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Punjab Health Alert: शिशु मृत्यु दर बढ़ने से बढ़ी चिंता, अमृतसर में सबसे ज्यादा मामले, जालंधर-लुधियाना भी प्रभावित

 जालंधर/लुधियाना  पंजाब में शिशु मृत्यु दर में 17.56 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है। शहरों में स्थिति ज्यादा गंभीर है जहां शिशु मृत्यु दर के कुल मामलों में से 90% मौतें हो रही हैं। अमृतसर में शिशु मृत्यु दर अधिक है। उसके बाद जालंधर और लुधियाना में अधिक मौतें हो रही हैं। नागरिक पंजीकरण प्रणाली पर आधारित महत्वपूर्ण सांख्यिकी रिपोर्ट 2024 में यह बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले कुछ साल से प्रदेश में शिशु मृत्यु के मामले बढ़ते जा रहे हैं। वर्ष 2023 में शिशु मृत्यु के 2272 मामले सामने आए थे जो 2024 में बढ़कर 2671 हो गए हैं। वर्ष 2020 में 1884, 2021 में 1830, 2022 में 2336 बच्चों की मौत हुई। इनमें समय से पहले प्रसव, जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी, संक्रमण और प्रसवपूर्व देखभाल की कमी है। इसके अलावा स्वास्थ्य सुविधाओं, स्वच्छता की कमी, कुपोषण और दस्त रोग भी शिशु मृत्यु दर के प्रमुख कारण हैं। वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर शिशु मृत्यु दर में 17.12% की कमी आई है। वर्ष 2023 में जहां 1.45 लाख बच्चों की मौत हुई थी जो अब कम होकर 1.20 लाख हो गई है। शहरों में स्थिति अधिक गंभीर प्रदेश में गांवों के मुकाबले शहरों की स्थिति अधिक गंभीर है जहां शिशु मृत्यु दर के अधिक मामले सामने आ रहे हैं। वर्ष 2024 के दौरान जहां ग्रामीण क्षेत्रों में शिशु मृत्यु दर के 258 मामले सामने आए हैं। वहीं शहरों में 2413 बच्चों की मौत हुई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार गांवों और शहरों में स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्रयास किया जा रहा है ताकि मृत्यु दर को कम किया जा सके। जिला, सब डिवीजनल अस्पतालों और कम्युनिटी हेल्थ सेंटरों पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती की जा रही है। पीजी कोर्स जॉइन करने के बॉन्ड सरकार सख्ती से लागू कर रही है। प्रदेश में शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए प्रसवपूर्व देखभाल में सुधार, कुपोषण को कम करना, स्वच्छता में सुधार और संक्रमण को रोकने के लिए विभिन्न उपायों पर काम किया जा रहा है।   अमृतसर में सबसे अधिक 835 व जालंधर में 368 मौतें  रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 के दौरान अमृतसर में सबसे अधिक 835 बच्चों की मौत हुई है। जालंधर 368 और लुधियाना में 348 बच्चों की मौत हुई है। यही कारण है कि इन जिलों में स्वास्थ्य विभाग की तरफ से विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विभाग की तरफ से यहां अस्पतालों में अधिक सुविधाएं दी जा रही हैं। साथ ही डॉक्टरों और स्टाफ की कमी पूरी किया जा रहा है। लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है ताकि इन शहरों में शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सके। बाकी जिलों में यह है स्थिति   जिला – मौतें अमृतसर – 835 बरनाला – 18 बठिंडा – 187 फरीदकोट – 169 फाजिल्का – 32 फतेहगढ़ साहिब – 5 फिरोजपुर – 8 गुरदासपुर – 32 होशियारपुर – 60 जालंधर – 368 कपूरथला – 12 लुधियाना – 348 मालेरकोटला – 12 मानसा – 5 मोगा – 55 श्री मुक्तसर साहिब – 15 पठानकोट – 36 पटियाला – 331 रूपनगर – 4 संगरूर – 16 मोहाली – 87 एसबीएस नगर – 25 तरनतारन – 11

एन्यूमेरेशन फॉर्म को लेकर भ्रम, लोग बूथों पर तलाश रहे BLO

नई दिल्ली  स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया में लोगों की परेशानियां कम नहीं हो रही हैं। अब कई इलाकों में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) डोर टु डोर नहीं पहुंच रहे हैं। लोग उन्हें खोजते हुए बूथों पर पहुंच रहे हैं। यहां नंबर लेकर फोन लगा रहे हैं और अपने घर बुला रहे हैं। इससे समस्या और बढ़ती जा रही है। कई इलाकों में आरडब्ल्यूए ने बूथों पर बीएलओ के बैठने की व्यवस्था की है। ताकि लोगों को आसानी से समझाकर फॉर्म भरवाए जा सकें। यहीं उनको फॉर्म भी बांटे जा रहे हैं। लेकिन, पूरी व्यवस्था ऐसे नहीं चल रही है। कई बीएलओ डोर टु डोर सर्वे भी कर रहे हैं। इससे भ्रम पैदा हो रहा है। लोगों में नाराजगी, कॉल करके घर बुला रहे बीएलओ को     कई इलाकों के लोग दूसरे बूथों पर जाकर फॉर्म मांग रहे हैं। लेकिन, फॉर्म नहीं मिल रहे हैं।     मटियामहल विधानसभा के 78 नंबर वार्ड में बने बूथ में बुजुर्ग एजाज खान पहुंचे थे।     उन्होंने बताया कि हमें मालूम हुआ कि यहां एन्यूमेरेशन फॉर्म मिल रहे हैं। यहां आकर पता चला कि हमारे इलाके चमड़े वाली गली के बीएलओ यहां नहीं हैं।     इनसे नंबर लिया है और बीएलओ से बात की है। उन्होंने कहा है कि वह जल्द पहुंचकर फॉर्म देंगी।     लोगों को एन्यूमेरेशन फॉर्म भरने के बारे में जानकारी नहीं है। ऐसे में वह गलतियां कर रहे हैं।     वहीं बीएलओ एक-एक फॉर्म ही दे रहे हैं। लोगों को पता नहीं है कि उन्हें दो फॉर्म दिए जाने हैं।     ऐसे में वह बीएलओ से दूसरा फॉर्म मांग रहे हैं और विवाद की स्थिति बन रही है।     चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने कहा, बीएलओ को दो फॉर्म देने हैं।     अगर कोई फॉर्म नहीं भर पा रहा है तो पेंसिल से भरने को कहा जाना चाहिए।     उसको ठीक करके वापस पेन से भरना चाहिए। जरूरी है कि बीएलओ दो फॉर्म दे।  

जनगणना-2027 से पहले हरियाणा में फील्ड अभ्यास शुरू, डिजिटल सिस्टम की होगी जांच

 चंडीगढ़  भारत की जनगणना-2027 की तैयारियों के तहत हरियाणा सरकार ने राज्य में जनसंख्या गणना के प्री-टेस्ट (पूर्व परीक्षण) की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राज्य सरकार ने इसके लिए चयनित क्षेत्रों को अधिसूचित कर दिया है, जहां छह से 18 जुलाई तक फील्ड अभ्यास कराया जाएगा। इससे पहले एक से पांच जुलाई तक पात्र नागरिकों को डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से स्वयं अपना विवरण दर्ज कराने (सेल्फ-एन्यूमरेशन) का अवसर दिया गया था। यह अभ्यास देशभर में होने वाली जनगणना-2027 की तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तायुक्त एवं हरियाणा जनगणना-2027 की नोडल अधिकारी डा. सुमिता मिश्रा ने बताया कि प्री-टेस्ट का उद्देश्य जनगणना की पूरी प्रक्रिया को अधिक सटीक, सुचारू और प्रभावी बनाना है। संभावित चुनौतियों की पहचान कर होगा समाधान इस दौरान डिजिटल डाटा संग्रह प्रणाली, फील्ड संचालन, प्रगणकों की कार्यप्रणाली तथा तकनीकी व्यवस्थाओं की व्यवहारिक जांच की जाएगी, ताकि वास्तविक जनगणना से पहले संभावित चुनौतियों की पहचान कर उनका समाधान किया जा सके। उन्होंने बताया कि फील्ड अभ्यास पूरा होने के बाद 19 और 20 जुलाई को पुनरीक्षण (रिविजनल राउंड) आयोजित किया जाएगा। इसमें प्री-टेस्ट के दौरान एकत्रित आंकड़ों का सत्यापन, अद्यतन और अंतिम पुष्टि की जाएगी। मिश्रा ने चयनित क्षेत्रों के लोगों से इस अभ्यास में सक्रिय भागीदारी करने और प्रगणकों को पूरा सहयोग देने की अपील की।

झारखंड में सामान्य से 50% कम बारिश, खेती और जलाशयों पर गहराया संकट

रांची झारखंड में अलनीनो का असर गहराता जा रहा है. बीते साल राज्य में मॉनसून बेहतर था. पिछले साल अब तक राज्य में 417 मिमी बारिश हो गई थी. इस वर्ष अब तक मात्र 129 मिमी ही बारिश हुई है. राज्य में कम बारिश का असर खेती-बारी के साथ-साथ जलाशयों में भी दिख रहा है. बीते साल इस समय से खरीफ में करीब 31 फीसदी खेतों में रोपा हो गया था. इस वर्ष अब तक जिलों में रोपा भी शुरू नहीं हो पाया है. विभागीय मंत्री हर 15 दिनों में खरीफ खेती की तैयारी की समीक्षा कर रही है. रांची में 205, गढ़वा जिले में सिर्फ 18 मिमी बारिश बीते साल रांची और पश्चिम सिंहभूम में जुलाई के पहले सप्ताह तक 600 मिमी से अधिक बारिश हो गयी थी. इस वर्ष रांची में अब तक 205 मिमी बारिश हुई है. वहीं, पश्चिम सिंहभूम में अब तक मात्र 136 मिमी ही बारिश हुई है. इस वर्ष तो गढ़वा में मात्र 18 मिमी ही बारिश हुई है. वहीं, इस वर्ष राज्य में सामान्य से भी करीब 45 मिमी बारिश हुई थी. राज्य के एक भी जिले में सामान्य बारिश नहीं हुई है. सभी जिलों की स्थिति खराब है. झारखंड में बारिश की कमी से धान की रोपाई हुई कम बीते साल (2025) में जुलाई के पहले सप्ताह में 95 हजार हेक्टेयर में धान लग गया था. इस वर्ष राज्य के अधिसंख्य जिलों में अब तक धान लगना चालू भी नहीं हुआ है. अब तक मात्र तीन हजार हेक्टेयर में ही धान लग पाया है. यह संताल परगना के जिले हैं. कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार 2025 में दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल में 70 हजार हेक्टेयर में धान का रोपा जुलाई के पहले सप्ताह में ही हो गया था. कोल्हान में भी करीब 14 हजार हेक्टेयर में धान लग गया था. क्या कहना है मंत्री का ? कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा है कि अलनीनो के कारण झारखंड में सामान्य से लगभग 50 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गयी है. यह चिंता का विषय है. हालांकि सरकार ने समय रहते सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. झारखंड देश का पहला राज्य है, जिसने संभावित सुखाड़ को देखते हुए सबसे पहले अपना कंटिन्जेसी प्लान केंद्र सरकार को उपलब्ध कराया है.

सपने में सांप दिखना शुभ या अशुभ? स्वप्न शास्त्र में छिपे हैं कई संकेत

 सोते समय सपने देखना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन स्वप्न शास्त्र के अनुसार, हर सपने का एक विशेष अर्थ और भविष्य से जुड़ा संकेत होता है. अक्सर लोग सपने में सांप (Snake) को देखकर डर जाते हैं और इसे केवल एक बुरा सपना मान लेते हैं. हालांकि, स्वप्न शास्त्र में सांप के दिखने को हमेशा अशुभ नहीं माना जाता है. सांप का सपना आपको आने वाले संकट से सावधान भी कर सकता है और अचानक मिलने वाली बड़ी सफलता का संकेत भी दे सकता है. तो आइए सद्गुरु से जानते हैं सपने में सांप की अलग-अलग स्थितियां किस बात का इशारा करती हैं. सपने में सांप का दिखना कब होता है शुभ? 1. सांप को पकड़ना या मारना सद्गुरु के मुताबिक, यदि आप सपने में खुद को सांप पकड़ते हुए देखते हैं, तो यह एक बेहद शुभ संकेत है. इसका अर्थ है कि आपको जल्द ही अपने शत्रुओं पर विजय मिलने वाली है. कोई पुराना रुका हुआ काम पूरा होगा. वहीं, सांप को मारना आने वाले संकट के टलने का सूचक है. 2. शिवलिंग पर लिपटा हुआ सांप देखना शिवलिंग पर सांप का लिपटा हुआ दिखना साक्षात महादेव की कृपा का संकेत है. इसका मतलब है कि आपकी कोई बड़ी मनोकामना जल्द ही पूरी होने वाली है. आपको करियर या व्यापार में बड़ा लाभ मिल सकता है. 3. सफेद या सुनहरे रंग का सांप सपने में सफेद या चमकीला सांप देखना भाग्य चमकने की निशानी है. यह इस बात का संकेत है कि आपको अचानक कहीं से गुप्त धन या पैतृक संपत्ति मिल सकती है. सपने में सांप का दिखना कब होता है अशुभ? 1. सांप का काटना (Snake Bite) यदि सपने में सांप आपको काट लेता है, तो स्वप्न शास्त्र के अनुसार इसे एक चेतावनी माना जाता है. यह संकेत देता है कि आने वाले समय में आप किसी गंभीर बीमारी की चपेट में आ सकते हैं या आपको कोई बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है. ऐसे में सेहत और पैसों के मामलों में सावधानी बरतें. 2. बहुत सारे सांप एक साथ देखना अगर सपने में आपको एक साथ कई सारे सांप रेंगते हुए दिखाई दें, तो यह मानसिक तनाव और भविष्य में आने वाली परेशानियों का संकेत है. यह इस बात को भी दर्शाता है कि आपके गुप्त शत्रु आपको नुकसान पहुंचाने की योजना बना रहे हैं. 3. सांप और नेवले की लड़ाई सपने में सांप और नेवले की लड़ाई देखना कोर्ट-कचहरी के मामलों या किसी कानूनी विवाद में फंसने का इशारा करता है. यह आने वाले समय में किसी के साथ बड़े वाद-विवाद का संकेत भी हो सकता है. कुंडली में कालसर्प दोष का भी है संकेत यदि किसी व्यक्ति को बार-बार सपने में सांप दिखाई देते हैं, खासकर उड़ते हुए या पीछा करते हुए सांप, तो ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह कुंडली में 'कालसर्प दोष' या 'पितृदोष' का लक्षण हो सकता है. ज्योतिषीय उपाय यदि सांप के सपनों से मानसिक अशांति बढ़ रही हो, तो सोमवार के दिन भगवान शिव का दूध से अभिषेक करें और 'ऊं नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें. इसके अलावा, नागपंचमी या किसी शुभ मुहूर्त पर बहते पानी में चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा प्रवाहित करने से भी इस दोष से राहत मिलती है.

बिहार के बड़े पुलों से गुजरना होगा महंगा, 94 पुलों पर टोल वसूली की तैयारी

पटना बिहार मं अब 250 मीटर से अधिक लंबे पुलों से गुजरने पर टोल टैक्स चुकाना होगा। जी हां, सरकार ने इसके लिए सर्वेे का काम शुरू भी कर दिया है। दरअसल सरकार स्टेट हाईवे के उन पुलों पर ही टोल टैक्स की वसूली करेगी, जो 250 मीटर से अधिक लंबे हैं। पथ निर्माण विभाग के अधीन ऐसे पुलों की संख्या 94 है। विभाग इन पुलों का सर्वे करा रहा है, जिसके बाद यह तय किया जाएगा कि इनमें किन-किन पुलों पर टोल टैक्स लिया जाएगा। पुलों की लंबाई के आधार पर टोल टैक्स की राशि तय की जाएगी। सर्वे के दौरान पुल के साथ-साथ उसके एप्रोच रोड की लंबाई भी मापी जाएगी। राज्य मंत्रिमंडल ने एक जुलाई की बैठक में राज्य की सड़कों और पुलों के बेहतर रखरखाव के लिए ‘बिहार पथ उपयोगकर्ता शुल्क (दरों का निर्धारण एवं संग्रहण) नियमावली’ को मंजूरी दी है। इसके तहत राष्ट्रीय उच्चपथ की तर्ज पर राज्य के स्वामित्व वाली सड़कों और बड़े पुलों पर भी टोल टैक्स वसूला जाएगा। छोटे वाहनों के लिए टोल की दर 1.25 रुपये प्रति किलोमीटर तय की गई है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, हर एक पुल का अध्ययन किया जा रहा है। इसमें यह देखा जा रहा है कि कितने वाहन इन पुलों पर से रोज गुजरते हैं। इनमें कितने शहर में हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग के टोल प्लाजा से इन पुलों की दूरी कितनी है। इन सभी को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाएगा, किन-किन पुलों पर से टोल टैक्स लेना है। टोल टैक्स वसूलने की जिम्मेदारी निजी एजेंसियों को दी जाएगी। 250 मीटर से ज्यादा लंबाई वाले पुलों की संख्या गया और पटना जिले में ज्यादा हैं। पटना के आसपास ही दो बड़े पुल कच्ची दरगाह-बिदुपुर और बख्तियारपुर-ताजपुर पुल है। राज्य सरकार को सबसे अधिक राजस्व देने वाली एजेंसी को यह जिम्मेवारी मिलेगी। इसके लिए स्टेट हाईवे और बड़े पुलों की नीलामी होगी। अधिक दबाव वाली सड़क और पुलों का चयन टोल के लिए किया जाएगा। टोल प्लाजा के समीप रहने वालों को पथकर में रियायत देगी राज्य सरकार विभागीय पदाधिकारी के मुताबिक, भविष्य में सड़कों का रख-रखाव और बेहतरीन ढंग से हो, नई-नई सड़कें विकसित हों, इसी मकसद से टोल टैक्स वसूलने की नीति बनायी गई है। जहां भी टोल टैक्स के लिए केंद्र बनेगा, वहां के आस-पास के लोगों को इससे राहत दी जाएगी। टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों को रियायती पास जारी किये जाएंगे। नियमित दौर पर सफर करने वालों के वाहनों के लिए एकमुश्त राशि लेकर वार्षिक पास भी जारी किये जायेंगे। देश के सभी विकसित और बड़े राज्यों में उनकी अपनी टोल टैक्स की नीति लागू है। इनमें महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश आदि राज्य शामिल हैं। इन बड़े पुलों पर चुकाना होगा टोल 1. कच्चीदरगाह-बिदुपुर पुल 2.बख्तियारपुर-ताजपुर पुल 3.दरभंगा-करेह नदी पुल 4.नवगछिया- कोसी नदी पुल 5.फुलतौरा घाट-खगड़िया 6.गया-फल्गु नदी पुल 7.नालंदा – सकरी नदी पुल 8.आरा-छपरा गंगा नदी पुल 9.सहरसा में बलुआहा घाट 10.गोपालगंज और बेतिया

हरियाणा में भाजपा का शक्ति प्रदर्शन! अंबाला पहुंचे CM नायब सैनी, नड्डा और डॉ. अर्चना का भव्य स्वागत

अम्बाला. अम्बाला छावनी रेलवे स्टेशन पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा तथा भाजपा हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता के अम्बाला आगमन पर उनका पूर्व मंत्री असीम गोयल ने स्वागत एवं अभिनंदन किया। गोयल ने सभी वरिष्ठ नेताओं का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया और उनके साथ सौहार्दपूर्ण मुलाकात की। उन्होंने कहा कि प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व का अम्बाला आगमन कार्यकर्ताओं के लिए उत्साहवर्धक है तथा इससे संगठन को और अधिक मजबूती मिलेगी। रेलवे स्टेशन पर भाजपा कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में भी नेताओं के आगमन को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला।

केंद्र ने ठुकराई ₹2.4 करोड़ की फंडिंग, अब चंडीगढ़ प्रशासन को अपने बजट से उठाना होगा खर्च

चंडीगढ़  केंद्र सरकार ने समग्र शिक्षा योजना 2026-27 के तहत चंडीगढ़ प्रशासन की स्पेशल एजुकेटर्स और क्लस्टर रिसोर्स सेंटर (CRC) कोऑर्डिनेटर्स के वेतन के लिए अतिरिक्त केंद्रीय सहायता बढ़ाने की मांग को ठुकरा दिया है।  प्रशासन ने 23 स्पेशल एजुकेटर्स के लिए प्रति शिक्षक वार्षिक सहायता 6.699 लाख रुपए से बढ़ाकर 10.5 लाख रुपए करने का प्रस्ताव भेजा था। प्रशासन का तर्क था कि वार्षिक वेतन वृद्धि, महंगाई भत्ता (DA) और एरियर के कारण खर्च बढ़ गया है। इस प्रस्ताव के अनुसार कुल 2.4 करोड़ रुपए की मांग की गई थी। हालांकि प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड (PAB) ने पुराने मानक के अनुसार ही प्रति शिक्षक 6.699 लाख रुपए मंजूर किए। इससे कुल स्वीकृत राशि करीब 1.5 करोड़ रुपए रही। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि अतिरिक्त राशि चंडीगढ़ प्रशासन अपने बजट से उपलब्ध कराए। CRC कोऑर्डिनेटर्स के लिए प्रस्ताव खारिज स्पेशल एजुकेटर्स के लिए अतिरिक्त केंद्रीय सहायता बढ़ाने का प्रस्ताव दूसरे साल खारिज हुआ है। वर्ष 2025-26 में भी प्रशासन ने प्रति शिक्षक सहायता 7.71 लाख रुपए करने की मांग की थी, लेकिन तब भी केंद्र ने 6.699 लाख रुपए के पुराने मानक को ही लागू रखा था। केंद्र ने CRC कोऑर्डिनेटर्स के वेतन बढ़ाने का प्रस्ताव भी स्वीकार नहीं किया। प्रशासन ने 20 CRC कोऑर्डिनेटर्स के लिए प्रति व्यक्ति 16.8 लाख रुपए वार्षिक सहायता के हिसाब से 3.3 करोड़ रुपए की मांग की थी। केंद्र ने केवल 1.1 करोड़ रुपए मंजूर किए। इसके तहत 15 कार्यरत कोऑर्डिनेटर्स का 12 महीने का वेतन और पांच खाली पदों के लिए नौ महीने का वेतन 48,708 रुपए प्रतिमाह की दर से स्वीकृत किया गया। एक करोड़ का फर्नीचर-कंप्यूटर ग्रांट भी नहीं मिली चंडीगढ़ प्रशासन ने 20 क्लस्टर रिसोर्स सेंटरों के लिए एक करोड़ रुपए का फर्नीचर और कंप्यूटर ग्रांट भी मांगा था, लेकिन PAB ने इसे यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि यह सहायता हर पांच साल में एक बार ही दी जाती है और वर्ष 2024-25 में पहले ही मंजूर की जा चुकी है। सभी 20 CRC के लिए रखरखाव, पढ़ाई का सामान, अन्य जरूरी खर्च, बैठक और यात्रा भत्ता तय नियमों के अनुसार मंजूर कर दिया गया है।

शनि देव 27 जुलाई 2026 को कुंभ राशि में वक्री, कई राशियों पर संकट के संकेत

ज्योतिष शास्त्र में न्याय के देवता माने जाने वाले शनि देव 27 जुलाई 2026 को कुंभ राशि में वक्री (उल्टी चाल) होने जा रहे हैं. शनि की यह उल्टी चाल 18 नवंबर 2026 तक रहेगी. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, वक्री होने पर शनि देव अत्यधिक बलवान और क्रूर हो जाते हैं, जिससे कई राशियों के लिए दुर्घटना, धन हानि और मानसिक तनाव के योग बनते हैं. अगर आपकी राशि नीचे दी गई लिस्ट में है, तो अगले कुछ महीने आपको फूंक-फूंक कर कदम रखना होगा. 1. कुंभ राशि (Aquarius): मानसिक तनाव और सेहत में गिरावट शनि देव आपकी ही राशि में वक्री हो रहे हैं, जिससे आप पर शनि की साढ़ेसाती का दूसरा चरण चल रहा है. इस अवधि में आपको अज्ञात भय, अनिद्रा और भारी मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है. सेहत को लेकर बिल्कुल लापरवाही न बरतें. कार्यक्षेत्र में आपकी एक छोटी सी गलती बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकती है. 2. मकर राशि (Capricorn): धन हानि और पारिवारिक कलह मकर राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती का अंतिम दौर चल रहा है और शनि आपके धन भाव में वक्री होंगे. आर्थिक मामलों में यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण रहेगा. अवांछित खर्चों के कारण बजट बिगड़ सकता है. फंसा हुआ धन डूबने की आशंका है. इस दौरान किसी को भी उधार देने से बचें. वाणी पर नियंत्रण रखें, अन्यथा परिवार में संपत्ति को लेकर बड़ा विवाद हो सकता है. 3. मीन राशि (Pisces): कोर्ट-कचहरी के चक्कर और बढ़ता कर्ज मीन राशि के जातकों पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण चल रहा है और शनि आपके द्वादश (12वें) भाव में वक्री हो रहे हैं. अस्पताल के खर्चों और कानूनी मामलों में आपका मोटा पैसा बर्बाद हो सकता है. व्यापार में पार्टनर से धोखा मिलने के योग हैं. नया निवेश या नया बिजनेस शुरू करने की भूल बिल्कुल न करें. कर्ज लेने या देने से पूरी तरह बचें. 4. कर्क राशि (Cancer): कार्यक्षेत्र में राजनीति और बदनामी का डर कर्क राशि के जातकों पर शनि की ढैय्या का प्रभाव है और शनि आपके अष्टम भाव (आठवें घर) में वक्री हो रहे हैं. नौकरीपेशा लोगों को ऑफिस पॉलिटिक्स (राजनीति) का शिकार होना पड़ सकता है. आपके बने-बनाए काम ऐन वक्त पर बिगड़ सकते हैं. वाहन चलाते समय विशेष सावधानी रखें, दुर्घटना के योग हैं. गुप्त शत्रुओं से सावधान रहें. अपनी गुप्त बातें किसी से शेयर न करें. 5. वृश्चिक राशि (Scorpio): माता की सेहत की चिंता और घरेलू अशांति वृश्चिक राशि पर भी शनि की ढैय्या चल रही है और शनि आपके चतुर्थ भाव (सुख स्थान) में वक्री चाल चलेंगे. घर का माहौल अशांत रह सकता है. सुख-सुविधाओं में कमी आएगी.  प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों में बड़ा नुकसान हो सकता है. माता जी के स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें. नया मकान या जमीन खरीदने का फैसला कुछ समय के लिए टाल दें. नुकसान और संकट से बचने के 3 अचूक उपाय शनिवार का व्रत और दान: शनिवार के दिन काली उड़द, काला कपड़ा या तिल का दान किसी जरूरतमंद को करें. सरसों के तेल का दीपक: हर शनिवार सूर्यास्त के बाद पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं. महामृत्युंजय मंत्र: यदि सेहत में लगातार गिरावट आ रही हो, तो रोज सुबह महामृत्युंजय मंत्र का 11 बार जाप करें. इससे शनि का नकारात्मक प्रभाव कम होता है.

पंजाब कांग्रेस में डैमेज कंट्रोल मिशन पर भूपेश बघेल, चन्नी-वड़िंग विवाद खत्म कराने की कोशिश

चंडीगढ़. पंजाब कांग्रेस में विधानसभा चुनाव से पहले उभरी अंदरूनी खींचतान को शांत करने के लिए पार्टी हाईकमान ने सक्रियता बढ़ा दी है। पंजाब मामलों के प्रभारी भूपेश बघेल सोमवार दोपहर तकरीबन 3 बजे चंडीगढ़ पहुंचेंगे। सूत्रों के अनुसार वह अगले करीब पांच दिनों तक पंजाब में रहकर पार्टी नेताओं से अलग-अलग बैठकें करेंगे और विधानसभा चुनाव की तैयारियों के साथ संगठनात्मक स्थिति की समीक्षा करेंगे। छत्तीसगढ़ से रवाना होने से पहले भूपेश सिंह बघेल ने कहा— ""पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर मैं पंजाब दौरे पर जा रहा हूं। चुनाव को लेकर कांग्रेस की ओर से कमेटियां गठित की जा चुकी हैं। यूथ कांग्रेस के चुनाव भी हो चुके हैं। पंजाब के सभी साथियों से मिलकर चुनावी रणनीति पर चर्चा होगी।"" सूत्रों के मुताबिक, चुनाव समिति के गठन के बाद पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक नेताओं की नाराजगी के बीच हाईकमान डैमेज कंट्रोल में जुटा है। इसी क्रम में भूपेश बघेल सबसे पहले चन्नी और कुछ वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करेंगे। इसके बाद उनकी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग समेत अन्य नेताओं के साथ भी बैठकें प्रस्तावित हैं। संगठन मजबूत करने पर हाईकमान का फोकस बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व फिलहाल चुनाव समिति में किसी तरह के बदलाव के पक्ष में नहीं है। पार्टी का फोकस संगठन को एकजुट कर विधानसभा चुनाव की तैयारियों को गति देना है। इस बीच एआईसीसी के पंजाब के तीन सह प्रभारी हीना कावरे, रविंदर डलवी और सूरज ठाकुर भी चंडीगढ़ पहुंच रहे हैं। सभी नेता प्रदेश के मौजूदा राजनीतिक हालात और संगठन की स्थिति का फीडबैक लेंगे। हाईकमान मतभेद दूर करने में जुटा सूत्रों के अनुसार, प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग ने चुनावी रणनीति को लेकर नेताओं से वन-टू-वन मुलाकातों का दौर शुरू कर दिया है। दूसरी ओर चरणजीत सिंह चन्नी भी अपने समर्थक नेताओं के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं। ऐसे में हाईकमान की कोशिश दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर कर चुनाव से पहले एकजुटता का संदेश देने की है। कांग्रेस नेतृत्व राहुल गांधी के विदेश दौरे से 7 जुलाई तक लौटने से पहले पंजाब के हालात पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करना चाहता है। भूपेश बघेल दौरे के बाद पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी को पंजाब की राजनीतिक स्थिति और चुनावी तैयारियों पर रिपोर्ट सौंपेंगे। दिल्ली में रवाना होने से पहले भूपेश बघेल ने भी कहा कि कांग्रेस में किसी प्रकार की गुटबाजी नहीं है और सभी नेता मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ेंगे।