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‘आम बहार- आपके द्वार’ का आयोजन करेगा वन विभाग

लखनऊ  योगी सरकार के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश वन विभाग पहली जुलाई से वन महोत्सव कराएगा। यह महोत्सव सात जुलाई तक चलेगा। इस दौरान विभाग की तरफ से 'आम बहार- आपके द्वार' का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान पौधरोपण के महत्व, पर्यावरण संरक्षण, वर्षा जल संचयन, जल संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त परिवेश व जन जागरूकता पर भी विशेष जोर रहेगा।  मुख्य वन संरक्षक (प्रचार/प्रसार) अदिति शर्मा ने बताया कि 1 से 7 जुलाई तक पौधरोपण से संबंधित जन जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। अनवरत पड़ रही बेतहाशा गर्मी व विपरीत मौसम को देखते हुए योगी सरकार का पौधरोपण के महत्व, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, प्लास्टिक मुक्त परिवेश पर विशेष जोर है। 'आम बहार- आपके द्वार' का आयोजन करेगा वन विभाग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फलदार वृक्षों की देशी प्रजातियों के रोपण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिये हैं। पौधरोपण महाभियान-2026 में वनावरण एवं वृक्षावरण के महत्व के प्रति जागरूक करते हुए फलदार प्रजातियों के रोपण हेतु जनसामान्य को प्रोत्साहित किए जाने पर जोर दिया है। इस क्रम में फलों के राजा "आम" के पौधों के वृहद वितरण के लिए 1 से 7 जुलाई (वन महोत्सव) में पूरे प्रदेश में "आम बहार, आपके द्वार" स्लोगन के माध्यम से आम भण्डारा का आयोजन होगा। इस अवधि में प्रत्येक विकास खण्ड में आम भण्डारा का आयोजन कर आम की देशी व अन्य प्रजाति के पौधों का वितरण कर जनसामान्य को उनके रोपण व रख-रखाव हेतु जागरूक किया जाएगा। 2026 में 35 करोड़ पौधरोपण कराएगी योगी सरकार  वन महोत्सव के अलावा योगी सरकार यूपी को हरा-भरा रखने के लिए इस वर्ष भी 35 करोड़ पौधरोपण करेगी। इसके लिए विभागों और मंडलों के लक्ष्य पहले ही निर्धारित किए जा चुके हैं। वर्षाकाल में पौधरोपण महाभियान की तिथि जल्द ही घोषित की जाएगी।

CM मोहन यादव आज सिवनी को देंगे 494.16 करोड़ के 629 विकास कार्यों की सौगात

मुख्यमंत्री डॉ. यादव सिवनी को देंगे 494.16 करोड़ के 629 विकास कार्यों की सौगात कोदो-कुटकी उत्पादक किसानों को मिलेगा प्रोत्साहन राशि का लाभ मुख्यमंत्री राज्य-स्तरीय धान महोत्सव में होंगे शामिल सिवनी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार 01 जुलाई को सिवनी जिले में राज्य-स्तरीय धान महोत्सव कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव जिले को विकास और किसान कल्याण की अनेक सौगातें देंगे। महोत्सव में कोदो-कुटकी उत्पादक किसानों को प्रोत्साहन राशि का अंतरण, 494.161 करोड़ रुपये लागत के 629 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन और हितग्राहियों को हितलाभ वितरण किया जाएगा। इस अवसर पर राजस्व मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री करण सिंह वर्मा, कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंषाना, सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते, सांसद श्रीमती भारती पारधी सहित जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव राज्य के कोदो-कुटकी उत्पादक 3,941 किसानों के बैंक खातों में 2 करोड 82 लाख 99 हजार 300 रूपये की प्रोत्साहन राशि सिंगल क्लिक से अंतरित करेंगे। यह राशि किसानों को 1 हजार रूपये प्रति क्विंटल की दर से प्रदान की जा रही है, जिससे श्रीअन्न उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय में वृद्धि होगी। महोत्सव में विभिन्न विभागों द्वारा थीम आधारित विकास प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। प्रदर्शनी में धान बुवाई के आधुनिक कृषि यंत्र, प्राकृतिक खेती एवं प्राकृतिक बगीचे, कस्टम हायरिंग सेंटर, जीआई टैग एवं मिलेट्स उत्पाद, पीएमएफएमई उत्पाद, आम की विभिन्न किस्में, स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित हस्तशिल्प एवं मिट्टी कला उत्पाद, लघु वनोपज, स्थानीय उद्यमियों के उत्पाद, पोषण आहार प्रदर्शनी, डिजिटल जमीन, कृषिका एप तथा किसान क्रेडिट कार्ड से संबंधित जानकारी प्रदर्शित की जाएगी। प्रदर्शनी परिसर में आकर्षक सेल्फी प्वाइंट भी आमजन के लिए विशेष आकर्षण रहेगा।  

जुलाई के पहले दिन खुशखबरी! पेट्रोल 5 रुपये और डीजल 3 रुपये सस्ता, ग्राहकों को बड़ी राहत

नई दिल्ली प्राइवेट सेक्टर की दिग्गज तेल कंपनी नायरा एनर्जी (Nayara Energy) ने देश के आम नागरिकों को राहत देते हुए रिटेल नेटवर्क पर पेट्रोल की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है. नई दरें बुधवार, 1 जुलाई 2026 से लागू कर दी गई हैं।  अब भोपाल में पेट्रोल की कीमत 119.79 रुपए और डीजल 102.57 रुपए पर आ गया है। नायरा के देशभर में 7 हजार से ज्यादा पेट्रोल पंप हैं। इंडस्ट्री के सूत्रों के मुताबिक, कंपनी की तरफ से कम की गईं कीमतें पूरे देश में नयारा (Nayara) के 7000 से ज्यादा पेट्रोल पंपों  पर लागू होगी.हालांकि, अलग-अलग राज्यों में वैट (VAT) और दूसरे लोकल टैक्स में अंतर के कारण पंप की कीमतों में थोड़ा-बहुत अंतर दिख सकता है।  आज प्राइवेट रिटेलर ने भले ही पेट्रोल-डीजल के दाम घटा दिए हैं, लेकिन सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों – इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) – ने रिटेल फ्यूल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है. ये तीनों कंपनियां मिलकर भारत के एक लाख से ज्यादा फ्यूल स्टेशनों को संभालती हैं।  प्रमुख शहरों में अनुमानित कीमतें शहर            पेट्रोल की अनुमानित कीमत     डीजल की अनुमानित कीमत     सरकारी तेल कंपनियों के रेट दिल्ली            97.12 रुपये                                          92.20 रुपये            102.12 और 95.20 रुपये नोएडा            96.96 रुपये                                          87.03 रुपये           101.96 और 90.03 रुपये मुंबई              106.21 रुपये                                       91.50 रुपये            111.21 और 94.50 रुपये 7000 पेट्रोल पंपों पर सस्ता पेट्रोल-डीजल Nayara Energy रूस की रोसनेफ्ट समर्थित फ्यूल कंपनी है. इसने हाल ही  भारत में अपने पेट्रोल पंप की संख्या 7,000 के पार पहुंचाई है और इसके साथ ही ये प्राइवेट सेक्टर की देश की सबसे बड़ी पेट्रोल-डीजल रिटेल सेलर के रूप में उभरी है. तेल की कीमतों पर बीते कुछ समय में महंगाई की मार से इस कंपनी ने अब अपने देशव्यापी नेटवर्क पर पेट्रोल प्राइस में 5 रुपये और डीजल प्राइस में 3 रुपये प्रति लीटर की कटौती का तोहफा दिया है।  इंडस्ट्री के सूत्रों ने बताया कि नायरा के 7,000 से ज्यादा फ्यूल स्टेशनों पर नई कीमतें 1 जुलाई 2026 से लागू कर दी गई हैं. यहां ध्यान रहे कि विभिन्न राज्यों में पेट्रोल पंपों पर Petrol-Diesel Price अलग-अलग हो सकती हैं, जो लोकल टैक्स जैसे वैल्यू-एडेड टैक्स (VAT) पर निर्भर करती हैं।  सरकारी तेल कंपनियों की कीमतें स्थिर एक ओर जहां प्राइवेट सेक्टर की नायरा एनर्जी ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती करते हुए लोगों को राहत दी है, तो वहीं सरकारी फ्यूल रिटेलर्स ने अपनी कीमतों में किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं किया है. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL),  जो मिलकर भारत के एक लाख से ज्यादा पेट्रोल-पंपों में से 90 फीसदी से ज्यादा का संचालन करती हैं, इनपर फ्यूल प्राइस यथावत बने हुए हैं. राजधानी दिल्ली में, IOC आउटलेट्स पर पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर है।  जितनी बढ़ोतरी, उतनी ही की कटौती गौरतलब है कि अमेरिका-ईरान युद्ध (US-Iran War) से पैदा हुई ग्लोबल टेंशन के बीच इंटरनेशनल ऑयल प्राइस में तेज उछाल देखने को मिला था. इस दौरान पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा करने के मामले में पहली फ्यूल रिटेलर्स में नायरा एनर्जी भी शामिल थी. बीते 26 मार्च को कंपनी ने अपने पेट्रोल की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी. अब इतनी ही कटौती भी की है।  नायरा के बाद करीब चार साल तक स्थिर रखने के बाद भारत में सरकारी तेल कंपनियों ने भी पेट्रोल-डीजल पर महंगाई का बम फोड़ते हुए देशवासियों को झटका दिया था. इंडियन ऑयल से बीपी, एचपी तक ने मई महीने में एक के बाद एक कई बार Petrol-Diesel Price में बढ़ोतरी की थी और इनकी कीमतों में कुल मिलाकर 7.50 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया था. इसके पीछे कंपनियों ने मिडिल ईस्ट युद्ध से पैदा हुए तेल संकट से बढ़ती लागत का हवाला दिया था।  युद्ध थमने, क्रूड सस्ता होने का असर नायारा एनर्जी गुजरात के वाडिनार में हर साल 20 मिलियन टन क्षमता वाली तेल रिफाइनरी संचालित करती है. पेट्रोल-डीजल की कीमतों में यह कटौती वेस्ट एशिया में तनाव कम होने और एक अहम समुद्री रास्ते होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) के फिर से खुलने के बाद ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट के बाद की गई है. समुद्री रास्ते के खुलने से क्रूड ऑयल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है और इससे सप्लाई में रुकावट की चिंता कम हो गई है।     

NICU में बार-बार ब्लड टेस्ट पड़ सकते हैं भारी! रिसर्च में सामने आया गंभीर खतरा

नई दिल्ली जब कोई बच्चा समय से पहले जन्म ( प्रीटर्म बर्थ) ले लेता है तो उसको अच्छी देखभाल के लिए NICU में रखा जाता है. इस दौरान कई बार खून की जांच होती है. किसी संक्रमण का पता लगाने के लिए यह ब्लड टेस्ट किए जाते हैं, लेकिन बार-बार होने वाले यह टेस्ट बच्चों की सेहत को बिगाड़ सकते हैं. एनआईसीयू में भर्ती हुए बच्चों पर हुई एक नई स्टडी में इस खतरे के बारे में बताया गया है. यह रिसर्च प्रसिद्ध मेडिकल जर्नल द लैंसेट में छपी है।  इस रिसर्च को 22 यूरोपीय देशों के 64 NICU में  भर्ती हुए 320 प्रीटर्म बर्थ वाले बच्चों पर किया गया है. इसमें बताया गया कि कुछ बच्चों को एनआईसीयू में से एक से तीन दिन में छुट्टी मिल जाती है तो कुछ को कई महीनों तकरखना पड़ता है. इस दौरान किए जाने वाले ब्लड टेस्ट से बच्चे के शरीर में पहले हफ्ते में ही खून की कमी हो सकती है. ये कमी उसको एनीमिया की बीमारी का शिकार बना सकती है. इस बीमारी से उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर असर पड़ सकता है. यह स्टडी यूरोप में NICU पर आधारित सबसे बड़ी स्टडी है. इससे यह पता लगाने की कोशिश की गई है कि एनआईसीयू में बच्चों का कितना खून केवल टेस्ट के लिए निकाल लिया जाता है।   28 दिनों के भीतर 50 फीसदी खून ले लिया जाता है रिसर्च में पता चला कि 24 सप्ताह में जन्मे बच्चों में 28 दिनों के भीतर जन्म के समय शरीर में मौजूद कुल खून का लगभग 50% ब्लड टेस्ट के लिए निकाल लिया जाता है. 25 सप्ताह में जन्मे बच्चों में लगभग 26% खून, 26 सप्ताह में लगभग 20% और 27 सप्ताह में लगभग 11.5% खून केवल टेस्ट के लिए निकाल लिया जाता है।  इन आंकड़ों से पता चलता है कि 24 सप्ताह में जन्मे बच्चों में तो जन्म के समय जितना खून था, उसका आधा सिर्फ ब्लड टेस्ट करने में खर्च हो जाता है. इससे आगे चलकर बच्चे के शरीर में खून की कमी होने का रिस्क होता है।  सबसे ज्यादा खून कब निकला? रिसर्चर्स ने पाया कि कुछ अस्पतालों में डॉक्टर NICU में मौजूद बच्चे का कम मात्रा में खून लेकर जांच करते हैं. जबकि कुछ अस्पताल उसी टेस्ट के लिए कई गुना ज्यादा खून लेते हैं. टेस्ट एक ही होता है, लेकिन खून की जरूरत अलग-अलग होती है. जहां अच्छे लैब और डॉक्टर हैं वहां कई टेस्ट के लिए एक बार ही सैंपल ले लिया जाता है, वहीं कई अस्पतालों में हर टेस्ट के लिए अलग- अलग बार सैंपल लिए जाते हैं।  इस तरह की जानी चाहिए बच्चों के खून की जांच रिसर्च में पाया गया कि जिन NICU में कम खून में जांच करने वाली मशीने थीं, वहां बच्चों का ब्लड लॉस लगभग आधा था. कम मात्रा में खून से जांच करने वाली मशीनों ज्यादा बेहतर हैं. रिसर्च से यह साफ हुआ है कि अगर कम खून में जांच करने वाली तकनीके अपनाई जाएं  तो बच्चों में खून की कमी का खतरा काफी कम हो सकता है. इससे एनीमिया की बीमारी का रिस्क भी कम रहता है।  क्या कहते हैं एम्स के एक्सपर्ट दिल्ली एम्स में पीडियाट्रिक विभाग में डॉ. हिमांशु भदानी बताते हैं कि NICU में भर्ती बच्चों को सामान्य बच्चों की तुलना में अधिक रिस्क होता है. उनमें किसी बीमारी की जांच और अलग- अलग इंफेक्शन का पता लगाने के लिए कई प्रकार के टेस्ट किए जाते हैं, हालांकि टेस्ट जरूरत के हिसाब से ही होने चाहिए. एक बार के सैंपल से ही कई जांच की जा सकती हैं. ऐसे में बार- बार सैंपल लेना ठीक नहीं है. अगर बच्चे में खून की कमी हो जाती है तो फिर ये स्थिति भी खतरनाक हो सकती है. इससे एनीमिया की बीमारी का रिस्क होता है।  क्या होती है एनीमिया की बीमारी?  नवजात शिशुओं में एनीमिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें बच्चे के शरीर में रेड ब्लड सेल्स की संख्या सामान्य से कम होती है. ऐसा कई कारणों से हो सकता है, जैसे कि बच्चा समय से पहले पैदा हुआ हो, रेड ब्लड सेल्स बहुत तेज़ी से टूट रहे हों, शरीर में पर्याप्त रेड ब्लड सेल्स न बन रहे हों या बच्चे का बहुत ज़्यादा खून बह गया हो.  डॉ हिमांशु बताते हैं कि एनीमिया की बीमारी में लक्षण गंभीर भी हो सकते हैं. इसमें स्किन का पीला पड़ना, कमजोरी होना और उसकी इम्यूनिटी पर भी इसका असर हो सकता है। 

निर्माण स्थलों पर सुरक्षा घेरा अनिवार्य, बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं: डॉ. वर्णिका शर्मा

रायपुर : निर्माण स्थलों पर सुरक्षा घेरा अनिवार्य हो, बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं: डॉ. वर्णिका शर्मा बारिश के मौसम में बच्चों की सुरक्षा पर अलर्ट, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने दिए निर्देश रायपुर बारिश के मौसम में खुले गड्ढों, निर्माणाधीन स्थलों और पानी से भरी नालियों के कारण बच्चों की सुरक्षा को लेकर बढ़ते खतरे को गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, जिला कलेक्टरों और नगरीय निकायों के अधिकारियों को आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।     आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बारिश के दौरान खुले गड्ढों में पानी भर जाने से बच्चों के लिए गंभीर दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। कई बार खेलते समय या स्कूल आते-जाते बच्चों को गड्ढों की गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे उनकी जान तक जोखिम में पड़ जाती है।     आयोग ने नगरीय क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर खुले गड्ढों, नालियों और निर्माणाधीन स्थलों की पहचान करने तथा उन्हें तत्काल भरने या उनके चारों ओर मजबूत बैरिकेडिंग और सुरक्षा घेरा लगाने की अनुशंसा की है। साथ ही निर्माण एजेंसियों और आवासीय कॉलोनियों को भी निर्देशित करने कहा गया है कि निर्माण कार्यों के लिए खोदे गए गड्ढों को खुला न छोड़ें और उनके आसपास पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करें।     डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि संवेदनशील और निर्माणाधीन स्थलों पर आवश्यकता अनुसार चौकीदार या सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएं, ताकि बच्चों को संभावित जोखिम से बचाया जा सके। उन्होंने इस विषय को अत्यंत संवेदनशील बताते हुए जिला स्तर पर नियमित समीक्षा करने और संबंधित अधिकारियों को सतत निगरानी रखने की आवश्यकता पर बल दिया।     आयोग ने संबंधित विभागों और निकायों से इस दिशा में त्वरित कार्रवाई करते हुए किए गए उपायों की जानकारी 7 जुलाई 2026 तक उपलब्ध कराने को कहा है, ताकि बारिश के मौसम में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

यूपीटीईटी-2026 के लिए व्यापक तैयारियां, 60 जनपदों के 955 परीक्षा केन्द्रों पर लगभग 20 लाख अभ्यर्थी होंगे शामिल

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी)-2026 प्रदेश के लाखों युवाओं की आकांक्षाओं से जुड़ी अत्यंत महत्वपूर्ण परीक्षा है। इसकी निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता किसी भी परिस्थिति में प्रभावित नहीं होनी चाहिए। परीक्षा का संचालन केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य के प्रति सरकार की जवाबदेही का विषय है। प्रत्येक अभ्यर्थी को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और तनावमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि परीक्षा में शामिल होने वाले किसी भी अभ्यर्थी को आवागमन, प्रवास, सुरक्षा अथवा अन्य मूलभूत सुविधाओं के अभाव में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। मुख्यमंत्री मंगलवार को आगामी 02, 03 एवं 04 जुलाई, 2026 को आयोजित होने वाली उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा-2026 की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा कर रहे थे।  इस दौरान, मुख्यमंत्री ने सेवारत शिक्षकों के हितों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता को देखते हुए कार्यरत शिक्षकों को अपनी पात्रता सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिए। इसी उद्देश्य से उन्होंने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को सेवारत शिक्षकों के लिए पृथक शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि उन्हें अधिक अवसर मिल सकें और केवल अवसर के अभाव में किसी शिक्षक को कठिनाई का सामना न करना पड़े। मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षा के दौरान बड़ी संख्या में अभ्यर्थी प्रदेश के विभिन्न जनपदों के साथ अन्य राज्यों से भी आएंगे। ऐसे में रेलवे स्टेशन, बस अड्डों तथा प्रमुख यातायात केन्द्रों पर पर्याप्त सहायता व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। अभ्यर्थियों को परीक्षा केन्द्रों तक पहुंचने में किसी प्रकार की असुविधा न हो। परिवहन निगम, रेलवे तथा आवश्यकतानुसार निजी स्थानीय परिवहन संचालकों के साथ समन्वय स्थापित कर अतिरिक्त परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। परीक्षा के पूर्व एवं पश्चात संभावित भीड़ को देखते हुए प्रभावी यातायात प्रबंधन किया जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर विशेष व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि बड़ी संख्या में युवाओं के आवागमन के दौरान खाद्य एवं पेय पदार्थों के मूल्य अनावश्यक रूप से न बढ़ाए जाएं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी परीक्षा केन्द्रों पर पेयजल, स्वच्छ शौचालय, छायादार प्रतीक्षास्थल, निर्बाध विद्युत आपूर्ति, अग्निशमन व्यवस्था तथा आकस्मिक चिकित्सा सुविधा अनिवार्य रूप से उपलब्ध रहे। वर्तमान मौसम को देखते हुए स्वास्थ्य एवं आपदा प्रबंधन तंत्र पूरी तरह सक्रिय रखा जाए। प्रत्येक जनपद में स्थापित कंट्रोल रूम प्रभावी ढंग से कार्य करें तथा किसी भी सूचना पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े सभी जिलाधिकारियों को मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि परीक्षा के सफल एवं त्रुटिरहित संचालन के लिए एक दिन पूर्व सभी व्यवस्थाओं का पूर्वाभ्यास अनिवार्य रूप से कर लिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षा की शुचिता सर्वोपरि है। परीक्षा ड्यूटी में केवल स्वच्छ छवि वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों की ही तैनाती की जाए। गोपनीय परीक्षा सामग्री के भंडारण, परिवहन तथा परीक्षा उपरांत आयोग तक उसके सुरक्षित प्रेषण की पूरी प्रक्रिया उच्चतम सुरक्षा मानकों के अनुरूप संपन्न कराई जाए। उन्होंने सोशल मीडिया तथा अन्य माध्यमों पर अफवाह, भ्रामक अथवा गलत सूचनाएं प्रसारित करने के प्रयासों पर कड़ी निगरानी रखने और ऐसे मामलों में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा-2026 का आयोजन प्रदेश के 60 जनपदों में स्थापित 955 परीक्षा केन्द्रों पर किया जाएगा। परीक्षा 02 से 04 जुलाई तक कुल पांच पालियों में आयोजित होगी। 02 जुलाई को दोनों पालियों में उच्च प्राथमिक स्तर की परीक्षा होगी। 03 जुलाई को प्रथम पाली में उच्च प्राथमिक तथा द्वितीय पाली में प्राथमिक स्तर की परीक्षा आयोजित की जाएगी। 04 जुलाई को प्रथम पाली में प्राथमिक स्तर की परीक्षा संपन्न होगी। बैठक में बताया गया कि परीक्षा में कुल 19,94,661 अभ्यर्थी सम्मिलित होंगे। इनमें 17,67,180 अभ्यर्थी उत्तर प्रदेश के हैं, जबकि 2,27,481 अभ्यर्थी अन्य राज्यों से परीक्षा देने आएंगे। परीक्षा में 1,85,791 सेवारत शिक्षक तथा 18,08,870 नए अभ्यर्थी सम्मिलित होंगे। प्राथमिक स्तर के लिए 3,88,179, उच्च प्राथमिक स्तर के लिए 8,16,436 तथा दोनों स्तरों के लिए 3,95,023 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। बैठक में यह भी बताया गया कि सर्वाधिक परीक्षा केन्द्र एवं अभ्यर्थियों वाले जनपदों में वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ, गोरखपुर, कानपुर नगर, मेरठ, मऊ, मुरादाबाद, आगरा तथा जौनपुर प्रमुख हैं। वाराणसी में 68 परीक्षा केन्द्रों पर 1,27,239 अभ्यर्थी परीक्षा देंगे। प्रयागराज में 53 परीक्षा केन्द्रों पर 76,634 तथा लखनऊ में 43 परीक्षा केन्द्रों पर 76,720 अभ्यर्थी परीक्षा में सम्मिलित होंगे। इन जनपदों में बाहरी जिलों एवं अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के आगमन को देखते हुए यातायात, सुरक्षा, चिकित्सीय सहायता तथा प्रवास संबंधी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

Train Delay Alert: यात्रियों के लिए बड़ी राहत, 15 मिनट से ज्यादा देरी पर मोबाइल ऐप देगा तुरंत सूचना

भोपाल  भारतीय रेलवे से सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए एक बेहद अच्छी खबर है। आने वाले समय में ट्रेनों के लेट होने की समस्या से काफी हद तक छुटकारा मिल सकता है। रेलवे ने ट्रेनों की आवाजाही पर सटीक और रियल-टाइम नजर रखने के लिए एक आधुनिक एंड्रॉयड मोबाइल एप्लीकेशन लॉन्च किया है। इस खास ऐप का नाम 'Punctuality BZA' है, जिसे साउथ कोस्ट रेलवे के विजयवाड़ा डिवीजन द्वारा विकसित किया गया है। इस डिजिटल तकनीक के आने से अब रेलवे के परिचालन से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी अपने स्मार्टफोन पर ही किसी भी ट्रेन की सटीक लोकेशन, उसकी गति और देरी से जुड़ी पल-पल की जानकारी हासिल कर सकेंगे। पहले जिस काम के लिए सिर्फ कंप्यूटर सिस्टम पर निर्भर रहना पड़ता था, वह काम अब बेहद तेज और आसान हो गया है। एक ही डैशबोर्ड पर मिलेगी पूरी कुंडली 'Punctuality BZA' एप्लीकेशन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसके सिंगल डैशबोर्ड पर ही यूजर को ट्रेन संचालन से जुड़ी तमाम जानकारियां मिल जाती हैं। इस ऐप में मिलने वाली मुख्य सुविधाएं इस प्रकार हैं:     लाइव ट्रैकिंग: अलग-अलग रूट और सेक्शन पर ट्रेनों की मौजूदा स्थिति की लाइव मॉनिटरिंग।     इंटेलिजेंट अलर्ट सिस्टम: यदि कोई ट्रेन अपने निर्धारित समय से 15 मिनट से अधिक लेट होती है, तो यह ऐप अधिकारियों को तुरंत अलर्ट भेजता है।     जीपीएस कनेक्टिविटी: यह ऐप सीधे 'जीपीएस आधारित लेट ट्रेन मॉनिटरिंग सिस्टम' से जुड़ा है, जो ट्रेनों की आवाजाही को खुद-ब-खुद रिकॉर्ड करता है।     कागजी कार्रवाई से मुक्ति: ट्रेन के लेट होने की वजहों को डिजिटल माध्यम से तुरंत दर्ज कर लिया जाता है, जिससे पुराना कागजी काम बेहद कम हो गया है। इससे ट्रेन मैनेजरों को सुरक्षित ट्रेन संचालन पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है। पुराने सिस्टम (ICMS) की कमियों से मिलेगा छुटकारा इस नई तकनीक के आने से पहले रेलवे मुख्य रूप से 'इंटीग्रेटेड कोचिंग मैनेजमेंट सिस्टम' (ICMS) के वेब पोर्टल का इस्तेमाल करता था। पुराने सिस्टम में अधिकारियों को बार-बार वन-टाइम पासवर्ड (OTP) डालकर लॉगइन करना पड़ता था। साथ ही, अलग-अलग जानकारियों के लिए बार-बार कंप्यूटर स्क्रीन बदलनी पड़ती थी, जिससे समय की बर्बादी होती थी। नया ऐप इस पूरी प्रक्रिया को बेहद सरल और 'यूजर-फ्रेंडली' बनाता है। यात्रियों और रेलवे को क्या होगा बड़ा फायदा? इस ऐप के जरिए मिलने वाले सटीक डेटा से रेलवे के उच्च अधिकारियों को विपरीत परिस्थितियों में तुरंत और सही निर्णय लेने में मदद मिलेगी। जब रेलवे स्टाफ के पास हर ट्रेन की रियल-टाइम लोकेशन होगी, तो वे ट्रेनों को ज्यादा कुशलता से री-शेड्यूल कर पाएंगे, जिसका सीधा फायदा यात्रियों को होगा और उनकी असुविधाएं कम होंगी। विजयवाड़ा डिवीजन में इस ऐप के सफल प्रयोग के बाद अब इसे भारतीय रेलवे के अन्य डिवीजनों में भी लागू करने की योजना बनाई जा रही है।  

PM सूर्य घर योजना: 3KW सोलर प्लांट पर ₹78,000 की सब्सिडी, ऊर्जा मंत्री तोमर ने दी जानकारी

पीएम सूर्य घर योजना में तीन किलोवॉट के सौर संयंत्र लगाने पर मिल रही 78 हजार रूपये की सब्सिडी : ऊर्जा मंत्री तोमर अब तक 1 लाख 43 हजार 150 उपभोक्‍ताओं के खातों में पहुंची 100 करोड़ रूपये से अधिक की सब्सिडी भोपाल ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि पीएम सूर्यघर योजना के तहत अब तक कुल एक लाख 43 हजार 150 उपभोक्‍ता लाभान्वित हुए हैं। इनके बैंक खातों में 1010 करोड़ 25 लाख रूपये की सब्सिडी जमा कराई जा चुकी है। योजना के तहत एक किलोवॉट सोलर संयंत्र लगाने पर 30 हजार रूपये, दो किलोवॉट सोलर संयंत्र लगाने पर 60 हजार रुपए तथा तीन किलोवॉट या उससे अधिक के सोलर संयंत्र स्थापना पर 78 हजार रुपए की सब्सिडी केन्द्र सरकार द्वारा दी जा रही है। कहां करें आवेदन पीएम सूर्यघर योजना का शुभारंभ 13 फरवरी 2024 को हुआ था। योजना में शामिल होने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। जिसके लिए पीएम सूर्य घर योजना की वेबसाइट pmsuryaghar.gov.in पर जाकर आवेदन किया जा सकता है। इसके अलावा अधिक जानकारी के लिए संबंधित विद्य़ुत वितरण कंपनी की वेबसाइट अथवा उपाय एप, वॉट्सऐप चेटबॉट एवं टोल फ्री नं, 1912 पर भी संपर्क किया जा सकता है। उपभोक्ताओं को समय पर सब्सिडी मिले इसके लिए वेंडर और उपभोक्ता दोनों को ध्यान रखना होगा कि उनके बैंक खाते में नाम, आधार कार्ड में नाम तथा बिजली बिल में नाम एक समान होना चाहिए। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन उपरांत विद्युत वितरण कंपनी में रजिस्टर्ड अधिकृत वेंडर से ही सौर ऊर्जा संयंत्र लगवाएं। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के अंतर्गत सौर संयंत्रों में केवल स्मार्ट मीटर ही लगाए जा रहे हैं। कंपनीवार स्थिति मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी क्षेत्र में 51 हजार 343 सोलर संयंत्रों पर 361 करोड़ 99 लाख, पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी क्षेत्र में 58 हजार 715 संयंत्रों पर 4162 करोड़ 30 लाख 39 हजार और पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी क्षेत्र में 33 हजार 092 सोलर संयंत्रों पर 231 करोड़ 95 लाख 50 हजार रूपये की सब्सिडी दी गई है।  

भोरमदेव जंगल सफारी बनी छत्तीसगढ़ के इको-टूरिज्म की नई पहचान, पर्यटकों की बढ़ी पसंद

रायपुर : भोरमदेव जंगल सफारी बनी छत्तीसगढ़ के इको-टूरिज्म की नई पहचान पर्यटन, प्रकृति और रोजगार का नया आयाम एक माह में ही पहुंचे 480 से ज्यादा पर्यटक, युवाओं, महिला समूह, वन प्रबंधन समिति को पौने 3 लाख रुपए से अधिक की हुई आय पर्यटन के साथ स्थानीय समुदाय को मिल रहा प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ जंगल सफारी, प्राकृतिक सौंदर्य और वन्यजीवों की रोमांचक साइटिंग से पर्यटकों का बढ़ा आकर्षण रायपुर   छत्तीसगढ़ में पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण का एक अनूठा संगम देखने को मिल रहा है भोरमदेव जंगल सफारी में । 'ईको-टूरिज्म' के तहत स्थानीय जैव विविधता को नुकसान पहुंचाए बिना लोगों को प्रकृति से जोड़ने की नई पहल शुरू की गई है, जिसमें पर्यटकों को आकर्षित करने वाले शानदार मॉडल शामिल हैं।               छत्तीसगढ़ सरकार की इको-टूरिज्म पहल के तहत विकसित भोरमदेव जंगल सफारी संचालन के पहले ही महीने में छत्तीसगढ़ के इको-टूरिज्म की नई पहचान बनकर उभरी है। जंगल सफारी प्रकृति प्रेमियों और रोमांच के शौकीनों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गई है, सिर्फ एक माह में ही 489 से अधिक पर्यटक यहां पहुंचे हैं, वहीं स्थानीय युवाओं, वन प्रबंधन समिति और स्व-सहायता समूहों को रोजगार एवं आमदनी के नए अवसर मिले हैं। भोरमदेव जंगल सफारी प्रकृति, रोमांच और स्थानीय विकास का सफल संगम बनी यह पहल भोरमदेव को राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों में स्थापित करने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान कर रही है। एक माह में पहुंचे सैंकड़ों पर्यटक          मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा तथा वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में शुरू की गई यह जंगल सफारी आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गई है। वन मंडलाधिकारी श्री निखिल अग्रवाल ने बताया कि भोरमदेव जंगल सफारी का उद्घाटन 3 मई को कर पर्यटकों के लिए इसका संचालन शुरू किया गया था। मानसून को देखते हुए 4 जून से सफारी को अस्थायी रूप से स्थगित किया गया है। मात्र एक माह के संचालन के दौरान 480 से अधिक पर्यटकों ने जंगल सफारी का आनंद लिया, जिससे पौने 3 लाख रुपए से अधिक की राशि प्राप्त हुई है। बारिश के बाद नवंबर माह से इसका संचालन फिर से शुरू होगा।  पर्यटन के साथ स्थानीय लोगों को मिला रोजगार        भोरमदेव जंगल सफारी की शुरुआत से स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के नए अवसर मिले हैं। केवल एक महीने के संचालन में वाहन चालक, गाइड और गेट कीपर के रूप में कार्यरत 17 स्थानीय युवाओं ने 75 हजार रुपये से अधिक की आय अर्जित की। वहीं वन प्रबंधन समिति को 92 हजार और वन विभाग को 26 हजार रुपये से अधिक की आय प्राप्त हुई। सफारी परिसर में स्व-सहायता समूह द्वारा संचालित कैंटीन भी पर्यटकों की पसंद बनी रही। एक माह में कैंटीन से 20 हजार रुपये से अधिक का मुनाफा हुआ, जिससे समूह की महिलाओं की आय बढ़ी और उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मजबूती मिली। सिर्फ सफारी ही नहीं, उद्यान भी बना आकर्षण का केंद्र        जंगल सफारी के साथ-साथ भोरमदेव का प्राकृतिक उद्यान भी पर्यटकों की पसंद बन रहा है। सफारी का आनंद लेने वाले पर्यटकों के अलावा 1500 से अधिक लोगों ने उद्यान का भी भ्रमण किया। इससे साफ है कि भोरमदेव क्षेत्र धीरे-धीरे प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बना रहा है। वन्यजीवों की रोमांचक साइटिंग ने बढ़ाया आकर्षण        करीब 36 किलोमीटर लंबी जंगल सफारी के दौरान पर्यटकों को कई वन्यजीवों और पक्षियों को करीब से देखने का अवसर मिला। सफारी में भारतीय गौर, भालू, नीलगाय, सांभर, कोटरी (बार्किंग डियर), बाघ के पदचिह्न (टाइगर पगमार्क), जंगली मुर्गा, विभिन्न प्रजातियों के पक्षी और रंग-बिरंगी तितलियां पर्यटकों के लिए खास आकर्षण रहीं। घने जंगल, ऊंची पहाड़ियां और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर वातावरण ने सफारी को रोमांचक और यादगार अनुभव बना दिया। इको-टूरिज्म की नई पहचान         वन मंडलाधिकारी श्री निखिल अग्रवाल ने बताया कि लगभग 352 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले भोरमदेव अभयारण्य में 36 किलोमीटर लंबा जंगल सफारी मार्ग तैयार किया गया है। सफारी का मुख्य प्रवेश द्वार भोरमदेव मंदिर के पास करियाआमा क्षेत्र में स्थित है, जहां से पर्यटक अपनी जंगल यात्रा शुरू करते हैं। इस सफारी के माध्यम से पर्यटकों को छत्तीसगढ़ के समृद्ध वन, वन्यजीव, जैव विविधता और प्राकृतिक सुंदरता को करीब से देखने का अवसर मिल रहा है। साथ ही, इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के नए अवसर भी मिल रहे हैं।

बोधि वृक्ष से 3डी गैलरी तक, बुद्ध दर्शन का मिलेगा अनूठा अनुभव, लाइट एंड साउंड शो होगा खास

लखनऊ/कुशीनगर  योगी सरकार में वैश्विक बौद्ध पर्यटन मानचित्र पर उत्तर प्रदेश की पहचान को और मजबूत करने वाली एक महत्वपूर्ण परियोजना अब पूरी तरह तैयार हो चुकी है। कुशीनगर में उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) द्वारा गौतम बुद्ध संग्रहालय के नजदीक लगभग 11.32 करोड़ रुपये की लागत से विकसित बुद्ध थीम पार्क का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। यह पार्क जल्द ही आम जनता के लिए खोला जाएगा।  आधुनिक तकनीक, आध्यात्मिक अनुभव और बौद्ध विरासत के अद्भुत संगम के रूप में विकसित यह थीम पार्क देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को भगवान बुद्ध के जीवन, दर्शन और करुणा के संदेश से जोड़ने का नया माध्यम बनेगा। इंटरएक्टिव गैलरियों से मिलेगा आध्यात्मिक अनुभव बुद्ध थीम पार्क को केवल एक पर्यटन स्थल के रूप में नहीं, बल्कि बौद्ध ज्ञान और आध्यात्मिकता के जीवंत अनुभव केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। यहां संवादात्मक शैली में कहानी कहने, हेरिटेज इंटरप्रिटेशन और आधुनिक प्रस्तुतीकरण तकनीकों के माध्यम से भगवान बुद्ध के जीवन की प्रमुख घटनाओं और उनकी शिक्षाओं को आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया है। पार्क का उद्देश्य यहां आने वालों को केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मचिंतन और आंतरिक जागृति का अनुभव कराना भी है। बोधि वृक्ष और आठ तथागत स्तूप होंगे प्रमुख आकर्षण पार्क का सबसे प्रमुख आकर्षण बोधि वृक्ष होगा, जहां संवादात्मक शैली में भगवान बुद्ध के ज्ञान, करुणा और जीवन मूल्यों को प्रस्तुत किया जाएगा। इसके अलावा तिब्बती शैली के स्तूप, प्रार्थना चक्र (प्रेयर व्हील्स), मूर्तिकला स्थापनाएं और विभिन्न अनुभवात्मक प्रदर्शनियां आगंतुकों (पर्यटकों व अन्य) को बौद्ध संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं से परिचित कराएंगी। यहां स्थापित आठ तथागत स्तूप भगवान बुद्ध के आठ महान कार्यों का प्रतीक होंगे और बौद्ध दर्शन की गहराई को समझने का अवसर प्रदान करेंगे। 3डी झांकियां और डिजिटल तकनीक से जीवंत होगा बुद्ध जीवन पार्क में तैयार की गई 3D झांकियां और डिजिटल प्रदर्शनियां भगवान बुद्ध के जीवन की प्रमुख घटनाओं को आधुनिक तकनीक के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत करेंगी। विशेष रूप से विकसित ट्रेवलॉग इंस्टॉलेशन बुद्ध की पवित्र यात्रा को क्रमबद्ध रूप से दर्शाएगा। इसके साथ ही भूमिस्पर्श, ध्यान, अभय और धर्मचक्र सहित भगवान बुद्ध की आठ विशाल मुद्राएं स्थापित की गई हैं, जो उनके जीवन, उपदेशों और बौद्ध दर्शन के मूल सिद्धांतों का प्रतिनिधित्व करती हैं। 40 फीट बुद्ध वॉल पर होगा लाइट एंड साउंड शो पर्यटकों को एक यादगार अनुभव देने के लिए पार्क में अत्याधुनिक ऑडियो-विजुअल तकनीक का उपयोग किया गया है। यहां 40 फीट ऊंची फैसाड बुद्ध वॉल पर भव्य लाइट एंड साउंड शो का आयोजन होगा, जिसमें कला, तकनीक और प्रभावशाली प्रस्तुति के माध्यम से भगवान बुद्ध के जीवन और उनके संदेशों को जीवंत किया जाएगा। भव्य प्रवेश द्वार और सांस्कृतिक आकर्षण भी होंगे विशेष पार्क का भव्य प्रवेश द्वार प्राचीन बौद्ध तोरणों से प्रेरित है। इस पर उत्कृष्ट नक्काशी और प्रतीकात्मक कलाकृतियों के माध्यम से शांति, ज्ञान और करुणा का संदेश प्रदर्शित किया गया है। इसके अलावा पार्क में बुद्ध जीवन दीर्घाएं, भगवान बुद्ध के जीवन प्रसंगों पर आधारित कलात्मक भित्ति चित्र, सांस्कृतिक थीम पर आधारित बच्चों का खेल क्षेत्र और स्मारिका केंद्र भी विकसित किया गया है, जहां बौद्ध हस्तशिल्प और स्थानीय कारीगरों के उत्पाद उपलब्ध होंगे। कुशीनगर की वैश्विक पहचान होगी और मजबूत यूपी के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि बुद्ध थीम पार्क का निर्माण पूरा होना कुशीनगर में बौद्ध पर्यटन को सशक्त बनाने का एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि यह परियोजना आध्यात्मिकता, कला, संस्कृति और आधुनिक तकनीक का अद्भुत संगम है, जो देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भगवान बुद्ध के जीवन और विचारों से गहराई से जोड़ने का अवसर देगी।  उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश के बौद्ध सर्किट में लगभग 82 लाख पर्यटक पहुंचे, जिनमें 4.4 लाख से अधिक विदेशी यात्री शामिल थे। ऐसे में यह नया थीम पार्क कुशीनगर की वैश्विक पहचान को और मजबूत करेगा और उत्तर प्रदेश को विश्वस्तरीय बौद्ध पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।