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मध्य प्रदेश में प्रमोशन पर नई हलचल, 10 साल बाद बढ़ी प्रक्रिया; आरक्षण नियमों पर फिर छिड़ा विवाद

भोपाल  प्रदेश में पदोन्नति की तैयारी है। इसके लिए पदोन्नति के पदों का निर्धारण किया जाना है, लेकिन पुराने नियमों के आधार पर ही आरक्षित वर्ग को दोहरा लाभ देने की तैयारी की जा रही है। अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 16 और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 20 प्रतिशत पद आरक्षित रहेंगे। शेष पद अनारक्षित श्रेणी में रहेंगे, लेकिन मेरिट में अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी भी आ सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो संबंधित श्रेणी का एक पद कम हो जाएगा। इसका आशय ये हुआ कि अनारक्षित (सामान्य) वर्ग नुकसान में रहेगा क्योंकि उसका कोटा कम हो जाएगा। इसका ही विरोध सामान्य वर्ग के कर्मचारी कर रहे हैं। मंत्रालय सहित कई विभाग ऐसे हैं, जहां उच्च स्तर पर आरक्षित वर्ग का कब्जा हो गया है। पदोन्नति नियम का पूरा मामला देखने वाले अपर सचिव अजय कटेसरिया ने सभी विभागों के स्थापना से जुड़े अधिकारियों के साथ सोमवार को मंत्रालय में बैठक की। इसमें बताया गया कि नए नियम के अनुसार भी कुल 36 प्रतिशत पद पदोन्नति के लिए आरक्षित रहेंगे, यानी चिह्नित पदों पर केवल अनुसूचित जाति या जनजाति वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी की पदोन्नति हो सकेगी। यदि किसी संवर्ग में पदोन्नत के लिए आरक्षित वर्ग का अधिकारी-कर्मचारी पात्र नहीं पाया जाता है तो वह स्थान रिक्त रहेगा। उसे किसी दूसरे वर्ग से भरा नहीं जाएगा। वहीं, अनारक्षित श्रेणी में जितने भी पद आएंगे, उसमें भी अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग को अवसर मिलेगा, क्योंकि अनारक्षित का मतलब सभी वर्गों से लिया गया है। इसे मेरिट से भी जोड़ा गया है। इसके मायने यह हुए कि किसी आरक्षित वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी की गोपनीय चरित्रावली ए प्लस प्लस रहती है और दूसरा कोई नहीं रहता है तो वह ऊपर आ जाएगा। सूत्रों का कहना है कि सभी विभागों से कहा गया है कि वे पदोन्नति के लिए तैयारी करके रख लें। वरिष्ठता सूची भी देख लें। उल्लेखनीय है कि पदोन्नति नियम 2025 के अनुसार पदोन्नति की तैयारी करने के निर्देश मुख्य सचिव अनुराग जैन ने सभी वरिष्ठ अधिकारियों को दिए हैं। इसका आधार हाई कोर्ट द्वारा नियम पर किसी प्रकार का स्थगन न देने को बनाया गया है। वहीं, निर्णय सुरक्षित रखा गया है लेकिन अब संभावना यही है कि पहले बेंच गठित होगी और अंतिम सुनवाई करके निर्णय सुनाया जाएगा। दो साल के पदों के हिसाब से होगी पदोन्नति विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पदोन्नति दो साल के हिसाब से होगी। एक बार की बैठक में आगे के पदों के लिए भी व्यवस्था कर ली जाएगी। पदोन्नति के पद पांच के लिए एक बार निर्धारित हो जाएंगे। इसके फिर कोई परिवर्तन नहीं होगा। यदि किसी संवर्ग में पहले से ही पदोन्नति से पद भरे हुए हैं तो वहां पदोन्नति नहीं होगी। दो लाख से अधिक अधिकारी-कर्मचारी होंगे लाभान्वित भले ही दस साल बाद पदोन्नति का अवसर बन रहा हो, मगर दो लाख से अधिक अधिकारी-कर्मचारी लाभान्वित होंगे। प्रतिनियुक्ति के पद भी पदोन्नति की श्रेणी में आएंगे। किसी के लिए कोई पद रोककर नहीं रखा जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह स्पष्ट कर दी गई है कि पदोन्नति 2025 के नियम लागू होने के बाद से दी जाएगी।  

महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर, सचिन अहीर के फैसले से उद्धव ठाकरे की मुश्किलें बढ़ीं

मुंबई  लोकसभा के छह सांसदों के साथ छोड़ने के बाद उद्धव ठाकरे को एक और गहरा जख्म मिला है. आदित्य ठाकरे के सबसे भरोसेमंद और करीबी नेता सचिन अहीर ने भी बगावत कर दी है. अहीर अब एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो गए हैं. मंगलवार को उन्होंने विधान परिषद उपसभापति पद के लिए महायुति के उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन दाखिल किया. यह चुनाव बुधवार को होना है. सचिन अहीर ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में पर्चा भरा. इस मौके पर डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार भी मौजूद थीं. वर्ली में आदित्य ठाकरे का राजनीतिक आधार मजबूत करने में अहीर का बड़ा रोल रहा है. ऐसे में उनका जाना ठाकरे परिवार के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है. सचिन अहीर साल 2019 में एनसीपी छोड़कर शिवसेना में आए थे. उन्हें 2022 में एमएलसी बनाया गया था।  बीजेपी नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने इस टूट के लिए उद्धव ठाकरे और संजय राउत के अहंकार को जिम्मेदार ठहराया है. बावनकुले ने साफ कहा कि बीजेपी का अहीर के इस कदम से कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा कि ठाकरे गुट अपने कार्यकर्ताओं को सम्मान नहीं देता. यही वजह है कि पार्टी में भारी नाराजगी है और नेता लगातार साथ छोड़ रहे हैं।  शिवसेना के दोनों गुटों में यह सियासी जंग काफी तेज हो गई है. कुछ ही दिन पहले पार्टी के छह सांसदों ने भी शिंदे गुट जॉइन किया था. पार्टी के नेता इसे ‘ऑपरेशन टाइगर’ का नाम दे रहे हैं. विधान परिषद चुनाव से पहले यह बगावत महाविकास अघाड़ी के लिए खतरे की घंटी है।  शरद पवार गुट के विधायक रोहित पवार ने क्या दावा किया? इस बड़े सियासी फेरबदल पर एनसीपी शरद पवार गुट के विधायक रोहित पवार ने कहा, ‘सचिन अहीर पहले हमारी पार्टी में थे. फिर वह उद्धव ठाकरे के साथ गए और अब शिंदे गुट में चले गए.’ उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए काफी खतरनाक बताया. रोहित ने आरोप लगाया कि पैसे और सत्ता के दम पर नेताओं को खरीदा जा रहा है. उन्होंने आशंका जताई कि शिंदे गुट अब उनकी पार्टी को भी निशाना बना सकता है।  हालांकि उन्होंने दावा किया कि शिंदे गुट को अब वैसी सफलता नहीं मिलेगी. वहीं ठाकरे गुट के नेता अंबादास दानवे ने एक अहम जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस चुनाव में जगन्नाथ अभ्यंकर महाविकास अघाड़ी के उम्मीदवार हैं। 

राजस्थान में पेयजल परियोजनाओं को बड़ा बजट, लंबे समय से रुके काम होंगे शुरू

जयपुर  राजस्थान के जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) में लंबे समय से चल रहा बजट संकट फिलहाल खत्म होता नजर आ रहा है. राज्य सरकार ने विभाग के लिए 935 करोड़ रुपए जारी कर दिए हैं. बताया जा रहा है कि करीब ढाई साल बाद पेयजल योजनाओं के लिए इस स्तर पर बजट जारी किया गया है. मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद प्रक्रिया में तेजी लाई गई है. लंबित कार्यों को मिलेगी गति जारी बजट में सबसे बड़ा हिस्सा मेजर प्रोजेक्ट्स के लिए रखा गया है. इन परियोजनाओं के लिए 735 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं.  जायका (JICA) और OTMP परियोजनाओं के लिए 100-100 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं, जिससे इन योजनाओं के लंबित कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है.  1 हजार करोड़ अतिरिक्त बजट जारी करने की तैयारी  सरकार अगले महीने भी करीब 1000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बजट जारी करने की तैयारी में है. इससे प्रदेश भर में चल रही पेयजल परियोजनाओं के भुगतान और नए कार्यों में तेजी आने की संभावना है.  मंत्री मामले की कर रहे मॉनिटरिंंग  बताया जा रहा है कि भुगतान को लेकर ठेकेदारों और सरकार के बीच पहले ही सहमति बन चुकी थी. इसके बाद बजट जारी करने की प्रक्रिया तेज की गई. जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी पूरे मामले की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं. 

पटना फायरिंग मामले में खान सर को राहत, गिरफ्तारी पर रोक, तीन जुलाई होगी सुनवाई

पटना  अपने कोचिंग सेंटर में हुई फायरिंग से संबंधित केस में फिलहाल खान सर की गिरफ्तारी पर रोक जारी रहेगी। दरअसल पटना सिविल कोर्ट में खान सर की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई होनी थी। अब इसपर सुनवाई 03 जुलाई को होगी। अदालत ने पहले ही खान सर की गिरफ्तारी रोक लगा रखी है। अब फैजल खान और खान सर की अग्रिम जमानत याचिका पर 03 जुलाई को अदाालत सुनवाई करेगा। बताया जा रहा है कि सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक की तरफ से कहा गया कि खान सर के अंगरक्षकों के पास अवैध हथियार थे। दहशत फैलाने के इरादे से ही वहां फायरिंग की गई थी। इसपर बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी है कि हथियार का लाइसेंस है और कागजात फिलहाल पुलिस ने जब्त कर लिए हैं। इसपर अदालत ने केस के आईओ को लोक अभियोजक से हथियार के कागजात मांगे हैं। इस मामले में अगली सुनवाई अब 03 जुलाई को होगी। बता दें कि पटना में -2 जुलाई को खान सर के कोचिंग संस्थान के नजदीक हुई गोलीबारी के वायरल वीडियो के आधार पर कदमकुआं थाना की पुलिस ने खान सर और उनके दो सुरक्षा कर्मियों के अलावा अन्य अज्ञात के खिलाफ बी एन एस और शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं में 04 जून 2026 को कदम कुआं थाना में कांड संख्या 418/2026 दर्ज किया है। खान कोचिंग पर पथराव के एक घंटे बाद हुई फायरिंग बता दें कि पटना के कदमकुआं थाना क्षेत्र के मुसल्लहपुर में दो जून की रात दो कोचिंग संस्थान खान ग्सोबल कोचिंग सेंटर और ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी के बीच विवाद के मामले को पुलिस हर पहलू पर परख रही है और इसका अनुसंधान कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि रात 10 बजे के करीब खान ग्लोबल कोचिंग सेंटर पर पथराव और गार्ड के सााथ मारपीट की घटना हुई थी। लेकिन उनके बॉडीगार्ड द्वारा फायरिंग घटना के करीब एक घंटे के बाद की गई थी। इसका मतलब है कि निजी सुरक्षा कर्मियों ने पथराव से अपनी रक्षा की बजाय दहशत फैलाने और डर का माहौल कायम करने के लिए ऐसा किया था। इस घटना के अनुसंधान की निगरानी एक वरीय पुलिस अधिकारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि फुटेज को सुक्ष्मता से देखा गया है। रात में करीब 10 बजे खान कोचिंग सेंटर पर पथराव और गार्ड के साथ मारपीट की घटना हुई थी। करीब एक घंटे के बाद गार्ड द्वारा हवा में फायरिंग की गई थी। उस समय दूसरे पक्ष के लोग वहां से चले गए थे।

मानवता की मिसाल: डॉ. अर्चना गुप्ता ने सड़क पर घायल युवक की बचाई जान, अस्पताल पहुंचाया

फतेहाबाद/चंडीगढ़. भारतीय जनता पार्टी की प्रदेशाध्यक्ष डा. अर्चना गुप्ता ने मंगलवार को मानवता का परिचय देते हुए सड़क दुर्घटना में घायल युवक की मदद कर संवेदनशीलता की मिसाल पेश की। सिरसा में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने जा रही डॉ. अर्चना गुप्ता ने फतेहाबाद बाईपास पर दुर्घटनाग्रस्त बाइक सवार को देखकर तत्काल अपना काफिला रुकवाया, उसकी प्राथमिक जांच की और उपचार के लिए अस्पताल भिजवाया। जानकारी के अनुसार डॉ. अर्चना गुप्ता अपने निर्धारित कार्यक्रम के तहत सिरसा जा रही थीं। इस दौरान नेशनल हाईवे स्थित बाईपास पर भाजपा जिलााध्यक्ष प्रवीण जोड़ा, चेयरमैन राजपाल बेनीवाल तथा अन्य पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। स्वागत कार्यक्रम के बाद जैसे ही उनका काफिला आगे बढ़ा, रतिया चुंगी के निकट गांव बड़ोपल निवासी विकास की बाइक गाय से टकराकर अचानक फिसल गई, जिससे वह सड़क पर गिरकर घायल हो गया। घटना पर नजर पड़ते ही डॉ. अर्चना गुप्ता ने बिना देर किए अपना काफिला रुकवा दिया। चिकित्सक होने के नाते उन्होंने स्वयं घायल युवक की प्राथमिक जांच की और कार्यकर्ताओं को आवश्यक निर्देश दिए। इसके बाद भाजपा कार्यकर्ताओं के सहयोग से घायल को सुरक्षित उठाकर मार्केट कमेटी फतेहाबाद के वाइस चेयरमैन इंद्र गावड़ी की गाड़ी से तत्काल अस्पताल भेजा गया, जहां उसका उपचार शुरू कराया गया। प्रत्यक्ष दर्शियों के अनुसार डॉ. अर्चना गुप्ता ने यह सुनिश्चित किया कि घायल को समय पर चिकित्सीय सहायता मिले। उनके इस मानवीय व्यवहार की मौके पर मौजूद लोगों ने सराहना की। घटना के बाद प्रदेशाध्यक्ष अपने काफिले के साथ सिरसा के लिए रवाना हो गईं, जहां उन्हें पार्टी के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम में भाग लेना था।

पंजाब के नए DGP पर जल्द फैसला! UPSC की अहम बैठक से साफ होगी तस्वीर

चंडीगढ़. पंजाब में आज परमानेंट डीजीपी नियुक्त होने का रास्ता साफ हो जाएगा। UPSC ने डीजीपी का पैनल शॉर्टलिस्ट करने के लिए आज बैठक बुलाई है। इस बैठक में तीन अधिकारियों का पैनल तैयार कर पंजाब सरकार को भेजा जाएगा, जिसके आधार पर सरकार एक अधिकारी को डीजीपी नियुक्त करेगी। जुलाई 2022 में पंजाब सरकार ने गौरव यादव को कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त किया था। इसके बाद से ही उनकी नियुक्ति पर सवाल उठाए जा रहे थे। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद पंजाब में स्थायी डीजीपी नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई। अधिकारियों का पैनल तय कर पंजाब सरकार को भेजेगी इसी साल फरवरी में यूपीएससी ने पंजाब सरकार से स्थायी डीजीपी की नियुक्ति के लिए अधिकारियों के नाम मांगे थे। इसके बाद पंजाब सरकार ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की सूची यूपीएससी को भेजी थी। इनमें से यूपीएससी आज तीन अधिकारियों का पैनल तय कर पंजाब सरकार को भेजेगी। अब पढ़ें 14 अफसरों की लिस्ट में किन-किन का नाम:- वर्तमान डीजीपी गौरव यादव समेत 14 अफसरों के नाम भेजे: पंजाब सरकार ने 6 अप्रैल को यूपीएससी को 14 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की सूची भेजी थी, जिसमें वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी गौरव यादव (1992 बैच) का नाम भी शामिल है। सरकार द्वारा भेजी गई इस सूची में वरिष्ठता के आधार पर गौरव यादव का नाम तीसरे स्थान पर है। इस बैच के सबसे वरिष्ठ अधिकारी शरद सत्य चौहान हैं, जिनके बाद क्रमशः हरप्रीत सिंह सिद्धू, गौरव यादव और कुलदीप सिंह का स्थान आता है। इस प्रस्ताव में 1993 बैच के तीन और 1994 बैच के सात अधिकारी भी शामिल हैं। तीन अफसरों का पैनल तय करेगा यूपीएससी: यूपीएससी, पंजाब सरकार की ओर से भेजी गई 14 आईपीएस अधिकारियों की सूची में से तीन अधिकारियों का पैनल शॉर्टलिस्ट कर सरकार को भेजेगा। इस पैनल में शामिल किसी भी एक अधिकारी को पंजाब सरकार स्थायी डीजीपी नियुक्त कर सकती है। सूची में सबसे ऊपर डॉ. शरद सत्य चौहान का नाम है, जबकि दूसरे स्थान पर हरप्रीत सिंह सिद्धू का नाम है, जो 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं व वरिष्ठता सूची में दूसरे स्थान पर आते हैं। वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी गौरव यादव का नाम तीसरे स्थान पर है। यदि यूपीएससी ने वरिष्ठता के आधार पर पैनल तैयार किया, तो यही तीन नाम इसमें शामिल हो सकते हैं। इसके बाद पंजाब सरकार एक बार फिर गौरव यादव को डीजीपी नियुक्त करने का निर्णय ले सकती है। इन अधिकारियों के सूची में नाम भेजे: सरकार की ओर से स्थायी डीजीपी के लिए भेजे गए अधिकारियों के पैनल को तीन बैचों में बांटा गया है। 1992 बैच में गौरव यादव (वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी), शरद सत्य चौहान, कुलदीप सिंह और हरप्रीत सिंह सिद्धू के नाम शामिल हैं। 1993 बैच में गुरप्रीत कौर देव, जितेंद्र कुमार जैन और शशि प्रभा द्विवेदी का नाम है। वहीं 1994 बैच में सुधांशु शेखर श्रीवास्तव, प्रवीण कुमार सिन्हा, अमरदीप सिंह राय, वी. नीरजा, अनिता पुंज, नरेश कुमार और राम सिंह के नाम शामिल हैं। इसके अलावा 1989 बैच के सामंत गोयल ने इस पद के लिए अनिच्छा जताई है, जबकि अर्पित शुक्ला और ईश्वर सिंह अपनी सेवानिवृत्ति के करीब होने के कारण इस दौड़ से बाहर हैं। ऐसे होती है सिलेक्शन प्रक्रिया सरकार की ओर से पैनल भेजे जाने के बाद उस पर विचार करने के लिए एक कमेटी गठित की जाती है। इसमें UPSC के अध्यक्ष (अध्यक्ष के रूप में), केंद्रीय गृह सचिव या उनके प्रतिनिधि, राज्य के मुख्य सचिव, राज्य के वर्तमान डीजीपी तथा किसी केंद्रीय पुलिस संगठन के प्रमुख (जो संबंधित राज्य कैडर से न हों) शामिल होते हैं। यह कमेटी तीन नामों को अंतिम रूप देती है और उन्हें राज्य सरकार को भेजती है, जिसके बाद सरकार अंतिम नियुक्ति पर निर्णय लेती है।

कबीरधाम में उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण, कालाबाजारी रोकने 170 केंद्रों का निरीक्षण

कबीरधाम में उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण, कालाबाजारी  रोकने 170 केंद्रों का निरीक्षण दो विक्रय केंद्रों के लाइसेंस निलंबित, 40 कृषि केंद्रों को  कारण बताओ नोटिस जारी रायपुर, राज्य सरकार खरीफ सीजन 2026 के लिए किसानों को पर्याप्त रासायनिक खाद उपलब्ध कराने सतर्कता के साथ कार्य कर रही है। जिलों में भी खाद-बीज की उपलब्धता को लेकर जिला प्रशासन द्वारा कड़ी निगरानी रखी जा रही है। खाद-बीज की कालाबाजारी को रोकने प्रशासन सतर्क है। इसी कड़ी में कबीरधाम जिले में भी खरीफ 2026 के लिए उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण किया गया है तथा कालाबाजारी एवं अधिक मूल्य पर विक्रय रोकने के लिए व्यापक निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि जिला कबीरधाम में सहकारी क्षेत्र में 57,200 मीट्रिक टन उर्वरक वितरण लक्ष्य के विरुद्ध सेवा सहकारी समितियों में 32,700 मीट्रिक टन उर्वरकों का भंडारण किया जा चुका है, जबकि डबल लॉक केंद्रों में 5,668 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध हैं। समितियों के माध्यम से किसानों को अब तक 21,151 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया जा चुका है। इसी प्रकार निजी क्षेत्र में 10,457 मीट्रिक टन उर्वरकों का भंडारण किया गया है, जिसके विरुद्ध अब तक 7,639 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किसानों को किया जा चुका है। सहकारी समितियों एवं निजी विक्रय केंद्रों के माध्यम से उर्वरकों का वितरण निरंतर जारी है। डीएपी उर्वरक के वैकल्पिक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की अनुशंसाओं के अनुसार एनपीके, टीएसपी एवं एसएसपी जैसे वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग और वितरण के संबंध में किसानों को जागरूक किया जा रहा है। मैदानी अमलों द्वारा किसानों के बीच व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है। जिले में उर्वरकों के भंडारण, वितरण, कालाबाजारी, अधिक मूल्य पर विक्रय एवं अन्य अनियमितताओं पर नियंत्रण के लिए जिला स्तरीय उड़नदस्ता दल का गठन किया गया है। कृषि विभाग के अधिकारियों, उड़नदस्ता दल तथा उर्वरक निरीक्षकों द्वारा अब तक 170 उर्वरक विक्रय केंद्रों का निरीक्षण किया जा चुका है। निरीक्षण के दौरान अनियमितता पाए जाने पर 2 विक्रय केंद्रों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं तथा 40 कृषि केंद्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। सभी निजी उर्वरक विक्रेताओं को निर्धारित मूल्य एवं नियमानुसार उर्वरकों का वितरण सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं। हाल ही में कलेक्टर की उपस्थिति में बोड़ला विकासखंड के तीन निजी उर्वरक विक्रय केंद्रों का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान किसानों से चर्चा कर उर्वरक वितरण व्यवस्था तथा नैनो उर्वरकों के उपयोग के संबंध में जानकारी दी गई। इस दौरान अधिक मूल्य पर उर्वरक विक्रय की कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई। कृषि विभाग ने कहा है कि खरीफ 2026 के दौरान किसानों को समय पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा कालाबाजारी और अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी एवं कार्रवाई जारी रहेगी।

सरपंचों का बड़ा ऐलान, CEO का तबादला नहीं हुआ तो देंगे सामूहिक इस्तीफा

मोहला-मानपुर. छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में जिला सरपंच संघ और स्थानीय प्रशासन के बीच छिड़ा विवाद गहराता जा रहा है. निर्माण कार्यों के भुगतान में कथित कमीशनखोरी, अनावश्यक देरी और अनदेखी का आरोप लगाते हुए तीनों विकासखंडों के सरपंचों ने जिला पंचायत सीईओ के तबादले की मांग तेज कर दी है. सरपंचों ने जल्द निर्णय नहीं होने पर सामूहिक इस्तीफा देने की चेतावनी दी है. उपमुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग सरपंचों ने जिला पंचायत सीईओ के अन्यत्र स्थानांतरित के लिए कलेक्टर को ज्ञापन भी सौंप दिया है. सरपंच संघ ने प्रशासनिक अफसरों की कार्यशैली को प्रशासनिक आतंकवाद करार देते हुए उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा से भी न्याय की गुहार लगाई. उन्होंने मांग की है कि सरपंचों को इस प्रशासनिक आतंकवाद से छुटकारा दिलाए.   विशेष ग्राम सभा का किया था बहिष्कार दरअसल, जिला सरपंच संघ के बैनर तले सरपंचों ने सप्ताह भर पहले कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा था. लेकिन इस दौरान कलेक्टर के मुलाकात नहीं करने पर नाराज सरपंच संघ ने 24 जून को प्रदेश स्तर पर सभी ग्राम पंचायतों में आयोजित विशेष ग्राम सभा का बहिष्कार भी कर दिया था. इसका असर जिले की अधिकांश ग्राम पंचायतों में देखने को मिला, जहां कई स्थानों पर सरपंचों की अनुपस्थिति में ग्राम सभाएं आयोजित हुईं, जबकि कुछ पंचायतों में ग्राम सभा का आयोजन ही नहीं हो सका. कलेक्टर ने मांग पर जताई असमर्थता इसी विवाद के बीच 29 जून को कलेक्ट्रेट परिसर में जिला सरपंच संघ के प्रतिनिधिमंडल और कलेक्टर के बीच बैठक हुई. बैठक के दौरान सरपंच संघ ने लिखित ज्ञापन सौंपते हुए जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) भारती चंद्राकर का स्थानांतरण करने की मांग रखी. हालांकि कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि यह विषय अधिकार क्षेत्र से बाहर है, इसलिए वे इस मांग को पूरा करने में सक्षम नहीं हैं. कलेक्टर से चर्चा में ठोस समाधान नहीं निकलने के बाद सरपंच संघ ने मोहला स्थित सामुदायिक भवन में फिर से बैठक की. इसमें निर्णय लिया गया कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो जिलेभर के सरपंच आंदोलन को और तेज करेंगे. साथ ही चेतावनी दी गई कि मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में सभी सरपंच सामूहिक इस्तीफा भी दे सकते हैं. मामले के संबंध में  जिला पंचायत सीईओ भारती चंद्राकर से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कोई भी कहने से इनकार कर दिया. आंदोलन का न करें राजनीतिकरण  सरपंच संघ ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन पूरी तरह गैर-राजनीतिक है. संघ ने राजनीतिक दलों और नेताओं से अपील की है कि वे इस मुद्दे पर बयानबाजी कर आंदोलन का राजनीतिकरण न करें, क्योंकि सरपंच अपनी लड़ाई स्वयं लड़ने में सक्षम हैं.

सिवनी में धान महोत्सव, CM डॉ. मोहन यादव किसानों के खातों में भेजेंगे ₹2.82 करोड़; कई सौगातें भी मिलेंगी

सिवनी  मध्यप्रदेश के किसानों के लिए 1 जुलाई का दिन खास रहने वाला है. सिवनी में आयोजित होने वाले धान महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव हजारों किसानों को आर्थिक सौगात देंगे. कार्यक्रम में सिंगल क्लिक के जरिए कोदो और कुटकी की खेती करने वाले 3941 किसानों के बैंक खातों में 2 करोड़ 82 लाख 99 हजार 300 रुपये की प्रोत्साहन राशि भेजी जाएगी।  सरकार की ओर से यह राशि 1000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से दी जा रही है. इसका उद्देश्य श्रीअन्न यानी मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देना है, ताकि किसान इस फसल की ओर ज्यादा आकर्षित हों और उनकी आय में भी इजाफा हो सके. माना जा रहा है कि इस पहल से प्रदेश में कोदो और कुटकी के उत्पादन को नई रफ्तार मिलेगी।  कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश के 3,941 कोदो एवं कुटकी उत्पादक किसानों के बैंक खातों में सिंगल क्लिक के माध्यम से 2 करोड़ 82 लाख 99 हजार 300 रुपये की प्रोत्साहन राशि सीधे डीबीटी के जरिए अंतरित करेंगे।यह राशि 1,000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्रदान की जा रही है, जिससे श्रीअन्न उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को आर्थिक सहायता प्राप्त होगी। सिवनी में धान महोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में धान महोत्सव का आयोजन सिवनी के पॉलीटेक्निक कॉलेज ग्राउंड में किया जाएगा. मुख्यमंत्री मोहन यादव इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे. जिला प्रशासन ने आयोजन को लेकर तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं और कार्यक्रम स्थल को अंतिम रूप दिया जा रहा है।  कलेक्टर नेहा मीना की निगरानी में प्रशासन ने हेलीपैड, सुरक्षा व्यवस्था, बैठक की व्यवस्था, पार्किंग, पेयजल, बिजली और यातायात जैसी सभी जरूरी सुविधाओं की तैयारियां पूरी कर ली हैं. अधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां भी सौंपी गई हैं ताकि कार्यक्रम बिना किसी परेशानी के संपन्न हो सके।  विकास परियोजनाओं की भी देंगे सौगात धान महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री सिर्फ किसानों को प्रोत्साहन राशि ही नहीं देंगे, बल्कि जिले को कई विकास कार्यों की सौगात भी मिलेगी. कार्यक्रम में विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण और भूमिपूजन भी किया जाएगा. इससे जिले में विकास कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद है।  सरकार का मानना है कि किसानों को आर्थिक सहायता देने के साथ-साथ श्रीअन्न की खेती को बढ़ावा देना भविष्य की कृषि नीति का अहम हिस्सा है. ऐसे में धान महोत्सव किसानों के लिए सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि नई संभावनाओं का मंच भी साबित हो सकता है।  वर्ष 2026 'कृषक कल्याण वर्ष': आयोजित होगा धान महोत्सव मध्य प्रदेश सरकार द्वारा चालू वर्ष 2026 को "कृषक कल्याण वर्ष" के रूप में मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में खरीफ सीजन की शुरुआत के मौके पर कार्यक्रम स्थल पर 'धान महोत्सव' का भी आयोजन किया जाएगा। इस महोत्सव में अच्छी बारिश, बेहतर पैदावार और अन्नदाताओं की समृद्धि की कामना के साथ ही किसानों को आधुनिक तरीके से धान की बोनी करने का संदेश दिया जाएगा। सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, बड़ी संख्या में जुटेंगे किसान निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत सीईओ अंजली शाह, अपर कलेक्टर सीएल चनाप सहित सभी संबंधित विभागों के जिला अधिकारी मौजूद रहे। कलेक्टर ने सभी वीआईपी और आम नागरिकों के लिए पार्किंग, पेयजल, बिजली और स्वच्छता की पुख्ता व्यवस्था समय पर पूरी करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर जिले के किसानों और आम जनता में खासा उत्साह देखा जा रहा है, जिसे देखते हुए कार्यक्रम में भारी भीड़ जुटने की संभावना है। प्रदर्शनी में शामिल प्रमुख आकर्षण होंगे—     धान बुवाई के आधुनिक कृषि यंत्र     प्राकृतिक एवं प्रमाणित बीजों की प्रदर्शनी     कस्टम हायरिंग सेंटर     प्राकृतिक एवं नैचुरल फार्मिंग मॉडल     जीआई टैग प्राप्त सीताफल एवं मिलेट्स उत्पाद     पीएमएफएमई योजना के उत्पाद     आम की विभिन्न उन्नत किस्में     स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित हस्तशिल्प एवं मिट्टी कला उत्पाद     लघु वनोपज आधारित उत्पाद     स्थानीय उद्यमियों के उत्पाद     पोषण आहार प्रदर्शनी     कृषिका एप की जानकारी प्रदर्शनी के माध्यम से शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, कृषि नवाचारों और विकास उपलब्धियों की जानकारी किसानों एवं नागरिकों को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशासन ने तैयारियों को दिया अंतिम रूप मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे को लेकर जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना के मार्गदर्शन में कार्यक्रम स्थल, हेलीपैड, सुरक्षा व्यवस्था, बैठक व्यवस्था, पार्किंग, पेयजल, विद्युत आपूर्ति, यातायात प्रबंधन एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर प्रशासनिक अमला पूरी तरह सक्रिय है और कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी विभागों के अधिकारी समन्वय के साथ कार्य कर रहे हैं।  

बरगी डैम में रिकॉर्ड गिरावट, एक्सपर्ट बोले- गेट खोलने पर भी नहीं निकलेगा पानी; बारिश नहीं हुई तो गहराएगा संकट

जबलपुर  बरगी बांध में 42 सालों बाद इतना पानी कम हो गया है कि बांध के तल से अनोखी चीजें निकलकर सामने आ रही है. कहीं, अचानक पुरानी नाव सामने आने से चर्चा का विषय बनी हुई है तो कहीं मंदिर दिखाई देने से लोग हैरान हैं. वहीं, बरगी बांध के दक्षिणी तट का गेट पूरी तरह ऊपर दिखाई देने लगा है, जिसे पिछले 42 सालों में लोगों ने जल भराव के बाद कभी नहीं देखा था।  बरगी बांध के बुरे हाल, कभी नहीं सूखा इतना पानी जबलपुर में नर्मदा नदी पर बने इस विशाल डैम में रोजाना 5 सेंटीमीटर के करीब पानी कम हो रहा है. बरगी बांध का कुछ पानी गर्मी की वजह से उड़ जाता है, तो वहीं कुछ हिस्सा नर्मदा नदी में प्रवाह बनाए रखने, पावर प्लांट चलाने और नहरों के लिए निरंतर प्रवाहित किया जाता है. खरीफ के मौसम में किसानों को धान की खेती के लिए नहरों से पानी भेजा जाता है, जिससे अब बांध का पानी रिकॉर्ड स्तर तक गिर गया है. नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अधिकारी और बांध के प्रभारी राजा राम रोहित ने बताया, ''बांध में रोज 5 सेंटीमीटर पानी की कमी आ रही है और बांध का वर्तमान जलस्तर समुद्र तल से 407.45 मीटर है. इसके अनुसार बांध में अब मात्र 5.5 मीटर पानी ही शेष बचा है।  आज तक बांध का ऐसा हाल नहीं देखा बरगी नगर में रहने वाले स्थानीय निवासी नीरज मिश्रा ने कहा, '' बचपन से ही बरगी नगर में ही रहे हैं लेकिन बांध में इतना कम पानी पहले कभी नहीं देखा. बरगी बांध का पानी कम होने के साथ ही बांध के कुछ ऐसे नजारे भी देखने को मिल रहे हैं, जो पहले लोगों ने कभी नहीं देखे. बरगी बांध में बायीं ओर से नहर से पानी नरसिंहपुर जिले के लिए जाता है और दायीं ओर पानी को सतना तक ले जाने की तैयारी है. फिलहाल यह पानी कटनी जिले तक जा रहा है।  पहली बार 407 मीटर तक गिरा बरगी डैम का जलस्तर बरगी डैम को फुल टैंक लेवल 422.76 मीटर है, वहीं इसकी दायीं नहर का गेट लगभग 409 मीटर पर लगा हुआ है और डैम का पानी कभी 408 मीटर के नीचे नहीं जाता था. लेकिन इस साल यह पानी 407 मीटर के स्तर तक गिर गया है. इसकी वजह से बांध की दायीं ओर का कैनाल गेट पानी के ऊपर नजर आ रहा है. नीरज मिश्रा ने कहा, '' बरगी बांध में पहली बार पानी 42 साल पहले भरा गया था और 42 साल में यह पहला मौका है जब यह गेट पानी के बाहर आया है।  इतना बड़ा है डैम का कैनाल गेट पानी से बाहर नजर आ रहा बरगी डैम का कैनाल गेट लगभग 50 फीट चौड़ाई और 100 फीट ऊंचाई का एक भीमकाय स्ट्रक्चर है, जिसमें 50 फीट हिस्सा हमेशा पानी में डूबा रहता है. बांध के इस हिस्से से जो पानी छोड़ा जाता है उससे दायीं नहर में पानी जाता है, यह नहर किसी नदी से कम नहीं है. इस हिस्से में लोहे के तीन बड़े गेट हैं. जब इससे पानी छोड़ा जाता है तो दायीं नहर में लगभग 20 फीट पानी होता है. यह इंजीनियरिंग का एक बड़ा नमूना है. इसी पानी को जबलपुर से कटनी और कटनी के आगे स्लीमनाबाद टनल से होते हुए सतना तक ले जाने की तैयारी की जा रही है।  बरगी बांध प्रबंधन के अनुसार बांध का जलस्तर प्रतिदिन करीब 5 सेंटीमीटर घट रहा है। कम पानी के कारण बिजली उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। दो में से एक बिजली उत्पादन यूनिट बंद कर दी गई है, जबकि दूसरी यूनिट का संचालन भी सीमित कर दिया गया है। 15 साल में सबसे खराब स्थिति बरगी बांध प्रबंधन के अनुसार 15 जून को बांध का जलस्तर 407.85 मीटर था, जो घटकर अब 407.45 मीटर रह गया है। यानी करीब 40 सेंटीमीटर पानी कम हो चुका है। वर्तमान में बांध में केवल 12.59 प्रतिशत पानी शेष है। पिछले वर्ष इसी अवधि में जल भंडारण करीब 22 प्रतिशत था। जून में सिर्फ डेढ़ इंच बारिश सामान्य तौर पर 30 जून तक जबलपुर में करीब 8 इंच बारिश दर्ज होती है, लेकिन इस वर्ष अब तक केवल करीब 1.5 इंच बारिश हुई है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून की उत्तरी सीमा अभी मंडला के आसपास है और इसके आगे बढ़ने की संभावना है। बिजली उत्पादन पर असर कम जलस्तर का असर बिजली उत्पादन पर भी पड़ा है। बरगी बांध की दो उत्पादन इकाइयों में से एक को 27 जून से बंद कर दिया गया है। दूसरी यूनिट, जो पहले 8 से 10 घंटे चलती थी, अब केवल 3 घंटे प्रतिदिन संचालित की जा रही है। डैम के तल में नजर आया मंदिर और पुरानी बोट बरगी बांध के जल भराव क्षेत्र में पानी कम होने की वजह से एक मंदिर भी चर्चा में है, जो हमेशा पानी में डूबा रहता था. इस बार ये मंदिर पानी के बाहर नजर आ रहा है. वहीं, दूसरी तरफ बरगी बांध के पुनर्वास विभाग की एक नाव भी चर्चा में है, जो लावारिस छोड़ दी गई थी और पानी कम होने की वजह से अब दिख रही है. बरगी बांध में अचानक इतना पानी कम क्यों हुआ यह चर्चा और जांच का विषय है. जांच ये होनी चाहिए कि बांध का पानी केवल जलवायु परिवर्तन की वजह से कम हुआ है या कोई लापरवाही बरती गई है. क्योंकि बांध से इस तरह पानी कम होना भविष्य में संकट की ओर इशारा कर रहा है।  पानी की सप्लाई और सिंचाई पर बढ़ सकता है संकट बरगी बांध से नर्मदा का पानी जबलपुर समेत कई शहरों में पेयजल आपूर्ति के लिए भेजा जाता है। इसी बांध से निकलने वाली नहरों से जबलपुर और नरसिंहपुर में सिंचाई होती है और भविष्य में कटनी व सतना तक पानी पहुंचाने की योजना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो आने वाले समय में पेयजल और सिंचाई दोनों पर संकट गहरा सकता है। लोग देखने पहुंच रहे सूखता बांध जबलपुर निवासी आकाश कोष्ठा ने बताया कि बरगी बांध के सूखने की चर्चा सुनकर वे मौके पर … Read more