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भोपाल में राष्ट्रीय कार्यशाला: मध्यप्रदेश में नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार और तकनीकी चुनौतियों पर मंथन

मध्यप्रदेश में विकेंद्रीकृत नवकरणीय ऊर्जा के विस्तार और तकनीकी चुनौतियों के समाधान पर भोपाल में राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने साझा किए नवाचार एवं रणनीतियां भोपाल नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव ने कहा कि मध्यप्रदेश स्वच्छ एवं सतत ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियां ऊर्जा सुरक्षा के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाने का माध्यम बनेंगी। उन्होंने कहा कि तकनीकी नवाचार, नीति समर्थन और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से राज्य में हरित ऊर्जा के विस्तार को नई गति मिलेगी। मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अमनबीर सिंह बैंस ने कहा कि आधुनिक तकनीकों और प्रभावी ग्रिड प्रबंधन के माध्यम से विकेंद्रीकृत नवकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं का सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सकता है तथा इससे राज्य की स्वच्छ ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इस अवसर पर अतिथियों ने पुस्तक विमोचन भी किया। “मध्यप्रदेश में विकेंद्रीकृत नवकरणीय ऊर्जा परिनियोजन को आगे बढ़ाना” विषय पर भोपाल में आयोजित कार्यशाला में ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों, परियोजना विकासकर्ताओं, शोधकर्ताओं, डिस्कॉम प्रतिनिधियों तथा सरकारी एवं निजी संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। जर्मनी की अंतर्राष्ट्रीय जलवायु पहल (आईकेआई), नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग, मध्यप्रदेश शासन तथा मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में मध्यप्रदेश में विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार एवं तकनीकी सहयोग को सुदृढ़ बनाने पर विशेष बल दिया गया। कार्यशाला में मध्यप्रदेश में एग्रीफोटोवोल्टिक्स पर व्यापक कानूनी एवं व्यवहार्यता मूल्यांकन रिपोर्ट का विमोचन किया गया। इसके साथ ही सौर ऊर्जा संयंत्रों के प्रदर्शन विश्लेषण, रिएक्टिव पावर मापन, रिले एवं ट्रांसफार्मर समन्वय, 11 केवी ग्रिड इंजेक्शन से जुड़ी चुनौतियों तथा मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के प्रभावी क्रियान्वयन सहित विभिन्न तकनीकी विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।कार्यशाला में जर्मनी के संघीय आर्थिक सहयोग एवं विकास मंत्रालय, जर्मन दूतावास, जीआईजेड इंडिया तथा केएफडब्ल्यू डेवलपमेंट बैंक के वरिष्ठ प्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने मध्यप्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, तकनीकी नवाचार और संस्थागत समन्वय को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर बल दिया।  

‘डॉ. पाठक जैसे गुरु मिलना सौभाग्य’, विज्ञान जगत में उनकी उपलब्धियों पर गर्व जताया

डॉ. पाठक जैसे विरले शिक्षकों का शिष्य होना सौभाग्य की बात, विज्ञान के क्षेत्र में उनकी उपलब्धियां हम सभी के लिए गर्व का विषय' मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने गुरू को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से दी बधाई भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शिक्षक दिवस के अतिरिक्त अन्य अवसरों पर भी अपने गुरूजनों के प्रति सदैव सम्मान व्यक्त करते रहे है। उन्होंने आज अपने शिक्षक रहे डॉ. जेपीएन पाठक के 80 वें जन्म दिन पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा बधाई दी और सम्मान व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन निवासी अपने गुरू डॉ. पाठक को जन्म दिन की वर्षगांठ पर बधाई देते हुए इन शब्दों में अपनी भावना व्यक्त की- "मुझे मुख्यमंत्री के रूप में प्रतिदिन अनेक कार्यक्रमों में शामिल होने का अवसर मिलता है। लेकिन आज का यह अवसर एक भावुक क्षण भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने गुरू डॉ. पाठक की जिजीविषा का उल्लेख करते हुए कहा कि आपको एक युवा की तरह देखकर ऊर्जा मिलती है और आपके स्नेह तथा सकारात्मकता के भाव से ऐसा अनुभव होता हैं, मानो हम अपने साइंस कालेज की कक्षा में बैठे हों और आप पढ़ा रहे हों। आपके पढ़ाने का विशेष तरीका था। आप जैसे विरले शिक्षकों का शिष्य होना सौभाग्य की बात है। आप सदैव मुस्कुराते रहें और सभी का मार्गदर्शन करते रहें, आपका आशीर्वाद हम पर बना रहे।" मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डॉ. पाठक की वैज्ञानिक उपलब्धियां महत्वपूर्ण हैं। वे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भागीदारी करते रहे हैं, जिस पर उनके विद्यार्थियों को गर्व है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर डॉ. पाठक से जुड़े कुछ संस्मरण भी साझा किए और अन्य गुरुजन को भी याद किया जिनकी शिक्षा आज भी जीवन में उपयोगी है। उनकी दी हुई शिक्षा संस्कार और साहस देने वाली शिक्षा थी। उन्होंने छात्र संघ को सशक्त बनाने में सहयोग दिया और प्रज्ञा पत्रिका के माध्यम से मार्गदर्शन दिया। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि गुरुजी डॉ. पाठक ने सदैव विद्यार्थियों की युवा शक्ति को महत्व दिया। डॉ. पाठक से वर्चुअल मीटिंग के अवसर पर मध्यप्रदेश गृह निर्माण और अधोसंरचना मंडल के अध्यक्ष श्री ओम जैन के साथ ही अन्य जनप्रतिनिधि और डॉ. पाठक के अन्य शिष्य उपस्थित थे।      

निलाक्षिका सिल्वा और कौशानी की दमदार साझेदारी, श्रीलंका ने आखिरी ओवर में जीता रोमांचक मुकाबला

साउथैम्पटन महिला टी20 विश्व कप 2026 में बड़ा उलटफेर हो गया है। डिफेंडिंग चैंपियन न्यूजीलैंड को श्रीलंका के हाथों हार झेलनी पड़ी है। न्यूजीलैंड ने अभी तक खेले दोनों मैचों में हार मिली है। इससे पहले दोनों टीमों के बीच महिला टी20 विश्व कप में 7 मैच हुए थे। सभी में न्यूजीलैंड को जीत मिली थी। पहले बैटिंग करते हुए न्यूजीलैंड ने 6 विकेट पर 150 रन बनाए। श्रीलंका ने आखिरी ओवर में लक्ष्य हासिल कर लिया। टीम को 5 विकेट से जीत मिली। न्यूजीलैंड की यह लगातार दूसरी हार है तो श्रीलंका का यह पहला ही मुकाबला था डेथ ओवर में न्यूजीलैंड की बैटिंग नहीं चली पहले बैटिंग करने उतरी न्यूजीलैंड की शुरुआत खराब रही। सलामी बल्लेबाज इसाबेला गेज पहले ही ओवर में आउट हो गईं। इसके बाद अमेलिया केर और जॉर्जिया प्लेमेर की जोड़ी क्रीज पर टिक गई। दोनों के बीच 49 रनों की साझेदारी हुई। जॉर्जिया 18 रन बनाकर आउट हुईं। कप्तान केर अर्धशतक लगाने से चूक गईं और 45 रन बनाकर वापस लौटीं। उन्होंने 36 गेंदों का सामना किया। इसके बाद न्यूजीलैंड की टीम खुलकर बैटिंग नहीं कर पाई। आखिरी 7 ओवरों में न्यूजीलैंड की टीम सिर्फ 52 रन ही बना सकी। सोफी डिवाइन 18वें ओवर की आखिरी गेंद पर 45 रन बनाकर आउट हुईं। आखिरी दो ओवर में न्यूजीलैंड को श्रीलंका ने एक भी बाउंड्री नहीं लगाने दिया। कविशा दिलहरी ने दो विकेट झटके। 55 रन पर श्रीलंका ने 4 विकेट को दिए थे श्रीलंका को कप्तान चमारी अटापट्टू ने अच्छी शुरुआत दिलाई। पावरप्ले के आखिरी ओवर में वह आउट हुईं तो टीम का स्कोर 45 रन था। 19 गेंदों पर उनके बल्ले से 27 रन निकले। 55 रन तक पहुंचने में श्रीलंका के 4 विकेट गिर गए। इसके बाद क्रीज पर उतरी निलाक्षिका सिल्वा ने एक छोर संभाल लिया। कविशा दिलहरी के साथ 5वें विकेट के लिए उन्होंने 39 गेंदों पर 49 रन जोड़े। 15वें ओवर की आखिरी गेंद पर कविशा 17 रन बनाकर रन आउट हुईं तो टीम का स्कोर 105 रन था। आखिरी 5 ओवर में जीत के लिए श्रीलंका को 45 रन चाहिए थे। नई बल्लेबाज कौशानी नुथ्यांगना के साथ निलाक्षिका ने लगातार स्ट्राइक रोटेट किए और मौका मिलने पर बाउंड्री लगाई। पहले तीन ओवर में 12 रन देने वाली अमेरिका केर के खिलाफ 18वें ओवर में दोनों ने 12 रन बटोर लिए। 19वें ओवर में निलाक्षिका सिल्वा 34 गेंदों पर अपनी फिफ्टी पूरी की। आखिरी ओवर में जीत के लिए 5 रन चाहिए थे। सोफी डिवाइन के खिलाफ चौखी गेंद पर चौका मारकर कौशानी ने टीम को जीत दिला दी। 14 गेंदों पर कौशानी ने 24 जबकि 37 गेंदों पर निलाक्षिका ने 54 रन बनाए। दोनों ने सिर्फ 28 गेंदों पर 45 रनों की साझेदारी की।  

घर पर बनाएं नेचुरल फेस वॉश, बेसन, एलोवेरा और ओट्स से पाएं चमकदार और हेल्दी स्किन

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बाहरी धूल-मिट्टी और पॉल्यूशन की वजह से हमारी स्किन अपनी नेचुरल ग्लो खोटी चली जा रही है. वैसे तो हम सभी अपने चेहरे की सफाई करने के लिए फेस वॉश या फिर एक क्लींजर का इस्तेमाल करते ही हैं, लेकिन कई बार इनमें मौजूद केमिकल्स हमारी स्किन को फायदा पहुंचाने की जगह पर नुकसान ज्यादा पहुंचा देते हैं. आपको भले ही एक हफ्ते या फिर एक महीने में इन केमिकल्स का असर अपनी स्किन पर देखने को न मिले, लेकिन एक समय के बाद आपको इन केमिकल्स की वजह से हुआ नुकसान जरूर दिखाई देगा. अगर आप अपने चेहरे को एक नेचुरल तरीके से साफ करना चाहते हैं, तो आज की यह आर्टिकल आपके काम की होने वाली है. आज हम आपको आपके घर और किचन में ही मौजूद कुछ चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका इस्तेमाल करके आप एक नेचुरल और ज्यादा सुरक्षित फेस वॉश आसानी से खुद ही तैयार कर सकते हैं. तो चलिए जानते हैं घर पर नेचुरल फेस वॉश बनाने और उसे इस्तेमाल करने का सबसे आसान तरीका. बेसन और हल्दी का फेस वॉश हमारे घरों में बेसन का इस्तेमाल सदियों से चेहरे को निखारने के लिए किया जाता रहा है. बेसन स्किन की गहराई से सफाई करता है और एक्स्ट्रा ऑयल को रिमूव करने में मदद भी करता है वहीं, हल्दी में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल क्वालिटीज पिंपल्स को दूर रखते हैं. इसे बनाने के लिए एक कटोरी में दो चम्मच बेसन लें और उसमें आधा छोटा चम्मच हल्दी पाउडर मिलाएं. अब इसमें ड्राई स्किन के लिए जरूरत के अनुसार कच्चा दूध या ऑयली स्किन के लिए गुलाब जल मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट तैयार कर लें. यह सिंपल सा पेस्ट चेहरे की गंदगी को पूरी तरह साफ कर देता है. एलोवेरा और शहद का फेस वॉश अगर आपकी स्किन बहुत ही ज्यादा सेंसिटिव या ड्राई है, तो एलोवेरा और शहद का कॉम्बिनेशन आपके लिए सबसे अच्छा साबित हो सकता है. एलोवेरा स्किन को ठंडक और फ्रेशनेस देता है, जबकि शहद मॉइस्चर को लॉक करके चेहरे को नैचुरली ग्लोइंग बनाता है. इसे बनाने के लिए दो चम्मच फ्रेश एलोवेरा जेल में एक चम्मच प्योर शहद मिलाएं और दोनों को अच्छी तरह से मिक्स कर लें. इस मिश्रण को आप चाहें तो एक छोटे कंटेनर में बनाकर फ्रिज में दो से तीन दिनों के लिए रख भी सकते हैं. ओट्स और दही का फेस वॉश धूप के कारण अगर चेहरे पर टैनिंग हो गई है या स्किन बेजान लग रही है, तो ओट्स और दही का फेस वॉश बेहतरीन तरीके से काम करता है. ओट्स आपकी स्किन को साफ करता है और दही में मौजूद लैक्टिक एसिड दाग-धब्बों को हल्का करने में मदद करता है. इसे तैयार करने के लिए सबसे पहले ओट्स को पीसकर उसका पाउडर बना लें और फिर एक चम्मच ओट्स पाउडर में एक से दो चम्मच फ्रेश दही मिलाएं. इन दोनों ही चीजों को अच्छे से मिक्स करके पेस्ट बना लें. यह आपकी स्किन की डेड सेल्स को हटाने में बहुत असरदार है. स्तेमाल करने का सही तरीका घर पर बने इस नेचुरल फेस वॉश का इस्तेमाल करना बेहद आसान है. सबसे पहले अपने चेहरे को सादे पानी से गीला कर लें. इसके बाद तैयार किए गए पेस्ट को चेहरे पर लगाएं और उंगलियों की मदद से गोल-गोल घुमाते हुए 1 से 2 मिनट तक हल्की मसाज करें. अब चेहरे को साफ पानी से धो लें और किसी साफ तौलिए से थपथपाकर सुखाएं. चेहरा धोने के तुरंत बाद चेहरे पर थोड़ा सा मॉइस्चराइजर या गुलाब जल जरूर लगाएं ताकि मॉइस्चर बनी रहे. चुरल फेस वॉश के फायदे घर के बने फेस वॉश पूरी तरह से केमिकल-फ्री और सल्फेट-फ्री होते हैं, जिससे स्किन को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है. ये आपके बजट में फिट बैठते हैं और इनका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता. इन्हें रोजाना इस्तेमाल करने से चेहरे का नेचुरल ग्लो वापस आता है और स्किन अंदर से हेल्दी भी रहती है.

FIFA World Cup: मेसी का ऐतिहासिक शो, 16वां वर्ल्ड कप गोल और हैट्रिक से अर्जेंटीना की शानदार जीत

कैनसस सिटी फीफा वर्ल्ड कप 2026 में अर्जेंटीना ने अपने खिताब बचाने के अभियान की शुरुआत जीत के साथ की, लेकिन इस मुकाबले की सबसे बड़ी कहानी एक बार फिर लियोनेल मेसी बने. 38 वर्षीय सुपरस्टार ने अपने 200वें अंतरराष्ट्रीय मैच और रिकॉर्ड छठे वर्ल्ड कप में ऐसा प्रदर्शन किया, जिसे फुटबॉल प्रेमी लंबे समय तक याद रखेंगे।  कैनसस सिटी के GEHA फील्ड एट एरोहेड स्टेडियम में 69,045 दर्शकों के सामने मेसी ने शानदार हैट्रिक जमाकर अर्जेंटीना को अल्जीरिया पर 3-0 की जीत दिलाई. इसके साथ ही उन्होंने वर्ल्ड कप में अपने गोलों की संख्या 16 तक पहुंचा दी और जर्मनी के महान स्ट्राइकर मिरोस्लाव क्लोज के सर्वकालिक रिकॉर्ड की बराबरी कर ली।  यह मेसी के वर्ल्ड कप करियर की पहली हैट्रिक भी रही. साथ ही वह टूर्नामेंट के इतिहास में हैट्रिक लगाने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बन गए. उन्होंने क्रिस्टियानो रोनाल्डो का रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया।  शुरुआत में अल्जीरिया ने दी कड़ी टक्कर मैच की शुरुआत अर्जेंटीना के लिए आसान नहीं रही. पांचवें मिनट में मेसी ने गेंद को नेट में पहुंचा दिया था, लेकिन बिल्ड-अप में ऑफसाइड होने के कारण गोल रद्द कर दिया गया. कुछ ही देर बाद अल्जीरिया ने भी जश्न मनाया, जब फार्स चाबी ने गोल किया, मगर VAR ने उसे भी ऑफसाइड करार दिया।  शुरुआती 15 मिनट तक अल्जीरिया ने विश्व चैम्पियन टीम को खुलकर चुनौती दी और गेंद पर अच्छा नियंत्रण बनाए रखा. लेकिन फिर मेसी ने अपनी क्लास दिखा दी।  20 साल बाद फिर 16 जून को मेसी का कमाल 17वें मिनट में रोड्रिगो डी पॉल ने शानदार थ्रू बॉल खेली. मेसी ने डिफेंडरों के दबाव के बावजूद गेंद को शानदार अंदाज में टॉप कॉर्नर में पहुंचा दिया. अल्जीरियाई गोलकीपर लुका जिदान के पास कोई जवाब नहीं था।  यह गोल कई मायनों में खास था. ठीक 20 साल पहले, 16 जून 2006 को मेसी ने सर्बिया और मोंटेनेग्रो के खिलाफ अपना पहला वर्ल्ड कप गोल किया था. अब उसी तारीख पर उन्होंने एक और ऐतिहासिक अध्याय लिख दिया।  इसके साथ ही मेसी पुरुष फुटबॉल में पांच अलग-अलग वर्ल्ड कप में गोल करने वाले केवल दूसरे खिलाड़ी बने. उनसे पहले यह उपलब्धि सिर्फ क्रिस्टियानो रोनाल्डो के नाम थी।  छठा वर्ल्ड कप खेलने वाले दुनिया के पहले फुटबॉलर इस मुकाबले ने मेसी को एक और ऐतिहासिक मुकाम पर पहुंचा दिया. वह वर्ल्ड कप इतिहास में छह संस्करण खेलने वाले पहले खिलाड़ी बन गए. इसके अलावा वह दक्षिण अमेरिका के पहले पुरुष फुटबॉलर और दुनिया के केवल तीसरे पुरुष खिलाड़ी बने, जिन्होंने 200 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं।  पहले गोल के बाद अर्जेंटीना ने मैच पर पकड़ मजबूत कर ली. हालांकि अल्जीरिया ने हार नहीं मानी और गेंद पर लगभग बराबर कब्जा बनाए रखा, लेकिन उसकी सात कोशिशों में एक भी शॉट टारगेट पर नहीं जा सका।  60वें मिनट में एलेक्सिस मैक एलिस्टर के शॉट को लुका जिदान पूरी तरह नहीं रोक पाए. गेंद उनके हाथों से छिटक गई और मेसी ने रिबाउंड पर गोल कर स्कोर 2-0 कर दिया।  इसके बाद 76वें मिनट में निकोलस गोंजालेज ने ऊंचे क्षेत्र में गेंद छीनी और मेसी को पास दिया. अर्जेंटीना के कप्तान ने बिना कोई गलती किए बाएं पैर से जोरदार शॉट लगाया और गेंद को नेट में पहुंचाकर अपनी पहली वर्ल्ड कप हैट्रिक पूरी कर ली।  रिकॉर्ड्स की झड़ी इस हैट्रिक के साथ मेसी ने कई और रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए. – वर्ल्ड कप में अब उनके नाम 16 गोल और 8 असिस्ट यानी कुल 24 गोल योगदान हैं. – उन्होंने ब्राजील के महान खिलाड़ी पेले के 21 गोल योगदान के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया. – लगातार पांच वर्ल्ड कप मैचों में गोल करने वाले खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो गए. – वर्ल्ड कप में पेनल्टी बॉक्स के बाहर से उनके गोलों की संख्या पांच हो गई, जो पिछले छह दशकों में संयुक्त रूप से सबसे ज्यादा है. – क्लब और देश के लिए उनके करियर का यह 911वां गोल योगदान रहा. अर्जेंटीना ने भी तोड़ा पुराना सिलसिला यह जीत सिर्फ मेसी के रिकॉर्ड्स तक सीमित नहीं रही. तीन बार की विश्व चैम्पियन अर्जेंटीना ने पहली बार बतौर डिफेंडिंग चैम्पियन अपना शुरुआती वर्ल्ड कप मैच जीता. इससे पहले 1982 और 1990 में खिताब जीतने के बाद उसे अपने पहले मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा था।  ग्रुप J में जीत के साथ अर्जेंटीना ने शानदार शुरुआत कर ली है. अब उसकी नजरें अगले मुकाबलों में ऑस्ट्रिया और जॉर्डन के खिलाफ जीत दर्ज कर नॉकआउट चरण की ओर बढ़ने पर होंगी. लेकिन फिलहाल पूरी दुनिया सिर्फ एक नाम की चर्चा कर रही है- लियोनेल मेसी. जिन्होंने 38 साल की उम्र में भी साबित कर दिया कि महान खिलाड़ी उम्र से नहीं, अपने जादू से पहचाने जाते हैं। 

इंदौरवासियों के लिए बड़ी सौगात, मेट्रो का सफर अब शहीद पार्क तक पहुंचने के करीब

इंदौर मध्य प्रदेश के आर्थिक नगर इंदौर मेट्रो के व्यावसायिक संचालन को लेकर लंबे समय से चल रहा इंतजार अब खत्म होने की ओर है। सुपर कॉरिडोर से शहीद पार्क (मालवीय नगर) स्टेशन तक मेट्रो के कमर्शियल रन की तारीख पर आज फैसला हो सकता है। माना जा रहा है कि, एसीएस और मेट्रो परियोजना से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी संजय दुबे के इंदौर दौरे के दौरान होने वाली बैठक में शुभारंभ की तारीख को अंतिम रूप दिया जा सकता है। मेट्रो प्रबंधन और प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। सुपर कॉरिडोर से मालवीय नगर स्टेशन तक के कॉरिडोर को पहले ही कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेलवे सेफ्टी (सीएमआरएस) की हरी झंडी मिल चुकी है। इसके बाद उम्मीद थी कि, जून के मध्य में ही यात्रियों के लिए मेट्रो का संचालन शुरू हो जाएगा, लेकिन तारीख को लेकर लगातार असमंजस बना रहा। 20 जून को कमर्शियल रन की संभावना सूत्रों के मुताबिक, पहले 18 जून को कमर्शियल रन का प्रस्ताव निर्धारित था। बाद में संभावित राजनीतिक और प्रशासनिक व्यस्तताओं को देखते हुए इसे आगे बढ़ाकर 20 जून करने पर विचार किया गया। अब एक बार फिर अंतिम तारीख को लेकर मंथन चल रहा है। हालांकि, मेट्रो अधिकारियों ने 20 जून को ध्यान में रखकर अपनी तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं। शासन स्तर पर होगी तारीख की घोषणा अधिकारियों का कहना है कि स्टेशन, सुरक्षा व्यवस्था, परिचालन स्टाफ और यात्री सुविधाओं से जुड़े सभी इंतजाम तय समय सीमा के अनुसार किए जा रहे हैं। जैसे ही शासन स्तर से तारीख की औपचारिक घोषणा होगी, उद्घाटन कार्यक्रम और संचालन संबंधी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक कर दी जाएगी। सुपर कॉरिडोर तक ही चल रहा संचालन अब आज होने वाली बैठक पर नजरें टिकी हैं। शहर की बहुप्रतीक्षित मेट्रो परियोजना का पहला चरण सुपर कॉरिडोर पर टीसीएस चौराहा तक चल रहा है। आगे चलने से विजय नगर और मालवीय नगर क्षेत्र के यात्रियों को तेज, सुरक्षित और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन का विकल्प मिलेगा। 12 घंटे मिलेगी इंदौर में मेट्रो ट्रेन की सुविधा इंदौर में मेट्रो ट्रेन का 17 किलोमीटर हिस्से में संचालन 20 जून से होने जा रहा है। शहरवासियों को भी मेट्रो के संचालन का इंतजार है। हर दिन मेट्रो में 50 हजार से ज्यादा यात्री सफर कर सकेंगे। मेट्रो का संचालन सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक 12 घंटे के लिए होगा और दिनभर में 50 से ज्यादा फेरे लगाए जाएंगे। सुपर कॉरिडोर से रेडिसन चौराहे तक के रूट के लिए अलग-अलग किराया रहेगा। न्यूनतम किराया 20 रुपये निर्धारित किया गया है। दूरी के अनुसार किराया भी बढ़ेगा। अधिकतम किराया 80 रुपये तक हो सकता है। गांधी नगर से रेडिसन चौराहा तक इतनी कीमत चुकानी होगी। पहले दो स्टेशनों तक 20 रुपये, जबकि अधिक दूरी के लिए 30, 40 रुपये और उससे अधिक का किराया होगा। 20 जून को केंद्रीय मंत्री मोहन लाल खट्टर और मुख्यमंत्री मोहन यादव मेट्रो के दूसरे चरण के संचालन का शुभारंभ करेंगे। यह होगा रूट अभी तक मेट्रो ट्रेन गांधी नगर डिपो से टीसीएस चौराहा तक जाती थी, लेकिन इस रूट पर काफी कम यात्री मिलते थे। अब मेट्रो गांधी नगर, एमआर-10 स्टेशन, चंद्रगुप्त मौर्य प्रतिमा, बापट चौराहा, मेघदूत चौराहा, विजय नगर चौराहा और रेडिसन चौराहे के बीच चलेगी। यह दूरी 20 से 30 मिनट में तय होगी। मेट्रो ट्रेन के चलने से कॉलेज और आईटी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों को सबसे ज्यादा फायदा होगा, क्योंकि सुपर कॉरिडोर पर फिलहाल लोक परिवहन के ज्यादा विकल्प नहीं हैं। 80 की स्पीड से चलेगी मेट्रो ट्रेन 17 किलोमीटर लंबे रूट पर 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से मेट्रो चलेगी। गांधी नगर से रेडिसन चौराहे तक आने में मेट्रो को 30 मिनट का समय लगेगा। ट्रेन छह स्टेशनों पर रुकेगी। पहले चरण में मेट्रो ट्रेन का संचालन खजराना चौराहा तक होगा। उसके बाद मेट्रो ट्रेन अंडरग्राउंड होगी। उसका काम भी अभी शुरू नहीं हो पाया है। साढ़े चार सौ यात्रियों की क्षमता 20 से ज्यादा मेट्रो ट्रेनों का संचालन होगा। एक ट्रेन में साढ़े चार सौ यात्री सवार हो सकेंगे। बैठने के अलावा खड़े रहकर सफर करने में भी आसानी होगी। ट्रेन के भीतर लगे पोल में चार ग्रिप दी गई हैं, जिन्हें यात्री पकड़कर सफर कर सकते हैं। मेट्रो ट्रेन बाहरी और आंतरिक रूप से सीसीटीवी कैमरों से लैस होगी। मेट्रो की खास बातें     मेट्रो की अधिकतम गति 80 किमी/घंटा होगी।     ट्रेनें छह स्टेशनों पर रुकेंगी।     सभी कोच अंदर और बाहर से CCTV कैमरों से लैस होंगे।     खड़े यात्रियों की सुविधा के लिए पोल पर चार-चार ग्रिप उपलब्ध होंगी।

अमेरिका-ईरान समझौते से टूटी नाकाबंदी, होर्मुज जलडमरूमध्य से बहने लगा ईरानी तेल

नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में जंग खत्म हो गई है और अमेरिका-ईरान में शांति समझौता हो गया है. इसके तहत जहां ईरान होर्मुज खोलने को राजी हो गया, तो वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया की तेल गैस जरूरत को पूरा करने के लिए अहम इस जरूरी समुद्री रूट से अमेरिकी नेवी की नाकाबंदी हटा दी. इसका असर भी देखने को मिल रहा है, करीब दो महीने की नाकाबंदी के बाद अब जहाजों में भरकर ईरानी कच्चा तेल निकलने लगा है।  4.8 मिलियन बैरल ईरानी तेल निकला टैंकरट्रैकर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल ईरानी टैंकर कंपनी (NITC) के दो VLCC सुपरटैंकर – DIONA (9569695) और HERO2 (9362073) तेल लेकर निकले हैं और इनमें 3.8 मिलियन बैरल ईरानी कच्चा तेल भरा हुआ है. ये सुपरटैंकर अमेरिकी नेवी की नाकेबंदी वाली सीमा से बाहर निकले हैं।  बता दें कि पिछले दो महीनों में यह ऐसा पहला एक्सपोर्ट है, जिसकी पुष्टि 15 जून, 2026 के AIS डेटा और सैटेलाइट तस्वीरों से हुई है. इसके बाद एक तीसरा स्वेजमैक्स (Suezmax) टैंकर 1 मिलियन बैरल तेल लेकर निकला।  एक टैंकर बढ़ रहा पाकिस्तान की ओर रिपोर्ट में पोस्ट किए गए मैप में ये तेल के जहाज और STREAM अरब सागर में ओमान की खाड़ी के पास दिखाई दे रहे हैं. ये उस नाकेबंदी वाली लाइन को पार कर रहे हैं जो अप्रैल 2026 में US-ईरान टकराव के दौरान बनाई गई थी।  मैप में ये भी देखा जा सकता है कि नेशनल ईरानी टैंकर कंपनी का STREAM (9569633) पाकिस्तान के EEZ से नाकेबंदी वाली लाइन की ओर बढ़ रहा है, जहां यह जहाज ईरान में प्रवेश करने के इंतजार में पिछले 7 हफ्तों से रुका हुआ था।  डील के बाद क्रैश हुआ कच्चा तेल  गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान में शांति समझौता होने से दुनिया ने राहत की सांस ली है. इसका सबसे बड़ा कारण कच्चा तेल है, जो डोनाल्ड ट्रंप के इस समझौते वाली डील के ऐलान के बाद से लगातार क्रैश हो रहा है. लंबे समय तक 100-110 डॉलर के आसपास रहकर दुनिया के डराने वाले ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत अब 80 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ चुकी है।  अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude Oil Price 79.02 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है, जो इसके तीन महीने का लो लेवल है. वहीं दूसरी ओर WTI Crude Oil Price 76.15 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है. इसके अलावा मर्बन क्रूड का भाव भी 7 फीसदी से ज्यादा फिसलकर अब 71 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है. तेल सस्ता होने से महंगाई का जोखिम कम हुआ है।   

रेजिडेंसी परमिट को लेकर स्वीडन का बड़ा फैसला, नए कानून से बढ़ी प्रवासियों की चिंता

 स्टॉकहोम  स्वीडन की संसद ने एक नया कानून पारित किया है, जिसके तहत अधिकारियों को प्रवासियों (इमिग्रेंट्स) का रेजिडेंसी परमिट खराब आचरण के आधार पर रद्द करने का अधिकार मिल गया है. इसमें बकाया कर्ज न चुकाना, बिना स्थानीय अधिकारियों को बताए काम करना या चरमपंथी संगठनों से संबंध जैसे कारण शामिल हैं।  ये कानून न केवल लंबित रेजिडेंसी परमिट आवेदनों पर लागू होगा, बल्कि पहले से दिए जा चुके परमिटों की भी समीक्षा कर उन्हें रद्द किया जा सकेगा. यह कदम दक्षिणपंथी सरकार और उसकी सहयोगी राष्ट्रवादी पार्टी स्वीडन डेमोक्रेट्स की सख्त इमिग्रेशन नीति का हिस्सा है. सितंबर में होने वाले संसदीय चुनाव से पहले सरकार लगातार इमिग्रेशन नियमों को कड़ा कर रही है।  नए कानून की हो रही आलोचना हालांकि, विपक्षी दलों और मानवाधिकार संगठनों ने इस कानून की आलोचना की है. उनका कहना है कि यह मनमाना कानून है, क्योंकि इसके तहत ऐसे व्यवहार के आधार पर भी कार्रवाई की जा सकती है जिसे कानूनी रूप से अपराध घोषित नहीं किया गया है।  स्टॉकहोम स्थित मानवाधिकार संगठन सिविल राइट्स डिफेंडर्स ने कहा कि यह 'अच्छे व्यवहार वाला कानून' लोगों के बीच असमंजस पैदा करता है कि उनकी कौन-सी गतिविधि या अभिव्यक्ति उनके खिलाफ इस्तेमाल की जा सकती है. संगठन के अनुसार, इससे कानून के शासन और कानून के समक्ष समानता के सिद्धांत को कमजोर किया जाता है।  2022 का चुनाव इस वादे के साथ जीतने वाली सरकार का कहना है कि जो लोग नियमों का पालन नहीं करते या अपराध करते हैं, उनका देश में स्वागत नहीं है।  कानून में यह साफ नहीं किया गया है कि कौन-कौन से व्यवहार अस्वीकार्य माने जाएंगे. हालांकि सरकार ने संकेत दिया है कि बकाया कर्ज, टैक्स न चुकाना, आपराधिक गतिविधियां और चरमपंथी संगठनों से संबंध ऐसे कारण हो सकते हैं।  इन मामलों की समीक्षा स्वीडिश माइग्रेशन एजेंसी करेगी और उसके फैसलों के खिलाफ माइग्रेशन कोर्ट में अपील की जा सकेगी. मार्च में इस विधेयक को पेश करते समय स्वीडन के आव्रजन मंत्री योहान फोर्शेल ने कहा था, 'जो लोग सही तरीके से रहने की कोशिश नहीं करते, उन्हें यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि वो स्वीडन में बने रह सकेंगे।   

जहां कभी था नक्सलियों का गढ़, आज वहां स्वास्थ्य सेवा का केंद्र; डॉक्टर रामटेके की तपस्या रंग लाई

कांकेर एक समय छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के अंतागढ़ का नाम सुनते ही लोगों के मन में डर बैठ जाता था. घने जंगलों से घिरा यह इलाका नक्सली गतिविधियों का गढ़ माना जाता था. सड़कें कम थीं, संचार के साधन सीमित थे और स्वास्थ्य सुविधाएं लगभग न के बराबर. किसी को गंभीर बीमारी हो जाए तो इलाज से ज्यादा चिंता अस्पताल तक पहुंचने की होती थी. मलेरिया यहां की सबसे बड़ी समस्या थी और हर साल सैकड़ों परिवार इसके कारण तबाह हो जाते थे।  लेकिन आज उसी अंतागढ़ का एक सरकारी अस्पताल पूरे छत्तीसगढ़ के लिए मिसाल बन चुका है. यह बदलाव किसी बड़े बजट, किसी कॉर्पोरेट निवेश या किसी चमत्कार से नहीं आया, बल्कि एक डॉक्टर की 23 साल लंबी तपस्या और जिद का नतीजा है. यह कहानी है डॉक्टर भेषज कुमार रामटेके की, जिन्होंने वर्ष 2003 में अंतागढ़ में कदम रखा और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. उन्होंने 23 साल पहले शुरू किए अपने मिशन को अब एक मॉडल में बदल दिया है।  जब लोगों ने कहा- वहां मत जाओ वर्ष 2003 में जब डॉक्टर भेषज कुमार रामटेके की नियुक्ति सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अंतागढ़ में हुई, तब यह इलाका डॉक्टरों के लिए सबसे कठिन पोस्टिंग मानी जाती थी. नक्सली गतिविधियां लगातार होती थीं. कई गांव ऐसे थे जहां पहुंचने के लिए घंटों पैदल चलना पड़ता था. पूरे विकासखंड में न कोई निजी डॉक्टर था, न नर्सिंग होम और न कोई निजी अस्पताल।  ऐसे माहौल में अधिकांश लोग यहां लंबे समय तक काम करने की कल्पना भी नहीं करते थे. लेकिन डॉक्टर रामटेके ने इसे चुनौती नहीं, बल्कि मिशन के रूप में लिया।  स्थानीय लोग बताते हैं कि शुरुआती दिनों में उन्होंने अस्पताल के कमरे को ही अपना घर बना लिया था. दिन हो या रात, मरीजों के लिए वे हमेशा उपलब्ध रहते. धीरे-धीरे उन्होंने महसूस किया कि इस इलाके की सबसे बड़ी बीमारी केवल मलेरिया नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर लोगों का टूटता भरोसा भी है।  गांव-गांव जाकर समझी लोगों की पीड़ा डॉक्टर रामटेके ने इलाज को केवल अस्पताल तक सीमित नहीं रखा. वे गांवों में जाते, आदिवासी परिवारों के बीच बैठते, उनकी भाषा और जीवनशैली को समझने की कोशिश करते. उन्हें पता चला कि कई लोग बीमारी को सामान्य मानकर इलाज नहीं कराते और जब तक अस्पताल पहुंचते, हालत गंभीर हो चुकी होती।  यहीं से उन्होंने एक अलग रणनीति तैयार की. उनका मानना था कि बीमारी का इलाज अस्पताल में नहीं, बल्कि समाज के भीतर जाकर करना होगा।  मलेरिया बना सबसे बड़ा लक्ष्य उस समय अंतागढ़ में मलेरिया भयावह रूप ले चुका था. वर्ष 2003 में क्षेत्र का API (Annual Parasite Incidence) 51.11 था, जो 2006 तक बढ़कर 70.65 पहुंच गया. केवल वर्ष 2006 में 4,942 मलेरिया मरीज दर्ज किए गए।  स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 95 से 98 प्रतिशत मामले प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम मलेरिया के थे, जो सबसे खतरनाक माना जाता है. सेरेब्रल मलेरिया और अन्य जटिल मामलों के कारण लोगों की जान तक चली जाती थी. डॉक्टर रामटेके ने तय किया कि अगर अंतागढ़ को बदलना है तो सबसे पहले मलेरिया को हराना होगा।  लोगों का भरोसा जीता, फिर बीमारी को हराया उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, मिथानिनों, पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय समुदाय को एक साथ जोड़ा. गांवों में रैलियां निकाली गईं, ग्राम सभाएं आयोजित की गईं, दीवारों पर संदेश लिखे गए और घर-घर जाकर लोगों को समझाया गया कि मलेरिया से कैसे बचा जा सकता है।  वर्ष 2010 और 2015 में पूरे इलाके में लॉन्ग लास्टिंग इंसेक्टिसाइडल नेट (LLIN) वितरित किए गए. लोगों को मच्छरदानी के उपयोग की आदत डाली गई।  धीरे-धीरे बदलाव दिखने लगा. लोग समय पर जांच कराने लगे. बुखार होने पर तुरंत अस्पताल पहुंचने लगे. मलेरिया की चेन टूटने लगी।  आज स्थिति यह है कि जहां वर्ष 2006 में 4,942 मरीज थे, वहीं वर्ष 2025 में यह संख्या घटकर सिर्फ 127 रह गई. API 70.65 से गिरकर 1.39 पर पहुंच गया. मलेरिया जनित मौतों और गंभीर मामलों में भी भारी कमी आई।  मलेरिया के बाद अस्पताल की बारी बीमारी पर नियंत्रण मिलने के बाद डॉक्टर रामटेके ने अस्पताल की तस्वीर बदलने का बीड़ा उठाया. उन्होंने “कायाकल्प” योजना के तहत अस्पताल को एक मॉडल संस्थान बनाने की शुरुआत की।  अस्पताल परिसर की साफ-सफाई, वेस्ट मैनेजमेंट, संक्रमण नियंत्रण, मरीजों के लिए बेहतर सुविधाएं, हाइजीन और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों पर लगातार काम किया गया।  एक समय दो कमरों के खपरेल भवन से चलने वाला यह स्वास्थ्य केंद्र आज 30 बिस्तरों वाले व्यवस्थित अस्पताल में बदल चुका है।  350 मानकों पर खरा उतरता अस्पताल कायाकल्प योजना के तहत किसी अस्पताल का मूल्यांकन 350 से अधिक बिंदुओं पर किया जाता है. इसमें साफ-सफाई से लेकर संक्रमण नियंत्रण, मरीजों के अनुभव से लेकर प्रशासनिक व्यवस्था तक सब कुछ शामिल होता है। अंतागढ़ अस्पताल ने इन सभी मानकों पर लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है. पिछले पांच वर्षों से यह बस्तर संभाग में प्रथम स्थान प्राप्त कर रहा है. वर्ष 2025 में इसे पूरे छत्तीसगढ़ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में दूसरा स्थान मिला।  एक डॉक्टर की वजह से बदली हजारों जिंदगियां 23 वर्षों तक लगातार एक ही क्षेत्र में काम करना अपने आप में असाधारण है. खासकर तब, जब वह इलाका नक्सल प्रभावित, आदिवासी बहुल और संसाधनों की कमी से जूझ रहा हो।  स्थानीय लोग कहते हैं कि डॉक्टर रामटेके केवल डॉक्टर नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह हैं. कई ऐसे बच्चे हैं जिनका जन्म उनके हाथों हुआ और आज वे युवा हो चुके हैं. कई परिवार ऐसे हैं जो उन्हें भगवान का रूप मानते हैं क्योंकि उन्होंने उनके प्रियजनों की जान बचाई।  अब पूरे छत्तीसगढ़ में लागू होगा मॉडल डॉक्टर रामटेके द्वारा विकसित मलेरिया नियंत्रण और अस्पताल प्रबंधन मॉडल को अब राज्य सरकार पूरे छत्तीसगढ़ में लागू करने की तैयारी कर रही है. अधिकारियों का मानना है कि यदि अंतागढ़ जैसे कठिन क्षेत्र में यह मॉडल सफल हो सकता है, तो राज्य के अन्य हिस्सों में भी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को नई ऊंचाई मिल सकती है।  डर से भरोसे तक का सफर अंतागढ़ की यह कहानी केवल एक अस्पताल की कहानी नहीं है. यह उस विश्वास की कहानी है जो एक डॉक्टर ने समाज में जगाया. यह … Read more

रेजिडेंसी परमिट को लेकर स्वीडन का बड़ा फैसला, नए कानून से बढ़ी प्रवासियों की चिंता

 स्टॉकहोम  स्वीडन की संसद ने एक नया कानून पारित किया है, जिसके तहत अधिकारियों को प्रवासियों (इमिग्रेंट्स) का रेजिडेंसी परमिट खराब आचरण के आधार पर रद्द करने का अधिकार मिल गया है. इसमें बकाया कर्ज न चुकाना, बिना स्थानीय अधिकारियों को बताए काम करना या चरमपंथी संगठनों से संबंध जैसे कारण शामिल हैं।  ये कानून न केवल लंबित रेजिडेंसी परमिट आवेदनों पर लागू होगा, बल्कि पहले से दिए जा चुके परमिटों की भी समीक्षा कर उन्हें रद्द किया जा सकेगा. यह कदम दक्षिणपंथी सरकार और उसकी सहयोगी राष्ट्रवादी पार्टी स्वीडन डेमोक्रेट्स की सख्त इमिग्रेशन नीति का हिस्सा है. सितंबर में होने वाले संसदीय चुनाव से पहले सरकार लगातार इमिग्रेशन नियमों को कड़ा कर रही है।  नए कानून की हो रही आलोचना हालांकि, विपक्षी दलों और मानवाधिकार संगठनों ने इस कानून की आलोचना की है. उनका कहना है कि यह मनमाना कानून है, क्योंकि इसके तहत ऐसे व्यवहार के आधार पर भी कार्रवाई की जा सकती है जिसे कानूनी रूप से अपराध घोषित नहीं किया गया है।  स्टॉकहोम स्थित मानवाधिकार संगठन सिविल राइट्स डिफेंडर्स ने कहा कि यह 'अच्छे व्यवहार वाला कानून' लोगों के बीच असमंजस पैदा करता है कि उनकी कौन-सी गतिविधि या अभिव्यक्ति उनके खिलाफ इस्तेमाल की जा सकती है. संगठन के अनुसार, इससे कानून के शासन और कानून के समक्ष समानता के सिद्धांत को कमजोर किया जाता है।  2022 का चुनाव इस वादे के साथ जीतने वाली सरकार का कहना है कि जो लोग नियमों का पालन नहीं करते या अपराध करते हैं, उनका देश में स्वागत नहीं है।  कानून में यह साफ नहीं किया गया है कि कौन-कौन से व्यवहार अस्वीकार्य माने जाएंगे. हालांकि सरकार ने संकेत दिया है कि बकाया कर्ज, टैक्स न चुकाना, आपराधिक गतिविधियां और चरमपंथी संगठनों से संबंध ऐसे कारण हो सकते हैं।  इन मामलों की समीक्षा स्वीडिश माइग्रेशन एजेंसी करेगी और उसके फैसलों के खिलाफ माइग्रेशन कोर्ट में अपील की जा सकेगी. मार्च में इस विधेयक को पेश करते समय स्वीडन के आव्रजन मंत्री योहान फोर्शेल ने कहा था, 'जो लोग सही तरीके से रहने की कोशिश नहीं करते, उन्हें यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि वो स्वीडन में बने रह सकेंगे।