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विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता और विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाना सर्वाेच्च प्राथमिकता – राज्यपाल डेका

रायपुर विभिन्न शासकीय विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों की बैठक राज्यपाल  रमेन डेका ने आज प्रदेश के विभिन्न शासकीय विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों की बैठक लेकर विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता, विद्यार्थियों की संख्या, रिक्त पदों की पूर्ति, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन तथा नवाचार एवं स्टार्टअप गतिविधियों सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों की विस्तृत समीक्षा की।             राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों में सीटों के अनुपात में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी ली और इस दिशा में प्राथमिकता से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में जहां भी व्यवस्थागत कमियां हैं, उन्हें दूर किया जाए तथा शैक्षणिक गुणवत्ता में निरंतर सुधार किया जाए। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए सभी विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।   ’विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों को शीघ्र भरने के निर्देश दिए’          राज्यपाल  डेका ने विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों की जानकारी लेते हुए उन्हें शीघ्र भरने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया में नियमानुसार स्थानीय योग्य एवं प्रतिभाशाली लोगों को प्राथमिकता देने के प्रयास किए जाएं, ताकि स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर मिल सके।  डेका ने विश्वविद्यालयों की नैक  (NAAC) एवं एनआईआरएफ (NIRF) रैंकिंग की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सभी विश्वविद्यालय अपनी रैंकिंग में सुधार के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार करें। ’नशा मुक्त युवा, विकसित भारत’ संकल्प अभियान में युवाओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ा’          राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को अपने आसपास के गांवों को गोद लेकर वहां इनोवेशन एवं स्टार्टअप गतिविधियों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में उपलब्ध ज्ञान, विशेषज्ञता और संसाधनों का लाभ ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचना चाहिए। विद्यार्थियों को स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए नवाचार एवं उद्यमिता से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने ‘नशा मुक्त युवा, विकसित भारत’ संकल्प अभियान में युवाओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने तथा विद्यार्थियों को खेलकूद के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए।  ’परीक्षा व्यवस्था को निष्पक्ष, पारदर्शी एवं लीक-प्रूफ बनाने पर विशेष जोर’           राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों में इंटरनल ऑडिट अनिवार्य रूप से कराने तथा इसके लिए इंटरनल कमेटी गठित करने के निर्देश दिए। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था को निष्पक्ष, पारदर्शी एवं लीक-प्रूफ बनाने पर विशेष जोर देते हुए इसके लिए सभी विश्वविद्यालयों में परीक्षा नियंत्रकों की आधिकारिक नियुक्ति सुनिश्चित करने कहा। उन्होंने आयुष विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित निजी मेडिकल कॉलेजों की व्यवस्थाओं पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए, ताकि इन संस्थानों का संचालन निर्धारित मानकों एवं नियमों के अनुरूप सुनिश्चित हो।          बैठक में राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, कृषि उत्पादन आयुक्त एवं सचिव कृषि विभाग डॉ. सिद्धार्थ कोमल परदेशी, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव  अविनाश चंपावत, चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त  रितेश अग्रवाल, सहित संबंधित अधिकारी एवं प्रदेश के विभिन्न शासकीय विश्वविद्यालयों के कुलसचिव उपस्थित थे।

साढ़े दस लाख स्वयं सहायता समूहों से जुड़े सवा करोड़ ग्रामीण परिवारों की बदली तकदीर

लखनऊ उत्तर प्रदेश के गांवों में स्वयं सहायता समूह अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला आत्मनिर्भरता के बड़े केंद्र बन रहे हैं। योगी सरकार के ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत प्रदेश में सक्रिय 10.58 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर लगभग सवा करोड़ ग्रामीण परिवारों को आजीविका के नए अवसर मिले हैं। इन समूहों ने महिलाओं को रोजगार और उद्यम से जोड़ने के साथ परिवारों की आय बढ़ाने और गांवों में आर्थिक गतिविधियों को गति देने का काम किया है। वहीं इन समूहों से जुड़ी 82 लाख से ज्यादा महिला किसान ग्रामीण बदलाव की नई अग्रदूत बनकर उभर रही हैं। समूहों से निकली आत्मनिर्भरता की नई कहानी ग्रामीण आजीविका मिशन का फोकस महिलाओं को केवल वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। उन्हें प्रशिक्षण, ऋण, उद्यम और बाजार से जोड़कर स्थायी आय के अवसर तैयार किए जा रहे हैं। इसका असर अब गांवों में साफ दिखाई देने लगा है। महिलाएं खाद्य प्रसंस्करण, सिलाई-कढ़ाई, डेयरी, हस्तशिल्प और स्वच्छता उत्पादों के निर्माण सहित कई क्षेत्रों में छोटे उद्यम संचालित कर रही हैं। इन गतिविधियों से महिलाओं के हाथ में कमाई आई है तो परिवारों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है। घर की जरूरतों में योगदान देने के साथ महिलाएं अपने फैसले खुद लेने और दूसरे परिवारों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने की दिशा में भी आगे बढ़ रही हैं। बचत-ऋण के जरिये कारोबार तक पहुंचीं ग्रामीण महिलाएं मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि ग्रामीण आजीविका मिशन की बड़ी उपलब्धि यह है कि महिलाओं को बचत और ऋण की पारंपरिक व्यवस्था से आगे बढ़ाकर उद्यमिता के अवसर दिए गए। प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता के साथ बाजार से जुड़ाव ने हजारों गांवों में छोटे-छोटे उद्योगों की नींव रखी है। इससे महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे अपनी पहचान कारोबारी के रूप में बना रही हैं। महिला समूहों के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी तैयार हो रहे हैं। एक महिला के उद्यमी बनने का असर उसके परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समूह की दूसरी महिलाएं भी उससे प्रेरणा लेकर आर्थिक गतिविधियों से जुड़ती हैं। 82 लाख महिला किसान बनीं बदलाव की वाहक ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करने के लिए कृषि क्षेत्र में भी उन्हें आगे बढ़ाया जा रहा है। 82 लाख महिला किसानों का जुड़ाव इस बदलाव की बड़ी तस्वीर पेश करता है। खेती से जुड़े काम में महिलाओं की भागीदारी को आय बढ़ाने वाले अवसरों से जोड़ने से ग्रामीण परिवारों की आजीविका के स्रोतों में विविधता आई है। महिला समूह अब गांवों में आर्थिक गतिविधियों के साथ सामाजिक बदलाव की भी मजबूत धुरी बन चुके हैं। समूहों में साथ काम करने से महिलाओं के बीच सहयोग और अनुभव साझा करने की संस्कृति मजबूत हुई है। सफल महिलाएं दूसरी महिलाओं को भी रोजगार और उद्यम की राह दिखा रही हैं। वित्तीय समावेशन से मजबूत हुई आर्थिक नींव ग्रामीण महिलाओं को बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं से जोड़ना भी मिशन की अहम उपलब्धियों में शामिल है। वित्तीय समावेशन के जरिए महिलाओं को बचत, ऋण और अन्य आर्थिक अवसरों तक पहुंच मिली है। इससे गांवों में छोटी पूंजी के आधार पर कारोबार शुरू करने की संभावनाएं बढ़ी हैं। सरकार का जोर अब इन समूहों को केवल समूह के रूप में सक्रिय रखने के बजाय उन्हें उद्यम, रोजगार और बाजार के अवसरों से जोड़कर आय के स्थायी स्रोत तैयार करने पर है। यही वजह है कि स्वयं सहायता समूह ग्रामीण विकास के साथ महिला सशक्तीकरण का भी प्रभावी माध्यम बनते जा रहे हैं। गांव की अर्थव्यवस्था को मिल रही नई ऊर्जा मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि प्रदेश में साढ़े दस लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों का नेटवर्क अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा भर रहा है। एक ओर इससे आजीविका के अवसर मिल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक सम्मान की नई पहचान मिल रही है। ग्रामीण आजीविका का यह मॉडल आने वाले समय में गांवों में रोजगार और उद्यम के और अधिक अवसर पैदा करने की क्षमता रखता है।

कोई भी डीलर 4 हजार क्विंटल से अधिक चीनी का नहीं रखेगा स्टॉक : खाद्य मंत्री राजपूत

भोपाल मध्यप्रदेश में कोई भी डीलर 4 हजार क्विंटल से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं रखेगा। साथ ही स्टॉक को 30 दिन से अधिक समय तक भंडारित भी नहीं करेगा। सभी डीलरों द्वारा भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के पोर्टल पर स्टॉक की घोषणा को नियमित अद्यतन करना अनिवार्य होगा। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने यह जानकारी देते हुए बताया है कि इस संबंध में जरूरी कार्यवाही के निर्देश सभी कलेक्टर को दिये गये हैं। सरकारी खाते पर या राज्य सरकार या उसके द्वारा प्राधिकृत किसी प्राधिकारी द्वारा विशेष रूप से किसी डीलर के माध्यम से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अधीन उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से वितरण के लिये स्टॉक के भंडारण पर यह सीमा लागू नहीं होगी। थोक उपभोक्ताओं के लिये स्टॉक रखने की सीमा कोई भी थोक उपभोक्ता, जो उत्पादन, उपभोग या उपयोग के लिये कच्चे माल के रूप में किसी भी प्रकार से प्रतिमाह 10 मीट्रिक टन चीनी का उपयोग या उपभोग करता है, वह 15 दिनों से अधिक की अवधि के लिये चीनी का स्टॉक नहीं करेगा। थोक उपभोक्ता से अभिप्राय है हलवाई, मिठाई विक्रेता, शीतल पेय निर्माता, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग आदि, जिसने चालू माह को छोड़कर पिछले एक वर्ष के दौरान औसत मासिक खपत के रूप में न्यूनतम 100 मीट्रिक टन का उपयोग किया है। राज्य सरकार द्वारा इस आदेश का कड़ाई से पालन करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये गये हैं।  

मेहनत को मिला योजनाओं का संबल, सीता मरावी बनीं गांव की ‘लखपति दीदी’

रायपुर  मरवाही विकासखंड के ग्राम पंचायत गुदुमदेवरी की मती सीता मरावी आज आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन चुकी हैं। कभी सीमित आय में परिवार का भरण-पोषण करने वाली सीता मरावी ने वंदना महिला स्वसहायता समूह से जुड़कर स्वरोजगार की राह अपनाई और आज ‘लखपति दीदी’ बनकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं। स्वसहायता समूह से जुड़ने के बाद सीता मरावी ने बैंक लोन, सीआईएफ एवं आरएफ के माध्यम से प्राप्त 25 हजार रुपये की राशि से गांव में किराना दुकान शुरू की। इसके बाद समूह के संकुल से 50 हजार रुपये की राशि प्राप्त कर उन्होंने मुर्गी व्यवसाय भी प्रारंभ किया। दोनों व्यवसायों को मेहनत, लगन और बेहतर प्रबंधन के साथ आगे बढ़ाते हुए उनकी वार्षिक आय अब लगभग 2 से 2.5 लाख रुपये तक पहुंच गई है। बढ़ी हुई आमदनी से न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई, बल्कि उनमें आत्मनिर्भर बनने का आत्मविश्वास भी बढ़ा है। सीता मरावी बताती हैं कि महिला स्वसहायता समूह से जुड़ना उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। समूह से मिले आर्थिक सहयोग और मार्गदर्शन ने उन्हें स्वरोजगार शुरू करने का अवसर दिया। आज वह अपने पैरों पर खड़ी हैं और गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं। सीता मरावी को महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त की राशि भी प्राप्त हो चुकी है। शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से मिले सहयोग और अपनी मेहनत के बल पर उन्होंने आर्थिक सशक्तिकरण की नई कहानी लिखी है। अपने जीवन में आए इस सकारात्मक बदलाव के लिए मती सीता मरावी ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया है।

22 जिलों में झमाझम बारिश के आसार, बिजली-वज्रपात को लेकर अलर्ट

रायपुर प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है, जिसके प्रभाव से पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई है। गंगीय पश्चिम बंगाल और उससे लगे क्षेत्रों पर बने सुस्पष्ट निम्न दबाव के असर से उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ में बारिश का दौर जारी है। विशेष रूप से बलरामपुर जिले में कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने से अतिवृष्टि की स्थिति बन गई है। भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी मौसम विभाग ने बुधवार को प्रदेश के अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा तथा एक-दो स्थानों पर भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी दी है। रायपुर में आंशिक रूप से बादल छाए रहने और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। पिछले 24 घंटों के दौरान चांदो में 150 मिमी, रामचंद्रपुर में 120 मिमी, रामानुजगंज व वाड्रफनगर में 80-80 मिमी तथा बलरामपुर, कुसमी, समरी, रघुनाथ नगर और राजपुर में 70-70 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। प्रदेश में सबसे अधिक अधिकतम और न्यूनतम प्रदेश में सबसे अधिक अधिकतम तापमान 31.0 डिग्री राजनांदगांव में और सबसे कम न्यूनतम तापमान 21.4 डिग्री पेंड्रा रोड में दर्ज किया गया। राजधानी में अधिकतम तापमान 29.5 डिग्री और न्यूनतम 24.0 डिग्री रहा। बलरामपुर में अतिवृष्टि और सरगुजा संभाग में बारिश का दौर जारी बंगाल की खाड़ी से झारखंड तक बने कम दबाव के कारण सरगुजा संभाग सहित उत्तरी छत्तीसगढ़ में पिछले चार दिनों से बारिश हो रही है। अंबिकापुर में 31 अगस्त तक औसत से अधिक बारिश हो चुकी है, जबकि जशपुर और सरगुजा जिलों में अभी भी औसत से करीब 32% से 38% तक कम बारिश दर्ज की गई है। लगातार हो रही इस बारिश से धान की फसलों को तो राहत मिली है, लेकिन खेतों में जलभराव के कारण सब्जी उत्पादकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं, जिससे फसलों में कीट और रोगों का खतरा उत्पन्न हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार दो सितंबर से उत्तरी छत्तीसगढ़ में बारिश की गतिविधियों में कुछ कमी आने की संभावना है। दुर्ग में उफान पर शिवनाथ नदी, महमरा एनिकट पर बह रहा पानी दुर्ग जिले में अब तक 668.8 मिमी औसत वर्षा हो चुकी है। लगातार तीन दिनों की अच्छी बारिश के चलते शिवनाथ नदी उफान पर है और महमरा एनिकट के ऊपर डेढ़ फीट पानी बह रहा है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जल संसाधन विभाग द्वारा एनिकट के 12 गेट खोल दिए गए हैं। हालांकि सोमवार दोपहर बाद से बारिश थमी है और धूप-छांव का दौर जारी है।  

बुनकरों को सरकारी खरीद के माध्यम से मिलेगा स्थायी बाजार और रोजगार

लखनऊ  प्रदेश की योगी सरकार हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग को प्रोत्साहन देने तथा प्रदेश के बुनकरों को अधिक से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए सरकारी संस्थानों में स्थानीय स्तर पर निर्मित हथकरघा उत्पादों की खरीद को बढ़ावा दे रही है। इसी क्रम में मंगलवार को विधान भवन स्थित कक्ष संख्या-80 में खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग एवं अन्य सरकारी विभागों तथा शासकीय उपक्रमों में प्रयुक्त होने वाले बेडशीट एवं गॉज बैंडेज की खरीद और आपूर्ति सुनिश्चित किए जाने के संबंध में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में मंत्री राकेश सचान ने कहा कि प्रदेश के बुनकरों को सरकारी खरीद का बाजार उपलब्ध कराना योगी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकारी संस्थानों में स्थानीय बुनकरों द्वारा निर्मित गुणवत्तापूर्ण वस्त्रों की खरीद बढ़ने से प्रदेश के लाखों बुनकर परिवारों को रोजगार और आर्थिक मजबूती मिलेगी तथा प्रदेश में उत्पादित वस्त्रों के लिए स्थायी बाजार भी विकसित होगा। उल्लेखनीय है कि 07 अगस्त 2026 को लोकभवन, लखनऊ में हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग निदेशालय, उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा दिवस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वास्थ्य विभाग सहित सरकारी विभागों एवं शासकीय उपक्रमों में प्रमुख रूप से प्रयुक्त होने वाले बेडशीट एवं गॉज बैंडेज की खरीद सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुपालन में बैठक के दौरान इसकी कार्ययोजना पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में लगभग 2,13,107 बुनकर कार्यरत हैं। बेडशीट तथा गॉज बैंडेज सहित विभिन्न वस्त्रों का उत्पादन प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में बुनकरों द्वारा किया जा रहा है। सरकारी खरीद में इन उत्पादों को प्राथमिकता मिलने से बुनकरों के उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराया जा सकेगा और परंपरागत बुनकरी व्यवसाय से नई पीढ़ी को जोड़ने में भी मदद मिलेगी। समीक्षा बैठक में प्रस्तावित व्यवस्था के तहत सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में आवश्यकतानुसार बेडशीट, तकिया कवर तथा गॉज बैंडेज क्लॉथ की आपूर्ति उत्तर प्रदेश राज्य हथकरघा निगम लिमिटेड के माध्यम से सुनिश्चित किए जाने पर चर्चा हुई। इसके लिए प्रदेश के बुनकर सहकारी समितियों एवं बुनकरों से गुणवत्तापूर्ण उत्पादन कराया जाएगा। संबंधित चिकित्सा संस्थानों द्वारा अपनी आवश्यकता के अनुरूप मांग एवं क्रय आदेश समय से जारी किए जाने की व्यवस्था विकसित करने पर भी विचार किया गया। मंत्री राकेश सचान ने उत्पादों की गुणवत्ता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि सरकारी संस्थानों को उपलब्ध कराई जाने वाली सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप और गुणवत्तापूर्ण होनी चाहिए।  बैठक में आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए नोडल अधिकारी नामित किए जाने पर भी चर्चा हुई। नोडल अधिकारी विभिन्न चिकित्सालयों, मेडिकल कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों से समन्वय स्थापित करते हुए उनकी आवश्यकताओं, निर्धारित विशिष्टियों एवं आपूर्ति से संबंधित सूचनाएं प्राप्त कर  विभाग को उपलब्ध कराएगा। इससे मांग के अनुरूप समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि योगी सरकार द्वारा हथकरघा क्षेत्र के लिए निर्धारित आरक्षित वस्तुओं की खरीद का उद्देश्य केवल सरकारी खरीद की प्रक्रिया पूरी करना नहीं, बल्कि प्रदेश के बुनकर परिवारों को स्थायी रोजगार और बाजार उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि जब बुनकरों को उनके उत्पाद का सुनिश्चित बाजार मिलेगा तो परंपरागत बुनकरी से जुड़ी युवा पीढ़ी भी इस व्यवसाय की ओर आकर्षित होगी और प्रदेश की समृद्ध हथकरघा परंपरा को नई गति मिलेगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप पूरी कार्ययोजना को शीघ्र अंतिम रूप दिया जाए। उत्पादों के मानक, गुणवत्ता जांच, दर निर्धारण, मांग प्राप्त करने, क्रय आदेश जारी करने, भुगतान तथा समयबद्ध आपूर्ति सहित सभी बिंदुओं को शामिल करते हुए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की जाए। उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को आपसी समन्वय से कार्य करते हुए अगले सप्ताह तक आवश्यक बिंदुओं को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए। बैठक में प्रमुख सचिव हथकरघा-वस्त्रोद्योग अनिल सागर, विशेष सचिव शेषमणि पांडेय, संयुक्त आयुक्त पी. सी. ठाकुर सहित स्वास्थ्य विभाग एवं हथकरघा-वस्त्रोद्योग विभाग के अधिकारियों के साथ अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल से की मुलाकात

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई दिल्ली में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री  पीयूष गोयल से मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास, निवेश संभावनाओं पर चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश में निवेश के लिए उपलब्ध व्यापक संभावनाओं, बेहतर अधोसंरचना और उद्योगों के अनुकूल वातावरण की जानकारी केंद्रीय मंत्री को दी। उन्होंने प्रदेश में नए निवेश को प्रोत्साहित करने तथा रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार के सहयोग से संबंधित विभिन्न विषयों पर भी विचार-विमर्श किया। मुलाकात के दौरान मध्यप्रदेश के औद्योगिक विस्तार, निर्यात को बढ़ावा देने और प्रदेश की आर्थिक क्षमता को नई ऊंचाई देने की दिशा में मिलकर कार्य करने पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से मध्यप्रदेश में निवेश एवं उद्योगों के लिए और अधिक अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है।  

‘प्रलय’ का नाम ही काफी! ब्रह्मोस से ज्यादा रेंज और रफ्तार वाली इस मिसाइल की ताकत जानें

मुंबई  भारत अपने डिफेंस सिस्‍टम को मॉडर्न वॉरफेयर के लिहाज से अपग्रेड कर रहा है. आर्मी, एयरफोर्स और नेवी को नई टेक्‍नोलॉजी से एडवांस किया जा रहा है. खासकर मिसाइल, फाइटर जेट और ड्रोन के सेगमेंट में हजारों करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है. नेक्‍स्‍ट जेनरेशन का फाइटर जेट डेवलप करने के लिए AMCA प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया गया है. इसके तहत पांचवीं के साथ ही छठी और उससे आगे की पीढ़ियों का लड़ाकू विमान डेवलप करने की योजना है. वहीं, मिसाइल डेवलपमेंट के क्षेत्र में भारत लगातार इतिहास रच रहा है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने हिन्‍द महासागर में तकरीबन 3000 किलोमीटर के लिए NOTAM जारी किया है. डिफेंस एक्‍सपर्ट का मानना है कि लंबी से मध्‍यम दूरी तक मार करने वाली मिसाइल का परीक्षण किया जा सकता है. इस बीच, DRDO एक और योजना बना रहे है. इसके तहत लॉन्‍ग रेंज एंटी-शिप मिसाइल के रेंज को दोगुना से ज्‍यादा किया जाएगा।  दरअसल, भारत अपनी समुद्री सुरक्षा और लंबी दूरी की मारक क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है. DRDO लॉन्ग रेंज एंटी-शिप मिसाइल (LR-AShM) के एक्‍सटेंडेड रेंज वाले वेरिएंट की संभावनाओं का अध्ययन कर रहा है, जिसकी मारक क्षमता करीब 3,500 किलोमीटर तक ले जाने का लक्ष्य हो सकता है. हालांकि, इसको लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है. मौजूदा LR-AShM 1,500 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है. ऐसे में इसकी रेंज को दोगुने से भी अधिक बढ़ाकर 3,500 किलोमीटर तक ले जाने से यह सिस्‍टम केवल कोस्‍टल सिक्‍योरिटी तक सीमित न रहकर हिंद महासागर क्षेत्र में दूर मौजूद नौसैनिक खतरों के खिलाफ एक रणनीतिक हथियार बन सकती है. इसका इस्तेमाल जमीन से तैनात लॉन्चरों के जरिए समुद्र में काफी दूर मौजूद वॉरशिप और अन्य नौसैनिक लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकेगा।  हाइपरसोनिक टेक्‍नोलॉजी बनेगी अहम आधार ‘डिफेंस डॉट इन’ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित एक्‍सटेंडेड रेंज वाला वेरिएंट मौजूदा LR-AShM की हाइपरसोनिक बूस्ट-ग्लाइड तकनीक पर आधारित हो सकता है. इस तकनीक में शुरुआती रॉकेट फेज मिसाइल को बेहद ऊंचाई और अत्यधिक गति तक पहुंचाते हैं. इसके बाद हाइपरसोनिक ग्लाइड व्‍हीकल अलग होकर वायुमंडल की ऊपरी परतों में एयरोडायनामिक लिफ्ट का इस्तेमाल करते हुए लंबी दूरी तय करता है. रिपोर्ट के मुताबिक, मिसाइल की गति करीब मैक-10 (तकरीबन 12348 किलोमीटर प्रति घंटा) तक पहुंचाने और हजारों किलोमीटर की यात्रा के दौरान उसे नियंत्रित रखने के लिए रॉकेट मोटर, ईंधन, एयरोडायनामिक डिजाइन और फ्लाइट पाथ में बड़े बदलाव की जरूरत होगी. केवल अतिरिक्त ईंधन जोड़कर 3,500 किलोमीटर की रेंज हासिल करना संभव नहीं होगा. इसके लिए प्रोपल्‍सन सिस्‍टम और स्टेजिंग को भी नए सिरे से विकसित करना पड़ सकता है।  LR-AShM बनाम ब्रह्मोस मिसाइल   LR-AShM मिसाइल ब्रह्मोस मिसाइल मौजूदा क्षमता से दोगुनी से ज्यादा होगी रेंज: DRDO कथित तौर पर Long Range Anti-Ship Missile (LR-AShM) के एक एक्‍सटेंडेड वेरिएंट पर काम करने की संभावनाओं का अध्ययन कर रहा है, जिसकी मारक क्षमता 3,500 किलोमीटर तक हो सकती है. मौजूदा LR-AShM की बताई गई क्षमता करीब 1,500 किलोमीटर है. 3,500 किमी की रेंज हासिल होने पर यह प्रणाली तटीय रक्षा से आगे बढ़कर समुद्र में काफी दूर मौजूद नौसैनिक ठिकानों और युद्धपोतों के खिलाफ रणनीतिक क्षमता प्रदान कर सकती है. 800-900 KM तक मारक क्षमता: भारत के एक्‍सटेंडेड घरेलू ब्रह्मोस वेरिएंट की ऑपरेशनल रेंज करीब 800 से 900 किलोमीटर तक बताई जाती है. वहीं, निर्यात संस्करण की रेंज करीब 290 किमी और Su-30MKI से लॉन्च होने वाले संस्करण की क्षमता करीब 450-500 किमी बताई गई है. हाइपरसोनिक टेक्‍नोलॉजी: प्रस्तावित मिसाइल मौजूदा LR-AShM की हाइपरसोनिक boost-glide तकनीक को आगे बढ़ा सकती है. रॉकेट बूस्टर मिसाइल को बेहद ऊंचाई और करीब Mach 10 तक की गति देने के बाद अलग होगा, जिसके बाद हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन वायुमंडल की ऊपरी परतों में एयरोडायनामिक लिफ्ट का इस्तेमाल करते हुए लंबी दूरी तय करेगा. इतनी दूरी हासिल करने के लिए रॉकेट मोटर, ईंधन, मिसाइल की संरचना और उड़ान पथ में बड़े बदलाव की जरूरत होगी. दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइलों में शामिल: ब्रह्मोस करीब Mach 2.8 से Mach 3 की रफ्तार से लक्ष्य की ओर बढ़ सकती है. इसकी सुपरसोनिक स्पीड दुश्मन को प्रतिक्रिया के लिए बेहद कम समय देती है. 2,000 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान बड़ी चुनौती: 3,500 किलोमीटर की उड़ान के दौरान हाइपरसोनिक गति बनाए रखना सबसे बड़ी तकनीकी चुनौतियों में से एक होगा. अत्यधिक गति पर वायुमंडलीय घर्षण से पैदा होने वाली गर्मी मिसाइल के बाहरी हिस्से का तापमान 2,000 डिग्री सेल्सियस से अधिक तक पहुंचा सकती है. ऐसे में DRDO को बेहतर heat shielding, उच्च तापमान सहने वाली सामग्री और अधिक एयरोडायनमिक डिजाइन विकसित करना होगा. तीनों सेनाओं के लिए अहम हथियार: ब्रह्मोस को जमीन, समुद्र और हवा से लॉन्च किया जा सकता है. भारतीय वायुसेना के Su-30MKI लड़ाकू विमान से भी इसका एयर-लॉन्च्ड वेरिएंट इस्तेमाल किया जाता है. NavIC और एडवांस नेविगेशन से सटीक निशाना साधने पर जोर: हजारों किलोमीटर दूर समुद्री लक्ष्य को सटीकता से निशाना बनाने के लिए बेहद एडवांस नेविगेशन सिस्‍टम जरूरी होगी. संभावित रूप से भारत के NavIC सैटेलाइट नेटवर्क के साथ मिसाइल के onboard sensors को जोड़ा जा सकता है. इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के दौरान सैटेलाइट सिग्नल बाधित होने की स्थिति में ring-laser या fibre-optic gyroscopes जैसे आंतरिक नेविगेशन सिस्टम मिसाइल को लक्ष्य तक पहुंचाने में मदद कर सकते हैं. 200-300 किलोग्राम तक वॉरहेड: मिसाइल में करीब 200 से 300 किलोग्राम का पेलोड ले जाने की क्षमता बताई जाती है. इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से पारंपरिक हमलों के लिए किया जाता है. समुद्र में भारत की A2/AD क्षमता को मिल सकता है बड़ा बढ़ावा: अगर 3,500 किलोमीटर क्षमता वाला संस्करण विकसित होता है तो भारत जमीन से लॉन्च होने वाली मिसाइल के जरिए समुद्र में बहुत दूर मौजूद दुश्मन के नौसैनिक बेड़े को निशाना बना सकेगा. इससे भारत की Anti-Access/Area-Denial (A2/AD) क्षमता मजबूत होगी और मेन लैंड एवं स्‍ट्रैटजिक आइलैंड जोन के आसपास एक व्यापक सुरक्षा कवच तैयार हो सकता है. हालांकि, 3,500 किलोमीटर की रेंज फिलहाल एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य है. दो चरणों वाला प्रोपल्शन सिस्टम: ब्रह्मोस में पहले चरण में सॉलिड-प्रोपेलेंट बूस्टर और इसके बाद लिक्विड रैमजेट इंजन काम करता है. यही तकनीक इसे … Read more

विभागाध्यक्ष और जिला कार्यालयों को भी किया गया सम्मानित

रायपुर, मुख्य सचिव  विकासशील ने आज मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर में आयोजित मासिक सम्मान कार्यक्रम में ई-ऑफिस के माध्यम से नस्तियों के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण तथा कार्यालयीन समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित करने वाले मंत्रालयीन अधिकारी एवं कर्मचारियों को जुलाई माह के लिए प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इसी प्रकार से ई-ऑफिस में सर्वश्रेष्ठ कार्य के लिए लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को प्रथम, आदिम जाति विकास विभाग को दूसरा तथा ग्रामोद्योग विभाग को तीसरे स्थान पर सम्मानित किया गया।  मुख्य सचिव ने सभी सम्मानित प्रशंसा पत्र प्राप्त करने वाले अधिकारी एवं कर्मचारियों को शुभकामनाएं एवं बधाई देते हुए कहा कि सभी अधिकारी-कर्मचारी ई-ऑफिस में लगातार अच्छा प्रदर्शन करें यही अपेक्षा है। उन्होंने आई-गाट पर प्रत्येक माह कम से कम 3 से 4 कोर्स प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी अपने विभाग की आवश्यकता के अनुसार अवश्य करें। मुख्य सचिव ने प्रदेश स्तर पर आई गाट में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।  संयुक्त सचिव से कनिष्ठ सचिवालय सहायक श्रेणी में ई-ऑफिस रैंकिंग के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर सचिव  सच्चिदानंद आलोक प्रथम, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की संयुक्त सचिव मती जय जैन द्वितीय, आदिम जाति विकास विभाग के संयुक्त सचिव  भूपेन्द्र कुमार राजपूत तृतीय स्थान पर सम्मानित किया गया। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के उप सचिव  दूरदेशी राम सोन्टापर विभाग प्रथम स्थान, श्रम विभाग के उप सचिव  विपुल कुमार गुप्ता द्वितीय स्थान, सामान्य प्रशासन विभाग (कक्ष-8) के उप सचिव मती ऋतु वर्मा तृृतीय स्थान पर सम्मानित किया हुए। गृह विभाग के अवर सचिव  पूरन लाल साहू प्रथम स्थान, सामान्य प्रशासन विभाग (कक्ष-1) के अवर सचिव  कैलाश कुमार नेताम द्वितीय स्थान, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अवर सचिव मती दिव्या वैष्णव तृतीय स्थान पर सम्मानित किया। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के अनुभाग अधिकारी  वीरेन्द्र कुमार प्रथम स्थान, अनुभाग अधिकारी  जीवन लाल नेताम द्वितीय स्थान, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के अनुभाग अधिकारी  योगेन्द्र कुमार साहू तृतीय स्थान पर सम्मानित किया हुए। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सहायक अनुभाग अधिकारी  मोहम्मद शाहिर अंसारी प्रथम स्थान, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के सहायक अनुभाग अधिकारी मती प्रिया बागड़े द्वितीय स्थान, सामान्य प्रशासन विभाग (कक्ष-4) के सहायक अनुभाग अधिकारी  जलेश राम तृतीय स्थान पर सम्मानित हुए।  लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण वरिष्ठ सचिवालय सहायक  मुकेश राम प्रधान प्रथम स्थान, अनुसूचित जाति विकास विभाग के वरिष्ठ सचिवालय सहायक  गौरव कुमार राय द्वितीय स्थान, वरिष्ठ सचिवालय सहायक मती अंजू दत्ता तृतीय स्थान पर सम्मानित हुए। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण कनिष्ठ सचिवालय सहायक  प्रभु सिंह राठिया प्रथम स्थान, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के कनिष्ठ सचिवालय सहायक  संदीप कुमार तारम द्वितीय स्थान, नगरीय प्रशासन विभाग के कनिष्ठ सचिवालय सहायक  उमेश यादव तृतीय स्थान पर सम्मानित हुए। आदिम जाति विकास विभाग के सहायक ग्रेड-2  शेष नारायण साहू प्रथम स्थान, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की डाटा एन्ट्री ऑपरेटर मती माया देवांगन द्वितीय स्थान, विधि एवं विधायी कार्य विभाग के सहायक ग्रेड- तरूण कुमार धृतलहरे तृतीय स्थान पर सम्मानित किया गया। अटेंडेंस रेंक में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले में अवर सचिव  अनिल तिर्की, निज सचिव सु आराधना साहू, अनुभाग अधिकारी  आशिष कुमार शर्मा, सहायक अनुभाग अधिकारी  आशुतोष वर्मा, अनुभाग अधिकारी  अश्वनी कुमार भतपहरी, सहायक अनुभाग अधिकारी  भागेश कुमार ध्रुव, अवर सचिव  भूपेन्द्र सिंह राजपूत, अवर सचिव मती दिव्या वैष्णव, उप सचिव मती हेमिन बाघे, भृत्य  किशोर कुमार, सहायक अनुभाग अधिकारी  लोक नारायण शर्मा, अनुभाग अधिकारी मती मंजूषा राजपूत, वरिष्ठ सचिवालय सहायक  मेलू राम ध्रुव, सहायक अनुभाग अधिकारी  मिर्जा मुस्कान बेग, अनुभाग अधिकारी  मुकेश कुमार शाकार, वरिष्ठ सचिवालय सहायक  नरेश कुमार बाघमार, सहायक अनुभाग अधिकारी  पवन कुमार साहू, वरिष्ठ सचिवालय सहायक मती पुष्पांजली गजभिये, भृत्य  राज कुमार सोरी, सचिव (भारसाधक)  राजेश सिंह राणा,  स्टैनो टायपिस्ट सु राखी सिदार, स्टैनो टायपिस्ट  रमाकांत, वरिष्ठ सचिवालय सहायक सु रूपाली तिवारी, सहायक अनुभाग अधिकारी  शिवचरण राठौर,  सहायक अनुभाग अधिकारी मती सुधा शेंडे, सहायक ग्रेड-01  तरूण कुमार धृतलहरे, वरिष्ठ सचिवालय सहायक  विवेक सोनी को रैंकिंग एक के लिए सम्मानित किया गया। तीन माह का ई-ऑफिस रैंकिंग में आदिम जाति विकास विभाग के संयुक्त सचिव,  भूपेन्द्र कुमार राजपूत प्रथम स्थान, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अपर सचिव  सच्चिदानंद आलोक द्वितीय स्थान, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के संयुक्त सचिव मती जय जैन तृतीय स्थान सम्मानित किया गया। तीन माह के लिए अडेंटेंस रैकिंग में उच्च शिक्षा विभाग के सहायक अनुभाग अधिकारी  लोक नारायण शर्मा प्रथम स्थान, सामान्य प्रशासन विभाग के भृत्य  राज कुमार सोरी द्वितीय स्थान, सामान्य प्रशासन विभाग के वरिष्ठ सचिवालय सहायक  मेलू राम ध्रुव तृतीय स्थान पर सम्मानित किया गया। तीन माह के लिए डिपार्टमेंट रैकिंग में प्रथम स्थान में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वितीय, गृह विभाग तृतीय स्थान वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को सम्मानित किया गया। ई-ऑफिस रैंकिंग विभागाध्यक्ष के अधिकारियों में उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त सु रीता यादव प्रथम स्थान, आदिम जाति विकास विभाग के आयुक्त  डी. राहुल वेंकट द्वितीय स्थान, उच्च शिक्षा विभाग के अपर संचालक  जॉन तिग्गा तृतीय स्थान, चिकित्सा शिक्षा विभाग सहायक ग्रेड-3  वेद प्रकाश देवांगन चतुर्थ स्थान, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग डाटा एन्ट्री ऑपरेटर  पीताम्बर प्रसाद पाचवें स्थान पर सम्मानित किया गया। ई-ऑफिस जिला कार्यालय में जिला रायपुर की सहायक परियोजना अधिकारी सु अनिता जैन प्रथम स्थान, जिला सक्ती कार्यालय सहायक सह डाटा एन्ट्री ऑपरेटर सु नंदनी सोनी द्वितीय स्थान, रायपुर जिले के नोडल अधिकारी  पंकज कुमार शर्मा तृतीय स्थान, सक्ती जिला के ई-जिला तकनीकी प्रबंधक  तुलसी देवांगन चौथा स्थान, कबीरधाम जिले के अधीक्षक  राजेन्द्र सिंह धु्रर्वे पांचवा स्थान पर सम्मानित किया गया। आई-गाट रैंकिंग में  गौतम कुमार देवांगन, चौकीदार, आयुक्त बिलासपुर को प्रथम स्थान,  प्रेम नारायण नायक, व्याख्याता, कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी बलौदाबाजार, द्वितीय स्थान और  दिनेश कुमार, पुलिस आरक्षक, पुलिस अधीक्षक बालोद, तृतीय स्थान सम्मानित किया गया।

श्योपुर में 2, मुरैना में 4 और भिंड में 5 सितंबर को होगा आयोजन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार प्रदेश के विभिन्न अंचलों में लगातार बलराम कृषि महोत्सव का आयोजन किया जाकर किसानों को लाभान्वित किया जा रहा है। किसान कल्याण वर्ष में प्रदेश के प्रत्येक जिला मुख्यालय पर बलराम कृषि महोत्सव मनाया जा रहा है। चंबल संभाग के श्योपुर में 2 सितंबर को मुरैना में 4 सितंबर को और भिंड में 5 सितंबर को बलराम कृषि महोत्सव मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को श्योपुर जिले में आयोजित बलराम महोत्सव को वर्चुअली संबोधित करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में राज्य सरकार द्वारा अन्नदाता किसानों कोलाभान्वित करने के लिये किसान कल्याण वर्ष में विभिन्न कार्यक्रम संचालित किया जा रहे हैं। किसानों के हित में लक्ष्य निर्धारित कर सतत प्रयास किये जा रहे हैं। सरकार ने वर्ष 2028-29 तक 100 लाख हैक्टेयर की सिंचाई क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। उद्यानिकी उत्पादन में 490 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य तय किया है। किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिये सरकार ने प्रतिदिन 50 लाख लीटर दुग्ध संकल्न का लक्ष्य निर्धारित किया है। प्रदेश में 5,562 दुग्ध समितियों के माध्यम से 83 हजार सदस्यों को वित्तीय लाभ मिलेगा। किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिये पीएम किसान सम्मान और मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना में पात्र हितग्राही किसानों को 12 हजार रूपये सालाना दिया जा रहा है। सरकार द्वारा किसानों को सिंचाई के लिये 5 रूपये में बिजली का स्थायी कनेक्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही 10 हॉर्स पॉवर तक के बिजली पंप कनेक्शन में सब्सिडी दी जा रही है। राज्य सरकार ने पीएम कुसुम योजना में 32 लाख किसानों को सोलर पंप देने का लक्ष्य निर्धारित कर सोलर पंप उपलब्ध करा रही है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों में निवेश को बढ़ावा देने के लिये 60 प्रतिशत तक की प्रोत्साहन राशि दी जायेगी। सरकार कृषि आधारित उद्योगों में 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में सराकर ने किसान कल्याण वर्ष में कृषि भूमि अर्जन की स्थिति में किसानों को 4 गुना मुआवजा देने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार ने किसानों को शून्य प्रतिशत की दर पर फसल ऋण का भुगतान साल भर में करने की सुविधा प्रदान की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशन में प्रदेश के समग्र विकास के लिये प्रतिबद्धता पूर्वक सभी वर्गों के कल्याण के लिये विभिन्न योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। किसान एवं संबद्ध राज्य सरकार ने 6 हजार करोड़ रूपये के मत्स्य निर्यात का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें 12 हजार 400 करोड़ रूपये से अधिक का संभावित निवेश आयेगा। सरकार का लक्ष्य है कि दृढ़ संकल्पित होकर समृद्ध मध्यप्रदेश के लिये निरंतर कार्य कर रही है।