samacharsecretary.com

सभी 75 जिलों में ‘सेवा ज्योति’ के लिए स्थान चिन्हित करें, राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज में उत्तर प्रदेश की मजबूत भागीदारी सुनिश्चित करें: मुख्यमंत्री

‘सेवा संकल्प अभियान’ को जनभागीदारी का व्यापक अभियान बनाएं, न्याय पंचायत और ग्राम पंचायत स्तर तक पहुंचे सरकार की उपलब्धियों की कहानी: मुख्यमंत्री 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा ‘सेवा संकल्प अभियान’, 13 प्रमुख कार्यक्रमों के जरिए जन-जन तक पहुंचेगी प्रधानमंत्री मोदी की 25 वर्षों की जनसेवा और विकास की यात्रा उपलब्धियों को आंकड़ों तक सीमित न रखें, लाभार्थियों के जीवन में आए बदलाव की वास्तविक कहानियां सामने लाएं: मुख्यमंत्री ‘आशीर्वाद का दीया’ से होगा अभियान का शुभारंभ, लाभार्थी परिवारों के घर जलेंगे दीप, दिव्यांगजन को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण भी दिए जाएंगे 25 लाख लाभार्थियों की कहानी से लेकर डिजिटल इन्फ्लुएंसर और 400-500 सांस्कृतिक टोलियों तक, गांव से राज्य स्तर तक चलेगा जनसंपर्क अभियान सभी 75 जिलों में ‘सेवा ज्योति’ के लिए स्थान चिन्हित करें, राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज में उत्तर प्रदेश की मजबूत भागीदारी सुनिश्चित करें: मुख्यमंत्री  17 अक्टूबर को 1.25 लाख जनप्रतिनिधियों के साथ होगा ‘जनसेवा महाकुंभ’, पंचायत से पार्लियामेंट तक लिया जाएगा ‘विकसित भारत 2047’ का संकल्प लखनऊ,   प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के 25 वर्षों के निरंतर सेवा काल की जनकल्याणकारी उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने और प्रत्येक नागरिक को ‘विकसित भारत 2047’ के सामूहिक राष्ट्रीय संकल्प से जोड़ने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाया जाएगा। एक माह के इस व्यापक अभियान में 13 प्रमुख कार्यक्रमों के माध्यम से सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण, विकास और जनभागीदारी की कहानी समाज के हर वर्ग तक पहुंचाई जाएगी। ‘आशीर्वाद का दीया’, ‘25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत’, ‘नमो सेवा गाथा’, ‘आंगन का उत्सव’, ‘कहानी बदलाव की’, ‘विकसित भारत संकल्प यात्रा’, ‘सेवा ज्योति यात्रा’, ‘वडनगर-सेवाराणसी यात्रा’, ‘सेवा मेरा योगदान’, ‘सेवा सेतु अभियान’, ‘रंगोली राष्ट्र एवं घर-घर से राष्ट्र तक’, ‘राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज’ और ‘जनसेवा महाकुंभ’ इसके प्रमुख कार्यक्रम होंगे। इनके साथ प्रमुख स्मारकों पर लेजर शो, प्रमुख तीर्थस्थलों पर महायज्ञ एवं विशेष अनुष्ठान तथा ग्राम चौपाल और सीधा संवाद भी अभियान का हिस्सा होंगे।   मंगलवार को अभियान की कार्ययोजना पर उच्चस्तरीय चर्चा के के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री जी के 25 वर्षों का सार्वजनिक जीवन सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण की निरंतर यात्रा है। इस अवधि में देश में हुए नीतिगत सुधारों, जनकल्याणकारी कार्यों और ऐतिहासिक बदलावों को जनता के सामने प्रभावी ढंग से रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के 12 वर्षों और प्रदेश सरकार के 10 वर्षों में हुए विकास कार्यों से आम नागरिक के जीवन में जो सकारात्मक परिवर्तन आया है, उसकी वास्तविक तस्वीर सामने आए। अभियान का उद्देश्य केवल उपलब्धियों को बताना नहीं, बल्कि युवा, महिला, किसान और वंचित वर्ग समेत प्रत्येक नागरिक को ‘विकसित भारत 2047’ के सामूहिक राष्ट्रीय संकल्प से जोड़ना भी है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियान की पहुंच जिला मुख्यालयों और विकासखंडों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। न्याय पंचायत और ग्राम पंचायत स्तर तक अभियान को पहुंचाने का विशेष प्रयास किया जाए। स्थानीय स्तर पर लोगों को यह जानकारी मिले कि केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं तथा विकास परियोजनाओं से उनके गांव, क्षेत्र और परिवार के जीवन में क्या बदलाव आया है। उन्होंने निर्देश दिए कि जनप्रतिनिधियों, युवाओं, महिलाओं, लाभार्थियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करते हुए अभियान को वास्तविक जनभागीदारी का स्वरूप दिया जाए। उन्होंने कहा कि उपलब्धियों को केवल योजनाओं की सूची अथवा आंकड़ों के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय लोगों के जीवन में आए बदलाव की कहानी के रूप में सामने लाया जाए। इसके लिए लाभार्थियों के अनुभवों का संकलन भी किया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि अभियान के दौरान तैयार होने वाली सामग्री प्रमाणिक और तथ्यपरक हो तथा उसका स्थायी डेटा-बैंक तैयार किया जाए। इसमें विधानसभा, विकासखंड और ग्राम पंचायत स्तर तक केंद्र सरकार के पिछले 12 वर्षों तथा राज्य सरकार के पिछले 10 वर्षों के विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं का विवरण तथा लाभार्थियों की अद्यतन सूची शामिल हो।  मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों, महत्वपूर्ण अवस्थापना एवं कनेक्टिविटी परियोजनाओं, शिक्षा एवं कौशल विकास, स्वास्थ्य एवं खेल, पंचायती राज एवं सुशासन तथा ओडीओपी से जुड़े कार्यों को भी डेटा-बैंक में शामिल किया जाए। काशी विश्वनाथ धाम, राम जन्मभूमि मंदिर अयोध्या समेत प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के पुनर्विकास, एक्सप्रेसवे, मेट्रो रेल नेटवर्क, नए एयरपोर्ट, विश्वविद्यालय, आयुष विश्वविद्यालय, अटल आवासीय विद्यालय, मेडिकल कॉलेज, एम्स, खेल विश्वविद्यालय और आधुनिक स्टेडियम, ग्राम सचिवालय, पंचायत भवन, डिजिटल लाइब्रेरी, अमृत सरोवर तथा ओडीओपी से जुड़े उद्यमियों और लाभार्थियों की सफलता की कहानियों का भी संकलन किया जाए।  मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियान के प्रभावी संचालन के लिए शासन, मुख्यमंत्री कार्यालय और जनपद स्तर पर समन्वय की स्पष्ट व्यवस्था हो।  मुख्यमंत्री कार्यालय में कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा और प्रतिदिन की प्रगति मुख्यमंत्री को उपलब्ध कराई जाएगी। सभी जिलों में मुख्य विकास अधिकारी पूरे अभियान के नोडल अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे। वे संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित करते हुए कार्यक्रमों को न्याय पंचायत, ग्राम पंचायत, वार्ड और मोहल्ला स्तर तक पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। अभियान की प्रदेश और जनपद स्तर पर साप्ताहिक समीक्षा होगी।  मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि 17 सितंबर को प्रधानमंत्री जी के जन्मदिवस के अवसर पर शाम सात बजे ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम से अभियान की शुरुआत हो। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से लाभान्वित परिवार अपने घरों में दीप प्रज्वलित करें। इसके लिए लाभार्थियों की सूची न्याय पंचायत, ग्राम पंचायत, ब्लॉक, वार्ड और मोहल्ला स्तर तक तैयार कर लगातार अपडेट रखी जाए। उन्होंने कहा कि नगर विकास, ग्राम्य विकास और पंचायती राज विभाग इस कार्यक्रम में विशेष भूमिका निभाएं और ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में इसकी प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करें। प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं, नदी घाटों, मंदिरों, पार्कों, विद्यालयों, महाविद्यालयों और चिकित्सालयों में भी विशेष दीप प्रज्वलन कराया जाए। इसी अवसर पर दिव्यांगजन को कृत्रिम अंग एवं अन्य सहायक उपकरण वितरित करने की व्यवस्था की जाए।  मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘आशीर्वाद का दीया’ को केवल प्रतीकात्मक आयोजन न बनाकर सरकार और लाभार्थियों के बीच सीधे जुड़ाव का अवसर बनाया जाए। ग्राम पंचायत और न्याय पंचायत स्तर पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा संबंधित विभागों की सक्रिय भागीदारी हो और यह सुनिश्चित किया जाए कि अभियान की गतिविधियां गांव के अंतिम छोर तक पहुंचें।  इसके साथ ही 17 सितंबर … Read more

कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर विशेषज्ञों की दो टूक, मानव मस्तिष्क और संवेदना का विकल्प नहीं AI

कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव मस्तिष्क और संवेदना का विकल्प नहीं : विशेषज्ञ * कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भविष्य की चुनौतियों पर वैचारिक विमर्श के साथ काव्य गोष्ठी का आयोजन रायपुर नव छत्तीसगढ़ साहित्य सांस्कृतिक संस्थान, रायपुर के तत्वावधान में सोमवार को रायपुर के वृंदावन सभागार में ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भविष्य की चुनौतियां’ विषय पर वैचारिक विमर्श एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों, कवियों और साहित्यप्रेमियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव, संभावनाओं, चुनौतियों तथा मानवीय मूल्यों पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता कवि, लेखक एवं स्तंभकार संजीव कुमार ठाकुर ने की। मुख्य अतिथि के रूप में बेंगलुरु से विशेष रूप से पहुंचे आर्यावर्त के प्रबंध संपादक बिजय कुमार सिंह उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में डॉ. महेंद्र कुमार ठाकुर, व्यंग्यकार एवं ज्योतिष विशेषज्ञ, उपसंचालक जनसंपर्क सौरभ शर्मा, पत्रकारिता महाविद्यालय के प्राचार्य देवाशीष मुखर्जी, कवि सुरेंद्र रावल तथा छत्तीसगढ़ी कवि-गीतकार मीर अली मीर शामिल रहे। संस्थान के अध्यक्ष डॉ. संजीव ठाकुर ने कहा कि 'कृत्रिम बुद्धिमत्ता विकास की नई दिशा और चुनौतियों की नई राह है।' उन्होंने कहा कि एआई के बढ़ते प्रभाव से घबराने के बजाय उसके उपयोग को समझने और सावधानीपूर्वक अपनाने की आवश्यकता है। मशीन बुद्धिमान हो सकती है, लेकिन वह मानव मस्तिष्क, मानवीय संवेदनाओं और भावनात्मक अनुभवों का विकल्प नहीं बन सकती। तकनीक का उपयोग मानव जीवन को बेहतर बनाने के लिए होना चाहिए, न कि मानवीय संवेदनाओं और रचनात्मकता को कमजोर करने के लिए। विमर्श के दौरान साहित्य और तकनीक के बदलते संबंधों पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा, पत्रकारिता, साहित्य, चिकित्सा, उद्योग और अन्य अनेक क्षेत्रों में नई संभावनाएं पैदा कर रही है, लेकिन इसके साथ रोजगार, मौलिकता, रचनात्मकता, सूचना की विश्वसनीयता और मानवीय मूल्यों से जुड़ी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। ऐसे में तकनीकी प्रगति के साथ विवेक, संवेदना और नैतिक जिम्मेदारी का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। वक्ताओं ने कहा कि एआई मनुष्य की कार्यक्षमता बढ़ाने वाला प्रभावी साधन बन सकता है, लेकिन सृजन के पीछे मौजूद भावनात्मक अनुभव, जीवन की अनुभूति और मानवीय दृष्टि को मशीन पूरी तरह प्रतिस्थापित नहीं कर सकती। साहित्य के क्षेत्र में भी तकनीक सहायक की भूमिका निभा सकती है, लेकिन रचना की आत्मा मानवीय अनुभव और संवेदना से ही आती है। विचार-विमर्श के पश्चात काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें मंजूषा अग्रवाल, कल्याणी तिवारी, यशवंत कुमार चतुर्वेदी, मीर अली मीर, मन्नू लाल यदु, छबिलाल सोनी, रूनाली चक्रवर्ती, सुषमा प्रेम पटेल, शकुंतला तिवारी, अभिषेक शर्मा, उदयभान सिंह चौहान, भूपेंद्र कुमार शर्मा, यशवंत यदु, जे. एस. उरकरकर, विवेक कुमार एवं प्रिया वर्मा ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। कवियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, प्रकृति, देशभक्ति, सामाजिक सरोकार, पारिवारिक रिश्तों और मानवीय संवेदनाओं सहित विभिन्न विषयों को अपनी रचनाओं में स्वर दिया। मंजूषा अग्रवाल ने शब्द और भाव के संबंध को रेखांकित करते हुए कहा— 'शब्द तभी अमर होते हैं, जब भाव से निकलते हैं। कवि तभी चमकते हैं, जब आँखों से बोलते हैं।' कल्याणी तिवारी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के संदर्भ में अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए मशीन और मनुष्य के संबंधों पर प्रश्न उठाए— 'मैं यंत्र नहीं, मैं प्रश्न हूँ, प्रश्न यहाँ है कि तुमने मुझमें बुद्धि भरी। प्रभावों को कैसे उत्कृष्टता प्रदान करूँ, नभ से सुने विस्तारों में, क्या तुम साथ निभाओगी?' यशवंत कुमार चतुर्वेदी ने सावन की मनोहारी छटा को अपनी कविता में उकेरा— 'सावन की कारी-कारी बदरिया, रिमझिम-रिमझिम बारिश का पानी। सावन पुरवाई शोर करे है, भूली-बिसरी वह कहानी।' मन्नू लाल यदु ने देशभक्ति से ओत-प्रोत रचना प्रस्तुत करते हुए कहा— 'कठिन लड़ाई लड़के पाएँ भारत की आज़ादी, मैं धरती के बेटा आहूँ, देश हमर महतारी।'  छबिलाल सोनी ने बचपन की स्मृतियों और संघर्षों को शब्द देते हुए अपनी रचना में बीते दिनों की तस्वीर प्रस्तुत की— 'याद मुझे हैं दिन बचपन के, अपना कच्चा वो मकान। निर्धनता में बीते दिन थे, आधे थे हर अरमान। बिना रंग-रोगन की दीवारें, कमरों में बिछी चटाई थी। गोबर से लिपा-पोता आँगन, लगती हमको सुखदायी थी।' रूनाली चक्रवर्ती ने भाई-बहन के रिश्ते की आत्मीयता और विश्वास को अपनी रचना में अभिव्यक्त किया— 'भाई एक उम्मीद है, आस है, बहनों की हिम्मत और विश्वास है। भाई त्याग है, तपस्या है, सेवा है, बहनों के लिए जीवन भर का रखवाला है।' सुषमा प्रेम पटेल ने भगवान श्रीकृष्ण और राधा-माधव की भक्ति भावना से ओत-प्रोत रचना प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया- 'अधरों पर स्थित हास्य सजाकर, नित लीला सरस रचते हैं। गोकुल में वह प्यारे कान्हा, माखन के चोर कहाते हैं। चंचल चितवन सा आकर्षण, देख हृदय नित मुस्काते हैं। राधा-माधव जब मिलते हैं, सुषमा शुभ दृश्य सजाते हैं।' विवेक कुमार रहाटगांवकर ने प्रसिद्ध कवि गोपालदास नीरज की कविता का छत्तीसगढ़ी अनुवाद प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति में शहर और समाज की बदलती संवेदनाओं तथा मनुष्य के भीतर छिपे भावों को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया गया। कार्यक्रम का संचालन ऋषभदेव साहू ने किया। काव्य गोष्ठी में उपस्थित रचनाकारों ने अपनी विविध रचनाओं के माध्यम से साहित्य की शक्ति और मानवीय संवेदनाओं की महत्ता को रेखांकित किया। आयोजन के अंत में छबिलाल सोनी ने अतिथियों, साहित्यकारों, कवियों और साहित्यप्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधुनिक जीवन की महत्वपूर्ण आवश्यकता बन सकती है, लेकिन मानव समाज की संवेदना, सृजनशीलता, विवेक और आत्मीयता को सुरक्षित रखना उतना ही आवश्यक है। एआई मनुष्य की सहायता का माध्यम बन सकता है, मानव मस्तिष्क और मानवीय संवेदनाओं का विकल्प नहीं।

कानपुर बनेगा डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब, निवेश और नई नीतियों पर होगा मंथन

कानपुर को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की तैयारी, निवेश और नीतियों पर होगा मंथन – ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन और यूपी सरकार की साझा पहल, शहर के उद्योग जगत को मिलेगी नई रफ्तार 'स्ट्रेटेजिक उत्तर प्रदेश: कानपुर रीजनल डिफेंस वर्कशॉप' का आयोजन बुधवार को  – डिफेंस कॉरिडोर में निवेश बढ़ाने और स्थानीय उद्योगों को रक्षा निर्माण से जोड़ने पर रहेगा विशेष जोर  कानपुर कानपुर शहर के औद्योगिक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। 'उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर' के अंतर्गत शहर को रक्षा निर्माण के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के उद्देश्य से 2 सितंबर (बुधवार) को क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। 'स्ट्रेटेजिक उत्तर प्रदेश: कानपुर रीजनल डिफेंस वर्कशॉप' का आयोजन एटरनिटी होटल में होगा। ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) तथा उत्तर प्रदेश सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कानपुर के स्थानीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को राष्ट्रीय रक्षा आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ना तथा क्षेत्र में बड़े निवेश को बढ़ाना है। सुबह 8:30 बजे पंजीयन के साथ शुरू होने वाले इस कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में ओआरएफ के उपाध्यक्ष प्रोफेसर हर्ष वी पंत, कानपुर नगर के जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह एवं कानपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद रमेश अवस्थी अपने विचार रखेंगे तथा अतिथियों का अभिनंदन करेंगे। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में 'यूपी डिफेंस कॉरिडोर के अंतर्गत कानपुर का औद्योगिक इकोसिस्टम' विषय पर विचार-विमर्श होगा। इस सत्र का संचालन ओआरएफ के डॉक्टर विवेक मिश्रा करेंगे। इसमें जिला उद्योग केंद्र के उपायुक्त अंजनीश प्रताप सिंह सहित रक्षा एवं तकनीक जगत की कई प्रमुख हस्तियां शामिल होंगी। इनमें डीएमएसआरडीई के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आशीष दुबे, डेटम एडवांस्ड कंपोजिट्स के उप प्रबंध निदेशक तनय तिवारी, एयरोस्पेस एवं एविएशन सेक्टर स्किल काउंसिल के सीईओ संघरक्षका वी पी, गोविंद नारायण एंड ब्रदर्स के सीईओ देवांश गर्ग और यूएसआईबीसी के निदेशक उदय अरुण प्रमुख हैं। सुबह 11:30 बजे आयोजित द्वितीय सत्र का विषय 'रक्षा निर्माण को मजबूत करने के लिए नीतिगत एवं संस्थागत सुधार' रहेगा। डॉक्टर समीर पाटिल के संचालन में होने वाले इस सत्र में टीकेएमएस इंडिया के उपाध्यक्ष कमोडोर अनिल जय सिंह, रक्षा मंत्रालय के पूर्व वित्तीय सलाहकार अमित कौशिश, डेल्टा कॉम्बैट सिस्टम्स लि. के चेयरमैन संतोष कुमार, ईवाई के मैनेजर बलप्रीत सिंह और कार्नेगी इंडिया के फेलो दिनकर पेरी चर्चा करेंगे। दोपहर 1:00 बजे डॉक्टर अतुल कुमार एवं कुमकुम मोहता कार्यशाला के प्रमुख निष्कर्षों का सार प्रस्तुत करेंगे। सभी विशेषज्ञ एमकेयू लिमिटेड के औद्योगिक परिसर का दौरा करेंगे।

योगी सरकार 15 सितंबर से 14 अक्टूबर तक चलाएगी अनुरक्षण माह

अनुरक्षण माहः त्योहारों पर निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए आंधी-बारिश से आई कमियों को किया जाएगा दूर योगी सरकार 15 सितंबर से 14 अक्टूबर तक चलाएगी अनुरक्षण माह  बारिश के दौरान जर्जर हुए तार और क्षतिग्रस्त उपकरण बदले जाएंगे  बिजली लाइनों के आसपास के पेड़ों की डालियों की युद्धस्तर पर होगी छंटाई लखनऊ उत्तर प्रदेश में बिजली व्यवस्था को और मजबूत, भरोसेमंद एवं चुस्त-दुरुस्त बनाए रखने के लिए योगी सरकार ने आगामी नवरात्र, दशहरा और दीपावली को देखते हुए व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन की ओर से 15 सितंबर से 14 अक्टूबर 2026 तक अनुरक्षण माह मनाया जाएगा। इस संबंध में अपर मुख्य सचिव ऊर्जा एवं उप्र. पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने सभी वितरण निगमों के प्रबंध निदेशकों को विस्तृत दिशा निर्देश जारी किए हैं। डॉ. आशीष कुमार गोयल ने कहा कि ग्रीष्म एवं वर्षा ऋतु के दौरान अधिक तापमान, बढ़े हुऐ विद्युत भार, वर्षा, आंधी- तूफान तथा अन्य कारणों से वितरण तंत्र के विभिन्न उपकरणों पर अधिक दबाव पड़ा है। इसके कारण कई क्षेत्रों में वितरण परिवर्तकों, फीडरों, 33 केवी एवं 11 केवी लाइनों, एलटी लाइनों तथा अन्य उपकरणों में खराबियां हुई हैं और विद्युत आपूर्ति में बार-बार व्यवधान की स्थिति उत्पन्न हुई है।  15 सितंबर से 14 अक्टूबर तक अनुरक्षण माह आगामी नवरात्र, दशहरा, दीपावली एवं अन्य पर्वों के दौरान उपभोक्ताओं को निर्बाध, गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराया जाना आवश्यक है। इस उद्देश्य से ग्रीष्म एवं वर्षा ऋतु के दौरान वितरण तंत्र में उत्पन्न कमियों को दूर करने, बार-बार होने वाली खराबियों एवं फीडर ट्रिपिंग को खत्म करने तथा वितरण तंत्र को आगामी पर्वों के लिए तैयार करने के लिए 15 सितम्बर से 14 अक्टूबर तक की अवधि को अनुरक्षण माह के रूप में मनाये जाने का निर्णय लिया गया है। खराबियों का होगा स्थायी समाधान, ट्रिपिंग पर लगेगी रोक अनुरक्षण माह का उद्देश्य वितरण तंत्र में मौजूद वास्तवित कमियों को दूर करना है तथा विद्युत व्यवधान, फीडर ट्रिपिंग एवं परिवर्तक क्षतिग्रस्त होने की घटनाओं में वास्तविक कमी लायी जा सके। अनुरक्षण माह के दौरान सभी 33/11 केवी उपकेंद्रों, शक्ति परिवर्तकों और वितरण परिवर्तकों की गहन जांच, साफ सफाई और मरम्मत का कार्य किया जाएगा। साथ ही जहां-जहां बार-बार खराबी आ रही है, वहां उसके मूल कारण को खोजकर उसका स्थायी समाधान किया जाएगा। जर्जर तारों, ढीले संयोजनों और क्षतिग्रस्त उपकरणों को बदला जाएगा। प्रत्येक परिवर्तक पर उसकी क्षमता के अनुसार उचित मानक के सुरक्षा तार लगाए जाएंगे और जुगाड़ से लगाए गए तारों को हटाया जाएगा। पेड़ों की डालियों की सघन छंटाई युद्ध स्तर पर बिजली लाइनों के आस-पास उगी पेड़ों की डालियों की सघन छंटाई युद्ध स्तर पर कराई जाएगी, क्योंकि अक्सर यही डालियां आंधी में लाइनों से टकराकर आपूर्ति बाधित करती हैं। इसके साथ ही पोषकों के मापक यंत्रों की जांच भी की जाएगी। ताकि आपूर्ति की विश्वसनीयता को सही ढंग से परखा जा सके। इसको लेकर यूपीपीसीएल अध्यक्ष ने निर्देश दिया है कि सभी खंड दस सितंबर तक अपने-अपने क्षेत्र की कार्य योजना तैयार कर लें और आवश्यक सामग्री की व्यवस्था पहले से कर ली जाए ताकि कार्य में कोई रुकावट न आए। त्योहारों के दिनों में बिजली बंद करने से बचा जाएगा और बंदी इस प्रकार नियोजित की जाएगी कि उपभोक्ताओं को कम से कम परेशानी हो।       वरिष्ठ अधिकारी फील्ड में जाकर उपकेंद्रों का अचानक करेंगे निरीक्षण  अभियान की गंभीरता को देखते हुए निगरानी के कड़े निर्देश दिए गए हैं। प्रबंध निदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी फील्ड में जाकर उपकेंद्रों का अचानक निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण वाले उपकेंद्रों की सूची पहले से जारी नहीं की जाएगी ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। कार्यों का सत्यापन 21 से 27 अक्टूबर के बीच निगम और मुख्यालय स्तर से कराया जाएगा। अध्यक्ष ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से इस अभियान को पूरी निष्ठा एवं परीश्रम के साथ सफल बनाने का आह्वान किया है।

योगी सरकार का फोकस, बेटियों की प्रतिभा को मंच से मिल रही सपनों को पंख देने की ताकत

बेटियों की प्रतिभा को मंच, सपनों को पंख दे रही योगी सरकार हौसलों की उड़ान-2026 में छात्राओं की उपलब्धियों की सराहना, शिक्षा के साथ खेल और संस्कृति में आगे बढ़ने का आह्वान मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को मिल रही नई ताकत अत्याधुनिक कंप्यूटर लैब से मिलेगा डिजिटल संसाधनों का लाभ: मंत्री असीम अरुण लखनऊ प्रदेश की बेटियों को शिक्षा, आत्मनिर्भरता और बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार लगातार नई पहल कर रही है। इसी कड़ी में मंगलवार को लखनऊ के खुन खुन जी गर्ल्स पीजी कॉलेज में राज्य स्तरीय युवा महोत्सव हौसलों की उड़ान-2026 का आयोजन किया गया।  बेटियों के आत्मविश्वास को मिल रहा सरकार का संबल इस दौरान समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने छात्राओं से संवाद कर उनकी प्रतिभा एवं उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश की बेटियों में प्रतिभा के साथ आत्मविश्वास भी भरपूर है। शिक्षा के साथ खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों में उनकी बढ़ती भागीदारी इसका प्रमाण है। बेटियां हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करने के लिए तैयार हैं।  अभ्युदय योजना से प्रतियोगी परीक्षाओं की राह हुई आसान योगी सरकार की मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना आर्थिक रूप से कमजोर और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का मजबूत माध्यम बन रही है। खुन खुन जी गर्ल्स पीजी कॉलेज में संचालित अभ्युदय योजना के तहत अब तक 80 विद्यार्थियों का विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में चयन हो चुका है। यह उपलब्धि योजना के प्रभाव और छात्राओं की मेहनत दोनों को दर्शाती है। अत्याधुनिक कंप्यूटर लैब से मिलेगा डिजिटल संसाधनों का लाभ मंत्री असीम अरुण ने घोषणा की कि अभ्युदय कोचिंग को और प्रभावी बनाने के लिए कॉलेज में जल्द ही अत्याधुनिक कंप्यूटर लैब स्थापित की जाएगी। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहीं छात्राओं को ऑनलाइन अध्ययन सामग्री, मॉक टेस्ट और डिजिटल रिसर्च जैसी सुविधाएं मिल सकेंगी। योगी सरकार का प्रयास है कि प्रदेश की बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ आधुनिक तकनीकी संसाधन भी उपलब्ध हों, ताकि वे अपने सपनों को साकार कर आत्मनिर्भर बन सकें।

महिलाओं को नेतृत्व की नई राह, योगी सरकार के प्रयासों से राजनीति में बढ़ेगी नारी शक्ति

नारी शक्ति को राजनीतिक नेतृत्व में आगे बढ़ा रही योगी सरकार, लोकतंत्र में बढ़ेगी महिलाओं की भागीदारी नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर संगोष्ठी में महिला सशक्तीकरण पर मंथन योगी सरकार की नीतियों से महिला सशक्तीकरण को मिला नया आधार निबंध प्रतियोगिता के विजेता छात्राओं को प्रमाण-पत्र, स्मृति-चिह्न और नकद पुरस्कार से सम्मानित लखनऊ  प्रदेश में महिला सशक्तीकरण और महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में योगी सरकार के प्रयासों के बीच उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान और पं. दीन दयाल उपाध्याय राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, राजाजीपुरम के संयुक्त तत्वावधान में ‘नारी की राजनीतिक चुनौतियां एवं नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ विषय पर द्विदिवसीय संगोष्ठी एवं निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस दौरान छात्राओं को लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिलाओं की भूमिका और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया। महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में समान अवसर देने पर जोर उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान के निदेशक सर्वेश कुमार सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति, सृजन और संवेदना का प्रतीक रही है। अब आवश्यकता है कि महिलाओं को केवल सम्मान देने तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें निर्णय लेने, नेतृत्व करने और अपनी बात स्वतंत्र रूप से रखने का समान अवसर मिले। उन्होंने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023’ को लोकतंत्र को अधिक समावेशी बनाने वाली महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि संविधान के 106वें संशोधन के माध्यम से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों के आरक्षण का प्रावधान किया गया है।  योगी सरकार की नीतियों से महिला सशक्तीकरण को मिला नया आधार उत्तर प्रदेश में योगी सरकार लगातार महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा, स्वावलंबन और सम्मान के साथ उन्हें आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है। ऐसे में महिला राजनीतिक भागीदारी पर केंद्रित इस तरह के शैक्षणिक आयोजन बेटियों में संवैधानिक चेतना और नेतृत्व क्षमता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। निबंध प्रतियोगिता में छात्राओं ने दिखाई प्रतिभा द्विदिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन आयोजित निबंध प्रतियोगिता में करीब 75 छात्राओं ने प्रतिभाग किया। एमए प्रथम वर्ष की शिवानी रावत ने प्रथम, बीए तृतीय वर्ष की वसुधा यादव ने द्वितीय और बीए तृतीय वर्ष की संजू ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विजेताओं को प्रमाण-पत्र, स्मृति-चिह्न और नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। प्राचार्य प्रो. डॉ. शिवानी श्रीवास्तव ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य ज्ञान के साथ संवैधानिक मूल्यों और जिम्मेदार नागरिकता का विकास करना भी है। कार्यक्रम संयोजक डॉ. रश्मिशील, प्रो. डॉ. संजीव कुमार अग्रवाल और डॉ. साधना सिंह यादव ने महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक निर्णय-प्रक्रिया में प्रभावी सहभागिता पर जोर दिया।

Stock Market Fall: शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 700 अंक टूटा, निफ्टी पर भी दबाव

मुंबई  अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और कच्‍चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच आज बुधवार को बाजार की शुरुआत बड़ी गिरावट के साथ हुई.  शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 706 अंक या 0.92 प्रतिशत गिरकर 76,238 पर आ गया. वहीं निफ्टी में भी गिरावट देखी गई और ये 23,850 के स्तर से नीचे फिसल गया. तेल की कीमतों में उछाल के बीच निफ्टी 50 में 231 अंकों या 0.96 प्रतिशत की गिरावट देखी गई. निफ्टी मिडकैप 100 में 1.16 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.97 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।  आज सभी सेक्‍टोरल इंडेक्‍स में गिरावट देखी जा रही है, जिनमें आईटी और ऑटो सेक्टर सबसे ज्यादा नुकसान में हैं. शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स के अधिकांश शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, केवल अदाणी पोर्ट्स और सन फार्मा ही अपवाद रहे। Sensex-Nifty खुलते ही क्रैश  शेयर मार्केट में बुधवार को कारोबार की शुरुआत होते ही बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 76,944 की तुलना में फिसलकर 76,471 पर ओपन हुआ और फिर पलक झपकते ही बुरी तरह क्रैश होकर 76,135 के लेवल पर आ गया. सेंसेक्स के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए एनएसई का निफ्टी भी ओपनिंग के साथ ही बड़ी गिरावट लेकर क्रैश हो गया. ये 50 शेयरों वाला इंडेक्स अपने पिछले कारोबारी बंद 24,055 के मुकाबले रेड जोन में 23,858 पर खुला और फिर देखते ही देखते फिसलकर 23,786 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया।  इन 10 शेयरों का बुरा हाल शेयर बाजार में अचानक आए इस बड़े भूचाल के बीच सबसे बुरे हाल में जो 10 शेयर नजर आए, उनमें बीएसई की लार्ज कैप कैटेगरी में शामिल IndiGo Share (2.70%), Eternal Share (1.90%) की गिरावट लेकर कारोबार कर रहे थे. तो वहीं मिडकैप कैटेगरी में शामिल GVT&D Share (3.10%), Godrej Properties Share (3%), MFSL Share (2.90%), TI India Share (2.50%), Voltas Share (2.20%) फिसलकर कारोबार कर रहे थे।  बात बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के स्मॉलकैप कैटेगरी की करें, तो यहां भी ज्यादातर शेयर रेड जोन में कारोबार करते हुए दिखे. यहां पर KFIN Tech Share (3.45%), Brigade Share (3%) और Chola Holdings Share (2.50%) गिरकर ट्रेड कर रहे थे।  ट्रंप का ये ऐलान, फिर मचा कोहराम  Stock Market Crash के पीछे के कारणों की बात करें, तो इसका सीधा कनेक्शन डोनाल्ड ट्रंप से है, जो एक बार फिर से वॉर मोड में नजर आ रहे हैं. उन्होंने बुधवार को दावा किया कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट पर अब अमेरिका का लगभग पूरा कंट्रोल है. उन्होंने यह भी कहा कि ईरानी अर्थव्यवस्था क्रैश की ओर बढ़ रही है. इसके साथ ही Donald Trump ने उस मीडिया रिपोर्ट को भी सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया जा रहा था कि US ईरान को बातचीत के लिए मजबूर करने की कोशिश कर रहे हैं।  कच्चे तेल में उबाल, बाजारों में भगदड़ Hormuz Strait को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखा. ब्रेंट क्रूड ऑयल का दाम 96 डॉलर प्रति बैरल, तो WTI क्रूड की कीमत बढ़कर 92 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई. मर्बन क्रूड ऑयल प्राइस भी रॉकेट की रफ्तार से भागते हुए 7 फीसदी से ज्यादा चढ़कर 104 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया. इससे एशियाई शेयर बाजारों का सेंटीमेंट भी बिगड़ा Japan Nikkei करीब 1800 अंक से ज्यादा फिसलकर, हांगकांग का HangSeng Index करीब 300 अंक की गिरावट में और साउथ कोरिया के कोस्पी इंडेक्स (KOSPI Index) करीब 4 फीसदी फिसलकर कारोबार कर रहा था।   

यूपी की उपलब्धि पर CM योगी गदगद, GeM पर तीन राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने की सराहना

जेम पर यूपी की उपलब्धि को सीएम योगी ने सराहा, तीन राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने पर दी बधाई शासकीय खरीद में पारदर्शिता और समावेशिता के लिए प्रदेश को मिला राष्ट्रीय सम्मान जेम पर अब तक ₹1 लाख करोड़ से अधिक की प्रदेश सरकार की खरीद, एमएसई की भागीदारी ₹55,972 करोड़ से अधिक चालू वित्तीय वर्ष में सरकारी खरीद में एमएसई की हिस्सेदारी बढ़कर 59 प्रतिशत, यूपी के एमएसई की हिस्सेदारी 86 प्रतिशत महिला उद्यमियों, एससी/एसटी उद्यमों और स्टार्टअप्स की भी जेम पर बढ़ी भागीदारी लखनऊ,   गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) के माध्यम से शासकीय खरीद में पारदर्शिता एवं समावेशिता सुनिश्चित करने की दिशा में उत्तर प्रदेश को मिली राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धि पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सराहना की है। प्रदेश को जेम पर श्रेष्ठ योगदान के लिए तीन राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। मंगलवार को एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी, प्रमुख सचिव एमएसएमई शशि भूषण लाल एवं स्टेट जेम नोडल एवं डिप्टी सीईओ कृष्ण मुरारी ने मुख्यमंत्री से भेंट कर उन्हें इस उपलब्धि के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उल्लेखनीय है कि जेम के माध्यम से प्रदेश सरकार ने प्रारंभ से अब तक ₹1 लाख करोड़ से अधिक की शासकीय खरीद की है। इसमें ₹55,972 करोड़ से अधिक की खरीद एमएसई से हुई है। इस प्रकार कुल शासकीय खरीद में एमएसई की भागीदारी 55 प्रतिशत से अधिक रही है। मुख्यमंत्री ने जेम के माध्यम से सरकारी खरीद में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ छोटे उद्यमों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के प्रयासों की सराहना की। तीन राष्ट्रीय पुरस्कारों से यूपी का सम्मान जेम पर उत्तर प्रदेश की उपलब्धि को राष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिली है। विगत दिनों नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित जेम के 10वें स्थापना दिवस समारोह में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने उत्तर प्रदेश को सार्वजनिक खरीद के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए तीन प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया। उत्तर प्रदेश को मिले पुरस्कारों में, जेम ओवरऑल एक्सीलेंस अवार्ड, हाईएस्ट जेम प्रोक्योरमेंट वैल्यू और बेस्ट आउटरीच बिल्डिंग अवार्ड शामिल हैं। इन पुरस्कारों को एमएसएमई के प्रमुख सचिव शशि भूषण लाल सुशील ने प्राप्त किया। चार साल में 43 से बढ़कर 59 प्रतिशत हुई एमएसई की हिस्सेदारी वित्तीय वर्ष 2026-27 में जुलाई तक जेम के माध्यम से प्रदेश की कुल ₹7,235 करोड़ की शासकीय खरीद हुई। इसमें एमएसई (पैन इंडिया) से ₹4,253 करोड़, यानी 59 प्रतिशत की खरीद की गई, जिसमें उत्तर प्रदेश के अपने उद्यमों की हिस्सेदारी 86 प्रतिशत, यानी ₹3,646 करोड़ रही। इसी प्रकार वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल ₹22,337 करोड़ की जेम खरीद में एमएसई (पैन इंडिया) से ₹12,181 करोड़ यानी 55 प्रतिशत की खरीद हुई थी, जिसमें यूपी के एमएसई की हिस्सेदारी 82 प्रतिशत यानी ₹9,976 करोड़ रही।  वर्ष 2024-25 में ₹16,830 करोड़ की कुल जेम खरीद में एमएसई का योगदान ₹8,952 करोड़ यानी 53 प्रतिशत था, जिसमें यूपी के एमएसई की हिस्सेदारी 81 प्रतिशत यानी ₹7,264 करोड़ रही। इसी तरह 2023-24 में कुल ₹20,248 करोड़ की जेम खरीद में एमएसई से ₹8,771 करोड़ यानी 43 प्रतिशत की खरीद हुई थी, जिसमें यूपी के एमएसई की हिस्सेदारी 76 प्रतिशत यानी ₹6,680 करोड़ थी। इस तरह चार वर्षों में जेम पर कुल सरकारी खरीद में एमएसई की हिस्सेदारी 43 प्रतिशत से बढ़कर 59 प्रतिशत हो गई है। एमएसई से हुई इस खरीद में प्रदेश के अपने उद्यमों की हिस्सेदारी भी 76 प्रतिशत से बढ़कर 86 प्रतिशत पहुंच गई है। महिला, एससी/एसटी उद्यमियों और स्टार्टअप्स को मिला अवसर जेम ने उत्तर प्रदेश के छोटे उद्यमियों को प्रदेश की सीमाओं से बाहर देशभर के सरकारी खरीदारों तक पहुंच उपलब्ध कराई है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में जुलाई तक प्रदेश के एमएसई को जेम के माध्यम से ₹16,953 करोड़ का कुल कारोबार मिला। इसमें महिला उद्यमियों को ₹2,202 करोड़, एससी/एसटी उद्यमियों को ₹255 करोड़ और स्टार्टअप्स को ₹2,360 करोड़ का कारोबार प्राप्त हुआ। वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश के छोटे उद्यमियों को जेम से ₹27,235 करोड़ का कारोबार मिला था। इसमें महिला उद्यमियों को ₹4,755 करोड़, एससी/एसटी उद्यमियों को ₹752 करोड़ और स्टार्टअप्स को ₹3,203 करोड़ का कारोबार प्राप्त हुआ। इसी तरह, वर्ष 2024-25 में सभी एमएसई को ₹21,275 करोड़ का कारोबार मिला, जिसमें महिला उद्यमियों का हिस्सा ₹3,310 करोड़, एससी/एसटी का ₹507 करोड़ और स्टार्टअप्स का ₹2,139 करोड़ था। 2023-24 में एमएसई को ₹18,230 करोड़ का कारोबार मिला था, जिसमें महिला उद्यमियों को ₹2,583 करोड़, एससी/एसटी को ₹438 करोड़ और स्टार्टअप्स को ₹2,435 करोड़ का कारोबार मिला। योगी सरकार की समावेशी खरीद नीति का दिख रहा असर जेम के यूपी स्टेट नोडल और डिप्टी सीईओ कृष्ण मुरारी ने बताया कि प्रदेश में एमएसई को सरकारी खरीद में अधिक अवसर देने के लिए योगी सरकार ने 26 नवंबर 2024 को शासनादेश जारी कर समावेशी सरकारी खरीद की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया था। इसके बाद जेम पर एमएसई की भागीदारी और खास तौर पर उत्तर प्रदेश के एमएसई से होने वाली सरकारी खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है। सरकार का फोकस छोटे उद्यमों के साथ महिला उद्यमियों, एससी/एसटी उद्यमियों और स्टार्टअप्स को भी सरकारी बाजार से जोड़ने पर है। इससे स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों और सेवाओं के लिए बाजार बढ़ने के साथ उद्यमिता और रोजगार सृजन को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। योगी सरकार जेम को ई-गवर्नेंस, पारदर्शी सरकारी खरीद और स्थानीय उद्यमों को बाजार उपलब्ध कराने के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में इस्तेमाल कर रही है। एक तरफ सरकारी विभागों को प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के जरिए उत्पाद और सेवाएं खरीदने का विकल्प मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रदेश के छोटे उद्यमों, महिलाओं, एससी/एसटी उद्यमियों और स्टार्टअप्स को बड़े सरकारी बाजार से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। ₹6.39 करोड़ के प्लॉट-शेड की नीलामी से मिले ₹32.54 करोड़ जेम सरकारी खरीद के साथ सरकारी परिसंपत्तियों का बेहतर मूल्य दिलाने का भी माध्यम बन रहा है। इसका बड़ा उदाहरण कानपुर में एमएसएमई विभाग के औद्योगिक प्लॉट और शेड की नीलामी में सामने आया। उद्योग निदेशालय, कानपुर ने 13 से 21 जुलाई 2026 के बीच औद्योगिक आस्थानों के 34 औद्योगिक प्लॉट एवं शेड की 99 वर्ष की लीज के लिए नीलामी की। इनका अपेक्षित/आरक्षित मूल्य ₹6.39 करोड़ था। प्रतिस्पर्धी बोली के बाद इनका विक्रय मूल्य ₹32.54 करोड़ पहुंच गया। इससे सरकार को आरक्षित … Read more

‘40 साल पुराना है, काफी खर्चा किया था’… नेपाल की विनाशकारी बाढ़ में भी डटा रहा घर

काठमांडू  नेपाल में बीते दिनों आई विनाशकारी बाढ़ के दौरान नुवाकोट जिले में स्थित एक घर अचानक पूरी दुनिया की नजर में आ गया। बाढ़ का पानी अपने साथ मिट्टी, बड़े पत्थर और मलबा लेकर तेजी से बह रहा था। आसपास के कई मकान और ढांचे बह गए या बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए, लेकिन यह घर काफी हद तक खड़ा रहा। ऐसे में इस घर की मजबूती को लेकर काफी चर्चा हो रही है। घर के मालिक प्रकाश प्याकुरेल का कहना है कि यह 35-40 साल पुराना है और इसे काफी मजबूती से बनाया गया था। प्रकाश ने बताया कि इस घर में 6 लोग फंसे थे। मेरे घर के 5 लोग और एक पड़ोसी था। जब बाढ़ आने की सूचना मिली तब मैं अपनी शॉप पर था और दौड़कर घर आया। द लल्लनटॉप से बातचीत में प्रकाश ने कहा, ‘हम लोग अपने घर के फोर्थ फ्लोर पर चले गए। जब वहां भी पानी आने लगा तो हम लोग सबसे ऊपर चले गए। करीब डेढ़ या दो घंटे बाद पानी थोड़ा कम हुआ। तब जाकर पाइप लगाकर हम लोगों को रेस्क्यू किया गया।’ इस मुश्किल समय को याद करते हुए उन्होंने कहा कि जब आपके पास जीवन का लास्ट समय होता है तो जो आप सोचते हैं, मैं भी वही सोच रहा था। ऐसा लग रहा था कि जिंदगी आज खत्म हो जाएगी। मेरा बेटा स्कूल गया था। मैं उसके बारे में सोच रहा था। घर के नीचे भी मजबूत राड डलवाए: मालिक प्रकाश प्याकुरेल ने बताया, 'यह पुराना घर है, करीब 35-40 साल पुराना होगा। उस टाइम सीमेंट और राड की क्वालिटी काफी अच्छी थी। इस घर को बनाने में काफी खर्चा किया था। यह घर रीवर साइट पर बनाया गया था। इसलिए इसके नीचे भी मजबूत राड डलवाए थे।' उन्होंने कहा कि यह घर वाकई मजबूत था। इसी घर में गोदाम था, जहां मेरी दुकान का सामान रखा हुआ था। इस बाढ़ में हमारा काफी नुकसान हुआ है। इससे रिकवर करने की कोशिश जारी है। सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि आखिर जब आसपास की इमारतें तबाह हो गईं तो यह घर कैसे बच गया? इंजीनियरिंग डेटा के मुताबिक, इसकी एक बड़ी वजह मजबूत आरसीसी फ्रेम हो सकती है। यानी घर के कॉलम, बीम और नींव को स्टील और कंक्रीट की मजबूत संरचना से जोड़ा गया था। ऐसी संरचना तेज पानी और मलबे से पैदा होने वाले साइड के दबाव को बेहतर तरीके से सह सकती है। इसके अलावा घर की कॉम्पैक्ट बनावट और उसकी स्थिति भी अहम रही। माना जा रहा है कि बाढ़ की सबसे तेज धारा सीधे घर के बीच से नहीं टकराई, बल्कि उसका एक हिस्सा घर के आसपास से निकल गया।

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! 8वें वेतन आयोग से पहले बढ़ सकता है DA

नई दिल्ली केंद्रीय कर्मचारियों को आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों के साथ ही साल 2026 की दूसरी छमाही के महंगाई भत्ता (DA) में बढ़ोतरी का भी इंतजार है। अगर सबकुछ ठीक रहा तो जुलाई से दिंसबर छमाही के दौरान का डीए सरकार अक्टूबर तक जारी कर देगी। अब सवाल है कि इस बार की छमाही में केंद्रीय कर्मचारियों को कितना डीए मिलेगा। वहीं, जनवरी 2027 की छमाही में कितना डीए बन सकता है। यहां ये भी बता दें कि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें भी अगले साल ही सरकार को मिलेंगी। अभी क्या है अनुमान? जुलाई 2026 में इंडस्ट्रियल वर्कर्स के लिए ऑल-इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI-IW) 1.3 पॉइंट बढ़कर 153.2 हो गया। इससे यह संकेत मिलता है कि जनवरी 2027 से केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता (DA) किस दिशा में जा सकता है। दरअसल, श्रम और रोजगार मंत्रालय के तहत आने वाले लेबर ब्यूरो ने 31 अगस्त को जुलाई का CPI-IW डेटा जारी किया। जून 2026 में यह इंडेक्स 151.9 था। जुलाई में साल-दर-साल CPI-IW महंगाई दर 4.57% रही जबकि एक साल पहले यह 2.66% थी। जनवरी 2027 के लिए DA का कैलकुलेशन अभी 64% दिखा रहा है। क्या है गणित? दरअसल, जनवरी 2027 में DA में बदलाव के कैलकुलेशन के लिए अगस्त 2025 से जुलाई 2026 तक के 12 महीनों के CPI-IW औसत का इस्तेमाल किया जाता है। इस दौरान रीडिंग 147.1, 147.3, 147.7, 148.2, 148.2, 148.6, 148.5, 149.1, 149.9, 150.8, 151.9 और 153.2 थीं। इससे 12 महीनों का औसत 149.21 आता है। डीए कैल्कुलेशन के हिसाब से जनवरी 2027 का महंगाई भत्ता लगभग 64% बैठता है। हालांकि, कैलकुलेशन में अगस्त, सितंबर, अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर 2026 के CPI-IW रीडिंग को शामिल किया जाएगा। उन रीडिंग में बदलाव से 12 महीने का औसत बदलेगा और नतीजतन, कैलकुलेट किया गया DA भी बदल जाएगा। अभी कितना है डीए? केंद्रीय कर्मचारियों के लिए DA फिलहाल 60% है। केंद्र सरकार ने जनवरी 2026 से DA में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी करके इसे 58% से बढ़ाकर 60% किया था। अब अगली DA समीक्षा जुलाई 2026 से प्रभावी होनी है, जिसकी औपचारिक घोषणा सरकार की ओर से की जानी बाकी है। DA साल में दो बार यानी 1 जनवरी और 1 जुलाई से संशोधित किया जाता है। जुलाई छमाही के डीए का ऐलान अक्टूबर के महीने में होने की उम्मीद है। जुलाई 2026 का DA और जनवरी 2027 का DA अलग यह समझना जरूरी है कि जुलाई 2026 में लागू होने वाला DA और जनवरी 2027 का संभावित DA अलग-अलग गणना चक्र हैं। जुलाई 2026 की बढ़ोतरी के लिए पहले के CPI-IW आंकड़े इस्तेमाल होते हैं, जबकि जनवरी 2027 की गणना में अगस्त 2025 से दिसंबर 2026 तक का डेटा शामिल होगा। इसलिए जुलाई 2026 का CPI-IW आंकड़ा मुख्य रूप से जनवरी 2027 के DA का शुरुआती संकेत देता है। अभी 64% को अंतिम DA दर मानना जल्दबाजी होगी। सरकार की औपचारिक घोषणा और बाकी CPI-IW आंकड़ों के बाद ही केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलने वाले वास्तविक DA की तस्वीर साफ होगी।