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सलाखों के पीछे गूंजेगी साहित्य की आवाज, पंजाब की 27 जेलों में होगा साहित्य उत्सव

 चंडीगढ़  जेल की सलाखें भले ही बंदियों की बाहरी दुनिया से दूरी तय करती हों, लेकिन अब उनकी कलम को अभिव्यक्ति की आजादी देने की तैयारी है। पंजाब की 27 जेलों में बंद कैदियों और बंदियों को अपनी भावनाओं, अनुभवों और कल्पनाओं को शब्दों में ढालने का अवसर देने के लिए जेल साहित्य उत्सव आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। अक्टूबर के पहले सप्ताह में प्रस्तावित इस उत्सव में प्रदेश की सभी 27 जेलों के बंदी हिस्सा ले सकेंगे। इस पहल का उद्देश्य बंदियों को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़कर उन्हें सकारात्मक दिशा देना और पुनर्वास की प्रक्रिया को मजबूत करना है। बंदियों को रचनात्मक रूप से व्यस्त रखना इस पहल के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। जेल में रहने के दौरान बंदियों के पास अपनी भावनाओं और अनुभवों को व्यक्त करने के सीमित अवसर होते हैं। ऐसे में लेखन उनके लिए अपनी बात कहने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। कहानी, कविता और अन्य रचनात्मक विधाओं के माध्यम से बंदी अपने भीतर चल रहे विचारों और भावनाओं को कागज पर उतार सकेंगे। ‘गुलदस्ता’ परियोजना से मिलेगा साहित्यिक माहौल इस पहल को ‘गुलदस्ता’ परियोजना के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है। बेल्बा फाउंडेशन के सहयोग से संचालित इस परियोजना के माध्यम से जेलों में साहित्यिक सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। बंदियों को विभिन्न प्रकार की साहित्यिक सामग्री पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें अपनी रचनाएं लिखने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा। जेल प्रशासन का मानना है कि पढ़ने और लिखने की आदत बंदियों को सकारात्मक गतिविधि से जोड़ सकती है। जेल में खाली समय का इस्तेमाल केवल समय बिताने के बजाय रचनात्मक कार्यों में किया जा सकेगा। बंदी अपने जीवन की घटनाओं, अनुभवों, यादों, सपनों और भविष्य की उम्मीदों को कहानी या कविता का रूप दे सकेंगे। इससे उन्हें अपने जीवन और परिस्थितियों को नए नजरिये से देखने का अवसर मिल सकता है। पुनर्वास की दिशा में अलग तरह का प्रयोग जेल साहित्य उत्सव को केवल साहित्यिक आयोजन के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसे बंदियों के सुधार और पुनर्वास से जोड़कर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लेखन व्यक्ति को अपने विचारों और भावनाओं पर आत्ममंथन करने का अवसर देता है। बंदी अपने अतीत की घटनाओं को शब्दों में व्यक्त करते हुए भविष्य को लेकर नई सोच विकसित कर सकते हैं। इस पहल की खास बात यह है कि इसमें बंदियों को अपनी कहानी खुद लिखने का मंच दिया जाएगा। जेल में बंद व्यक्ति के लिए यह अवसर इसलिए भी अहम है क्योंकि समाज से दूरी के बीच उसकी आवाज अक्सर सीमित हो जाती है। साहित्य उस आवाज को अभिव्यक्ति देने का माध्यम बन सकता है। कलम के जरिये दूसरी तरह की आजादी पंजाब की सभी 27 जेलों को इस साहित्यिक पहल से जोड़ना इसे व्यापक स्वरूप देता है। जेल प्रशासन के लिए यह प्रयोग बंदियों को अनुशासन और रचनात्मकता के साथ जोड़ने का अवसर भी है। वहीं बंदियों के लिए यह अपनी प्रतिभा को पहचानने और उसे सामने लाने का माध्यम बन सकता है। सलाखों के पीछे बाहरी दुनिया की आजादी भले सीमित हो, लेकिन विचारों और कल्पनाओं पर कोई पहरा नहीं होता। ऐसे में एक कलम बंदी को उसकी यादों, कल्पनाओं और आत्ममंथन की दुनिया तक पहुंचाने का रास्ता खोल सकती है। जेल साहित्य उत्सव इसी सोच के साथ बंदियों को शब्दों की दुनिया से जोड़ने की एक नई पहल के रूप में सामने आ रहा है।

Maruti Cars Price Hike: ग्राहकों को फिर झटका! मारुति ने बढ़ाए कारों के दाम, जानें कितना महंगा हुआ सफर

मुंबई  मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) ने ग्राहकों को एक और झटका दिया है। कंपनी ने सितंबर 2026 से अपने कुछ सेलेक्टेड कार मॉडल्स की कीमतों में 20 हजार रुपये तक बढ़ोतरी करने का ऐलान किया है। कंपनी का कहना है कि लगातार बढ़ती प्रोडक्शन कॉस्ट और महंगाई के कारण यह फैसला लेना पड़ा है। मारुति सुजुकी इससे पहले मई और अगस्त में भी कीमतों में बढ़ोतरी कर चुकी है। हालांकि, पहले की दोनों बढ़ोतरी कंपनी के लगभग पूरे व्हीकल पोर्टफोलियो पर लागू हुई थीं, जबकि इस महीने में होने वाली प्राइस हाइक सिर्फ सेलेक्टेड मॉडल्स के लिए थी। किन कारों की कीमत बढ़ेगी? मारुति सुजुकी ने फिलहाल यह साफ नहीं किया है कि 20 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी किन-किन कारों पर लागू होगी। कंपनी के मौजूदा कार पोर्टफोलियो में ऑल्टो K10, S-प्रेसो, सेलेरियो, वैगनआर, ईको, स्विफ्ट, डिजायर, ब्रेजा, अर्टिगा और विक्टोरिस जैसी कारें शामिल हैं। वहीं, नेक्सा सीरीज के तहत कंपनी ई विटारा, इनविक्टो, जिम्नी, XL6, ग्रैंड विटारा, फ्रॉन्क्स और बलेनो सेल है। इनमें से किन मॉडलों पर नई कीमत लागू होगी, इसकी जानकारी कंपनी ने अभी नहीं दी है। लागत बढ़ने से कंपनियों पर दबाव मारुति सुजुकी के अलावा हाल में टाटा मोटर्स और हुंडई ने भी अपनी कारों की कीमतें बढ़ाने की घोषणा की है। इन कंपनियों ने भी बढ़ती प्रोडक्शन कॉस्ट और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों को कीमत बढ़ाने का मेन कारण बताया है। मारुति सुजुकी का कहना है कि कंपनी लागत का असर कम से कम ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है। इसके लिए कॉस्ट कम करने और लोकल लेवल पर ज्यादा से ज्यादा कंपोनेंट तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है। मारुति सुजुकी ने हाल में लॉन्च की नई बलेनो मारुति सुजुकी ने 5 सितंबर को बलेनो के फेसलिफ्ट को लॉन्च किया है। कंपनी ने इसकी शुरुआती कीमत 6.10 हजार रुपये (एक्स-शोरूम) रखी है। इसमें सबसे बड़ा बदलाव 1.2-लीटर Z-सीरीज के थ्री-सिलेंडर वाले पेट्रोल इंजन का इस्तेमाल है, जिसे स्विफ्ट और Dzire से लिया गया है। यह इंजन 5-स्पीड मैनुअल और AMT गियरबॉक्स के साथ आता है। यही इंजन मैनुअल गियरबॉक्स के साथ फैक्ट्री-फिटेड CNG किट के ऑप्शन में भी उपलब्ध है। बलेनो में अब बड़ी फ्रंट ग्रिल दी गई है, जिसमें काले हॉरिजॉन्टल स्लैट्स हैं, जबकि हेडलैंप और टेल लैंप पहले जैसे ही हैं। नए फॉग लैंप हाउसिंग के साथ बंपर में थोड़ा बदलाव किया गया है। इस बार इसमें जो नई चीजे जोड़ी गई हैं, उनमें वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स, टायर प्रेशर मॉनिटर और लेवल 2 ADAS-बेस्ड सेफ्टी फीचर्स शामिल हैं।  

MP Transco में 351 युवाओं को मिली नौकरी! ऊर्जा मंत्री तोमर ने नियुक्ति पत्र देकर किया स्वागत

एमपी ट्रांसको ने 351 नए कार्मिकों को दी नियुक्ति : ऊर्जा मंत्री तोमर भोपाल  ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार ऊर्जा विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) द्वारा विभिन्न श्रेणियों के पदों पर चयन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूर्ण कर प्रथम चरण में अब तक कुल 351 नए कार्मिकों को नियुक्तियां दी गई है। इनमें द्वितीय श्रेणी के 55 अधिकारी, तृतीय श्रेणी के 173 कर्मचारी तथा चतुर्थ श्रेणी के 123 कर्मचारी शामिल हैं। ऊर्जा मंत्री तोमर ने सभी नवनियुक्त कार्मिकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए समर्पण, दक्षता और उत्तरदायित्व के साथ कार्य करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि युवा एवं प्रशिक्षित मानव संसाधन के जुड़ने से प्रदेश की ट्रांसमिशन व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी। चरणबद्ध तरीके से की जा रही है नियुक्तियां ऊर्जा मंत्री ने बताया कि कंपनी द्वारा ट्रांसमिशन तंत्र के प्रभावी संचालन, रखरखाव तथा विस्तार कार्यों को गति देने के लिए चरणबद्ध रूप से रिक्त पदों पर भर्ती की जा रही है। इन नियुक्तियों से कंपनी की तकनीकी एवं संचालन क्षमता को और मजबूती मिलेगी तथा प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण एवं विश्वसनीय विद्युत पारेषण व्यवस्था सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। नए कार्मिकों को दिया जा रहा है प्रशिक्षण एमपी ट्रांसको के मुख्य अभियंता (मानव संसाधन एवं प्रशासन) धीरेंद्र सिंह ने बताया कि नियुक्त किए गए 351 कार्मिकों में 55 सहायक अभियंता, 166 कनिष्ठ अभियंता(पारेषण), 7 कनिष्ठ अभियंता (सिविल), 89 उपकेंद्र परिचारक, 24 सिविल परिचारक तथा 10 सर्वेयर परिचारक शामिल हैं। सभी नवनियुक्त कार्मिकों को आवश्यक तकनीकी एवं कार्यात्मक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।  

बिहार वाला फॉर्मूला यूपी में आजमाएगी BJP? तावड़े ने मिशन-2027 के लिए कसी कमर

   लखनऊ उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने सत्ता की हैट्रिक लगाने का ताना-बाना बुनना शुरू कर दिया है. बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और यूपी प्रभारी विनोद तावड़े ने अपने दो दिवसीय लखनऊ दौरे के दौरान मिशन-2027 के लिए पार्टी के रणनीतिक खाके यानी ब्लूप्रिंट की नींव रखी. बिना किसी भारी तामझाम और सादगी के साथ लखनऊ पहुंचे तावड़े ने जीत की हैट्रिक लगाने के लिए संगठन को चुस्त-दुरुस्त करने से लेकर नैरेटिव सेट करने तक कई अहम दिशा-निर्देश दिए।  बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने अपने दो दिवसीय प्रवास के दौरान विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की तैयारियों को परखा. इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ-साथ दोनों उप-मुख्यमंत्रियों से मुलाकात और बातचीत भी की. इसके अलावा संगठन के लोगों के साथ मंथन कर सारा ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है।  विनोद तावड़े ने पार्टी पदाधिकारियों को विधानसभा चुनाव 2027 के लिए टारगेट दिया. उन्होंने कहा कि हमें हर बूथ को मजबूत करना होगा, कोई बूथ छूटना नहीं चाहिए और उसके लिए विशेष कार्ययोजना बनाएं. इसके साथ ही उन्होंने सभी जातियों को साधने का मंत्र भी दिया और कहा कि संख्या चाहे कम हो या ज्यादा, लेकिन कोई जाति छूट न जाए, हमें सबको जोड़ना होगा।  यूपी फतह का खाका खींच गए तावड़े बिहार चुनावों में एनडीए के चुनावी प्रबंधन और तालमेल के सफल फार्मूले को यूपी की जमीन पर उतारने का काम तावड़े ने शुरू कर दिया है. उत्तर प्रदेश के बीजेपी प्रभारी बनने के बाद पहली बार लखनऊ पहुंचे राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े ने 2027 का विधानसभा चुनाव मजबूत संगठन के बलबूते और पीएम मोदी व सीएम योगी के नाम और काम पर लड़ने के संकेत दिएच इस तरह सरकार और संगठन दोनों के साथ समन्वय बनाकर 2027 के चुनाव में उतरने का खाका खींच गए।  विनोद तावड़े ने रविवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के बाद दिनभर पार्टी दफ्तर में क्षेत्रीय पदाधिकारियों से मुलाकात की. उन्होंने प्रदेश के महामंत्रियों, क्षेत्रीय अध्यक्षों और प्रभारियों के साथ बैठक की. बीजेपी संगठन के नेताओं से मुलाकात के दौरान विनोद तावड़े ने साफ कहा कि बूथ की मजबूती ही 2027 के चुनाव की जीत का आधार बनेगी।  तावड़े ने पदाधिकारियों से कहा कि वे हर बूथ के अनुसार कार्ययोजना बनाएं. किस बूथ पर जीत की क्या स्थिति है, इसकी ठीक से समीक्षा करें. इसके अलावा जहां कमी नजर आए, उसे दुरुस्त करें. इस तरह हारी हुई बूथों को चिह्नित करते हुए वहां पार्टी को मजबूत करने के निर्देश भी दिए।  सपा के पीडीए का काउंटर प्लान तैयार अखिलेश यादव के 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) कार्ड की काट के लिए तावड़े ने 'परफॉर्मेटिव नैरेटिव' पेश किया. उन्होंने सपा के पीडीए पर तंज कसते हुए इसे 'पराया धन अपना' करार दिया और जमीन पर अवैध कब्जे तथा महिला सुरक्षा (स्त्रीधन) जैसे मुद्दों को उठाकर सपा को घेरने का संकेत दिया. इसके साथ ही बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग को मजबूत करने का खाका भी खींचा।  तावड़े ने कहा कि हमें सभी वर्गों का साथ चाहिए, ऐसी कोई भी जाति न हो जो अछूती रह जाए. यूपी बड़ा प्रदेश है और हर क्षेत्र में अलग-अलग जातियों का प्रभाव है. यदि किसी जाति के वोटरों की संख्या कम है, तो भी हमें उसे छोड़ना नहीं है, उनसे संपर्क करके उन्हें पार्टी से जोड़ने का प्रयास करना है. इसके साथ ही उन्होंने विपक्ष की तैयारी पर नजर रखकर अपनी रणनीति बनाने की नसीहत दी।  विपक्ष के प्रत्याशी का तोड़ तलाशने का टास्क बीजेपी प्रभारी ने कहा कि विपक्षी तैयारियों पर हमें पूरी नजर रखनी होगी. विपक्ष का कोई नेता या प्रत्याशी मजबूत है, तो उसकी मजबूती का आधार पता करना होगा और फिर उसी के अनुसार अपनी रणनीति तैयार करके मजबूत होना होगा. पार्टी सूत्रों का कहना है कि उन्होंने विपक्ष के मजबूत प्रत्याशियों पर खास नजर रखने और उनका तोड़ निकालने के लिए कहा है. इसका यह संदेश भी है कि यदि विपक्ष के मजबूत प्रत्याशी को अपने पाले में लाकर जीत मिलती है, तो आखिर में यह भी एक विकल्प हो सकता है।  बीजेपी संगठन को निर्देश दिए गए कि 2022 के चुनाव में गंवाई गई 57 सीटों और एनडीए की हारी हुई 130 सीटों की गहन समीक्षा की जाए और बूथ स्तर पर शक्ति केंद्रों में युवाओं को जोड़ा जाए. इस तरह से विनोद तावड़े 2027 के विधानसभा चुनाव में सत्ता की हैट्रिक लगाने ही नहीं, बल्कि बिहार की तरह क्लीन स्वीप करने का प्लान बना रहे हैं।  वीआईपी कल्चर से दूरी बनाकर दिया संदेश बीजेपी के प्रदेश प्रभारी बनाए जाने के बाद विनोद तावड़े ने उत्तर प्रदेश आने से पहले ही साफ कर दिया था कि उनके स्वागत की एक भी होर्डिंग शहर में नहीं लगनी चाहिए और न ही उनका नाम दिखाई देना चाहिए. ऐसे में जिन लोगों ने विनोद तावड़े के लिए बैनर, पोस्टर और होर्डिंग लगाए थे, उन्हें रातों-रात उन्हीं लोगों ने हटा लिया।  अब विनोद तावड़े ने नया मंत्र दिया और पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे लखनऊ में समय बिताने के बजाय अपने-अपने आवंटित विधानसभा क्षेत्रों में जाएं, रात को वहीं प्रवास करें और स्वागत-सत्कार के चक्कर में न पड़ें. मार्च 2027 तक, यानी विधानसभा चुनाव होने तक सभी पदाधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गईं और चुनावी अभियानों को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए गए।  संगठन-सरकार के साथ मजबूत समन्वय प्रदेश प्रभारी तावड़े ने भाजपा के सभी प्रदेश मोर्चों के अध्यक्षों से भी संवाद किया. इस दौरान उन्होंने निर्देश दिए कि वे जल्द से जल्द अपनी कार्यसमिति बनाएं. सूत्रों के अनुसार हफ्तेभर के अंदर कार्यकारिणी गठित करने के लिए उन्होंने कहा है. यह भी कहा गया कि जब कार्यकारिणी गठित हो जाए, तो उन्हें आगे का टारगेट दिया जाएगा जिसे पूरा करने के लिए सभी को मिलकर जुटना होगा।  तावड़े ने रविवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की. सूत्रों के अनुसार उन्होंने सरकार के कामकाज की जानकारी ली और कल्याणकारी योजनाओं पर बात की. सरकार और संगठन में समन्वय के मुद्दे पर भी दोनों नेताओं के बीच चर्चा हुई।  सीएम के साथ बैठक में संगठन के सहयोग से सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने और विकास को मुद्दा बनाने पर सहमति बनी. इससे पहले उन्होंने शनिवार … Read more

सब्जी-चाय वालों पर मंडराया QR बंद होने का खतरा! 15 सितंबर तक Re-KYC जरूरी, लाखों छोटे कारोबारी परेशान

नई दिल्ली भारत में डिजिटल पेमेंट अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है. चाय की दुकान हो, सब्जी मंडी हो या गली-मोहल्ले की किराना दुकान, हर जगह QR कोड के जरिए भुगतान आम बात है. लेकिन अब एक ऐसी डेडलाइन सामने आई है, जिसने लाखों छोटे कारोबारियों और उनके ग्राहकों की चिंता बढ़ा दी है।  RBI के नियमों के तहत मर्चेंट्स के लिए री-केवाईसी (Re-KYC) प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है. उद्योग जगत का कहना है कि अगर बड़ी संख्या में छोटे कारोबारियों का सत्यापन तय समय तक पूरा नहीं हो पाया, तो उनके QR कोड आधारित भुगतान प्रभावित हो सकते हैं।  क्या है पूरा मामला? रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार मर्चेंट्स को समय-समय पर अपनी KYC जानकारी अपडेट करनी होती है. मौजूदा समयसीमा के तहत 15 सितंबर तक री-केवाईसी पूरी करना जरूरी है. पेमेंट एग्रीगेटर और फिनटेक कंपनियों का कहना है कि लाखों छोटे कारोबारियों का सत्यापन अभी बाकी है. इसी वजह से इंडस्ट्री ने RBI से समयसीमा बढ़ाने की मांग भी की है।  आम लोगों पर क्या असर पड़ सकता है? अगर किसी दुकानदार की री-केवाईसी समय पर पूरी नहीं होती और उसका QR कोड प्रभावित होता है, तो ग्राहकों को भुगतान में परेशानी हो सकती है. मान लीजिए आप सब्जी खरीदने पहुंचे और दुकानदार का QR कोड काम नहीं कर रहा. ऐसी स्थिति में UPI से भुगतान संभव नहीं होगा. तब आपको नकद भुगतान करना पड़ सकता है या फिर सीधे बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने जैसे विकल्प अपनाने पड़ सकते हैं. हालांकि इसका असर पूरे देश में एक जैसा नहीं होगा. एक्सपर्ट्स का मानना है कि छोटे व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी वाले विक्रेताओं वाले इलाकों में परेशानी ज्यादा दिखाई दे सकती है।  कितने कारोबारी हो सकते हैं प्रभावित? इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक स्थिति चिंता बढ़ाने वाली हो सकती है. करीब 30 से 35 फीसदी छोटे और रेहड़ी-पटरी वाले विक्रेता इस डेडलाइन से प्रभावित हो सकते हैं. वहीं लगभग 10 लाख छोटे कारोबारियों को जोखिम के दायरे में माना जा रहा है. इंडस्ट्री का अनुमान है कि तय समय तक करीब 80 फीसदी वेरिफिकेशन ही पूरा हो पाएगा. यही वजह है कि पेमेंट कंपनियां RBI से अतिरिक्त समय देने की मांग कर रही हैं।  क्या रुक जाएगा डिजिटल पेमेंट सिस्टम? इस पूरे मामले को लेकर सबसे जरूरी बात है कि इससे देश का डिजिटल पेमेंट सिस्टम बंद नहीं होने वाला है. भारत में हर महीने अरबों UPI ट्रांजैक्शन होते हैं और बड़े कारोबारियों के भुगतान सिस्टम सामान्य रूप से चलते रहेंगे. चिंता मुख्य रूप से उन छोटे व्यापारियों को लेकर है, जिनका कारोबार QR कोड आधारित भुगतान पर काफी हद तक निर्भर है. अगर ऐसे कारोबारियों के QR कोड प्रभावित होते हैं, तो उनकी बिक्री और ग्राहकों की सुविधा दोनों पर असर पड़ सकता है।  क्या ग्राहकों को कैश रखना चाहिए? फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है. इंडस्ट्री लगातार समयसीमा बढ़ाने की मांग कर रही है और बाजार की नजर RBI के अगले कदम पर टिकी हुई है. हालांकि एहतियात के तौर पर अगर आप छोटे बाजारों, मंडियों या रेहड़ी-पटरी वाले इलाकों में खरीदारी करते हैं, तो कुछ नकद राशि साथ रखना उपयोगी हो सकता है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि RBI 15 सितंबर की समयसीमा को बरकरार रखता है या फिर इंडस्ट्री को कुछ और राहत देता है. लाखों छोटे कारोबारियों की नजर फिलहाल इसी फैसले पर टिकी हुई है। 

छत्तीसगढ़ से जुड़ेंगे 3 बड़े राज्य, रायपुर-रांची दूरी होगी महज 7 घंटे; बिलासपुर समेत कई शहरों को फायदा

रायपुर  रायपुर से रांची और धनबाद तक का सफर अब आसान होने वाला है. क्योंकि छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच बन रहा रायपुर-धनबाद एक्सप्रेसवे दोनों राज्यों के बीच गेंमचेंचर होने वाला है. इसके बनने के बाद रायपुर से रांची का सफर महज 7 घंटे में पूरा हो जाएगा. जबकि रायपुर से धनबाद का सफर भी 8 से 9 घंटे के बीच में पूरा हो जाएगा. इस हाईवे के बनने से छत्तीसगढ़ की कनेक्टिविटी झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों से और तेज हो जाएगी. 707 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का काम अलग-अलग चरणों में पूरा किया जा रहा है. छत्तीसगढ़ के लिहाज से यह प्रोजेक्ट बेहद अहम माना जा रहा है. क्योंकि इससे न केवल पश्चिम की तरफ रोड कनेक्टिविटी मजबूत होगी. बल्कि ईधन और समय की भी अच्छी बचत होनी शुरू हो जाएगी।  रायपुर से रांची 7 घंटे में  रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर (EC-07) के बनने के बाद छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर और झारखंड की राजधानी रांची के बीच सफर आसान हो जाएगा. अभी दोनों शहरों के बीच की दूरी तय करने में 13 से 14 घंटे का समय लग जाता है, क्योंकि टू-लेन रास्तों से होकर जाना पड़ता है. लेकिन इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद यह सफर 7 घंटे में पूरा कर लिया जाएगा. वहीं दोनों शहरों के बीच 30 किलोमीटर तक का फर्क आएगा।  रायपुर से धनबाद का सफर 9 घंटे में  छत्तीसगढ़ और झारखंड के इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से रायपुर और धनबाद की दूरी में भी बड़ा अंतर आएगा. अभी दोनों शहरों के सफर में 14 से 16 घंटे का समय लगता है. लेकिन इस एक्सप्रेसवे के पूरा होने से दोनों शहरों के बीच का सफर 8 से 9 घंटे में पूरा हो जाएगा. यह एक्सप्रेसवे पुराने घुमावदार रास्तों के बजाय कई जगह बिल्कुल नया और सीधा रास्ता बना देगा. रायपुर से धनबाद के बीच बनकर तैयार होने वाला है यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे एक्सेस-कंट्रोल्ड से लेस होगा. जिससे यहां 100 किलोमीटर रफ्तार से गाड़ियां दौड़ सकेगी।  छत्तीसगढ़ की तीन राज्यों तक कनेक्टिविटी     छत्तीसगढ़: रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, पत्थलगांव, कुनकुरी, जशपुर तक जाएगा.      झारखंड: गुमला, रांची, बोकारो और धनबाद तक जाएगा.     यहां से आगे का यह सफर छत्तीसगढ़ को ओडिशा और पश्चिम बंगाल से भी कनेक्ट कर देगा. छत्तीसगढ़ में 384 किलोमीटर का हिस्सा  रायपुर-धनबाद एक्सप्रेसवे का 384 किलोमीटर का हिस्सा छत्तीसगढ़ में बनाया जा रहा है. प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की तरफ से प्रेस रिलीज जारी करके बताया गया कि NHAI ने पत्थलगांव-कुनकुरी से छत्तीसगढ़-झारखंड सीमा तक NH-43 पर इस प्रोजेक्ट का काम शुरू कर दिया है. यह राजमार्ग सीधे तौर पर रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़ और कोरबा जैसे औद्योगिक केंद्रों को झारखंड के धनबाद से जोड़ देगा. रायपुर से बिलासपुर के बीच का पुराना मार्ग 6-लेन के ब्राउनफील्ड एक्सप्रेसवे में अपग्रेड हो रहा है. जबकि बिलासपुर से आगे धनबाद तक यह पूरी तरह से एक नया रूट होगा. यह टोटल 104.25 किलोमीटर लंबा रूट है।  ट्रैफिक का दवाब नहीं होगा  इस एक्सप्रेसवे की खास बात यह है कि रास्ते में पड़ने वाले बड़े शहरों जैसे रायपुर, कोरबा, जशपुर, गुमला, रांची, बोकारो के बाहर से बायपास और ओवरब्रिज दिए गए हैं. जिससे शहर के अंदर का लोकल ट्रैफिक और जाम सफर को धीमा नहीं करेगा. इस पूरे रूट पर 382 से अधिक स्ट्रक्चर बनाए जा रहे हैं. जिसमें 7 बड़े पुल, 30 छोटे पुल, 6 फ्लाईओवर्स और जंगली जानवरों को पैदल चलने वालों की सुरक्षा के लिए बड़े पैमाने पर अंडरपास शामिल हैं. जिससे ट्रैफिक का दवाब कम रहेगा।  2027 तक शुरू करने की तैयारी फिलहाल एनएचएआई की तरफ से छत्तीसगढ़ और झारखंड में अलग-अलग चरणों में इसका काम शुरू हो चुका है. एक्सप्रेसवे का ज्यादातर हिस्सा 2026 के दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. जबकि 2027 तक इसे शुरू करने की तैयारी है. यह एक्सप्रेसवे चालू होने के बाद लॉजिस्टिक्स लागत को 30 से 40 प्रतिशत तक कम कर देगा. जिससे छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच हाईस्पीड कनेक्टिविटी हो जाएगी। 

जंग के लिए ‘पोर्न टैक्स’! यूक्रेन में एडल्ट इंडस्ट्री को कानूनी बनाने का प्रस्ताव, जुटेंगे करोड़ों डॉलर

कीव  रूस के खिलाफ जंग लड़ रहे यूक्रेन में पोर्नोग्राफी को कानूनी रूप से वैध बनाने का प्रस्ताव सामने आया है. यूक्रेनी सांसद यारोस्लाव जेलेजनियाक के समर्थन वाला एक बिल एडल्ट एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को कानूनी अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाने की कोशिश कर रहा है. जेलेजनियाक यूक्रेनी संसद की वित्त समिति के अध्यक्ष हैं।  वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, जेलेजनियाक का अनुमान है कि पोर्नोग्राफी को कानूनी बनाने से सरकार को टैक्स के रूप में करीब 25 मिलियन डॉलर यानी 2.5 करोड़ डॉलर की आमदनी हो सकती है. उनका कहना है कि यह रकम युद्ध के लिए करीब 30 हजार ड्रोन खरीदने के लिए पर्याप्त हो सकती है।  अभी पोर्नोग्राफी है गैरकानूनी यूक्रेन में फिलहाल पोर्नोग्राफी बनाना, रखना या उसका वितरण करना गैरकानूनी है. इसके लिए सात साल तक की जेल की सजा हो सकती है. हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बावजूद एडल्ट कंटेंट इंडस्ट्री लगातार बढ़ी है और भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों की मदद से इसका कारोबार चलता रहा है।  अब टैक्स अधिकारियों ने एडल्ट कंटेंट क्रिएटर्स से टैक्स वसूलने की कोशिश शुरू की है. लेकिन यहां एक अजीब स्थिति पैदा हो गई है. जो क्रिएटर्स अपनी कमाई घोषित करते हैं, वे खुद ऐसी गतिविधियों की जानकारी अधिकारियों तक पहुंचा सकते हैं, जो कानून के तहत अपराध हैं। जेलेजनियाक ने इसे 'ट्रेजिकॉमिक' स्थिति बताया. उनके मुताबिक, महिलाओं के सामने या तो टैक्स न देने पर आपराधिक कार्रवाई का खतरा है या टैक्स देने पर पोर्नोग्राफी कानून के तहत कार्रवाई का।  OnlyFans से करोड़ों की कमाई रिपोर्ट में प्लेटफॉर्म की पैरेंट कंपनी फेनिक्स इंटरनेशनल के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि 2023 में 7,900 यूक्रेनियों ने OnlyFans के जरिए 131 मिलियन डॉलर से ज्यादा कमाए।  टैक्स अधिकारियों की कार्रवाई के बाद कुछ क्रिएटर्स को टैक्स चोरी और अवैध एडल्ट कंटेंट बनाने के आरोपों में नोटिस भी मिले. OnlyFans क्रिएटर स्वितलाना ड्वोर्निकोवा ने दावा किया कि पुलिस ने उनके घर पर छापा मारा और 20 हजार डॉलर नकद के साथ लैपटॉप और हार्ड ड्राइव जब्त किए. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने केस खत्म करने के बदले रिश्वत की पेशकश की, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया।  राष्ट्रपति जेलेंस्की की वेबसाइट पर पहुंचा मामला टैक्स वकील लेसिया मिखालेंको ने कहा कि युद्ध के दौरान क्रिएटर्स पर मुकदमा चलाना सरकारी संसाधनों का सही इस्तेमाल नहीं है. वहीं ड्वोर्निकोवा ने राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की वेबसाइट पर याचिका दायर कर खुद को 'ईमानदार टैक्सपेयर' बताया. उनका दावा था कि उन्होंने करीब 9 लाख डॉलर टैक्स दिया है।  रिपोर्ट के मुताबिक, याचिका को एक हफ्ते में 25 हजार से ज्यादा हस्ताक्षर मिले. इसके बाद जेलेंस्की ने कहा कि संसद जेलेजनियाक के पोर्नोग्राफी को कानूनी बनाने के प्रस्ताव पर विचार करेगी. बिल जुलाई में संसद की पहली रीडिंग पास कर चुका है और अब दूसरी रीडिंग का इंतजार है।   

MP में 12 और सड़कों पर टोल की तैयारी, बढ़ेगा सफर का खर्च; सरकार को सालाना 3 हजार करोड़ की उम्मीद

भोपाल  मध्यप्रदेश में आने वाले समय में सड़क से सफर करना महंगा हो सकता है। राज्य सरकार सड़कों से होने वाली आय बढ़ाने के लिए टोल व्यवस्था का विस्तार करने की तैयारी में है। कम से कम 12 और सड़कों को टोल के दायरे में लाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके अलावा कुछ अन्य सड़कों को भी भविष्य में इस व्यवस्था से जोड़ने की योजना है। फिलहाल प्रदेश में मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीआरडीसी) की अलग-अलग योजनाओं के तहत 93 सड़कों पर 139 टोल प्लाजा संचालित हो रहे हैं। विभाग का मानना है कि नई सड़कों को टोल व्यवस्था से जोड़कर सरकार की आय में बड़ा इजाफा किया जा सकता है। अभी 400 करोड़, लक्ष्य 3 हजार करोड़ तक पीडब्ल्यूडी से जुड़े अधिकारियों के अनुसार प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के टोल से सालाना करीब 4 हजार करोड़ रुपये की आय होती है। इसके मुकाबले पीडब्ल्यूडी और एमपीआरडीसी की टोल से कमाई करीब 400 करोड़ रुपये सालाना है। इसी अंतर को देखते हुए विभाग अगले 10 से 15 साल में टोल से होने वाली आय को बढ़ाकर 2 हजार से 3 हजार करोड़ रुपये सालाना तक पहुंचाना चाहता है। इसके लिए नई सड़कों का निर्माण टोल आधारित मॉडल पर करने पर जोर दिया जा रहा है। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के अनुसार टोल आधारित नई सड़कों से विभाग की आय बढ़ेगी। इससे सड़क क्षेत्र में निवेश के साथ राज्य के राजस्व में भी विभाग का योगदान बढ़ाया जा सकेगा।  निजी कंपनियों के बजाय सरकार के पास आएगा टोल सड़क निर्माण के लिए पीडब्ल्यूडी अब हाइब्रिड एन्युटी मॉडल यानी एचएएम को ज्यादा बढ़ावा देने की तैयारी में है। इसका उद्देश्य यह भी है कि सड़क बनने के बाद टोल से मिलने वाली राशि सरकार के पास आए। बीओटी मॉडल में सड़क बनाने वाली निजी कंपनी निवेश करती है और तय अवधि तक टोल से अपनी लागत और मुनाफा वसूलती है। वहीं एचएएम में सड़क निर्माण की लागत का 40 प्रतिशत हिस्सा सरकार देती है, जबकि बाकी 60 प्रतिशत राशि निजी कंपनी लगाती है। इस मॉडल में सड़क बनने के बाद टोल वसूली पीडब्ल्यूडी के माध्यम से किए जाने का प्रावधान है। यही वजह है कि विभाग नई परियोजनाओं के लिए एचएएम मॉडल को प्राथमिकता देने पर विचार कर रहा है।  एमपीआरडीसी के टोल आधारित सड़क प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक हाल में कुछ सड़कों को एचएएम के तहत मंजूरी दी गई है। इनमें सिवनी-बालाघाट, विदिशा-भोपाल और दमोह-कटनी सड़क परियोजनाएं शामिल हैं। इन सड़कों पर टोल प्लाजा बनाए जाने की योजना है। इसके अलावा आने वाले समय में एचएएम के तहत और सड़क परियोजनाएं मंजूर किए जाने की तैयारी है।  वाहन चालकों पर बढ़ेगा खर्च नई सड़कों को टोल नेटवर्क में शामिल किए जाने का सीधा असर वाहन चालकों पर पड़ेगा। इन सड़कों का इस्तेमाल करने वाले लोगों को निर्धारित शुल्क देना होगा। सरकार जहां इसे सड़क निर्माण और रखरखाव के लिए अतिरिक्त आय का जरिया मान रही है, वहीं यात्रियों और माल परिवहन करने वाले वाहनों के लिए यात्रा की लागत बढ़ने की संभावना है। नई सड़कों पर टोल लागू होने से पहले शुल्क की दर और वसूली की व्यवस्था तय की जाएगी। 

दिवाली-छठ की ट्रेन टिकट बुकिंग शुरू, स्पेशल ट्रेनों का भी ऐलान; कंफर्म सीट के लिए करें जल्दी

नई दिल्ली दिवाली और छठ पर घर जाने की तैयारी कर रहे यात्रियों के लिए अहम खबर है. भारतीय रेलवे में दिवाली की यात्रा के लिए टिकट बुकिंग शुरू हो गई है. देशभर में इस साल दिवाली 8 नवंबर को मनाई जाएगी. रेलवे के एडवांस रिजर्वेशन सिस्टम के तहत यात्री अपनी यात्रा की तारीख के आधार पर 60 दिन पहले तक टिकट बुक कर सकते हैं. यदि आपको कन्फर्म सीट चाहिए, तो रिजर्वेशन जल्द करना होगा।  रेलवे की एडवांस रिजर्वेशन विंडो सुबह 8 बजे खुलती है. हालांकि, टिकट बुकिंग यात्रा की तारीख पर निर्भर करती है. यात्रियों को यात्रा की तारीख को छोड़कर 60 दिन पहले तक रिजर्वेशन की सुविधा मिलती है. दिवाली के आसपास दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों से बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब और दूसरे राज्यों के लिए जाने वाली ट्रेनों में भारी मांग रहती है. इसलिए लोकप्रिय ट्रेनों में सीटें तेजी से भर सकती हैं।  इन रूट्स पर होता है ट्रैफिक प्रेशर त्योहारी सीजन में दिल्ली-पटना, पटना-अहमदाबाद, पटना-उधना, मुंबई-पटना, हावड़ा-पटना, बेंगलुरु-पटना, फिरोजपुर-पटना, वाराणसी-दिल्ली, कानपुर-दिल्ली, लुधियाना-सुपौल, लुधियाना-पटना, चेन्नई-पटना, हैदराबाद-पटना और दिल्ली-गोरखपुर जैसे रूट पर यात्रियों का दबाव ज्यादा रहता है. इन रूट्स पर यात्रा की योजना बना रहे यात्रियों को रिजर्वेशन विंडो खुलने के साथ ही सीट की उपलब्धता चेक कर लेनी चाहिए।  रेलवे ने चलाईं फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली यात्रियों की भीड़ को देखते हुए नॉर्दर्न रेलवे ने कई फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों की घोषणा की है. ये ट्रेनें दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, चंडीगढ़, महाराष्ट्र और अन्य प्रमुख शहरों के बीच अतिरिक्त कनेक्टिविटी देंगी. इनमें वाराणसी-दिल्ली, अयोध्या कैंट-आनंद विहार, चंडीगढ़-पटना, फिरोजपुर कैंट-पटना और आनंद विहार-पाटलिपुत्र जैसे प्रमुख रूट शामिल हैं।  क्र. ट्रेन नंबर ट्रेन रूट ट्रिप/फेरे 1 09189/09190 मुंबई सेंट्रल-कटिहार-मुंबई सेंट्रल 77 अतिरिक्त ट्रिप 2 04127/04128 कानपुर सेंट्रल-गुवाहाटी-कानपुर सेंट्रल 14 अतिरिक्त ट्रिप 3 05736/05735 कटिहार-अमृतसर-कटिहार 12 अतिरिक्त ट्रिप 4 05932/05931 डिब्रूगढ़-कोलकाता-डिब्रूगढ़ 13 अतिरिक्त ट्रिप 5 04209/04210 वाराणसी-नई दिल्ली-वाराणसी 50 ट्रिप 6 04213/04214 अयोध्या कैंट-आनंद विहार टर्मिनल-अयोध्या कैंट 36 ट्रिप 7 04512/04511 चंडीगढ़-पटना जंक्शन-चंडीगढ़ 18 ट्रिप 8 04616/04615 फिरोजपुर कैंट-पटना जंक्शन-फिरोजपुर कैंट 16 ट्रिप 9 04008/04007 आनंद विहार टर्मिनल-जोगबनी-आनंद विहार टर्मिनल 10 ट्रिप 10 04028/04027 आनंद विहार टर्मिनल-मुजफ्फरपुर-आनंद विहार टर्मिनल 26 ट्रिप 11 04010/04009 दिल्ली जंक्शन-सीतामढ़ी-दिल्ली जंक्शन 12 ट्रिप 12 02456/02455 नई दिल्ली-कानपुर सेंट्रल-नई दिल्ली 98 ट्रिप 13 02563/02564 बरौनी-नई दिल्ली-बरौनी स्पेशल — 14 02569/02570 दरभंगा-नई दिल्ली-दरभंगा स्पेशल — 15 04014/04013 आनंद विहार टर्मिनल-लौकाहा बाजार-आनंद विहार टर्मिनल 150 ट्रिप 16 04002/04001 हजरत निजामुद्दीन-दादर-हजरत निजामुद्दीन 14 ट्रिप 17 04227/04228 वाराणसी-चंडीगढ़-वाराणसी 36 ट्रिप 18 02458/02457 आनंद विहार टर्मिनल-कानपुर सेंट्रल-आनंद विहार टर्मिनल 72 ट्रिप 19 04314/04313 योग नगरी ऋषिकेश-मुजफ्फरपुर-योग नगरी ऋषिकेश 18 ट्रिप 20 04096/04095 आनंद विहार टर्मिनल-पाटलिपुत्र-आनंद विहार टर्मिनल 120 ट्रिप   टिकट बुक करते समय इन बातों का रखें ध्यान दिवाली के दौरान लोकप्रिय ट्रेनों में टिकट तेजी से भर सकते हैं. इसलिए यात्रियों को अपनी यात्रा की तारीख पहले से तय करके रिजर्वेशन विंडो खुलते ही उपलब्धता चेक करनी चाहिए।  टिकट बुक करते समय ट्रेन नंबर, यात्रा की तारीख, बोर्डिंग स्टेशन और ​गंतव्य स्टेशन की जानकारी ध्यान से जांचना जरूरी है. यात्रा से पहले ट्रेन का शेड्यूल और सीट की उपलब्धता भी चेक कर लें।  रेलवे से जुड़ी सेवाओं, शिकायतों और यात्रा संबंधी जानकारी के लिए यात्री रेलमदद हेल्पलाइन 139 पर संपर्क कर सकते हैं या NTES ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं।  दिवाली के दौरान नियमित ट्रेनों में सीट नहीं मिलने पर नॉर्दर्न रेलवे की ओर से घोषित ये फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें यात्रियों के लिए अतिरिक्त विकल्प साबित हो सकती हैं।  कंफर्म टिकट के लिए अपनाएं ये आसान ट्रिक्स कंफर्म टिकट के लिए मास्टर लिस्ट बनाएं. टिकट बुकिंग शुरू होने से पहले ही IRCTC के टिकट बुकिंग App में यात्रियों के नाम, उम्र और बर्थ की जानकारी (Master List) सेव कर लें. समय से पहले लॉगिन करें. सुबह 8 बजे बुकिंग शुरू होने से 5 मिनट पहले लॉगिन कर लें. तेजी से पेमेंट के लिए IRCTC Wallet का प्रयोग करें।