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ANTF की बड़ी कार्रवाई: 71.44 लाख की नशीली दवाएं बरामद, 6 तस्कर गिरफ्तार

 लखनऊ  एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) की लखनऊ टीम ने नशीली दवाओं की तस्करी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए छह तस्करों को गिरफ्तार किया है। टीम ने इनके कब्जे से करीब 71.44 लाख रुपये कीमत की नशीली दवाएं, सात मोबाइल फोन और 11,140 रुपये नकद बरामद किए हैं। कार्रवाई शुक्रवार को ट्रांसपोर्टनगर स्थित कन्हैया फार्मा के पास की गई। एएनटीएफ के मुताबिक गिरफ्तार आरोपितों में लखनऊ निवासी किशन वासवानी, शाद इरशाद, उमेश कुमार, विशाल चौरसिया, कानपुर देहात के राजपुर निवासी समीर अहमद, आजमगढ़ के अहरौली निवासी सतेन्द्र सिंह शामिल हैं। तस्करों के पास से कोडीनयुक्त कफ सीरप की 720 बोतल, ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड युक्त स्पास्मोनाम प्लस के 1.20 लाख कैप्सूल और अल्प्राजोलम की 9.60 लाख गोलियां बरामद हुई हैं। पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि वे नशीली दवाएं खरीदते थे। इसके बाद किसी पार्टी को खेप पहुंचाकर मोटा मुनाफा कमाते थे। सरोजनीनगर थाने में आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। कन्हैया फार्मा के नाम से लगा रखा था बोर्ड एएनटीएफ एसपी के मुताबिक तस्करों ने गोदाम के बाहर कन्हैया फार्मा के नाम से बोर्ड लगा रखा था। तस्करों की कंपनी रजिस्टर्ड है या नहीं इस बिंदु पर औषधि विभाग की टीम जांच कर रही है। इसी नाम से संचालित गोदाम में तस्कर दिल्ली से माल लाकर रखते थे। भारी मात्रा में माल यहां डंप था। इसकी हुई बरामदगी कोडीन युक्त वनरेक्स 100 एमएल कफ सिरप (कुल 720 बोतल), स्पैस्मोनाम प्लस (ट्रामाडोल एचसीएल) कैप्सूल (कुल 1,20,000), अल्जोमैक-0.5 अल्प्राजोलम टैबलेट्स (कुल 9,60,000) अनुमानित कीमत लगभग 71 लाख 44 हजार 180 रुपये) के अलावा सात मोबाइल फोन, 11,140 रुपये नकद।

एआईएम कांग्रेस 2026 में उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का करेंगे नेतृत्व

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार से 9 सितंबर 2026 तक संयुक्त अरब अमीरात के दुबई यात्रा पर रहेंगे। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल एआईएम कांग्रेस-2026 में सहभागिता करेगा। मुख्यमंत्री की यह यात्रा मध्यप्रदेश के वैश्विक निवेश संपर्कों को सुदृढ़ करने, अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के समक्ष राज्य की आर्थिक एवं औद्योगिक क्षमताओं को प्रस्तुत करने और नई निवेश साझेदारियों को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव दुबई के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में आयोजित एआईएम कांग्रेस-2026 में मध्यप्रदेश की निवेश क्षमता, औद्योगिक आधार और विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध निवेश अवसरों को वैश्विक उद्योग जगत के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। यात्रा के दौरान ‘इन्वेस्ट मध्यप्रदेश' विषय पर विशेष सत्र भी प्रस्तावित है, जिसमें मुख्यमंत्री राज्य के निवेश-अनुकूल वातावरण और औद्योगिक विकास की संभावनाओं पर प्रकाश डालेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश भारत के तेजी से उभरते औद्योगिक और निवेश गंतव्यों में अपनी सशक्त पहचान बना रहा है। राज्य में उपलब्ध संसाधन, बेहतर आधारभूत संरचना, उद्योग-अनुकूल वातावरण और निवेशकों के लिए विकसित सुविधाएं प्रदेश को निवेश के लिए आकर्षक बनाती हैं। हमारा प्रयास है कि वैश्विक निवेशकों के साथ मजबूत साझेदारी स्थापित कर मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दुबई यात्रा मध्यप्रदेश और संयुक्त अरब अमीरात के बीच आर्थिक एवं औद्योगिक सहयोग को और अधिक मजबूत बनाने का अवसर प्रदान करेगी। वैश्विक निवेशकों और उद्योग समूहों के साथ होने वाली बैठकें प्रदेश में नए निवेश और रोजगार के अवसर सृजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यात्रा का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य जनवरी 2027 में भोपाल में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संपर्क एवं सहभागिता को बढ़ावा देना भी है। यात्रा में संयुक्त अरब अमीरात सरकार को ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 में पार्टनर कंट्री के रूप में आमंत्रित करने के प्रयास किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव एआईएम कांग्रेस के उद्घाटन समारोह, वैश्विक नेतृत्व से जुड़े कार्यक्रमों तथा विभिन्न निवेश और व्यावसायिक बैठकों में सहभागिता करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश मंडप का अवलोकन भी करेंगे और वैश्विक कॉर्पोरेट समूहों के साथ वन-टू-वन बैठकों में मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। दुबई यात्रा के दौरान सरकारी एवं व्यावसायिक स्तर की बैठकों के साथ राष्ट्र प्रमुख और संस्थागत निवेशकों के साथ राउंड टेबल बैठक भी प्रस्तावित है। इन बैठकों में मध्यप्रदेश में निवेश की नई संभावनाओं तथा दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी पर चर्चा की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मेजबानी में बिजनेस लीडर्स लंच तथा निवेशकों के साथ संवाद कार्यक्रम भी प्रस्तावित हैं। 8 सितंबर को 'इन्वेस्ट मध्यप्रदेश : इंटरएक्टिव सेशन' के माध्यम से चुनिंदा वैश्विक निवेशकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ सीधे संवाद का अवसर मिलेगा। इस दौरान मध्यप्रदेश की औद्योगिक नीतियों, निवेश-अनुकूल वातावरण और विभिन्न उभरते क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार का लक्ष्य केवल निवेश आकर्षित करना ही नहीं, बल्कि निवेशकों के साथ दीर्घकालिक और भरोसेमंद साझेदारी स्थापित करना है। प्रदेश में निवेश के माध्यम से उद्योगों के विस्तार, रोजगार सृजन और समावेशी आर्थिक विकास को गति देने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की दुबई यात्रा से मध्यप्रदेश की वैश्विक पहचान को और मजबूती मिलने तथा अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के साथ नए आर्थिक एवं औद्योगिक सहयोग के अवसर बढ़ेंगे। यह यात्रा आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहभागिता सुनिश्चित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगी।  

लोकधुनों और लोकगाथाओं से सजेगा रायपुर का ‘लोकरंग पर्व’

रायपुर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं, लोकगाथाओं और पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत को मंच देने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ‘विभागीय आयोजन 2026’ के अंतर्गत तीन दिवसीय ‘लोकरंग पर्व’ का आयोजन किया जा रहा है। यह सांस्कृतिक आयोजन 6, 7 एवं 8 सितंबर को रायपुर स्थित मुक्ताकाशी मंच, महंत घासीदास संग्रहालय परिसर, सिविल लाइंस में आयोजित होगा। कार्यक्रम प्रत्येक दिन शाम 7 बजे से प्रारंभ होगा। लोकरंग पर्व के माध्यम से छत्तीसगढ़ की विविध लोक विधाओं को एक ही मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा। आयोजन में प्रदेश की पारंपरिक लोकगाथाओं, लोकनाट्य, लोकगीत और लोकनृत्य की ऐसी रंगारंग प्रस्तुतियां देखने को मिलेंगी, जो छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू और उसकी सांस्कृतिक पहचान को जीवंत करेंगी। भरथरी और पंडवानी से लेकर पंथी-करमा तक तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध लोक विधाओं भरथरी, पंडवानी, ढोलामारू, लोरिकचंदा, नाचा और गम्मत की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इनके साथ सुआ, करमा और पंथी जैसे पारंपरिक लोकनृत्यों की प्रस्तुतियां भी दर्शकों को छत्तीसगढ़ की लोकजीवन से जोड़ेंगी। वहीं बांसगीत, देवारगीत, ददरिया, जसगीत और संस्कार गायन जैसी लोक एवं पारंपरिक गायन शैलियों की प्रस्तुतियों के जरिए प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता और लोक परंपराओं की गहराई को सामने लाया जाएगा। लोक कलाकारों को मिलेगा मंच, नई पीढ़ी तक पहुंचेगी विरासत ‘लोकरंग पर्व’ केवल मनोरंजन का आयोजन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सदियों पुरानी लोक सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण प्रयास है। लोकगीतों, लोकगाथाओं और पारंपरिक नृत्य-नाट्य शैलियों के माध्यम से प्रदेश के ग्रामीण एवं जनजातीय जीवन, सामाजिक परंपराओं और लोक आस्थाओं की झलक दर्शकों को देखने मिलेगी। आयोजन में पारंपरिक लोक विधाओं के कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता को मंच पर साकार करेंगे। लोक वाद्यों की धुन, पारंपरिक गीतों की मिठास और लोकनृत्यों की लय से मुक्ताकाशी मंच तीन दिनों तक छत्तीसगढ़ी संस्कृति के रंग में रंगा नजर आएगा। मुक्ताकाशी मंच पर तीन शाम संस्कृति के नाम संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रदेश की लोककलाओं और लोक कलाकारों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ आम नागरिकों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है। 6 से 8 सितंबर तक शाम 7 बजे से होने वाली प्रस्तुतियों में दर्शकों को छत्तीसगढ़ की अलग-अलग लोक विधाओं का विविधतापूर्ण संगम देखने को मिलेगा। ‘लोकरंग पर्व’ के जरिए छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की जीवंत तस्वीर रायपुर के मुक्ताकाशी मंच पर उभरेगी, जहां लोकगाथाओं की कथात्मकता, लोकगीतों की मिठास, नृत्यों की थिरकन और पारंपरिक वाद्यों की गूंज मिलकर प्रदेश की गौरवशाली सांस्कृतिक पहचान को प्रस्तुत करेगी।

गांधी मैदान से शिफ्ट होगी रामलीला और रावण वध की भव्य परंपरा, मार्च तक तैयार होगा नया मैदान

पटना सीएम सम्राट चौधरी ने कल शनिवार (5, सितंबर) को पटना के गांधी मैदान में आयोजित श्रीकृष्ण महोत्सव 4.0-2026 ‘कान्हा के रंग, उत्सव के संग’ कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार एवं सात्विका ग्रुप के सौजन्य से दशहरा कमिटी ट्रस्ट, पटना द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बड़ा ऐलान करते हुए अपने संबोधन में कहा कि, अगले वर्ष मार्च तक मरीन ड्राइव के समीप तीन बड़े मैदान तैयार हो जाएंगे। इनमें से एक मैदान का नाम रामलीला मैदान रखा जाएगा। सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि रामलीला एवं रावण वध के कार्यक्रम को गांधी मैदान से वहां स्थानांतरित कर पूरी व्यवस्था के साथ आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दशहरा कमेटी ट्रस्ट वर्ष 1955 से गांधी मैदान में रामलीला महोत्सव एवं रावण वध का आयोजन कर रहा है। समिति की ओर से लंबे समय से रामलीला और रावण वध के लिए अलग स्थान उपलब्ध कराने का आग्रह किया जा रहा था। इसको लेकर पटना के जिलाधिकारी को निर्देश दिए गए हैं। मार्च के बाद जैसे ही नए मैदान का हैंडओवर होगा, समिति को वह मैदान उपलब्ध करा दिया जाएगा। इस मौके पर श्रीकृष्ण महोत्सव की शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि, भगवान श्रीकृष्ण ने अन्याय के खिलाफ खड़े होने और सत्य की विजय का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि महाभारत के समय भगवान श्रीकृष्ण ने शांति के लिए हर संभव प्रयास किया और कौरवों से केवल पांच गांव देने की बात कही, लेकिन अन्याय के कारण युद्ध टल नहीं सका। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का स्पष्ट संदेश था कि जो अन्याय करेगा, उसका विनाश निश्चित है। गीता के माध्यम से उन्होंने अर्जुन को कर्तव्य और धर्म का बोध कराया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भी भगवान श्रीकृष्ण का संदेश समाज को सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। इस दौरान सीएम सम्राट चौधरी ने बिहार में जारी बाढ़ की स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में इस समय गंगा में पानी का स्तर काफी अधिक है। गंगा बेसिन वाले जिलों में अधिकारियों और मंत्रियों को लगाया गया है तथा सरकार पूरी स्थिति पर नजर रख रही है। उन्होंने कहा कि सोन और गंडक नदियों से भी बड़ी मात्रा में पानी आ रहा है। नेपाल की तराई से आने वाले पानी के कारण बिहार के लोगों को हर वर्ष परेशानी का सामना करना पड़ता है। सरकार ने कोसी, गंडक और गंगा बेसिन को व्यवस्थित करने के लिए व्यापक योजना तैयार करने की दिशा में काम शुरू किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय जल आयोग के साथ मिलकर दोनों बेसिनों के किनारे सड़क निर्माण और वाटर ट्रांसपोर्टेशन की व्यवस्था विकसित करने पर भी काम किया जाएगा, ताकि बरसात के दौरान लोगों को होने वाली परेशानी को कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप बिहार को भी समृद्ध और विकसित बनाने के लिए सरकार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की परिकल्पना के अनुरूप बिहार को समृद्ध बनाने की पूरी रूपरेखा तैयार की जा रही है। सीएम सम्राट ने श्रीकृष्ण महोत्सव और दही हांडी प्रतियोगिता के आयोजन के लिए दशहरा कमेटी ट्रस्ट को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से बिहार की सनातन संस्कृति और भारतीय संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने में मदद मिलती है। वहीं, दशहरा कमिटी ट्रस्ट के सदस्यों ने अंगवस्त्र और मोमेंटो देकर मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया। इस मौके पर दही-हांडी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था जहां मुख्यमंत्री ने स्वयं जाकर प्रतियोगिता में शामिल प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम के दौरान सीएम के अलावा , स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार समेत कई मंत्री और विधायक समेत अधिकारी मौजूद रहे।

योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का असर, यूपी में नशे के कारोबार पर प्रहार

लखनऊ/वाराणसी  योगी सरकार की नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 2.10 करोड़ रुपये कीमत की हेरोइन बरामद की है। एएनटीएफ यूनिट वाराणसी की टीम ने अवैध मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले सक्रिय तस्कर अभिषेक सोनकर को गिरफ्तार किया है। डीजीपी कार्यालय के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी वाराणसी के फूलपुर थाना क्षेत्र के झोरिया जगदीशपुर बाबतपुर का निवासी है। एएनटीएफ टीम ने उसके कब्जे से 1 किलो 20 ग्राम अवैध मादक पदार्थ हेरोइन समेत अन्य सामान भी बरामद किया है। आरोपी की गिरफ्तारी चंदौली जिले के अलीनगर थाना क्षेत्र में गोदना मोड़ सर्विस रोड से की गई। चंदौली में करनी थी सप्लाई पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह अपने पार्टनर के साथ मिलकर अवैध मादक पदार्थों की सप्लाई करता है। बरामद हेरोइन भी वह अपने पार्टनर के कहने पर किसी व्यक्ति को सप्लाई करने के लिए चंदौली की ओर ले जा रहा था। इसी दौरान पुलिस ने उसे पकड़ लिया। पुलिस मामले और गिरोह से जुड़े अन्य पहलुओं पर भी जांच कर रही है।

‘मुस्लिमों की बर्बादी के पीछे अखिलेश-राहुल और ओवैसी’, संगीत सोम का तीखा हमला

‘मस्जिद नहीं, अवैध इमारत गिरी’, सहारनपुर विवाद पर संगीत सोम ने अखिलेश-राहुल-ओवैसी को घेरा ‘मुस्लिमों की बर्बादी के पीछे अखिलेश-राहुल और ओवैसी’, संगीत सोम का तीखा हमला कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई, फिर बखेड़ा क्यों?’ सहारनपुर पर संगीत सोम का विपक्ष से सवाल अखिलेश-राहुल-ओवैसी पर संगीत सोम का हमला- ‘संविधान की किताब लेकर घूमते हैं, कोर्ट के आदेश पर सवाल उठाते हैं’ '2013 की तरह फिर पश्चिमी यूपी में दंगा कराना चाहते हैं अखिलेश, संगीत सोम ने सपा को घेरा लखनऊ  सहारनपुर में सरकारी जमीन पर बनी अवैध मस्जिद पर हुई कार्रवाई को लेकर बीजेपी नेता संगीत सोम ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर तीखा हमला बोला है। संगीत सोम ने साफ कहा कि मीडिया और विपक्ष को यह समझना होगा कि सहारनपुर में किसी मस्जिद को नहीं गिराया गया, बल्कि अवैध जमीन पर बनी एक अवैध इमारत को कानूनी प्रक्रिया के तहत हटाया गया है। संगीत सोम ने दावा किया कि कार्रवाई के दौरान इमारत के नीचे करीब 400 साल पुराना कुआं भी मिला है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में जो भी निर्माण अवैध जमीन पर या अतिक्रमण करके किया गया है, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। किसी धर्म को निशाना बनाने का सवाल ही नहीं है। ‘मुस्लिमों का आका बनने की होड़ में हैं विपक्षी नेता’ बीजेपी नेता ने अखिलेश यादव, राहुल गांधी और असदुद्दीन ओवैसी पर निशाना साधते हुए कहा कि इन दिनों उत्तर प्रदेश में यह होड़ लगी है कि मुस्लिमों का सबसे बड़ा आका कौन बनेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी राजनीति के चलते सहारनपुर की कार्रवाई को धार्मिक रंग देने की कोशिश की जा रही है। संगीत सोम ने ओवैसी पर भी हमला बोलते हुए पुराने दस्तावेजों और बिजली बिल से जुड़े दावों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब 1911 में सहारनपुर में बिजली की व्यवस्था ही नहीं थी, तो उस दौर का बिजली बिल कहां से आया? सोम ने इसे फर्जीवाड़े का उदाहरण बताते हुए कहा कि ओवैसी जैसे नेता ऐसे ही दावों के सहारे लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। ‘कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई, फिर बखेड़ा क्यों?’ संगीत सोम ने कहा कि जिस इमारत पर कार्रवाई हुई, वह कोर्ट के आदेश के बाद की गई। ऐसे में विपक्ष का इस मुद्दे को लेकर हंगामा खड़ा करना उनकी मंशा पर सवाल पैदा करता है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव, राहुल गांधी और ओवैसी तीनों संविधान की किताब लेकर घूमते हैं, लेकिन जब अदालत के आदेश पर कार्रवाई होती है तो उसी कार्रवाई को धार्मिक रंग देने की कोशिश शुरू हो जाती है। उन्होंने तीनों नेताओं को निशाने पर लेते हुए कहा कि यह राजनीति संविधान और कानून की रक्षा के लिए नहीं, बल्कि वोट बैंक की राजनीति के लिए की जा रही है। ‘पश्चिमी यूपी में फिर दंगा कराना चाहते हैं अखिलेश’ संगीत सोम ने आरोप लगाया कि विपक्षी नेता सहारनपुर के मुद्दे के बहाने पश्चिमी उत्तर प्रदेश का माहौल खराब करना चाहते हैं। उन्होंने अखिलेश यादव पर हमला करते हुए 2013 के दंगों का भी जिक्र किया और कहा कि अब एक बार फिर पश्चिमी यूपी में तनाव पैदा करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रहते उत्तर प्रदेश में किसी को दंगा कराने या कानून व्यवस्था को चुनौती देने की इजाजत नहीं दी जाएगी। अगर अखिलेश यादव अपने समर्थकों के जरिए माहौल बिगाड़ने की कोशिश करते हैं तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ‘मुस्लिमों की बर्बादी के पीछे अखिलेश, ओवैसी और राहुल’ संगीत सोम ने कहा कि मुस्लिमों की तीन बर्बादी- अखिलेश, ओवैसी और राहुल गांधी। उन्होंने कहा कि विपक्ष जानबूझकर यह नैरेटिव बनाने की कोशिश कर रहा है कि मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि कार्रवाई का निशाना धर्म नहीं बल्कि अवैध कब्जा और भूमाफिया हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों तक कुछ लोगों ने मुस्लिमों का इस्तेमाल किया, उनसे कब्जे करवाए और अपनी जेबें भरीं। संगीत सोम ने आखिर में फिर विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि अखिलेश यादव, राहुल गांधी और ओवैसी ने मुस्लिम समाज को सबसे ज्यादा छला है और अब भी वे उत्तर प्रदेश की शांति और कानून व्यवस्था को राजनीतिक फायदे के लिए दांव पर लगाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब “उत्तम प्रदेश” बनने की राह पर है और किसी को भी अराजकता फैलाकर इस रास्ते को रोकने नहीं दिया जाएगा।

योगी सरकार ट्रामा एंड इमरजेंसी नेटवर्क से हर साल बचाएगी 12 हजार लोगों की जान

लखनऊ खयमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं और अन्य गंभीर आपात स्थितियों में मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को एकीकृत और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ी पहल की जा रही है। इसके तहत यूपीटीईएन (उत्तर प्रदेश ट्रामा एंड इमरजेंसी नेटवर्क) को एक ऐसे एकीकृत आपात चिकित्सा नेटवर्क के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की गई है, जिसका उद्देश्य दुर्घटना या मेडिकल इमरजेंसी के बाद शुरुआती 60 मिनट यानी ‘गोल्डन ऑवर’ में मरीज को सही उपचार तक पहुंचाना है।   यूपीटीईएन के जरिए प्रदेश की बिखरी ट्रॉमा, बर्न, कार्डियक, स्ट्रोक और अन्य इमरजेंसी सेवाओं को एक नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। योजना के तहत 173 एकीकृत ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन यूनिट विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें 11 लेवल-1 एपेक्स हब, 36 लेवल-2 रीजनल सेंटर और 126 लेवल-3 जिला स्तर की इकाइयां शामिल होंगी। इसका मकसद मरीज को जरूरत के अनुसार नजदीकी और सक्षम चिकित्सा केंद्र तक तेजी से पहुंचाना है। हर साल 12 हजार जानें बचाने का लक्ष्य अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित घोष ने बताया कि व्यवस्था के जरिए हर साल 10 हजार से 12 हजार लोगों की जान बचाने का लक्ष्य रखा गया है। विशेषज्ञों की मानें तो समय पर इलाज मिलने से गंभीर दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों और स्थायी विकलांगता के मामलों में कमी लाई जा सकती है। इसके लिए केवल अस्पतालों की संख्या बढ़ाने के बजाय अस्पताल, एंबुलेंस, ट्रॉमा सेंटर, डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और कमांड सेंटर को एक ही आपात नेटवर्क में जोड़ने पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि यूपीटीईएन का उद्देश्य मरीज के अस्पताल पहुंचने का इंतजार करने के बजाय आपातकाल की सूचना मिलते ही इलाज की प्रक्रिया शुरू करना है। योजना के तहत 1,200 एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एंबुलेंस को नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इन एंबुलेंस को केवल परिवहन का साधन न मानकर चलते-फिरते आपात उपचार केंद्र के रूप में इस्तेमाल करने की दिशा में काम किया जाएगा। इसके अलावा प्रदेश के 18 मंडलीय स्तर के कमांड सेंटर नेटवर्क के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इन केंद्रों के जरिए इमरजेंसी कॉल, एंबुलेंस, अस्पतालों में बेड और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के बीच समन्वय स्थापित करने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। 30 से 50 प्रतिशत तक रिस्पांस टाइम किया जाएगा कम अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य ने बताया कि योजना के तहत आपातकालीन प्रतिक्रिया समय में 30 से 50 प्रतिशत तक कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं अस्पताल पहुंचने से पहले महत्वपूर्ण चिकित्सकीय निर्णय लेने के लिए करीब 10 मिनट का अतिरिक्त समय हासिल करने की योजना है। इसके लिए रियल-टाइम नेटवर्किंग, डिजिटल अलर्ट सिस्टम और एआई आधारित ट्रायेज जैसी तकनीकों के इस्तेमाल का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य है कि किस मरीज को किस अस्पताल या किस विशेषज्ञ विभाग में भेजा जाना चाहिए। यानी ‘राइट मरीज, राइट डिपार्टमेंट और राइट टाइम’ के सिद्धांत पर इमरजेंसी सिस्टम को संचालित किया जाएगा। योजना में आम लोगों को भी आपातकालीन व्यवस्था का हिस्सा बनाने पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए तीन स्तरों पर फर्स्ट रिस्पॉन्डर नेटवर्क तैयार करने की योजना बनायी जा रही है। इसमें पहले स्तर पर पुलिस, एंबुलेंस चालक, फायर सर्विस और हाईवे पेट्रोल जैसे तत्काल मदद पहुंचाने वाले लोग होंगे। वहीं दूसरे स्तर पर पुलिस, होमगार्ड और अन्य संस्थागत रिस्पॉन्डर होंगे जबकि तीसरे स्तर पर आम नागरिकों को बेसिक इमरजेंसी रिस्पांस का प्रशिक्षण देकर उन्हें जरूरत के समय शुरुआती मदद के लिए तैयार किया जाएगा। 48 घंटे तक मुफ्त इमरजेंसी इलाज* योजना के तहत सभी नागरिकों के लिए 48 घंटे तक मुफ्त आपातकालीन उपचार की व्यवस्था होगी। इसका उद्देश्य दुर्घटना या गंभीर बीमारी की स्थिति में मरीज और उसके परिवार पर तत्काल इलाज के खर्च का दबाव कम करना है, ताकि आर्थिक कारणों से उपचार में देरी न हो। इसके साथ ही यूपीटीईएन के लिए अलग बजट, मानव संसाधन नीति और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। इसके अलावा इमरजेंसी मेडिसिन ऑफिसर (ईएमओ) कैडर बनाने, एम्स के अनुरूप वेतनमान तथा विशेषज्ञ डॉक्टरों के लिए प्रोत्साहन की व्यवस्था जैसे कदम शामिल हैं।

पंजाब में जातिगत जनगणना की तैयारी तेज, 16 नवंबर से सेल्फ एन्यूमरेशन; 1 दिसंबर से शुरू होगा अभियान

चंडीगढ़  पंजाब में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जनगणना का काम पूरा होगा। केंद्र सरकार की ओर से तय कार्यक्रम के अनुसार Punjab Census News का मुख्य चरण एक दिसंबर 2026 से चार जनवरी 2027 तक चलेगा। इससे पहले लोगों को अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कराने का अवसर दिया जाएगा। इसके लिए 16 से 30 नवंबर 2026 तक स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध रहेगी। मुख्य चरण के बाद पांच से नौ जनवरी 2027 तक दोबारा जांच का काम किया जाएगा। इस बार की जनगणना कई मायनों में महत्वपूर्ण होगी। लोगों से कुल 40 सवाल पूछे जाएंगे। इनमें परिवार और आवास से जुड़ी जानकारी के साथ जाति, धर्म, शिक्षा, रोजगार, भाषा, प्रवास और कोविड-19 टीकाकरण सहित कई जानकारियां दर्ज की जाएंगी। इस दौरान 40 सवाल पूछे जाएंगे, जिसमें जाति धर्म, कोविड वैक्सीन लगाने से लेकर सारी जानकारी शामिल रहेगी। केंद्र सरकार की राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCPA) के फैसले के तहत इस बार जनगणना में जातिगत जनगणना को भी शामिल किया गया है। पंजाब में होने वाली जनगणना में भी जाति संबंधी जानकारी दर्ज की जाएगी। पंजाब सरकार के समन्वय से पूरा होगा काम पूरी जनगणना को डिजिटल बनाने के लिए मोबाइल एप तैयार किए गए हैं। केंद्र सरकार ने इस महाअभियान के लिए 11,718.24 करोड़ का बजट मंजूर किया है। जनगणना का काम पंजाब सरकार के समन्वय से पूरा किया जाएगा। केंद्र सरकार की राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति के फैसले के बाद इस बार जातिगत आंकड़े भी जुटाए जाएंगे। ऐसे में पंजाब में भी लोगों से उनकी जाति से संबंधित जानकारी ली जाएगी। 2011 की जनगणना 2.77 करोड़ आबादी थी 2011 की जनगणना के अनुसार पंजाब की कुल आबादी 2.77 करोड़ थी, जिसमें 1.46 करोड़ पुरुष और 1.31 करोड़ महिलाएं थीं। राज्य की दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर 13.89% रही, जबकि जनसंख्या घनत्व 551 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर और लिंगानुपात 895 महिलाएं प्रति 1000 पुरुष था। पंजाब की कुल साक्षरता दर 75.84% थी, जिसमें पुरुष साक्षरता 80.44% और महिला साक्षरता 70.73% रही। राज्य की 62.52% आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में, जबकि 37.48% आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती थी। पहचान और परिवार से जुड़े 12 सवाल जनगणना में पहचान और परिवार से जुड़े 12 सवाल होंगे। इनमें व्यक्ति का नाम, लिंग, जन्मतिथि, वैवाहिक स्थिति, धर्म, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति तथा जाति, माता-पिता का नाम आदि की जानकारी ली जाएगी। इसके अलावा परिवार के सदस्यों से संबंधित आवश्यक विवरण भी दर्ज किए जाएंगे। शिक्षा और भाषा से जुड़े सवालों में व्यक्ति की साक्षरता के साथ डिजिटल साक्षरता की जानकारी भी ली जाएगी। इसके अलावा उच्चतम शैक्षणिक योग्यता और अध्ययन की शाखा से संबंधित जानकारी दर्ज होगी। रोजगार की स्थिति जानने के लिए पिछले एक वर्ष में काम किया या नहीं, आर्थिक गतिविधि की श्रेणी, व्यवसाय, उद्योग या व्यापार का प्रकार तथा काम की जगह तक पहुंचने के लिए की जाने वाली यात्रा से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे। बच्चों और प्रवास का भी बनेगा आंकड़ा जन्म और प्रवास से संबंधित जानकारी में वर्तमान में जीवित बच्चों की संख्या, अब तक जन्मे कुल बच्चों की संख्या और पिछले एक वर्ष में जन्मे बच्चों की संख्या दर्ज की जाएगी। इससे राज्य में जन्म दर और आबादी में हो रहे बदलाव की तस्वीर सामने आएगी। जनगणना के दौरान आधार संख्या, मतदाता पहचान पत्र संख्या, पासपोर्ट संख्या और वाहन चलाने के लाइसेंस की उपलब्धता से संबंधित जानकारी भी मांगी जाएगी। इसके साथ कुल बैंक खातों, मोबाइल नंबर और कोविड-19 टीकाकरण की जगह की जानकारी भी दर्ज की जाएगी। पंजाब सरकार से होगा तालमेल पूरे अभियान को डिजिटल तरीके से संचालित करने की तैयारी है। इसके लिए मोबाइल आधारित अनुप्रयोग तैयार किए गए हैं। केंद्र सरकार ने जनगणना के लिए 11,718.24 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। पंजाब में जनगणना का काम राज्य सरकार के समन्वय से पूरा किया जाएगा। यूपी समेत इन राज्यों में शुरू होने वाली है जनगणना लद्दाख के बाद अब चार अन्य राज्यों में 1 दिसंबर से जनगणना 2027 की शुरुआत होने जा रही है। गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में जनसंख्या की गणना एक दिसंबर, 2026 से चार जनवरी, 2027 तक की जाएगी। अगले साल की शुरुआत में जिन राज्यों में चुनाव होने की संभावना है, वहां जनगणना की यह प्रक्रिया पहले शुरू की जा रही है। 16 नवंबर से खुल जाएगी स्व-गणना भारत के महापंजीयक (RGI) एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने राजपत्र अधिसूचना में कहा कि इन क्षेत्रों के नागरिक 16 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक स्व-गणना का विकल्प अपना सकते हैं। अधिसूचना में कहा गया है, ''गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड राज्य के बर्फबारी से प्रभावित क्षेत्रों को छोड़कर बाकी इलाकों में जनसंख्या की जनगणना एक दिसंबर 2026 से चार जनवरी 2027 तक की जाएगी। इसके बाद पांच जनवरी 2027 से नौ जनवरी 2027 तक पुनरीक्षण चरण आयोजित किया जायेगा।' लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में बर्फ वाले इलाकों में चल रही जनगणना इसमें कहा गया कि गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड के बर्फबारी से प्रभावित क्षेत्रों को छोड़कर राज्य के अन्य हिस्सों के लिए जनगणना 2027 की संदर्भ तिथि पांच जनवरी 2027 की रात 12 बजे होगी। इसके अलावा केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों तथा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों के लिए संदर्भ तिथि एक अक्टूबर 2026 की रात 12 बजे होगी।'' पिछले महीने जारी एक राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, लद्दाख तथा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों में जनसंख्या की गणना एक सितंबर से 30 सितंबर तक की जाएगी। मई में खत्म हो रहा इन विधानसभाओं का कार्यकाल जून 2025 को जारी एक सरकारी बयान में कहा गया था कि लद्दाख, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों तथा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों को छोड़कर देश के बाकी हिस्सों के लिए संदर्भ तिथि एक मार्च 2027 होगी। गोवा, मणिपुर, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की विधानसभा का कार्यकाल मई 2027 तक समाप्त हो जायेगा। एक अधिकारी ने कहा कि बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी, मुख्य रूप से शिक्षक, जनगणना और चुनावी कार्यों में लगे हुए हैं। ऐसे में इन दोनों प्रक्रियाओं … Read more

PM मोदी की मंत्रियों संग कल अहम बैठक, कैबिनेट फेरबदल को लेकर बढ़ी हलचल

 नई दिल्ली केंद्र सरकार में मंत्रियों के कामकाज को लेकर सोमवार शाम अहम बैठक होने वाली है. पीएम मोदी इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे. इसमें कुछ मंत्रालयों के कामकाज, मंत्रियों के प्रदर्शन से जुड़े मुद्दों पर बात होगी. बैठक को आने वाले समय में संभावित कैबिनेट फेरबदल से भी जोड़कर देखा जा रहा है।  बैठक में सामाजिक न्याय और जनकल्याण से जुड़े कामों पर खास ध्यान रहेगा. इसके लिए सिर्फ उन राज्यमंत्रियों और स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्रियों को बुलाया गया है, जिनका विभाग समाज कल्याण से जुड़ा है. सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में बाकी मंत्रालयों के मंत्रियों के साथ भी सिलसिलेवार ऐसी बैठकें होंगी।  इन मंत्रालयों के काम का होगा हिसाब सोमवार की चर्चा में मुख्य रूप से शिक्षा मंत्रालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय और कृषि मंत्रालय शामिल रहेंगे. इसमें देखा जाएगा कि तय योजनाएं जमीन पर कितनी तेजी से उतरी हैं और मंत्रियों ने अपनी जिम्मेदारियां किस तरह निभाई हैं।  बैठक का एक अहम हिस्सा जवाबदेही भी होगा. यानी जिन मंत्रियों को जो जिम्मेदारी दी गई है, उस पर उनका काम कैसा रहा, इस पर चर्चा की जाएगी. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि बैठक के बाद किसी मंत्री को लेकर तत्काल कोई फैसला होगा।  राज्यमंत्रियों के साथ अलग-अलग बैठकें सरकार आने वाले दिनों में राज्यमंत्रियों के दूसरे समूह के साथ भी ऐसी बैठकें कर सकती है. इसका मकसद अलग-अलग मंत्रालयों के कामकाज को समझना है।  इन बैठकों में मंत्रियों के प्रदर्शन पर चर्चा होने की वजह से इन्हें कैबिनेट में होने वाले संभावित बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि, अभी फेरबदल को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।  क्यों अहम मानी जा रही है बैठक? मंत्रियों के कामकाज की यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब सरकार के स्तर पर अलग-अलग मंत्रालयों के प्रदर्शन पर नजर रखी जा रही है. ऐसे में सोमवार की बैठक में होने वाली चर्चा आगे के फैसलों के लिए अहम हो सकती है।  फिलहाल सबसे ज्यादा नजर इस बात पर रहेगी कि बैठक में किन मंत्रियों के कामकाज पर बात होती है और आने वाले दिनों में होने वाली बैठकों का क्या रुख रहता है. इन्हीं चर्चाओं से आगे कैबिनेट में किसी बदलाव की तस्वीर साफ हो सकती है। 

अनुकंपा नियुक्ति में शादीशुदा बेटी के हक पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, भेदभाव नहीं कर सकती सरकार

बिलासपुर  छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि सिर्फ वैवाहिक स्थिति के आधार पर बेटी को नियुक्ति के विचार से बाहर नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि तलाकशुदा बेटी द्वारा तलाक से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने के आधार पर उसके अनुकंपा नियुक्ति के दावे को खारिज करना उचित नहीं है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने जल संसाधन विभाग के अस्वीकृति आदेश को निरस्त करते हुए महिला के आवेदन पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया है। इसके लिए अधिकारियों को 40 दिन की समय-सीमा दी गई है। पिता की मृत्यु के बाद किया था आवेदन यह आदेश जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने तीजिया बाई यादव विरुद्ध छत्तीसगढ़ शासन एवं अन्य मामले में सुनाया। याचिकाकर्ता तीजिया बाई यादव पति भरत यादव, उम्र करीब 42 वर्ष, निवासी नवागांव तखतपुर के पिता स्वर्गीय पिल्लू राम यादव जल संसाधन विभाग में चौकीदार के पद पर कार्यरत थे। सेवा में रहते हुए 26 अगस्त 2024 को उनका निधन हो गया। पिता की मृत्यु के बाद तीजिया बाई यादव ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। सक्षम अधिकारी ने आवेदन पर विचार करने के बाद दो जुलाई 2025 को आदेश जारी कर उनका दावा खारिज कर दिया। अस्वीकृति का प्रमुख आधार यह था कि आवेदन के साथ तलाक से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए थे। शादी के आधार पर बेटी को नहीं कर सकते बाहर हाई कोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता एफएस खरे ने दलील दी कि केवल वैवाहिक स्थिति अथवा तलाक का दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर विचार करने से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने हाई कोर्ट के 30 नवंबर 2015 के पूर्व निर्णय का भी हवाला दिया। इस फैसले में हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि केवल शादीशुदा होने के आधार पर बेटी को अनुकंपा नियुक्ति के विचार से बाहर करना संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। अदालत ने नीति के उन प्रावधानों को असंवैधानिक माना था, जिनके तहत सिर्फ विवाह के आधार पर विवाहित बेटी को अनुकंपा नियुक्ति के लिए विचार से बाहर किया जाता था। सरकार ने भी माना, 2015 का फैसला लागू राज्य की ओर से उप महाधिवक्ता केजी यादव ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सक्षम अधिकारी ने उपलब्ध दस्तावेजों और लागू नीति के आधार पर आदेश पारित किया था। हालांकि, उन्होंने इस बात का विरोध नहीं किया कि वर्तमान मामले में उठाया गया कानूनी प्रश्न हाई कोर्ट के 30 नवंबर 2015 के फैसले से कवर होता है। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने जल संसाधन विभाग के दो जुलाई 2025 के अस्वीकृति आदेश को रद्द कर दिया और संबंधित अधिकारियों को तीजिया बाई यादव के अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर कानून के अनुसार नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया।