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UP में इको क्लब्स को बड़ी सौगात, योगी सरकार ने ₹65.64 करोड़ की फंडिंग को दी मंजूरी

पर्यावरण संरक्षण को नई गति, योगी सरकार ने इको क्लब्स के लिए जारी की ₹65.64 करोड़ की लिमिट – प्रत्येक परिषदीय विद्यालय को ₹5,000 की दर से उपलब्ध कराई गई लिमिट – इको क्लब्स के गठन, कार्य एवं दायित्व, मासिक गतिविधि कैलेंडर और सुझावात्मक गतिविधियां भी जारी – जल संरक्षण, ऊर्जा बचत, ई-वेस्ट प्रबंधन और सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त अभियान पर रहेगा विशेष फोकस लखनऊ योगी सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को नई गति देने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में समग्र शिक्षा अंतर्गत 'इको क्लब्स फॉर मिशन लाइफ' की गतिविधियों के क्रियान्वयन हेतु लगभग ₹65.64 करोड़ (₹6563.95 लाख) की लिमिट जारी कर दी है। इसके अंतर्गत प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों को ₹5,000 प्रति विद्यालय की दर से लिमिट उपलब्ध कराई जाएगी। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों, सहायक लेखा अधिकारियों, खंड शिक्षा अधिकारियों एवं जिला समन्वयकों को निर्देश दिए हैं कि जारी की गई लिमिट का तीन दिन के भीतर विद्यालयों को हस्तांतरण सुनिश्चित कराया जाए। साथ ही इको क्लब्स के उद्देश्य, गठन, अधिसूचना, कार्य एवं दायित्व, मासिक गतिविधि कैलेंडर तथा सुझावात्मक गतिविधियों के अनुरूप समयबद्ध क्रियान्वयन भी सुनिश्चित किया जाए।  निर्धारित मदों में होगा लिमिट का उपयोग प्रत्येक विद्यालय को उपलब्ध कराई गई ₹5,000 की लिमिट का उपयोग निर्धारित मदों में किया जाएगा। इसमें इको क्लब की गतिविधियां, जागरूकता कार्यक्रम, पौधरोपण, कम्पोस्ट निर्माण, आवश्यक शिक्षण सामग्री, स्टेशनरी तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी अन्य गतिविधियां शामिल हैं। विद्यालयों को निर्धारित वित्तीय मानकों का पालन करते हुए व्यय करना होगा तथा सभी खर्च के अभिलेख सुरक्षित रखना होगा। अभिभावकों, स्थानीय निकायों तथा समुदाय की भागीदारी पर विशेष बल योगी सरकार ने विद्यालय प्रबंधन समिति, अभिभावकों, स्थानीय निकायों तथा समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया है। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यक्रमों को विद्यालय परिसर से बाहर समाज तक पहुंचाने का भी लक्ष्य रखा गया है। सभी विद्यालयों को इको क्लब गठन, गतिविधियों, फोटो, वीडियो तथा प्रगति रिपोर्ट निर्धारित पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। बेसिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी एवं जिला स्तर के अधिकारी नियमित समीक्षा करेंगे। प्रत्येक विद्यालय में गठित होगा इको क्लब निर्देशों के अनुसार सभी पात्र प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों में इको क्लब्स फॉर मिशन लाइफ का गठन किया जाएगा। प्रधानाध्यापक क्लब के संरक्षक होंगे, जबकि एक शिक्षक को प्रभारी बनाया जाएगा। विभिन्न कक्षाओं के छात्र-छात्राओं को क्लब से जोड़कर उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। क्लब की अधिसूचना जारी होगी, उसका पंजीकरण निर्धारित पोर्टल पर कराया जाएगा तथा विद्यालय स्तर पर नियमित बैठकें आयोजित की जाएंगी। प्रत्येक गतिविधि का अभिलेखीकरण और समय-समय पर उसकी समीक्षा भी की जाएगी। मिशन लाइफ के सात विषयों पर होगा विशेष फोकस इको क्लब्स के माध्यम से विद्यार्थियों को लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट (मिशन लाइफ) के सात प्रमुख विषयों से जोड़ा जाएगा। इनमें स्वस्थ एवं सतत जीवनशैली अपनाना, टिकाऊ खाद्य प्रणाली को बढ़ावा देना, जल संरक्षण, ऊर्जा संरक्षण, कचरा कम करना एवं पुनर्चक्रण, ई-वेस्ट प्रबंधन तथा सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग में कमी लाना शामिल है। उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना और दैनिक जीवन में पर्यावरण अनुकूल व्यवहार को बढ़ावा देना है। मासिक कैलेंडर के अनुसार चलेंगी गतिविधियां आदेश के साथ जुलाई से मार्च तक का विस्तृत गतिविधि कैलेंडर भी साझा किया गया है। जुलाई में पौधरोपण एवं हरित परिसर, अगस्त में किचन गार्डन और कम्पोस्ट निर्माण, सितंबर में ई-वेस्ट प्रबंधन, अक्टूबर में कचरा पृथक्करण एवं पुनर्चक्रण, नवंबर में ऊर्जा संरक्षण, दिसंबर में जल संरक्षण, जनवरी में सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त अभियान तथा फरवरी और मार्च में स्वच्छता, जैव विविधता संरक्षण एवं विश्व जल दिवस से संबंधित गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त पोस्टर, निबंध, चित्रकला, प्रश्नोत्तरी, रैली, शपथ, प्रदर्शनी और जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों तथा समुदाय को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा। विद्यालय स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अतिरिक्त गतिविधियां भी आयोजित कर सकेंगे।

पंडित के बेटे से चंबल का डाकू बना जगन, आखिर जेल की बैरक में खत्म हुआ

चंबल  कभी चंबल के बीहड़ों में बंदूक के दम पर अपना कानून चलाने वाला डाकू जगन गुर्जर अब सिर्फ एक फाइल, एक आपराधिक इतिहास और एक अधूरी कहानी बनकर रह गया है। 29 जून को अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल की बैरक में उसकी हत्या के साथ उस शख्स का अंत हो गया, जिसका नाम तीन राज्यों की पुलिस के लिए सालों तक चुनौती बना रहा। यह वही जगन गुर्जर था, जिसके एनकाउंटर की मांग देश की संसद तक पहुंची थी। लेकिन विडंबना देखिए, जो कभी लाखों के इनामी डाकू के रूप में पहचाना जाता था, वही बाद के वर्षों में 3 रुपए के खुले पैसों और पंचर ठीक से नहीं बनाने जैसी मामूली बातों पर झगड़ा करने लगा था। पंडित का बेटा कैसे बन गया चंबल का डाकू जगन गुर्जर की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं रही। धौलपुर जिले के डांग क्षेत्र के भवुतीपुरा गांव में जन्मे जगन का बचपन बेहद साधारण था। उसके पिता शिवचरण गुर्जर मंदिर में पूजा-पाठ करते थे और परिवार दूध बेचकर भी गुजर-बसर करता था। लेकिन एक विवाद ने उसकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी। मंदिर कमेटी से हुए झगड़े के बाद पुलिस से बचने के लिए वह बीहड़ों में भागा और फिर कभी सामान्य जिंदगी में लौट नहीं सका। 20 साल की उम्र में अपराध की दुनिया में एंट्री साल 1994 में महज 20 साल की उम्र में उसके खिलाफ पहला मामला दर्ज हुआ। इसके बाद उसने अपराध की दुनिया में ऐसा कदम रखा कि पीछे मुड़कर नहीं देखा। पहले डकैत मोहन गुर्जर के गिरोह में शामिल हुआ और फिर अपने ही गुरु तथा जीजा के हत्यारों की हत्या कर खुद अलग गैंग बना ली। धीरे-धीरे राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के चंबल क्षेत्र में उसका नाम खौफ का पर्याय बन गया। हत्या, अपहरण, फिरौती, डकैती और लूट जैसे 125 से अधिक मुकदमे उसके नाम दर्ज हुए। जब संसद में गूंजी एनकाउंटर की मांग उसका आतंक इतना बढ़ गया कि साल 2019 में नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने संसद में खड़े होकर उसके एनकाउंटर की मांग की। संसद में उन्होंने कहा था कि जगन गुर्जर जैसे खूंखार अपराधी के कारण लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं और केंद्र सरकार को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए। किसी डाकू के खिलाफ संसद में इस तरह एनकाउंटर की मांग उठना अपने आप में असाधारण घटना थी। एनकाउंटर का डर, इसलिए करता रहा सरेंडर लेकिन जितना बड़ा उसका आतंक था, उतना ही बड़ा उसके भीतर एनकाउंटर का डर भी था। पुलिस का दबाव बढ़ता तो वह आत्मसमर्पण कर देता। साल 2001 में उसने पहली बार धौलपुर के तत्कालीन एसपी बीजू जॉर्ज जोसफ के सामने सरेंडर किया। जेल से बाहर आया तो फिर अपराध में लौट गया। 2009 में कांग्रेस नेता सचिन पायलट की मौजूदगी में दूसरी बार आत्मसमर्पण किया। इसके बाद भी कोई बदलाव नहीं आया। तीसरी बार 2018 में तत्कालीन आईजी मालिनी अग्रवाल के सामने हथियार डाल दिए। पूछताछ में उसने माना था कि बीहड़ों की जिंदगी, गंदा पानी और लगातार भागते रहने की थकान ने उसे आत्मसमर्पण के लिए मजबूर किया। बेटी की कसम भी नहीं बदल सकी आदत सरेंडर के बाद कुछ समय ऐसा भी आया जब लगा कि शायद जगन बदल जाएगा। उसने अपनी बेटी की शादी में अपराध छोड़ने की कसम भी खाई। पत्नी को चुनाव भी लड़वाया, लेकिन हार के बाद फिर हथियार उठा लिए। इसके बाद उसका व्यवहार और ज्यादा अस्थिर होता गया। साल 2019 में वह महज 3 रुपए के खुले पैसों को लेकर दुकानदार से भिड़ गया। दूसरी बार पंचर ठीक से नहीं बनाने पर विवाद कर बैठा। छोटी-छोटी बातों पर हिंसक हो जाना उसकी पहचान बन चुका था। आतंक से बहिष्कार तक का सफर इसी दौरान उसने दो महिलाओं के साथ अमानवीय मारपीट कर उन्हें निर्वस्त्र घुमाने जैसी वारदात को अंजाम दिया, जिससे पूरे प्रदेश में आक्रोश फैल गया। कभी धौलपुर महल को उड़ाने की धमकी देने वाला यही डाकू बाद में मीडिया के सामने यह शिकायत करता नजर आया कि उसे मनरेगा में भी काम नहीं मिल रहा और समाज ने पूरी तरह बहिष्कृत कर दिया है। उसने तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और डीजीपी को पत्र लिखकर अपनी और परिवार की सुरक्षा की गुहार भी लगाई थी। एक दौर ऐसा जब गांवों में नहीं बजी शहनाई एक समय ऐसा भी था जब उसके डर से गांवों में शादियां तक रुक गई थीं। खुद उसके गांव में लगभग दस साल तक कोई बारात नहीं आई। उसके आतंक का असर सिर्फ पुलिस रिकॉर्ड तक सीमित नहीं था, बल्कि आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी साफ दिखाई देता था। जेल की बैरक में खत्म हुआ चंबल का अध्याय आखिरकार 29 जून को अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल की बैरक में उसकी कहानी खत्म हो गई। आरोप है कि भरतपुर के कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी विष्णु ने तौलिए से गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। जिस व्यक्ति ने तीन दशक तक पुलिस, प्रशासन और कानून व्यवस्था को चुनौती दी, उसका अंत जेल की चारदीवारी के भीतर हुआ। खौफ, बंदूक और दर्दनाक अंजाम जगन गुर्जर की जिंदगी यह बताती है कि अपराध की दुनिया में बंदूक भले कुछ समय के लिए ताकत दे दे, लेकिन उसका अंजाम अक्सर अकेलापन, डर और हिंसक मौत ही होता है। चंबल के बीहड़ों का यह चर्चित नाम अब इतिहास का हिस्सा बन चुका है, लेकिन उसके अपराधों की दहशत और उसके जीवन का विरोधाभास लंबे समय तक याद किया जाता रहेगा।

यूपी में दो बेटियों वाले परिवारों को राहत, सरकार भरेगी दूसरी बेटी की ट्यूशन फीस

लखनऊ  यूपी की योगी सरकार उन परिवारों को बड़ी राहत देने जा रही है जिनकी दो बेटियां पढ़ाई कर रही हैं। अगर दो बेटियां एक ही विद्यालय, महाविद्यालय अथवा संस्थाओं में पढ़ रही हैं तो एक की ट्यूशन फीस सरकार की तरफ से माफ किए जाने या उसकी भरपाई किए जाने की तैयारी है। इसका आदेश जल्द ही जारी हो जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से इस संबंध में की गई घोषणा को शासन स्तर से अमली जामा पहनाने की कवायद शुरू कर दी गई है। सभी बोर्ड के स्कूलों में मिलेगी राहत महिला कल्याण एवं बाल विकास पुष्टाहार विभाग ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक तथा जिला विद्यालय निरीक्षकों से इस संबंध में प्रदेश में अलग-अलग बोर्डों के स्कूलों में पढ़ रहीं ऐसी बच्चियों का विवरण मांगा है। इसके तहत यूपी बोर्ड से लेकर सीबीएसई एवं आईसीएसई स्कूलों के कक्षा 9 से 12 तक की बच्चियों का सारा विवरण तलब किया गया है। वहीं दूसरी तरफ पहली जुलाई को इस संबंध में उच्च स्तरीय बैठक भी बुलाई गई है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक एवं जिला विद्यालय निरीक्षकों को शासन की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि यदि शासन द्वारा निर्धारित आय सीमा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार की एक से अधिक बच्चियां किसी विद्यालय, महाविद्यालय अथवा संस्था में अध्ययन कर रही है तो दूसरी बच्ची का ट्यूशन फीस या तो संस्था को प्रोत्साहित करते हुए माफ कराई जाएगी या उसकी प्रतिपूर्ति राज्य सरकार की ओर से की जाएगी। मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा के क्रियान्वयन के लिए शासन स्तर पर पहली जुलाई को उच्च स्तरीय बैठक भी बुलाई गई है जिसमें बेसिक, माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा के प्रतिनिधियों के अलावा महिला कल्याण, एवं वित्त विभाग के शीर्ष अधिकारी भी रहेंगे। शिक्षा से जुड़े विभागों से मांगे गए विवरण व डाटा शिक्षा से जुड़े विभागों के प्रतिनिधियों को प्रयागराज, मेरठ, सहारनपुर एवं लखनऊ के यूपी बोर्ड, सीबीएसई तथा आईसीएसई के संचालित स्ववित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों द्वारा कक्षा- 9,10,11 एवं 12 के विद्यार्थियों से ली जाने वाली ट्यूशन फीस का समस्त विवरण व डाटा के साथ पहली जुलाई की बैठक में आने को कहा गया है। अगले महीने के अन्त तक लिया जाना है निर्णय जानकारों की मानें तो पहली जुलाई को होने वाली बैठक में ही इस मामले को अन्तिम रूप दिए जाने की तैयारी है ताकि इसे अगले महीने के तीसरे या चौथे सप्ताह में कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जा सके। कैबिनेट की मंजूरी के साथ ही एक़ ही परिवार की दो बच्चियों में से एक के ट्यूशल फीस माफ करने के आदेश जारी कर दिए जाएंगे।

वैज्ञानिक तरीके से खीरे की खेती ने बदली कमार कृषक की तकदीर, उद्यानिकी योजना का मिला लाभ

सफलता की कहानी  उद्यानिकी विभाग की योजना से बदली कमार कृषक की तकदीर खीरे की वैज्ञानिक खेती बनी वरदान रायपुर खीरे की व्यावसायिक खेती एक बेहद लाभदायक व्यवसाय है, जो 45 से 50 दिनों में पैदावार देना शुरू कर देता है। व्यावसायिक खेती में खीरे को जमीन पर फैलाने के बजाय मचान और तारों का सहारा देकर ऊपर चढ़ाना चाहिए। इससे फल जमीन के संपर्क में नहीं आते, गलते नहीं हैं और उनका आकार, रंग और चमक शानदार रहती है, जिससे बाजार में बेहतरीन भाव मिलता है। बुवाई के 45-50 दिनों बाद फल तोड़ने योग्य हो जाते हैं। मचान विधि से एक एकड़ में लगभग 30 से 45 क्विंटल तक उपज प्राप्त हो जाती है।                  सीमित संसाधनों और पारंपरिक खेती के दौर में यदि सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का साथ मिले, तो खेती कैसे फायदे का सौदा बन सकती है, इसे धमतरी जिले के एक प्रगतिशील किसान ने सच कर दिखाया है। जिला धमतरी के विकासखंड नगरी के अंतर्गत ग्राम सेलबहरा के विशेष पिछड़ी जनजाति (कमार समुदाय) के कृषक श्री खीमांशु गजेसिंग आज क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं। 4 एकड़ में खीरे की व्यावसायिक खेती         श्री गजेसिंग के पास कुल 10 एकड़ कृषि भूमि है, जिसमें से उन्होंने इस वर्ष 4 एकड़ क्षेत्र में खीरे की व्यावसायिक खेती की। उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के नियमित संपर्क और तकनीकी मार्गदर्शन से उन्होंने उन्नत खेती की तकनीक, गुणवत्तायुक्त बीजों का चयन, संतुलित पोषण प्रबंधन, आधुनिक सिंचाई और पौध संरक्षण जैसी वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाया। पारंपरिक से वैज्ञानिक खेती का सफर        पहले पारंपरिक ढर्रे पर खेती करने के कारण श्री गजेसिंग के लिए कृषि की लागत निकालना भी एक बड़ी चुनौती थी और आय बेहद सीमित थी। लेकिन आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के बाद पासा पलट गया। वैज्ञानिक तरीके से की गई इस खेती के कारण खीरे की फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में जबरदस्त सुधार हुआ है। स्थानीय बाजारों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में भी उनके खीरे की भारी मांग है। उपज का सही और उचित मूल्य मिलने से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। भविष्य की योजनाएं और संदेश          अपनी सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए श्री खीमांशु गजेसिंग ने बताया कि विभागीय अधिकारियों के तकनीकी सुझावों और शासकीय योजनाओं के सहयोग से मुझे खेती को एक नए नजरिए से देखने का मौका मिला। इस सफलता से प्रेरित होकर अब मैं भविष्य में अन्य उद्यानिकी फसलों का विस्तार करने और आधुनिक कृषि तकनीकों के जरिए उत्पादन को और बढ़ाने की योजना बना रहा हूँ।        उद्यानिकी विभाग भी लगातार किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रहा है। श्री गजेसिंग की यह उपलब्धि साबित करती है कि वैज्ञानिक नवाचार और सरकारी योजनाओं का सही लाभ उठाकर कृषि को टिकाऊ और अत्यधिक लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है।

दिल्ली में वोटर लिस्ट से नाम कटने के पांच कारण, चुनाव आयोग ने जारी की जानकारी

नई दिल्ली  राजधानी में हाल में अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया गया और कई अवैध निर्माण तोड़े गए हैं। ऐसे में प्रभावित लोग अगर SIR की प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले पा रहे हैं तो उनके लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी। दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी अशोक ने बताया कि इन लोगों के लिए मुख्य चुनाव आयोग से चर्चा की जाएगी। कोई न कोई विशेष व्यवस्था करके उन्हें SIR में शामिल कराया जाएगा। इसके अलावा जो बेघर हैं और उन्होंने जो पोल नंबर दिया है या जहाँ का पता दिया है, उन तक फॉर्म पहुंचाए जाएंगे। मुख्य चुनाव अधिकारी ने बताया कि 13,033 बीएलओ एसआईआर की प्रक्रिया में भाग लेंगे। प्रमुख राजनीतिक दलों की ओर से नियुक्त 32,429 बीएलए-2 प्रक्रिया में सहयोग करेंगे। दिल्ली में वर्तमान में कुल मतदाताओं की संख्या 1,45,10,298 (लगभग 1.45 करोड़) हैं। इनमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 77,11,132 है, जबकि महिला मतदाताओं का आंकड़ा 67,98,142 है। इसके अलावा राष्ट्रीय राजधानी में 1,024 थर्ड जेंडर मतदाता भी रजिस्टर्ड हैं। जनवरी 2026 के बाद से 16 जून तक 2,48,992 नए मतदाता लिस्ट में शामिल हुए हैं। इन 5 वजहों से कटेगा नाम बीएलओ के पहुंचने पर यदि आप उन्हें नहीं मिलते हैं और ऐसा तीन बार आने पर भी हो तो नाम कटेगा। कहीं और शिफ्ट हुए हैं और एड्रेस चेंज नहीं कराया है तो नाम कटेगा। जिनकी मृत्यु हुई है, उनका नाम हटेगा। अगर दो जगहों पर नाम है तो एक जगह काटा जाएगा। विदेशी नागरिक हैं तो प्रक्रिया में शामिल नहीं हो पाएंगे। महत्वपूर्ण तारीखें     30 जून से 29 जुलाई तक बीएलओ घर-घर जाकर सर्वे करेंगे।     5 अगस्त 2026 को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होगी।     5 अगस्त से 4 सितंबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे।     5 अगस्त से 3 अक्टूबर तक दावे और आपत्तियों का निवारण किया जाएगा।     7 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा। दिल्ली के लोग ऐसे खोज सकते हैं अपना नाम     www.ceo.delhi.gov.in पर जाएं।     जहां आपको सर्च बाय EPIC नंबर, इलेक्टर डिटेल और पोलिंग स्टेशन के विकल्प दिखाई देंगे।     इनसे आप 2002 की मतदाता सूची की डिटेल्स निकाल सकते हैं। यदि 2002 का EPIC नंबर मालूम है तो अपना नंबर और कैप्चा एंटर करें।     अगर इलेक्टर डिटेल से सर्च करना चाहते हैं तो इसके ऑप्शन में जाकर AC नंबर, इलेक्टर नंबर, रिलेटिव का नाम पैरेंट्स या ग्रैंड पैरेंट्स का नाम, हाउस नंबर, जेंडर और कैप्चा भरें।     अगर आपको हाउस नंबर या AC नंबर नहीं पता तो कोई भी दो या तीन विकल्प भरकर सर्च कर सकते हैं।     सर्च बाय पोलिंग स्टेशन विकल्प में AC नंबर और पोलिंग स्टेशन का नाम भरकर सर्च करें और अपना नाम देखें।     आखिर में अपने रिश्तेदार या माता-पिता का या ग्रैंड पैरेंट्स का नाम, AC का नाम या AC नंबर और लास्ट SIR की जानकारी नोट करके रख लें।     इसे एन्यूमरेशन फॉर्म में भरना होगा। जो लोग डिजिटल माध्यम अपनाना चाहते हैं, वे सीधे www.voters.eci.gov.in पर जाकर ऑनलाइन भी इस फॉर्म को भर सकते हैं, लेकिन बीएलओ इसका सत्यापन करेंगे।     इसके अलावा ECINET ऐप गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करके अपना नाम आसानी से खोजा जा सकता है।     नए मतदाता माता-पिता और दादा-दादी की जानकारी से अपना नाम जुड़वा सकते हैं। हेल्प डेस्क, टोल-फ्री नंबर और बुक-ए-कॉल सर्विस चुनाव से जुड़ी किसी भी पूछताछ के लिए चुनाव आयोग का टोल-फ्री नंबर 1950 है। इसके अलावा ईसीआई ने 'ECINet' पर एक खास 'Book-A-Call' सुविधा भी दी है, जिससे लोग सीधे अपने क्षेत्र के बीएलओ से संपर्क साध सकते हैं। दिल्ली के सभी जिला मुख्यालयों और विधानसभा क्षेत्रों के मतदाता केंद्रों पर विशेष हेल्पडेस्क भी बनाई गई है, जिन्हें दिल्ली चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जाकर देखा जा सकता है। इसके अलावा एन्यूमरेशन फॉर्म पर भी बीएलओ का नंबर लिखा होगा, जिसे कॉल कर मदद ली जा सकती है।

नई सीरीज के बाद एक्ट्रेस का लुक वायरल, सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा सर्च हुआ उनका स्टाइल इनरवियर्स

मुंबई  इन दिनों टीवी सीरीज Off Campus सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है. सीरीज की कहानी और कलाकारों की एक्टिंग को दर्शकों ने पसंद किया है. लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा महिला मुख्य किरदार हन्ना वेल्स (Hannah Wells) की स्टाइलिंग की हो रही है. खास तौर पर उनकी ब्रा ने फैशन प्रेमियों का ध्यान खींच लिया है।  सोशल मीडिया पर कई यूजर्स पूछ रहे हैं कि सीरीज में दिखाई गई ब्रा किस ब्रांड की है और इसे कहां से खरीदा जा सकता है. फैन पेज और फैशन कम्युनिटी में लोग उससे मिलते-जुलते डिजाइन शेयर कर रहे हैं. कई लोग उसी तरह की ब्रा खरीदने के लिए ऑनलाइन सर्च भी कर रहे हैं।  शो के बाद बढ़ी डिमांड पेज सिक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, शो रिलीज होने के बाद इसमें इस्तेमाल किए गए कुछ लिंजरी स्टाइल्स की मांग इतनी बढ़ गई कि कई डिजाइन जल्दी ही स्टॉक से बाहर हो गए. दर्शक सिर्फ कपड़ों ही नहीं, बल्कि शो में दिखाए गए इनरवियर तक की जानकारी जुटाने लगे.शो में हन्ना के किरदार ने ब्रांड की अलग-अलग लेस ब्रा पहनी हैं. इनमें से कुछ डिजाइन सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा में हैं।  पिछले महीनों में Off Campus सीरीज के बारे में गूगल पर क्या-क्या सर्च किया गया।  सिर्फ कपड़े नहीं, अंदर पहने जाने वाले फैशन की भी चर्चा  फैशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर दिखाई जाने वाली स्टाइलिंग का सीधा असर बाजार पर पड़ रहा है. पहले दर्शक फिल्मों और सीरीज में दिखने वाले कपड़े, जूते या बैग खरीदना चाहते थे, लेकिन अब इनरवियर और लिंजरी भी ट्रेंड का हिस्सा बन रहे हैं।  सीरीज के कॉस्ट्यूम डिजाइनर्स ने किरदार के व्यक्तित्व को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग तरह की ब्रा का इस्तेमाल किया. इनमें लेस ब्रा, सपोर्टिव ब्रा और दूसरे प्रीमियम डिजाइन शामिल हैं. दर्शकों का कहना है कि ये सिर्फ देखने में आकर्षक नहीं, बल्कि रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए भी बेहतर लगती हैं।  एला ब्राइट (Off Campus की Hannah Wells) का इंस्टाग्राम प्रोफाइल हाल के महीनों में इस सीरीज की लोकप्रियता के बाद तेजी से फॉलो किया जाने लगा है।  सोशल मीडिया बना सबसे बड़ा फैशन गाइड फैन पेज पर लोग सिर्फ ब्रा ही नहीं, बल्कि सीरीज में दिखने वाले टॉप, जूते, जर्सी, मेकअप, नेल पॉलिश और एक्सेसरीज तक की जानकारी साझा कर रहे हैं. इंस्टाग्राम और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसे कई पोस्ट वायरल हो रहे हैं, जिनमें बताया जा रहा है कि शो जैसा लुक कैसे पाया जा सकता है।  ब्रांड्स भी उठाना चाहते हैं फायदा रिपोर्ट के मुताबिक, कई लिंजरी ब्रांड्स भी इस ट्रेंड का फायदा उठाना चाहते हैं. कुछ कंपनियों ने शो की कॉस्ट्यूम टीम से संपर्क किया है, ताकि आने वाले सीजन में उनके प्रोडक्ट भी इस्तेमाल किए जा सकें. उनका मानना है कि किसी लोकप्रिय सीरीज में प्रोडक्ट दिखने से उसकी बिक्री पर सीधा असर पड़ता है।  क्यों बढ़ रहा है यह ट्रेंड? फैशन विशेषज्ञों का कहना है कि आज के दौर में दर्शक सिर्फ किसी शो को देखते नहीं हैं, बल्कि उसमें दिखने वाली हर छोटी-बड़ी चीज पर नजर रखते हैं. उन्हें पसंद आने वाला फैशन तुरंत सोशल मीडिया पर ट्रेंड बन जाता है. यही वजह है कि अब कहानी के साथ-साथ कॉस्ट्यूम और स्टाइलिंग भी किसी शो की लोकप्रियता तय करने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। 

सेवा सहकारी समिति मुनुंद में पर्याप्त मात्रा में रासायनिक खाद उपलब्धता

सेवा सहकारी समिति मुनुंद में पर्याप्त मात्रा में रासायनिक खाद उपलब्धता  कालाबाजारी रोकने प्रशासन सतर्क रायपुर, राज्य सरकार खरीफ सीजन 2026 के लिए किसानों को पर्याप्त रासायनिक खाद उपलब्ध कराने सतर्कता के साथ कार्य कर रही है। जिलों में भी खाद बीज की उपलब्धता को लेकर जिला प्रशासन द्वारा कड़ी निगरानी रखी जा रही है। खाद-बीज की कालाबाजारी को रोकने प्रशासन सतर्क है। इसी कड़ी में जांजगीर-चांपा जिला प्रशासन के कृषि अधिकारियों द्वारा बताया गया है कि खरीफ 2026 सीजन के लिए जांजगीर-चांपा जिले में किसानों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है तथा खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए नियमित निरीक्षण एवं वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। कृषि विभाग के अनुसार सहकारी क्षेत्र में 39,200 मीट्रिक टन उर्वरक वितरण लक्ष्य के विरुद्ध वर्तमान में 21,362 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है, जिसमें से 7,826 मीट्रिक टन किसानों को वितरित किया जा चुका है। इसी प्रकार निजी क्षेत्र में 26,130 मीट्रिक टन लक्ष्य के विरुद्ध 13,487 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है तथा 10,150 मीट्रिक टन का वितरण किया जा चुका है। जिला जांजगीर-चांपा के नवागढ़ विकासखंड की सेवा सहकारी समिति मुनुंद में वर्तमान में यूरिया, डीएपी, एनपीके, जिंकेटेड सुपर फॉस्फेट तथा नैनो उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है और किसानों को निरंतर वितरण किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि किसानों को उनके खेती के रकबे के आधार पर किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से उर्वरकों का वितरण किया जा रहा है। किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए शनिवार एवं रविवार सहित अवकाश दिवसों में भी सेवा सहकारी समितियों को संचालित कर खाद वितरण जारी रखा गया है। खाद की कालाबाजारी एवं वितरण में अनियमितता रोकने के लिए जिला एवं विकासखंड स्तरीय उर्वरक निरीक्षक दल द्वारा निजी कृषि केंद्रों का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान शासकीय दर से अधिक मूल्य पर उर्वरक विक्रय की शिकायत सही पाए जाने पर संबंधित विक्रेताओं के विरुद्ध तत्काल वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

School Reopen Update: 1 जुलाई से स्कूल खुलेंगे या बढ़ेगा अवकाश? गर्मी-बिजली संकट पर फैसला बाकी

बुढलाडा  पंजाब में पड़ रही भीषण गर्मी, लगातार बढ़ते तापमान और बार-बार लग रहे बिजली कटों के बीच 1 जुलाई से पूरे राज्य में स्कूल खुलने जा रहे हैं। ऐसे में सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार स्कूलों की छुट्टियां बढ़ाने का ऐलान करेगी। दूसरी ओर, सरकार और शिक्षा विभाग से गर्मियों की छुट्टियों में 10 दिन और बढ़ोतरी करने की मांग उठने लगी है, ताकि बच्चों की सेहत और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। आने वाले दिनों में बढ़ेगा और तापमान उक्त मांग समाजसेवी गुरलाभ सिंह माहल, भाजपा नेता काका अमरिंदर सिंह दातेवास समेत बड़ी संख्या में लोगों ने उठाई है। उनका कहना है कि सरकार ने पहले ही 1 जून से 30 जून तक गर्मियों की छुट्टियों की घोषणा की थी, लेकिन मौजूदा समय में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। मौसम विभाग ने भी आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ने की संभावना जताई है। ऐसे हालात में स्कूल खोलना बच्चों की सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। स्कूलों में छुट्टियां और बढ़ाने की मांग  उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के कारण लू लगने, दस्त, उल्टी, पेट संबंधी बीमारियों और अन्य मौसमी रोगों का खतरा काफी बढ़ जाता है। छोटे बच्चे इन बीमारियों की चपेट में सबसे ज्यादा आते हैं, इसलिए सरकार को विद्यार्थियों की सेहत को प्राथमिकता देनी चाहिए। उनका कहना है कि हर साल मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए गर्मियों की छुट्टियों में बढ़ोतरी की जाती रही है। इस वर्ष भीषण गर्मी के साथ-साथ बिजली संकट ने भी लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। उन्होंने पंजाब सरकार से अपील करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को गंभीरता से देखते हुए स्कूलों की गर्मियों की छुट्टियों में कम से कम 10 दिन का और विस्तार किया जाए। उनका कहना है कि यह फैसला विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के हित में होगा। इस मौके पर अभिभावकों और समाजसेवियों ने भी सरकार से इस मांग पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की। 

मुख्य सचिव के निर्देश: सामाजिक अंकेक्षण की आपत्तियों का कंडिकावार शीघ्र निराकरण सुनिश्चित करें

सामाजिक अंकेक्षण के दौरान प्राप्त आपत्तियों का कंडिकावार शीघ्र निराकरण सनिश्चित करें-मुख्य सचिव मुख्य सचिव की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ सामाजिक अंकेक्षण इकाई की सामान्य सभा की बैठक सम्पन्न रायपुर,  मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में छत्तीसगढ़ सामाजिक अंकेक्षण इकाई की सामान्य सभा की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने सामाजिक अंकेक्षण में पारदर्शिता और जवाबदेही पर विशेष जोर दिया जाए। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सामाजिक अंकेक्षण के दौरान प्राप्त आपत्तियों का कंडिकावार शीघ्र निराकरण किया जाना चाहिए। मुख्य सचिव ने कहा कि सामाजिक अंकेक्षण में जनभागीदारी को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक अंकेक्षण ग्राम सभा को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।  वार्षिक कार्ययोजना पर विस्तार से हुई चर्चा           मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को ग्राम सभाओं में अनिवार्य रूप से अंकेक्षण रिपोर्ट दिया जाना आवश्यक है। बैठक में सामाजिक अंकेक्षण इकाई द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत वार्षिक कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई। इस वर्ष प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में महात्मा गांधी नरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, ग्रामीण एवं राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रमों के सामाजिक अंकेक्षण कराये जाने पर बल दिया गया।  सामाजिक अंकेक्षण नवाचार एवं गुणवत्तापूर्ण कार्यक्रम          बैठक में वित्तीय वर्ष 2024-25 से 2025-26 में अब तक किए गए सामाजिक अंकेक्षण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना एवं बजट का भी अनुमोदन किया गया। बैठक में सामाजिक अंकेक्षण इकाई के निर्माण हेतु विस्तार से चर्चा हुई। सामाजिक अंकेक्षण कार्य में नवाचार एवं गुणवत्तापूर्ण कार्यक्रम क्रियान्वयन हेतु डेवलपमेंट एजेंसी के सहयोग के लिए भी चर्चा हुई।  बैठक में सामाजिक अंकेक्षण इकाई के विस्तार हेतु अन्य योजनाओं से निश्चित विकास निधि के निर्धारण के संबंध में विस्तृत चर्चा हुई।  सामाजिक अंकेक्षण कार्यों के संपादन पदों को भरने के प्रस्ताव पर चर्चा          बैठक में मनरेगा योजना को संशोधित नवीन योजना वीबीजीरामजी में सामाजिक अंकेक्षण के प्रावधान का अवलोकन, आत्मसात करने के प्रस्ताव पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत महात्मा गांधी नरेगा सहित अन्य योजनाओं के सामाजिक अंकेक्षण के कार्यों के संपादन हेतु विभिन्न पदों को नियमानुसार भरने के लिए आवश्यक नियमों के प्रस्ताव पर चर्चा के बाद अनुमोदन किया गया।          बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋर्चा शर्मा, आदिम जाति विकास विभाग एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार, कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो सहित पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग एवं छत्तीसगढ़ सामाजिक अंकेक्षण इकाई के सामान्य सभा के सदस्यों ने भाग लिया।

युवती की हत्या के संदिग्ध का रेलवे ट्रैक पर मिला शव, अंबाला में सनसनी

अंबाला. मनिंद्र कौर की हत्या की गुत्थी सोमवार को और उलझ गई। हत्या के शक में मनिंद्र सिंह (26) की तलाश पुलिस कर रही थी, उसका शव घर से 15 किमी दूर घेल स्टेशन के पास रेल लाइन पर मिला। मालगाड़ी से कटकर उसकी मौत हुई है। लोको पायलट ने बताया कि वह लाइन पार कर रहा था। रविवार को मनिंद्र सिंह के घर में बने गैराज में स्विफ्ट कार से मनिंद्र कौर (35) का शव मिला था। पुलिस हर एंगिल पर जांच कर रही है। मनिंद्र सिंह की मौत आत्महत्या है, हादसा है या फिर इस पूरी वारदात में कोई तीसरा भी शामिल है। हालांकि रेलवे पुलिस इसे आत्महत्या मान रही है। स्वजन जांच की मांग कर रहे हैं। मंनिंद्र कौर का मायका गांव हिमायुपर में था और मनिंद्र सिंह पास के गांव गोबिंदगढ़ का रहने वाला था। पुलिस मनिंद्र सिंह को ढूंढ़ती रही, लेकिन उसका शव शनिवार की दोपहर बाद 4:38 बजे रेल लाइन से बरामद हो गया था। तब शव की पहचान नहीं हो सकी थी, इसलिए जीआरपी ने लावारिस मान नागरिक अस्पताल में रखवा दिया। सोमवार सुबह स्वजन मनिंद्र सिंह की तलाश में जीआरपी थाना पहुंचे तो उन्हें शव दिखाया गया और पहचान हुई। उसकी बाइक और मोबाइल भी बरामद कर लिया है। मोबाइल पूरी तरह से टूटा हुआ है। सीसीटीवी फुटेज में सामने आया 27 जून को दोपहर दो बजकर पांच मिनट पर मनिंद्र कौर स्विफ्ट कार में आगे की सीट पर बैठती दिखाई दी। इसके बाद 30 मिनट में दो बजकर 35 मिनट पर कार गोबिंदगढ़ स्थित मनिंद्र सिंह के घर में खड़ी दिखाई दी। यह दूरी अस्पताल से 20 किमी है। इसी दौरान मनिंद्र कौर की हत्या हुई। भाई सुखबीर के अनुसार, मनिंद्र कौर 27 जून को दोपहर 12 बजकर 10 मिनट पर मां सरजिंद्र कौर के लिए नारियल पानी लेने निकली थीं। रात दो बजे उनके भाई सुखबीर ने माडल टाउन चौकी में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करवाई। लगभग 14 घंटे बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। मनिंद्र कौर के स्वजन अभी कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं। मनिंद्र सिंह के चाचा करनबीर का सवाल है कि 30 मिनट में 20 किलोमीटर की ड्राइव, हत्या और शव शिफ्ट करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं लगता। किसी तीसरे व्यक्ति की भूमिका भी हो सकती है। वहीं, मनिंद्र कौर के भाई का कहना है कि यदि वह 12:10 बजे निकली थीं तो फिर 2:05 बजे तक वह कहां थीं? सवाल यह भी उठ रहा है कि स्वजन ने 12:10 बजे लापता होने के बावजूद रात दो बजे तक शिकायत क्यों दी। 15 साल पहले हुई थी शादी अंबाला के गांव हिमायुपुर की मनिंद्र कौर की शादी पंजाब के पटियाला जिले के बटौली में जसलप्रीत से करीब 15 साल पहले हुई थी। वह खेती करता है और परिवार के साथ सेक्टर-8 में पांच साल से किराये पर रहा है। उसकी 14 साल की बेटी भी है। मनिंद्र सिंह हिमायुपुर के पास ही गोबिंदगढ़ का रहने वाला था। मनिंद्र सिंह भी खेती करता था और इकलौता बेटा था। मनिंद्र कौर के मायके में करीब 80 एकड़ जमीन है। 2:25 बजे दोस्त को किया था फोन चाचा ने बताया कि मनिंद्र सिंह ने दो बजकर 25 मिनट पर शनिवार को अपने एक दोस्त को फोन किया था लेकिन उसने नहीं उठाया। कुछ देर बाद उसने काल वापस की तो मनिंद्र सिंह ने उसे कहा था कि मैंने तो लाइट के बारे में पूछना था कि खेतों में ट्यूबवेल चला है या नहीं। लोको पायलट ने दी थी सूचना – 6 शनिवार की सायं राजपुरा से अंबाला कैंट की ओर जा रही मालगाड़ी के लोको पायलट रूपेश कुमार ने सूचना दी थी कि एक युवक रेल लाइन पार करते समय ट्रेन की चपेट में आ गया। मौके पर पहुंचे तो शव कई हिस्सों में बंटा मिला। जेब से कोई पहचान पत्र नहीं मिला। टूटा हुआ आइफोन बरामद हुआ था, जिससे पहचान संभव नहीं हो सकी। शव को अस्पताल में रखवा दिया था। यशपाल, सब इंस्पेक्टर, रेलवे पुलिस।