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CM विष्णुदेव साय की बड़ी पहल, खरीफ 2026 में किसानों को मिलेगा एकमुश्त यूरिया; 80% वितरण सीमा खत्म

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से किसानों को बड़ी राहत खरीफ 2026 में पूर्व वर्ष की तरह मिलेगा एकमुश्त यूरिया, 80 प्रतिशत वितरण सीमा समाप्त रायपुर,  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों को समय पर कृषि आदान उपलब्ध कराने और खेती को अधिक सुगम बनाने के लिए लगातार महत्वपूर्ण निर्णय ले रही है। इसी क्रम में खरीफ सीजन 2026 के लिए जांजगीर-चांपा जिले के किसानों को बड़ी राहत देते हुए सहकारी समितियों के माध्यम से यूरिया वितरण पर लागू 80 प्रतिशत की सीमा समाप्त कर दी गई है। अब किसानों को खरीफ 2025 की भांति उनकी पात्रता के अनुसार एकमुश्त यूरिया उपलब्ध कराया जाएगा। उप संचालक कृषि राकेश शर्मा ने बताया कि खरीफ 2026 में किसानों को खरीफ 2025 में प्राप्त यूरिया की मात्रा के अनुरूप यूरिया वितरित किया जाएगा। यदि संबंधित सहकारी समिति में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहेगा तो किसानों को एकमुश्त यूरिया प्रदान किया जाएगा। किसी समिति में स्टॉक की कमी होने पर शेष मात्रा यूरिया उपलब्ध होते ही किसानों को वितरित कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि शासन के इस निर्णय से किसानों को बार-बार समिति के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और खरीफ सीजन में आवश्यक उर्वरक समय पर उपलब्ध होने से कृषि कार्य निर्बाध रूप से संचालित हो सकेंगे। इससे किसानों को खेती की तैयारी में सुविधा मिलेगी तथा समय पर उर्वरक उपलब्ध होने से फसल उत्पादन को भी गति मिलेगी। राज्य सरकार का यह निर्णय किसान हितों के प्रति उसकी संवेदनशीलता और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। शासन का उद्देश्य किसानों को आवश्यक कृषि आदान समय पर उपलब्ध कराकर उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाना और कृषि को अधिक समृद्ध एवं टिकाऊ बनाना है।

जुलाई 2026 में दो रवि प्रदोष व्रत, जानिए तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त

प्रदोष व्रत हिंदू धर्म का एक प्रमुख व्रत है, जिसे भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने के लिए रखा जाता है. प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है. यह व्रत जिस वार को पड़ता है, उसी के आधार पर इसका नाम रखा जाता है. मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक प्रदोष व्रत करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं तथा घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली का वास होता है. वैदिक पंचांग के अनुसार, जुलाई 2026 में दो प्रदोष व्रत पड़ रहे हैं. खास बात यह है कि इस बार दोनों ही व्रत रविवार को पड़ रहे हैं, इसलिए इन्हें रवि प्रदोष व्रत कहा जाएगा. रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित माना जाता है. ऐसे में इस शुभ संयोग में व्रत रखने से भक्तों को भगवान शिव के साथ-साथ सूर्य देव की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है. पहला प्रदोष व्रत जुलाई महीने का पहला प्रदोष व्रत आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाएगा.     व्रत एवं पूजा तिथि: 12 जुलाई 2026, रविवार     त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 12 जुलाई, सुबह 02:04 बजे     त्रयोदशी तिथि समाप्त: 12 जुलाई, रात्रि 10:29 बजे     पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 07:22 बजे से रात 09:24 बजे तक दूसरा प्रदोष व्रत जुलाई का दूसरा प्रदोष व्रत आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाएगा.     व्रत एवं पूजा तिथि: 26 जुलाई 2026, रविवार     त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 26 जुलाई, दोपहर 01:57 बजे     त्रयोदशी तिथि समाप्त: 27 जुलाई, शाम 04:14 बजे     पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 07:16 बजे से रात 09:21 बजे तक प्रदोष काल में पूजा का महत्व प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा प्रदोष काल में की जाती है. यह समय सूर्यास्त के बाद और रात्रि के आगमन के बीच का होता है. धार्मिक मान्यता है कि इस काल में भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न रहते हैं. कहा जाता है कि प्रदोष काल में शिवलिंग का विधि-विधान से पूजन करने और भगवान शिव की आराधना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है.

NIHEA की 7 करोड़ रुपये सालाना की परियोजना फाइलों में कैद, चंडीगढ़ में काम लटका

चंडीगढ़. देश में आधुनिक अस्पतालों की बढ़ती जरूरत के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए विशेषज्ञ इंजीनियर और आर्किटेक्ट तैयार करने की महत्वाकांक्षी योजना दो दशक बाद भी शुरू नहीं हो सकी। वर्ष 2006 में पीजीआइ में नेशनल इंस्टीट्यूट आफ हेल्थकेयर इंजीनियरिंग एंड आर्किटेक्चर (एनआइएचईए) स्थापित करने की घोषणा हुई थी। उम्मीद थी कि यहां ऐसे विशेषज्ञ तैयार होंगे, जो भविष्य के अस्पतालों की बेहतर डिजाइन, सुरक्षित निर्माण और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की योजना बना सकेंगे। लेकिन 20 साल बाद भी यह परियोजना केवल फाइलों और बैठकों तक सीमित है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने वर्ष 2007 में पीजीआइ को संस्थान स्थापित करने के निर्देश दिए थे। इसके साथ हर वर्ष सात करोड़ रुपये तक का बजट उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया गया था। योजना के तहत हेल्थ फैसिलिटी प्लानिंग एंड डिजाइनिंग तथा हेल्थकेयर इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट जैसे विशेष मास्टर डिग्री कोर्स शुरू किए जाने थे। इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य ऐसे विशेषज्ञ तैयार करना था, जो अस्पतालों की योजना, निर्माण, तकनीकी प्रबंधन और स्वास्थ्य अवसंरचना को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित कर सकें। हालांकि, परियोजना शुरुआत से ही असमंजस में रही। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2014 में स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी ने यह कहते हुए प्रस्ताव रोक दिया कि इसमें पीजीआइ की भूमिका स्पष्ट नहीं है। बाद में गवर्निंग बाडी ने भी माना कि इस तरह का संस्थान स्थापित करना पीजीआइ के मूल दायित्व यानी कोर मैंडेट का हिस्सा नहीं है। समितियों ने शुरू की मास्टर डिग्री इसके बाद भी योजना को आगे बढ़ाने के लिए कई प्रयास किए गए। वर्ष 2016 से 2021 के बीच गठित विभिन्न समितियों ने एमबीए की जगह मास्टर डिग्री पाठ्यक्रम शुरू करने, पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक), चंडीगढ़ कालेज आफ आर्किटेक्चर और यूआइईटी के सहयोग से पाठ्यक्रम तैयार करने तथा एम्स-जोधपुर और आइआइटी-जोधपुर के संयुक्त माडल को अपनाने जैसी सिफारिशें कीं। लेकिन इन सुझावों के बावजूद परियोजना मंजूरी की दहलीज पार नहीं कर सकी।मार्च 2024 में स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि एनआइएचईए की स्थापना पीजीआइ के कोर मैंडेट में नहीं आती। समिति ने सुझाव दिया कि इस तरह का संस्थान आइआइटी रोपड़ या चंडीगढ़ कालेज आफ आर्किटेक्चर जैसे संस्थानों में स्थापित किया जाना अधिक उपयुक्त होगा। प्रस्तावों और समितियों के बावजूद परियोजना के बाद भी नहीं निकला हल ऑडिट रिपोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। दो दशक तक बैठकों, प्रस्तावों और समितियों के बावजूद परियोजना का धरातल पर नहीं उतरना यह दर्शाता है कि स्वास्थ्य क्षेत्र की महत्वपूर्ण योजनाएं कई बार प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उलझकर रह जाती हैं। यदि यह संस्थान समय पर स्थापित हो जाता, तो देश को अस्पतालों के निर्माण और स्वास्थ्य अवसंरचना के लिए विशेष प्रशिक्षित विशेषज्ञों की एक नई पीढ़ी मिल सकती थी। आज भी महत्वाकांक्षी योजना फाइलों से बाहर आने का इंतजार कर रही है।

लोकमाता अहिल्याबाई पर आधारित पुस्तक का विमोचन, CM डॉ. मोहन यादव रहे मुख्य अतिथि

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोकमाता अहिल्याबाई : राष्ट्र पुनरुत्थान की संकल्पना पुस्तक का किया विमोचन म.प्र. हिन्दी ग्रंथ अकादमी ने किया पुस्तक का प्रकाशन भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 'लोकमाता अहिल्याबाई राष्ट्र पुनरुत्थान की संकल्पना' पुस्तक का समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में विमोचन किया। मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी द्वारा प्रकाशित यह शोध संकलन बताता है कि लोकमाता, पुण्य श्लोका अहिल्याबाई होल्कर का जीवन और कर्म किसी आकस्मिक महानता का परिणाम नहीं, बल्कि दीर्घ सांस्कृतिक धारा का स्वाभाविक विस्तार रहा। उनकी जीवन गाथा इस तथ्य का प्रमाण है कि भारतीय नारी संत, विदुषी, योद्धा होने के साथ-साथ कुशल शासिका भी रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा विमोचित इस शोध संकलन में कुल 19 अध्याय हैं। पुस्तक अहिल्याबाई होल्कर की दृष्टि में नारी स्वाभिमान और समाजोत्थान, सांस्कृतिक पुनर्निर्माण से राष्ट्रीय एकता, पंचपरिवर्तन से समाज कल्याण, जीवन प्रबंधन की पाठशाला, बाल विवाह-सामाजिक कुरीति की चुनौतियाँ और समाधान पर शोध पत्रों का संकलन हैं। पुस्तक में देवी अहिल्याबाई होल्कर की राष्ट्र पुनरुत्थान की संकल्पना न्यायप्रियता और प्रशासनिक दक्षता, समग्र जीवन चिंतन, भारतीय हस्तशिल्प के उत्थान में अहिल्याबाई की भूमिका तथा महिलाओं के लिए न्याय और समानता पर शोधपरक लेख हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा में लोकमाता अहिल्याबाई के अवदान के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विश्लेषण पर भी पुस्तक में एक पाठ है। पुस्तक का मूल्य 160 रूपए मात्र है। इस अवसर पर संचालक म.प्र. हिन्दी ग्रंथ अकादमी अशोक कड़ेल, राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान के निदेशक चंद्रचारु त्रिपाठी, माखनलाल चर्तुवेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी उपस्थिति थे।  

इक्का ट्रेलर लॉन्च पर भावुक हुए सनी देओल, कहा मैं हमेशा पापा का बेटा हूं

मुंबई में 29 जून को नेटफ्लिक्स की फिल्म इक्का का ट्रेलर लॉन्च किया गया. इस मौके पर जब फिल्म के ट्रेलर में दिग्गज एक्टर धर्मेंद्र को ट्रिब्यूट दिया गया. ट्रेलर में सनी को “धर्मेंद्र का बेटा, सनी देओल” कहकर क्रेडिट किया गया. इस बारे में बात करते हुए सनी काफी भावुक हो गए. सनी देओल ने कहा- मैं हमेशा पापा का बेटा हूं और हमेशा रहूंगा जब सनी देओल से पूछा गया कि मेकर्स ने उन्हें “धर्मेंद्र का बेटा” कहकर क्यों क्रेडिट किया, तो उन्होंने बहुत ही भावुक अंदाज में कहा, “मैं हमेशा अपने पापा का बेटा हूं और हमेशा रहूंगा… बस इससे आगे कुछ नहीं.” ‘इक्का’ ट्रेलर में दिखा कोर्टरूम ड्रामा फिल्म ‘इक्का’ का ट्रेलर एक इंटेंस कोर्टरूम ड्रामा की झलक दिखाता है, जिसमें सनी देओल एक वकील अर्जुन मेहरा का किरदार निभा रहे हैं. कहानी में वह अपने अतीत के एक व्यक्ति का केस लड़ने के लिए मजबूर हो जाते हैं, जिसे अक्षय खन्ना निभा रहे हैं. फिल्म में तिलोत्तमा शोम एक सख्त पब्लिक प्रॉसिक्यूटर की भूमिका निभा रही हैं. जबकि दिया मिर्जा, सनी की पत्नी का रोल निभा रही है. इसके अलावा फिल्म में संजेदा शेख, शिशिर शर्मा और आकांक्षा रंजन कपूर भी हैं. फिल्म को लेकर डायरेक्टर ने क्या कहा? फिल्म के डायरेक्टर सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा ने बताया कि ‘इक्का’ सिर्फ एक कोर्टरूम ड्रामा नहीं है, बल्कि इसमें रिश्तों, इमोशंस और न्याय की जटिलताओं को भी दिखाया गया है. उन्होंने कहा कि इतने बड़े कलाकारों के साथ इस कहानी को पर्दे पर लाना उनके लिए बेहद खास अनुभव रहा. फिल्म की कहानी इक्का को अल्थिया कौशल और मयंक तिवारी ने लिखा है. यह फिल्म 10 जुलाई को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी.

भाजपा नेता विक्रमादित्य ने नौगई ट्रिपल मर्डर पीड़ित परिवार से की मुलाकात, सख्त कार्रवाई की उठाई मांग

कोरिया. छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के चर्चित नौगई ट्रिपल मर्डर मामले को लेकर जूदेव परिवार के सदस्य एवं भाजपा नेता विक्रमादित्य सिंह जूदेव बैकुंठपुर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर घटना पर शोक व्यक्त किया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। इस दौरान विक्रमादित्य सिंह जूदेव ने कहा कि इस घटना से पूरा क्षत्रिय समाज शोक में है। उन्होंने मामले की CBI जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। एनकाउंटर और मौत के बदले मौत की मांग साथ ही उन्होंने आरोपियों की संपत्ति कुर्क करने की मांग भी की और कहा कि जब तक ऐसी कार्रवाई नहीं होती, तब तक समाज शांत नहीं बैठेगा। इस दौरान उन्होंने अपने बयान में आरोपियों के एनकाउंटर और ‘मौत के बदले मौत’ जैसी मांग भी रखी।

CM विष्णु देव साय बोले- रामगढ़ संस्कृति, इतिहास, साहित्य और पर्यटन का अद्भुत संगम

रामगढ़ संस्कृति, इतिहास, साहित्य और पर्यटन का अद्भुत संगम : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री ने रामगढ़ पहुँचकर निहारी सीताबेंगरा की प्राचीन विरासत जोगीमारा गुफा शिलालेख एवं हाथीपोल का किया अवलोकन हमारी सांस्कृतिक धरोहर आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य विरासत – मुख्यमंत्री साय रायपुर   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड अंतर्गत ऐतिहासिक एवं रामवनगमन पर्यटन परिपथ से जुड़े रामगढ़ में आयोजित दो दिवसीय "रामगढ़ महोत्सव-2026" के समापन समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला के रूप में विख्यात सीताबेंगरा गुफा का अवलोकन किया तथा इसकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं स्थापत्य विशेषताओं की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने इसके साथ ही जोगीमारा गुफा के प्राचीन शिलालेख, भित्तिचित्रों तथा क्षेत्र की अनूठी प्राकृतिक धरोहर हाथीपोल का भी अवलोकन किया। इस अवसर पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि रामगढ़ सरगुजा की हजारों वर्ष पुरानी सांस्कृतिक चेतना, कला, आस्था और गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला के रूप में विख्यात यह स्थल संस्कृति, इतिहास, साहित्य एवं पर्यटन का अद्भुत संगम है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती केवल प्राकृतिक संपदा से ही समृद्ध नहीं है, बल्कि इसकी सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक विरासत भी विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान रखती है। रामगढ़ जैसी धरोहरें हमारी ऐतिहासिक अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव की अमूल्य निधि हैं, जिनका संरक्षण और संवर्धन हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इन धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन तथा पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें और स्थानीय लोगों को भी रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर प्राप्त हों। उल्लेखनीय है कि रामगढ़ पर्वत की पश्चिमी ढलान पर स्थित सीताबेंगरा एवं जोगीमारा गुफाएँ भारतीय इतिहास, स्थापत्य, शिलालेख एवं चित्रकला की अनुपम धरोहर मानी जाती हैं। मान्यता है कि महाकवि कालिदास ने इन्हीं पहाड़ियों में अपनी कालजयी कृति "मेघदूतम्" की रचना की थी, जिसका आरंभ "आषाढस्य प्रथमदिवसे" से होता है। इसी ऐतिहासिक एवं साहित्यिक स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष आषाढ़ के प्रथम दिवस पर रामगढ़ महोत्सव का आयोजन किया जाता है। लगभग 44 फीट लंबी सीताबेंगरा गुफा में निर्मित प्राकृतिक रंगमंच, जोगीमारा गुफा में तीसरी-दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व की भित्तिचित्र परंपरा तथा यहाँ प्राप्त प्राचीन अभिलेख इस क्षेत्र को विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं। रामगढ़ की एक अन्य महत्वपूर्ण पहचान "हाथीपोल" नामक प्राकृतिक सुरंग है। लगभग 180 फीट लंबी तथा 15 से 20 फीट ऊँची यह प्राकृतिक सुरंग अपनी अनूठी संरचना के कारण पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। माना जाता है कि वर्षों तक जल प्रवाह के कारण इसका वर्तमान स्वरूप विकसित हुआ। सुरंग के दूसरे छोर पर स्थित सीताबेंगरा एवं जोगीमारा गुफाएँ इस सम्पूर्ण क्षेत्र को और अधिक रहस्यमयी, आकर्षक एवं ऐतिहासिक महत्व प्रदान करती हैं। रामगढ़ पर्वत के निचले शिखर पर स्थित इन कलात्मक गुफाओं का संबंध रामायणकालीन परंपराओं से भी जोड़ा जाता है, जिसके कारण यह स्थल धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

महिलाओं को एक ही स्थान पर मिलेंगी सभी स्वास्थ्य जांच और परामर्श सुविधाएँ

सिरसा  महिलाओं के स्वास्थ्य को केंद्र में रखकर हरियाणा सरकार ने एक नई पहल शुरू की है। अब प्रदेश के चयनित सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पतालों में स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार क्लीनिक स्थापित किए जाएंगे, जहां महिलाओं को जांच, परामर्श, टीकाकरण और रेफरल जैसी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाएंगी। स्वास्थ्य महानिदेशक पंचकूला की ओर से इस संबंध में संबंधित जिलों के सिविल सर्जनों को निर्देश जारी किए गए हैं। यह पहल मुख्यमंत्री के वित्त वर्ष 2026-27 के बजट भाषण की घोषणा के तहत लागू की जा रही है। इससे पहले जिला नागरिक अस्पतालों में मौजूदा पोस्ट-पार्टम सेंटर पीपीसी के माध्यम से एसएनएसपी क्लीनिक शुरू किए जा चुके हैं और अब इन्हें चरणबद्ध तरीके से ब्लाक स्तर के अस्पतालों तक विस्तारित किया जा रहा है। इन अस्पतालों को किया गया है चिंहिृत मुख्यालय से जारी निर्देशों के अनुसार प्रदेश के 9 जिलों के 10 सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पतालों में यह व्यवस्था शुरू की जाएगी। इनमें अंबाला जिले के अबांला कैंट व नारायणगढ़ उपमंडल अस्पताल, फतेहाबाद के टोहाना, हिसार के नारनौंद, पानीपत के समालखा, कुरूक्षेत्र के शाहबाद, यमुनानगर के जगाधरी, सिरसा के डबवाली, झज्जर के बहादुरगढ़ तथा नारनौल के महेंद्रगढ़ उपमंडल अस्पताल को शामिल किया गया है। अस्पताल प्रशासन को चार दिनों के भीतर क्लीनिक के लिए चिन्हित स्थान की फोटो सहित तैयारी रिपोर्ट भेजने को कहा गया है। महिलाओं को एक ही छत के नीचे मिलेगी स्वास्थ्य सुविधाएं एसएनएसपी क्लीनिक का उद्देश्य महिलाओं से जुड़ी सामान्य और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की समय पर पहचान और उपचार सुनिश्चित करना है। यहां 9 से 65 वर्ष तक की महिलाओं के स्वास्थ्य डेटा संकलन, टीकाकरण, गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर और स्तन कैंसर की स्क्रीनिंग, पोषण एवं मानसिक स्वास्थ्य परामर्श, फॉलोअप और रेफरल सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। निर्देशों के अनुसार क्लीनिक में एचपीवी टीकाकरण कवरेज बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा। साथ ही महिलाओं को किशोरावस्था, रजोनिवृत्ति, आस्टियोपोरोसिस, हृदय रोग, मेटाबोलिक विकार और स्त्री रोग संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूक किया जाएगा। प्रत्येक क्लीनिक में नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा और संबंधित अस्पताल के पीएमओ, एमएस इसकी निगरानी करेंगे, जबकि जिला स्तर पर सिविल सर्जन पूरी व्यवस्था के प्रभारी होंगे। हर सोमवार दोपहर 12 बजे तक साप्ताहिक रिपोर्ट जमा करना अनिवार्य रहेगा। सिरसा के सीएमओ डॉ. पवन कुमार ने कहा किस्वस्थ नारी सशक्त परिवार क्लिनिक नागरिक अस्पताल में संचालित हो रहा है। मुख्यालय से उपमंडल नागरिक अस्पताल डबवाली में भी इसके संचालन के लिए दिशा-निर्देश दिए गए हैं।  

रांची के कई इलाकों में बिछेगी पीएनजी पाइपलाइन, 2026 तक जुड़ेंगे 20 हजार नए उपभोक्ता

 रांची  राजधानी रांची में स्वच्छ और सुरक्षित ऊर्जा उपलब्ध कराने की दिशा में गेल इंडिया लगातार अपने पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) नेटवर्क का विस्तार कर रही है। शहर के वार्ड नंबर 46 स्थित कृष्णापुरी, मोरहाबादी, हेहल, लालपुर, स्मार्ट सिटी और बीआईटी मेसरा क्षेत्र में गैस पाइपलाइन बिछाने का कार्य शुरू कर दिया गया है।  इस विस्तार योजना के पूरा होने के बाद शहर की लगभग एक लाख आबादी को घरेलू गैस पाइपलाइन सुविधा का लाभ मिलने की उम्मीद है।  150 किलोमीटर अतिरिक्त पाइपलाइन नेटवर्क बिछाने की योजना गेल इंडिया के डीजीएम प्रशांत कुमार सिंह ने बताया कि रांची में पीएनजी नेटवर्क का विस्तार चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान लगभग 150 किलोमीटर अतिरिक्त पाइपलाइन नेटवर्क बिछाने की योजना बनाई गई है, ताकि शहर के अधिक से अधिक क्षेत्रों को इस सुविधा से जोड़ा जा सके।  उन्होंने बताया कि वर्तमान में रांची में करीब 550 किलोमीटर एमडीपीई पाइपलाइन और लगभग 70 किलोमीटर स्टील पाइपलाइन नेटवर्क में गैस चार्ज की जा चुकी है। इसके माध्यम से शहर के विभिन्न इलाकों में गैस आपूर्ति की व्यवस्था विकसित की गई है। 78 हजार घरों तक पहुंची अवसंरचना घरेलू पीएनजी कनेक्शन के लिए अब तक लगभग 78 हजार घरों में आवश्यक अवसंरचना तैयार की जा चुकी है। इनमें से करीब 24 हजार घरों तक गैस आपूर्ति शुरू हो चुकी है, जबकि लगभग 18 हजार उपभोक्ता नियमित रूप से पीएनजी गैस का उपयोग कर रहे हैं।  कंपनी का लक्ष्य वर्ष 2026 के अंत तक अतिरिक्त 20 हजार नए घरेलू उपभोक्ताओं को इस सुविधा से जोड़ने का है। गेल इंडिया की यह योजना केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है। आने वाले समय में औद्योगिक क्षेत्रों तक भी गैस नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा, जिससे उद्योगों को सस्ती, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा उपलब्ध हो सकेगी। वार्ड 46 में 20 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाने का लक्ष्य वार्ड नंबर 46 की पार्षद आरती कुमारी ने बताया कि गैस सिलिंडर की उपलब्धता और बढ़ती कीमतों के कारण लोगों में पीएनजी कनेक्शन की मांग तेजी से बढ़ी है। स्थानीय लोगों की मांग और शिकायतों के बाद उनके वार्ड में पाइपलाइन बिछाने का कार्य शुरू किया गया है। वार्ड में लगभग 20 किलोमीटर गैस पाइपलाइन बिछाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसे अगले एक वर्ष में पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि कार्य पूरा होने के बाद विशेष शिविर लगाकर एक साथ बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को कनेक्शन उपलब्ध कराया जाएगा। वार्ड में करीब 20 हजार परिवार रहते हैं, जिन्हें इस योजना का सीधा लाभ मिलेगा। शिकायत के लिए टोल-फ्री नंबर जारी गेल इंडिया ने उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए टोल-फ्री नंबर 1800-123-121-111 जारी किया है। किसी भी प्रकार की शिकायत, तकनीकी सहायता या कनेक्शन संबंधी जानकारी के लिए उपभोक्ता इस नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। कंपनी ने वर्ष 2027 के अंत तक परियोजना को व्यापक रूप से पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। घर तक गैस पाइपलाइन पहुंचने से सिलेंडर बुकिंग और ढुलाई की परेशानी खत्म होगी। यह आम लोगों के लिए बड़ी राहत है।- संतोष सिंह, स्थानीय निवासी     पीएनजी कनेक्शन सुरक्षित होने के साथ-साथ किफायती भी है। इससे पुरुषों का समय बचेगा व महिलाओं को सबसे अधिक सुविधा मिलेगी।- सुमंत महतो, स्थानीय निवासी यदि पूरे वार्ड में समय पर काम पूरा हो जाता है तो हजारों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। घरेलू गैस के साथ उद्योगों को भी लाभ मिलेगा।- विजय कुमार, स्थानीय निवासी  

सुनील गावस्कर का बयान, इंग्लैंड दौरे पर रोहित शर्मा दिखा सकते हैं कप्तानी और फॉर्म

नई दिल्ली महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने सोमवार को कहा कि अगले महीने इंग्लैंड के खिलाफ भारत की वनडे सीरीज रोहित शर्मा के लिए यह दिखाने का बहुत अच्छा मौका होगी कि वह अगले साल होने वाले 50 ओवर के वर्ल्ड कप में भारत के लिए पारी का आगाज करेंगे। रोहित और विराट कोहली दोनों भारत के लिए सिर्फ एक फॉर्मेट में खेलते हैं, वे 14-19 जुलाई तक इंग्लैंड के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज में वापसी करेंगे। रोहित शर्मा पर क्या बोले सुनील गावस्कर? गावस्कर ने कहा कि रोहित जानते हैं कि अगले साल होने वाले वनडे वर्ल्ड कप में जगह बनाने के लिए उनकी स्थिति क्या है। गावस्कर ने कहा,‘रोहित शर्मा के बारे में कब बात नहीं हुई है? रोहित शर्मा के बारे में हमेशा से बहुत बात होती रही है।’ उन्होंने कहा, ‘वह जानते हैं कि उनकी स्थिति क्या है। मुझे लगता है कि जाहिर तौर पर अहम लोगों और रोहित शर्मा के बीच साफ तौर पर जानकारी का आदान-प्रदान हुआ है। वह अच्छी तरह जानते हैं कि उनकी स्थिति क्या है और वर्ल्ड कप तक के अगले डेढ़ साल में उन्हें बस लगातार अच्छा प्रदर्शन करना है।’ गावस्कर ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि वह ऐसे व्यक्ति हैं जो अपनी प्रतिभा और काबिलियत के कारण कोई दबाव महसूस करते हैं। इंग्लैंड (दौरा) उनके लिए यह दिखाने का बहुत अच्छा मौका है कि डेढ़ साल बाद भी वह भारत के लिए पारी का आगाज करते रहेंगे।’ गावस्कर ने कहा कि किसी भी भारतीय खिलाड़ी का आकलन कभी खत्म नहीं होता और सीनियर बल्लेबाजों को पता होता है कि उन्हें लगातार अच्छा प्रदर्शन करते रहना होगा। आलोचना कोई नई बात नहीं है उन्होंने कहा, ‘जब आप डेब्यू करने वाले युवा खिलाड़ी होते हैं, तो आप पर नजर रखी जाती है कि आप अंतरराष्ट्रीय (क्रिकेट के) दबाव को कैसे संभालते हैं, क्या आपमें अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का मिजाज और काबिलियत है।’ उन्होंने कहा, ‘भारतीय क्रिकेट में ऐसा होता है कि शुरुआत से ही खिलाड़ियों पर लगातार नजर रखी जाती है और यह दबाव लगभग कभी खत्म नहीं होता। इसलिए इन खिलाड़ियों के लिए यह निगरानी या आलोचना कोई नई बात नहीं होगी।’ उन्हें दवाब संभालना आता है उन्होंने कहा, ‘वे जानते हैं कि दबाव को कैसे संभालना है और उन्हें पता है कि एकमात्र तरीका है रन बनाते रहना, जो कैच मिलें उन्हें पकड़ना, रन-आउट करना और साथ ही कप्तान को सलाह देने के लिए तैयार रहना क्योंकि वे खुद कप्तान रह चुके हैं और उनके पास अनुभव है।’ गावस्कर ने कहा कि रोहित और कोहली के मामले में, उनकी शारीरिक क्षमताओं पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा जिसे वे दोनों आसानी से संभाल सकते हैं। अनुभव से स्थिती को संभाल लेंगे उन्होंने कहा, ‘जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती है और आप 35 साल के पार जाते हैं, तो आपके स्वभाव के बजाय आपकी शारीरिक फिटनेस पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। उनके पास जो अनुभव है, उससे वे इसे आसानी से संभाल लेंगे।’