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ग्रेटर नोएडा वेस्ट को जाम से मिलेगी राहत, 6 लेन अंडरपास का 3 दिन ट्रायल शुरू

  नोएडा ग्रेटर नोएडा वेस्ट में रहने वाले लोगों के लिए गौर चौक का जाम रोज की परेशानी रहा है. सुबह ऑफिस जाने का समय हो या शाम को घर लौटने की भीड़, इस चौराहे पर गाड़ियों की लंबी कतारें लग जाती हैं. अब इस परेशानी को कम करने के लिए 92 करोड़ रुपये की लागत से बना 6 लेन का अंडरपास खोल दिया गया है।  आज गुरुवार 5 नवंबर से इस अंडरपास पर गाड़ियों की आवाजाही शुरू हो गई है. हालांकि, फिलहाल इसे आम लोगों के लिए ट्रायल के तौर पर खोला गया है. यह ट्रायल 5 से 7 नवंबर तक चलेगा. यानी तीन दिन तक अधिकारी देखेंगे कि अंडरपास से गाड़ियां किस तरह निकल रही हैं और कहीं कोई परेशानी तो नहीं आ रही।  ग्रेटर नोएडा वेस्ट के चार मूर्ति गोलचक्कर को गौर चौक के नाम से भी जाना जाता है. यह इलाका ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के बीच आने-जाने वाले लोगों के लिए अहम रास्ता है. यहां गाड़ियों का दबाव काफी ज्यादा रहता है।  खासकर सुबह और शाम के समय इस चौराहे पर जाम लग जाता है. इसकी वजह से लोगों को कुछ दूरी तय करने में भी काफी वक्त लग जाता है. नए अंडरपास से इसी परेशानी को कम करने की कोशिश की गई है।  700 मीटर लंबा, छह लेन का अंडरपास करीब 700 मीटर लंबे इस अंडरपास को बनाने में लगभग 92 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. इसमें आने-जाने के लिए कुल छह लेन बनाई गई हैं. इसके शुरू होने से ग्रेटर नोएडा से गाजियाबाद और गाजियाबाद से ग्रेटर नोएडा आने-जाने वाले वाहन चालकों को राहत मिलने की उम्मीद है. अधिकारियों के मुताबिक, अंडरपास के चालू होने से गौर चौक पर गाड़ियों का दबाव कम हो सकता है. ग्रेटर नोएडा वेस्ट की करीब पांच लाख आबादी को इस अंडरपास से राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।  अंडरपास को सिर्फ गाड़ियों की आवाजाही के लिहाज से ही तैयार नहीं किया गया है. इसकी दीवारों पर खूबसूरत चित्रकारी की गई है और आकर्षक लाइटें लगाई गई हैं. बारिश के दिनों में पानी भरने की समस्या से निपटने के लिए भी खास इंतजाम किए गए हैं. हालांकि, असली परीक्षा बारिश के दौरान ही होगी, जब यह पता चलेगा कि पानी निकालने की व्यवस्था कितनी कारगर है।  तीन दिन के ट्रायल में क्या देखा जाएगा? ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के जीएम एके सिंह के मुताबिक, फिलहाल अंडरपास को तीन दिन के ट्रायल पर खोला गया है. इस दौरान ट्रैफिक की आवाजाही और निर्माण से जुड़ी व्यवस्थाओं पर नजर रखी जाएगी. अगर ट्रायल के दौरान कोई कमी सामने आती है तो उसे तुरंत ठीक कराया जाएगा. इसके बाद आगे की व्यवस्था तय की जाएगी. अब लोगों की उम्मीद है कि अंडरपास शुरू होने के बाद गौर चौक पर लगने वाले जाम से राहत मिलेगी. हालांकि, इसका असली असर तब पता चलेगा जब रोजाना की तरह बड़ी संख्या में गाड़ियां यहां से गुजरेंगी। 

Medical PG Admission: MD-MS में सीट मिली तो करना होगा ये काम, वरना रद्द होगा एडमिशन

रायपुर  NEET PG Admission 2026: प्रदेश के सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेजों के संचालित एमडी-एमएस कोर्स में आवंटित सीट को स्वीकारने के बाद छात्रों को प्रवेश लेना अनिवार्य है। ऐसा नहीं करने पर छात्र स्वत: ही प्रवेश प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे। यही नहीं वे आगे होने वाली काउंसिलिंग के लिए अपात्र हो जाएंगे। एमबीबीएस काेर्स में निजी कॉलेजों में ये नियम लागू नहीं था। इस बार नीट पीजी के टॉपरों में 6 को मेडिसिन, 3 को रेडियो डायग्नोसिस व एक को स्किन की सीट मिली है। प्रदेश में पीजी की 642 सीटें हैं। इनमें सरकारी कॉलेजों में 378 व निजी कॉलेजों में 264 एमडी-एमएस की सीटें हैं। नीट पीजी क्वालिफाइड छात्रों को प्रवेश नियमों को ध्यान से पढ़ना होगा, नहीं तो उन्हें बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। नियम के अनुसार छात्र असंतुष्ट होने पर आवंटित सीट को अस्वीकार कर सकेगा। ऐसे में उनके पास अगले राउंड में बने रहने के लिए विकल्प बना रहेगा। मेडिकल एक्सपर्ट व पूर्व डीएमई डॉ. विष्णु दत्त व हिमेटोलॉजिस्ट डॉ. विकास गोयल के अनुसार काउंसिलिंग के पहले सभी दस्तावेज होना भी जरूरी है। आवंटन सूची में नाम आने के बाद भी अगर दस्तावेज सही नहीं मिलता है तो छात्र स्वत: ही प्रवेश के लिए अपात्र माना जाएगा। निजी कॉलेजों में प्रवेश के दौरान 8 से 10 लाख निर्धारित ट्यूशन फीस जमा करनी होगी। कॉलेज बदलने पर 10 फीसदी काटकर बाकी फीस वापस करने का नियम है। दिवाली 8 को, एडमिशन 10 तक चलेगा, कर्मियों की परेशानी बढी पीजी की प्रवेश प्रक्रिया सोमवार को शुरू हो गई है, जो 10 नवंबर तक चलेगी। गाैर करने वाली बात ये है कि एडमिशन प्रक्रिया के दौरान ही 8 नवंबर को दिवाली है। इस दिन रविवार है, लेकिन पहले रविवार को भी एडमिशन प्रक्रिया चलती रही है। काउंसिलिंग से जुड़े कर्मचारियों व अधिकारियों का कहना है कि दिवाली जैसे त्योहार में छुट्टी दी जानी चाहिए। 9 नवंबर को कोई त्योहार नहीं है, लेकिन 10 को गोवर्धन पूजा व 11 नवंबर को भाई दूज है। इन कॉलेजों में पीजी की सीटें कॉलेज – कुल – आल इंडिया – स्टेट – एनआरआई रायपुर – 146 – 74 – 92 – 00 बिलासपुर – 91 – 43 – 48 – 00 राजनांदगांव – 18 – 09 – 09 – 00 जगदलपुर – 28 – 15 – 13 – 00 रायगढ़ – 42 – 21 – 21 – 00 अंबिकापुर – 40 – 20 – 20 – 00 कोरबा – 13 – 07 – 06 – 00 रिम्स – 63 – 54 – 00 – 09 बालाजी – 100 – 85 – 00 – 15 शंकराचार्य – 101 – 86 – 00 – 15 कुल – 642

‘ख्वाबों का हमसफर मिला…’ मनीष कश्यप ने किया प्यार का इजहार, कौन हैं अनुष्का?

 पटना 'हमसफर का साथ मिला है, अब जिंदगी का हर सफर खूबसूरत होगा. एक नई शुरुआत, नए सपनों के साथ…' बिहार के चर्चित यूट्यूबर मनीष कश्यप की निजी जिंदगी को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हैं. इस बार वजह कोई चुनावी बयान या सोशल मीडिया पर उनका वीडियो नहीं, बल्कि एक फोटो है. मनीष और अनुष्का दोनों ने अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की हैं. दोनों ने ही रोमांटिक अंदाज में कैप्शन भी लिखा है।  अनुष्का ने  यह तस्वीर साझा करते हुए लिखा है कि ख्वाबों में देखा था जिस खूबसूरत एहसास को… आज उस हमसफर के साथ एक नई कहानी दुनिया के सामने है. वहीं मनीष कश्यप ने लिखा है कि    'हमसफर का साथ मिला है, अब जिंदगी का हर सफर खूबसूरत होगा. एक नई शुरुआत, नए सपनों के साथ! इसके साथ उन्होंने अनुष्का और मनीष के नाम को दिल के निशान के साथ लिखा है. तस्वीर में दोनों ब्लैक शर्ट और ब्लू जींस में नजर आ रहे हैं. दोनों के जूते भी एक जैसे दिखाई दे रहे हैं।  रियलिटी शो में किया था 21 साल की गर्लफ्रेंड का जिक्र मनीष कश्यप की लव लाइफ की चर्चा अचानक शुरू नहीं हुई है. इससे पहले रियलिटी शो 'राइज एंड फॉल' के दौरान उन्होंने अपनी निजी जिंदगी को लेकर एक खुलासा किया था. शो में मनीष ने बताया था कि उनकी एक गर्लफ्रेंड है. हालांकि, उस वक्त उन्होंने उसका नाम सार्वजनिक नहीं किया था. अब अनुष्का के साथ सामने आई तस्वीर और उनके कैप्शन के बाद सोशल मीडिया पर लोग दोनों को उस पुराने खुलासे से जोड़कर देख रहे हैं।   कौन हैं अनुष्का, जिनके साथ आई तस्वीर अनुष्का शर्मा बिहार के औरंगाबाद जिले के दाउदनगर इलाके की रहने वाली हैं. उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है. पढ़ाई के साथ वह छात्र राजनीति में भी सक्रिय रही हैं. अनुष्का पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की ओर से अध्यक्ष पद की उम्मीदवार भी रह चुकी हैं।   इंजीनियरिंग छोड़कर यूट्यूब से बनाई पहचान मनीष कश्यप का असली नाम त्रिपुरारी कुमार तिवारी है. वह पश्चिम चंपारण जिले के रहने वाले हैं. उन्होंने पुणे की सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. लेकिन इंजीनियरिंग में करियर बनाने के बजाय उन्होंने यूट्यूब और सोशल मीडिया की दुनिया में अपनी पहचान बनाने का रास्ता चुना. उनका 'सच टॉक' नाम का यूट्यूब चैनल काफी लोकप्रिय हुआ. बिहार से जुड़े मुद्दों और अपने अलग अंदाज में रिपोर्टिंग के चलते वह सोशल मीडिया पर चर्चित चेहरा बन गए. धीरे-धीरे उनकी पहचान सिर्फ एक यूट्यूबर तक सीमित नहीं रही और उन्होंने राजनीति में भी कदम रखा।  बीजेपी से जन सुराज तक पहुंचा राजनीतिक सफर मनीष कश्यप का राजनीतिक सफर भी उतार-चढ़ाव भरा रहा है. अप्रैल 2024 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्यता ली थी. बाद में उन्होंने बीजेपी छोड़कर प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी का दामन थाम लिया. 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने पश्चिम चंपारण की चनपटिया विधानसभा सीट से जन सुराज के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें जीत नहीं मिली. चुनावी मैदान में हार के बाद अब उनकी निजी जिंदगी से जुड़ी यह तस्वीर चर्चा में है. फिलहाल, अनुष्का की पोस्ट और उसके कैप्शन ने मनीष कश्यप की लव लाइफ को फिर सुर्खियों में ला दिया है. जिस गर्लफ्रेंड का जिक्र उन्होंने रियलिटी शो में किया था, क्या यह तस्वीर उसी रिश्ते की ओर इशारा करती है। 

मध्य प्रदेश के लाखों ग्रामीणों को बड़ी सौगात, मकान के कागजों से बैंक से ले सकेंगे कर्ज

भोपाल  मध्य प्रदेश में स्वामित्व योजना ग्रामीण परिवारों को उनकी आवासीय संपत्ति का कानूनी अधिकार दिलाने का माध्यम बन रही है। प्रदेश के सभी 55 जिलों में योजना के तहत अब तक 15 लाख 98 हजार 46 रजिस्ट्रियां पूरी की जा चुकी हैं। इन दस्तावेजों के जरिए ग्रामीण परिवार अपनी संपत्ति पर मालिकाना हक का प्रमाण प्राप्त कर सकेंगे और बैंक ऋण सहित अन्य वित्तीय सुविधाओं का लाभ लेना उनके लिए आसान होगा। योजना के तहत ग्रामीण आबादी भूमि पर बने पात्र मकानों और भूखंडों का पंजीयन निशुल्क किया जा रहा है। पंजीयन और सत्यापन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए 'सारा' ऐप और 'संपदा 2.0' जैसी डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे संपत्ति के अभिलेख तैयार करने, मौके पर सत्यापन और पंजीयन की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने में मदद मिल रही है। छिंदवाड़ा सबसे आगे, राजगढ़ दूसरे नंबर पर जिलावार आंकड़ों में छिंदवाड़ा 74 हजार 2 रजिस्ट्रियों के साथ पहले स्थान पर है। राजगढ़ में 64 हजार 880, उज्जैन में 62 हजार 244 और सागर में 56 हजार 143 रजिस्ट्रियां पूरी हो चुकी हैं। सिवनी में 55 हजार 910, छतरपुर में 55 हजार 381, जबलपुर में 54 हजार 573, बालाघाट में 53 हजार 228 और शिवपुरी में 51 हजार 855 रजिस्ट्रियां दर्ज की गई हैं। इन जिलों में भी हजारों परिवारों को मिला अधिकार अभिलेख नरसिंहपुर में 49 हजार 896, मंदसौर में 49 हजार 552, रायसेन में 45 हजार 333, धार में 45 हजार 311, विदिशा में 44 हजार 25 और बैतूल में 42 हजार 743 रजिस्ट्रियां पूरी हुई हैं। नीमच, सीहोर, खंडवा, खरगोन, कटनी, शाजापुर, देवास और नर्मदापुरम में भी हजारों ग्रामीण परिवारों का पंजीयन किया जा चुका है। छोटे जिलों में भी जारी है पंजीयन पांढुर्णा में 9 हजार 416, मैहर में 9 हजार 100, झाबुआ में 8 हजार 629, सीधी में 4 हजार 41 और सिंगरौली में 2 हजार 588 रजिस्ट्रियां पूरी हुई हैं। आलीराजपुर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर और मऊगंज में भी पंजीयन का काम जारी है। ग्रामीणों को क्या होगा फायदा?     आवासीय संपत्ति का वैधानिक अधिकार अभिलेख मिलेगा।     संपत्ति के दस्तावेज के आधार पर बैंक ऋण लेने में सुविधा होगी।     जमीन और मकान से जुड़े विवादों को कम करने में मदद मिलेगी।     पंजीयन और सत्यापन की प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से आसान होगी। राजस्व विभाग के अनुसार, प्रदेश के सभी जिलों में स्वामित्व योजना का काम जारी है। शेष पात्र हितग्राहियों को निर्धारित समय-सीमा में अधिकार अभिलेख उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जा रही है।  

धनतेरस पर महाकाल के दरबार में होगी चांदी के सिक्कों की पूजा, दीपोत्सव की खास तैयारी

उज्जैन  पांच दिवसीय दीपावली पर्व की शुरुआत सबसे पहले भगवान महाकाल के आंगन से होगी। शुक्रवार को धनतेरस पर महाकालेश्वर मंदिर में परंपरानुसार विशेष पूजन-अभिषेक किया जाएगा। पुजारी-पुरोहित भगवान महाकाल के साथ धन कुबेर और चांदी के सिक्कों का पूजन करेंगे। बाबा महाकाल को चांदी का सिक्का अर्पित किया जाएगा। सुबह भस्म आरती में विशेष पूजन के बाद पुजारी गर्भगृह में फुलझड़ी जलाकर दीपावली पर्व का शुभारंभ करेंगे। मंदिर के नंदी हाल में सुबह करीब नो बजे पुरोहित समिति द्वारा महापूजा की जाएगी। लगभग एक घंटे चलने वाले इस आयोजन में वैभव, आरोग्य और सुख-समृद्धि की कामना से गणपति व महालक्ष्मी पूजन के बाद भगवान महाकाल का पंचामृत और रुद्राभिषेक होगा। पुरोहित समिति के सदस्य लोकेश व्यास के अनुसार पूजन जनकल्याण और विश्व कल्याण की कामना से किया जाता है। इसमें कलेक्टर रोशन सिंह, एसपी प्रदीप शर्मा सहित करीब दो दर्जन पुजारी-पुरोहित शामिल होंगे। रूप चौदस पर उबटन, अमावस्या पर अन्नकूट आठ नवंबर को रूप चौदस पर तड़के भस्म आरती में विशेष पूजन होगा। दीपावली पर पुजारी परिवार की महिलाएं भगवान महाकाल को उबटन लगाएंगी। बाबा का विशेष श्रृंगार कर गर्भगृह में अन्नकूट का भोग लगाया जाएगा। शाम को कोटितीर्थ कुंड में दीपमालाएं सजाई जाएंगी। धनतेरस से दीपावली तक मंदिर में परंपरागत धार्मिक आयोजन होंगे। पुजारी-पुरोहित भगवान महाकाल के साथ धन कुबेर और चांदी के सिक्कों का पूजन करेंगे। बाबा महाकाल को चांदी का सिक्का अर्पित किया जाएगा।सुबह भस्म आरती में विशेष पूजन के बाद पुजारी गर्भगृह में फुलझड़ी जलाकर दीपावली पर्व का शुभारंभ करेंगे। मंदिर के नंदी हॉल में सुबह करीब नौ बजे पुरोहित समिति द्वारा महापूजा की जाएगी। लगभग एक घंटे चलने वाले इस आयोजन में वैभव, आरोग्य और सुख-समृद्धि की कामना से गणपति व महालक्ष्मी पूजन के बाद भगवान महाकाल का पंचामृत और रुद्राभिषेक होगा। पुरोहित समिति के सदस्य लोकेश व्यास के अनुसार पूजन जनकल्याण और विश्व कल्याण की कामना से किया जाता है। इसमें कलेक्टर रोशन सिंह, एसपी प्रदीप शर्मा सहित करीब दो दर्जन पुजारी-पुरोहित शामिल होंगे। आठ नवंबर को रूप चौदस पर तड़के भस्म आरती में विशेष पूजन होगा। दीपावली पर पुजारी परिवार की महिलाएं भगवान महाकाल को उबटन लगाएंगी।बाबा का विशेष श्रृंगार कर गर्भगृह में अन्नकूट का भोग लगाया जाएगा। शाम को कोटितीर्थ कुंड में दीपमालाएं सजाई जाएंगी।धनतेरस से दीपावली तक मंदिर में परंपरागत धार्मिक आयोजन होंगे। नंदी हॉल में एक घंटे चलेगी महापूजा मंदिर के नंदी हॉल में पुरोहित समिति के पुजारी सुबह करीब 9 बजे वैभव, आरोग्य और सुख-समृद्धि की कामना के साथ महापूजा शुरू करेंगे। करीब एक घंटे तक चलने वाली इस पूजा में गणपति पूजन और महालक्ष्मी पूजन के बाद भगवान महाकाल का पंचामृत और रुद्राभिषेक किया जाएगा। पुरोहित समिति के सदस्य लोकेश व्यास ने बताया कि पूजन जनकल्याण और विश्व कल्याण की कामना से किया जाता है। इसमें उज्जैन कलेक्टर रोशन सिंह, एसपी प्रदीप शर्मा सहित करीब दो दर्जन पंडे-पुजारी शामिल होंगे। रूप चौदस पर उबटन, अमावस्या पर अन्नकूट का भोग पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि 8 नवंबर को तड़के भस्म आरती के दौरान रूप चौदस का पूजन होगा। इसके बाद अमावस्या लगने पर मंदिर में दीपावली पर्व मनाया जाएगा। इस दिन पुजारी परिवार की महिलाएं भगवान महाकाल को उबटन लगाएंगी। बाबा का विशेष श्रृंगार किया जाएगा और गर्भगृह में अन्नकूट का भोग लगाया जाएगा। शाम को कोटितीर्थ कुंड में दीपमालाएं सजाई जाएंगी। इस तरह महाकाल मंदिर में धनतेरस से दीपावली तक परंपरागत धार्मिक आयोजन होंगे। धनतेरस से शुरू होगा पांच दिवसीय उत्सव महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि दीपावली का पर्व मंदिर में पांच दिनों तक धार्मिक उल्लास के साथ मनाया जाता है. इसकी शुरुआत धनतेरस से होती है. पर्व को देखते हुए मंदिर में साफ-सफाई के साथ रंग-रोगन और सजावट का काम भी कराया जा रहा है. मंदिर परिसर को आकर्षक विद्युत रोशनी से सजाया जाएगा. रंग-बिरंगी लाइटों से सजा मंदिर रात के समय विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा।  श्रद्धालुओं को दिखेगा बदला हुआ स्वरूप महाकाल मंदिर में बड़े पर्वों से पहले गर्भगृह की विशेष सफाई और चांदी के हिस्सों की चमक बढ़ाने की परंपरा रही है. शिवरात्रि और श्रावण मास के दौरान भी इसी तरह विशेष तैयारियां की जाती हैं. अब दीपावली के अवसर पर भी बाबा महाकाल के दरबार को सजाने-संवारने का काम किया जा रहा है. मंदिर में आने वाले श्रद्धालु जहां चांदी की चमक से दमकते गर्भगृह में बाबा के दर्शन करेंगे, वहीं रोशनी से जगमगाता मंदिर परिसर दीपोत्सव के आध्यात्मिक और उत्सवी माहौल को और खास बनाएगा। 

Diwali 2026: लक्ष्मी पूजन में चावल की जगह क्यों चढ़ाई जाती है खील, गणेश जी के आगे क्यों जलता है सरसों का दीपक?

Diwali 2026: हर साल कार्तिक अमावस्या की रात दीपावली का त्योहार मनाया जाता है. इस साल दीपावली का त्योहार 8 नवंबर दिन रविवार को मनाया जाएगा. इस दिन भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की संयुक्त पूजा की जाती है. उन्हें खील का भोग लगाया जाता है. खील यानि खिली हुई धान. सभी पूजा-पाठ में देव पूजन के लिए सामान्यतः रोली के साथ चावल का उपयोग किया जाता है. लेकिन दीपावली एकमात्र ऐसा त्योहार है. जब लक्ष्मी-गणेश जी के पूजन के लिए खील-बताशे का प्रयोग होता है. जबकि भगवान गणेश के सामने सरसों के तेल का दीपक भी विशेष रूप से जलाया जाता है. दीपावली पर लोग घर में सुख-समृद्धि और धन-वैभव की कामना के साथ लक्ष्मी पूजन करते हैं. खिली हुई धान यानि खील घर में सुख-समृद्धि और सम्पन्नता का प्रतीक है और बताशे घर के सभी सदस्यों के बीच मिठास बढ़ाने का काम करते हैं. घर में हमेशा इसी तरह धनधान्य बना रहे, मिठास बिखरी रहे, इसी कामना के लिए दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश जी के पूजन के लिए चावल के स्थान पर खील का प्रयोग किया जाता है. गणपति के आगे सरसों के तेल का दीपक दीपावली पर मां लक्ष्मी के समक्ष शुद्ध घी और गणपति के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाने की प्रथा है. मां लक्ष्मी के बाईं तरफ विराजमान गणपति के सामने सरसों के तेल का दीपक प्रज्ज्वलित किया जाता है. पूजन के बाद उसी दीपक की लौ से एक कच्चे मिट्टी के दीपक से काजल बनाया जाता है. इसे घर के सभी सदस्य अगले दिन सुबह उठकर अपनी आंखों में लगाते हैं. मान्यता है कि इस काजल को परिवार के सदस्यों को लगाने से बुरी नजर का प्रभाव दूर रहता है और घर-परिवार पर गणेश जी की कृपा बनी रहती है. देव पूजन में प्रज्वलित दीपक से प्राप्त काजल शुभता का प्रतीक होता है और इसे लगाने से बुरी नजर से बचाव होता है. बच्चों को विशेष रूप से काजल लगाने की परंपरा भी कई क्षेत्रों में प्रचलित रही है. सरसों के तेल का दीपक और विघ्नहर्ता गणेश भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और बुद्धि-विवेक का देवता माना जाता है. दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के साथ गणेश पूजन का विधान है. लक्ष्मी जी धन, वैभव और ऐश्वर्य प्रदान करती हैं, वहीं गणेश जी उस धन के सदुपयोग के लिए बुद्धि और विवेक देते हैं. ऐसे में गणेश जी के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाना जीवन की बाधाओं को दूर करने और परिवार में सुख-शांति बनाए रखने की कामना का प्रतीक माना जाता है.

Diwali 2026: छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली एक ही दिन, जानें नरक चतुर्दशी की पूजा का समय

 Diwali 2026: दिवाली से पहले मनाए जाने वाले छोटी दिवाली के त्योहार की तारीख को लेकर इस बार लोगों के बीच असमंजस है.  कोई 7 नवंबर तो कोई 8 नवंबर को छोटी दिवाली बता रहा है.  इसकी वजह कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का दो दिनों तक रहना है.  ऐसे में सवाल है कि आखिर नरक चतुर्दशी का व्रत और पर्व किस दिन मनाया जाएगा? आइए जानते हैं छोटी दिवाली 2026 की सही तारीख, अभ्यंग स्नान का मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व. छोटी दिवाली 2026 कब है? हिंदू पंचांग के अनुसार, छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी, नरक चौदस और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है.  यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है. साल 2026 में चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर, शनिवार को सुबह 10 बजकर 47 मिनट से शुरू होगी और 8 नवंबर, रविवार को सुबह 11 बजकर 27 मिनट तक रहेगी.  उदया तिथि और अभ्यंग स्नान की परंपरा के आधार पर छोटी दिवाली 8 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी.  खास बात यह है कि इस बार छोटी दिवाली और मुख्य दिवाली दोनों एक ही दिन पड़ रही हैं.   छोटी दिवाली 2026 पूजा और अभ्यंग स्नान का मुहूर्त दिल्ली के पंचांग के अनुसार, छोटी दिवाली पर अभ्यंग स्नान का शुभ समय सुबह सूर्योदय से पहले रहेगा.  इस दिन तिल के तेल से शरीर पर मालिश करके स्नान करने की परंपरा है. – नरक चतुर्दशी की तारीख: 8 नवंबर 2026, रविवार – चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 7 नवंबर, सुबह 10:47 बजे – चतुर्दशी तिथि समाप्त: 8 नवंबर, सुबह 11:27 बजे – अभ्यंग स्नान मुहूर्त: सुबह 5:41 से 6:38 बजे तक नोट: ये मुहूर्त नई दिल्ली के लिए हैं.  दूसरे शहरों में सूर्योदय के अंतर के कारण समय में बदलाव हो सकता है.   छोटी दिवाली पर क्यों किया जाता है अभ्यंग स्नान? छोटी दिवाली के दिन अभ्यंग स्नान का विशेष महत्व माना जाता है.  धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सूर्योदय से पहले शरीर पर तिल का तेल लगाकर स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति को नरक की यातनाओं से बचने का आशीर्वाद मिलता है. इसे रूप चौदस भी कहा जाता है.  मान्यता है कि इस दिन उबटन लगाकर स्नान करने से सौंदर्य और आरोग्य की प्राप्ति होती है.  कई जगहों पर लोग स्नान के बाद नए कपड़े पहनते हैं और घर में दीपक जलाते हैं. छोटी दिवाली पर किसकी पूजा होती है? नरक चतुर्दशी पर भगवान श्रीकृष्ण और यमराज की पूजा का विशेष महत्व है.  कुछ क्षेत्रों में माता काली और हनुमान जी की भी पूजा की जाती है.  इस दिन शाम को घर के बाहर और मुख्य द्वार पर दीपक जलाए जाते हैं.  यमराज के निमित्त दीपदान करने की भी परंपरा है. धार्मिक मान्यता है कि छोटी दिवाली पर दीपदान करने से परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है. छोटी दिवाली की पूजा विधि 1. छोटी दिवाली के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान की तैयारी करें. 2. स्नान से पहले शरीर पर तिल का तेल लगाएं और उबटन का इस्तेमाल करें. 3. स्नान के बाद साफ कपड़े पहनकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करें. 4. पूजा में फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें. 5. शाम को घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं. 6. यमराज के निमित्त दक्षिण दिशा में दीपदान करने की परंपरा भी निभाएं. छोटी दिवाली की पौराणिक कथा पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नरकासुर नाम का एक शक्तिशाली असुर था.  उसने अपनी ताकत के बल पर देवताओं और ऋषि-मुनियों को परेशान करना शुरू कर दिया था.  उसने देवमाता अदिति के कुंडल छीन लिए थे और 16 हजार महिलाओं को बंदी बनाकर रखा था. नरकासुर के अत्याचारों से परेशान होकर देवताओं ने भगवान श्रीकृष्ण से मदद मांगी.  इसके बाद भगवान कृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ युद्ध करके नरकासुर का वध किया और उसकी कैद से महिलाओं को मुक्त कराया. मान्यता है कि नरकासुर के अंत के बाद लोगों ने दीप जलाकर खुशी मनाई थी.  तभी से कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी और छोटी दिवाली के रूप में मनाने की परंपरा शुरू हुई.  यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है. 7 नवंबर को क्यों है छोटी दिवाली को लेकर कन्फ्यूजन? इस साल चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर की सुबह शुरू होकर 8 नवंबर की सुबह तक रहेगी.  वहीं, काली चौदस की निशीथ काल में की जाने वाली पूजा 7 नवंबर की रात को पड़ रही है.  दूसरी ओर, नरक चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान 8 नवंबर की सुबह किया जाएगा. इसी वजह से अलग-अलग परंपराओं और पूजा के समय के कारण 7 और 8 नवंबर को लेकर भ्रम की स्थिति बन रही है.  पंचांग के अनुसार, छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी 8 नवंबर को मनाई जाएगी

ट्रंप की हार के पीछे भारतीय वोटरों का कितना असर? मुनीर और वीजा मुद्दे भी चर्चा में

वाशिंगटन  करीब दो साल पहले जब अमेरिका में चुनाव होने वाले थे, तो रिपब्लिकन पार्टी की तरफ भारतीय-अमेरिकी वोटर्स ज्यादा आकर्षित दिख रहे थे. भारत के प्रति ट्रंप का झुकाव इसकी बड़ी वजह था, लेकिन दूसरे कार्यकाल में जिस तरह से ट्रंप ने खुद को पाकिस्तान से जोड़ लिया और गाहे-बगाहे भारत के विरोध में बयानबाजी करने लगे, उसने इस पूरे सीन को पलट दिया. मध्यावधि चुनाव आते-आते प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप का भारत विरोधी रुख असंतोष और आखिरकार उनके खिलाफ वोटों में तब्दील हो गया।  इस बदलाव के पीछे MAGA आंदोलन से जुड़े कुछ समर्थकों की भारत विरोधी बयानबाजी को एक अहम वजह माना जा रहा है. MAGA यानी ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ ट्रंप का राजनीतिक आंदोलन है. इसके कुछ समर्थकों की ओर से भारतीय प्रवासियों को निशाना बनाने वाली टिप्पणियों और भारत को लेकर नकारात्मक रुख ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय में नाराजगी पैदा की है. कहीं भी भारत को लेकर ट्रंप का रुख सकारात्मक नहीं था, खासतौर पर ऑपरेशन सिंदूर के बाद तो ट्रंप इसे खुलकर जाहिर कर रहे थे।  भारतीय-अमेरिकी समुदाय की नाराजगी का एक उदाहरण टेक्सस में देखने को मिला. यहां रिपब्लिकन पार्टी के एक उम्मीदवार बो फ्रेंच ने यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास के दक्षिण एशियाई मूल के छात्रों की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करते हुए उनकी मौजूदगी पर टिप्पणी की थी. इस पोस्ट के बाद अमेरिका में भारतीयों की पहचान, प्रवासियों के अधिकार और समाज में उनकी जगह को लेकर बहस शुरू हो गई. MAGA समर्थकों की ओर से भारतीय प्रवासियों को लेकर की गई ऐसी टिप्पणियों ने समुदाय के एक हिस्से को यह सोचने पर मजबूर किया कि क्या रिपब्लिकन पार्टी उनके हितों का सही प्रतिनिधित्व कर रही है. ये भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं के अपना मन बदलने के लिए पीछे वजह हो सकती है।  कार्नेगी एंडोमेंट और रिसर्च फर्म YouGov के अक्टूबर 2026 के सर्वे में भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं का रुझान साफ दिखाई दिया. 1000 भारतीय-अमेरिकी वयस्कों पर किए गए इस सर्वे में 62 प्रतिशत नागरिकों ने कांग्रेस चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को वोट देने की इच्छा जताई, जबकि सिर्फ 19 प्रतिशत ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों का समर्थन किया. 12 प्रतिशत मतदाता असमंजस में थे. साल 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में 62 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकियों ने कमला हैरिस और 30 प्रतिशत ने डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन किया था यानी उस समय दोनों के बीच 32 प्रतिशत अंकों का अंतर था, जो 2026 के सर्वे में बढ़कर 43 प्रतिशत अंक हो गया. हालांकि दोनों सर्वे अलग-अलग तरह के चुनावों से जुड़े हैं, इसलिए उनकी सीधी तुलना सावधानी से करनी चाहिए।  सर्वे में एक और दिलचस्प बात सामने आई. डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों का समर्थन करने वाले 35 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं ने कहा कि उनका फैसला मुख्य रूप से रिपब्लिकन पार्टी के विरोध में है. वहीं 65 प्रतिशत ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार या पार्टी के समर्थन को अपनी प्राथमिक वजह बताया. इस चुनाव में सुहास सुब्रमण्यम और पिया दांडिया समेत भारतीय मूल के उम्मीदवारों ने भी जीत दर्ज की. कुल मिलाकर नतीजे बताते हैं कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय का वोट किसी एक मुद्दे पर निर्भर नहीं है. भारत विरोधी बयानबाजी, प्रवासियों को लेकर राजनीति, आर्थिक परेशानियां और ट्रंप प्रशासन की नीतियां मिलकर इस बदलाव को प्रभावित करती दिखाई दे रही हैं।