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E20 फ्लाइंग टैक्सी डील: UAE और चीन ने मिलाया हाथ, इलेक्ट्रिक एविएशन में बड़ी छलांग

दुबई  चीन ने इलेक्ट्रिक और हवाई तकनीक में एक बड़ी छलांग लगाई है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने चीन की E20 फ्लाइंग टैक्सियों के लिए 1 अरब डॉलर का सौदा किया है, जिसमें 350 टैक्सियां शामिल हैं. यह अब तक का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेकऑफ एंड लैंडिंग (eVTOL) ऑर्डर है. ये टैक्सियां 5 सीटों वाली हैं, 320 किमी/घंटा की रफ्तार से उड़ सकती हैं. 200 किमी की रेंज रखती हैं. यह सौदा चीन के इलेक्ट्रिक विमानन क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है.  कैसे होगी बुकिंग? लोग मोबाइल ऐप से एयर टैक्सी बुक कर सकेंगे। यह Uber की तरह ही होगा। Joby, Uber का ग्लोबल पार्टनर है। इसलिए मुमकिन है कि लोग एक ही ऐप से टैक्सी बुक कर सकें, उसमें चढ़ सकें और पैसे भी दे सकें। धीरे-धीरे, यह सेवा होटलों और खास जगहों तक भी पहुंच जाएगी। इससे एयरपोर्ट से सीधे अपनी मंजिल तक जाना आसान हो जाएगा। कितना होगा किराया? अभी तक किराये की सही जानकारी नहीं मिली है। लेकिन Conde Nast Traveller के अनुसार Joby का अनुमान है कि एक ट्रिप का किराया लगभग 75 डॉलर (करीब 6464 रुपये) होगा। यह उबर ब्लैक की महंगी राइड जैसा होगा। टैक्सी के अंदर कांच की दीवारें और छत तक विंडशील्ड होगी। इससे उड़ान के दौरान दुबई शहर का शानदार नजारा देखने को मिलेगा। कितने यात्री बैठ सकेंगे? जॉबी का कहना है कि एयर टैक्सी की सैकड़ों टेस्ट उड़ानें हो चुकी हैं। ये उड़ानें 60,000 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तक हुई हैं। सभी विमानों को लाइसेंस वाले पायलट उड़ाएंगे। कंपनी का कहना है कि लोगों के लिए शुरू करने से पहले सुरक्षा के सभी जरूरी इंतजाम किए जाएंगे। हर एयर टैक्सी में एक पायलट और चार यात्री बैठ सकेंगे। इसकी टॉप स्पीड 320 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। E20 फ्लाइंग टैक्सी क्या है? E20 एक आधुनिक इलेक्ट्रिक विमान है, जो वर्टिकल टेकऑफ कर सकता है. बिना रनवे के उतर सकता है. इसे शंघाई की TCab टेक्नोलॉजी कंपनी ने बनाया है. इसकी खासियतें हैं…     सीटें: 5 लोग (1 पायलट और 4 यात्री).     रफ्तार: अधिकतम 320 किमी/घंटा.     रेंज: 200 किमी तक उड़ान.     वजन: हल्का और पर्यावरण के लिए सुरक्षित.     डिजाइन: टिल्ट-रोटर तकनीक, जो इसे हेलिकॉप्टर और हवाई जहाज का मिश्रण बनाती है. यह टैक्सी शोर कम करती है. प्रदूषण भी कम करती है, जो इसे शहरों के लिए आदर्श बनाता है. यूएई और चीन का सौदा यह सौदा पिछले साल चीन इंटरनेशनल इम्पोर्ट एक्सपो में शुरू हुई साझेदारी का नतीजा है. यूएई की कंपनी ऑटोक्राफ्ट ने TCab टेक्नोलॉजी के साथ 350 E20 टैक्सियों के लिए करार किया. पहली डिलीवरी तभी होगी, जब चीन की सिविल एविएशन अथॉरिटी (CAAC) से एयरवर्थीनेस सर्टिफिकेट मिलेगा. यह सौदा मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में कम ऊंचाई वाले पर्यटन और शहरी हवाई गतिशीलता के लिए होगा. चीन के लिए यह क्यों खास है? चीन ने अपने ‘लो-ऑल्टिट्यूड इकोनॉमी’ प्रोग्राम के तहत इस तकनीक को बढ़ावा दिया है. सरकार का लक्ष्य 2030 तक 1 लाख ड्रोन और eVTOL विमान हवा में लाना है. E20 का सौदा दिखाता है कि चीन की तकनीक अंतरराष्ट्रीय बाजार में भरोसा जीत रही है. इसके पीछे चीन की सस्ती एविएशन और बैटरी सप्लाई चेन है, जो इसे यूरोप और अमेरिका से सस्ता बनाती है. यूएई को क्या फायदा? यूएई, जो पर्यटन और आधुनिक तकनीक में आगे है, इस सौदे से कई लाभ लेगा…     पर्यटन: दुबई और अबू धाबी में हवाई पर्यटन को नया रूप मिलेगा.     शहरी यातायात: भीड़भाड़ से बचने के लिए हवाई टैक्सी सेवा शुरू हो सकती है.     आर्थिक विकास: यह सौदा UAE की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा और नई नौकरियां पैदा करेगा. चुनौतियां और भविष्य इस तकनीक को लागू करने में रेगिस्तानी मौसम, नियामक मंजूरी और बुनियादी ढांचे की जरूरतें चुनौती हैं. फिर भी, TCab टेक्नोलॉजी का प्लान अबू धाबी से शुरू कर आसपास के शहरों तक विस्तार करना है. कुछ लोग मानते हैं कि यह सौदा चीन को इलेक्ट्रिक विमानन में विश्व नेता बना सकता है.

उज्जैन: नागचंद्रेश्वर मंदिर में इस बार विशेष दर्शन व्यवस्था, जारी हुई समयसारिणी

उज्जैन उज्जैन में श्रावण मास (shravan month) के पावन अवसर पर आगामी मंगलवार 29 जुलाई को नागपंचमी पर्व के उपलक्ष्य में श्री महाकालेश्वर मंदिर (mahakal mandir) के मुख्य शिखर में विराजमान नागचंद्रेश्वर मंदिर (nagchandreshwar mandir darshan) के पट खुलेंगे। दर्शन का सिलसिला 28 जुलाई की रात 12 बजे शुरु होकर अगले दिन 29 जुलाई की रात 12 बजे खत्म होगा। इस विशेष दिन पर लाखों श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया जा रहा है। वर्ष में केवल एक दिन के लिए दर्शनार्थ खुलने वाले भगवान श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन का सौभाग्य सभी प्राप्त हो, इसके लिए अधिकारियों ने बैठक बुलाई। ये है मंदिर खुलने और बंद होने का समय जिला और मंदिर प्रशासन के अनुसार 28 जुलाई की रात 12 बजे से 29 जुलाई की रात 12 बजे तक मंदिर के पट आम श्रद्धालुओं के लिए खुले रहेंगे। नागचंद्रेश्वर दर्शन के लिए देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के उज्जैन आने की संभावना जताई जा रही है। पर्व की तैयारियों को लेकर कलेक्टर रौशन कुमार सिंह की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में एसपी प्रदीप शर्मा, मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक, महंत विनीत गिरि, नगर निगम, स्वास्थ्य, पीएचई, लोक निर्माण विभाग समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं के लिए होंगी ये व्यवस्थाएं     एयरो ब्रिज का तकनीकी परीक्षण कलेक्टर सिंह ने निर्देश दिए कि भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए बनाए गए एयरो ब्रिज की तकनीकी क्षमता और मजबूती की जांच कर प्रमाण-पत्र लिया जाए।     साफ-सफाई एवं पेयजल व्यवस्था मंदिर परिसर और उसके आसपास नगर निगम द्वारा सफाई सुनिश्चित की जाएगी।     साथ ही पेयजल पाइंट, टैंकर, और मोबाइल लॉकर की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।     दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए व्हील चेयर, जूता स्टैंड और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था की जाएगी।     यातायात, पार्किंग एवं सुरक्षा पार्किंग के लिए कर्कराज पार्किंग, बड़ा गणेश, और अन्य स्थानों पर समुचित व्यवस्था की जाएगी। दर्शन मार्ग पर बैरिकेडिंग, पुलिस बल, और फायर स्टेशन, खोया-पाया केन्द्र भी तैनात किए जाएंगे। दर्शन मार्ग निर्धारित     श्रद्धालु कर्कराज पार्किंग में वाहन पार्क कर, भील समाज धर्मशाला में जूते उतारेंगे।     वहां से गंगा गार्डन, चारधाम पार्किंग, हरसिद्धि चौराहा, रुद्रसागर की दीवार, विकम टीला, बड़ा गणेश मंदिर होते हुए द्वार कमांक- 4 से प्रवेश करेंगे।     दर्शन के उपरांत विश्रामधाम, एयरो ब्रिज, मार्बल गलियारा से होते हुए हरसिद्धि चौराहा की ओर निकलेंगे।

MPTET प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025: जानें आवेदन प्रक्रिया और कुल पदों का विवरण

भोपल  मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPTET) की ओर से स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा-2025 के लिए योग्य उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए जा रहे हैं। अगर आप भी मध्य प्रदेश में प्राइमरी टीचर के पद पर नौकरी करना चाहते हैं, तो यह आपके लिए एक सुनहरा अवसर है। इन पदों पर आवेदन प्रक्रिया 18 जुलाई, 2025 से शुरू हो गई है। अब उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट esb.mp.gov.in पर जाकर प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा-2025 के लिए आवेदन कर सकते है। आवेदन करने की अंतिम तिथि 01 अगस्त, 2025 निर्धारित की गई है। साथ ही उम्मीदवार 18 जुलाई से लेकर 06 अगस्त, 2025 तक अपने आवेदन-पत्र में सुधार कर सकते हैं। परीक्षा शुल्क इस पद पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को परीक्षा शुल्क का भुगतान भी करना होगा। सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए परीक्षा शुल्क 500 रुपये निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, मध्य प्रदेश के मूल निवासी, अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों के लिए परीक्षा शुल्क 250 रुपये निर्धारित किया गया है। जरूरी योग्यता     प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा-2020 अथवा 2024 में निर्धारित प्रतिशत के साथ उत्तीर्ण अभ्यर्थी ही आवेदन करने के पात्र होंगे।     आवेदन करने के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों के साथ हायर सेकेंडरी अथवा इसके समकक्ष प्रारंभिक शिक्षा में दो वर्ष का डिप्लोमा होना चाहिए।     कम से कम 50 प्रतिशत अंकों के साथ हायर सेकेंडरी अथवा इसके समकक्ष प्रारंभिक शिक्षा शास्त्र में चार वर्षीय बीएलएड की डिग्री होनी चाहिए। आयु-सीमा आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित की गई है। साथ ही पुरुष अभ्यर्थियों की अधिकतम आयु 40 वर्ष, मध्य प्रदेश की मूल स्थानीय निवासी महिला, अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति और दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए अधिकतम आयु 45 वर्ष निर्धारित की गई है। परीक्षा पैटर्न प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा में उम्मीदवारों से हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान से 100 अंकों के 100 बहुविकल्पीय प्रकार के प्रश्न पूछे जाएंगे। 

इंटरनेट स्पीड में सबसे आगे निकला यह देश, चौंक गए जापान और अमेरिका भी

जापान  जापान ने हाल ही में इंटरनेट स्पीड के मामले में एक ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है। जापान के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी (NICT) के वैज्ञानिकों ने दुनिया की अब तक की सबसे तेज़ इंटरनेट स्पीड का परीक्षण कर सबको चौंका दिया है। वैज्ञानिकों ने 1.02 पेटाबिट्स प्रति सेकंड यानी लगभग 1,27,500 Gbps की स्पीड से इंटरनेट डेटा ट्रांसफर करके एक नया रिकॉर्ड बनाया है। यह स्पीड अमेरिका के औसत होम ब्रॉडबैंड की स्पीड से लगभग 30 लाख गुना अधिक है। यह सफलता एक खास ऑप्टिकल फाइबर टेक्नोलॉजी के ज़रिए संभव हो सकी है, जो भविष्य में इंटरनेट की दुनिया में बड़ा बदलाव ला सकती है। हालांकि, इतना तेज़ इंटरनेट हासिल करने के बावजूद जापान का नाम फिलहाल उन देशों की सूची में शामिल नहीं है जो इंटरनेट सर्विस स्पीड में सबसे आगे हैं। Speedtest Global Index की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, मोबाइल इंटरनेट स्पीड के मामले में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) शीर्ष पर है, जहां औसत मोबाइल इंटरनेट स्पीड 546.14 Mbps है। वहीं, होम ब्रॉडबैंड इंटरनेट की बात करें तो सिंगापुर पहले स्थान पर है, जहां की औसत स्पीड 393.15 Mbps है। भारत, अमेरिका, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश भले ही दुनिया में सबसे अधिक इंटरनेट उपयोग करने वाले देशों में शामिल हैं, लेकिन इंटरनेट की औसत स्पीड के मामले में यह देश अभी भी पीछे हैं। भारत की क्या स्थिति है? भारत की स्थिति देखें तो मोबाइल इंटरनेट स्पीड में देश ने 26वां स्थान प्राप्त किया है और औसत स्पीड 133.51 Mbps है। लेकिन होम ब्रॉडबैंड स्पीड के मामले में भारत काफी पिछड़ा हुआ है और 98वें स्थान पर है, जहां औसत ब्रॉडबैंड स्पीड केवल 59.51 Mbps है। दिलचस्प बात यह है कि इस मामले में भारत नेपाल से भी पीछे है। नेपाल 88वें स्थान पर है और वहां की औसत ब्रॉडबैंड स्पीड 77.90 Mbps दर्ज की गई है। यह स्थिति भारत के टेलीकॉम सेक्टर के लिए एक संकेत है कि अभी भी ब्रॉडबैंड इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्पीड सुधारने के लिए बहुत काम करना बाकी है।

बालाघाट देश में अटल पेंशन योजना में पहले स्थान पर, 10 जिले टॉप पर

भोपाल  देश में असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को 60 वर्ष की आयु के बाद एक निश्चित पेंशन राशि प्रदान करने के लिए अटल पेंशन योजना चलाई जा रही है। योजना में अधिक से अधिक असंगठित क्षेत्र के लोगों को जोड़ने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा इस वर्ष 1 मई से 15 जुलाई 2025 तक पूरे देश में विशेष अभियान चलाया गया। इस अभियान में नए लोगों को जोड़ने और उनका पंजीयन कराने में मध्यप्रदेश के 10 जिलों ने देश के टॉप टेन जिलों में स्थान बनाया है। इसमें बालाघाट जिले ने देश में प्रथम स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि राज्य के साथ ही बालाघाट के लिए भी बड़ी उपलब्धि है। इस अभियान का फाइनल स्कोर पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण के द्वारा 18 जुलाई को जारी किया गया। इस अभियान में बालाघाट जिले ने 2992 लक्ष्य के विरूद्ध 12 हजार 507 लोगों को अटल पेंशन योजना से जोड़कर 418 प्रतिशत उपलब्धि हासिल किया है। श्योपुर जिले ने 836 के विरूद्ध 2538 लोगों को जोड़कर 304 प्रतिशत उपलब्धि के साथ दूसरे, अलीराजपुर जिले ने 880 के विरूद्ध 1705 लोगों को जोड़कर 194 प्रतिशत उपलब्धि के साथ तीसरे, उज्जैन जिले ने 5676 के विरूद्ध 10813 लोगों को जोड़कर 191 प्रतिशत उपलब्धि के साथ चौथे, अनूपपुर जिले ने 1342 के विरूद्ध 2542 लोगों को जोड़कर 189 प्रतिशत उपलब्धि के साथ पांचवे, उमरिया जिले ने 990 के विरूद्ध 1819 लोगों को जोड़कर 184 प्रतिशत उपलब्धि के साथ छटवें, छिंदवाड़ा जिले ने 4994 के विरूद्ध 9148 लोगों को जोड़कर 183 प्रतिशत उपलब्धि के साथ सातवें, डिंडोरी जिले ने 946 के विरूद्ध 1720 लोगों को जोड़कर 182 प्रतिशत उपलब्धि के साथ आठवें, शहडोल जिले ने 1936 के विरूद्ध 3445 लोगों को जोड़कर 178 प्रतिशत उपलब्धि के साथ नौवें और दमोह जिले ने 1870 के विरूद्ध 3314 लोगों को जोड़कर 177 प्रतिशत उपलब्धि के साथ देश में दसवां स्थान हासिल किया है। अभियान के अंतर्गत अटल पेंशन योजना में अधिक से अधिक लोगों के नाम जोड़ने मे देश में प्रथम 10 स्थान पर रहे इन जिलों को अवॉर्ड ऑफ एक्सीलेंस प्रदान किया जाएगा। बालाघाट जिले में कलेक्टर मृणाल मीणा के नेतृत्व एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक सराफ के साथ समन्वय कर इस योजना में लोगों को जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अग्रणी बैंक प्रबंधक संजीव कुमार ने इस संबंध में बताया कि सम्पूर्ण देश में अटल पेंशन योजना में अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया गया। बालाघाट जिले में अभियान के बाद भी जिले में पात्र लोगों को इस योजना से जोड़ने का काम निरंतर जारी रहेगा और 50 हजार के लक्ष्य को हासिल करने का प्रयास किया जाएगा। अटल पेंशन योजना भारत सरकार की एक सामाजिक सुरक्षा योजना है, जो मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए तैयार की गई है। यह योजना उन लोगों को पेंशन प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई है, जो रिटायरमेंट के बाद आर्थिक रूप से सुरक्षित रहना चाहते हैं। इसके लिए 18 से 40 वर्ष की आयु के भारतीय नागरिक, जो असंगठित क्षेत्र के कामगार जैसे दिहाड़ी मजदूर, छोटे व्यापारी, घरेलू कामगार, रेहड़ी-पटरी वाले, किसान, आदि पात्र हैं। इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का किसी बैंक या डाकघर में बचत खाता होना चाहिए, जो आधार से लिंक हो। इस योजना का लाभ उन लोगों को दिया जाता है जो आयकर दाता नहीं हैं। इसी के साथ आवेदक को किसी अन्य सरकारी पेंशन योजना जैसे एनपीएस, ईपीएस का लाभार्थी नहीं होना चाहिए। यह योजना 1,000 रुपये से 5,000 रुपये तक की मासिक पेंशन प्रदान करती है, जो 60 वर्ष की आयु के बाद मिलती है।  

सर्जिकल स्ट्राइक जैसे वार से नहीं उभर पाया पाकिस्तान, एयरबेस पर ताले दो महीने से ज्यों के त्यों

इस्लामाबाद  ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना की ओर से किए गए हमले में पाकिस्तान के रहीम यार खान एयरबेस का इकलौता रनवे पूरी तरह बर्बाद हो गया था. इस एयरबेस पर हुए नुकसान का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसका रनवे अभी तक बंद है. पाकिस्तान ने तीसरी बार इस रनवे की मरम्मत के चलते उड़ान संचालन पर रोक को आगे बढ़ा दिया है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि भारतीय हमले से हुए नुकसान की गंभीरता काफी ज्यादा थी. पाकिस्तान की ओर से हाल ही में जारी की गई NOTAM (नोटिस टू एयरमेन) में कहा गया है कि रहीम यार खान एयरबेस का रनवे अब 5 अगस्त तक उड़ानों के लिए बंद रहेगा. नोटिस में कोई ठोस वजह नहीं दी गई है, सिर्फ यह कहा गया है कि मरम्मत का काम जारी है. 10 मई को जारी की गई थी नोटिस पहली NOTAM 10 मई को जारी की गई थी, यानी उसी दिन जब भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत हवाई हमले किए थे. नोटिस में बताया गया था कि पंजाब प्रांत में स्थित इस रणनीतिक एयरबेस का रनवे एक हफ्ते तक संचालन के लिए अनुपलब्ध रहेगा. फिर 4 जून को दूसरी NOTAM जारी कर प्रतिबंध की अवधि 4 जुलाई तक बढ़ा दी गई. मिलिट्री एयरबेस भी और इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी आजतक को मिलीं हाई-रिजॉल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों में यह साफ देखा जा सकता है कि एयरबेस के रनवे के बीचोंबीच एक बड़ा और गहरा गड्ढा बन गया है. इसके अलावा, एयरबेस की एक इमारत को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है. गौरतलब है कि रहीम यार खान एक ऐसा एयरपोर्ट है जहां सैन्य हवाई अड्डे के साथ-साथ शेख जायद इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी स्थित है. पीएम मोदी ने भी रैली में किया था जिक्र यह एयरबेस उन 11 सैन्य ठिकानों में शामिल था जिन्हें भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत निशाना बनाया था. यह ऑपरेशन कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले (जिसमें 26 लोग मारे गए थे) के जवाब में किया गया था. भारत के इन हमलों के बाद ही पाकिस्तान ने सीजफायर के लिए संपर्क किया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राजस्थान के बीकानेर में एक चुनावी रैली के दौरान इस एयरबेस का जिक्र करते हुए पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान का रहीम यार खान एयरबेस आज भी ICU में पड़ा है, पता नहीं कब तक ठीक होगा.'

दुनिया की सबसे बड़ी बाघ प्रतिमा पेंच टाइगर रिजर्व में आकार ले रही, हजारों किलो कबाड़ का उपयोग

सिवनी  दुनिया की सबसे बड़ी बाघ प्रतिमा पेंच टाइगर रिजर्व में आकार ले रही है, जिसे सिवनी जिले के स्थानीय कलाकारों द्वारा तैयार किया जा रहा है।हजारों किलो कबाड़ (स्क्रैप) से तैयार हो रही बाघ की आकृति का दीदार पेंच पहुंचने वाले पर्यटक व आम नागरिक 29 जुलाई को विश्व बाघ दिवस से कर सकेंगे। पेंच प्रबंधन का दावा है कि खवासा में अनपयोगी कबाड़ से तैयार हो रही बाघ की प्रतिमा दुनिया में अब तक बनी बाघ प्रतिमाओं में सबसे बड़ी होगी।पेंच टाईगर रिजर्व के अधिकारियों के अनुसार स्क्रैप से बनाई जा रही बाघ प्रतिमा की प्रेरणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मिशन लाइफ से ली गई है। पेंच टाइगर रिजर्व के उपसंचालक रजनीश सिंह ने बताया कि मिशन लाइफ के अंतर्गत प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के तीन आर (3R) सूत्रों में रिड्यूस (Reduce), रियूस (Ruse) एवं रिसाईकल (Recycle) भावना के अंतर्गत पेंच टाइगर रिजर्व में लोहे के स्क्रैप मटेरियल से एक विशालकाय बाघ प्रतिमा का निर्माण किया जा रहा है। जनवरी माह में लोहे के अनुपयोगी सामग्रियों जैसे पुरानी साईकिल, पाइप, जंग लगी लोहे की चादरें आदि विविधतापूर्ण सामग्रियों से प्रतिमा का निर्माण प्रारंभ किया गया था, जो अब वह लगभग अपनी पूर्णता पर है। जिस तरह से प्रधानमंत्री मोदी ने मेक इन इंडिया का प्रतीक चिन्ह एक सिंह को बनाया था और वह सिंह भी अनुपयोगी लोहे की सामग्री से बना डिजाइन था उसी से प्रेरणा लेकर लोहे के स्‍क्रैप मटेरियल के इस बाघ कलाकृति की संकल्पना की गई है। यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि इंटरनेट में उपलब्ध वल्र्ड रिकार्ड एकेदमी के अनुसार दुनिया में सबसे बड़ी बाघ की मूर्ति अमेरिका के जार्जिया राज्य में है जो 8 फिट ऊंची और 14 फिट लंबी है। जबकि पेंच टाइगर रिजर्व में बन रही लोहे के स्क्रैप मटेरियल की यह बाघ कलाकृति पूर्ण होने के बाद 16 फिट से अधिक उंची व 36 फिट से भी अधिक लंबी होगी। उल्लेखनीय है कि मठ मंदिर में कबाड़ से महादेव की आकर्षक प्रतिमा तैयार करने वाले कलाकार विक्की और उनके साथियों द्वारा इस विशालकाय प्रतिमा को तैयार किया जा रहा है।  

उज्जैन महाकुंभ में पहली बार AI का कमाल, यूपी की विशेषज्ञ टीम संभालेगी मोर्चा

उज्जैन  साल 2028 में उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ आस्था का सुपर हाईटेक मेला होने वाला है। जिसकी तैयारियां पुलिस महकमे द्वारा अभी से ही शुरू कर दी गई है। सबसे खास बात यह है कि सिंहस्थ मेले का पूरा क्राउड मैनेजमेंट ही एआइ तकनीक के जरिए किया जाएगा। भीड़ प्रबंधन के लिए एआई इनेबल कैमरा, आरएफआईडी रिस्टबैंड, ड्रोन सर्विलांस और मोबाइल एप ट्रैकिंग जैसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा। सिंहस्थ महाकुंभ मेला में पहली बार साइबर मॉनिटरिंग यूनिट की स्थापना की जाएगी। साइबर यूनिट डिजिटल माध्यमों से फैलने वाली अफवाहों से लेकर ऑनलाइन ठगी की कोशिशों पर नियंत्रण का काम करेंगी। साथ ही इस यूनिट द्वारा सोशल मीडिया कंटेंट और डिजिटल गतिविधियों की लाइव मॉनिटरिंग की जाएगी। वहीं मोबाइल नेटवर्क बाधित नहीं हो इसके लिए अस्थायी मोबाइल टॉवर, हाई- स्पीड डेटा कनेक्टिविटी की योजना गई है। यूपी का दल जल्द आएगा उज्जैन सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर यूपी का एक दल जल्द उज्जैन का दौरा करने वाला है। जिसके दौरे में प्रबंधन की बारीकियां समझी जाएंगी। दल में वह अधिकारी शामिल होंगे जिन्होंने प्रयागराज महाकुंभ मेले में महत्वपूर्ण जिमेदारियां निभाई है। बता दें, इससे पहले डीजीपी कैलाश मकवाना ने भी अधिकारियों की बैठक लेकर महाकुंभ में तकनीकी मदद लेने पर जोर दिया था।

स्वस्थ पर्यावरण की ओर कदम: इंदौर में शुरू होगा मध्यप्रदेश का पहला ऑक्सीजन गार्डन

     इंदौर में बनेगा प्रदेश का पहला ऑक्सीजन गार्डन, लगेंगे लाखों पौधे     अगले एक साल में 50 टन कचरा कम करने का लक्ष्य।     तीन साल पहले सूखा कचरा 650-750 टन था।     अब शहर में सूखा कचरा 450-500 टन हो गया है। इंदौर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत देशभर में अब तक 141 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं। पीएम मोदी के आव्हान पर यह पर्यावरणीय जनांदोलन निरंतर प्रगति पर है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश सरकार के नेतृत्व में यह संकल्प तेजी से धरातल पर साकार होता दिख रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रेरणा और मार्गदर्शन तथा जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट की सक्रिय पहल से प्रदेश में पहली बार "ऑक्सीजन गार्डन" की परिकल्पना को मूर्त रूप दिया जा रहा है।   इंदौर शहर अब ग्रीन सिटी बनने की तैयारी में जुटा है। दिल्ली में स्वच्छ सर्वेक्षण के सम्मान समारोह के बाद हुई राउंड टेबल कांफ्रेंस में इंदौर निगम ने अपने ग्रीन सिटी बनने वाले का भविष्य का रोडमैप बताया। इसमें कचरे के साथ पानी व ऊर्जा के माडल पर काम किया जाएगा। शहर की लगातार बढ़ती आबादी, भौगोलिक स्तर पर शहर को होते विस्तार के कारण इंदौर बढ़ते कचरे को कम करने के लिए अभी से प्रयासरत है। इंदौर में हर दिन 1250 टन गीला व सूखा कचरा उत्पन्न होता है। पिछले तीन साल में इंदौर ने 250 टन सूखा कचरा कम किया। तीन साल में 19 ग्राम प्रति व्यक्ति प्रतिदिन कचरा कम किया गया। वहीं अगले एक साल में इंदौर नगर निगम 21 से 22 ग्राम प्रति व्यक्ति प्रतिदिन कचरा कम करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इस तरह इंदौर में अगले एक साल में 250 टन के अलावा 50 टन अतिरिक्त कचरा कम करने की तैयारी है। इंदौर में 11 एकड़ में विकसित होगा ऑक्सीजन गार्डन इंदौर के कनाडिया क्षेत्र स्थित गुलमर्ग परिसर के पीछे 11 एकड़ के पहाड़ी क्षेत्र में इस विशाल हरित परियोजना की शुरुआत की जाएगी। इस संबंध में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने इस क्षेत्र को एक प्रमुख पर्यावरणीय केंद्र के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। इस मौके पर नगर निगम आयुक्त शिवम वर्मा, अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर, इंदौर जनपद अध्यक्ष विश्वजीत सिंह सिसोदिया सहित कई जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे। औषधीय पौधों और पक्षी विहार से सजेगा हरित क्षेत्र इस पहाड़ी क्षेत्र पर नीम, पीपल, बरगद, अशोक, आम, महुआ, रेन ट्री, जामुन, उंबर सहित लाखों की संख्या में औषधीय एवं छायादार प्रजातियों के पौधे रोपे जाएंगे। यह ऑक्सीजन गार्डन न केवल नागरिकों को शुद्ध वायु प्रदान करेगा, बल्कि पक्षियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगा। विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों के आगमन से यह स्थल एक प्राकृतिक पक्षी विहार और पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित होगा। पौधों की सिंचाई के लिए गुलमर्ग परिसर स्थित ट्रीटमेंट प्लांट से पाइपलाइन के माध्यम से जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश भी मंत्री सिलावट ने दिए हैं। जन भागीदारी से बनेगा पर्यावरण संरक्षण का उदाहरण इस अभियान को जन आंदोलन का स्वरूप देते हुए समाज के सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इसमें पद्मश्री एवं पद्मभूषण सम्मानित नागरिकों, व्यापारी संगठनों, समाजसेवियों, धर्मगुरुओं, किसान संगठनों, जनप्रतिनिधियों एवं प्रबुद्धजनों की सक्रिय भागीदारी रहेगी। यह ऐतिहासिक पहल आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित एवं स्वच्छ पर्यावरण प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। इसी अवसर पर सिलावट ने कनाडिया क्षेत्र की गौशाला का भी निरीक्षण किया और व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए।  तीन साल में 190 टन गीले कचरे को ट्रेंचिंग ग्राउंड जाने से रोका शहर के घरों व प्रतिष्ठानों से पिछले तीन साल में 190 टन कचरा ट्रेंचिंग ग्राउंड पहुंचने से रोका गया। इसके लिए इंदौर में 56 हजार घरों के लोगों का विशेष सहयोग मिला। इन घरों में होम कंपोस्टिंग यूनिट के माध्यम से घरों में ही गीले कचरे से खाद बनाई जा रही है। वही शहर के उद्यानों में पिट कंपोस्टिंग, आर्गेनिक वेस्ट वाटर व ड्रम कंपोस्ट के माध्यम से हरित कचरे का निपटान गार्डन परिसर में ही किया जा रहा है। 287 संस्थानों ने 30 टन प्रतिदिन कचरा किया कम शहर में 287 संस्थाएं ऐसी हैं जो प्रतिदिन 30 किलो से ज्यादा कचरा देती हैं। ऐसे संस्थानों में होटल, मैरिज गार्डन, शैक्षणिक संस्थान हैं। इन संस्थानों ने गीले कचरे के खाद बनाने के उपक्रम लगाए और सूखे कचरे की छंटाई की यूनिट लगाई। परिणामस्वरूप प्रतिदिन 30 टन कचरा नगर निगम को मिलना कम हुआ। इस तरह कचरे का परिवहन हुआ कम मोबाइल कंपोस्टिंग वैन : चार वाहनों के माध्यम से प्रतिदिन आठ से नौ टन गीला कचरा एकत्र कर उससे खाद बनाई जा रही है। बायोसीएनजी प्लांट : कबीटखेड़ी व चोइथराम मंडी में बायोसीएनजी प्लांट में 35 टन कचरे से गैस बनाई जा रही है। यह कचरा शहर में खत्म हो रहा है। बढ़ते कचरे के नियंत्रण के लिए भविष्य की तैयारी वर्तमान में ट्रेंचिंग ग्राउंड पर 550 टन प्रतिदिन गीले कचरे से खाद बनाने का संयंत्र लगाया गया है। इसकी क्षमता बढ़ाकर 800 टन प्रतिदिन करने की योजना है। इस तरह यह विश्व का सबसे बड़ा बायो सीएनजी प्लांट बन जाएगा। ग्रीन इंदौर के लिए ये भी हो रहे प्रयास     इंदौर नगर निगम शहर की वायु गुणवत्ता का स्तर 50 से कम करने के लिए अलग-अलग प्रयास कर रहा है।     सोलर मित्र योजना के तहत अगले तीन साल में शहर के शत-प्रतिशत घरों में सोलर पैनल से बिजली बनाने के संयंत्र लगाने की योजना। फिलहाल एक माह में एक करोड़ से अधिक विद्युत यूनिट बचाई गई।     1 लाख 70 हजार घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगे। अगले तीन साल में छह लाख घरों में लगवाने की योजना।     हरित क्षेत्र बढ़ा रहे हैं। अभी शहर में छह स्थानों पर सिटी फारेस्ट विकसित किए गए हैं। शहर में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए विशेष पौधे लगाए जाएंगे। इंदौर को ग्रीन सिटी बनाएंगे     ग्रीन इंदौर बनाने के लिए इंदौर निगम लगातार काम कर रहा है। भविष्य में इंदौर को ग्रीन सिटी बनाएंगे। हमने … Read more

MP में हाईटेक सुरक्षा की शुरुआत: 15 अगस्त से सक्रिय होगी सेंट्रलाइज्ड 112 सेवा

भोपाल  मध्यप्रदेश में अब आपातकालीन सेवाएं और भी आसान और तेज हो जाएगी। 15 अगस्त 2025 से प्रदेश में इमरजेंसी सर्विसेज के लिए एक नया एकीकृत नंबर 112 शुरू होने जा रहा है। अब आपको पुलिस, एम्बुलेंस या फायर ब्रिगेड जैसी आपात सेवाओं के लिए अलग-अलग नंबर याद रखने की जरूरत नहीं होगी। बस एक नंबर 112 डायल करें, और मदद तुरंत आपके दरवाजे पर पहुंचेगी। इस नई पहल के तहत मध्यप्रदेश सरकार डायल 112 सेवा को हाईटेक और सेंट्रलाइज्ड बनाने जा रही है। इसके लिए एक अत्याधुनिक कॉल सेंटर तैयार किया जा रहा है, जो सीधे सेंट्रल सर्वर से जुड़ा होगा। इस सेवा के तहत सड़कों पर बोलेरो नियो और स्कॉर्पियो जैसी हाईटेक इमरजेंसी गाड़ियां दौड़ती नजर आएंगी, जो आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करेंगी। 1200 नए वाहन मिलेंगे नई व्यवस्था के तहत पूरे प्रदेश में 1200 नए बोलेरो नियो “फर्स्ट रिस्पांस व्हीकल” तैनात किए जाएंगे. ये वाहन जीपीएस, वायरलेस, डिजिटल नेविगेशन सिस्टम और लाइव लोकेशन ट्रैकिंग जैसी आधुनिक तकनीकों से लैस होंगे, जिससे किसी भी आपात स्थिति में पुलिस की मदद पहले से कहीं तेज़ और सटीक हो सकेगी. 10 साल तक चली ये सेवा बता दें कि डायल-100 सेवा वर्ष 2015 में सिर्फ पांच साल के लिए शुरू की गई थी, लेकिन विभिन्न तकनीकी समस्याओं, निविदा प्रक्रिया में देरी, कोविड-19 महामारी और प्रशासनिक कारणों के चलते यह सेवा 10 वर्षों तक चली. अब बीवीजी कंपनी के बजाय जीवीके कंपनी को नई डायल-112 सेवा का संचालन सौंपा गया है. पुलिस का ये दावा पुलिस विभाग का दावा है कि नई सेवा के माध्यम से प्रदेशवासियों को और भी अधिक भरोसेमंद, तेज़ व स्मार्ट सुरक्षा मिलेगी. नई तकनीक के इस्तेमाल से घटना स्थल तक पहुंचने का औसत समय भी घटेगा, जिससे आपराधिक घटनाओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी. इस ऐलान के बाद से लोगों में नई सेवा को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है. 112 के साथ शुरू होगा मध्यप्रदेश आपातकालीन सेवाओं में एक नया अध्याय  फिलहाल, प्रदेश में इमरजेंसी सेवाओं के लिए डायल 100 नंबर का उपयोग होता है, जिसकी स्कीम 2015 में शुरू हुई थी और यह 5 साल के लिए थी। अब डायल 112 के साथ मध्यप्रदेश आपातकालीन सेवाओं में एक नया अध्याय शुरू करने जा रहा है। तो, 15 अगस्त से तैयार रहें, क्योंकि मध्यप्रदेश में आपकी सुरक्षा और सहायता के लिए सिर्फ एक कॉल काफी होगी- डायल 112.