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श्री हरमंदिर साहिब परिसर में हंगामा, युवक की हरकत से मचा बवाल; SGPC अध्यक्ष ने दिए जांच के आदेश

अमृतसर  अमृतसर स्थित गोल्डन टेंपल परिसर के गुरुद्वारा शहीद बाबा गुरबख्श सिंह में एक युवक ने बेअदबी का प्रयास किया। युवक ने बुधवार देर शाम पावन स्वरूप के सामने की तलवार निकाल ली। हालांकि सेवादारों ने मुस्तैदी दिखाते हुए उसे पकड़ लिया। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने इस घटना का कड़ा संज्ञान लेते हुए साजिशकर्ताओं को बेनकाब करने की मांग की है। धामी ने बताया कि सेवादारों की मुस्तैदी के कारण बेअदबी होने से बच गई। दोषी को अब तक सजा नहीं मिल पाई उन्होंने इस घटना को बेहद गंभीर बताया और कहा कि यह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा प्रतीत होती है। धामी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बेअदबी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन सरकारों की नाकामी के कारण किसी भी दोषी को अब तक सजा नहीं मिल पाई है। धामी बोले- धार्मिक भावनाओं को भड़काने की साजिश धामी ने याद दिलाया कि कुछ वर्ष पहले सच्चखंड श्री हरिमंदिर साहिब में भी एक व्यक्ति ने जंगला फांदकर बेअदबी की कोशिश की थी, जिसकी साजिश का पर्दाफाश करने में सरकार विफल रही हैं। धामी के अनुसार, यह ताजा घटना शिरोमणि कमेटी के प्रबंधन को बदनाम करने और संगत की धार्मिक भावनाओं को भड़काने की साजिश है। सरकार सिख भावनाओं से जुड़े मामलों के प्रति गंभीर नहीं एडवोकेट धामी ने कहा कि आरोपी पुलिस हिरासत में है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस घटना के साजिशकर्ताओं को सामने नहीं लाया जाता, तो यह स्पष्ट होगा कि सरकार सिख भावनाओं से जुड़े मामलों के प्रति गंभीर नहीं है। उन्होंने गुरुद्वारा प्रबंधकों और संगत से भी अपील की कि ऐसे तत्वों को सफल होने से रोकने के लिए सभी को सतर्क रहकर अपनी सेवा निभानी चाहिए।  

पूर्वांचल बना पंचायत राजनीति का नया केंद्र, बलिया में जुड़े सबसे ज्यादा वोटर

लखनऊ यूपी के पंचायत मतदाताओं का नया भूगोल सामने आया है। त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचक नामावली-2025-26 के आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण वोट बैंक का संतुलन तेजी से बदल रहा है। एक तरफ पूर्वांचल के कई जिलों में पंचायत मतदाताओं की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ी है तो दूसरी तरफ शहरीकरण और पलायन की वजह से 11 जिलों में पंचायत वोट बैंक सिमट गया है। इनमें पश्चिम के पांच जिले शामिल हैं। सबसे चौंकाने वाली तस्वीर गाजीपुर की है, जहां पंचायत मतदाताओं की संख्या में 94,757 की कमी दर्ज हुई है। मैनपुरी में 93,207 और आजमगढ़ में 60,347 मतदाता घटे हैं। वाराणसी में 41,397, एटा में 23,429, आगरा में 23,294, गाजियाबाद में 15,637 और गौतमबुद्धनगर में 12,431 मतदाता कम हुए हैं। पंचायत क्षेत्रों से मतदाताओं के घटने का यह रुझान उन जिलों में अधिक दिखाई दे रहा है, जहां तेजी से शहरी विस्तार हो रहा है या फिर लंबे समय से पलायन चुनौती बना हुआ है। गौतमबुद्धनगर में मतदाताओं की संख्या सबसे कम एनसीआर के जिले पंचायत व्यवस्था से सबसे तेजी से दूर होते नजर आ रहे हैं। गौतमबुद्धनगर में पंचायत मतदाताओं की कुल संख्या केवल 2.09 लाख रह गई है, जो पूरे प्रदेश में सबसे कम है। गाजियाबाद में यह संख्या 4.56 लाख है। दूसरी ओर जौनपुर में 36.97 लाख, आजमगढ़ में 35.76 लाख, प्रयागराज में 34.95 लाख और गोरखपुर में 29.63 लाख पंचायत मतदाता हैं। यह अंतर बताता है कि जहां पश्चिमी यूपी के कुछ जिले तेजी से शहरी पहचान हासिल कर रहे हैं। वहीं, पूर्वांचल अब भी ग्रामीण राजनीति की सबसे बड़ी धुरी बना हुआ है। बलिया में सबसे अधिक नए मतदाता पूर्वांचल और तराई के कई जिले पंचायत वोटरों की नई ताकत बनकर उभरे हैं। बलिया में सबसे अधिक 1,60,376 नए पंचायत मतदाता जुड़े हैं। लखीमपुर खीरी में 1,38,223, देवरिया में 1,26,771, सिद्धार्थनगर में 1,23,162 और कुशीनगर में 1,20,011 मतदाताओं की वृद्धि दर्ज की गई है। प्रयागराज में भी 92,460 नए मतदाता जुड़े हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि प्रदेश की ग्रामीण राजनीति का केंद्र अब और अधिक पूर्वांचल की ओर खिसकता दिखाई दे रहा है।  

रूसी तेल विवाद पर जयशंकर का पलटवार, बोले- जरूरत पड़ने पर खुद भारत के पास आए थे अमेरिका

नई दिल्ली  भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अमेरिका और यूरोप को तेल के खेल पर अच्छे से धोया है. रूसी तेल की खरीद के मसले पर एस जयशंकर ने अमेरिका को स्पष्ट संदेश दिया. फिनलैंड की धरती से एस जयशंकर ने अमेरिका को साफ सुनाया कि दिखावा न करो, अमेरिका का तेल वाला खेल भारत अच्छे से जानता है. उन्होंने कहा कि रूस से तेल खरीदने के मामले में भारत ने हमेशा अपने राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखा है. भारत तेल की लागत और उपलब्धता के आधार पर तेल खरीदता है. भारत किसी दबाव या नैरेटिव को नहीं मानता. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जिस रूस तेल खरीद को लेकर आज सवाल उठाए जाते हैं, उसी के लिए कभी अमेरिका ने खुद भारत से आग्रह किया था कि भाई प्लीज रूसी तेल खरीद लो, वरना मार्केट की लंका लग जाएगी. वैश्विक तेल बाज़ार को स्थिर रखने के लिए ही अमेरिका ने भारत से रूसी तेल खरीद को लेकर गुहार लगाई थी।  दरअसल, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर अमेरिका और यूरोप को दो टूक जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि भारत ने रूस से तेल किसी राजनीतिक या वैचारिक कारण से नहीं, बल्कि अपनी जरूरतों और बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए खरीदा था. जयशंकर ने यह भी दावा किया कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जब वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल मची हुई थी, तब अमेरिका ने खुद भारत से रूसी तेल खरीदने के लिए कहा था ताकि बाजार स्थिर बना रहे।  भारत क्यों और कैसे रूसी तेल खरीदने लगा विदेश मंत्री ने कहा कि 2022 से पहले भारत ने रूस से बहुत अधिक मात्रा में तेल नहीं खरीदा था, लेकिन यूक्रेन युद्ध के बाद बनी परिस्थितियों ने भारत को नए विकल्प तलाशने के लिए मजबूर किया. उन्होंने बताया कि उस समय बाजार में जो तेल सबसे अधिक उपलब्ध था, वह रूसी तेल था. कारण कि यूरोपीय देश मिडिल ईस्ट से बड़े पैमाने पर तेल खरीद रहे थे, जो भारत का पारंपरिक सप्लायर रहा है. ऐसे में भारत के सामने रूस से तेल खरीदने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं बचे थे।  जयशंकर ने अमेरिका की पोल खोली उन्होंने याद दिलाया कि उसी दौरान अमेरिका ने भारत से कहा था कि वह रूस से तेल खरीदे, ताकि वैश्विक तेल बादार में कीमतें और आपूर्ति संतुलित रह सके. लेकिन बाद में जब भारत ने अपने हित में निर्णय लेते हुए रूसी तेल की खरीद बढ़ाई, तो पहले उस पर टैरिफ लगाए गए और फिर प्रतिबंधों में ढील दी गई. अमेरिका के इस दोहरे रवैये पर टिप्पणी करते हुए जयशंकर ने कहा,’आइए यह दिखावा न करें कि इसमें कोई बहुत बड़ा सिद्धांत शामिल है. यह पूरा मामला ऑन-ऑफ’ जैसा है. मतलब जब सूट करे तो करो, जब न सूट करे तो मत करो. हम सब समझदार लोग हैं, हम जानते हैं खेल क्या है।  जयशंकर का पूरा बयान पढ़िए     फिनलैंड में एक पैनल चर्चा में एस जयशंकर ने कहा, ‘हमने 2022 तक ज़्यादा रूसी तेल नहीं खरीदा. रूस-यूक्रेन जंग के हालात ने हमें मार्केट में उतरने पर मजबूर किया. रशियन हमारे लगातार सप्लायर रहे हैं. मैं चाहता हूं कि लोग यह याद रखें कि उस समय अमेरिका ने खास तौर पर भारत से रूसी तेल खरीदने के लिए कहा था ताकि ऑयल मार्केट स्टेबल हो सके. अगर आप देखें तो पहले पिछले साल रूसी तेल खरीदने पर हम पर टैरिफ लगाया, फिर अमेरिका ने रूसी तेल पर सैंक्शन हटा दिए. इसलिए यह दिखावा न करें कि इसमें कोई बड़ा प्रिंसिपल शामिल है. कुल मिलाकर बात यह है कि आपका सिद्धांत यह है कि जब हमें सूट करे तब सब ठीक और जब सूट न करे तब सब खराब. यहां हम सब समझदार हैं. हम जानते हैं कि खेल क्या है।  फिनलैंड में आयोजित एक टॉक में फिनलैंड की विदेश मंत्री एलीना वाल्टोनेन और यूएई की असिस्टेंट विदेश मंत्री लाना नुसेबेह के साथ एक पैनल चर्चा में भाग लेते हुए जयशंकर से रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत की स्थिति पर सवाल पूछा गया।  सवाल: रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर यूरोप में ऐसा माना जा रहा है कि भारत दोनों पक्षों के बीच एक नैतिक समानता (Moral Equivalence) बनाने की कोशिश कर रहा है. जैसे कि आप कह रहे हों कि ‘यह बहुत बुरा हुआ और इसे रुकना चाहिए’ लेकिन आप रूस के प्रति अधिक सहानुभूति रख रहे हैं और उससे तेल खरीदने को तैयार हैं. आप यहां मौजूद लोगों को अपना यह रुख कैसे समझाएंगे? डॉ. एस. जयशंकर का जवाब: ‘मैं यहां दो बातें कहना चाहूंगा. पहली यह कि मैं तेल खरीदता हूं. मैं तेल की कीमत (Cost) और उसकी उपलब्धता (Availability) के आधार पर इसे खरीदता हूं. उस समय बाज़ार में उपलब्ध ज़्यादातर तेल रूसी था, क्योंकि यूरोपीय देश मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट का तेल खरीद रहे थे, जो कि हमारा पारंपरिक सप्लायर था. ऐसे में परिस्थितियों ने हमें एक निश्चित दिशा में आगे बढ़ने के लिए मजबूर किया. दूसरी बात चूंकि आपने ‘नैतिक अस्पष्टता’ (Moral Ambiguity) की बात की है, तो मैं यह कहना चाहूंगा कि किसी भी यूरोपीय देश पर कभी भारतीय हथियारों से हमला नहीं हुआ है. काश, मैं यही बात भारत के संदर्भ में यूरोपीय हथियारों के लिए भी कह पाता.’ यूरोपीय देश उन हथियारों को बेचते हैं जिनका इस्तेमाल भारत पर हमला करने के लिए किया जाता है. ऐसा आज से नहीं, बल्कि पिछले कई सालों से हो रहा है. इसके विपरीत, हम भारतीयों ने कभी भी ऐसा कुछ नहीं किया जिससे यूरोप की सुरक्षा खतरे में पड़े. मुझे लगता है कि यह एक बेहद वाजिब और सही तर्क है। 

बॉर्डर से लौटाए गए 94 सिख श्रद्धालु, शहीदी गुरु पर्व यात्रा पर उठा बड़ा सवाल

कुरुक्षेत्र. हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (एचएसजीएमसी) की ओर से श्रीगुरु अर्जुन देव महाराज के शहीदी गुरु पर्व पर पाकिस्तान की धार्मिक यात्रा के लिए भेजे गए सिखों के जत्थे को अटारी-वाघा बॉर्डर से वापस भेजे जाने के बाद मामला पूरी तरह गरमा गया है। प्रशासनिक और दस्तावेजी प्रक्रिया में हुई गंभीर चूक के कारण 94 श्रद्धालुओं को पाकिस्तान में प्रवेश नहीं मिल सका और उन्हें बार्डर से बैरंग लौटना पड़ा। इस बड़ी लापरवाही के बाद जहां श्रद्धालुओं में भारी रोष है, वहीं एचएसजीएमसी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित कर दी है। बुधवार देर रात जत्थे के वापस कुरुक्षेत्र लौटने के बाद वीरवार सुबह एचएसजीएमसी के अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा तुरंत मुख्य कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों के साथ आपातकालीन बैठक की। मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने जांच कमेटी गठित करने की घोषणा की। कमेटी ने साफ किया है कि इस ऐतिहासिक चूक के लिए जो भी कर्मचारी या अधिकारी दोषी पाया जाएगा, उस पर सख्त कार्रवाई होगी। गृह मंत्रालय तक दौड़े अधिकारी, पर नहीं मिली क्लीयरेंस सूत्रों के मुताबिक, यात्रा के लिए आवश्यक दस्तावेज समय रहते बार्डर पर तैनात सुरक्षा और आव्रजन (इमिग्रेशन) अधिकारियों तक नहीं पहुंच पाए थे। बुधवार को जब जत्थे को बार्डर पर रोके जाने की खबर आई, तो एचएसजीएमसी के आला अधिकारी तुरंत चंडीगढ़ भागे और गृह मंत्रालय के अधिकारियों से संपर्क साधा। मंत्रालय से संपर्क करने पर जो सच सामने आया, वह चौंकाने वाला था। पता चला कि जिला स्तर से जो अधिकृत सूची गृह विभाग को भेजी जानी चाहिए थी, वह समय पर पहुंची ही नहीं। वीजा जारी होने के बाद भी सूची को वापस जिलों में नहीं भेजा गया। तालमेल की कमी के कारण श्रद्धालुओं को जरूरी क्लीयरेंस नहीं मिल सकी। अब संबंधित विभाग के कर्मचारी खुद को पाक-साफ बताते हुए एक-दूसरे पर जिम्मेदारी मढ़ने में लगे हैं।

15 जून को बनेगा बुधादित्य राजयोग, चार राशियों के लिए खुलेंगे सफलता के द्वार

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों का गोचर एक बेहद महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है. 15 जून को ग्रहों के राजा सूर्य देव वृषभ राशि से निकलकर अपने मित्र ग्रह बुध की स्वराशि मिथुन में प्रवेश करने जा रहे हैं, जहां बुद्धि और व्यापार के दाता बुध देव पहले से ही विराजमान हैं. सूर्य और बुध की इस युति से ब्रह्मांड में एक अत्यंत शुभ और शक्तिशाली बुधादित्य राजयोग का निर्माण होने जा रहा है. वैदिक ज्योतिष के अनुसार, जब आत्मा और प्रतिष्ठा के कारक सूर्य का मिलन बुद्धि और संवाद के कारक बुध से होता है, तो जातकों के आत्मविश्वास, निर्णय लेने की क्षमता और करियर में अभूतपूर्व प्रगति होती है. इस बार इस युति के शुरुआती समय में चंद्रमा की मौजूदगी से 'त्रिग्रही योग' का विशेष प्रभाव भी देखने को मिलेगा. इस महासंयोग का सबसे सकारात्मक प्रभाव मुख्य रूप से 4 भाग्यशाली राशियों पर पड़ने वाला है. आइए जानते हैं. मेष राशि (Aries)- करियर में बड़ी उपलब्धि और व्यावसायिक मुनाफा मेष राशि के लिए यह बुधादित्य योग दशम भाव में बनने जा रहा है, जो पेशेवर जीवन के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है. नौकरीपेशा जातक: नौकरी में प्रमोशन और वेतन वृद्धि के प्रबल योग हैं. नई नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अच्छे अवसर मिलेंगे. व्यापार: नए काम या स्टार्टअप की शुरुआत करने के लिए यह समय अत्यंत लाभकारी है. बाजार में आपकी साख बढ़ेगी और मुनाफे का ग्राफ ऊपर जाएगा. स्वास्थ्य: यदि आप पिछले कुछ समय से किसी पुरानी शारीरिक समस्या से परेशान थे, तो उसमें सुधार देखने को मिलेगा. वृषभ राशि (Taurus)– भाग्य का साथ और धार्मिक कार्यों में रुचि वृषभ राशि के जातकों को इस योग से रुके हुए कार्यों में गति मिलेगी. अटके काम पूरे होंगे: जो काम पिछले कई महीनों से सरकारी कागजी कार्रवाई या किसी अन्य वजह से रुके हुए थे, वे अब आसानी से पूरे हो जाएंगे. प्रतियोगी परीक्षाएं: छात्रों और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं को इस अवधि में अपनी मेहनत का सुखद परिणाम मिल सकता है. मानसिक शांति: आध्यात्मिक और धार्मिक गतिविधियों की तरफ आपका झुकाव बढ़ेगा. लंबी दूरी की यात्राओं के योग बनेंगे जो भविष्य में फलदायी सिद्ध होंगी. मिथुन राशि (Gemini)– आत्म-विश्वास और मान-सम्मान में वृद्धि चूंकि, यह युति और बुधादित्य राजयोग इसी राशि के लग्न भाव (प्रथम भाव) में बन रहा है, इसलिए सबसे अधिक और सीधा लाभ मिथुन राशि के जातकों को मिलेगा. करियर व व्यापार: कार्यक्षेत्र में आपकी लीडरशिप क्वालिटी निखरकर सामने आएगी. उच्च अधिकारियों से सराहना मिलेगी. व्यापार में कोई नई बड़ी डील फाइनल हो सकती है. आर्थिक पक्ष: अचानक धन लाभ के मजबूत योग बन रहे हैं. यदि कहीं पैसा अटका हुआ था, तो उसकी वापसी की संभावना बढ़ेगी. व्यक्तित्व: आपके आत्मविश्वास में गजब की वृद्धि होगी. आपकी वाणी प्रभावशाली और सौम्य रहेगी, जिससे लोग आपकी तरफ आकर्षित होंगे. सिंह राशि (Leo)- आय के नए स्रोत और पारिवारिक सुख सिंह राशि के स्वामी स्वयं सूर्य देव हैं, इसलिए इस गोचर का प्रभाव आपके लिए बेहद शुभ रहने वाला है. यह युति आपके एकादश भाव में होगी. आर्थिक लाभ: आपकी आय में जबरदस्त बढ़ोतरी के संकेत हैं. धन कमाने के नए-नए स्रोत सामने आएंगे, जिससे बैंक बैलेंस मजबूत होगा. पारिवारिक जीवन: परिवार में लंबे समय से चल रहे मतभेद या तनाव समाप्त होंगे. जीवनसाथी के साथ रिश्ते मधुर होंगे और उनका पूरा सहयोग मिलेगा. निवेश: यदि आप शेयर बाजार, संपत्ति या किसी अन्य क्षेत्र में निवेश की योजना बना रहे हैं, तो यह समय आपके लिए अनुकूल साबित हो सकता है.

27 जुलाई को शनि होंगे वक्री, शश महापुरुष राजयोग से 4 राशियों को बड़ा लाभ

27 जुलाई 2026 को कर्मफल दाता और न्याय के देवता शनि देव मीन में वक्री (Retrograde) होने जा रहे हैं. ज्योतिष शास्त्र में शनि की उल्टी चाल को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि वक्री होने पर शनि का प्रभाव और अधिक गहरा और तीव्र हो जाता है. आमतौर पर शनि की वक्री चाल को कष्टकारी माना जाता है, लेकिन यह सभी राशियों के लिए बुरी नहीं होती है. शनि देव व्यक्ति के कर्मों के हिसाब से फल देते हैं. इस बार मीन राशि में शनि के वक्री होने से 4 विशेष राशियों को 'शश महापुरुष राजयोग' के प्रभाव से जबरदस्त लाभ और तरक्की मिलने के योग बन रहे हैं. आइए जानते हैं वे भाग्यशाली राशियाँ कौन सी हैं. वृषभ राशि (Taurus)- करियर में बड़ी सफलता शनि देव आपकी राशि के स्वामी शुक्र के परम मित्र हैं और आपकी कुंडली के 10वें (कर्म) भाव में वक्री हो रहे हैं. आपके लिए यह समय किसी वरदान से कम नहीं है. नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन, सैलरी इंक्रीमेंट या मनचाही जगह ट्रांसफर मिल सकता है. बिजनेस में अटके हुए प्रोजेक्ट्स दोबारा शुरू होंगे. प्रॉपर्टी या रियल एस्टेट से जुड़े लोगों को तगड़ा मुनाफा होगा. समाज और कार्यक्षेत्र में आपका मान-सम्मान और अधिकार बढ़ेगा. मिथुन राशि (Gemini)- भाग्य का पूरा साथ शनि देव आपकी राशि से 9वें (भाग्य) भाव में वक्री होने जा रहे हैं, जो कि भाग्य और धर्म का स्थान है. पिछले काफी समय से आपके बनते हुए कामों में जो रुकावटें आ रही थीं, वे अब दूर होंगी. भाग्य का बंद दरवाजा खुलेगा. उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने की इच्छा रखने वाले छात्रों को सफलता मिलेगी. व्यापार के सिलसिले में की गई यात्राएं बेहद लाभदायक रहेंगी. आपकी सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी. आप कोई नया वाहन या मकान खरीदने की योजना बना सकते हैं. तुला राशि (Libra)- अचानक धन लाभ और संतान सुख तुला राशि के लिए शनि देव 'योगकारक' ग्रह माने जाते हैं. वे आपकी राशि से 5वें (संतान, बुद्धि और प्रेम) भाव में वक्री होंगे. जो छात्र किसी प्रतियोगी परीक्षा (Competitive Exam) की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें कोई बड़ी खुशखबरी मिल सकती है. संतान की ओर से सुखद समाचार मिलेगा. अचानक धन लाभ (आकस्मिक धन) के योग बनेंगे. अगर कहीं पैसा फंसा हुआ था, तो वह वापस मिल सकता है. प्रेम संबंधों में गहराई और स्पष्टता आएगी, रिश्ते मजबूत होंगे. वृश्चिक राशि (Scorpio)- सुख-साधनों में वृद्धि और ढैय्या से राहत वृश्चिक राशि पर इस समय शनि की ढैय्या चल रही है, लेकिन चौथे (सुख और माता) भाव में शनि के वक्री होने से आपको ढैय्या के नकारात्मक प्रभावों से बड़ी राहत मिलेगी. पारिवारिक विवाद या मानसिक तनाव से मुक्ति मिलेगी. माता के स्वास्थ्य में सुधार होगा. नया घर, जमीन या गाड़ी खरीदने के लिए यह समय बेहद अनुकूल है. पैतृक संपत्ति से जुड़ा कोई पुराना विवाद आपके पक्ष में सुलझ सकता है. नौकरी में आपके काम की सराहना होगी, जिससे आपका मानसिक बोझ कम होगा.

कांग्रेस ने पंजाब चुनाव की तैयारियां तेज कीं, तीन पर्यवेक्षकों की नियुक्ति से संगठन को मिलेगी मजबूती

चंडीगढ़  ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी ने पंजाब में वर्तमान राजनीतिक हालातों का जायजा लेने के लिए तीन ऑब्जर्वर नियुक्त किए हैं। कांग्रेस हाईकमान ने यह जिम्मेदारी अजय माकन, मीनाक्षी नटराजन और भजन लाल जाटव को सौंपीं है। जल्दी ही तीनों पंजाब का दौरा करेंगे। दरअसल, पंजाब में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इसके मद्देनजर कांग्रेस हाईकमान का फोकस पंजाब पर है।  कांग्रेस दो बार कर चुकी है चुनावी सर्वेक्षण हाईकमान दो बार पंजाब में अपना चुनावी सर्वेक्षण भी करवा चुका है मगर दोनों सर्वे में अंतर सामने आया। सर्वे में पंजाब के अध्यक्ष को बदलने के लिए भी अलग-अलग राय सामने आई। हाईकमान अब यह देखना चाहता है कि पंजाब में राजनीति के वर्तमान हालात क्या हैं और इन परिस्थितियों में कांग्रेस की स्थिति कितनी मजबूत है, पार्टी कहां कमजोर है और मतदाताओं का रुख कैसा है। ऑब्जर्वर तैयार करेंगे रिपोर्ट तीनों ऑब्जर्वर प्रदेश का दौरा कर अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगे, जिसे अलग-अलग टिप्पणियों के साथ हाईकमान को सौंपी जाएगी। इस रिपोर्ट के बाद हाईकमान प्रदेश में अपनी चुनावी रणनीति को धार देगी।

शादी से पहले पहुंची टीम, पंजाब में 15 बाल विवाह रोके गए, प्रशासन की सराहनीय पहल

चंडीगढ़. पंजाब सरकार ने बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई के खिलाफ अपनी मुहिम को और तेज करते हुए अप्रैल 2026 के दौरान राज्यभर में 15 बाल विवाह समय रहते रुकवाए। सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि इन मामलों में त्वरित हस्तक्षेप से बच्चों का बचपन, उनकी शिक्षा और भविष्य सुरक्षित किया गया। उन्होंने कहा कि बाल विवाह केवल कानून का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह बच्चों के अधिकारों और उनके उज्ज्वल भविष्य पर गंभीर प्रहार है। रोका गया हर बाल विवाह एक बच्चे के सपनों को नई दिशा देने और उसे सुरक्षित बचपन उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित बचपन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर भविष्य का अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बच्चों का स्थान विवाह मंडप में नहीं, बल्कि विद्यालय में है। महीने में 3000 से अधिक जागरुक कार्यक्रम करवाए मंत्री के अनुसार, बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए अप्रैल माह के दौरान पंजाब में 3000 से अधिक जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं। स्कूलों, गांवों, आंगनवाड़ी केंद्रों और विभिन्न समुदायों में हुए इन कार्यक्रमों के जरिए अभिभावकों, युवाओं और आम नागरिकों को बाल विवाह के नुकसान तथा बच्चों के अधिकारों के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि जिला बाल संरक्षण इकाइयां, चाइल्ड वेलफेयर कमेटियां, स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं। बाल विवाह, बाल शोषण, बाल मजदूरी या बच्चों से जुड़े किसी भी संदिग्ध मामले की सूचना चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर दी जा सकती है, जहां से तत्काल हस्तक्षेप कर आवश्यक कार्रवाई की जाती है। बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाने की मांग डॉ. बलजीत कौर ने पंचायती राज संस्थाओं, शिक्षकों, धार्मिक एवं सामाजिक नेताओं और आम लोगों से अपील की कि वे बाल विवाह के खिलाफ इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं और किसी भी संदिग्ध मामले की तुरंत सूचना दें, ताकि समय रहते बच्चों के अधिकारों की रक्षा की जा सके। उन्होंने विश्वास जताया कि जनभागीदारी, व्यापक जागरूकता और कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के बल पर पंजाब बाल विवाह के पूर्ण उन्मूलन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और बच्चों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक तथा अवसरों से भरपूर समाज के निर्माण का लक्ष्य हासिल करेगा।

प्रदर्शन में भाग लेना पड़ा महंगा, हरियाणा की महिला शिक्षक पर गिरी निलंबन की गाज

रोहतक  हरियाणा के रोहतक जिले के एक सरकारी स्कूल में कार्यरत एक अतिथि शिक्षिका को दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले सप्ताह हुए एक प्रदर्शन में शामिल होने के कुछ दिनों बाद निलंबित कर दिया गया है। यह प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा आयोजित किया गया था। जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी ने  शिक्षिका सुलेखा दलाल को आठ जून से निलंबित करने का आदेश जारी किया। हालांकि आदेश में निलंबन का कारण स्पष्ट नहीं किया गया है। खुद को बताया था कॉकरोच की मां आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि के दौरान रोहतक खंड शिक्षा अधिकारी का कार्यालय उनका मुख्यालय रहेगा और उन्हें बिना पूर्व अनुमति के वहां से बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी। गौरतलब है कि एक वीडियो क्लिप में दलाल को जंतर-मंतर पर आयोजित सीजेपी के प्रदर्शन के बोलते हुए देखा गया था। वीडियो में कथित तौर पर उन्हें यह कहते हुए सुना गया कि यह लड़ाई है। इस बार ‘करो या मरो’ की लड़ाई है। अब ‘कॉकरोच की मां’ मैदान में उतर चुकी है। हम किसी समूह का हिस्सा नहीं हैं, हम अपने बच्चों के साथ हैं। एक मां पूरे देश की मां होती है। क्या बोली टीचर     निलंबन को लेकर पूछे जाने पर दलाल ने कहा कि उन्हें इसके कारण की जानकारी नहीं है।     उन्होंने कहा कि मैं कई वर्षों से काम कर रही हूं। मुझे यह नहीं पता था कि वहां (प्रदर्शन में) शामिल नहीं हुआ जा सकता।     मुझे लगता है कि निलंबन से पहले मुझे कारण बताया जाना चाहिए था।     शिक्षिका ने बताया कि उनके स्नातक पुत्र ने उस भर्ती परीक्षा में भाग लिया था, जिसमें कथित अनियमितताएं सामने आई हैं।     उन्होंने कहा कि इसलिए मेरा बेटा और एक अभिभावक के रूप मैं प्रभावित हैं। मेरा किसी पार्टी या संगठन से कोई संबंध नहीं उन्होंने कहा कि मैं वहां केवल एक चिंतित मां के रूप में गई थी। मैंने जो कहा, वह एक मां का दर्द था। मेरा किसी पार्टी या संगठन से कोई संबंध नहीं है। उल्लेखनीय है कि अतिथि शिक्षक की नियुक्ति सरकार द्वारा अस्थायी रिक्तियों को भरने के लिए अनुबंध के आधार पर की जाती है। सीजेपी का प्रदर्शन छह जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुआ था, जहां देश के विभिन्न हिस्सों से आए छात्रों और युवाओं ने कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर जवाबदेही की मांग की थी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। यह समूह हाल के हफ्तों में परीक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर सोशल मीडिया अभियानों के जरिए चर्चा में आया है और खुद को शिक्षा क्षेत्र में सुधार की मांग करने वाला युवा मंच बताता है।  

मानसून से पहले पूरे हों एनीकट और बांध निर्माण कार्य, अधिकारियों को निर्देश

अलवर वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री संजय शर्मा ने गुरूवार को अलवर में वन विभाग के अधिकारियों की टीम के साथ  भाखेडा, भूरासिद्ध व जरखवाला एनीकट एवं निदानी बांध का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। श्री शर्मा ने जल संरक्षण से संबंधित कार्यों का बारीकी से अवलोकन कर निर्देश दिये कि एनिकट व बांध निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखते हुए सभी कार्य मानसून से पूर्व ही पूर्ण होना सुनिश्चित करें। उन्होंने निर्देश दिये कि एनिकट व बांध में वर्षा जल आने में कोई अवरोध न रहे, इसके लिए आसपास के केचमेंट एरिया की साफ-सफाई करायें। डिसिल्टिंग आदि कार्य को भी समयबद्ध रूप में पूर्ण करायें। उन्होंने निर्देश दिये कि एनिकट के किनारे भ्रमण हेतु सुन्दर पाथवे, ग्रीनरी एवं सौन्दर्यकरण के कार्य शुरू करें। ये एनिकट बनने से पर्यावरण संरक्षण के साथ वन्यजीवों व पेड-पौधों को जल की उपलब्धता होगी,  वर्षा जल संरक्षण से शहर के भूमिगत जल स्तर में वृद्धि होगी। इन एनिकटों के सौन्दर्यकरण से पर्यटन में भी वृद्धि होगी। उन्होंने चोर डूंगरी पहाडी पर श्रीराम वाटिका हेतु चिन्हित किए गए स्थान का अवलोकन कर वन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वाटिका के निर्माण हेतु कार्य योजना तैयार कर इसका निर्माण प्राकृतिक एवं पर्यावरण संरक्षण को दृष्टिगत रखते हुए कराया जाए जिससे यहां आने वाले लोगों को प्राकृतिक परिवेश का अनुभव हो सके। उन्होंने निर्देश दिया कि वाटिका में वृहद स्तर पर विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाएं,  सौन्दर्यकरण व हरियाली पर विशेष फोकस करें। इसके उपरान्त उन्होंने अपने प्रतिदिन के पौधारोपण के संकल्प के तहत मातृवन में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस दौरान मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक श्री अरूण प्रसाद, डीएफओ अलवर श्री राजेन्द्र हुड्डा, डीएफओ सरिस्का श्री अभिमन्यु सहारण, श्री घनश्याम गुर्जर सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।