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Rajkummar Rao First Look: सौरव गांगुली की बायोपिक से सामने आया पहला लुक, ‘दादा’ के अंदाज में छाए एक्टर

मुंबई  क्रिकेट और बॉलीवुड के फैंस के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। लंबे समय से चर्चा में रही सौरव गांगुली की बायोपिक ‘दादा: द सौरव गांगुली स्टोरी’ का पहला लुक आखिरकार रिलीज कर दिया गया है। फिल्म में राजकुमार राव पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली का किरदार निभा रहे हैं। फर्स्ट लुक सामने आते ही सोशल मीडिया पर फैंस ने उनकी तारीफ शुरू कर दी है। फिल्म का पहला लुक सौरव गांगुली के जन्मदिन के मौके पर जारी किया गया। इसी के साथ मेकर्स ने फिल्म की रिलीज डेट की भी घोषणा की। पोस्टर में राजकुमार राव लॉर्ड्स की बालकनी वाले उस यादगार पल को दोबारा जीते दिखाई दे रहे हैं, जब साल 2002 में नेटवेस्ट सीरीज जीतने के बाद सौरव गांगुली ने अपनी टी-शर्ट हवा में लहराकर जीत का जश्न मनाया था। फर्स्ट लुक में फिर दिखा लॉर्ड्स वाला ऐतिहासिक पल फिल्म का पोस्टर आते ही सोशल मीडिया पर लोगों को सबसे पहले 2002 की वही ऐतिहासिक जीत याद आ गई। इंग्लैंड के लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर नेटवेस्ट सीरीज जीतने के बाद सौरव गांगुली का टी-शर्ट लहराने वाला जश्न भारतीय क्रिकेट के सबसे आइकॉनिक पलों में गिना जाता है। राजकुमार राव ने भी अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर फिल्म से जुड़ा पहला लुक शेयर किया। उन्होंने सौरव गांगुली को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए फिल्म को लेकर अपनी खुशी जाहिर की। फैंस का कहना है कि राजकुमार का लुक और बॉडी लैंग्वेज काफी हद तक गांगुली जैसी लग रही है। फिल्म में सिर्फ क्रिकेट नहीं, संघर्ष और कप्तानी की कहानी भी दिखेगी ‘दादा: द सौरव गांगुली स्टोरी’ सिर्फ एक क्रिकेट फिल्म नहीं होगी, बल्कि यह भारतीय क्रिकेट के एक ऐसे दौर की कहानी भी दिखाएगी, जब टीम इंडिया बदलाव के दौर से गुजर रही थी। सौरव गांगुली को उस कप्तान के तौर पर याद किया जाता है, जिन्होंने युवा खिलाड़ियों पर भरोसा जताया और भारतीय टीम को विदेशों में जीतना सिखाया। स्पोर्ट्स बायोपिक फिल्मों को पिछले कुछ वर्षों में दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। ऐसे में सौरव गांगुली की जिंदगी पर बनी यह फिल्म भी क्रिकेट प्रेमियों के लिए खास मानी जा रही है। मेकर्स की ओर से रिलीज डेट का ऐलान कर दिया गया है, जबकि शूटिंग अभी जारी है। फर्स्ट लुक ने साफ कर दिया है कि फिल्म में उस दौर की कई यादगार घटनाओं को बड़े पर्दे पर दोबारा जीवंत करने की कोशिश की जाएगी।

CM नायब सैनी की बंजारा समाज को सौगात, 6 मांगें मंजूर, 62 लाख रुपये से बनेगा सामुदायिक भवन

चंडीगढ़. हरियाणा में बंजारा समाज की सभी छह मांगों को सरकार पूरा करेगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंगलवार को संत कबीर कुटीर में संत-महापुरुष सम्मान एवं विचार प्रसार योजना के तहत आयोजित बाबा मक्खन शाह लुबाना और बाबा लक्खी शाह बंजारा के राज्य स्तरीय जयंती समारोह में यह भरोसा दिलाया। साथ ही पेहवा में मक्खन शाह लुबाना धर्मशाला और दतौली के सामुदायिक केंद्र के लिए 31-31 लाख रुपये देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा मक्खन शाह लुबाना और बाबा लक्खी शाह बंजारा इतिहास के दो अमर अध्याय हैं। उन्होंने त्याग को धर्म, सेवा को संस्कार और बलिदान को अपनी पहचान बनाया। ऐसी दोनों महान विभूतियों के चरणों में वे श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं। उन्होंने पेहवा में मक्खन शाह लुबाना धर्मशाला के लिए दी गई जमीन से संबंधित कार्रवाई तेजी से पूरी करने का वादा करते हुए कहा कि बाबा मक्खन शाह लुबाना के नाम पर किसी संस्थान का नाम भी रखा जाएगा। 6300 परिवारों को 100-100 गज के प्लॉट नायब ने कहा कि बाबा मक्खन शाह और बाबा लक्खी शाह का जीवन सेवा, समानता और समर्पण का संदेश देता है। इसी भावना के साथ प्रदेश सरकार अंत्योदय के सिद्धांत पर कार्य कर रही है। परिवार पहचान पत्र के माध्यम से प्रत्येक परिवार को पहचान दी गई है। मुख्यमंत्री शहरी आवास योजना के तहत 14 शहरों में 15 हजार 250 परिवारों को आवास तथा मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना के अंतर्गत 6300 परिवारों को 100-100 गज के प्लाट तथा घर निर्माण के लिए एक लाख रुपये की सहायता दी गई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक लाख 56 हजार गरीब परिवारों को पक्के घर उपलब्ध कराए गए हैं। डा. भीमराव आंबेडकर आवास नवीनीकरण योजना के अंतर्गत सहायता राशि 30 हजार रुपये से बढ़ाकर 80 हजार रुपये की गई है। अब तक 85 हजार 815 परिवारों को 416 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री अंत्योदय परिवार उत्थान योजना के तहत 55 हजार से अधिक जरूरतमंदों को स्वरोजगार के लिए बैंक ऋण उपलब्ध कराया गया है। 13 लाख 43 हजार परिवारों को प्रतिमाह 500 रुपये में गैस सिलिंडर  दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय परिवार सुरक्षा योजना के माध्यम से परिवार के कमाने वाले सदस्य की मृत्यु होने पर 74 हजार 245 परिवारों को 2,800 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है। इसके अलावा 13 लाख 43 हजार परिवारों को प्रतिमाह 500 रुपये में गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है। विद्यार्थियों को 12वीं तक मुफ्त किताबें, वर्दी और स्टेशनरी उपलब्ध कराई जा रही है। प्रतियोगी परीक्षाओं की निशुल्क कोचिंग के साथ-साथ डा. आंबेडकर मेधावी छात्रवृत्ति योजना के तहत आठ हजार से 12 हजार रुपये तक की वार्षिक छात्रवृत्ति भी दी जा रही है। कार्यक्रम में बंजारा समाज के पुरोहित हुकुम सिंह, सूचना जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के महानिदेशक के. मकरंद पांडुरंग और अतिरिक्त निदेशक मनीष लोहान सहित प्रदेशभर से आए लुबाना और बंजारा समाज के गण्यमान्य लोग मौजूद थे।

बिल्ली रास्ता काटे तो क्यों रुकते हैं लोग? जानें शकुन शास्त्र की मान्यताएं

 बचपन से हम अपने बड़े-बुजुर्गों से सुनते आ रहे हैं कि बिल्ली अगर रास्ता काट जाए तो 10 मिनट के लिए रुक जाना चाहिए. शकुन शास्त्र में भी बिल्ली का रास्ता काटना एक बहुत ही पुराना और प्रचलित शकुन-अपशकुन माना जाता है. लेकिन इसके पीछे सिर्फ अंधविश्वास नहीं, बल्कि पुराने समय की कुछ व्यवहारिक वजहें भी थीं. शकुन शास्त्र के अनुसार मान्यताएं शकुन शास्त्र में बिल्ली यानी विशेषकर काली बिल्ली का रास्ता काटना सामान्यतः अशुभ या किसी आने वाले संकट का संकेत माना जाता है. राहु ग्रह से संबंध ज्योतिष और शकुन शास्त्र में बिल्ली को राहु ग्रह की सवारी या उससे संबंधित जीव माना गया है. राहु को दुर्घटनाओं, रुकावटों और नकारात्मक ऊर्जा का कारक माना जाता है. इसलिए माना जाता है कि अगर बिल्ली रास्ता काटती है, तो राहु का नकारात्मक प्रभाव आपके काम में बाधा डाल सकता है. बाईं से दाईं ओर जाना कुछ मान्यताओं के अनुसार, अगर बिल्ली बाईं ओर से दाईं ओर रास्ता काटती है, तो उसे अधिक अशुभ माना जाता है. अधूरे काम की चेतावनी ऐसा माना जाता है कि यदि आप किसी जरूरी काम से बाहर जा रहे हैं और बिल्ली रास्ता काट दे, तो उस कार्य में असफलता या देरी हो सकती है. बिल्ली का रोना या लड़ना केवल रास्ता काटना ही नहीं, बल्कि यदि घर या उसके आसपास बिल्लियां आपस में लड़ रही हों या उनके रोने की आवाज आए, तो उसे भी शकुन शास्त्र में गृह-क्लेश (घर में झगड़े) या धन-हानि का संकेत माना जाता है. छींकना यदि बिल्ली आपके सामने आकर छींक दे, तो इसे शकुन शास्त्र में एक बड़ा अपशकुन माना जाता है, और ऐसी स्थिति में थोड़ी देर रुक कर यात्रा शुरू करने की सलाह दी जाती है. यदि बिल्ली रास्ता काट दे, तो क्या करें? अगर आप इन मान्यताओं को मानते हैं या मन में कोई शंका आती है, तो लोक परंपराओं में इसके कुछ सरल उपाय बताए गए हैं. थोड़ी देर रुक जाएं: रास्ता काटने पर एक-दो मिनट के लिए वहीं रुक जाएं. शकुन शास्त्र के अनुसार, आपके बाद अगर कोई दूसरा व्यक्ति या वाहन वहां से गुजर जाता है, तो उसका दोष समाप्त हो जाता है. जल का छिड़काव: यदि पास में पानी हो, तो थोड़ा सा जल जमीन पर छिड़क दें या पानी पीकर आगे बढ़ें. भगवान का स्मरण: अपने ईष्ट देव का नाम लें या हनुमान चालीसा की एक पंक्ति पढ़ लें. इससे मन का डर और नकारात्मक विचार दूर हो जाते हैं.

Nijjar Murder Case: आरोपियों को नहीं मिली राहत, 2028 में शुरू होगी कोर्ट में सुनवाई

चंडीगढ़. कनाडा में खालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में न्यायिक शुरू होने में समय लगेगा। ब्रिटिश कोलंबिया प्रॉसिक्यूशन सर्विस के अनुसार इस बहुचर्चित मामले का ट्रायल अब 2028 में शुरू होने की संभावना है। फिलहाल अदालत ने केवल प्री-ट्रायल कार्यवाही का कार्यक्रम तय किया है, जो 2028 की शुरुआत तक जारी रहेगा। ऐसे में हत्या के मामले में गिरफ्तार चारों आरोपितों को ट्रायल शुरू होने तक हिरासत में ही रहना होगा। ब्रिटिश कोलंबिया प्रॉसिक्यूशन सर्विस की एक्टिंग कम्युनिकेशन काउंसल एन सीमोर ने बताया कि अभी तक ट्रायल की तारीख तय नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि प्री-ट्रायल आवेदनों की सुनवाई 2028 की शुरुआत तक निर्धारित है। मामले में अगली केस मैनेजमेंट कॉन्फ्रेंस 16 जुलाई को न्यू वेस्टमिंस्टर ला कोर्ट में होगी। इन लोगों पर हत्या की साजिश रचने का आरोप मामले में करण बराड़, कमलप्रीत सिंह, करणप्रीत सिंह और अमनदीप सिंह पर प्रथम श्रेणी हत्या तथा हत्या की साजिश रचने के आरोप हैं। चारों भारतीय नागरिक हैं और फिलहाल अनिवार्य न्यायिक हिरासत में रखे गए हैं। अदालत के आदेश के अनुसार ट्रायल शुरू होने तक वे हिरासत में ही रहेंगे। करण बराड़, कमलप्रीत सिंह और करणप्रीत सिंह को मई 2024 में एडमंटन और उसके आसपास से गिरफ्तार किया गया था, जबकि अमनदीप सिंह पर कुछ दिन बाद आरोप तय किए गए। उस समय वह पील रीजनल पुलिस की हिरासत में था, जहां उसे नवंबर 2023 में अन्य आपराधिक मामलों में गिरफ्तार किया गया था। इस पूरे मामले में अदालत ने प्रकाशन प्रतिबंध भी लागू कर रखा है। इसके चलते केस मैनेजमेंट, प्री-ट्रायल कॉन्फ्रेंस और विभिन्न आवेदनों के दौरान अदालत में पेश की गई दलीलों और दस्तावेजों को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। गौरतलब है कि हरदीप सिंह निज्जर की 18 जून 2023 को ब्रिटिश कोलंबिया के सरे शहर में गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद भारत और कनाडा के संबंधों में भारी तनाव आ गया था। तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने संसद में भारतीय एजेंसियों की संभावित संलिप्तता के "विश्वसनीय आरोप" होने की बात कही थी। भारत ने इन आरोपों को शुरू से ही "बेबुनियाद" और "राजनीति से प्रेरित" बताते हुए सिरे से खारिज किया है। अब सबकी नजरें 16 जुलाई की अगली अदालत की सुनवाई और उसके बाद ट्रायल की समय सीमा पर टिकी हैं।

PM Awas Yojana को लेकर डिप्टी CM विजय शर्मा का बड़ा कदम, केंद्रीय मंत्री शिवराज चौहान से की अहम अपील

रायपुर. छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के पात्र परिवारों को योजना का लाभ दिलाने की मांग की है. उन्होंने आवास प्लस 2.0 सर्वे के दौरान आई तकनीकी और व्यावहारिक समस्याओं का उल्लेख करते हुए सर्वे से छूटे पात्र हितग्राहियों को योजना में शामिल करने का आग्रह किया है. साथ ही भारत सरकार से इस संबंध में आवश्यक निर्णय और पहल करने की अपील की है. राष्ट्रीय ग्रामीण सम्मेलन का किया उल्लेख उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने अपने पत्र में लिखा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में आयोजित राष्ट्रीय ग्रामीण सम्मेलन एक महत्वपूर्ण पहल है. उन्होंने सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान को बधाई देते हुए ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन की सराहना की. साथ ही उनके प्रति आभार भी व्यक्त किया. पत्र में सम्मेलन के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा दिए उस आश्वासन का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत कोई भी पात्र परिवार आवास से वंचित नहीं रहेगा. विजय शर्मा ने इस संदर्भ में छत्तीसगढ़ में योजना के क्रियान्वयन के दौरान सामने आ रही व्यावहारिक समस्याओं की ओर भी ध्यान आकर्षित किया. आवास प्लस 2.0 की सूची में सामने आईं दिक्कतें विजय शर्मा ने पत्र में बताया कि 24 जून को प्रदेशभर की ग्राम सभाओं में आवास प्लस 2.0 की पात्रता सूची प्रस्तुत की गई थी. इस प्रक्रिया के दौरान कई व्यावहारिक समस्याएं सामने आईं. उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण के समय कुछ पात्र परिवार पलायन या अन्य कारणों से अपने गांव में मौजूद नहीं थे, जिसके चलते उनका सर्वे नहीं हो सका और उनका नाम पात्रता सूची में शामिल नहीं हो पाया. इसके अलावा कुछ ऐसे परिवार भी रहे, जिनका सर्वेक्षण तो किया गया, लेकिन तकनीकी अथवा अन्य कारणों से उनकी जानकारी पोर्टल पर अपडेट या प्रदर्शित नहीं हो सकी. परिणामस्वरूप ग्राम सभा में उनकी पात्रता दर्ज नहीं हो पाई, जबकि वे योजना के लाभ के पात्र हैं. उपमुख्यमंत्री शर्मा ने समाधान निकालने का किया आग्रह उपमुख्यमंत्री शर्मा ने पत्र में कहा कि इन दोनों कारणों से प्रदेश के बड़ी संख्या में पात्र परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लाभ से वंचित रह गए हैं. उन्होंने केंद्रीय मंत्री से अनुरोध किया कि इस समस्या के समाधान के लिए भारत सरकार स्तर पर आवश्यक निर्णय लिए जाएं और उचित पहल की जाए, ताकि प्रदेश का कोई भी पात्र परिवार आवास योजना के लाभ से वंचित न रहे. पत्र के अंत में विजय शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सभी पात्र परिवारों को आवास के संकल्प को पूरी तरह साकार करने के लिए केंद्र सरकार से सहयोग का आग्रह किया. साथ ही छत्तीसगढ़ के प्रति केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा दिए जा रहे निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग के लिए उनका पुनः आभार व्यक्त किया है.

‘मेरा कचरा-मेरी जिम्मेदारी’ अभियान से बदलेगा मध्यप्रदेश, CM डॉ. यादव बोले- देश का अग्रणी राज्य बनेगा MP

मेरा कचरा-मेरी जिम्मेदारी के संकल्प से मध्यप्रदेश बनेगा देश का अग्रणी राज्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर मध्यप्रदेश के जागरूक नागरिकों के अमूल्य और अनुकरणीय सहयोग से राज्य ने स्वच्छता के क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धियां अर्जित की हैं। पर्यावरण संरक्षण और संवर्द्धन की दिशा में राज्य सरकार द्वारा 1 अप्रैल 2026 से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026' को प्रभावी रूप से लागू कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह नवीन नियम केवल नगरीय निकायों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इन्हें राज्य के सभी शासकीय विभागों में समान रूप से लागू किया गया है। इसके अंतर्गत नगरीय क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण अंचलों से निकलने वाले कचरे को भी समेकित कर वैज्ञानिक पद्धति से प्रबंधित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस दूरगामी नियम का सफल क्रियान्वयन केवल शासकीय प्रयासों से संभव नहीं है, इसके लिए राज्य के प्रत्येक नागरिक, संस्थान और व्यावसायिक प्रतिष्ठान को आगे आकर अपनी महती भूमिका निभानी होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भावी पीढ़ी के सुरक्षित भविष्य को रेखांकित करते हुए प्रदेशवासियों से अपनी दैनिक दिनचर्या में विशेष आदतों को सम्मिलित करने के लिए कहा कि पर्यावरण को अक्षुण्ण रखने के लिए हमें यह दृढ़ संकल्प लेना होगा कि हम किसी भी प्रकार का कचरा न तो खुले में फेंकेंगे और न ही उसे जलाएंगे। अपने घर, गली, मोहल्ले और नगर को कचरा मुक्त बनाने के लिए यह आवश्यक है कि नागरिक अपने घरों से निकलने वाले अपशिष्ट को चार श्रेणियों— 'गीला, सूखा, सैनिटरी एवं स्पेशल केयर' में अनिवार्य रूप से अलग-अलग करके ही अधिकृत कचरा संग्रहण वाहन को सौंपें। कचरे को संपदा में बदलने और पुनर्चक्रण के सिद्धांतों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नागरिकों से गृह-स्तर पर जैविक खाद निर्माण (होम कम्पोस्टिंग) अपनाने की अपील की है। उन्होंने आह्वान किया कि पुराने कपड़े, पुस्तकें और अन्य उपयोगी वस्तुओं को फेंकने के बजाय स्थानीय 'रिड्यूस, रियूस, रिसाईकल' (आरआरआर) केंद्रों में जमा करें। इसके साथ ही, पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली विकसित करने के लिए बाजार जाते समय हमेशा अपना कपड़े का झोला और पानी की व्यक्तिगत बोतल साथ रखने की आदत डालें, जिससे एकल-उपयोग प्लास्टिक और अपशिष्ट की उत्पत्ति को प्राथमिक स्तर पर ही न्यूनतम किया जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य के समस्त नगरीय निकायों को प्रदेश के प्रत्येक घर, व्यावसायिक दुकान और झुग्गी बस्तियों से नियमित, समयबद्ध और निर्बाध रूप से कचरे का संग्रहण करने के निर्देश दिए। इस जन-सरोकार के कार्य में किसी भी स्तर पर शिथिलता स्वीकार्य नहीं होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वच्छता हमारे सामूहिक स्वास्थ्य, पर्यावरण संतुलन और जीवन की समग्र गुणवत्ता का आधार स्तंभ है। हम आज यदि पूर्ण उत्तरदायित्व के साथ कार्य करेंगे, तभी अपनी भावी पीढ़ी को एक स्वच्छ, समृद्ध और सुरक्षित मध्यप्रदेश सौंप पाएंगे। उन्होंने आह्वान किया कि आइए, हम सब मिलकर "मेरा कचरा – मेरी जिम्मेदारी" के मंत्र को आत्मसात करें और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के सफल क्रियान्वयन में अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराकर मध्यप्रदेश को देश का सबसे स्वच्छ, सुंदर और संवहनीय (सस्टेनेबल) राज्य बनाएं।  

Argentina vs Egypt: मेसी की टीम क्वार्टर फाइनल में, VAR विवाद पर मिस्र का बड़ा आरोप- FIFA नहीं चाहता था बाहर हों अर्जेंटीना

अटलांटा फीफा वर्ल्ड कप 2026 में अर्जेंटीना का शानदार प्रदर्शन जारी है. 7 जुलाई (मंगलवार) को अटलांटा के अटलांटा स्टेडियम में आयोजित राउंड ऑफ 16 मुकाबले में अर्जेंटीना ने मिस्र को 3-2 से हराया. इस जीत के साथ ही अर्जेंटीना की टीम क्वार्टर फाइनल में पहुंच गई. क्वार्टर फाइनल में अर्जेंटीना का सामना 12 जुलाई को कैनसस सिटी के कैनसस सिटी स्टेडियम में कोलंबिया/स्विट्जरलैंड से होगा।  इस मुकाबले में 78वें मिनट तक अर्जेंटीना 0-2 से पिछड़ रहा था, लेकिन इसके बाद लियोनेल मेसी की अगुवाई में मौजूदा वर्ल्ड चैम्पियन टीम ने जोरदार वापसी की. 13 मिनट के अंदर तीन गोल कर अर्जेंटीना ने मिस्र की टीम पूरी तरह पस्त कर दिया।  अर्जेंटीना की जीत के हीरो कप्तान लियोनेल मेसी रहे, जिन्होंने एक गोल दागने के अलावा एक गोल में असिस्ट दिया. मेसी ने 79वें मिनट में क्रिस्टियन रोमेरो को गोल करने में असिस्ट दिया. इसके बाद मेसी ने 83वें मिनट में गोंजालो मोंटिएल के पास पर बेहतरीन गोल दागा. वहीं इंजरी टाइम (90+2वें मिनट) में एनजो फर्नांडीज ने लौटारो मार्टिनेज के पास पर गोल दाग अर्जेंटीना को 3-2 की निर्णायक लीड दिला दी।  FIFA नहीं चाहता था अर्जेंटीना बाहर हो फुटबॉल में साजिश की कहानियां नई नहीं हैं, लेकिन जब बात लियोनेल मेसी और अर्जेंटीना की होती है तो यह बहस खत्म होने का नाम नहीं लेती. 2022 के कतर विश्व कप में शुरू हुई 'रेफरी की मेहरबानी' वाली चर्चा अब 2026 फीफा विश्व कप में फिर भड़क उठी है. इस बार वजह बना प्री-क्वार्टर फाइनल, जहां अर्जेंटीना ने मिस्र को 3-2 से हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई. लेकिन मुकाबले के बाद जीत से ज्यादा चर्चा रेफरी और VAR (Video Assistant Referee) के फैसलों की होने लगी।  मिस्र का आरोप- FIFA मेसी को बाहर नहीं होने देना चाहता था मुकाबले में मिस्र ने 2-0 की बढ़त बनाने वाला गोल कर दिया था. 58वें मिनट में मुस्तफा जिको ने गेंद नेट में पहुंचाई, लेकिन VAR ने बिल्ड-अप में मारवान अटिया द्वारा लिसांद्रो मार्टिनेज पर कथित फाउल दिखाया. रेफरी फ्रांस्वा लेटेक्सियर ने ऑन-फील्ड रिव्यू के बाद गोल रद्द कर दिया।  यहीं से विवाद शुरू हुआ. अर्जेंटीना ने इसके बाद अंतिम 13 मिनट में तीन गोल दागकर मैच पलट दिया। मैच के बाद मिस्र के कोच होसम हसन ने बेहद गंभीर आरोप लगाए. उनका कहना था, 'शायद वे चाहते थे कि विश्व चैम्पियन टूर्नामेंट में बना रहे. शायद वे चाहते थे कि मेसी की दौड़ जारी रहे.' उन्होंने यहां तक कह दिया, 'अब मैं कभी विश्व कप नहीं देखूंगा, क्योंकि इस प्रतियोगिता में न्याय नहीं है।  गोल करने वाले मुस्तफा जिको भी रेफरी पर भड़क उठे. उनका कहना था कि रेफरी के फैसलों ने मिस्र की सारी मेहनत पर पानी फेर दिया और टूर्नामेंट को अर्जेंटीना की ओर मोड़ दिया गया।  क्या VAR प्रोटोकॉल का गलत इस्तेमाल हुआ? विवाद सिर्फ गोल रद्द होने तक सीमित नहीं है. पूर्व प्रीमियर लीग रेफरी ग्राहम स्कॉट ने माना कि यह सामान्य फुटबॉल संपर्क था और इतनी दूर हुई घटना पर VAR को दखल नहीं देना चाहिए था. उनके अनुसार जिस फाउल के आधार पर गोल रद्द किया गया, उसके बाद अर्जेंटीना के खिलाड़ियों के पास गेंद वापस हासिल करने के कई मौके थे. ऐसे में इसे Attacking Possession Phase (APP) का हिस्सा मानना VAR प्रोटोकॉल के खिलाफ था।  पूर्व FIFA रेफरी फर्नांडो ग्युरेरो ने भी इसी राय का समर्थन किया. उनका कहना था कि रेफरी और VAR दोनों ने प्रोटोकॉल की गलत व्याख्या की, जिसका सीधा नुकसान मिस्र को हुआ।  यही नियम बाकी टीमों पर क्यों नहीं? यहीं से बहस और गहरी हो जाती है. कुछ ही दिन पहले FIFA के रेफरिंग प्रमुख पियरलुइजी कोलिना ने कहा था कि अधिकारियों को सामान्य शारीरिक संपर्क पर खेल नहीं रोकने के निर्देश दिए गए हैं ताकि मैच की रफ्तार बनी रहे।  लेकिन अगर यही मानक है, तो फिर मिस्र का गोल क्यों रद्द हुआ? इसी सवाल ने पुराने विवाद भी फिर जिंदा कर दिए हैं।  कतर से शुरू हुई बहस, 2026 में फिर भड़की     2022: पोलैंड के खिलाफ मेसी को मिला विवादित पेनल्टी     2022: सऊदी अरब मैच में लंबे स्टॉपेज टाइम पर सवाल     2026: ऑस्ट्रिया के खिलाफ मेसी के गोल से पहले कथित फाउल पर VAR ने दखल नहीं दिया     2026: अल्जीरिया के खिलाफ मेसी की चुनौती पर रेड कार्ड की समीक्षा नहीं हुई इन सभी घटनाओं को जोड़कर सोशल मीडिया पर लंबे समय से यह नैरेटिव बनाया जाता रहा है कि अर्जेंटीना को अहम मौकों पर रेफरी का फायदा मिलता है।  मिस्र को पेनल्टी भी नहीं मिली मिस्र का दावा है कि मैच के अंतिम दौर में मोहम्मद सलाह बॉक्स के अंदर संपर्क के बाद गिरे थे, जबकि एक अन्य खिलाड़ी की जर्सी भी खींची गई थी. इसके बावजूद VAR ने समीक्षा तक नहीं की।  पूर्व इंग्लैंड स्टार इयान राइट ने कहा कि यदि अर्जेंटीना के खिलाफ दूर हुई घटना पर गोल वापस लिया जा सकता है, तो मिस्र की पेनल्टी अपील की भी कम से कम समीक्षा होनी चाहिए थी।  क्या सचमुच अर्जेंटीना को मिल रही है विशेष छूट? फिलहाल इसका कोई ठोस सबूत नहीं है कि FIFA किसी टीम का पक्ष ले रहा है. बड़े टूर्नामेंटों में विवादित फैसले हमेशा बहस का विषय रहे हैं. लेकिन जब एक जैसी परिस्थितियों में अलग-अलग फैसले दिखते हैं, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।  मिस्र की हार के बाद यह बहस पहले से कहीं ज्यादा तेज हो गई है. अब अर्जेंटीना के हर बड़े मैच में रेफरी और VAR के फैसले पहले से ज्यादा बारीकी से परखे जाएंगे. सवाल सिर्फ इतना है कि यह महज संयोग है या फिर वास्तव में विश्व चैम्पियन टीम को बाकी देशों से अलग नजरिए से देखा जा रहा है।  मेसी ने मिस की पेनल्टी मुकाबले के पहले हाफ में अर्जेंटीना को कई मौके मिले, लेकिन गोल दागने में मिस्र की टीम कामयाब रही. यासर इब्राहिम ने 15वें मिनट में गोल कर मिस्र को 1-0 से आगे कर दिया. इस गोल में असिस्ट मरवान अत्तिया ने दिया था. इसके बाद लियोनेल मेसी 21वें मिनट में पेनल्टी मिस कर गए।  मिस्र के गोलकीपर मोस्तफा शोबेर ने इस मौके पर शानदार बचाव किया. दूसरे हाफ में … Read more

सीएम योगी ने चौकाघाट स्थित विद्युत सब स्टेशन का किया स्थलीय निरीक्षण 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकमंगल की कामना के साथ काल भैरव व काशी विश्वनाथ मंदिर में किए दर्शन सीएम योगी ने चौकाघाट स्थित विद्युत सब स्टेशन का किया स्थलीय निरीक्षण  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे थे वाराणसी  मंदिर में मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं का अभिवादन हाथ जोड़कर स्वीकारा, बच्चों को दुलारा एक मांगलिक कार्यक्रम में भी शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वाराणसी,  विकास कार्यों और कानून व्यवस्था की समीक्षा बैठक के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकमंगल की कामना के साथ काशी कोतवाल काल भैरव व बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए और विधि विधान से पूजन-अर्चन किया। मुख्यमंत्री ने काल भैरव मंदिर में आरती के साथ विधि विधान से पूजा कर बाबा का आशीर्वाद लिया। उन्होंने मंदिर प्रांगण में मौजूद श्रद्धालुओं का अभिवादन हाथ जोड़कर स्वीकार किया और बच्चों को दुलारा। इसके पश्चात सीएम ने काशीपुराधिपति बाबा विश्वनाथ के दरबार में गर्भगृह में जाकर षोडशोपचार पूजन कर लोक कल्य़ाण की कामना की। यहां बाबा के दर्शन करने आए भक्तों ने मुख्यमंत्री को देखकर 'हर-हर महादेव' का जयकारा लगाया। मुख्यमंत्री वाराणसी में आयुष एवं खाद्य सुरक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ दयाशंकर मिश्र 'दयालु' के बेटे के विवाह समारोह में भी शामिल हुए। उन्होंने इस मांगलिक वेला पर वर-वधू एवं परिजनों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। काल भैरव व बाबा विश्वनाथ मंदिर पहुंचने से पहले सीएम योगी ने चौकाघाट स्थित विद्युत सब स्टेशन का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान विद्युत सब स्टेशन पर चल रहे कार्य की प्रगति के संबंध में विभाग के अधिकारियों ने विस्तार से जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने सभी कार्य समय से पूरा कराए जाने हेतु निर्देशित किया। इस मौके पर श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर, खादी ग्रामोद्योग मंत्री राकेश सचान, स्टाम्प एवं पंजीयन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल, एमएसएमई राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, पूर्व मंत्री एवं विधायक डॉ नीलकंठ तिवारी, महापौर अशोक तिवारी, सदस्य विधान परिषद राय धर्मेंद्र सिंह, विधायक डॉ अवधेश सिंह, सौरभ श्रीवास्तव, त्रिभुवन राम, मंडलायुक्त एस. राजलिंगम, पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल, जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

चार दशक की बदलाव यात्रा! ग्रामीण भारत में ISECТ इंडिया की परिवर्तनकारी पहल ने बदली लाखों जिंदगियां

भोपाल  भारत के विकास का वास्तविक अर्थ तभी सार्थक होता है, जब उसके लाभ गांवों, कस्बों और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचें। शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र में भी यही चुनौती लंबे समय तक बनी रही। एक समय ऐसा था, जब कंप्यूटर शिक्षा केवल महानगरों और चुनिंदा संस्थानों तक सीमित थी। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के अधिकांश युवाओं के लिए आधुनिक तकनीकी शिक्षा तक पहुंचना एक कठिन सपना था। ऐसे समय में कुछ लोगों ने केवल परिस्थितियों को स्वीकार नहीं किया, बल्कि उन्हें बदलने का संकल्प लिया। ऐसे ही दूरदर्शी व्यक्तित्व थे वरिष्ठ शिक्षाविद्, साहित्यकार और चिंतक संतोष चौबे। वर्ष 1985 में उन्होंने ऑल इंडिया सोसाइटी फॉर इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कंप्यूटर टेक्नोलॉजी (आईसेक्ट) की स्थापना इस विश्वास के साथ की कि भारत का भविष्य तभी सशक्त होगा, जब शिक्षा, तकनीक और कौशल का लाभ गांवों और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा। उनके लिए शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं थी, बल्कि आत्मनिर्भरता, सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण का आधार थी। यही सोच आगे चलकर आईसेक्ट की कार्यसंस्कृति, विस्तार और विकास यात्रा की मूल प्रेरणा बनी। इस सोच को व्यवहार में उतारते हुए वर्ष 1986 में भोपाल में पहला प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया गया। यह केवल एक शिक्षण केंद्र नहीं था, बल्कि ग्रामीण भारत में तकनीकी शिक्षा के लोकतांत्रीकरण की दिशा में उठाया गया एक महत्त्वपूर्ण कदम था। संस्था ने स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें ही प्रशिक्षक बनाया, जिससे शिक्षा के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार, नेतृत्व और आत्मविश्वास के नए अवसर विकसित हुए। धीरे-धीरे यह प्रयास एक व्यापक सामाजिक पहल में बदलने लगा। आईसेक्ट ने यह सिद्ध किया कि यदि आधुनिक शिक्षा को स्थानीय आवश्यकताओं और समुदाय की भागीदारी से जोड़ा जाए, तो परिवर्तन दूरस्थ क्षेत्रों तक भी पहुंच सकता है।   शिक्षा से कौशल, कौशल से आत्मनिर्भरता वर्ष 1995 आईसेक्ट की विकास यात्रा का महत्त्वपूर्ण पड़ाव सिद्ध हुआ। इसी अवधि में संस्था ने अपने कार्यों का विस्तार करते हुए बहुउद्देशीय प्रशिक्षण केंद्र की अवधारणा विकसित की। इन केंद्रों में शिक्षा के साथ कौशल प्रशिक्षण, रोजगार मार्गदर्शन और सामुदायिक विकास की गतिविधियों को एक साथ जोड़ा गया। इससे प्रशिक्षण केंद्र केवल शिक्षण संस्थान नहीं रहे, बल्कि स्थानीय विकास के केंद्र के रूप में विकसित होने लगे। इसी समय अधिकृत केंद्र मॉडल को अपनाकर स्थानीय उद्यमियों और युवाओं को संस्था के साथ जोड़ा गया। इससे शिक्षा के विस्तार में जनभागीदारी बढ़ी और अनेक क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के नए अवसर भी बने। जन-जागरूकता अभियानों के माध्यम से तकनीकी शिक्षा के प्रति समाज का विश्वास बढ़ा और ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक शिक्षा की स्वीकार्यता मजबूत हुई। संस्था के बढ़ते कार्यक्षेत्र को अधिक व्यवस्थित स्वरूप देने के उद्देश्य से वर्ष 2003 में आईसेक्ट लिमिटेड की स्थापना की गई। इसके साथ शिक्षा, कौशल विकास और तकनीकी प्रशिक्षण से जुड़े कार्यक्रमों का विस्तार और अधिक संगठित रूप में आगे बढ़ा। यही वह दौर था, जब आईसेक्ट ने प्रशिक्षण संस्था की सीमाओं से आगे बढ़कर शिक्षा, रोजगार और सामाजिक विकास को एक-दूसरे से जोड़ने वाले व्यापक मॉडल के रूप में अपनी पहचान स्थापित की।   उच्च शिक्षा, नवाचार और भविष्य की तैयारी तकनीकी प्रशिक्षण और कौशल विकास के क्षेत्र में मजबूत आधार तैयार करने के बाद आईसेक्ट ने उच्च शिक्षा को भी अपनी विकास यात्रा का महत्त्वपूर्ण हिस्सा बनाया। उद्देश्य स्पष्ट था कि महानगरों तक सीमित गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा को राज्यों और क्षेत्रीय स्तर तक पहुंचाना, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर अवसर अपने ही क्षेत्र में उपलब्ध हो सकें। इस दिशा में वर्ष 2005 में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय की स्थापना हुई। इसके बाद वर्ष 2010 में भोपाल में रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, 2016 में झारखंड के हजारीबाग में आईसेक्ट विश्वविद्यालय, 2018 में बिहार के वैशाली तथा मध्य प्रदेश के खंडवा में डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालयों की स्थापना की गई। आगे बढ़ते हुए वर्ष 2023 में भोपाल में स्कोप ग्लोबल स्किल्स विश्वविद्यालय की स्थापना ने कौशल आधारित उच्च शिक्षा को नई दिशा प्रदान की। इन विश्वविद्यालयों के माध्यम से शिक्षा को केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित न रखकर कौशल विकास, अनुसंधान, नवाचार, उद्योग-शिक्षा समन्वय और रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण पर विशेष बल दिया गया। बदलते समय की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ऐसे शैक्षणिक वातावरण के निर्माण का प्रयास किया गया, जो विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ व्यवहारिक दक्षता भी प्रदान कर सके। इसी अवधि में डिजिटल प्रौद्योगिकी ने देश के सामाजिक और आर्थिक जीवन में व्यापक परिवर्तन किए। शिक्षा और सेवाओं का स्वरूप भी तेजी से बदला। आईसेक्ट ने इस परिवर्तन के साथ कदम मिलाते हुए डिजिटल माध्यमों, तकनीकी प्रशिक्षण और कौशल विकास के जरिए दूरस्थ क्षेत्रों तक आधुनिक सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने का प्रयास किया। इससे अनेक युवाओं को नई तकनीकों के अनुरूप स्वयं को तैयार करने का अवसर मिला।   चार दशक, एक सतत संकल्प चार दशकों की इस यात्रा का सबसे उल्लेखनीय पक्ष यह रहा कि आईसेक्ट ने विकास का केंद्र ग्रामीण भारत को बनाया। जहां अनेक शैक्षणिक पहले बड़े शहरों तक सीमित रहीं, वहीं संस्था ने गांवों, छोटे कस्बों और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में शिक्षा और कौशल विकास का आधार तैयार करने का प्रयास किया। स्थानीय युवाओं को अवसर देना, समुदाय की भागीदारी बढ़ाना और शिक्षा को आत्मनिर्भरता से जोड़ना इस यात्रा की प्रमुख विशेषताएं रहीं। वर्ष 2026 में आईसेक्ट इंडिया के रूप में नई पहचान अपनाना इसी निरंतर विकास का अगला चरण है। यह परिवर्तन केवल नाम का नहीं, बल्कि उस व्यापक दृष्टि का प्रतीक है, जिसके केंद्र में भविष्य उन्मुख शिक्षा, कौशल, नवाचार, अनुसंधान और डिजिटल सशक्तीकरण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का संकल्प है। आज भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में शिक्षा, कौशल और तकनीक की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण हो गई है। चार दशकों की यह यात्रा इस विश्वास को सशक्त करती है कि जब शिक्षा समाज की वास्तविक आवश्यकताओं से जुड़ती है, जब अवसर गांवों तक पहुंचते हैं और जब युवा अपनी प्रतिभा को विकसित करने का अवसर पाते हैं, तब परिवर्तन केवल व्यक्तियों के जीवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के विकास की आधारशिला बन जाता है। इसी विश्वास के साथ आईसेक्ट इंडिया की चालीस वर्षों की यात्रा आज एक नए पड़ाव … Read more

यूपी के शिक्षकों को बड़ी सौगात! चुनाव से पहले योगी सरकार का बड़ा फैसला, लाखों कर्मचारियों को मिलेगा फायदा

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के करीब 12 लाख शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी और उनके आश्रितों के लिए बड़ी राहत की खबर है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 8 जुलाई को सुबह 10 बजे वाराणसी से मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का शुभारंभ करेंगे. इस योजना के शुरू होते ही सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सुविधा मिलने लगेगी।  इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इलाज के समय शिक्षकों और उनके परिवारों को अपनी जेब से पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा. तय अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी, जिससे आर्थिक बोझ काफी कम होगा. लंबे समय से शिक्षक इस तरह की स्वास्थ्य सुरक्षा योजना की मांग कर रहे थे।  इसके साथ ही प्रदेश के करीब 1.10 करोड़ परिषदीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के खातों में डीबीटी के माध्यम से 1,200 रुपये भी भेजे जाएंगे. यह राशि यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, बैग, स्वेटर और अन्य जरूरी शैक्षणिक सामग्री के लिए दी जाएगी. इसके अलावा करीब 10 लाख शिक्षकों और संविदा कर्मचारियों को राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के साथ सामाजिक सुरक्षा से जुड़े अन्य लाभ भी दिए जाएंगे, जिससे भविष्य की आर्थिक सुरक्षा और मजबूत होगी।  वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 8 जुलाई को दोपहर 2 बजे चित्रकूट और मानिकपुर में 951 करोड़ रुपये की लागत वाली 124 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी करेंगे. इन परियोजनाओं के जरिए सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं को और बेहतर बनाया जाएगा।