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Samsung Galaxy Z Fold8 पर बड़ी राहत, Galaxy Forever प्लान से 25% तक घटेगी EMI

Samsung Galaxy Z Fold8 और Galaxy Z Fold8 Ultra खरीदने वालों के लिए कंपनी ने नया Galaxy Forever प्लान पेश किया है. इसके तहत दोनों फोल्डेबल फोन की महीने की EMI 25% तक कम हो जाएगी. हालांकि, कम EMI का मतलब फोन पर 25% की छूट नहीं है. फोन की कीमत का 40% हिस्सा 24 महीने बाद देना होगा. चूंकि ये फोन काफी महंगा है, इसलिए कई लोग चाहते हैं कि कम पैसे देकर फोन चलाया जाए, बाद में पूरा पैसे दे देंगे. इसी को साधते हुए ये स्कीम आई है. Samsung अपने महंगे फोल्डेबल फोन खरीदने का नया तरीका लेकर आया है. कंपनी ने Galaxy Z Fold8 और Galaxy Z Fold8 Ultra के लिए Galaxy Forever प्रोग्राम में नया 24 महीने का प्लान पेश किया है. इसके तहत ग्राहक हर महीने कम EMI देकर फोन खरीद सकते हैं, लेकिन फोन की कुल कीमत का एक बड़ा हिस्सा बाद में देना होगा. नए प्लान में Galaxy Z Fold8 Ultra की EMI 9,417 रुपये से घटकर 6,997 रुपये हो जाती है. वहीं Galaxy Z Fold8 की EMI 8,584 रुपये से घटकर 6,416 रुपये रह जाती है. यानी महीने की EMI में करीब 25 फीसदी की कमी आती है. यह प्लान 24 महीने के लिए है. 40 फीसदी पैसा 2 साल बाद देना होगा यहां सबसे जरूरी बात यह है कि सैमसंग ने फोन की कीमत 25 फीसदी कम नहीं की है. कंपनी सिर्फ पेमेंट का तरीका बदल रही है. Galaxy Forever प्लान में फोन की कीमत का 60 फीसदी हिस्सा 24 महीने की EMI के जरिए चुकाया जाता है. इसके साथ Galaxy Forever की प्रोग्राम फीस भी जुड़ी होती है. बाकी 40 फीसदी रकम 24 महीने पूरे होने के बाद देनी होती है. इसे बुलेट पेमेंट कहा जाता है. मसलन, Galaxy Z Fold8 की शुरुआती कीमत 1,79,999 रुपये है, जबकि Galaxy Z Fold8 Ultra की कीमत 1,99,999 रुपये से शुरू होती है. ऐसे में कम EMI देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि फोन सस्ता हो गया है. अगर कस्टमर फोन अपने पास रखना चाहता है, तो 24 महीने बाद बची हुई 40 फीसदी रकम का भुगतान करना होगा. 2 साल बाद तीन विकल्प मिलेंगे 24 महीने पूरे होने के बाद कस्टमर्स के पास तीन विकल्प होंगे. पहला, वह अपना पुराना फोन वापस करके नया Galaxy फोन ले सकता है. दूसरा, 40 फीसदी की बची हुई रकम देकर मौजूदा फोन अपने पास रख सकता है. तीसरा, फोन वापस करके Galaxy Forever प्रोग्राम से बाहर निकल सकता है. ये विकल्प सैमसंग की शर्तों के तहत उपलब्ध होंगे. सैमसंग ने 24 महीने पूरे होने से पहले फोन वापस करने या अपग्रेड करने का विकल्प भी दिया है. 10 से 11 महीने के बीच फोन लौटाने पर 55 फीसदी तक, 12 से 13 महीने में 50 फीसदी तक, 14 से 18 महीने में 45 फीसदी तक और 19 से 25 महीने में 40 फीसदी तक अश्योर्ड बायबैक वैल्यू भी मिल सकती है. Samsung Care+ भी मिलेगा Galaxy Forever प्लान में Samsung Care+ भी शामिल है. इसमें फोन को एक्सिडेंटल और लिक्विड से सुरक्षा मिलती है. इसके लिए ग्राहक को अलग से Care+ खरीदने की जरूरत नहीं होगी.

कनाडा से 12 सितंबर को लौटा युवक गिरफ्तार, फरीदकोट में 2 ग्रेनेड मिलने से मचा हड़कंप

फरीदकोट फरीदकोट में बाबा फरीद आगमन पर्व से पहले काउंटर इंटेलिजेंस ने एक बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम करते हुए दो ग्रेनेड समेत एक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान गुरु अर्जन देव नगर निवासी नवजोत सिंह उर्फ नव के रूप में हुई है। नवजोत कनाडा का पीआर है और एक सप्ताह पहले ही भारत आया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी के पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों से संपर्क होने का संदेह है और उसने ड्रोन के जरिए विस्फोटक सामग्री मंगवाई थी। काउंटर इंटेलिजेंस ने उसे फिरोजपुर से एक्टिवा पर फरीदकोट आते समय गिरफ्तार किया।  आरोपी के खिलाफ थाना स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल, फाजिल्का में एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट और यूएपीए के तहत केस दर्ज किया गया है। 19 सितंबर से शुरू होने वाले पांच दिवसीय बाबा फरीद आगमन पर्व से पहले हुई इस गिरफ्तारी के बाद पुलिस आरोपी के नेटवर्क और संभावित निशाने को लेकर पूछताछ करेगी।  इस मामले में युवक के पिता सूबा सिंह ने बताया कि कनाडा में पीआर उसका बेटा 12 सितंबर को ही भारत लौटा है। वीरवार शाम उसके बेटे ने बताया कि उसका कोई कोरियर आना है और जब वह बेटे के साथ कोरियर लेने सादिक चौक पहुंचे तो वहां पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। उन्होंने पूरे मामले में इंसाफ की गुहार लगाई है।  

राधा अष्टमी 2026 कब है? आज या कल, जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

हर साल राधा अष्टमी का पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. यह दिन भगवान श्रीकृष्ण की प्रिय और शक्ति स्वरूपा श्री राधा रानी के प्रकटोत्सव के रूप में मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राधा रानी का जन्म श्री कृष्ण के जन्मोत्सव (जन्माष्टमी) के ठीक 15 दिन बाद मनाया जाता है. इस दिन जो भक्त सच्चे मन से श्री राधा-कृष्ण की पूजा और व्रत करते हैं, उनके जीवन में सुख-समृद्धि, प्रेम और शांति बनी रहती है. ऐसा माना जाता है कि केवल श्रीकृष्ण की पूजा से पूर्ण फल नहीं मिलता, जब तक कि उनके साथ राधा रानी की भी आराधना ना की जाए. इस दिन कई लोग व्रत रखते हैं और खासकर बरसाना और मथुरा-वृंदावन में इस पर्व को बहुत ही भव्य और धूमधाम से मनाया जाता है. वहीं, हर बार की तरह इस बार भी राधा अष्टमी की तिथि को लेकर कंफ्यूजन है. कुछ लोग कह रहे हैं कि राधा अष्टमी कल मनाई जानी चाहिए और कुछ लोग कह रहे हैं आज. तो आइए जानते हैं कि राधा अष्टमी की सही तिथि क्या रहेगी. कब मनाई जाएगी राधा अष्टमी 2026 (Radha Ashtami 2026 Date) द्रिक पंचांग और उदयातिथि के अनुसार, राधा अष्टमी 19 सितंबर 2026, शनिवार यानी कल के दिन मनाने की सलाह दी जा रही है. राधा अष्टमी 2026 तिथि (Radha Ashtami 2026 Tithi) द्रिक पंचांग के अनुसार, राधा अष्टमी की तिथि 18 सितंबर यानी आज दोपहर 1 बजे शुरू होगी और तिथि का समापन 19 सितंबर को दोपहर 3 बजकर 26 मिनट पर होगा. राधा अष्टमी 2026 पूजन शुभ मुहूर्त (Radha Ashtami 2026 Pujan Shubh Muhurat) राधा अष्टमी पर पूजन का सबसे उत्तम समय 19 सितंबर की सुबह 11 बजे से लेकर दोपहर 1 बजकर 28 मिनट तक रहेगा. क्योंकि शास्त्रों के अनुसार श्री राधा रानी का जन्म दोपहर के समय हुआ था, इसलिए इस समयावधि में पूजा करना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है. राधा अष्टमी 2026 पूजन विधि (Radha Ashtami 2026 Pujan Vidhi) राधा अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें. फिर, व्रत का संकल्प लें. फिर, पूजा स्थल पर एक साफ चौकी बिछाकर उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं. फिर, चौकी पर तांबे या मिट्टी का कलश स्थापित करें. कलश के पास या चौकी पर श्री राधा-कृष्ण की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें. यदि संभव हो, तो राधा रानी का पंचामृत से अभिषेक करें. राधा रानी को सुंदर वस्त्र और आभूषणों से सजाएं. इसके बाद उन्हें रोली, अक्षत (चावल), चंदन, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य (फल और मिठाइयां) अर्पित करें. आखिरी में ऊं श्री राधायै नमः मंत्र का जाप करें, कथा सुनें और अंत में घी का दीपक जलाकर आरती करें. सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें राधा अष्टमी के दिन पूजा के दौरान श्री राधा रानी को सुहाग की वस्तुएं अर्पित करें. पूजा के बाद इनमें से थोड़ा सा सिंदूर या प्रसाद स्वरूप सुहाग की सामग्री अपने घर की सुहागन महिलाओं को दें या माता रानी के चरणों में अर्पित रहने दें. इससे वैवाहिक जीवन में प्रेम और मधुरता बढ़ती है. राधा-कृष्ण को इत्र और पीले फूल चढ़ाएं राधा रानी और कृष्ण जी को इत्र बेहद प्रिय है. इस दिन राधा-कृष्ण को गुलाब या चमेली का इत्र अर्पित करें. साथ ही, उन्हें पीले या गुलाबी रंग के ताजे फूल (जैसे गेंदे या गुलाब की माला) चढ़ाएं. ऐसा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आकर्षण बढ़ता है.

पठानकोट से BJP की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ का आगाज, 117 विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचेगी

पठानकोट पंजाब को नशामुक्त बनाने और राज्य की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाने के मकसद से भारतीय जनता पार्टी आज एक विशाल जन-अभियान की शुरुआत करने जा रही है। पार्टी की ओर से नशा मुक्त पंजाब यात्रा का शंखनाद आज पठानकोट के सीमावर्ती इलाके माधोपुर स्थित एकता स्थल से हो रहा है। इस राज्यव्यापी यात्रा को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। माधोपुर में आयोजित होने वाली विशाल रैली और यात्रा के औपचारिक शुभारंभ से ठीक पहले एक बेहद संवेदनशील कार्यक्रम रखा गया है। मुख्य पंडाल के पीछे बनाए गए विशेष ग्रीन रूम में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन नशे की गर्त में धकेले गए 50 पीड़ित परिवारों से सीधे मुलाकात करेंगे। इस दौरान वह पीड़ितों का दर्द सुनेंगे और उन्हें नशे के खिलाफ इस जंग में हर संभव मदद का भरोसा दिलाएंगे। 13 दिन, 4000 किलोमीटर और 117 विधानसभा क्षेत्र यह पूरी यात्रा 18 सितंबर से 30 सितंबर तक कुल 13 दिनों तक निरंतर चलेगी। इस दौरान प्रदेश भर में चार अलग-अलग यात्राएं निकाली जाएंगी, जो राज्य के सभी 117 विधानसभा हलकों को कवर करेंगी। इस महा-अभियान के तहत करीब 4000 किलोमीटर का सफर तय किया जाएगा। पहली यात्रा के सुचारू संचालन और नेतृत्व के लिए 15 विशेष रथ तैयार किए गए हैं। माधोपुर के एकता स्थल पर आज 10 हजार से अधिक लोगों के जुटने का दावा किया गया है। चरणबद्ध तरीके से शुरू होंगी अन्य तीन यात्राएं पहली यात्रा आज पठानकोट से शुरू होने के बाद, बाकी की तीन यात्राएं 19, 20 और 21 सितंबर को क्रमशः फतेहगढ़ साहिब, फाजिल्का और तलवंडी साबो से रवाना होंगी। फाजिल्का से निकलने वाली तीसरी यात्रा को केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल हरी झंडी दिखाएंगे। इन सभी यात्राओं का भव्य समापन 30 सितंबर को जालंधर में होगा। पठानकोट में रहेगा पहला रात्रि विश्राम माधोपुर से रवाना होने के बाद यह यात्रा सुजानपुर हलके के पूर्व विधायक दिनेश सिंह बब्बू के निवास स्थान पर चायपान के लिए रुकेगी। इसके बाद शाम छह बजे यात्रा पठानकोट शहर में प्रवेश करेगी। खानपुर चौक, डाकखाना चौक, पटेल चौक और एशिया पैलेस से गुजरते हुए यात्रा शहीद भगत सिंह चौक पहुंचेगी, जहां एक विशाल जनसभा का आयोजन किया जाएगा। यात्रा का पहला रात्रि विश्राम पठानकोट में ही निर्धारित किया गया है। राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो वर्ष 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा का यह कदम प्रदेश में कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और आम जनता के बीच अपनी पैठ गहरी करने की एक बेहद सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है।

राधा रानी की मृत्यु कैसे हुई? अंतिम समय में कृष्ण ने बजाई बांसुरी, जानें पूरी पौराणिक कथा

 राधा रानी की मृत्यु कैसे हुई थी? इसे लेकर तरह-तरह की कथाएं प्रचलित हैं. अलग-अलग धार्मिक परंपराओं और लोककथाओं में राधा रानी के जीवन के अंतिम समय को अलग-अलग तरीके से बताया गया है. लेकिन आज हम उस कथा को जानेंगे, जो पुराणों और वैष्णव परंपरा से जुड़ी कथाओं में मिलती है. भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी का प्रेम भारतीय भक्ति परंपरा में प्रेम, समर्पण और भक्ति का प्रतीक माना जाता है. दोनों का जन्म एक ही तिथि यानी अष्टमी को हुआ था, लेकिन दोनों के जन्म पक्ष अलग थे. श्री कृष्ण और राधा रानी का जन्म एक ही तिथि पर हुआ था धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था. वहीं राधा जी का प्राकट्य भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को माना जाता है. यानी भगवान कृष्ण के जन्म के करीब 15 दिन बाद राधाष्टमी का पर्व आता है. इसी दिन राधा रानी के प्राकट्य का उत्सव मनाया जाता है. राधा जी के पिता का नाम वृषभानु और माता का नाम कीर्ति बताया जाता है. बरसाना को राधा रानी की जन्मभूमि माना जाता है. उनका लालन-पालन बरसाना में हुआ और वृंदावन से भी उनका गहरा संबंध बताया जाता है. बांसुरी की धुन पर खिंची चली आती थीं गोपियां राधा रानी और श्री कृष्ण के बीच प्रेम को सामान्य सांसारिक प्रेम से अलग दिव्य और आध्यात्मिक प्रेम के रूप में देखा जाता है. मान्यता है कि जब भगवान कृष्ण वृंदावन में अपनी बांसुरी बजाते थे, तो उसकी धुन सुनकर गोपियां सब कुछ भूलकर उनकी ओर खिंची चली आती थीं. काव्य परंपरा में भी कृष्ण की बांसुरी के प्रभाव का बेहद सुंदर वर्णन मिलता है. बांसुरी की धुन कानों में पड़ते ही गोपियां सामाजिक मर्यादाओं और सांसारिक बंधनों को भूलकर कृष्ण की ओर चली आती थीं. इन गोपियों में राधा रानी का स्थान सबसे विशेष माना गया है. राधा और कृष्ण का प्रेम भक्ति परंपरा में आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक भी माना जाता है. क्या राधा-कृष्ण का विवाह हुआ था? राधा और कृष्ण के विवाह को लेकर भी अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में अलग मान्यताएं मिलती हैं. ब्रह्मवैवर्त पुराण से जुड़ी परंपरा में राधा-कृष्ण के विवाह का वर्णन मिलता है. इस कथा के अनुसार, भांडीर वन में ब्रह्मा जी ने राधा और कृष्ण का विवाह कराया था. मान्यता है कि इस विवाह के समय कई देवी-देवता भी साक्षी बने थे. वृंदावन के पास स्थित भांडीर वन आज भी राधा-कृष्ण की इस कथा से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता है. यहां राधा-कृष्ण विवाह की कथा से जुड़े स्थानों और परंपराओं के दर्शन किए जाते हैं. श्री कृष्ण के वृंदावन छोड़ने के बाद क्या हुआ? समय बीतता गया और भगवान कृष्ण वृंदावन छोड़कर मथुरा चले गए. इसके बाद वे द्वारका चले गए. दूसरी ओर राधा रानी का जीवन बरसाना और वृंदावन से जुड़ा रहा. श्री कृष्ण के मथुरा और फिर द्वारका चले जाने के बाद राधा और कृष्ण का मिलना बेहद दुर्लभ हो गया था. कहा जाता है कि एक बार दोनों की मुलाकात कुरुक्षेत्र में हुई थी. उस समय सूर्य ग्रहण के अवसर पर भगवान कृष्ण द्वारका से कुरुक्षेत्र आए थे. नंद बाबा और वृंदावन के कई गोप-गोपिकाएं भी वहां पहुंचे थे. इसी दौरान राधा रानी और भगवान कृष्ण की भी मुलाकात हुई. द्वारका में हुई राधा-कृष्ण की अंतिम मुलाकात राधा-कृष्ण की अंतिम मुलाकात को लेकर एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा द्वारका से जुड़ी है. कथा के अनुसार, अपने जीवन के प्रमुख दायित्वों से मुक्त होने के बाद राधा रानी भगवान कृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचीं. वहां उन्होंने भगवान कृष्ण के महल में जाकर उनसे मुलाकात की. कहा जाता है कि राधा जी को देखकर भगवान कृष्ण बेहद प्रसन्न हुए. राधा रानी के अनुरोध पर कृष्ण ने उन्हें महल में एक जिम्मेदारी भी सौंपी. इसके बाद राधा रानी कुछ समय तक द्वारका में रहकर महल के कार्यों में सहयोग करती रहीं और अवसर मिलने पर भगवान कृष्ण के दर्शन करती थीं. लेकिन द्वारका का राजसी वातावरण राधा रानी को वह आनंद नहीं दे पा रहा था, जो उन्हें वृंदावन में कृष्ण के साथ महसूस होता था. क्यों छोड़ दिया था राधा रानी ने द्वारका का महल? वृंदावन में राधा रानी का जीवन कृष्ण की भक्ति और प्रेम से जुड़ा था. द्वारका में रहते हुए उन्हें महसूस हुआ कि वह पहले जैसा दिव्य प्रेम और अपनापन महसूस नहीं कर पा रही हैं. धीरे-धीरे वह उदास रहने लगीं. आखिरकार उन्होंने द्वारका का महल छोड़ दिया और एकांत स्थान पर चली गईं. समय बीतता गया. राधा रानी कमजोर होती गईं और उनके मन में भगवान कृष्ण की स्मृतियां और भी गहरी होती चली गईं. अंतिम समय में कृष्ण ने दिया राधा को दर्शन कथा के अनुसार, जब राधा रानी ने अपने अंतिम समय में भगवान कृष्ण को याद किया, तब कृष्ण उनके सामने प्रकट हुए. भगवान कृष्ण ने राधा जी से कहा कि वह अपनी कोई इच्छा बताएं. लेकिन राधा रानी ने अपने लिए कुछ नहीं मांगा. भगवान कृष्ण ने जब दोबारा उनसे अपनी इच्छा बताने को कहा, तब राधा रानी ने केवल इतना कहा कि वह कृष्ण की बांसुरी सुनना चाहती हैं. वह वही बांसुरी की धुन सुनना चाहती थीं, जिसे उन्होंने वृंदावन में सुना था. बांसुरी की धुन सुनते-सुनते राधा रानी ने त्यागा था शरीर कथा के अनुसार, भगवान कृष्ण ने अपनी बांसुरी उठाई और उसी तरह बजाने लगे, जैसे वह वृंदावन में बजाया करते थे. कृष्ण बांसुरी बजाते रहे और राधा रानी उस मधुर धुन को सुनती रहीं. बांसुरी की धुन में खोई राधा रानी ने धीरे-धीरे अपने शरीर का त्याग कर दिया. पौराणिक कथा में आगे कहा जाता है कि राधा रानी की दिव्य आत्मा भगवान कृष्ण में विलीन हो गई. यही वजह है कि राधा-कृष्ण को केवल दो अलग-अलग स्वरूपों के रूप में नहीं, बल्कि एक ही दिव्य प्रेम और चेतना के दो रूपों के तौर पर भी देखा जाता है.

कूनो नेशनल पार्क में चीतों का कुनबा बढ़ा, KGP12 ने 4 शावकों को दिया जन्म

श्योपुर प्रोजेक्ट चीता के 4 साल पूरे होने के एक दिन बाद 18 सितंबर को कूनो नेशनल पार्क में जन्मी मादा चीता KGP12 ने 4 शावकों को जन्म दिया। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पर यह जानकारी दी। भारत की धरती पर जन्मी मादा चीता KGP12 ने खुले जंगल में चार शावकों को जन्म दिया है। इस नए जन्म के साथ ही देश में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 56 हो गई है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि चीते अब भारतीय जलवायु और जंगलों में पूरी तरह से रच-बस गए हैं। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने साझा की खुशखबरी शावकों के जन्म की आधिकारिक जानकारी केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की। उन्होंने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए लिखा, "4 साल, 4 नई जिंदगियां – प्रोजेक्ट चीता के लिए यह उम्मीद और सफलता का प्रतीक है।" भारत में दूसरी पीढ़ी की शुरुआत मादा चीता KGP12 का खुले जंगल में मां बनना इस प्रोजेक्ट की एक बहुत बड़ी कामयाबी है। KGP12 दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा चीता 'गामिनी' की बेटी है। गामिनी भारत में शावकों को जन्म देने वाली पहली चीता थी। अब उसकी बेटी द्वारा शावकों को जन्म देना यह साबित करता है कि यह प्रोजेक्ट अब विदेशों से चीते 'लाने' के शुरुआती चरण से आगे बढ़कर भारत में उनके 'बसने और बढ़ने' के प्राकृतिक दौर में सफलतापूर्वक प्रवेश कर चुका है। कूनो में चीतों की संख्या में वृद्धि की उम्मीद KGP12 का भारत में जन्म लेना और अब उसके शावकों को जन्म देना प्रोजेक्ट चीता के लिए खास महत्व रखता है। इससे भारत में जन्मे चीतों के प्राकृतिक प्रजनन की प्रक्रिया बढ़ने का संकेत मिला है। कूनो में चीतों की संख्या बढ़ाने और उनके लिए अनुकूल माहौल बनाने के प्रयासों के बीच चार नए शावकों का जन्म वन्यजीव प्रेमियों के लिए भी अच्छी खबर है। पर्यावरण मंत्री ने इस मौके पर कूनो और प्रोजेक्ट चीता से जुड़े पूरे परिवार को बधाई दी। चार नए शावकों के जन्म के बाद कूनो में चीता संरक्षण अभियान की उपलब्धियों में एक और खास अध्याय जुड़ गया है। सीसीएफ उत्तम कुमार शर्मा ने इसकी जानकारी दी है। कूनो में चीता प्रोजेक्ट के 4 साल चार साल पहले 17 सितंबर 2022 को मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीतों की वापसी हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को कूनो में छोड़ा था। अब इस परियोजना के चार साल पूरे होने पर 17 सितंबर को कूनो के टिकटोली गेट पर हजारों दीप जलाए । यह आयोजन सेवा संकल्प अभियान के तहत हुआ । चीतों की वापसी के चार साल बाद कूनो में उनकी संख्या बढ़ी है और यहां भारत में भी शावकों का जन्म हुआ है। परियोजना ने श्योपुर को देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई है। 4 साल में क्या बदला? चीता परियोजना के चार वर्ष पूरे होने पर देश में 52 चीते हैं। इनमें 49 कूनो नेशनल पार्क और 3 मंदसौर के गांधी सागर अभयारण्य में हैं। कुल 52 चीतों में से 32 का जन्म भारत में हुआ है। कूनो का प्राकृतिक वातावरण चीतों के प्रजनन के लिए अनुकूल साबित हुआ है। भारत में जन्मे शावकों ने परियोजना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 17 सितंबर को कूनो में क्या होगा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन और चीता परियोजना के चार साल पूरे होने के मौके पर टिकटोली गेट पर हजारों दीप जलाए । दीपों के जरिए चीता संरक्षण और भारत में चीतों की वापसी के प्रति आभार व्यक्त किया ।    

चंडीगढ़ में आज शुरू होगी ‘भारत टैक्सी’ सेवा, ड्राइवरों से नहीं लिया जाएगा कमीशन; जानें फायदे

 चंडीगढ़  Bharat Taxi News: चंडीगढ़ में आज से भारत टैक्सी सेवा की शुरुआत हो रही है। आज सेक्टर 9 में मौजूद नई यूटी सचिवालय इमारत में आयोजित कार्यक्रम में इसका शुभारंभ होगा। कार्यक्रम में केंद्रीय सहकारिता एवं नागर विमानन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल तथा केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। डिजिटल शुभारंभ के बाद भारत टैक्सी (Bharat Taxi App Launched) वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा। भारत टैक्सी से लोगों को क्या फायदा होगा, ड्राइवरों को यह कैसे फायदा पहुंचाएगी, ओला-उबर जैसी टैक्सी सेवाओं से यह सर्विस कैसे अलग है, क्या यह सरकार द्वारा जारी एक नई पहल है? आइए, इन सभी सवालों के जवाब यहां जानते हैं। लेकिन इससे पहले जानना जरूरी है कि हाल ही में चंडीगढ़ में कई नामी टैक्सी सेवाओं के लाइसेंस छह महीने के लिए रद किए गए हैं। इसके कुछ दिनों बाद ही प्रशासन केंद्रशासित प्रदेश में भारत टैक्सी की शुरुआत कर रहा है। ओला-उबर जैसी सेवाओं पर लगी रोक पिछले सप्ताह चंडीगढ़ प्रशासन ने एक अहम फैसला लिया। इसके अनुसार, केंद्रशासित प्रदेश में एप आधारित कैब-बाइक टैक्सी सेवाओं वाली कंपनियों पर छह महीने की रोक लगा दी गई। ओला, इन-ड्राइव, उबर, रैपिडो का एग्रीगेटर लाइसेंस छह महीने के लिए सस्पेंड किया गया है। क्यों लिया यह फैसला? कैब और टैक्सी ड्राइवरों के करीब 100 दिन से चल रहे धरने और 15 दिन की भूख हड़ताल के बीच स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) ने यह फैसला लिया है। अब जानिए क्या है भारत टैक्सी सेवा भारत टैक्सी सेवा सरकार की एक नई पहल है, जिसकी शुरुआत 2 दिसंबर, 2025 को नई दिल्ली से हुई थी । इसका उद्देश्य कॉ-ओपरेटिव टैक्सी प्लेटफॉर्म पर प्राइवेट कंपनियों की मनमानी पर रोक लगाना है। सरकार इस एप के जरिए यात्रियों और ड्राइवर दोनों के हितों का ध्यान रख रही है। सरकार के इस एप के जरिए टैक्सी चालकों को केवल सेवा प्रदाता के रूप में नहीं, बल्कि सहकारी व्यवस्था के हिस्सेदार के रूप में जोड़ा जाएगा। ड्राइवरों को क्या होगा फायदा? भारत टैक्सी सेवा का उद्देश्य तकनीक आधारित परिवहन सेवा में सहकारिता की भावना को लागू करना और ड्राइवरों की भागीदारी बढ़ाना है। प्रशासन के अनुसार, इस पहल से सहकारी मॉडल का विस्तार परिवहन क्षेत्र में होगा, जिससे चालकों को एक ऐसा मंच उपलब्ध कराया जाएगा, जिसमें उनकी भागीदारी और हिस्सेदारी सुनिश्चित हो सकेगी। यानी ड्राइवर खुद इस प्लेटफॉर्म के हिस्सेदार होंगे। खास बात है कि इसमें ड्राइवरों को कोई कमीशन नहीं देना होगा। इसके साथ ही राइडर को एक्सीडेंट और इंश्योरेंस कवरेज जैसी सुविधाएं भी दी जाती हैं। भारत टैक्सी एप से ड्राइवर को फायदे     किराया ड्राइवर के बैक अकाउंट में जाएगा।     एप में कंपनी का कोई वॉलेट नहीं है।     ड्राइवर कर्मचारी नहीं , बल्कि हिस्सेदार होंगे।     एप में कोई सर्ज प्राइसिंग नहीं है।     किराए में कोई फेरबदल नहीं होता। यात्रियों को क्या होगा फायदा? भारत टैक्सी एप का किराया अन्य टैक्सी सेवाओं की तुलना में 30 फीसदी (Bharat Taxi fare) तक कम है। वहीं, इस एप के जरिए यात्रियों की सुरक्षा, विशेषतौर पर महिलाओं की सुरक्षा पर फोकस किया गया है। गलत व्यवहार पर यात्री भारत टैक्सी एप के हेल्प-सपोर्ट सेक्शन में जाकर राइड से संबंधित कोई भी शिकायत दर्ज करवा सकता है। खास बात है कि 150 से ज्‍यादा महिला ड्राइवर ‘बाइक दीदी’ योजना के तहत प्लेटफॉर्म से जुड़ी हैं, इससे महिलाएं महिला कैप्टन या ड्राइवर का भी चुनाव कर सकती हैं।     कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं।     महिलाओं की सुरक्षा पर विशेष फोकस।     अन्य टैक्सी सेवाओं से 30 फीसदी तक सस्ता।     राइड बुक करना काफी आसान।     कोई सर्ज प्राइसिंग नहीं।     वाहन को ट्रैक करना काफी आसान। किन शहरों में जारी है भारत टैक्सी एप की सेवाएं? भारत टैक्सी एप की शुरुआत दिल्ली में  हुई। आज इसे चंडीगढ़ में लॉन्च किया जा रहा है। इसके साथ ही जयपुर और राजकोट जैसे शहरों में भी इसका संचालन किया जाएगा। जानकारी के अनुसार, इस सहकारी मॉडल को उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में भी चलाए जाने की प्रक्रिया जारी है। कैसे करें डाउनलोड? भारत टैक्सी एप (Bharat Taxi booking) को गुगल प्ले स्टोर या आईओएस से आसानी से डाउनलोड किया जा सकता है। जिसके बाद यूजर अपनी ई-मेल आईडी या फिर मोबाइल नंबर से लॉग-इन कर सकता है। वहीं, राइडर्स भारत टैक्सी ड्राइवर एप डाउनलोड कर अपना आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस व वाहन से जुड़े अन्य डॉक्यूमेंट अपलोड कर वेरिफाई के बाद सर्विस शुरू कर सकते हैं।

मेस के खाने को लेकर भड़के 200 छात्र, देर रात सड़क पर उतरे; अधिकारियों ने पहुंचकर संभाला मामला

पलामू लेस्लीगंज थाना क्षेत्र के बसौरा स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज में गुरुवार की देर रात खराब खाना मिलने की शिकायत को लेकर छात्रों ने हंगामा किया। छात्र कॉलेज के सामने डालटनगंज-पांकी रोड के समीप जुट गए और मेस संचालक के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे। छात्रों का आरोप था कि मेस में गुणवत्तापूर्ण भोजन नहीं दिया जा रहा है। मामले की जानकारी मिलने पर सदर एसडीएम संजय पांडेय, लेस्लीगंज के अंचल अधिकारी जागो महतो और फूड सेफ्टी टीम मौके पर पहुंची। एसडीएम ने छात्रों से बातचीत कर उनकी शिकायत सुनी। इसके बाद फूड सेफ्टी टीम ने मेस में तैयार भोजन समेत खाद्य सामग्री के कई सैंपल जब्त किए। कार्रवाई के आश्वासन पर शांत हुए छात्र सदर एसडीएम संजय पांडेय ने बताया कि छात्रों की शिकायत को गंभीरता से लिया गया है। फूड सेफ्टी टीम ने भोजन के सैंपल जब्त किए हैं और पूरे मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। सैंपल जब्त किए जाने और कार्रवाई के आश्वासन के बाद छात्रों ने हंगामा समाप्त किया और वापस हॉस्टल लौट गए। छात्रों ने मेस संचालक पर गुणवत्ताहीन भोजन उपलब्ध कराने और खाने में मिलावट किए जाने समेत कई आरोप लगाए हैं। जिस मेस को लेकर छात्रों ने शिकायत की है, वहां करीब 200 छात्रों के लिए भोजन तैयार किया जाता है।  

मनु भाकर और तूर को मिली बड़ी जिम्मेदारी, नागोया एशियन गेम्स में करेंगे भारत की अगुवाई

नई दिल्ली भारत के अभियान प्रमुख (Chef de Mission) सहदेव यादव ने शुक्रवार को मनु के ध्वजवाहक बनने की पुष्टि की. उन्होंने कहा, ‘मनु भाकर एक ध्वजवाहक होंगी.’ इसके बाद भारतीय एथलेटिक्स महासंघ ने तूर के दूसरे ध्वजवाहक होने की पुष्टि की. मनु भाकर के लिए यह जिम्मेदारी खास है. पेरिस ओलंपिक 2024 में उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल और 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम स्पर्धा में कांस्य पदक जीते थे. वह स्वतंत्र भारत की पहली खिलाड़ी बनी थीं, जिन्होंने एक ही ओलंपिक में दो पदक जीते. वहीं तूर पिछले दो एशियाई खेलों में शॉटपुट का स्वर्ण पदक जीत चुके हैं. अब नागोया में दोनों भारत की अगुवाई करते हुए तिरंगा थामेंगे. उद्घाटन से पहले ही समारोह में रुकावट शनिवार को होने वाले आधिकारिक उद्घाटन से ठीक एक दिन पहले शुक्रवार को नागोया में पारंपरिक फ्लैग होस्टिंग समारोह आयोजित किया जाना था. इसमें भारत समेत पांच दलों को हिस्सा लेना था. लेकिन समारोह शुरू होने से पहले ही इसमें देरी हो गई और बाद में इसे अचानक रोक दिया गया. यमन, उत्तर कोरिया, फिलिस्तीन, भारत और तिमोर-लेस्ते के प्रतिनिधिमंडल गार्डन पियर पर मौजूद थे. भारत की ओर से चार डिप्टी शेफ डी मिशन अचंता शरत कमल, लिजो डेविड थोट्टन, अलकनंदा अशोक और अंजलि भागवत भी वहां मौजूद थे. स्थानीय आयोजकों ने देरी के लिए किसी एक टीम से जुड़ी ‘कुछ परेशानी’ का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि स्थिति को करीब 15 मिनट में सामान्य करने की कोशिश की जाएगी. करीब 20 मिनट की देरी के बाद समारोह शुरू भी हुआ, लेकिन कुछ ही देर में इसे फिर रोकना पड़ा. शरत कमल और अंजलि भागवत मंच की ओर बढ़ चुके थे, लेकिन कार्यवाही रुकने के बाद उन्हें वापस प्रतीक्षा क्षेत्र में लौटना पड़ा. आयोजकों ने हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया कि आखिर किस टीम से जुड़ी क्या परेशानी थी. नागोया में पहले भी उठ चुके हैं सवाल फ्लैग होस्टिंग समारोह में हुई यह रुकावट ऐसे समय आई है, जब नागोया एशियाई खेलों की आयोजन व्यवस्था पहले से ही चर्चा में है. खिलाड़ियों और अधिकारियों की ओर से आवास और परिवहन को लेकर शिकायतें सामने आ चुकी हैं. इस बार पारंपरिक गेम्स विलेज की जगह खिलाड़ियों और अधिकारियों के लिए कंटेनर शैली के आवास, होटल और कोस्टा सेरेना क्रूज शिप समेत अलग-अलग जगहों पर ठहरने की व्यवस्था की गई है. कमरों के आवंटन में देरी और ट्रेनिंग वेन्यू तक पहुंचने में परेशानी की बातें भी सामने आई हैं. भारतीय MMA खिलाड़ी वरुण सान्याल ने आवास व्यवस्था को लेकर चिंता जताई थी. भारत के शेफ डी मिशन सहदेव यादव ने भी व्यवस्थाओं में कुछ मिसमैनेजमेंट की बात स्वीकार की थी. बैडमिंटन स्टार सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी ने बताया था कि भारतीय दल के कुछ सदस्यों को एक मौके पर बस के लिए कई घंटे इंतजार करना पड़ा. अब शुक्रवार की फ्लैग होस्टिंग में हुई रुकावट ने आयोजन व्यवस्था को लेकर चर्चा को और बढ़ा दिया है. हालांकि इसकी वजह के बारे में आयोजकों की ओर से विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है. शनिवार को तिरंगे के साथ भारत की एंट्री एशियाई खेलों का आधिकारिक उद्घाटन शनिवार, 19 सितंबर को होना है. कई खेलों की प्रतियोगिताएं पहले ही शुरू हो चुकी हैं, लेकिन उद्घाटन समारोह के साथ खेलों का औपचारिक आगाज होगा.

गर्मी में बिजली कटौती से मचा था हंगामा, अब लखनऊ में 232 करोड़ से होंगे 1000 से ज्यादा काम

लखनऊ  इस गर्मी जिन बिजली उपकेंद्रों में उपभोक्ताओं ने बिजली संकट को लेकर नाराजगी जताई, घेराव किया और सड़क जाम की। वहां बिजली विभाग ने हकीकत जानने का प्रयास कि आखिर बिजली ने परेशान क्यों किया? इसकी रिपोर्ट तैयार की गई, जिसमें स्थानीय अवर अभियंता व सहायक अभियंता ने स्थलीय रिपोर्ट तैयार की और ट्रांसफार्मर क्षमता वृद्धि, नई 33 केवी लाइन, एक बिजली उपकेंद्र से दूसरी बिजली उपकेंद्र को इंटरलिंकिंग, पावर ट्रांसफार्मर क्षमता वृद्धि, 11 केवी लाइन निर्माण, रिले, कंट्रोल पैनल, आइसोलेटर सहित तीन नए बिजली उपकेंद्रों को शामिल करते हुए दर्जनों कामों के सुधार की सिफारिश की गई। मुख्यालय स्तर पर चर्चा हुई और लेसा के सभी चारों जोन से कुल 232 करोड़ का प्रस्ताव तैयार करके 26 सितंबर 2026 को प्रस्तावित बोर्ड आफ डायरेक्टर की बैठक में रखा जाएगा। इस एडिशन बिजनेस प्लान को स्वीकृति भी मिलने की सौ प्रतिशत संभावनाएं अफसरों ने जताई है। क्योंकि अगर यह व्यवस्था अभी से आगामी गर्मी के लिए नहीं की गई तो वर्ष 2027 में बिजली का सबसे ज्यादा बुरा हाल होगा और उपभोक्ता सड़कों पर उतरने को विवश होंगे। बनाए जाएंगे तीन उपकेंद्र अमौसी जोन के उतरेटिया, निलमथा, कल्ली पश्चिम, एकता नगर, पारा के लोगों ने बिजली संकट को लेकर गर्मी में खूब नाराजगी जताई। इसलिए यहां कल्ली पश्चिम, पारा और गोसाईगंज, मोहनलालगंज व पूरनपुर के बीच पड़ने वाले बेलीराम में बिजली संकट से उबरने के लिए तीन नए उपकेंद्र बनाए जाएंगे। इससे आगामी कई सालों तक बिजली संकट खत्म जाएगा। उतरेठिया में दस एमवी का पावर ट्रांसफार्मर रखे जाने से यहां भी संकट पूरी तरह से खत्म होगा। इसके लिए 90 कराेड़ रुपये का प्रस्ताव बनाया गया है। इसमें 63 से 250 केवीए तक 233 ट्रांसफार्मर लगाए जाएंगे, इनमें कइयों की क्षमतावृ़द्धि की जाएगी। लखनऊ मध्य जोन में 46 करोड़ का काम होगा। ऐशबाग बिजली उपकेंद्र में इस साल उपभोक्ताओं ने घेराव, तोड़फोड़ की थी, बिजली संकट से निजात दिलाने के लिए यहां दस एमवीए का पावर ट्रांसफार्मर लगाया जाएगा। इसके अलावा पुराने लखनऊ सहित कई बिजली उपकेंद्रों में छोटे व बड़े मिलाकर 564 काम कराए जाएंगे। यहां भी सौ से अधिक ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि का काम किया जाएगा। जानकीपुरम जोन में प्रियदर्शनी, इंटिग्रल, सृष्टि सहित पांच बिजली उपकेंद्रों में पावर ट्रांसफार्मर पांच व दस एमवीए के लगाए जाएंगे। इसके अलावा 63 से 250 केवीए के 150 ट्रांसफार्मर अतिरिक्त लगेंगे और उनकी क्षमता बढ़ाई जाएगी। ऐसे तीन सौ से अधिक काम होंगे और उस पर 40 करोड़ खर्च होंगे। गोमती नगर जोन में चिनहट के शिवपुरी बिजली उपकेंद्र के लिए नई 33 केवी लाइन बनाने के साथ ही पावर ट्रासंफार्मर यहां लगाया जाएगा। इसके अलावा इंदिरा नगर, गोमती नगर, चिनहट सहित आसपास क्षेत्र में 74 नए ट्रांसफार्मर लगाए जाएंगे। इन कामों के लिए 56 करोड़ का प्रस्ताव तैयार किया गया है।