो जाएगा।  इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसकी तकनीकी जटिलता है. पाइपलाइन का कुछ हिस्सा समुद्र तल से 3,000 मीटर से भी अधिक गहराई में बिछाया जाएगा. इतनी गहराई पर पाइपलाइन निर्माण दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण इंजीनियरिंग परियोजनाओं में गिना जाता है. अगर यह योजना सफल होती है तो यह दुनिया की सबसे गहरी समुद्री गैस पाइपलाइनों में से एक होगी।  इस प्रोजेक्ट को लंबे समय से बढ़ावा देने वाली कंपनी साउथ एशिया गैस एंटरप्राइज (SAGE) का दावा है कि वह पहले ही तकनीकी और वित्तीय अध्ययन के साथ-साथ समुद्र तल का सर्वेक्षण भी कर चुकी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक पेट्रोलियम मंत्रालय ने अब सरकारी कंपनियों जैसे गेल, इंडिया ऑयल कॉर्पोरेशन और इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड को विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का काम सौंपा है।  गैस आयात हो जाएगा सस्ता एनर्जी एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह परियोजना सिर्फ गैस आयात का माध्यम नहीं होगी, बल्कि भारत और खाड़ी देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को भी नई मजबूती देगी. ओमान को लंबे समय के लिए स्थायी ग्राहक मिलेगा, जबकि भारत को गैस की सुरक्षित और लगातार आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।  वर्तमान में एलएनजी आयात की प्रक्रिया काफी लंबी और महंगी है. पहले गैस को तरल रूप में बदला जाता है, फिर विशेष जहाजों से हजारों किलोमीटर दूर ले जाया जाता है और भारत पहुंचने पर दोबारा गैस में परिवर्तित किया जाता है. इस पूरी प्रक्रिया में भारी खर्च आता है. प्रस्तावित पाइपलाइन के जरिए गैस सीधे स्रोत से उपभोक्ता तक पहुंचेगी. शुरुआती अनुमान के मुताबिक गैस परिवहन की लागत 2 से 2.25 डॉलर प्रति MMBtu के बीच रह सकती है, जो कई परिस्थितियों में एलएनजी आयात से प्रतिस्पर्धी साबित हो सकती है।  इस प्रोजेक्ट में क्या है रोड़ा? हालांकि इस महत्वाकांक्षी परियोजना के सामने कई बड़ी चुनौतियां भी हैं. सबसे बड़ी चुनौती इंजीनियरिंग की है. समुद्र की 3,000 मीटर गहराई पर पाइपलाइन बिछाना और उसका रखरखाव करना बेहद जटिल और महंगा काम होगा. किसी भी तकनीकी खराबी या रिसाव की स्थिति में मरम्मत करना आसान नहीं होगा. इसके लिए विशेष जहाजों और अत्याधुनिक उपकरणों की जरूरत पड़ेगी।  दूसरी बड़ी चुनौती लागत और फंडिंग की है. 40,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत शुरुआती आंकड़ा है. ऐसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में अक्सर लागत बढ़ जाती है. इसके अलावा यह भी तय करना होगा कि निवेश कौन करेगा, लागत का बंटवारा कैसे होगा और गैस खरीद के दीर्घकालिक समझौते किस प्रकार होंगे।  तीन दशक से अटका था काम फिर भी हालात बदल चुके हैं. तीन दशक पहले जब यह परियोजना पहली बार सामने आई थी, तब तकनीक और आर्थिक व्यवहार्यता सबसे बड़ी बाधा थीं. लेकिन अब ऊर्जा सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा बन चुकी है. रूस-यूक्रेन युद्ध, लाल सागर संकट और अब होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने यह दिखा दिया है कि किसी एक समुद्री मार्ग पर अत्यधिक निर्भरता कितनी जोखिम भरी हो सकती है।  विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह परियोजना सफल होती है तो भविष्य में इसी नेटवर्क का इस्तेमाल हाइड्रोजन जैसे स्वच्छ ईंधनों के परिवहन के लिए भी किया जा सकता है. यानी यह सिर्फ आज की जरूरत नहीं, बल्कि आने वाले दशकों की ऊर्जा रणनीति का आधार बन सकती है।  यही कारण है कि ओमान-गुजरात डीप-सी गैस पाइपलाइन को सिर्फ एक ऊर्जा परियोजना नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा स्वतंत्रता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. होर्मुज संकट ने जिस खतरे की ओर दुनिया का ध्यान खींचा है, भारत उसी का स्थायी समाधान खोजने में जुटा हुआ है. अगर यह मेगा प्लान जमीन पर उतरता है, तो देश की तेल-गैस आपूर्ति पहले की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद हो सकती है।   

84 घंटे तक उग्रवादियों से लोहा लेने वाले मेजर अर्शदीप गिल को मिला कीर्ति चक्र सम्मान

 मोहाली  सेक्टर 79 मोहाली के भारतीय सेना के जांबाज अधिकारी मेजर अर्शदीप सिंह गिल को उनकी असाधारण वीरता और कर्तव्यनिष्ठा के लिए देश के दूसरे सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह में प्रदान किया। मेजर अर्शदीप सिंह गिल, जो द आर्मर्ड कोर और 1 असम राइफल्स से संबद्ध हैं, ने मणिपुर में एक चुनौतीपूर्ण और जोखिमपूर्ण सैन्य अभियान के दौरान अद्वितीय साहस, नेतृत्व क्षमता और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया। करीब 84 घंटे तक चले ऑपरेशन में उन्होंने अपनी टीम का नेतृत्व करते हुए आतंकवादियों के खिलाफ सफल कार्रवाई को अंजाम दिया और मिशन को सफलता पूर्वक पूरा किया। सेना के सूत्रों के अनुसार, अभियान के दौरान मेजर गिल ने विपरीत परिस्थितियों में भी असाधारण वीरता का प्रदर्शन किया, जिसके लिए उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया। उनकी बहादुरी और समर्पण की देशभर में सराहना हो रही है। मेजर अर्शदीप सिंह गिल की इस उपलब्धि से पंजाब सहित पूरे देश को गौरव की अनुभूति हुई है। उनके सम्मानित होने पर परिवार, मित्रों और शुभचिंतकों में खुशी का माहौल है। सेना और सुरक्षा बलों से जुड़े अधिकारियों ने इसे युवाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बताया है। मेजर गिल की यह उपलब्धि देश सेवा, साहस और कर्तव्य के प्रति समर्पण की एक मिसाल के रूप में देखी जा रही है। ऑपरेशन की बड़ी बातें मणिपुर में उग्रवादियों के खिलाफ यह काउंटर-इंसरजेंसी ऑपरेशन करीब 84 घंटे (साढ़े तीन दिन) तक चला था। खतरनाक और प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद मेजर अर्शदीप ने अपनी टीम को आगे रहकर लीड किया और मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। मेजर गिल 'द आर्मर्ड कॉर्प्स' के अधिकारी हैं और फिलहाल '1 असम राइफल्स' के साथ तैनात हैं। पूरे पंजाब में गर्व का माहौल, युवाओं के लिए बने रोल मॉडल सेना के सूत्रों के मुताबिक, मेजर गिल ने बेहद खतरनाक हालातों में भी अद्वितीय पेशेवर कौशल और वीरता दिखाई। उनकी इस बहादुरी से न सिर्फ मोहाली बल्कि पूरे पंजाब और देश का नाम रोशन हुआ है। सम्मान की खबर मिलते ही मेजर अर्शदीप के मोहाली स्थित घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। रक्षा विशेषज्ञों और सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों ने इसे देश के युवाओं के लिए एक प्रेरक मिसाल बताया है। क्या है कीर्ति चक्र? यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा शांतिकालीन वीरता पुरस्कार है। यह सम्मान सेना, नौसेना और वायु सेना के जवानों के अलावा आम नागरिकों को भी असाधारण वीरता या आत्म बलिदान के लिए दिया जाता है। वरीयता में यह 'अशोक चक्र' के बाद आता है।  

हरियाली के बीच बसा जेनिफर विंगेट का करोड़ों का आलीशान आशियाना, लग्जरी सुविधाएं जीत लेंगी दिल

मुंबई  टीवी की फेमस एक्ट्रेस जेनिफर विंगेट इन दिनों अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर चर्चा में हैं. खबरें हैं कि वो सिंगापुर के बिजनेसमैन William Ishmael को डेट कर रही हैं और दोनों इसी साल शादी कर सकते हैं। इस बीच जेनिफर का गोवा की हरियाली के बीच मौजूद शानदार वेकेशन होम भी खूब सुर्खियां बटोर रहा है. आइए देखते हैं जेनिफर विंगेट के इस खूबसूरत गोवा विला की खास झलकियां। जेनिफर का गोवा वाला घर बेहद मॉडर्न और स्टाइलिश डिजाइन में बना हुआ है. विला के बाहरी हिस्से में सफेद रंग और लकड़ी का खूबसूरत इस्तेमाल किया गया है, जो इसे बेहद एलिगेंट लुक देता है।  जेनिफर ने अपने घर को सिर्फ लग्जरी नहीं बल्कि बेहद आरामदायक भी बनाया है. विला के अंदर से सीढ़ियां जाती हैं, जो किसी फिल्म के घर जैसी फील देती हैं. एक कोने में फ्लोर सीटिंग का खास इंतजाम है, जहां कुशन, मोमबत्तियां, पौधे और हैंडमेड सजावटी सामान रखे गए हैं। रात के समय जब पूरे घर की लाइटिंग जलती है तो इसकी खूबसूरती और भी बढ़ जाती है. घर के बाहर हरियाली से भरा गार्डन और खूबसूरत एंट्री एरिया इसे किसी लग्जरी रिसॉर्ट जैसा लुक देता है। इस विला की सबसे खास चीज इसका प्राइवेट स्विमिंग पूल है. पूल के एक कोने पर फाउंटेन है और चारों तरफ हरियाली और पौधे लगे हुए हैं, जिससे ये जगह किसी पीसफुल डेस्टिनेशन जैसी महसूस होती है।         बड़े कमरे, हरियाली से भरा गार्डन, खुली जगहें और सोच-समझकर की गई सजावट पूरे घर को बेहद रिलैक्सिंग माहौल देती है. चाहे लिविंग एरिया हो, बेडरूम हो या पूल साइड, हर जगह सुकून का एहसास होता है। न्यूट्रल रंगों और कम फर्नीचर का इस्तेमाल रूम को और भी क्लासी लुक देता है. यही वजह है कि शहर की बिजी लाइफ से दूर जेनिफर के लिए ये विला एक परफेक्ट छुट्टियों का ठिकाना माना जाता है। जेनिफर के गोवा विला का बेडरूम भी किसी लग्जरी रिसॉर्ट के सुइट से कम नहीं है.कमरे के बीचों-बीच एक शानदार फोर-पोस्टर बेड रखा गया है, जिस पर सफेद रंग के हल्के और पारदर्शी पर्दे लगे हुए हैं। जेनिफर का गोवा से खास कनेक्शन होना लाजिमी लगता है. ये परफेक्ट हॉलिडे डेस्टिनेशन फील देता है, है ना?