samacharsecretary.com

चाणक्य नीति: सुबह की ये 2 गलतियां घर में लाती हैं कंगाली, तुरंत बदलें आदतें आज

आचार्य चाणक्य को भारत के महान नीतिशास्त्रियों और अर्थशास्त्रियों में गिना जाता है. उनकी नीतियां और विचार आज के समय में भी उतने ही सटीक बैठते हैं, जितने सदियों पहले थे. कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि व्यक्ति कड़ी मेहनत करके अच्छी खासी कमाई तो कर लेता है, लेकिन फिर भी उसके पास पैसा टिक नहीं पाता है. सैलरी आते ही हाथ खाली हो जाते हैं , आर्थिक तंगी घेरने लगती है. चाणक्य नीति के अनुसार, हमारी रोजमर्रा की आदतें और खास तौर पर सुबह की शुरुआत का तरीका हमारी आर्थिक स्थिति पर बहुत गहरा असर डालता है. अगर सुबह उठते ही कुछ खास बातों का ध्यान न रखा जाए, तो मां लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं, घर में कंगाली आने लगती है. आइए जानते हैं कि वे कौन सी दो बड़ी गलतियां हैं जो सुबह के वक्त पैसों के टिकने में रुकावट बनती हैं: 1. सुबह उठते ही घर में कलह या तनाव का माहौल बनाना आचार्य चाणक्य के अनुसार, दिन की शुरुआत हमेशा सकारात्मक और शांत माहौल में होनी चाहिए. जिन घरों में सुबह उठते ही वाद-विवाद, गुस्सा, चीख-चिल्लाहट या पैसों को लेकर बहसबाजी शुरू हो जाती है, वहां कभी भी बरकत नहीं होती. सुबह का तनावपूर्ण माहौल मानसिक स्थिति को तो बिगाड़ता ही है, साथ ही नकारात्मक ऊर्जा को भी बुलावा देता है. इसलिए सुबह के समय घर में शांति बनाए रखें और अनावश्यक तर्कों या कलह से दूर रहें. 2. अन्न और धन का अनादर करना चाणक्य नीति में अन्न और धन दोनों को ही बहुत पवित्र और देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है. कई लोगों की आदत होती है कि वे सुबह के वक्त खाने-पीने की चीजों में कमियां निकालते हैं या जरूरत से ज्यादा खाना थाली में लेकर बर्बाद करते हैं. इसके अलावा, पैसों के लेन-देन या खर्च को लेकर सुबह-सुबह लापरवाह रवैया अपनाना भी भारी पड़ सकता है. अन्न का अपमान या धन का गलत इस्तेमाल करने वालों के पास कभी भी मां लक्ष्मी का वास नहीं टिकता है. आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए अपनाएं ये आसान आदतें: अनुशासित रूटीन: सुबह समय पर उठने की आदत डालें, अपने दिन की शुरुआत एक निश्चित योजना के साथ करें. बचत की आदत: अपनी कमाई में से कुछ हिस्सा हर महीने सेविंग (बचत) के रूप में जरूर अलग रखें. सकारात्मक सोच: सुबह उठकर खुद को शांत रखें, बेवजह के खर्चों पर लगाम लगाने की नीति अपनाएं.

जमाबंदी में 99% आवेदन रिजेक्ट करने पर 3 CO पर गिरी गाज, निलंबन की कार्रवाई के निर्देश

पटना राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने कहा है कि जमाबंदी में सुधार के लिए चल रहे अभियान की जवाबदेही अंचलाधिकारियाें की होगी। गुरुवार को हुई समीक्षा बैठक में उन्होंने अंचलाधिकारियों से कहा कि जमाबंदी में किसी भी तरह के सुधार के लिए वे आवेदन की प्रतीक्षा न करें। स्वयं देखें कि क्या गड़बड़ी है। उसमें अपनी पहल पर सुधार करें। बैठक में सारण, सुपौल और पश्चिम चंपारण के अंचल अधिकारियों के कार्यों की हुई समीक्षा की गई। सचिव ने कहा कि जिन मामलों को जमाबंदी में त्रुटि के कारण पूर्व में रिजेक्ट किया गया है, उनमें आवश्यक सुधार के बाद निष्पादन की जिम्मेदारी अंचल अधिकारियों की है। राजस्व महाअभियान के 99 प्रतिशत आवेदनों को रिजेक्ट कर देने के कारण सारण जिले के परसा, अमनौर एवं दरियापुर के अंचलाधिकारी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई के निर्देश दिए। सीओ को कहा गया कि वे मृत रैयतों के उत्तराधिकार नामांतरण के मामलों में भी अपने स्तर से पहल करें। अंचल में संचालित सभी राजस्व कार्यों की जिम्मेदारी सीओ की है। मुख्यालय आने की जरूरत नहीं सचिव ने कहा कि अभियान बसेरा के तहत पात्र भूमिहीन लाभुकों को आवेदन जमा करने के लिए राज्य मुख्यालय आने की आवश्यकता नहीं है। वे अपने संबंधित अंचल कार्यालय में ही आवेदन जमा कर सकते हैं। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि लाभुकों को आवेदन प्रक्रिया के संबंध में सही जानकारी उपलब्ध कराई जाए। किसी व्यक्ति द्वारा लाभुकों को भ्रमित किए जाने या गलत जानकारी देने का मामला सामने आने पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बैठक में विभाग के अधिकारी मोना झा, संयुक्त गिरधारी लाल, डॉ. सुनील कुमार, संजय कुमार सिंह, मणिभूषण किशोर, नवाजिश अख्तर, अनुपम प्रकाश, अविनाश कुमार, जूही कुमारी तथा आनंद शंकर सहित तीनों जिलों के सभी अंचल अधिकारी उपस्थित थे।

कच्चा बादाम गर्ल अंजलि अरोड़ा बनेंगी माता सीता, देव शर्मा ने रामायण से जुड़े किए बड़े खुलासे

'कच्चा बादाम' गर्ल के नाम से मशहूर अंजलि अरोड़ा अब बड़े पर्दे पर डेब्यू करने वाली हैं. फिल्म महाकाव्य श्री राम कथा में वो माता सीता का रोल निभा रही हैं, जो 25 सितंबर को रिलीज होने के लिए तैयार है. इसमें भगवान राम की भूमिका एक्टर देव शर्मा निभा रहे हैं, जिनका ये पहला बड़ा ब्रेक भी बन सकता है. अंजलि की 'रामायण' में बना राम फिल्म महाकाव्य श्री राम कथा का ट्रेलर बीते दिन एक शानदार तरीके से लॉन्च किया गया. इवेंट में कास्ट से रणबीर कपूर की आने वाली रामायण पर भी सवाल किए गए. देव शर्मा ने कहा कि उन्हें रामायण और आदिपुरुष में लक्ष्मण के रोल ऑफर हुए थे, लेकिन अंत में वो रिजेक्ट हो गए. मीडिया के सवालों पर एक्टर ने ये खुलासा किया था. देव ने कहा- इससे पहले मुझे आदिपुरुष और नितेश तिवारी की रामायण, दोनों फिल्मों में लक्ष्मण का किरदार ऑफर हुआ था. मेरे लुक टेस्ट भी लगभग फाइनल हो चुके थे, लेकिन बात नहीं बन पाई. एक फिल्म में मैं भगवान राम का किरदार निभाने वाले एक्टर से करीब दो इंच लंबा था, जबकि दूसरी में मेरा कद-काठी राम का किरदार निभाने वाले एक्टर जितनी ही भारी थी. इसी वजह से मुझे फाइनल नहीं किया गया. इससे मैं काफी निराश हुआ. मुझे लगा कि शायद रामायण से मेरा कनेक्शन इतना अच्छा नहीं है, तभी बार-बार मुझे इस प्रोजेक्ट से बाहर कर दिया जा रहा है. एक्टर का इस दौरान ये भी कहना था कि उन्हें जब फिल्म महाकाव्य श्री राम कथा ऑफर की गई थी, तब उन्होंने इसे ठुकराया था. वो ना तो रामायण पर बनी फिल्म करना चाहते हैं और ना ही लक्ष्मण का किरदार निभाना चाहते हैं. हालांकि, बाद में उन्हें लगा कि भगवान राम का किरदार निभाना उनकी किस्मत में लिखा था और लक्ष्मण के रोल के लिए पहले जो ऑफर्स उन्होंने ठुकराए थे, उनके पीछे भी कोई वजह थी. ट्रोल हुए देव शर्मा देव शर्मा के इन खुलासों से कई लोग सहमत नहीं दिखे हैं. वो एक्टर को जमकर ट्रोल कर रहे हैं, उनका मानना है कि ये सब झूठ है और वो फेंक रहे हैं. वहीं कई लोगों का कहना है कि देव ने लक्ष्मण के रोल के लिए ऑडिशन दिया होगा, जिसमें वो रिजेक्ट हुए होंगे. बात करें फिल्म महाकाव्य श्री राम कथा की, तो इसे ऑडियंस से काफी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ रहा है. इसका ट्रेलर देख सब कह रहे हैं कि ये बुरे वीएफएक्स और खराब एक्टिंग से लबरेज है. सीता के रोल में अंजलि अरोड़ा भी जम नहीं रही हैं. रिलीज से पहले ही ऑडियंस मान चुकी है कि फिल्म फ्लॉप है. अब देखना है कि क्या 'कच्चा बादाम' गर्ल कोई कमाल दिखा पाती है या नहीं.

‘फूलन देवी की हत्या करवाकर मछुआरा समाज की राजनीति रोकी’… संजय निषाद का परोक्ष रूप से सपा पर तीखा हमला

‘साढ़े चार साल सुख-दुख में नहीं आए, अब पंचायत के बहाने कूद रहे बरसाती मेंढक’… संजय निषाद का तीखा हमला ‘फूलन देवी की हत्या करवाकर मछुआरा समाज की राजनीति रोकी’… संजय निषाद का परोक्ष रूप से सपा पर तीखा हमला  ‘मछुआरे दरी बिछाने वाली कौम नहीं, हक के लिए लड़ने वाली कौम हैं’… संजय निषाद का दो टूक संदेश ‘भेष बदल-बदलकर आएंगे बरसाती मेंढक, उनसे सावधान रहना है’… संजय निषाद ने मछुआरा समाज को चेताया लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने आगामी चुनाव को देखते हुए शुक्रवार को मछुआरा समाज को सावधान करते हुए तीखा सोशल मीडिया पोस्ट किया है। उन्होंने कहा कि जो लोग साढ़े चार साल तक समाज के सुख-दुख में दिखाई नहीं दिए, वही अब पंचायत के बहाने मछुआरा समाज के आसपास नजर आने लगे हैं। संजय निषाद ने परोक्ष रूप से समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए ऐसे लोगों को ‘बरसाती मेंढक’ और ‘दरी बिछाने वाले सौदागर’ बताते हुए समाज से सतर्क रहने की अपील की।  ‘साढ़े चार साल नहीं आए, अब पंचायत के बहाने कूदने लगे’ संजय निषाद ने मल्लाह, निषाद, केवट, कश्यप, बिंद, धीवर, कहार, बाथम, रायकवार और माझी समेत पूरे मछुआरा समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि चुनावी मौसम में ऐसे लोगों से सावधान रहना होगा, जो लंबे समय तक समाज के बीच नहीं रहे और अब पंचायत के बहाने उसके आसपास सक्रिय होने लगे हैं। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि 'जो साढ़े चार साल आपके सुख-दुख में नहीं आए- अब दरी बिछाने वाले वही सौदागर पंचायत के बहाने आपके आसपास बरसाती मेंढक की तरह कूदने लगे हैं।' फूलन देवी की हत्या और राजनीतिक विरासत का मुद्दा संजय निषाद ने अपने पोस्ट में वीरांगना फूलन देवी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने फूलन देवी की हत्या करवाकर मछुआरा समाज की अलग राजनीति को खड़ा होने से रोकने का काम किया, उनसे और उनकी मदद करने वालों से समाज को सावधान रहना होगा। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि जिस पार्टी ने फूलन देवी की हत्या की सुपारी दी, उनकी संपत्ति पर कब्जा कर लिया और उनकी राजनीतिक विरासत को मछुआरा समुदाय से छीनने का प्रयास किया, ऐसे लोग मछुआरा समाज का भला चाहने वाले नहीं हो सकते। दरअसल, फूलन देवी की हत्या को लेकर संजय निषाद सपा पर निशाना साधते रहे हैं। उनका दावा है कि फूलन देवी की बढ़ती लोकप्रियता देखकर सपा ने उनके खिलाफ साजिश की थी। ‘मछुआरे दरी बिछाने वाली कौम नहीं’ संजय निषाद ने अपने पोस्ट में मछुआरा समाज की राजनीतिक पहचान को लेकर भी दो टूक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि 'मछुआरों की अब स्वतंत्र पहचान निषाद पार्टी हैं।' उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि मछुआरे दरी बिछाने वाली कौम नहीं हैं, बल्कि ओबीसी समाज के हक के लिए लड़ने वाली कौम हैं। उनका संदेश था कि समाज को चुनावी मौसम में आने वाले ऐसे चेहरों को पहचानना होगा, जो अलग-अलग रूप और भेष में उसके बीच पहुंचेंगे। संजय निषाद ने लिखा, 'बरसाती मेंढक भेष बदल-बदल के आएंगे। उनसे सावधान रहना है।' ‘समाज को अपने हक के लिए खड़ा होना होगा’ संजय निषाद के इस पूरे पोस्ट में मछुआरा समाज की राजनीतिक पहचान, उसके अधिकार और अलग राजनीतिक ताकत के तौर पर खड़े होने का संदेश प्रमुखता से सामने आया। उन्होंने समाज को आगाह किया कि चुनावी मौसम में आने वाले राजनीतिक सौदागरों के बहकावे में आने के बजाय अपने हित और अधिकारों को प्राथमिकता देनी होगी।

संजू की वापसी से वैभव सूर्यवंशी को करना पड़ा इंतजार, गंभीर ने बताया टीम का प्लान

नई दिल्ली अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे टी20 में अभिषेक शर्मा ने 30 गेंदों में शतक ठोककर खूब सुर्खियां बटोरीं, लेकिन इसी सीरीज में संजू सैमसन ने भी चुपचाप अपना जवाब दे दिया. इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे पर लगातार नाकामी के बाद टीम से बाहर हुए संजू ने अफगानिस्तान के खिलाफ तीन मैचों में 117 रन बनाए, जिसमें दो अर्धशतक शामिल रहे. उनका स्ट्राइक रेट 180 रहा. गंभीर ने कहा कि इंग्लैंड में संजू को बाहर रखना उनके कोचिंग कार्यकाल का सबसे मुश्किल फैसला था. उन्होंने माना कि वर्ल्ड कप जीतने से पहले संजू के प्रदर्शन को देखते हुए यह फैसला आसान नहीं था. हालांकि, गंभीर ने यह भी कहा कि कई बार टीम मैनेजमेंट को खिलाड़ियों की मौजूदा फॉर्म के आधार पर फैसला लेना पड़ता है. गंभीर के मुताबिक टी20 क्रिकेट में सिर्फ रन या विकेट नहीं देखे जाते, बल्कि खिलाड़ी और टीम कितना इम्पैक्ट डाल रहे हैं, यह ज्यादा अहम है. इसी वजह से उन्होंने अभिषेक के 100 रन से ज्यादा टीम के पावरप्ले में 100 रन पूरे करने को बड़ी उपलब्धि बताया. उनके कोचिंग कार्यकाल में भारत ने पहली बार पावरप्ले में 100 रन बनाए. गंभीर ने कहा कि टीम को इसी आक्रामक सोच के साथ आगे बढ़ना है और अब अगला लक्ष्य 300 रन का स्कोर है. वर्ल्ड कप वाली टीम पर भरोसा क्यों? संजू के मामले में गंभीर ने एक और बात साफ की. उनका कहना था कि टीम मैनेजमेंट शुरू से ही वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम के कॉम्बिनेशन पर वापस जाने को लेकर स्पष्ट था. गंभीर ने कहा कि कोई खिलाड़ी दो-तीन मैच या एक-दो सीरीज में नाकाम होने से खराब खिलाड़ी नहीं बन जाता. भारत एक वर्ल्ड कप से दूसरे वर्ल्ड कप तक अजेय रहा और वर्ल्ड कप जीता. ऐसे में सिर्फ दो-तीन नाकामियों के बाद उस टीम या उसके खिलाड़ियों पर भरोसा खत्म नहीं किया जा सकता. संजू आए तो वैभव को करना पड़ा इंतजार अफगानिस्तान सीरीज में संजू की वापसी का सीधा असर 15 साल के वैभव सूर्यवंशी पर पड़ा. वैभव को प्लेइंग इलेवन से बाहर होना पड़ा. गंभीर ने इसे वैभव के लिए झटका नहीं, बल्कि इंतजार का हिस्सा बताया. उन्होंने कहा कि टीम मैनेजमेंट को वैभव की प्रतिभा और वह क्या कर सकता है, इसकी पूरी जानकारी है. लेकिन जो खिलाड़ी करीब दो साल से लगातार अच्छा कर रहा है, वह उस खिलाड़ी से आगे रहेगा जो अभी टीम में आया है. उनका संदेश साफ था- चाहे खिलाड़ी 15 साल का हो या 30 साल का, अगर मौका मिलने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है तो इंतजार करना होगा. भारतीय क्रिकेट में यही प्रतियोगिता है और टीम के ड्रेसिंग रूम में इस तरह की प्रतिभाओं की मौजूदगी ही टीम को मजबूत बनाती है.

महाभारत के 7 अनसुने रहस्य, शिखंडी से दुर्योधन तक जानिए पूरी कहानी और रहस्य

महाभारत केवल एक युद्ध की कहानी नहीं है. यह ऐसा महाग्रंथ है, जिसमें धर्म-अधर्म के संघर्ष के साथ-साथ रिश्तों, वचनों, त्याग, बदले और कर्म की कई कहानियां छिपी हुई हैं. कुरुक्षेत्र के इस युद्ध में भाई ने भाई के खिलाफ हथियार उठाया, शिष्य ने अपने गुरु से युद्ध किया और एक ही परिवार के लोग एक-दूसरे के सामने खड़े हो गए. महाभारत की यही खासियत है कि इसे जितनी बार पढ़ा जाए, हर बार कोई न कोई नई कथा या रहस्य सामने आता है. आज हम आपको महाभारत से जुड़े ऐसे ही कुछ प्रसंग बताएंगे, जिनका संबंध सीधे कुरुक्षेत्र युद्ध और उसके प्रमुख पात्रों से है. अंबा की कहानी और शिखंडी का जन्म महाभारत युद्ध में भीष्म पितामह की मृत्यु के पीछे शिखंडी की महत्वपूर्ण भूमिका थी. लेकिन शिखंडी के पीछे एक ऐसी कहानी थी, जो वर्षों पुराने अपमान और प्रतिशोध से जुड़ी थी. शिखंडी का पूर्वजन्म अंबा के रूप में बताया जाता है. अंबा काशी नरेश की पुत्री थीं. उनके साथ हुई घटनाओं के बाद उनके मन में भीष्म के प्रति गहरा आक्रोश पैदा हुआ. उन्होंने भीष्म के वध का संकल्प लिया और भगवान शिव की कठोर तपस्या की. मान्यता है कि भगवान शिव ने उन्हें वर दिया कि अगले जन्म में वह भीष्म की मृत्यु का कारण बनेंगी. इसके बाद अंबा ने अगले जन्म में शिखंडी के रूप में जन्म लिया था. कुरुक्षेत्र युद्ध के दौरान भीष्म शिखंडी के सामने अस्त्र उठाने से पीछे हट गए, क्योंकि वे शिखंडी को अंबा का पुनर्जन्म मानते थे. इसी परिस्थिति का लाभ उठाकर अर्जुन ने भीष्म पर बाण चलाए और अंततः भीष्म शरशय्या पर जा गिरे थे. अंबिका और अंबालिका के पुत्र कौन थे? अंबा के अलावा काशी नरेश की दो अन्य पुत्रियां थीं, अंबिका और अंबालिका. दोनों का विवाह हस्तिनापुर के राजकुमार विचित्रवीर्य से हुआ था. लेकिन विवाह के कुछ समय बाद ही विचित्रवीर्य की मृत्यु हो गई. उनके कोई संतान नहीं थी. ऐसे में हस्तिनापुर के राजवंश और सिंहासन के भविष्य को लेकर सत्यवती चिंतित हो उठीं. तब सत्यवती ने अपने पुत्र महर्षि वेदव्यास को बुलाया. धार्मिक परंपरा में वर्णित कथा के अनुसार, वंश को आगे बढ़ाने के लिए नियोग की व्यवस्था के तहत अंबिका और अंबालिका से संतान उत्पन्न करने की बात सामने आई. जब अंबिका वेदव्यास के सामने गईं तो भय के कारण उन्होंने अपनी आंखें बंद कर लीं. मान्यता है कि इसी वजह से उनके पुत्र धृतराष्ट्र जन्म से नेत्रहीन हुए. वहीं अंबालिका वेदव्यास को देखकर भय से पीली पड़ गईं. उनके पुत्र पांडु के शरीर का वर्ण पीला बताया गया. सत्यवती को जब यह पता चला कि दोनों राजकुमारों में कुछ विशेष शारीरिक परिस्थितियां हैं, तो उन्होंने स्वस्थ संतान की इच्छा से दोबारा प्रयास करने को कहा. लेकिन अंबिका खुद नहीं गईं और उन्होंने अपनी दासी को भेज दिया. उस दासी से विदुर का जन्म हुआ. विदुर आगे चलकर हस्तिनापुर के अत्यंत बुद्धिमान और नीति-कुशल मंत्री बने. यक्ष ने पांडवों से पूछे थे कठिन सवाल महाभारत का एक बेहद प्रसिद्ध प्रसंग पांडवों के वनवास के समय का है. वनवास के दौरान एक दिन पांडवों को बहुत प्यास लगी. पानी की तलाश में नकुल एक सरोवर के पास पहुंचे. वहां उन्हें एक अदृश्य आवाज सुनाई दी. आवाज ने चेतावनी दी कि सरोवर का पानी पीने से पहले उसके सवालों का जवाब देना होगा. लेकिन नकुल ने उस चेतावनी पर ध्यान नहीं दिया और पानी पी लिया. कथा के अनुसार, वह वहीं अचेत होकर गिर पड़े. जब नकुल वापस नहीं लौटे तो सहदेव उन्हें खोजने गए. उनके साथ भी यही हुआ. इसके बाद अर्जुन और भीम वहां पहुंचे, लेकिन उन्होंने भी उस चेतावनी को नजरअंदाज किया और सरोवर का पानी पीते ही अचेत होकर गिर पड़े. अंत में युधिष्ठिर वहां पहुंचे. उन्होंने अपने चारों भाइयों को इस हालत में देखा तो दुखी हुए. जब वह सरोवर का पानी पीने के लिए आगे बढ़े, तो वही आवाज फिर सुनाई दी. युधिष्ठिर ने जल्दबाजी करने के बजाय उस अदृश्य सत्ता की बात मान ली और उसके सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हो गए. यक्ष के सवालों का युधिष्ठिर ने दिया जवाब यक्ष ने युधिष्ठिर से जीवन और धर्म से जुड़े कई कठिन सवाल पूछे. इन सवालों को महाभारत के 'यक्ष प्रश्न' के नाम से जाना जाता है. यक्ष ने पूछा कि हवा से भी तेज क्या चलता है? युधिष्ठिर ने उत्तर दिया- मन. इसके बाद पूछा गया कि पृथ्वी से भारी क्या है? युधिष्ठिर ने माता को इसका उत्तर बताया. आकाश से ऊंचा क्या है? इस पर उन्होंने पिता को उत्तर दिया. इसी तरह यक्ष ने उनसे धर्म, जीवन, मृत्यु और मनुष्य के आचरण से जुड़े कई प्रश्न पूछे. युधिष्ठिर ने सभी प्रश्नों के संतुलित उत्तर दिए. युधिष्ठिर ने नकुल को ही क्यों चुना? यक्ष युधिष्ठिर के जवाबों से प्रसन्न हुए और उनसे कहा कि वह अपने चारों भाइयों में से किसी एक को जीवित कर सकते हैं. युधिष्ठिर ने नकुल को जीवित करने की इच्छा जताई. यक्ष ने पूछा कि उन्होंने भीम या अर्जुन को क्यों नहीं चुना, जबकि युद्ध के समय उनकी आवश्यकता अधिक थी. युधिष्ठिर ने कहा कि वह माता कुंती के पुत्र हैं और नकुल माता माद्री के. कुंती का एक पुत्र जीवित है, इसलिए माद्री का भी एक पुत्र जीवित रहना चाहिए. युधिष्ठिर की इस बात से यक्ष प्रसन्न हुए. महाभारत की कथा के अनुसार, वह यक्ष वास्तव में धर्मदेव थे. उन्होंने युधिष्ठिर को आशीर्वाद दिया और उनके सभी भाइयों को पुनर्जीवित कर दिया. श्री कृष्ण ने शिशुपाल की 100 गलतियां क्यों माफ कीं? महाभारत में श्रीकृष्ण को केवल योद्धा या अर्जुन के सारथी के रूप में ही नहीं, बल्कि अपने वचन का पालन करने वाले व्यक्ति के रूप में भी देखा जाता है. राजसूय यज्ञ के दौरान युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण को अग्रपूजा के योग्य माना. लेकिन शिशुपाल इससे बेहद नाराज हो गया और भरी सभा में कृष्ण का अपमान करने लगा. शिशुपाल की मां श्रीकृष्ण की बुआ थीं. शिशुपाल के जन्म से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, वह सामान्य बालक की तरह पैदा नहीं हुआ था. उसके तीन नेत्र और चार भुजाएं थीं. भविष्यवाणी की गई थी कि जिस व्यक्ति की गोद में जाने के बाद उसके अतिरिक्त अंग … Read more

Bhopal Ring Road की रिपोर्ट में बड़ी गड़बड़ी? सागर जिले के जिक्र और बजट आंकड़ों में विसंगतियां

भोपाल  भोपाल रिंग रोड को पूरा करने वाला करीब 3000 करोड़ के प्रोजेक्ट में भी इंजीनियरों का हैरतअंगेज खेल सामने आया है। भोपाल, नर्मदापुर, नागपुर, जबलपुर और इंदौर जाने वालों के लिए 25 किमी तक की दूरी कम करने वाले पश्चिमी बायपास की पर्यावरणीय रिपोर्ट बनाने में ही जिम्मेदारों ने बड़ी लापरवाही कर दी। रतनपुर से फंदा तक 36 किमी लंबे पश्चिमी बायपास के प्रोजेक्ट की पर्यावरणीय रिपोर्ट में सागर के बायपास की पर्यावरणीय रिपोर्ट को कॉपी पेस्ट कर पश्चिमी बायपास की पर्यावरणीय रिपोर्ट तैयार कर दी गई। हिन्दी और अंग्रेजी दोनों ही रिपोर्ट्स में ऐसी ही गलतियां हैं। इस रिपोर्ट के ड्राफ्ट पर आपत्तियां ली जा रही हैं। 25 सितंबर को इस पर आमला गांव में सुनवाई होगी। इसके बाद जमीनी काम शुरू होगा। सामने आ रही अफसरों की लापरवाही बता दें, पर्यावरणीय कारणों से ही प्रोजेक्ट का अलाइनमेंट एक बार बदला गया था। 4 किमी की लंबाई घटाकर 40 किमी से 36 किमी का किया। इसमें भी पर्यावरणीय रिपोर्ट की गड़बड़ी और सागर जिले के उल्लेख से अफसरों की लापरवाही सामने आ रही है। अब प्रोजेक्ट पर काम कर रहे एमपीआरडीसी के एजीएम एसपी दुबे का कहना है कि गड़बड़ी दिखवा लेंगे। भोपाल रिंग रोड प्रोजेक्ट, जिसे मुख्य रूप से भोपाल पश्चिमी बायपास (Bhopal Western Bypass) के रूप में जाना जाता है। भोपाल के ट्रैफिक को शहर के बाहर से ही डायवर्ट करने के लिए बनाई जा रही एक महत्वपूर्ण सड़क परियोजना है। ऐसे समझें प्रोजेक्ट रिपोर्ट में गड़बड़ियां -हिन्दी की रिपोर्ट के अनुभाग 1.7 में पर्यावरण प्रबंधन योजना में पर्यावरण संरक्षण के उपाय के लिए अंकों में बजट 05 करोड़ 12 हजार 722 रुपए लिखे हैं। जबकि शब्दों में चौबीस करोड़ छह लाख दो हजार आठ सौ नब्बे रुपए लिखा गया है। -हिन्दी की रिपोर्ट के अनुभाग 15 में पर्यावरण निगरानी कार्यों के लिए अंकों में 10,64,000 रुपए लिखे हैं। शब्दों इसे सात लाख छप्पन हजार रुपए लिखा। -अंग्रेजी की रिपोर्ट में टेबल 1.2 की एन्वायरमेंटल लेजिसलेशंस में 3 नंबर पर लिखा है, प्रोजेक्ट अलाइनमेंट इज पासिंग थू रिजर्ल्ड एंड प्रोटेक्टेड फॉरेस्ट ऑफ एबाउट 47 हेक्टेयर लेंथ 6058 मीटर डिस्ट्रिक्ट सागर इन स्टेट ऑफ एमपी। जाहिर है, ये सागर जिले की सड़क की बात है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार उज्जैन पहुंचे नितिन नबीन, धोती पहन महाकाल के किए दर्शन

 उज्जैन विश्व प्रसिद्ध द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक भगवान श्री महाकालेश्वर के आंगन में शुक्रवार तड़के भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने महाकाल मंदिर में आयोजित भस्म आरती में शामिल होकर बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए। नंदी हॉल में बैठ शिव भक्ति में लीन नितिन नबीन भाजपा राष्ट्रीय नितिन नबीन, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल व अन्य बाबा महाकाल के दरबार में अल सुबह 04 बजे पहुंचे. जहां उन्होंने नंदी हॉल में बैठकर 2 घण्टे तक भस्म आरती के दर्शन लाभ लिए. भगवान का आशीर्वाद लिया और पूजन अर्चन आरती की. वे नंदी हॉल में बैठ शिव भक्ति में लीन नजर आए. बाबा का भी इस दौरान राजा स्वरूप में श्रृंगार हुआ. नितिन नबीन मंदिर के ही पास सम्राट विक्रमादित्य हेरीटेज होटल में ही रात रुके. अब इंदौर एयरपोर्ट और वहां से पंजाब निकलने का कार्यकम है।  भस्म आरती में लीन दिखे भाजपा अध्यक्ष बाबा महाकाल की भस्म आरती के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन शिवभक्ति में लीन नजर आए। नंदी हॉल में बैठकर उन्होंने पूरे समय हाथ जोड़कर भगवान शिव का ध्यान किया और महाकाल के जाप में डूबे रहे। आरती के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं के साथ तालियां बजाकर शिवभक्ति की लय में सहभागिता की। उज्जैन आगमन पर भस्म आरती में शामिल होने का यह अनुभव उनके लिए खास रहा। महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान नितिन नबीन पारंपरिक सोला-पारिधान में नजर आए। उन्होंने पीले रंग की धोती पहनी हुई थी। मंदिर की परंपरा के अनुसार भस्म आरती में शामिल होने के दौरान निर्धारित पारंपरिक परिधान धारण किया जाता है। देश की यश-कीर्ति और प्रधानमंत्री के लिए की प्रार्थना भस्म आरती के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए नितिन नबीन ने कहा कि यह बाबा महाकाल की पवित्र नगरी है और यहां पहली बार आने का सौभाग्य पाकर वे अभिभूत हैं। उन्होंने कहा कि बाबा महाकाल पूरे विश्व का ध्यान रखते हैं।  अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार पहुंचे उज्जैन नितिन नबीन ने कहा, ''बाबा महाकाल की भूमि पर आकर जो खुशी हो रही है उसे शब्दों में बयान नहीं कर सकता. मैंने बाबा महाकाल से देश की सुख समृद्धि की मनोकामना की है.'' उन्होंने बताया कि, ''अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार उज्जैन आया हूं. आज जो कुछ हूं बाबा के आशीर्वाद से हूं. इसलिए तय कर रखा था बाबा का आशीर्वाद लेना है. बाबा का बुलावा आया और मैं चला आया. कल हमने पीएम मोदी का जन्मदिवस मनाया है. बाबा से प्रार्थना की है कि पीएम नरेंद्र मोदी की आयु लंबी हो और वे ऐसे ही विकास कार्य करते रहे. बाबा का आशीर्वाद प्रधानमंत्री पर बना रहे. यश कीर्ति वैभव उन्हें मिले।  पारंपरिक सोला-पारिधान में दिखा राष्ट्रीय अध्यक्ष सबसे खास बात यह रही ही महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान नितिन नबीन पारंपरिक सोला-पारिधान में नजर आए. उन्होंने पीले रंग की धोती पहनी हुई थी. दर्शन के बाद मंदिर में कलेक्टर एवं मंदिर समिति अध्यक्ष रोशन कुमार सिंह, प्रशासक प्रथम कौशिक द्वारा नितिन नबीन एवं हेमंत खंडेलवाल को बाबा महाकाल का स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया. उन्हें लड्डू प्रासद दिया गया. साथ ही प्रभारी मंत्री, सांसद व अन्य नेताओं ने भी दोनों पार्टी अध्यक्षों का स्वागत सम्मान किया।  'आशीर्वाद दीप' प्रोग्राम में शामिल हुए नितिन नबीन इससे पहले नितिन नबीन बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन के मशहूर राम घाट पर महाकाल के भक्तों के साथ 'आशीर्वाद दीप' प्रोग्राम में शामिल हुए. इस पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की प्रार्थना की. नितिन नबीन ने अपने X हैंडल पर ट्वीट करते हुए लिखा कि, ''प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश 'विकसित भारत' के संकल्प को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ता रहे यही कामना है। 

भारत की इकोनॉमी को मूडीज का बूस्टर, GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7% किया

नईदिल्ली  मूडीज रेटिंग्स ने भारत की अर्थव्यवस्था के लिए अपना अनुमान बड़े पैमाने पर बढ़ा दिया है। पहले जहां 2026-27 में 6% वृद्धि का अनुमान था, अब उसे बढ़ाकर 7% कर दिया गया है। इसकी वजह यह है कि मिडिल ईस्ट के संघर्ष के झटके को भारत ने जितनी अच्छी तरह झेला है, उतना मूडीज को उम्मीद नहीं थी। आज 18 सितंबर यानी शुक्रवार को मूडीज की नियमित समीक्षा में यह अपग्रेड सामने आया। इसके पीछे मजबूत निजी खपत, अच्छा ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन, लगातार सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च, निजी निवेश में सुधार के संकेत और सेवाओं की मजबूती जैसे कारण बताए गए हैं। पहले छह महीनों में 8.2% की वृद्धि मूडीज के मुताबिक, 2026 के पहले 6 महीनों में भारत की रियल GDP वृद्धि 8.2% रही, जबकि 2025 में पूरे साल की वृद्धि 7.3% थी। मूडीज ने कहा, "मिडिल ईस्ट के संघर्ष से पैदा हुए वैश्विक झटके को अर्थव्यवस्था ने जिस तरह झेला है, उसी वजह से हमने वित्त वर्ष 2026-27 (मार्च 2027 में खत्म) के लिए अपना अनुमान 6% से बढ़ाकर 7% किया है।" आधिकारिक आंकड़े भी मजबूत मूडीज का संशोधित अनुमान ऐसे समय आया है जब आधिकारिक वृद्धि आंकड़े भी मजबूत हैं। FY26 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.7% बढ़ी, जबकि एक साल पहले 7.1% थी। चौथी तिमाही की वृद्धि 7.8% रही। IMF, S&P और RBI से आगे निकला मूडीज मूडीज का यह संशोधित अनुमान इस साल की शुरुआत में दूसरी बड़ी संस्थाओं के अनुमानों से काफी ऊपर है।     अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने जुलाई की अपनी वर्ल्ड इकनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में वित्तवर्ष 2027 के लिए 6.4% वृद्धि का अनुमान लगाया था। IMF ने कहा था, "भारत सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है, निजी खपत और सेवाओं की मजबूत रफ्तार के सहारे 6.4% वृद्धि का अनुमान है।"     S&P ग्लोबल रेटिंग्स ने जून में 6.6% वृद्धि का अनुमान दिया था। S&P ने जून में ऊर्जा कीमतों, मिडिल ईस्ट संघर्ष, कमजोर मानसून और धीमी वैश्विक वृद्धि के जोखिमों के चलते FY27 का अनुमान 7.1% से घटाकर 6.6% किया था। उसे FY28 में 7.2% की वापसी की उम्मीद थी।     भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी जून में FY27 का अनुमान 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया था। RBI ने भी पश्चिम एशिया संघर्ष, ऊंची ऊर्जा कीमतों, सप्लाई में बाधा और मौसम से जुड़ी अनिश्चितताओं के चलते FY27 का अनुमान 6.9% से घटाकर 6.6% किया था। मूडीज का 7% अनुमान IMF से 0.6 प्रतिशत अंक और S&P तथा RBI दोनों से 0.4 प्रतिशत अंक ज्यादा है। घरेलू मांग है रियल ताकत मूडीज का मानना है कि इस उम्मीद भरे अनुमान की मुख्य वजह घरेलू मांग है। निजी खपत मजबूत हुई है और सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च के सहारे ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन भी अच्छा बना हुआ है। एजेंसी को उम्मीद है कि निजी क्षेत्र का निवेश भी फिर से शुरू होगा, जो वृद्धि की एक और वजह बनेगा। सेवाओं का कामकाज भी मजबूत बना हुआ है। इन सबने मिलकर भारत को मिडिल ईस्ट संघर्ष का असर सहने में मदद की, जिससे साल की शुरुआत में ऊर्जा कीमतों, व्यापार और विदेशी संतुलन को लेकर चिंताएं थीं।

अभिषेक शर्मा का तूफान, 11 छक्कों के साथ वैभव सूर्यवंशी से निकले आगे; 2026 में जड़े 96 सिक्स

नई दिल्ली साल 2026 में भारतीय बल्लेबाजों अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी के बीच एक खास रेस देखने को मिली है. वो रेस टी20 क्रिकेट में छक्के लगाने की है. हालांकि गुरुवार (17 सितंबर) को अफगानिस्तान के खिलाफ अभिषेक की तूफानी पारी ने समीकरण थोड़े बदल दिए हैं. अभिषेक इस साल टी20 क्रिकेट में कुल 96 छक्के लगा चुके हैं, जबकि 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी के नाम पर 86 छक्के हैं. इस तरह अभिषेक ने वैभव पर 10 छक्कों की बढ़त बना ली है. अभिषेक शर्मा ने दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में सीरीज के तीसरे और आखिरी टी20I मुकाबले में अफगानी गेंदबाजों की जमकर खबर ली. उन्होंने सिर्फ 34 गेंदों में 108 रन बनाए, जिसमें 11 छक्के के अलावा 9 चौके शामिल थे. इस पारी के दौरान उन्होंने 16 गेंदों में पचास रनों का आंकड़ा टच किया. फिर अभिषेक ने देखते ही देखते सिर्फ 30 गेंदों में अपना शतक पूरा कर लिया. भारत के लिए टी20 इंटरनेशनल में किसी बैटर का ये का सबसे तेज शतक रहा. साथ ही यह किसी फुल मेम्बर टीम के बल्लेबाज का दूसरी फुल मेम्बर टीम के खिलाफ सबसे तेज टी20I शतक भी रहा. बता दें कि अभिषेक शर्मा एक कैलेंडर ईयर में सबसे ज्यादा टी20 सिक्स लगाने वाले भारतीय बल्लेबाज हैं. अभिषेक ने 2025 में टी20 क्रिकेट में कुल 108 छक्के लगाए थे. इस साल अभिषेक 96 छक्के लगा चुके हैं और अपना ही रिकॉर्ड बेहतर करने की स्थिति में पहुंच गए हैं. 2024 में उनके बल्ले से 87 छक्के निकले थे. जबकि वैभव सूर्यवंशी 86 छक्कों के साथ चौथे स्थान पर हैं. दिलचस्प बात यह है कि कुल छक्कों की संख्या में अभिषेक शर्मा भले ही वैभव सूर्यवंशी से आगे निकल गए हों, लेकिन छक्का लगाने की आवृत्ति में युवा बल्लेबाज का आंकड़ा बेहतर है. 2026 में वैभव ने औसतन हर 4.99 गेंद पर एक छक्का लगाया है, जबकि अभिषेक के लिए यह आंकड़ा 6.64 है. एक कैलेंडर ईयर में सर्वाधिक छक्के लगाने वाले भारतीय (टी20 क्रिकेट) 108- अभिषेक शर्मा, 2025 96- अभिषेक शर्मा, 2026 87- अभिषेक शर्मा, 2024 86- वैभव सूर्यवंशी, 2026 85- सूर्यकुमार यादव, 2022 अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे टी20I में 11 छक्के लगाने के साथ ही अभिषेक शर्मा ने एक और उपलब्धि हासिल की. अभिषेक बतौर भारतीय बल्लेबाज एक टी20 इंटरनेशनल पारी में सबसे ज्यादा छक्के लगाने के मामले में दूसरे नंबर पर पहुंच गए हैं. इस सूची में सबसे ऊपर भी उनका ही नाम है. अभिषेक ने 2025 में मुंबई में इंग्लैंड के खिलाफ एक पारी में 13 छक्के लगाए थे. टी20I पारी में भारत के लिए सबसे अधिक छक्के 13- अभिषेक शर्मा बनाम इंग्लैंड, वानखेड़े, 2025 11- अभिषेक शर्मा बनाम अफगानिस्तान, दिल्ली, 2026 10- रोहित शर्मा बनाम श्रीलंका, इंदौर, 2017 10- संजू सैमसन बनाम साउथ अफ्रीका, डरबन, 2024 10- तिलक वर्मा बनाम साउथ अफ्रीका, जोहानिसबर्ग, 2024 10- ईशान किशन बनाम न्यूजीलैंड, तिरुवनंतपुरम, 2026