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यूपी में सरकारी स्कूलों का होगा कायाकल्प, 14,429 स्कूलों में बढ़ेगी डिजिटल शिक्षा

यूपी के सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को नया आयाम, 14,429 स्कूल बनेंगे स्मार्ट श्रीट्रॉन इंडिया लिमिटेड करेगी स्मार्ट क्लासेज़ की स्थापना, 300 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत, चरणबद्ध तरीके से होगा विद्यालयों का विकास वर्तमान में 32 हजार से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, 15 हजार से अधिक विद्यालयों में आईसीटी लैब और 1,129 विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी की मिल रही सुविधा 2 लाख 61 हजार से अधिक शिक्षकों को दिए गए टैबलेट, बच्चों को आधुनिक और बेहतर डिजिटल शिक्षा उपलब्ध कराने पर योगी सरकार का जोर लखनऊ  उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा को और मजबूत करने के लिए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को 'स्मार्ट स्कूल' के रूप में विकसित करने के लिए श्रीट्रॉन इंडिया लिमिटेड को कार्यदायी संस्था के रूप में नामित किया गया है। कैबिनेट ने 300 करोड़ रुपये की स्वीकृत धनराशि के सापेक्ष 14,429 प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इन विद्यालयों में स्मार्ट क्लासेज़ की स्थापना चरणबद्ध तरीके से की जाएगी। प्रदेश सरकार पहले से ही बेसिक शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल सुविधाओं के विस्तार पर लगातार काम कर रही है। वर्तमान में 32 हजार से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लासेज़, 15 हजार से अधिक विद्यालयों में आईसीटी लैब और 1,129 विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा उपलब्ध है। इसके साथ ही 2 लाख 61 हजार से अधिक शिक्षकों को टैबलेट दिए जा चुके हैं। सरकार का प्रयास है कि डिजिटल माध्यमों के जरिए सरकारी स्कूलों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा के बेहतर अवसर मिलें। उत्तर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास की शुरुआत योगी सरकार ने वर्ष 2021 में की थी और इनका विधिवत संचालन शैक्षिक सत्र 2022-23 से शुरू किया गया। स्मार्ट क्लास के माध्यम से बच्चों को विषयों को समझने में डिजिटल माध्यमों का लाभ मिल रहा है। अब प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने के निर्णय से इस व्यवस्था का और विस्तार होगा। 300 करोड़ रुपये से होगा स्मार्ट स्कूलों का विकास कैबिनेट निर्णय के अनुसार बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत प्राथमिक विद्यालयों को 'स्मार्ट स्कूल' के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए 300 करोड़ रुपये की स्वीकृत धनराशि के सापेक्ष 14,429 प्राथमिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लासेज़ की स्थापना की जाएगी। स्मार्ट क्लास की स्थापना का कार्य नियमानुसार प्रतिस्पर्धात्मक निविदा के माध्यम से कराया जाएगा। इसके लिए प्रति विद्यालय 2,07,910 रुपये (सेनेटेज चार्जेज एवं जीएसटी सहित) की प्रस्तावित दर निर्धारित की गई है। यदि निविदा प्रक्रिया में प्रति विद्यालय इससे कम दर प्राप्त होती है, तो स्वीकृत कुल 300 करोड़ रुपये की धनराशि के भीतर अधिक संख्या में प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित किया जा सकेगा। उच्च नामांकन वाले विद्यालयों में चरणबद्ध तरीके से बढ़ेंगी डिजिटल सुविधाएं प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या और उच्च नामांकन के आधार पर चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट क्लास एवं आईसीटी लैब की स्थापना की जाएगी। भारत सरकार की समग्र शिक्षा योजनान्तर्गत परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में डिजिटल इनिशिएटिव प्रोग्राम के तहत उच्च नामांकन वाले विद्यालयों में भी चरणबद्ध रूप से स्मार्ट क्लास एवं आईसीटी लैब स्थापित की जानी हैं। परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने से बच्चों को पारंपरिक शिक्षण व्यवस्था के साथ आधुनिक तकनीक का लाभ मिलेगा। स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब के माध्यम से विद्यार्थियों की पढ़ाई को अधिक प्रभावी और रोचक बनाने में मदद मिलेगी। डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा भी बच्चों को सीखने के लिए अतिरिक्त डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराएगी। योगी सरकार की प्राथमिकता प्रदेश के बच्चों को बेहतर, आधुनिक और तकनीक आधारित शिक्षा उपलब्ध कराना है। सरकारी स्कूलों में डिजिटल संसाधनों का लगातार विस्तार इसी प्रतिबद्धता का हिस्सा है, ताकि अधिक से अधिक बच्चे बदलती तकनीक के साथ कदम मिलाकर आगे बढ़ सकें।

‘यूपी राइज 2026’: इनोवेटिव स्टार्टअप आइडियाज से जॉब क्रिएटर बनेंगे आगरा के युवा

'यूपी राइज 2026': इनोवेटिव स्टार्टअप आइडियाज से जॉब क्रिएटर बनेंगे आगरा के युवा – कार्यक्रम में 30 में से 11 बेहतरीन स्टार्टअप आइडियाज हुए शॉर्टलिस्ट, युवाओं ने दिखाई अपनी उद्यमशीलता – कुकिंग ऑयल के डिजिटल मार्केटप्लेस 'री-ऑयल' ने जीता प्रथम पुरस्कार, 'स्टडी एप' और 'सोलर स्वीप' रहे रनरअप – आंबेडकर विवि में छात्रों को दी गई उ.प्र. सरकार की रोजगारपरक और स्टार्टअप योजनाओं की विस्तृत जानकारी आगरा  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'आत्मनिर्भर यूपी' विजन को धरातल पर उतारने के लिए मंगलवार को डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के खंदारी परिसर स्थित जेपी सभागार में 'यूपी राइज 2026' कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति प्रो. आशु रानी और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के उप निदेशक आत्रेय मिश्रा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस आयोजन में शहर और आसपास के क्षेत्रों से आए 1000 से अधिक छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के युवाओं की मानसिकता में बदलाव लाकर उन्हें केवल नौकरी तलाशने वाला न बनाकर, स्वयं का उद्यम स्थापित कर दूसरों को रोजगार देने वाला 'जॉब क्रिएटर' (रोजगार सृजक) बनाना है। नवाचार और स्टार्टअप को उत्तर प्रदेश सरकार की उड़ान उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश में नवाचार (इनोवेशन) और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए निरंतर और धरातलीय कार्य कर रही है। कार्यक्रम में युवाओं को राज्य सरकार की विभिन्न रोजगारपरक नीतियों की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना, यूपी स्टार्टअप फंड, मुख्यमंत्री अभ्युदय निशुल्क कोचिंग योजना और यूपी स्किल मिशन जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं पर प्रकाश डाला। इसके अलावा कन्या सुमंगला योजना, फ्री टैबलेट/स्मार्टफोन योजना और महिला सामर्थ्य योजना से जुड़ी नीतियों के माध्यम से मिलने वाली वित्तीय सहायता व आसान सब्सिडी के बारे में भी बताया गया, ताकि युवा बिना किसी आर्थिक बाधा के अपने स्टार्टअप को एक सफल बिजनेस मॉडल में बदल सकें। विद्यार्थियों के इनोवेटिव स्टार्टअप आइडियाज ने खींचा ध्यान यूपी राइज की थीम के अनुरूप, आगरा के युवाओं ने अपनी उद्यमशीलता का शानदार प्रदर्शन किया। आयोजन में कुल 30 स्टार्टअप आइडिया आए, जिनमें से 11 बेहतरीन आइडिया को शॉर्टलिस्ट किया गया। इनमें कलाकारों के लिए एआई आधारित मार्केटप्लेस 'Kalaverse', कंस्ट्रक्शन प्लानिंग को आसान बनाने वाला 'Build Easy AI', अनदेखे पर्यटन स्थलों को प्रमोट करने वाला 'Hidden India' और बेकरी के लिए 'Organic floral cream color' जैसे आइडियाज शामिल रहे। वहीं, ई-रिक्शा चालकों की बैटरी समस्या सुलझाने के लिए 'Saathi EV', हस्तशिल्प को बढ़ावा देने वाला 'The Craft Duo' और मंदिर के कचरे से उपयोगी उत्पाद बनाने वाले 'Temple 2 Green' जैसे अनूठे पर्यावरण-अनुकूल प्रोजेक्ट्स ने भी खूब वाहवाही लूटी। 'री-ऑयल' ने जीता प्रथम पुरस्कार, मेंटर्स ने किया मार्गदर्शन जूरी और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के सामने बेहतरीन प्रेजेंटेशन देकर 'Re-Oil' (इस्तेमाल किए गए कुकिंग ऑयल के लिए डिजिटल मार्केटप्लेस) ने प्रथम स्थान हासिल कर 25,000 रुपये का मुख्य पुरस्कार जीता। वहीं, छात्रों की पढ़ाई को व्यवस्थित करने वाले 'Study App' और सोलर पैनल की सफाई के लिए रोबोटिक ब्रश तकनीक वाले 'Solar Sweep' की टीम संयुक्त रूप से रनरअप रही। छात्रों का मार्गदर्शन करने के लिए जाने-माने कॉर्पोरेट विशेषज्ञ हर्षित देसाई, कपिल त्रिमाल और विवेक गोयल बतौर मेंटर मौजूद रहे। गौरतलब है कि यूपी राइज कार्यक्रम प्रदेश के 25 शहरों के 30 प्रमुख कॉलेजों में आयोजित किया जाएगा। इसका अगला पड़ाव 18 सितम्बर 2026 को मथुरा स्थित जीएलए विश्वविद्यालय में होगा। युवाओं के पास असीम क्षमता: कुलपति प्रो. आशु रानी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी ने विद्यार्थियों के उत्साह और उनके इनोवेटिव आइडियाज की जमकर सराहना की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हमारे छात्र- छात्राओं में नवाचार की असीम क्षमता और संभावनाएं हैं। 'यूपी राइज 2026' जैसे मंच युवाओं को अपनी रचनात्मकता और उद्यमशीलता को प्रदर्शित करने का एक बेहतरीन अवसर प्रदान कर रहे हैं। विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। आज के युवा कल के सशक्त 'जॉब क्रिएटर' हैं, जो अपनी सोच से न सिर्फ अपना बल्कि पूरे समाज और प्रदेश का आर्थिक विकास सुनिश्चित करेंगे।

हिसार में स्वाइन फ्लू के 4 नए मरीज मिले, संक्रमितों की संख्या बढ़कर 70 हुई

हिसार  स्वाइन फ्लू के कारण एक और महिला मरीज की मौत हो गई। जिले में स्वाइन फ्लू से मरने वालों की संख्या तीन पर पहुंच गई है। मरने वाली तीनों महिलाएं हैं। मंगलवार को चार और स्वाइन फ्लू के मरीज सामने आए। इससे जिले में स्वाइन फ्लू से संक्रमित मरीजों की संख्या 70 पर पहुंच गई है। हालांकि अभी स्वास्थ्य विभाग की तरफ से मृतक महिला की रिपोर्ट का आडिट किया जा रहा है। जिला मलेरिया अधिकारी और डिप्टी सीएमओ डॉ. सुभाष खतरेजा ने बताया कि इस साल अभी तक 70 मरीज स्वाइन फ्लू से ग्रस्त मिले हैं। अभी तक तीन महिला मरीजों की मौत हो चुकी है। दो महिला मरीजों की पुष्टि हो चुकी है, एक महिला मरीज की फाइल अभी आडिट हो रही है। स्वाइन फ्लू ग्रस्त मरीज और उनके स्वजन को टैमीफ्लू दवा दी जा रही है। खांसी, जुकाम और बुखार होने पर तुरंत चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए और नागरिक अस्पताल में सैंपल जांच के लिए देना चाहिए। अस्पताल परिसर में स्वाइन फ्लू की निशुल्क जांच की जाती है। लक्षण दिखाई देने पर मुंह पर मास्क लगाकर रखना चाहिए और भीड़भाड़ वाले एरिया में नहीं जाना चाहिए। स्वाइन फ्लू के लक्षण सामान्य बुखार की तरह ही होते हैं।

चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के लिए योगी कैबिनेट की मंजूरी, 1,008.67 करोड़ रुपये होंगे खर्च

चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के लिए योगी कैबिनेट की मंजूरी, 1,008.67 करोड़ रुपये होंगे खर्च 15.172 किलोमीटर लंबे छह लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का होगा निर्माण बुंदेलखंड से चित्रकूट धाम तक आसान होगा सफर, पर्यटन को मिलेगी रफ्तार लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के संशोधित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। प्रवेश नियंत्रित छह लेन के इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण पर 1,008.67 करोड़ रुपये खर्च होंगे। परियोजना का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। इसमें केंद्र सरकार की किसी तरह की वित्तीय भागीदारी प्रस्तावित नहीं है। 15.172 किलोमीटर लंबा होगा एक्सप्रेसवे वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे की लंबाई 15.172 किलोमीटर होगी। इसका निर्माण इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) मोड पर कराया जाएगा। व्यय-वित्त समिति द्वारा पूंजीगत मदों के लिए संशोधित प्रस्ताव की लागत का मूल्यांकन किया गया था, जिसे अब कैबिनेट ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद निर्माणकर्ता के चयन की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके लिए ग्लोबल बिड आमंत्रित की जाएगी। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा। चित्रकूट धाम तक पहुंच होगी आसान चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण से बुंदेलखंड के प्रारंभिक बिंदु से चित्रकूट धाम तक आवागमन आसान और तेज होने की उम्मीद है। इससे दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों को बेहतर यातायात सुविधा मिलेगी। प्रवेश नियंत्रित छह लेन एक्सप्रेसवे होने से यात्रियों को सुगम और व्यवस्थित सफर का लाभ मिल सकेगा। चित्रकूट धाम धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल है। एक्सप्रेसवे के निर्माण से यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इससे पर्यटन गतिविधियों को गति मिलने और क्षेत्र के आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने की संभावना है। बुंदेलखंड के विकास में भी यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

योगी कैबिनेट ने दी अभियंताओं के वित्तीय अधिकार बढ़ाने को मंजूरी

योगी कैबिनेट ने दी अभियंताओं के वित्तीय अधिकार बढ़ाने को मंजूरी निर्माण कार्यों में तेजी लाने के लिए 31 साल पुराने वित्तीय अधिकारों में संशोधन छोटे-छोटे कामों के लिए उच्च स्तर की मंजूरी का इंतजार नहीं, विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आएगी तेजी लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास पर हुई कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश के अभियंत्रण विभागों में कार्यों के त्वरित एवं प्रभावी निष्पादन के लिए अभियंताओं के वित्तीय अधिकारों में वृद्धि किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस फैसले से निर्माण कार्यों को गति देने और छोटे-छोटे कार्यों के लिए उच्च स्तर से अनुमोदन लेने की प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद मिलेगी। 31 साल पुराने प्रावधानों में होगा संशोधन वित्तीय नियम संग्रह खंड-1 में अभियंत्रण विभागों के अभियंताओं को वित्तीय अधिकारों का प्रतिनिधायन किया गया है। इन अधिकारों में समय-समय पर शासनादेशों के माध्यम से संशोधन और वृद्धि होती रही है। वर्तमान में वित्त (लेखा) अनुभाग-2 के शासनादेश के अनुसार वित्तीय अधिकार निर्धारित हैं। यह व्यवस्था पिछले 31 वर्षों से अधिक समय से लागू है। निर्माण सामग्री, श्रम और सेवाओं की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि के कारण मौजूदा वित्तीय अधिकारों के तहत कार्यों के निष्पादन में कठिनाइयां आ रही थीं। छोटे-छोटे निर्माण कार्यों के लिए भी उच्च स्तर से अनुमोदन लेना पड़ता था, जिससे परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी होती थी। लोक निर्माण से ग्रामीण अभियंत्रण तक मिलेगा लाभ प्रस्ताव के तहत लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, लघु सिंचाई विभाग, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग सहित अन्य अभियंत्रण विभागों के अभियंताओं को प्रदत्त वित्तीय अधिकारों के प्रतिनिधायन की सीमा में वृद्धि की जाएगी। इससे अभियंताओं को अपने स्तर पर निर्धारित वित्तीय सीमा के भीतर कार्यों को स्वीकृति देने और आगे बढ़ाने में अधिक सुविधा मिलेगी। निर्माण कार्यों के लिए बार-बार उच्च स्तर से अनुमोदन लेने की जरूरत कम होने से विकास परियोजनाओं की गति बढ़ाने में मदद मिलेगी। लागत बढ़ने के बीच जरूरी था बदलाव निर्माण सामग्री, श्रम और सेवाओं की लागत में वृद्धि के कारण 1995 में निर्धारित वित्तीय अधिकारों के तहत कार्य कराना कठिन हो रहा था। ऐसे में वित्तीय अधिकारों में संशोधन की जरूरत महसूस की गई। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य निर्माण कार्यों के निष्पादन में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों को दूर करना और परियोजनाओं को समय पर पूरा कराने की दिशा में कदम बढ़ाना है। इस फैसले से प्रदेश में सड़क, सिंचाई, ग्रामीण विकास और अन्य निर्माण परियोजनाओं के क्रियान्वयन को गति मिलने की उम्मीद है। वित्तीय अधिकारों के प्रतिनिधायन की सीमा बढ़ने से विभागीय स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी।

मथुरा में छाता चीनी मिल में 3.96 करोड़ लीटर क्षमता का लगेगा एथेनॉल प्लांट

मथुरा में छाता चीनी मिल में 3.96 करोड़ लीटर क्षमता का लगेगा एथेनॉल प्लांट 200 करोड़ से अधिक की लागत, गन्ने के बाद मक्का-धान से भी होगा उत्पादन, हजारों को मिलेगा रोजगार लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मथुरा की बंद छाता चीनी मिल में एथेनॉल प्लांट स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। गन्ना विकास मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी ने बताया कि 200 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनने वाला यह एक्सटेंशन प्लांट साल में 11 महीने संचालित होगा। उन्होंने बताया कि यह मिल 19 साल पहले बंद हो गई थी। समाजवादी पार्टी के सरकार के दौरान इसको एक रुपए का भुगतान नहीं किया गया। प्लांट की वार्षिक उत्पादन क्षमता 3.96 करोड़ लीटर होगी। गन्ना पेराई का सीजन समाप्त होने के बाद मक्का और धान से भी एथेनॉल का उत्पादन किया जाएगा। छाता चीनी मिल की नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से करीब 40 मिनट की दूरी को भी परियोजना के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यहां गोदाम और अन्य सुविधाएं विकसित करने की संभावनाएं हैं। परियोजना से क्षेत्र में हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड और मध्यांचल में खिलौना उद्योग लगाने पर मिलेगा प्रोत्साहन

पूर्वी उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड और मध्यांचल में खिलौना उद्योग लगाने पर मिलेगा प्रोत्साहन योगी कैबिनेट ने दी खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025 को मंजूरी, यूपी में खिलौना उद्योग को मिलेगी रफ्तार कारीगरों, महिलाओं और ग्रामीण समुदायों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर योगी सरकार का फोकस लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025 को मंजूरी दे दी गई। इस नीति का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को खिलौना विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाना, नए उद्योगों को प्रोत्साहित करना और ट्वॉय क्लस्टर्स में रोजगार के अवसर बढ़ाना है। नीति के माध्यम से प्रदेश में खिलौना निर्माण, विपणन और तकनीकी उन्नयन को बढ़ावा दिया जाएगा। खिलौना उद्योग में यूपी की मजबूत पहचान वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि उत्तर प्रदेश विशेष रूप से खिलौना विनिर्माण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। राज्य भारतीय पर्व-त्योहारों से संबंधित वस्तुओं (HS 9505) के निर्यात में लगभग 50 प्रतिशत योगदान करता है। वाराणसी, झांसी और चित्रकूट अपने जीआई टैग प्राप्त लैकवेयर तथा हस्तनिर्मित लकड़ी के खिलौनों के लिए प्रसिद्ध हैं। यह क्षेत्र कारीगरों, महिलाओं और ग्रामीण समुदायों के लिए रोजगार का महत्वपूर्ण माध्यम है। खिलौना विनिर्माण एवं विपणन को विकास के प्रमुख क्षेत्र के रूप में बढ़ावा देकर कुशल, अर्धकुशल और अकुशल मानव संसाधन का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। इससे ट्वॉय क्लस्टरों में रोजगार और कौशल विकास के अवसर बढ़ेंगे। नए उद्योगों और मौजूदा इकाइयों को मिलेगा समर्थन नीति के तहत खिलौना विनिर्माण इकाइयों को प्रोत्साहन आधारित व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। मौजूदा उद्योगों के विस्तार, विविधीकरण और तकनीकी उन्नयन के लिए भूमि एवं अवस्थापना सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा। नए उद्यमों की स्थापना में सहायता देने के साथ एमएसएमई और बड़े उद्योगों को भी समर्थन दिया जाएगा। पूर्वी उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड और मध्यांचल क्षेत्रों में खिलौना उद्योग स्थापित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन दिए जाएंगे। इससे इन क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित करने में मदद मिलेगी। एमएसएमई और बड़े उद्योगों के लिए अलग व्यवस्था उत्तर प्रदेश खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025 के अंतर्गत एमएसएमई वर्गीकरण के अनुसार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी की इकाइयों के साथ वृहद और उससे उच्च श्रेणी की खिलौना विनिर्माण इकाइयों तथा खिलौना क्लस्टर उद्यमों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। एमएसएमई श्रेणी की पात्र इकाइयों को उत्तर प्रदेश एमएसएमई प्रोत्साहन नीति-2022 और उसके निष्प्रभावी होने की स्थिति में लागू उत्तरवर्ती नीति के तहत निर्धारित प्रोत्साहन मिलेंगे। वहीं, बड़े और उससे उच्च श्रेणी के तहत स्थापित नई इकाइयों तथा विस्तार एवं विविधीकरण करने वाली इकाइयों को प्रस्तावित नीति के प्रावधानों के अनुसार प्रोत्साहन दिए जाएंगे। इनका क्रियान्वयन इन्वेस्ट यूपी के माध्यम से किया जाएगा। निवेश और रोजगार को मिलेगा बल नीति के तहत पात्र खिलौना विनिर्माण इकाइयों को निर्धारित प्रोत्साहन वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने के बाद प्रदान किए जाएंगे। प्रस्ताव में फ्रंट एंड सब्सिडी के प्रावधान भी शामिल हैं। इससे प्रदेश में खिलौना उद्योग की स्थापना और विस्तार को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। नीति का क्रियान्वयन उत्तर प्रदेश सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग (एमएसएमई) द्वारा किया जाएगा। बड़े और उससे उच्च श्रेणी के उद्योगों से संबंधित प्रोत्साहनों का क्रियान्वयन इन्वेस्ट यूपी के माध्यम से होगा। पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगी नीति उत्तर प्रदेश खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025 प्रख्यापन की तिथि से पांच वर्ष की अवधि तक अथवा सरकार द्वारा नई नीति के प्रख्यापन तक लागू रहेगी। इस नीति के अंतर्गत प्रोत्साहन प्राप्त करने वाली परियोजनाएं राज्य सरकार की किसी अन्य नीति के तहत प्रोत्साहनों की पात्र नहीं होंगी। हालांकि, भारत सरकार की योजनाओं एवं नीतियों के तहत उपलब्ध प्रोत्साहन इसके अतिरिक्त प्राप्त किए जा सकेंगे। नीति से होने वाले प्रमुख लाभ – प्रदेश को खिलौना विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने में मदद। – पूर्वी उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड और मध्यांचल में उद्योग स्थापना को प्रोत्साहन। – खिलौना क्लस्टरों में अतिरिक्त रोजगार के अवसर। – कारीगरों, महिलाओं और ग्रामीण समुदायों को आर्थिक अवसर। – एमएसएमई एवं बड़े उद्योगों के विस्तार और तकनीकी उन्नयन को समर्थन। – खिलौना निर्माण एवं विपणन के क्षेत्र में कौशल विकास को बढ़ावा।

घातक तलवार और चाकू लेकर घूम रहे दो आरोपी कुठला पुलिस के हत्थे चढ़े, आर्म्स एक्ट के तहत हुई कार्रवाई, न्यायालय ने दोनों को भेजा जेल

घातक तलवार और चाकू लेकर घूम रहे दो आरोपी कुठला पुलिस के हत्थे चढ़े, आर्म्स एक्ट के तहत हुई कार्रवाई, न्यायालय ने दोनों को भेजा जेल कटनी  आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत कुठला पुलिस ने अलग-अलग कार्रवाई करते हुए धारदार तलवार और चाकू के साथ दो युवकों को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया। पुलिस के अनुसार, पुलिस अधीक्षक कटनी अभिनय विश्वकर्मा (भापुसे) के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमल मौर्य एवं उप पुलिस अधीक्षक शिवा पाठक के मार्गदर्शन में कुठला थाना प्रभारी निरीक्षक अखलेश दाहिया के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई। पहली कार्रवाई 14 सितंबर की रात पेट्रोलिंग के दौरान पहलवान ढाबा के आगे नहर के पास की गई। पुलिस को यहां एक युवक संदिग्ध अवस्था में मिला। पूछताछ में उसने अपना नाम शिब्बू चौधरी (20), निवासी इंद्रानगर गली नंबर 9, थाना कुठला बताया। तलाशी लेने पर उसके कब्जे से धारदार लोहे की तलवार बरामद हुई, जिसे पुलिस ने जब्त कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। वहीं, 15 सितंबर को पुलिस को भ्रमण के दौरान इंद्रानगर बायपास यात्री प्रतीक्षालय के पास एक युवक के धारदार चाकू लेकर मौजूद होने की मुखबिर से सूचना मिली। सूचना की तस्दीक करने पहुंची पुलिस को देखकर युवक भागने का प्रयास करने लगा। पुलिस ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम मोहित पटेल (22), निवासी इंद्रानगर गली नंबर 4, थाना कुठला बताया। तलाशी लेने पर उसके कब्जे से धारदार चाकू बरामद हुआ। पुलिस ने दोनों आरोपियों के विरुद्ध पृथक-पृथक धारा 25 आर्म्स एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना में लिया। कार्रवाई पूरी करने के बाद दोनों आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। पूरी कार्रवाई कुठला थाना प्रभारी निरीक्षक अखलेश दाहिया के नेतृत्व में की गई। कार्रवाई में सहायक उप निरीक्षक रवि शुक्ला, प्रधान आरक्षक अजय यादव, राहुल मिश्रा, रामेश्वर सिंह, आलोक तिवारी, आरक्षक दुर्गेश सिंह, विवेक शुक्ला, विजय प्रजापति सहित अन्य पुलिस स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

एलडीए पूरा करेगा एपीआईएल की हाईटेक टाउनशिप परियोजना

एलडीए पूरा करेगा एपीआईएल की हाईटेक टाउनशिप परियोजना करीब 5,000 होमबायर्स की समस्या सुलझने की उम्मीद, 2,912 करोड़ तक की संभावित देनदारी शेष अवस्थापना सुविधाओं का होगा विकास, सरकारी जमीन की भी होगी सुरक्षा लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक में लखनऊ स्थित मेसर्स एपीआईएल की हाईटेक टाउनशिप परियोजना को पूरा किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके तहत हाईटेक टाउनशिप नीति के अंतर्गत दिए गए लाइसेंस के तहत स्वीकृत परियोजना को लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) टेकओवर करेगा। इसके बाद परियोजना को पूर्ण करने का प्रस्ताव राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। 2,912 करोड़ तक की संभावित देनदारी प्रारंभिक अनुमान के अनुसार परियोजना की अधिकतम संभावित देनदारी करीब 2,912 करोड़ रुपये है। हालांकि, वास्तविक देनदारी आईआरपी (इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल) प्रक्रिया के माध्यम से निर्धारित होगी, जिसके भुगतान के लिए आवश्यक धनराशि एलडीए को सीड कैपिटल के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी। 5,000 होमबायर्स की समस्या सुलझने की उम्मीद विशेष सचिव आवास राजेश कुमार राय ने बताया कि परियोजना को सरकारी अभिकरण के माध्यम से पूरा किए जाने से करीब 5,000 होमबायर्स की समस्या का समाधान संभव हो सकेगा। रुकी हुई परियोजना में दोबारा विकास कार्य शुरू कराए जा सकेंगे। हाईटेक टाउनशिप की शेष अवस्थापना सुविधाओं और उपयोगिताओं का विकास भी कराया जा सकेगा। इससे परियोजना को पूर्ण कर सुनियोजित विकास सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। सरकारी जमीन की होगी सुरक्षा प्रस्ताव के तहत बंधक भूमि और ग्राम समाज की भूमि को किसी तीसरे पक्ष के पक्ष में विनियमित किए जाने के स्थान पर लखनऊ विकास प्राधिकरण के पक्ष में विनियमित किया जाएगा। इससे शासकीय भूमि की रक्षा होगी। साथ ही, भविष्य में शासकीय विभागों की देनदारियों की प्राप्ति की संभावना भी बेहतर हो सकेगी। रियल एस्टेट और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा किसी शासकीय अभिकरण के माध्यम से परियोजना को विकसित किए जाने से होमबायर्स के बीच विश्वास पैदा होगा। परियोजना पूरी होने से रियल एस्टेट क्षेत्र और निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इससे रोजगार सृजन में वृद्धि होने की भी उम्मीद है।

नागौर में दर्दनाक सड़क हादसा, मुरड़ से भरे डंपर ने कार को मारी टक्कर; 4 की मौत

नागौर  राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले में गुरुवार तड़के हुए भीषण सड़क हादसे में चार लोगों की मौत हो गई। हादसा नावां क्षेत्र के मिठड़ी बाइपास पर सुबह करीब 5 बजे हुआ। यहां मुरड़ से भरे डंपर और कार में आमने-सामने की भिड़ंत हो गई। हादसा इतना जबरदस्त थी कि कार पूरी तरह चकनाचूर हो गई और उसमें सवार चारों लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में पति-पत्नी और उनकी बेटी समेत कार चालक शामिल है। हादसे की सूचना मिलते ही नावां पुलिस मौके पर पहुंची। कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने के कारण शव अंदर फंस गए थे। पुलिस और स्थानीय लोगों ने काफी मशक्कत के बाद शवों को बाहर निकाला। इसके बाद सभी शवों को डीडवाना-कुचामन जिले के नावां उपजिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया। हादसे के बाद सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई थी। पुलिस ने क्षतिग्रस्त कार और डंपर को हटवाकर यातायात सुचारू करवाया। पति-पत्नी और बेटी की मौत पुलिस के अनुसार मृतकों की पहचान लक्ष्मण सिंह (46), उनकी पत्नी तुलसी (45), बेटी शीतल (22) और कार चालक रामा किशन (35) के रूप में हुई है। तीनों मृतक एक ही परिवार के थे। परिवार डीडवाना-कुचामन जिले के मिठड़ी के पास पालड़ी गांव में किराए के मकान में रह रहा था। बताया गया कि कार सवार जयपुर की ओर से आए थे और नावां होते हुए मिठड़ी गांव की तरफ जा रहे थे। इसी दौरान मिठड़ी बाइपास पर सामने से आ रहे मुरड़ से भरे डंपर से कार की भिड़ंत हो गई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। फिर कुछ ही देर में चारों की मौत हो गई। एएनएम के पद पर कार्यरत थी महिला पुलिस ने सभी शवों को नावां के सरकारी अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया है। साथ ही परिजनों को सूचना भिजवा दी है। परिजनों के आने के बाद पोस्टमार्टम होगा। इसके बाद शवों परिजनों को सौंपे जाएंगे। मृतका तुलसी स्वास्थ्य विभाग में एएनएम के पद पर कार्यरत थी। वह कासेड़ा उप स्वास्थ्य केंद्र में अपनी सेवाएं दे रही थी। हादसे में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत से पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है। डंपर जब्त, हादसे की जांच शुरू नावां थानाधिकारी सुरेश चौधरी ने बताया कि हादसे के बाद डंपर को जब्त कर पुलिस थाने भिजवा दिया गया है। पुलिस ने क्षतिग्रस्त कार को भी सड़क से हटवाया और यातायात बहाल करवाया। हादसे में शामिल डंपर में मुरड़ भरी हुई थी। क्षेत्र में रात के समय मुरड़ और बजरी से भरे भारी वाहनों के संचालन को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। फिलहाल, पुलिस हादसे के कारणों की जांच में जुटी हुई है।