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Bihar MLC Election: 9 उम्मीदवार बिना मुकाबले जीते, पवन सिंह और निशांत कुमार के नाम भी शामिल

पटना  बिहार विधान परिषद की 10 सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया गुरुवार  को औपचारिक रूप से पूरी हो गई. नामांकन वापसी की अंतिम तिथि तक किसी भी उम्मीदवार ने अपना पर्चा वापस नहीं लिया. इसके बाद निर्वाची पदाधिकारी ने पवन सिंह समेत सभी 10 उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया. इनमें सबसे ज्यादा चर्चा भाजपा के नए चेहरे पवन सिंह को लेकर रही, जिन्हें पहली बार पार्टी ने विधान परिषद भेजा है।  पहली बार विधान परिषद पहुंचे पवन सिंह भाजपा ने इस बार विधान परिषद चुनाव में भोजपुरी फिल्म अभिनेता और गायक पवन सिंह को उम्मीदवार बनाया था. नामांकन के बाद से ही उनकी उम्मीदवारी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई थी। अब निर्विरोध निर्वाचन के साथ पवन सिंह का विधान परिषद पहुंचना तय हो गया है. माना जा रहा है कि पवन सिंह विधानपरिषद में अपने इलाके के लोगों के मुद्दों को मजबूती से उठाएंगे।  बीजेपी के चार उम्मीदवार हुए निर्वाचित भारतीय जनता पार्टी के खाते से पवन सिंह, संजय मयूख, अनिल ठाकुर और शीला पंडित निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए हैं. इनमें संजय मयूख लगातार तीसरी बार विधान परिषद पहुंचे हैं, जबकि पवन सिंह और शीला पंडित के लिए यह नई राजनीतिक पारी की शुरुआत मानी जा रही है।  जेडीयू के चार उम्मीदवारों को भी मिली जीत जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के निशांत कुमार, भारती मेहता, शिवरानी देवी प्रजापति और ललन कुमार भी निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए. पार्टी ने सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए इन उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था।  एलजेपी (रामविलास) और आरजेडी को भी एक-एक सीट लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अशरफ अंसारी और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सुनील कुमार सिंह भी निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए हैं. दोनों नेताओं का विधान परिषद पहुंचना पहले से लगभग तय माना जा रहा था।  नामांकन वापसी की समय सीमा तक नहीं हुआ कोई बदलाव निर्वाचन प्रक्रिया के तहत नामांकन वापसी का समय बुधवार शाम 3 बजे तक निर्धारित था. लेकिन, किसी भी उम्मीदवार ने अपना नामांकन वापस नहीं लिया. चूंकि जितनी सीटें थीं, उतने ही उम्मीदवार मैदान में थे, इसलिए सभी को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया।  यूपी चुनाव से पहले राजनीतिक संदेश राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधान परिषद के लिए उम्मीदवारों का चयन सिर्फ संगठनात्मक जरूरत नहीं, बल्कि आगामी यूपी विधानसभा चुनाव की रणनीति का भी हिस्सा है. खासकर पवन सिंह की एंट्री को भाजपा के बड़े राजनीतिक दांव के रूप में देखा जा रहा है. भोजपुरी क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता को देखते हुए पार्टी उन्हें भविष्य में बड़ी जिम्मेदारी भी दे सकती है, जिसका लाभ यूपी चुनाव में भी देखने को मिल सकता है. बहरहाल, सभी 10 उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचन के साथ बिहार विधान परिषद की इन सीटों का चुनाव बिना मतदान के ही संपन्न हो गया है।  पवन सिंह और भाजपा उम्मीदवारों की CM से होगी मुलाकात भाजपा के उम्मीदवार पवन सिंह निर्वाचन प्रमाण पत्र लेने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा वे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी से भी मिलेंगे।भाजपा के वरिष्ठ नेता संजय मयूख के साथ पार्टी के सभी निर्वाचित उम्मीदवार मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद और मार्गदर्शन प्राप्त करेंगे।इस मुलाकात को आगामी राजनीतिक और संगठनात्मक रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जदयू के चारों निर्वाचित MLC करेंगे नीतीश कुमार से मुलाकात जनता दल यूनाइटेड के सभी 4 निर्वाचित विधान पार्षद प्रमाण पत्र मिलने के बाद मुख्यमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता नीतीश कुमार से मुलाकात करेंगे। इसके लिए वे 7, सर्कुलर रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास पहुंचेंगे। जदयू के नवनिर्वाचित सदस्य पार्टी नेतृत्व का आशीर्वाद लेने के साथ-साथ आगामी राजनीतिक जिम्मेदारियों पर भी चर्चा कर सकते हैं। राजद के सुनील सिंह लेंगे लालू-राबड़ी और तेजस्वी का आशीर्वाद राजद के निर्वाचित उम्मीदवार सुनील सिंह निर्वाचन प्रमाण पत्र लेने के बाद राजद नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। वे पहले तेजस्वी यादव से मिलेंगे और उसके बाद लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी का आशीर्वाद लेंगे। राजद इसे संगठन की एकजुटता और नेतृत्व के प्रति सम्मान के रूप में देख रही है। औपचारिक निर्वाचन के साथ नए सदस्यों की होगी परिषद में एंट्री निर्वाचन प्रमाण पत्र मिलने के बाद सभी 10 उम्मीदवार औपचारिक रूप से बिहार विधान परिषद के सदस्य बन जाएंगे।निर्विरोध निर्वाचन के कारण इस बार मतदान की जरूरत नहीं पड़ी। सभी प्रमुख दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित कर ली।अब सभी की नजर परिषद में इन नए सदस्यों की भूमिका और राजनीतिक गतिविधियों पर रहेगी।

छत्तीसगढ़ के अधिकारियों ने किया मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना का अध्ययन, मॉडल को समझने पहुंचे प्रतिनिधि

छत्तीसगढ़ के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना का किया अध्ययन भोपाल  "मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना" के क्रियान्वयन संबंधी जानकारी लेने और इसमें विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करने के लिये छत्तीसगढ़ स्टेट सिविल सप्लाई कार्पोरेशन के अधिकारियों का एक दल मध्यप्रदेश भ्रमण पर है। इस दल ने गुरूवार को खाद्य संचालनालय में अधिकारियों से योजना की कार्य प्रणाली, परिवहन व्यवस्था, आईटी आधरित मॉनीटरिंग प्रणाली, संबंधित विभागों के बीच समन्वय, हित धारकों की भूमिका तथा खाद्यान वितरण व्यवस्था में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में जानकारी ली। अपर संचालक खाद्य एचएस परमार एवं अन्य अधिकारियों ने योजना के क्रियान्वयन के संबंध में पॉवर प्वाइंट प्रेजेंटेशन दिया। छत्तीसगढ़ के दल में सहायक महाप्रबंधक आईटी एवं उपार्जन महेन्द्र साहू, उप सहायक महाप्रबंधक परिवहन मनोज वर्मा, उप सहायक महाप्रबंधक सार्वजनिक वितरण प्रणाली त्रिनाधा रेड्डी, वरिष्ठ सलाहकार सुशील तिवारी और सलाहकार संदीप हलदर शामिल हैं। 9954-मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली अंतर्गत प्रदाय केन्द्र से उचित मूल्य' दुकानों तक राशन सामग्री के परिवहन का कार्य परिवहनकर्ता ठेकेदार के स्थान पर बेरोजगार युवकों के माध्यम से कराकर उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने के लिये मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना नवाचार के रूप में लागू की गई है। इसमें लगभग 900 परिवहन कर्ता हैं। मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजनांतर्गत ऋण स्वीकृति से 7.5 मीट्रिक टन क्षमता के वाहन उपलब्ध कराएँ गए हैं। वाहनों के लिये राज्य सरकार द्वारा 1.25 लाख रूपये प्रति वाहन मार्जिन मनी और 3 प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जाता है। वाहनों से प्रतिमाह लगभग 3,000 क्विंटल राशन सामग्री का परिवहन किया जा रहा है। योजना में बेरोजगार युवकों को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ सामग्री का परिवहन भी त्वरित गति से किया जा रहा है। मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना के वाहनों में जीपीएस के माध्यम से स्टेट लेवल कमांड कंट्रोल सेंटर से मॉनीटरिंग की जाती है।  

भोपाल के चर्चित त्विषा केस में नया मोड़, जेल में किताब पढ़ती दिखीं गिरिबाला सिंह; महिला आयोग ने जाना हाल

भोपाल  त्विषा शर्मा मौत मामले में न्यायिक हिरासत में भोपाल सेंट्रल जेल में बंद रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह से बुधवार को मध्यप्रदेश महिला आयोग की टीम ने मुलाकात की। आयोग की टीम महिला कैदियों और बंदियों की स्थिति का जायजा लेने जेल पहुंची थी। आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव ने गिरिबाला सिंह से जेल में भोजन, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली। इस दौरान गिरिबाला सिंह ने किसी भी प्रकार की परेशानी से इनकार करते हुए कहा कि जेल में सभी व्यवस्थाएं ठीक हैं और उन्हें कोई शिकायत नहीं है। जानकारी के अनुसार, आयोग की टीम जब उनके पास पहुंची, तब वे लेखक देवदत्त पटनायक की पुस्तक 'द प्रेग्नेंट किंग' पढ़ रही थीं। टीम को देखते ही उन्होंने किताब बंद कर दी। बातचीत के दौरान वे काफी शांत नजर आईं। निरीक्षण के दौरान महिला आयोग की टीम को ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि गिरिबाला सिंह को जेल में किसी प्रकार की विशेष सुविधा उपलब्ध कराई जा रही हो।   क्या है 'द प्रेग्नेंट किंग' की कहानी देवदत्त पटनायक का उपन्यास 'द प्रेग्नेंट किंग' पौराणिक कथा से प्रेरित है। कथा के अनुसार राजा युवनाश्व संतान प्राप्ति के लिए यज्ञ कराते हैं। यज्ञ के बाद रानियों के लिए तैयार किया गया मंत्रयुक्त पेय वे स्वयं पी लेते हैं, जिसके बाद वे गर्भवती हो जाते हैं। बाद में उनके शरीर से पुत्र मांधाता का जन्म होता है। इसी कथा को आधार बनाकर यह उपन्यास लिखा गया है।  लीगल एड के वकीलों ने पेश किया वकालतनामा त्विषा शर्मा मामले में गिरिबाला सिंह की ओर से चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल रीना वर्मा और श्रेयस सक्सेना ने जिला अदालत में वकालतनामा प्रस्तुत किया है। दोनों वकील विधिक सेवा प्राधिकरण से जुड़े हैं। इस कारण अदालत ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से पूछा है कि उन्हें मामले में पैरवी की अनुमति दी जा सकती है या नहीं। कोर्ट ने इस संबंध में आवश्यक अनुमति और दिशा-निर्देश मांगे हैं।  दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद जांच तेज त्विषा शर्मा की दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट सीबीआई को मिल गई है। जांच एजेंसी अब मेडिकल, डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों का मिलान कर रही है। जांच का फोकस गर्भावस्था, शरीर पर मिले चोटों के निशान और फांसी के फंदे से जुड़े तथ्यों पर है। इसके अलावा मोबाइल और लैपटॉप से रिकवर किए गए चैट, कॉल रिकॉर्ड, फोटो, वीडियो और अन्य डिलीट किए गए डेटा का भी विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि मामले की सभी कड़ियों को जोड़ा जा सके।  CBI जुटा रही मेडिकल और डिजिटल सबूत ट्विशा शर्मा मौत मामले में जांच कर रही सीबीआई को दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिल गई है। एजेंसी अब मेडिकल, डिजिटल और फोरेंसिक सबूतों का मिलान कर रही है। जांच में प्रेग्नेंसी, अबॉर्शन, शरीर पर मिले चोटों के निशान और फांसी के फंदे से जुड़े तथ्यों पर फोकस किया जा रहा है। वहीं, गिरिबाला सिंह की ओर से जिला कोर्ट में लीगल एड डिफेंस काउंसिल की रीना वर्मा और श्रेयस सक्सेना ने वकालतनामा पेश किया। दोनों वकील विधिक सेवा प्राधिकरण (लीगल सर्विस अथॉरिटी) से जुड़े हैं, इसलिए कोर्ट ने प्राधिकरण से अनुमति मांगी है। सीबीआई मोबाइल, लैपटॉप से मिले चैट, कॉल रिकॉर्ड, फोटो, वीडियो और डिलीट डेटा की भी जांच कर रही है, ताकि मामले की पूरी कड़ी को जोड़ा जा सके। मेडिकल रिकॉर्ड, डिजिटल सबूतों की जांच कर रही सीबीआई एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा डेथ केस की जांच कर रही सीबीआई मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। मेडिकल रिकॉर्ड, डिजिटल सबूतों और अन्य तथ्यों को जोड़कर जांच कर रही है। गिरिबाला सिंह की ओर से जबलपुर हाईकोर्ट में पेश दस्तावेज में सामने आया है कि जांच से जुड़े तथ्य पहले ही उनके पास पहुंच रहे थे। ट्विशा के परिजन के वकील अंकुर पांडे का कहना है कि इसी के चलते गिरिबाला अग्रिम जमानत लेने में सफल हो गईं। मामले की प्रारंभिक जांच और रस्सी जब्त करने वाले एसआई दिनेश शर्मा से दोबारा पूछताछ की जाएगी। शर्मा ने ही घटना के बाद सबसे पहले घटनास्थल का निरीक्षण किया और क्राइम सीन तैयार किया था। घटनास्थल की तस्वीरों में कमरे में दो अलग-अलग रिंग पर दो बेल्ट लटकी नजर आ रही थीं, लेकिन पुलिस ने 13 मई को केवल एक बेल्ट जब्त की। महिला बंदियों ने प्रस्तुत किए भजन महिला आयोग की टीम ने जेल के महिला वार्ड, अस्पताल, रसोईघर, पुस्तकालय, आर्ट एंड क्राफ्ट सेंटर तथा ब्यूटी पार्लर का निरीक्षण किया। इस दौरान बंदियों से उनकी समस्याओं और जरूरतों के बारे में भी जानकारी ली गई। जेल के सांस्कृतिक कक्ष में महिला बंदियों के ऑर्केस्ट्रा दल ने भजन प्रस्तुत किए। निरीक्षण के दौरान आयोग के सचिव सुरेश तोमर, जेल अधीक्षक राकेश भांगरे सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।  एसआई ने रस्सी जब्त की और कार में रख ली वकील अंकुर पांडे ने कहा– कटारा हिल्स थाने के एसआई दिनेश शर्मा 13 मई 2026 को सुबह करीब 9:42 बजे ट्विशा के घर पहुंचे। उन्होंने गिरिबाला और समर्थ के सामने रस्सी जब्त की, लेकिन दस्तावेज में किसी को चश्मदीद नहीं बनाया। उन्होंने रस्सी अपनी कार में रख ली, जबकि ये तत्काल एम्स के डॉक्टरों को देना था। 13 मई को पीएम कराने भी दिनेश शर्मा ही एम्स पहुंचे थे। ट्विशा के परिजन ने इस पर 14 मई को हंगामा कर दिया। इसके बाद एसआई ने 15 मई को ये रस्सी डॉक्टरों को दी। वकील कहते हैं, ऐसे सबूत जुटाते समय गवाह बनाना कानूनी रूप से जरूरी है। पुलिस को शुरुआत में ही गिरिबाला और पति समर्थ को संदिग्ध के रूप में चिह्नित करना था, लेकिन ऐसा नहीं किया। इतनी बड़ी चूक के बावजूद जिम्मेदार उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। 27 मई को हाईकोर्ट ने गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी थी। एक जून को गिरफ्तारी के बाद सीबीआई की टीम गिरिबाला और समर्थ सिंह को लेकर उनके घर पहुंची थी। रस्सी की पहचान करने वाले व्यक्ति का नाम दर्ज नहीं वकील का दावा है कि प्रारंभिक जांच करने वाले एसआई दिनेश शर्मा की भूमिका संदिग्ध है। अग्रिम जमानत के लिए दिए गए आवेदन में जब्ती से जुड़े दस्तावेज में हुई गलतियों का जिक्र था। इसी आधार पर जमानत मांगी गई। इससे संकेत मिलता है कि केस डायरी … Read more

नटराजन मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, कांग्रेस विधायक आज राष्ट्रपति से करेंगे मुलाकात

भोपाल  सुप्रीम कोर्ट कल कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें उन्होंने अपने राज्यसभा नामांकन पत्रों को खारिज किए जाने को चुनौती दी है। वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने न्यायमूर्ति पीके मिश्रा और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर की पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए इसे अत्यंत तत्काल सुनवाई योग्य मामला बताया और शीघ्र सुनवाई या अंतरिम आदेश की मांग की। अदालत ने उनकी दलीलों पर संज्ञान लेते हुए मामले को कल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया। सिंघवी ने दलील दी कि रिटर्निंग ऑफिसर ने यह कहते हुए नामांकन खारिज किया कि नटराजन ने लंबित आपराधिक मामले की जानकारी नहीं दी, जबकि वास्तव में केवल समन जारी हुआ था और मामले में अभी तक संज्ञान भी नहीं लिया गया था। उन्होंने कहा कि यहां तक कि संज्ञान भी नहीं लिया गया था, फिर भी नामांकन खारिज कर दिया गया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि रिटर्निंग ऑफिसर का निर्णय अवैध, मनमाना और पक्षपातपूर्ण है। साथ ही नामांकन खारिज करने के आदेश को तत्काल रद्द करने की मांग की गई है। याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने मीनाक्षी नटराजन की ओर से पेश होते हुए आरोप लगाया कि उनका नामांकन गलत कानूनी आधार पर संक्षेप में खारिज किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करने पर सहमति जताई, लेकिन साथ ही कहा कि वास्तविक कानूनी उपाय चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव याचिका (इलेक्शन पिटीशन) दायर करना है।  मीनाक्षी नटराजन को चुनाव आयोग पर भरोसा पूरे मामले पर मीनाक्षी नटराजन का भी बयान सामने आया था। चुनाव आयोग के दफ्तर से बाहर आकर मीडिया से उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने हमारी बात सुनी है और सिंघवी जी ने पूरे मामले को विस्तार से उनके समक्ष रखा है। हमें संवैधानिक संस्थाओं पर पूरा भरोसा है। हम अपनी लड़ाई आगे भी जारी रखेंगे। चुनाव आयोग के फैसले का इंतजार जो जानकारी सामने आ रही है, इसके मुताबिक कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को करीब 35 मिनट तक चुनाव आयुक्त से  बातचीत की थी। इस प्रतिनिधिमंडल में केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, मीनाक्षी नटराजन, भूपेश बघेल, अभिषेक मनु सिंघवी और विवेक तन्खा समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। बाहर आकर प्रेस को ब्रीफ किया था। उसमें सिंघवी ने बताया था कि चुनाव आयोग तक हमने हमारी बात पहुंचा दी है। उन्होंने हमारी बात पर विचार कर फैसला लेने का कहा है। हालांकि ये फैसला कब आएगा, इसका कहीं जिक्र नहीं है। बुधवार रात तक कोई फैसला नहीं आया। अब संभावना जताई जा रही है कि कुछ देर में चुनाव आयोग मामले में अपना फैसला सुना सकता है।  न्याय में इतनी देरी क्यों : सिंघार नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि कांग्रेस को आज सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। उनका कहना था कि चुनाव आयोग चाहता तो इस मामले में बुधवार को ही फैसला दे सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड में भाजपा उम्मीदवार के मामले में चुनाव आयोग ने निर्णय लिया था, लेकिन इस प्रकरण में आयोग ने कोई विचार नहीं किया। सिंघार ने कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर ने नियमों की अनदेखी की है। उन्होंने कहा, "हमने सुप्रीम कोर्ट से तत्काल सुनवाई और निर्णय की मांग की थी। अदालत ने कल का समय दिया है, लेकिन न्याय में इतनी देरी क्यों हो रही है? कई मामलों में रातभर सुनवाई होती रही है।" उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग भाजपा की कठपुतली की तरह काम कर रहा है और संवैधानिक संस्थाओं का उपयोग रबर स्टांप की तरह किया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने विश्वास जताया कि सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को न्यायपूर्ण फैसला देगा। तीनों राज्यसभा सीटें जीत सकती है भाजपा दरअसल, मामले पर चुनाव आयोग की चुप्पी ने कांग्रेस की धड़कनें बढ़ा दी हैं। सूत्रों के अनुसार, आयोग इस मामले में कानूनी राय लेने के बाद फैसला करेगा। यदि तब तक आयोग कांग्रेस के पक्ष में कोई फैसला नहीं करता या खामोश ही रहता है तो भाजपा उम्मीदवार महेश केवट का निर्वाचन तय हो जाएगा। बाकी दो सीटों पर भाजपा उम्मीदवार तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल का निर्वाचन निर्विरोध तय है। ऐसे में प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटें भाजपा बिना लड़े जीत जाएगी। सिंघार बोले- न्याय में देरी क्यों? सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टलने पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा- कांग्रेस को आज सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ा। चुनाव आयुक्त चाहते तो कल इस बारे में निर्णय दे सकते थे। खारिज करना या स्वीकार करना, यह विशेष अधिकार चुनाव आयोग को है। हरियाणा में चुनाव आयोग ने हस्तक्षेप किया था, गुजरात में हस्तक्षेप किया था तो एमपी में क्यों नहीं किया? सिंघार ने भोपाल में मीडिया से कहा- झारखंड में बीजेपी कैंडिडेट को आप (चुनाव आयोग) वैलिड कर सकते हैं तो मीनाक्षी नटराजन के मामले में फैसला क्यों नहीं लिया? इससे स्पष्ट है कि चुनाव आयोग भाजपा के रबर स्टैंप के रूप में काम कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन पर चुनाव आयोग ने कोई विचार नहीं किया। उनके रिटर्निंग ऑफिसर ने स्पष्ट रूप से नियमों की धज्जियां उड़ाईं। सुप्रीम कोर्ट ने कल का समय दिया है। मैं समझता हूं कि इसमें न्याय होगा लेकिन न्याय में इतनी देरी क्यों हो रही है? सुप्रीम कोर्ट इस पर निर्णय आज करता तो बेहतर होता क्योंकि आज नामांकन वापसी की लास्ट डेट है। अदालत के निर्णय के बाद ही करें कार्यवाही वहीं, पूर्व मंत्री पी.सी. शर्मा विधानसभा पहुंचे और अपने समर्थकों के साथ विधानसभा गेट पर नारेबाजी की। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा की निर्वाचन शाखा भाजपा के इशारे पर काम कर रही है। शर्मा ने कहा कि ऐसी जानकारी मिल रही है कि दोपहर एक से तीन बजे के बीच भाजपा के तीनों राज्यसभा उम्मीदवारों को विजयी घोषित कर प्रमाणपत्र दिए जा सकते हैं। उन्होंने कहा, "हमने इस पर आपत्ति दर्ज कराई है। मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए विधानसभा की निर्वाचन शाखा को अदालत के निर्णय के बाद ही आगे की कार्रवाई करनी चाहिए।"  कांग्रेस की बैठक में होगी चर्चा गुरुवार को दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं की एक बैठक भी आयोजित की गई है। पार्टी ने अपने सभी महासचिवों, प्रदेश प्रभारियों और प्रदेश अध्यक्षों को दिल्ली तलब किया है। … Read more

किसानों के लिए बड़ी सौगात: बाढ़ और फतुहा में बन रहे दो चेकडैम, 3000 एकड़ भूमि होगी सिंचित

बाढ़ (पटना)  बाढ़ और फतुहा के किसानों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। क्षेत्र में जल संचयन और सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए जल संसाधन विभाग द्वारा दो बड़े चेकडैम का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर कराया जा रहा है। इस पूरी महत्वाकांक्षी योजना के तहत कुल 10 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जा रही है, जिसका आवंटन ग्लोबल टेंडर के माध्यम से किया गया है। आगामी मानसून और वर्षा के मौसम को देखते हुए निर्माण एजेंसी द्वारा कार्य की रफ्तार काफी तेज कर दी गई है। जनवरी 2027 तक अंदौली चेकडैम पूरा करने का लक्ष्य, 10 गांवों को मिलेगा लाभ योजना के अंतर्गत पहला चेकडैम फतुहा प्रखंड के जैतीया पंचायत में धारदा नदी पर और दूसरा बाढ़ अनुमंडल के महाने नदी पर अंदौली चेकडैम के नाम से बनाया जा रहा है। बाढ़ के अंदौली में लगभग 4 करोड़ रुपये की लागत से जयप्रकाश कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा तैयार किए जा रहे इस चेकडैम का निर्माण कार्य जनवरी 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस परियोजना से नदी में करीब डेढ़ मीटर तक पानी को रोका जा सकेगा। कनीय अभियंता चंद्रशेखर वर्मा ने बताया कि इस चेकडैम से पानी को डाइवर्ट कर सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचाया जाएगा, जिससे विशेषकर गेहूं की फसल के पटवन में किसानों को व्यापक फायदा मिलेगा। इन दोनों परियोजनाओं से दोनों अनुमंडलों के लगभग 10-10 गांवों के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और करीब 1500-1500 एकड़ (कुल 3000 एकड़) कृषि भूमि सिंचित हो सकेगी। इसके साथ ही आसपास के इलाकों का वाटर लेवल (भूजल स्तर) भी काफी सुधरेगा। काम बंद होने की अफवाह निराधार: जेपीसी हाल ही में स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों के विरोध के कारण निर्माण कार्य बंद होने की उड़ी अफवाहों को कंपनी प्रबंधन ने पूरी तरह खारिज कर दिया है जयप्रकाश कंस्ट्रक्शन कंपनी के अधिकारी सूरज साह ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि काम रुकने की बात पूरी तरह बेबुनियाद और निराधार है। यह केवल कंपनी पर अनावश्यक दबाव बनाने की कुछ तत्वों की साजिश थी, जबकि हकीकत यह है कि निर्माण कार्य एक मिनट के लिए भी प्रभावित नहीं हुआ है और लगातार जारी है। घटिया ईंट की शिकायत पर तुरंत एक्शन, ग्रामीणों की निगरानी में हो रहा काम परियोजना की गुणवत्ता के सवाल पर कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि कुछ ग्रामीणों ने निर्माण में उपयोग की जा रही ईंटों के स्तर को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी, जिस पर प्रबंधन ने त्वरित संज्ञान लिया। अधिकारियों के अनुसार, इस बड़े प्रोजेक्ट में सैकड़ों डाला ट्रैक्टर ईंटों की खपत होनी है, जिसमें से संबंधित ईंट भट्ठा मालिक द्वारा भेजे गए महज एक-दो डाला ईंटों में थोड़ी कमी पाई गई थी। शिकायत मिलते ही उस भट्ठे से तत्काल सप्लाई रोक दी गई और कमियों को दुरुस्त कर लिया गया। ईंट की शिकायत करने वाले स्थानीय ग्रामीण सुजीत कुमार ने बताया कि शुरुआत में दो डाला ईंट दो-तीन नंबर (घटिया स्तर) की आ गई थी, जिसकी उन्होंने आपत्ति की थी। शिकायत के बाद कंपनी द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए उन ईंटों को बदलवा दिया गया और अब पूरी तरह से नंबर वन (उत्कृष्ट) ईंटें लगाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण खुद लगातार इस पूरी परियोजना की निगरानी कर रहे हैं और अब बेहद पारदर्शी व गुणवत्तापूर्ण काम हो रहा है।

रांची में भूजल स्तर बढ़ाने की बड़ी योजना, 3 लाख मिलियन लीटर जल रिचार्ज का लक्ष्य

रांची  राज्य में भूगर्भ जल स्तर को बढ़ाने और वर्षा का जल संरक्षित करने के लिए पेयजल स्वच्छता विभाग और नगर निकायों की तरफ से अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए करीब 2500 ऐसे जलस्रोतों की पहचान की गई है जिनमें कम जल रहता है या सूखे पड़े हैं। इनकी जलभंडारण क्षमता को बढ़ाकर वर्षा का जल इनमें जमा किया जाएगा। इसके अलावा खराब पड़े हैंडपंप, डीप बोरिंग और खदानों के जरिए भी जल संग्रहण किया जाएगा। केंद्रीय भूजल परियोजना के विज्ञानी सलाहकार परमिंदर सिंह ने बताया कि इस तरह के उपायों से करीब तीन लाख मिलियन लीटर जल जमीन के नीचे भेजा जाएगा। यह जल पहले से बने वाटर रिचार्ज सिस्टम के अतिरिक्त होगा। भूजल की स्थिति को इससे नया रिचार्ज सिस्टम मिलेगा और यह लंबे समय तक प्रभावी रहेगा। परमिंदर सिंह ने बताया कि नदियों और तालाबों का पानी एक दूसरे को रिचार्ज करेगा तो सतह पर मौजूद जलस्रोतों में सालों भर जल की उपलब्धता रहेगी। बड़े बांध की जगह नए कच्चे निर्माण से रोकेंगे जल राज्य में 28 के करीब बड़े बांध हैं जिनमें साल भर जल रहता है। पिछले तीस सालों में किसी बड़े बांध का निर्माण नहीं हुआ है। लेकिन दस हजार के करीब कच्ची संरचना बनी है। पिछले साल हुई भारी बारिश ने ग्रामीण और वन क्षेत्र में सतह के उपर और नीचे मौजूद जल को स्थिर किया है। लेकिन शहरी क्षेत्र में जल की समस्या गर्मी के साथ ही चरम पर है। इसे रोकने के लिए शहरों के आसपास भी कच्चे निर्माण कर उनमें जल संरक्षण किया जाएगा। बढ़ा है राज्य का जलभंडार राज्य में इस वर्ष भी बारिश समय से पहले हुई है। पिछले साल वर्षा जल रिचार्ज और जल दोहन का अनुपात सही रहा था। नई वर्षा ने जल भंडारण को बढ़ाया है जबकि अभी मानसून आने ही वाला है। इससे राज्य को सुरक्षित जल भंडारण में मदद मिलेगी।  

भारत-पाकिस्तान महामुकाबला 14 जून को, हरमनप्रीत की टीम पर रहेंगी नजरें

 नई दिल्ली  महिला टी20 वर्ल्ड कप का 10वां संस्करण कल यानी 12 जून 2026 से शुरू होने वाला है। ये सीजन ऐतिहासिक होने जा रहा है, क्योंकि पहली बार 12 टीमें खिताब की जंग के लिए एक-दूसरे से भिड़ेगी। इस टूर्नामेंट का फाइनल मैच 5 जुलाई को खेला जाएगा इस बार टी20 विश्व कप की मेजबानी का जिम्मा इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड के कंधों पर है। 33 मुकाबलों वाले इस मेगा इवेंट में 12 टीमों को दो ग्रुप में बांटा गया है। ग्रुप-ए में भारत, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, बांग्लादेश और नीदरलैंड्स को रखा गया है। वहीं ग्रुप-बी में मेजबान इंग्लैंड के साथ न्यूजीलैंड, श्रीलंका, वेस्टइंडीज, आयरलैंड और स्कॉटलैंड की टीमें होंगी। भारतीय फैंस को तो बस इंतजार है कब भारत और पाकिस्तान महिला टीम का मैच हो, आइए आपको बताते हैं ये मैच कब, कहां और कितने बजे से खेला जाएगा? IND vs PAK W T20 World Cup 2026: कब होगा भारत-पाक मैच? वनडे विश्व कप 2025 का खिताब जीतने वाली हरमनप्रीत कौर की अगुवाई वाली भारतीय टीम के लिए यह विश्व कप बेहद खास होगा, क्योंकि अब टीम इंडिया टी20 की बादशाहत हासिल करने के इरादे से उतरेगी। भारतीय महिला टीम आज तक टी20 विश्व कप की ट्रॉफी नहीं उठा सकी है। वह सिर्फ एक बार 2020 में फाइनल तक पहुंची थी। बता दें कि 14 जून को बर्मिंघम में भारतीय महिला टीम का पहला मुकाबला चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से होगा। ये मैच रात 7 बजे से खेला जाएगा। दोनों के हेड-टू-हेड रिकॉर्ड देखें तो महिला टी20 विश्व कप में दोनों टीमें 8 बार भिड़ी हैं, जिनमें 6 बार भारत और सिर्फ 2 बार पाकिस्तान को जीत मिली है। ऐसे में भारतीय महिला टीम का पाकिस्तान पर पलड़ा भारी है। भारत का ग्रुप स्टेज का पूरा शेड्यूल 14 जून: भारत vs पाकिस्तान, बर्मिंघम 17 जून: भारत vs नीदरलैंड्स, लीड्स 21 जून: भारत vs दक्षिण अफ्रीका, मैंचेस्टर 25 जून: भारत vs बांग्लादेश, मैंचेस्टर 28 जून: भारत vs ऑस्ट्रेलिया,लंदन ट्रॉफी का रास्ता आसान नहीं ग्रुप-ए में भारतीय महिला टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती 6 बार की चैंपियन ऑस्ट्रेलिया और मजबूत दक्षिण अफ्रीका होगी। हरमनप्रीत की सेना को अगर इतिहास रचना है तो ग्रुप स्टेज से लेकर नॉकआउट तक हर मैच में अपना सर्वश्रेष्ठ देना होगा। बांग्लादेश और नीदरलैंड्स को हल्के में लेनी की गलती टीम इंडिया को नहीं करनी होगी। Women's T20 WC 2026: दोनों ग्रुप इस प्रकार- ग्रुप ए: भारत, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड्स, दक्षिण अफ्रीका, बांग्लादेश ग्रुप बी: इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, श्रीलंका, वेस्टइंडीज, आयरलैंड, स्कॉटलैंड

नारायणपुर मॉडल बना किसानों के लिए मिसाल, खेतों में आई फलदार क्रांति

नारायणपुर का मॉडल बना मिसाल, किसानों के खेतों में फलदार क्रांति बासीन ग्राम में मनरेगा का असर: 99% पौधे जीवित, किसानों के लिए नई उम्मीद रायपुर,  महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत नारायणपुर जिले के ओरछा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत कुंदला के आश्रित ग्राम बासीन में किसानों की आय बढ़ाने और हरित विकास को बढ़ावा देने की एक उल्लेखनीय पहल सामने आई है। यहां किसानों के खेतों में लगाए गए फलदार वृक्षों में लगभग 99 प्रतिशत पौधे जीवित एवं स्वस्थ पाए गए हैं, जो योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का सफल उदाहरण बनकर उभरा है। किसानों के दीर्घकालिक लाभ, पर्यावरण संरक्षण के लिए लगाए फलदार वृक्ष         मनरेगा के अंतर्गत स्वीकृत नर्सरी में उद्यान विभाग द्वारा उच्च गुणवत्ता वाले ग्राफ्टेड आम के पौधे तैयार किए गए और वित्तीय वर्ष 2025-26 में चयनित किसानों के खेतों में उनका रोपण कराया गया। इस पहल का उद्देश्य किसानों को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ उपलब्ध कराना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और ग्रामीण क्षेत्रों में फलदार वृक्षों का विस्तार करना है। पौधों के संरक्षण-संवर्धन के लिए रखरखाव व्यवस्था की गई सुनिश्चित        योजना के तहत केवल पौधारोपण ही नहीं, बल्कि पौधों के संरक्षण और संवर्धन के लिए एक वर्ष तक रखरखाव की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई। साथ ही उद्यान विभाग द्वारा किसानों को सामूहिक फेंसिंग (बाड़बंदी) का लाभ दिया गया, जिससे पौधों को नुकसान से बचाया जा सका। किसानों ने भी सिंचाई और देखभाल में सक्रिय भूमिका निभाई।  किसानों की भागीदारी, विभागीय समन्वय से हुई 99 प्रतिशत जीवितता दर        हाल ही में किए गए क्षेत्रीय निरीक्षण में लगाए गए पौधों की 99 प्रतिशत जीवितता दर दर्ज की गई, जो किसानों की भागीदारी, विभागीय समन्वय और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का परिणाम माना जा रहा है। इस पहल से आने वाले वर्षों में किसानों को आम उत्पादन के माध्यम से अतिरिक्त आय प्राप्त होगी, वहीं क्षेत्र में हरित आवरण बढ़ने से पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। ग्राम बासीन का यह मॉडल अब अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है।         “रोजगार के साथ हरियाली और आय वृद्धि” की अवधारणा को साकार करती यह पहल ग्रामीण विकास का एक सफल मॉडल बनकर उभर रहा है।

89 किलो अफीम के साथ ट्रक चालक दबोचा गया, सिरसा पुलिस और ANC को मिली बड़ी सफलता

पंचकूला. वर्तमान में हरियाणा के 22 जिलों में से 14 जिले एनसीआर यानी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आते हैं। इनमें से पांच जिले जल्द ही बाहर हो सकते हैं। जी हां, हरियाणा सरकार इस बाबत 16 जून को बड़ा फैसला ले सकती है। ये पांच जिले कौन से हैं, सरकार यह फैसला क्यों ले रही है और यह NCR होता क्या है? आइए इसे पूरे मामले को विस्तार से जानते हैं। क्या है NCR? राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का संदर्भ दिल्ली के पड़ोसी राज्यों के जिलों से संबंधित है। दरअसल, 1951 के बाद दिल्ली में औद्योगिक विकास तेजी से हुआ। जिससे देश की राजधानी में अन्य राज्यों के लोग भी रोजगार और बेहतर सुविधाओं के लिए प्रवास करने लगे। दिल्ली पर इस बढ़ती आबादी और भीड़-भाड़ के दबाव को कम करने के लिए NCR की परिकल्पना की गई। इसी उद्देश्य के साथ साल 1985 में NCR प्लानिंग बोर्ड (NCRPB) का गठन किया गया, ताकि पूरे क्षेत्र का विकास एक व्यवस्थित योजना के तहत हो सके। अत: पड़ोसी राज्यों के कुछ शहर और जिलों में इसका विस्तार (100 KM तक) कर दिल्ली जैसी सुविधाएं और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सके। मौजूदा समय में एनसीआर में तीन राज्यों (हरियाणा, यूपी और राजस्थान) के 24 जिले शामिल हैं। इस सूची में सबसे ज्यादा जिले (14) हरियाणा के हैं, इन्हीं 14 जिलों के पांच जिलों को बाहर करने के प्रस्ताव पर अगले सप्ताह बैठक की जाएगी। हरियाणा के इन पांच जिलों में करनाल, जींद, महेंद्रगढ़, भिवानी और चरखी दादरी शामिल है।। इस बाबत एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की 16 जून को होने वाली बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा होगी। सरकार क्यों ले रही यह फैसला? दिल्ली से 100 किलोमीटर के दायरे से बाहर के जिलों को एनसीआर से बाहर करने के लिए हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में केंद्रीय ऊर्जा और आवास व शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने प्रयास शुरू किए थे। रीजनल प्लान-2041 के तहत एनसीआर सीमा को नए सिरे से तय करने का प्रस्ताव है। हरियाणा सरकार के प्रस्ताव को स्वीकृति मिली तो राज्य का एनसीआर क्षेत्र करीब 60 फीसदी तक सिमट सकता है। बैठक के मसौदे में प्रस्ताव है कि एनसीआर की सीमा राजघाट से 100 किमी के दायरे तक सीमित की जाए। अभी हरियाणा के 14 जिले किसी न किसी रूप में एनसीआर का हिस्सा हैं, जिसका कुल क्षेत्रफल 25 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक है। NCR से बाहर होने की वजह हरियाणा सरकार का तर्क है कि एनसीआर (NCR) के सख्त नियमों के कारण इन 5 जिलों को फायदे से ज्यादा भारी आर्थिक और व्यापारिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। दिल्ली से दूर मौजूद जींद या महेंद्रगढ़ जैसे जिलों में औद्योगिक विकास ठप होने की आशंका है। NGT और GRAP के कड़े नियमों के कारण उद्योगों और फैक्ट्रियों पर लगातार सख्त कार्रवाई होती है। इसके साथ ही 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर रोक से स्थानीय व्यापारियों और किसानों का परिवहन बजट बिगड़ता है। नए फॉर्मूले में क्या होगा? नए फॉर्मूले के लागू होने पर यह क्षेत्र घटकर करीब 10.5 हजार वर्ग किलोमीटर तक रह सकता है। उत्तर प्रदेश और राजस्थान ने उन तहसीलों को भी एनसीआर में शामिल रखने का सुझाव दिया है, जिनका कुछ हिस्सा 100 KM की सीमा में आता है, जबकि हरियाणा का तर्क है कि केवल एनसीआर की सीमा में पूरी तरह आने वाली तहसीलों को ही रखा जाए।

बाढ़-जलभराव से निपटने के लिए 15 जून से 24×7 कंट्रोल रूम सक्रिय

 जयपुर  आपदा प्रबंधन, सहायता एवं नागरिक सुरक्षा मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि आगामी मानसून के दृष्टिगत प्रदेश में संभावित बाढ़, अतिवृष्टि, जलभराव एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी विभाग व्यापक एवं समन्वित तैयारियां सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जनसुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा संभावित आपदा की स्थिति में त्वरित राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करने के लिए अभी से पूर्ण तैयारी रखें। शासन सचिवालय के सभागार में गुरुवार को आयोजित राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में डॉ.किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि पिछले वर्षों के अनुभवों एवं संवेदनशील क्षेत्रों के आकलन के आधार पर बाढ़ संभावित एवं जलभराव वाले क्षेत्रों की पुनः पहचान की जाए तथा वहां आवश्यक संसाधनों की अग्रिम उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन में पूर्व तैयारी, समयबद्ध चेतावनी, त्वरित प्रतिक्रिया तथा प्रभावी समन्वय सफलता का आधार है। उन्होंने निर्देश दिए कि राज्य एवं जिला स्तर पर स्थापित आपदा नियंत्रण कक्ष 15 जून से चौबीसों घंटे सक्रिय रहें। राज्य स्तरीय नियंत्रण कक्ष, जिला नियंत्रण कक्ष तथा विभागीय नियंत्रण कक्षों के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए तथा सभी सूचनाएं समय पर राज्य नियंत्रण कक्ष को प्रेषित की जाएं। आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों एवं एडवाइजरी की पूर्ण पालना सुनिश्चित की जाए। आपदा प्रबंधन मंत्री ने कहा कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा 24 घंटे संचालित वेधशालाओं एवं मौसम निगरानी तंत्र के माध्यम से नियमित मौसम पूर्वानुमान एवं चेतावनियां जारी की जा रही हैं। मौसम संबंधी जानकारी के त्वरित प्रसार के लिए सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया, एसएमएस, व्हाट्सएप समूहों तथा अन्य संचार माध्यमों का प्रभावी उपयोग किया जाए। उन्होंने सभी अधिकारियों को सचेत ऐप डाउनलोड कर चेतावनी अलर्ट से अद्यतन रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मानसून की नियमित निगरानी के लिए वेदर वॉच ग्रुप का गठन किया गया है, जो नियमित बैठकों के माध्यम से वर्षा की स्थिति, संभावित जोखिमों तथा आवश्यक तैयारियों की समीक्षा करेगा। राज्य एवं जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन तंत्र, मौसम विभाग, जल संसाधन विभाग तथा जिला प्रशासन के बीच सतत समन्वय बनाए रखा जाएगा।  डॉ. मीणा ने जल संसाधन विभाग को सभी बांधों, जलाशयों एवं एनीकटों के गेटों की मरम्मत, रखरखाव एवं नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए प्रभावी अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित करने, बाढ़ संभावित क्षेत्रों का जोखिम मूल्यांकन करने तथा आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।  उन्होंने नगरीय विकास विभाग, स्थानीय निकायों एवं पंचायतीराज संस्थाओं को नालों की सफाई, ड्रेनेज तंत्र को सुचारू बनाने, जलभराव वाले क्षेत्रों की पहचान करने तथा डी-वाटरिंग के लिए पर्याप्त पम्पसेट, जनरेटर, रेत की बोरियां एवं अन्य आवश्यक उपकरण उपलब्ध रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उचित ड्रेनेज व्यवस्था के माध्यम से शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव की समस्या को न्यूनतम किया जाए।  डॉ. मीणा ने कहा कि बाढ़ प्रबंधन के लिए त्रिस्तरीय तैयारी सुनिश्चित की जाए। इसमें बाढ़ से पूर्व की तैयारी, बाढ़ के दौरान राहत एवं बचाव कार्य तथा बाढ़ के पश्चात पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन की कार्ययोजना शामिल हो। जिला कलक्टर बाढ़ संहिता के अनुसार सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें। उन्होंने राज्य आपदा मोचन बल एसडीआरएफ, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल एनडीआरएफ, सेना, वायुसेना, पुलिस, सिविल डिफेंस, होमगार्ड तथा अन्य सुरक्षा एजेंसियों को पूर्ण सतर्कता बनाए रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। विशेष बचाव दलों एवं क्विक रिस्पॉन्स टीमों की तैनाती कर आवश्यक उपकरणों, नौकाओं, लाइफ जैकेट, रस्सियों एवं अन्य संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।  बैठक में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को 24×7 नियंत्रण कक्ष संचालित करने, पर्याप्त दवाइयों एवं जीवनरक्षक औषधियों का भंडारण रखने तथा मोबाइल मेडिकल टीमों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही जलजनित एवं संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए विशेष निगरानी रखने को कहा गया। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को सुरक्षित पेयजल आपूर्ति, क्लोरीनेशन तथा क्षतिग्रस्त जलापूर्ति लाइनों की त्वरित मरम्मत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।  ऊर्जा विभाग को विद्युत आपूर्ति व्यवस्था सुचारू बनाए रखने, क्षतिग्रस्त लाइनों एवं ट्रांसफार्मरों की त्वरित मरम्मत तथा राहत शिविरों में निर्बाध विद्युत उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। जिलों में उपलब्ध हेवी ड्यूटी जनरेटर सेट्स का डेटाबेस तैयार कर आवश्यकता पड़ने पर उनका उपयोग सुनिश्चित करने को कहा गया।  उन्होंने सार्वजनिक निर्माण विभाग को जर्जर भवनों की पहचान करने, रेलवे अंडरपास एवं संभावित जलभराव वाले क्षेत्रों में चेतावनी संकेतक लगाने तथा क्षतिग्रस्त सार्वजनिक परिसंपत्तियों के त्वरित पुनर्स्थापन की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। सभी विभागों को अपने क्षेत्राधिकार में जर्जर भवनों एवं जोखिम वाले स्थलों का सर्वेक्षण कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।  पशुपालन विभाग को पशुओं के लिए चारा, दवाइयों एवं टीकाकरण की पर्याप्त व्यवस्था रखने तथा पशुपालकों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए। वहीं मत्स्य विभाग को मछुआरों, तैराकों एवं विशेषज्ञ गोताखोरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को संवेदनशील क्षेत्रों के लिए आवश्यक खाद्यान्न एवं अन्य जरूरी वस्तुओं का अग्रिम भंडारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। डॉ. मीणा ने जिला कलक्टरों को राहत शिविरों, निकासी मार्गों, सुरक्षित आश्रय स्थलों, खोज एवं बचाव दलों तथा उपलब्ध संसाधनों का पूर्व परीक्षण करने के निर्देश दिए। जलभराव एवं बाढ़ संभावित क्षेत्रों की मैपिंग, राहत शिविरों का चिन्हीकरण तथा मॉक ड्रिल आयोजित कर तैयारियों की समीक्षा करने को कहा । जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों की बैठकें आयोजित कर विभागवार तैयारियों की समीक्षा करने तथा ग्राम स्तर तक चेतावनी एवं सूचना तंत्र को सुदृढ़ बनाने को निर्देशित किया।  आपदा प्रबंधन, सहायता एवं नागरिक सुरक्षा राज्य मंत्री श्री ओटाराम देवासी ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य आपदा आने पर राहत पहुंचाने के साथ पूर्व चेतावनी एवं समयबद्ध तैयारी के माध्यम से जनहानि एवं संपत्ति की क्षति को न्यूनतम करना है। उन्होंने कहा कि 15 जून से राज्य एवं जिला आपदा नियंत्रण कक्ष 24×7 सक्रिय रहेंगे तथा हेल्पलाइन सेवाएं भी पूर्ण रूप से कार्यशील रहे। मौसम विभाग, जल संसाधन विभाग, जिला प्रशासन एवं आपदा प्रबंधन तंत्र के मध्य सतत समन्वय स्थापित कर संभावित अतिवृष्टि, जलभराव एवं बाढ़ की परिस्थितियों पर निरंतर निगरानी रखने के निर्देश दिए।  श्री देवासी ने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, राहत शिविरों की तैयारी, … Read more