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पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ पर जस्टिस कौल के गंभीर दावे, किताब में न्यायिक नियुक्तियों और PMLA केस का जिक्र

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस संजय किशन कौल अपनी किताब में पूर्व CJI डी वाई चंद्रचूड़ पर किए गए दावे को लेकर सुर्खियों में आ गए हैं। जस्टिस कौल ने कहा है कि पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ ने उनसे पीएमएलए वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर फिर से विचार करने वाली याचिकाओं वाले मामले में बीच का रास्ता अपनाने को कहा था। जस्टिस कौल ने यह भी बताया कि न्यायिक नियुक्तियों में देरी से जुड़े मामले को उनकी बेंच से तब वापस ले लिया गया था, जब वे केंद्र सरकार पर कॉलेजियम सिफारिशों को लागू करने के लिए दबाव डालने की कोशिश कर रहे थे। जस्टिस कौल का दावा है कि सीजेआई चंद्रचूड़ पर इस मामले को बेंच से हटाने का दबाव जरूर था। हालांकि, यह नहीं बता सकते कि वह दबाव सरकार ने डाला था या नहीं। 'द वायर' के हवाले से लाइव लॉ ने बताया कि जस्टिस कौल ने कहा कि एक बार पीएमएलए केस में तत्कालीन सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने उन्हें अपने चैंबर में बुलाया था। उस समय उनकी अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच विजय मदनलाल चौधरी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के फैसलों पर दोबारा विचार करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करने जा रही थी। जस्टिस कौल की किताब 'विदाउट फियर ऑर फेवर' लॉन्च होने जा रही है। इसी में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और पू्र्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ से जुड़े भी कई दावे किए हैं। जस्टिस कौल ने आगे बताया कि जस्टिस संजीव खन्ना भी उसी बेंच का हिस्सा थे और वह भी वहीं पर मौजूद थे। पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ ने उन्हें मामले को आगे न बढ़ाने के लिए मनाने की कोशिश की और सुझाव दिया कि अगर वह आगे बढ़ने का फैसला करते हैं तो सावधानी बरतनी चाहिए और बीच का रास्ता निकालना चाहिए। जस्टिस कौल ने बताया कि उन्होंने सुनवाई को आगे ले जाने का फैसला किया, क्योंकि अगर वे पीछे हटते तो इससे उनकी ईमानदारी पर असर पड़ता। 'मैं अपनी ईमानदारी की बहुत कद्र करता हूं' जस्टिस कौल ने इंटरव्यू में कहा, ''लोग मेरे बारे में क्या कहेंगे कि मैं इसके लिए पैसे ले रहा हूं? अगर 22 साल जज रहने के बाद भी इस तरह के मामलों में झुक जाऊंगा तो मैंने अपना काम नहीं किया। मैं अपनी ईमानदारी का बहुत कद्र करता हूं।'' उन्होंने दावा किया कि तब उन्होंने जस्टिस चंद्रचूड़ से कहा था कि मैंने अपने करियर में कभी भी बीच का रास्ता नहीं अपनाया और जब भी लगा कि यह सही है, तो मामले को आगे ही बढ़ाया। जस्टिस कौल ने याद किया कि पूर्व सीजेआई से यह चर्चा करने के बाद वे आगे सुनवाई के लिए कोर्टरूम में गए और मामले की सुनवाई की।

मकान मालिक ने तोड़ा कमरे का ताला तो खुला नकली नोटों का राज, ₹48 लाख की सामग्री जब्त; मुंबई भागा आरोपी

नागपुर महाराष्ट्र के नागपुर शहर से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक किराएदार ने बंद कमरे के भीतर ही नकली नोट छापने का पूरा सेटअप लगा रखा था। मकान मालिक के साथ किराए के पैसों को लेकर हुए विवाद और कमरे का ताला तोड़े जाने के बाद इस पूरे फर्जी नोट रैकेट का खुलासा हुआ। वाठोड़ा थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जब कमरे की तलाशी ली, तो अधिकारियों के होश उड़ गए। कमरे से 500 रुपए के नकली नोटों की गड्डियां, हाई-टेक प्रिंटर, नोट गिनने की मशीन और आधा-अधूरी छपी करेंसी बरामद की गई है। 18 महीने पहले लिया था कमरा पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, फर्जी नोटों के इस कारोबार को अंजाम देने वाले आरोपी की पहचान पुष्पक कृष्णा भंडारकर उर्फ बेंदने (त्रिमूर्ति नगर, नागपुर निवासी) के रूप में हुई है। आरोपी पुष्पक ने करीब डेढ़ साल पहले नागपुर के खारबी इलाके में रमेश नाम के व्यक्ति से एक कमरा किराए पर लिया था। जनवरी में उसका रेंट एग्रीमेंट खत्म हो गया था, जिसके बाद उसने पिछले कई महीनों से किराया देना बंद कर दिया था। जब मकान मालिक रमेश ने उससे कमरा खाली करने को कहा, तो आरोपी ने उन्हें चाकू दिखाकर जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद मकान मालिक ने वाठोड़ा पुलिस स्टेशन में एनसी दर्ज कराई थी। बाल्टी में भरी थीं 500 रुपए के नोटों की गड्डियां कई दिनों तक जब किराएदार कमरे पर नहीं आया, तो शनिवार को मकान मालिक रमेश ने हथौड़े से कमरे का ताला तोड़ दिया। जैसे ही वे अंदर घुसे, नजारा देखकर दंग रह गए। कमरे के अंदर एक बाल्टी में 500 रुपए के जाली नोटों की गड्डियां ठसाठस भरी हुई थीं। कमरे में चारों तरफ नोट छपे हुए कागज के पन्ने बिखरे पड़े थे, साथ में एक प्रिंटर और नोट गिनने की मशीन भी लगी हुई थी। मकान मालिक ने तुरंत इसकी जानकारी वाठोड़ा पुलिस को दी। 37 लाख रुपए के छपे नोट और 48 लाख रुपए की कुल संपत्ति जब्त मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने जब नोट गिनने की मशीन से बरामद नोटों की गिनती की, तो शुरुआती जांच में 37 लाख रुपए मूल्य के 500 रुपए के नकली नोट पाए गए। इसके अलावा, पुलिस को बड़ी संख्या में ऐसे कागज भी मिले जिन पर केवल एक तरफ नोट छपा था और दूसरी तरफ का हिस्सा कोरा था। छपे और आधे छपे नोटों तथा प्रिंटिंग सामग्री की कुल कीमत लगभग 48 लाख रुपए आंकी गई है। मुंबई भागा आरोपी, गिरफ्तारी के लिए टीम रवाना वाठोड़ा पुलिस ने सारा सामान जब्त कर आरोपी पुष्पक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने जब आरोपी से संपर्क करने की कोशिश की, तो पता चला कि वह लोकेशन बदलकर मुंबई भाग गया है। नागपुर पुलिस की एक विशेष टीम को आरोपी पुष्पक को ट्रैक कर गिरफ्तार करने के लिए मुंबई भेजा जा रहा है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि आरोपी अब तक बाजार में कितने लाख रुपये के नकली नोट खपा चुका है और इस रैकेट में उसके साथ कौन-कौन शामिल हैं।

ममता बनर्जी के करीबी फिरहाद हकीम का खुलासा, ‘शुभेंदु अधिकारी आज TMC के मुख्यमंत्री होते’, जानें वजह

नई दिल्ली ममता गुट वाले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और कोलकाता के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम ने घोषणा की है कि वे अब नगर निगम चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने पार्टी के भीतर अपनी उपेक्षा, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ अपने संबंधों और तृणमूल कांग्रेस के भविष्य को लेकर कई बड़े खुलासे किए। ममता बनर्जी के प्रति अपनी निष्ठा जाहिर करते हुए भी फिरहाद हकीम ने पार्टी नेतृत्व पर तीखा हमला बोला। मीडिया  में उन्होंने कहा, "हमने कभी ममता बनर्जी का साथ नहीं छोड़ा। समस्या तब शुरू हुई जब उन्होंने अपने पुराने समर्थकों से ज्यादा अपने 'खून' यानी कि रिश्तेदारों और परिवार पर भरोसा करना शुरू कर दिया। हम सब उनके साथ खड़े थे, लेकिन उन्होंने हेलीकॉप्टर से एक नेता को लाकर बैठाना बेहतर समझा।" शुभेंदु अधिकारी होते आज TMC के मुख्यमंत्री राजनीतिक वफादारी पर बात करते हुए हकीम ने एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा, "अगर पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को सही महत्व दिया गया होता, तो शायद आज शुभेंदु अधिकारी TMC के मुख्यमंत्री होते।" पार्टी से अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए हकीम ने कहा कि बीते कुछ वर्षों से उन्हें कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा, "पिछले पांच सालों से पार्टी ने मेरा कोई इस्तेमाल नहीं किया है।" उन्होंने यह भी कहा कि वे दुर्गा पूजा के दौरान ममता बनर्जी को मिस कर रहे थे और जब भी उनसे मुलाकात होगी वे खुलकर अपनी बात रखेंगे। फिरहाद हकीम ने बताया कि कोलकाता में पीने के पानी की किल्लत को दूर करना और उत्तर कोलकाता में जलभराव की समस्या को सुलझाना उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि रही। अपने कार्यकाल के दौरान हुई इमारत ढहने की घटना को उन्होंने अपना सबसे बड़ा मलाल बताया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह घटना सीधे तौर पर उनके नियंत्रण में नहीं थी। नई पीढ़ी को सलाह हकीम ने कहा कि अब नई पीढ़ी को चुनावी राजनीति में आगे आना चाहिए। हालांकि उन्होंने सचेत किया कि युवाओं को ईंट, बालू और सीमेंट के कारोबार के लिए राजनीति में नहीं आना चाहिए, बल्कि जनता के लिए हमेशा उपलब्ध रहने वाला पार्षद बनना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को अपने परिवार पर नहीं थोपेंगे और न ही किसी पारिवारिक सदस्य पर राजनीति में आने का दबाव बनाएंगे।

Chery Omoda 5 का एक्सल बॉडी से अलग होने पर हड़कंप, 8,878 कारों में जांच; भारत में एंट्री पर भी नजर

नई दिल्ली भारत में एंट्री की तैयारी कर रही चीन की कार कंपनी Chery के लिए ग्लोबल मार्केट से आई एक खबर किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है. जिस वक्त कंपनी भारतीय बाजार में अपनी पहचान बनाने और ग्राहकों का भरोसा जीतने का सपना देख रही है, उसी वक्त मलेशिया में उसकी Omoda 5 कार का पिछला एक्सल बॉडी से अलग होने की घटना कंपनी की साख पर सवाल खड़े कर रही है. मामला इतना गंभीर हुआ कि 8,878 कारों को रिकॉल करना पड़ा और कंपनी के चेयरमैन को खुद माफी मांगनी पड़ी. दरअसल बीते दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ था. जिसमें मलेशिया की सड़क पर एक कार दो टुकड़ों में बंटी नज़र आ रही थी और कार पिछली एक्सल अलग होकर सड़क पर पड़ा था. घटना के वक्त लोग आते-जाते इस कार का वीडियो बना रहे थें. इस मामले में एक बार फिर से Chery Omoda 5 की मतबूती और यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल खड़ा कर दिया था और लोगों के बीच तगड़ी बहस छेड़ दी थी. अब इस मामले की जांच शुरू होने के साथ ही कंपनी को 8,878 कारों को रिकॉल करने का फैसला लेना पड़ा. अब Chery के चेयरमैन और प्रेसिडेंट यिन टोंग्यू ने इस घटना को लेकर माफी मांगी है. उन्होंने चीनी वाहन कंपनियों को भी सलाह दी है कि वे विदेशी बाजारों में कारोबार बढ़ाते समय जल्द मुनाफा कमाने के बजाय ग्राहकों का भरोसा जीतने और लंबे समय तक टिके रहने पर ध्यान दें. कार न्यूज चाइना के मुताबिक, 21 अक्टूबर को वर्ल्ड इंटेलिजेंट कनेक्टेड व्हीकल कॉन्फ्रेंस (WICV) में बोलते हुए यिन टोंग्यू ने मलेशिया में सामने आई वाहन की क्वालिटी से जुड़े चिंताओं को स्वीकार किया. उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर मलेशिया के इन्वेस्टमेंट, बिजनेस और इंडस्ट्री मिनिस्टर से भी माफी मांगी है. यिन ने कहा कि चीनी कंपनियां विदेशों में केवल जल्दी मुनाफा कमाने के लिए नहीं जा रही हैं, बल्कि वे वहां लंबे समय तक कारोबार करना चाहती हैं. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि दूसरे देशों में कारोबार शुरू करने वाली कंपनियों को वहां के कानून, नियमों और व्यापार करने के तरीकों का सम्मान करना चाहिए. यह घटना 6 अक्टूबर को मलेशिया के जोहोर बाहरू में हुई थी. यहां Chery Omoda 5 कार का पिछला सस्पेंशन असेंबली और पहिए गाड़ी की बॉडी से अलग हो गए.  इसके बाद मलेशिया के रोड ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट (JPJ) ने मामले में हस्तक्षेप किया. 11 अक्टूबर को विभाग ने Omoda 5 के लिए नए व्हीकल टाइम अप्रूवल (VTA) को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया. इसका मतलब है कि जांच पूरी होने तक इस मॉडल के नए रजिस्ट्रेशन पर रोक लगा दी गई. विभाग ने मलेशिया में बेची जाने वाली Chery की उन कारों को आइडेंटिफाई करने का निर्देश दिया, जो इस समस्या से प्रभावित हो सकती हैं. इसके लिए कंपनी को पार्ट नंबर, प्रोडक्शन बैच और व्हीकल आइडेंटिफिकेशन नंबर (VIN) को चेक करने को कहा है. JPJ की तकनीकी जांच में कारों के प्रोडक्शन और असेंबली के प्रोसेस के साथ क्वालिटी कंट्रोल सिस्टम की भी समीक्षा की जा रही है. इसके अलावा वेल्डिंग की क्वॉलिटी और एक्सल से जुड़े पार्ट्स की सप्लाई करने वाली कंपनियों की भी जांच की जा रही है. भारत आने की तैयारी में Cherry चेरी ऑटोमोबाइल अब भारत में अपनी पारी शुरू करने की योजना बना रही है. ये चीपी कंपनी भारतीय बाजार में एंट्री के लिए JSW Group के साथ साझेदारी पर काम कर रही है. माना जा रहा है कि Chery की पहली गाड़ियों की एंट्री 2026 के अंत से लेकर 2027 के बीच शुरू हो सकती है. अगर यह योजना तय समय के मुताबिक आगे बढ़ती है, तो भारतीय कार बाजार में एक और मजबूत चीनी ऑटो ब्रांड की सीधी एंट्री देखने को मिलेगी. BYD पहले से ही इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री भारत में कर रही है.

महंगे कच्चे तेल से तेल कंपनियों की बढ़ी मुश्किलें, LPG बिक्री पर HPCL को ₹500 करोड़ का घाटा

नई दिल्ली कच्चे तेल की अधिक कीमतों की वजह से इस समय ऑयल रिफाइनरी कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। मौजूदा समय में एक सिलेंडर पर HPCL को 245 रुपये का नुकसान हो रहा है। HPCL के मैनेजिंग डायरेक्टर विकास कौशल के अनुसार नवंबर में यह नुकसान 327 रुपये के स्तर पर पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि कंपनियों को पश्चिम एशिया में जारी गतिरोध की वजह से यह नुकसान हो रहा है। बता दें, विश्व भर में कई मोर्चे पर जारी युद्ध की वजह से कच्चे तेल की कीमतें इस समय सातवें आसमान पर है। यही वजह है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को भारी नुकसान हो रहा है। दूसरी तिमाही में एलपीजी पर 500 करोड़ रुपये का नुकसान एचपीसीएल के एमडी ने कहा कि उन्होंने कहा कि जुलाई से सितंबर के दौरान उन्होंने 500 करोड़ रुपये का नुकसान के साथ एलपीजी सिलेंडर की बिक्री की है। बता दें, मौजूदा समय में इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलिय कारपोरेशन और हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन ने मार्केट प्राइस से कम की कीमत पर घरेलू सिलेंडर की बिक्री की है। जिसकी वजह से इन कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। मौजूदा समय में कंपनियां सिर्फ कच्चे तेल की अधिक कीमतों की वजह से ही नहीं परेशान हैं। माल ढुलाई की बढ़ती लागत का भी असर कंपनियों के बहिखाते पर पड़ रहा है। कंपनी के अनुसार स्वेजमैक्स टैंकर का भाड़ा 9 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। जोकि पहली तिमाही में 4 डॉलर प्रति बैरल था। इन सबके अलावा HPCL मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए आपतकालीन खरीद पर विचार कर रहा है। कितना हुआ है दूसरी तिमाही में नेट प्रॉफिट एचपीसीएल ने पिछले हफ्ते तिमाही नतीजों का ऐलान किया है। कंपनी ने दी जानकारी में बताया है कि दूसरी तिमाही में कुल नेट प्रॉफिट 3625.22 करोड़ रुपये रहा है। पहली तिमाही में कंपनी को 12264.67 करोड़ रुपये का नेट लॉस हुआ है। बता दें, सालाना आधार पर कंपनी का प्रॉफिट 6.1 प्रतिशत घट गया है। एक साल पहले इसी तिमाही में कंपनी का प्रॉफिट (टैक्स भुगतान के बाद) के 3859 करोड़ रुपये रहा था। कंपनी का रेवन्यू (ऑपरेशंस) से सालाना आधार पर 26.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 139140 करोड़ रुपये रहा है। इससे पहले पिछले साल कंपनी को 110323 करोड़ रुपये की आय हुई थी।

Operation Trident: क्या है अमित शाह का ऑपरेशन ट्राइडेंट? ड्रग नेटवर्क से लेकर हवाला कारोबार तक पर शिकंजा

नई दिल्ली देश में नशे के कारोबार को चलाने वाले नेटवर्क पर सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी कार्रवाई की है. इसका नाम है ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’. इस अभियान के तहत असम, मिजोरम और मणिपुर में एक साथ 38 ठिकानों पर छापेमारी की गई. कार्रवाई में 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. जांच एजेंसियों के मुताबिक करीब 100 करोड़ रुपए के हवाला लेनदेन का खुलासा हुआ है. इसके अलावा 1,424 बैंक खातों को फ्रीज किया गया और 17.82 करोड़ रुपए की संपत्तियां अटैच की गई हैं. तलाशी के दौरान 500 डेटोनेटर और 12 लाख रुपए नकद भी जब्त किए गए. इस कार्रवाई के बाद सवाल उठ रहा है कि आखिर ऑपरेशन ट्राइडेंट क्या है और यह किस तरह अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी के नेटवर्क पर चोट करता है? यह अभियान 23 अक्टूबर को चलाया गया. इसमें केंद्रीय एजेंसियों और असम, मिजोरम तथा मणिपुर की पुलिस ने मिलकर कार्रवाई की. जांच के मुताबिक संदिग्ध नेटवर्क भारत के साथ म्यांमार और बांग्लादेश की सीमाओं का इस्तेमाल करके नशीले पदार्थों की तस्करी कर रहा था. इस तस्करी मार्ग को ‘डेथ ट्रायंगल कॉरिडोर’ बताया गया है. एजेंसियों की जांच केवल नशीले पदार्थों की बरामदगी तक सीमित नहीं रही. कथित तौर पर तस्करी से जुड़े पैसों के लेनदेन और संपत्तियों की भी पड़ताल की गई. बैंक खाते फ्रीज करने और संपत्तियां अटैच करने का मकसद नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियों पर रोक लगाना है. हालांकि पूरे नेटवर्क की भूमिका और गिरफ्तार लोगों के खिलाफ आरोपों की स्थिति आगे की जांच से स्पष्ट होगी।  क्या है ऑपरेशन ट्राइडेंट? ऑपरेशन ट्राइडेंट नशीले पदार्थों की तस्करी और उससे जुड़े कथित पैसें के नेटवर्क के खिलाफ चलाया गया संयुक्त अभियान है. इसमें कई स्थानों पर एक साथ कार्रवाई की गई ताकि नेटवर्क के अलग-अलग हिस्सों की जांच की जा सके. इस कार्रवाई में केंद्रीय एजेंसियों के साथ तीन पूर्वोत्तर राज्यों की पुलिस ने भी सहयोग किया. जांच का अहम पहलू यह है कि एजेंसियां कथित तस्करी के साथ उससे जुड़े धन के स्रोत और इस्तेमाल को भी खंगाल रही हैं. इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि नशे के कारोबार से जुड़ी कमाई किन लोगों और संस्थाओं तक पहुंच रही थी।  38 ठिकानों पर छापेमारी और 18 गिरफ्तार 23 अक्टूबर को असम, मिजोरम और मणिपुर में 38 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया. इस दौरान 18 लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी गई है. जांच एजेंसियों का दावा है कि यह कार्रवाई एक अंतरराष्ट्रीय नार्को-कार्टेल यानी नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले संगठित नेटवर्क के खिलाफ की गई. तीन राज्यों में एक साथ कार्रवाई का मकसद कथित नेटवर्क से जुड़े लोगों और गतिविधियों का पता लगाना था. गिरफ्तार आरोपियों की व्यक्तिगत भूमिका और उनके खिलाफ मौजूद साक्ष्यों का पूरा विवरण आगे की जांच में स्पष्ट हो सकेगा।  100 करोड़ के हवाला कारोबार पर कैसे हुई चोट? इस अभियान का बड़ा पहलू कथित हवाला लेनदेन का खुलासा है. एजेंसियों के मुताबिक जांच में करीब 100 करोड़ रुपए के लेनदेन का पता चला है. इसके साथ 1,424 बैंक खातों को फ्रीज किया गया और 17.82 करोड़ रुपए की संपत्तियां अटैच की गईं. कार्रवाई के दौरान 12 लाख रुपए नकद भी जब्त किए गए. हवाला के जरिए पैसों का लेनदेन जांच को जटिल बना सकता है क्योंकि इसमें रकम की वास्तविक आवाजाही और उसके स्रोत का पता लगाना महत्वपूर्ण होता है. खातों को फ्रीज करने और संपत्तियां अटैच करने से कथित नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है।  500 डेटोनेटर मिलने से जांच का दायरा बढ़ा छापेमारी में 500 डेटोनेटर बरामद किए जाने की जानकारी भी सामने आई है. इनके मिलने के बाद जांच में यह पता लगाना अहम होगा कि वे कहां से आए और किस उद्देश्य से रखे गए थे. फिलहाल उपलब्ध जानकारी से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि डेटोनेटर का इस्तेमाल किसी खास घटना के लिए होना था. एजेंसियां बरामद सामग्री और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर रही हैं. इस बरामदगी ने अभियान में नशीले पदार्थों और वित्तीय लेनदेन के अलावा दूसरे संभावित पहलुओं की पड़ताल को भी महत्वपूर्ण बना दिया है।  भारत-म्यांमार-बांग्लादेश सीमा पर तस्करी का कथित नेटवर्क जांच एजेंसियों के मुताबिक यह नेटवर्क भारत, म्यांमार और बांग्लादेश के सीमावर्ती इलाकों का इस्तेमाल करके नशीले पदार्थों की आवाजाही करता था. इस मार्ग को ‘डेथ ट्रायंगल कॉरिडोर’ कहा गया है. सीमापार तस्करी में कई समूहों और रास्तों की भूमिका हो सकती है. ऐसे मामलों में केवल सामान जब्त करना ही पर्याप्त नहीं होता. एजेंसियों को यह भी पता लगाना पड़ता है कि सप्लाई कहां से शुरू हुई और उसके पीछे कौन लोग काम कर रहे थे. ऑपरेशन ट्राइडेंट में वित्तीय लेनदेन की जांच इसी व्यापक पड़ताल का हिस्सा है।  2029 तक नशे के नेटवर्क खत्म करने का लक्ष्य इस कार्रवाई को 31 दिसंबर 2029 तक देश से नशीले पदार्थों के नेटवर्क खत्म करने के लक्ष्य की दिशा में एक कदम बताया गया है. तीन राज्यों में संयुक्त कार्रवाई और वित्तीय नेटवर्क पर चोट इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है. हालांकि किसी एक अभियान से पूरे तस्करी नेटवर्क के खत्म होने की पुष्टि नहीं की जा सकती. इसके लिए आगे की जांच और लगातार कार्रवाई जरूरी होगी. ऑपरेशन ट्राइडेंट का वास्तविक असर इस बात से सामने आएगा कि एजेंसियां कथित नेटवर्क के बाकी सदस्यों तक पहुंच पाती हैं या नहीं और तस्करी के रास्तों तथा पैसों के प्रवाह पर कितनी प्रभावी रोक लगती है। 

‘वोट चोरी’ के आरोपों पर 1 नवंबर को दिल्ली में विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन, BJP ने जवाबी रणनीति के लिए बुलाई बैठक

नई दिल्ली इंडिया गठबंधन 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली कर रहा है। इंडिया गठबंधन की रैली के जरिए विपक्षी दल चुनाव आयोग की ओर से कराए जा रहे वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को उठाएंगे। वहीं इस रैली के बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने रविवार शाम पार्टी मुख्यालय में एक अहम बैठक बुलाई है। इस बैठक में विपक्ष की रैली का जवाब देने के लिए रणनीति तैयार की जाएगी। पार्टी के नेता मिलकर तय करेंगे कि विपक्ष के आरोपों और मुद्दों का जवाब किस तरह दिया जाए। भाजपा कर रही बैठक सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी इस बैठक में शामिल हो सकते हैं। बैठक की अध्यक्षता पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष करेंगे। पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री सुनील बंसल भी बैठक में मौजूद रहेंगे। इसके अलावा, बीजेपी के कई बड़े नेताओं के भी बैठक में शामिल होने की उम्मीद है। यह प्रदर्शन चुनाव आयोग की ओर से वोटर लिस्ट की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में कथित गड़बड़ियों के विरोध में किया जाएगा। विपक्ष ने इन गड़बड़ियों को लेकर ‘वोट चोरी’ का नारा दिया है। विपक्षी गठबंधन इन आरोपों के आधार पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है। विपक्ष का है ये प्लान विपक्ष की योजना दिल्ली के रामलीला मैदान में इकट्ठा होने के बाद वहां से चुनाव आयोग के कार्यालय तक विरोध मार्च निकालने की है। कांग्रेस के बड़े नेता भी इस रैली की तैयारी में जुटे हैं। पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली के क्षेत्रीय नेताओं के साथ बैठकें कर रहे हैं। इन बैठकों का मकसद रैली में 10 लाख लोगों को जुटाना है। रैली को लेकर CTI ने लिखा खत दिल्ली पुलिस ने 25 अक्टूबर से 3 नवंबर तक होने वाले कार्यक्रम के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी कर दिया है। इसके साथ ही कार्यक्रम के लिए सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और अन्य जरूरी इंतजामों को भी मंजूरी मिल गई है। हालांकि, मंजूरी मिलने के बावजूद रैली की तारीख और जगह को लेकर व्यापारियों और राजनीतिक विरोधियों ने आपत्ति जताई है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को पत्र लिखकर रैली को 10 नवंबर के बाद आयोजित करने की अपील की है। 10,000 करोड़ का कारोबार प्रभावित होने का दावा व्यापारियों का कहना है कि रैली के दौरान भारी बैरिकेडिंग, कड़ी सुरक्षा और यातायात में बदलाव के कारण दिल्ली के मध्य हिस्से के 20 बड़े बाजारों में कारोबार प्रभावित हो सकता है। उनका अनुमान है कि दिवाली और धनतेरस के दौरान बाजारों में खरीदारी के सबसे व्यस्त समय में 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार प्रभावित होने का खतरा है। हालांकि, कांग्रेस के नेताओं के संकेतों से लगता है कि पार्टी तय कार्यक्रम के अनुसार ही रैली आयोजित करने की तैयारी कर रही है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने 1 नवंबर को रैली आयोजित करने के फैसले की कड़ी आलोचना की है। पार्टी का कहना है कि 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी के दिन राजनीतिक रैली करना सिख समुदाय की भावनाओं के प्रति असंवेदनशीलता दिखाता है।

फ्रांस से पुर्तगाल तक विरोध की आग, आवास संकट-पेंशन कटौती के खिलाफ भड़के लोग

 नई दिल्ली  यूरोप के कई देशों में वीकेंड पर महंगाई, आवास संकट, पेंशन कटौती, शिक्षा व्यवस्था में गिरावट, भ्रष्टाचार और युद्ध के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। शनिवार को फ्रांस, अल्बानिया, इटली, स्पेन और पुर्तगाल में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। कई शहरों में प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ हिंसक झड़पें हुईं, जिसके बाद सरकारों को सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करनी पड़ी और कुछ स्थानों पर सेना तक को तैनात करना पड़ा। फ्रांस में हिंसक झड़प के बाद 1000 के करीब गिरफ्तार फ्रांस में शनिवार को हुए प्रदर्शनों के दौरान भारी तनाव देखा गया। गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज के अनुसार, देशभर में लगभग 1000 लोगों को हिरासत में लिया गया है। सरकार के अनुमान के मुताबिक करीब 4.10 लाख लोगों ने इन रैलियों में हिस्सा लिया, जबकि आयोजकों ने यह संख्या लगभग 8 लाख बताई। पेरिस में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़प के बाद पुलिस ने वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले दागे। उपद्रवियों पर नजर रखने के लिए पुलिस हेलीकॉप्टर भी तैनात किए गए। वामपंथी नेता ज्यां-लुक मेलेंशों ने पुलिस की सख्त कार्रवाई की आलोचना की, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने एक चुनावी रैली में फ्रांस के हालात के लिए वहां की इमिग्रेशन नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। अल्बानिया में सरकार और भ्रष्टाचार के खिलाफ गुस्सा अल्बानिया की राजधानी तिराना समेत कई शहरों में छात्रों के नेतृत्व में जोरदार प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारी भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और खराब शिक्षा व्यवस्था को लेकर आक्रोशित थे। उन्होंने ट्यूशन फीस कम करने और शिक्षा बजट बढ़ाने की मांग के साथ-साथ प्रधानमंत्री एडी रामा के इस्तीफे की भी मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कृषि मंत्रालय के प्रवेश द्वार पर आग लगा दी, सरकारी इमारतों और बैंकों को निशाना बनाया तथा पुलिस पर पत्थर और पटाखे फेंके। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए दंगा रोधी पुलिस ने आंसू गैस, वॉटर कैनन और रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया। इटली में सेना के 500 अतिरिक्त जवान तैनात इटली के मिलान, रोम, ट्यूरिन, नेपल्स और फ्लोरेंस जैसे शहरों में युवाओं ने कई सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर मार्च निकाला। पुलिस ने आठ शहरों से 9 लोगों को गिरफ्तार किया और 371 लोगों को अस्थायी तौर पर हिरासत में लिया, जिनमें 110 नाबालिग शामिल थे। रोम में प्रदर्शनकारियों के एक छोटे समूह ने ऐतिहासिक कोलोसियम में जबरन घुसने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक दिया। हिंसा की आशंका को देखते हुए मिलान के फैशन हब में दुकानों ने खिड़कियों पर सुरक्षा बोर्ड लगा दिए थे। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने मिलान में 500 अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की घोषणा की और कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए, लेकिन नागरिकों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। स्पेन में पेंशन और आवास संकट को लेकर प्रदर्शन स्पेन की राजधानी मैड्रिड में हजारों पेंशनभोगियों और आम नागरिकों ने सार्वजनिक पेंशन प्रणाली की सुरक्षा और महंगाई के अनुसार पेंशन बढ़ाने की मांग को लेकर मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने न्यूनतम पेंशन को न्यूनतम वेतन के बराबर करने, महिला-पुरुष पेंशन अंतर को खत्म करने और पेंशन के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग उठाई। यह प्रदर्शन अगले महीने होने वाले मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले हुआ है। इसके साथ ही, स्पेन में बढ़ते किराये और घरों की बढ़ती कीमतों ने भी जनता के बीच भारी असंतोष पैदा कर दिया है। पुर्तगाल में महंगे मकानों के खिलाफ टेंट लगाकर विरोध पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में हजारों लोगों ने हाउसिंग क्राइसिस और बढ़ती महंगाई के खिलाफ मार्च किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि युवाओं के लिए घर खरीदना या किराए पर लेना नामुमकिन होता जा रहा है। मार्च के बाद प्रदर्शनकारियों ने रॉसियो स्क्वायर में 100 से अधिक टेंट लगाकर डेरा डाल दिया, जिसे पुलिस ने रविवार तड़के बलपूर्वक हटा दिया। प्रदर्शनकारियों ने उस नए कानून को वापस लेने की मांग की जिससे किरायेदारों को बेदखल करना आसान हो जाएगा और नए पट्टों पर किराया सीमा हट जाएगी। गौरतलब है कि पुर्तगाल में 2017 के बाद से घरों की कीमतें दोगुनी से ज्यादा हो चुकी हैं और बैंक ऑफ पुर्तगाल के अनुसार देश में करीब 3 लाख घरों की भारी कमी है।

Driving Licence Rules: अब आसानी से नहीं बनेगा DL, नए नियमों में कई बड़े बदलाव

 नई दिल्ली Driving Licence New Rules: ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने या उसमें नाम-पता बदलवाने के लिए लोगों को अक्सर कागजी कार्रवाई और लंबे प्रोसेस से गुजरना पड़ता है. लेकिन आने वाले दिनों में इन नियमों में बड़ा बदलाव हो सकता है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े नियमों में कई अहम बदलावों का प्रस्ताव रखा है।  इसके तहत भारतीय और विदेशी नागरिकों के ड्राइविंग लाइसेंस के फॉर्मेट और कलर अलग-अलग हो सकते हैं. साथ ही, लाइसेंस पर ब्लड ग्रुप, मोबाइल नंबर और इमरजेंसी कॉन्टैक्ट की जानकारी देना भी जरूरी हो सकता है. मंत्रालय ने लाइसेंस में नाम और पता बदलने के प्रोसेसे को आसान बनाने के साथ सेफ ड्राइविंग असेसमेंट के नियम सख्त करने का भी प्रस्ताव दिया है।  दरअसल, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों (Central Motor Vehicles Rules) में बदलाव के लिए ड्राफ्ट जारी किया है. प्रस्ताव के मुताबिक, लाइसेंस जारी करने या रिन्यू कराने पर इसे लैमिनेटेड कार्ड या पॉलीविनाइल क्लोराइड (PVC) कार्ड के रूप में दिया जाएगा. इसके लिए फॉर्म 7 का इस्तेमाल होगा. खास बात यह है कि भारतीय और विदेशी नागरिकों के ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अलग-अलग फॉर्मेट तय किए जा सकते हैं. इनके रंग भी अलग हो सकते हैं, जिससे दोनों तरह के लाइसेंस की पहचान करना आसान होगा।  प्रस्तावित नियमों के तहत ड्राइविंग लाइसेंस पर कुछ एक्स्ट्रा इंफॉर्मेशन देना भी अनिवार्य हो सकता है. इनमें लाइसेंस होल्डर का ब्लड ग्रुप, मोबाइल नंबर और इमरजेंसी कॉन्टैक्ट नंबर शामिल हैं. इन जानकारियों से जरूरत पड़ने पर संबंधित व्यक्ति या उसके परिवार से संपर्क करने में मदद मिल सकती है. मंत्रालय ने पहचान, उम्र और पते के सर्टिफकेट के तौर पर स्वीकार किए जाने वाले डॉक्यूमेंट की भी लिस्ट दी है।  मंत्रालय ने उम्र और पते के प्रमाण से जुड़े नियमों में भी बदलाव का प्रस्ताव दिया है. इसके तहत एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट या नोटरी के सामने शपथ लेकर बनवाए जाने वाले हलफनामे की अनिवार्यता खत्म करने का प्रस्ताव है. साथ ही, कुछ मामलों में हलफनामे और लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी को उम्र और पते के प्रमाण के रूप में स्वीकार करने की बात कही गई है. इसका उद्देश्य डॉक्यूमेंट के गलत इस्तेमाल को रोकना और एक्लीकेशन प्रोसेसे को आसान बनाना है।  एड्रेस प्रूफ के लिए इनमें से कोई एक डॉक्यूमेंट जरूरी प्रस्तावित नियमों में आधार कार्ड, पासपोर्ट, वोटर आईडी कार्ड, ई-राशन कार्ड, केंद्र और राज्य या किसी भी पब्लिक सेक्टर के उपक्रम द्वारा जारी किया गया सर्विस आईडी कार्ड, पेंशन भोगी फोटो पहचान पत्र, स्वतंत्रता सेनानी पहचान पत्र, 3 महीने पुराना बिजली का बिल या गैस कनेक्शन बिल, और जन्म प्रमाण पत्र जैसे डॉक्यूमेंट को पहचान, उम्र और निवास के प्रमाण के तौर पर शामिल किया गया है।  सेफ ड्राइविंग असेसमेंट में 75% अंक जरूरी ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी ऑनलाइन प्रक्रिया में सेफ ड्राइविंग ट्यूटोरियल असेसमेंट के नियम भी सख्त किए जा सकते हैं. फिलहाल इस असेसमेंट में पास होने के लिए 60 फीसदी अंक हासिल करना जरूरी है. मंत्रालय ने इसे बढ़ाकर 75 फीसदी करने का प्रस्ताव दिया है. इसके अलावा, सेफ ड्राइविंग ट्यूटोरियल कम से कम 30 मिनट का होना जरूरी होगा. इससे आवेदकों को रोड सेफ्टी और सेफ ड्राइविंग से जुड़े नियमों की बेहतर जानकारी देने की कोशिश की जाएगी।    15 दिन में बदलेगा नाम और पता ड्राफ्ट नियमों में ड्राइविंग लाइसेंस पर दिए जाने वाले पर्सनल इंफॉर्मेशन डिटेल्स में बदलाव को लेकर भी अहम प्रस्ताव रखा गया है. इसके मुताबिक, लाइसेंसिंग अथॉरिटी को नाम और पता बदलने जैसे आवेदनों पर 15 दिन के भीतर फैसला लेना होगा. अथॉरिटी को आवेदन स्वीकार करना होगा या उसे खारिज करना होगा. यदि आवेदन खारिज किया जाता है, तो इसके पीछे की वजह भी बतानी होगी।  इसके अलावा, मंत्रालय ने नाम और पते सहित व्यक्तिगत जानकारी में बदलाव के लिए लगने वाली फीस खत्म करने का प्रस्ताव भी रखा है. अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो लाइसेंस धारकों को अपनी जानकारी अपडेट कराने में समय और पैसे, दोनों की बचत हो सकती है।  यहां मिलेगी फीस में छूट मंत्रालय ने कुछ ऑनलाइन ड्राइविंग लाइसेंस सर्विसेज के लिए फीस माफ करने का भी प्रस्ताव रखा है. इसका फायदा उन आवेदकों को मिल सकता है, जो आधार ऑथेंटिकेशन के जरिए प्रोसेस पूरा करेंगे. हालांकि, यह छूट किन-किन सर्विसेज पर लागू होगी, इसका फैसला अंतिम नियमों के आधार पर होगा।  मंत्रालय ने इन बदलावों को लेकर संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं. ड्राफ्ट नोटिफिकेशन प्रकाशित होने के 30 दिनों के भीतर लोग और अन्य संबंधित पक्ष अपनी राय मंत्रालय को भेज सकेंगे. फिलहाल ये बदलाव प्रस्तावित हैं. इन्हें अंतिम रूप दिए जाने और लागू होने के बाद ही नए नियमों के तहत ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी प्रक्रियाओं में बदलाव होगा। 

करवा चौथ पर पति की लंबी उम्र के लिए क्यों रखा जाता है व्रत? जानें रोहिणी नक्षत्र का धार्मिक महत्व

Chauth 2026 : हिंदू धर्म में करवा चौथ का व्रत सबसे बड़ी और सबसे महत्वपूर्ण चौथ माना गया है, जिसे हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। सालभर में कुल 24 चौथें आती हैं, लेकिन करवा चौथ का विशेष महत्व है। इसी दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। मान्यता है कि इस व्रत को करने से पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और समर्पण बढ़ता है। इस विषय पर हमारी उज्जैन के पंडित एवं ज्योतिषाचार्य मनीष शर्मा से बात हुई। वह कहते हैं, " वर्ष में 24 चौथ पड़ती हैं और हर बार ये अलग-अलग नक्षत्रों में पड़ती हैं। करवा चौथ को सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण चौथ इसलिए माना गया है क्योंकि यह चौथ रोहिणी नक्षत्र में पड़ती है और रोहिणी चंद्र देव की सबसे प्रिय रानी हैं।" इतना ही नहीं, पंडित जी यह भी बताते हैं कि इस बार की करवा चौथ और भी खास है क्योंकि इस बार शुक्र- बुध की युति से लक्ष्‍मीनारायण राजयोग और सूर्य की स्थिति से बुधादित्‍य योग बनेगा, जो रिश्‍तों को गहराई से मजबूत बनाएगा और रिश्‍तों में प्रेम भावना को बढ़ाएगा। चलिए जानते हैं कि आखिर इस पर्व का क्या महत्व है और कैसे इस वर्ष यह और भी ज्यादा खास है। करवा चौथ के दिन क्‍यों रखा जाता है पति की लंबी उम्र के लिए व्रत? पंडित मनीष शर्मा के अनुसार, करवा चौथ पर पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से रखे जाने वाले व्रत का संबंध चंद्रदेव और उनकी पत्नी रोहिणी की पौराणिक कथा से है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, राजा दक्ष की 27 नक्षत्र रूपी पुत्रियों का विवाह चंद्रदेव से हुआ था। इनमें चंद्रमा रोहिणी से सबसे अधिक प्रेम करते थे और अपना ज्यादातर समय उन्हीं के साथ बिताते थे। इससे नाराज होकर अन्य पत्नियों ने राजा दक्ष से शिकायत की। इस पर दक्ष ने चंद्रदेव को क्षय होने का श्राप दे दिया। बाद में भगवान शिव की कृपा से चंद्रमा को राहत मिली और उन्हें दोबारा उनकी कलाएं मिलीं। हिंदू पंचांग के अनुसार, करवा चौथ कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस दिन रोहिणी नक्षत्र का संयोग भी बनता है। धार्मिक मान्यताओं में चंद्रमा को प्रेम, शांति और सुख का प्रतीक माना गया है। इसी आस्था के चलते महिलाएं करवा चौथ पर चंद्रदेव की पूजा कर अपने पति की दीर्घायु, वैवाहिक जीवन में प्रेम और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। यह व्रत पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक होता है। करवा चौथ के दिन लक्ष्‍मीनारायण योग बनने से लाभ लक्ष्मीनारायण योग तब बनता है जब ग्रहों के राजकुमार बुध और धन-वैभव के स्वामी शुक्र एक ही राशि में बैठे होते हैं। इस वर्ष करवा चौथ के दिन यह योग बन रहा है। इस योग के बनने से गृहस्थ जीवन में धन, सुख-सुविधा, करियर में प्रमोशन और रिश्तों के मध्य आकर्षण बनने की संभावना बढ़ जाएगी। सूर्य और बुध की युति से करवाचौथ पर लाभ बुधादित्‍य योग का निर्माण तब होता है, जब कुंडली में एक ही राशि में बुध और सूर्य साथ बैठे होते हैं। इस बार करवा चौथ के दिन सूर्य और बुध की युति बन रही है, जिससे इस दिन किए गए व्रत, पूजन का महत्‍व कई गुना बढ़ जाएगा और महिलाओं को अखंड सौभाग्‍य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी।