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दिल्ली वोटर लिस्ट पर SIR का असर, तीन दिन में 5.40 लाख आवेदन; तुगलकाबाद में सबसे ज्यादा नाम हटे

नई दिल्ली दिल्ली में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद महज तीन दिनों में 5.40 लाख क्लेम और आब्जेक्शन और आवेदन प्राप्त हुए हैं। 31 अगस्त को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशित होने के बाद 2 सितंबर तक नाम जोड़ने के लिए फॉर्म-6 के 2,21,806 आवेदन मिले हैं। वहीं वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के तहत 51,556 आवेदन आए हैं। वोटर लिस्ट में संशोधन के लिए फॉर्म -S के 2,65,396 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा विदेश में रहने वाले इंडियन वोटर्स के लिए फॉर्म-6ए के 1,372 आवेदन मिले हैं। नाम जोड़ने के सबसे ज्यादा आवेदन आए साउथ वेस्ट जिले से मुख्य निर्वाचन अधिकारी दिल्ली के अनुसार, सबसे ज्यादा फॉर्म-6 आवेदन साउथ वेस्ट जिले में 25,3 25,332 प्राप्त हुए हैं। इसके बाद साउथ-ईस्ट में 25,795 और साउथ जिले में 22,522 आवेदन आए है। नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के सबसे ज्यादा 11,626 आवेदन साउथ ईस्ट जिले में मिले हैं। 3,275 आवेदन ईस्ट जिले से हुए प्राप्त वहीं, फॉर्म-S के जरिए वोटर लिस्ट में सुधार के सबसे अधिक 33,275 आवेदन ईस्ट जिले से प्राप्त हुए हैं। SIR के तहत 31 अगस्त से 30 सितंबर तक क्लेम और ऑब्जेक्शन दाखिल किए जा सकते हैं। तुगलकाबाद विधानसभा सीट में सबसे ज्यादा नाम हटे बता दें कि दिल्ली की तुगलकाबाद विधानसभा सीट में सर्वाधिक नाम हटे हैं। यहां 1,92,419 वोटर्स हैं। इनमें 1,00,345 वोटर्स के नाम ड्राफ्ट रोल में हैं, जबकि 92,074 वोटर्स के नाम लिस्ट में नहीं हैं। अगर 2025 विधानसभा चुनाव पर नजर डालें तो 2,04,802 वोटर्स में से 1,14,402 ने मतदान किया था। यहां पिछले साल वोट डालने वालों की संख्या के बराबर लोगों के नाम तक नहीं जुड़े हैं। इसी तरह ओखला में 3,62,813 वोटर्स में से 1,96,362 के नाम लिस्ट में हैं, जबकि 1,64,451 के नाम कट गए हैं।  

चित्रकूट में घटा मंदाकिनी का जलस्तर, 688 लोगों का रेस्क्यू, सीएम योगी के निर्देश पर राहत-बचाव अभियान जारी

लखनऊ चित्रकूट में बाढ़ की चुनौती के बीच योगी सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन राहत और बचाव कार्यों को लेकर पूरी तरह सतर्क है। मंदाकिनी नदी का जलस्तर 29 अगस्त को 135.20 मीटर के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद अब घटकर 128.00 मीटर पर आ गया है। उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक जलस्तर में गिरावट के बावजूद प्रशासन ने निगरानी और राहत कार्यों में कोई ढिलाई नहीं की है। अब तक 688 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा चुका है। वहीं जिले में बाढ़ से कोई भी जनहानि या पशुहानि नहीं हुई है। बाढ़ की स्थिति के दौरान प्रशासन ने अब तक करीब 688 लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत एवं सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया है। बचाव अभियान के लिए एनडीआरएफ की टीम के 30 सदस्य और एसडीआरएफ की दो टीमों के 27 सदस्य तैनात किए गए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन की टीमें भी लगातार सक्रिय हैं। 36 गांवों के 13,906 लोगों तक पहुंची मदद मंदाकिनी नदी में बढ़े जलस्तर से कर्वी के रामघाट सहित 19 गांव, राजापुर के 7 गांव और मानिकपुर के 10 गांव, यानी कुल 36 गांव प्रभावित हुए। इन क्षेत्रों में  13,906 लोगों तक मदद पहुंचाई गई। प्रशासन प्रभावित आबादी तक भोजन, राहत सामग्री और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के काम में जुटा हुआ है। 28,803 लंच पैकेट बांटे गए बाढ़ प्रभावित लोगों को तत्काल भोजन उपलब्ध कराने के लिए बड़े स्तर पर व्यवस्था की गई है। तहसील कर्वी में 24,530, राजापुर में 4,043 और मानिकपुर में 230 यानी कुल 28,803 लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। इससे प्रभावित परिवारों को संकट के समय भोजन की तत्काल सुविधा मिली है। 2,065 राहत किट का वितरण प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों तक जरूरी सामग्री पहुंचाने के लिए राहत किट का वितरण किया जा रहा है। अब तक कर्वी में 1,073, राजापुर में 796 और मानिकपुर में 196 यानी कुल 2,065 राहत किट वितरित की जा चुकी हैं। साथ ही अन्य प्रभावितों तक भी तेजी से राहत किट पहुंचाई जा रही है। वहीं प्रभावित लोगों को सुरक्षित आश्रय देने के लिए जिले में 18 बाढ़ शरणालय क्रियाशील हैं। मकान क्षति पर तत्काल आर्थिक सहायता जिले में बाढ़ से 653 मकानों के आंशिक क्षतिग्रस्त हुए हैं। इनमें से 188 मामलों में 7.52 लाख रुपये की सहायता राशि लाभार्थियों के खातों में भेजी जा चुकी है। वहीं पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त एक मामले में 1.20 लाख रुपये की सहायता दी गई है। शेष मामलों में भी भुगतान की प्रक्रिया जारी है। स्वास्थ्य और फसल क्षति पर भी नजर बाढ़ प्रभावित और संभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत रखने के लिए 28 मेडिकल टीमें एंबुलेंस और आवश्यक दवाओं के साथ स्वास्थ्य परीक्षण व दवा वितरण कर रही हैं। वहीं किसानों को राहत देने के लिए फसल क्षति का सर्वेक्षण भी कराया जा रहा है। 12 चरवाहों और 2 हजार से अधिक भेड़ों को बचाया गाजीपुर में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से डूहिया सरैया के पास नदी के टापू पर फंसे 12 चरवाहों और 2 हजार से अधिक भेड़ों को पुलिस और प्रशासन ने बचाया। करीब छह घंटे चले जोखिमपूर्ण अभियान के बाद यह सफलता मिली।  देर रात में सूचना मिलते ही पुलिस-प्रशासन की संयुक्त टीम ददरी घाट पहुंची। नाइट विजन ड्रोन से फंसे लोगों और भेड़ों की लोकेशन चिन्हित की गई। इसके बाद फ्लड कंपनी पीएसी, पुलिस, प्रशासनिक टीम और स्थानीय नाविकों ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू अभियान चलाया। अभियान में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। स्थानीय ग्रामीणों और चरवाहों ने त्वरित कार्रवाई के लिए पुलिस-प्रशासन की सराहना की।

अब स्कूलों में पढ़ेंगे AI, कोडिंग और डेटा साइंस, झारखंड में सिलेबस तैयार करने की प्रक्रिया शुरू

 रांची  राज्य के प्लस टू उच्च विद्यालयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड कोडिंग, साइबर सिक्योरिटी एंड डेटा साइंस, कंप्यूटर साइंस, अप्लाइड इंग्लिश जैसे विषयों में पढ़ाई शुरू करने के लिए सिलेबस तैयार करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने इसकी जिम्मेदारी झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (जेसीईआरटी) को सौंपी है। प्रयास है कि शैक्षणिक सत्र 2027-28 से इन विषयों का सिलेबस तैयार हो ताकि इन विषयों की पढ़ाई शुरू की जा सके। जेसीईआरटी को नौवीं से 12वीं कक्षा के लिए इन विषयों का सिलेबस तैयार करना है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने इन विषयों के लिए माध्यमिक आचार्य के पद पहले ही स्वीकृत कर लिए हैं। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग से इन विषयों में माध्यमिक आचार्य के पदों पर नियुक्ति की अनुशंसा भी विभाग को मिल चुकी है। अनुशंसित अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की जांच की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि शीघ्र ही शिक्षकों की नियुक्ति प्लस टू विद्यालयों में हो जाएगी। इधर, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने जेसीईआरटी को कमेटी गठित कर सिलेबस का प्रारुप तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसमें विशेषज्ञ शिक्षकों का भी सहयोग लेने का निर्देश दिया गया है। एनसीईआरटी के दिशा-निर्देशों तथा सीबीएसई स्कूलों में लागू पाठ्यक्रमों को ध्यान में रखते हुए राज्य के लिए सिलेबस तैयार किया जाएगा। सिलेबस तैयार करने के लिए कई कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी। उल्लेखनीय है कि राज्य के प्लस टू विद्यालयों के लिए पहली बार माध्यमिक आचार्य के पद सृजित किए गए हैं।

जहां कभी था नक्सल का साया, अब गूंज रही स्कूल की घंटी; शिक्षा से बदल रही छत्तीसगढ़ की तस्वीर

रायपुर  छत्तीसगढ़ के पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में दो दशकों के लंबे इंतजार के बाद स्कूलों में घंटियां बजने लगी हैं, जो इस शिक्षक दिवस पर बस्तर और उसके आस-पास के क्षेत्रों के लिए एक ऐतिहासिक और भावुक बदलाव का प्रतीक है। जहाँ कभी बारूद की गंध और बंदूक की आवाजें हुआ करती थीं, वहाँ अब बच्चे राष्ट्रगान गा रहे हैं।  5 सितंबर को देशभर में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर ‘शिक्षक दिवस’ की धूमधाम रहेगी। इस पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ का बस्तर और अन्य दूरस्थ अंचल एक नई उम्मीद के साथ मुस्कुरा रहा है। कभी बंदूक के साए और नक्सली खौफ के कारण दशक भर से बंद पड़े स्कूल आज फिर से गुलजार हो चुके हैं। दूर-दराज के गांवों में जब वर्षों बाद फिर से स्कूल की घंटी बजती है, तो वह केवल पढ़ाई की शुरुआत नहीं होती, बल्कि उस क्षेत्र में लौटते लोकतंत्र, शांति और सुरक्षा की गूंज होती है। बंद पड़े स्कूल फिर से हुए संचालित छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास, सुरक्षा और जन कल्याणकारी नीतियों (‘नियद नेल्ला नार’ जैसी योजनाओं) के प्रभाव से दक्षिण बस्तर के सुदूर नक्सल प्रभावित इलाकों में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहा है। बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा और नारायणपुर जैसे जिलों में लगभग दो से ढाई दशकों से बंद पड़े 600 से अधिक प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को जिला प्रशासन और पुलिस बल के सहयोग से दोबारा खोल दिया गया है। जो इमारतें कभी नक्सलियों द्वारा ध्वस्त कर दी गई थीं या सुरक्षा बलों के कैंप के लिए इस्तेमाल होती थीं, उन्हें फिर से संवारकर बाल-सुलभ रूप दिया गया है। शिक्षकों का अदम्य साहस और समर्पण नक्सलमुक्त होते क्षेत्रों में शिक्षा की लौ जलाने का वास्तविक श्रेय उन स्थानीय शिक्षकों को जाता है, जिन्होंने विपरीत और भयावह परिस्थितियों के बावजूद अपना कर्तव्य नहीं छोड़ा। •    स्थानीय भाषा में अध्यापन: दूरस्थ वनांचल में नियुक्त शिक्षक न केवल बच्चों को बुनियादी अक्षर ज्ञान दे रहे हैं, बल्कि गोंडी, हलबी और डोरली जैसी स्थानीय बोलियों में संवाद कर बच्चों का स्कूल से जुड़ाव मजबूत कर रहे हैं। •    समुदाय से संवाद: शिक्षकों ने ग्रामीणों और नक्सलियों के डर से सहमे अभिभावकों के बीच जाकर उनका विश्वास जीता, जिससे आज सैकड़ों बच्चे वापस ब्लैकबोर्ड और किताबों से जुड़ चुके हैं। तकनीक और नवाचार से जुड़ रहा बस्तर का बचपन बस्तर संभाग के बीजापुर (जैसे पीड़िया, गंपूर, तमोड़ी गांव) और सुकमा के कई अंदरूनी इलाकों में सालों से बंद पड़े स्कूलों को दोबारा खोला गया है। नक्सलियों द्वारा जिन पक्के स्कूल भवनों को आईईडी से उड़ा दिया गया था, वहाँ ग्रामीणों ने प्रशासन के साथ मिलकर अस्थायी बांस और तिरपाल की झोपड़ियां (छप्पर) तैयार की हैं ताकि बच्चों की पढ़ाई न रुके। स्थानीय भाषाओं (जैसे गोंडी, हल्बी) की चुनौती से निपटने और बच्चों में विश्वास जगाने के लिए स्थानीय शिक्षित युवाओं को शिक्षा दूत  के रूप में नियुक्त किया गया है, जो इस शिक्षक दिवस के असली नायक हैं। पुनः संचालित हो रहे स्कूलों में अब केवल पुरानी लीक पर पढ़ाई नहीं हो रही है। राज्य शासन द्वारा इन स्कूलों में आधुनिक सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं: •    स्मार्ट क्लासेस और टैबलेट: कई वनांचल स्कूलों में डिजिटल कंटेंट और टैबलेट के माध्यम से बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। •    खेलकूद और न्योता भोजन: स्कूलों में मध्याह्न भोजन (न्योता भोजन) के साथ-साथ खेल सामग्री उपलब्ध कराई गई है, जिससे बच्चों की उपस्थिति में भारी उछाल आया है। •    सुरक्षित माहौल: नियद नेल्ला नार (आपका अच्छा गांव) योजना के तहत कैंपों के आसपास सुरक्षा का दायरा बढ़ने से शिक्षक बिना किसी खौफ के रोजाना स्कूल पहुंच रहे हैं। शिक्षक दिवस पर संदेश छत्तीसगढ़ में इस बार का शिक्षक दिवस उन शिक्षकों को समर्पित है जो राज्य के सबसे कठिन और दुर्गम क्षेत्रों में 'शिक्षादूत' बनकर कार्य कर रहे हैं। बंदूक की आवाज को दबाकर जब कलम और किताब की ताकत आगे बढ़ती है, तो समाज की नई तस्वीर बनती है। छत्तीसगढ़ के नक्सलमुक्त इलाकों मं। गूंजती स्कूलों की घंटी इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि शिक्षा ही बदलाव और शांति की सबसे मजबूत नींव है।

हनुमान अंश’ की सफलता पर ओपुलेंट स्कूल ऑफ एक्टिंग एंड फिल्म्स ने जताया गर्व, शौभिनव सत्या को दी बधाई

‘हनुमान अंश’ की सफलता पर ओपुलेंट स्कूल ऑफ एक्टिंग एंड फिल्म्स ने जताया गर्व, पूर्व छात्र एवं फैकल्टी शौभिनव सत्या को दी शुभकामनाएं लखनऊ ओपुलेंट स्कूल ऑफ एक्टिंग एंड फिल्म्स ने अपने पूर्व छात्र, फैकल्टी एवं टीम सदस्य शौभिनव सत्या को फिल्म ‘हनुमान अंश’ की उल्लेखनीय सफलता के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। संस्थान के संस्थापक मनीष नंदन ने कहा कि शौभिनव सत्या की सफलता पूरे ओपुलेंट परिवार के लिए गर्व का विषय है। छोटे शहरों और सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले प्रतिभाशाली युवाओं के लिए शौभिनव की यात्रा एक प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि मेहनत, ईमानदारी, अनुशासन और प्रतिभा के बल पर शौभिनव ने अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में नए कलाकारों के लिए अपनी पहचान बनाना चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में शौभिनव की उपलब्धियां इस बात का प्रमाण हैं कि निरंतर मेहनत और प्रतिभा के दम पर स्थापित धारणाओं और पारंपरिक सीमाओं को चुनौती दी जा सकती है। ओपुलेंट स्कूल ऑफ एक्टिंग एंड फिल्म्स के सह-संस्थापक एवं फिल्म निर्देशक नितिश नंदन ने कहा कि ओपुलेंट की स्थापना 15 मई 2011 को हुई थी और यह लखनऊ के शुरुआती प्रमुख फिल्म एवं एक्टिंग ट्रेनिंग संस्थानों में से एक है। उन्होंने बताया कि संस्थान के संस्थापक सदस्यों में NSD से प्रशिक्षित स्वर्गीय अलोपी वर्मा जी के नाट्य समूह से जुड़े कलाकारों के साथ-साथ NSD स्नातक एवं फिल्म अभिनेता आलोक नाथ जी, अभिनेत्री सीमा बिस्वास जी, टीवी के लोकप्रिय कलाकार योगेश त्रिपाठी, जो ‘दरोगा हप्पू सिंह’ के किरदार के लिए जाने जाते हैं, तथा आशीष श्रीवास्तव सहित कई प्रतिष्ठित कलाकार एवं रंगकर्मी शामिल रहे हैं। नितिश नंदन ने बताया कि अपनी स्थापना से अब तक 1,500 से अधिक कलाकार ओपुलेंट से प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं, जिनमें अनेक कलाकारों ने थिएटर, टेलीविजन और फिल्म के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि शौभिनव सत्या के साथ विद्यार्थी और फैकल्टी के रूप में ओपुलेंट ने कई प्रोजेक्ट्स पर काम किया है। शौभिनव संस्थान से अपने जुड़ाव के दौरान न केवल कलाकार के रूप में सक्रिय रहे, बल्कि नई प्रतिभाओं के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए एक फैकल्टी सदस्य के रूप में भी योगदान दिया है। नितिश नंदन ने आगे कहा, “शौभिनव आज अपने व्यस्त पूर्व-निर्धारित शूटिंग शेड्यूल के कारण लगातार व्यस्त हैं। हमें उम्मीद है कि वे अपने व्यस्त कार्यक्रम से समय निकालकर भविष्य में ओपुलेंट मीडिया एंड एंटरटेनमेंट के साथ भी फिल्म एवं अन्य रचनात्मक प्रोजेक्ट्स में काम करेंगे। ओपुलेंट परिवार के साथ उनका यह जुड़ाव हमारे लिए हमेशा विशेष रहेगा।” मनीष नंदन ने कहा कि शौभिनव सत्या की सफलता ओपुलेंट के विद्यार्थियों और देशभर के उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो छोटे शहरों से निकलकर सिनेमा की दुनिया में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “शौभिनव आज एक उभरते हुए सितारे हैं और हमें विश्वास है कि आने वाले समय में वे एक बड़े कलाकार और सुपरस्टार के रूप में अपनी पहचान स्थापित करेंगे। उनकी यात्रा अभी शुरू हुई है और हमें उनकी आने वाली उपलब्धियों का इंतजार है।” ओपुलेंट स्कूल ऑफ एक्टिंग एंड फिल्म्स परिवार ने शौभिनव सत्या को उनके आगामी प्रोजेक्ट्स एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।  

राज्य सरकार प्रभु राम और कृष्ण से जुड़े सभी स्थानों को भव्य तीर्थ बनाकर कर रही जीवंत

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भगवान राम और कृष्ण के नाम से भारत की पहचान दुनियाभर में बनी है। उन्होंने सृष्टि का उद्धार करने के लिए पृथ्वी पर मानव रूप में जन्म लिया। अपने जीवन में अनेकों कष्ट सहे और दुष्टों का संहार कर जनता के लिए सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त किया। भगवान कृष्ण ने कारागार में जन्म लेने के बाद अपनी बाल्यकाल की लीलाओं से आमजन के कई कष्टों को मुस्कुराते हुए दूर किया। उन्होंने विश्व को संदेश दिया कि हमें मुश्किल परिस्थितियों में धैर्य और संयम से काम लेना चाहिए। भगवान कृष्ण ने हमें कष्टों को दूर कर मार्ग निकालने की प्रेरणा दी है। उज्जैन में महर्षि सांदीपनि के आश्रम में कृष्ण ने 64 कला और 14 विद्याएं सीखीं। कृष्ण के जीवन से हम सभी के लिए शिक्षा का महत्व प्रतिपादित होता है। सांदीपनि आश्रम में सुदामा जी के साथ उनकी मित्रता के प्रसंग हर काल में प्रासंगिक हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को मुख्यमंत्री निवास में आयोजित कृष्ण जन्माष्टमी आख्यान पर्व के अवसर पर उपस्थित जनों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान कृष्ण के बाल्य स्वरूप लड्डू गोपाल का जलाभिषेक कर विधिवत पूजन-अर्चन किया। मुख्यमंत्री ने माखन और मिसरी से भरी मटकी फोड़कर राधारानी और बाल गोपाल की वेशभूषा में आए नौनिहालों को माखन खिलाया और उपहार देकर दुलार किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को कृष्ण जन्माष्टमी पर्व की शुभकामनाएं दी। मयूर नृत्य, मलखंभ खिलाड़ियों के करतब से दर्शक हुए मंत्रमुग्ध कृष्ण आख्यान की कला अभिव्यक्तियों के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न कला समूहों ने कृष्ण जन्म, कृष्ण लीला, कालिया नाग मर्दन, गोवर्धन लीला, कंस वध, गीता उपदेश सहित कृष्ण के जीवन पर आधारित नृत्य नाटिकाओं का मंचन किया। जबलपुर से आए  जुगलकिशोर नामदेव और उनके साथी कलाकारों ने मयूर नृत्य, ब्रज में आनंद उमंग भयो जय हो नंदलाल की, आज ब्रज में होली रे रसिया, कृष्ण गोबिंद हरे मुरारी जैसे सुमधुर भजनों की मनमोहक प्रस्तुति दी, जिससे मुख्यमंत्री निवास का वातावरण कृष्णमय होकर भक्तिरस से सराबोर हो गया। कार्यक्रम में  भारत सिंह पालीवाल के निर्देशन में उज्जैन से आए खिलाड़ियों ने मलखंभ की प्रस्तुति दी। खिलाड़ियों के अद्भुत करतब देखकर पंडाल में मौजूद सभी दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मलखंभ खिलाड़ियों के साथ फोटो खिंचवाकर सभी का उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव को वैदिक घड़ी भी भेंट की गई। भव्य तीर्थ के रूप में जीवंत हो रहे प्रभु राम और कृष्ण से जुड़े स्थान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार प्रभु राम और कृष्ण से जुड़े सभी स्थानों को भव्य तीर्थ के रूप में विकसित कर जीवंत करने के लिए संकल्पित है। कृष्ण पाथेय में उज्जैन का सांदीपनि आश्रम, जानापाव, महिदपुर सहित अन्य तीर्थ स्थल शामिल हैं। इसी प्रकार से संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से प्रभु राम से जुड़े चित्रकूट धाम को भव्यता के साथ विकसित किया जा रहा है। हमारी सरकार ने सनातन संस्कृति के गौरवशाली अतीत से दुनिया को परिचित कराने के लिए त्यौहार और पर्वों को हर्षोल्लास के साथ व्यापक स्तर पर मनाने की शुरुआत की है। विश्व बंधुत्व का संदेश देते हुए आर्थिक रूप से सशक्त हो रहा भारत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के अथक प्रयासों से आज भारत विश्व बंधुत्व का संदेश देते हुए आर्थिक रूप से सशक्त हो रहा है। हमारी संस्कृति अच्छाई बांटने वाली संस्कृति है। हम इसके वैभव को पुन: प्रतिष्ठित करने के लिए कटिबद्ध हैं। उन्होंने बताया कि दुनिया के कई देशों पर युद्ध के संकट का साया है, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ रही है। ग्रोथ रेट के मामले में भारत ने अमेरिका, चीन और जापान जैसे देशों को पीछे छोड़ दिया है। भारत सरकार अपने नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और अपने विदेशी रिश्तों को मजबूत करेगी। कृष्ण के चतुर्भुज रूप की शोभा हैं सुदर्शन चक्र और पांचजन्य शंख मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आचार्य सांदीपनि का पहला आश्रम बनारस में था। इसके बाद वे परिवार के साथ उज्जैन आए और यहां विद्यार्थियों को शिक्षा देना प्रारंभ किया। सांदीपनि आश्रम की शिक्षा पद्धति प्रसिद्ध और अद्भुत थी। तत्कालीन समय में गुजरात के प्रभाषपाटण (वर्तमान में द्वारिका) क्षेत्र में जम जाति के आक्रांताओं का आतंक फैला था। जब आचार्य सांदीपनि ने उनके बच्चों को शिक्षा देने के इनकार कर दिया तो आक्रांताओं ने उनके पुत्र को बंधक बना लिया। इसके बाद महर्षि सांदीपनि उज्जैन लौट आए और इस कठिन काल में भी 11 वर्षों तक विद्यार्थियों को शिक्षित करते रहे। भगवान कृष्ण और बलराम ने शिक्षा पूर्ण होने पर मथुरा जाकर जरासंध से युद्ध किया। आचार्य सांदीपनि के बताने पर कृष्ण जानापाव गए और भगवान परशुराम से सुदर्शन चक्र प्राप्त किया। कृष्ण ने तभी निश्चय कर लिया था कि गुरु के बेटे को जम आक्रांताओं से मुक्त कर उन्हें गुरु दक्षिणा के रूप में सकुशल लौटाएंगे। जब कृष्ण युद्ध समाप्त कर लौट रहे थे तो समुद्र से उन्हें पांचजन्य शंख मिला। सुदर्शन चक्र और पांचजन्य शंख भगवान कृष्ण के चतुर्भुज रूप की शोभा हैं। जन्माष्टमी पर्व कार्यक्रम में खेल एवं युवा कल्याण तथा सहकारिता मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री  राकेश शुक्ला, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मती कृष्णा गौर, विधायक  रामेश्वर शर्मा, पूर्व राज्यपाल  कप्तान सिंह सोलंकी, वरिष्ठ समाजसेवी  रघुनंदन शर्मा, महापौर मती मालती राय,  रविन्द्र यति, मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार  राम तिवारी सहित अनेक संत-वृंद , माताएं-बहनें, बाल-गोपाल, मुख्यमंत्री निवास के अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।  

उत्तर प्रदेश की सियासत में हर समीकरण बेअसर, अब सामने खड़ा सबसे बड़ा सवाल

हर समीकरण की सीमा लांघने वाला उत्तर प्रदेश का यक्ष प्रश्न लखनऊ  राजनीति में प्रायः चुनावी अंकगणित, जातिगत गोलबंदी, क्षेत्रीय समीकरण और घोषणापत्रों के बड़े-बड़े दावे ही जीत-हार का मुख्य आधार माने जाते हैं। चुनावी मंचों से गूंजने वाले नारों, रैलियों में उमड़ती भीड़ और मीडिया के विश्लेषकों की बहसों का अपना एक निश्चित गणितीय हिसाब होता है। परंतु इतिहास साक्षी है कि जब किसी राज्य के राजनीतिक क्षितिज पर कुछ ऐसी अभूतपूर्व संरचनाएं और सांस्कृतिक प्रतीक उभर आते हैं, तो उन्हें केवल आंकड़ों के पारंपरिक तराजू पर नहीं तौला जा सकता। उत्तर प्रदेश का आगामी चुनावी संग्राम जब-जब आकार लेगा, तब-तब एक मौलिक और यक्ष प्रश्न सतह पर आएगा—आखिर वह क्या है, जो इस विशाल प्रदेश में केवल योगी आदित्यनाथ कर सकते हैं, कोई अन्य राजनेता नहीं? पारंपरिक राजनीति के व्याकरण को चुनौती देती छवि उत्तर प्रदेश का राजनीतिक इतिहास गवाह रहा है कि यहां का जनादेश अधिकांशतः जातियों के जोड़-तोड़, कुनबे के हिसाब-किताब और सामाजिक ध्रुवीकरण के इर्द-गिर्द ही सिमटता रहा है। दशकों तक दलों ने केवल जातिगत जनगणना और क्षेत्रीय क्षत्रपों के गठजोड़ के आधार पर सरकारें बनाई और चलाई हैं। परंतु जब भगवा वस्त्रधारी गोरक्षपीठाधीश्वर सत्ता संभालते हैं तो राजनीति का यह पारंपरिक व्याकरण पूरी तरह बदलने लगता है। जिस व्यक्ति ने अपना व्यक्तिगत जीवन, कुनबा और पारिवारिक मोह से पूरी तरह ऊपर उठकर संन्यास का मार्ग चुना हो, उसकी सामाजिक और राजनीतिक छवि स्वतः ही जाति के संकीर्ण दायरों को लांघ जाती है। जब विपक्षी दल अलग-अलग जातियों और उप-जातियों का गणित साधने में व्यस्त होते हैं, तब योगी आदित्यनाथ एक सर्वव्यापी और व्यापक सांस्कृतिक पहचान खड़ी कर देते हैं। यह एक ऐसा मनोवैज्ञानिक और राजनीतिक प्रभाव है, जिसे कोई भी पारंपरिक राजनेता अपनी अंतर्निहित जातिगत सीमाओं और पारिवारिक दायित्वों के कारण आसानी से नहीं दोहरा सकता। संन्यास और समर्पण की यह छवि उन्हें राजनीतिक जोड़-तोड़ से परे एक अलग ही आधार प्रदान करती है। शासन की "कठोर मुद्रा" और सुरक्षा का मनोवैज्ञानिक भाव उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक शब्दावली में अपराध के प्रति “जीरो टॉलरेंस” और “बुलडोजर कार्रवाई” केवल एक प्रशासनिक नीति का हिस्सा मात्र नहीं रही, बल्कि वह एक मजबूत राजनीतिक ब्रांड का रूप धारण कर चुकी है। अतीत के उस उत्तर प्रदेश को याद कीजिए, जहां कानून-व्यवस्था पर निरंतर गंभीर प्रश्नचिह्न लगते थे, व्यापारी पलायन के लिए विवश थे और माफिया का अपना समानांतर शासन चलता था। उस पृष्ठभूमि के विपरीत, एक कठोर प्रशासक की भांति खड़े होकर अपराधियों और माफिया तंत्र के मन में कानून का भय पैदा करना, यह वह अभेद्य राजनीतिक पत्ता है, जिसे केवल योगी आदित्यनाथ ही पूर्ण नैतिक अधिकार के साथ खेल सकते हैं। दिलचस्प बात यह है कि जब विपक्षी दल इस आक्रामक नीति की प्रक्रियागत और संवैधानिक आलोचना करते हैं, तो वे अनजाने में योगी की इसी “दृढ़ संकल्प और सख्त प्रशासक” वाली छवि को जनता के बीच और अधिक सशक्त बना देते हैं। जनता सुरक्षा के इस अहसास को किसी भी राजनीतिक तर्क से ऊपर रखती है। 'विकास' और 'विरासत' का अभूतपूर्व समन्वय भारतीय राजनीति में लंबे समय से दो स्पष्ट और परस्पर विरोधी धाराएं विद्यमान रही हैं। एक तरफ वे नेता रहे हैं जो केवल आधुनिकता, अवसंरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) और आर्थिक विकास की बात करते थे, तो दूसरी तरफ वे जो केवल परंपरा, धर्म और सांस्कृतिक अस्मिता के पक्षधर थे। योगी आदित्यनाथ ने इन दो विपरीत धाराओं को एक ही धरातल पर लाकर खड़ा कर दिया है। उनके एक हाथ में जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, गंगा एक्सप्रेस-वे, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे और डिफेंस कॉरिडोर का आधुनिक खाका है, तो दूसरे हाथ में भव्य अयोध्या का राम मंदिर, काशी का दिव्य विश्वनाथ धाम, मथुरा-वृंदावन का कायाकल्प और महाकुंभ का अभूतपूर्व सांस्कृतिक वैभव है। वे “विरासत” को बिना किसी हिचकिचाहट के सार्वजनिक रूप से स्वीकारते हैं और उसे 'विकास' के आधुनिक पहियों पर आरूढ़ कर देते हैं। यह समन्वय किसी ऐसे राजनेता के लिए अत्यंत कठिन है, जिसे सांस्कृतिक प्रतीकों को छूने में राजनीतिक संकोच होता हो, धर्मनिरपेक्षता का आवरण या वोटबैंक खिसकने का भय सताता हो। सशक्तीकरण का नया मानक: आधी आबादी का अटूट विश्वास चुनावी बहसों में अक्सर मुफ़्त योजनाओं, वित्तीय रेवड़ियों और कैश ट्रांसफर के मुद्दे छाये रहते हैं। विभिन्न दल महिलाओं को आकर्षित करने के लिए कई तरह के आर्थिक वादे करते हैं। परंतु राज्य की “आधी आबादी”, यानी महिला मतदाताओं के लिए, वास्तविक और धरातलीय सशक्तीकरण का अर्थ क्या है? उत्तर प्रदेश के छोटे कस्बों, गांवों और सुदूर ग्रामीण अंचलों में शाम ढलने के बाद महिलाओं का निडर होकर बाहर निकलना, बेटियों का बिना किसी भय के स्कूल और कॉलेज जाना—यह वह प्रत्यक्ष अनुभूति है, जिसे योगी सरकार अपने सुशासन की सबसे बड़ी पूंजी मानती है। चुनावी मैदान में आर्थिक वादे तो कई दल कर सकते हैं, परंतु सार्वजनिक जीवन में निर्भयता और गरिमा का जो वातावरण महिलाओं के बीच स्थापित हुआ है, उस अटूट विश्वास को चुनौती देना किसी भी प्रतिद्वंद्वी के लिए सहज नहीं होगा। सुरक्षा का यह अहसास महिलाओं को एक स्वतंत्र और निर्णायक वोटबैंक में बदल चुका है। निर्णायक नेतृत्व की विश्वसनीयता और भावी चुनौतियां अंततः, यह प्रश्न एकाधिकारी, स्वतंत्र और निर्णायक नेतृत्व की विश्वसनीयता का भी है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और विविध राज्य में जनता प्रायः एक ऐसे “मजबूत और सख्त” चेहरे को चुनना पसंद करती है, जिसकी कमान किसी गठबंधन के जोड़-तोड़, आंतरिक अंतर्विरोधों या किसी रिमोट कंट्रोल के हाथ में न दिखे। लगातार दो कार्यकाल के बाद भी, योगी आदित्यनाथ की पहचान एक ऐसे बेबाक प्रशासक की बनी हुई है, जो राज्य के हित में कड़े और अप्रिय फैसले लेने से भी पीछे नहीं हटता। फिर भी, राजनीति का एक अटल नियम यह भी है कि जीत का रथ कई पहियों पर चलता है। सरकार की सफल योजनाओं और उपलब्धियों को आमजन तक पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना सरकार व संगठन का युद्धस्तर पर सक्रिय होना। अतीत की प्रतिष्ठा सफलता का दरवाजा अवश्य खोलती है, लेकिन भविष्य का भरोसा संस्थागत निरंतरता, व्यापक जन-संपर्क और जमीनी समाधानों पर टिकता है। 2027 के चुनाव का अंतिम फैसला कई वास्तविक और व्यावहारिक मानदंडों पर निर्भर करेगा। लेकिन, इतना तय है कि योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक ऐसा मानक स्थापित कर दिया है, जो … Read more

यूपी एसटीएफ ने पकड़ी अवैध कोडीन सिरप की 30 हजार शीशियां, कीमत लगभग 3 करोड़ रुपये

लखनऊ योगी सरकार उत्तर प्रदेश में अवैध कोडीन कफ सिरप कारोबार और नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई कर रही है। इसी क्रम में यूपी एसटीएफ ने अंतरराज्यीय स्तर पर अवैध कोडीन कफ सिरप की तस्करी करने वाले गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए बांदा जिले में चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। एसटीएफ की टीम ने इनके कब्जे से करीब तीन करोड़ रुपये कीमत की 30 हजार शीशियां अवैध कोडीन कफ सिरप बरामद की हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बांदा निवासी धीरेन्द्र कुमार, अतर्रा निवासी प्रवीण कुमार उर्फ लकी और रोहित पांडेय, हापुड़ निवासी शेखर सिंह के रूप में हुई है। बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे पर घेराबंदी कर पकड़ा गिरोह एसटीएफ को सूचना मिली थी कि अंतरराज्यीय गिरोह दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ से अवैध कोडीन कफ सिरप की खेप लाकर उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों में सप्लाई कर रहा है। इस पर गुरुवार को एसटीएफ फील्ड इकाई प्रयागराज की टीम बांदा में मौजूद थी।  इसी दौरान सूचना मिली कि कुछ लोग डीसीएम में अवैध कोडीन कफ सिरप लेकर बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के रास्ते बिसंडा बाईपास से अतर्रा, बांदा की ओर जाने वाले हैं। टीम ने बिसंडा-अतर्रा मार्ग पर बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के उत्तरी गोल चौराहे के पास डीसीएम के आगे चल रही लाल रंग की टाटा नेक्सॉन कार और डीसीएम को रोककर तलाशी ली। तलाशी में दोनों वाहनों से भारी मात्रा में अवैध कोडीन कफ सिरप की शीशियां बरामद हुई और मौके से चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। मेडिकल स्टोर के बजाय नशे के कारोबार में सप्लाई पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उनका एक सक्रिय गिरोह है, जो नशे के रूप में इस्तेमाल होने वाली अवैध कोडीन कफ सिरप की तस्करी करता है। गिरोह उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में इसकी सप्लाई करता था। वाहन चालक को मिलता था इनाम जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह के सदस्य दिल्ली के द्वारका स्थित एक फार्मा प्रतिष्ठान से सिरप लेकर आते थे फिर बांदा, अतर्रा, चित्रकूट और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में मेडिकल स्टोर के बजाय नशे के कारोबार में इसकी सप्लाई करते थे। गिरोह सिरप की रैपर बदलकर उसे महंगे दामों पर बेचता था। इससे होने वाले फायदे को गिरोह के सदस्य आपस में बांट लेते थे। वाहन चालक को खेप सुरक्षित पहुंचाने के बदले अलग से 25 हजार रुपये इनाम दिए जाते थे।  फर्जी जीएसटी बिल से तैयार किए जा रहे थे कागजात एसटीएफ की पूछताछ में गिरोह के कारोबार का एक और अहम पहलू सामने आया। आरोपियों के अनुसार कोडीन कफ सिरप की सप्लाई और बिक्री से संबंधित जीएसटी इनवॉइस और बिलों में फर्जीवाड़ा कर उन्हें हमीरपुर स्थित एक मेडिकल एजेंसी के नाम से तैयार किया जाता था। दस्तावेजों में ऐसी फर्म का इस्तेमाल किया जा रहा था, जिसे वाणिज्य कर विभाग द्वारा निष्प्रयोज्य/बोगस फर्म घोषित किया जा चुका है। इन कागजात की आड़ में कोडीन सिरप का अवैध कारोबार संचालित किया जा रहा था। 80 लाख की हेरोइन बरामद, तस्कर गिरफ्तार एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) वाराणसी यूनिट ने सोनभद्र के करमा थाना क्षेत्र से मादक पदार्थ तस्कर हिमांशु गौतम को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से करीब 80 लाख रुपये कीमत की हेरोइन बरामद की गई। आरोपी ने बताया कि वह छोटी पुड़िया बनाकर हेरोइन की सप्लाई करने का काम करता आ रहा है। पुलिस मामले की अन्य पहलुओं पर जांच कर रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने “माटी गणेश-सिद्ध गणेश” अभियान का किया शुभारंभ

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद एवं नर्मदा समग्र के संयुक्त तत्वावधान में "माटी गणेश-सिद्ध गणेश" अभियान का शुभारंभ किया। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा अभियान की संकल्पना पर केन्द्रित पोस्टर का विमोचन भी किया। परिषद द्वारा पर्यावरण संरक्षण की नवाचारी पहल करते हुए "माटी गणेश-सिद्ध गणेश" अभियान चलाया जायेगा। अभियान में पर्यावरण हितैषी संस्थान नर्मदा समग्र द्वारा प्रशिक्षण के माध्यम से प्रदेश के समस्त 313 विकासखण्ड में परषिद के नेटवर्क से जुड़ी नवांकुर सखियों को प्रशिक्षित किया जायेगा। प्रशिक्षित सखियों द्वारा पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से अपने ग्रामों में स्थानीय महिलाओं को प्रेरित-प्रशिक्षित कर मिट्टी के 10 लाख गणेण की घर-घर स्थापना करायी जायेगी। अभियान का लक्ष्य 10 लाख गणेश जी की प्रतिमाओं के निर्माण कर 25 लाख लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करना है। इस अवसर पर परिषद के उपाध्यक्ष  मोहन नागर, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के सचिव मन एवं परिषद के कार्यपालन निदेशक डॉ. बकुल लाड उपस्थित थे। 

दिल्ली-NCR में बारिश का कहर, गरज के साथ तेज बौछारें; IMD ने जारी किया रेड अलर्ट

नई दिल्ली दिल्ली-NCR में मौसम ने शुक्रवार को अचानक करवट ली है. कई इलाकों में तेज गरज के साथ झमाझम बारिश से लोगों को चिलचिलाती गर्मी से राहत मिली है. मौसम विभाग ने राजधानी और आसपास के इलाकों में भारी बारिश की आशंका को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट को बढ़ाकर रेड अलर्ट कर दिया है. मौसम विभाग के इस अलर्ट के बाद दिल्ली और एनसीआर के लोगों को बेहद सतर्क रहने की सलाह दी गई है।  जानकारी के मुताबिक, दिल्ली के कई इलाकों के साथ-साथ नोएडा-ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में भी बारिश हुई है. मौसम विभाग ने कुछ इलाकों में मध्यम से तेज बारिश के साथ भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. लगातार बारिश की स्थिति में निचले इलाकों में पानी भरने और सड़कों पर यातायात की रफ्तार धीमी पड़ने की संभावना है. हालांकि राहत की बात यह है कि जन्माष्टमी के चलते स्कूल-कॉलेज और तमाम दफ्तरों में छुट्टी होने के चलते सड़कों पर ट्रैफिक का कम दबाव रहेगा।  मौसम विभाग के ताजा अपडेट के मुताबिक, राजधानी के ज्यादातर हिस्सों में मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि कुछ इलाकों में भारी बारिश (50 से 100 मिमी) होने की आशंका है. बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की भी संभावना जताई गई है. इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, जिनके झोंकों की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है। मौसम विभाग ने लोगों को मौसम संबंधी अपडेट पर नजर रखने और बेहद जरूरी होने पर ही बारिश के दौरान बाहर निकलने की सलाह दी है।  राजस्थान से उत्तर प्रदेश तक भी मौसम विभाग का अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर मध्य प्रदेश और दक्षिणी उत्तर प्रदेश के ऊपर एक अच्छी तरह से चिह्नित निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है. वहीं मानसून की अक्षीय रेखा भी सक्रिय है और यह श्रीगंगानगर से होकर निम्न दबाव वाले क्षेत्र तक गुजर रही है. इसका असर उत्तर भारत के कई हिस्सों में देखने को मिल रहा है।  राजस्थान के पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में भी भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान जताया गया है. पिछले 24 घंटे में पूर्वी राजस्थान के कई इलाकों में तेज बारिश दर्ज की गई. सवाई माधोपुर के खंडार में सबसे ज्यादा 130 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई. राजस्थान के अलवर, भरतपुर, डीग, दौसा, धौलपुर, जयपुर, सीकर, भीलवाड़ा, अजमेर, करौली, टोंक, बारां, कोटा और झालावाड़ में भी हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई।