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पंजाब के 85 हजार सरकारी कर्मचारियों को राहत, DA 42% से बढ़ाकर 60% करने की सिफारिश

चंडीगढ़  पंजाब के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी है. पंजाब सरकार ने राज्‍य के 85 हजार कर्मचारियों को जन्‍माष्‍टमी का बड़ा तोहफा दिया है. कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने बताया कि पंजाब के 85 हजार कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर महंगाई भत्ता मिलेगा. अभी इन कर्मचारियों को बेसिक पे यानी मूल वेतन का 42% महंगाई भत्ता दिया जाता है. भगवंत मान सरकार के नए फैसले के मुताबिक, अब 85,000 सरकारी कर्मियों को केंद्र के बराबर यानी मूल वेतन का 60 फीसदी महंगाई भत्ता मिलेगा।    किन 85 हजार कर्मियों को मिलेगा 60%  DA/ महंगाई भत्ता  पंजाब कैबिनेट सब-कमेटी ने साल 2020 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों को केंद्र सरकार के बराबर DA देने का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे मान सरकार मंजूरी देने वाली है. कैबिनेट मंत्री ने बताया कि 17 जुलाई 2020 के बाद जितने कर्मी बहाल हुए हैं उन्‍हें केंद्र के पे-स्‍केल पर बहाल किया गया था, लेकिन उन्‍हें राज्‍य के मुताबिक, 42% महंगाई भत्ता ही दिया जा रहा था. इनकी संख्‍या राज्‍य में करीब 85 हजार है. अब इन्‍हें मान सरकार, केंद्र के बराबर यानी 60 फीसदी महंगाई भत्ता देने जा रही है।     चीमा ने यह भी दावा किया कि राज्य अपने कर्मचारियों को देश में सबसे अधिक वेतन देता है। उन्होंने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते को लेकर विपक्षी दलों पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया।उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री अमन अरोड़ा और सामाजिक सुरक्षा बलजीत कौर के साथ मौजूद चीमा ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पंजाब के कई प्रमुख श्रेणियों के कर्मचारी पहले से ही अधिक वेतन प्राप्त कर रहे हैं।कैबिनेट मंत्री अरोड़ा ने कर्मचारी संगठनों से अपील की कि वे टकराव का रास्ता अपनाने के बजाय सरकार के साथ बातचीत के माध्यम से अपनी बात रखें। उन्होंने कहा, ‘‘कर्मचारी सुशासन की रीढ़ हैं। हम कर्मचारी संगठनों से अपील करते हैं कि वे विपक्षी दलों के राजनीतिक अवसरवाद को समझें, जिन्होंने चुनाव से पहले बिना आवश्यक वित्तीय प्रावधान किए वादे किए थे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के साथ बातचीत की मेज पर सभी लंबित मुद्दों का समाधान करने के लिए तैयार हैं, ताकि कर्मचारियों के हितों की रक्षा हो सके और पंजाब की जनता पर असहनीय वित्तीय बोझ भी न पड़े।’’ मंत्रियों का यह बयान ऐसे वक्त आया है जब पंजाब सरकार ने उच्च न्यायालय के उस आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी है, जिसमें राज्य के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का लंबित महंगाई भत्ता (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) का बकाया पैसा दो हफ़्ते के अंदर देने को कहा गया था। सरकार की दलील है कि इतने कम समय में कुल 14,191 करोड़ रुपये का बकाया चुकाने का आदेश संवैधानिक रूप से असंभव है। चीमा ने करीब 14,000 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान नहीं किए जाने के लिए पिछली सरकारों को भी जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार ने अब तक 4,500 करोड़ रुपये के बकाये का भुगतान कर दिया है।सरकारी कर्मचारी, जिन्होंने 27 अगस्त को राज्यव्यापी हड़ताल की थी, लंबित डीए जारी करने समेत अपनी विभिन्न मांगों को स्वीकार करने के लिए राज्य सरकार पर दबाव बना रहे हैं। चीमा ने कहा कि पंजाब के कर्मचारियों का मूल वेतन और डीए मिलाकर मिलने वाली राशि हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे अन्य राज्यों के कर्मचारियों से अधिक है। उन्होंने दावा किया कि गुजरात में सरकारी कर्मचारियों का वेतन पंजाब सरकार के कर्मचारियों को मिलने वाले वेतन से 28 प्रतिशत कम है।चीमा ने यह भी दावा किया कि राज्य के कुल राजस्व में सरकारी कर्मचारियों के वेतन और पेंशन पर 51 प्रतिशत राशि खर्च होती है, जबकि अन्य राज्यों में यह औसतन 38 प्रतिशत है।उन्होंने पंजाब में क्लर्क, ड्राइवर, शिक्षक और स्टेनोग्राफर के वेतन की तुलना केंद्र सरकार में इन्हीं पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को मिलने वाले वेतन से भी की।उन्होंने दावा किया कि पंजाब सरकार अपने कर्मचारियों को केंद्र सरकार की तुलना में अधिक मूल वेतन दे रही है। वित्त मंत्री ने दावा किया कि आम आदमी पार्टी के सत्ता में आने के बाद उसने अपने कर्मचारियों का डीए 28 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत कर दिया।उन्होंने कहा, ‘‘जब आम आदमी पार्टी की सरकार बनी थी, तब कर्मचारियों को 28 प्रतिशत डीए मिल रहा था। हमने इसे अक्टूबर 2022 में बढ़ाकर 34 प्रतिशत, दिसंबर 2023 में 38 प्रतिशत और 2024 में 42 प्रतिशत कर दिया।’’ उन्होंने विपक्षी दलों पर यह दुष्प्रचार फैलाने का आरोप लगाया कि आप सरकार ने अपने कर्मचारियों का बकाया भुगतान नहीं किया है।

अजित पवार की मौत पर आमने-सामने सुनेत्रा और सुप्रिया सुले, ‘मेरा भाई चला गया, कुछ सत्ता भोग रहे’ पर पलटवार

पुणे महाराष्ट्र की डिप्टी CM और NCP प्रमुख सुनेत्रा पवार ने विपक्षी नेताओं से उनके पति अजित पवार की मौत पर राजनीति नहीं करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अजित पवार की मां, बच्चों और उनके दुख को कोई और नहीं समझ सकता। सुनेत्रा पवार ने गुरुवार को पुणे में कहा कि अजित दादा के जाने से महाराष्ट्र में पैदा हुआ खालीपन बहुत बड़ा है। यह बयान NCP (SP) की वर्किंग प्रेसिडेंट सुप्रिया सुले के उस बयान के एक दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने हादसे के बाद NCP पर सत्ता का आनंद लेने का आरोप लगाया था। सुनेत्रा बोलीं- जांच एजेंसियों पर पूरा भरोसा सुनेत्रा पवार ने कहा कि उन्हें कानून और संविधान पर भरोसा है। जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं और उन्हें समय दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “लगातार मीडिया के सामने आने का मतलब यह नहीं है कि जांच में कोई अपडेट मिल रहा है। यह संदेह है कि बार-बार मीडिया ट्रायल तो नहीं किया जा रहा।” सुप्रिया सुले ने NCP पर सत्ता भोगने के आरोप लगाए थे सुप्रिया सुले ने बुधवार को पुणे में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, “मेरे भाई यानी मेरे कजिन अजित पवार की मौत को लेकर FIR दर्ज क्यों नहीं की गई? हमने अपने परिवार के एक प्रमुख सदस्य को खोया है। NCP का अजित पवार गुट मौजूदा सरकार का हिस्सा है। क्या उनके 40 विधायकों या 8-9 मंत्रियों में से किसी ने मेरे भाई की मौत को लेकर FIR या सही जांच की मांग करते हुए एक शब्द भी कहा है?” सुले ने कहा था, “हमारा भाई चला गया और वे सत्ता का आनंद ले रहे हैं।” 28 जनवरी: बारामती में प्लेन क्रैश में अजित पवार समेत 4 की मौत हुई थी अजित पवार का 28 जनवरी को बारामती में एक प्लेन क्रैश में निधन हो गया था। मुंबई से बारामती जा रहे लियरजेट 45 XR एयरक्राफ्ट ने कम विजिबिलिटी के बावजूद रनवे पर लैंडिंग की। रिपोर्ट के मुताबिक एयरक्राफ्ट पहले दायीं ओर मुड़ा, पेड़ों से टकराया और फिर जमीन पर गिर गया। इसके बाद उसमें आग लग गई। इस हादसे में महाराष्ट्र के डिप्टी CM अजित पवार और 4 और लोगों की मौत हो गई थी। AAIB ने क्रैश साइट के पास के गांव में लगे CCTV फुटेज का हवाला देते हुए कहा कि हादसे से पहले प्लेन दायीं ओर मुड़ा, पेड़ों और फिर जमीन से टकराया। इससे उसमें आग लग गई और पूरा कॉकपिट, केबिन जल गया।  

NH-44 को अतिक्रमण मुक्त बनाने की कार्रवाई, करनाल में NHAI ने चलाया अभियान

 करनाल  सड़क सुरक्षा को मजबूत करने और निर्बाध राजमार्ग संचालन सुनिश्चित करने के एक निर्णायक कदम के तहत, एनएचएआई क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ के अधीन परियोजना क्रियान्वयन इकाई (पीआईयू)-अंबाला ने ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस (ओएंडएम) व्यवस्था के तहत रखरखाव किए जाने वाले पानीपत-खन्ना कॉरिडोर पर करनाल में एनएच-44 के किनारे एक व्यापक अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया। इस अभियान का उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्ग को सुरक्षित, सुलभ और बाधाओं से मुक्त रखना था, जिसके तहत राजमार्ग के राइट-ऑफ-वे (मार्ग के अधिकार क्षेत्र) के भीतर अनधिकृत संरचनाओं, सड़क किनारे के अवरोधों और अतिक्रमणों को निशाना बनाया गया। यह कार्रवाई राजमार्ग की भूमि की सुरक्षा करने, यातायात की आवाजाही में सुधार लाने और यह सुनिश्चित करने के एनएचएआई के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है कि नियमित रखरखाव, आपातकालीन प्रतिक्रिया और अन्य राजमार्ग संचालन बिना किसी रुकावट के किए जा सकें। एनएच-44 एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परिवहन गलियारा है, जिस पर भारी यात्री और वाणिज्यिक यातायात होता है। अतिक्रमण न केवल राजमार्ग की भूमि के प्रभावी उपयोग को सीमित करते हैं, बल्कि गंभीर सुरक्षा खतरे भी पैदा कर सकते हैं, दृश्यता में बाधा डाल सकते हैं और आपातकालीन व रखरखाव कार्यों में रुकावट बन सकते हैं। संबंधित टीमों ने दोहराया है कि दोबारा अतिक्रमण को रोकने के लिए साफ किए गए हिस्सों की नियमित रूप से निगरानी की जाएगी। राजमार्ग के किनारे स्थित हितधारकों को भी राजमार्ग की भूमि पर अनधिकृत कब्जे से परहेज करने की सलाह दी गई है। यह पहल सड़क उपयोगकर्ताओं और व्यापक जनता के हित में एनएच-44 के पानीपत-खन्ना खंड को सुरक्षित, कुशल, बाधा रहित और पूरी तरह से चालू रखने की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करती है।

शिक्षकों को यूपीजीबी का तोहफा, 1.10 करोड़ रुपये तक का मुफ्त दुर्घटना बीमा

लखनऊ  शिक्षक दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक (यूपीजीबी) ने शिक्षकों के लिए विशेष वेतन पैकेज की घोषणा की है। बैंक की ओर से शुरू किए गए ‘शिक्षक विशेष यूपीजीबी वेतन पैकेज’ में शिक्षकों को 1.10 करोड़ रुपये तक का दुर्घटना एवं विकलांगता बीमा पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही 10 लाख रुपये का जीवन बीमा भी मुफ्त दिया जाएगा। लखनऊ स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में बैंक प्रबंधन ने इस विशेष पैकेज का अनावरण किया। प्रबंधन के अनुसार, पैकेज को तैयार करने में पिछले एक महीने से चल रहे ‘शिक्षक संवाद’ के दौरान शिक्षकों से मिले सुझावों को शामिल किया गया है। क्षेत्रीय प्रबंधक कौशल किशोर ने शिक्षकों को राष्ट्र निर्माता बताते हुए कहा कि बैंक का उद्देश्य केवल शिक्षकों के वेतन खाते खोलना नहीं, बल्कि उनके साथ दीर्घकालिक वित्तीय संबंध स्थापित करना है। शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष सुधांशु मोहन ने पैकेज को शिक्षकों के लिए अन्य बैंकों की योजनाओं की तुलना में अधिक लाभकारी बताया। ऋण से लेकर बैंकिंग सेवाओं तक कई सुविधाएं यूपीजीबी के इस विशेष वेतन पैकेज में शिक्षकों को होम लोन, कार लोन और व्यक्तिगत ऋण पर प्रसंस्करण शुल्क नहीं देना होगा। लॉकर शुल्क में भी छूट दी गई है। शिक्षा ऋण पर 0.25 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज छूट का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा एनईएफटी, आरटीजीएस, एसएमएस अलर्ट, चेकबुक और डिमांड ड्राफ्ट जैसी बैंकिंग सेवाएं भी निशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी। दुर्घटना एवं विकलांगता बीमा तथा जीवन बीमा की सुविधा शिक्षकों और उनके परिवारों को अतिरिक्त वित्तीय सुरक्षा प्रदान करेगी। कार्यक्रम में शिक्षकों को अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उप क्षेत्रीय प्रबंधक अखिलेश उपाध्याय, मुख्य प्रबंधक अभय कुमार सिंह, वरिष्ठ प्रबंधक शशि सिंह, मोहम्मद रऊफ, शिक्षक अजय सिंह और शाखा प्रबंधक निराजन आनंद सहित बैंक अधिकारी एवं शिक्षक मौजूद रहे। बैंक प्रबंधन के अनुसार, 4,300 से अधिक शाखाओं वाला उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक आठ करोड़ से अधिक ग्राहकों को बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध करा रहा है।

मुख्यमंत्री ने जताया संकल्प- मथुरा, वृंदावन में ऐसा भव्य परिसर तैयार करेंगे, जैसा अयोध्या और काशी में हुआ

मथुरा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या काशी के भव्य विकास के बाद अब ब्रजभूमि को भी जन-भावनाओं के अनुरूप विकसित किया जाएगा। डबल इंजन सरकार इसमें कोई कसर नहीं छोड़ेगी। ब्रजभूमि के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए यहां ऐसा भव्य परिसर तैयार किया जाएगा, जैसा अयोध्या और काशी में हुआ है। पिछली सरकारें श्रीकृष्ण जन्मभूमि आने से डरती थीं, क्योंकि उन्हें अपने वोट बैंक की चिंता होती थी। यह सरकार कृष्ण कन्हैया, प्रभु श्रीराम, बाबा विश्वनाथ और मां विंध्यवासिनी पर विश्वास करती है। लेकिन, जिनकी आस्था बाबर और औरंगजेब में होगी, क्या वे आपकी आस्था का सम्मान कर पाएंगे?  समाज विरोधी मंसूबे पूरे नहीं होने देगी सरकार मुख्यमंत्री शुक्रवार को श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में दर्शन-पूजन करने के उपरांत मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बाबर और औरंगजेब के अनुयायी फिर से समाज में जहर घोलने का काम करने जा रहे हैं। उनकी आदत समाज में विष वमन करने की है, जिससे समाज व राष्ट्र विरोधी तत्वों के हौसले बढ़ सकें, वे आपकी सुरक्षा में सेंध लगा सकें, युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर सकें, बहन-बेटियों की सुरक्षा में सेंध लगा सकें, अन्नदाता किसानों की खुशहाली पर डकैती डाल सकें और उद्यमी बनने की ओर अग्रसर कारीगरों व हस्तशिल्पियों को फिर से लाचार बना सकें। लेकिन डबल इंजन की सरकार इन मंसूबों पर पानी फेरेगी और इन्हें कभी पूरा नहीं होने देगी।  कल्पना से परे था अयोध्या का कायापलट मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्यावासियों को कल्पना भी नहीं थी कि कभी अयोध्या का इतना भव्य विकास होगा। वहां न सड़क थी, न बिजली और न ही पानी की समुचित व्यवस्था। गंदगी का अंबार लगा रहता था। अयोध्या रेलवे की सिंगल लाइन से जुड़ी थी। जो श्रद्धालु वहां जाता था,  अव्यवस्था और अराजकता देखकर रोता हुआ लौटता था। आज प्रतिदिन करीब एक लाख श्रद्धालु अयोध्या धाम आते हैं। रामनवमी, कार्तिक माह, सावन का झूला मेला, दीपोत्सव आदि पर्वों पर यह संख्या बढ़कर पांच से 50 लाख तक पहुंच जाती है। कहीं कोई असुविधा नहीं होती। सामाजिक समता का अद्भुत उदाहरण भी देखने को मिलता है। प्रभु श्रीराम के नाम को जन-जन तक पहुंचाने वाले महर्षि वाल्मीकि के नाम पर अयोध्या में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बन गया है। कनेक्टिविटी के लिए चारों ओर से फोरलेन सड़कें बन चुकी हैं। रेलवे की डबल लाइन हो चुकी है। अयोध्या में जहां भी जाएंगे, आपको भक्तिपथ, रामपथ जैसे नामों की फोरलेन सड़कें मिलेंगी। अपराजित रही हमारी आस्था सीएम ने कहा कि 500 वर्ष पहले 1528 में विदेशी आक्रांता ने हमारी आस्था को समाप्त करने का प्रयास किया था। लेकिन, अयोध्या में प्रभु श्रीराम के प्रति हमारी सनातन आस्था निरंतर बढ़ रही है। वहां उमड़ रहे जनसैलाब से इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। जो आक्रांता खुद को अविजित मानते थे, आज उनका कहीं अता-पता नहीं। सब समाप्त हो गए। लेकिन, हमारी आस्था कभी पराजित नहीं हुई। अयोध्या में प्रभु श्रीराम का दुनिया का विशालतम भव्य मंदिर बन गया। जिन लोगों को ये सब अच्छा नहीं लगता, वे अयोध्या को बदनाम कर रहे हैं। मां विंध्यवासिनी धाम का भव्य परिसर मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं अभी यहां योगमाया का दर्शन कर रहा था। इसी धरा पर योगमाया ने अवतरित होकर कंस के अहंकार को चुनौती दी थी और वही योगमाया विंध्यवासिनी धाम में प्रकट हुई थीं। मैं जब भी यहां आता था, मुझे तत्काल मां विंध्यवासिनी का स्मरण आता था। आज मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि योगमाया के प्रति हमारी आस्था ने विंध्यवासिनी धाम को एक भव्य परिसर उपलब्ध कराया है। ब्रज क्षेत्र में श्रद्धालुओं को मिलेंगी सभी सुविधाएं सीएम ने कहा कि मथुरा-वृंदावन समेत बरसाना, नंदगांव व गोवर्धन आने वाले श्रद्धालुओं को सभी सुविधाएं मिलेंगी। किसी श्रद्धालु को कोई दिक्कत न हो, उसकी आस्था को ठेस न लगे, वह सहज भाव से आए, दर्शन करे और आशीर्वाद लेकर जाए। इसके लिए डबल इंजन की सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। ये पर्व व त्योहार केवल आस्था ही नहीं,  हमारी आर्थिकी के आधार भी हैं। समाज का हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में व्यवस्था के साथ जुड़कर पीएम मोदी जी के विकसित भारत की परिकल्पना को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दे रहा है। हम सिर्फ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से एक ही बात कही कि अर्जुन, तुम निमित्त मात्र हो, तुम अपना कर्तव्य करो। तुम अगर निष्काम कर्म करोगे तो परिणाम पाओगे। इसी तरह हम सब भी देश, समाज व परिवार के प्रति अपने कर्तव्यों का ईमानदारीपूर्वक निर्वहन करेंगे तो भारत को विकसित भारत और उत्तर प्रदेश को विकसित उत्तर प्रदेश बनने में कोई देर नहीं लगेगी। ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन’, श्रीकृष्ण कहते हैं कि कर्म करो, अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ो। बाकी चिंता हमारे कृष्ण कन्हैया करेंगे। उन्होंने कहा कि हमारा देश स्वतंत्र है, तभी हम इतने स्वतंत्र माहौल में अपने पर्व और त्योहार मना पा रहे हैं। कल से लाखों की संख्या में श्रद्धालु मथुरा-वृंदावन आकर आस्था के साथ विभिन्न समारोहों और आयोजनों में भागीदार बन रहे हैं। आज हम शासन की सुविधाओं से जुड़े हैं और विकास की नई-नई परियोजनाओं का लाभ ले रहे हैं। नौजवान अपने जीवन और भविष्य के प्रति आश्वस्त है। हर बेटी बहन अपनी सुरक्षा के प्रति आश्वस्त है। हर कारीगर और हर हस्तशिल्पी के मन में उद्यमी बनने का विश्वास है। इसी विश्वास को जगाने और हमें जोड़ने के लिए ये पर्व व त्योहार आते हैं। मुझे भी इसीलिए ब्रजभूमि में ‘लाला’ (बालकृष्ण) के दर्शन करने का अवसर प्राप्त हुआ है। अब जवाहर बाग जैसी घटना नहीं, बल्कि उत्सव होता है मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लिए हमारी आस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। विरासत के सम्मान के लिए ही मैं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर यहां आता हूं। पिछली सरकारें यहां आने से डरती थीं, क्योंकि उन्हें वोट बैंक की चिंता होती थी। उन्हें डर रहता था कि कहीं लोग सवाल न पूछ लें और इसीलिए उनके कृत्यों से यहां जवाहर बाग जैसी घटना हुई। लेकिन, अब हमारी यह ब्रजभूमि जन्मोत्सव, रंगोत्सव, ब्रजरज उत्सव और वैष्णव कुंभ जैसे आयोजनों के साथ नए उत्साह, नई उमंग और नए विश्वास से … Read more

अब 50.43 सीएफटी मिट्टी कटाई पर मिलेगी एक दिन की मजदूरी

 रांची राज्य में वीबी जीरामजी योजना के तहत कार्यरत अकुशल श्रमिकों के लिए कार्य की मात्रा पूर्व की तुलना में कम कर दी गई है। इस योजना के अंतर्गत कार्यरत श्रमिकों को अब मिट्टी कटाई के कार्य में पूर्व निर्धारित 73 सीएफटी के स्थान पर औसतन 50.43 सीएफटी कार्य करने पर एक दिन की मजदूरी दिए जाने का प्रविधान किया गया है। इसके तहत महिलाओं के लिए इसकी सीमा 46.97 सीएफटी ही रखी गई है। राज्य सरकार यह व्यवस्था कर रही है कि निर्धारित सॉफ्टवेयर सेक्योर साफ्ट में नई दरों को शीघ्र ही अपलोड किया जाए। इससे कार्य की मात्रा एवं मजदूरी भुगतान के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। मजदूरी भुगतान व्यवस्था को अधिक वैज्ञानिक, न्यायसंगत एवं श्रमिक हितैषी बनाने की दिशा में यह पहल की गई है। ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत विभिन्न श्रेणियों के श्रमिकों की कार्यक्षमता, कार्य की प्रकृति, श्रम एवं निर्धारित कार्यदिवस में किए जा सकने वाले कार्य की मात्रा का आकलन किया गया है। झारखंड में वर्तमान व्यवस्था के तहत एक दिन की मजदूरी के भुगतान के लिए 73 सीएफटी मिट्टी कटाई का कार्य निर्धारित था। टाइम एंड मोशन के आधार पर अब विभिन्न श्रेणियों के श्रमिकों के लिए कार्य-मात्रा को युक्तिसंगत बनाया गया है। इसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि निर्धारित कार्य-मात्रा एक सामान्य श्रमिक द्वारा सामान्य कार्यदिवस में वास्तविक रूप से पूरी की जा सके। ग्रामीण विकास मंत्रालय के दिशा-निर्देशों में महिलाओं, बुजुर्गों तथा दिव्यांग श्रमिकों के लिए अलग दर निर्धारित करने का भी प्रविधान है। निर्धारित दरों को लेकर मंत्रालय से अनुमोदन प्राप्त हो चुका है।

‘सत्संग संजीवनी’ में गूंजा श्रीकृष्ण भक्ति का संदेश, वृंदावन के कलाकारों ने प्रस्तुत कीं भगवान की दिव्य लीलाएं

भोपाल  श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व के अवसर पर शुक्रवार को मानस भवन, पॉलिटेक्निक चौराहा, भोपाल में ‘सत्संग संजीवनी’ का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की प्रेरणादायी कथा का श्रवण करने के साथ ही वृंदावन के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का भावपूर्ण आनंद लिया। कार्यक्रम का आयोजन आचार्य संजीव शर्मा गुधैनिया जी के पावन सान्निध्य में किया गया। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, उनके विचारों तथा उनके द्वारा दिए गए कर्म, धर्म, भक्ति और मानवता के संदेशों को सरल एवं प्रभावी रूप में श्रद्धालुओं के समक्ष प्रस्तुत किया। इस अवसर पर मानस भवन में विशेष धार्मिक एवं सांस्कृतिक वातावरण देखने को मिला। भगवान श्रीकृष्ण की मनोहारी झांकी, आकर्षक पुष्प सज्जा और भक्ति संगीत के बीच वृंदावन से आए कलाकारों ने श्रीकृष्ण की विभिन्न दिव्य लीलाओं की प्रस्तुतियां दीं।  कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सपरिवार उपस्थित होकर कथा श्रवण एवं भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के दर्शन किए। आयोजन के पश्चात श्रद्धालुओं के लिए फलाहार एवं महाप्रसाद की व्यवस्था भी की गई। आयोजन में सहयोगकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में रचना बिल्डर्स (Rachna Builders) के श्री रितेश शर्मा सहित सहयोगकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा। साथ ही श्री कैलाश शर्मा, रचना बिल्डर्स ने भी आयोजन में सहयोग एवं सहभागिता प्रदान की। कार्यक्रम में रीगल होम्स के श्री नीरज शर्मा तथा द सोर्स ऑफ फिटनेस के श्री हरि नारायण द्विवेदी का भी सहयोग रहा। आयोजक आचार्य संजीव शर्मा गुधैनिया जी ने उपस्थित श्रद्धालुओं एवं सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ‘सत्संग संजीवनी’ का उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण की कथा एवं उनकी दिव्य लीलाओं के माध्यम से समाज में आध्यात्मिक चेतना, सकारात्मक सोच और संस्कारों का प्रसार करना है। कार्यक्रम का समापन भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष एवं प्रसाद वितरण के साथ हुआ।

असिस्टेंट प्रोफेसर योगेश धाकड़ ने राजनीति विज्ञान में की पीएचडी.

भोपाल  परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, दृढ़ संकल्प, शिक्षा और निरंतर परिश्रम से सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है। इसे चरितार्थ किया है रायसेन जिले के पड़रिया कलां गांव निवासी योगेश धाकड़ ने  100 प्रतिशत दृष्टिबाधित योगेश धाकड़ ने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल से राजनीति विज्ञान (Political Science) विषय के अंतर्गत दिव्यांगजनों के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषय पर पीएचडी शोध पूर्ण कर प्रेरणादायी उपलब्धि हासिल की है। योगेश धाकड़ वर्तमान में मध्यप्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं और शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बरेली, जिला रायसेन में अध्यापन सेवाएं दे रहे हैं। स्वयं दृष्टिबाधित होते हुए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों को शिक्षित करने के साथ उन्होंने शोध के माध्यम से दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और उनके विकास से जुड़े शासकीय प्रयासों का भी गंभीर अध्ययन किया है। दिव्यांगजनों के विकास को बनाया शोध का विषय योगेश धाकड़ ने राजनीति विज्ञान विषय के अंतर्गत “दिव्यांगजनों के विकास में शासन की योजनाओं का व्यावहारिक अध्ययन (मध्यप्रदेश के विशेष संदर्भ में)” विषय पर शोध किया है। अपने शोध में उन्होंने मध्यप्रदेश के विशेष संदर्भ में दिव्यांगजनों के विकास एवं कल्याण के लिए शासन द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की व्यावहारिक उपयोगिता, जमीनी क्रियान्वयन, लाभार्थियों तक पहुंच और उनके जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया। इस शोध का महत्व इसलिए भी विशेष है क्योंकि शोधार्थी स्वयं 100 प्रतिशत दृष्टिबाधित हैं। ऐसे में उनके अध्ययन में अकादमिक दृष्टिकोण के साथ दिव्यांगजनों की वास्तविक परिस्थितियों के प्रति व्यक्तिगत अनुभव, संवेदनशीलता और व्यावहारिक समझ का भी समावेश है। डॉ. अनुपमा यादव के मार्गदर्शन में पूर्ण हुआ शोध योगेश धाकड़ ने अपना शोध कार्य डॉ. अनुपमा यादव, विभागाध्यक्ष (राजनीति विज्ञान), भेल शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भोपाल के मार्गदर्शन में पूर्ण किया।शोध में दिव्यांगजनों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास, शासकीय सहायता, योजनाओं की पहुंच, उनके व्यावहारिक क्रियान्वयन तथा दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में शासन की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को केंद्र में रखा गया। यह अध्ययन दिव्यांगजनों के लिए संचालित शासकीय योजनाओं की जमीनी स्थिति को समझने के साथ-साथ भविष्य में उन्हें और अधिक सुलभ, प्रभावी एवं परिणामोन्मुखी बनाने की दिशा में भी उपयोगी संदर्भ प्रदान कर सकता है। पड़रिया कलां से असिस्टेंट प्रोफेसर और अब पीएचडी तक प्रेरक सफर. रायसेन जिले के पड़रिया कलां गांव से निकलकर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने और अब राजनीति विज्ञान में पीएचडी पूर्ण करने तक योगेश धाकड़ का सफर प्रेरणादायी है। दृष्टिबाधिता उनके शैक्षणिक और व्यावसायिक लक्ष्यों के मार्ग में बाधा नहीं बन सकी। उन्होंने शिक्षा को अपनी शक्ति बनाते हुए न केवल स्वयं उच्च शिक्षा में मुकाम हासिल किया, बल्कि आज विद्यार्थियों को शिक्षित कर नई पीढ़ी के निर्माण में भी योगदान दे रहे हैं। उनकी उपलब्धि का महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि उन्होंने अपने शोध के लिए उसी समुदाय के विकास से जुड़ा विषय चुना, जिसकी चुनौतियों और आवश्यकताओं को वे स्वयं बेहद करीब से समझते हैं। दिव्यांग युवाओं के लिए बने प्रेरणा. योगेश धाकड़ की यह उपलब्धि केवल पीएचडी की उपाधि हासिल करने तक सीमित नहीं है। एक 100 प्रतिशत दृष्टिबाधित व्यक्ति का उच्च शिक्षा विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में सेवाएं देना और राजनीति विज्ञान में दिव्यांगजनों के विकास एवं शासकीय योजनाओं पर शोध करना, समावेशी शिक्षा और दिव्यांगजन सशक्तिकरण का प्रेरक उदाहरण है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि उचित अवसर, शिक्षा, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के माध्यम से दिव्यांगजन न केवल आत्मनिर्भर बन सकते हैं, बल्कि शिक्षक, शोधकर्ता और सामाजिक परिवर्तन के वाहक के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। योगेश धाकड़ की इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर उनके परिवारजनों, गुरुजनों, सहकर्मियों, विद्यार्थियों और शुभचिंतकों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। “दृष्टि की सीमा सपनों की सीमा नहीं होती— योगेश ने शिक्षा, अध्यापन और शोध के माध्यम से इसे सिद्ध कर दिखाया।”

बिहार की पढ़ाई में AI की एंट्री, Google देगा शिक्षकों को ट्रेनिंग; छात्रों को भी मिलेगा फायदा

पटना  गूगल फाॅर एजुकेशन इंडिया बिहार के शिक्षकों को समूह में एआई का प्रशिक्षण उपलब्ध कराएगा। गूगल के रिसाेर्स पर्सन क्षेत्रवार प्रशिक्षण देंगे। सभी शिक्षकों को इस प्रशिक्षण में शामिल में होने को ले शिक्षा मंत्री के स्तर से पत्र भी लिख जा रहा। शिक्षकों के इस प्रशिक्षण के मूल मे है कि AI के उपयोग की ट्रेनिंग लेकर विद्यार्थियों को एआई में दक्ष कर सकें। गूगल एजुकेशन फाॅर इंडिया के कंट्री हेड ने अपनी टीम के साथ हाल ही में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के साथ इस संबंध में बैठक की थी। शनिवार को शिक्षक दिवस के मौके पर इस संबंध में गूगल एजुकेशन फाॅर इंडिया का शिक्षा विभाग के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर होना है। रिसोर्स पर्सन को बिहार में तैनात करेगा गूगल इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार सहमति पत्र हस्ताक्षर होने के बाद गूगल अपने रिसोर्स पर्सन को प्रशिक्षण के लिए बिहार में तैनात करेगा। यह पहली बार हो रहा जब शिक्षकों के तकनीकी प्रशिक्षण खासकर एआई के लिए शिक्षा विभाग गूगल एजुकेश फार इंडिया के साथ किसी तरह का एमओयू कर रहा। शिक्षा विभाग पहले जिला स्तर पर शिक्षकों का चयन कर उन्हें मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार करेगा। गूगल अपने एआई प्लेटफाॅर्म पर इन शिक्षकों को यह ट्रेनिंग देगा कि एआई का उपयोग कितनी सहजता से किया जा सकता है। छात्रों को एआई में दक्ष बनाने की पहल किसी विषय पर सूचना के लिए किस तरह से प्रांप्ट लिखना है यह ट्रेनिंग का खास हिस्सा है। विद्यार्थियों की जरूरत के हिसाब से शिक्षकों को यह ट्रेनिंग दी जाएगी कि वे तय पाठ्यक्रम को और कैसे बेहतर कर सकते हैं। इस पूरी कवायद के मूल में शिक्षा विभाग की यह योजना है कि विद्यार्थियों को एआई के उपयोग में दक्ष बनाया जाए। माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थी इसके केंद्र में हैं। शिक्षक एआई की मदद से सभी विषयों पर खास तरीके से विद्यार्थियों को उपलब्ध कराएंगे। मास्टर ट्रेनर के माध्यम से अलग-अलग विद्यालय के शिक्षकों को एआई में प्रशिक्षित किया जाएगा।  

मंधाना से मिताली राज तक, ये 5 महिला क्रिकेटर बना चुकी हैं इंटरनेशनल क्रिकेट में 10,000+ रन

नई दिल्ली महिला इंटरनेशनल क्रिकेट में लंबे करियर और तीनों फॉर्मेट में रन बनाने की क्षमता से ही खिलाड़ी की महानता पता चलती है। आज के आक्रामक क्रिकेट के दौर में दुनिया की केवल पांच ऐसी दिग्गज महिला क्रिकेटर हुई हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 10,000 रनों के इस ऐतिहासिक आंकड़े को पार किया है। आइए उन महिला क्रिकेटर्स के बारे में जानते हैं। स्मृति मंधाना भारतीय टीम की स्टार ओपनर और उप-कप्तान स्मृति मंधाना महिला इंटरनेशनल क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली बल्लेबाज बन गई हैं। उन्होंने महिला एशिया कप में हांगकांग के खिलाफ 64 गेंदों पर 124 रनों की तूफानी पारी खेलकर यह ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया। मंधाना इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे ज्यादा 18 शतक लगाने वाली महिला क्रिकेटर हैं। इसके साथ ही वे सबसे तेज 10,000 रन पूरे करने वाली खिलाड़ी भी बन गई हैं। मिथाली राज भारतीय महिला क्रिकेट की मजबूत स्तंभ मानी जाने वाली पूर्व कप्तान मिथाली राज ने 23 साल के अपने लंबे करियर में 10,868 रन बनाए। साल 2022 में संन्यास लेने वाली मिथाली आज भी महिला वनडे क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन (7,805 रन, 50.68 की औसत) बनाने वाली बल्लेबाज हैं। इंटरनेशनल क्रिकेट में उनके नाम रिकॉर्ड 93 बार 50 या उससे अधिक रन बनाने का कीर्तिमान दर्ज है। सूजी बेट्स न्यूजीलैंड की यह आक्रामक बल्लेबाज महिला क्रिकेट इतिहास में सबसे लंबे समय तक खेलने वाली और सबसे ज्यादा इंटरनेशनल मैच खेलने वाली खिलाड़ी हैं। लगभग दो दशकों से न्यूजीलैंड क्रिकेट की रीढ़ रही सूजी बेट्स पूर्व आईसीसी क्रिकेटर ऑफ द ईयर रह चुकी हैं। उन्होंने विशेष रूप से टी20 अंतरराष्ट्रीय प्रारूप में दबदबा बनाया है, जहां उनके नाम अकेले 4,700 से अधिक रन दर्ज हैं। शार्लोट एडवर्ड्स इंग्लैंड की पूर्व दिग्गज कप्तान शार्लोट एडवर्ड्स इंटरनेशनल क्रिकेट में 10,000 रनों का आंकड़ा छूने वाली दुनिया की पहली महिला क्रिकेटर थीं। महज 16 साल की उम्र में डेब्यू करने वाली एडवर्ड्स ने दो दशकों तक इंटरनेशनल मंच पर अपना दबदबा बनाए रखा और अपनी कप्तानी में इंग्लैंड को वनडे विश्व कप और एशेज में ऐतिहासिक जीत दिलाई। स्टेफनी टेलर वेस्टइंडीज की ऑलराउंडर स्टेफनी टेलर कैरेबियाई महिला क्रिकेट इतिहास की सबसे सफल बल्लेबाज हैं। अपनी आक्रामक पावर-हिटिंग और सूझबूझ भरी बल्लेबाजी के दम पर उन्होंने एक दशक से अधिक समय तक वेस्टइंडीज के बल्लेबाजी क्रम की कमान संभाली। अपनी कप्तानी में 2016 में वेस्टइंडीज को टी20 विश्व कप दिलाने वाली टेलर 10,000 रनों के क्लब में शामिल होने वाली 5वीं खिलाड़ी बनीं।