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छत्तीसगढ़ कांग्रेस की अहम बैठक शुरू, सुखदेव भगत सहित दिग्गज नेता मौजूद

रायपुर. राजधानी रायपुर स्थित राजीव भवन में सोमवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यकारणी की महत्वपूर्ण बैठक शुरू हो गई है। बैठक की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सुखदेव भगत कर रहे हैं। बैठक में PCC अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत सहित प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी शामिल हुए हैं। राजीव भवन में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्यों के साथ बैठक के बाद कनेक्ट सेंटर की टीम के साथ भी बैठक प्रस्तावित है। नए प्रदेश प्रभारी के तौर पर सुखदेव भगत का यह पहला छत्तीसगढ़ दौरा है, ऐसे में उनकी वरिष्ठ नेताओं और संगठन के विभिन्न स्तरों के पदाधिकारियों के साथ हो रही बैठकों पर राजनीतिक नजरें बनी हुई हैं। मुलाकात के दौरान नेताओं के बीच छत्तीसगढ़ में कांग्रेस संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, कार्यकर्ताओं में नयी ऊर्जा का संचार करने, जिला एवं ब्लॉक इकाइयों को सक्रिय करने व आगामी राजनीतिक चुनौतियों से निपटने की रणनीति पर विचार-विमर्श हुआ. चर्चा में संगठनात्मक एकजुटता, युवाओं व महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, अनुसूचित जाति-जनजाति एवं पिछड़े वर्गों को संगठन में समुचित प्रतिनिधित्व देने तथा जनता के ज्वलंत मुद्दों महंगाई, बेरोजगारी, जल-जंगल-जमीन, किसानों-मजदूरों के हक को सड़क से सदन तक प्रभावी ढंग से उठाने पर विशेष जोर दिया गया. इस अवसर पर प्रभारी सुखदेव भगत ने कहा कि छत्तीसगढ़ के सभी कांग्रेसी एक परिवार की तरह हैं. हम सब मिलकर संगठन को गांव-गांव, बूथ-बूथ तक मजबूत करेंगे. कार्यकर्ता ही हमारी असली पूंजी हैं, उनका सम्मान और मनोबल बढ़ाना मेरी पहली प्राथमिकता होगी. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी एवं नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप छत्तीसगढ़ में संगठन को नयी धार दी जायेगी और भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ सशक्त जनआंदोलन खड़ा किया जायेगा.

बीटूबी बैठकों से छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की पहल, नए टूर पैकेज, व्यावसायिक साझेदारी और निवेश की संभावनाओं को मिला मंच

‘सेंट्रल इंडिया कनेक्ट छत्तीसगढ़ मार्केट प्लेस-2026’ में देश-विदेश के टूर ऑपरेटर्स, ट्रैवल एजेंट्स और हॉस्पिटैलिटी विशेषज्ञों का संगम बीटूबी बैठकों से छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की पहल, नए टूर पैकेज, व्यावसायिक साझेदारी और निवेश की संभावनाओं को मिला मंच पर्यटन को रोजगार, स्थानीय अर्थव्यवस्था और महिला-जनजातीय सशक्तिकरण से जोड़ने पर जोर, उत्कृष्ट पर्यटन हितधारकों को राज्य स्तरीय पुरस्कार से किया गया सम्मानित विश्व पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है छत्तीसगढ़- राजेश अग्रवाल रायपुर,  विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ ने अपने समृद्ध प्राकृतिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और विरासत पर्यटन को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल एवं छत्तीसगढ़ ट्रैवल ट्रेड एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में मेफेयर लेक व्यू रिसॉर्ट, नवा रायपुर में ‘सेंट्रल इंडिया कनेक्ट छत्तीसगढ़ मार्केट प्लेस-2026’ का आयोजन किया गया। आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों के साथ पड़ोसी राज्यों के प्रमुख टूर ऑपरेटर्स, ट्रैवल एजेंट्स, होटलियर्स, होम-स्टे संचालक, पर्यटन संस्थाओं तथा विदेशी टूर एजेंसियों के प्रतिनिधियों की सहभागिता रही। इस आयोजन ने छत्तीसगढ़ को केवल एक पर्यटन गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय उसे राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पर्यटन कारोबार के संभावनाशील बाजार के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। बीटूबी बैठकों के माध्यम से पर्यटन कारोबारियों के बीच सीधे व्यावसायिक संवाद, नए टूर पैकेज तैयार करने, पर्यटक समूहों को छत्तीसगढ़ लाने, निवेश की संभावनाओं को तलाशने तथा प्रदेश के पर्यटन उत्पादों को नए बाजारों तक पहुंचाने पर चर्चा हुई। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल रहे मुख्य अतिथि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने की। इस अवसर पर पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक सौमिल रंजन चौबे, एलियांज इंडिया एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदीप भगत, छत्तीसगढ़ ट्रैवल ट्रेड एसोसिएशन के अध्यक्ष जसप्रीत भाटिया, कपिल जैन, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही कलेक्टर विजय दयाराम के., होटल मेफेयर के जीएम नीलेश, जिला पंचायत जीपीएम के सीईओ मुकेश रावटे सहित पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि, मीडिया प्रतिनिधि एवं पर्यटन मंडल के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे। छत्तीसगढ़ को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलाने की प्रतिबद्धता पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि पर्यटन केवल घूमने-फिरने का माध्यम नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति, इतिहास, विरासत और स्थानीय अर्थव्यवस्था को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण क्षेत्र है। छत्तीसगढ़ के पास बस्तर की जीवंत जनजातीय संस्कृति, सरगुजा की प्राकृतिक सुंदरता, चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे जलप्रपात, सिरपुर की ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक विरासत, राजिम की धार्मिक आस्था, भोरमदेव की स्थापत्य कला और बारनवापारा का वन्यजीवन जैसी विविध पर्यटन संपदाएं हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। पर्यटन विकास का उद्देश्य केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, कारीगरों एवं कलाकारों के लिए बाजार तथा ग्रामीण एवं जनजातीय समुदायों के लिए आजीविका के नए अवसर तैयार करना भी है। अग्रवाल ने कहा कि ‘सेंट्रल इंडिया कनेक्ट छत्तीसगढ़ मार्केट प्लेस’ देश-विदेश के पर्यटन कारोबारियों को छत्तीसगढ़ से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण बिजनेस प्लेटफॉर्म है। इस प्रकार के आयोजन से व्यावसायिक साझेदारी बढ़ाने, नए पर्यटन बाजारों से जुड़ने, नए टूर पैकेज विकसित करने और छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को अधिक से अधिक पर्यटकों तक पहुंचाने के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने रायपुर में निर्माणाधीन फिल्म सिटी, भोरमदेव कॉरिडोर और जशपुर के मयाली क्षेत्र में पर्यटन विकास जैसी परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। 400 से अधिक ट्रैवल एजेंसियां छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल से जुड़ीं छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने कहा कि यह आयोजन केवल उत्सव या औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण प्रयास है। देश-विदेश के पर्यटन कारोबारियों और विभिन्न हितधारकों को एक मंच पर लाकर व्यावसायिक संबंधों को मजबूत करने तथा छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि दिल्ली, भुवनेश्वर, पुणे और चेन्नई जैसे प्रमुख शहरों में रोड शो एवं विभिन्न राष्ट्रीय पर्यटन आयोजनों में सहभागिता के माध्यम से छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहर और पर्यटन सुविधाओं का प्रचार-प्रसार किया गया है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप 400 से अधिक ट्रैवल एजेंसियां छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल से जुड़ चुकी हैं। आने वाले समय में इस नेटवर्क को और विस्तारित किया जाएगा। पर्यटन को स्थानीय रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बनाने पर जोर पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन ने कहा कि पर्यटन को केवल भ्रमण का विषय न मानकर विकास, रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बनाना होगा। स्थानीय समुदायों को पर्यटन से जोड़कर रोजगार और आय के अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक धरोहर, सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक संपदा को बेहतर पर्यटन उत्पादों और पैकेज में परिवर्तित करते हुए अन्य राज्यों एवं देशों के साथ पर्यटन साझेदारी विकसित करनी होगी। उन्होंने आयोजन में बने नए संपर्कों और साझेदारियों को वास्तविक पर्यटन विकास में परिवर्तित करने तथा डिजिटल मार्केटिंग और सोशल मीडिया के माध्यम से छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने पर जोर दिया। डिजिटल तकनीक और एआई से वैश्विक पर्यटन बाजार में नई पहुंच छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक सौमिल रंजन चौबे ने विश्व पर्यटन दिवस 2026 की थीम ‘डिजिटल एजेन्डा एन्ड आर्टिफिशियल इन्टेलिजेन्स टू रिडिजाइन टूरिज्म’ के संदर्भ में छत्तीसगढ़ पर्यटन की संभावनाओं को प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर्यटन क्षेत्र को नई दिशा देने की क्षमता रखते हैं। पर्यटन संबंधी जानकारी, डिजिटल प्रचार-प्रसार, पर्यटक अनुभव, कंटेंट निर्माण और पर्यटन स्थलों की वैश्विक पहुंच बढ़ाने में इन तकनीकों का प्रभावी उपयोग किया जा सकता है। प्रस्तुतीकरण में चित्रकोट, तीरथगढ़, कुटुमसर, मैनपाट, जशपुर, बस्तर दशहरा, सिरपुर, भोरमदेव, ढोलकल गणेश, नारायणपाल और मल्हार सहित छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक, जनजातीय, आध्यात्मिक, ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक पर्यटन स्थलों की संभावनाओं को रेखांकित किया गया। चौबे ने बताया कि पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिलने के साथ आधारभूत संरचना को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। होम-स्टे के लिए … Read more

मंत्री गुप्ता- प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में बदली प्रदेश की औद्योगिक पहचान

निवेशकों के बीच भरोसे से बना उत्तर प्रदेश का क्रेडिट: नंदी मंत्री गुप्ता- प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में बदली प्रदेश की औद्योगिक पहचान अब निवेशकों के उद्योग लगने तक होगी हैंडहोल्डिंग- मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ग्रेटर नोएडा  उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने कहा कि प्रदेश ने निवेशकों के बीच अपना क्रेडिट और भरोसा संवाद, सुविधा और निरंतर सहयोग के माध्यम से बनाया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में ऐसा औद्योगिक वातावरण विकसित किया जा रहा है, जहां निवेशकों को केवल निवेश के लिए आमंत्रित करने तक सीमित न रहकर उद्योग स्थापित होने तक आवश्यक सहयोग और हैंडहोल्डिंग उपलब्ध कराई जा रही है। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के चौथे दिन उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के ‘फ्रॉम योर फैक्ट्री टू द फ्रंट लाइन’ नॉलेज सेशन को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि दुनिया के विभिन्न देशों और प्रमुख शहरों में किए गए रोड शो तथा निवेशकों के साथ लगातार संवाद का परिणाम है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तर प्रदेश के प्रति भरोसा बढ़ा है। उन्होंने कहा कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में विभिन्न देशों की भागीदारी भी इसी बढ़ते संवाद और विश्वास को दर्शाती है। मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने बताया कि उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के छह नोड लखनऊ, कानपुर, झांसी, चित्रकूट, अलीगढ़ और आगरा में अब तक लगभग 40,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं तथा करीब 1,142 हेक्टेयर भूमि विभिन्न उद्योगों को आवंटित की जा चुकी है।  उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता ऐसी व्यवस्था तैयार करना है जिसमें निवेशक को फाइल लेकर एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें। निवेशक के प्रदेश में आने के बाद उसकी जरूरतों को समझकर संबंधित विभागों और अधिकारियों के साथ समन्वय कर समाधान उपलब्ध कराया जाए। ‘निवेशक आए तो उद्योग लगने तक साथ खड़ी रहे सरकार’ नंदी ने कहा कि निवेशक के लिए केवल जमीन उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। उसे नीति, कनेक्टिविटी, आधारभूत ढांचे, टेस्टिंग, तकनीकी सुविधाओं और अन्य आवश्यक अनुमतियों के संबंध में भी सहयोग मिलना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से निवेशक सुविधा को कार्यालय की कार्यप्रणाली और व्यवहार से जोड़ने पर जोर दिया। रक्षा सप्लाई चेन में एमएसएमई और स्टार्टअप के लिए अवसर उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र का मतलब केवल टैंक, मिसाइल या विमान बनाना नहीं है। प्रिसीजन कंपोनेंट, इलेक्ट्रॉनिक सर्किट, सेंसर, बैटरी, विशेष केबल, सॉफ्टवेयर, तकनीकी टेक्सटाइल, एडवांस मटेरियल, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स सहित पूरी सप्लाई चेन में उद्योगों के लिए अवसर हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लखनऊ, कानपुर, झांसी, चित्रकूट, अलीगढ़ और आगरा नोड में रक्षा विनिर्माण का इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है। इसका लाभ बड़े उद्योगों के साथ एमएसएमई, स्टार्टअप, कंपोनेंट निर्माता और टेक्नोलॉजी कंपनियां भी उठा सकती हैं। कनेक्टिविटी, कानून-व्यवस्था और भरोसा निवेश की बुनियाद मंत्री ने कहा कि निवेश के लिए तीन चीजें महत्वपूर्ण हैं- कनेक्टिविटी, कानून-व्यवस्था और भरोसा। बेहतर एक्सप्रेसवे एवं परिवहन नेटवर्क, एयर कनेक्टिविटी और औद्योगिक आधारभूत ढांचे से प्रदेश में कारोबार के अवसर बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास कारोबारी प्रक्रियाओं को अधिक सुविधाजनक बनाने और अनावश्यक कानूनी जटिलताओं को कम करने का है। उद्योग और सरकार के बीच संबंध सहयोग और साझेदारी पर आधारित होने चाहिए। नंदी ने निवेशकों से उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और यूपीडा से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती जरूरतों के साथ प्रदेश के उद्योगों के लिए नई संभावनाएं बन रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार निवेशकों के साथ कदम-दर-कदम खड़ी है और उनका निवेश सुरक्षित वातावरण में उत्पादन, रोजगार और तकनीकी क्षमता के विस्तार से जुड़ सके, इसके लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। बॉक्स  रक्षा क्षेत्र की मांग सुनिश्चित, सप्लाई चेन में हर उद्योग के लिए अवसर: कर्नल संजय सिंह यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के सीजीएम रिटायर्ड कर्नल संजय सिंह ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में अवसर केवल टैंक, मिसाइल और विमान बनाने वाली बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रिसीजन इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर, बैटरी, स्पेशल केबल, सॉफ्टवेयर, एडवांस मटेरियल, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स सहित विभिन्न क्षेत्रों के उद्योग रक्षा सप्लाई चेन का हिस्सा बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र की मांग सामान्य बाजार की तरह अनुमान आधारित नहीं, बल्कि सशस्त्र बलों की निर्धारित आवश्यकताओं पर आधारित है, इसलिए स्वदेशी निर्माण के लिए बाजार की स्पष्ट संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने उद्योगों से अपनी मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का आकलन कर यह पहचानने का आह्वान किया कि वे रक्षा क्षेत्र की किस आवश्यकता को पूरा कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में भूमि, टेस्टिंग सुविधाओं, आरएंडडी और निवेशक सुविधा के साथ ऐसा इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है, जिसमें बड़े उद्योगों के साथ एमएसएमई और स्टार्टअप भी रक्षा आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ सकें।

मुख्य सचिव ने विभागीय सचिवों को समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर कार्य करने के दिए निर्देश

मुख्य सचिव ने विभागीय सचिवों को समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर कार्य करने के दिए निर्देश धान खरीदी नीति से लेकर जल प्रबंधन और प्रशासनिक सुधारों की हुई समीक्षा रायपुर मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन राज्य शासन के सभी विभागों के भारसाधक सचिवों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य शासन के विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव एवं सचिवों के साथ महत्वपूर्ण योजनाओं और विभागीय कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्धारित कार्यों को समयबद्ध रूप से पूरा करने के निर्देश दिए है। बैठक में धान खरीफ विपणन वर्ष के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए गए। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को पेयजल योजनाओं और जल संसाधन विभाग को शहरी एवं औद्योगिक क्षेत्रों में जल प्रबंधन और उपचार के लिए बेहतर कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है। नगरीय विकास विभाग को सिटी वाटर प्लान को विकसित भारत-2047 के विजन के अनुरूप तैयार करने के निर्देश दिए गए। ग्राम सभा के आयोजन के लिए निर्धारित 15 से 22 अक्टूबर की अवधि में आवश्यक तैयारियां समय पर पूर्ण करने को कहा गया। परिवहन विभाग को आगामी समय में ई-व्हीकल को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान देने तथा खाद्य विभाग को सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन पॉलिसी तैयार करने के निर्देश दिए गए। जिलों की मॉनिटरिंग पर जोर मुख्य सचिव ने जिलों में योजनाओं और विभागीय कार्यों की प्रभावी निगरानी के लिए स्कोर कार्ड को अंतिम रूप देने को कहा गया, जिससे कलेक्टरों के स्तर पर प्रगति की नियमित मॉनिटरिंग की जा सके। उन्होंने कहा कि कोर्ट मॉनिटरिंग सिस्टम को प्रभावी बनाने तथा अक्टूबर माह के लिए पारस पोर्टल से संबंधित प्रस्तावों पर आईटी विभाग के साथ समन्वय कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। ई-गजट पर निर्देशों की प्रतियां अपलोड करने के निर्देश मुख्य सचिव ने कहा कि शासन द्वारा बनाए गए सभी विधिक, नियमो, निर्देशों की संदर्भ प्रति ई-गजट पर अपलोड की जाए, ताकि अधिकारियों और संबंधित विभागों को भविष्य में संदर्भ के लिए इनका आसानी से उपयोग किया जा सके। पेंशन से संबंधित मामलों की विभागवार समीक्षा करते हुए विभागध्यक्ष को प्रत्येक विभाग के लंबित प्रकरणों की संख्या, उनके निराकरण में लगे समय और प्रगति की रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। एपीएआर को आईगॉट से लिंक करने तथा प्रत्येक विभाग को कर्मचारियों के क्षमता निर्माण की कार्ययोजना तैयार करने को भी कहा गया। 30 सितंबर तक रिक्त पदों की जानकारी देने के निर्देश मुख्य सचिव ने कर्मचारी चयन मंडल के लिए विभिन्न विभागों में रिक्त पदों की जानकारी 30 सितंबर तक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। बैठक में लोक सेवा गारंटी अधिनियम, रिफॉर्म उत्सव, 2 अक्टूबर की ग्राम सभाओं की तैयारियों और सेवा सेतु की प्रगति पर भी चर्चा हुई। बताया गया कि वर्तमान में 38 विभागों की 907 सेवाएं सेवा सेतु के माध्यम से ऑनलाइन उपलब्ध हैं। मुख्य सचिव ने फायर सेफ्टी अधिनियम में आवश्यक सुधार की दिशा में कार्यवाही करने के साथ ही ’माय भारत पोर्टल’ से संबंधित गतिविधियों को भी गति देने के निर्देश दिए। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के माध्यम से होगी सूचनाओं की समेकित रिपोर्टिंग बैठक में गृह विभाग की सचिव श्रीमती नेहा चम्पावत ने बताया कि एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के माध्यम से जानकारी एकत्रित की जाएगी और इसके बाद भारत सरकार को भेजी जाएंगी। उन्होंने बताया कि इससे विभिन्न विभागों से प्राप्त सूचनाओं की समेकित रिपोर्टिंग सुनिश्चित होगी। मुख्य सचिव ने बैठक के अंत में सभी विभागों को क्षमता निर्माण, विभागीय कार्यों की निगरानी और निर्धारित लक्ष्यों की समयबद्ध पूर्ति के लिए स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री मनोज कुमार पिंगुआ,पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, गृह एवं जेल विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, विधि एवं विधायी विभाग के प्रमुख सचिव श्री मनीष कुमार ठाकुर, नगरीय प्रशासन विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार, खनिज साधन विभाग एवं मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद, मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद, ऊर्जा विभाग के सचिव श्री सारांश मित्तर, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुल हक सहित राज्य शासन के अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

चीनी के भाव में ₹22 की बड़ी गिरावट, त्योहारों से पहले आम लोगों को राहत

सवाईमाधोपुर  त्योहारों का दौर शुरू होने से पहले ही बाजार ने आमजन को राहत की खबर दी है। कभी 72 रुपए प्रति किलो तक पहुंची चीनी अब करीब 50 रुपए किलो में बिक रही है। करीब एक पखवाड़े में ही चीनी के भाव में लगभग 22 रुपए प्रति किलो तक की गिरावट दर्ज की है। ऐसे में त्योहारों पर घरों में बनने वाली मिठाइयों से लेकर बाजार में बिकने वाली मिठाई और अन्य खाद्य सामग्री की लागत पर भी इसका असर पड़ने की उम्मीद है। पिछले कुछ समय में चीनी के दाम लगातार बढ़ते हुए 48 रुपए से 50, 55, 60, 65, 68, 70 और 72 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए थे। बढ़ते भाव के कारण घरेलू रसोई का बजट प्रभावित होने के साथ ही मिठाई कारोबारियों की लागत भी बढ़ गई थी। अब अचानक भाव में आई कमी से बाजार में खरीदारों को राहत मिली है। मिठाई कारोबारियों को भी राहत की उम्मीद त्योहारों के दौरान चीनी की खपत बढ़ जाती है। मिठाई, पेठा, बर्फी, रसगुल्ला सहित कई उत्पादों में चीनी प्रमुख कच्चा माल है। ऐसे में कीमतों में आई कमी से मिठाई कारोबारियों की उत्पादन लागत घट सकती है। वहीं इसका लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचने पर त्योहारों के दौरान मिठाई और अन्य चीनी आधारित उत्पादों के दामों में भी राहत की संभावना रहेगी। आपूर्ति बढ़ी तो भाव पर पड़ा असर कारोबारियों के अनुसार चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से स्टॉक सीमा और बिक्री व्यवस्था को लेकर किए गए नियंत्रण का असर बाजार में दिखाई देने लगा है। इसके साथ ही सरकार की ओर से चीनी के आयात को लेकर दिए गए संकेतों से भी बाजार में आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद बनी, जिसका दबाव भाव पर पड़ा। पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होने से तेजी पर अंकुश लगा और कीमतें नीचे आने लगीं। मासिक बिक्री कोटा भी बढ़ाया चीनी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए मासिक बिक्री कोटा 22 लाख टन से बढ़ाकर 26.50 लाख टन किया गया है। इसके तहत महीने की 15 तारीख तक 13 लाख टन तथा 16 से 30 तारीख तक 13.50 लाख टन चीनी की बिक्री का प्रावधान किया गया है। स्टॉक का समय पर निस्तारण और बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने की व्यवस्था का सीधा असर अब खुदरा बाजार के भाव पर दिखाई दे रहा है। 72 से 50 रुपए किलो तक पहुंचा भाव समय                            चीनी का भाव करीब पखवाड़े पहले    72 रुपए प्रति किलो वर्तमान भाव करीब            50 रुपए प्रति किलो गिरावट करीब                     22 रुपए प्रति किलो इनका कहना है चीनी के भाव में पिछले दिनों तेजी से बढ़ोतरी हुई थी और भाव 72 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए थे। अब सरकार की ओर से स्टॉक सीमा तय करने और बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के बाद भाव में लगातार गिरावट आई है। वर्तमान में चीनी करीब 50 रुपए किलो बिक रही है। त्योहारों के सीजन में चीनी की मांग बढ़ने के बावजूद भाव कम होने से आम उपभोक्ताओं के साथ मिठाई कारोबारियों को भी राहत मिलेगी। — मोहन मंगल, संरक्षक, खाद्य व्यापार मंडल, बजरिया  

बिल गेट्स की AI पर बड़ी चेतावनी, बोले- गलत इस्तेमाल से हो सकती है 1 अरब मौतें

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर दुनिया में जितना उत्साह है, उतनी ही तेजी से इसके खतरों पर भी बहस बढ़ रही है. अब माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स ने AI को लेकर ऐसी चेतावनी दी है, जिसने इस बहस को और गंभीर बना दिया है. बिल गेट्स ने कहा है कि AI इतना पावरफुल हो चुका है कि अगर इसका गलत इस्तेमाल हुआ तो ऐसी घटनाएं हो सकती हैं, जिनमें एक अरब लोगों की मौत तक हो सकती है. हालांकि, गेट्स ने यह नहीं कहा कि AI निश्चित तौर पर इतनी मौतों का कारण बनेगी. उनका कहना है कि AI की मौजूदा और भविष्य की क्षमता गलत हाथों में बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचाने के लिए पर्याप्त हो सकती है. बिल गेट्स को आखिर किस बात का डर है? NBC के कार्यक्रम Meet the Press में क्रिस्टन वेलकर के साथ बातचीत में गेट्स से पूछा गया कि क्या AI पूरी मानवता को खत्म करने जितनी ताकतवर हो सकती है. इसके जवाब में उन्होंने कहा कि AI ऐसी घटनाओं को जन्म देने के लिए निश्चित रूप से पर्याप्त शक्तिशाली है, जिनमें एक अरब लोगों की मौत हो सकती है. गेट्स की चिंता सिर्फ किसी फिल्म जैसे AI रोबोट के इंसानों के खिलाफ हो जाने को लेकर नहीं है. उनका बड़ा डर यह है कि इंसान खुद AI का इस्तेमाल विनाशकारी कामों के लिए कर सकते हैं. उन्होंने खास तौर पर साइबर अटैक और बायो-टेररिज्म जैसे खतरों का जिक्र किया है. उनके मुताबिक AI का इस्तेमाल ऐसे साइबर हमलों में हो सकता है जो अस्पतालों या बिजली जैसी जरूरी सेवाओं को ठप कर दें. यानी खतरा यह नहीं है कि कोई AI अचानक खुद फैसला लेकर इंसानों पर हमला कर दे. बड़ा सवाल यह है कि बेहद शक्तिशाली AI टूल अगर गलत लोगों के हाथ में चले गए तो वे उनका इस्तेमाल कितनी तेजी और बड़े स्तर पर कर सकते हैं. AI को लेकर दुनिया के टेक दिग्गज भी क्यों चिंतित हैं? गेट्स की यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब AI कंपनियों के अंदर से भी इसके खतरों को लेकर आवाजें उठ रही हैं. Anthropic के CEO डारियो अमोडी ने भी AI के गलत इस्तेमाल से साइबर अटैक और बायो-टेररिज्म जैसे जोखिमों की बात की है. हाल ही में AI इंडस्ट्री के कुछ बड़े नामों ने भी ज्यादा मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और नियमों की जरूरत पर चर्चा की है. इस पूरी बहस में सबसे दिलचस्प बात यह है कि AI बनाने वाली कंपनियां खुद भी अब सिर्फ अपनी इंटरनल सेफ्टी पॉलिसीज पर निर्भर रहने के सवाल का सामना कर रही हैं. गेट्स का कहना है कि सेल्फ रेगुलेशन यानी कंपनियों का खुद अपने लिए नियम बनाना काफी नहीं है. उनके मुताबिक सरकारों, कानून लागू करने वाली एजेंसियों और नेताओं को भी तय करना होगा कि AI के लिए कौन से सेफ्टी और मॉनिटरिंग नियम जरूरी हैं. इसका मतलब AI को रोक देना चाहिए? गेट्स AI के पूरी तरह खिलाफ नहीं हैं. यही इस कहानी का दूसरा और ज्यादा दिलचस्प पहलू है. उनका मानना है कि AI आने वाले समय में बीमारी के इलाज, शिक्षा, खेती और दूसरे क्षेत्रों में बड़ा बदलाव ला सकती है. गेट्स की चिंता AI के इस्तेमाल को खत्म करने की नहीं, बल्कि यह तय करने की है कि इसकी रफ्तार इतनी तेज न हो जाए कि इंसानों के पास नुकसान होने के बाद प्रतिक्रिया देने के अलावा कोई रास्ता न बचे. सबसे बड़ा सवाल: नियम कौन बनाएगा? दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां अमेरिका और चीन के बीच AI की होड़ में तेजी से आगे बढ़ रही हैं. ऐसे माहौल में ज्यादा सख्त नियमों को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि कहीं सुरक्षा के नाम पर AI की रफ्तार तो धीमी नहीं हो जाएगी. गेट्स का तर्क है कि जरूरी सुरक्षा व्यवस्था AI की प्रगति को पूरी तरह रोकने वाली नहीं होनी चाहिए. उदाहरण के लिए उन्होंने ऐसे मॉनिटरिंग सिस्टमम्स की बात की है जो यह पहचान सकें कि किसी AI का इस्तेमाल साइबर अटैक या बायो-टेररिज्म के लिए तो नहीं हो रहा. उनके मुताबिक इसके लिए AI की पूरी डेवेलपमेंट को रोकना जरूरी नहीं है. AI का असली खतरा शायद AI नहीं, इंसान हैं AI खुद कोई इंसानी इरादा नहीं रखती, लेकिन यह इंसानों की क्षमता को कई गुना बढ़ा सकती है. अगर यही ताकत गलत व्यक्ति, अपराधी संगठन या किसी खतरनाक नेटवर्क के हाथ लगती है, तो नुकसान का स्तर आज की तकनीकों से कहीं ज्यादा हो सकता है. बिल गेट्स का 'एक अरब मौतों' वाला बयान इसी बड़े सवाल की तरफ इशारा करता है. यह किसी तय भविष्यवाणी का दावा नहीं है, बल्कि AI के गलत इस्तेमाल से पैदा हो सकने वाले संभावित नुकसान को लेकर उनकी चेतावनी है. और जैसे-जैसे AI ज्यादा शक्तिशाली होती जा रही है, यह बहस सिर्फ टेक कंपनियों की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की बनती जा रही है.

CM योगी ने जनता दर्शन में सुनी फरियाद, जमीन कब्जे पर सख्त कार्रवाई के निर्देश

लखनऊ जनसेवा को सदैव सर्वोपरि रखने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार सुबह ‘जनता दर्शन’ में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और पीड़ितों को समाधान का भरोसा दिया। रायबरेली से आए एक बुजुर्ग अपनी पीड़ा कहते भावुक हो गए, इस पर मुख्यमंत्री ने तत्काल दोषियों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया। कहा कि शांति, खुशहाली व सुदृढ़ कानून व्यवस्था ही नए उत्तर प्रदेश की पहचान है, इसमें बाधा डालने वालों को कानूनी ढंग से सबक सिखाएं। कब्जे की शिकायतों पर भी उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जमीन कब्जामुक्त कराने के साथ दोषियों पर कार्रवाई की जाए। हर पीड़ित से मिले मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक पहुंचकर उनकी पीड़ा जानी। उन्होंने हर पीड़ित को आश्वस्त किया कि सभी की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। ‘जनता दर्शन’ में मुख्यमंत्री ने मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर पीड़ित व्यक्ति की समस्या पर संवेदनशीलता से ध्यान दें और तत्परता से उसका समयबद्ध-पारदर्शी निस्तारण कराएं। मुख्यमंत्री ने बुजुर्ग का सुना प्रकरण, आरोपियों पर सख्त कार्रवाई का निर्देश रायबरेली से एक बुजुर्ग भी जनता दर्शन में पहुंचे। शरीर पर लगी चोट मुख्यमंत्री को दिखाते हुए उनका गला रुंध गया। इस पर मुख्यमंत्री ने उनसे पूरे प्रकरण की जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि कुछ लोगों ने उन पर अकारण हमला कर दिया है। आरोपियों को लगता है कि वह कहीं बाहर रहते हैं। ऐसे में घात लगाए बदमाशों ने उन्हें पीटा और रुपये छीन लिए। इस पर मुख्यमंत्री ने मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि सख्त से सख्त कार्रवाई कर इस प्रकरण में तत्काल कार्रवाई करें। राजस्व से जुड़े प्रकरणों के समयबद्ध निस्तारण पर जोर कुछ पीड़ितों ने जमीन जबरन कब्जा किए जाने की भी शिकायत की। इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि यदि किसी दबंग ने किसी गरीब की जमीन हड़पी है तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। जमीन अवैध या जबरन कब्जे से मुक्त होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने राजस्व से जुड़े प्रकरणों के समयबद्ध निस्तारण पर जोर दिया।  

CBT में बदली पहचान, फिजिकल टेस्ट में खुला राज; AI कैमरों ने पकड़े 4 मुन्नाभाई

अंबाला  रेलवे भर्ती में चयन हासिल करने के लिए चार परीक्षार्थियों ने ऐसा फर्जीवाड़ा किया कि एक-दूसरे की जगह कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) तक दे डाली। सीबीटी में तो उनकी यह चालाकी पकड़ में नहीं आई, लेकिन जब भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण में शारीरिक दक्षता परीक्षा देने अंबाला कैंट रेलवे स्टेडियम पहुंचे तो एआइ कैमरों ने उनकी पोल खोल दी। चेहरे और अभ्यर्थी के उपलब्ध डाटा का मिलान नहीं होने पर चारों संदिग्ध पकड़ में आ गए। प्रारंभिक जांच के बाद उन्हें परीक्षा से अलग कर दिया गया। रेलवे की शिकायत पर पड़ाव थाना पुलिस ने चारों के खिलाफ केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार आरोपितों की पहचान प्रह्लाद कुमार निवासी ग्राम संधा, पोस्ट नोमाजिला, जिला लखीसराय, बिहार, अनंत कुमार निवासी ग्राम यशवंतपुर, पोस्ट रूखई, थाना चंडी, जिला नालंदा, बिहार, उज्जवल कुमार निवासी ग्राम मंडिल, पोस्ट मंडिल, थाना पारसबिघा, जिला जहानाबाद, बिहार और गोलू निवासी ग्राम उसरी, थाना कोको, जिला जहानाबाद, बिहार के रूप में हुई है। भर्ती प्रक्रिया में लगाए गए थे एआइ कैमरे रेलवे स्टेडियम अंबाला कैंट में रेलवे भर्ती प्रक्रिया के तहत अभ्यर्थियों की शारीरिक दक्षता परीक्षा आयोजित की जा रही थी। भर्ती प्रक्रिया में निजी एजेंसियों टीसीएस और टीटीआइपीएल का सहयोग लिया जा रहा था। फर्जीवाड़ा रोकने और अभ्यर्थियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए परीक्षा स्थल पर एआइ आधारित कैमरे लगाए गए थे। जैसे ही अभ्यर्थी फिजिकल फिटनेस टेस्ट के लिए पहुंचे, कैमरों ने उनकी पहचान से संबंधित डाटा का मिलान शुरू किया। इसी दौरान चार अभ्यर्थियों के मामले में पहचान का मिलान नहीं हुआ। तकनीकी प्रणाली से मिले संकेत के बाद संबंधित अभ्यर्थियों की जांच की गई। प्रारंभिक स्तर पर ही मामला संदिग्ध पाए जाने पर चारों को अलग कर दिया गया। सीबीटी में एक-दूसरे की जगह बैठे थे जांच के दौरान जब चारों से पूछताछ की गई तो कथित तौर पर सीबीटी में किए गए फर्जीवाड़े का भी खुलासा हुआ। पूछताछ में प्रह्लाद कुमार ने बताया कि अनंत कुमार की सीबीटी परीक्षा उसने दी थी, जबकि उसकी जगह अनंत कुमार ने परीक्षा दी थी। इसी तरह उज्जवल कुमार की सीबीटी परीक्षा गोलू ने दी और गोलू की जगह उज्जवल कुमार परीक्षा में बैठा था। इस तरह चारों ने आपस में एक-दूसरे की जगह सीबीटी देकर भर्ती प्रक्रिया के पहले चरण को पार करने का प्रयास किया। सीबीटी के दौरान उनकी यह अदला-बदली पकड़ में नहीं आ सकी। इसके बाद जब भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण में उन्हें वास्तविक अभ्यर्थी के तौर पर शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए बुलाया गया तो एआइ आधारित पहचान प्रणाली ने उनके फर्जीवाड़े को पकड़ लिया। तकनीक के सामने नहीं चली चालाकी चारों अभ्यर्थियों ने सीबीटी में पहचान छिपाकर भर्ती प्रक्रिया में आगे बढ़ने की कोशिश की, लेकिन फिजिकल फिटनेस टेस्ट के दौरान लगाए गए एआइ कैमरों ने उनकी चालाकी पर पानी फेर दिया। परीक्षा स्थल पर अभ्यर्थी की पहचान और उपलब्ध डाटा के मिलान की व्यवस्था होने के कारण एक-दूसरे की जगह परीक्षा देने वाले अभ्यर्थी तकनीक की नजर से बच नहीं सके। रेलवे की ओर से मामले की शिकायत पुलिस को दी गई। शिकायत के आधार पर पड़ाव थाना पुलिस ने चारों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि सीबीटी परीक्षा में पहचान बदलकर परीक्षा देने की पूरी योजना कैसे तैयार की गई और इसमें अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका तो नहीं थी। भर्ती प्रक्रिया में इस तरह के फर्जीवाड़े से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

माओवादी डंप से बरामद ₹20 लाख लापता, दो DSP पर गंभीर आरोप; विभाग में हड़कंप

कांकेर  जिले में माओवादी डंप से बरामद 20 लाख रुपये गायब होने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार मार्च-अप्रैल 2026 में मुरगांव क्षेत्र के जंगलों में माओवादी डंप की तलाश के दौरान करीब 20 लाख रुपये की नकदी बरामद हुई थी। आरोप है कि बरामद रकम को सरकारी खाते में जमा कराने के बजाय तत्कालीन दो डीएसपी ने आपस में बांट लिया। मामले की जानकारी एसपी तक पहुंचने के बाद जांच कराई गई, लेकिन जांच रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है। टोडेमरका और मरकाकोनारी के जंगलों में हुई थी बरामदगी बताया गया कि तत्कालीन डीएसपी अपनी टीम के साथ मुरगांव के आश्रित ग्राम टोडेमरका और मरकाकोनारी के जंगलों में डंप की तलाश के लिए निकले थे। सर्च ऑपरेशन के दौरान टोडेमरका जंगल से करीब 15 लाख और मरकाकोनारी से करीब पांच लाख रुपये बरामद हुए थे। कुल मिलाकर करीब 20 लाख रुपये की नकदी मिलने की बात सामने आई है। जांच के बाद भी रिपोर्ट नहीं आई सामने बरामद रकम के बंटवारे को लेकर अब तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि नियमानुसार रकम को सरकारी खाते में जमा किया जाना था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इधर मामले में एसपी के संज्ञान में आने के बाद आंतरिक जांच कराई गई, मगर उसकी रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है। इससे मामले को लेकर संदेह और गहरा गया है। 22 करोड़ की अफवाह से हड़कंप इधर डंप से 20 लाख की जगह 22 करोड़ रुपये मिलने की अफवाह भी फैली हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह चर्चा जोरों पर है कि बरामद रकम 20 लाख से कहीं ज्यादा थी। वहीं स्थानांतरण के बाद विभाग में मामले की फिर से चर्चा शुरू हो गई है। फिलहाल आधिकारिक तौर पर विभाग ने इस पूरे मामले पर चुप्पी साध रखी है।

सांसद-विधायकों के लंबित मामलों की फाइलों का होगा कलर कोड, पंजाब-हरियाणा में नई व्यवस्था

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सांसदों और विधायकों से जुड़े आपराधिक मामलों की निगरानी को और प्रभावी बनाने के मामले में सुनवाई स्थगित कर दी। कोर्ट ने कहा कि मामले से संबंधित कुछ हलफनामे अभी दाखिल होना बाकी हैं। इसके चलते मामले को अब सात अक्टूबर 2026 को दोबारा सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया है। इस मामले में पंजाब सरकार की ओर से यह बताए जाने पर कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) और आयकर विभाग की ओर से चलाए जा रहे कई मामलों का पूरा ब्योरा तत्काल उपलब्ध नहीं है, हाई कोर्ट ने केंद्रीय एजेंसियों से इसकी जानकारी जुटाकर अदालत में पेश करने को कहा हुआ है। साथ ही, लंबे समय से लंबित मामलों को तुरंत पहचानने के लिए मामलों के रंग-कोड की व्यवस्था को और स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। पिछली सुनवाई पर चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार के वकील ने बताया कि सांसदों और विधायकों से संबंधित कई मामलों में ईडी, सीबीआइ और आयकर विभाग की ओर से अभियोजन चल रहा है, लेकिन इनका पूरा विवरण राज्य सरकार के पास तत्काल उपलब्ध नहीं है। जांच एजेंसियों को पहले रिकॉर्ड रखने के आदेश इस पर हाई कोर्ट ने केंद्रीय संबंधित विभागों और एजेंसियों से जानकारी एकत्र कर अगली सुनवाई से पहले रिकॉर्ड पर रखने को कहा था । अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के आंकड़ों में कोई अंतर सामने आता है तो संबंधित अधिकारी उसकी जांच कर स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं। हाई कोर्ट के स्वत संज्ञान लेकर इस मामले की सुनवाई शुरू की है। अदालत पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के मौजूदा और पूर्व सांसदों तथा विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों की प्रगति की निगरानी कर रही है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही सभी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को मौजूदा और पूर्व सांसदों-विधायकों के लंबित आपराधिक मामलों को तत्काल सूचीबद्ध करने का निर्देश दे चुका है। विशेष रूप से उन मामलों पर ध्यान देने को कहा गया है, जिनमें सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट की ओर से कार्यवाही पर रोक लगी हुई है। अब रंग बताएगा केस कितना पुराना खंडपीठ ने रजिस्ट्री की ओर से तैयार सांसद-विधायकों से जुड़े लंबित मामलों की रंग-कोड वाली सूची भी देखी। इसमें उन मामलों की अलग श्रेणी बनाई गई है, जिनकी कार्यवाही हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के आदेश से रुकी हुई है। अदालत ने कहा कि जो मामले लंबे समय से लंबित हैं, उन्हें अधिक स्पष्ट और उभरते हुए रंग में प्रदर्शित किया जाना चाहिए, ताकि पहली नजर में ही पता चल सके कि इन मामलों पर प्राथमिकता से ध्यान देने की जरूरत है।