samacharsecretary.com

‘विकास भी, विरासत भी’ के तहत आबूराज का होगा समग्र और इको-फ्रेंडली विकास

जयपुर  मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने आबूराज के पर्यटन, आध्यात्मिक एवं पर्यावरणीय विशिष्टताओं के अनुरूप सर्वांगीण विकास का ब्लूप्रिंट तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने विकास कार्यों को परस्पर समन्वय के साथ समयबद्ध रूप से पूरा करने के साथ ही संभागीय आयुक्त एवं मुख्य सचिव को निरंतर मॉनिटरिंग के लिए निर्देशित भी किया मुख्यमंत्री रविवार को आबूराज में आबूपर्वत विकास समिति की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आबूराज में शहरी विकास, सड़क, पार्किंग, आवागमन के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित की जाएं, ताकि अधिक से अधिक पर्यटकों का आगमन हो। उन्होंने अधिकारियों को नक्की झील के सौंदर्यकरण, प्रकाश व्यवस्था, रंग रोगन, सीढ़ियों की मरम्मत, सीवरेज सहित विभिन्न विकास कार्यों के संबंध में विशेष रूप से निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि आबूराज ऋषि-मुनियों की भूमि रही है। यहां धार्मिक पर्यटन को नई गति प्रदान करने के लिए मंदिरों का सूचीकरण किया जाए। मुख्यमंत्री ने आबूराज को क्लीन एवं ग्रीन सिटी के रूप में विकसित करने पर विशेष जोर देते हुए इसे स्वच्छता युक्त एवं अतिक्रमण मुक्त बनाए रखने के संबंध में निर्देश प्रदान किए। उन्होंने कहा कि आबूराज की सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय विशिष्टता को संरक्षित रखते हुए टोकन कार्य में ऑनलाइन प्रणाली को पूर्ण पारदर्शिता के साथ लागू किया जाए और निर्माण सामग्री के आवागमन पर निगरानी रखी जाए। ‘विकास भी, विरासत भी’ के मूल मंत्र पर आबूराज का हो रहा विकास मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आबूराज में ‘विकास भी, विरासत भी‘ के मूल मंत्र पर प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि विवेकानंद पार्क का सौंदर्यकरण, गुरु शिखर का सौंदर्यकरण एवं सुदृढ़ीकरण, अर्बुदा माता मंदिर एवं दत्तात्रेय मंदिर के विकास कार्यों, ईवी व्हीकल को बढ़ावा देने और भारत माता नमन स्थल को नमो उद्यान के रूप में विकसित करने सहित विभिन्न विकास कार्यों से आबूराज इको फ्रेंडली, क्लीन-ग्रीन एवं स्पिरिचुअल बन सकेगा। इन सभी सहित विभिन्न 100 करोड़ रुपये से अधिक के कार्यों पर उन्होंने दिशा-निर्देश प्रदान किए। इस दौरान उन्होंने पूर्व बैठकों में दिए गए निर्देशों की प्रगति की भी समीक्षा करते हुए कहा कि आबू पर्वत विकास समिति की नियमित बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में पंचायतीराज राज्य मंत्री ओटा राम देवासी, उद्योग एवं वाणिज्य राज्य मंत्री केके विश्नोई, सांसद मदन राठौड़, लुंबाराम चौधरी, विधायक समाराम, मुख्य सचिव वी श्रीनिवास, अतिरिक्त मुख्य सचिव, वन एवं पर्यावरण आनंद कुमार, अतिरिक्त मुख्य सचिव, नगरीय विकास आलोक गुप्ता, स्वायत्त शासन विभाग के शासन सचिव रवि जैन, पर्यटन विभाग की शासन सचिव शुचि त्यागी सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीगण उपस्थित रहे। वहीं, संबंधित मंत्रीगण एवं विभागीय अधिकारी वीसी के माध्यम से जुड़े। इससे पहले मुख्यमंत्री ने यहां विकास कार्यों पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

संस्कृति विभाग ने 14 स्थानों पर आयोजित किए सांस्कृतिक कार्यक्रम, जनजातीय संग्रहालय में संगीत संध्या

भोपाल  विश्व संगीत दिवस के पावन अवसर पर समूचा मध्य प्रदेश नाद-ब्रह्म की अलौकिक स्वर-लहरियों से गुंजायमान हो उठा। संस्कृति विभाग के तत्वावधान में प्रदेश के 14 अंचलों में कला-साधना और सांस्कृतिक सौंदर्य का एक ऐसा अनुपम वितान तना, जिसने युवा पीढ़ी में नई सांस्कृतिक चेतना का संचार कर दिया। शासकीय संगीत एवं ललित कला महाविद्यालयों सहित विभिन्न सांस्कृतिक संस्थानों में आयोजित इन कार्यक्रमों का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, कला और परंपराओं से जोड़ना एवं उनमें सांस्कृतिक चेतना का संवर्धन करना रहा। इसी श्रृंखला में, मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में आयोजित 'संगीत संध्या' मुख्य आकर्षण रही, जहाँ कला-साधना और सांस्कृतिक सौंदर्य का अनूठा संगम देखने को मिला। इस शाम पुणे की सुप्रसिद्ध भरतनाट्यम नृत्यांगना सुस्मिता महाजन की लयात्मक प्रस्तुतियों और भोपाल की गुणी गायिका सुप्रदक्षिणा भट्ट के मनोहारी शास्त्रीय गायन ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया, जो सांस्कृतिक विरासत के संवर्धन में एक सराहनीय प्रयास सिद्ध हुआ। इस अवसर पर संचालक, संस्कृति एन.पी. नामदेव एवं संस्कृति संचालनालय की उप संचालक डॉ. पूजा शुक्ला ने उपस्थित कलाकारों का पुष्पगुच्छ भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रोता एवं दर्शक उपस्थित रहे। संगीत संध्या में पुणे (महाराष्ट्र) की सुप्रसिद्ध भरतनाट्यम नृत्यांगना सुस्मिता महाजन ने अपनी शिष्याओं सुहार्दिका फड़के, सुसिद्धि पाटिल एवं सुसिद्धि तार्डे के साथ भरतनाट्यम की प्रभावपूर्ण प्रस्तुति दी। प्रस्तुत सभी नृत्य रचनाएँ संस्कृत एवं हिंदी में रचित थीं, जिनका लेखन, संगीतबद्धता और नृत्य संयोजन स्वयं स्मिता महाजन द्वारा किया गया है। प्रस्तुति का शुभारंभ ‘विनायक स्तुति’ से हुआ, जिसमें विघ्नहर्ता भगवान गणेश की वंदना करते हुए उनसे बुद्धि, शक्ति एवं मंगलकारी आशीर्वाद की कामना की गई। इसके पश्चात प्रस्तुत ‘मल्लारी’ में मंदिरों में देवयात्रा के दौरान वाद्ययंत्रों पर बजाई जाने वाली पारंपरिक रचना को भरतनाट्यम की शैली में साकार किया गया। चार विभिन्न गतियों में प्रस्तुत इस रचना ने दर्शकों को लय और ताल की अद्भुत अनुभूति कराई। अगली प्रस्तुति ‘देवी कौतुकम्’ रही, जिसमें ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती, समृद्धि की प्रतीक देवी लक्ष्मी तथा शक्ति स्वरूपा माँ अम्बा की स्तुतियाँ तीन भिन्न रागों एवं तालों में प्रस्तुत की गईं। इसके बाद प्रस्तुत हिंदी पदम में एक युवती की मनःस्थिति को भावपूर्ण ढंग से अभिव्यक्त किया गया, जो अपनी प्रिय सखी के रूठ जाने से व्यथित है और उसे मनाने का उपाय खोज रही है। दूसरे पदम में वासकसज्जिता नायिका के भावों का अत्यंत सजीव चित्रण किया गया, जिसमें वह अपने प्रियतम के आगमन की प्रतीक्षा करते हुए उनके साथ बिताए जाने वाले सुखद क्षणों की कल्पना करती है। कार्यक्रम का समापन पारंपरिक रूप से ‘तिल्लाना’ से हुआ, जो लयात्मकता, ऊर्जा और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत संगम था। राग देश में निबद्ध इस रचना के माध्यम से मातृभूमि को भावपूर्ण नमन अर्पित किया गया। उल्लेखनीय है कि स्मिता महाजन ने स्वयं रचित एवं संगीतबद्ध 75 भरतनाट्यम रचनाओं का तीन खंडों में प्रकाशित ग्रंथ ‘मार्गम उन्मेष’ तैयार किया है। उन्हें 16वीं से 19वीं शताब्दी के तंजावुर भोंसले राजाओं की परंपरा के पश्चात मराठी एवं हिंदी में नृत्य रचनाओं के लेखन और संगीत-सृजन की विशिष्ट परंपरा को आगे बढ़ाने वाली अग्रणी कलाकारों में माना जाता है। भरतनाट्यम की प्रस्तुति पश्चात शास्त्रीय गायन की सभा सजी। भोपाल की गुणी गायिका सुप्रदक्षिणा भट्ट ने अपने सुरों से शाम को सजाया। उन्होंने अपनी सुरमयी प्रस्तुति की शुरुआत राग यमन कल्याण से किया। इस राग की गरिमा और माधुर्य को स्वर देते हुए एकताल में निबद्ध बड़ा ख़याल “मेरा मन बाँध लीनो रे” एवं तीनताल में छोटा ख़याल “रंग दे रंग रेजवा” प्रस्तुत किया। उनकी गायकी में राग की शास्त्रीय गंभीरता और भावों की सहज अभिव्यक्ति श्रोताओं को एक विशिष्ट संगीतानुभूति प्रदान कर रही थी। इसके उपरांत ग्वालियर घराने की समृद्ध और विशिष्ट परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हुए तराना एवं तिरबट की प्रस्तुति दी। तिरबट की विशेषता यह है कि इसमें अर्थपूर्ण शब्दों के स्थान पर तबले और पखावज के बोलों की प्रधानता रहती है, जो लय और स्वर के अद्भुत समन्वय का सृजन करती है। इस क्रम में उन्होंने हमीर, केदार, बहार, दरबारी, अड़ाना और भोपाली जैसी विविध रागों की रंगत प्रस्तुत की, जिन्हें एकताल, तीनताल एवं रूपक ताल में संयोजित किया गया। अपनी प्रस्तुति का भावपूर्ण समापन अपने दादा एवं गुरु पंडित सज्जनलाल ब्रह्मभट्ट द्वारा रचित भजन “मोहन की राधा” से किया, जो भक्ति, माधुर्य और गुरु-परंपरा के प्रति उनकी श्रद्धा का सुंदर प्रतीक था। इस संगीत संध्या में उनके साथ हारमोनियम पर चैतन्य भट्ट एवं तबले पर रतलाम के युवा तबला वादक तल्लीन त्रिवेदी ने संगत दी। स्वर, लय और भाव के समन्वय से सुसज्जित यह प्रस्तुति भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा, सौंदर्य और आध्यात्मिक संवेदना का अनुपम उत्सव सिद्ध हुई। कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट नृत्य एवं गायन प्रस्तुतियों ने वातावरण को कला-साधना और सांस्कृतिक सौंदर्य से सराबोर कर दिया। विश्व संगीत दिवस पर आयोजित यह संध्या भारतीय शास्त्रीय कलाओं की समृद्ध विरासत, सृजनात्मकता और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक सार्थक पहल सिद्ध हुई।  

चीता परियोजना का जायजा लेने पहुंचीं राष्ट्रपति, चीता प्रदर्शिनी का भी किया अवलोकन

भोपाल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कूनो नेशनल उद्यान के दो दिवसीय प्रवास के दौरान रविवार को चीता कमांड एवं कंट्रोल सेंटर का अवलोकन किया। चीता कमांड एवं कण्ट्रोल सेंटर के अवलोकन के दौरान राष्ट्रपति मुर्मु को चीतों कि निगरानी और ट्रैकिंग की प्रक्रिया के संबंध में जानकारी प्रदान की गयी। राष्ट्रपति ने चीता कमांड एवं कंट्रोल सेंटर परिसर में चीता प्रोजेक्ट की अभी तक की प्रगति पर लगाई गई प्रदर्शिनी का अवलोकन किया। राष्ट्रपति मुर्मु को अवगत कराया गया कि वर्तमान में भारत में चीतों की संख्या 52 है, जिनमें से 49 चीते कूनो में मौजूद है, तीन चीते गाँधी सागर अभयारण्य मंदसौर भेजे गए है। राष्ट्रपति मुर्मु द्वारा इस दौरान चीतों के लिए की गई आवश्यक सुविधाओं के विषय में जानकारी ली गई। बताया गया कि हर 2 किलोमीटर पर जंगल में वाटर पिट बनाये गए हैँ जिनमें अवश्यकता अनुसार पानी भरवाया जाता है। इस दौरान उन्हें बोत्सवाना से लाये गए चीतों की गतिविधियों की भी जानकारी दी गयी। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति श्री मुर्मु द्वारा अपनी बोत्सवाना यात्रा के दौरान 8 चीते रिसीव किये गए थे जिन्हें कुनो लाया गया है। इस दौरान सीसीफ श्री उत्तम कुमार, कलेक्टर सुश्री शीला दाहिमा, डीएफओ श्री आर थिरूकुराल आदि मौजूद रहे। राष्ट्रपति मुर्मु की कूनो हेलीपैड पर हुई आगवानी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु अपने दो दिवसीय प्रवास पर रविवार को श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क पहुंचीं। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल भी साथ रहे। इस अवसर पर कूनो नेशनल पार्क स्थित हेलीपैड पर मिनिस्टर इन वेटिंग एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री राकेश शुक्ला ने आगवनी करते हुए पुष्प गुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया गया। इस दौरान सांसद श्री शिवमंगल सिंह तोमर, प्रमुख सचिव वन श्री संदीप यादव, पीसीसीएफ श्री शुभरंजन सेन, कलेक्टर सुश्री शीला दाहिमा, पुलिस अधीक्षक श्री सुधीर कुमार अग्रवाल द्वारा भी उनकी आगवनी करते हुए स्वागत किया गया। राष्ट्रपति मुर्मु कूनो नेशनल पार्क में रात्रि विश्राम करेंगी और भारत में चीतों के पुनर्स्थापन की इस महत्वपूर्ण परियोजना के संबंध में वन विभाग के अधिकारियों से चर्चा भी करेंगी। 

सारंगढ़ की सुनीता पटेल ऐसे बनीं ‘लखपति ड्रोन दीदी’

​रायपुर    ​ कहते हैं कि अगर हौसलों को सही तकनीक और अवसरों के पंख मिल जाएं, तो ग्रामीण परिवेश की साधारण सी दिखने वाली महिलाएं भी कामयाबी की नई उड़ान भर सकती हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के एक छोटे से गांव खोरीगांव की रहने वाली सुनीता पटेल की। सुनीता आज सिर्फ अपने घर की दहलीज तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे आसमान में ड्रोन उड़ाकर अपने खेतों को समृद्ध बना रही हैं और खुद 'लखपति दीदी' बनकर ग्रामीण सशक्तिकरण की नई मिसाल पेश कर रही हैं। ​शुरुआत एक सपने की, जिसने बदली जिंदगी     ​ इस बदलाव की नींव तब पड़ी जब 15 अगस्त 2023 को प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने "नमो ड्रोन दीदी" योजना की घोषणा की थी। इस योजना का मकसद देश की ग्रामीण महिलाओं को तकनीक से जोड़कर उनकी सालाना आय को 1 लाख रुपये से ऊपर ले जाना था। सुनीता पटेल ने इस सुनहरे मौके को हाथ से जाने नहीं दिया। ​दिसंबर 2023 में वे अपने सपनों की पोटली बांधकर 15 दिनों के कड़े प्रशिक्षण के लिए ग्वालियर गईं। वहां उन्होंने न सिर्फ ड्रोन उड़ाने की बारीकियां सीखीं, बल्कि खेतों में कीटनाशकों और नैनो उर्वरकों के सही इस्तेमाल का तकनीकी ज्ञान भी हासिल किया। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद जब उन्हें उर्वरक कंपनी 'इफको' (IFFCO) की ओर से कृषि ड्रोन मिला, तो मानो उनकी आजीविका को नए पंख मिल गए। ​खेतों में तकनीक की क्रांति और 2 लाख रुपए तक की आय      ​ साल 2024 से शुरू हुआ सुनीता का यह सफर आज 2026 में सफलता के शिखर पर है। सुनीता अब हर साल खेतों में दवा और खाद का छिड़काव करके 1 से 2 लाख रुपये की सम्मानजनक वार्षिक आय कमा रही हैं। सबसे खूबसूरत बात यह है कि सुनीता अपने काम को सिर्फ एक व्यवसाय नहीं मानतीं। ग्रामीण परिवेश से जुड़ी होने के कारण वे अमीर-गरीब का भेद किए बिना, पैसों की परवाह किए बगैर हर किसान के खेत में उतनी ही शिद्दत से काम करती हैं।  ​ शनिवार को सारंगढ़ मंडी प्रांगण में जब 'खेती बचाओं अभियान' और 'प्राकृतिक खेती कार्यशाला' का आयोजन हुआ, तो सुनीता के हुनर को देखने भारी भीड़ उमड़ी। वहां मौजूद प्रदेश के राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा के सामने जब सुनीता ने पानी से भरे भारी-भरकम ड्रोन को रिमोट के जरिए आसमान में उड़ाया और मैदान में छिड़काव का सजीव प्रदर्शन किया, तो पूरा प्रांगण तालियों से गूंज उठा। मंत्री जी ने भी उनके इस जज्बे और तकनीकी कुशलता की जमकर सराहना की। ​कैसे काम करती है यह योजना और आप कैसे उठा सकते हैं लाभ?      ​ सुनीता की यह सफलता दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) की ताकत को दर्शाती है। इस योजना के तहत देश की सात प्रमुख उर्वरक कंपनियां महिलाओं को ट्रेनिंग और ड्रोन सप्लाई में मदद कर रही हैं।     ​ अगर गांव की कोई भी अन्य महिला सुनीता की तरह 'ड्रोन दीदी' बनना चाहती है, तो उसकी प्रक्रिया बेहद सरल है। इसके लिए महिला की उम्र 18 वर्ष से अधिक हो, वह कम से कम 10वीं पास हो और किसी पंजीकृत स्वयं सहायता समूह (SHG) की सदस्य हो। चयन होने के बाद नजदीकी रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (RPTO) में 15 दिनों की मुफ्त पायलट और असिस्टेंट ट्रेनिंग दी जाती है, जिसके बाद DGCA द्वारा आधिकारिक 'रिमोट पायलट सर्टिफिकेट' मिलता है। ड्रोन खरीदने के लिए सरकार की तरफ से 80 प्रतिशत या अधिकतम 8 लाख रुपये तक की भारी सब्सिडी दी जाती है। बाकी बची रकम पर भी एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) के जरिए महज 3 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर लोन मिल जाता है। ​ ​प्रेरणा की नई मिसाल  ​आज सुनीता पटेल सिर्फ अपने गांव की नहीं, बल्कि पूरे जिले और पड़ोसी राज्यों की महिलाओं के लिए एक रोल मॉडल बन चुकी हैं। शासकीय कार्यक्रमों में जब वे अपने ड्रोन के साथ पहुंचती हैं, तो उन्हें देखकर सैकड़ों अन्य ग्रामीण महिलाओं की आंखों में भी आत्मनिर्भर बनने के सपने तैरने लगते हैं। सुनीता ने साबित कर दिया है कि भारत के गांवों की तरक्की का रास्ता अब खेतों से होते हुए आसमान की तरफ जाता है। ​यदि योजना के बारे में अधिक जानना चाहते हैं, तो इसकी आधिकारिक वेबसाइट https://namodronedidi.da.gov.in/ पर जाकर जानकारी ले सकते हैं।

सीफूड प्रोसेसिंग यूनिट में गैस लीक, 65 से ज्यादा कर्मचारी प्रभावित

तमिलनाडु तमिलनाडु के तिरुवल्लुर जिले में रविवार को एक बड़ा हादसा हो गया. पेरियापालयम के पास कन्निगापेर गांव स्थित 'सेंट पीटर्स पॉल सीफ़ूड प्रोसेसिंग एंड एक्सपोर्ट कंपनी' में अचानक अमोनिया गैस का रिसाव हो गया. गैस फैलते ही फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी मच गई और कर्मचारी अपनी जान बचाने के लिए बाहर की ओर भागने लगे. इस हादसे में 65 से ज्यादा कर्मचारी गैस की चपेट में आ गए, जिनमें इलाज के दौरान दो लोगों की मौत हो गई है. वहीं, उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों से आए प्रवासी मजदूर भी शामिल हैं. गैस का असर होते ही कई कर्मचारियों को सांस लेने में तकलीफ, चक्कर और बेचैनी की शिकायत होने लगी. इसके बाद पर फैक्ट्री प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन ने तत्काल राहत कार्य शुरू किया. प्रभावित कर्मचारियों को अलग-अलग वाहनों के जरिए नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया गया. अस्पतालों में भर्ती किए गए कर्मचारी प्रभावित कर्मचारियों को इलाज के लिए तुरंत गाड़ियों से पास के वेल्स प्राइवेट मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल और वेंकटेश्वर प्राइवेट मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल ले जाया गया में भर्ती कराया गया. डॉक्टरों की टीम ने सभी मरीजों की तत्काल जांच शुरू की और इलाज किया. प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, 6 कर्मचारी गैस के प्रभाव से बेहोश हो गए. उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है और डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं. वहीं, दो लोगों के नाक से खून आने की भी जानकारी है, जिससे आसपास के इलाके में दहशत का माहौल बन गया है. गांव के लोगों और फैक्ट्री में मौजूद अन्य कर्मचारियों में भी इस घटना के बाद भय का माहौल है. बड़ी संख्या में लोग अस्पतालों और फैक्ट्री परिसर के बाहर जमा हो गए हैं. तीन गंभीर मरीजों को किया गया रेफर घटना की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों की विशेष टीम ने गंभीर रूप से प्रभावित मरीजों का प्राथमिक उपचार किया. इसके बाद तीन गंभीर मरीजों को एंबुलेंस के जरिए चेन्नई स्थित स्टेनली गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल पहुंचाया गया. बता दें कि अमोनिया गैस का इस्तेमाल आमतौर पर कोल्ड स्टोरेज और सीफूड प्रोसेसिंग यूनिट्स में रेफ्रिजरेशन सिस्टम के लिए किया जाता है. वहीं, राज्य के मंत्री कुमार ने घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि हादसे में 60 महिलाएं और 4 पुरुष प्रभावित हुए हैं. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने मृतकों के प्रति गहरा शोक व्यक्त किया है और अधिकारियों को इस मामले में सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं. FIR दर्ज, दो फैक्ट्री मालिक हिरासत में हादसे के बाद पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है. शुरुआती कार्रवाई के तहत फैक्ट्री के दो मालिकों को हिरासत में लिया गया है. उनसे पूछताछ की जा रही है और हादसे के कारणों की जांच जारी है. वहीं, घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है. समिति को 24 घंटे के भीतर अंतरिम रिपोर्ट और तीन दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं.  

28 लाख रुपये की विकास परियोजनाएं जनता को समर्पित, आमाकोनी पहुंचे मंत्री टंकराम वर्मा

​रायपुर         राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा अपने जिला प्रवास के दौरान रविवार को तहसील सुहेला के ग्राम आमाकोनी पहुंचे। इस दौरान उन्होंने ग्रामवासियों को बड़ी सौगात देते हुए 10 लाख रुपए की लागत से नवनिर्मित सामुदायिक भवन तथा 18 लाख रुपए की लागत से तैयार प्रार्थना शेड एवं अहाता निर्माण का  लोकार्पण किया।     ​ अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर क्षेत्रवासियों को शुभकामनाएं देते हुए राजस्व मंत्री  वर्मा ने कहा कि सुहेला क्षेत्र में अब विकास के कार्य लगातार गति पकड़ रहे हैं, जिससे यह क्षेत्र प्रगति के नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि क्षेत्र की जो भी समस्याएं हैं, उन सभी का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित समाधान किया जाएगा। ​समग्र विकास के लिए सरकार कृत संकल्पित     राजस्व मंत्री ने राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व में हमारी सरकार प्रदेश के चहुंमुखी विकास के लिए पूरी तरह कृत संकल्पित है। हमने जनता से की गई 'मोदी की गारंटी' के सभी प्रमुख वादों को पूरा कर दिया है।     ​3 से 4 वर्षों में हर परिवार को मिलेगा पक्का आशियाना    ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरोसा देते हुए  वर्मा ने बताया कि वर्तमान में आमाकोनी ग्राम में 51 प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण तेजी से चल रहा है और आने वाले समय में और भी आवास स्वीकृत किए जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि अगले 3 से 4 साल के भीतर क्षेत्र में कोई भी घर कच्चा नहीं रहेगा। सरकार हर घर में शुद्ध पेयजल, बिजली और शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित कर रही है। पात्र लोगों को जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिलने से हर परिवार में खुशहाली आएगी। उन्होंने ग्रामीणों से आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे के साथ रहकर गांव के विकास में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।      लोकार्पण समारोह के इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य,जनपद सदस्य, सरपंच  सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित थे। ​

उसायनी में मुख्यमंत्री योगी का दौरा, 650 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास

 फिरोजाबाद  टूंडला के गांव उसायनी में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के 568 आवासों की चाबी सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ सोमवार को सुबह 11.15 बजे लाभार्थियों को सौंपेगे। इस दौरान वह 650 करोड़ से अधिक के कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण करेंगे। उनके आगमन को लेकर हेलीपैड के साथ ही पंडाल बनाने का काम देर शाम तक चलता रहा। डीएम ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण कर व्यवस्थाएं देखीं। केंद्र सरकार ने शहरी बेघर लोगों के लिए मार्च-2019 पीएम शहरी आवास योजना का शुभारंभ किया था। इसके तहत फिरोजाबाद-शिकोहाबाद विकास प्राधिकरण (विप्रा) ने उसायनी के निकट आवासीय कॉलोनी बनाई गई है। काम पूरा होने के बाद भी लोकार्पण न होने से लाभार्थियों को अब तक कब्जा मिलने की कार्रवाई नहीं हो सकी है। इस मामले में विप्रा उपाध्यक्ष की ओर शासन को निरंतर पत्राचार किए जा रहे थे। उसायनी में होगा कार्यक्रम, 568 पीएम आवासों की लाभार्थियों को सौंपेंगे चाबी सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गांव उसायनी पहुंचकर इसका लोकार्पण करने के साथ पात्र लाभार्थियों को आवासों की चाबी सौंपेगे। इसके साथ टूंडला और शिकोहाबाद विधानसभा क्षेत्रों के अन्य विकास कार्यों का लोकार्पण, शिलान्यास कर जनसभा को भी संबोधित करेंगे। उनके कार्यक्रम को लेकर शनिवार से ही हेलीपैड के साथ वाटर प्रूफ पंडाल तैयार कराने काम शुरू हो गया है। वाहनों की पार्किंग के साथ ही आवासों की रंगाई पुताई का काम भी किया जा रहा है। अधूरे पड़े पार्क को भी ठीक कराया जा रहा है। नगर निगम के 54.12 करोड़ के प्रोजेक्ट का होगा लोकार्पण और शिलान्यास मेयर कामिनी राठौर ने बताया कि मुख्यमंत्री के हाथों नगर निगम के 54.12 करोड़ की प्रोजेक्ट का लोकार्पण और शिलान्यास कराया जाएगा। इसमें स्मार्ट जोनल कार्यालय, सीनियर सिटीजन केयर सेंटर, ब्रज थीम और एबीसी सेंटर, गैस संचालित शवदाह गृह, डिजिटल लाइब्रेरी, वेस्ट टू वंडर पार्क, 18 पार्कों में ओपन जिम, स्मार्ट क्लासेज, वर्कशाप का निर्माण व मलिन बस्तियों में विकास कार्य शामिल हैं। एसआईआर में 100 से अधिक फॉर्म भरवाने वाले कार्यकर्ताओं से मिलेंगे मुख्यमंत्री जिलाध्यक्ष उदय प्रताप सिंह ने बताया कि जिले में एसआईआर कार्य में 100 से अधिक फार्म भरवाने वाले कार्यकर्ताओं से मुख्यमंत्री ने मिलने की घोषणा की थी। सभी को कार्यक्रम स्थल पर ही मुख्यमंत्री से मिलवाया जाएगा। इसके लिए अलग से पंडाल बनाया जाएगा।  

नौ चौकी पाल पर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन, जनप्रतिनिधियों और हजारों नागरिकों की भागीदारी

जयपुर  अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन एवं आयुर्वेद विभाग के संयुक्त तत्वावधान में जिला स्तरीय योगाभ्यास कार्यक्रम ऐतिहासिक पर्यटन स्थल नौ चौकी पाल पर उत्साहपूर्वक आयोजित किया गया। कार्यक्रम में आमजन की उल्लेखनीय सहभागिता देखने को मिली तथा 2390 योग अभ्यर्थियों ने सामूहिक योगाभ्यास में भाग लेकर योग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। जिलेभर में संगम पोर्टल पर पंजीकृत 2909 स्थलों पर आयोजित योग कार्यक्रमों में लगभग 86 हजार 600 लोगों ने सहभागिता कर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को जनआंदोलन का स्वरूप प्रदान किया। कार्यक्रम में राजसमंद सांसद महिमा कुमारी मेवाड़, राजसमंद विधायक दीप्ति किरण माहेश्वरी, जिला कलक्टर अरुण कुमार हसीजा, पुलिस अधीक्षक हेमंत कलाल, एडीएम नरेश बुनकर, जिला परिषद सीईओ बृजमोहन बैरवा सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, कर्मचारी, विद्यार्थी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात प्रधानमंत्री के उद्बोधन का सीधा प्रसारण टेलीकास्ट के माध्यम से उपस्थित जनसमूह को दिखाया गया। निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार योग विशेषज्ञ शैलेश चौरड़िया एवं योग चिकित्सा प्रभारी डॉ. रामकन्या मेनारिया के निर्देशन में मंच प्रदर्शन के माध्यम से योगाभ्यास कराया गया। सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ ने अपने संबोधन में कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का उद्देश्य योग के माध्यम से स्वस्थ, निरोग एवं संतुलित जीवनशैली को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मानसिक शांति, आत्मविश्वास, एकाग्रता एवं सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने का प्रभावी साधन भी है। उन्होंने सभी नागरिकों से योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। विधायक दीप्ति किरण माहेश्वरी ने कहा कि योग भारत की प्राचीन एवं अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर है, जो स्वस्थ एवं संतुलित जीवन का आधार प्रदान करती है। उन्होंने आमजन से आह्वान किया कि वे योग को केवल एक दिवस के आयोजन तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने दैनिक जीवन का नियमित हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि नियमित योगाभ्यास से शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है, मानसिक तनाव दूर होता है तथा व्यक्ति में सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार होता है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं, महिलाओं एवं विद्यार्थियों से प्रतिदिन योग करने और अपने परिवार तथा समाज को भी योग के प्रति जागरूक करने का आग्रह किया। योगाभ्यास के उपरांत जिला कलक्टर श्री अरुण कुमार हसीजा ने उपस्थित योग साधकों को योग संकल्प दिलाया तथा लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मतदान शपथ भी दिलाई। कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य जागरूकता एवं जनभागीदारी का वातावरण बना रहा। उपनिदेशक आयुर्वेद विभाग डॉ. रमेशचंद्र मीणा ने बताया कि जिले के विभिन्न पर्यटन स्थलों, ब्लॉक मुख्यालयों, ग्राम पंचायतों तथा आयुष्मान आरोग्य मंदिरों सहित संगम पोर्टल पर पंजीकृत 2909 स्थानों पर योगाभ्यास कार्यक्रम आयोजित किए गए।  

फतेहाबाद के रतिया शहर के लिए 1667 हेक्टेयर में विकास योजना, आबादी 2 लाख पहुंचने का अनुमान

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने फतेहाबाद जिले के रतिया शहर के लिए वर्ष 2041 तक का नया विकास खाका जारी कर दिया है। प्रस्तावित प्रारूप विकास योजना के तहत रतिया को आने वाले वर्षों की आबादी, आर्थिक गतिविधियों और शहरी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नए स्वरूप में विकसित करने की तैयारी की गई है। सरकार का अनुमान है कि वर्ष 2041 तक रतिया की आबादी दो लाख के करीब पहुंच सकती है, जिसके अनुरूप शहर के विस्तार, सड़क नेटवर्क, सार्वजनिक सुविधाओं और औद्योगिक विकास की रूपरेखा तैयार की गई है। नोटिफिकेशन के अनुसार, इस योजना पर लोगों से आपत्तियां और सुझाव भी मांगे गए हैं। तय अवधि के भीतर प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद अंतिम स्वरूप तय किया जाएगा। 2011 की तुलना में कई गुना आबादी का अनुमान योजना दस्तावेज के अनुसार वर्ष 2011 में रतिया की आबादी 37,152 दर्ज की गई थी। प्रक्षेपण के आधार पर 2021 में यह 65 हजार से अधिक और वर्ष 2041 तक करीब 2.02 लाख पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। इसी संभावित दबाव को देखते हुए विकास योजना तैयार की गई है। सरकार का मानना है कि कृषि आधारित गतिविधियों, व्यापार और बढ़ती शहरी जरूरतों के कारण आने वाले वर्षों में रतिया का स्वरूप तेजी से बदलेगा। 1667 हेक्टेयर क्षेत्र के हिसाब से होगी प्लानिंग प्रारूप विकास योजना में शहर के लिए कुल 1667 हेक्टेयर क्षेत्र का प्रस्ताव रखा गया है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा आवासीय उपयोग के लिए रखा गया है। सरकार ने 634 हेक्टेयर आवासीय क्षेत्र के लिए, 116 हेक्टेयर वाणिज्यिक, 296 हेक्टेयर औद्योगिक, 193 हेक्टेयर परिवहन व संचार, 122 हेक्टेयर सार्वजनिक उपयोगिताएं, 101 हेक्टेयर सार्वजनिक एवं अर्ध-सार्वजनिक उपयोग तथा 205 हेक्टेयर भूमि खुले स्थान और हरित क्षेत्र के लिए प्रस्तावित की गई है। योजना में सड़क ढांचे को भी विस्तार देने का प्रस्ताव है। शहर के विभिन्न सेक्टरों को जोड़ने के लिए नई परिधीय सड़कें और सेक्टर सड़कें प्रस्तावित की गई हैं। प्रमुख सड़कों के साथ हरित पट्टी और भविष्य की यातायात जरूरतों को ध्यान में रखते हुए चौड़ाई का भी प्रावधान किया गया है। योजना में परिवहन और संचार उपयोग के लिए अलग क्षेत्र आरक्षित किया गया है ताकि बढ़ती आबादी के साथ ट्रैफिक और आवाजाही की चुनौतियों को नियंत्रित किया जा सके। पानी, बिजली और सार्वजनिक सेवाओं का भी रोडमैप दस्तावेज में जल आपूर्ति, सीवरेज, ग्रिड सब-स्टेशन और अन्य सार्वजनिक उपयोगिताओं के लिए भी अलग क्षेत्र प्रस्तावित किए गए हैं। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए जलापूर्ति और विद्युत ढांचे को मजबूत करने की दिशा में स्थान आरक्षित किए गए हैं। इसके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य और सार्वजनिक संस्थानों के लिए भी अलग प्रावधान किए गए हैं ताकि शहर का विकास केवल आबादी बढ़ाने तक सीमित न रहे बल्कि सुविधाओं के साथ संतुलित ढंग से आगे बढ़ सके। लोगों से मांगे गए सुझाव सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह प्रारूप योजना है और अंतिम अधिसूचना से पहले नागरिक, संस्थाएं और अन्य हितधारक अपने सुझाव और आपत्तियां दे सकेंगे। इन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत परखा जाएगा। रतिया के लिए जारी यह विकास खाका आने वाले डेढ़ दशक की शहरी दिशा तय करेगा और इससे शहर के नियोजित विस्तार, निवेश तथा बुनियादी ढांचे को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।  

यूक्रेन-पोलैंड तनाव बढ़ा: राष्ट्रपति जेलेंस्की ने डाक से वापस भेजा सम्मान

कीव यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने पोलैंड का सर्वोच्च राजकीय सम्मान लौटा दिया है। जेलेंस्की ने यह कदम जब पोलैंड के राष्ट्रपति कैरोल नवरोकी ने कह कि वह यूक्रेनी नेता से यह सम्मान वापस ले रहे हैं। इसने दोनों देशों के बीच द्वितीय विश्वयुद्ध के समय के विवाद को फिर से खड़ा कर दिया है। जेलेंस्की ने इस कदम के बारे में जानकारी देते हुए सोशल मीडिया पर बताया कि उन्होंने यह सम्मान पोलैंड के राष्ट्रपति के पास वापस भेज दिया है। आज मैंने यह सम्मान पोलैंड के राष्ट्रपति को वापस भेज दिया है। मेरा मानना है कि भविष्य उस सम्मान की पुष्टि करेगा जिसके यूक्रेन के लोग हकदार हैं। जेलेंस्की ने डाक से वापस भेजा सम्मान एक्स पर पोस्ट में जेलेंस्की ने कहा की यूक्रेनी लोगों का मानना है कि यह सम्मान यूक्रेन के लोगों और उनकी सेना के लिए है। इस संदेश के साथ जेलेंस्की ने पोलैंड के सम्मान और डाक रसीद की तस्वीरें भी शेयर की हैं। इससे पता चलता है कि इसे पोलैंड के राष्ट्रपति कार्यालय को भेजा जा रहा है। यूक्रेन के तीन अधिकारियों ने भी राष्ट्रपति के साथ एकजुटता दिखाते हुए पोलैंड से मिले सम्मान वापस करने का फैसला किया है। यूक्रेनी सेना की यूनिट पर विवाद साल 2023 में पोलैंड के तत्कालीन राष्ट्रपति आंद्रेज डूडा ने जेलेंस्की को पोलिश ऑर्डर ऑफ द वॉइट ईगल से सम्मानित किया था। लेकिन पिछले महीने यूक्रेन के एक कदम से पोलैंड नाराज हो गया। कीव ने यूक्रेनी सेना की एक यूनिट यूक्रेनी इंसर्जेंट आर्मी (UPA) के नाम पर रखा। UPA द्वितीय विश्व यु्द्ध के दौरान लड़ने वाला एक विवादास्पद समूह था, जो 1940 के 1950 के दशक में सक्रिय था। UPA पर नरसंहार का आरोप यूक्रेन में कई लोग UPA के सदस्यों को नायक मानते हैं। उनका मानना है कि इन लोगों ने सोवियत रेड आर्मी, नाजी जर्मनी और पोलिश अधिकारियों के खिलाफ यूक्रेन की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी थी। इस समूह का लाल और काले रंग का झंडा आज भी अक्सर यूक्रेनी सैनिक मोर्चे पर इस्तेमाल करते हैं। पोलैंड का आरोप है कि UPA ने 1943-45 के दौरान वोल्हिनिया में लगभग 1 लाख पोलिश लोगों को नरसंहार किया था। वोल्हिनिया अब यूक्रेन का इलाका है, जिसे वोलिन नाम से जाना जाता है।