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भारत ने पाकिस्तान जाने को दी सैद्धांतिक मंजूरी, 2027 साउथ एशियन गेम्स में उतरेंगे खिलाड़ी

नई दिल्ली भारत ने 2027 साउथ एशियन गेम्स में भाग लेने के लिए अपने खिलाड़ियों को पाकिस्तान जाने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। दोनों देशों के बीच रिश्ते तल्ख हैं और किसी भी खेल में दोनों देशों के खिलाड़ी कोई द्विपक्षीय सीरीज नहीं खेल रहे हैं। हालांकि, मल्टी नेशनल टूर्नामेंट में भारत और पाकिस्तान एक-दूसरे के खिलाफ खेलते हैं। हाल ही में महिला एशिया कप के मुकाबले में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ बड़ी जीत हासिल की थी। भारत सरकार ने साफ किया है कि पाकिस्तान जब तक आतंकवाद के लिए अपनी जमीन का इस्तेमाल होने देगा, तब तक दोनों देशों के बीच कोई बातचीत नहीं होगी। इसी वजह से भारत के खिलाड़ी भी पाकिस्तान खेलने के लिए नहीं जाते हैं। हालांकि, मल्टी नेशनल टूर्नामेंट में टीम भेजने का फैसला उस खेल से जुड़ी संस्था का होता है। इसमें सरकार कोई हस्तक्षेप नहीं करती है। इसी वजह से भारतीय खिलाड़ी साउथ एशियन गेम्स के लिए पाकिस्तान जा सकते हैं। साउथ एशियन गेम्स अगले साल 4 से 11 अपैल के बीच पाकिस्तान में आयोजित होंगे। पहलगाम हमले के बाद पहली बार पाकिस्तान जाएंगे भारतीय खिलाड़ी पहलगाम आतंकी हमले के बाद यह पहली बार होगा, जब कोई भारतीय टीम पाकिस्तान जा सकती है। पाकिस्तान जाने वाले भारतीय दल में किन खिलाड़ियों को शामिल किया जाएगा। इसका खुलासा अगले साल जनवरी में होगा। पाकिस्तान 23 साल बाद साउथ एशियन गेम्स होस्ट कर रहा है। इससे पहले 2004 में पाकिस्तान के इस्लामाबाद शहर ने इन खेलों की मेजबानी की थी। 28 खेलों में भाग लेंगे खिलाड़ी 14वें साउथ एशियन गेम्स का आयोजन 2026 में ही होना था, लेकिन अब इस टूर्नामेंट का आयोजन 2027 में हो रहा है। इसमें 28 खेल शामिल हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने गेम्स की तैयारियों का रिव्यू किया है। उन्होंने अधिकारियों से यह पक्का करने को कहा है कि इंटरनेशनल स्टैंडर्ड की सुविधाएं, सिक्योरिटी, लॉजिस्टिक्स और मेडिकल सपोर्ट मौजूद हों। तीन शहरों में होंगे मुकाबले साउथ एशियन गेम्स के मुकाबले पाकिस्तान के तीन शहरों में होंगे। इस्लाबाद में 15, लाहौर में 10 और कराची में तीन खेलों के इंवेट आयोजित होंगे। भारतीय क्रिकेट टीम 2008 के बाद से पाकिस्तान में नहीं खेली है। आईसीसी या एसीसी टूर्नामेंट में भी भारत-पाकिस्तान के मुकाबले न्यूट्रल वेन्यू में कराए जाते हैं। पिछले साल जुलाई में वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लेजेंड्स में भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाला मुकाबला भारतीय खिलाड़ियों के विरोध के बाद रद्द कर दिया गया था।

अपराध की कमाई पर चलेगा बुलडोजर! बिहार में 4000 से अधिक अपराधियों की संपत्ति जब्ती की तैयारी

पटना बिहार में अपराधियों पर कड़ा प्रहार करने की तैयारी कर ली गई। दरअसल अपराध से संपत्ति अर्जित करने वाले बिहार के 4000 से अधिक अपराधी और माफियाओं की संपत्तियां अब जब्त होंगी। एसपी की अनुशंसा के आधार पर बिहार पुलिस मुख्यालय ने इससे संबंधित प्रस्ताव तैयार किया है। इनमें से 800 मामले न्यायालय के स्तर पर प्रक्रियाधीन हैं। सोमवार को बिहार पुलिस के एडीजी (मुख्यालय) सुनील कुमार और एडीजी (विधि-व्यवस्था) केएस अनुपम ने इसकी जानकारी दी। पुलिस मुख्यालय में एडीजी (विधि व्यवस्था) ने कहा कि बीएनएसएस की धारा 107 के तहत संपत्ति जब्ती का प्रस्ताव है। पुलिस पर हमले के 1166 आरोपित गिरफ्तार एडीजी (विधि व्यवस्था) ने बताया कि विगत तीन माह (जून से अगस्त माह) में 23,958 वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी की गयी है। इनमें पुलिस पर हमला के मामलों में 1166, सांप्रदायिक हिंसा के मामलों में 42, भीड़ द्वारा हिंसा के मामलों में 11 एवं हर्ष फायरिंग के मामलों में 10 सहित कुल 1229 अभियुक्तों की गिरफ्तारी की गयी है। इसके अलावा, 1270 हत्या, 784 एससी-एसटी एक्ट, 214 डकैती और 473 लूट कांडों के अभियुक्त भी गिरफ्तार हुए। जांच के दौरान बिना निबंधन के मिले 400 महिला छात्रावास केएस अनुपम ने बताया कि राज्य भर में महिला हॉस्टल और कोचिंग संस्थान की जांच को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के दौरान सिर्फ पटना में 400 महिला हॉस्टल बिना निबंधन के मिले हैं। पुलिस दीदी की मदद से निजी महिला हॉस्टलों पर नजर रखी जा रही है। इनमें सुरक्षा से संबंधित ऑडिट भी कराये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बक्सर में स्कूली छात्राओं के साथ गलत हरकत करने वाले आरोपित शिक्षकों के मामले में सभी आरोपितों की गिरफ्तारी कर ली गई है। जल्द ही इनके खिलाफ चार्जशीट दायर की जाएगी। पुलिस मुख्यालय इस मामले पर निरंतर नजर रखे हुए है। कांडों के निष्पादन को विशेष अभियान एडीजी (मुख्यालय) सुनील कुमार ने बताया कि लंबित कांडों के पर्यवेक्षण और निष्पादन को लेकर भी अभियान चलाया गया है। अभियान के दौरान दस दिन में 33,390 कांडों का निष्पादन किया गया। इनमें 10,875 कांड एसपी, 9159 कांड डीएसपी और 13356 कांड अंचल पुलिस निरीक्षक स्तर पर निष्पादित किए।

सीएमओ ने नगर का किया मैदानी भ्रमण, मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं के शीघ्र निराकरण के दिए निर्देश

सीएमओ ने नगर का किया मैदानी भ्रमण, मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं के शीघ्र निराकरण के दिए निर्देश शहडोल   मुख्य नगर पालिका अधिकारी शहडोल श्रीमती आशा जितेंद्र भंडारी ने सोमवार को वार्ड पार्षद शक्ति लक्ष्यकार के साथ चौधरी मोहल्ले सहित आसपास के क्षेत्रों का भ्रमण कर सड़क एवं नाली व्यवस्था का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान वार्डवासियों एवं जनप्रतिनिधियों ने क्षेत्र में सड़क, नाली एवं जल निकासी से संबंधित विभिन्न समस्याओं से सीएमओ को अवगत कराया। नागरिकों द्वारा बताई गई समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए सीएमओ ने मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने सड़क एवं नाली से संबंधित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर कराने के निर्देश दिए। उन्होंने सब इंजीनियर शरद द्विवेदी को क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप आवश्यक कार्यों का प्राक्कलन तैयार कर प्रस्तुत करने को कहा। उन्होंने निर्देशित किया कि प्राक्कलन तैयार करते समय क्षेत्र की वास्तविक आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाए तथा नियमानुसार आगामी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि नागरिकों को बेहतर सड़क सुविधा के साथ सुचारु जल निकासी की सुविधा मिल सके। सीएमओ ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वार्डवासियों से प्राप्त समस्याओं का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए उनका समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित करें। उन्होंने मौके पर उपस्थित नागरिकों से क्षेत्र की अन्य समस्याओं की जानकारी भी ली और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान वार्ड पार्षद शक्ति लक्ष्यकार, मनोनीत पार्षद विनय केवट, निकाय कर्मचारी, सब इंजीनियर शरद द्विवेदी सहित वार्ड के नागरिक उपस्थित रहे।

रामायण-महाभारत की 5 दिव्य तलवारें, जिनकी शक्ति के आगे बड़े-बड़े योद्धा भी थे बेबस

हमारे हिंदू धर्म में ऐसी कई दिव्य शक्तियों और अस्त्र-शस्त्रों का वर्णन मिलता है, जिनका सामना करना बड़े-बड़े योद्धाओं और यहां तक कि देवताओं के लिए भी आसान नहीं था. कहा जाता है कि इनमें से कुछ तलवारें इतनी शक्तिशाली थीं कि उनके सामने सामान्य अस्त्र-शस्त्र टिक ही नहीं सकते थे. हिंदू महाकाव्यों में कई ऐसे दिव्यास्त्र और शस्त्रों का जिक्र मिलता है, जिन्हें संभाल पाना या उनका इस्तेमाल करना आम योद्धाओं के बस की बात नहीं थी. इन्हीं दिव्य शस्त्रों में तलवार और खड़ग का भी विशेष स्थान था. रामायण और महाभारत में हमें कई ऐसे योद्धाओं का वर्णन मिलता है, जिन्होंने वरदान, तपस्या या अपनी युद्ध-कला के बल पर इन दिव्य शस्त्रों को प्राप्त किया था. वैसे शस्त्रों की श्रेणी में एक होती है तलवार, जिसकी एक या दोनों धारें हो सकती हैं, जबकि खड़ग आमतौर पर चौड़ी और बेहद धारदार तलवार के रूप में वर्णित किया जाता है. लेकिन आज हम बात करेंगे उन दिव्य तलवारों और खड़ग की, जिन्हें पौराणिक कथाओं में असाधारण शक्तियों से युक्त बताया गया है. तो चलिए जानते हैं रामायण और महाभारत से जुड़ी पांच शक्तिशाली तलवारों के बारे में, जिनके स्वामी महान योद्धा माने जाते हैं. कौशल्य तलवार सबसे पहली तलवार आती है कौशल्य तलवार. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस तलवार का निर्माण स्वयं विश्वकर्मा जी ने किया था और इसे देवताओं के गुरु बृहस्पति से जोड़ा जाता है. कहा जाता है कि बृहस्पति जी ने राक्षसों और असुरों से अपनी रक्षा के लिए इस दिव्य तलवार का इस्तेमाल किया. बाद में जब गंगापुत्र भीष्म ने उनसे शिक्षा प्राप्त की, तो यह तलवार भीष्म को प्राप्त हुई. आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले भीष्म अपने तपोबल और युद्ध कौशल के लिए प्रसिद्ध थे. कहा जाता है कि उन्होंने इस तलवार की शक्ति को अपनी साधना और पराक्रम से और अधिक प्रभावशाली बना दिया था. परशुराम जी के साथ हुए युद्ध के प्रसंग में भी भीष्म के अद्भुत युद्ध कौशल का वर्णन मिलता है. वहीं महाभारत के युद्ध में भी उनकी तलवारबाजी का भयंकर रूप देखने को मिला. कहा जाता है कि जब नकुल की तलवार और भीष्म की तलवार आपस में टकराई, तो उनके टकराने से इतनी तेज चमक पैदा हुई कि आसपास मौजूद सैनिक कुछ समय के लिए ठीक से देख नहीं पाए. भीष्म पितामह ने अभिमन्यु के कई दिव्य बाणों को भी अपनी तलवार से काट दिया था. इस तलवार की धार और बनावट को लेकर पौराणिक कथाओं में विश्वकर्मा जी की अद्भुत शिल्पकला का वर्णन किया जाता है. एक कथा के अनुसार, राजा पांडु ने भी युद्ध में जाने से पहले भीष्म से यह तलवार मांगी थी, लेकिन भीष्म ने इसे देने से इनकार कर दिया. उनका कहना था कि इस तलवार का इस्तेमाल हर कोई नहीं कर सकता था. असी तलवार दूसरी है असी तलवार. महाभारत के शांतिपर्व में असी के प्रकट होने से जुड़ी एक अद्भुत कथा मिलती है. कहा जाता है कि जब पृथ्वी पर अधर्म और असुरों का प्रभाव बढ़ने लगा, तब ऋषियों ने यज्ञ किया था. यज्ञ के दौरान एक भयंकर आकृति प्रकट हुई. उसका स्वरूप असाधारण था. इसके बाद वह आकृति एक तेजस्वी और धारदार तलवार में बदल गई. इसी तलवार को असी नाम दिया गया. ब्रह्मा जी ने इस तलवार को जगत की रक्षा और देवद्रोही असुरों के विनाश के लिए प्रकट किया था. इसके बाद यह भगवान शिव को प्राप्त हुई थी. कहा जाता है कि भगवान शिव ने इस दिव्य तलवार की सहायता से कई शक्तिशाली राक्षसों का अंत किया था. इसके बाद यह तलवार भगवान विष्णु और फिर अन्य देवताओं तक पहुंची. आगे चलकर यह कई महान योद्धाओं के पास रही. अंततः इस तलवार का संबंध द्रोणाचार्य से भी जोड़ा जाता है. असी तलवार की सबसे बड़ी विशेषता इसकी धार और शक्ति बताई जाती है. पौराणिक वर्णनों के अनुसार, यह इतनी शक्तिशाली थी कि बड़े से बड़े कवच को भेद सकती थी. सामान्य तलवारें इसके सामने बेहद कमजोर मानी जाती थीं. कहा जाता है कि द्रोणाचार्य ने जब अपने पुराने मित्र द्रुपद से राज्य का हिस्सा मांगा और इसके बदले उन्हें युद्ध का सामना करना पड़ा, तब उन्होंने द्रुपद को पराजित करने के लिए अपनी युद्ध-कला का प्रदर्शन किया. हालांकि, महाभारत के युद्ध में असी तलवार का इस्तेमाल बहुत अधिक होने का वर्णन नहीं मिलता. इसके बावजूद पौराणिक कथाओं में इसकी शक्ति का वर्णन बेहद प्रभावशाली तरीके से किया गया है. लेकिन असी तलवार का मुकाबला करने वाली एक और तलवार थी, जिसे हमारी सूची में तीसरे नंबर पर रखा गया है. नरसिंह तलवार तीसरे नंबर पर है नरसिंह तलवार. महाभारत के पांच पांडवों में नकुल का नाम सबसे ज्यादा उनकी सुंदरता, अश्व विद्या और तलवारबाजी के लिए लिया जाता है. नकुल युद्ध-कला में बेहद कुशल थे और तलवार चलाने में उन्हें विशेष महारत हासिल थी. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नकुल के पास एक अद्भुत तलवार थी, जिसे नरसिंह तलवार के नाम से जाना जाता था. कहा जाता है कि इंद्रप्रस्थ के निर्माण के समय भगवान कृष्ण की प्रेरणा से विश्वकर्मा जी ने पांडवों के लिए कई दिव्य वस्तुओं और अस्त्र-शस्त्रों की व्यवस्था की थी. इसी दौरान नकुल को यह विशेष तलवार प्राप्त हुई थी. जब पांडवों को वनवास मिला, तब नकुल ने इस तलवार का इस्तेमाल अपनी और अपने भाइयों की सुरक्षा के लिए किया. वनवास के दौरान उन्हें कई तरह के खतरों का सामना करना पड़ा और ऐसे समय में उनकी तलवारबाजी बेहद उपयोगी साबित हुई थी. कुरुक्षेत्र युद्ध के अंतिम चरण में भी नकुल ने अपने युद्ध कौशल का प्रदर्शन किया. युद्ध के 18वें दिन उन्होंने कर्ण के पुत्रों सुषेण, सत्यसेन और प्रसन्न के साथ युद्ध किया और उन्हें पराजित किया था. नरसिंह तलवार की शक्तियों की बात करें तो पौराणिक कथाओं में इसे बेहद खास बताया गया है. कहा जाता है कि इसका निर्माण ऐसी विशेष धातु से हुआ था, जिस पर समय का प्रभाव आसानी से नहीं पड़ता था. मान्यता है कि यह तलवार भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार की शक्ति से अभिमंत्रित थी. यही कारण था कि इसकी मारक क्षमता सामान्य तलवारों की तुलना में कहीं अधिक मानी जाती थी. नंदक तलवार नंदक तलवार भगवान विष्णु की तलवार थी. पौराणिक कथाओं … Read more

सिराज को चौके-छक्के जड़ने के बाद तिलक से हुई कहासुनी, 1991 के राशिद पटेल-रमण लांबा कांड की आई याद

नई दिल्ली दोनों घटनाओं के बीच 35 साल का फासला है. एक तरफ भारतीय क्रिकेट के इतिहास का सबसे बदनाम घरेलू क्रिकेट विवाद, दूसरी तरफ नई पीढ़ी के दो चर्चित खिलाड़ियों के बीच कुछ पल की गरमागरमी. फर्क बहुत बड़ा है, लेकिन एक सवाल दोनों घटनाओं को जोड़ देता है- जब दलीप ट्रॉफी के फाइनल में मुकाबला सिर्फ बल्ले और गेंद का नहीं रह जाता, तब मैदान का तापमान कितना ऊपर जा सकता है? चेन्नई में पहले बल्ला बोला, फिर तेवर चेन्नई के चेपॉक में ईस्ट जोन की पारी शुरू हुई तो सबसे ज्यादा निगाहें वैभव सूर्यवंशी पर थीं. उम्र सिर्फ 15 साल, लेकिन अंदाज ऐसा जैसे सालों से बड़े मंच पर खेल रहे हों. सामने थे मोहम्मद सिराज. भारतीय क्रिकेट के स्थापित तेज गेंदबाज.लेकिन वैभव ने उम्र नहीं देखी, गेंद देखी. उन्होंने सिराज के खिलाफ आक्रामक बल्लेबाजी की और एक ही ओवर में चौका-छक्का-चौका जड़कर फाइनल की शुरुआत में ही बता दिया कि वह यहां सिर्फ अनुभव लेने नहीं आए हैं. इसके बाद मैदान पर एक और दिलचस्प तस्वीर बनी. साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा वैभव के करीब पहुंचे. दोनों के बीच कुछ बातचीत हुई. कैमरों ने उस पल को पकड़ लिया और देखते ही देखते यह फाइनल के सबसे चर्चित दृश्यों में शामिल हो गया. कुछ रिपोर्टों ने इसे गरमागरम एक्सचेंज बताया, जबकि दूसरी व्याख्या में इसे हल्की-फुल्की स्लेजिंग या मजाकिया बातचीत भी माना गया. लेकिन इस पूरे दृश्य की असली दिलचस्पी शब्दों में नहीं, पात्रों की उम्र और कद के अंतर में थी. एक तरफ 15 साल का वैभव. दूसरी तरफ भारतीय क्रिकेट में अपनी पहचान बना चुका तिलक वर्मा. और यही वह तस्वीर है, जिसने 35 साल पुरानी दलीप ट्रॉफी की एक दूसरी कहानी याद दिला दी. वेन्यू – कीनन स्टेडियम, जमशेदपुर नॉर्थ जोन और वेस्ट जोन के बीच जमशेदपुर के कीनन स्टेडियम में खेला गया पांच दिवसीय फाइनल का आखिरी दिन भारतीय घरेलू क्रिकेट के इतिहास के लिए काला दिन साबित हुआ. दरअसल, वेस्ट जोन से खेल रहे राशिद पटेल नॉर्थ जोन के सलामी बल्लेबाज रमण लांबा पर स्टंप्स से हमला करने के लिए आगे बढ़े. लांबा खुद को बचाते रहे. स्टेडियम में बैठा हर कोई हैरान था कि आखिर ये क्या हो गया…? मैच के आखिरी दिन राशिद पटेल ने आपा खोया मैच का पांचवां और आखिरी दिन था. पहली पारी के आधार पर नॉर्थ जोन का विजेता होना तय था. कपिल देव की कप्तानी वाली नॉर्थ जोन की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 729/9 रनों का पहाड़ खड़ा कर अपनी पारी घोषित की थी. जवाब में रवि शास्त्री की कप्तानी वाली वेस्ट जोन की टीम 561 रनों पर ऑल आउट हो गई थी. यानी बड़े स्कोर वाले इस मैच में चार दिन बीत गए. आखिरी दिन नॉर्थ जोन ने बचे हुए समय में अपनी दूसरी पारी शुरू की. लेकिन 10वें ओवर में जो हुआ, वो अच्छा नहीं हुआ. बीमर फेंकी… लांबा का सिर बाल-बाल बचा नॉर्थ जोन की दूसरी पारी की शुरुआत एक बार फिर अजय जडेजा और पहली पारी में 180 रन बनाने वाले रमण लांबा ने की. दोनों जोरदार बल्लेबाजी कर रहे थे. स्कोर 59/0 (9.5 ओवर) तक पहुंच गया था. राशिद पटेल गुस्से में राउंड द विकेट गेंदें डाल रहे थे. वह लांबा को डेंजर एरिया के पास गेंद फेंक रहे थे. लांबा ने इस बीच बैट का हैंडल दिखा अपनी नाराजगी जताई. फिर क्या था, राशिद ने अपना आपा खो दिया और लगभग आधी पिच पर आकर लांबा पर बीमर फेंकी. लांबा का सिर बाल-बाल बचा. स्टंप उखाड़ा और लांबा को दौड़ाया… राशिद यहीं नहीं रुके. वह घूमकर आए, स्टंप उखाड़ा और लांबा पर वार करने की कोशिश में उन्हें बाउंड्री लाइन तक दौड़ाया. इस बीच लांबा खुद को बचाते रहे. आखिरकार किसी तरह यह लड़ाई रुकी. मैदान पर यह वाकया देख दर्शक भी उत्तेजित हो गए और पत्थर फेंकने शुरू कर दिए. विनोद कांबली बाउंड्री के पास फील्डिंग कर रहे थे. उन्हें चोट लगी. इसके बाद सारे खिलाड़ी पवेलियन में कैद हो गए. अंदर ही विजेता कप्तान को ट्रॉफी दे दी गई. आखिरकार राशिद पटेल पर 13 महीने का प्रतिबंध लगाया गया. लांबा भी इस लपेटे में आए, उन्हें भी 10 महीने के लिए बैन कर दिया गया. रमण लांबा के दौर में क्रिकेट का मैदान कई बार खिलाड़ियों के गुस्से का गवाह बना. आज क्रिकेट कहीं ज्यादा पेशेवर है, लेकिन प्रतिस्पर्धा की गर्मी अब भी वही है. फर्क सिर्फ इतना है कि वैभव के सामने अभी पूरा करियर पड़ा है. लांबा की कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि क्रिकेट में हुनर और आक्रामकता के साथ संयम की अहमियत भी कम नहीं होती. वैभव जिस रफ्तार से आगे बढ़ रहे हैं, उनके लिए चुनौती सिर्फ गेंदबाजों को छक्के लगाना या सीनियर्स के सामने टिकना नहीं है. असली चुनौती है- इस बढ़ते कद, बढ़ती चर्चा और मैदान के बढ़ते दबाव को संभालना. दुर्भाग्य से रमण लांबा की कहानी का अंत बेहद दर्दनाक रहा. 1998 में बांग्लादेश में क्लब क्रिकेट खेलते हुए शॉर्ट लेग पर फील्डिंग के दौरान उनके सिर पर गेंद लगी. लांबा उस वक्त बिना हेलमेट के फील्डिंग कर रहे थे. बल्लेबाज मेहराब हुसैन के जोरदार शॉट से निकली गेंद सीधे उनके सिर पर जा लगी. हालत गंभीर होने पर दिल्ली से न्यूरोसर्जन को बुलाया गया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका. महज 38 साल की उम्र में लांबा का निधन हो गया.

संगठन की सदस्यता में भी भ्रष्टाचार, यही है कांग्रेस के डीएनए की सच्चाई – संजय श्रीवास्तव

संगठन की सदस्यता में भी भ्रष्टाचार, यही है कांग्रेस के डीएनए की सच्चाई – संजय श्रीवास्तव पैसे लेकर कांग्रेस की सदस्यता देने को लेकर श्रीवास्तव का तीखा हमला’’ रायपुर यूथ कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव में पैसे लेकर सदस्यता देने का मामला सामने आने पर छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ भाजपा नेता ’’श्री संजय श्रीवास्तव’’ ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। श्रीवास्तव ने कहा कि यूथ कांग्रेस के चुनाव में सदस्य बनाने के नाम पर पैसे लिए जाने के आरोप बेहद गंभीर हैं। यदि संगठन के चुनाव के लिए सदस्यता अभियान में ही आर्थिक लेन-देन के आरोप सामने आ रहे हैं, तो यह कांग्रेस की कार्यप्रणाली और संगठनात्मक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता बड़े-बड़े घोटालों और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे रहे हैं और अब यदि उसी पार्टी के संगठनात्मक विस्तार एवं सदस्यता प्रक्रिया में भी पैसे लेने के आरोप सामने आते हैं, तो यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। कांग्रेस के लिए यह आत्ममंथन का विषय होना चाहिए। वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि ’’कांग्रेस देश में 58 वर्षो तक सत्ता में रही है। उनके इतने लंबे शासनकाल में उनके बड़े-बड़े नेताओं की भ्रष्टाचार और घोटालों के कई मामलों में संलिप्तता के सबूत मिले है। उन्होंने छत्तीसगढ़ प्रदेश में शराब घोटाले, कोयला घोटाले और डीएमएफ घोटाले से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर भ्रष्टाचार की राजनीति को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यूथ कांग्रेस जैसे संगठन में सदस्यता ही चुनावी प्रक्रिया का आधार होती है। जब सदस्यता के आधार पर संगठन के भीतर चुनाव होते हैं, तब सदस्य बनाने के लिए ही पैसे लिए जाने के आरोप लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करते हैं। श्रीवास्तव ने कहा कि ’’“यदि किसी राजनीतिक दल में सदस्यता से लेकर चुनाव तक पैसे का प्रभाव दिखाई देने लगे, तो यह लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। कांग्रेस को यह बताना चाहिए कि यूथ कांग्रेस की सदस्यता प्रक्रिया में पैसे लिए जाने के आरोपों की सच्चाई क्या है और इस मामले में क्या कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज देश के लिए नासूर बन चुकी है और जहां-जहां कांग्रेस की सरकारें हैं, वहां भ्रष्टाचार के आरोप लगातार सामने आते रहते हैं। श्रीवास्तव ने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि ’’कांग्रेस को अपने संगठन के भीतर झांककर देखना चाहिए और यह विचार करना चाहिए कि आखिर उसकी राजनीतिक एवं संगठनात्मक कार्यप्रणाली पर बार-बार भ्रष्टाचार के सवाल क्यों उठते हैं।’ उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक दलों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए राजनीतिक दलों की सदस्यता और चुनाव जैसी आंतरिक प्रक्रियाएं पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और भ्रष्टाचार से मुक्त होनी चाहिए। कांग्रेस को यूथ कांग्रेस सदस्यता में पैसे लेने के आरोपों पर तत्काल स्पष्टीकरण देना चाहिए।

पंजाब में बड़ी कार्रवाई, अर्श डल्ला गैंग के 2 सदस्य दबोचे; 5 पिस्टल और कारतूस मिले

मानसा. जिला पुलिस ने अर्श डल्ला गैंग के दो गुर्गो को पांच पिस्टल और कारतूस समेत गिरफ्तार किया है। पुलिस गिरफ्तार किए गए इन आरोपितों का अदालत से पुलिस रिमांड हासिल करके गहराई से जांच करेगी कि उनका आगे मकसद क्या था। एसएसपी वैभव चौधरी ने प्रेस काॅन्फ्रेंस दौरान बताया कि ऑपरेशन प्रहार मुहिम के तहत गश्त के दौरान पुलिस नेहरू काॅलेज की बैक साइड पहुंची तो दो आरोपित थैले से कुछ निकालकर अपने डब्ब और जेब में कुछ डालते दिखाई दिए। पुलिस पार्टी की ओर से काबू किए गए आरोपितों की पहचान शहर के वार्ड नंबर 9 वासी अमृत पाल सिंह उर्फ जैकी पुत्र गोरा सिंह और गांव मूसा वासी कुलदीप सिंह उर्फ घुग्गी पुत्र करनैल सिंह के रूप में हुई। पुलिस ने दोनों आरोपितों के कब्जे से 4 पिस्टल 32 बोर समेत 12  कारतूस और 315 बोर की देसी पिस्टल बरामद करके उनके खिलाफ थाना सिटी-2 में आर्म्स एक्ट तहत मामला दर्ज किया गया। एसएसपी ने बताया कि प्राथमिक पूछताछ के दौरान सामने आया कि वे अर्श डल्ला गैंग के लिए काम करते थे और अवैध तरीके से असले की सप्लाई वे मध्य प्रदेश से मंगवाते थे। अमृत पाल सिंह के खिलाफ 3 और कुलदीप सिंह के खिलाफ पहले 2 मामले एनडीपीएस,आर्म्ज और लूटपाट के दर्ज है। एसएसपी ने बताया कि पुलिस की मुस्तैदी से दोनों आरोपितों को गिरफ्तारी करने से बड़ी वारदात टल गई है। उन्होंने बताया कि पुलिस रिमांड के दौरान बरामद हथियारों का सोत्र और इससे जुड़े आरोपितों के बारे ओर जानकारी हासिल की जाएगी। पुलिस लोगों की सुरक्षा और शांति को यकीनी बनाने के लिए बचनबद्ध है और गैर कानूनी गतिविधियों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए लगातार कार्रवाई जारी रखेगी। इस दौरान एसपी जसबिंदर सिंह, डीएसपी जसविंदर सिंह और पुशपिंदर सिंह भी मौजूद थे।

‘हनुमान अंश’ के शो को लेकर हंगामे की खबरों के बीच बंद हुआ Gaiety Galaxy, जानें पूरा मामला

नीम करौली बाबा के जीवन पर बनी फिल्म 'हनुमान अंश' को दर्शकों का खूब प्यार मिल रहा है. रिलीज के एक महीने बाद भी फिल्म के शोज हाउसफुल जा रहे हैं. फिल्म देखने के लिए लोग थिएटर्स तक खिंचे चले आ रहे हैं. इसी बीच मुंबई के बांद्रा स्थित मशहूर गेयटी गैलेक्सी थिएटर में फिल्म 'हनुमान अंश' का शो हटाने पर बवाल मचने की खबर सामने आई. बताया गया कि कुछ लोगों ने वहां जमकर विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद थिएटर को बंद कर दिया गया है. हालांकि, थिएटर बंद होने की असली वजह क्या है? चलिए बताते हैं.. क्यों बंद हुआ थिएटर? ऐसी रिपोर्ट्स सामने आईं कि बांद्रा के गेयटी गैलेक्सी थिएटर में 'हनुमान अंश' फिल्म न दिखाए जाने पर कुछ लोगों ने हंगामा किया. उन्होंने वहां लगी 'मिर्जापुर द मूवी' के पोस्टरों को भी फाड़ दिया. बवाल के बाद जब मुंबई पुलिस मामले की जांच के लिए वहां पहुंची तो पता चला कि Gaiety Galaxy थिएटर ने साल 2021-22 से अपना लाइसेंस रिन्यू नहीं करवाया है. इसके बाद से ही थिएटर का कामकाज ठप पड़ गया, क्योंकि पुलिस ने इसे बंद कर दिया है. यह भी बताया गया कि पुलिस ने थिएटर पर एक नोटिस भी चिपकाया, जिसमें उसे बंद रखने का निर्देश दिया गया है. हालांकि, आज तक संग बातचीत में अधिकारियों ने साफ किया है कि लाइसेंस रिन्यू होते ही सिनेमाघर को दोबारा खोलने की अनुमति दे दी जाएगी. लाइसेंस इश्यू के चलते बंद हुआ थिएटर मराठा मंदिर के मैनेजर मनोज पांडे ने 'इंडिया टुडे/ आजतक' संग खास बातचीत में इस बात की पुष्टि की है कि लाइसेंस से जुड़े कुछ इंटरनल इश्यूज की वजह से यह स्थिति पैदा हुई है, जिसे वो जल्द से जल्द सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं. आपको बता दें कि मराठा मंदिर और गेयटी गैलेक्सी दोनों का मैनेजमेंट एक ही है. बता दें कि ऐसी अफवाहें भी थीं कि 'हनुमान अंश' की स्क्रीनिंग के दौरान हुए हंगामे के कारण थिएटर बंद किया गया. वहीं, सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में यह दावा भी किया जा रहा है कि थिएटर के अंदर कुछ केबल जल गए थे और मैनेजमेंट इस समस्या को ठीक करने में लगा हुआ था. ऐसे में मनोज पांडे ने सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों पर यकीन न करने की सलाह दी है. उन्होंने कहा- सोशल मीडिया पर चल रही किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें. कुछ अंदरूनी मुद्दे हैं, जिन्हें हम फिलहाल सुलझाने में लगे हैं. हम जल्द ही शो दोबारा शुरू करेंगे. 'हनुमान अंश' की बात करें तो फिल्म बॉक्स ऑफिस पर तूफानी रफ्तार से कमाई कर रही है. फिल्म के भजन, स्टोरीलाइन और सादगी फैंस के दिलों को छू रही है.

7 साल से अटका PU अंडरपास प्रोजेक्ट अब आगे बढ़ा, ₹8.40 करोड़ की लागत से बनेगा रास्ता

चंडीगढ़ चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी से जुड़े दो बड़े अंडरपास प्रोजेक्ट अब फाइलों से निकलकर अगले चरण में पहुंच गए हैं। पीयू और पीजीआई के बीच बनने वाले अंडरपास का टेंडर जल्द आवंटित किया जाएगा। पीयू-पीजीआई अंडरपास का प्रस्ताव वर्ष 2019 में तैयार हुआ था। इसके बाद डिजाइन और सुविधाओं में कई बदलाव किए गए। अब करीब सात साल बाद इसका निर्माण शुरू करने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ी है। इस प्रोजेक्ट पर कुल 8.40 करोड़ रुपए खर्च होंगे। 25 हजार लोगों की रोजाना आवाजाही पंजाब यूनिवर्सिटी और PGI के बीच रोजाना करीब 25 हजार लोग पैदल आवाजाही करते हैं। इनमें PGI आने वाले मरीज, उनके परिजन, पीयू के छात्र और कर्मचारी शामिल हैं। पहले पीयू के गेट नंबर-1 के सामने सड़क पार करने के लिए एक रास्ता था, लेकिन वहां वाहनों की आवाजाही बढ़ने से जाम लगने लगा। इसके बाद यह रास्ता बंद कर दिया गया। अब लोगों को नेहरू अस्पताल के निकास द्वार के सामने से सड़क पार करनी पड़ती है। यहां दोनों तरफ भारी ट्रैफिक होने के कारण खासकर मरीजों और बुजुर्गों को परेशानी होती है। पीजीआई के मुख्य गेट से आने-जाने वालों को भी लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। मई में निकला टेंडर जल्द आवंटन पीयू और पीजीआई के बीच बनने वाले अंडरपास के लिए मई में टेंडर जारी किया गया था। टेंडर प्रक्रिया में शामिल कंपनियों के साथ शर्तों को लेकर बातचीत हुई। अब सहमति बनने के बाद टेंडर जल्द आवंटित करने की तैयारी है। अंडरपास प्रोजेक्ट की कुल लागत 8.40 करोड़ रुपए है। इसमें से 6.73 करोड़ रुपए निर्माण कार्य पर खर्च होंगे, जबकि 1.67 करोड़ रुपए भूमिगत सीवरेज और ड्रेनेज लाइनों को बदलने पर खर्च किए जाएंगे। अंडरपास निर्माण से पहले इलाके में मौजूद भूमिगत सीवरेज और ड्रेनेज व्यवस्था में बदलाव किया जाएगा। पीजीआई के एडवांस न्यूरो साइंस सेंटर की ओर जाने वाले गेट नंबर-3 के छोटे चौक से लेकर सेक्टर-14 और 15 के चौक तक लाइनों को बदला जाएगा। नई लाइनें बिछाने के बाद उन्हें मौजूदा सीवरेज और ड्रेनेज नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। पहले सिर्फ सीढ़ियां, सुविधा के लिए बदला प्लान इन सात वर्षों में अंडरपास के डिजाइन में कई बदलाव हुए। शुरुआती योजना में अंडरपास के अंदर केवल सीढ़ियों का प्रावधान था। बाद में पीजीआई आने वाले मरीजों और अन्य लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए डिजाइन में बदलाव किया गया। अंडरपास के अंदर बनने वाली दुकानों की संख्या भी कम की गई। पहले यहां 12 दुकानें बनाने की योजना थी, जिसे घटाकर 9 दुकानें कर दिया गया, ताकि दुकानों और आवाजाही के लिए अधिक जगह मिल सके। नॉर्थ-साउथ कैंपस के बीच जाम से समाधान पीयू के सेक्टर-25 स्थित साउथ कैंपस में पिछले डेढ़ दशक के दौरान काफी विस्तार हुआ है। वर्ष 2010 तक यहां मुख्य रूप से डेंटल कॉलेज और यूआईईटी थे, लेकिन बाद में पंजाब यूनिवर्सिटी के कई साइंस विभाग और तीन हॉस्टल भी यहां बनाए गए। इसके कारण नॉर्थ और साउथ कैंपस के बीच छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों की आवाजाही बढ़ी है। इलाके में जाम की समस्या भी बढ़ गई है दूसरी ओर, मध्य मार्ग और दक्षिण मार्ग पर भारी ट्रैफिक के कारण इस इलाके में जाम की समस्या भी बढ़ गई है। इसी को देखते हुए पीयू के गेट नंबर-3 के पास नॉर्थ और साउथ कैंपस को जोड़ने के लिए दूसरा अंडरपास बनाने की योजना तैयार की गई। चीफ आर्किटेक्ट के पास पहुंचा डिजाइन प्रशासनिक मंजूरी के बाद इंजीनियरिंग विभाग ने इस प्रोजेक्ट के लिए कंसल्टेंट नियुक्त किया था। कंसल्टेंसी रिपोर्ट तैयार होने के बाद अब प्रस्तावित डिजाइन को चंडीगढ़ टाउन प्लानिंग विभाग और चीफ आर्किटेक्ट कार्यालय की मंजूरी के लिए भेज दिया गया है। सेक्टर-25 स्थित साउथ कैंपस तक पहुंच बनाई जाए प्रस्तावित योजना के अनुसार, गेट नंबर-3 के पास टीचर फ्लैट्स के सामने से अंडरपास निकालकर सेक्टर-25 स्थित साउथ कैंपस तक पहुंच बनाई जाएगी। पार्क की ओर या टीचर फ्लैट्स की दूसरी साइड से अंडरपास बनाने के विकल्प पर योजना तैयार की गई है।

बंदियों ने गढ़ी आस्था और पर्यावरण संरक्षण की मिसाल, गणेश प्रतिमाओं में दिखा अनोखा संदेश

आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही बंदियों की गणेश प्रतिमाएं केंद्रीय जेल रायपुर में बंदियों ने मिट्टी से तैयार की 500 पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं प्रतिमाओं में तुलसी एवं विभिन्न पौधों के बीज, विसर्जन के बाद अंकुरित होकर बनेंगे पौधे रायपुर गणेशोत्सव के पावन अवसर पर केंद्रीय जेल रायपुर के बंदियों ने आस्था, रचनात्मकता और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम प्रस्तुत किया है। आगामी गणेशोत्सव के लिए केंद्रीय जेल रायपुर में बंदियों द्वारा प्राकृतिक मिट्टी से लगभग 1 से 2 फीट आकार की 500 पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं तैयार की गई हैं। इन प्रतिमाओं की खासियत यह है कि इनके निर्माण में प्राकृतिक मिट्टी एवं रंगों का उपयोग किया गया है तथा प्रतिमाओं में तुलसी सहित विभिन्न पौधों के बीज भी डाले गए हैं।           गणेशोत्सव के पश्चात इन प्रतिमाओं का विसर्जन किए जाने पर इनमें मौजूद बीज अंकुरित होकर पौधों का रूप लेंगे। इस प्रकार ये प्रतिमाएं धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और हरित संदेश को भी जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनेंगी। बंदियों की रचनात्मकता को मिला सकारात्मक दिशा           केंद्रीय जेल रायपुर में बंदियों द्वारा विभिन्न कौशल विकास एवं उत्पादन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में लगभग 10 बंदियों ने अत्यंत लगन, मेहनत और रचनात्मकता के साथ भगवान गणेश की इन आकर्षक प्रतिमाओं का निर्माण किया है। यह पहल बंदियों के कौशल विकास, रचनात्मक अभिव्यक्ति और सकारात्मक सोच को प्रोत्साहित करने के साथ उन्हें समाजोपयोगी एवं पर्यावरण हितैषी गतिविधियों से जोड़ने का सार्थक प्रयास है। मिट्टी की प्रतिमाओं में बीजों का समावेश इस कार्य को और विशेष बनाता है। आस्था और प्रकृति संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं         जेल अधीक्षक रायपुर योगेश सिंह क्षत्री ने कहा कि केंद्रीय जेल रायपुर द्वारा बंदियों के पुनर्वास एवं आत्मनिर्भरता के लिए निरंतर विभिन्न कौशल विकास एवं उत्पादन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में बंदियों द्वारा तैयार की गई ये बीजयुक्त पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं इस संदेश को साकार करती हैं कि आस्था और प्रकृति संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की रचनात्मक गतिविधियों से बंदियों को अपनी प्रतिभा और कौशल को सकारात्मक दिशा में उपयोग करने का अवसर मिलता है। साथ ही पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी ऐसे प्रयास महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।