samacharsecretary.com

नगरीय प्रशासन विभाग ने बल्क वेस्ट जनरेटर्स के पंजीयन के लिए निकायों को जारी किया परिपत्र

नगरीय प्रशासन विभाग ने बल्क वेस्ट जनरेटर्स के पंजीयन के लिए निकायों को जारी किया परिपत्र सभी बल्क वेस्ट जनरेटर्स का पंजीयन सुनिश्चित कराने के निर्देश रायपुर.   नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सभी निकायों में बल्क वेस्ट जनरेटर्स का पंजीयन केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पोर्टल पर कराने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने संचालनालय से इस संबंध में सभी नगर निगमों के आयुक्तों तथा नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को परिपत्र जारी किया है।   नगरीय प्रशासन विभाग ने परिपत्र जारी कर निकायों को जानकारी दी है कि केन्द्रीय प्रदूषण बोर्ड द्वारा वेस्ट जनरेटर के पंजीयन के लिए केन्द्रीकृत पोर्टल तैयार किया गया है। बल्क वेस्ट जनरेटर के पंजीयन के लिए केन्द्रीकृत पोर्टल https://swm.cpcb.gov.in 1 जून 2026 से प्रभावशील है। भारत सरकार द्वारा जारी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के अनुसार चिन्हांकित सभी बल्क वेस्ट जनरेटर्स का पंजीयन केन्द्रीकृत पोर्टल पर किया जाना है। विभाग ने सभी निकायों को परिपत्र जारी कर केन्द्रीकृत पोर्टल पर चिन्हांकित सभी बल्क वेस्ट जनरेटर्स का पंजीयन कराना सुनिश्चित करने को कहा है।

कर्नाटक में सरकारी बसों की बदहाल हालत पर बवाल, हेडलाइट बंद तो मोबाइल टॉर्च से चला सफर; KKRTC घिरी

 बेंगलुरु कर्नाटक में सरकारी बस सेवाओं की स्थिति को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है. सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो और तस्वीरों में दावा किया गया कि कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (KKRTC) की कुछ बसें हेडलाइट खराब होने के कारण रात में मोबाइल की टॉर्च के सहारे चलाई गईं. दावा किया जा रहा है, राज्य सरकार के पास फंड नहीं है, जिसके चलते इन बसों की लाइटों को ठीक नहीं करवाया गया. हालांकि इस पूरे मामले को लेकर विपक्ष ने राज्य सरकार पर परिवहन व्यवस्था की अनदेखी का आरोप लगाया है।  वहीं इस पूरे मामले में केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारास्वामी ने एक्स पर एक पोस्ट किया है. जिसमें उन्होंने कहा कि भारी उद्योग मंत्रालय ने पीएम ई-ड्राइव स्कीम के तहत 4,500 इलेक्ट्रिक बसें आवंटित की थीं. दिसंबर 2025 में ही कन्फर्मेशन मिलने के बावजूद राज्य सरकार (@tdkarnataka) 'लेटर ऑफ़ अवार्ड' (LoA) तक जारी नहीं कर पाई है, जिससे पूरी प्रक्रिया रुकी हुई है।  बसों की खराब स्थिति पर गरमाई राजनीति साथ ही राज्य सरकार पर 'शक्ति' स्कीम के तहत ₹4,573 करोड़ का रीइम्बर्समेंट बकाया है. जिससे मौजूदा बसों की मामूली मरम्मत भी नहीं हो पा रही है. फिर भी अपनी नाकामी के कारण वे 4500 मुफ़्त नई ई-बसों का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं।  फिलहाल बसों की खराब स्थिति और ई-बस परियोजना में कथित देरी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. मामले को लेकर अब सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं, जबकि परिवहन व्यवस्था को लेकर यात्रियों की चिंता भी बढ़ती जा रही है। 

महिला टी20 वर्ल्ड कप 2026 में ऑस्ट्रेलिया की जीत, इंग्लैंड को फाइनल में हराया

नई दिल्ली  ऑस्ट्रेलिया महिला क्रिकेट टीम की दिग्गज ऑलराउंडर एलिस पेरी ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 जीतकर इतिहास रच दिया है। वे दुनिया में अब सबसे ज्यादा आईसीसी ट्रॉफी जीतने के मामले में शीर्ष स्थान पर पहुंच गईं हैं। 5 जुलाई को इंग्लैंड के खिलाफ हुए फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने 151 रन के टारगेट का पीछा करते हुए 7 विकेट और 17 गेंद शेष रहते जीत अपने नाम की। इस जीत के साथ ही एलिस पेरी पुरुष और महिला क्रिकेटरों में सबसे ज्यादा आईसीसी ट्रॉफी जीतने वाली खिलाड़ी बन गईं हैं। एलिस पेरी के नाम 9 आईसीसी ट्रॉफी एलिस पेरी ने क्रिकेट की दुनिया में वो आयाम हासिल किया है जो कोई और क्रिकेटर नहीं कर पाया है। टी20 वर्ल्ड कप 2026 का खिताब उनके करियर का 9वां आईसीसी टाइटल है। उन्होंने अपने देश के लिए 7 टी20 वर्ल्ड कप और 2 वनडे विश्व कप जीते हैं। साल 2010, 2012, 2014, 2018, 2020, 2023 और 2026 में उन्होंने 20 ओवर के खेल में चैंपियनशिप पर कब्जा किया। वहीं 2013 और 2022 में वनडे वर्ल्ड कप जीता। महिला क्रिकेट में सबसे ज्यादा आईसीसी ट्रॉफी जीतने वाली खिलाड़ी एलिस पेरी (9) एलिसी हीली (8) मेग लैनिंग (7) बेथ मूनी (6) मेगन शुट्ट (6) विराट और रोहित ने जीते 4-4 खिताब भारतीय क्रिकेट के दिग्गज विराट कोहली और रोहित शर्मा अब तक अपने करियर में 4-4 आईसीसी ट्रॉफी जीत चुके हैं। रोहित ने साल 2007 में पहली बार टी20 वर्ल्ड कप की ट्रॉफी पर हाथ लगाया था। वहीं विराट साल 2011 वनडे विश्व कप की टीम का हिस्सा थे। इसके बाद दोनों ने साथ मिलकर साल 2013 और 2025 में चैंपियंस ट्रॉफी पर कब्जा किया। टी20 वर्ल़्ड कप 2024 जीतने के बाद दोनों ने साथ ही फॉर्मेट को अलविदा भी कह दिया। पुरुषों में सबसे ज्यादा आईसीसी ट्रॉफी जीतने वाली खिलाड़ी पुरुष क्रिकेट में सबसे ज्यादा आईसीसी ट्रॉफी जीतने का रिकॉर्ड ऑस्ट्र्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग के नाम है। अपनी कप्तानी में उन्होंने कंगारू टीम को बुलंदियों पर पहुंचाया। पोंटिंग ने अपन देश के लिए 5 खिताब जीते। जिसमें 3 वनडे वर्ल्ड कप और 2 चैंपियंस ट्रॉफी शामिल हैं।  

Punjab News: राखी के मद्देनज़र डाक विभाग ने रद्द की रविवार सहित सरकारी छुट्टियां, सेवाएं रहेंगी जारी

चंडीगढ़. रक्षाबंधन के मद्देनजर 15 जुलाई से 28 अगस्त तक कुछ पोस्ट ऑफिस रविवार और सरकारी छुट्टियों में भी खुले रहेंगे ताकि अधिक से अधिक लोग डिपार्टमैंट की सेवाओं का लाभ उठा सकें। प्रवर अधीक्षक डाकघर होशियारपुर मंडल संदीप कुमार शोरी ने बताया कि उक्त अवधि में कुछ पोस्ट ऑफिस के एम.पी.सी.एम. काऊंटर सभी छुट्टियों और रविवार को सुबह 9 से शाम 4.30 बजे तक खुलेंगे, जहां सभी मेल, पार्सल को बुक किया जाएगा, जिसमें राखी पार्सल और आधार एनरोलमैंट एवं अपडेटेशन सेवाएं भी शामिल हैं। इस अवधि में खुले रहने वाले पोस्ट ऑफिस में होशियारपुर हैड पोस्ट ऑफिस, दसूहा, बलाचौर, गढ़शंकर, गढ़दीवाला, मुकेरियां, तलवाड़ा, उड़मुड़ पोस्ट ऑफिस शामिल हैं। सभी पोस्ट ऑफिस में पार्सल पैकेजिंग मैटीरियल, राखी बॉक्स, राखी लिफाफे और फ्लायर्स उपलब्ध हैं।

रामायण की शूटिंग में दीपिका चिखलिया ने बताईं मुश्किलें, कपड़े बदलने तक की नहीं थी सुविधा

दीपिका चिखलिया का नाम जेहन में आते ही उनका देवी सीता वाला रूप उभर आता है, जो रामानंद सागर की 'रामायण' में देखने को मिला था। इस सीरियल ने दीपिका को सीता के किरदार में हमेशा के लिए 'अमर' कर दिया। दीपिका चिखलिया को लोग देवी सीता मानकर पूजते थे और उनका आशीर्वाद लेते थे। और आज भी यही आलम है। हालांकि, सीता बनने के लिए दीपिका चिखलिया को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। इसके बारे में 61 वर्षीय एक्ट्रेस ने कुछ साल पहले एक इंटरव्यू में बताया था। दीपिका चिखलिया ने बताया था कि 'रामायण' की शूटिंग के दौरान उन्हें किन तकलीफों से गुजरना पड़ा और क्यों सीता के रोल में उनके जितनी शोहरत किसी और एक्ट्रेस को क्यों नहीं मिली। साथ ही बताया था कि वह सीता के लुक में आने के लिए क्या खास तरह की तैयारी करती थीं। शूट की मुश्किलें, पुराने कपड़ों का टेंट, लोगों के घर वॉशरूम इस्तेमाल करना दीपिका चिखलिया ने साल 2023 में 'आजतक' को दिए इंटरव्यू में 'रामायण' के सेट की मुश्किलें बयां की थीं। दीपिका ने बताया था कि उस वक्त आउटडोर शूटिंग में सबसे बड़ी दिक्कत होती थी, क्योंकि वॉशरूम की परेशानी हो जाती थी। उन्हें और बाकी फीमेल कास्ट को लोकल लोगों के घर-घर जाकर वॉशरूम इस्तेमाल करने की रिक्वेस्ट करनी पड़ती थी। वहीं, जब कपड़े बदलने की बारी आती थी, तो उसके लिए भी कोई व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में पुराने कपड़े पकड़कर टेंट बनाया जाता और फिर उसके बीच में दीपिका चिखलिया और बाकी महिलाएं कपड़े बदलती थीं। पुराने कपड़ों के टेंट के बीच में रहकर ही वो धूप से खुद को बचाती थीं। कार में बैठकर साड़ी बदलनी पड़ती थी दीपिका ने यह भी बताया था कि कई बार तो ऐसा हुआ कि उन्हें कार में बैठकर साड़ी बदलनी पड़ी। इसके लिए क्रू मेंबर्स कार के शीशों पर कपड़ा लगा देते थे ताकि बाहर से कुछ न दिखे, और फिर दीपिका कपड़े बदलती थीं। सीता बनने के लिए दीपिका चिखलिया की तैयारी सीता बनने के लिए दीपिका चिखलिया क्या खास और क्या अलग तैयारी करती थीं? इसके बारे में एक्ट्रेस ने बताया था कि रामानंद सागर ने उन्हें देवी सीता का एक रफ स्कैच बनाकर दिया था और बताया था कि सीता ऐसी होनी चाहिए। उसे दीपिका चिखलिया ने दिमाग में रखा। वह रोजाना रामायण पढ़ती थीं और किरदार की गरिमा पर फोकस किया। चूंकि सीता का किरदार गंभीर था, इसलिए दीपिका को बोलने के अंदाज, रिएक्शन और डायलेक्ट पर काम करना पड़ा। उस किरदार को दीपिका चिखलिया ने तीन साल तक निभाया था। क्यों कोई और एक्ट्रेस सीता बन नहीं पा सकी दीपिका जितनी शोहरत? जब भी कोई एक्ट्रेस सीता का किरदार निभाती है, तो उसकी तुलना दीपिका चिखलिया के निभाए सीता के किरदार से ही की जाती है। 'रामायण' सीरियल को बने 39 साल हो चुके हैं। तबसे अभी तक कई एक्ट्रेसेस ने सीता का किरदार निभाया, पर दीपिका को छू न सकीं। आखिर ऐसी क्या वजह है कि सीता के किरदार में दीपिका चिखलिया जितनी शोहरत किसी और एक्ट्रेस को नहीं मिली? इसकी वजह दीपिका ने बताई थी। उनके मुताबिक, उनका चेहरा ऐसा रहा, जिस पर धार्मिक प्रोजेक्ट्स ही शूट करते हैं। उनके चेहरे पर पहले से ही भक्ति भाव था और वह माला पर राम का 100 बार नाम जपती थीं। बताया था आज की एक्ट्रेसेस में क्या है सबसे बड़ी कमी दीपिका चिखलिया ने कहा था कि बाकी एक्ट्रेसेस जहां एक्टिंग करती हैं, वहीं सीता का किरदार उनके लिए एक्टिंग नहीं था। दीपिका के मुताबिक, वह सीता के किरदार को भक्ति की तरह देखती थीं। वो ऐसे सोचती थीं कि वह सीता हैं, राम का दौर है और उनके साथ वह सब हो रहा है, जो 'रामायण' में दिखाया गया। दीपिका चिखलिया ने कहा था कि आज की एक्ट्रेसेस के अंदर भक्ति भाव नहीं है, और इसलिए वो 'सीता' नहीं बन पा रही हैं।  

पत्नी के सपोर्ट से फिर चमका ‘फेडरर को टक्कर देने वाला’ खिलाड़ी

नई दिल्ली  ब्रिटेन के टेनिस खिलाड़ी मार्कस विलिस की कहानी इतनी फिल्मी है कि उस पर यकीन कर पाना भी मुश्किल हो सकता है। वे एक समय पर टेनिस खेलना छोड़ चुके थे लेकिन बाद में पत्नी की जिद की वजह से उन्हें खेल में वापसी करनी पड़ी। वे दिग्गज खिलाड़ी रोजर फेडरर के खिलाफ एक शॉट खेलकर मशहूर हो गए थे लेकिन उसके कुछ ही दिनों बाद ये चमक चली गई। विलिस इस बार विंबलडन में खेलने के लिए लौटे हैं। हालांकि, इस बार उनका अलग ही रूप देखने को मिल रहा है। पहले जब उन्होंने 2016 में फेडरर का सामना किया था, तो वे सिंगल्स में हिस्सा लिया करते थे। हालांकि, अब वो डबल्स खिलाड़ी के रूप में खेल रहे हैं। उन्होंने एक समय पर डिप्रेशन की वजह से टेनिस खेलना छोड़ दिया था। यहां तक कि वे परिवार का खर्च उठाने के लिए ईंट उठाने का काम करने लगे थे लेकिन पत्नी की वजह से उन्होंने दोबारा खेल में वापसी की। रोजर फेडरर के खिलाफ खेले थे विलिस 10 साल पहले मुकाबला दो अलग-अलग दुनिया के लोगों के बीच था। एक तरफ दुनिया के सबसे अमीर खिलाड़ियों में शामिल फेडरर थे, तो दूसरी तरफ विलिस, जिन्होंने उस पूरे साल टेनिस से सिर्फ 24 हजार रुपए कमाए थे। वे अनफिट थे, जंक फूड के शौकीन थे और खेल छोड़ने वाले थे, लेकिन उनकी गर्लफ्रेंड ने उन्हें खेलते रहने के लिए मनाया था। फेडरर से मैच के बाद उन्हें कुछ समय तो खूब शोहरत मिली, टीवी पर इंटरव्यू हुए, लेकिन जल्द ही यह जादू खत्म हो गया। डिप्रेशन और चोट की वजह से छोड़ दिया था टेनिस लगातार लगने वाली चोटों और डिप्रेशन के कारण विलिस ने साल 2018 में टेनिस को पूरी तरह अलविदा कह दिया। साल 2020 में कोरोना के दौरान जब पैसों की भारी किल्लत हुई, तो परिवार चलाने के लिए इस खिलाड़ी ने अपने भाई की कंस्ट्रक्शन कंपनी में ईंट बिछाने का काम किया। कुछ समय बाद जब स्थितियां बदलीं, तो परिवार के एक दोस्त ने उनके प्रोफेशनल कमबैक का खर्च उठाने का फैसला किया। विलिस खुद दोबारा खेलने को लेकर दुविधा में थे लेकिन पत्नी जेनी ने उनसे कहा, 'जाओ और खेलो, जिंदगी में ऐसा मौका दोबारा नहीं मिलेगा।' पत्नी के इसी भरोसे ने उन्हें फिर से कोर्ट पर उतारा। इस बार उन्होंने सिंगल्स के बजाय खुद को डबल्स खिलाड़ी के रूप में ढाला। अब वह दुनिया के 64वें नंबर के डबल्स खिलाड़ी हैं। विलिस ने अपनी जिंदगी के बारे में खुद की बात अब 35 वर्षीय विलिस चार बच्चों के पिता हैं। टेनिस के साथ- साथ वह अपना एक पॉडकास्ट भी चलाते हैं। विलिस ने कहा, 'अब मेरी जिंदगी में ड्रामा कम और गंभीरता ज्यादा है। मैं बस एक बेहतर खिलाड़ी, अच्छा पति और पिता बनने की कोशिश कर रहा हूं।'  

बारिश पर भी सियासत! डिप्टी CM साव बोले- किसानों को मिली राहत, कांग्रेस को नहीं हो रही बर्दाश्त

रायपुर. प्रदेश में बारिश के बाद जलभराव की स्थिति पर कांग्रेस के आरोप पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि किसानों को राहत मिली है, लेकिन कांग्रेस उसे भी नहीं पचा पा रही. बारिश होगी तो कुछ स्थानों पर जलभराव भी होगा. प्रशासन पूरी मुस्तैदी से काम कर रहा है, और जलभराव की स्थिति जल्द सामान्य हो जाएगी. उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने चिंतन शिविर को लेकर मीडिया से चर्चा में कहा कि देश के विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों, भारत सरकार के अधिकारियों, नीति आयोग के प्रतिनिधियों और समाज के कई महत्वपूर्ण लोगों का मार्गदर्शन मिला, इससे सरकार के नीति निर्धारण में बड़ा लाभ होगा. शासन प्रणाली कैसी होनी चाहिए, योजनाएं कैसे बनाई जाएं और प्रशासन को किस दिशा में काम करना चाहिए. इन सभी विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई. उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती पर दो दिनों तक मंथन हुआ. इससे कम लागत में बेहतर खेती और रासायनिक खेती के नुकसान को समझने का अवसर मिला, पर्यटन को बढ़ावा देने और राज्य की अर्थव्यवस्था में उसके योगदान पर भी चर्चा हुई मंत्रियों ने भी अपनी जिज्ञासाएं रखीं, इसका लाभ पूरे प्रदेश को मिलेगा. वहीं, चिंतन शिविर को लेकर कांग्रेस द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए पोस्ट पर अरुण साव ने कहा कि कांग्रेस की स्थिति यही है कि सत्ता में रहते समय वह भ्रष्टाचार में व्यस्त रहती है, और सत्ता से बाहर होने पर दूसरी बातें याद आती हैं. हमारी सरकार जनहित और राष्ट्रहित में काम कर रही है. ऐसे कार्य कांग्रेस की सोच से बहुत दूर हैं, इसलिए वह केवल आलोचना करती है. जल जीवन के ठेकेदारों को किया जा रहा भुगतान जल जीवन मिशन का भुगतान नहीं होने पर ठेकेदारों के एक दिवसीय हड़ताल पर जाने पर उप मुख्यमंत्री साव ने कहा कि राज्य सरकार ने राज्य मद से भी राशि देकर ठेकेदारों का भुगतान किया है. भारत सरकार की नई व्यवस्था के तहत भी भुगतान की प्रक्रिया जारी है. सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है. बड़े पैमाने पर भुगतान हो चुका है, और जिन ठेकेदारों के काम पूरे हो चुके हैं, उन्हें भुगतान करने की प्रक्रिया और तेज कर दी गई है. कांग्रेस के समय क्यों नहीं बना मेडिकल कॉलेज नए मेडिकल कॉलेज के शिलान्यास पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सवाल उठाए जाने पर अरुण साव ने कहा कि भूपेश बघेल को पहले यह बताना चाहिए कि अपने पांच साल के कार्यकाल में मेडिकल कॉलेज क्यों नहीं बन पाए? उन्होंने केवल श्रेय लेने का काम किया, यदि 2021 में शिलान्यास हुआ था तो निर्माण कार्य पूरा क्यों नहीं हुआ? वीबी जीरामजी योजना पर कांग्रेस से पूछा सवाल वहीं वीबी जीरामजी योजना को लेकर कांग्रेस के सवाल पर डीसीएम ने कहा कि कांग्रेस पहले यह तय करे कि वह इस योजना के पक्ष में है या विरोध में. यह मजदूरों के हित, रोजगार सृजन और पंचायतों को मजबूत बनाने की महत्वपूर्ण योजना है. कांग्रेस ने पहले इसका विरोध किया था. मानसून सत्र के लिए सरकार पूरी तरह से तैयार विधानसभा के मानसून सत्र को लेकर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि राज्य सरकार जनहित में पूरी मुस्तैदी के साथ काम कर रही है. विधानसभा के मानसून सत्र में विपक्ष के हर सवाल का जवाब देने के लिए सरकार पूरी तरह तैयार है.

UP Cabinet Meeting: 27 अहम प्रस्ताव पास, नई स्टार्टअप नीति को हरी झंडी; किसानों के लिए भी बड़ा ऐलान

लखनऊ  यूपी की योगी कैबिनेट ने सोमवार को प्रदेश की नई स्टार्टअप नीति समेत 27 प्रस्तावों को मंजूरी दे दी। इसके तहत अब 20 लाख तक पूंजीगत सहायता दी जाएगी। विशेष परिस्थितियों में 50 लाख तक दिया जा सकता है। क्लाउड रेंबर्समेंट दो लाख सालाना दिया जाएगा। एक हजार करोड़ का स्टार्टअप फंड रखा गया है। होमगार्ड और उनके आश्रितों को कैशलेस इलाज को भी मंजूरी दे दी गई। अब पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल सकेगा। इसके साथ ही पशुओं को लेकर किसानों को बड़ी राहत दी गई है। पशुओं का बीमा होगा और अलग-अलग कारणों से इनकी मौत पर एक महीने में मुआवजा मिलेगा। सीएम योगी की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री आवास पर हुई बैठक के फैसलों की जानकारी मंत्री सुरेश खन्ना, मंत्री सुनील शर्मा, मंत्री धर्मपाल सिंह, मंत्री अनिल राजभर ने मीडिया को दी। इलेक्ट्रानिक विभाग के तीन प्रस्ताव रखे गए और तीनों पास हो गए हैं। इसके साथ ही उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए स्टार्टअप मिशन का गठन किया जाएगा। इसकी अलग से बॉडी होगी। अब तक यूपीएलसी इसका काम देखती थी। अब मुख्य सचिव गवर्निंग बॉडी के अध्यक्ष होंगे। डेटा पॉलिसी भी नई आई है। डेटा सुरक्षित रखने और हिन्दुस्तान में ही डेटा रखने पर जोर होगा। पशुओं का भी होगा बीमा पशुओं का भी बीमा होगा। महामारी, बीमारी और दुर्घटना में पशु हानि से किसानों को लाभ होगा। मुर्रा की कीमत 75000 हजार, बाकी की 50 हजार होगी। शाहीवाल की 65 हजार रुपये, गंगागिरी की 60 हजार कीमत होगी। खरगोश जैसे छोटे पशुओं की 6500 रुपये रखा गया है। बैल की कीमत 40 हजार, बछड़ा का 20 हजार रखा गया है। बीमा कंपनी बीमित पशुओं को एक महीने में मुआवजा देगी। केंद्र और प्रदेश सरकार के सहयोग से योजना चलेगी। इसमें केंद्रांश 51 प्रतिशत और राज्यांश 34 प्रतिशत होगी। गोरखपुर-मुरादाबाद में 100-100 बेड के अस्पताल गोरखपुर और मुरादाबाद में 100-100 बेड का अस्पताल और वाराणसी में ईएसआई का मेडिकल कॉलेज बनेगा। इनके लिए निशुल्क जमीन हस्तांतरण के प्रस्ताव को मंजूरी दी गईं। वाराणसी के मेडिकल कॉलेज में 50% सीटें श्रमिकों के परिवार के लिए आरक्षित होगी। ओलंपिक-पैरा ओलंपिक में पदक विजेताओं को सीधी भर्ती ओलंपिक और पैरा ओलंपिक में पदक विजेताओं को अब सीधी भर्ती दी जाएगी। अब भर्ती को लोक सेवा आयोग की परिधि से बाहर किया गया है। इसमें क्रीड़ा अधिकारी के 9 पद, जिला युवा कल्याण 3 पद, उप क्रीड़ा अधिकारी 23 पद पर सीधी भर्ती हो सकेगी। अभी तक समूह ख और ग के पदों पर सीधी भर्ती नहीं हो पाती थी। उनकी व्यवस्था की गई है। तीन निजी विश्वविद्यालयों को मंजूरी मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि प्रदेश में तीन नए निजी विश्वविद्यालयों को मंजूरी दी गई। 2017 तक प्रदेश में केवल 27 विश्वविद्यालय थे। अब राज्य में 56 निजी विश्वविद्यालय हो जाएंगे। अन्य फैसले -शाहजहांपुर में भगवान परशुराम की जन्मस्थली जलालाबाद नगर का नाम बदलकर परशुरामपुरी किया गया है। -रायबरेली में उद्यान महाविद्यालय की स्थापना होगी। 20 हेक्टेयर जमीन इसके लिए निशुल्क दी जाएगी। 50 करोड़ रुपये राज्य सरकार खर्च करेगी। -गोरखपुर और मुरादाबाद नगर निगम म्यूनिसिपल बॉन्ड जारी करेगा। गोरखपुर 80 करोड़, मुरादाबाद में 50 करोड़ का बांड जारी होगा। -धुलाई भत्ता और वर्दी का पैसा बढ़ाया जाएगा। वेतन समिति की सिफारिश को मंजूरी दी गई है। 50% तक बढ़ाया गया है। -लोकसेवा आयोग के चेयरमैन की अधिकतम पेंशन 1 लाख 12 हजार 500 रुपये होगी

राष्ट्र की एकता और अखंडता के महान पुरोधा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धापूर्वक नमन

चंडीगढ़  भारत के महान राष्ट्र नायकों में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नाम अत्यंत सम्मान और श्रद्धा के साथ लिया जाता है। वे केवल एक प्रखर शिक्षाविद्, दूरदर्शी राजनेता और कुशल प्रशासक ही नहीं थे, बल्कि भारत की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय स्वाभिमान के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले एक युगपुरुष थे। उनका सम्पूर्ण जीवन हमें राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देता है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई, 1901 को एक संभ्रांत परिवार में हुआ था। महानता के सभी गुण उन्हें विरासत में मिले थे। उनके पिता आशुतोष बाबू अपने जमाने के प्रख्यात शिक्षाविद् थे। वे 24 वर्ष की आयु में कोलकाता विश्वविद्यालय सीनेट के सदस्य बने। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कर्मक्षेत्र के रूप में 1939 से राजनीति में भाग लिया और आजीवन इसी में लगे रहे। उन्होंने स्वतंत्र भारत के प्रथम उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में देश के औद्योगिक विकास की मजबूत नींव रखने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। किंतु जब राष्ट्रहित के मूल्यों से समझौता करने की स्थिति आई, तब उन्होंने सिद्धान्तों के लिए अपने पद का त्याग करना उचित समझा। यह उनके उच्च आदर्शों और अटूट राष्ट्रहित का अनूठा प्रमाण है। डॉ. मुखर्जी ने सदैव एक सशक्त, समरस और आत्मनिर्भर भारत का सपना देखा। उनका विश्वास था कि देश की एकता और अखंडता सर्वोपरि है तथा इसके साथ किसी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं हो सकता। जम्मू कश्मीर के सन्दर्भ में उनका ऐतिहासिक संदेश 'एक देश में दो विधान, दो प्रथम और दो निशान नहीं चलेंगे। केवल एक ही नारा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता का उद्घोष था। इसी उद्देश्य के लिए उन्होंने अपने प्राणों का बलिदान देकर राष्ट्रसेवा की एक अमर मिसाल स्थापित की। आज विकसित भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ते हुए हम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों से निरन्तर प्रेरणा प्राप्त करते हैं। एक मंत्री के रूप में डॉ. मुखर्जी को स्वतंत्र भारत की आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने वाली सबसे सफल चार परियोजनाओं की शुरुआत करने का श्रेय जाता है। वर्ष 1948 में, पश्चिम बंगाल के चित्तरंजन में स्वचालित इंजन कारखाने की शुरुआत हुई जिसमें वर्ष 1950 में 'देशबंधु नाम से एसेंबल किये गए पार्ट्स से देश के प्रथम भारतीय स्वचालित इंजन का निर्माण किया गया। डॉ. मुखर्जी ने हिन्दुस्तान एयरक्राफ्ट फैक्ट्री को लिमिटेड कंपनी के रूप में पुनर्गठित किया, जिसने शानदार काम करते हुए इंडियन एयरफोर्स के लिए जेट एयरक्राफ्ट की असेंबलिंग की। नागरिक तथा रक्षा उद्देश्यों के प्रशिक्षण के लिए एचटी-2 का, भारतीय रेलवे के लिए 'स्टील रेल कोच' का, तथा विभिन्न राज्यों तथा निजी परिवहन प्राधिकरण के लिए बसों के बाहरी ढांचे का निर्माण किया गया। इस प्रकार, डॉ. मुखर्जी के कुशल और योग्य नेतृत्व में 1947-48 तथा 1948-49 में विश्वयुद्ध के दौरान हुई क्षति को लाभ में बदल दिया गया। कंपनियों का विक्रय 1949-50 में लगभग 2 करोड़ रुपये तक हो गया। उस समय हिन्दुस्तान एयरक्राफ्ट कारखाने द्वारा निर्मित भारतीय रेलवे के नये मॉडल थर्ड क्लास कोच का निर्माण सही मायने में डॉ. मुखर्जी की व्यक्तिगत रूचि का ही परिणाम था। डॉ. मुखर्जी भारतीय एकता, सुशासन और आत्मनिर्भर के प्रबल समर्थक थे। यद्यपि हरियाणा का गठन उनके निधन के बाद हुआ है। फिर भी उनके राष्ट्रवादी विचारों और नीतिगत दृष्टिकोण ने ऐसे भारत की परिकल्पना प्रस्तुत की जिसने हरियाणा सहित पूरे देश के विकास की दिशा को प्रेरित किया। उन्होंने कृषि, उद्योग, शिक्षा और राष्ट्रीय एकीकरण को देश की प्रगति का आधार माना। हरियाणा आज कृषि उत्पादन, औद्योगिक विकास, खेल और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। डॉ. मुखर्जी का मानना था कि विकास का लाभ पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उनके विचार, पारदर्शी प्रशासन, मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था और जन-कल्याणकारी नीतियों को बढ़ावा देते हैं। हरियाणा सरकार ऐसी महान विभूति के आदर्शों का अनुसरण कर रही है। आज हरियाणा में आधुनिक सड़कें, नेटवर्क, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और निवेश को प्रोत्साहन देने वाली नीतियां उसी समावेशी और विकासोन्मुख सोच को आगे बढ़ाने का कार्य कर रही हैं। उनके आदर्श आज भी हरियाणा को सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा प्रदान करते हैं। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी दुर्घटना सहायता योजना 01.04.2017 से शुरू की गई हैं। इस योजना के तहत उन व्यक्तियों को कवर किया जाता है, जो हरियाणा के स्थाई निवासी हों तथा हरियाणा में रह रहें हैं और जिन द्वारा प्रधान मन्त्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत पंजीकरण नहीं करवाया गया है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी दुर्घटना सहायता योजना के तहत एक लाख रुपये की राशि का लाभ दिया जाता है 18 से 70 वर्ष तक की आयु के व्यक्ति को इस योजना के तहत कवर किया जाता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश ने राष्ट्रीय एकता, सुशासन, आत्मनिर्भरता और जनकल्याण के अनेक ऐतिहासिक आयाम स्थापित किए हैं। यह डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों के भारत की दिशा में एक सशक्त कदम है। उनके जन्म दिवस पर मैं उन्हें अपनी ओर से नमन करता हूं जो एक विशिष्ट देशभक्त, विद्वान और राजनेता थे। उन्होंने अपना जीवन भारत के विकास के लिए समर्पित कर दिया। सार्वजनिक जीवन में उनका अटूट विश्वास, साहस और राष्ट्रीय हित के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी। हम उनके द्वारा संजोए गए सेवा मूल्यों के मार्गदर्शन में एक मजबूत और विकसित भारत के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं। नायब सिंह सैनी, मुख्यमंत्री, हरियाणा

WhatsApp यूजरनेम फीचर पर सरकार सख्त, Meta को मिला 9 जुलाई तक का नया डेडलाइन

नई दिल्ली WhatsApp के नए यूजरनेम फीचर को लेकर भारत सरकार और Meta के बीच चल रहा विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है. अब सरकार ने Meta को अपना जवाब देने के लिए कुछ और समय दिया है।  पहले कंपनी को तीन दिन के भीतर जवाब देना था, लेकिन अब यह समय बढ़ाकर 9 जुलाई कर दिया गया है. सरकार इस फीचर के सुरक्षा और ऑनलाइन फ्रॉड से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है. HT की एक रिपोर्ट मेें सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि मेटा को कुछ दिन का एक्स्टेंशन दिया गया है।  दरअसल वॉट्सऐप ने हाल ही में यूजरनेम फीचर का ऐलान किया था. इस फीचर के आने के बाद यूजर्स अपना मोबाइल नंबर बताए बिना भी दूसरे लोगों से बात कर सकेंगे। यानी अगर आपके पास किसी का यूजरनेम है, तो कई मामलों में फोन नंबर शेयर किए बिना भी बातचीत शुरू की जा सकेगी. मेटा का कहना है कि इससे यूजर्स की प्राइवेसी पहले से बेहतर होगी।  लेकिन भारत सरकार की चिंता कुछ और है. सरकार का मानना है कि अगर किसी प्लेटफॉर्म पर पहचान छिपाकर लोगों से संपर्क करना आसान हो गया, तो ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग और किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान बनाकर ठगी करने जैसी घटनाएं बढ़ सकती हैं।  इसी वजह से सरकार ने पिछले हफ्ते Meta को इस फीचर का रोलआउट रोकने और इसकी पूरी जानकारी देने का नोटिस भेजा था।  सरकारी अधिकारियों के मुताबिक मेटा और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय (MeitY) के अधिकारियों के बीच इस मुद्दे पर बैठक भी हो चुकी है. बैठक में कंपनी ने यूजरनेम फीचर के सुरक्षा उपायों की जानकारी दी।  इसके बाद सरकार ने कंपनी को अपना विस्तृत लिखित जवाब देने के लिए 9 जुलाई तक का समय दे दिया है. इसके बाद सरकार तय करेगी कि फीचर को भारत में किस तरह और किन शर्तों के साथ शुरू किया जा सकता है।  मेटा का कहना है कि यूजरनेम फीचर को शुरू से ही सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया है. कंपनी के मुताबिक यूजरनेम पूरी तरह ऑप्शनल होगा. वॉट्सऐप अकाउंट बनाने के लिए मोबाइल नंबर पहले की तरह जरूरी रहेगा।  इसके अलावा किसी व्यक्ति से बातचीत करने के लिए उसका सही यूजरनेम पता होना चाहिए. कंपनी का दावा है कि उसने फर्जी अकाउंट और स्कैम से बचाने के लिए कई सुरक्षा लेयर भी जोड़ी हैं. हाल ही में मेटा ने इस फीचर से जुड़े सवालों के जवाब देने के लिए एक FAQ भी जारी किया है।  सरकार हालांकि अभी इन दावों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है. अधिकारियों का कहना है कि टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर यूजरनेम और पहचान छिपाने वाले फीचर्स का इस्तेमाल कई साइबर अपराधों में हुआ है। ऐसे में वॉट्सऐप पर भी इसी तरह की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. सरकार चाहती है कि फीचर शुरू होने से पहले यह साफ हो जाए कि इससे फर्जी पहचान बनाकर लोगों को ठगना आसान नहीं होगा।  भारत वॉट्सऐप का सबसे बड़ा बाजार है, जहां 80 करोड़ से ज्यादा लोग इस ऐप का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में सरकार का यह फैसला सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि वॉट्सऐप के ग्लोबल रोलआउट पर भी असर डाल सकता है।  अब सभी की नजर 9 जुलाई पर है, जब मेटा अपना विस्तृत जवाब सरकार को सौंपेगी. उसके बाद यह तय होगा कि वॉट्सऐप का नया यूजरनेम फीचर भारत में कब और किन नियमों के साथ शुरू होगा।