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मध्यप्रदेश पर्यटन क्विज 2026: 25 जुलाई तक करें ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, जानें प्रदेश की समृद्ध विरासत

मध्यप्रदेश पर्यटन क्विज-2026 के लिए ऑनलाइन पंजीयन 25 जुलाई 2026 तक: विद्यार्थियों को जानने को मिलेगी प्रदेश की समृद्धशाली विरासत "बूझो जानो फिर देखो अपना प्रदेश"की जिला स्तरीय क्विज 07 अगस्त को होगी आयोजित मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड की ओर से विजेता और उपविजेता टीमों को मिलेगा पर्यटन का आकर्षक उपहार साल 2025 में 24489 विद्यार्थियों ने लिया था उत्साहपूर्वक हिस्सा, 8163 विद्यालयों ने द्वारा कराया गया था पंजीयन भोपाल  मध्यप्रदेश के समृद्धशाली इतिहास, परंपराओं, ऐतिहासिक धरोहरों, सांस्कृतिक विविधताओं, कला, प्राकृतिक संपदा और पर्यटन की असीम संभावनाओं से विद्यार्थियों को अवगत कराने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा 'पर्यटन क्विज-2026' का आयोजन किया जा रहा है। जिला स्तरीय इस क्विज में भाग लेने के लिए विद्यालयों द्वारा ऑनलाइन पंजीयन 1 जुलाई से 25 जुलाई 2026 तक शाम 5:30 बजे तक आधिकारिक वेबसाइट    https://www.mptourism.com/tourismquiz2026/schools/ के माध्यम से किया जा सकता है। विद्यार्थियों में पर्यटन के माध्यम से सीखने की प्रवृत्ति को विकसित करने, मध्यप्रदेश पर्यटन की संभावनाओं से जुड़े ज्ञान का संचार करने के उद्देश्स से आयोजित हो रहे इस क्विज में प्रदेश के सभी शासकीय, अशासकीय, सी.बी.एस.ई. (CBSE) एवं केंद्रीय विद्यालयों के कक्षा 9वीं से 12वीं के अध्ययनरत छात्र-छात्राएं सहभागिता कर सकते हैं। 7 अगस्त को"बूझो जानो फिर देखो अपना प्रदेश" की जिला स्तरीय क्विज मध्य प्रदेश पर्यटन क्विज-2026 "बूझो जानो फिर देखो अपना प्रदेश" का जिला स्तरीय आयोजन आगामी 07 अगस्त 2026 को प्रदेश के समस्त जिलों में एक साथ किया जाएगा। पर्यटन क्विज-2026 क्विज में पूछे जाने वाले प्रश्न मध्य प्रदेश के पर्यटन, कला, संस्कृति, धार्मिक, प्राकृतिक परिवेश और ऐतिहासिक संवर्धन पर आधारित होंगे। जिला स्तर पर प्रतियोगिता दो चरणों में संपन्न होगी। प्रथम चरण की लिखित परीक्षा के आधार पर चयनित शीर्ष 06 टीमों के मध्य द्वितीय चरण में 'ऑडियो-विजुअल/मल्टीमीडिया' आधारित क्विज का आयोजन किया जाएगा। जिला स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली विद्यालयीन टीम राज्य स्तरीय क्विज में जिले का प्रतिनिधित्व करेगी। साल 2025 में 24,489 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक लिया था हिस्सा मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा वर्ष 2016 से (कोविड महामारी के कारण वर्ष 2020-21 को छोड़कर) प्रतिवर्ष पर्यटन क्विज का सफल आयोजन किया जा रहा है। वर्ष 2025 में आयोजित पर्यटन क्विज को विद्यार्थियों का अभूतपूर्व उत्साह प्राप्त हुआ, जिसमें 24,489 विद्यार्थियों ने भागीदारी की तथा 8,163 विद्यालयों ने अपने विद्यार्थियों का पंजीयन कराया। यह उल्लेखनीय सहभागिता विद्यार्थियों में प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहरों के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाती है। पर्यटन क्विज-2026 का ध्येय भी विद्यार्थियों को मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक एवं प्राकृतिक पर्यटन स्थलों से परिचित कराना, उनमें पर्यटन के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा अपने गौरवशाली प्रदेश की विरासत और पर्यटन संभावनाओं से जोड़ना है, ताकि भावी पीढ़ी प्रदेश की अनमोल धरोहरों से परिचित हो सके।  मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड की ओर से विजेता टीमों को मिलेगा निःशुल्क पर्यटन भ्रमण का उपहार मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा विद्यार्थियों को पर्यटन के प्रति प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आकर्षक पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। प्रत्येक जिले की प्रथम तीन विजेता टीमों को मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (MPSTDC) के होटलों में 2 रात्रि एवं 3 दिवस के निःशुल्क पर्यटन भ्रमण का कूपन प्रदान किया जाएगा। वहीं, अगली तीन उपविजेता टीमों को 1 रात्रि एवं 2 दिवस के निःशुल्क पर्यटन भ्रमण का कूपन दिया जाएगा।इन कूपनों के अंतर्गत विद्यार्थियों के आने-जाने, आवास, भोजन तथा स्थानीय भ्रमण का संपूर्ण व्यय मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा वहन किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों को प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हो सके।  

Ketan Murder Case: जांच में नया मोड़, सिया-चेतन के कथित कोड वर्ड चैट की पड़ताल; पुलिस ने बरामद किया दूसरा फोन

 पुणे केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं. अब पुलिस ने अदालत से मुख्य आरोपी सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी की पुलिस हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की. हालांकि कोर्ट ने इसे नामंजूर करते हुए दोनों आरोपियों को ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया. पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान पता चला है कि दोनों आपस में बातचीत के लिए कोड वर्ड का इस्तेमाल करते थे, जिनका मतलब और उद्देश्य अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है।  मामले की जानकारी देते हुए जांच अधिकारी मनोज पवार ने बताया कि जांच के दौरान चेतन से घटनाक्रम की आमने-सामने पड़ताल की गई, जबकि सिया से उसके पासपोर्ट और अन्य पहलुओं पर पूछताछ की गई. इसी बीच गुरुवार सुबह सिया का दूसरा मोबाइल फोन भी जब्त किया गया. इससे पहले दोनों आरोपियों के एक-एक मोबाइल फोन पहले ही पुलिस अपने कब्जे में ले चुकी थी।  पुलिस के अनुसार, डिजिटल जांच में सामने आया है कि सिया और चेतन बातचीत के दौरान कोड वर्ड्स का इस्तेमाल करते थे. अब दूसरे मोबाइल की फॉरेंसिक जांच के जरिए इन कोड वर्ड्स का मतलब, उनके इस्तेमाल का उद्देश्य और हत्या की साजिश से उनका संबंध पता लगाया जाएगा. इसी वजह से दोनों आरोपियों की पुलिस कस्टडी तीन दिन और बढ़ाने की मांग की गई है।  सरकारी पक्ष की ओर से पेश वकील ने बताया कि नया मोबाइल मिलने के बाद दोनों आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करना बेहद जरूरी है. उनका कहना था कि जिन कोड वर्ड्स का इस्तेमाल किया गया, उनका सही अर्थ केवल सिया और चेतन ही बता सकते हैं. इसलिए जांच को आगे बढ़ाने के लिए दोनों का आमना-सामना कराना आवश्यक है।  पुलिस ने सीन किया था री-क्रिएट इससे पहले गुरुवार सुबह पुलिस सिया गोयल को पुणे के लुल्लानगर स्थित उस स्थान पर भी लेकर गई, जहां उसने और चेतन ने कथित तौर पर लोहागढ़ किले से केतन अग्रवाल को धक्का देने की रिहर्सल की थी. पुलिस का दावा है कि मई महीने में दोनों ने हत्या की योजना को अंजाम देने से पहले वहां अभ्यास किया था. सिया ने मौके पर उस स्थान की पहचान भी की।  जांच के दौरान पुलिस ने सिया के घर से घटना वाले दिन पहने गए कथित कपड़े भी बरामद किए हैं. इसके अलावा दोनों आरोपियों का पॉलीग्राफ टेस्ट कराने के लिए भी अदालत से अनुमति मांगी गई है. पुलिस का कहना है कि तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण जारी है और जांच तेजी से आगे बढ़ रही है. पुलिस के अनुसार, प्रेम संबंध में बाधा बनने के कारण केतन अग्रवाल की कथित तौर पर हत्या की गई थी। 

भीषण बस हादसे से दहला पाकिस्तान, ओवरलोडेड बस खाई में गिरी; 40 यात्रियों की जान गई

इस्लामाबाद  पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया है. यहां यात्रियों से भरी एक बस गहरी खाई में गिर गई. अधिकारियों के मुताबिक हादसा उस समय हुआ जब बस बलूचिस्तान के शेरानी जिले के दाना सर इलाके से निकलकर खैबर पख्तूनख्वा में प्रवेश कर रही थी. मिल रही जानकारी के मुताबिक घटना में कम से कम 40 लोगों की मौत हो गई, जबकि अब तक 8 लोगों के जख्मी होने की खबर है।  बलूचिस्तान सरकार के प्रवक्ता शाहिद रिंद ने घटना के बारे में ज्यादा जानकारी देते हुए कहा कि हादसे में जख्मी हुए लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है. दुर्घटना के तुरंत बाद इलाके में बचाव अभियान शुरू कर दिया गया. बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने भी राहत और बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचाया जा सके. ट्रिब्यून एक्सप्रेस के मुताबिक बस क्वेटा से रवाना हुई थी, जिसके खराब होने के बाद यात्रियों को दूसरी बस में बिठाया गया, जिससे वो ओवरलोड हुई और हादसा हुआ।  घटना की जांच जारी शेरानी के डिप्टी कमिश्नर हजरत वाली काकर ने बताया- ‘घायलों को निकालकर नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया जा रहा है. मरने वालों की लाशों को निकालने और शिफ्ट करने का काम जारी है.’ डिप्टी कमिश्नर ने आगे बताया कि बस क्वेटा से 36 यात्रियों के साथ रवाना हुई थी, लेकिन रास्ते में एक दूसरी बस खराब हो जाने के कारण कुछ और यात्री इस बस में सवार हो गए थे. इससे बस पर सवारियों की संख्या बढ़ गई थी. प्रशासन ने हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बस की तेज रफ्तार या सड़क की खराब स्थिति हादसे की वजह हो सकती है. बलूचिस्तान की पहाड़ी सड़कें अक्सर खतरनाक होती हैं और यहां बस व ट्रक दुर्घटनाएं आम हैं. स्थानीय लोगों ने बताया कि हादसा रात के समय हुआ, जिससे बचाव कार्य में दिक्कत आई।  घायलों को इलाज के लिए क्वेटा और अन्य नजदीकी अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है. पाकिस्तान में सड़क सुरक्षा एक बड़ी समस्या बनी हुई है. हर साल सैकड़ों लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाते हैं। खराब सड़कें, ओवरलोडेड वाहन, ड्राइवरों की लापरवाही और खराब मौसम अक्सर ऐसे हादसों का कारण बनते हैं. अभी गुरुवार इसी इलाके में मौजूद एक पर्यटन स्थल पर नाव पलट जाने की वजह से एक ही परिवार के 7 लोगों की मौत हो गई। 

नागिन डांस बना शादी टूटने की वजह! कानपुर में दुल्हन ने किया इनकार, बाद में हुई मारपीट

 कानपुर शादी की खुशियां उस वक्त  बदल गईं, जब जयमाल से ठीक पहले दूल्हे की हरकतें देखकर दुल्हन ने शादी करने से साफ इनकार कर दिया. आरोप है कि दूल्हा शराब के नशे में इतना धुत था कि स्टेज पर पहुंचते ही संतुलन खो बैठा और लोगों के सामने नागिन डांस करने लगा. इसके बाद दुल्हन ने सभी के सामने कहा कि वह नशे की हालत में आए दूल्हे से शादी नहीं करेगी।  मामला कानपुर के चौबेपुर थाना क्षेत्र के हल्कापुर गांव का है. यहां शोभन बेरी सवाई से बारात पहुंची थी. शादी की शुरुआती रस्में सामान्य ढंग से पूरी हुईं. तिलक के बाद बारात दरवाजे पर पहुंची और जयमाल की तैयारी शुरू हुई. इसी दौरान दूल्हे को स्टेज पर बुलाया गया, लेकिन वहां पहुंचते ही उसकी हालत बिगड़ गई. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दूल्हा स्टेज पर गिर पड़ा और नशे की हालत में अजीब हरकतें करने लगा. मौजूद लोगों का कहना है कि वह नागिन डांस भी करने लगा. यह दृश्य देखकर दोनों पक्षों के लोग हैरान रह गए. जब दुल्हन को दूल्हे की हालत का पता चला तो वह भी स्टेज पर पहुंची. दूल्हे की स्थिति देखने के बाद उसने बिना देर किए शादी से इनकार कर दिया. दुल्हन ने साफ शब्दों में कहा कि वह किसी नशे के आदी व्यक्ति के साथ अपना जीवन शुरू नहीं कर सकती।  दुल्हन की बात सुनते ही मारपीट  दुल्हन के फैसले के बाद माहौल अचानक गर्म हो गया. दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हुई, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गई. सूचना मिलने पर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को शांत कराया.इसके बाद मामला थाने पहुंचा, जहां दिनभर पंचायत और समझौते की कोशिशें चलती रहीं. हालांकि दुल्हन अपने फैसले पर अडिग रही और उसने दोहराया कि वह नशे की हालत में आए दूल्हे से किसी भी कीमत पर शादी नहीं करेगी।  मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस को घटना की सूचना मिली थी. प्रारंभिक जानकारी में दूल्हे के नशे में होने की बात सामने आई है. उन्होंने बताया कि लड़की पक्ष ने यह आरोप भी लगाया है कि लड़के वालों ने शादी के दौरान एक लाख रुपये अतिरिक्त दहेज की मांग की थी. पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और दोनों पक्षों के आरोपों की पड़ताल की जा रही है। 

Delhi HC की ध्रुव राठी को फटकार, अदालत बोली- भावनाएं आहत करने वाला कंटेंट नहीं चलेगा

नई दिल्ली यूट्यूबर ध्रुव राठी के एक विवादित वीडियो को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम निर्देश जारी किए हैं. अदालत ने सरकार की शिकायत अपीलीय समिति (Grievance Appellate Committee-GAC) को आदेश दिया है कि वह वीडियो हटाने की मांग वाली अपील पर 15 दिनों के भीतर फैसला सुनाए. कोर्ट ने यह भी कहा कि उसके आदेश की किसी भी तरह की अनदेखी को गंभीरता से लिया जाएगा।  यह मामला ध्रुव राठी के इसी साल 21 मार्च को अपलोड किए गए यूट्यूब वीडियो 'क्या हिंदू बीफ खा सकते हैं? केरल स्टोरी 2 का पर्दाफाश' से जुड़ा है. याचिकाकर्ता वकील अमिता सचदेवा का आरोप है कि इस वीडियो में भगवान राम, माता सीता और भगवान कृष्ण के बारे में कथित तौर पर कहा गया कि वे मांस और शराब का सेवन करते थे, जिससे करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।  सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा ने कहा कि यूट्यूब जैसे इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म को उचित सावधानी बरतनी चाहिए थी. उनका तर्क था कि आपत्तिजनक और नफरत फैलाने वाले कंटेंट को तुरंत हटाया जाना चाहिए था. उन्होंने अदालत से कहा कि ध्रुव राठी का वीडियो नुकसान पहुंचाने वाला है और समाज में फूट डालने वाला कंटेंट है।  या तो गूगल वीडियो हटाए, या कोर्ट दे आदेश! एएसजी ने यह भी कहा कि या तो गूगल खुद वीडियो हटाने का फैसला करे या फिर अदालत इस मामले में उचित आदेश पारित करे. उन्होंने कहा कि ऐसे कंटेंट को मंच नहीं मिलना चाहिए, जो बहुसंख्यक समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता हो।  15 दिनों के भीतर GAC को देना होगा फैसला- कोर्ट वहीं गूगल की तरफ से पेश वकील ने अदालत को बताया कि कंपनी अपना जवाब याचिकाकर्ता को दे चुकी है और इस मामले में GAC के सामने अपील भी दायर कर दी गई है. इसके बाद जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने GAC को 15 दिनों के भीतर अपील पर फैसला लेने का निर्देश दिया।  फिलहाल हाईकोर्ट ने वीडियो हटाने पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है. अब सभी की नजर GAC के फैसले पर टिकी है, जिसे अदालत के निर्देश के मुताबिक अगले 15 दिनों के भीतर अपना फैसला देना होगा। 

CM मोहन यादव ने की बारिश की समीक्षा, अधिकारियों को किसानों को समय पर मार्गदर्शन देने के निर्देश

भोपाल   संभावित अल्पवर्षा की आशंका को देखते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 2 जुलाई को मंत्रालय में किसान कल्याण एवं कृषि विकास, जल संसाधन, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारिता, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी समेत विभिन्न विभागों की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में उन्होंने कहा कि कम बारिश की संभावना को संकट के बजाय बेहतर योजना, वैज्ञानिक खेती और समय रहते तैयारी करने का अवसर माना जाना चाहिए। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करते हुए किसानों तक समय पर जरूरी जानकारी और मार्गदर्शन पहुंचाने के निर्देश दिए, ताकि कृषि उत्पादन और किसानों की आय पर किसी प्रकार का नकारात्मक असर न पड़े।  मुख्यमंत्री  यादव ने  कहा कि कम वर्षा की संभावना को चुनौती के रूप में नहीं, बल्कि बेहतर योजना, वैज्ञानिक खेती और समय पर तैयारी के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।उन्होंने बारिश की स्थिति की समीक्षा करते हुए कहा कि सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ काम करना चाहिए और किसानों को समय पर मार्गदर्शन प्रदान करना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो कि कृषि उत्पादन और किसानों की आय प्रभावित न हो।अधिकारियों ने बताया कि यादव ने सचिवालय में किसान कल्याण एवं कृषि विकास, जल संसाधन, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारिता, लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं अन्य विभागों द्वारा अब तक की गई तैयारियों की समीक्षा की। किसानों को वैज्ञानिक खेती और कम पानी वाली फसलों के लिए किया जाएगा प्रेरित मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि प्रदेश का हर किसान मौसम की चुनौतियों का सामना वैज्ञानिक तरीके और उचित तैयारी के साथ कर सके। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसानों को ऐसी फसलों के बारे में जागरूक किया जाए, जिन्हें कम पानी की जरूरत होती है और जो कम समय में तैयार हो जाती हैं। उन्होंने ज्वार, बाजरा, उड़द, मूंग, तुअर, कोदो और कुटकी जैसी मोटे अनाज एवं दलहनी फसलों को अपनाने पर विशेष जोर दिया। उनका कहना था कि ये फसलें कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती हैं और किसानों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी साबित हो सकती हैं। बुआई में जल्दबाजी न करें, पर्याप्त नमी के बाद ही करें खेती मुख्यमंत्री ने किसानों को सलाह देने के निर्देश दिए कि पर्याप्त नमी बनने से पहले बुआई न करें। खेतों में नमी संरक्षण के उपाय अपनाने के साथ-साथ कम अवधि में अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत किस्मों और आधुनिक कृषि तकनीकों का अधिक से अधिक उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की सलाह किसानों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाई जाए, ताकि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार सही फसल का चयन किया जा सके। इसके लिए कृषि विस्तार तंत्र को और अधिक सक्रिय बनाने पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार लगातार मौसम की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसानों को हर संभव तकनीकी एवं प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। दो वर्षों में जल संरक्षण और जलापूर्ति को मजबूत करने की तैयारी बैठक में बताया गया कि प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में वैकल्पिक जल स्रोतों की पहचान कर टैंकर आपूर्ति की आकस्मिक योजना तैयार की जाएगी। अमृत 2.0 के अंतर्गत जलप्रदाय योजनाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के तहत प्रत्येक गांव की समीक्षा होगी और बंद या अधूरी नल-जल योजनाओं की मरम्मत के लिए 90 दिन का विशेष अभियान चलाया जाएगा। 'जलाभिषेक 2.0' अभियान के तहत पुराने तालाबों, कुओं, बावड़ियों और अन्य जल संरचनाओं का सर्वे कर उनका जीर्णोद्धार किया जाएगा। मनरेगा के सहयोग से प्रत्येक विकासखंड में कम से कम 100 जल संरचनाओं को अगले दो वर्षों में पुनर्जीवित करने का लक्ष्य रखा गया है। भूजल संरक्षण और सिंचाई व्यवस्था पर रहेगा विशेष फोकस सरकार सभी विकासखंडों में रिचार्ज शाफ्ट, चेक डैम, स्टॉप डैम और खेत-तालाब निर्माण को मिशन मोड में आगे बढ़ाएगी। "खेत का पानी खेत में और गांव का पानी गांव में" की अवधारणा पर विशेष रूप से काम किया जाएगा। इसके साथ ही रबी सीजन से पहले नहरों की सफाई और मरम्मत पूरी करने तथा अंतिम छोर तक सिंचाई का पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए गए हैं। कम पानी वाली खेती और जिला स्तर पर आकस्मिक फसल योजना तैयार बैठक में जानकारी दी गई कि दलहन, तिलहन और श्रीअन्न जैसी कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। इनके समर्थन मूल्य पर खरीदी की व्यवस्था भी मजबूत की जाएगी। धान उत्पादक क्षेत्रों में डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) और वैकल्पिक गीला-सूखा सिंचाई पद्धति को बढ़ावा देने के साथ प्रत्येक जिले के लिए अलग-अलग कंटिन्जेंसी क्रॉप प्लान तैयार किया जा रहा है। जलाशयों के संचालन के लिए तय होगा स्पष्ट प्रोटोकॉल सरकार इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर, बाणसागर और गांधीसागर सहित सभी प्रमुख जलाशयों के संचालन में तय नियमों का पालन सुनिश्चित करेगी। जल उपयोग की प्राथमिकता में सबसे पहले पेयजल, उसके बाद सिंचाई और अंत में विद्युत उत्पादन रखा जाएगा। इसके अलावा राज्य स्तर पर रियल-टाइम जल डैशबोर्ड तैयार किए जाएंगे, जिससे जलाशयों और जल संसाधनों की लगातार निगरानी की जा सके। "जल गंगा संवर्धन" अभियान की तर्ज पर जनभागीदारी वाले कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे। प्रत्येक जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में जल संकट से निपटने के लिए अलग आकस्मिक योजना तैयार होगी। फसल बीमा, डिजिटल सर्वे और सोशल मीडिया से किसानों तक पहुंचेगी जानकारी बैठक में बताया गया कि आरबीसी 6(4) के तहत फसल क्षति सर्वे के लिए राजस्व, कृषि और पंचायत विभाग के अधिकारियों का संयुक्त प्रशिक्षण पहले ही पूरा कराया जाएगा। डिजिटल क्रॉप सर्वे और सैटेलाइट इमेजरी के माध्यम से नुकसान का आकलन कर 15 दिनों के भीतर सर्वे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। फसल बीमा का दायरा बढ़ाने और दावों का शीघ्र निपटारा सुनिश्चित करने के लिए भी कार्यवाही की जा रही है। राज्य स्तरीय आकस्मिक कार्ययोजना विभागीय पोर्टल पर अपलोड की जा चुकी है। उन्नत बीज वितरण, फसल प्रदर्शन और बलराम तालाब योजना के तहत वर्षा जल संरक्षण के लक्ष्य जिलों को दिए जा चुके हैं। सरकार सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से किसानों को मौसम पूर्वानुमान, खेती से जुड़ी सलाह और आवश्यक जानकारी लगातार उपलब्ध कराएगी। सभी जिलों के कलेक्टरों को सिंचाई, जलभराव, जीवन रक्षक … Read more

आम की फसल से काफी मुनाफा कमा रहे किसान, देश में 26 फीसदी आम का उत्पादन करता है उत्तर प्रदेशः सीएम

गुणवत्ता, विश्वास व वैश्विक मानकों पर खरा उतरे यूपी का आमः मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में किया आम महोत्सव-2026 का शुभारंभ, स्टॉल्स का अवलोकन किया और आम की 800 प्रजातियों के बारे में जानकारी ली आम की फसल से काफी मुनाफा कमा रहे किसान, देश में 26 फीसदी आम का उत्पादन करता है उत्तर प्रदेशः सीएम  सीएम ने की काकोरी ब्रांड की चर्चा, कहा- इसमें देश के प्रति समर्पण का भाव और किसानों की मेहनत की मिठास  उद्यान विभाग को आम की अधिक से अधिक किस्मों को जीआई टैग दिलाने के लिए आवेदन करने का निर्देश लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में शुक्रवार को आम महोत्सव-2026 का शुभारंभ किया। उन्होंने स्टॉल्स का अवलोकन कर आम की 800 से अधिक प्रजातियों के बारे में भी जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी तैयारी इस तरह होनी चाहिए कि यूपी के किसानों का आम गुणवत्ता, विश्वास व वैश्विक मानकों पर खरा उतर सके। हमारा लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित न रहे, बल्कि ब्रांडिंग, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग के साथ ही प्रोडक्ट की ट्रेसेबिलिटी व ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन पर भी ध्यान देना होगा। तभी यह एक्सपोर्ट के लिए स्वीकार्य होगा। एक बाग आय के कई मॉडल के रूप में फल उत्पादन, प्रोसेसिंग, टूरिज्म, ऑर्गेनिक उत्पाद, मधुमक्खी पालन, खाद्य उद्योग और एक्सपोर्ट के जरिए किसानों की आमदनी बढ़ाने का माध्यम बन सकता है।  माटी की खुशबू व मिठास से आकर्षित कर रहा आम  मुख्यमंत्री ने कहा कि जब सरकार के स्तर पर प्लेटफॉर्म मिलता है, शोकेसिंग का अवसर प्राप्त होता है तो यूपी के आम की प्रजातियों का पता चलता है। यहां प्रदेश व देश के अलग-अलग राज्यों से आम की 800 वैरायटी प्रदर्शित हो रही हैं। वाराणसी-गोरखपुर का लंगड़ा, गोरखपुर का गौरजीत, बस्ती का आम्रपाली, मलिहाबाद लखनऊ का दशहरी, बागपत व सहारनपुर के रटौल समेत प्रदेश के अलग-अलग जनपदों व मंडलों में पैदा होने वाली आम की किस्में वहां की माटी की सुगंध व मिठास के जरिए इस महोत्सव में आए हर व्यक्ति को आकर्षित कर रही है और यही यूपी की ताकत है।  प्लेटफार्म पर साझा हों किसानों के अनुभव सीएम ने मंच पर सम्मानित होने वाले किसानों से उत्पादन के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने बताया कि एक दिन औद्यानिक फसल से जुड़े किसान से बातचीत हो रही थी। वह प्राकृतिक तरीके से बाग में कीड़ों को नष्ट करने के तरीके बता रहे थे। उनका कहना था कि वह खुद तो इसका उपयोग करते हैं, लेकिन उनके अनुभव को प्लेटफॉर्म न मिलने से अन्य किसानों को व्यापक लाभ नहीं मिल पाता। इसे देखते हुए किसानों को उनके अनुभव साझा करने के लिए अधिक से अधिक प्लेटफॉर्म दिलाने के प्रयास में तेजी लाई जाएगी।  आम की फसल से अच्छा मुनाफा कमा रहे किसान सीएम ने कहा कि किसान सामान्यत: एक एकड़ में आम की फसल से दो से तीन लाख रुपये मुनाफा कमा रहे हैं। इसमें वैल्यू एडिशन, प्रोसेसिंग जोड़ेंगे, एक्सपोर्ट के लिए तैयार करेंगे मुनाफा और बढ़ जाता है। आम महोत्सव उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के किसानों के लिए भी शोकेसिंग का आधार है। वे अपने उत्पाद प्रस्तुत कर बायर्स-सेलर मीट के माध्यम से इसे वैश्विक पहचान दिला सकते हैं। मलिहाबाद के आम को जीआई टैग प्राप्त होने से उसे वैश्विक पहचान मिली है।  प्रदेश के हर हिस्से में पैदा होता है आम सीएम ने कहा कि 2017 से यह आयोजन अनवरत हो रहा है। पहले वर्ष महोत्सव में कम वैरायटी आई, लेकिन साल दर साल यह बढ़ता गया। इस साल आम की 800 वैरायटी आईं हैं। इसके साथ ड्रैगन फ्रूट व कमल की ब्रांडिंग भी देखने को मिली। यूपी के सभी 18 मंडलों, 75 जनपदों, 350 तहसीलों और 825 विकास खंडों में आम पैदा होता है। यहां 100 ग्राम से लेकर डेढ़-दो किलो तक वजन वाले आम दिखे। वैरायटी व स्वाद, अन्नदाता किसान व प्रदेश की ताकत को बढ़ाता है।  देश में 26 फीसदी आम का उत्पादन करता है उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के कुल आम उत्पादन में उत्तर प्रदेश 26 फीसदी हिस्सेदारी करता है। महोत्सव में 7 श्रेणियों के 56 वर्गों में 800 से अधिक वैरायटी हैं। सीएम ने आम महोत्सव में बायर्स-सेलर्स मीट की सराहना की। कहा कि यूपी में हम लोग ओडीओपी से जुड़े आयोजन करते हैं तो बायर्स-सेलर्स मीट अवश्य रखते हैं। इससे किसानों व उद्यमियों को अपने उत्पाद आगे बढ़ाने में मदद मिलती है। औद्यानिक फसलों से जुड़े किसान, स्वयं सहायता समूह, पैक हाउस, एक्सपोर्ट, फूड प्रोसेसिंग, नर्सरी मालिक, बैंकर्स, इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने वाला मैकेनिज्म, मशीनरी व उपकरण आपूर्तिकर्ता, रिसर्च व डवलपमेंट से जुड़े वैज्ञानिक भी इस कार्यक्रम से जुड़े हैं। उद्यान विभाग ने यूपी में औद्यानिक फसलों के लिए ईकोसिस्टम बनाने का कार्य किया है। वोकल फॉर लोकल को प्रोत्साहित करते हैं ऐसे महोत्सव सीएम ने कहा कि दुनिया बदल रही है। तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में यूपी में ग्रामीण अर्थव्यवस्था, खाद्य प्रसंस्करण, महिला सशक्तीकरण, कृषि आधारित उद्योगों, पर्यटन, रोजगार व निर्यात संवर्धन की दृष्टि से यह बेहतरीन प्लेटफॉर्म है। ऐसे महोत्सव प्रधानमंत्री जी के वोकल फॉर लोकल को प्रोत्साहित करते हैं और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्रस्तुत करते हैं। स्वस्थ प्रतिस्पर्धा आगे बढ़ने को प्रेरित करती है। कई देशों में होता है यूपी के आम का निर्यात  सीएम ने कहा कि यूपी ने खुद को भारत की बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित किया है। यूपी के आम का निर्यात यूके, यूएई, कुवैत, मलेशिया, सिंगापुर, न्यूजीलैंड, बेल्जियम, जापान, इटली, रूस, कतर आदि देशों में हो रहा है। एपीडा जैसी एजेंसियां विदेशों में खरीदार व एफपीओ के बीच सीधा संपर्क स्थापित करती हैं।  काकोरी ब्रांड में दिखता है देश के प्रति समर्पण  सीएम ने मलिहाबादी आम की चर्चा करते हुए कहा कि हमने इसे ‘काकोरी ब्रांड’ दिया है। काकोरी के अमर शहीदों ने देश की आजादी के लिए खुद का बलिदान दिया। उनकी स्मृति को जीवंत बनाए रखने के लिए हमने इसे यह नाम दिया। काकोरी ब्रांड में देश के प्रति समर्पण का भाव और किसानों की मेहनत की मिठास है।  जेवर एयरपोर्ट के पास बनेगा इंटीग्रेटेड टेस्टिंग एंड ट्रीटमेंट पार्क सीएम ने कहा कि सहारनपुर, वाराणसी, लखनऊ, अमरोहा में आम के आधुनिक पैक हाउस काम कर रहे हैं। इसके माध्यम से आम … Read more

खेती की लागत कम करना और किसानों की आय बढ़ाना हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

किसानों से सीधे संवाद के लिए राजधानी से लेकर मैदानी स्तर तक किये जाये कार्यक्रम आयोजित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव खेती की लागत कम करना और किसानों की आय बढ़ाना हमारी प्राथमिकता किसानों को उन्नत नस्ल की गाय उपलब्ध कराने में निजी संस्थाओं का सहयोग भी लिया जाए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की कृषक कल्याण वर्ष के अंतर्गत संचालित गतिविधियों की समीक्षा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों का कल्याण राज्य सरकार का कर्तव्य है। खेती की लागत कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए गतिविधियों को प्राथमिकता पर लिया जाना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किया गया है। कृषकों के हित संवर्धन के लिए लागू कार्यक्रमों और योजनाओं का क्रियान्वयन मिशन मोड में किया जाए। किसानों से सीधे संवाद के लिए राजधानी से लेकर मैदानी स्तर तक कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। दुग्ध उत्पादन किसानों की आय बढ़ाने के लिए विशेष रूप से सहायक है। किसानों को उन्नत नस्ल की गाय उपलब्ध कराने में निजी संस्थाओं का सहयोग भी लिया जाए। ग्रामीण स्तर पर इस तरह के केन्द्रों का अधिक से अधिक विस्तार हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कृषक कल्याण वर्ष के अंतर्गत अब तक हुए कार्यक्रमों की मंत्रालय में समीक्षा कर रहे थे। बैठक में आगामी प्रस्तावित कार्यक्रमों के संबंध में भी अधिकारियों को निर्देश दिए गए। बैठक में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना, मुख्य सचिव अनुराग जैन तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे। सहकारी समितियों की प्रक्रियाओं का डिजिटलाइजेशन हो मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को कम पानी और अल्प अवधि की फसलों के लिए जागरूक किया जाए। फसल चक्र में परिवर्तन और प्राकृतिक व जैविक खेती के प्रोत्साहन के लिए वातावरण बनाना आवश्यक है। खेती-किसानी से जुड़े स्थानीय पर्व और त्यौहारों तथा फसल चक्र के अनुसार किसानों से संवाद स्थापित किया जाए। सुगमता और सरलता सुनिश्चित करते हुए सहकारी समितियों की प्रक्रियाओं का डिजिटलाइजेशन किया जाए। सभी जिलों में बलराम कृषि महोत्सव और संभागीय मुख्यालयों पर होंगे फूड फेस्टिवल मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में जानकारी दी गई कि ऑनलाईन किसान क्रेडिट कार्ड पोर्टल और किसानों के लिए ई-पासबुक सुविधा का शुभारंभ जुलाई माह में ही किया जाएगा। राज्य स्तरीय सहकारिता सम्मेलन का आयोजन भी होगा। उत्कृष्ट कार्य करने वाले मैदानी कार्यकर्ताओं तथा पशुपालकों को पुरस्कृत और सम्मानित करने के लिए उज्जैन में राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन होगा। प्रदेश के सभी जिलों में बलराम कृषि महोत्सव आयोजित किए जाएंगे और सभी संभागीय मुख्यालयों पर फूड फेस्टिवल होंगे। इंदौर में होगा सब्जी महोत्सव और एक्वाकल्चर मार्केटिंग सिम्पोजियम बैठक में बताया गया कि खरगौन में राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन और कपास एवं मिर्च महोत्सव के आयोजन की योजना है। अन्तर्देशीय मत्स्य पालन और जलीय कृषि पर जबलपुर में कार्यक्रम होगा। इसी प्रकार जबलपुर में ही कुक्कुट पालकों और उद्यमियों का सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा। बुरहानपुर में केला महोत्सव, उज्जैन में हाईटेक नर्सरी और संरक्षित खेती पर कार्यशाला, सागर और रतलाम में कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) का राज्य स्तरीय सम्मेलन, नीमच में उद्यानिकी में आधुनिक तकनीक पर कार्यशाला, इंदौर में सब्जी महोत्सव तथा एक्वाकल्चर मार्केटिंग सिम्पोजियम और भोपाल पराली प्रबंधन पर कार्यशाला के साथ ही नरसिंहपुर में गन्ना महोत्सव के अंतर्गत राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन भी प्रस्तावित है। बैठक में अपर मुख्य सचिव के.सी गुप्ता, नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव डी.पी. आहूजा, उमाकांत उमराव, आयुक्त जनसम्पर्क मनीष सिंह उपस्थित थे।  

एक पेड़ मां के नाम 3.0′ अभियान से हरित चेतना को मिलेगी नई उड़ान, जुलाई में स्कूलों में होगा महाअभियान

एक पेड़ मां के नाम 3.0' से हरित चेतना को मिलेगा नया विस्तार, जुलाई में विद्यालयों में पर्यावरण संरक्षण का महाअभियान  'इको क्लब्स फॉर मिशन लाइफ' के जुलाई कैलेंडर के तहत पूरे माह चलेंगी पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली से जुड़ी गतिविधियां – पौधरोपण, प्रकृति भ्रमण, पोस्टर, स्लोगन, वाद-विवाद, लेखन और जागरूकता कार्यक्रमों से विद्यार्थियों में विकसित होंगे पर्यावरणीय संस्कार प्रत्येक विद्यार्थी बनेगा एक पौधे का संरक्षक, विद्यालयों से समाज तक पहुंचेगा हरित संदेश लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार विद्यालयों को पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की प्रयोगशाला बनाने की दिशा में लगातार कदम बढ़ा रही है। इसी क्रम में 'इको क्लब्स फॉर मिशन लाइफ' के अन्तर्गत जुलाई माह का गतिविधि कैलेंडर जारी किया गया है। जुलाई माह का यह कैलेंडर विद्यालयों में हरित संस्कृति को मजबूत करने और मिशन लाइफ के उद्देश्यों को धरातल पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। कैलेंडर के अनुसार जुलाई मे पूरे महीने 'स्वस्थ जीवनशैली अपनाना' विषय पर आधारित गतिविधियां आयोजित होंगी, जिनका उद्देश्य विद्यार्थियों में प्रकृति संरक्षण, पर्यावरणीय उत्तरदायित्व और सतत जीवनशैली के प्रति व्यावहारिक दृष्टिकोण विकसित करना है। कैलेंडर में अभिभावकों और स्थानीय समुदाय की सहभागिता पर भी विशेष बल दिया गया है, ताकि पर्यावरण संरक्षण केवल विद्यालय तक सीमित न रहकर जनभागीदारी का अभियान बन सके। योगी सरकार का उद्देश्य बच्चों में ऐसे व्यावहारिक संस्कार विकसित करना है, जो उन्हें प्रकृति के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनाए। 'एक पेड़ मां के नाम 3.0' बनेगा प्रमुख अभियान जुलाई माह की सबसे प्रमुख गतिविधि 'एक पेड़ मां के नाम 3.0' अभियान होगी। इसके अंतर्गत विद्यालय परिसर, सार्वजनिक स्थलों तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उपयुक्त स्थानों पर पौधरोपण कराया जाएगा। विद्यार्थियों को पौधों के वैज्ञानिक, सामाजिक और पर्यावरणीय महत्व से अवगत कराया जाएगा, ताकि वे केवल पौधे लगाएं ही नहीं, बल्कि उनके संरक्षण का संकल्प भी लें। हर छात्र निभाएगा पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी कैलेंडर के अनुसार प्रत्येक लगाए गए पौधे की देखभाल, सिंचाई, संरक्षण और नियमित निगरानी की जिम्मेदारी विद्यार्थियों को सौंपी जाएगी। इसके साथ ही विद्यालयों में इको क्लब्स के माध्यम से पौधों की प्रगति की समीक्षा तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सामुदायिक प्रयासों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। रचनात्मक गतिविधियों से बढ़ेगी जागरूकता जुलाई के दौरान पोस्टर, स्लोगन, कोलाज, स्वतंत्र लेखन, वाद-विवाद और अन्य रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। विद्यार्थियों को प्रकृति भ्रमण के माध्यम से स्थानीय जैव विविधता, पौधों और प्राकृतिक संसाधनों का प्रत्यक्ष अध्ययन कराया जाएगा। दूसरे शनिवार को विशेष पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित होंगे तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया जाएगा।

सरकारी नौकरी का मौका! MPESB में कृषि विस्तार अधिकारी के 2784 पदों पर आज से आवेदन, जानें योग्यता

भोपाल   मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड (MPESB), भोपाल ने किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग के अंतर्गत ग्रुप-2, सब-ग्रुप-1 कृषि विस्तार अधिकारी पदों पर आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस भर्ती अभियान के माध्यम से कुल 2,784 रिक्तियां भरी जाएंगी। इच्छुक उम्मीदवार 17 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) ने किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग में कृषि विस्तार अधिकारी (AEO) के 2784 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए आज से ऑनलाइन आवेदन शुरू हो गए हैं। अभ्यर्थी 17 जुलाई तक आवेदन कर सकेंगे। इसके बाद 2 अगस्त से भर्ती परीक्षा आयोजित की जाएगी। यह भर्ती परीक्षा समूह-2, उप समूह-1 के तहत आयोजित की जा रही है। उम्मीदवार कर्मचारी चयन मंडल की आधिकारिक वेबसाइट www.esb.mp.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। 73% आरक्षण के साथ जारी होगा रिजल्ट कर्मचारी चयन मंडल ने भर्ती में राज्य की आरक्षण व्यवस्था लागू की है। अनुसूचित जाति (SC) को 20 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति (ST) को 16 प्रतिशत, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27 प्रतिशत (न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को 10 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। 73 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान पर परिणाम घोषित किए जाएंगे। आरक्षण के साथ जारी होगा रिजल्ट इस भर्ती में कुल 73 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत अनुसूचित जाति को 20 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति को 16 प्रतिशत, अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। 2 अगस्त को दो पालियों में होगी परीक्षा कृषि विस्तार अधिकारी भर्ती परीक्षा 2 अगस्त को आयोजित होगी। परीक्षा दो पालियों में कराई जाएगी। परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों को निर्धारित समय पर पहुंचना होगा। रिपोर्टिंग समय समाप्त होने के बाद किसी भी उम्मीदवार को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं मिलेगा। परीक्षा में आधार सत्यापन अनिवार्य परीक्षा में शामिल होने के लिए आधार आधारित सत्यापन अनिवार्य रहेगा। अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र के साथ वैध फोटोयुक्त पहचान पत्र भी साथ लाना होगा। पहचान पत्र के बिना परीक्षा में प्रवेश नहीं मिलेगा। मोबाइल, स्मार्ट वॉच और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पूरी तरह प्रतिबंधित परीक्षा केंद्र में मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, कैलकुलेटर सहित सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाने पर पूरी तरह रोक रहेगी। परीक्षा शुरू होने के बाद से लेकर परीक्षा समाप्त होने तक किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा कक्ष छोड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इन उम्मीदवारों को आवेदन की पात्रता नहीं कर्मचारी चयन मंडल ने भर्ती के लिए कुछ पात्रता शर्तें भी तय की हैं। जिन अभ्यर्थियों की 26 जनवरी 2001 या उसके बाद दो से अधिक संतान हैं, वे आवेदन के पात्र नहीं होंगे। जिन पुरुष अभ्यर्थियों का विवाह 21 वर्ष की आयु से पहले और महिला अभ्यर्थियों का विवाह 18 वर्ष की आयु से पहले हुआ है, वे भी आवेदन नहीं कर सकेंगे। महिलाओं के विरुद्ध अपराध में दोषी ठहराए गए पुरुष भी इस भर्ती के लिए पात्र नहीं होंगे। ऐसे करें आवेदन योग्य और पात्र अभ्यर्थी कर्मचारी चयन मंडल की आधिकारिक वेबसाइट www.esb.mp.gov.in पर जाकर 17 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 2 अगस्त से परीक्षा आयोजित की जाएगी। परीक्षा केंद्र के लिए जरूरी नियम – परीक्षा में शामिल होने के लिए बायोमेट्रिक (आधार आधारित) सत्यापन अनिवार्य होगा। – प्रवेश पत्र के साथ एक वैध फोटोयुक्त पहचान पत्र लाना जरूरी है। – परीक्षा केंद्र पर तय रिपोर्टिंग समय के बाद एंट्री नहीं मिलेगी। – मोबाइल, स्मार्ट वॉच और कैलकुलेटर जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पूरी तरह बैन रहेंगे। – परीक्षा शुरू होने के बाद पेपर खत्म होने से पहले उम्मीदवार कक्ष नहीं छोड़ सकेंगे। ये लोग नहीं कर पाएंगे आवेदन – जिन उम्मीदवारों के 26 जनवरी 2001 को या उसके बाद दो से अधिक बच्चे हैं, वे आवेदन नहीं कर सकते। – यदि पुरुष का विवाह 21 वर्ष और महिला का विवाह 18 वर्ष की कानूनी उम्र से पहले हुआ हैए तो वे पात्र नहीं होंगे। – महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में दोषी सिद्ध पाए गए पुरुष आवेदक भी इस भर्ती के लिए अयोग्य होंगे। – योग्य उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट www.esb.mp.gov.in पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं। कौन कर सकता है आवेदन?     आवेदन की अंतिम तिथि तक अभ्यर्थी के पास निर्धारित शैक्षणिक योग्यता होना आवश्यक होगा।      आवेदन की अंतिम तिथि तक उम्मीदवार के पास निर्धारित शैक्षणिक योग्यता होना अनिवार्य है।     अनारक्षित (UR) वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष निर्धारित की गई है।     SC/ST/OBC/EWS/PwD, महिला उम्मीदवार, पूर्व सैनिक एवं संविदा कर्मचारी न्यूनतम 18 वर्ष और अधिकतम 45 वर्ष की आयु तक आवेदन कर सकते हैं।     पूर्व सैनिकों को सेवा अवधि के अनुसार अतिरिक्त आयु छूट का लाभ भी मिलेगा।     आयु में छूट मध्य प्रदेश शासन के प्रचलित नियमों के अनुसार पात्र अभ्यर्थियों को प्रदान की जाएगी।