samacharsecretary.com

तूफान के बीच बड़ा हादसा टला, इंडिगो फ्लाइट पर बिजली गिरने के बाद बदला गया विमान

नई दिल्ली पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से शुक्रवार को अगरतला जाने वाली इंडिगो की एक फ्लाइट एयरपोर्ट पर खड़ी थी. इसी दौरान जबरदस्त तूफान के दौरान बिजली गिरी और फ्लाइट उसकी चपेट में आ गई. सुरक्षा नियमों के तहत यात्रियों को विमान से उतारा गया और नियमों के मुताबिक जरूरी जांच की गई. इसके बाद दूसरे विमान का इंतजाम किया गया. न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, एहतियातन ग्राउंड पर काम करने वाले दो कर्मचारियों को मेडिकल सुविधा के लिए ले जाया गया. सूत्रों के मुताबिक, किसी के घायल होने की खबर नहीं है. न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के एक अधिकारी ने बताया कि शुक्रवार को कोलकाता एयरपोर्ट पर तूफान के दौरान अगरतला जा रहे इंडिगो के एक विमान पर बिजली गिरी. क्या है पूरा मामला? रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना तूफान और बारिश के बीच हुई, जिसके लिए एयरपोर्ट ऑपरेशन्स कंट्रोल सेंटर (AOCC) ने मौसम संबंधी अलर्ट जारी किए थे. उन्होंने बताया कि इस घटना में कोई भी यात्री घायल नहीं हुआ. इंडिगो की फ्लाइट 6E6068 (VT-IPW) एरोब्रिज 56L पर खड़ी थी, तभी सुबह करीब 9:30 बजे उस पर बिजली गिरी. बिजली गिरने से विमान के पावर सिस्टम पर असर पड़ा, जिससे अचानक पावर ऑफ हो गया. अधिकारी ने बताया कि जब बिजली गिरी, तो A320 विमान में 141 यात्री और छह क्रू मेंबर सवार थे. एहतियात के तौर पर एयरलाइन ने यात्रियों को विमान से उतार दिया और बाद में उन्हें A321 विमान (VT-ICD) से रवाना किया गया. यह फ्लाइट असल में सुबह 9.20 बजे रवाना होने वाली थी, लेकिन यात्रियों के साथ दोपहर 12.50 बजे रवाना हुई. इंडिगो के मुताबिक, दो ग्राउंड स्टाफ मामूली रूप से प्रभावित हुए और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया. अधिकारी ने बताया कि मेडिकल चेकअप के तुरंत बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई. कोलकाता और आसपास के जिलों में शुक्रवार सुबह से ही आंधी-तूफान और बारिश हो रही है, जिससे कई इलाकों में जलजमाव हो गया है और ट्रैफिक में रुकावट आने की खबरें आईं.

फीफा वर्ल्ड कप 2026: अमेरिका की लगातार दूसरी जीत, मोरक्को ने भी दर्ज की अहम जीत

 नई दिल्ली  फीफा वर्ल्ड कप-2026 के संयुक्त मेजबान अमेरिका ने ग्रुप-डी के मैच में ऑस्ट्रेलिया को मात देकर नॉकआउट दौर में जगह बना ली है। वहीं, मोरक्को ने ग्रुप-सी के मैच में स्कॉटलैंड को पटखनी देते हुए अगले दौर में जाने की संभावनाओं को मजबूत कर लिया है। अमेरिका नॉकआउट दौर में पहुंचाने वाली दूसरी टीम बन गई है। उससे पहले, एक और संयुक्त मेजबान मैक्सिको ने अगले दौर में जगह बनाई थी। वह ऐसा करने वाली पहली टीम थी। 96 साल बाद हुआ ऐसा अमेरिका की ये इस वर्ल्ड कप में लगातार दूसरी जीत है और इसी के साथ उसने 96 साल का सूखा खत्म किया है। इस वर्ल्ड कप से पहले अमेरिका ने साल 1929 में लगातार दो मैच जीते थे। इस डबल को दोहराने में अमेरिका को 96 साल लग गए। उसने अपने पहले मैच में पैराग्वे को 4-1 से मात दी थी। सीटल स्टेडियम में खेले गए इस मैच में अमेरिका के लिए पहला गोल ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी कैमरन बर्गेस ने किया। उन्होंने गेंद को क्लियर करने के प्रयास में आत्मघाती गोल कर डाला जिससे अमेरिका 11वें मिनट में ही 1-0 से आगे हो गई। पहले हाफ के खत्म होने से दो मिनट पहले यानी 43वें मिनट में एलेक्स फ्रीमैन ने अमेरिका के लिए दूसरा गोल कर दिया। दूसरे हाफ में कोई गोल हो नहीं सका और अमेरिका ने ये मैच जीतते हुए शान से नॉकआउट दौर में जगह बनाई। मोरक्को ने भी जीता मैच वहीं मोरक्को ने भी स्कॉटलैंड के खिलाफ शुरुआती बढ़त ले ली थी जिसे कायम रखते हुए जीत हासिल की। मोरक्को के लिए इस्माइल साल्बारी ने डेढ़ मिनट में गोल करते हुए अपनी टीम को बढ़त दिलाई और फिर इसे कायम रखते हुए स्कॉटलैंड को पटखनी दी। ब्राहिम डिएज ने स्कॉटलैंड को डिफेंस को भेदते हुए इस्लमाइल तक शानदार पास दिया। इसके बाद इस्माइल ने एक झन्नटेदार किक से गेंद को नेट में डाल अपनी टीम को 1-0 से आगे कर दिया। इसी स्कोरलाइन से मोरक्को ने जीत हासिल की और अगले दौर में जाने की उम्मीदों को पुख्ता किया।  

नेमार के बिना भी चमका ब्राजील, हैती को हराकर विश्व कप में खोला जीत का खाता

 नई दिल्ली  मोरक्को के खिलाफ अपने पहले मैच में 1-1 से ड्रॉ खेलने पर मजबूर होने वाली ब्राजील ने शनिवार को फीफा वर्ल्ड कप-2026 में अपनी पहली जीत हासिल कर ली है। ग्रुप-सी के मैच में ब्राजील ने हैती को 3-0 से मात देकर अपना खाता खोला। पहले मैच में ड्रॉ खेलने के बाद ब्राजील को इस मैच में जीत की सख्त जरूरत थी और उसने इसी तरह का खेल दिखाते हुए तीन अंक लिए जिससे अब उसके कुल चार अंक हो गए हैं और वह मोरक्को की बराबरी पर है जिसने स्कॉटलैंड को मात दी है। शुरू से दिखाया दबदबा हैती की ये लगातार दूसरी हार है और वह अगले दौर की रेस से लगभग बाहर हो गई है। अपने स्टार खिलाड़ी नेमार के बिना उतरी ब्राजील ने शुरू से ही इस मैच में अपना दबदबा दिखाया। 23वें मिनट में उसने अपना पहला गोल किया। उसके लिए ये गोल माथेयास कुनहो ने किया। माथेयास यहीं नहीं रुके। उन्होंने 36वें मिनट में एक और गोल कर दिया और अपनी टीम को 2-0 की बढ़त दिला दी। पहले हाफ का अंत ब्राजील के पक्ष में 2-0 से होता दिख रहा था, लेकिन इस हाफ के अतिरिक्त समय में विनिसियस जूनियर ने लुकास पाक्वेटा के पास पर शानदार गोल कर स्कोर 3-0 कर दिया। दूसरे हाफ में नहीं हो सका गोल हैती के लिए वापसी काफी मुश्किल थी, लेकिन उसके पास पूरा दूसरा हाफ था। हालांकि, ब्राजील की दीवार को भेदना उसके लिए आसान नहीं रहा। इस हाफ में उसके लिए उपलब्धि यही रही कि उसने और कोई गोल नहीं होने दिया। ब्राजील ने काफी कोशिश की, लेकिन दूसरे हाफ में वह हैती के डिफेंस को चकमा नहीं दे सकी। हालांकि, उसके पास जीत के लिए पर्याप्त स्कोर था जो उसके काम आया और ब्राजील ने इस टूर्नामेंट की अपनी पहली जीत हासिल की।  

दो रेड कार्ड पड़े भारी, नौ खिलाड़ियों वाली कतर पर कनाडा की बड़ी जीत

 नई दिल्ली  फीफा विश्व कप 2026 के ग्रुप मैच में दो-दो लाल कार्ड खाने वाली कतर को मेजबान कनाडा ने 6-0 से रौंद दिया। मेजबानों के लिए स्ट्राइकर जोनाथन डेविड ने हैटट्रिक जमाई जबकि काएल लैरिन और नेथन सलिबा ने एक-एक गोल किया। मैच का छठा गोल मोहम्मद मनाइ ने 75वें मिनट में अपने ही गोल पोस्ट में मार दिया। मैच की शुरुआत लैरिन के खूबसूरत गोल से हुई। मैच के 16वें मिनट में बॉक्स के बाएं तरफ से आई गेंद पर जमाए करारे शॉट को कतर के गोलकीपर ने रोक लिया लेकिन वह गेंद पर काबू नहीं पा सके और वह छिटककर लैरिन के पैरों में आ गिरी जिन्होंने एकदम करीब से इसे गोल में पहुंचा दिया। कतर की मुश्किलें बढ़ीं मैच के 29वें मिनट में डेविड ने अपना पहला गोल दागा जब उन्होंने दूर से जमाए एक शॉट को कतर के डिफेंडर से लगकर छिटकने के बाद दमदार शॉट के जरिए गोल में पहुंचाया। दो-तीन मिनट के बाद ही कतर की मुसीबतें बढ़ गईं जब मैच के 33वें मिनट में होमाम अहमद को रेफरी ने रेड कार्ड दिखा दिया। पहले हाफ के अतिरिक्त समय (45+3) में अपना दूसरा और मैच का तीसरा गोल किया। इस गोल में भी डेविड को भाग्य का साथ मिला। बॉक्स के बाएं तरफ से उछली गेंद पर लगे करारे हेडर को कतर के गोलकीपर ने रोक लिया, लेकिन गेंद फिर से डेविड के पास जा गिरी जिन्होंने एकदम नजदीक से कोई गलती नहीं की। पहला हाफ खत्म हुआ तो कनाडा 3-0 से आगे थी। दूसरे हाफ में कनाडा का जलवा दूसरे हाफ की शुरुआत कतर के असिम मदिबो के भयंकर फाउल से हुई। उन्होंने कनाडा के इस्माइल कोने को पीछे से टैकल करके गिरा दिया। रेफरी ने मदिबो को तुरंत रेड कार्ड दिखाकर बाहर भेज दिया। कोने की चोट बहुत गंभीर थी उन्हें भी स्ट्रेचर पर लादकर मैदान से बाहर ले जाया गया। मैच के 53वें मिनट में हुई इस घटना के कुछ देर बाद, 64वें मिनट में सलिबा ने बेहतरीन फ्री किक के जरिए कनाडा की बढ़त 4-0 की कर दी। सिर्फ नौ खिलाड़ियों के साथ खेल रही कतर की मुश्किलें खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही थीं। मनाइ ने 75वें मिनट में कनाडा का एक शॉट गोल से दूर भेजने की जगह पूरी ताकत से गोल के अंदर मार दिया। डेविड ने दूसरे हाफ के अतिरिक्त समय (90+2) में अपनी हैटट्रिक पूरी करते हुए कनाडा को 6-0 से जीत दिला दी।

क्या तेजस MK2 बदल देगा हवाई युद्ध का खेल? F-35 और Su-57 की जरूरत पर उठे सवाल

बेंगलुरु   दशकों पहले जिस देश के पास जितनी मजबूत आर्मी यानी थलसेना होती थी, उसे उतना पावरफुल माना जाता था. फिर हिरोशिमा और नागासाकी परमाणु बम हमले के बाद कॉम्‍बैट फील्‍ड में एयरफोर्स की धमाकेदार एंट्री हुई. आज 21वीं सदी में दुनिया दो भीषण सशस्‍त्र संघर्ष का साक्षी बनी है – रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान जंग. इन दोनों युद्ध में एक बात कॉमन है – एरियल अटैक यानी हवाई हमले. इन संघर्षों में पैदल सेना यानी आर्मी का न के बराबर यूज किया गया. हवाई हमले प्रमुख रहे. फाइटर जेट, मिसाइल और ड्रोन हमलों ने प्रतिद्वंद्वी देशों की हालत खराब करके रख दी. इसके दो परिणाम सामने आए हैं – पहला फाइटर जेट, मिसाइल और ड्रोन सिस्‍टम डेवलप करने वाले प्रोजेक्‍ट्स का रफ्तार मिली है. दूसरा, अल्‍ट्रा मॉडर्न टेक्‍नोलॉजी से लैस एयर डिफेंस सिस्‍टम विकसित करने पर जोर दिया जाने लगा है. भारत का मिशन सुदर्शन चक्र परियोजना नेशनल एयर डिफेंस सिस्‍टम का हिस्‍सा है. इसके अलावा देसी टेक्‍नोलॉजी के दम पर फाइटर जेट डेवलप करने की प्रक्रिया को भी रफ्तार मिली है. इसी क्रम में भारत के रक्षा वैज्ञानिकों ने बड़ी सफलता हासिल की है. तेजस फाइटर जेट के MK2 वेरिएंट Mk1A की तुलना में काफी कम रडार क्रॉस सेक्‍शन (RCS) हासिल करने में सफल रहा है।   इसका मतलब यह हुआ कि तेजस MK2 मॉडर्न रडार सिस्‍टम को चकमा दे सकता है. साथ ही THAAD और आयरन डोम जैसे एयर डिफेंस सिस्‍टम को धता बताने से महज कुछ कदम ही दूर है. इस खासियत के चलते तेजस MK2 चौथी और पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट के बीच का ब्रिज भी माना जा रहा है. साथ ही इसकी स्‍पीड राफेल फाइटर जेट जितनी होने वाली है।  भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम को एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि मिली है. एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) द्वारा विकसित किए जा रहे तेजस MK2 फाइटर जेट (मीडियम वेट फाइटर) में रडार से बचने की क्षमता को लेकर महत्वपूर्ण सुधार किया गया है. परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, तेजस MK2 का फ्रंटल रडार क्रॉस सेक्शन (आरसीएस) मौजूदा तेजस MK-1A की तुलना में लगभग 75 प्रतिशत कम होगा. इसका अर्थ है कि नए विमान की रडार पर दिखाई देने की संभावना काफी कम हो जाएगी, जिससे युद्धक्षेत्र में दुश्मन को चकमा देने और सर्वाइवल की क्षमता बढ़ेगी. ‘इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोर्ट के अनुसार, ADA के परियोजना निदेशक ने बताया कि तेजस MK2 का फ्रंटल आरसीएस तेजस MK-1A का लगभग एक चौथाई होगा. स्वतंत्र आकलनों के अनुसार, साफ कॉन्फिगरेशन (बिना बाहरी हथियारों और अतिरिक्त ईंधन टैंकों के) में इसका फ्रंटल आरसीएस 0.1 से 0.2 वर्ग मीटर के बीच हो सकता है. यह आंकड़ा आधुनिक 4.5 पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की श्रेणी में काफी प्रभावशाली माना जाता है।  RCS में कमी लाने वाली प्रमुख खासियतें     एडवांस शेपिंग और एज अलाइनमेंट (किनारों का विशेष डिजाइन), जिससे रडार तरंगें अपने स्रोत की ओर वापस परावर्तित यानी रिफ्लेक्‍ट होने के बजाय दूसरी दिशा में मुड़ जाती हैं।      S-डक्ट (S-Duct) या ट्विस्टेड एयर इंटेक, जो इंजन के कंप्रेसर ब्लेड्स को छिपाते हैं. कंप्रेसर ब्लेड्स किसी भी लड़ाकू विमान में रडार के लिए सबसे बड़े परावर्तक (रिफ्लेक्टर) माने जाते हैं।      विमान के पंखों, फ्यूजलाज (मुख्य ढांचे), कैनार्ड्स और अन्य सतहों में 90 प्रतिशत से अधिक कंपोजिट सामग्री का उपयोग, जो धातु की तुलना में रडार ऊर्जा को अधिक प्रभावी ढंग से अवशोषित करती है।      स्वदेशी रडार एब्जॉर्बेंट मैटेरियल (RAM) कोटिंग, जिसे एएमसीए (Advanced Medium Combat Aircraft) कार्यक्रम के तहत विकसित तकनीकों के आधार पर तैयार किया गया है।      सतहों के बीच अधिक चिकने और निर्बाध संक्रमण (स्मूथ सरफेस ट्रांजिशन) तथा बाहरी उभारों और गैप्स की संख्या में कमी, जिससे रडार पर विमान की पहचान और भी कठिन हो जाती है।  मॉडर्न टेक्‍नोलॉजी के साथ बड़ा आकार दिलचस्प बात यह है कि तेजस MK2 फाइटर जेट आकार में अपने पूर्ववर्ती एमके-1ए से बड़ा है. इसमें लंबा फ्यूजलेज, क्लोज कपल्ड कैनार्ड और अधिक ईंधन तथा हथियार ले जाने की क्षमता होगी. सामान्य तौर पर विमान का आकार बढ़ने से उसकी रडार पहचान भी बढ़ जाती है, लेकिन डिजाइनरों ने एडवांस एयरोडायनामिक डिजाइन, स्मूथ ट्रांजिशन और व्यापक रूप से कंपोजिट सामग्री के इस्तेमाल के जरिए इसकी रडार पहचान को उल्लेखनीय रूप से कम करने में सफलता हासिल की है. तेजस एमके-1ए पहले से ही अपनी श्रेणी के विमानों में अपेक्षाकृत कम आरसीएस के लिए जाना जाता है. इसका अनुमानित फ्रंटल आरसीएस लगभग 0.5 वर्ग मीटर या उससे कम माना जाता है. अब इसमें चार गुना तक कमी लाकर तेजस MK2 को लो विजिबिलिटी वाले उन विमानों की श्रेणी में पहुंचाने का प्रयास किया गया है, जिनकी तुलना अक्सर महंगे और अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों से की जाती है।  रडार को चकमा देने की क्षमता रडार से कम दिखाई देने की यह क्षमता विमान को दुश्मन के रडार द्वारा देर से पकड़े जाने में मदद करेगी. इससे विशेष रूप से बियॉन्ड-विजुअल-रेंज (बीवीआर) एरियल वॉर में इंडियन एयरफोर्स को सामरिक बढ़त मिल सकती है. हालांकि, विमान को पूरी तरह हथियारों और ईंधन टैंकों से लैस करने के बाद भी कम आरसीएस बनाए रखना सबसे बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती बनी हुई है. बाहरी हथियार, पॉड और अतिरिक्त टैंक रडार सिग्नेचर को बढ़ा देते हैं. इसी कारण डिजाइनर एडवांस रडार और अन्य तकनीकों पर काम कर रहे हैं।  भारत के एरियल पावर को नई ऊंचाई रक्षा अधिकारियों का कहना है कि इन तकनीकी सुधारों के बावजूद विमान के विकास और वायुसेना में शामिल किए जाने की समयसीमा प्रभावित नहीं होनी चाहिए. भारतीय वायुसेना को अपनी भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए तेजस MK2 की आवश्यकता है, खासकर तब तक जब तक एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) परियोजना पूरी तरह मैच्‍योर नहीं हो जाती. GE F414 इंजन, ‘उत्तम’ एईएसए रडार और अन्य आधुनिक सिस्‍टम्‍स के साथ तेजस MK2 भारतीय वायुसेना के लिए एक शक्तिशाली लड़ाकू प्लेटफॉर्म साबित हो सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि कम रडार पहचान, एडवांस सेंसर, अधिक हथियार क्षमता और संभावित सुपरक्रूज क्षमता से यह विमान भविष्य के युद्धक्षेत्र में भारत की ताकत को नई ऊंचाई देगा। 

Jio का नया AI असिस्टेंट कमाल करेगा, कॉल के दौरान मीटिंग रिकॉर्ड और फूड ऑर्डर भी होगा आसान

नई दिल्ली भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में डेटा और कॉलिंग की परिभाषा बदलने के बाद अब रिलायंस जियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की ताकत को सीधे आम आदमी की रोजमर्रा की फोन कॉल्स से जोड़ने जा रहा है. कंपनी इस नए एआई टूल को इस साल के अंत तक देश भर में रोलआउट करने की योजना पर काम कर रही है, जो हर एक जियो यूजर के लिए पूरी तरह उपलब्ध होगा. इस सर्विस की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरी तरह से ‘मेड इन इंडिया’ और भारतीय परिवेश के अनुकूल है. यह असिस्टेंट देश की सभी प्रमुख भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करेगा, जिससे ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों तक के आम उपभोक्ताओं के लिए फोन पर बात करने और अपने काम निपटाने का तरीका पूरी तरह से बदलने वाला है।  जियो कॉल एजेंट एक तरह का पर्सनल एआई दरबान (AI Concierge) है जो आपकी नॉर्मल वॉयस कॉल्स के भीतर ही मौजूद रहेगा. इसके इस्तेमाल के लिए किसी स्मार्टफोन में किसी थर्ड-पार्टी ऐप को इंस्टॉल करने या किसी अतिरिक्त सेटिंग को ऑन करने की कोई झंझट नहीं होगी. जब आप किसी से फोन पर बात कर रहे होंगे, तो आपको बस अपनी आवाज में “हे जियो” (Hey Jio) कहना होगा. यह कमांड सुनते ही जियो का नेटवर्क-बेस्ड एआई असिस्टेंट आपकी कॉल में एक मददगार की तरह शामिल हो जाएगा. इसके बाद यह कॉल पर हो रही बातचीत को लाइव सुनने और समझने लगेगा. सुरक्षा और प्राइवेसी के लिहाज से यह बेहद जरूरी फीचर है कि यह एआई केवल यूजर की स्पष्ट सहमति और कमांड मिलने के बाद ही कॉल में शामिल होगा, जिससे डेटा सिक्योरिटी से जुड़ा कोई खतरा नहीं रहेगा।  कॉन्फ्रेंस कॉल में 10 लोगों की आवाज पहचानेगा एआई आकाश अंबानी के अनुसार, इस एआई एजेंट की क्षमताएं बेहद आधुनिक हैं. यह किसी भी चालू कॉल के दौरान कही गई बातों को रियल-टाइम में लिखित रूप में (Transcribe) बदल सकता है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अगर आप एक कॉन्फ्रेंस कॉल पर हैं, तो यह एआई एक साथ 10 अलग-अलग लोगों की अनूठी आवाजों को पहचान सकता है और यह भी रिकॉर्ड रख सकता है कि किस व्यक्ति ने क्या बात कही. बातचीत खत्म होने के बाद, यह जियो कॉल एजेंट पूरी कॉल का एक सटीक सारांश (Summary) तैयार करेगा. इसके साथ ही मीटिंग में तय हुए जरूरी काम (Action Items) और जरूरी रिमाइंडर्स की एक लिस्ट बनाकर कॉल में शामिल सभी सदस्यों के साथ तुरंत शेयर कर देगा, ताकि किसी को अलग से नोट्स बनाने की जरूरत न पड़े।  आम आदमी के एक्सपीरियंस को कैसे बनाएगा खास? यह एआई असिस्टेंट केवल ऑफिस की मीटिंग्स या नोट्स बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी को बेहद आसान और स्मार्ट बना देगा. लाइव कॉल के दौरान ही यूजर इस एआई एजेंट को सीधे निर्देश देकर कई तरह के टास्क पूरे करवा सकेंगे।      कैब और फूड बुकिंग: कॉल पर बात करते-करते ही आप एआई से कहकर अपने लिए खाना ऑर्डर कर सकते हैं या कहीं जाने के लिए कैब बुक कर सकते हैं।      टेबल और मीटिंग शेड्यूलिंग: किसी रेस्टोरेंट में टेबल रिजर्व करनी हो या दोस्तों-सहकर्मियों के साथ मीटिंग का समय तय करना हो, एआई कॉल के बैकग्राउंड में ही यह काम संभाल लेगा।      भाषा की दीवार होगी खत्म: सभी भारतीय भाषाओं के सपोर्ट के कारण, यदि कोई व्यक्ति अपनी क्षेत्रीय भाषा में भी निर्देश देगा, तो यह एआई उसे बखूबी समझकर टास्क पूरा करेगा।  जियो का यह कदम भारत में एआई तकनीक के लोकतंत्रीकरण (Democratization) की दिशा में एक बड़ा क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है, जो महंगे एआई फीचर्स को बिना किसी अतिरिक्त खर्च के देश के 50 करोड़ से ज्यादा आम स्मार्टफोन और फीचर फोन यूजर्स की पहुंच में ला देगा। 

WhatsApp यूजर्स के लिए नया सब्सक्रिप्शन प्लान, ₹79 प्रति माह में मिलेगा प्रीमियम अनुभव

 नई दिल्ली WhatsApp अब तक पूरी तरह फ्री ऐप रहा है, लेकिन अब इसमें पहली बार एक पेड सब्सक्रिप्शन मॉडल आ गया है. कंपनी ने भारत में WhatsApp Plus नाम से नया प्लान रोलआउट करना शुरू किया है, जो Android और iOS दोनों यूजर्स के लिए है।  इस नए प्लान की कीमत भारत में 79 रुपये प्रति महीने रखी गई है. हालांकि शुरुआत में यूजर्स को पहला महीना फ्री ट्रायल के तौर पर मिल रहा है. यानी आप पहले इसे इस्तेमाल करके देख सकते हैं और उसके बाद तय कर सकते हैं कि यह आपके लिए जरूरी है या नहीं।  WhatsApp Plus को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि यह कोई बड़ा बदलाव नहीं लाता, बल्कि यह एक तरह का कस्टमाइजेशन पैक है. इसका मतलब यह है कि ऐप के बेसिक फीचर्स जैसे कॉलिंग, स्टेटस, मैसेजिंग और एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन पहले जैसे ही रहेंगे और सभी यूजर्स के लिए फ्री रहेंगे।  यह सब्सक्रिप्शन सिर्फ उन लोगों के लिए है जो WhatsApp को थोड़ा अलग और पर्सनल तरीके से इस्तेमाल करना चाहते हैं।  इस प्लान के तहत यूजर्स को ऐप के लुक को बदलने का ऑप्शन मिलता है. इसमें करीब 18 नए कलर थीम्स दिए गए हैं, जिनमें अलग-अलग स्टाइल और कलर कॉम्बिनेशन शामिल हैं।  इसके अलावा ऐप का आइकन भी बदला जा सकता है, जिसके लिए 14 नए डिजाइन दिए गए हैं. यानी WhatsApp अब पहले जैसा दिखे, यह जरूरी नहीं है, आप इसे अपनी पसंद के हिसाब से बदल सकते हैं।  सिर्फ लुक ही नहीं, कुछ छोटे लेकिन काम के फीचर्स भी इसमें जोड़े गए हैं. जैसे यूजर्स को एक्सक्लूसिव रिंगटोन मिलती हैं, जो आम यूजर्स के पास नहीं होंगी. इसके साथ ही नए स्टिकर पैक भी दिए जाते हैं. एक और बदलाव यह है कि अब आप अपनी चैट लिस्ट में 20 तक चैट्स को पिन कर सकते हैं, जो पहले लिमिटेड थी।  चैट को मैनेज करने के लिए भी कुछ एडिशनल कंट्रोल दिए गए हैं. यूजर्स अपनी चैट लिस्ट को अपने हिसाब से कस्टमाइज कर सकते हैं, जिससे ऐप का इस्तेमाल थोड़ा ज्यादा आसान और पर्सनल हो जाता है।  अगर सब्सक्राइब करने की बात करें तो प्रोसेस आसान है. WhatsApp की सेटिंग्स में जाकर Subscriptions सेक्शन में WhatsApp Plus का ऑप्शन मिलेगा. वहां से पेमेंट करके इसे एक्टिव किया जा सकता है. पेमेंट Google Play Store के जरिए प्रोसेस होता है और एक्टिवेशन के बाद नोटिफिकेशन भी मिलता है।  हालांकि यह भी ध्यान देने वाली बात है कि यह फीचर अभी सभी यूजर्स तक नहीं पहुंचा है. अगर आपको Subscriptions में WhatsApp Plus का ऑप्शन नहीं दिख रहा है, तो इसका मतलब है कि यह अभी आपके अकाउंट के लिए रोलआउट नहीं हुआ है. ऐसे में कुछ दिन इंतजार करना होगा।  अब सवाल यही है कि क्या WhatsApp Plus लेना चाहिए या नहीं. इसका जवाब पूरी तरह यूजर पर निर्भर करता है. अगर आप WhatsApp को सिर्फ मैसेजिंग के लिए इस्तेमाल करते हैं और आपको उसका मौजूदा लुक और फीचर्स ठीक लगते हैं, तो यह प्लान आपके लिए जरूरी नहीं है। 

COVID-19 की उत्पत्ति पर नई बहस, चीन की लैब और अमेरिकी फंडिंग को लेकर सामने आए चौंकाने वाले दावे

बीजिंग /न्यूयॉर्क पूरी दुनिया को झकझोर देने वाली कोरोना महामारी को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. कुछ दिनों पहले अमेरिकी खुफिया विभाग की निदेश का पद छोड़ने का ऐलान करने वाली तुलसी गबार्ड नेकोरोना वायरस को लेकर बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने कहा कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के चीफ मेडिकल एडवाइजर एंथोनी फुसी ने चीन स्थित वुहान के उस लैब को फंडिंग की थी, जहां से कोरोना महामारी फैली थी।  प्रतिबंधित दस्तावेज हुए सार्वजनिक अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने हाल ही में अमेरिकी की ओर से फंड किए गए बायोलैब्स से संबंधित कई दस्तावेज को सार्वजनिक कर दिया.  उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि अमेरिका के राष्ट्रीय एलर्जी और संक्रामक रोग संस्थान (एनआईएआईडी) के पूर्व निदेशक एंथनी फौसी ने कोरोना महामारी की शुरुआत पर खुफिया आकलन को प्रभावित किया और बाद में संसद के सामने कसम खाकर ऐसे कनेक्शन को खारिज किया था।  राष्ट्रीय खुफिया निदेशक के दफ्तर (ओडीएनआई) ने इस दस्तावेज को जारी किया. गबार्ड का यह कदम ट्रंप प्रशासन के उस प्रयास में एक बड़ा कदम है, जिसमें महामारी की उत्पत्ति की फिर से समीक्षा करने और वैश्विक स्वास्थ्य संकट के दौरान अमेरिकी सरकारी एजेंसियों, वैज्ञानिकों और खुफिया अधिकारियों की भूमिका की जांच करने की बात कही गई है।  गबार्ड के अनुसार, नए जारी किए गए बातचीत और दस्तावेजों से पता चलता है कि जब वायरस नैचुरली निकला या चीन के वुहान की लैब से, इसपर बहस तेज हुई तो कैसे फौसी ने राष्ट्रीय एलर्जी और संक्रामक रोग संस्थान (एनआईएआईडी) के निदेशक के तौर पर काम करते हुए खुफिया अधिकारियों के साथ बातचीत की।  बाइडेन के अधिकारी पर तुलसी गबार्ड का बड़ा आरोप गबार्ड ने कहा, 'कोविड-19 महामारी की वजह से हमारे लाखों साथी, अमेरिकियों और दुनिया भर के अनगिनत लोगों को बहुत मुश्किल भरे दौर से गुजरना पड़ा. सालों के झूठ, सेंसरशिप और छिपाने के बाद, अमेरिकी लोग पारदर्शिता, सच्चाई और जवाबदेही के हकदार हैं.' उन्होंने आरोप लगाया कि डॉ. फौसी जैसे राजनीतिक स्वार्थी नेताओं ने अपने गलत कामों और सत्ता के दुरुपयोग को छुपाया, खुफिया जानकारी में हेरफेर किया, कांग्रेस से झूठ बोला और देश को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी सूचानाओं तक निर्वाचित राष्ट्रपति की पहुंच सीमित करके उनकी छवि को कमजोर किया।  ओडीएनआई ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पारदर्शिता संबंधी निर्देश के तहत उसने एक वर्ष तक चली गोपनीय दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की समीक्षा प्रक्रिया संचालित की. इस दौरान अनियमितताओं का खुलासा करने वाले अधिकारियों की गवाही भी एकत्र की गई. इन अधिकारियों ने आरोप लगाया कि वायरस की उत्पत्ति को लेकर आधिकारिक आकलनों पर सवाल उठाने के कारण उनके खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई की गई।  ओडीएनआई ने दावा किया कि फौसी के खुफिया अधिकारियों के साथ अच्छे संबंध थे, जिससे वह कोविड-19 की शुरुआत के बारे में चर्चा में अहम भूमिका निभा पाए. इसमें आरोप लगाया गया कि फौसी ने खुफिया एजेंसियों से सलाह लेने वाले विशेषज्ञों के बारे में सुझाव दिए और ऐसे आकलन बनाने में मदद की जिन्हें बाद में वैज्ञानिक सहमति के तौर पर सबके सामने पेश किया गया।  बाइडेन सरकार ने की थी समीक्षा बैठक जुलाई 2021 के एक इंटेलिजेंस कम्युनिटी ईमेल में कहा गया था कि अधिकारी फौसी के सुझावों पर आगे बढ़ना चाहते थे क्योंकि उन्हें एक एसएमई के ​​तौर पर देखा जाता था, जिसके पास मौजूदा और ऐतिहासिक रिसर्च के बारे में बहुत जानकारी है और जो शायद ज्यादातर लोगों से बेहतर जानता है कि असली कोरोना वायरस विशेषज्ञ कौन हैं।  तत्कालीन बाइडेन सरकार ने कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर 90 दिनों की समीक्षा बैठक की थी. इसे लेकर दस्तावेज में बताया गया है कि 2021 में खुफिया अधिकारी ने 90-दिनों की समीक्षा के दौरान फौसी की तरफ से रिकमेंड किए गए वैज्ञानिक तक पहुंचने को लेकर चर्चा कर रहे थे. आंतरिक पत्राचार में उन्हें एक सब्जेक्ट मैटर एक्सपर्ट बताया गया था, जिनकी रिकमेंडेशन्स को समीक्षा प्रक्रिया के लिए जरूरी माना गया था।  फौसी ने 2024 में कोरोना वायरस महामारी पर हाउस सिलेक्ट सबकमेटी के सामने अपनी गवाही में वायरल रिसर्च के बारे में इंटेलिजेंस एजेंसियों के साथ बातचीत की जानकारी से इनकार किया. रिपोर्ट में कहा गया है कि डॉक्यूमेंट्स में इंटेलिजेंस अधिकारियों और कोविड-की उत्पत्ति की जांच के बीच कई बातचीत दिखाई गई हैं. उस समय कुछ सरकारी कम्युनिकेशन ने इस दावे को खारिज कर दिया था कि वायरस को लैब में बनाया गया था, जबकि दूसरों ने लैबोरेटरी एक्सीडेंट सिनेरियो और वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की क्षमताओं की जांच की।  वुहान लैब को लेकर बड़ा खुलासा लॉरेंस लिवरमोर नेशनल लेबोरेटरी की ओर से मई 2020 में तैयार किए गए एक आकलन में यह निष्कर्ष निकाला गया कि वुहान में लेबोरेटरी में बदले गए कोरोना वायरस के गलती से फैलने के लिए हालात मौजूद थे और लेबोरेटरी और प्राकृतिक उत्पत्ति की परिकल्पनाओं को बराबर महत्व दिया गया. ओडीएनआई रिलीज में अनियमितताओं का खुलासा करने वाले अधिकारियों के आरोप भी शामिल हैं कि जिन खुफिया विश्लेषकों ने लैब-लीक हाइपोथीसिस का समर्थन किया, उन्हें परेशानी झेलना पड़ी, किनारे कर दिया गया या अलग राय रखने से रोका गया।  तुलसी गबार्ड ने कहा कि इनमें से कई शिकायतों को आगे की समीक्षा के लिए इंटेलिजेंस कम्युनिटी इंस्पेक्टर जनरल के पास भेज दिया गया है. कोविड-19 की शुरुआत महामारी के सबसे विवादित मुद्दों में से एक है. अमेरिकी खुफिया एजेंसियां ​​लंबे समय से बंटी हुई हैं, कुछ का मानना ​​है कि यह जानवरों से प्राकृतिक रूप से फैला है और कुछ लैब से जुड़ी घटना को ज्यादा संभावित वजह मानते हैं।   

तलाक के एक दशक बाद हुआ पुनर्मिलन, बेटियों की खातिर फिर साथ आए पति-पत्नी

10 साल पहले हुआ था तलाक सखी की समझाइश से बेटियों के लिए फिर एक हुआ परिवार भोपाल  मध्यप्रदेश में संकटग्रस्त, पीड़ित और असहाय महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए संचालित 'वन स्टॉप सेंटर' (सखी) मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। ऐसा ही एक अविश्वसनीय और दिल को छू लेने वाला मामला मध्यप्रदेश के दतिया जिले से सामने आया है, जहां कानूनी तौर पर तलाक होने के 10 वर्ष बाद वन स्टॉप सेंटर के प्रयासों से एक परिवार को पुनः मिलाया गया। इस पहल ने न सिर्फ दो मासूम बच्चियों को उनके पिता का साया वापस दिलाया, बल्कि टूट चुके एक वैवाहिक रिश्ते में फिर से खुशियों के रंग भर दिए। यह कहानी दतिया की रहने वाली 36 वर्षीय उर्मिला (बदला हुआ नाम) की है। 10 वर्ष पूर्व न्यायालय द्वारा पति से तलाक होने के बाद उर्मिला अपनी दो मासूम बच्चियों के साथ मायके में रह रही थी। उर्मिला के वृद्ध पिता मजदूरी करके किसी तरह अपनी बेटी और दोनों नातिनों का पेट पाल रहे थे और तंगहाली के बावजूद बच्चियों को अच्छे स्कूल में पढ़ा रहे थे। वर्तमान समय में महंगाई और बढ़ती उम्र के कारण वृद्ध पिता के लिए पूरे परिवार का खर्च उठाना असंभव हो गया। अपनी बच्चियों के भविष्य को अंधकार में डूबता देख, उर्मिला ने हिम्मत जुटाई और दतिया कलेक्टर की जनसुनवाई में न्याय की गुहार लगाते हुए एक शिकायती पत्र सौंपा। वन स्टॉप सेंटर से मिली मदद महिला एवं बाल विकास विभाग दतिया के जिला कार्यक्रम अधिकारी अरविंद कुमार उपाध्याय के माध्यम से यह संवेदनशील मामला तुरंत 'वन स्टॉप सेंटर' को ट्रांसफर किया गया। सेंटर पर जब उर्मिला को काउंसलिंग के लिए बुलाया गया, तो 10 साल का दर्द और भविष्य की चिंता उसकी आँखों से बह निकली। उसकी बस यही चिंता थी कि क्या तलाक के इतने सालों बाद उसका पति उसे और बच्चियों को स्वीकार करेगा? वन स्टॉप सेंटर की प्रशासक सुरीना गौतम ने उर्मिला को ढांढस बंधाया और हर संभव प्रयास कर उसका हक दिलाने का अटूट विश्वास दिलाया। कानूनी पेचीदगियों पर भारी पड़ी 'समझाइश' वन स्टॉप सेंटर की टीम ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की मदद से उर्मिला के पति और उसके परिवारजनों को कार्यालय आमंत्रित किया। काउंसलिंग के दौरान पति ने 10 साल पुराने तलाक के कानूनी दस्तावेज पेश किए। कानूनी रूप से रिश्ता खत्म हो चुका था, लेकिन मानवीय दृष्टिकोण अभी बाकी था। विभाग के अधिकारियों और वन स्टॉप सेंटर की टीम ने कड़े वैधानिक रुख के बजाय बेहद संवेदनशील तरीके से संयुक्त काउंसलिंग की। उन्होंने पति और उसके परिवार को बच्चियों के भरण-पोषण, शिक्षा और उनके सुरक्षित भविष्य का अहसास कराया। और खिल उठे चेहरे, लौट आई खुशियां इस मैराथन काउंसलिंग और मानवीय समझाइश का असर यह हुआ कि पति और उसके भाइयों का दिल पिघल गया। पति न केवल कानूनी तलाक को भुलाकर उर्मिला को पत्नी के रूप में दोबारा स्वीकार करने को राजी हुआ, बल्कि दोनों बच्चियों की पढ़ाई और पूरी जिम्मेदारी उठाने की सहर्ष सहमति दे दी। 10 साल से मायूसी का जीवन जी रही उर्मिला का चेहरा उम्मीद की नई किरण से खिल उठा। वन स्टॉप सेंटर के दफ्तर में जो परिवार कभी कानूनी तौर पर अलग हुआ था, वह एक-दूसरे का हाथ थामकर, खुशी-खुशी अपने घर के लिए रवाना हुआ। उर्मिला ने नम आंखों से दतिया प्रशासन और वन स्टॉप सेंटर का आभार व्यक्त किया।  

क्या है ब्रह्मोस मिसाइल की सबसे बड़ी ताकत? जिस हथियार को भारत ने बनाया, उसे अब रूस भी अपनाने जा रहा

 नई दिल्ली भारत और रूस के संयुक्त प्रयासों से बनी दुनिया की सबसे तेज और सटीक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस मिसाइल ने वैश्विक रक्षा बाजार में एक नया इतिहास रच दिया है. अब तक जिस मिसाइल तकनीक के लिए भारत विदेशी ताकतों पर निर्भर रहता था, आज उसी भारत से रूस जैसा महाशक्ति देश ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल सिस्टम खरीदने की तैयारी कर रहा है।  ब्रह्मोस एयरोस्पेस के प्रमुख डॉ. जयतीर्थ आर. जोशी ने नागपुर में आयोजित एक रक्षा कार्यक्रम के इतर इसकी पुष्टि की है कि रूस अपनी सेना में ब्रह्मोस को शामिल करने का इच्छुक है और इसके लिए द्विपक्षीय बातचीत बेहद एडवांस्ड स्टेज में पहुंच चुकी है. भारत जल्द ही रूस को इन घातक प्रणालियों की आपूर्ति शुरू कर सकता है।  यह घटनाक्रम न केवल वैश्विक भू-राजनीति में भारत के बढ़ते कद को दर्शाता है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत अभियान की सबसे बड़ी सफलता की गवाही भी देता है. जिस मिसाइल को फिलीपींस जैसे देश पहले ही खरीद चुके हैं, उसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में अपनी संहारक क्षमता साबित कर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है।  ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस की अचूक मारक क्षमता मई 2025 में हुए भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान भारतीय वायुसेना और थलसेना ने सीमा पार आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद करने के लिए ऑपरेशन सिंदूर चलाया था. इस ऑपरेशन के दौरान पहली बार ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल केवल परीक्षणों या सिमुलेशन तक सीमित न रहकर वास्तविक युद्धक्षेत्र में किया गया।  भारतीय सुखोई-30MKI लड़ाकू विमानों से दागी गई एयर-लॉन्च ब्रह्मोस मिसाइलों ने दुश्मन के हवाई क्षेत्रों और आतंकी बुनियादी ढांचों पर पिन-पॉइंट सटीकता से हमला किया।  रडार को चकमा देने की इसकी काबिलियत और मैक 2.8 से 3.0 की सुपरसोनिक रफ्तार के कारण दुश्मन का कोई भी एयर डिफेंस सिस्टम इसे ट्रैक या इंटरसेप्ट नहीं कर सका. ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस के इस प्रदर्शन ने पूरी दुनिया, खासकर रूस के सैन्य कमांडरों का ध्यान खींचा. रूस ने देखा कि यह मिसाइल घने हवाई सुरक्षा कवच को भेदकर अत्यंत सटीक हमले करने में पूरी तरह सक्षम है।  आखिर रूस को क्यों पड़ी ब्रह्मोस की जरूरत? रणनीतिक तौर पर ब्रह्मोस को भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन- DRDO और रूस के NPO Mashinostroyenia ने मिलकर विकसित किया है. शुरुआत से ही इसका सबसे बड़ा उपभोक्ता भारत रहा है. वर्तमान में रूस द्वारा ब्रह्मोस को अपनी सेना में शामिल करने के पीछे कई बड़े कारण हैं…     वॉर टेस्टेड और विश्वसनीय तकनीक: यूक्रेन संकट और हालिया वैश्विक तनावों के बीच रूस को ऐसी मिसाइलों की आवश्यकता है जो पहले से 'बैटल-प्रूवन' हो. ब्रह्मोस ने भारतीय सेना के तीनों अंगों में रहकर और ऑपरेशन सिंदूर में हिस्सा लेकर अपनी विश्वसनीयता साबित की है।      तेज गति और रडार से बचने की क्षमता: ब्रह्मोस की सबसे बड़ी ताकत इसकी गति है. ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना तेज 3704.4 km/hr चलने के कारण यह दुनिया की सबसे तेज ऑपरेशनल क्रूज मिसाइल है. समुद्र या जमीन की सतह से बेहद कम ऊंचाई पर उड़ने से रडार इसे बहुत देर से पकड़ पाते हैं, जिससे दुश्मन को संभलने का मौका नहीं मिलता।       स्वदेशीकरण और लागत में कमी: भारत ने ब्रह्मोस में बड़े पैमाने पर स्वदेशीकरण किया है. इसके स्वदेशी बूस्टर और वॉरहेड अब भारत में ही बन रहे हैं, जिससे इसके निर्माण और कच्चे माल की लागत में भारी गिरावट आई है. रूस के लिए भारत से रेडी-टू-यूज़ मिसाइल प्रणालियों की आपूर्ति लेना आर्थिक और रणनीतिक दोनों रूप से बेहद फायदेमंद है।  वैश्विक बाजार में भारत का डंका: फिलीपींस के बाद रूस की बारी ब्रह्मोस एयरोस्पेस के लिए यह दौर रिकॉर्ड मुनाफे और वैश्विक विस्तार का रहा है. वर्ष 2022 में फिलीपींस ने भारत के साथ लगभग 3,100 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक सौदा कर ब्रह्मोस का पहला अंतरराष्ट्रीय खरीदार बनने का गौरव हासिल किया था, जिसकी मिसाइल खेपें पहले ही पहुंचाई जा चुकी हैं।  फिलीपींस के बाद अब वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के साथ भी निर्यात वार्ता अंतिम चरण में है. अब इस कड़ी में रूस का नाम जुड़ना भारत के रक्षा निर्यात इतिहास का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट है. अब तक सैन्य साजो-सामान के लिए रूस पर निर्भर रहने वाला भारत अब खुद रूस को मिसाइल एक्सपोर्ट करेगा।  इस कदम से न केवल दोनों देशों के कूटनीतिक संबंध नए मुकाम पर पहुंचेंगे, बल्कि भविष्य में बनने वाली हाइपरसोनिक मिसाइल 'ब्रह्मोस-II' और इसके छोटे वेरिएंट 'ब्रह्मोस-एनजी' के संयुक्त विकास को भी नई रफ्तार मिलेगी।