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चित्रकूट में बाढ़ प्रभावित 800 परिवारों को राहत सामग्री वितरण, बेघर परिवारों को आवास हेतु भूमि आवंटन प्रमाणपत्र एवं राहत राशि

लखनऊ/चित्रकूट  मंदाकिनी नदी में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित चित्रकूट के 800 परिवारों को रविवार को राहत सामग्री वितरण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले की सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले बाढ़ आने पर तत्कालीन सरकार इसका संज्ञान तक नहीं लेती थी। राहत के नाम पर बहुत अधिक हो-हल्ला होने पर प्रभावितों को केवल सूखे ब्रेड दे दिए जाते थे, जबकि राहत के लिए आने वाला पूरा पैसा सपाई गुंडे खाकर हजम कर जाते थे और गरीब, कमजोर एवं वंचित लोगों को कुछ नहीं मिलता था। उन्होंने कहा कि पहले जहां बाढ़ प्रभावितों को एक किलो राहत सामग्री भी नहीं मिलती थी, वहीं अब करीब 50 किलो राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद 800 बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री वितरित की गई। बाढ़ में आश्रयहीन हुए परिवारों को आवास के लिए भूमि आवंटन प्रमाण पत्र तथा आपदा मोचक निधि से राहत राशि भी वितरित की गई। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रभावित लोगों से उनका हाल-चाल जाना और बच्चों को चॉकलेट देकर उनसे बातचीत की। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभु राम को जब वनवास हुआ था तो चित्रकूट ने उन्हें आश्रय दिया। अब चित्रकूटवासी संकट में हैं तो प्रभु का भक्त होने के नाते वे साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि सरकार हर स्थिति में गरीब और प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है। बाढ़ से प्रभावित गरीबों, किसानों, नौजवानों, महिलाओं, व्यापारियों और साधु-संतों को आश्वस्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिसका भी नुकसान हुआ है, सरकार उसे हर संभव मदद उपलब्ध कराएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चित्रकूट की पावन धरा को नमन करते हुए कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम ने लगभग 12 वर्ष जिस धरा पर रहकर ऋषि-मुनियों के सानिध्य में राम राज्य की परिकल्पना को साकार किया था, वह भूमि आज भी आस्था और साधना का प्रमुख केंद्र है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा की इस घड़ी में प्रभावित परिवार खुद को अकेला न समझें। डबल इंजन की सरकार भारतीय जनता पार्टी के कोटि-कोटि कार्यकर्ताओं के साथ उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने मंदाकिनी नदी में पिछले दिनों आई भीषण आपदा से हुई त्रासदी का पहले हवाई सर्वेक्षण किया और बाद में रामघाट सहित आसपास के प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर हालात का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस दिन चित्रकूट में अचानक बाढ़ आई, उस समय वह बलिया के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के दौरे पर थे। सूचना मिलते ही उन्होंने लखनऊ से डीजी पीएसी को निर्देश देकर एसडीआरएफ और पीएसी की अतिरिक्त फ्लड कंट्रोल कंपनियों को तत्काल चित्रकूट रवाना कराया। उस समय जिले में एसडीआरएफ की केवल एक कंपनी तैनात थी, लेकिन अगले दो से तीन घंटे के भीतर एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और पीएसी की फ्लड यूनिट की कुल आठ कंपनियां राहत एवं बचाव कार्य में जुट गईं और युद्ध स्तर पर अभियान चलाया गया। उसी दिन शाम को जिला प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर राहत कार्यों की समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि घरों में फंसे सभी लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहली बार मंदाकिनी नदी में इतने बड़े पैमाने पर जलस्तर बढ़ा है। गत वर्ष क्षेत्र में लगभग 360 मिलीमीटर वर्षा हुई थी, जबकि इस बार इसका स्तर लगभग दोगुना पहुंच गया। मध्य प्रदेश की ओर जाने वाला भारी वाहनों का पक्का पुल भी बह गया है। उन्होंने कहा कि जब एक मजबूत पुल तक बह सकता है तो सामान्य घरों की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। आपदा की इसी विकरालता को देखते हुए प्रशासन के साथ विस्तृत बैठक कर कार्ययोजना तय करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि नदी के कैचमेंट क्षेत्र में अनियोजित निर्माण ऐसी आपदाओं का बड़ा कारण बन सकता है। उन्होंने कहा कि नदी जब अपने स्वाभाविक स्वरूप में बहती है तो उसके दायरे में आने वाले अतिक्रमण और निर्माण बह जाते हैं। इसलिए कैचमेंट क्षेत्र में ऐसे निर्माण से बचना होगा और नदी के स्वाभाविक प्रवाह के लिए पर्याप्त मार्ग सुनिश्चित करना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी भीषण बाढ़ के बावजूद प्रभु श्रीराम, कामदनाथ, हनुमान और चित्रकूट के ऋषि-मुनियों की तपस्थली की कृपा से कोई जनहानि नहीं हुई। बाढ़ से प्रभावित परिवारों, व्यापारियों, मठ-मंदिरों और घाटों को सरकार देगी सहयोग मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावितों को आश्वस्त करते हुए कहा कि आपदा की इस घड़ी में वे अकेले नहीं हैं। सामान्य परिवारों, व्यापारियों, मठ-मंदिरों और घाटों को बाढ़ से जो भी नुकसान हुआ है, उसमें सरकार की ओर से सहयोग की व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने पहले ही निर्देश दे रखा है कि बाढ़ या अग्निकांड में किसी गरीब अथवा किसी अन्य व्यक्ति का पूरा घर नष्ट हो जाता है तो पात्रता के अनुसार उसे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नया आवास उपलब्ध कराया जाए। यदि वह प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए पात्र नहीं है तो मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत नया आवास और जमीन का पट्टा तत्काल उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की भी समुचित व्यवस्था की गई है। जहां जलजमाव हो गया है या अत्यधिक पानी आने के कारण लोग घिर गए हैं, उन्हें सुरक्षित राहत शिविरों में पहुंचाया जाए। राहत शिविरों में प्रभावित लोगों के लिए भोजन, सुरक्षा, चिकित्सा सहित हर प्रकार की सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। आप नहीं रह सकते तो हमारी जनता सूखा ब्रेड खाकर क्यों रहेगी सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2017 में बाढ़ राहत कार्यों के निरीक्षण का प्रसंग साझा करते हुए कहा कि उस समय उन्होंने अधिकारियों से पूछा था कि पीड़ित परिवारों को क्या सहायता दी जा रही है। जवाब में सूखा ब्रेड बताया गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा था कि यदि आपको 10 दिन तक केवल सूखा ब्रेड दिया जाए तो क्या आप रह पाएंगे। यदि आप नहीं रह सकते तो हमारी जनता क्यों रहेगी। इसके बाद उन्होंने पीड़ित परिवारों के लिए पूरी राहत सामग्री की किट तैयार करने के निर्देश दिए। राहत सामग्री में 26 सामान हैं, इसका वजन लगभग 50 किलो  सीएम योगी ने कहा कि हर जरूरतमंद परिवार को राहत … Read more

​जिज्ञासा से हुनर तक, युवाओं के कौशल विकास से ही संभव है प्रगति -श्री विश्व विजय सिंह तोमर

​रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य गठन के रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में प्रदेश के युवाओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ विजन और ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के संकल्प से जोड़ने के उद्देश्य से नारायणपुर स्थित ए.जी. ऑडिटोरियम में ‘युवा उड़ान’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 16 से 24 वर्ष आयु वर्ग के मेधावी विद्यार्थियों, राष्ट्रीय- राज्य स्तरीय खिलाड़ियों, दिव्यांगजनों, कौशल विकास प्रशिक्षणार्थियों और आत्मसमर्पित पूर्व नक्सली युवाओं की व्यापक सहभागिता रही। युवाओं के हुनर, शिक्षा और खेल प्रतिभा का राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप ने ‘युवा उड़ान’ कार्यक्रम में युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ गठन के इस रजत जयंती वर्ष में प्रदेश की युवा शक्ति ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ और ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के विजन को साकार करेगी। बस्तर क्षेत्र के प्रतिभावान विद्यार्थियों, राष्ट्रीय खिलाड़ियों और कौशल विकास से जुड़ रहे युवाओं की सक्रिय भागीदारी राज्य की प्रगति की नई दिशा तय कर रही है। राज्य सरकार युवाओं के हुनर, शिक्षा और खेल प्रतिभा को बढ़ावा देकर उन्हें आत्मविश्वास के साथ राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए हर संभव अवसर प्रदान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।       ​ ​हुनर और जिज्ञासा से बनेगी युवाओं की पहचान-  तोमर ​राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष  विश्व विजय सिंह तोमर ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि केवल किताबी शिक्षा पर्याप्त नहीं है; युवाओं को अपने हुनर, कौशल, जिज्ञासा और रचनात्मकता को लगातार विकसित करना होगा। उन्होंने कहा कि प्रतिभा को सही दिशा और मंच देना ही श्युवा उड़ानश् का मुख्य ध्येय है, जिससे युवाओं में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और राष्ट्र निर्माण की सोच विकसित हो सके। उन्होंने पंजीयन के लिए युवा आयोग की वेबसाइट और क्यूआर कोड/गूगल फॉर्म की जानकारी भी साझा की। ​विशेषज्ञों ने साझा किए राष्ट्र निर्माण के मंत्र  ​कार्यक्रम के बौद्धिक सत्रों में विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन दिया।​ युवा शक्ति-राष्ट्र शक्ति पर केंद्रित डॉ. मीनाक्षी ठाकुर ने विकसित भारत 2047, आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया में युवाओं की निर्णायक भूमिका पर प्रकाश डाला।​ डॉ. विश्वजीत ने विद्यार्थियों को इस राष्ट्रीय विषय के संवैधानिक व व्यावहारिक पहलुओं को सरल भाषा में समझाया तथा एक देश-एक चुनाव की महत्ता पर प्रकाश डाला। इसी तरह डॉ. सतीश पाण्डेय ने प्रेरक कहानियों के माध्यम से सकारात्मक सोच और निरंतर सीखने की ललक बनाए रखने का आह्वान किया। ​प्रतिभावान विद्यार्थियों और उत्कृष्ट खिलाड़ियों का किया गया सम्मान शिक्षा और खेल के क्षेत्र में जिले का नाम रोशन करने वाली प्रतिभाओं को मंच पर विशेष रूप से सम्मानित किया गया। ​शिक्षा क्षेत्र में कक्षा 10वीं में 94.33 प्रतिशत अंक लाकर जिले में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली छात्रा भाविका देवांगन तथा 94ः अंकों के साथ द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाली कोविता कोर्राम को सम्मानित किया गया। ​खेल क्षेत्र में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के मलखंभ विजेता संताय पोटाई व मोनिका पोटाई, खेलो इंडिया फुटबॉल उपविजेता शशिकांत कुमेटी व मनीष कोवाची; ऑल इंडिया खो-खो क्वालीफायर अमृता गोटा, नेशनल स्कूल गेम्स खो-खो विजेता शामुएल कल्लो व किशोर कावड़ो तथा राष्ट्रीय खिलाड़ी दिव्या कांगे को खेल पुरस्कार से नवाजा गया।  ​इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, डीएफओ सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षक और युवा उपस्थित रहे।  

अधिवेशन को लेकर आज जिला बुरहानपुर मे राष्ट्रीय संगठन मंत्री के नेतृत्व हुई बैठक

भोपाल  आगामी 26 और 27 सितंबर को राजस्थान के जोधपुर शहर में अखिल भारत हिन्दू महासभा का राष्ट्रीय अधिवेशन का आयोजन है इस विषय को लेकर प्रदेश उपाध्यक्ष अरुणा पारे और जिलाध्यक्ष आंनद मेहता ने जिला बैठक का आयोजन किया गया.   अधिवेशन में मध्यप्रदेश के साथ साथ समस्त प्रदेशों के पदाधिकारी समलित होंगे  बैठक में राष्ट्रीय संगठन मंत्री जी के द्वारा समस्त प्रदेशों से पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं से पहुंचने का आव्हान किया गया बैठक में उपस्थित रहे प्रदेश उपाध्यक्ष ओ पी सिंह सहाब, प्रदेश मंत्री प्रवीण देवताले, महिला प्रदेश महामंत्री किरण जी व्यास, संभाग अध्यक्ष दीपा अठवाल, संत संभाग अध्यक्ष बाल्या महाराज, अशोक जी भालेराव, संजय मिश्रा, बापू महाराज पंडित जी, नीलेश जी जेसवाल, उमेश भाई, मुकेश डालमिया, सुनील महाजन, संजय मिश्रा जी शैलेश निभोरे जी,विनोद पाटिल जी,आशा जी नेपा तहसील अध्यक्ष,सहित सभी जिला कार्यकारिणी के सदस्य मौजूद थे  

CO-0238 का विकल्प बनेंगी गन्ने की 6 नई प्रजातियां, बीमारी से राहत के साथ बढ़ेगा चीनी उत्पादन

करनाल देश में चीनी उद्योग और गन्ना किसान इस समय दोहरी चुनौती से जूझ रहे हैं। वर्षों तक उत्तर भारत के खेतों में राज करने वाली गन्ने की वंडर किस्म सीओ-0238 में रेड रॉट (लाल सड़न) बीमारी के तेजी से फैलने से पैदावार और चीनी उत्पादन पर बुरा असर पड़ा है। दूसरी ओर, गन्ने का रकबा घटने से चीनी मिलों के पेराई सत्र प्रभावित हो रहे हैं। इस बढ़ते संकट के बीच भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के करनाल, लखनऊ संस्थान और महाराष्ट्र के वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने ऐसी 6 उन्नत प्रजातियां तैयार की हैं, जो देश के चीनी उद्योग को नई संजीवनी देने जा रही हैं। शोध और विकास के किस मुहाने पर खड़ी हैं नई प्रजातियां? 1.गन्ना प्रजनन अनुसंधान संस्थान करनाल l सीओ-16030: यह किस्म अंतिम रिलीज प्रक्रिया में है। चीनी मिलों में इसके शुद्ध बीज बढ़ाने का काम चल रहा है ताकि किसानों को जल्द व्यावसायिक रूप से उपलब्ध कराया जा सके। l सीओ-17018: यह अगेती किस्म वर्तमान में अखिल भारतीय समन्वित गन्ना अनुसंधान परियोजना (एआइसीआरपी) के तहत एडवांस्ड वैराइटल ट्रायल के चरण में है। विज्ञानी इसके शर्करा प्रतिशत और रोग प्रतिरोधकता की गहन निगरानी कर रहे हैं। 2. भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (आइआइएसआर) लखनऊ सीओ-एलके14201: यह किस्म शोध का चरण सफलतापूर्वक पार कर भारत सरकार की केंद्रीय प्रजाति विमोचन समिति (सीवीआरसी) द्वारा नोटिफाइड हो चुकी है। वर्तमान में यह उत्तर प्रदेश व मध्य भारत में किसानों के खेतों तक पहुंच चुकी है। सीओ-एलके 15201 : इस अगेती किस्म ने राष्ट्रीय परीक्षण पूरे कर लिए हैं। आइआइएसआर लखनऊ के फार्मों पर इसके शुद्ध बीजों का संवर्धन कर इसे राज्य स्तरीय मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया गया है। 3. वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट (वीएसआइ), पुणे महाराष्ट्र वीएसआइ 434: महाराष्ट्र और प्रायद्वीपीय भारत के लिए यह उच्च-शर्करा किस्म आधिकारिक रूप से रिलीज हो चुकी है और चीनी मिलों के कमान क्षेत्रों में व्यापक रूप से बुआई शुरू कर दी गई है। सीओ-एम12085: वीएसआइ के प्रयास से विकसित यह किस्म नोटिफाइड होकर महाराष्ट्र के किसानों के लिए उपलब्ध कराई जा रही है। यह विशेषकर पेड़ी फसल और जलभराव वाले क्षेत्रों के लिए वरदान साबित होगी। देश में गिरते चीनी उत्पादन में संकटमोचन बनेंगी गन्ने की छह नई प्रजातियां एसबीआइ करनाल से डॉ. रविंद्र ने बताया कि छह नई किस्मों को 14 प्रतिशत या इससे भी ऊपर रिकवरी रेट के साथ धरातल पर उतारने का प्रयास विज्ञानियों द्वारा किया जा रहा है। सीओ-16030, सीओएलके 14201 और वीएसआइ 434 जैसी अगेती किस्में 9 से 10 महीने में पककर तैयार हो जाती हैं। इनसे पेराई सत्र की शुरुआत में ही 14 प्रतिशत तक चीनी रिकवरी मिलेगी, कई क्षेत्रों में आंकड़ा इससे भी पार जा सकता है। खास बात ये भी है कि यह रेड राट से पूर्ण सुरक्षित है। l आइसीएआर के एसबीआइ क्षेत्रीय केंद्र करनाल, आइआइएसआर लखनऊ और महाराष्ट्र के वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट में तैयार की जा रही हैं यह अत्याधुनिक किस्में l सर्वाधिक 13 से 14 प्रतिशत रिकवरी देने वाली किस्म सीओ-15023 एकल किस्म पर निर्भरता जोखिम भरी, इसलिए छह नई प्रजातियां इस संकट का करेंगी स्थायी समाधान  

बिहार में बाढ़ का कहर तेज, गंगा का पानी HFL के पार; छपरा में बांध टूटा, मुंगेर में डायवर्सन बहा

पटना पटना में गंगा नदी विकराल रूप धारण कर चुकी है। गंगा नदी के जलस्तर में वृद्धि औरहा गांधी घाट पर जलस्तर के उच्चतम बाढ़ स्तर (Highest Flood Level) को पार करने के बाद अब पानी का दबाव डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में रहेगा। इसका प्रभाव अगले 1 से 3 दिनों तक हाथीदह एवं उसके बाद के डाउनस्ट्रीम गेज स्टेशनों पर देखने को मिल सकता है तथा यह हाथीदाह में पुराने उच्चतम बाढ़ स्तर को पार कर सकता है। इसके मद्देनजर बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर, कटिहार जिले के गंगा के किनारे वाले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। गांधी घाट पर बढ़े हुए जलस्तर की लहर के डाउनस्ट्रीम की ओर बढ़ने को देखते हुए संबंधित पदाधिकारियों एवं क्षेत्रीय अधिकारियों को सतर्क रहने तथा जलस्तर की लगातार निगरानी करने को कहा गया है। साथ ही, नदी के जलस्तर, तटबंधों, संवेदनशील स्थलों एवं निचले इलाकों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करें। बिहार में 11 जिलों के 66 प्रखंडों की 330 ग्राम पंचायतों में बाढ़ का पानी फैल गया है। आपदा प्रबंधन विभाग का कहना है कि इससे 19.57 लाख आबादी प्रभावित हुई है। बाढ पीड़ितों के बीच राहत-बचाव कार्य चलाए जा रहे हैं। 110 सामुदायिक रसोई केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। 326 बाढ़ शरणार्थी शिविरों में भोजन और चिकित्सा की व्यवस्था की गई है। छपरा में मही नदी का बांध टूटा छपरा में दरियापुर के सेमरहिया-मोहन कोठियां के पास रविवार की सुबह मही नदी का बांध टूट गया। बांध टूटने की वजह से छह से अधिक पंचायत बाढ़ की चपेट में आ गए। बांध की मरम्मत का प्रयास किया जा रहा है। बांध टूटने के बाद स्थिति को देखते हुए अब सीओ कैंप कर रहे हैं। सारण डीएम भी दरियापुर के लिए रवाना हो चुके हैं। बता दें कि इससे पहले शुक्रवार की देर रात दिघवारा में भी मही नदी का बांध टूटा था। इधर, एनएच-19 पर भी बाढ़ के पानी का तेज बहाव हो रहा है। मुंगेर: महाने नदी पर बना डायवर्सन चार दिन में दूसरी बार बहा मुंगेर जिले में टेटिया बंबर प्रखंड के बरसंडा के समीप महाने नदी पर पुल निर्माण के लिए बनाया गया अस्थायी डायवर्सन चार दिनों के अंदर दूसरी बार तेज धारा में बह गया। इससे प्रखंड की आधी से अधिक आबादी का थाना, अस्पताल और बंबर बाजार से एक बार फिर सीधा संपर्क टूट गया है। जानकारी हो कि लगातार बारिश से महाने नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण गुरुवार सुबह डायवर्सन बह गया था। विभाग के निर्देश पर संवेदक द्वारा मिट्टी डालकर उसे पैदल और दोपहिया वाहनों के चलने लायक बनाया गया था, लेकिन शनिवार रात हुई तेज बारिश के बाद नदी में आई बाढ़ में एक बार फिर डायवर्सन बह गया है। इससे प्रखंड की आधी से अधिक आबादी का थाना, अस्पताल, बंबर बाजार से सीधा संपर्क भंग हो गया। संपर्क भंग होने से आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कत मरीजों और स्कूली बच्चों को हो रही है। लोगों को लंबी दूरी तय कर आवागमन करना पड़ रहा है।

झारखंड का राजस्व संग्रह लक्ष्य से दूर, अगस्त में GST कलेक्शन 938 करोड़ के करीब

 रांची वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए वाणिज्यिक कर विभाग के ताजा आंकड़ों ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में विभाग के अधिकारियों के प्रयास का असर ताे दिख रहा है, लेकिन इसके बावजूद जीएसटी कलेक्शन लक्ष्य से काफी कम है। रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2026 में राजस्व संग्रह में पिछले साल की तुलना में गिरावट दर्ज की गई है। विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में कुल सब-टोटल कलेक्शन 1,709.50 करोड़ रुपये रहा, जो अगस्त 2025 के 1,919.11 करोड़ रुपये से 10.92 प्रतिशत कम है। रिपोर्ट के अनुसार, टैक्स संग्रह में सबसे बड़ी गिरावट जीएसटी कैटेगरी में देखी गई। प्रदेश के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने इसकी संभावना पहले ही व्यक्त की थी कि राज्य सरकार के राजस्व संग्रह पर असर पड़ सकता है। अगस्त 2026 में कुल जीएसटी कलेक्शन 937.11 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल इसी महीने के 1,200.77 करोड़ रुपये के मुकाबले 21.96 प्रतिशत कम है। इसमें इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स सेटलमेंट में सबसे ज्यादा 58.19 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई, जो 449.10 करोड़ रुपये से घटकर सिर्फ 187.77 करोड़ रुपये रह गई। वैट संग्रह से मिली राहत आंकड़ों को देखें तो राहत की बात यह रही कि वैट में अच्छी बढ़त देखने को मिल रही है। अगस्त 2026 में वैट कलेक्शन 695.90 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के 602.76 करोड़ रुपये से 15.45 प्रतिशत अधिक है। इसी तरह, कुल नान-जीएसटी कलेक्शन में भी 7.52 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जो 772.39 करोड़ रुपये रही। हालांकि प्रोफेशनल टैक्स संग्रह में भारी गिरावट 46.63 प्रतिशत दर्ज की गई। विभाग के लिए आने वाला समय चुनौतीपूर्ण वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कुल वार्षिक लक्ष्य 24 हजार करोड़ रुपये रखा गया है। अगस्त 2026 तक (अप्रैल से अगस्त तक) विभाग ने 8,172.70 करोड़ रुपये जुटाए हैं, जो लक्ष्य का सिर्फ 34.05 प्रतिशत है। अगर इसी रफ्तार से गिरावट जारी रही, तो विभाग के लिए वार्षिक लक्ष्य को पूरा करना चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। कुल कलेक्शन में भी पिछले वर्ष की तुलना में 15.14 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। वरीय अधिकारियों को मानना है कि आइजीएसटी सेटलमेंट में आई भारी कमी चिंता का विषय है, जबकि वैट कलेक्शन में बढ़त से राज्य के घरेलू कर राजस्व में कुछ सुधार का संकेत मिलता है। विभाग अब बाकी बचे महीनों में लक्ष्य हासिल करने के लिए रणनीति बनाने में जुट गया है। अप्रैल से अगस्त तक राजस्व संकलन में झारखंड पांच प्रतिशत पीछे है, नवंबर आते-आते हम इसकी भरपाई के लिए पूरा प्रयास करेंगे और अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि इसकी भरपाई करते हुए आगे बढ़ जाएंगे। जिन अधिकारियों का प्रयास बेहतर होगा उन्हें विभाग पुरस्कृत करेगी और जिनका नहीं होगा उन्हें दंडित भी किया जा सकता है। -राधाकृष्ण किशोर, वित्त मंत्री, झारखंड सरकार।

प्रदूषित जल के प्रभाव एवं समाधान के लिए कलेक्टर-एसपी ने किया मेघनगर क्षेत्र का निरीक्षण

झाबुआ झाबुआ मेघनगर औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाले प्रदूषित जल के प्रभाव का मैदानी स्तर पर आकलन करने तथा समस्या के स्थायी समाधान के लिए कार्ययोजना तैयार करने के उद्देश्य से कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट एवं पुलिस अधीक्षक श्री देवेन्द्र पाटीदार ने शनिवार को मेघनगर एवं आसपास के प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक ने औद्योगिक इकाइयों से नालों में सीपेज के माध्यम से पहुंच रहे प्रदूषित जल को एकत्र कर उपचारित करने की व्यवस्था का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने प्रदूषित जल के संग्रहण के लिए निर्माणाधीन दो कॉमन एफ्लुएंट कलेक्शन सम्प (Common Effluent Collection Sump) का निरीक्षण किया। इन सम्प के माध्यम से औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाले एफ्लुएंट को एकत्र कर कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) तक पहुंचाया जाएगा, जहां उसका निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उपचार किया जाएगा। कलेक्टर डॉ. भरसट ने AKVN के अधिकारियों को निर्देश दिए कि दोनों कॉमन एफ्लुएंट कलेक्शन सम्प का शेष निर्माण कार्य एवं आवश्यक कनेक्शन आगामी 7 दिवस के भीतर अनिवार्य रूप से पूर्ण किए जाएं, ताकि प्रदूषित जल को नालों में जाने से रोककर एकत्रित किया जा सके तथा उसे उपचार के लिए CETP तक पहुंचाया जा सके। उन्होंने कार्य को प्राथमिकता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। इसके पश्चात कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक ने झायड़ा क्षेत्र में प्रदूषित जल से प्रभावित नाले का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों से प्रदूषित जल के प्रवाह, उसके स्रोत एवं आसपास के क्षेत्र पर पड़ रहे प्रभाव के संबंध में जानकारी प्राप्त की गई। साथ ही झायड़ा स्थित इंटेक वेल का भी निरीक्षण किया गया निरीक्षण के दौरान कलेक्टर डॉ. भरसट ने झायड़ा में स्थित हैंडपंप के पानी की स्थिति भी देखी तथा स्वयं पानी पीकर उसकी प्रत्यक्ष रूप से जांच की। हैंडपंप का पानी स्वच्छ पाया गया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को क्षेत्र में पेयजल की गुणवत्ता पर सतत निगरानी रखने के निर्देश दिए। कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक ने अनास नदी पर स्थित AKVN की जल प्रदाय व्यवस्था का भी निरीक्षण किया तथा जल प्रदाय की वर्तमान स्थिति एवं संबंधित व्यवस्थाओं की जानकारी ली। कलेक्टर डॉ. भरसट ने कहा कि निरीक्षण का उद्देश्य प्रदूषित जल के प्रभाव की वास्तविक स्थिति का मैदानी स्तर पर आकलन करने के साथ ही उसके प्रभावी एवं दीर्घकालीन समाधान के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करना है। उन्होंने संबंधित विभागों एवं एजेंसियों को समन्वय के साथ कार्य करते हुए औद्योगिक प्रदूषण की समस्या के समाधान के लिए आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस दौरान पूर्व विधायक कलसिंह भाबर, पुलिस अधीक्षक देवेन्द्र पाटीदार, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत जितेन्द्रसिंह चौहान, अपर कलेक्टर सी एस सोलंकी,अनुविभागीय अधिकारी राजस्व मेघनगर सुश्री अवनधती प्रधान एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

सिर्फ 30 सेकंड में मचा हड़कंप, 50 हजार फीट ऊंची राख; इंडोनेशिया में कई फ्लाइट्स रद्द

सुमात्रा इंडोनेशिया में रविवार सुबह अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी फट गया. विस्फोट के बाद राख के दो गुबार बने. इनमें से एक 20 हजार फीट तक पहुंचा, जबकि दूसरा लगभग 50 हजार फीट की ऊंचाई तक गया. राख फैलने के कारण जकार्ता के सोएकार्नो-हट्टा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कुछ घंटे उड़ान संचालन रोकना पड़ा।  यह ज्वालामुखी जावा और सुमात्रा द्वीपों के बीच सुंडा जलडमरूमध्य (सुंडा जलसंधि) में स्थित है. भूवैज्ञानिक एजेंसी के मुताबिक, यहां शुक्रवार से गतिविधि बढ़ी हुई थी. रविवार सुबह 3:53 बजे करीब 30 सेकंड तक विस्फोट हुआ. निगरानी कैमरे में ज्वालामुखी से निकलती लावा की चमक भी दिखाई दी. फिलहाल किसी की मौत की खबर नहीं है. लोगों को सक्रिय क्रेटर से कम से कम 3 किलोमीटर दूर रहने की सलाह दी गई है।  आसमान में 50 हजार फीट तक पहुंची राख विस्फोट के बाद राख के दो अलग-अलग गुबार बने. पहला करीब 20 हजार फीट की ऊंचाई तक पहुंचा. यह उत्तर-पूर्व दिशा में बढ़ा, जिससे जकार्ता, बैंटन, पश्चिमी जावा के कुछ हिस्सों पर असर पड़ा।  दूसरा गुबार 50 हजार फीट तक पहुंचा. यह पश्चिम और उत्तर-पश्चिम की तरफ बढ़ा. इसकी वजह से बैंटन, लैंपुंग, बेंगकुलु, दक्षिणी सुंडा जलडमरूमध्य और सुमात्रा के पश्चिम में हिंद महासागर के कुछ हिस्से प्रभावित हुए।  जकार्ता एयरपोर्ट पर थमीं उड़ानें राख फैलने के खतरे को देखते हुए सोएकार्नो-हट्टा एयरपोर्ट ने सुबह 5:30 बजे से 9:30 बजे तक उड़ान संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया. यात्रियों ने टिकट का पैसा वापस लेने की कोशिश की. कुछ लोग अपना चेक-इन सामान भी वापस लिए।  इससे रविवार को 209 फ्लाइट मूवमेंट प्रभावित हुए. करीब 22,800 यात्री इसकी चपेट में आए. घरेलू उड़ानों में मकासर जाने वाला रूट भी प्रभावित रहा. अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में सिंगापुर जाने वाली फ्लाइट्स पर सबसे ज्यादा असर पड़ा. हांगकांग, सिडनी, एम्स्टर्डम, सियोल, दोहा और कुआलालंपुर की उड़ानों में भी रद्दीकरण, देरी या समय में बदलाव हुआ।  170 विमान एयरपोर्ट पर ही खड़े रहे रात में एयरपोर्ट पर खड़े किए गए 170 विमान वहीं मौजूद रहे. नागरिक उड्डयन विभाग एयरलाइंस, एयरपोर्ट संचालकों, एयर नेविगेशन सेवाओं और मौसम विभाग के साथ मिलकर हालात पर नजर रख रहा है।  यात्रियों को सलाह दी गई है कि एयरपोर्ट निकलने से पहले अपनी एयरलाइन से फ्लाइट की ताजा स्थिति जरूर जांच लें. अधिकारियों ने जरूरी न होने पर फिलहाल एयरपोर्ट जाने से बचने को भी कहा है. उड़ानों की बहाली के बाद भी विमान की आवाजाही, उपलब्ध विमानों तथा टर्मिनल पर यात्रियों की भीड़ पर असर पड़ सकता है।  3 किलोमीटर दूर रहने की चेतावनी गनीमत रही कि विस्फोट में किसी की मौत की खबर नहीं है. प्रशासन ने लोगों को निकालने का आदेश भी नहीं दिया है. सबसे नजदीकी बस्ती 16 किलोमीटर से ज्यादा दूर है. फिर भी लोगों को सक्रिय क्रेटर से कम से कम 3 किलोमीटर दूर रहने की सलाह दी गई है।  अनाक क्राकाटोआ चार स्तर वाली चेतावनी व्यवस्था में दूसरे सबसे ऊंचे स्तर पर है. 2018 में भी इस ज्वालामुखी के विस्फोट के बाद सुनामी आई थी. उस घटना में जावा और सुमात्रा में कम से कम 430 लोगों की मौत हुई थी. वैज्ञानिकों के मुताबिक, उस घटना के बाद ज्वालामुखी का द्वीप अपने पुराने आकार का करीब एक-चौथाई रह गया है। 

चित्रकूट में सीएम योगी ने बाढ़ पीड़ितों के घावों पर लगाया मरहम, बांटी राहत सामग्री, ढहे मकानों के लिए दिए चेक

चित्रकूट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को अपने एक दिवसीय दौरे पर धर्मनगरी चित्रकूट पहुंचे। यहां पर मुख्यमंत्री ने भीषण बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों का हवाई और जमीनी निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने मंदाकिनी नदी की बाढ़ से प्रभावित हुए सैकड़ों परिवारों से मुलाकात कर उनका दुख-दर्द जाना और उन्हें राशन किट व राहत सामग्री वितरित की। आपदा की इस घड़ी में त्वरित सहायता पहुंचाते हुए मुख्यमंत्री ने उन तीन बाढ़ पीड़ितों में से प्रत्येक को 1 लाख 20 हजार रुपये के चेक सौंपे, जिनके आशियाने बाढ़ की भेंट चढ़ गए थे वहीं कुछ लाभार्थियों को भूमि आवंटन प्रमाण पत्र भी दिये। प्रशासन अभी सर्वे करा रहा है, शीघ्र ही अन्य प्रभावितों को भी ऐसी ही मदद दी जाएगी। हर वर्ग को मदद का दिया भरोसा राहत सामग्री वितरण के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में उत्तर प्रदेश सरकार पूरी मजबूती के साथ बाढ़ पीड़ितों के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि किसी भी पीड़ित को परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। सरकार द्वारा हर वर्ग के सभी प्रभावित लोगों को बिना किसी भेदभाव के हर संभव मदद दी जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि राहत कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सीएम योगी ने दिया चेक व भूमि आवंटन प्रमाणपत्र बाढ़ प्रभावित लोगों का दर्द व राहत कार्य की ताजा स्थिति जानने आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चित्रकूट के रामायण मेला में आयोजित राहत सामग्री वितरण कार्यक्रम में मंच से जहां पूर्ण रूप से मकान छतिग्रस्त हो जाने पर मुकेश, लल्लू और चुन्नीलाल में प्रत्येक को 1 लाख 20 हजार रुपए के चेक प्रदान किए तो वही राम सूरज और सूरज कली को भूमि आवंटन प्रमाणपत्र प्रदान किया। सिर्फ योगी जी ही इतनी जल्दी राहत पहुंचाने आ सकते हैं, कह कर पीड़ितों ने जताया आभार मुख्यमंत्री के हाथों तुरंत मदद पाकर बाढ़ पीड़ित खुश नजर आए। राहत सामग्री और पक्के मकान का आश्वासन पाकर लोगों ने मुख्यमंत्री का दिल से आभार जताया। सीतापुर मलकाना इलाके की रहने वाली रानी व मंजू ने बताया कि बाढ़ में हमारा पूरा घर डूब गया था और गृहस्थी का सारा सामान बर्बाद हो गया था। आज सुख्यमंत्री जी ने खुद आकर हमें राशन किट दी है जिससे हमें बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री जी ने हमें नया घर बनवाने का भरोसा भी दिया है। कटरा गूजर गांव की रहने वाली आशा ने बताया कि बाढ़ में हमारा मकान डूब गया था। लेकिन प्रशासन और योगी सरकार की सजगता के कारण बाढ़ के पहले दिन से ही हमें लगातार खाने-पीने का सामान मिल रहा था। आपदा के बीच भी हमें भूखा नहीं सोने दिया गया। वहीं एक अन्य बाढ़ पीड़ित ज्ञान सिंह ने कहा कि मेरा कच्चा मकान बाढ़ में ढह गया था। आज राशन किट भी मिली और घर बनवाने का भी आश्वासन मिला है। मैंने अपने जीवन में ऐसे मुख्यमंत्री कभी नहीं देखा जो इतनी जल्दी खुद पीड़ितों के बीच आकर उनका दुख-दर्द बांटें। जो योगी जी ने किया, वह आज तक किसी मुख्यमंत्री ने नहीं किया। चित्रकूट की जनता और जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के इस त्वरित दौरे और संवेदनशीलता की जमकर सराहना की है। बाढ़ क्षेत्रों का दौरा करने के बाद मुख्यमंत्री ने स्थानीय प्रशासन के साथ समीक्षा बैठक कर स्थिति को जल्द से जल्द सामान्य करने और पुनर्वास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।

मोहाली में बिजनेस वुमन से दुष्कर्म का मामला, सोशल मीडिया पर आरोपी से हुई थी दोस्ती

मोहाली  मोहाली की सोशल मीडिया ब्लॉगर एवं बिजनेस वुमन के रेप केस की शिकायत कॉपी सामने आई है।‌ शिकायत के मुताबिक आरोपी सोशल मीडिया के जरिए उसके संपर्क में आया और धीरे-धीरे विश्वास जीतकर नजदीकियां बढ़ाईं। इसके बाद उसके फ्लैट पर आया और गन पॉइंट पर रेप किया। ब्लॉगर के बताया कि आरोपी ने अश्लील वीडियो-फोटो वायरल करने की धमकी देकर उसे ब्लैकमेल किया। इसके बाद उसने पुलिस को शिकायत दी। शनिवार (5 सितंबर) को ब्लॉगर मोहाली कोर्ट में पेश हुई। उसने पुलिस जांच पर नाराजगी जताई है। उसका आरोप है कि अदालत के निर्देशों के बावजूद जांच के दौरान उससे संपर्क नहीं किया गया। ब्लॉगर का कहना है कि उसे कानून और न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। ब्लॉगर के वकील एचएस धनोआ ने कहा कि हमने केस की अनट्रेस कॉपी लेने के लिए अप्लाई किया है। अब इस मामले में कानूनी जंग लड़ेंगे। शिकायत में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की 5 अहम बातें…     सोशल मीडिया पर हुई दोस्ती: पुलिस को दी शिकायत में पीड़िता ने बताया कि मैं बिजनेस वुमन और सोशल मीडिया ब्लॉगर हूं। आरोपी गुरविंदर सिंह उर्फ गुरी चहल मुझसे सोशल मीडिया पर संपर्क में आया था। मेरे ब्लॉग में धीरे-धीरे दिलचस्पी बढ़ाकर मेरे से नजदीकियां बढ़ाईं और विश्वास जीता।     ऑर्डर देने के बहाने आकर रेप किया: 27 नवंबर 2025 को आरोपी सामान ऑर्डर करने के बहाने मेरे फ्लैट पर आया। इसके बाद मेरे इनकार करने के बाद आरोपी ने गन पॉइंट मेरे से जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए। विरोध करने पर उसने मुझे व मेरे परिवार को जान से मारने की धमकियां दीं। इसके बाद मैं डर गई। मैंने इस संबंधी शिकायत दर्ज नहीं करवाई। मैंने उससे अपने आप को बहुत दूर कर लिया।     अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी: 2 महीने बाद जनवरी 2026 में आरोपी ने मुझे दोबारा फोन व स्नैपचैट पर ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। साथ ही धमकी दी कि उसके पास मेरे अश्लील वीडियो व फोटो हैं। अगर मैंने उसकी बातें नहीं मानीं तो उसे वायरल कर देगा।     वर्क प्लेस पर पहुंचा, गालियां दीं: इसके बाद आरोपी अपने अज्ञात साथियों, ड्राइवरों व बॉडीगार्ड व सरकारी सिक्योरिटी मुलाजिमों सहित मेरे वर्क प्लेस पर आया। आरोपी ने मुझे गालियां निकालीं, डराया और जान से मारने की धमकियां दीं।     दोबारा फिर तंग किया तो पहुंची पुलिस तक: 25 अप्रैल को आरोपी ने स्नैपचैट पर कॉल कर मुझे अपने फ्लैट पर जाने व शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया। साथ ही उसने अपने पुराने आपराधिक रिकॉर्ड, गैंगस्टरों से संबंधी धमकी दी। इसके बाद उसी दिन शाम को आरोपी ने मेरी ईमेल आईडी पर धमकी भरे अश्लील मैसेज भेजे। इसके बाद मैंने हिम्मत कर अपनी सारी बात वकील को बताई। इसलिए उसके खिलाफ बनती कार्रवाई की जाए। जांच की सर्टिफाइड कॉपी की मांग की पुलिस ने 24 जुलाई को अदालत में अनट्रेस रिपोर्ट दाखिल की थी। पुलिस के अनुसार, पीड़िता अदालत में बयान दर्ज करवाने के लिए पेश नहीं हो रही थी। अब पीड़िता ने अदालत पहुंचकर अपने बयान दर्ज करवाए हैं। उसके वकील धनौआ के अनुसार, पुलिस जांच की सर्टिफाइड कॉपी मांगी गई है। कॉपी मिलने के बाद अनट्रेस रिपोर्ट पर जवाब दाखिल किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 19 सितंबर को होगी। कोर्ट ने जून में गाड़ी रिलीज करने के दिए थे आदेश मामले में अदालत ने 16 जून को उस गाड़ी को रिलीज करने के आदेश जारी किए थे, जिसे पुलिस ने केस प्रॉपर्टी बनाया था। मोहाली पुलिस की ओर से अदालत में दलील दी गई थी कि जांच के दौरान अब इस गाड़ी की जरूरत नहीं है। अदालत ने शर्तों के साथ गाड़ी रिलीज करने के आदेश दिए थे। इसमें कहा गया था कि जांच अधिकारी या अदालत जब भी गाड़ी पेश करने को कहे, उसे तत्काल पेश करना होगा। इसके अलावा गाड़ी की ऑनरशिप, रंग या किसी अन्य तरह का बदलाव नहीं किया जा सकेगा।