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सीएम योगी रविवार को चित्रकूट पहुंचेंगे, बाढ़ प्रभावित 800 परिवारों को बांटेंगे राहत सामग्री

सीएम योगी रविवार को चित्रकूट पहुंचेंगे, बाढ़ प्रभावित 800 परिवारों को राहत सामग्री वितरित करेंगे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर हालात का लेंगे जायजा आश्रयहीन परिवारों को देंगे भूमि आवंटन प्रमाणपत्र और राहत राशि का करेंगे वितरण रैन बसेरा में बाढ़ पीड़ितों से संवाद कर जानेंगे उनकी समस्याएं लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को चित्रकूट जनपद के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह बाढ़ प्रभावित 800 परिवारों को राहत सामग्री वितरित करेंगे। साथ ही बाढ़ में आश्रयहीन हुए परिवारों को आवास के लिए भूमि आवंटन प्रमाण पत्र और आपदा मोचन निधि से राहत राशि भी प्रदान करेंगे। मुख्यमंत्री बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर हालात का जायजा लेंगे। इसके बाद रैन बसेरा में बाढ़ प्रभावित लोगों से संवाद कर उनकी समस्याएं जानेंगे। कार्यक्रम के दौरान मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, जिला पंचायत प्रशासक अशोक जाटव, नगर पालिका परिषद चित्रकूटधाम कर्वी अध्यक्ष नरेंद्र गुप्ता और मानिकपुर विधायक अविनाश चंद्र द्विवेदी समेत अन्य गणमान्य मौजूद रहेंगे।

भवभूति अलंकरण से सम्मानित होंगे गिरधर राठी और राजेन्द्र दानी

भोपाल  नर्मदापुरम जिले के पिपरिया में जन्मे प्रख्यात कवि, संपादक,अनुवादक और मानवाधिकार कार्यकर्ता गिरधर राठी तथा जबलपुर निवासी वरिष्ठ कथाकार एवं संपादक राजेन्द्र दानी को वर्ष 2026 का मप्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन का प्रतिष्ठित भवभूति अलंकरण प्रदान किया जाएगा। अलंकरण के लिए गठित निर्णायक मण्डल में वरिष्ठ साहित्यकार सत्यमोहन वर्मा, रामप्रकाश त्रिपाठी तथा प्रो इकबाल मसूद शामिल थे।  राठी साहित्य अकादमी की हिन्दी पत्रिका समकालीन भारतीय साहित्य (1992-2003) और प्रतिपक्ष के संपादक रह चुके हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पत्रिका अल्टरनेटिव्स (1978-1991) के प्रबंध संपादक और चाइना रिपोर्ट और जनयुग के संपादकीय सहायक का दायित्व भी निभाया है। उनके तीन काव्य संग्रह, एक यात्रा वृत्तांत और आलोचना की दो पुस्तकें  प्रकाशित हैं।उन्होंने डेनियल वेइसबोर्ट के साथ 'सर्वाइवल : एन एक्सपीरियंस एंड एन एक्सपेरिमेंट इन ट्रांसलेटिंग मॉडर्न हिन्दी पोएट्री' का सह-संपादन किया है। अनेक भारतीय तथा विदेशी कवियों की रचनाओं का अनुवाद भी राठी ने किया है। वे एमनेस्टी इंटरनेशनल की भारत शाखा के सचिव भी रहे हैं। गिरधर राठी, ओमप्रकाश साहित्य सम्मान तथा कृष्णा सोबती की जीवनी पर आधारित पुस्तक 'दूसरा जीवन' के लिए रज़ा फैलोशिप से सम्मानित हैं।  दूसरी ओर राजनांदगांव में जन्मे और लगभग चालीस वर्षों से कथा-लेखन में अनवरत सक्रिय शीर्षस्थ कथाकार राजेन्द्र दानी वर्गीय चेतना और प्रगतिशील-जनवादी मूल्यों के साथ गहरी प्रतिबद्धता के लिये जाने जाते हैं। वे लंबे समय तक हिन्दी कथा साहित्य की महत्वपूर्ण पत्रिका 'पहल' के सम्पादन से जुड़े रहे। उनके 17 कहानी संग्रह, दो उपन्यास और कथेतर गद्य की एक पुस्तक प्रकाशित है। विगत 4 वर्षों से वे साहित्यिक पत्रिका अन्विति का सम्पादन और प्रकाशन कर रहे हैं। उन्हें मप्र शासन के अखिल भारतीय मुक्तिबोध सम्मान सहित अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।

बाढ़ में योगी सरकार का राहत अभियान तेज, 19 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया

बाढ़ में योगी सरकार का राहत अभियान तेज, 19 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया राहत-बचाव के बीच 4.66 लाख से अधिक लंच पैकेट और 92 हजार राहत खाद्य पैकेट वितरित किए 1,977 नाव-मोटरबोट से जारी है बचाव अभियान, अब तक शून्य जनहानि, शरणालयों में मिला सुरक्षित ठिकाना लोगों के स्वास्थ का ध्यान रखते हुए 6.13 लाख क्लोरीन टैबलेट और 2.17 लाख ओआरएस वितरित किए लखनऊ  उत्तर प्रदेश में बाढ़ की चुनौती के बीच योगी सरकार ने राहत एवं बचाव अभियान को युद्धस्तर पर तेज कर दिया है। प्रशासन की सतर्कता, राहत दलों की तत्परता और प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी का असर साफ दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक प्रदेश में अब तक 19,294 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है, जबकि बाढ़ से जन व पशुहानि का आंकड़ा शून्य है। प्रभावित परिवारों तक भोजन और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाने के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा के भी व्यापक इंतजाम किए गए हैं। 4.66 लाख से अधिक लंच पैकेट बांटे बाढ़ प्रभावित लोगों को तत्काल भोजन उपलब्ध कराने के लिए बड़े स्तर पर राहत अभियान चल रहा है। अब तक 4.66 लाख से अधिक लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। इसके अलावा 92,128 बाढ़ राहत खाद्य पैकेट भी प्रभावित परिवारों तक पहुंचाए गए हैं। इससे बाढ़ के चलते आवागमन अवरुद्ध होने से प्रभावित होने वाले परिवारों को संकट के समय भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है। रेस्क्यू अभियान में 1,977 नाव-मोटरबोट राहत एवं बचाव अभियान के लिए अब तक 1,977 नाव एवं मोटरबोट रेस्क्यू कार्य में लगाई जा चुकी हैं। इनके माध्यम से प्रभावित गांवों और जलभराव वाले इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के साथ जरूरी राहत सामग्री भी पहुंचाई जा रही है। 1,313 बाढ़ शरणालयों में सुरक्षित ठिकाना प्रभावित लोगों के लिए प्रदेश में अब तक 1,313 बाढ़ शरणालय स्थापित किए गए हैं। जहां 6,538 लोग रह रहे हैं। सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए लोगों के लिए भोजन और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग से लगातार सक्रिय बाढ़ के बाद जलजनित बीमारियों की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग भी सक्रिय है। प्रदेश में 1,072 मेडिकल टीमें गठित की गई हैं। स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए अब तक 6.13 लाख से ज्यादा क्लोरीन टैबलेट और 2.17 लाख से अधिक ओआरएस पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। इससे प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम को कम करने में मदद मिल रही है। शनिवार को प्रभावित जिले अयोध्या, आजमगढ़, बहराइच, बदायूं, बलिया, बांदा, बाराबंकी, बस्ती, चंदौली, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, कासगंज, कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, मुरादाबाद, प्रयागराज, रायबरेली, संत कबीर नगर, रामपुर, शाहजहांपुर, सीतापुर, उन्नाव और वाराणसी।

बिहार में शिक्षकों को मिलेगी AI की ट्रेनिंग, गूगल इंडिया के साथ हुआ MoU

पटना बिहार के शिक्षकों को कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) के क्षेत्र में गूगल इंडिया दक्ष बनाएगा। शिक्षा दिवस समारोह के मौके पर इस बाबत शिक्षा विभाग और गूगल इंडिया के साथ करार हुआ।मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी की मौजूदगी में एससीईआरटी के निदेशक यतेंद्र कुमार पाल और गूगल इंडिया के कंट्री हेड संजय जैन ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। समारोह को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने राज्य के शिक्षकों से पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षक ही बिहार के स्वर्णिम भविष्य के निर्माता हैं। उनके भीतर देश का सर्वोच्च पद हासिल करने का माद्दा है। शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के साथ उनके व्यक्तित्व और चरित्र का भी निर्माण करते हैं। शिक्षकों का सबसे महत्वपूर्ण कर्मक्षेत्र उनका विद्यालय है। अब उन्हें अपनी समस्याओं के समाधान के लिए पटना आकर धरना-प्रदर्शन करने की नौबत नहीं आएगी। इस अवसर पर कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री शीला कुमारी, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, डीजीपी विनय कुमार, शिक्षा सचिव राजीव रौशन, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, शिक्षा विभाग के विशेष सचिव धर्मेन्द्र कुमार, प्राथमिक शिक्षा निदेशक निशांत कुमार विवेक, माध्यमिक शिक्षा निदेशक नितिन कुमार सिंह, एससीईआरटी के निदेशक यतेंद्र कुमार पाल, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष डॉ. त्यागराजन एसए, जिलाधिकारी कुंदन कुमार, वरीय पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के. शर्मा उपस्थित थे। लाइव प्रसारण से जुड़े स्कूलों के विद्यार्थी और शिक्षक कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय समेत राज्य के उन माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में, जहां स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब की सुविधा उपलब्ध है, वहां समारोह का सीधा प्रसारण किया गया। इससे हजारों विद्यालयों में मौजूद शिक्षक और विद्यार्थी सीधे जुड़े रहे। दूसरे सत्र में बच्चों की प्रस्तुतियों ने मन मोहा : समारोह के दूसरे सत्र में स्कूली बच्चों ने लगभग दो घंटे तक नृत्य और संगीत की प्रस्तुति देकर लोगों का मन मोह लिया। इसके लिए राजधानी के 11 स्कूलों के तकरीबन 400 बच्चों और शिक्षकों को बुलाया गया था।

योगी सरकार में गुमशुदा बच्चों की तलाश को मिली रफ्तार, 18 हजार से ज्यादा मामलों का निस्तारण

योगी सरकार में गुमशुदा बच्चों की तलाश को मिली और रफ्तार, 18 हजार से ज्यादा मामलों का निस्तारण बाल हेल्पलाइन पर 7 महीने में सामने आए करीब 20,500 मामले 9,146 बच्चों से जुड़े मामलों में 92.05% का निस्तारण, परिवारों तक सुरक्षित पहुंचाने पर जोर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में बाल सुरक्षा के व्यापक तंत्र को मिल रही मजबूती महिला कल्याण विभाग की सक्रियता से बड़ी संख्या में परिवारों को मिली राहत लखनऊ, बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और सुरक्षित भविष्य को लेकर योगी सरकार की संवेदनशीलता का असर बाल हेल्पलाइन के आंकड़ों में स्पष्ट रूप से सामने आया है। 7 महीने में बाल हेल्पलाइन (1098) पर बच्चों के गुम होने से संबंधित करीब 20,500 मामले सामने आए, जिनमें 18,123 मामलों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया जा चुका है। गुमशुदा बच्चों की तलाश, उनकी सुरक्षित बरामदगी और परिवार से पुनर्मिलन के लिए प्रदेश का बाल संरक्षण तंत्र लगातार सक्रियता से काम कर रहा है। संकट में फंसे बच्चों तक समय पर सहायता पहुंचाने और उन्हें सुरक्षित उनके परिवार तक वापस पहुंचाने के लिए सरकार ने एक संवेदनशील और जवाबदेह व्यवस्था विकसित की है। हर सूचना पर सक्रियता, बड़ी संख्या में परिवारों को मिली राहत बाल हेल्पलाइन के आंकड़ों के अनुसार,1 जनवरी से 1 अगस्त 2026 तक बच्चों से संबंधित कुल 58,293 मामले प्राप्त हुए, जिनमें 50,589 मामलों का निस्तारण किया जा चुका है। इनमें सबसे ज्यादा संख्या गुमशुदा बच्चों से संबंधित मामलों की रही। वहीं 9,146 बच्चों के मिलने से जुड़े मामले भी हेल्पलाइन तक पहुंचे, जिनमें 8,419 मामलों का समाधान किया गया। योगी सरकार की प्राथमिकताओं में बच्चों की सुरक्षा और उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना प्रमुख रूप से शामिल है। इसी सोच के तहत हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त सूचनाओं को संबंधित स्तर तक पहुंचाने के साथ मामलों की प्रगति पर भी नजर रखी जा रही है।  गुमशुदा बच्चों की सुरक्षित वापसी पर विशेष फोकस गुमशुदगी के मामलों में बड़ी संख्या में निस्तारण होना उन परिवारों के लिए बड़ी राहत है, जिनके बच्चे किसी कारण से उनसे बिछड़ गए। बाल संरक्षण तंत्र बच्चों की तलाश के साथ उनकी सुरक्षा और आवश्यक सहायता सुनिश्चित करने पर भी ध्यान दे रहा है। बच्चों के मिलने के बाद उन्हें परिवार तक सुरक्षित पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग एवं पुनर्वास सेवाओं से जोड़ने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाती है। काउंसलिंग और पुनर्वास पर दिया जा रहा ध्यान महिला कल्याण विभाग की निदेशक सी. इंदुमति ने बताया कि प्रदेश सरकार बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। गुमशुदा बच्चों से संबंधित प्रत्येक सूचना को गंभीरता से लेते हुए संबंधित स्तर पर कार्रवाई की जाती है। बच्चों की तलाश के साथ उनकी सुरक्षित वापसी, परिवार से पुनर्मिलन तथा जरूरत के अनुसार काउंसलिंग और पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बाल हेल्पलाइन पर केवल गुमशुदगी ही नहीं, बल्कि अन्य समस्याओं से जुड़े मामले भी सामने आते हैं। इन पर भी संबंधित विभागों और संस्थाओं के समन्वय से कार्रवाई की जा रही है। ऐसे में हेल्पलाइन बच्चों की समस्याओं को सुनने और उन्हें समाधान तक पहुंचाने के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में काम कर रही है।

मध्यप्रदेश में वैश्विक निवेश को नई उड़ान, डॉ. यादव के नेतृत्व में बन रही मजबूत रणनीति

इन्वेस्ट मध्यप्रदेश : दुबई 2026 मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश की वैश्विक निवेश संभावनाओं को मिलेगा नया आयाम मुख्यमंत्री डॉ. यादव 6 से 9 सितंबर तक दुबई प्रवास पर वैश्विक आयोजन एआईएम कांग्रेस 2026 में सहभागिता के साथ इन्वेस्ट एमपी 2026 में करेंगे निवेश संवाद भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 6 से 9 सितंबर 2026 तक दुबई में इन्वेस्ट मध्यप्रदेश–दुबई 2026 के तहत संयुक्त अरब अमीरात के प्रमुख निवेशकों, उद्योग समूहों और वैश्विक कारोबारी नेतृत्व के साथ मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर सीधा संवाद करेंगे। दुबई में मुख्यमंत्री डॉ. यादव की भागीदारी का एक महत्वपूर्ण पक्ष एआईएम कांग्रेस-2026 में सहभागिता का भी रहेगा। इसके माध्यम से मध्यप्रदेश को अंतर्राष्ट्रीय उद्योग समुदाय के सामने अपनी औद्योगिक और पर्यटन क्षमताओं को प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, विभिन्न देशों और संयुक्त अरब अमीरात के शीर्ष नीति-निर्माताओं एवं कारोबारी नेतृत्व के साथ बैठकों में मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं, सहयोग और नए अवसरों पर चर्चा होगी। तीन दिवसीय कार्यक्रम में निवेशकों के साथ वन-टू-वन बैठकों से लेकर उच्चस्तरीय शासन-स्तरीय मुलाकातें, एआईएम कांग्रेस में मध्यप्रदेश पेवेलियन का उद्घाटन, इन्वेस्ट इन मध्यप्रदेश–इंडिया निवेश सत्र, शारजाह के उद्योग प्रतिनिधियों के साथ संवाद तथा दुबई के प्रमुख उद्योग समूहों के साथ बैठकें शामिल हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से मध्यप्रदेश की औद्योगिक, व्यापारिक और पर्यटन क्षमता को निवेशकों के सामने प्रभावी ढंग से रखा जाएगा।मध्यप्रदेश अपनी औद्योगिक क्षमता, समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों, कुशल मानव संसाधन और निवेश के लिए अनुकूल नीतियों के साथ वैश्विक निवेश मानचित्र पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का दुबई में विभिन्न उद्योग प्रतिनिधियों से निवेश संवाद इस दिशा में परिणाममूलक साबित होगा। 6 सितंबर 2026 पहला दिन प्रवासी भारतीयों से संवाद और वैश्विक कारोबारी समुदाय से संपर्क मुख्यमंत्री डॉ. यादव के दुबई पहुंचने पर प्रवासी भारतीय समुदाय द्वारा उनका स्वागत किया जाएगा। इसके बाद ओडीओपी (एक जिला-एक उत्पाद) स्टॉल का उद्घाटन होगा। स्टॉल में मध्यप्रदेश के बेल मेटल, चंदेरी, माहेश्वरी, बाटिक, ज़री-ज़रदोज़ी और ग्वालियर कारपेट जैसे स्थानीय उत्पादों को प्रदर्शित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव संयुक्त अरब अमीरात में भारत के राजदूत डॉ. दीपक मित्तल और दुबई के महावाणिज्य दूत डॉ. ई. विष्णु वर्धन रेड्डी से मुलाकात कर द्विपक्षीय आर्थिक एवं निवेश संबंधों से जुड़े विषयों पर चर्चा करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव अरब संसद के अध्यक्ष हिज हाईनेस मोहम्मद अहमद अल यम्माही के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे और अरब संसद के अध्यक्ष एवं सदस्यों को इन्वेस्ट मध्यप्रदेश ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 के लिए आमंत्रित करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मीडिया से संवाद करेंगे तथा एआईएम कांग्रेस-2026 के आमंत्रण-आधारित ‘टाइकून्स’ कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में करीब 500 संप्रभु संपदा कोष, फैमिली ऑफिस और प्रमुख कॉरपोरेट संस्थानों के प्रतिनिधियों की भागीदारी रहेगी। यहां निवेश के प्रमुख विषयों पर संवाद के साथ मुख्यमंत्री डॉ. यादव की एआईएम कांग्रेस के अध्यक्ष हिज हाईनेस डॉ. थानी बिन अहमद अल ज़ेयूदी के साथ भी बैठक होगी। 7 सितंबर 2026 दूसरा दिन एआईएम कांग्रेस में मध्यप्रदेश की वैश्विक निवेश क्षमता का प्रदर्शन दूसरे दिन 7 सितंबर सोमवार को एआईएम कांग्रेस-2026 पर केंद्रित रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश पेवेलियन का उद्घाटन करेंगे। पवेलियन के माध्यम से प्रदेश की औद्योगिक क्षमता, निवेश अवसरों और प्रमुख क्षेत्रों को अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव संघीय सर्वोच्च परिषद के सदस्य एवं रास अल खैमाह के शासक हिज हाईनेस शेख सऊद बिन सक्र अल कासिमी से शिष्टाचार भेंट करेंगे तथा उन्हें इन्वेस्ट मध्यप्रदेश ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 के लिए आमंत्रित करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव एआईएम कांग्रेस के उद्घाटन समारोह में राष्ट्राध्यक्षों एवं शासनाध्यक्षों की उपस्थिति में लीडर्स सेशन को संबोधित करेंगे। इसके बाद तातारस्तान गणराज्य के गवर्नर के साथ बैठक होगी। वहीं इन्वेस्ट इन मध्यप्रदेश –इंडिया निवेश सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश की निवेश संभावनाओं और राज्य की नीतिगत तैयारियों को वैश्विक निवेशकों के सामने रखेंगे। इस सत्र को विदेश व्यापार राज्य मंत्री हिज हाईनेस डॉ. थानी बिन अहमद अल ज़ेयूदी भी संबोधित करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव संयुक्त अरब अमीरात के अर्थव्यवस्था एवं पर्यटन मंत्री हिज हाईनेस अब्दुल्ला बिन तौक अल मर्री तथा विदेश व्यापार राज्य मंत्री एवं एआईएम कांग्रेस के अध्यक्ष हिज हाईनेस डॉ. थानी बिन अहमद अल ज़ेयूदी के साथ उच्चस्तरीय बैठकें करेंगे। दूसरे दिन लूलू ग्रुप इंटरनेशनल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक यूसुफ़ अली एम.ए. के साथ बैठक भी महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में शामिल है। दिन का समापन दुबई के कारोबारी एवं निवेश समुदाय के साथ संवाद के साथ होगा। 8 सितंबर 2026 तीसरा दिन निवेशकों से सीधा संवाद और शारजाह-दुबई के प्रमुख कारोबारी समूहों से संवाद तीसरे दिन मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. यादव यूएई के प्रमुख निवेशकों के साथ वन-टू-वन बैठक करेंगे। इनमें राणा होल्डिंग्स, जेम्स एजुकेशन, क्रेसेंट ग्रुप, प्योर हेल्थ, शराफ ग्रुप, चोइथराम्स, डीपी वर्ल्ड, ब्यूमर्क कॉरपोरेशन, वेस्ट ज़ोन, केजीके ग्रुप, विस्टास मीडिया कैपिटल और वीएफएस ग्लोबल जैसे प्रमुख उद्योग समूहों के प्रतिनिधि शामिल हैं । इसके बाद शारजाह चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष हिज हाईनेस अब्दुल्ला सुल्तान अल ओवैस के साथ बैठक होगी। शारजाह चैंबर एवं आईबीपीसी शारजाह के प्रतिनिधियों के साथ राउंड टेबल बैठक में मध्यप्रदेश में निवेश के अवसरों पर चर्चा होगी और उन्हें इन्वेस्ट मध्यप्रदेश ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 के लिए आमंत्रित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बीआह समूह के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के साथ भी बैठक करेंगे। इस दौरान मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर प्रस्तुति दी जाएगी और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 का आमंत्रण दिया जाएगा। इसके बाद दुबई के प्रमुख कारोबारी समूह इमार समूह के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के साथ बैठक होगी। यह बैठक रियल एस्टेट, शहरी विकास और संबंधित क्षेत्रों में संभावित निवेश एवं सहयोग के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण होगी। तीसरे दिन मंगलवार शाम को इन्वेस्ट मध्यप्रदेश : निवेश अवसरों पर संवाद सत्र आयोजित होगा। इसमें संयुक्त अरब अमीरात के व्यवसाय एवं परोपकार के लिए विशेष दूत हिज हाईनेस बद्र जाफ़र विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। सत्र में मध्यप्रदेश की औद्योगिक एवं पर्यटन क्षेत्र की संभावनाओं को प्रस्तुत किया जाएगा और मुख्यमंत्री डॉ. यादव निवेशकों एवं प्रमुख उद्योग प्रतिनिधियों को मध्यप्रदेश में उपलब्ध अवसरों से सीधे रूबरू कराएंगे। 9 सितंबर 2026 नई दिल्ली के लिए प्रस्थान मुख्यमंत्री डॉ. यादव तीन दिवसीय निवेश-केंद्रित कार्यक्रम के बाद 9 सितंबर को दुबई से नई … Read more

भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हर परिस्थिति में अपने कर्तव्य और दायित्व को निभाने की देता है प्रेरणा – मुख्यमंत्री साय

दही हांडी हमें एकता, सहयोग और टीम भावना की शक्ति का संदेश देती है : मुख्यमंत्री साय भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हर परिस्थिति में अपने कर्तव्य और दायित्व को निभाने की देता है प्रेरणा – मुख्यमंत्री साय  मुख्यमंत्री विशाल दही हांडी उत्सव में हुए शामिल, गोविंदाओं की टोलियों का बढ़ाया उत्साह रायपुर,  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राजधानी रायपुर के गुढ़ियारी स्थित अवधपुरी मैदान में आयोजित विशाल दही हांडी उत्सव में शामिल हुए। उत्सव में उमड़े जनसमूह के बीच मुख्यमंत्री ने गोविंदाओं की टोलियों का उत्साहवर्धन किया और प्रदेशवासियों को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि दही हांडी का उत्सव भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की स्मृतियों को जीवंत करने के साथ हमें एकता, सहयोग और टीम भावना की शक्ति का संदेश भी देता है। माखन चुराने वाले नटखट कान्हा की बाल लीलाएं आज भी हर मन में आनंद, प्रेम और भक्ति का भाव जगाती हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि दही हांडी केवल उत्सव नहीं, बल्कि सामूहिकता की शक्ति का सुंदर प्रतीक है। हांडी तक पहुंचने वाला गोविंदा अकेले उस ऊंचाई तक नहीं पहुंचता। उसके नीचे खड़े प्रत्येक साथी का विश्वास, सहयोग और सामर्थ्य उसे ऊपर तक पहुंचाता है। जब सभी एक लक्ष्य के लिए मिलकर प्रयास करते हैं, तभी कठिन से कठिन लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है। यही संदेश हमें समाज और प्रदेश के विकास के लिए भी प्रेरित करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन हमें जीवन जीने की कला और अपने कर्तव्य के प्रति समर्पण की सीख देता है। ग्वालबालों के प्रिय सखा के रूप में उन्होंने प्रेम और मित्रता का संदेश दिया, द्वारका के नेतृत्वकर्ता के रूप में कुशल नेतृत्व का आदर्श प्रस्तुत किया और कुरुक्षेत्र में सारथी बनकर पूरी मानवता को कर्मयोग का मार्ग दिखाया। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जीवन की प्रत्येक भूमिका को पूर्ण जिम्मेदारी के साथ निभाया। उनका जीवन हमें परिस्थितियां कैसी भी हों, अपने कर्तव्य पथ पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारा प्रदेश प्रभु श्रीराम का ननिहाल और माता कौशल्या की जन्मभूमि है। भगवान श्रीराम ने वनवास का लंबा समय छत्तीसगढ़ की पुण्य धरा पर बिताया। आज जिस अबूझमाड़ क्षेत्र को हम जानते हैं, वह रामायण काल के विशाल दंडकारण्य का हिस्सा रहा है। प्रभु श्रीराम से जुड़ी स्मृतियां और स्थल छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को विशेष गौरव प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और श्रद्धालुओं को प्रमुख तीर्थ स्थलों से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। रामलला दर्शन योजना के माध्यम से प्रदेश के श्रद्धालुओं को अयोध्याधाम में प्रभु श्रीरामलला के दर्शन का अवसर मिल रहा है। अब तक छत्तीसगढ़ के 50 हजार से अधिक श्रद्धालु इस योजना के माध्यम से अयोध्याधाम जाकर रामलला के दर्शन कर चुके हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के माध्यम से राज्य के वृद्धजनों को देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा कराई जा रही है। योजना के अंतर्गत अब तक 10 हजार से अधिक श्रद्धालु विभिन्न तीर्थ स्थलों के दर्शन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में गौमाता का विशेष स्थान है। राज्य सरकार सुरभि गोधाम योजना के माध्यम से गौवंश के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में भी कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देवी-देवताओं की कृपा से समृद्ध पुण्यभूमि है। प्रदेश पर भगवान भोलेनाथ की विशेष कृपा रही है। कबीरधाम में भोरमदेव और राजिम में कुलेश्वर महादेव जैसे प्राचीन एवं प्रसिद्ध शिव मंदिर हमारी आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। जशपुर का मधेश्वर पहाड़ अपनी अद्भुत प्राकृतिक संरचना के कारण विशेष पहचान रखता है और इसे विश्व के सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग के रूप में मान्यता मिली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती पर मातृशक्ति के अनेक प्रसिद्ध शक्तिपीठ और आस्था केंद्र भी विद्यमान हैं। डोंगरगढ़ में मां बम्लेश्वरी, रतनपुर में मां महामाया, दंतेवाड़ा में मां दंतेश्वरी और चंद्रपुर में मां चंद्रहासिनी के धाम प्रदेश की समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा के प्रतीक हैं। हमारी सरकार इस गौरवशाली धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। विशाल दही हांडी उत्सव में भक्ति, उल्लास और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। गोविंदाओं की टोलियों ने पूरे जोश के साथ दही हांडी प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रसिद्ध भजन गायक लखबीर सिंह लक्खा और लोकप्रिय गायक बी प्राक ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। भक्तिमय गीतों और भजनों के बीच पूरा आयोजन स्थल श्रीकृष्ण भक्ति के रंग में सराबोर नजर आया। इस अवसर पर कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक मोतीलाल साहू, अनुज शर्मा एवं ईश्वर साहू, छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, गौसेवा आयोग के उपाध्यक्ष राजीव लोचन महाराज, रायपुर नगर निगम की अध्यक्ष श्रीमती मीनल चौबे, श्रीमती वीणा सिंह, श्रीमती कौशल्या देवी साय सहित जनप्रतिनिधिगण, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।

उत्तराखंड में रोपवे कनेक्टिविटी का विस्तार, 51 परियोजनाओं से पहाड़ी परिवहन होगा आसान

 रोपवे नेटवर्क से बदलेगी उत्तराखंड की तस्वीर  तीर्थयात्रा, पर्यटन और पहाड़ी परिवहन को मिलेगी नई रफ्तार, 51 परियोजनाओं पर सरकार का फोकस देहरादून  दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और पहाड़ी क्षेत्रों में सीमित सड़क कनेक्टिविटी वाले उत्तराखंड में *रोपवे परिवहन व्यवस्था भविष्य की बड़ी जरूरत* बनकर उभर रही है। हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के राज्य में पहुंचने से प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों पर यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में रोपवे न केवल यात्रा को सुगम बनाने का माध्यम बन सकता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय रोजगार और पर्वतीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाला महत्वपूर्ण आधार भी साबित हो सकता है। इसी सोच के साथ उत्तराखंड सरकार ने राज्य में व्यापक रोपवे नेटवर्क विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। पर्यटन सीजन में लगने वाले जाम, कठिन पहाड़ी रास्तों, तीर्थ यात्रियों की बढ़ती संख्या और पर्यावरणीय चुनौतियों को देखते हुए सरकार ने धार्मिक स्थलों के साथ-साथ पर्यटन एवं शहरी परिवहन से जुड़ी कई रोपवे परियोजनाओं का खाका तैयार किया है। केंद्र और राज्य की साझेदारी से URDL का गठन रोपवे परियोजनाओं को योजनाबद्ध और व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए उत्तराखंड सरकार ने *2 सितंबर 2025 को उत्तराखंड रोपवेज डेवलपमेंट लिमिटेड (URDL)* का गठन विशेष प्रयोजन वाहन यानी SPV के रूप में किया। इसमें केंद्र सरकार की *49 प्रतिशत* और राज्य सरकार की *51 प्रतिशत हिस्सेदारी* है। URDL का उद्देश्य राज्य में रोपवे परियोजनाओं को विकसित करना, निवेश एवं तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना और पर्यटन तथा परिवहन के लिए आधुनिक कनेक्टिविटी तैयार करना है। इससे अलग-अलग परियोजनाओं को एक समन्वित नेटवर्क के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी।  केदारनाथ और हेमकुंड साहिब रोपवे से नई शुरुआत उत्तराखंड के सबसे महत्वपूर्ण रोपवे प्रोजेक्ट्स में *सोनप्रयाग-गौरीकुंड-केदारनाथ* और *गोविंदघाट-घांघरिया-हेमकुंड साहिब* रोपवे प्रमुख हैं। करीब *12.9 किलोमीटर लंबा सोनप्रयाग-गौरीकुंड-केदारनाथ रोपवे* लगभग 1,276.45 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से PPP मॉडल पर विकसित किया जा रहा है। परियोजना में 30 केबिन प्रस्तावित हैं और प्रत्येक केबिन में 10 यात्री यात्रा कर सकेंगे। इसका निर्माण मई 2026 से शुरू होकर मई 2032 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना से चारधाम यात्रा, विशेषकर केदारनाथ जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए यात्रा का अनुभव पूरी तरह बदलने की उम्मीद है। इसी तरह करीब *12.4 किलोमीटर लंबा गोविंदघाट-घांघरिया-हेमकुंड साहिब रोपवे* लगभग 1,162.26 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा है। इसके शुरू होने के बाद हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी जाने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को कठिन पहाड़ी मार्ग की जगह तेज और सुविधाजनक विकल्प मिलेगा। इन दोनों परियोजनाओं को उत्तराखंड में आधुनिक रोपवे परिवहन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 51 रोपवे परियोजनाओं का विशाल नेटवर्क राज्य सरकार ने उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों में कुल *51 रोपवे परियोजनाओं* की पहचान की है। इनकी प्रस्तावित कुल लंबाई लगभग *160.75 किलोमीटर* है। इन परियोजनाओं में धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ एडवेंचर टूरिज्म, इको-टूरिज्म, पर्यटन स्थलों की कनेक्टिविटी और शहरी परिवहन को भी शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य रोपवे को केवल तीर्थ स्थलों तक पहुंचने का साधन न बनाकर राज्य के व्यापक परिवहन एवं पर्यटन ढांचे का हिस्सा बनाना है। इनमें *कद्दूखाल-सुरकंडा देवी, देहरादून-मसूरी, जानकी चट्टी-यमुनोत्री, ठुलीगाड़-पूर्णागिरि और तपोवन-कुंजापुरी* जैसी परियोजनाएं विशेष महत्व रखती हैं।  सुरकंडा देवी रोपवे से कठिन चढ़ाई होगी आसान टिहरी गढ़वाल स्थित सुरकंडा देवी मंदिर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। मंदिर तक पहुंचने वाली कठिन चढ़ाई बुजुर्गों, बच्चों और अन्य यात्रियों के लिए चुनौतीपूर्ण रहती है। *कद्दूखाल-सुरकंडा देवी रोपवे* इस समस्या का समाधान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे मंदिर तक पहुंचना आसान और कम समय वाला होगा। साथ ही आसपास के क्षेत्रों में होटल, रेस्टोरेंट, स्थानीय हस्तशिल्प और अन्य पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है। यह परियोजना इस बात का उदाहरण बन सकती है कि किस तरह रोपवे धार्मिक पर्यटन के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर सकता है। देहरादून-मसूरी रोपवे बनेगा जाम का विकल्प पर्यटन सीजन में देहरादून-मसूरी मार्ग पर यातायात का भारी दबाव देखने को मिलता है। सड़क पर वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण जाम पर्यटकों और स्थानीय लोगों दोनों के लिए चुनौती बनता है। *देहरादून के पुरुकुल से मसूरी लाइब्रेरी चौक तक प्रस्तावित रोपवे* इस समस्या का आधुनिक समाधान बन सकता है। सड़क परिवहन के समानांतर एक वैकल्पिक और तेज परिवहन व्यवस्था विकसित होने से मसूरी की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इससे पर्यटकों का यात्रा समय घटने के साथ वाहनों की संख्या और उनसे होने वाले प्रदूषण के दबाव को भी कम करने में मदद मिल सकती है। यह परियोजना उत्तराखंड में रोपवे आधारित शहरी परिवहन की संभावनाओं को भी विस्तार देगी।  यमुनोत्री और पूर्णागिरि यात्रा होगी सुगम चारधाम यात्रा में यमुनोत्री धाम तक पहुंचना यात्रियों के लिए अपेक्षाकृत कठिन माना जाता है। *जानकी चट्टी (खरसाली)-यमुनोत्री रोपवे* बनने से श्रद्धालुओं, विशेषकर बुजुर्गों और दिव्यांग यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इसी तरह *ठुलीगाड़-पूर्णागिरि रोपवे* से चंपावत क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को नई गति मिल सकती है। पूर्णागिरि धाम में विशेष अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। रोपवे के माध्यम से सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध होने से स्थानीय व्यापार, होटल व्यवसाय और स्वरोजगार को भी लाभ मिल सकता है।  कुंजापुरी से जुड़ेगा आध्यात्मिक और एडवेंचर पर्यटन ऋषिकेश के निकट स्थित कुंजापुरी मंदिर धार्मिक आस्था के साथ प्राकृतिक सौंदर्य और हिमालयी दृश्यों के लिए भी प्रसिद्ध है। *तपोवन-कुंजापुरी रोपवे* को इसी व्यापक पर्यटन क्षमता को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रोपवे के माध्यम से पर्यटकों को यात्रा के दौरान गंगा घाटी और हिमालयी क्षेत्र के प्राकृतिक दृश्यों का अलग अनुभव मिलेगा। इससे ऋषिकेश के धार्मिक पर्यटन के साथ एडवेंचर और इको-टूरिज्म को भी विस्तार मिल सकता है।  त्रिवेणी घाट-नीलकंठ से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा ऋषिकेश में प्रस्तावित *त्रिवेणी घाट-नीलकंठ रोपवे* भी महत्वपूर्ण परियोजना है। लगभग 6 किलोमीटर के प्रस्तावित नेटवर्क में पहले चरण में करीब 4.1 किलोमीटर लंबा रोपवे त्रिवेणी घाट से नीलकंठ महादेव मंदिर तक विकसित करने की योजना है। आगे इसे त्रिवेणी घाट से आईएसबीटी तक जोड़ने की योजना भी प्रस्तावित है। नीलकंठ महादेव मंदिर में वर्षभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। सावन और महाशिवरात्रि जैसे अवसरों पर यात्रियों की संख्या और बढ़ जाती है। ऐसे में रोपवे से … Read more

गांवों में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार कर रही योगी सरकार, डिजिटल लाइब्रेरी से पंचायत उत्सव भवन तक फोकस

गांवों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ रही योगी सरकार, डिजिटल लाइब्रेरी से लेकर पंचायत उत्सव भवन तक पर जोर ग्रामीण युवाओं के लिए पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का नया केंद्र पंचायत भवन बनेंगे गांव के सामाजिक केंद्र, जवाबदेही और गुणवत्ता पर भी निगरानी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने के साथ-साथ पंचायतों को शिक्षा, डिजिटल संसाधन और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसी कड़ी में ग्राम पंचायत स्तर पर डिजिटल लाइब्रेरी, पंचायत उत्सव भवन और बहुउद्देशीय पंचायत भवनों के निर्माण एवं संचालन पर विशेष जोर दिया जा रहा है।    वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में प्रदेश की ग्राम पंचायत एवं वार्ड स्तर पर डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना के लिए 454 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही 1000 बहुउद्देशीय पंचायत भवनों के निर्माण के लिए करीब 57 करोड़ रुपये तथा प्रत्येक विधानसभा के ग्रामीण क्षेत्र में पंचायत उत्सव भवन/बारात घर के लिए 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।      ग्राम पंचायतों में स्थापित की जा रही डिजिटल लाइब्रेरियों का उद्देश्य केवल किताबें उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि गांव के बच्चों और युवाओं को ई-बुक्स, डिजिटल अध्ययन सामग्री और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़ी सामग्री पंचायत स्तर पर उपलब्ध कराना है। सरकार की योजना के तहत डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने और ग्रामीण युवाओं में पढ़ने की आदत विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। डिजिटल लाइब्रेरी परियोजना के तहत कई जिलों में फर्नीचर और पुस्तकों की आपूर्ति का काम पूरा हो चुका है, जबकि कुछ स्थानों पर भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जानी बाकी है। इसके साथ ही डिजिटल लाइब्रेरियों के लिए आईटी उपकरण, फर्नीचर, पुस्तकों और ई-कंटेंट की व्यवस्था तथा उनके रखरखाव के लिए मानक कार्यप्रणाली (SOP) पर भी जोर दिया गया है।   योगी सरकार की ग्रामीण विकास की सोच में पंचायत भवनों को केवल सरकारी कामकाज तक सीमित रखने के बजाय उन्हें गांव के सामाजिक, शैक्षिक और सामुदायिक केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर है। पंचायत उत्सव भवनों का उपयोग विवाह, सामाजिक और मांगलिक कार्यक्रमों के लिए किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने भी ग्राम पंचायतों में उत्सव भवन विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है और राज्य सरकार की ओर से इसके लिए वित्तीय सहयोग की व्यवस्था की गई है।      डिजिटल लाइब्रेरी के संचालन को लेकर उत्तरदायित्व एवं संचालन, भवन-सुरक्षा एवं स्वच्छता, पुस्तक एवं फर्नीचर प्रबंधन, आईटी उपकरण, निरीक्षण-रिपोर्टिंग एवं नागरिक फीडबैक तथा जवाबदेही एवं अनुपालन को प्रमुख बिंदु बनाया गया है। यानी सरकार केवल संसाधन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि उनके नियमित संचालन और उपयोगिता की निगरानी पर भी जोर दिया जा रहा है। इस पूरी पहल को योगी सरकार के उस विजन से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें गांवों को बेहतर शिक्षा, डिजिटल सुविधाओं, आधुनिक पंचायत व्यवस्था और सामुदायिक आधारभूत ढांचे से लैस कर ग्रामीण जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाने का प्रयास किया जा रहा है।      डिजिटल लाइब्रेरी से गांव के युवा डिजिटल दुनिया से जुड़ेंगे, जबकि पंचायत उत्सव भवन ग्रामीण समाज को सामुदायिक गतिविधियों के लिए बेहतर स्थान उपलब्ध कराएंगे। इस तरह पंचायतें केवल प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि गांव के विकास और सामाजिक परिवर्तन के केंद्र के रूप में विकसित हो रही हैं।

योगी सरकार की पहल से मजबूत हो रही शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था, 17 डायटों में वरिष्ठ प्रवक्ताओं को प्रभार

योगी सरकार के प्रयासों से मजबूत हो रही शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था, 17 डायटों में वरिष्ठ प्रवक्ताओं को प्रधानाचार्य का प्रभार – वरिष्ठता क्रम के आधार पर वरिष्ठ प्रवक्ताओं को सौंपी गई जिम्मेदारी – विशेष सचिव बेसिक शिक्षा, यतीन्द्र कुमार ने निदेशक एससीईआरटी को दिए आवश्यक कार्यवाही के निर्देश – डायटों के प्रभावी संचालन से शिक्षक प्रशिक्षण और शैक्षणिक गतिविधियों को मिलेगा संस्थागत संबल – एटा, इटावा और मऊ में भी अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता के साथ शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था को भी लगातार सुदृढ़ कर रही है। इसी क्रम में बेसिक शिक्षा विभाग के विशेष सचिव यतीन्द्र कुमार ने निदेशक, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तर प्रदेश को पत्र जारी कर 17 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में वरिष्ठ प्रवक्ताओं को वरिष्ठता क्रम के आधार पर प्रधानाचार्य पद का प्रभार दिए जाने के संबंध में आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही एटा, इटावा और मऊ के डायट में तीन वरिष्ठ प्रवक्ताओं को प्रधानाचार्य पद का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। योगी सरकार के विशेष सचिव की ओर से जारी पत्र में शासन द्वारा सम्यक विचारोपरांत डायटों के सुचारु संचालन के लिए संबंधित वरिष्ठ प्रवक्ताओं को प्रधानाचार्य पद का प्रभार दिए जाने का निर्णय बताया गया है। निदेशक एससीईआरटी को संबंधित अधिकारियों को प्रभार दिलाने और आवश्यक अग्रेतर कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। डायट, प्रदेश की शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। शिक्षकों के प्रशिक्षण, क्षमता संवर्धन, शैक्षणिक सहयोग और विद्यालयी शिक्षा में नवाचारों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने में इन संस्थानों की अहम भूमिका है। ऐसे में डायटों को प्रभावी नेतृत्व उपलब्ध कराना शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था को संस्थागत रूप से मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। 17 डायटों में वरिष्ठ प्रवक्ताओं को जिम्मेदारी शासन के निर्देश के अनुसार इनमें राजेश कुमार सिंह (बहराइच), राम प्रताप सिंह (श्रावस्ती), विनोद कुमार (हमीरपुर), मुक्तेश कुमार (फिरोजाबाद), संजय कुमार (फर्रुखाबाद), नवाब वर्मा (हाथरस), दीपक श्रीवास्तव (ललितपुर), अश्वनी प्रताप सिंह (जालौन), विश्वदीपक त्रिपाठी (चंदौली), विमलेश कुमार त्रिपाठी (मिर्जापुर), सुरिद्धि पाण्डेय (सोनभद्र), सुनील कुमार (बलिया), कुलदीप नारायण सिंह (देवरिया), दीनानाथ (कुशीनगर), नरेन्द्र सिंह (संतकबीर नगर), आशीष चौहान (शाहजहांपुर) और नन्दित कुमार (झांसी) शामिल हैं। इन्हें मिला अतिरिक्त प्रभार जिन तीन वरिष्ठ प्रवक्ताओं/अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है, उनमें पत्र में आराध्य उपाध्याय, वरिष्ठ प्रवक्ता, डायट अलीगढ़ को डायट एटा, अतुल कुमार सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक, इटावा को डायट इटावा तथा अतुल कुमार तिवारी, वरिष्ठ प्रवक्ता, डायट मऊ को डायट मऊ के प्रधानाचार्य पद का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने के लिए आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं।