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आवास मेला-2025 के लक्की ड्रॉ का सफल आयोजन, विजेताओं की हुई घोषणा

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय आवास मेला-2025 तथा इसके उपरांत 31 दिसम्बर 2025 तक मंडल की विभिन्न आवासीय एवं व्यावसायिक योजनाओं में पंजीयन कराकर भवन आबंटन प्राप्त करने वाले पात्र हितग्राहियों के लिए विशेष लक्की ड्रॉ का आयोजन आज दिनांक 22 जून 2026 (सोमवार) को अपराह्न 3:00 बजे मंडल मुख्यालय, सेक्टर-19, नवा रायपुर अटल नगर में हितग्राहियों एवं पत्रकारों के उपस्थिति में किया गया। लक्की ड्रॉ कार्यक्रम छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंह देव तथा आयुक्त अवनीश शरण की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित किया गया। ड्रॉ की संपूर्ण प्रक्रिया लॉटरी पद्धति के माध्यम से पारदर्शी एवं निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराई गई, जिसका अवलोकन उपस्थित हितग्राहियों एवं अधिकारियों द्वारा किया गया। आवास मेले तथा निर्धारित अवधि में पंजीयन कराने वाले पात्र हितग्राहियों के लिए आयोजित इस विशेष लक्की ड्रॉ में मारुति स्विफ्ट कार, होंडा शाइन मोटरसाइकिल, होंडा एक्टिवा स्कूटी, वाशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर (फ्रिज), एलईडी टेलीविजन सहित अन्य आकर्षक उपहारों के लिए विजेताओं का चयन किया गया। विशेष लक्की ड्रॉ के अंतर्गत बम्पर उपहार "मारुति स्विफ्ट कार" सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की पूजा बरेठ ने जीती। उन्होंने अटल विहार योजना, दानसरा में एल.आई.जी. भवन क्रमांक-32 बुक कराया था। होंडा शाइन मोटरसाइकिल कोरबा जिले के खरमोरा निवासी रवि प्रकाश राठौर को मिली। उन्होंने अटल विहार योजना अंतर्गत गोकुल नगर, खरमोरा, कोरबा में कमर्शियल-कम-रेजिडेंशियल फ्लैट की दुकान क्रमांक-06 क्रय की है। होंडा एक्टिवा स्कूटी भी खरमोरा, कोरबा के कृष्ण कुमार को प्राप्त हुई। उन्होंने अटल विहार योजना अंतर्गत गोकुल नगर, खरमोरा, कोरबा में एम.आई.जी. फ्लैट ब्लॉक क्रमांक-1, तृतीय तल, फ्लैट क्रमांक एफ-302 बुक किया है। रेफ्रिजरेटर (फ्रिज) की प्रथम विजेता श्रीमती सुषमा गुप्ता रहीं, जिन्होंने अटल विहार योजना, जगदीशपुर में ई.डब्ल्यू.एस. मकान बुक किया है। दूसरा रेफ्रिजरेटर अरुण कुमार प्रधान ने जीता, जिन्होंने वन टाइम सेटलमेंट योजना-2 अंतर्गत अभिलाषा परिसर में एच.आई.जी. फ्लैट बी-सी-604 बुक कराया था। वाशिंग मशीन के विजेताओं में ओम सोनी शामिल हैं, जिन्होंने अटल विहार योजना, बोदरी (बिलासपुर) में ई.डब्ल्यू.एस. मकान क्रमांक-414 बुक किया है। दूसरी वाशिंग मशीन कोहका, तिल्दा की रेणुका घृतलहरे ने जीती। उन्होंने अटल विहार योजना, कोहका-तिल्दा में एरिका पाम एल.आई.जी. स्वतंत्र मकान क्रमांक-126 क्रय किया है। एलईडी टेलीविजन के विजेताओं में गजेन्द्र कुमार यादव शामिल हैं, जिन्होंने पुलगांव फेस-2, दुर्ग में एच.आई.जी. डीएक्स-34 मकान बुक कराया है। दूसरे विजेता संजीत कुमार साह रहे, जिन्होंने सामान्य आवास योजना, सेक्टर-12, नवा रायपुर अटल नगर में जूनियर एम.आई.जी.-1 मकान क्रमांक-555 बुक कराया है। उल्लेखनीय है कि राज्य स्तरीय आवास मेले के दौरान भी प्रतिदिन कूपन के माध्यम से भाग लेने वाले हितग्राहियों के लिए लक्की ड्रॉ आयोजित कर आकर्षक उपहार वितरित किए गए थे। प्रथम दिवस (23 नवम्बर 2025) को हिया साहू ने एलईडी टीवी, गौरव सौंपिपरे ने वाशिंग मशीन तथा राजेन्द्र धृतलहरे ने रेफ्रिजरेटर (फ्रिज) जीता था। वहीं आर.के. साहू, प्रदीप चन्द्रवंशी एवं आनंद जावुलकर ने मिक्सर ग्राइंडर जीता था। इसके अतिरिक्त पांच अन्य विजेताओं ने स्टीम आयरन प्राप्त किया था। द्वितीय दिवस (24 नवम्बर 2025) को जीतेन्द्र कुमार साहू ने एलईडी टीवी, प्रिया कर्मकार ने वाशिंग मशीन तथा विशाल टीकम ने रेफ्रिजरेटर (फ्रिज) जीता था। वहीं त्रिलोचन पांडेय, भुनेश्वरी वर्मा एवं तुलेश्वर भोड़कर ने मिक्सर ग्राइंडर जीता था। इसके अतिरिक्त पांच अन्य विजेताओं ने स्टीम आयरन प्राप्त किया था। तृतीय दिवस (25 नवम्बर 2025) को प्रदीप वर्मा ने एलईडी टीवी, संजय शुक्ला ने वाशिंग मशीन तथा राजा बंजारे ने रेफ्रिजरेटर (फ्रिज) जीता था। वहीं उन्नति पाल, नीलू साहू एवं पवन रेड्डी ने मिक्सर ग्राइंडर जीता था। इसके अतिरिक्त पांच अन्य विजेताओं ने स्टीम आयरन प्राप्त किया था। विशेष लक्की ड्रॉ बम्पर उपहार के चयनित विजेताओं को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उपहार प्रदान किए जाएंगे। उपहार वितरण समारोह 25 जून 2026 को सर्किट हाउस, नवा रायपुर अटल नगर में आयोजित किया जाएगा, जहां विजेताओं को सम्मानपूर्वक उनके उपहार प्रदान किए जाएंगे। मंडल अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने सभी विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल राज्य के नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण आवास उपलब्ध कराने तथा हितग्राही-केंद्रित योजनाओं के माध्यम से उन्हें अधिकतम लाभ पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। आयुक्त अवनीश शरण ने सभी हितग्राहियों के प्रति आभार व्यक्त किया तथा कार्यक्रम के सफल आयोजन पर मंडल के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई दी । साथ ही उन्होंने भविष्य में भी मंडल की योजनाओं में इसी प्रकार सहभागिता बनाए रखने की अपील सभी हितग्राहियों से की।

पश्चिमी सिंहभूम में वोटर लिस्ट अपडेट को लेकर विशेष पुनरीक्षण अभियान युद्धस्तर पर शुरू

पश्चिमी सिंहभूम  झारखंड में मतदाता सूची (Voter List) को पूरी तरह त्रुटिहीन, पारदर्शी और अपडेटेड बनाने के लिए ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) अभियान की तैयारियां युद्धस्तर पर शुरू हो गई हैं. इसी सिलसिले में निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी-सह-अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) श्रुति राजलक्ष्मी ने सोमवार को कराईकेला में बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) के साथ एक हाई-लेवल बैठक की. बैठक में उन्होंने एसआईआर (SIR) प्रक्रिया की बारीकियों को साझा करते हुए सख्त निर्देश दिए कि इस बार लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होगी और हर पात्र नागरिक का नाम वोटर लिस्ट में जोड़ना सुनिश्चित किया जाएगा. घर-घर दस्तक देंगे बीएलओ, दरवाजे पर चिपकेगा स्टिकर एसडीओ श्रुति राजलक्ष्मी ने साफ शब्दों में कहा कि इस पूरे महा-अभियान की सबसे मजबूत कड़ी बीएलओ की ‘घर-घर दस्तक’ होगी. इस बार प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी बनाया जा रहा है. इसके मुताबिक इन्यूमरेशन फॉर्म का वितरण बीएलओ हर घर जाकर फॉर्म बांटेंगे. मतदाता उसे मौके पर ही भरवाकर वापस कलेक्ट करेंगे. पहचान के तौर पर हर घर के बाहर एक विशेष स्टिकर चिपकाया जाएगा. इस स्टिकर पर न सिर्फ मकान संख्या दर्ज होगी, बल्कि संबंधित बीएलओ का नाम और उनका मोबाइल नंबर भी साफ-साफ लिखा होगा. एसडीओ ने बताया कि चुनाव आयोग की इस अनूठी पहल का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि आम जनता को वोटर कार्ड या लिस्ट से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. लोग अपने घर के बाहर लगे स्टिकर से नंबर देखकर सीधे अपने बीएलओ से संपर्क कर सकेंगे. पारदर्शिता से ही बनेगी सटीक सूची: बीडीओ बैठक में मौजूद प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) भीषम कुमार ने भी बीएलओ को दो टूक लहजे में अपनी कार्यशैली सुधारने और पूरी जिम्मेदारी से काम करने की हिदायत दी. उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को सटीक और अद्यतन (Updated) बनाने का पूरा दारोमदार बीएलओ के कंधों पर है. राज्य स्तर पर पिछले गहन पुनरीक्षण की सूची से मैपिंग का काम शुरू हो चुका है, इसलिए फील्ड वर्क में किसी भी तरह की गड़बड़ी तुरंत पकड़ में आ जाएगी. इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में बीडीओ भीषम कुमार के अलावा प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी सदानंद होता, कृषि पदाधिकारी विजय सिंह जोंकों सहित बंदगांव प्रखंड क्षेत्र के बड़ी संख्या में बीएलओ और निर्वाचन कर्मी मुख्य रूप से उपस्थित थे.

अमेरिका को चीन का झटका, 46 अमेरिकी कंपनियों को सरकारी खरीद सूची से किया बाहर

बीजिंग  चीन ने 46 अमेरिकी कंपनियों से कोई भी उत्पाद खरीदने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। चीनी वित्त मंत्रालय ने सोमवार को इस आशय की सूची जारी की है। इन कंपनियों में लॉकहीड मार्टिन कॉरपोरेशन भी शामिल है। मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि लागू कानूनों और नियमों के अनुसार, सरकारी खरीद गतिविधियों के दायरे में 46 अमेरिकी कंपनियों के खिलाफ प्रासंगिक कदम उठाने का निर्णय लिया गया है।   चीनी कंपनियों को इन 46 अमेरिकी कंपनियों में बने उत्पादों को खरीदने से रोक दिया गया है, हालांकि चीन में काम कर रहे अमेरिकी निवेश वाले उद्यमों को इससे छूट दी गयी है। चीन ने लॉकहीड मार्टिन पर प्रतिबंध लगाकर एक तरह से अमेरिका को भी संकेत दिया है कि वह अपने मामले में किसी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेगी। गौरतलब है कि लॉकहीड मार्टिन सैन्य विमान और उन्नत तकनीकी हथियारों की दुनिया की सबसे बड़ी निर्माता कंपनी है और यह कंपनी अमेरिकी सरकार के जरिए ताइवान को सबसे ज्यादा हथियारों और सैन्य उपकरणों की आपूर्ति करती है, जबकि चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है।

‘मेडल की खान’ बने हरियाणा के अखाड़े, यहां तैयार हो रहे देश के अगले चैंपियन

झज्जर. हर साल 23 जून को जब पूरी दुनिया अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक दिवस मनाती है, तो झज्जर जिले में इस दिन के मायने कुछ अलग ही नजर आते हैं। झज्जर की हवाओं में केवल फसलों की महक नहीं, बल्कि अखाड़ों की मिट्टी और पसीने की वह सोंधी खुशबू भी घुली है, जिसने देश को कई ओलिंपिक पदक विजेता दिए हैं। झज्जर जिला हरियाणा में कुश्ती के सबसे बड़े केंद्रों में से एक है। जिले में 50 से अधिक निजी और पंजीकृत अखाड़े संचालित हो रहे हैं, जहां पर वर्तमान में 3,000 से अधिक युवा पहलवान सुबह और शाम के सत्रों में कड़ा अभ्यास करते हैं। झज्जर के छारा, खुड्डन, बिरोहड़ और गोरिया जैसे गांवों ने देश को ऐसे नायाब हीरे दिए हैं। छारा गांव की बात करें तो अकेले इस गांव में 5 सक्रिय अखाड़े हैं। यहां का ''लाला दीवान चंद माडर्न कुश्ती एवं योग केंद्र'' देश भर में अपनी एक अलग पहचान रखता है, जिसने बजरंग पूनिया और दीपक पूनिया जैसे अंतरराष्ट्रीय पहलवान देश को दिए हैं। इन अखाड़ों में हरियाणा के ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र तक के युवा आकर ओलंपिक पदक जीतने का सपना संजोए मिट्टी और मैट पर खुद को तपा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकने वाले सितारों की गौरवगाथा – मनु भाकर: निशानेबाजी की दुनिया में रचा इतिहास गांव: गोरिया, जिला झज्जर खेल: निशानेबाजी (10 मीटर एयर पिस्टल) प्रमुख उपलब्धि:  पेरिस ओलिंपिक 2024 में दो कांस्य पदक (एकल और मिश्रित टीम) जीतकर एक ही ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय बनीं। सफलता की कहानी: झज्जर के गोरिया गांव में जन्मी मनु भाकर की कहानी असाधारण एकाग्रता की मिसाल है। उनके पिता राम किशन भाकर मर्चेंट नेवी में चीफ इंजीनियर हैं, जिन्होंने मनु की प्रतिभा को पहचाना और उनके खेल के लिए शुरुआती निवेश किया। मनु ने निशानेबाजी से पहले कराटे, स्केटिंग, टेनिस और मुक्केबाजी में भी हाथ आजमाया था, लेकिन 14 साल की उम्र में उन्होंने पूरी तरह शूटिंग को अपना लिया। टोक्यो ओलिंपिक में पिस्टल खराब होने के कारण लगे बड़े झटके के बाद मनु टूटी नहीं, बल्कि अपने गुरु जसपाल राणा के मार्गदर्शन में रोजाना 12 से 16 घंटे अभ्यास किया। कड़ी तपस्या का परिणाम रहा कि पेरिस के मंच पर उन्होंने दो बार तिरंगा ऊंचा कर झज्जर और पूरे देश का मस्तक गर्व से ऊंचा कर दिया। अमन सहरावत: दुखों के पहाड़ को चीरकर बने सबसे युवा पदक विजेता गांव: बिरोहड़, जिला झज्जर खेल: फ्रीस्टाइल कुश्ती (57 किलोग्राम भार वर्ग) प्रमुख उपलब्धि: पेरिस ओलिंपिक 2024 में कांस्य पदक विजेता, व्यक्तिगत ओलिंपिक पदक जीतने वाले भारत के सबसे युवा खिलाड़ी (21 वर्ष 24 दिन)। सफलता की कहानी: अमन सहरावत का जीवन संघर्ष किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। मात्र 11 वर्ष की अल्पायु में अमन ने अपने माता-पिता दोनों को खो दिया था। इस भयानक पारिवारिक त्रासदी के बाद वह गहरे अवसाद और तनाव से जूझे, लेकिन उनके दादा मांगेराम और चाचाओं ने उन्हें संभाला। अमन ने दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में कोच ललित कुमार की देखरेख में अपनी कुश्ती को धार दी। गति और आक्रामक खेल शैली के धनी अमन ने साल 2022 में अंडर-23 विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतकर इतिहास रचा था। ओलिंपिक में देश के शीर्ष पहलवान रवि दहिया को ट्रायल्स में हराकर जगह बनाने वाले अमन ने पेरिस में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। वह आज झज्जर के हर उस बच्चे के लिए रोल माडल हैं जो अभावों में जी रहा है। बजंरग पूनिया: मिट्टी से उठकर विश्व स्तर पर धाक जमाने वाले पहलवान गांव: खुड्डन, जिला झज्जर खेल: फ्रीस्टाइल कुश्ती (65 किलोग्राम भार वर्ग) प्रमुख उपलब्धि: टोक्यो ओलिंपिक 2020 में कांस्य पदक विजेता, विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में 4 पदक जीतने वाले भारतीय पहलवान। सफलता की कहानी: खुड्डन गांव के एक साधारण परिवार में जन्मे बजरंग पूनिया के पास बचपन में महंगे खेल उपकरणों के लिए पैसे नहीं थे। उनके पिता बलवान सिंह स्वयं पहलवान थे, जिन्होंने बजरंग को 7 साल की उम्र में स्थानीय मिट्टी के अखाड़े में उतारा। बजरंग की खुराक और दूध-बादाम का खर्च पूरा करने के लिए उनके पिता बस का किराया बचाकर साइकिल से सफर करते थे। बजरंग ने छारा गांव के वीरेंद्र आर्य के अखाड़े से शुरुआत की और बाद में ओलिंपिक पदक विजेता योगेश्वर दत्त को अपना मेंटर माना। राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले बजरंग ने टोक्यो ओलंपिक में घुटने की चोट के बावजूद देश को कांस्य पदक दिलाकर अपनी वीरता का परिचय दिया था। दीपक पूनिया: ओलंपिक पदक के बेहद करीब पहुंचने वाले जांबाज गांव: छारा, जिला झज्जर खेल: फ्रीस्टाइल कुश्ती (86 किलोग्राम भार वर्ग) प्रमुख उपलब्धि: टोक्यो ओलंपिक 2020 में चौथे स्थान पर रहे, राष्ट्रमंडल खेल 2022 में स्वर्ण पदक विजेता। सुमित नागल: भारतीय टेनिस के नए सिरमौर गांव: जैतपुर, जिला झज्जर खेल: टेनिस (पुरुष एकल) प्रमुख उपलब्धि: टोक्यो ओलिंपिक 2020 और पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत का प्रतिनिधित्व किया, एटीपी चैलेंजर खिताब विजेता और देश के नंबर-1 एकल टेनिस खिलाड़ी।  दो बार के ओलिंपियन सुमित नागल ने विश्व रैंकिंग के शीर्ष 70 खिलाड़ियों में जगह बनाकर यह तक साबित किया कि हरियाणा की माटी टेनिस जैसे खेल में भी वैश्विक स्तर पर कमाल कर सकती है। दीक्षा डागर: बाधाओं को पार कर गोल्फ कोर्स पर रची इबारत मूल संबंध: गांव छप्पार खेल: गोल्फ प्रमुख उपलब्धि: टोक्यो ओलिंपिक 2020 और पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत का प्रतिनिधित्व किया, डेफलिंपिक (मूक-बधिर ओलंपिक) में दो बार की स्वर्ण पदक विजेता। – यह यात्रा दर्शाती है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो कोई भी शारीरिक कमजोरी आपकी सफलता की राह में रोड़ा नहीं बन सकती। राहुल रोहिल्ला: बहादुरगढ़ (हरियाणा) के रहने वाले है। 20 किलोमीटर रेस वाक (पैदल चाल) में टोक्यो ओलिंपिक में देश का प्रतिनिधित्व किया। सुजीत मान पहलवान, सिदिपुर लोवा भी ओलिंपिक में भाग ले चुके हैं।

रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ डुओलॉजी ने मचाया धमाल, प्रॉफिट शेयरिंग से कमाए 325 करोड़ रुपये

बॉलीवुड सुपरस्टार रणवीर सिंह ने बॉक्स ऑफिस पर एक ऐसा धमाका किया है, जिसने उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे महंगे सितारों की कतार में सबसे आगे लाकर खड़ा कर दिया है. ब्लॉकबस्टर फिल्म 'धुरंधर' की डुओलॉजी (दो फिल्मों की सीरीज) से रणवीर ने अनुमानित ₹325 करोड़ की रिकॉर्ड तोड़ कमाई की है. खास बात यह है कि रणवीर ने इसके लिए कोई बंधी-बंधाई मोटी फीस नहीं ली थी, बल्कि मेकर्स के साथ मुनाफे में हिस्सेदारी (प्रॉफिट-शेयरिंग) का एक बड़ा सौदा किया था. अब इस स्मार्ट मूव के साथ ही वो अब शाहरुख खान और रजनीकांत जैसे उन चुनिंदा सुपरस्टार्स की लीग में शामिल हो गए हैं, जो अपनी फिल्मों की बंपर कमर्शियल सफलता का सबसे बड़ा फायदा खुद उठाते हैं. तय फीस छोड़ी और खेला बड़ा दांव हिंदुस्तान टाइम्स की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, रणवीर सिंह ने 'धुरंधर' के लिए अपनी एक्टिंग फीस न लेने का एक साहसिक और समझदारी भरा फैसला किया था. इसकी जगह उन्होंने प्रॉफिट-शेयरिंग मॉडल को चुना. इस डील का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि रणवीर की जेब में सिर्फ बॉक्स ऑफिस कलेक्शन का हिस्सा ही नहीं आया, बल्कि फिल्म के सैटेलाइट राइट्स, डिजिटल (ओटीटी) और म्यूजिक राइट्स की बिक्री से हुई मोटी कमाई का भी एक सीधा और बड़ा हिस्सा उनके खाते में गया. बजट बढ़ा तो खुद लगाए पैसे शुरुआती रिपोर्ट्स बताती हैं कि 'धुरंधर' को पहले एक ही फिल्म के तौर पर प्लान किया गया था, लेकिन बाद में इसे दो भागों में बनाने का फैसला हुआ. जब फिल्म का प्रोडक्शन बजट बढ़ने लगा, तो रणवीर ने पीछे हटने के बजाय प्रोजेक्ट को पूरा सपोर्ट किया और फिल्म में अपने पास से अतिरिक्त पैसे भी लगाए. उनका यह कदम मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ, क्योंकि फिल्म में निवेश करने की वजह से मुनाफे में उनका पार्टनरशिप शेयर और ज्यादा बढ़ गया. जब ये दोनों फिल्में सिनेमाघरों में रिलीज हुईं, तो इन्होंने कमाई के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए और रणवीर की यह रणनीति उनके करियर की सबसे बड़ी लॉटरी साबित हुई. 40 की उम्र में रचा नया इतिहास अगर इंडस्ट्री में चल रही ₹325 करोड़ की यह संख्या पूरी तरह सही है, तो 40 साल के रणवीर सिंह इस समय भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के सबसे ज्यादा कमाई करने वाले एक्टर बन चुके हैं. हालांकि, बड़े स्टार्स के बीच प्रॉफिट-शेयरिंग का यह ट्रेंड अब तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसमें जोखिम भी उतना ही ज्यादा होता है. अगर फिल्म फ्लॉप हो जाए, तो एक्टर को खाली हाथ भी रहना पड़ सकता है. इसके विपरीत, जब फिल्म 'धुरंधर' जैसी ब्लॉकबस्टर साबित होती है, तो एक्टर की कमाई किसी भी तय फीस के मुकाबले कई गुना ज्यादा ऊपर निकल जाती है. बड़े-बड़े दिग्गजों की लीग में एंट्री रणवीर की इस छप्परफाड़ कमाई ने भारतीय सिनेमा के इतिहास के कुछ सबसे बड़े नामों के साथ उनकी तुलना शुरू कर दी है. इससे पहले रजनीकांत, शाहरुख खान, प्रभास और अल्लू अर्जुन जैसे पैन-इंडिया सुपरस्टार्स ही अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के लिए इस तरह के रेवेन्यू-शेयरिंग समझौतों के जरिए इतनी भारी-भरकम रकम कमा चुके हैं. हालांकि, सोशल मीडिया और मीडिया गलियारों में ₹325 करोड़ के इस आंकड़े को लेकर जबरदस्त चर्चा और उत्साह है, लेकिन अभी तक खुद रणवीर सिंह या 'धुरंधर' के मेकर्स की तरफ से इस कमाई पर कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगाई गई है.

अलीगढ़ दौरा बीच में छोड़कर लखनऊ रवाना हुए मुख्यमंत्री

अलीगढ़.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ अग्निकांड की सूचना मिलने पर अपना अलीगढ़ दौरा बीच में ही रद कर दिया। उन्हें लोकार्पण व शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान ही इस हादसे की जानकारी मिली, इसके तत्काल बाद मुख्यमंत्री राजधानी लखनऊ के लिए प्रस्थान कर गए।अलीगढ़ में आयोजित लोकार्पण/शिलान्यास कार्यक्रम में संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने जनसमूह से कहा कि मेरी इच्छा थी कि यहीं रहूं। लेकिन अभी-अभी जानकारी मिली है कि लखनऊ में एक दुर्घटना हुई है और कुछ बच्चे अग्निकांड की चपेट में आए हैं। इसमें कुछ बच्चों की दुखद मौत हो गई है। प्रशासन राहत कार्यों में लगा है। मुझे भी इस दुखद घटना के कारण तत्काल वापस लखनऊ जाना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री ने घायलों के उचित इलाज का भी निर्देश दिया।  डीजीपी व एसीएस (गृह) को मौके पर जाने का निर्देश  सीएम ने कहा कि जिन परिवारों ने अपने नौजवानों को खोया है, उनके प्रति गहन संवेदना व्यक्त करता हूं। पुलिस महानिदेशक व अपर मुख्य सचिव (गृह) को निर्देश दिया है कि मौके पर जाकर इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करें। मैं स्वयं भी वहां के लिए प्रस्थान कर रहा हूं। इस मामले की तह में जाकर दोषियों को सजा दिलाई जाएगी। सीएम ने जनहानि पर जताया शोक मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर भी घटना पर दुख जताया। मुख्यमंत्री ने लिखा कि लखनऊ में अग्नि दुर्घटना में हुई जनहानि अत्यंत दुःखद एवं हृदय विदारक है। मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं। प्रभु श्रीराम से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्माओं को शांति तथा घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्रदान करें। मुख्यमंत्री ने अलीगढ़ में कहा मेरी हार्दिक इच्छा थी कि आज मैं अलीगढ़ में रहूं, लेकिन मुझे दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि अभी अभी मुझे जानकारी मिली है कि लखनऊ में एक अग्निकांड की दुखद घटना हुई है, उसकी चपेट में कुछ बच्चे आये हैं, उनकी दुखद मौत हुई है, इसलिए मुझे तत्काल वापस जाना पड़ रहा है। जिन्होंने जान खोई उनके परिजनों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं। इस पूरे मामले के लिए पुलिस महानिदेशक व अपर मुख्य सचिव गृह को भी कहा है कि मौके पर जाकर इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करें। मैं स्वयं भी वहां प्रस्थान कर रहा हूँ जिससे इस पूरे मामले की तह में जाकर दोषियों को सज़ा भी दे सकें और उन पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदना भी व्यक्त कर सकें.

अब त्योहारों व मांगलिक कार्यक्रमों में उपहार में चीनी उत्पादों के बजाए दी जाती हैं फिरोजाबाद के ग्लास की मूर्तियां: मुख्यमंत्री

फिरोजाबाद.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सपा के एजेंडे में विकास नहीं है। समाज को बांटना, सामाजिक एकता को छिन्न-भिन्न करना, गुंडागर्दी-माफियागिरी को प्रोत्साहित करना, गरीब कल्याण के कार्य न होने देना, विकास योजनाओं में रोड़े अटकाना और त्योहारों के पहले उत्सव को उपद्रव में बदल देना ही उसका काम रहा है। यूपी में 2017 के पहले के हालात किसी से छिपे नहीं हैं। लेकिन, जनता के आशीर्वाद से डबल इंजन सरकार आज विकास व विरासत की यात्रा को बढ़ा रही है। यूपी अब अच्छी कानून व्यवस्था तथा विकास परियोजनाओं से पहचाना जा रहा है। मुख्यमंत्री सोमवार को कांच नगरी में 658 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 81 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करने के बाद जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। इनमें टुंडला की 452 करोड़ और शिकोहाबाद की 206 करोड़ रुपये की परियोजनाएं शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने बाबा नीम करोली की जन्मस्थली पर नागरिकों को विकास परियोजनाओं की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इसके पीछे हमारे विधायकों की मेहनत है। शिकोहाबाद के विधायक भी हमारी तरह काम करते तो यह संख्या बढ़ सकती थी। सपा शासन में सीना तानकर उपद्रव करता था माफिया सीएम ने कहा कि डबल इंजन सरकार ‘एक जिला-एक उत्पाद’, ‘एक जिला-एक कुजीन’, ‘एक जिला-एक मेडिकल कॉलेज’ दे रही है, जबकि सपा ‘एक जिला-एक माफिया’ देती थी। हर जिले का चिह्नित माफिया जमीन पर कब्जा, गुर्गों के जरिए व्यापारियों से वसूली कर अराजकता पैदा करता था। प्रदेश को तबाह करने वाले माफिया सीना तानकर उपद्रव करते थे, लेकिन अब यूपी माफिया, गुंडा, उपद्रव मुक्त है। नो कर्फ्यू-नो दंगा, यूपी में है सब चंगा।  गरीब को तबाह करती थी सपा व कांग्रेस  सीएम ने सपा को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि यह पार्टी रामनवमी का विरोध करती थी। कांवड़ यात्रा व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के उत्सवों पर रोक लगाती थी। गरीब को आवास, आयुष्मान, एलपीजी सिलेंडर, शौचालय आदि की कोई सुविधा नहीं देती थी। बिजली भी नहीं थी, क्योंकि सपा व कांग्रेस के लोग अंधेरे में रहकर डकैती डालते थे। ये लोग गरीब को तबाह करते थे। लोकल से ग्लोबल बन रही फिरोजाबाद की विकास यात्रा  मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम मोदी के मार्गदर्शन में डबल इंजन सरकार द्वारा किए जा रहे विकास का श्रेय जनता-जनार्दन को है। क्योंकि जब आप ईवीएम का सही बटन दबाकर अच्छे जनप्रतिनिधि चुनते हैं और वे कमल का फूल लेकर लखनऊ पहुंचते हैं तो विकास आता है। इससे फिरोजाबाद की यात्रा लोकल से ग्लोबल बनती है। यहां का ग्लास उद्योग नवाचार का नया केंद्र बना है। इसने चीन को पीछे कर दिया है। पहले होली, दीवाली, विजयदशमी आदि त्योहारों पर चीन के बने उत्पाद ही बाजारों में पहुंचते थे। लेकिन, जब यहां के कारीगरों ने नई तकनीक, डिजाइन व बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद बनाने शुरू किए तो त्योहारों, जन्मदिन व अन्य मांगलिक कार्यक्रमों पर ग्लास की सुंदर मूर्तियां व कलाकृतियां भेंट की जाती हैं। गणपति, राम दरबार, राधा-कृष्ण, भगवान शिव, महात्मा बुद्ध आदि की शानदार प्रतिमाएं देखकर हर कोई अभिभूत होता है। यह प्रतिभा और कला पहले भी थी, लेकिन 2017 से पहले इन्हें प्लेटफॉर्म व प्रोत्साहन नहीं मिलता था। अब स्थानीय उद्यमी व कारीगर इस सुहाग नगरी को नई ऊंचाई दे रहे हैं। डबल इंजन सरकार उन्हें और प्रोत्साहित करेगी। पीएम मोदी जब अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष को ओडीओपी का उपहार देते हैं तो इससे उत्तर प्रदेश भी गौरवान्वित होता है। प्रदूषण बोर्ड की छापेमारी रोकी, दी नई तकनीक व सुविधाएं  सीएम ने कहा कि 9 साल पहले विधायक मनीष असीजा मेरे पास आए और अपना आक्रोश प्रकट करते हुए कहा कि प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने तबाही मचाई हुई है, यह बंद हो तो उद्यमी-व्यापारी कुछ करें। हमने बोर्ड के छापों को बंद कराया, उद्यमियों को नई तकनीक दी और गैस आपूर्ति सुनिश्चित कराई। अब फिरोजाबाद के उद्यमी बिजली से भी भट्टियों का संचालन कर उसे सोलर पैनल से जोड़कर नई तकनीक के साथ आगे बढ़ चुके हैं। आलू उत्पादक किसानों ने भी फिरोजाबाद को समृद्ध किया है। लोकमाता की प्रतिमा जनपद को दिला रही पहचान मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा जनपद को पहचान दिलाते हुए सनातन धर्मावलंबियों को पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने की प्रेरणा दे रही है। उनका जन्म भले ही महाराष्ट्र में हुआ, वह इंदौर की महारानी रहीं, लेकिन उनका कार्यक्षेत्र पूरा भारत था। जहां सनातन धर्म है, वहां लोकमाता की उपस्थिति है। विदेशी आक्रांताओं ने जिन धर्मस्थलों को नष्ट किया, लोकमाता ने उन सभी का पुनरुद्धार किया। जब उनकी जयंती के 300 वर्ष हुए तो पूरे देश में लोकमाता के त्रिशताब्दी कार्यक्रम को भव्यता से मनाया गया। मैं भी अनेक कार्यक्रमों से जुड़ा। हमारी सरकार ने जगह-जगह उनकी प्रतिमाओं को स्थापित किया। औरैया मेडिकल कॉलेज का नामकरण लोकमाता के नाम पर किया गया। लोकमाता ने अपने कृतित्व के माध्यम से धर्म की स्थापना व पुनरुद्धार के लिए प्रेरणा प्रदान की। हमारे जनप्रतिनिधियों को मिलता रहेगा जनता का आशीर्वाद सीएम ने कहा कि यहां की विकास परियोजनाएं बताती हैं कि विधायकों ने मेहनत की। उनका व्यक्तिगत परिश्रम भी रंग लाया। सीएम ने विधायक प्रेमपाल धनगर व अन्य जनप्रतिनिधियों को विकास में रुचि के लिए बधाई दी। कहा कि अब टुंडला में भी विकास दिखाई दे रहा है। सीएम ने विश्वास जताया कि जनता का आशीर्वाद भाजपा व हमारे जनप्रतिनिधियों को प्राप्त होता रहेगा।  प्रदेशवासियों को दीं असीमित सुविधाएं  सीएम ने प्रदेशवासियों को मिलने वाली सुविधाओं का जिक्र करते हुए कहा कि 15 करोड़ गरीबों को राशन, आय़ुष्मान भारत के तहत 10 करोड़ लोगों को पांच लाख रुपये की निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा, 65 लाख गरीबों को आवास, दो करोड़ गरीबों को रसोई गैस कनेक्शन, लगभग डेढ़ करोड़ परिवारों को बिजली कनेक्शन और 16 लाख किसानों के निजी ट्यूबवेल के बिल माफ कर मुफ्त बिजली दी जा रही है। किसानों को सरकार क्रय केंद्रों व सॉइल हेल्थ कार्ड की सुविधा उपलब्ध कराती है। पीएम मोदी ने शनिवार को किसानों के खाते में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि भेजी, जिसमें यूपी के किसानों के खाते में 4300 करोड़ रुपये से अधिक आए। अब कार्यालयों में नहीं लगाने पड़ते बाबू के चक्कर सीएम ने स्पष्ट कहा कि यह हमारी कार्य संस्कृति है कि अब किसी कार्यालय में बाबू के चक्कर नहीं लगाने … Read more

विदेश भेजने के नाम पर कारोबार! जालंधर में बिना लाइसेंस संचालित हो रहे 4 ऑफिस

जालंधर. विदेश यात्रा कंस्ल्टैंट्स (छोटी बारादरी) का मालिक बिना लाइसैंस के चार-चार ऑफिस चला रहा था और इसका प्रशासन को पता तक नहीं लगा। यह लापरवाही है या फिर अनदेखी लेकिन विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स का मालिक पिछले चार सालों से लोगों को ठग रहा था। विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स के खिलाफ एंटी फ्रॉड में ही 60 से ज्यादा शिकायतें दर्ज हैं लेकिन अभी तक कोई एफ.आई.आर. दर्ज नहीं हुई। सूत्रों की मानें तो विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स ने गढ़ा रोड पर ही नहीं बल्कि सहदेव मार्कीट के पास भी ऑफिस खोल रखा था। इसके अलावा ग्रैंड मॉल में उसके दो दफ्तर हैं जिसमें से 5वीं मंजिल पर बनाया गया ऑफिस तो आलीशान था जबकि एक आफिस तीसरी मंजिल पर था। बताया है कि बी.एम.सी. चौक के पास भी विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स के नाम पर दफ्तर चला रहा है। प्रशासन की लापरवाही के चलते विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स के मालिक ने सैंकड़ों लोगों के साथ विदेश भेजने के नाम पर फ्रॉड किया। करतारपुर का रहने वाला विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स का मालिक उन्हीं पैसों से शहर के पॉर्श इलाके माडल टाऊन में करीब अढ़ाई करोड़ की कोठी बनाई है। इस तथा कथित एजैंट खिलाफ अपराधिक केस दर्ज हैं जिसके बारे भी जल्द खुलासा किया जाएगा। इसकी गाड़ी नंबर 3131 और अदिति नाम की करीबी महिला दोस्त भी काफी चर्चित रह चुकी है। गौरतलब है कि विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स नाम से संचालित यह संस्था बिना लाईसेंस के सोशल मीडिया का सहारा लेकर विदेश भेजने का लालच देकर भोले-भाले लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है और फिर उन्हीं लोगों को ठगी का शिकार बना लिया जाता है। वर्क परमिट के लिए ज्यादा पैसे वसूल विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स का मालिक इतना शातिर था कि वह अपने क्लाइंट से वीजा लगवाने के लिए ज्यादा पैसे लेकर कम पैसों का एफिडेविट देता था। काम न होने पर अगर क्लाइंट पुलिस को शिकायत भी देता था कि वह क्लाइंट को कुछ पैसों देकर शिकायत ही खत्म करवा देता था जबकि पुलिस भी लिखित में प्रूफ होने की बात कह कर ज्यादा गंभीरता से मामले को नहीं लेती थी। सूत्रों की मानें तो विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स में गया अगर क्लाइंट मलेशिया में वर्क परमिट के लिए अप्लाई करता था तो उससे डेढ़ लाख रुपए लिए जाते थे, लेकिन एफिडेविट पर वही राशि 40 हजार रुपए लिखी जाती थी। पहले तो क्लाइंट को वीजा आने का भरोसा दिया जाता था जिससे क्लाइंट भी उस एफिडेविट पर साइन कर देता था और अगर काम नहीं होता था तो शिकायत देने पर एफिडेविट के हिसाब से विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स का मालिक 40 हजार रुपए लौटा देता था और काफी शातिर तरीके से 1.10 लाख रुपए हड़प जाता था। जिसने काम में एंट्री दिलाई, उसी से कर चुका फ्रॉड सूत्रों ने बताया कि विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स के मालिक को नरिंदर सिनेमा के पास पड़ते एक इमीग्रेशन के मालिक ने इस काम में एंट्री दिलाई थी। विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स के मालिक को इस काम की कोई जानकारी नहीं थी, जिसके चलते इमीग्रेशन के मालिक ने उसे अपने साथ जोड़ा और सारा काम सिखाया। काफी समय से वह दोनों एक साथ काम करते रहे लेकिन बाद में विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स के मालिक ने अपने गुरु को ही ठग लिया और फिर अपना बिजनेस शुरू कर दिया। वहीं विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स के मालिक द्वारा किए अपराधों की लिस्ट लंबी है।

प्रवासी पक्षियों पर रहेगी स्मार्ट नजर: सुल्तानपुर में AI कैमरे और ड्रोन करेंगे निगरानी

चंडीगढ़  सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान में अब कृत्रिम बुद्धिमता (एआइ) और ड्रोन के माध्यम से पक्षियों की गणना होगी। पहली बार डिजिटल रिकार्ड तैयार किया जाएगा कि आगामी सीजन में कितने प्रवासी पक्षी आए, कब पहुंचे और किन हिस्सों में रुके। साथ ही पता लगाया जाएगा कि कितने समय तक प्रवासी पक्षी रहे और पर्यावरणीय बदलावों का उनकी गतिविधियों पर क्या असर पड़ा। गुरुग्राम जिले में फरुखनगर के पास स्थित सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान में अभी तक पक्षियों की गणना प्रत्यक्ष अवलोकन पर आधारित रही है। इसमें पक्षियों की मौजूदगी का केवल एक समय का चित्र सामने आता था। जलभराव, दलदली हिस्से और संवेदनशील क्षेत्र कई बार प्रत्यक्ष गणना को सीमित कर देते हैं। निगरानी टावरों पर लगाए गए एआई आधारित कैमरे नई व्यवस्था में ड्रोन उन हिस्सों का सर्वे भी करेंगे जहां सामान्य टीमें नहीं पहुंच पातीं। इससे पक्षियों की गतिविधि का ज्यादा व्यापक और सटीक रिकार्ड तैयार होने की उम्मीद है। ड्रोन से मिलने वाली तस्वीरें और वीडियो एआइ विश्लेषण के साथ जोड़कर गणना को अधिक विश्वसनीय बनाने की योजना है। उद्यान में दो स्थानों पर बने निगरानी टावरों पर एआइ आधारित कैमरे लगाए जा रहे हैं, जो पार्क की झीलों, जलभराव वाले क्षेत्रों और आसपास के खुले भूभाग को लगातार रिकार्ड करेंगे। इससे पूरे मौसम का व्यावहारिक डेटा तैयार होगा, जिससे पता लगेगा कि कौन सी प्रजाति किस समय सबसे ज्यादा सक्रिय रही, किस हिस्से में आवाजाही बढ़ी या घटी और किन इलाकों का उपयोग कम हुआ। इन कामों में एआई से मिलेगी मदद एआइ सिस्टम दुर्लभ और संवेदनशील प्रजातियों की पहचान के साथ उनके व्यवहार और आवास में बदलाव के संकेत भी रिकार्ड करेगा। देखा जाएगा कि जल क्षेत्र कितना बदला, वनस्पति की स्थिति कैसी रही और किस हिस्से में पक्षियों की गतिविधि कम या ज्यादा हुई। अक्टूबर से शुरू होने वाली डिजिटल निगरानी से यह समझने में मदद मिलेगी कि बदलता मौसम, मानसून में देरी, गर्मी-सर्दी, सिकुड़ते वेटलैंड और बढ़ती मानवीय गतिविधियां प्रवासी पक्षियों को किस तरह प्रभावित कर रही हैं। इसके आधार पर भविष्य में पानी प्रबंधन, वनस्पति नियंत्रण, संवेदनशील क्षेत्रों में आगंतुकों की आवाजाही और संरक्षण की रणनीति तय की जा सकेगी। लगातार बदल रही पक्षियों की संख्या सुल्तानपुर में हर साल 250 से अधिक प्रजातियों के पक्षी होते हैं, जिनमें 100 से ज्यादा प्रवासी प्रजातियां शामिल रहती हैं। हाल के वर्षों के आंकड़े दिखाते हैं कि पक्षियों की संख्या और प्रजातियों की संरचना लगातार बदल रही है। 2025 में यहां 48 प्रजातियों के 2,593 प्रवासी पक्षी दर्ज किए गए, जबकि 2024 में 43 प्रजातियों के 2686 और 2023 में 61 प्रजातियों के 6,036 पक्षी दर्ज किए गए थे।

डॉक्टरों की कमी पर सवाल, CG के मेडिकल कॉलेजों में खाली पद भरने की मांग तेज

रायपुर. छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी ने मुख्य सचिव को 16 पन्नों का पत्र लिखा है। इस पत्र में प्रदेश के शासकीय मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों तथा शैक्षणिक स्टाफ के रिक्त पदों को तत्काल नियमित भर्ती से भरने एवं लड़खड़ाती चिकित्सा व्यवस्था को सुदद करने की मांग की गई है। पत्र के अनुसार, छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में डॉक्टरों व शैक्षणिक स्टाफ की भारी कमी ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को वेंटिलेटर पर ला खड़ा किया है। हाल ही में सामने आए आंकड़े न केवल चौंकाने वाले हैं, बल्कि सरकारी दावों की पोल खोलने के लिए काफी हैं। ये आंकड़े साफ बयां करते हैं कि करोड़ों मरीजों का बोझ उठाने वाले प्रदेश के मुख्य चिकित्सा संस्थान खुद स्टाफ की किल्लत से बुरी तरह हांफ रहे हैं। विडंबना यह है कि एक तरफ सरकारें ‘डॉक्टरों की कमी’ का रोना रोती हैं, वहीं दूसरी तरफ राज्य में हजारों योग्य डॉक्टर होने के बावजूद सालों से नियमित भर्ती प्रक्रिया ठप पड़ी है। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले संस्थानों में स्वीकृत पदों के मुकाबले आधे से अधिक पद खाली पड़े हैं। इस प्रशासनिक उदासीनता का सीधा असर मरीजों के इलाज पर तो पड़ ही रहा है, साथ ही सूबे के भावी डॉक्टरों (मेडिकल छात्रों) की पढ़ाई और भविष्य भी भगवान भरोसे चल रहा है। आलम ये है कि प्रदेश से हर साल लगभग 2250 एमबीबीएस निकल रहे हैं। इसके एवज में पीजी में बमुश्किल 399 ही सीट हैं। इसके अलावा अन्य विशेषज्ञों की तो सीट भी नहीं है। रायपुर-बिलासपुर को छोड़ दें तो राज्य के अन्य कालेजों में 80 प्रतिशत डाक्टरों के पद खाली हैं। एमबीबीएस के बाद इंटर्नशिप करने वाले डॉक्टारों को महज 530 प्रतिदिन रुपये मानदेय मिलता है, जबकि अन्य राज्यों में स्थिति बेहतर है। बांड की शर्तों के अनुरूप काम करने वाले डाक्टरों को भी केवल 49 हजार ही मानदेय मिलता है। दो साल तक उन्हें गांव में सेवा देनी पड़ती है। यही वजह है कि ज्यादातर युवा डॉक्टर स्वेच्छा से बांड शर्तों से मुक्त होकर 25 लाख रुपये जमा करके प्रदेश से ही मुक्ति पाने की कोशिश में लगे रहते हैं। चिकित्सा व्यवस्था की दुर्दशा इसी से समझ सकते हैं कि प्रदेश में आज तक प्रदेश के सरकारी क्षेत्र में एक भी किडनी, लीवर या हार्ट ट्रांसप्लांट सर्जरी नहीं हो सकी है। उच्च चिकित्सा के लिए राज्य के बाहर जाने की स्थिति बनी हुई है। रिक्त पदों का गणित: रीढ़ विहीन ढांचा सरकारी आंकड़ों का बारीकी से विश्लेषण करें, तो इस बदहाली का सबसे स्याह और डरावना चेहरा सीनियर रेजिडेंट्स (SR) के पदों पर देखने को मिलता है। किसी भी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के भीतर व्यावहारिक चिकित्सा और चौबीस घंटे मुस्तैद रहने वाली व्यवस्था की रीढ़ सीनियर रेजिडेंट्स ही होते हैं। राज्य में इनके कुल 518 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 375 पद खाली पड़े हैं। यानी करीब 72.3 प्रतिशत पदों पर डॉक्टरों की तैनाती ही नहीं हुई है। यही वजह है कि ओपीडी से लेकर इमरजेंसी वार्डों तक में मरीजों को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है और गिने-चुने डॉक्टरों पर काम का मानसिक दबाव लगातार बढ़ रहा है पद का नाम रिक्तता (प्रतिशत में) स्थिति का आकलन सीनियर रेजिडेंट 72.3% सर्वाधिक गंभीर असिस्टेंट प्रोफेसर 51.6% चिंताजनक एसोसिएट प्रोफेसर 49.1% गंभीर संकट प्रोफेसर 48.5% शैक्षणिक ढांचा प्रभावित जूनियर रेजिडेंट 41.6% जमीनी स्तर पर स्टाफ की कमी चिंता की बात यह भी है कि मेडिकल कॉलेजों में सिर्फ जूनियर डॉक्टरों की ही कमी नहीं है, बल्कि देश के भविष्य (डॉक्टरों) को तैयार करने वाले प्रोफेसरों की कुर्सियां भी सूनी हैं। चिकित्सा शिक्षकों की कमी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर तीनों श्रेणियों में लगभग 50 प्रतिशत पद खाली हैं। जानकारों का स्पष्ट कहना है कि अगर समय रहते इन पदों को नियमित भर्ती के जरिए नहीं भरा गया, तो चिकित्सा सेवाओं का पूरी तरह चरमराना तय है। चिकित्सा विशेषज्ञ के 80 प्रतिशत तक पद खाली चिकित्सा विशेषज्ञ: प्रदेश में कुल स्वीकृत 1773 पदों में से केवल 355 कार्यरत हैं (नियमित: 320, तदर्थ: 2, संविदा: 33)। इसके चलते रिकार्ड 1418 पद खाली हैं, यानी लगभग 80% पद रिक्त हैं। चिंताजनक बात यह है कि मोहला-मानपुर और सुकमा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में विशेषज्ञों की संख्या शून्य है, जिससे ग्रामीण अंचलों में गंभीर स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। चिकित्सा अधिकारी : इसी तरह चिकित्सा अधिकारियों के कुल 2296 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 1174 पदों पर डॉक्टर कार्यरत हैं और 305 पद रिक्त पड़े हैं। हालांकि, कार्यरत अमले में नियमित डॉक्टरों की संख्या (सिर्फ 37) बेहद कम है, जबकि तदर्थ (780) और संविदा (1991) कर्मियों की संख्या कहीं अधिक है। यह स्वास्थ्य ढांचे की संविदा और तदर्थ व्यवस्था पर अत्यधिक निर्भरता को दर्शाता है। विरोधाभास: 17 हजार से अधिक डॉक्टर उपलब्ध, फिर भी नियुक्तियां बंद स्वास्थ्य सेवाओं की इस दुर्दशा के पीछे डॉक्टरों की अनुपलब्धता नहीं, बल्कि सरकारी और प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी है। छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल में पंजीकृत डॉक्टरों के ताजा आंकड़े इस विरोधाभास को पूरी तरह स्पष्ट करते हैं। राज्य में वर्तमान में कुल 17,142 डॉक्टर पंजीकृत हैं, जो चिकित्सा ढांचे को मजबूत बनाने के लिए पर्याप्त हैं। काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार: एमबीबीएस डॉक्टर: 11,132 एमडी (विशेषज्ञ): 2,850 एमएस (सर्जन): 2,740 सुपर स्पेशलिस्ट (DM): 190 सुपर स्पेशलिस्ट (MCh): 230 नियमित डॉक्टरों के अलावा, राज्य में करीब 5,000 अस्थायी डॉक्टर भी पंजीकृत हैं, जो समय-समय पर संविदा या अन्य माध्यमों से चिकित्सा कार्यों में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करते हैं। इतने बड़े पूल के बावजूद राज्य में साल 2020 के बाद से छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) के माध्यम से कोई नियमित भर्ती प्रक्रिया आयोजित नहीं की गई है। योग्य डॉक्टरों की फौज सड़क पर है या निजी अस्पतालों की ओर रुख कर रही है, और सरकारी अस्पताल खाली पड़े हैं।