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मोहाली में आम आदमी पार्टी की ऐतिहासिक जीत, मेयर पद पर सरबजीत समाना, डिप्टी मेयर पदों पर भी कब्जा

मोहाली  मोहाली नगर निगम पर पहली बार आम आदमी पार्टी (आप) ने पूर्ण नियंत्रण स्थापित करते हुए मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के तीनों प्रमुख पदों पर जीत हासिल कर ली है। नगर निगम के नवनिर्वाचित सदन की पहली बैठक में आप के सरबजीत सिंह समाना को मेयर, आरपी शर्मा को सीनियर डिप्टी मेयर तथा हरपाल सिंह चन्ना को डिप्टी मेयर चुना गया। चुनाव प्रक्रिया से पहले 50 नवनिर्वाचित पार्षदों को शपथ दिलाई गई, जिसके बाद मतदान कराया गया। आम आदमी पार्टी पंजाब के अध्यक्ष अमन अरोड़ा पर्यवेक्षक के रूप में मौजूद रहे, जबकि कांग्रेस ने चुनाव का बहिष्कार किया। मेयर पद के लिए सरबजीत समाना को 35 वोट मिले। इसी तरह आरपी शर्मा और हरपाल सिंह चन्ना को भी 35-35 वोट प्राप्त हुए। उल्लेखनीय है कि नगर निगम चुनाव में आप के 27 पार्षद ही निर्वाचित हुए थे, लेकिन विधायक कुलवंत सिंह की वोट सहित पार्टी उम्मीदवारों को 35 वोट मिले, जो चर्चा का विषय बना रहा। नतीजों के बाद निगम कार्यालय में जश्न का माहौल रहा। अमन अरोड़ा ने कहा कि पार्षदों ने सरबजीत समाना पर भरोसा जताया है और पंजाब सरकार शहर के विकास के लिए पूरा सहयोग देगी। चुनाव के बाद नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने गुरुद्वारा अंब साहिब में माथा टेका।

स्वच्छता को लेकर BMC का नया नियम, आयोजन से पहले मंजूरी अनिवार्य, घर में रखने होंगे 4 डस्टबिन

​​भोपाल  शहर में स्वच्छता व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए नगर निगम परिषद ने केंद्र सरकार के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 को लागू करने का फैसला किया है. अब नगर निगम की नजर सिर्फ बड़े राजनीतिक या व्यावसायिक आयोजनों पर ही नहीं, बल्कि घरों में होने वाले छोटे-मोटे कार्यक्रमों जैसे बर्थ-डे पार्टी, सगाई, फेयरवेल और कॉलोनी के फंक्शन्स पर भी रहेगी।  निगम अधिकारियों का कहना है कि नए नियमों का मुख्य उद्देश्य बड़े और छोटे आयोजनों से निकलने वाले कचरे पर नियंत्रण पाना और लोगों की जवाबदेही तय करना है. ऐसे में नियमों का उल्लंघन करने या खुले में कचरा फेंकने और जलाने पर भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।  ​100 मेहमान जुटे तो 3 दिन पहले देनी होगी सूचना ​नए नियमों के अनुसार यदि किसी भी निजी, धार्मिक, सामाजिक या पारिवारिक कार्यक्रम में 100 या उससे अधिक लोगों के शामिल होने की संभावना है, तो आयोजक को कार्यक्रम से 3 दिन पहले नगर निगम को इसकी लिखित जानकारी और अनुमति लेनी होगी. आयोजकों को पहले से यह बताना होगा कि कार्यक्रम कहां हो रहा है, कितने लोग आएंगे और वहां पैदा होने वाले कचरे के निपटारे के लिए क्या व्यवस्था की गई है. बिना सूचना दिए आयोजन करने या कचरा प्रबंधन के नियमों का पालन न करने पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।  बिना छंटनी पर 150 प्रतिशत जुर्माना ​अब भोपाल के हर घर और व्यावसायिक संस्थान को अपने कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर रखना होगा. ऐसा न करने और 100 किलोग्राम से अधिक कचरा अलग-अलग श्रेणियों में देने पर 150 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जाएगा।  कचरे को इन 4 भागों में विभाजित करना होगा अनिवार्य ​गीला कचरा- रसोई का भोजन, फल-सब्जियों के छिलके और पेड़-पौधों की हरी पत्तियां. ​सूखा कचरा- रद्दी कागज, गत्ते, प्लास्टिक, धातु, कांच की बोतलें और फटे-पुराने कपड़े. ​सैनिटरी कचरा – डायपर, सैनिटरी नैपकिन, टिश्यू पेपर और घरेलू स्तर का मेडिकल वेस्ट. ​घरेलू ई-वेस्ट – मोबाइल, चार्जर, बैटरियां, बल्ब, घरेलू केमिकल और एक्सपायर्ड दवाइयां. ​बड़े आवासीय और व्यावसायिक परिसर भी दायरे में नगर ​निगम ने बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी तय की है, जिसमें शहर के लगभग 2 हजार आवासीय, व्यावसायिक और सरकारी परिसर शामिल होंगे. नियमों के दायरे में आने वाले मानदंड इस प्रकार है।      ​आवासीय भवन – कुल फ्लोर एरिया 20,000 वर्ग मीटर या अधिक होने पर.     ​होटल और रेस्टोरेंट – कुल फ्लोर एरिया 5,000 वर्ग मीटर या अधिक होने पर.     कचरा उत्पादन – प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक ठोस कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थान.

Jharkhand News: राज्यपाल की मंजूरी के बाद अनुज सिन्हा सहित चार नए सूचना आयुक्त होंगे नियुक्त

रांची. झारखंड राज्य सूचना आयाेग में वरिष्ठ पत्रकार अनुज सिन्हा, झामुमो के प्रवक्ता रहे तनुज खत्री, भाजपा के मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक तथा कांग्रेस नेता अमूल नीरज खलखो सूचना आयुक्त होंगे। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने सूचना आयुक्त के पद पर इन चारों की नियुक्ति के संबंध में राज्य सरकार द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर सशर्त स्वीकृति प्रदान की है। उन्होंने कहा है कि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया में यदि कोई प्रक्रियागत त्रुटि पाई जाती है अथवा इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन से संबंधित कोई सवाल उठता है, तो उसकी पूरी जवाबदेही राज्य सरकार की होगी। राज्यपाल ने राज्य सरकार को निर्देश भी दिया है कि आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति शीघ्र सुनिश्चित की जाए, ताकि आयोग का कार्य सुचारु एवं प्रभावी ढंग से संचालित हो सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है। अब राज्यपाल की स्वीकृति मिलने के बाद कार्मिक विभाग चारों सूचना आयुक्तों की नियुक्ति संबंधित अधिसूचना जारी करेगा। बताते चलें कि राज्यपाल ने पूर्व में अनुज सिन्हा को छोड़कर बाकी अन्य तीन नामों पर आपत्ति करते हुए प्रस्ताव लौटा दिया था। उन्होंने तीनों के राजनीतिक दलों से जुड़े होने पर सवाल उठाया था कि उनकी नियुक्ति सूचना आयुक्त के पद पर हो सकती है या नहीं। साथ ही उनपर आपराधिक मामलों की भी जानकारी मांगी थी। छह वर्षों से रिक्त है सूचना आयुक्तों के पद झारखंड राज्य सूचना आयोग में पिछले लगभग छह वर्ष से मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों के पद रिक्त हैं। इस कारण यहां पूरी तरह सुनवाई ठप है। बताया जाता है कि लगभग 25 हजार आवेदन वहां लंबित हैं। इस मसले पर झारखंड हाई कोर्ट में लगातार सुनवाई से जल्द नियुक्ति का दबाव राज्य सरकार बना हुआ था।  इन चार नामों पर लगी मुहर राज्यपाल द्वारा स्वीकृत किए गए प्रस्ताव के अनुसार, राज्य सूचना आयोग में जिन चार प्रमुख चेहरों को सूचना आयुक्त बनाया गया है, वे हैं: अनुज कुमार सिन्हा: वरिष्ठ पत्रकार, लेखक और झारखंड के बौद्धिक व सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ रखने वाली शख्सियत। तनुज खत्री: युवा और प्रखर राजनीतिज्ञ/अधिवक्ता, जो विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक मंचों पर सक्रिय रहे हैं। अमूल्य नीरज खलखो: प्रशासनिक व सामाजिक क्षेत्र का जाना-माना चेहरा। शिवपूजन पाठक: सार्वजनिक जीवन और सांगठनिक कार्यों का लंबा अनुभव रखने वाले वरिष्ठ व्यक्तित्व। क्यों अहम है यह फैसला? लंबे समय से लंबित था मामला: झारखंड राज्य सूचना आयोग पिछले काफी समय से आयुक्तों के पदों की रिक्ति के कारण लगभग निष्क्रिय सा हो गया था। आयुक्तों के न होने से आरटीआई के तहत आने वाली हजारों द्वितीय अपीलों का निपटारा रुका हुआ था और मामलों का अंबार लग गया था। पारदर्शिता को मिलेगा बल: इन चार नई नियुक्तियों के बाद राज्य में सूचना के अधिकार कानून के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। आम जनता को विभागों से समय पर जानकारी न मिलने की स्थिति में अब समय पर न्याय मिल सकेगा। संतुलित चयन: इस सूची में पत्रकारिता, कानून, प्रशासन और सामाजिक-राजनीतिक पृष्ठभूमि के दिग्गजों को शामिल कर एक संतुलित पैनल बनाने का प्रयास किया गया है, ताकि आयोग का कामकाज पारदर्शी और प्रभावी तरीके से चल सके। राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग द्वारा जल्द ही इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना जारी की जाएगी। इसके बाद तय प्रक्रिया के तहत इन सभी नवनियुक्त सूचना आयुक्तों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई जाएगी। शपथ ग्रहण के दिन से ही इनका कार्यकाल शुरू हो जाएगा, जिससे राज्य में पारदर्शिता और सुशासन को और मजबूती मिलेगी।

2027 चुनाव से पहले पंजाब सरकार का बड़ा दांव, विभिन्न समुदायों के लिए बनेंगे कल्याण बोर्ड

चंडीगढ़. पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी सरकार ने समाज के विभिन्न वर्गों तक अपनी पहुंच मजबूत करने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में राज्य सरकार ने हर जिले और विधानसभा क्षेत्र स्तर पर कल्याण बोर्ड गठित करने का फैसला किया है, जिसके जरिए विभिन्न समुदायों से सीधे संवाद और योजनाओं को लेकर फीडबैक लेने की व्यवस्था बनाई जाएगी। सरकार पहले ही 21 राज्य स्तरीय कल्याण बोर्ड बना चुकी है। अब इन्हीं बोर्डों का विस्तार जिला और विधानसभा स्तर तक किया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत राज्य की 117 विधानसभा सीटों और सभी जिलों में अलग-अलग समुदायों के लिए बोर्ड गठित होंगे, जिनमें बड़ी संख्या में पदाधिकारियों और सदस्यों को शामिल किया जाएगा। समुदायों से सीधे संवाद की तैयारी राजनीतिक हलकों में इस कदम को चुनावी तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि बोर्डों के माध्यम से सरकार विभिन्न जातियों और समुदायों के प्रभावशाली लोगों को संगठनात्मक ढांचे से जोड़ने का प्रयास करेगी, ताकि चुनाव से पहले जमीनी स्तर पर संपर्क मजबूत किया जा सके। जनसंपर्क मजबूत करने में मदद मिलेगी हालांकि सरकार का कहना है कि इन बोर्डों का उद्देश्य विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी करना और समुदायों की समस्याओं व सुझावों को सरकार तक पहुंचाना है। सभी पद मानद होंगे और इन पर नियुक्त व्यक्तियों को वेतन या अन्य वित्तीय सुविधाएं नहीं मिलेंगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पहल से सरकार को अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच अपनी मौजूदगी बढ़ाने और चुनावी माहौल में जनसंपर्क मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

Chhattisgarh News: पटाखा गोदाम में लगी आग ने मचाई अफरा-तफरी, धमाकों से सहमे लोग

कोरबा. जिले के कटघोरा थाना क्षेत्र के रामपुर स्थित एक पटाखा गोदाम में बुधवार को भीषण आग लग गई। आग लगते ही गोदाम में रखे पटाखों में लगातार विस्फोट होने लगे, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। घटना के दौरान आसमान में धुएं का गुबार दूर-दूर तक दिखाई दिया। जानकारी के अनुसार, रामपुर स्थित शर्मा पटाखा गोदाम में अचानक आग भड़क उठी। आग की लपटें देखते ही आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। गोदाम में रखे पटाखों के फटने से लगातार तेज धमाके सुनाई देते रहे, जिससे आसपास के ग्रामीण और स्थानीय लोग सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे। घटना की सूचना मिलते ही कटघोरा नगर पालिका की फायर ब्रिगेड टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू किया। हालांकि आग की भयावहता को देखते हुए अन्य क्षेत्रों से भी अतिरिक्त दमकल वाहनों को बुलाया जा रहा है। मौके पर पुलिस बल भी तैनात है। सुरक्षा के मद्देनजर इलाके को घेरकर लोगों को दूर रखा जा रहा है। राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी है। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है। प्रशासन द्वारा स्थिति पर नजर रखी जा रही है। समाचार लिखे जाने तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली थी, हालांकि आग से हुए नुकसान का आकलन अभी किया जा रहा है।

रिश्तेदार सरपंच या उपसरपंच होने पर भी होगा तबादला, पंचायत सचिवों के लिए सरकार का नया नियम

भोपाल तबादला सीजन के बीच पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने पंचायत सचिवों के स्थानांतरण को लेकर नई गाइडलाइन जारी कर दी है। नई नीति के तहत अब कोई भी पंचायत सचिव अपने गृहग्राम या ससुराल की पंचायत में पदस्थ नहीं रह सकेगा। इसके साथ ही जिस पंचायत में सचिव के रिश्तेदार सरपंच या उपसरपंच बन जाएंगे, वहां से भी सचिव का तबादला किया जाएगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के आधार पर यह नई गाइडलाइन जारी की है। विभाग ने सभी जिलों के कलेक्टरों और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि तय समय सीमा के भीतर स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी कराई जाए। बता दें कि मध्य प्रदेश में 23 हजार से ज्यादा पंचायत सचिव हैं। 15 जून तक होंगे तबादले 9 जून को जारी आदेश के अनुसार 15 जून तक जिले के भीतर पंचायत सचिवों के स्थानांतरण किए जा सकेंगे। स्थानांतरण प्रस्ताव जिला कलेक्टर की अनुशंसा और प्रभारी मंत्री की स्वीकृति के बाद जारी किए जाएंगे। यह प्रक्रिया एक जून से ही मान्य की जाएगी। विभागीय निर्देशों के मुताबिक स्थानांतरण आदेश मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत द्वारा जारी किए जाएंगे। नई गाइडलाइन में जिला एवं अंतरजिला स्तर पर पंचायत सचिवों के स्थानांतरण की प्रक्रिया भी तय की गई है। सरकार को इसलिए रखनी पड़ी शर्त दिग्विजय सरकार ने वर्ष 1994 से 1996 के बीच पंचायत कर्मियों की नियुक्ति की थी, जो आज पंचायत सचिव हैं। तब नियुक्ति ग्राम सभा के अनुमोदन से की गई थी और ज्यादातर मामलों में ग्राम सभा ने सरपंच, उप सरपंच, पंच या गांव के प्रभावशाली व्यक्ति के रिश्तेदारों को नियुक्त किया था। ज्यादातर मामलों में देखने में आया है कि ये जनप्रतिनिधि रिश्तेदारी या अहसान के बदले सचिवों को वह सब करने के लिए राजी कर लेते हैं, जो वे चाहते हैं। ऐसे कई मामले जांच में आ चुके हैं। जिनमें सरपंच, उप सरपंच और सचिव ने मिलकर गड़बड़ी की है। इसलिए सरकार को तबादला नीति में यह शर्तें जोड़नी पड़ीं। इन परिस्थितियों में स्थानांतरण होगा अनिवार्य विभाग ने कुछ मामलों में ग्राम पंचायत सचिवों का स्थानांतरण अनिवार्य किया है, जिनमें इस तरह की परिस्थितियां शामिल हैं।     यदि किसी ग्राम पंचायत में सचिव का रिश्तेदार पंचायत का सरपंच या उपसरपंच चुन लिया गया हो।     सचिव को उसके पैतृक ग्राम या ससुराल स्थित ग्राम पंचायत में पदस्थ नहीं किया जाएगा।     जो सचिव एक ही ग्राम पंचायत में 10 वर्ष या उससे अधिक समय से पदस्थ हैं, उन्हें प्राथमिकता से स्थानांतरित किया जाएगा।     यदि 10 साल या अधिक समय से पदस्थ सचिवों की संख्या तबादला लिमिट से अधिक है तो पहले सबसे अधिक अवधि से पदस्थ सचिव का तबादला किया जाएगा। प्रतिबंध अवधि में भी संभव होगा इनका स्थानांतरण     स्थानांतरण प्रतिबंध अवधि के दौरान विशेष परिस्थितियों में इन सचिवों के तबादले किए जा सकेंगे।     भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता या गंभीर शिकायतों के मामले।     अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित होने की स्थिति।     लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू अथवा अन्य जांच एजेंसियों की कार्रवाई से जुड़े प्रकरण।     उच्च प्राथमिकता वाले प्रशासनिक मामलों में शासन स्तर से प्राप्त निर्देश।     ऐसे मामलों में विभागीय मंत्री की स्वीकृति के बाद आयुक्त, संचालक पंचायत राज द्वारा आदेश जारी किए जाएंगे। अंतरजिला संविलियन केवल स्वैच्छिक आधार पर     आदेश में अंतरजिला संविलियन (ट्रांसफर) को केवल स्वैच्छिक आधार पर अनुमति दी गई है।     महिला सचिवों को विशेष सुविधा मिलेगी। इसमें विवाहित, विधवा एवं तलाकशुदा महिला ग्राम पंचायत सचिव अपने पति, ससुराल या माता-पिता के निवास वाले जिले में संविलियन के लिए आवेदन कर सकेंगी।     अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त सचिव, यदि उनकी नियुक्ति वाले जिले के अलावा किसी अन्य जिले से संबंध रखते हैं, तो वे भी अपने मूल जिले में संविलियन के लिए आवेदन कर सकेंगे।     इच्छुक सचिव को वर्तमान पदस्थापना जिले के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को आवेदन देना होगा।     आवेदन के साथ संबंधित जिले में रिक्त पद की उपलब्धता का सत्यापन किया जाएगा।     रिक्त पद उपलब्ध होने पर प्रस्ताव पंचायत राज संचालनालय भोपाल भेजा जाएगा।     प्रशासनिक स्वीकृति के बाद संविलियन आदेश जारी किए जाएंगे।     संविलियन के बाद सचिव का नाम वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे रखा जाएगा।     अंतरजिला संविलियन का लाभ केवल एक बार ही दिया जाएगा।

भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में नया अध्याय, CM साय ने PM मोदी के कार्यकाल को बताया कीर्तिमान

रायपुर  भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में आज एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज हुई है। देश की जनता से लगातार प्राप्त जनादेश के आधार पर माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह उपलब्धि जनसेवा, सुशासन और राष्ट्रहित के प्रति उनके समर्पित नेतृत्व का प्रमाण है। नरेंद्र मोदी  के नेतृत्व में अंत्योदय का संकल्प साकार हुआ है और भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर पूरे आत्मविश्वास के साथ अग्रसर हुआ है। अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण से राष्ट्रीय चेतना को नई ऊर्जा मिली, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 की समाप्ति ने राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ किया तथा आतंकवाद के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई और सशक्त सैन्य अभियानों ने विश्व के समक्ष नए भारत के सामर्थ्य और आत्मविश्वास को स्थापित किया है। साथ ही, उन्होंने संगठन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते हुए भारतीय जनता पार्टी को विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज वे विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय नेताओं में अग्रणी हैं और उनके नेतृत्व में भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए हार्दिक शुभकामनाएं। उन्होंने कहा कि हम एक पारदर्शी और सुशासन पर आधारित सरकार चलाना चाहते हैं, और लोगों को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं देने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। हमने राज्य में 'सुशासन और कन्वर्जेंस विभाग' भी बनाया है और इसी पहल के तहत आज हम मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 शुरू कर रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि नीति आयोग की बैठकों का एजेंडा तय होता है और उसी के अनुसार चर्चा होगी। जहां तक ​​बस्तर की बात है, नक्सलवाद के कारण यह इलाका लगभग 40 से 50 वर्षों तक पिछड़ा रहा। सरकार ने इसके विकास में तेजी लाने के लिए पहले ही काम शुरू कर दिया है और इसकी तेजी से प्रगति सुनिश्चित करने के लिए एक रोडमैप भी तैयार किया जा रहा है। सीएम हेल्पलाइन 1076 का शुभारंभ मुख्यमंत्री ने प्रदेश में शुरू की गई सीएम हेल्पलाइन 1076 के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि इसका उद्देश्य आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है। अब प्रदेशवासी टोल-फ्री नंबर 1076, मोबाइल एप और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी शिकायतें, सुझाव और समस्याएं सीधे सरकार तक पहुंचा सकेंगे। उन्होंने बताया कि प्रत्येक शिकायत को एक यूनिक आईडी प्रदान की जाएगी, जिससे उसकी ट्रैकिंग, निगरानी और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित होगा। यदि शिकायतकर्ता समाधान से संतुष्ट नहीं होता है, तो मामले की पुनः समीक्षा का भी प्रावधान रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के विकास से जुड़े सुझाव भी नागरिक सीधे सरकार तक पहुंचा सकेंगे। सुशासन का मूल उद्देश्य जनसमस्याओं का संवेदनशील, पारदर्शी और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है। सुशासन को प्राथमिकता विष्णु देव साय ने कहा कि उनकी सरकार पारदर्शिता और सुशासन के सिद्धांतों पर कार्य कर रही है। जनता को अधिकतम सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी उद्देश्य से राज्य में "सुशासन एवं कन्वर्जेंस विभाग" का गठन किया गया है और सीएम हेल्पलाइन 1076 उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। बस्तर विकास के लिए तैयार हो रहा रोडमैप नीति आयोग की बैठकों के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्धारित एजेंडे के अनुसार विभिन्न विषयों पर चर्चा की जाएगी। बस्तर क्षेत्र के विकास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के कारण यह क्षेत्र पिछले चार से पांच दशकों तक विकास की मुख्यधारा से पीछे रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार बस्तर के सर्वांगीण विकास के लिए पहले से ही कई योजनाओं पर कार्य कर रही है तथा क्षेत्र की तीव्र प्रगति सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक रोडमैप भी तैयार किया जा रहा है।

मेडिकल क्षेत्र में नौकरी का मौका, गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल में 22 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों के लिए आवेदन शुरू

भोपाल  राजधानी के गांधी चिकित्सा महाविद्यालय (जीएमसी) में सहायक प्राध्यापकों (असिस्टेंट प्रोफेसर) की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित जीएमसी स्वशासी समिति द्वारा विभिन्न सुपर स्पेशियलिटी और ब्रांड स्पेशियलिटी विभागों में रिक्त 22 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इच्छुक अभ्यर्थी 25 जून तक आवेदन कर सकते हैं। इन विभागों में होंगी नियुक्तियां महाविद्यालय प्रशासन के अनुसार भर्ती प्रक्रिया के तहत कुल 15 विभागों में नियुक्तियां की जाएंगी। इनमें कम्युनिटी मेडिसिन (स्टेटिस्टिक्स), न्यूरोसर्जरी ट्रॉमा यूनिट, स्पोर्ट्स मेडिसिन, जनरल मेडिसिन, एंडोक्राइनोलॉजी, पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी, पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी, पीडियाट्रिक नियोनेटोलॉजी, प्रसूति एवं स्त्री रोग, फार्माकोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, रेस्पिरेटरी मेडिसिन, रेडियोडायग्नोसिस, नेफ्रोलॉजी, मेडिकल ऑन्कोलॉजी और फॉरेंसिक मेडिसिन जैसे विभाग शामिल हैं। सातवें वेतनमान का मिलेगा लाभ चयनित अभ्यर्थियों को सातवें वेतनमान के वेतन मैट्रिक्स लेवल-11 के अनुसार वेतन प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा राज्य शासन द्वारा स्वीकृत अन्य भत्ते एवं सुविधाएं भी नियमानुसार मिलेंगी। तीन वर्ष के सेवा बांड पर होगी नियुक्ति भर्ती प्रक्रिया के तहत चयनित चिकित्सकों की नियुक्ति प्रारंभिक रूप से तीन वर्ष के सेवा बांड या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, के आधार पर की जाएगी। चिकित्सा शिक्षा विभाग का उद्देश्य विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाकर चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना है। 

हरिद्वार में CM धामी का बुलडोजर एक्शन, अवैध मजार पर चली कार्रवाई, प्रशासन सख्त

 लक्सर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर लक्सर तहसील प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने हरिद्वार में एक और अवैध मजार को ध्वस्त कर दिया। सहारनपुर झबेडा मार्ग पर सरकारी जमीन पर बनी उक्त मजार को ध्वस्त करने के लिए पहले नोटिस दिया गया था। वहीं गोवर्धनपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर अभियान चलाकर 35 से अधिक अतिक्रमण हटाए। अभियान के दौरान अधिकारियों ने सड़क, नाली और फुटपाथ पर किए गए कब्जों को हटाते हुए व्यापारियों और स्थानीय लोगों को आगे से अतिक्रमण न करने की चेतावनी दी। 13 लोगों के चालान मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस टीम ने राजमार्ग किनारे दुकानों व सार्वजनिक भूमि का निरीक्षण किया। कार्रवाई के दौरान कई अस्थायी ढांचे, सामान और अवैध कब्जे हटाए गए। साथ ही 81 पुलिस एक्ट के तहत 13 लोगों के चालान भी किए गए। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि, सड़क, नालियों और फुटपाथों पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि दोबारा अतिक्रमण किया गया तो सामान जब्त करने के साथ-साथ संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। अभियान में एसडीएम अनिल कुमार शुक्ला, तहसीलदार दीवान सिंह राणा, नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी मोहम्मद कामिल पुलिस अधिकारी व कर्मचारी शामिल रहे।

Bihar Social Security Pension: लाभार्थियों के खाते में आए ₹84 करोड़, अब तय तारीख पर होगी भुगतान प्रक्रिया

पटना. सामाजिक सुरक्षा पेंशन के 77265 लाभुकों के बैंक खाते में भेजे गए 84 करोड़ 99 लाख 24 हजार 625 रुपये भेज दिए गए हैं। बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लाभुकों को मई माह की पेंशन राशि प्रदान की। यह राशि उन्होंने दिल्ली में बिहार भवन से डीबीटी के जरिए भेजी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बुलावे पर सम्राट बुधवार पूर्वाह्न दिल्ली गए हैं। पहले वे मंगलवार रात को प्रस्थान करने वाले थे, लेकिन कामकाज की व्यस्तता के कारण पटना से निकल नहीं पाए। बुधवार को दिल्ली में एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में सम्राट भी सहभागी रहेंगे। बैठक का उपलक्ष्य मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर जन-जन तक उपलब्धियों का प्रचार-प्रसार है।  पेंशन भुगतान का समय अनियमित उल्लेखनीय है कि बिहार में उल्लेखनीय है कि बिहार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के एक करोड़ 21 लाख चार हजार 939 लाभुक हैं। इस योजना के अंतर्गत प्रति लाभुक 1100 रुपये दिए जाते हैं। पहले पेंशन भुगतान का समय अनियमित था।  अब हर महीने 10 तारीख को पेंशन का भुगतान इस कारण बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों की आर्थिक समस्याओं का  समय से समाधान नहीं हो पा रहा था। अंतत: मुख्यमंत्री ने निर्णय लिया कि अब प्रत्येक माह की 10 तारीख को लाभुकों के खाते में सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि भेज दी जाएगी। उस पर अमल शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के गरीब, वंचित एवं जरूरतमंद तबकों को सामाजिक सुरक्षा मुहैया कराना हमारी सरकार का दायित्व है। हमने पिछली सरकार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि को 400 रूपये से बढ़ाकर सीधे 1100 रुपये प्रति माह किया था। हम 60 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धजनों, सभी विधवाओं एवं निःशक्तजनों को विभिन्न सामाजिक सुरक्षा पेंशनों का लाभ देते है।  सभी लाभुकों को यह राशि हर माह निश्चित समय पर प्राप्त हो इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में सबसे लंबा कार्यकाल पूरा करने के सुअवसर पर इन योजनाओं के 94 लाख से अधिक लाभुकों को 1100 रुपये प्रति माह की दर से आज हम लगभग 1100 करोड़ रुपये की राशि उनके खाते में भेज रहे है।  जरूरतमंद लोगों की सेवा करते रहने के लिए संकल्पित उन्होंने कहा कि आगे हर महीने की 10 तारीख को हमारी सरकार सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लाभुकों के खाते में यह राशि अंतरित करती रहेगी। इसके अलावा विभिन्न प्रकार के लोक कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से सरकार सभी जरूरतमंद लोगों की सेवा करते रहने के लिए कृतसंकल्पित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोग जिन्हें सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है, वे लाभ प्राप्त करने के लिए शीघ्र आवेदन करें। साथ ही आधार कार्ड लिंक नहीं होने के कारण पेंशन से वंचित लोग भी जल्द अपना आधार लिंक कराकर सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना का लाभ प्राप्त करें। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, स्थानिक आयुक्त मनोज कुमार उपस्थित थे, जबकि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समाज कल्याण मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, अपर मुख्य सचिव एचआर श्रीनिवास, सभी जिलों के जिलाधिकारी एवं लाभार्थीगण जुड़े हुए थे।