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बारिश में जलभराव रोकने पर गडकरी का फोकस, सड़कों को तालाब बनने से बचाने के लिए क्या है प्लान?

मुंबई  मॉनसून में अक्सर सड़कों के तालाब बन जाने की खबरों के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बारिश आने से पहले ही तैयारी करने के जरूरी निर्देश दिए हैं. गडकरी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं पर मानसून से जुड़ी तैयारियों को पूरी तरह मजबूत किया जाए और खराब मौसम के कारण होने वाली बाधाओं को कम करने के लिए जरूरी एहतियाती कदम उठाए जाएं।  सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) के अनुसार, यह निर्देश उन समीक्षा बैठकों के दौरान दिए गए, जिनमें तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में चल रही राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता, रखरखाव और प्रगति का आकलन किया गया है. गडकरी ने सड़क परिवहन की नींव राष्ट्रीय राजमार्गों पर खासतौर पर ध्यान रखने के लिए कहा है।  इन परियोजनाओं में तेलंगाना के 4,931 किलोमीटर, जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के 2,035 किलोमीटर और लद्दाख के 804 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग शामिल हैं। मंत्रालय के अनुसार, यह समीक्षा मीडिया रिपोर्टों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मिली प्रतिक्रियाओं और अधिकारियों, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), नेशनल हाईवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) और परियोजना ठेकेदारों से प्राप्त जानकारी के आधार पर की गई।  बैठकों के दौरान गडकरी ने चल रही परियोजनाओं, रखरखाव कार्यों और सुरक्षित, टिकाऊ एवं प्रभावी राजमार्ग बुनियादी ढांचा सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों की समीक्षा की।  गडकरी ने परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने पर जोर देते हुए कहा कि गुणवत्ता और जवाबदेही के उच्चतम मानकों को बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों और कार्यान्वयन एजेंसियों को निगरानी व्यवस्था मजबूत करने, समय पर काम पूरा करने तथा आधुनिक निर्माण तकनीकों और बेहतर कार्य पद्धतियों को अपनाने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि इससे सड़कों की मजबूती, यात्रा सुविधा और राजमार्गों का दीर्घकालिक प्रदर्शन बेहतर होगा।  मानसून के दौरान संभावित चुनौतियों को देखते हुए मंत्री ने अधिकारियों को प्रभावी ड्रेनेज प्रबंधन, ढलानों की स्थिरता (स्लोप स्टेबिलाइजेशन) और सुरक्षा कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने मौसम से जुड़ी आपात स्थितियों से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली (रैपिड रिस्पॉन्स सिस्टम) तैनात करने पर भी जोर दिया। मंत्री के अनुसार, ये कदम राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क पर निर्बाध यातायात, सड़क सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की मजबूती सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी हैं।  गडकरी ने कहा कि अच्छी तरह से विकसित और रखरखाव वाली सड़कें क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने, आर्थिक विकास को गति देने, पर्यटन को बढ़ावा देने और यात्रियों की सुविधा सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि समय पर परियोजनाओं का पूरा होना, गुणवत्ता सुनिश्चित करना और आधुनिक इंजीनियरिंग समाधानों को अपनाना सड़क क्षेत्र की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। 

छतरपुर के 54 गांवों की जमीन अधिग्रहित होगी, केन-बेतवा प्रोजेक्ट पर तेजी से बढ़ा काम

छतरपुर  बुंदेलखंड क्षेत्र के कायाकल्प के लिए प्रस्तावित महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना अब तेजी से धरातल पर उतर रही है। इस परियोजना के क्रियान्वयन के लिए छतरपुर जिले के 54 गांवों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया ने तीव्र गति पकड़ ली है। वहीं, परियोजना के विस्तार के क्रम में उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में भी प्रशासनिक तैयारियां शुरू हो गई है। कलेक्टर की वर्तमान गाइडलाइन दर का चार गुना मुआवजा मिलेगा। छतरपुर में धारा 11 का प्रकाशन पूरा छतरपुर जिले में परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की वैधानिक प्रक्रिया ने बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है। परियोजना की कार्यपालन यंत्री उमा गुप्ता ने बताया कि जिले के 54 प्रभावित गांवों के लिए भूमि अधिग्रहण की धारा 11 वैधानिक प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। धारा 19 की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। नहर परियोजना प्रभावित किसानों को उनकी जमीन के बदले सरकारी गाइडलाइन से चार गुना अधिक मुआवजा मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। प्रशासन अब मुआवजा वितरण को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए तत्पर है। उत्तर प्रदेश में भी प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ्तार परियोजना की व्यापकता को देखते हुए अब उत्तर प्रदेश में भी कार्य ने गति पकड़ी है। केन-बेतवा लिंक नहर परियोजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में आने वाले गांवों की भूमि की नपाई (सीमांकन) के लिए 15 जून 2026 को निविदा जारी कर दी गई है। यह निविदा झांसी जिले में केन-बेतवा लिंक नहर परियोजना के तहत नहर निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश के हिस्से में आने वाले गांवों की भूमि की नपाई के कार्य के लिए जारी की गई है, जिससे परियोजना के इस हिस्से में भी निर्माण कार्य की नींव रखी जा सके। पारदर्शिता का अधिकार मुआवजे की राशि तय करने के लिए गांव की सरकारी गाइडलाइन और क्षेत्र में हाल ही में हुई जमीनों की रजिस्ट्री की औसत दर में से जो भी अधिक होगा, उसी को आधार मानकर भुगतान किया जाएगा। एक्सपेरिमेंट ने बर्बाद किए कीमती दो साल परियोजना से जुड़े सूत्रों के अनुसार शुरुआत में अधिकारियों ने 218 किलोमीटर लंबी लिंक नहर के एक बड़े हिस्से (लगभग 65 किमी) को भूमिगत सुरंग के जरिए ले जाने का प्रस्ताव रखा था। इस प्रयोगात्मक मॉडल के पीछे तर्क दिया गया था कि इससे भूमि अधिग्रहण कम होगा और पानी का वाष्पीकरण रुकेगा। लेकिन हकीकत के धरातल पर यह योजना अत्यधिक महंगी और जोखिम भरी साबित हुई। लंबे समय तक चले विचार-मंथन के बाद अंतत: इस टनल प्रस्ताव को अव्यावहारिक मानकर निरस्त कर दिया गया है। इस तकनीकी हेर-फेर के चक्कर में परियोजना के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से लिंक नहर का काम दो साल पिछड़ गया है। नहर का मार्ग आबादी वाले क्षेत्रों के बाहर से निर्धारित किया गया है. जिससे किसी भी गांव के पूर्ण विस्थापन का संकट नहीं है। नहर की मुख्य संरचना और सर्विस रोड के निर्माण के लिए 100 मीटर चौड़ी पट्टी में भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। यह परियोजना न केवल बुंदेलखंड के सिंचाई संकट को दूर करेगी, बल्कि कानून के तहत मिलने वाले उचित मुआवजे से स्थानीय किसानों के आर्थिक स्तर में भी बड़ा सकारात्मक बदलाव लाएगी। 218 किमी लंबी नहर और चार गुना मुआवजा केन नदी पर निर्माणाधीन ढोड़न बांध से बेतवा नदी तक बनने वाली यह 218 किलोमीटर लंबी लिंक नहर बुंदेलखंड के सिंचाई संकट को दूर करने के लिए संजीवनी साबित होगी। छतरपुर जिले से होकर गुजरने वाले इसके 107 किलोमीटर के हिस्से के लिए किसानों को मध्य प्रदेश भूमि अर्जन पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन में प्रतिकार और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम 2013 के तहत मुआवजा दिया जा रहा है। जिसको लेकर राज्य केबिनेट ने भी बीते माह चार गुना मुआवजा पर मुहर लगाई थी। परियोजना के लिए कुल 1488.42 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है जिसमें 54 गांवों की भूमि अधिग्रहित की जा रही है। विकासखंड/तहसील गांवों की संख्या मुख्य प्रभावित गांव छत्तरपुर विकासखंड 17-बंधीकला, ईशानगर, लहेरा, दिदौल, राजापुरवा आदि महाराजपुर तहसील 12-मऊ, नुना, पड़वाहा आदि राजनगर विकासखंड 11- गंज, करी, पहरा, सीलोन, कोटा, बरद्वाहा आदि नौगांव विकासखंड 07 – लुगासी, नयागांव, तिंदनी आदि बिजावर व सटई तहसील 07-करोदिया, दिदौनियां आदि

बकाया गन्ना भुगतान को लेकर किसानों का बड़ा ऐलान, हाईवे जाम करने की तैयारी

समराला लंबे समय से लंबित चला आ रहा गन्ने के बकाए का भुगतान न होने से क्षुब्ध गन्ना किसानों ने एक बार फिर सरकार से टक्कर लेने का फैसला कर लिया है। प्राप्त जानकारी अनुसार दोआबा किसान कमेटी पंजाब ने जालंधर-जम्मू नेशनल हाईवे को 1 जुलाई से अनिश्चितकाल के लिए जाम करने का बड़ा ऐलान किया है। इस फैसले के चलते आने वाले दिनों में आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। दोआबा किसान कमेटी पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष जंगवीर सिंह चौहान ने बताया कि गन्ना किसानों के बकाया भुगतान को लेकर 18 मई को जालंधर स्थित गन्ना विभाग के कार्यालय के बाहर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया गया था। उस समय परियोजना अधिकारी और संबंधित विभाग ने आश्वासन दिया था कि 30 मई तक किसानों के खातों में 68.50 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से 142 करोड़ रुपये की बकाया राशि जमा करवा दी जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि एक महीना बीत जाने के बावजूद किसानों के खातों में अभी तक एक भी रुपया नहीं पहुंचा है। अधिकारियों ने केवल आश्वासन दिए हैं और उनके द्वारा बनाया गया नया पोर्टल भी पूरी तरह विफल साबित हुआ है। किसान नेता ने कहा कि अब गन्ने की अगली फसल तैयार होने वाली है, लेकिन किसानों को पिछली फसल का भुगतान भी नहीं मिला है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। सरकार किसानों की मदद करने के बजाय उनका वैध बकाया देने से भी बच रही है। जंगवीर सिंह चौहान ने पंजाब सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 30 जून तक किसानों के खातों में 68.50 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बकाया राशि जमा नहीं करवाई गई, तो 1 जुलाई को दोआबा किसान कमेटी के कार्यकर्ता सड़कों पर उतरेंगे और टांडा में जालंधर-जम्मू नेशनल हाईवे को अनिश्चितकाल के लिए पूरी तरह जाम कर देंगे।

पूजा पाल का सियासी सफर: अतीक से टकराव से लेकर BJP में बड़ी जिम्मेदारी तक

लखनऊ  भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए नई प्रदेश कार्यकारिणी का ऐलान कर दिया है. इस लिस्ट में एक चर्चित नाम समाजवादी पार्टी की बागी नेता पूजा पाल का है. पूजा पाल को यूपी बीजेपी का उपाध्यक्ष बनाया गया है।  पूजा पाल को पिछले साल समाजवादी पार्टी (SP) से निकाल दिया गया था क्योंकि उन्होंने मुख्यमंत्री की तारीफ की थी. पार्टी से निकाले जाने के कुछ वक्त बाद उन्होंने सीएम योगी से मुलाकात भी की थी। प्रयागराज का प्रतिनिधित्व करने वाली पाल को पार्टी विरोधी गतिविधियों और गंभीर अनुशासनहीनता के आरोप में समाजवादी पार्टी से निकाल दिया गया था।  अतीक अहमद से पूजा पाल की अदावत क्यों? पूजा पाल को समाजवादी पार्टी से तब निकाला गया, जब उन्होंने पूर्व सांसद और विधायक अतीक अहमद के खिलाफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की सख्त कार्रवाई की सार्वजनिक रूप से तारीफ की थी. पूजा ने अतीक अहमद पर ही अपने पति राजू पाल की हत्या का आरोप लगाया था. यह हत्या उनकी शादी के महज नौ दिन बाद ही कर दी गई थी।  यूपी विधानसभा में पूजा पाल ने योगी की 'जीरो-टॉलरेंस' नीतियों की तारीफ करते हुए कहा था, "मैं मुख्यमंत्री का शुक्रिया अदा करना चाहती हूं कि उन्होंने मुझे इंसाफ दिलाया, जबकि किसी और ने मेरी बात नहीं सुनी।  इसके बाद, कुछ ही घंटों के अंदर समाजवादी पार्टी ने अखिलेश यादव के हस्ताक्षर वाला निष्कासन पत्र जारी किया, जिसमें पार्टी के निर्देशों को लगातार न मानने और संगठन के लिए नुकसानदेह गतिविधियों में शामिल होने का हवाला दिया गया था।  पूजा पाल कौन हैं? पूजा पाल, बीएसपी के पूर्व विधायक राजू पाल की पत्नी हैं. राजू पाल की हत्या उनकी शादी के सिर्फ 10 दिन बाद ही कर दी गई थी. राजू पाल की हत्या का आरोप माफिया डॉन अतीक अहमद के भाई अशरफ पर लगा था. बीएसपी ने पूजा पाल को इलाहाबाद शहर की पश्चिमी सीट पर हुए उपचुनाव में अतीक अहमद के भाई अशरफ के खिलाफ मैदान में उतारा था, लेकिन वह हार गईं थीं।  साल 2007 के चुनावों में पूजा पाल को फिर से BSP ने टिकट दिया. 2012 में वे दोबारा उसी सीट से चुनी गईं. फरवरी 2018 में बीजेपी नेता और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात के बाद मायावती ने उन्हें बीएसपी से निकाल दिया था. पूजा 2019 में समाजवादी पार्टी में शामिल हो गईं और 2022 के विधानसभा चुनाव में कौशाम्बी जिले की चैल सीट से जीत हासिल की। 

भरत तिवारी मामले में भावुक पल, आयोग अध्यक्ष ने मां को दिया न्याय का भरोसा

भोजपुर. भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर प्रकरण की न्यायिक जांच के सिलसिले में गुरुवार को न्यायिक जांच आयोग के अध्यक्ष एवं पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा बिलौटी गांव पहुंचे। यहां उन्होंने मृतक भरत भूषण तिवारी के स्वजन से मुलाकात की और मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया। परिवार का दर्द सुना, निष्पक्ष जांच का आश्वासन स्वजन से बातचीत के दौरान न्यायमूर्ति विनोद कुमार सिन्हा ने कहा कि वह परिवार के दर्द को समझते हैं। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी घटना के बाद पीड़ा होना स्वाभाविक है। घटना की सच्चाई सामने लाने और व्यवस्था में सुधार के उद्देश्य से ही उन्हें जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। साक्ष्य उपलब्ध कराने की अपील न्यायिक जांच आयोग के अध्यक्ष ने स्वजन से जांच में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने घटना से संबंधित सभी फोटो, वीडियो और अन्य साक्ष्य उपलब्ध कराने का अनुरोध करते हुए कहा कि मामले से जुड़ी हर जानकारी का गंभीरता से परीक्षण किया जाएगा। मोबाइल लौटाने की उठी मांग इस दौरान मृतक के भाई ने भरत भूषण तिवारी का मोबाइल फोन वापस दिलाने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि मोबाइल फिलहाल पुलिस के कब्जे में है। इस पर न्यायमूर्ति सिन्हा ने भरोसा दिलाया कि वह इस संबंध में डीएम और एसपी से बातचीत करेंगे। सुरक्षा को लेकर जताई चिंता मृतक के स्वजन ने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जाहिर की। परिवार का कहना था कि घटना के बाद भय का माहौल बना हुआ है। इस पर न्यायमूर्ति सिन्हा ने आश्वस्त किया कि जिला प्रशासन को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे और परिवार की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा। दोषियों पर कार्रवाई की मांग मृतक की मां आशा देवी और पिता काशीनाथ तिवारी ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। न्यायिक जांच आयोग के अध्यक्ष ने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ की जाएगी। वहीं, उनके गांव पहुंचने की सूचना पर दिनभर लोगों की भीड़ जुटी रही और आयोग स्थानीय लोगों से भी जानकारी जुटाकर जांच को आगे बढ़ाने में लगा रहा।

पुलिस और बदमाशों के बीच चली गोलियां, गुरदासपुर में एनकाउंटर के दौरान आरोपी घायल

गुरदासपुर. कुछ दिन पहले बटाला शहर में एक नामी कपड़ा व्यापारी के घर पर हुई फायरिंग के मामले में गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों में से एक आरोपी पुलिस मुठभेड़ के दौरान घायल हो गया। पुलिस ने इस मामले में पहले दो युवकों को गिरफ्तार किया था, जिनकी पहचान बलदेव सिंह उर्फ करण और कुलदीप सिंह, निवासी गांव खजाला, के रूप में हुई थी। जानकारी के अनुसार, थाना सिविल लाइन की पुलिस बलदेव सिंह उर्फ करण को अवैध हथियार की बरामदगी के लिए थाना घुमाण क्षेत्र में लेकर गई थी। इस दौरान आरोपी ने मौके का फायदा उठाते हुए पुलिस पार्टी पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी फायरिंग की, जिसमें गोली आरोपी की टांग में लगी और वह घायल हो गया। घटना की सूचना मिलते ही एसएसपी बटाला डॉ. महिताब सिंह, एसपी Investigation रमणिंदर सिंह, डीएसपी सिटी सुखइंदर सिंह, डीएसपी श्री हरगोबिंदपुर, थाना सिविल लाइन के एसएचओ गुरमीत सिंह तथा सीआईए स्टाफ के प्रभारी सुखराज सिंह भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी। घायल आरोपी को तुरंत इलाज के लिए सिविल अस्पताल बटाला में भर्ती कराया गया। समाचार लिखे जाने तक पुलिस मामले की जांच और कानूनी कार्रवाई में जुटी हुई थी। साथ ही पुलिस मुठभेड़ और हथियार बरामदगी से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है। 

बस्तर रेंज को मिला नया IG, IPS बद्रीनारायण मीणा संभालेंगे कमान

रायपुर. राज्य शासन ने भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के वरिष्ठ अधिकारी बद्रीनारायण मीणा को बस्तर रेंज के नए आईजी नियुक्त किए हैं। इसका आदेश आज गृह (पुलिस) विभाग ने जारी किया है। जारी आदेश के अनुसार, वर्तमान में पुलिस महानिरीक्षक पुलिस मुख्यालय नवा रायपुर के पद पर पदस्थ बद्रीनारायण मीणा को अस्थायी रूप से आगामी आदेश तक पुलिस महानिरीक्षक, बस्तर रेंज, जगदलपुर के पद पर पदस्थ किया गया है। राज्य सरकार द्वारा जारी इस प्रशासनिक आदेश के बाद मीणा अब बस्तर रेंज की कानून-व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी संभालेंगे। बस्तर क्षेत्र नक्सल प्रभावित इलाकों में शामिल होने के कारण यह पद महत्वपूर्ण माना जाता है। सरकार के आदेश के अनुसार यह पदस्थापना आगामी आदेश तक प्रभावी रहेगी। NIA के आईजी बनाए गए हैं सुंदरराज पी बता दें कि बस्तर आईजी छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुंदरराज पी को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में इंस्पेक्टर जनरल (IG) के पद पर नियुक्त किया गया है। इसके चलते बस्तर आईजी का पद खाली था। वर्ष 2003 बैच के आईपीएस अधिकारी सुंदरराज पी लंबे समय तक बस्तर रेंज के आईजी रहे हैं। उन्हें छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियानों के सबसे प्रभावशाली अधिकारियों में गिना जाता है। उनके नेतृत्व में सुरक्षा बलों ने बस्तर के दुर्गम और नक्सल प्रभावित इलाकों में लगातार अभियान चलाए, जिससे माओवादी संगठन को बड़ा नुकसान पहुंचा। नक्सलवाद के खिलाफ अभियान का प्रमुख चेहरा रहे सुंदरराज पी सुंदरराज पी की रणनीति केवल सशस्त्र कार्रवाई तक सीमित नहीं रही। उन्होंने खुफिया तंत्र को मजबूत करने, स्थानीय युवाओं को सुरक्षा अभियानों से जोड़ने, नए सुरक्षा कैंप स्थापित करने और सड़क व विकास कार्यों को आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। अबूझमाड़ जैसे इलाकों में सुरक्षा बलों की पहुंच बढ़ाने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके कार्यकाल में बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया।

संपत्ति विवाद पर सियासत तेज, कांग्रेस के आरोपों के बीच CM मोहन यादव के समर्थन में मंत्री मैदान में

भोपाल  सीएम मोहन यादव और उनके परिवार पर जमीनों की खरीद फरोख्त के आरोप पर बीजेपी ने अब हमलावर रुख अपना लिया है। मामले में सीएम के बचाव में प्रदेश के मंत्रियों की फौज उतर आई। बीजेपी ने राज्य सरकार के आधा दर्जन मंत्रियों के बयानों के वीडियो जारी किए जिसमें सीएम मोहन यादव पर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया गया है। बीजेपी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष व सरकार के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह से लेकर तुलसी सिलावट, चेतन काश्यप, कृष्णा गौर, प्रद्युम्न सिंह तोमर, इंदर सिंह परमार ने इस मामले में कांग्रेस पर पलटवार किया। पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने तो सीएम CM Mohan Yadav पर गलत आरोप लगाने पर कांग्रेस को मानहानि का नोटिस देने की भी बात कही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस, सीएम के रिश्तेदारों की संपत्ति भी जोड़ रही है। प्रदेश कांग्रेस ने सीएम डॉ. मोहन यादव व उनके परिवार के सदस्यों पर कई एकड़ जमीन खरीदने के आरोप लगाए हैं। बुधवार को इस मामले में बीजेपी नेताओं और मंत्रियों ने न केवल सीएम पर लग रहे आरोपों का बचाव किया बल्कि रॉबर्ट वाड्रा के बहाने कांग्रेस को ही घेरा। प्रदेश के लोक निर्माण विभाग यानि पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने सीएम मोहन यादव पर बेबुनियाद आरोप लगाकर उनकी छवि खराब करने का षड्यंत्र रचा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस राजनीतिक दिवालियापन के दौर से गुजर रही है। सीएम मोहन यादव के रिश्तेदारों की संपत्ति को उनसे जोड़ा मंत्री राकेश सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि जब रॉबर्ट वाड्रा का नाम भूमि घोटालों में आता है तो कांग्रेसी इसे व्यक्तिगत बताते हुए किनारा करते हैं जबकि सीएम मोहन यादव के रिश्तेदारों की संपत्ति को उनसे जोड़ा जाता है। उन्होंने मामले में कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि उसे मानहानि का नोटिस देंगे। पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि सरकारी और निजी ट्रस्ट में अंतर होता है, यह कांग्रेस समझ नहीं पाई। जिस वीर भारत न्यास को 1 रुपए में उज्जैन में भूमि देने का आरोप लगाया जा रहा है, वह संस्कृति विभाग का हिस्सा है, न कि निजी न्यास। उन्होंने बताया कि अब लीगल सेल पूरे प्रकरण को देख रहा है। बीजेपी ने सभी मंत्रियों के बयानों के बाकायदा वीडियो जारी किए सरकार के अन्य वरिष्ठ मंत्रियों तुलसी सिलावट, चेतन काश्यप, कृष्णा गौर, प्रद्युम्न सिंह तोमर, इंदर सिंह परमार ने भी जमीन विवाद पर सीएम मोहन यादव का पक्ष प्रस्तुत किया। इससे पहले शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने भी मामले में कांग्रेस पर सवाल दागे थे। बीजेपी ने सभी मंत्रियों के बयानों के बाकायदा वीडियो जारी किए हैं।

निर्धन परिवार, वृद्धजन और दिव्यांग साथी स्वयं को बेसहारा न समझें: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

बुजुर्गों और असहाय लोगों का आदर करना हमारा धर्म : मुख्यमंत्री डॉ. यादव निर्धन परिवार, वृद्धजन और दिव्यांग साथी स्वयं को बेसहारा न समझें प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अंत्योदय का संकल्प हो रहा है सिद्ध मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 33 लाख 92 हजार 695 सामाजिक सुरक्षा पेंशन हितग्राहियों के खातों में अंतरित किए 203 करोड़ 56 लाख रुपये मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय से हितग्राहियों को किया वर्चुअली संबोधित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि घर में बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद होना, तपती धूप में ठंडी छांव के समान होता है। हमारी संस्कृति में बुजुर्गों, असहायों और समाज के सबसे कमजोर वर्ग को आदर देना केवल कर्तव्य नहीं बल्कि हमारा धर्म माना गया है। राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारी कोशिश है कि राज्य का कोई भी निर्धन परिवार, माताएं, बहनें या हमारे दिव्यांग साथी स्वयं को बेसहारा न समझें। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में अंत्योदय का संकल्प सिद्ध हो रहा है। इसी दिशा में राज्य सरकार भी गरीबों, वंचितों और कमजोर वर्गों के कल्याण में जुटी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंगल क्लिक से सामाजिक सुरक्षा पेंशन वितरण के लिए मंत्रालय में आयोजित कार्यक्रम में यह विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम से विभिन्न जिलों के हितग्राही वर्चुअली जुड़े। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 33 लाख 92 हजार 695 से अधिक भाई-बहनों और बुजुर्गों के खातों में माह मई महीने की 203 करोड़ 56 लाख रुपये की सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की। इस अवसर पर सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, संजय शुक्ला, मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव श्रीमती सोनाली वायंगणकर कार्यक्रम में उपस्थित थी। सामाजिक सुरक्षा पेंशन सरकार के स्नेह, सम्मान और सुरक्षा का वचन है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन केवल आर्थिक सहायता नहीं है, अपितु निर्धन परिवारों, दिव्यांग साथियों में आपके प्रति सरकार का स्नेह, सम्मान और सुरक्षा का वचन है। राज्य सरकार सभी को अपने परिवार का हिस्सा मानती है। सरकार प्रत्येक नागरिक के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष में राज्य सरकार ने किसान हितैषी महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। प्रदेश के किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर कर्ज दिया जाएगा और इसे चुकाने की समयावधि 31 मार्च नहीं होगी, बल्कि किसान जिस तारीख को कर्ज लेंगे, उसे अगले 12 माह की अवधि में ऋण भरना होगा। 10 साल में देश के 25 करोड़ से ज्यादा लोग बाहर आए गरीबी से मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश का प्रत्येक नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रहा है। पिछले 10 वर्षों में देश के 25 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के माध्यम से 80 करोड़ से अधिक लोगों को हर महीने मुफ्त राशन मिल रहा है। प्रधानमंत्री आवास, आयुष्मान भारत, जल-जीवन मिशन, उज्जवला योजना जैसी योजनाओं ने जन-कल्याण का इतिहास लिखा है। राज्य सरकार अधिकांश कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में देश में अग्रणी है। सरकार गरीब, युवा, नारी और किसान कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि वितरण कार्यक्रम में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से वरिष्ठजन, माताएं-बहनें और हितग्राही वर्चुअली सम्मिलत हुए।  

बेअदबी मामले में CM मान का बड़ा खुलासा, कहा- गले के निशान बताते हैं पूरी साजिश

चंडीगढ़  बेअदबी मामले में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बड़ा पलटवार करते हुए दावा किया है कि उनके खिलाफ सुनियोजित साजिश रची गई है. वीडियो में दिख रहा शख्स वह नहीं, बल्कि उनके चेहरे का मास्क पहनने वाला व्यक्ति है. इस दौरान, सीएम मान ने गले के निशान से लेकर हुलिये तक कई सबूत पेश भी किए. साथ ही, उन्‍होंने दावा किया कि लोगों के मन में उनके खिलाफ नफरत फैलाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने साफ कहा कि धर्म का इस्तेमाल राजनीति के लिए करना गलत है और आने वाले दिनों में इस पूरे मामले के पीछे पैसे देने वालों का भी खुलासा किया जाएगा।  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी कथित आपत्तिजनक वीडियो को लेकर कई बड़े दावे किए हैं. उन्होंने दावा किया कि सोशल मीडिया पर वायरल की गई वीडियो पूरी तरह फर्जी है और इसे सियासी फायदे के लिए तैयार कराया गया है. इस नकली वीडियो के जरिए सिर्फ उनकी छवि खराब करने की कोशिश नहीं है, बल्कि लोगों के मन में उनके खिलाफ धार्मिक आधार पर नफरत पैदा करने की साजिश भी है।      प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भगवंत मान ने एक वीडियो भी दिखाई. उनका कहना था कि वीडियो बनाने का दावा करने वाले जगमन समरा के हाथ में उनके चेहरे वाला मास्क साफ दिखाई देता है. वीडियो में जिस व्यक्ति को दिखाया गया है, उसने उनका मास्क पहना हुआ है।      उन्होंने सवाल उठाया कि अगर वीडियो असली होती तो उसमें उनके गले पर बचपन के ऑपरेशन का निशान क्यों नहीं दिखाई देता. उन्होंने कहा कि मेरे गले पर बचपन से ऑपरेशन का निशान है, लेकिन वायरल वीडियो में ऐसा कोई निशान नहीं है।      मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति हमेशा चश्मा लगाए हुए नजर आता है, क्योंकि आंखों से असली पहचान छिपाई नहीं जा सकती. होटल के कमरे में गुरु साहब की तस्वीर लगाए जाने की बात भी पूरी तरह गलत है।      उन्होंने कहा कि नवंबर 2016 के बाद वह कभी कनाडा गए ही नहीं, जबकि वीडियो बनाने वाला व्यक्ति कनाडा में बैठा है. सीएम भगवंत मान ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में राजनीतिक साजिश रची गई है. कांग्रेस, अकाली दल और बीजेपी मिलकर उनके खिलाफ सांझा मोर्चा बनाकर काम कर रहे हैं।      उनका कहना था कि उनकी सरकार ने बेअदबी कानून, पालकी साहब वाली गाड़ियों के टोल और पवित्र शहरों को विशेष दर्जा देने जैसे कई अहम फैसले किए हैं, जिन्हें पहले की सरकारें नहीं कर सकीं. इसी वजह से उन्हें लगातार निशाना बनाया जा रहा है।      मुख्यमंत्री मान ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) पर भी सवाल उठाए. उन्होंने पूछा कि गुरुद्वारों के बाहर उनके खिलाफ बोर्ड क्यों लगाए जा रहे हैं, जबकि पहले ऐसा कभी नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि एसजीपीसी के प्रधान खुद सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि वह सुखबीर बादल के सिपाही हैं।      भगवंत मान ने कहा कि वह पहले भी अकाल तख्त साहिब गए थे और अगर दोबारा बुलाया जाएगा तो फिर जाएंगे. उन्होंने कहा कि उस समय उन्होंने कार्यवाही को लाइव करने की भी अपील की थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया. अब अलग-अलग क्लिप जारी कर लोगों को गुमराह किया जा रहा है।  गुरु नानक नाम लेवा संगत के हाथों अंतिम फैसला मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि वह इस नकली वीडियो को अकाल तख्त साहिब को भी भेजेंगे ताकि उसकी निष्पक्ष जांच हो सके. उन्होंने कहा कि अंतिम फैसला गुरु नानक नाम लेवा संगत पर छोड़ते हैं. साथ ही उन्होंने ऐलान किया कि जगमन समरा को इंटरपोल की मदद से भारत लाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है. उन्होंने दावा किया कि आने वाले दिनों में यह भी सामने लाया जाएगा कि इस वीडियो को बनवाने के लिए पैसा किसने दिया था. मान ने कहा कि चाहे जितनी कोशिश कर ली जाए, पंजाब के लोगों के मन में उनके खिलाफ नफरत पैदा करने की यह साजिश सफल नहीं होगी।