samacharsecretary.com

ऐतिहासिक गुरुद्वारे को नुकसान पहुंचाने के आरोप पर SGPC सख्त, केंद्र से उठाई कार्रवाई की मांग

अमृतसर  पाकिस्तान के फरुखाबाद स्थित करीब 125 वर्ष पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा के एक हिस्से को बुलडोजर से गिराए जाने के मामले में नया खुलासा हुआ है। जानकारी के अनुसार, जिस स्थानीय कारोबारी ने गुरुद्वारे के ढांचे को ध्वस्त कराया, उसने संबंधित सरकारी विभागों से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) अथवा अन्य वैधानिक अनुमति प्राप्त नहीं की थी। इस जानकारी के सामने आने के बाद सिख संगठनों में घटना को लेकर नाराजगी और बढ़ गई है। घटना के बाद शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने भारत सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। कमेटी ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर पाकिस्तान सरकार के समक्ष इस मुद्दे को प्रभावी ढंग से उठाने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित कराने की मांग की है। साथ ही दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई किए जाने की भी अपील की गई है। सिख समुदाय की भावनाओं को पहुंची ठेस एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व रखने वाले गुरुद्वारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं विश्वभर के सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाती हैं। उनका कहना है कि यदि किसी भी ऐतिहासिक धार्मिक स्थल से जुड़ा कोई निर्माण कार्य या बदलाव किया जाना हो, तो उसे निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही किया जाना चाहिए। प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्थानीय कारोबारी ने बिना आवश्यक सरकारी स्वीकृति के बुलडोजर चलवाकर गुरुद्वारे के ऐतिहासिक ढांचे के एक हिस्से को गिरा दिया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय सिख समुदाय और विभिन्न धार्मिक संगठनों ने इसका विरोध जताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। पाकिस्तान सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग इस मामले पर भारत के विदेश मंत्रालय ने भी गंभीर चिंता व्यक्त की है। मंत्रालय ने पाकिस्तान सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने और क्षतिग्रस्त ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा को उसके मूल स्वरूप में पुनर्स्थापित करने की मांग की है। इसके साथ ही पाकिस्तान में स्थित सभी धार्मिक स्थलों, विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदायों के पूजा स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। गौरतलब है कि पाकिस्तान में स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारों और अन्य धार्मिक स्थलों के संरक्षण का मुद्दा समय-समय पर उठता रहा है। ऐसे में इस घटना ने एक बार फिर धार्मिक विरासत की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि पाकिस्तान सरकार इस मामले में क्या कार्रवाई करती है और जांच के बाद कौन से तथ्य सामने आते हैं।

धार्मिक परंपराओं में हिस्सा नहीं लेने पर ग्रामसभा का फैसला, धर्मांतरण कर चुके आदिवासी परिवार को गांव छोड़ने का निर्देश

नारायणपुर  छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के एक गांव में धर्म परिवर्तन के विरोध में ग्रामीणों ने एक आदिवासी परिवार को गांव से बाहर कर दिया। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस ने दखल दिया। जिसके बाद ग्रामीणों और धर्म बदलने वाले आदिवासी परिवार के बीच समझौता हुआ। समझौते के अनुसार, आदिवासी परिवार को अपने मूल धर्म में लौटना होगा। पुलिस के अनुसार, परिवार के सदस्यों द्वारा अपनी मूल आदिवासी आस्था में लौटने पर सहमति जताने के बाद उन्हें दोबारा गांव में रहने की अनुमति दे दी गई। पुलिस के मुताबिक यह घटना जिले के खड़कागांव गांव की है। ईसाई धर्म अपना लिया था ग्रामीणों के अनुसार, आदिवासी समुदाय के सदस्य मंटू दुग्गा ने ईसाई धर्म अपना लिया था, जबकि उनके पुत्र मोहन दुग्गा कबीर पंथ का पालन कर रहे थे। ग्रामीणों ने दावा किया कि परिवार के प्रति कोई व्यक्तिगत दुर्भावना नहीं थी, लेकिन उन्होंने गांव की पारंपरिक आदिवासी धार्मिक परंपराओं में भाग लेना बंद कर दिया था। गांव में 12 लोग बदल चुके हैं धर्म ग्रामीण ने कहा, ‘‘हमने उनसे कई बार अपनी परंपराओं में लौटने का अनुरोध किया, लेकिन वे तैयार नहीं हुए। वर्षों तक समझाने के बाद ग्रामसभा में इस विषय पर चर्चा हुई और परिवार को गांव से बाहर करने का निर्णय लिया गया।’’ दावा किया कि गांव के करीब 12 परिवार अन्य धर्मों को अपना चुके हैं, लेकिन केवल दुग्गा परिवार को ही गांव से निकाला गया। विवाद का समाधान हो गया है और गांव में स्थिति शांतिपूर्ण है। परिवार ने अपनी मूल आदिवासी आस्था में लौटने पर सहमति जताई, जिसके बाद ग्रामीणों ने उन्हें गांव में रहने की अनुमति दे दी। सुशील नायक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीणों ने उपलब्ध कराया था मकान एक अन्य ग्रामीण राजमन कुमेटी ने आरोप लगाया कि परिवार को गांव में रहने के लिए जमीन और मकान उपलब्ध कराया गया था, लेकिन मूल आस्था में लौटने के लिए किए गए बार-बार के अनुरोध को उन्होंने स्वीकार नहीं किया। उन्होंने बताया कि परिवार का सामान घर से बाहर निकाल दिया गया था, हालांकि मकान को क्षति नहीं पहुंचाई गई।     ईसाई धर्म अपनाने पर ग्रामीणों ने परिवार को किया गांव से बाहर     पुलिस के दखल के बाद दोनों पक्षों के बीच हुआ समझौता     आदिवासी परिवार ने मूल धर्म में वापसी की कही है बात     धार्मिक परंपराओं में परिवार ने भाग लेना कर दिया था बंद कबीर पंथ का पालन करते हैं ग्रामीण उन्हें गांव में रहने से इसलिए रोका जा रहा है क्योंकि वह कबीर पंथ का पालन करते हैं, जो 15वीं शताब्दी के संत-कवि कबीर की शिक्षाओं पर आधारित धार्मिक परंपरा है। इस घटना की सूचना मिलने पर पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारी गांव पहुंचे और ग्रामीणों तथा परिवार के सदस्यों से बातचीत की। ग्रामीणों ने बताया कि परिवार ने पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए और समुदाय को आश्वासन दिया कि वह आगे भी आदिवासी रीति-रिवाजों और परंपराओं का पालन करेगा।  

BAT-BMS App पर गिरी गाज, ई-रिक्शा बंद करने वाला ऐप Play Store से हटाया गया

नई दिल्ली सरकार के निर्देश पर ई-रिक्शा को बंद करने वाले ऐप BAT BMS App को Google Play Store और Apple App Store से हटा दिया गया है. इस कार्रवाई के तहत दो ऐप्स डिलीट किए गए हैं. आरोप है कि इन ऐप्स का इस्तेमाल ई-रिक्शा को दूर से (रिमोट के जरिए) बंद करने के लिए किया जा रहा था.  सुरक्षा और संभावित गलत इस्तेमाल की आशंका को देखते हुए यह कदम उठाया गया है. मामले की जांच और निगरानी आगे भी जारी रहेगी।  हाल ही में सोशल मीडिया पर BAT BMS App से जुड़े कई वीडियो और पोस्ट वायरल हुए हैं. इनमें दावा किया गया कि इस ऐप के जरिए कुछ लोग ई-रिक्शा को दूर से ही बंद कर रहे थे, जिससे कई चालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा. ई-रिक्शा अचानक बंद होने की घटनाओं और चालकों की बढ़ती शिकायतों के बाद इस मामले ने गंभीर रूप ले लिया, जिसके बाद संबंधित अधिकारियों ने इसकी जांच शुरू कर दी।  क्या है BAT BMS App? कई सस्ते ई-रिक्शा में लिथियम-आयन बैटरी लगी होती है. इन बैटरियों के अंदर बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) होता है, जो बैटरी की स्थिति पर नजर रखता है. यह बताता है कि बैटरी में कितना चार्ज बचा है, वह ज्यादा गर्म तो नहीं हो रही और कहीं कोई तकनीकी खराबी तो नहीं है.  कुछ सस्ती, खासकर चीन में बनी बैटरियों में इस BMS के साथ ब्लूटूथ की सुविधा भी दी जाती है।  अगर इस ब्लूटूथ पर पासवर्ड या सुरक्षा लॉक नहीं लगाया गया हो, तो आसपास मौजूद कोई भी व्यक्ति अपने मोबाइल से उससे कनेक्ट हो सकता है. ठीक वैसे ही जैसे बिना पासवर्ड वाले वाई-फाई या खुले ब्लूटूथ से कोई भी जुड़ सकता है. BAT-BMS ऐप इसी ब्लूटूथ कनेक्शन का इस्तेमाल करके बैटरी के सिस्टम तक पहुंच सकता है, जिसे सुरक्षा के लिहाज से बड़ा रिस्क माना जा रहा है।  क्या है ब्लूटूथ कनेक्शन की रेंज? इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जिन बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) में सुरक्षा लॉक नहीं होता, उनमें ब्लूटूथ की रेंज आमतौर पर 10 से 15 मीटर तक होती है. इसका मतलब है कि कोई व्यक्ति सड़क किनारे, पास खड़े वाहन या बाइक से भी ब्लूटूथ के जरिए बैटरी सिस्टम से जोड़ने की कोशिश कर सकता है. ऐसे में ई-रिक्शा अचानक बंद हो सकता है और चालक को ये भी समझ ही नहीं आता कि रिक्शा में क्या दिक्कत आई है।  हालांकि, अच्छी और ब्रांडेड कंपनियों की बैटरियों में मजबूत सुरक्षा और एन्क्रिप्शन सिस्टम होता है, इसलिए उन पर इस तरह का रिस्क नहीं माना जाता है. यह रिस्क ज्यादातर से कम कीमत वाली और बाद में लगाई गई (आफ्टरमार्केट) बैटरियों में देखी जा रही है, जिनका इस्तेमाल बड़ी संख्या में ई-रिक्शा में किया जाता है। 

दैनिक वेतनभोगियों को राहत, हाईकोर्ट ने ग्रेच्युटी का अधिकार माना; राज्य सरकार को झटका

बिलासपुर  छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय से दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के पक्ष में एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला आया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि दैनिक वेतन भोगी के रूप में दी गई सेवाओं के लिए भी कर्मचारी ग्रेच्युटी पाने के हकदार हैं। जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की एकल पीठ ने इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा दायर की गई याचिकाओं के पूरे बैच को खारिज कर दिया है। विवाद जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ के विभिन्न संभागों में कार्यरत रहे कर्मचारियों सदानंद मानिकपुरी, बाबूलाल साहू, नैन सिंह क्षत्रिय, शैलेंद्र तिवारी व अन्य से जुड़ा है। इन कर्मचारियों ने दैनिक वेतन भोगी के रूप में लंबी सेवाएं दी थीं, जिसके बाद उन्हें नियमित किया गया था। ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 के तहत सक्षम प्राधिकारी और अपीलीय प्राधिकारी ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें दैनिक वेतन भोगी अवधि की भी ग्रेच्युटी देने का आदेश दिया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। राज्य सरकार का पक्ष: शासकीय अधिवक्ता विनय पांडे ने तर्क दिया कि इसी तरह के एक मामले धनसाई साहू बनाम छत्तीसगढ़ राज्य में सुप्रीम कोर्ट ने इस कानूनी बिंदु को तीन जजों की बड़ी बेंच को रेफर किया है। चूंकि मामला देश की सर्वोच्च अदालत के समक्ष लंबित है, इसलिए हाई कोर्ट को इस मामले की सुनवाई तब तक टाल देनी चाहिए। कर्मचारियों की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता विनोद देशमुख ने सुप्रीम कोर्ट के ही ''''नेत्राम साहू बनाम छत्तीसगढ़ राज्य 2018 फैसले का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही यह तय कर चुका है कि कल्याणकारी राज्य में वर्षों तक कम वेतन पर काम लेने के बाद कर्मचारियों को ग्रेच्युटी से वंचित करना न्याय का मज़ाक होगा। हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण निष्कर्ष हाई कोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष को सही ठहराते हुए राज्य सरकार की दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में मुख्य रूप से दो बातें साफ कीं। सुप्रीम कोर्ट के अशोक सदारंगानी 2012 मामले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि सिर्फ इस आधार पर मामले को अनिश्चितकाल के लिए नहीं टाला जा सकता कि कोई संदर्भ बड़ी बेंच के पास लंबित है। जब तक कोई बड़ी बेंच पुराना फैसला बदल नहीं देती, तब तक पुराना कानून ही लागू रहेगा। कोर्ट ने पूर्व के फैसलों को दोहराते हुए कहा कि यदि किसी कर्मचारी ने 22-25 साल तक दैनिक वेतन भोगी के रूप में निरंतर सेवा दी है और बाद में उसे नियमित किया गया है, तो विभाग को स्वेच्छा से उसे ग्रेच्युटी का भुगतान करना चाहिए, न कि उसे अदालतों के चक्कर काटने पर मजबूर करना चाहिए। भविष्य का रास्ता हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की सभी 9 रिट याचिकाएं खारिज कर दी हैं। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि भविष्य में सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बेंच द्वारा जो भी अंतिम फैसला आएगा, वह दोनों पक्षों पर बाध्यकारी होगा। यदि भविष्य में स्थिति बदलती है, तो राज्य सरकार के पास नए सिरे से कानूनी विकल्प चुनने की स्वतंत्रता होगी। इस फैसले से प्रदेश के हजारों ऐसे कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है जो अपने सेवाकाल का एक लंबा हिस्सा दैनिक वेतन भोगी के रूप में बिता चुके हैं।

इंटीमेट सीन्स और Kiss पर खुलकर बोलीं सिंपल कौल, कहा- रिश्ते में भरोसा सबसे ज़रूरी

मुंबई  फिल्मों-शोज में किसिंग सीन शूट करना आम माना जाता है, लेकिन कई बार इन पर विवाद भी हो जाता है और रिश्ते टूटने की कगार पर भी जाते हैं. टीवी इंडस्ट्री की मशहूर एक्ट्रेस सिंपल कौल ने इंटीमेट और किसिंग सीन्स को लेकर अपनी राय रखी है. एक्ट्रेस का कहना है कि एक्टर के लिए ऐसे सीन्स सिर्फ उसके काम का हिस्सा होते हैं, इसलिए इन्हें पर्सनल लाइफ से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।  'किसिंग सीन करना पड़े तो कोई दिक्कत नहीं' न्यूज एजेंसी से खास बातचीत में सिंपल कौल ने कहा कि एक्टिंग एक प्रोफेशन है और कलाकार को वही करना पड़ता है, जिसकी कहानी में जरूरत होती है। उन्होंने कहा- अगर कोई एक्टर किसिंग सीन या कोई भी इंटीमेट सीन करता है, तो वह सिर्फ अपने काम का हिस्सा निभा रहा होता है. अगर मेरे पति या पार्टनर को भी प्रोफेशनल तौर पर ऐसा सीन करना पड़े, तो मुझे उससे कोई परेशानी नहीं होगी, क्योंकि वह सिर्फ उनका काम है।  'लेकिन अफेयर हुआ तो बिल्कुल बर्दाश्त नहीं' हालांकि सिंपल ने साफ कर दिया कि ऑनस्क्रीन इंटीमेसी और असल जिंदगी के रिश्ते में बड़ा फर्क होता है. उन्होंने कहा- अगर कोई अपने रिश्ते से बाहर जाकर किसी के साथ सचमुच रिलेशनशिप रखता है, तो वह बिल्कुल अलग बात है. उसे मैं कभी सही नहीं मानूंगी।  रिश्तों में भरोसे और वफादारी पर बात करते हुए सिंपल कौल ने दो टूक कहा- चीटिंग तो चीटिंग ही होती है. इसकी कोई दूसरी परिभाषा नहीं हो सकती. अगर दो लोग एक-दूसरे से प्यार करते हैं, तो उन्हें ईमानदार और वफादार रहना चाहिए।  'कमिटमेंट नहीं चाहिए तो पहले ही साफ कह दें' एक्ट्रेस का मानना है कि अगर किसी को कमिटमेंट नहीं चाहिए, तो उसे शुरुआत से ही अपने इरादे साफ कर देने चाहिए. उन्होंने कहा- अगर रिश्ते में कोई बदलाव या आकर्षण महसूस हो रहा है, तो उसे छिपाने के बजाय ईमानदारी से अपने पार्टनर से बात करनी चाहिए. लेकिन धोखा देना किसी भी हाल में सही नहीं है।  वर्कफ्रंट की बात करें तो सिंपल कौल 'कुटुंब', 'शरारत', 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा', 'ओए जैस्सी', 'यम हैं हम', 'दिल्ली वाली ठाकुर गर्ल्स' और 'जिद्दी दिल माने ना' जैसे कई फेमस टीवी शोज का हिस्सा रह चुकी हैं।   

श्रीरामानुज संस्कृत परिसर बनेगा वैदिक अध्ययन और भारतीय दर्शन का प्रमुख केंद्र: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

श्रीरामानुज संस्कृत परिसर वैदिक अध्ययन, भारतीय दर्शन, ज्ञान परम्परा के अध्ययन-अध्यापन और शोध का बनेगा महत्वपूर्ण केंद्र : उप मुख्यमंत्री शुक्ल श्रीरामानुज संस्कृत परिसर में 243 पदों के सृजन का प्रस्ताव शीघ्र करें तैयार भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के श्रीरामानुज संस्कृत परिसर, लक्ष्मण बाग, रीवा के सशक्तीकरण एवं संस्थागत विकास संबंधी प्रस्तावों की समीक्षा की। बैठक में अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा अनुपम राजन उपस्थित थे। बैठक में श्रीरामानुज संस्कृत परिसर, रीवा में अध्ययन-अध्यापन, शोध, प्रकाशन, परीक्षा, प्रशासनिक एवं विस्तार गतिविधियों के सुचारु संचालन के लिए शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं गैर-शैक्षणिक पदों के सृजन के प्रस्ताव पर चर्चा की गई। परिसर के लिए कुल 243 पदों के सृजन तथा उनकी पूर्ति तीन वर्षों में चरणबद्ध रूप से किए जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसमें 117 शैक्षणिक, 4 प्रशासनिक तथा 122 गैर-शैक्षणिक पद सम्मिलित हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि श्रीरामानुज संस्कृत परिसर संस्कृत, वैदिक अध्ययन, भारतीय दर्शन, प्राचीन शास्त्रों तथा भारतीय ज्ञान परम्परा के अध्ययन-अध्यापन और शोध का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। परिसर में आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध होने से विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध मार्गदर्शन और आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं प्राप्त होंगी। उन्होंने परिसर के संधारण एवं शैक्षणिक गतिविधियों के विस्तार के लिए आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पदों की स्वीकृति से श्रीरामानुज संस्कृत परिसर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मानकों के अनुरूप शैक्षणिक वातावरण विकसित होगा। साथ ही संस्कृत भाषा, वैदिक ज्ञान, भारतीय दर्शन और पारम्परिक विद्या प्रणालियों के संरक्षण, संवर्धन एवं व्यापक प्रसार को नई गति मिलेगी। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि श्रीरामानुज संस्कृत परिसर, लक्ष्मण बाग, रीवा की स्थापना मध्यप्रदेश शासन द्वारा 5 अक्टूबर 2023 को की गई थी। परिसर में संस्कृत, वैदिक अध्ययन तथा भारतीय शास्त्रों एवं भारतीय ज्ञान परम्परा से संबंधित विषयों में अध्ययन-अध्यापन एवं शोध कार्य संचालित किए जा रहे हैं। वर्तमान में परिसर में शैक्षणिक एवं प्रशासनिक गतिविधियों का संचालन सीमित मानव संसाधनों से किया जा रहा है। परिसर में वेद, वेदान्त दर्शन, व्याकरण, साहित्य, ज्योतिष, संस्कृत, योग, पुराणेतिहास, धर्मशास्त्र, वास्तुशास्त्र, संगीत, मानविकी, पौरोहित्य, हिन्दू अध्ययन, भारतीय ज्ञान परम्परा और शिक्षाशास्त्र सहित विभिन्न विभागों की स्थापना एवं सुदृढ़ीकरण का प्रस्ताव है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने इन विभागों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग मानकों के अनुरूप प्रोफेसर, सह प्राध्यापक एवं सहायक प्राध्यापक के पद सृजित किए जाने के लिए प्रस्ताव शीघ्र तैयार करने के निर्देश दिए।  

पाथरी एनीकट निर्माण कार्य के लिए 3.32 करोड़ रूपए स्वीकृत

पाथरी एनीकट निर्माण कार्य के लिए 3.32 करोड़ रूपए स्वीकृत रायपुर, छत्तीसगढ़ शासन जल संसाधन विभाग द्वारा बस्तर जिले के विकासखण्ड-बकावण्ड की मारकण्डी नदी में ग्राम पाथरी के समीप पाथरी एनीकट निर्माण कार्य के लिए 3 करोड़ 32 लाख 39 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के प्रस्तावित कार्यों के पूर्ण हो जाने पर क्षेत्र में निस्तारी, पेयजल, भू-जल संवर्धन एवं किसानों द्वारा स्वयं के साधन से 50 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ और 30 हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसलों के लिए सिंचाई सुविधा मिलेगी। योजना के निर्माण कार्यों को कराने के लिए मुख्य अभियंता गोदावरी कछार जल संसाधन विभाग जगदलपुर को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।

31 एल्डरमैन की नियुक्ति, 3 जिलों के 8 निकायों में नई जिम्मेदारियां; राजनांदगांव निगम में 8 नाम शामिल

राजनांदगांव राज्य सरकार ने नगरीय निकायों में नामांकित पार्षदों (एल्डरमैन) की आधिकारिक सूची जारी कर दी है। इस घोषणा के तहत तीनों जिलों के 8 निकायों में कुल 31 एल्डरमैन नियुक्त किए गए हैं, जिनमें 11 महिलाएं भी शामिल हैं। राजनांदगांव नगर निगम में कुल 8 एल्डरमैन नियुक्त किए गए हैं, जिनमें युवा चेहरों को प्राथमिकता दी गई है। नवनियुक्त सदस्यों में नागेश यदु, करूणा राजपूत, हर्ष रामटेके, सूर्यकांत श्रीवास, मंजू यादव, भीष्म देवांगन, कृति बोरकर और देवाशीष झा शामिल हैं। राजनांदगांव नगर निगम के अतिरिक्त अन्य नगरीय निकायों में भी एल्डरमैन नियुक्त किए गए हैं। डोंगरगढ़ नगर पालिका में लक्ष्मी नारायण अग्रवाल, जितेंद्र हिरवानी, सविता दरगड़, पूजा नामदेव और लक्ष्मी यादव को जिम्मेदारी मिली है। डोंगरगांव नगर पंचायत में 3 एल्डरमैन नियुक्त डोंगरगांव में गुलशन हिरवानी, दयानंद सेन और राजीव वैष्णव नियुक्त हुए हैं। छुरिया नगर पंचायत में संगीता यादव, गुरप्रीत सिंह भाटिया और नीतीश सिन्हा को एल्डरमैन बनाया गया है। एलबी नगर में राजेंद्र तिवारी, घमोतीन चंद्रवंशी और रेखराम यादव को नियुक्त किया गया है। छुईखदान नगर पंचायत में एल्डरमैन की नियुक्ति जबकि छुईखदान नगर पंचायत में राजू ऊके, किरण गुप्ता और अर्जुन महोबिया को जिम्मेदारी दी गई है। गंडई नगर पंचायत में टेकन देवांगन, राजेश जायसवाल और अशोक देवांगन, और अंबागढ़ चौकी नगर पंचायत में देव नारायण कुंभकार, सैयद अजहरूद्दीन और कुंजलता हरमुख को एल्डरमैन पद पर नियुक्त किया गया है।

भारत-इंग्लैंड दूसरे टी20 का समय बदला, जानिए कब और कितने बजे शुरू होगा मैच

 मैनचेस्टर  इंडिया वर्सेस इंग्लैंड 5 मैच की टी20 सीरीज का दूसरा मुकाबला शनिवार, 4 जुलाई को मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर खेला जाना है। दूसरी टी20 की टाइमिंग में थोड़ा बदलाव है। पहला मुकाबला भारतीय समयानुसार 10 बजे शुरू हुआ था, जो बारिश की भेंट चढ़ा था। इस मैच का भारतीय फैंस मजा नहीं उठा पाए थे। लेकिन दूसरे टी20 को लेकर एक बड़ी खुशखबरी है। फैंस इस मुकाबले का भरपूर मजा उठा पाएंगे क्योंकि यह मैच नॉर्मल टाइमिंग पर शुरू होगा। आईए एक नजर इंडिया वर्सेस इंग्लैंड दूसरे टी20 मुकाबले से जुड़ी कुछ अहम जानकारियों पर डालते हैं- इंडिया वर्सेस इंग्लैंड दूसरा टी20 कब खेला जाएगा? India vs England 2nd T20I शनिवार, 4 जुलाई को खेला जाएगा। IND vs ENG दूसरा टी20 कहां खेला जाएगा? इंडिया वर्सेस इंग्लैंड दूसरा टी20 मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर खेला जाएगा। India vs England 2nd T20I कितने बजे शुरू होगा? IND vs ENG दूसरा टी20 भारतीय समयानुसार शाम 7 बजे शुरू होगा, जबकि टॉस के लिए दोनों कप्तान आधा घंटा पहले मैदान पर उतरेंगे। इंडिया वर्सेस इंग्लैंड दूसरा टी20 कैसे देखें लाइव? India vs England 2nd T20I का लाइव प्रसारण टीवी पर सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क पर होगा, जबकि लाइव स्ट्रीमिंग का मजा भारतीय फैंस दो अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर उठा सकते हैं। सोनीलिव और जियो हॉटस्टार दोनों जगह भारत बनाम इंग्लैंड मुकाबले की लाइव स्ट्रीमिंग होगी। पहला टी20 चढ़ा था बारिश के भेंट इंडिया वर्सेस इंग्लैंड पहला टी20 बारिश की भेंट चढ़ा था। भारत ने पहले बैटिंग करते हुए अभिषेक शर्मा और श्रेयस अय्यर के अर्धशतकों की मदद से 189 रन बोर्ड पर लगाए थे। वहीं शिवम दुबे ने शानदार फिनिशिंग टच देते हुए 21 गेंदों पर 42 रनों की नाबाद पारी खेली। संजू सैमसन एक बार फिर फेल हुए थे। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि दूसरे टी20 में वैभव सूर्यवंशी को डेब्यू का मौका मिल सकता है। इसके अलावा टीम में ज्यादा बदलाव होते नहीं दिख रहे हैं। इंडिया वर्सेस इंग्लैंड स्क्वॉड इंग्लैंड टीम: फिलिप सॉल्ट, जोस बटलर (विकेट कीपर), हैरी ब्रूक (कप्तान), जैकब बेथेल, टॉम बैंटन, सैम करन, विल जैक्स, लियाम डॉसन, साकिब महमूद, आदिल राशिद, ल्यूक वुड, जॉर्डन कॉक्स, जेम्स कोल्स, रेहान अहमद, सोनी बेकर इंडिया टीम: संजू सैमसन, अभिषेक शर्मा, ईशान किशन (विकेट कीपर), श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा, अक्षर पटेल, शिवम दुबे, सूर्यांश शेज, हर्षित राणा, अर्शदीप सिंह, प्रिंस यादव, वाशिंगटन सुंदर, वैभव सूर्यवंशी, प्रसिद्ध कृष्णा, वरुण चक्रवर्ती, रवि बिश्नोई

CG Judicial Transfer: 17 न्यायिक अधिकारियों का ट्रांसफर, ओमप्रकाश जायसवाल बने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार

रायपुर  छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट प्रशासन ने राज्य की उच्च न्यायिक सेवा संवर्ग में एक बड़ा फेरबदल किया है। हाईकोर्ट रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी आदेश के तहत प्रदेश के 17 उच्च न्यायिक सेवा अधिकारियों का तबादला किया गया है। यह आदेश हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है। ​इस प्रशासनिक फेरबदल में कई महत्वपूर्ण नियुक्तियां की गई हैं। ​महत्वपूर्ण नियुक्तियां: हाईकोर्ट लीगल सर्विस कमेटी के सचिव ओम प्रकाश जायसवाल को हाईकोर्ट में नया रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल बनाया गया है। वहीं, जगदलपुर के प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत को जगदलपुर में ही स्पेशल जज एनआईए (NIA) कोर्ट की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ​हाईकोर्ट और अकादमी में बदलाव: बलौदाबाजार के प्रधान जिला न्यायाधीश अब्दुल जाहिद कुरैशी को हाईकोर्ट में रजिस्ट्रार विजलेंस नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, बलौदाबाजार के राकेश कुमार वर्मा को छत्तीसगढ़ न्यायिक अकादमी बिलासपुर में एडिशनल डायरेक्टर और रूपनारायण पात्रे को हाईकोर्ट लीगल सर्विस कमेटी का सचिव बनाया गया है। ​जिलों के जिला न्यायाधीश बदले: सूरजपुर की प्रधान जिला न्यायाधीश विनिता वारनेर का तबादला बलौदाबाजार किया गया है, जबकि सूरजपुर परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश थामस एक्का अब सूरजपुर के नए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश होंगे। इसके साथ ही हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार न्यायिक सुमित कपूर को रायपुर का जिला एवं सत्र न्यायाधीश बनाया गया है। ​इस फेरबदल में रायपुर, जगदलपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज और सारंगढ़ सहित कई जिलों के अतिरिक्त व जिला न्यायाधीशों के प्रभार बदले गए हैं, जिससे न्यायिक कामकाज को और अधिक गति मिलने की उम्मीद है।