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मध्यप्रदेश में मानसून की रफ्तार तेज, शाजापुर-नर्मदापुरम में 2 इंच बारिश; भोपाल-उज्जैन में 48 घंटे में एंट्री

 भोपाल मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 48 घंटे प्रदेश के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं। संभावना है कि मानसून इसी दौरान भोपाल और उज्जैन संभाग तक पहुंच जाएगा। हालांकि ग्वालियर-चंबल, सागर, रीवा और शहडोल संभाग के जिलों में मानसून सबसे आखिर में दस्तक देगा। इस बीच शुक्रवार को प्रदेश के 45 जिलों में तेज हवा और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।  दो जिलों में ऑरेंज अलर्ट, कई इलाकों में तेज बारिश की संभावना मौसम विभाग ने आगर-मालवा और सीहोर में 60 किलोमीटर प्रतिघंटा तक की रफ्तार से आंधी और तेज बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं भोपाल, रायसेन, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, उज्जैन, देवास, शाजापुर, रतलाम, मंदसौर, नीमच, धार, झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह और छतरपुर समेत कई जिलों में हल्की से भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इसके विपरीत ग्वालियर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, निवाड़ी और टीकमगढ़ में फिलहाल मौसम शुष्क रहने और धूप निकलने के आसार हैं। शाजापुर में सबसे ज्यादा बरसात गुरुवार को प्रदेश के कई हिस्सों में झमाझम बारिश हुई। सबसे अधिक 51 मिमी (दो इंच से ज्यादा) वर्षा शाजापुर में दर्ज की गई, जबकि श्योपुर और बालाघाट में भी करीब आधा इंच पानी गिरा। इंदौर, खंडवा, शिवपुरी, छिंदवाड़ा, खरगोन और मैहर सहित कई जिलों में तेज हवा के साथ बारिश हुई। बारिश से तापमान में आई गिरावट लगातार बारिश के कारण प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में दिन के तापमान में गिरावट दर्ज की गई। खरगोन सबसे ठंडा जिला रहा, जहां अधिकतम तापमान 29.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। बैतूल, सिवनी, खंडवा, धार और नर्मदापुरम सहित कई जिलों में पारा सामान्य से नीचे रहा। बड़े शहरों में भोपाल का अधिकतम तापमान 32.8 डिग्री, इंदौर 33.9 डिग्री, उज्जैन 33.8 डिग्री, जबलपुर 38.1 डिग्री और ग्वालियर 40.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। 15 जिलों में हुई बारिश गुरुवार को शाजापुर और नर्मदापुरम में करीब 2 इंच बारिश हुई। श्योपुर, रायसेन और सागर में सवा इंच से ज्यादा पानी गिरा। वहीं गुना में 1 इंच, पचमढ़ी में पौन इंच और बालाघाट में करीब आधा इंच बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा इंदौर, खंडवा, बैतूल, राजगढ़, रतलाम, शिवपुरी, मैहर और छिंदवाड़ा समेत कई जिलों में भी बारिश का दौर जारी रहा। बिजली गिरने से बुजुर्ग की मौत शाजापुर में आकाशीय बिजली गिरने से एक बुजुर्ग की मौत हो गई। वहीं लगातार बारिश को देखते हुए इंदौर के जोखिम वाले पर्यटन स्थलों पर 22 अगस्त तक पर्यटकों की एंट्री पर रोक लगा दी गई है। कई शहरों में तापमान गिरा बारिश के बाद प्रदेश के कई शहरों में दिन का तापमान सामान्य से नीचे पहुंच गया। खरगोन सबसे ठंडा रहा, जहां अधिकतम तापमान 29.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं भोपाल में 32.8 डिग्री, इंदौर में 33.9 डिग्री, उज्जैन में 33.8 डिग्री, जबलपुर में 38.1 डिग्री और ग्वालियर में सबसे अधिक 40.5 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। अभी भी सामान्य से कम बारिश मानसून की सक्रियता बढ़ने से प्रदेश में वर्षा की कमी कुछ कम हुई है। एक जून से अब तक सामान्य रूप से 91.7 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, जबकि 52.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। यानी प्रदेश अभी भी सामान्य से 43 प्रतिशत कम बारिश पर है। हालांकि 24 जून तक यह कमी 50 प्रतिशत थी, जिससे स्पष्ट है कि हाल की बारिश ने स्थिति में करीब सात प्रतिशत सुधार किया है। किन जिलों में कम और कहां ज्यादा बारिश अब तक अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आलीराजपुर, बड़वानी, बैतूल, भिंड, दतिया, देवास, धार, गुना, ग्वालियर, हरदा, झाबुआ, खंडवा, खरगोन, मुरैना, नर्मदापुरम, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई है। वहीं भोपाल, अशोकनगर, आगर-मालवा, मंदसौर, नीमच, श्योपुर, बुरहानपुर, इंदौर, शाजापुर और सीहोर ऐसे जिले हैं जहां सामान्य से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। 15 जिलों तक पहुंच चुका है मानसून अब तक मानसून प्रदेश के 15 जिलों-आलीराजपुर, इंदौर, हरदा, धार, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, खरगोन, सिवनी, बालाघाट, मंडला, बड़वानी और डिंडौरी में प्रवेश कर चुका है। इन जिलों के कई क्षेत्रों में चार इंच से अधिक बारिश दर्ज की गई है। 

वेल्डिंग मिस्त्री की बेटी सिमरन प्रवीन ने बास्केटबॉल में जीता गोल्ड, राष्ट्रीय स्तर पर चमकी प्रतिभा

बीकानरे  कहा जाता है कि यदि इरादे मजबूत हों और मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो रास्ते की हर मुश्किल आसान हो जाती है. इसका एक जीता-जागता और प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है राजस्थान के बीकानेर की रहने वाली युवा बास्केटबॉल खिलाड़ी सिमरन प्रवीन ने. सिमरन ने अपने परिवार के बेहद सीमित संसाधनों और कमजोर आर्थिक हालातों के बावजूद अपनी कड़ी मेहनत और असाधारण प्रतिभा के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी पहचान बनाई है. एक साधारण वेल्डिंग मिस्त्री की बेटी सिमरन अब तक दो राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में राजस्थान का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और एक नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर बीकानेर जिले सहित पूरे प्रदेश का नाम रोशन कर चुकी हैं. वर्तमान में सिमरन प्रवीन 12वीं कक्षा की छात्रा हैं और वे अपनी पढ़ाई के साथ-साथ बास्केटबॉल के मैदान पर भी लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही हैं. बेहद कम समय में राष्ट्रीय फलक पर अपनी चमक बिखेरने वाली सिमरन का अब अगला लक्ष्य भारतीय सीनियर बास्केटबॉल टीम का हिस्सा बनना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए मेडल जीतना है. तीन साल पहले शुरू हुआ था बास्केटबॉल का सफर सिमरन बताती हैं कि उन्होंने करीब तीन वर्ष पहले ही बास्केटबॉल खेलना शुरू किया था. शुरुआत में उन्हें इस खेल के नियमों और तकनीकों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन एक स्थानीय ट्रायल में भाग लेने के बाद बास्केटबॉल के प्रति उनका लगाव इतना बढ़ गया कि उन्होंने इसे ही अपनी जिंदगी का मुख्य लक्ष्य बना लिया. इसके बाद नियमित कड़े अभ्यास, अनुशासन और अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने बहुत ही कम समय में राष्ट्रीय स्तर तक का एक सफर तय कर लिया, जो हर किसी के लिए प्रेरणादायक है. सिमरन ने बताया कि वे अब तक दो नेशनल प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी हैं. हाल ही में जनवरी माह में राजस्थान के बाड़मेर में आयोजित स्कूली राष्ट्रीय खेलों में भी उन्होंने अपनी टीम के लिए शानदार प्रदर्शन किया. इससे पहले आयोजित हुई एक अन्य प्रतिष्ठित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उन्होंने गोल्ड मेडल जीतकर अपनी अद्भुत खेल प्रतिभा का लोहा देश भर में मनवाया था. बहन से मिली प्रेरणा, कोच ने तराशा हुनर सिमरन अपनी इस शानदार सफलता का एक बड़ा श्रेय अपने कोच नरेंद्र कस्वा को देती हैं. उनका कहना है कि उनके कोच ने हमेशा उन्हें मैदान पर और मैदान के बाहर बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया है. वे खिलाड़ियों को केवल खेल की तकनीक और ड्रिबलिंग ही नहीं सिखाते, बल्कि जीवन में अनुशासन और लक्ष्य के प्रति पूर्ण समर्पण का महत्व भी गहराई से समझाते हैं. सिमरन बताती हैं कि कोच अक्सर सभी खिलाड़ियों से कहते हैं कि “मोबाइल में कुछ नहीं रखा है, खेलो और अपना भविष्य बनाओ.” कोच की यही बातें सिमरन के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बन गईं. इसके अलावा सिमरन ने बताया कि बास्केटबॉल खेलने की शुरुआती प्रेरणा उन्हें अपनी बड़ी बहन से मिली थी, जिन्होंने उन्हें इस खेल को अपनाने की सलाह दी थी. माता-पिता ने आर्थिक तंगी के बाद भी दिया पूरा साथ एक बेहद साधारण और मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाली सिमरन के पिता यूसुफ अली वेल्डिंग का कार्य करते हैं, जिससे उनके घर का गुजारा चलता है, जबकि उनकी माता मन्नत बानो एक कुशल गृहिणी हैं. चार भाई-बहनों में सिमरन सबसे छोटी और सबकी लाडली हैं. परिवार की आर्थिक परिस्थितियां बहुत ज्यादा मजबूत नहीं होने के बावजूद उनके माता-पिता ने कभी भी सिमरन के कदमों को रुकने नहीं दिया और अपनी क्षमता से बढ़कर उनकी खेल प्रतिभा को आगे बढ़ाने में पूरा सहयोग दिया. मैदान पर जब सिमरन उतरती हैं, तो अपनी तेज रफ्तार, बेहतरीन बॉल कंट्रोल और शानदार शूटिंग स्किल के दम पर विपक्षी टीम के डिफेंस को पूरी तरह से ध्वस्त कर देती हैं. सिमरन का कहना है कि उनका सबसे बड़ा सपना भारतीय टीम की आधिकारिक जर्सी पहनकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करना है, जिसके लिए वे रोज घंटों पसीना बहा रही हैं.

गरुड़ पुराण के अनुसार रात में अंतिम संस्कार क्यों नहीं किया जाता, जानिए धार्मिक कारण

जैसे दिन के बाद रात होना निश्चित है, ठीक उसी प्रकार यह भी निश्चित है कि जिसने इस मृत्यु लोक में जन्म लिया है, उसे एक न एक दिन मृत्यु का सामना अवश्य करना पड़ता है. यानी पृथ्वी लोक का सबसे बड़ा सत्य है- मृत्यु. फिर भी कुछ लोग इस सच्चाई को स्वीकार नहीं कर पाते है. आपने अक्सर देखा होगा कि हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद शव का दाह संस्कार किया जाता है. लेकिन अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु सूर्यास्त के बाद होती है, तो उसका अंतिम संस्कार उसी समय नहीं किया जाता, बल्कि अगले दिन किया जाता है. ऐसे में एक बात और ध्यान देने वाली होती है कि शव को रात भर कभी भी अकेला नहीं छोड़ा जाता है. लेकिन ऐसा क्यों किया जाता है? आइए, इसके पीछे के धार्मिक कारणों को समझते हैं, जिनका उल्लेख गरुड़ पुराण में मिलता है. किन परिस्थितियों में टाल दिया जाता है अंतिम संस्कार? किन स्थितियों में दाह संस्कार को कुछ समय के लिए रोका जाता है? गरुड़ पुराण के मुताबिक, यदि मृत्यु सूर्यास्त के बाद हो जाए या यदि मृत्यु पंचक काल में हो तो ऐसी परिस्थितियों में शव को घर पर ही रखा जाता है. शुभ समय आने के बाद ही अंतिम संस्कार किया जाता है. मान्यता है कि इन समयों में दाह संस्कार करने से आत्मा को मोक्ष प्राप्त नहीं होता है. शव को अकेला क्यों नहीं छोड़ा जाता है? 1. जानवरों से सुरक्षा गरुड़ पुराण के मुताबिक, अगर शव को अकेला छोड़ दिया जाए, तो कुत्ते या अन्य जानवर उसे नुकसान पहुंचा सकते हैं. मान्यता है कि इससे मृत आत्मा को भी यमलोक की यात्रा में कष्ट झेलने पड़ते हैं. 2. दुर्गंध से बचाव मृत शरीर से कुछ समय बाद दुर्गंध आने लगती है. इसलिए वहां किसी का उपस्थित रहना जरूरी होता है, जो धूप या अगरबत्ती जलाकर वातावरण को शुद्ध रखे. 3. नकारात्मक शक्तियों का डर गरुड़ पुराण में बताया गया है कि रात के समय आसपास भटकने वाली नकारात्मक या दुष्ट आत्माएं मृत शरीर में प्रवेश कर सकती हैं. इससे मृतक और उसके परिवार को कष्ट झेलने पड़ सकते हैं. 4. आत्मा की उपस्थिति ऐसी मान्यता है कि मृत्यु के बाद कुछ समय तक आत्मा अपने शरीर के आसपास ही रहती है और अपने परिजनों को देखती रहती है. इसलिए शव को अकेला नहीं छोड़ा जाता. संतान का इंतजार भी होता है जरूरी गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु, गरुड़ जी से कहते हैं कि यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए और उसकी संतान उपस्थित न हो, तो अंतिम संस्कार को तब तक टाला जा सकता है जब तक पुत्र या पुत्री आ न जाए. मान्यता है कि जब तक संतान मुखाग्नि नहीं देती, तब तक आत्मा को पूर्ण मुक्ति नहीं मिलती है. रात में अंतिम संस्कार क्यों नहीं किया जाता? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि सूर्यास्त के बाद दाह संस्कार किया जाए, तो आत्मा को मोक्ष प्राप्त नहीं होता है और उसे निम्न योनि जैसे असुर, पिशाच आदि, में जन्म लेना पड़ सकता है.

राजस्थान सरकार का बड़ा कदम, ऊर्जा बचाने वाले भवनों और ई-वाहनों को मिलेगा बढ़ावा

 जयपुर मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने प्रदेश में ऊर्जा दक्ष भवनों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रस्तावित राजस्थान एनर्जी कंजर्वेशन सस्टेनेबल बिल्डिंग कोड को अधिसूचित करने की प्रक्रिया को गति देने के निर्देश दिए हैं। इससे भवनों में ऊर्जा की खपत को कम किया जा सकेगा। मुख्य सचिव ने इस कोड के अनुपालन मैकेनिज्म को भी प्रभावी बनाने के निर्देश दिए ताकि प्रदेश में भवन निर्माण के क्षेत्र में ऊर्जा दक्षता के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्रोत्साहन दिया जा सके। मुख्य सचिव ने यह निर्देश गुरूवार को शासन सचिवालय में प्रदेश में एनर्जी ट्रांजिशन पर गठित राज्य स्तरीय स्टीयरिंग समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रदान किए।  कोड तथा इससे संबंधित रूल्स के प्रारूपों की समीक्षा करते हुए उन्होंने इसे जल्द अंतिम रूप देने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सौर ऊर्जा सहित नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा दिए जाने से ऊर्जा परिदृश्य में सकारात्मक बदलाव आया है और राजस्थान इसमें निरन्तर अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने पीएम ई— ड्राईव योजना के अन्तर्गत प्रदेश के प्रमुख शहरों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों के लिए व्यापक रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट्स, ग्रिड स्थिरता और एनर्जी स्टोरेज परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि राजस्थान मजबूत एवं स्थिर ग्रिड तंत्र विकसित करने की दिशा में भी पूरी तरह प्रतिबद्धता से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन को और गति प्रदान करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने सरकारी भवनों में रूफ टॉप सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के कार्य की समीक्षा करते हुए कहा कि इससे राजकीय कार्यस्थलों पर बिजली की बचत को प्रोत्साहन मिला है। बैठक में ऊर्जा सचिव सुश्री आरती डोगरा ने ग्रिड की स्थिरता, सौर ऊर्जा परियोजनाओं के क्रियान्वयन सहित ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से जानकारी दी।

ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026 पर मेष, मिथुन, सिंह, तुला और धनु राशि को मिलेगा बड़ा लाभ

 सनातन धर्म में ज्येष्ठ पूर्णिमा का विशेष महत्व है. इस दिन स्नान-दान और लक्ष्मी-नारायण की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है. इस वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा 29 जून, सोमवार को मनाई जाएगी. पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 29 जून को प्रातः 3:06 बजे से होगी और इसका समापन 30 जून को सुबह 5:26 बजे होगा. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस साल की ज्येष्ठ पूर्णिमा कई राशियों के लिए बेहद भाग्यशाली रहने वाली है. सोमवार का दिन होने और ग्रहों की शुभ स्थिति के कारण कुछ विशेष राशियों का अच्छा टाइम शुरू होने जा रहा है. आइए जानते हैं कि इस पूर्णिमा से किन राशियों के जीवन में बड़े सकारात्मक बदलाव आने वाले हैं. मेष राशि (Aries) मेष राशि के जातकों के लिए ज्येष्ठ पूर्णिमा वरदान की तरह साबित हो सकती है. लंबे समय से रुके हुए काम इस अवधि में गति पकड़ेंगे. कार्यक्षेत्र में आपके प्रदर्शन की सराहना होगी और वरिष्ठ अधिकारियों का पूरा सहयोग मिलेगा. आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और आय के नए स्रोत बन सकते हैं. परिवार के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बने रहेंगे. मिथुन राशि (Gemini) मिथुन राशि के लोगों के लिए यह समय करियर में बड़ी छलांग लगाने का है. यदि आप नौकरी बदलने का विचार कर रहे हैं, तो अच्छे अवसर मिल सकते हैं. व्यापार से जुड़े जातकों को इस दौरान कोई बड़ा सौदा हाथ लग सकता है, जिससे मुनाफे में वृद्धि होगी. समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा. मानसिक तनाव से मुक्ति मिलेगी. सिंह राशि (Leo) सिंह राशि वालों के लिए ज्येष्ठ पूर्णिमा से सुनहरे दिनों की शुरुआत हो सकती है. आपकी नेतृत्व क्षमता में निखार आएगा. निवेश के दृष्टिकोण से यह समय काफी लाभदायक रहने वाला है. पैतृक संपत्ति से जुड़े विवाद सुलझ सकते हैं. जीवनसाथी के साथ रिश्ते और मजबूत होंगे. आप दोनों मिलकर भविष्य की योजनाएं बनाएंगे. तुला राशि (Libra) तुला राशि के जातकों के लिए यह पूर्णिमा आर्थिक रूप से बेहद शुभ रहने वाली है. फंसा हुआ धन वापस मिल सकता है. नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या वेतन वृद्धि की खुशखबरी मिल सकती है. जो लोग कला, लेखन या डिजिटल मीडिया से जुड़े हैं, उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का बेहतरीन मंच मिलेगा. स्वास्थ्य में भी सुधार देखने को मिलेगा. धनु राशि (Sagittarius) धनु राशि के जातकों का भाग्य इस अवधि में पूरी तरह से उनका साथ देगा. कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता मिल सकती है. विद्यार्थियों के लिए यह समय बेहद अनुकूल है, परीक्षाओं में अच्छे परिणाम मिलेंगे. धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों की ओर आपका झुकाव बढ़ेगा, जिससे मन को शांति मिलेगी. ज्येष्ठ पूर्णिमा पर जरूर करें ये उपाय यदि आप इस शुभ दिन का पूरा लाभ उठाना चाहते हैं, तो पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय के समय कच्चे दूध में चीनी और चावल मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें. इसके साथ ही 'ऊं सों सोमाय नमः' मंत्र का जप करें. चूंकि इस बार पूर्णिमा सोमवार को है, इसलिए शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करना भी बेहद फलदायी रहेगा.

साई सुदर्शन की शतकीय पारी से मजबूत हुई इंडिया ए की स्थिति गॉल टेस्ट में

गॉल  भारत ए और श्रीलंका ए के बीच गाले में खेले जा रहे पहले चार दिवसीय अनाधिकारिक टेस्ट मैच के दूसरे दिन भारतीय टीम ने अपनी स्थिति बेहद मजबूत कर ली है। पहली पारी में बल्लेबाजी करते हुए इंडिया ए की टीम ने 99 ओवर के खेल में 5 विकेट खोकर 381 रनों का बड़ा स्कोर खड़ा कर लिया है। टीम के लिए कप्तान और विकेटकीपर बल्लेबाज ध्रुव जुरेल क्रीज पर डटे हुए हैं और वह अपने शतक के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। जुरेल 177 गेंदों का सामना करते हुए 8 चौकों की मदद से 97 रन बनाकर खेल रहे हैं। दूसरे दिन उनका साथ हर्षल दुबे दे रहे हैं, जो 7 रन बनाकर क्रीज पर मौजूद हैं। जुरेल से पहले साई सुदर्शन का कमाल इससे पहले कल के स्कोर 4 विकेट पर 333 रन से आगे खेलते हुए कप्तान ध्रुव जुरेल और शेख रशीद ने पारी को आगे बढ़ाया। शेख रशीद ने बेहतरीन बल्लेबाजी करते हुए अपना अर्धशतक पूरा किया, लेकिन वह 113 गेंदों पर 5 चौकों की मदद से 63 रन बनाकर चामिका गुणसेकरा की गेंद पर आउट हो गए। इस मैच में भारत के लिए सबसे बड़ी पारी ओपनर साई सुदर्शन ने खेली, जिन्होंने 175 गेंदों में 19 चौकों की बदौलत 132 रनों की शतकीय पारी खेली। अन्य बल्लेबाजों में आयुष पांडे ने 25 रन, ऋतुराज गायकवाड़ ने 22 रन और देवदत्त पडिक्कल ने 12 रनों का योगदान दिया। श्रीलंकाई गेंदबाजों ने खाए खूब सारे रन श्रीलंका ए के गेंदबाजों को भारतीय बल्लेबाजों को रोकने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी और उन्होंने जमकर रन लुटाए। मेजबान टीम की तरफ से दिलुम सुदीरा और चामिका गुणसेकरा सबसे सफल गेंदबाज रहे, जिन्होंने 2-2 विकेट अपने नाम किए। हालांकि, इसके लिए दिलुम सुदीरा ने अपने 31 ओवरों के स्पेल में 3.40 की इकोनॉमी से 105 रन खर्च किए। वहीं चामिका गुणसेकरा ने 14 ओवर गेंदबाजी की और 5.00 की महंगी इकोनॉमी से 70 रन लुटाए। अन्य गेंदबाजों की बात करें तो रविन्दु फर्नांडो ने सबसे ज्यादा 22 ओवर फेंके और 4.00 की इकोनॉमी से 87 रन देकर 1 विकेट हासिल किया। इसके अलावा दुलज समुदिथा ने 16 ओवर में 59 रन और कविंदु पाथिरत्ने ने 13 ओवर में 49 रन दिए, लेकिन इन दोनों को कोई सफलता हाथ नहीं लगी। कप्तान सहान अराचिगे ने भी 3 ओवर की किफायती गेंदबाजी की और मात्र 8 रन दिए।

Haryana High Court का बड़ा फैसला, 396 दिन अनुपस्थित पुलिसकर्मी की अनिवार्य रिटायरमेंट कायम

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति दंड नहीं बल्कि जनहित में लिया गया प्रशासनिक निर्णय होता है और इसके लिए कर्मचारी के पूरे सेवा रिकॉर्ड को आधार बनाया जा सकता है। अदालत ने कहा कि पहले दी गई विभागीय सजा के बाद अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश अपने आप में दोहरी सजा नहीं माना जा सकता। जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने करनाल निवासी हरियाणा पुलिस के एक कर्मचारी की अपील खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। हालांकि, अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि कर्मचारी के लंबित सेवा लाभ तीन माह के भीतर जारी किए जाएं। पुलिस कर्मी ने एकल पीठ के 11 फरवरी 2026 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी अनिवार्य सेवानिवृत्ति के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी गई थी। उनका तर्क था कि उन्हें पहले ही 396 दिन तक ड्यूटी से गैर-हाजिर रहने के मामले में दंडित किया जा चुका है, इसलिए उसी आधार पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति देना दोहरी सजा के समान है। हाई कोर्ट ने अस्वीकार की दलील हाई कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि कानून स्पष्ट है कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होती, बल्कि जनहित में यह तय करने का अधिकार नियोक्ता के पास है कि किसी कर्मचारी को आगे सेवा में बनाए रखना उचित है या नहीं। इसके लिए कर्मचारी के पूरे सेवा रिकॉर्ड का मूल्यांकन किया जा सकता है। अदालत ने पाया कि याची को अतीत में कई बार चेतावनी और निंदा जैसी सजाएं मिल चुकी थीं। वर्ष 2017 में उन्हें समय पर अदालत और महाधिवक्ता कार्यालय में उपस्थित नहीं होने पर निंदा की सजा दी गई थी। इसके अलावा 2018 और 2019 में भी विभिन्न मामलों में चेतावनी और निंदा के दंड दिए गए थे। रिपोर्ट में ईमानदारी पर उठे सवाल अदालत ने उनकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्टों का भी उल्लेख किया, जिनमें उन्हें कई अवसरों पर औसत से नीचे दर्ज किया गया था। एक रिपोर्ट में उनकी ईमानदारी को संदिग्ध बताया गया, जबकि व्यवहार, नेतृत्व क्षमता और सरकारी कार्यों में रुचि को भी संतोषजनक नहीं माना गया था। रिपोर्ट में उन्हें लापरवाह, गैर-जिम्मेदार और अविश्वसनीय कर्मचारी तक कहा गया था। खंडपीठ ने कहा कि इन सभी तथ्यों को देखते हुए सक्षम प्राधिकारी के पास यह निष्कर्ष निकालने के पर्याप्त आधार थे कि कर्मचारी की आगे की सेवा जनहित में नहीं है और वह विभाग के लिए ''डेडवुड'' बन चुका है। अदालत ने माना कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति का निर्णय उचित सामग्री पर आधारित था, इसलिए इसमें न्यायिक हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता। इसी के साथ अपील को खारिज कर दिया गया।

विंबलडन से पहले सिनर का दमदार प्रदर्शन, नारी को सीधे सेटों में हराया

लंदन  दुनिया के नंबर एक टेनिस खिलाड़ी जानिक सिनर ने कहा कि वह विम्बलडन में अपने खिताब का बचाव करने को लेकर आश्वस्त हैं। बुधवार को लंदन की भीषण गर्मी में खेले गए प्रदर्शनी मुकाबले में उन्होंने ब्रिटेन के कैमरन नारी को 6-3, 6-3 से हराया। फ्रेंच ओपन में शारीरिक परेशानी के बाद यह उनका पहला मुकाबला था। घास के कोर्ट पर खेले जाने वाले ग्रैंड स्लैम विंबलडन की शुरुआत सोमवार से होगी। सिनर ने इस टूर्नामेंट से पहले किसी भी एटीपी टूर स्तर के मुकाबले में हिस्सा नहीं लिया है। ऐसे में जार्जियो अरमानी टेनिस क्लासिक में मिली यह जीत उनके लिए अच्छी तैयारी साबित हुई। सिनर ने कहा कि आज काफी गर्मी थी, लेकिन शारीरिक रूप से मैं अच्छा महसूस कर रहा था। उन्होंने यह भी बताया कि फ्रेंच ओपन में अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्होंने कई चिकित्सकीय परीक्षण कराए। बुधवार को आल इंग्लैंड क्लब में अभ्यास के दौरान सिनर ने कूलिंग वेस्ट पहनी थी। हालांकि, नारी के विरुद्ध मुकाबले में उन्होंने पहले की तरह बर्फ की थैलियों का इस्तेमाल नहीं किया। फुलहम में दोपहर के समय तापमान 33 डिग्री सेल्सियस था, जबकि सोमवार को विम्बलडन के पहले दिन तापमान लगभग 24 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। फ्रेंच ओपन में सिनर दो सेट और तीसरे सेट में 5-1 की बढ़त के बावजूद अर्जेंटीना के जुआन मैनुअल सेरुंडोलो से 3-6, 2-6, 7-5, 6-1, 6-1 से हार गए थे।

लाउडस्पीकर से अजान पर सख्ती की तैयारी! डेनमार्क सरकार के बयान से छिड़ी नई बहस

कोपेनहेगन डेनमार्क की वामपंथी सरकार ने लाउडस्पीकर पर अजान देने पर रोक लगाने की बात कही है। सरकार में मंत्री मोर्टन बोडस्कोव ने कहा कि देश कुछ इलाके 'इस्लामाबाद के उपनगर' जैसे लगते हैं। ऐसे में हम अजान को कानूनी तौर पर बैन करने पर विचार कर रहे हैं। डेनमार्क सरकार ने नमाज से पहले अजान पर रोक लगाने के पीछे इस्लाम के प्रभाव के बढ़ने (इस्लामीकरण) की चिंता बताई जा रही है। सत्ताधारी सोशल डेमोक्रेट्स पार्टी की मस्जिदों में लाउडस्पीकर का इस्तेमाल रोकने की यह तीसरी कोशिश है। द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, सेंटर-लेफ्ट सोशल डेमोक्रेट्स पार्टी के सदस्य और सरकार में आव्रजन मंत्री मोर्टन बोडस्कोव ने अपने एक बयान में कहा है कि नई सरकार अजान पर रोक लगाने के कानूनी पहलुओं की फिर से जांच शुरू करेगी। उन्होंने इसके लिए प्लान तैयार कर लेने का दावा किया है। बोडस्कोव के नेतृत्व में डेनमार्क की आव्रजन और एकीकरण नीतियों को भी सख्त बनाया जा रहा है। यूरोप में बढ़ते प्रवासन और इस्लामीकरण को लेकर जारी बहस के बीच अब डेनमार्क ने भी बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है. देश की सरकार मस्जिदों से लाउडस्पीकर पर दी जाने वाली अजान पर कानूनी प्रतिबंध लगाने की संभावना पर विचार कर रही है. डेनमार्क के इमीग्रेशन मामलों के मंत्री मोर्टन बोडस्कोव ने कहा कि अजान की आवाज डेनमार्क की पहचान का हिस्सा नहीं है और लोग यह महसूस न करें कि वे किसी यूरोपीय शहर की बजाय इस्लामाबाद के किसी शहर में पहुंच गए हैं।  बोडस्कोव ने डेनिश समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा, "डेनमार्क की छतों के ऊपर अजान की आवाज नहीं सुनाई देनी चाहिए." उनका कहना है कि सरकार इस बात की कानूनी समीक्षा कर रही है कि क्या ऐसा प्रतिबंध देश के संविधान के दायरे में लगाया जा सकता है।  हालांकि, फिलहाल यह सिर्फ एक प्रस्ताव है और इसे अंतिम मंजूरी नहीं मिली है. डेनमार्क का संविधान सार्वजनिक रूप से धार्म के पालन की स्वतंत्रता देता है, इसलिए सरकार को यह भी देखना होगा कि ऐसा कानून संवैधानिक रूप से कितना टिकाऊ होगा।  पहले भी उठ चुका है यह मुद्दा डेनमार्क में यह बहस नई नहीं है. राजधानी कोपेनहेगन समेत कई इलाकों में पहले से ही स्थानीय शोर-शराबे से जुड़े नियमों के कारण लाउडस्पीकर पर अजान को सीमित किया गया है. इसके अलावा 2023 में सरकार ने धार्मिक ग्रंथों के अपमान पर भी कानून बनाया था. यह फैसला उस समय लिया गया था जब कुरान जलाने की घटनाओं के बाद कई मुस्लिम देशों ने कड़ी नाराजगी जताई थी।  डेनमार्क में करीब 2.7 लाख मुस्लिम रहते हैं और देशभर में लगभग 100 मस्जिदें हैं. ऐसे में अजान पर संभावित प्रतिबंध को मुस्लिम समुदाय से जुड़े बड़े फैसले के रूप में देखा जा रहा है।  यूरोप में तेज हुई इस्लामीकरण पर बहस हाल के वर्षों में यूरोप के कई देशों में प्रवासन, हिजाब, धार्मिक पहचान और सार्वजनिक धार्मिक गतिविधियों को लेकर बहस लगातार तेज हुई है. कई देशों में दक्षिणपंथी और इमीग्रेशन विरोधी दल यह दावा करते रहे हैं कि बड़े पैमाने पर प्रवासन यूरोपीय सांस्कृतिक पहचान को प्रभावित कर रहा है।  बोडस्कोव ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया पोस्ट में भी कहा था कि जो विदेशी कानूनी रूप से डेनमार्क में रहने के हकदार नहीं हैं, उन्हें चरणबद्ध तरीके से वापस भेजा जाएगा. उन्होंने इसे सरकार की सख्त प्रवासन नीति का हिस्सा बताया।  हालांकि सरकार प्रतिबंध की तैयारी कर रही है, लेकिन इसे लागू करना आसान नहीं होगा. संविधान धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है और किसी भी नए कानून को अदालत में चुनौती दी जा सकती है. इसलिए सरकार फिलहाल कानूनी विशेषज्ञों से राय ले रही है. डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन की सरकार पहले भी अपनी सख्त प्रवासन नीतियों को लेकर सुर्खियों में रही है। 

तन्वी शर्मा और किदांबी श्रीकांत ने यूएस ओपन में आसान जीत से किया आगाज

फुलर्टन (अमेरिका)  विश्व जूनियर चैंपियनशिप की रजत पदक विजेता तन्वी शर्मा और अनुभवी खिलाड़ी किदांबी श्रीकांत ने आसान जीत के साथ यूएस ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट में अपने अभियान की शुरुआत की। तन्वी ने बुधवार को महिला सिंगल्स के पहले दौर में जर्मनी की यवोन ली को 23-21, 21-16 से, जबकि थाईलैंड मास्टर्स की मौजूदा चैंपियन देविका सिहाग ने पेरू की इनेस लूसिया कैस्टिलो को 21-14, 21-14 से हराया। पुरुष सिंगल्स में भारतीय खिलाड़ियों के बीच खेले गए मैच में रौनक चौहान ने एस शंकर मुथुसामी को 23-21, 21-16 से हराया। पांचवीं वरीयता प्राप्त श्रीकांत ने भी हमवतन डी सानीथ के विरुद्ध केवल 30 मिनट में 21-14, 21-12 से जीत हासिल की। महिला सिंगल्स में रक्षिता श्री ने भी चेक गणराज्य की टेरेजा स्वाबिकोवा पर 21-15, 21-8 से आसान जीत हासिल करके अगले दौर में प्रवेश किया। ध्रुव रावत और के मनीषा की जोड़ी ने मिक्स्ड डबल्स में इंडोनेशिया के विरावण इहसान आदम और सेरेना कानी को महज 26 मिनट में 21-15, 21-16 से हराया।