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दंतेवाड़ा में एनएमडीसी के समर कैंप को मिल रहा शानदार प्रतिसाद

दंतेवाड़ा दंतेवाड़ा जिले के जिन गांवों में एनएमडीसी द्वारा समर कैंप शुरू किए गए हैं, वहां बच्चों, अभिभावकों और स्थानीय हितधारकों की ओर से बेहद उत्साहजनक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। इन कैंपों के माध्यम से बच्चों को रचनात्मक गतिविधियों, खेल, शिक्षा और व्यक्तित्व विकास से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिल रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी सकारात्मक माहौल बन रहा है। समर कैंप के प्रति बढ़ती रुचि के चलते सामुदायिक भागीदारी लगातार मजबूत हो रही है। स्थानीय लोग भी बच्चों के विकास और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए इस पहल में सक्रिय सहयोग दे रहे हैं। कैंपों में बच्चों की बढ़ती उपस्थिति यह दर्शाती है कि यह पहल ग्रामीण समाज में नई ऊर्जा और उत्साह भर रही है। एनएमडीसी ने कहा है कि आने वाले हफ्तों में इस पहल का और अधिक विस्तार किया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा गांवों के बच्चे इसका लाभ उठा सकें। संस्था ने एनएमडीसी परिवारों और समुदाय के सदस्यों से अपील की है कि वे दंतेवाड़ा के बच्चों के लिए इस गर्मी को और अधिक आनंददायक, रचनात्मक और यादगार बनाने में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

सम्राट सरकार की नई ट्रांसफर लिस्ट जारी, गृह विभाग समेत कई अहम पदों पर बदलाव

पटना बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद से बड़े पैमाने पर प्रशासनिक अधिकारियों का फेरबदल हो रहा है। सम्राट सरकार ने शुक्रवार को एक बार फिर भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की ट्रांसफर लिस्ट निकाल दी। इसके तहत 11 आईएएस का तबादला किया गया है। इसमें कुछ विभागों के अपर मुख्य सचिव भी बदले गए हैं। वरीय आईएएस दीपक कुमार को लोकभवन भेज दिया गया है। वहीं, गृह विभाग के एसीएस अरविंद कुमार को मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग में भेजा गया है। कुंदन कुमार को गृह विभाग का सचिव बनाया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने शुक्रवार को आईएएस अधिकारियों की नई पोस्टिंग की अधिसूचना जारी की। इसके तहत 1992 बैच के आईएएस दीपक कुमार को राज्यपाल का प्रधान सचिव बनाया गया है, उनके पास सामान्य प्रशासन विभाग के महानिदेशक और मुख्य जांच आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार रहेगा। अरविंद चौधरी का गृह विभाग से ट्रांसफर 1995 बैच के आईएएस अधिकारी गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी का तबादला कर उन्हें मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग का एसीएस नियुक्त किया गया है। उनके पास बिहार कर्मचारी चयन आयोग के अध्यक्ष और बिहार राज्य संयुक्त प्रवेश परीक्षा पर्षद के परीक्षा नियंत्रक का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा। उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार का ट्रांसफर कर गृह विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है। 1995 बैच के एक और वरीय अधिकारी एवं सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव बी राजेंदर को निगरानी विभाग के एसीएस का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वित्त विभाग के सचिव संजय कुमार सिंह को सामान्य प्रशासन विभाग के जांच आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। सीमा त्रिपाठी और निलेश देवरे की नई पोस्टिंग बिहार मानवाधिकार आयोग की सचिव सीमा त्रिपाठी को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का सचिव बनाया गया है। सिविल विमानन विभाग के विशेष सचिव निलेश रामचंद्र देवरे को बिहार राज्य आवास बोर्ड के प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार सौंप गया है। 2012 बैच की आईएएस इनायत खान को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के विशेष सचिव का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वह बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड का प्रबंध निदेशक हैं। मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के विशेष सचिव अरविंद कुमार वर्मा को उद्योग विभाग में विशेष सचिव का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। बिहार राज्य आवास बोर्ड के प्रबंध निदेशक राजीव कुमार श्रीवास्तव का ट्रांसफर कर उन्हें वित्त विभाग का अपर सचिव लगाया गया है। गोपाल मीणा सेंट्रल डेप्युटेशन पर गए राज्यपाल के मौजूदा प्रधान सचिव गोपाल मीणा को बिहार सरकार ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए विरमित कर दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने शुक्रवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी। उन्हें केंद्र सरकार ने नोएडा का विकास आयुक्त बनाया है।

हरियाणा: ग्रामीण विकास पर फोकस, फतेहाबाद को मिलेगा करोड़ों का बजट

 फतेहाबाद  जिले में विकास कार्यों को गति देने के लिए शनिवार को जिला विकास एवं निगरानी समिति (डीडीएमसी) की बैठक आयोजित होगी। इस बैठक की अध्यक्षता सामाजिक न्याय, अधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी करेंगे। बैठक में वर्ष 2026-27 की जिला योजना के तहत तैयार वार्षिक कार्य योजना को मंजूरी दी जाएगी। जिला योजना के अंतर्गत जिले के लिए कुल 14.86 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। इसमें 8.91करोड़ रुपये सामान्य वर्ग तथा 5.94 करोड़ रुपये अनुसूचित वर्ग के विकास कार्यों के लिए निर्धारित किए गए हैं। पिछले वित्तीय वर्ष के लंबित कार्यों के 1.56 करोड़ रुपये के बिलों के भुगतान के बाद शेष 13.29 करोड़ रुपये की राशि जिले में विभिन्न विकास कार्यों पर खर्च की जाएगी। बैठक को जिले की विकास योजनाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों पर रहेगा सबसे ज्यादा फोकस बैठक में प्रस्तुत होने वाले प्रस्तावित बजट के अनुसार इस बार भी ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता दी गई है। ग्रामीण इलाकों के लिए 10.33 करोड़ रुपये जबकि शहरी क्षेत्रों के लिए 2.95 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। ब्लाक स्तर पर सबसे अधिक 2.39 करोड़ रुपये फतेहाबाद ब्लाक को मिलने का प्रस्ताव है। इसके अलावा टोहाना ब्लाक के लिए 1.81 करोड़ रुपये, रतिया के लिए 1.52 करोड़ रुपये, भट्टू कलां के लिए 1.46 करोड़ रुपये, भूना के लिए 1.38 करोड़ रुपये, नागपुर के लिए 1.02 करोड़ रुपये तथा जाखल ब्लाक के लिए 72.53 लाख रुपये निर्धारित किए गए हैं। शहरी निकायों में खर्च होगी इतनी राशि वहीं, शहरी निकायों के विकास कार्यों के लिए भी अलग से बजट तय किया गया है। नगर परिषद फतेहाबाद को 99.88 लाख रुपये, टोहाना को 52.43 लाख रुपये, भूना को 42.47 लाख रुपये, रतिया को 39.90 लाख रुपये तथा जाखल को 10.99 लाख रुपये दिए जाने का प्रस्ताव है। बैठक में इन प्रस्तावों पर चर्चा के बाद अंतिम मंजूरी दी जाएगी। बता दें कि सड़कों, गलियों, पेयजल, सामुदायिक भवनों और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कार्यों को इस बजट से गति मिलेगी। पिछले कार्यों की भी होगी समीक्षा बैठक में पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में हुए विकास कार्यों की प्रगति रिपोर्ट भी रखी जाएगी। रिकार्ड के अनुसार पिछले वर्ष भी जिले को 14.86 करोड़ रुपये का बजट मिला था। 31 मार्च 2026 तक 13.54 करोड़ रुपये की राशि विकास कार्यों पर खर्च की जा चुकी है। इसमें सामान्य वर्ग के कार्यों पर 7.65 करोड़ रुपये तथा अनुसूचित वर्ग के विकास कार्यों पर 5.88 करोड़ रुपये व्यय किए गए। पिछले वर्ष कुल 142 कार्य स्वीकृत किए गए थे भौतिक प्रगति रिपोर्ट के अनुसार पिछले वर्ष कुल 142 कार्य स्वीकृत किए गए थे। इनमें से 80 कार्य पूरे हो चुके हैं जबकि 119 कार्य अभी विभिन्न चरणों में प्रगति पर हैं। बैठक में इन परियोजनाओं की स्थिति पर विस्तार से चर्चा होगी और लंबित कार्यों को जल्द पूरा करने के निर्देश भी मंत्री द्वारा दिए जाएंगे।साथ ही 10 जुलाई 2025 को हुई पिछली बैठक की कार्यवाही की पुष्टि भी सदन में की जाएगी। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की रहेगी मौजूदगी डीडीएमसी की इस बैठक में शामिल होने के लिए प्रशासन की तरफ से जिले के कई प्रमुख जनप्रतिनिधि को निमंत्रण भेजा गया है। बैठक में राज्यसभा सांसद सुभाष बराला, सिरसा लोकसभा सांसद कुमारी शैलजा, फतेहाबाद विधायक बलवान सिंह दौलतपुरिया, रतिया विधायक जरनैल सिंह तथा टोहाना विधायक परमवीर सिंह, जिप चेयरपर्सन सुमन खिचड़ को आमंत्रित किया गया है।  

दिल्ली में बस सफर होगा आसान, सरकार ने 650 करोड़ की नई योजना को दी मंजूरी

 नई दिल्ली इस चिलचिलाती धूप और लू के बीच जब लोग छत विहीन स्टाप पर बस के लिए इंतजार कर भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं तो ऐसे समय में परिवहन विभाग अब बस स्टाप पर बस क्यू शेल्टर लगाने के काम का सर्वे करने के लिए प्राइवेट फर्म ढूंढ रहा है, इसके लिए टेंडर जारी किए गए हैं। 3,575 बस शेल्टर लगाने की योजना परिवहन विभाग लगभग 3,575 बस शेल्टर लगाएगा। इसे लापरवाही ही कहा जाएगा कि अगर यह काम छह माह पहले कर लिया गया होता तो आज हजारों लोग खुले आसमान के नीचे धूप में बस का इंतजार नहीं कर रहे होते। बस क्यू शेल्टर योजना पर करीब 600 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है। डीटीआईडीसी कर रहा परियोजना पर काम इस योजना पर परिवहन विभाग के अंतर्गत दिल्ली ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कार्पोरेशन (डीटीआइडीसी) काम कर रहा है। डीटीआइडीसी के एक अधिकारी ने कहा कि दिल्ली भर में सभी शेल्टर को डिजाइन करने, रीडेवलप करने और सर्वे करने के लिए एक प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी फर्म को हायर करने की योजना बनाई जा रही है। नए बस शेल्टर में होंगी आधुनिक सुविधाएं जिसके लिए एक टेंडर जारी किया गया है। याेजना के मुताबिक, रीडेवलप किए जाने वाले बस शेल्टर में कई सुविधाएं होंगी, जिसमें पैनिक अलार्म सिस्टम, वेदर डिस्प्ले, सोलर पैनल और डिजिटल एडवरटाइजिंग सिस्टम का इंतज़ाम शामिल है। 20 साल तक मेंटेनेंस भी शामिल डीटीआइडीसी के पास अभी लगभग 3,575 बस शेल्टर हैं, जिनके लिए कंसल्टिंग फर्म को हायर किया जा रहा है। प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 650 करोड़ रुपये है, जिसमें 20 साल तक मेंटेनेंस भी शामिल है। टेंडर के मुताबिक सभी बस शेल्टर में एक पब्लिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम भी उपलब्ध कराया जाएगा, जो यात्रियों को बस की जानकारी देगा। रीडेवलपमेंट का काम टेंडर मिलने की तारीख से छह महीने के अंदर पूरा करना होगा।

रक्षा सेक्टर के इस शेयर पर टूटा निवेशकों का भरोसा, रॉकेट टेस्टिंग के बाद आई तेजी

बेंगलुरु  डिफेंस सिस्टम बनाने वाली कंपनी निबे लिमिटड (Nibe Limited) के शेयर शुक्रवार को भारी डिमांड में थे। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन इस शेयर में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। शेयर में यह उछाल इजरायल की डिफेंस कंपनी Elbit सिस्टम्स के साथ मिलकर बनाए और विकसित किए गए लंबी दूरी के सूर्यास्त्र (Suryastra) रॉकेट सिस्टम के सफल फ्लाइट-टेस्ट के बाद आया। इस नए रॉकेट सिस्टम का टेस्ट-फायर ओडिशा के तट के पास स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) से किया गया। शेयर का परफॉर्मेंस इस खबर की वजह से शुक्रवार को शेयर 1,293.65 रुपये की पिछली क्लोजिंग के मुकाबले 14 पर्सेंट से ज्यादा उछलकर 1,469 रुपये तक जा पहुंचा। पिछले एक हफ्ते में शेयर लगभग 30 प्रतिशत बढ़ चुका है। शेयर का 52 वीक हाई 2000 रुपये और 52 वीक लो 810 रुपये है। निवेशकों में उत्साह की वजह बाजार विश्लेषकों ने शेयर को लेकर निवेशकों के उत्साह की मुख्य वजह 'सूर्यास्त्र' रॉकेट सिस्टम के सफल परीक्षण और 'वायु अस्त्र-1' लोइटरिंग म्यूनिशन के पहले ट्रायल की वजह से था। इसके अलावा, 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत भारत के रणनीतिक रक्षा निर्माण क्षेत्र में कंपनी की भविष्य की भूमिका को लेकर बढ़ती उम्मीदें भी इस तेजी की एक वजह थीं। बाजार विश्लेषकों ने कहा-हाल के वर्षों में किसी डिफेंस स्टॉक में देखी गई यह सबसे तेज उछालों में से एक हो सकती है। खासकर तब जब यह किसी उभरती हुई निजी क्षेत्र की कंपनी का स्टॉक हो। विश्लेषकों ने इस तेजी का श्रेय हथियारों के सफल परीक्षणों को लेकर निवेशकों के जबरदस्त उत्साह और भारत के स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षेत्र में बढ़ते अवसरों की उम्मीदों को दिया। सूर्यास्त्र रॉकेट सिस्टम का सफल टेस्ट रक्षा अधिकारियों ने बताया कि ओडिशा के चांदीपुर टेस्ट सेंटर से दो दिनों में सूर्यास्त्र रॉकेट सिस्टम के कई राउंड का सफल टेस्ट किया गया। इनमें 150 किलोमीटर और 300 किलोमीटर रेंज वाले वेरिएंट भी शामिल थे। 18 और 19 मई को लगातार हुए इन ट्रायल्स में मिशन के सभी लक्ष्य असाधारण सटीकता के साथ हासिल किए गए। इससे इस सिस्टम की लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता साबित हुई और भारत का स्वदेशी प्रिसिजन-गाइडेड रॉकेट आर्टिलरी प्रोग्राम और मजबूत हुआ। बता दें कि सूर्यास्त्र रॉकेट, एलबिट सिस्टम्स द्वारा विकसित 'प्रेसिज एंड यूनिवर्सल लॉन्चिंग सिस्टम' (PULS) टेक्नोलॉजी पर आधारित हैं और इनका निर्माण भारत में निबे ग्रुप के सहयोग से किया जा रहा है। इस सिस्टम को पारंपरिक फील्ड आर्टिलरी और भारी बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम के बीच की खाई को पाटने के लिए डिजाइन किया गया है। जनवरी में सेना के साथ समझौता जनवरी में भारतीय सेना ने आपातकालीन खरीद शक्तियों के तहत निबे लिमिटेड के साथ ₹292.69 करोड़ ($31 मिलियन) का एक कॉन्ट्रैक्ट किया था। यह कॉन्ट्रैक्ट 150 किलोमीटर और 300 किलोमीटर तक मार करने की क्षमता वाले एक उन्नत लंबी दूरी के रॉकेट लॉन्चर सिस्टम की आपूर्ति के लिए किया गया था। इस आपूर्ति को एक वर्ष के भीतर किस्तों में पूरा किया जाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सुशासन तिहार के समाधान शिविर में हुए शामिल

महतारी वंदन योजना बनी महिलाओं के आत्मविश्वास और बच्चों के भविष्य का सहारा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सुशासन तिहार के समाधान शिविर में हुए शामिल बलौदबाजार जिले के करहीबाजार में हितग्राहियों से की आत्मीय बातचीत सुशासन तिहार के समाधान शिविर में महिलाओं ने साझा किए अपने अनुभव रायपुर राज्य शासन की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। योजना के माध्यम से मिलने वाली आर्थिक सहायता महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उनके परिवार और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने में सहायक सिद्ध हो रही है। सुशासन तिहार के अंतर्गत बलौदबाजार जिले के करहीबाजार में आयोजित समाधान शिविर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने योजना की हितग्राहियों से संवाद कर उनके अनुभव जाने। हितग्राही श्रीमती रुखमनी पाल ने बताया कि उनके पति दिलेश्वर पाल मजदूरी कार्य करते हैं और परिवार की आय सीमित है। महतारी वंदन योजना के तहत प्राप्त होने वाली राशि को वे अपनी दो बेटियों के भविष्य के लिए जमा कर रही हैं। उन्होंने कहा कि योजना से मिलने वाली सहायता ने उन्हें आर्थिक संबल दिया है तथा बच्चों की पढ़ाई और आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है। इसी तरह योजना की एक अन्य हितग्राही श्रीमती धनमता पाल ने भी बताया कि उन्हें प्रतिमाह 1000 रुपये की सहायता राशि प्राप्त हो रही है। उनके पति होरीलाल पाल मजदूरी का कार्य करते हैं। धनमता पाल ने बताया कि वे इस राशि को अपने दो बच्चों के नाम पर जमा कर रही हैं ताकि भविष्य में उनकी शिक्षा और जरूरतों के लिए आर्थिक परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि पहले छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी चिंता बनी रहती थी, लेकिन अब योजना से मिलने वाली राशि ने परिवार को राहत दी है। बच्चों के भविष्य को लेकर उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है और वे बचत की दिशा में भी आगे बढ़ रही हैं। हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं के लिए सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का माध्यम बन रही है।

आतंकियों की साजिश का खुलासा, पहलगाम अटैक की चार्जशीट में सामने आए नए तथ्य

पहलगाम पहलगाम आतंकी हमले की चार्जशीट ने उस खौफनाक साजिश की परतें खोल दी हैं, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच में सामने आया है कि पहलगाम घूमने आए निर्दोष पर्यटकों को चुन-चुनकर निशाना बनाया गया. इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे. शुरुआती जांच में ही पता चल गया था कि इस वारदात को लश्कर-ए-तैयबा के संगठन TRF यानी द रजिस्टेंस फ्रंट ने अंजाम दिया. हमले के कुछ ही देर बाद TRF ने इसकी जिम्मेदारी ली थी, लेकिन बाद में उसने अपने बयान से पलटते हुए इसे फॉल्स नैरेटिव बता दिया।  इस हमले की जांच जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अनंतनाग के एडिशनल एसपी गुलाम हसन को सौंपी थी. जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि हमले को तीन आतंकियों ने मिलकर अंजाम दिया था. इनमें फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ छोटू और हमजा अफगानी शामिल थे. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, वैसे-वैसे इस पूरे हमले के मास्टरमाइंड का नाम भी सामने आया. जांच एजेंसियों ने बताया कि इस हमले की साजिश सज्जाद जट्ट उर्फ अली भाई ने रची थी, जो लंबे समय से आतंकी गतिविधियों से जुड़ा हुआ था।  हमले के तुरंत बाद घायल लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया और पुलिस व फॉरेंसिक टीमों ने घटनास्थल को अपने कब्जे में ले लिया. पूरे इलाके की घेराबंदी की गई और सबूत जुटाने का काम शुरू हुआ. मौके से हथियारों से जुड़े अहम सुराग, कारतूसों के खोखे और अन्य फॉरेंसिक सबूत बरामद किए गए. इसके साथ ही मृतकों के परिवार वालों और घटनास्थल पर मौजूद चश्मदीदों के बयान दर्ज किए गए. शुरुआती जांच में ही यह साफ हो गया था कि हमला पूरी प्लानिंग के साथ किया गया था।  30 अप्रैल को NIA ने पूरे इलाके में बड़े स्तर पर ग्रिड सर्च ऑपरेशन चलाया. इस अभियान में NIA, फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स, सुरक्षा बलों और एंटी-सैबोटाज टीमों को शामिल किया गया. पूरे जंगल और आसपास के इलाकों को खंगाला गया. जांच एजेंसियों ने हर संभावित जगह से सबूत जुटाने की कोशिश की. इसके बाद CBI से उस लोकेशन की 3D मैपिंग कराई गई, जिसकी रिपोर्ट 7 मई को NIA को सौंप दी गई. इस मैपिंग से आतंकियों की मूवमेंट और हमले के एंगल को समझने में मदद मिली।  जांच के दौरान NIA ने स्थानीय लोगों से भी बड़े पैमाने पर पूछताछ की. दुकानदारों, पोनी वालों, ढोक में रहने वाले लोगों और टैक्सी ड्राइवरों समेत कुल 1,113 लोगों से सवाल-जवाब किए गए. यही पूछताछ बाद में जांच की सबसे अहम कड़ी साबित हुई. एक अज्ञात गवाह ने एजेंसी को बताया कि हमले से एक दिन पहले उसने बशीर अहमद जोठाड़ को तीन हथियारबंद लोगों के साथ देखा था. गवाह के मुताबिक, बशीर उन तीनों को परवेज के ढोक यानी झोपड़ी में लेकर गया था।  गवाह ने आगे बताया कि 22 मई की सुबह जब वह बैसरन पार्क गया, तब उसने वहां बशीर और परवेज दोनों को देखा था. कुछ घंटों बाद ही बैसरन में गोलीबारी की खबर आ गई. इसी गवाह ने जांच एजेंसियों को यह भी बताया कि बाद में आतंकियों ने उसे भी पकड़ लिया था और उससे कलमा पढ़ने को कहा था. जब उसने कलमा पढ़ दिया, तब जाकर आतंकियों ने उसे छोड़ा. इस बयान ने जांच एजेंसियों को यह यकीन दिलाया कि हमलावर धर्म के आधार पर लोगों को निशाना बना रहे थे।  गवाह से मिली जानकारी के बाद NIA ने कई जगहों पर छापेमारी की. जांच में कुछ और अहम सबूत हाथ लगे, जिसके बाद 22 जून को पोनी वाले बशीर अहमद और परवेज अहमद को गिरफ्तार कर लिया गया. पूछताछ के दौरान परवेज अहमद ने उस रात की पूरी कहानी जांच एजेंसियों को बताई. उसने कहा कि 21 अप्रैल की शाम करीब 5 बजे वह अपनी पत्नी और छोटे बेटे के साथ ढोक में चाय पीने की तैयारी कर रहा था, तभी उसका मामा बशीर वहां पहुंचा और सबको चुप रहने के लिए कहा।  कुछ देर बाद बशीर बाहर गया और फिर तीन हथियारबंद लोगों के साथ लौटा. तीनों के हाथों में बंदूकें थीं और वे बेहद थके हुए लग रहे थे. उन्होंने पानी मांगा और अंदर बैठ गए. परवेज ने बताया कि उन लोगों ने कहा कि वे लंबा सफर तय करके आए हैं. इसके बाद उन्होंने अल्लाह के रास्ते में लड़ने वालों की मदद करने पर सवाब मिलने की बात कही. परवेज के मुताबिक, वे लगातार जिहाद और कश्मीर की आजादी की बातें कर रहे थे।  परवेज ने बताया कि उसकी पत्नी ताहिरा ने उन आतंकियों के लिए खाना बनाया था. खाना खाते समय आतंकी अमरनाथ यात्रा, सुरक्षा बलों की आवाजाही और इलाके में तैनाती के बारे में सवाल पूछ रहे थे. परवेज ने जांच एजेंसियों को बताया कि आतंकी उर्दू बोल रहे थे, लेकिन उनकी बोली में पंजाबी लहजा साफ महसूस हो रहा था. आपस में भी वे पंजाबी में ही बात कर रहे थे. परवेज की पत्नी ताहिरा ने भी जांच के दौरान यही बयान दिया।  जांच एजेंसियों ने बाद में बशीर अहमद जोठाड़ से भी पूछताछ की. उसने बताया कि हमले से एक दिन पहले वह अपने घोड़े को देखने जंगल की तरफ गया था. तभी अचानक पेड़ों के पीछे से तीन हथियारबंद लोग उसके सामने आ गए. उनके हाथों में बंदूकें थीं. उन्होंने बशीर से कहा कि उन्हें किसी सुरक्षित जगह पर ले जाया जाए और खाने का इंतजाम किया जाए. बशीर ने बताया कि उसे तुरंत समझ आ गया था कि वे मुजाहिद हैं।  बशीर ने जांच एजेंसियों को बताया कि आतंकियों ने अपने बैग और पाउच उसे छिपाने के लिए दिए थे. बाद में उन सामानों को परवेज ने कंबलों के नीचे छिपा दिया था. तीनों आतंकी करीब पांच घंटे तक ढोक में रुके रहे. रात करीब 10 बजे वे एक-एक करके वहां से निकल गए. जाते समय छोटे कद वाले आतंकी ने परवेज को 3000 रुपये भी दिए. जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह रकम मदद के बदले दी गई थी।  दोनों आरोपियों से पूछताछ में कई अहम राज सामने आए. इसके बाद 28 जून को बशीर अहमद के ढोक, परवेज अहमद के ढोक और बैसरन मार्गूजा इलाके में सर्च … Read more

सेंट जेवियर्स स्कूल पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, यूनिफार्म बेचने वाली दुकान सील

बिलासपुर छत्तीसगढ़ शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद निजी स्कूलों की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही है। अभिभावकों पर तय दुकान से यूनिफार्म और किताबें खरीदने का दबाव बनाने के मामले में प्रशासन ने व्यापार विहार स्थित सेंट जेवियर्स स्कूल के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए स्कूल के सामने संचालित दुकान को सील कर दिया। मामले की शिकायत कलेक्टर तक पहुंचने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी विजय कुमार टांडे ने तत्काल जांच के निर्देश दिए। इसके बाद डीईओ स्वयं जांच दल के साथ स्कूल पहुंचे और औचक निरीक्षण किया। जांच टीम में प्राचार्य चंद्रभान सिंह ठाकुर और एपीसी रोहित भांगे भी शामिल रहे। जांच के दौरान स्कूल के ठीक सामने संचालित “साई इंटरप्राइजेज” नामक दुकान में स्कूल यूनिफार्म और किताबों की बिक्री होती मिली। सबसे अहम बात यह रही कि सामान पर स्कूल का आधिकारिक टैग लगा हुआ था। शिकायत सही पाए जाने पर टीम ने तत्काल दुकान को सील कर दिया। स्कूल संरक्षण में दुकान चलने की आशंका जांच के दौरान दुकान संचालक को बुलाया गया तो उसने बताया कि दुकान पहले ही स्कूल से जुड़ी “दिव्या मैडम” को बेच दी गई थी। दस्तावेजों की पड़ताल में यह बयान सही पाया गया। इसके बाद जांच टीम ने आशंका जताई कि अतिरिक्त कमाई के उद्देश्य से स्कूल प्रबंधन के संरक्षण में ही दुकान संचालित की जा रही थी। डीईओ ने दी कड़ी चेतावनी जिला शिक्षा अधिकारी विजय कुमार टांडे ने स्पष्ट कहा कि किसी भी निजी स्कूल को अभिभावकों पर विशेष दुकान से किताब या यूनिफार्म खरीदने का दबाव बनाने का अधिकार नहीं है। शासन के नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी और जरूरत पड़ने पर मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है। फिलहाल शिक्षा विभाग की टीम पूरे मामले की विस्तृत जांच में जुटी हुई है।

बिहार को मिल सकती है अपनी IPL टीम, वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने जताई इच्छा

पटना इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में बिहार की क्रिकेट टीम आ सकती है। मशहूर उद्योगपति एवं वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा कि चेन्नई सुपर किंग्स, मुंबई इंडियंस और कोलकाता नाइट राइडर्स की तरह बिहार की भी एक क्रिकेट टीम होनी चाहिए। उन्होंने इसके लिए पूरा सहयोग देने का भी ऐलान किया है। वहीं, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी अनिल अग्रवाल की इस बात का समर्थन करते हुए इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया है। अनिल अग्रवाल ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "बिहार की मिट्टी ने देश को बहुत से बेहतरीन क्रिकेट खिलाड़ी दिए हैं। पटना में जन्मे ईशान किशन ने सबसे कम गेंदों में वनडे में दोहरा शतक लगाया। समस्तीपुर के वैभव सूर्यवंशी सबसे कम उम्र में आईपीएल डेब्यू करने वाले खिलाड़ी बने। गोपालगंज के साधारण परिवार में जन्मे साकिब हुसैन की शानदार गेंदबाजी पर आज पूरी दुनिया की नजरें हैं।" उन्होंने कहा कि बिहार को क्रिकेट में अब भी वह नाम और पहचान नहीं मिल पा रही, जिसका यह हकदार है। यह बात हमेशा खलती है। अग्रवाल ने कहा, "मेरा हमेशा से यह सपना और प्रयास रहा है कि बिहार के युवाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ने का पूरा मौका मिले, हमारे खिलाड़ियों को भी वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर और सपोर्ट बिहार में ही मिलना चाहिए। मुझे पूरा भरोसा है कि अगर हमारे बच्चों को सही प्रेरणा और सुविधाएं मिलें, तो हमारे बिहार से बनने वाली टीम दुनिया की बेस्ट टीम होगी।" पटना में जन्मे अनिल अग्रवाल ने कहा कि वह इस काम में बिहार के युवाओं के साथ खड़े हैं। बिहार की क्रिकेट टीम और यहां के खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए वह अपनी तरफ से पूरा सहयोग देंगे। उन्होंने कहा कि बिहार उनके लिए सिर्फ एक राज्य नहीं, बल्कि एक इमोशन है। अब वक्त आ गया है कि हमारी मिट्टी का टैलेंट मैदान पर दिखे। अनिल अग्रवाल के इस पोस्ट के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि भविष्य में आईपीएल के अंदर बिहार की भी अलग क्रिकेट टीम होगी। बिहार से नई आईपीएल टीम बनने पर इसका मालिकाना हक वेदांता ग्रुप के पास रह सकता है, क्योंकि इसके चेयरमैन इसमें खुद रुचि दिखा रहे हैं। सम्राट चौधरी ने दिया समर्थन सीएम सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अनिल अग्रवाल के इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी है। मुख्यमंत्री ने अनिल से कहा कि वह उनकी बात से पूरी तरह सहमत हैं। बिहार के बिहार के क्रिकेट इमोशन के लिए सरकार स्पष्ट विजन के साथ मिशन मोड में कार्यरत है। आपके सहयोग से निश्चित ही बिहार की क्रिकेट टीम को लेकर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा। इसके बाद अनिल अग्रवाल ने सीएम से कहा कि उनका पूरा समर्थन और सहयोग सरकार के साथ है। उन्होंने बिहार के खिलाड़ियों को शुभकामनाएं भी दीं। राजगीर में तैयार हो रहा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम नालंदा जिले के राजगीर में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम तैयार हो रहा है। आने वाले समय में यहां पर इंटरनेशनल, रणजी और आईपीएल के मैच हो सकेंगे। बताया जा रहा है कि यह स्टेडियम बिहार की क्रिकेट टीम का नया घरेलू मैदान होगा। वहीं, पटना में भी मोइन उल हक स्टेडियम का लगभग 500 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्निर्माण कराया जा रहा है। बिहार सरकार ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को इसे 30 साल के लिए लीज पर दिया है। यहां पर विश्व स्तरीय सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।

DMRC की पहल: 12 स्टेशनों पर शुरू हुए सेल्फ सर्विस कियोस्क, सीधे व्हाट्सऐप से टिकट बुकिंग

नई दिल्ली  दिल्ली मेट्रो में सफर करने वाले यात्रियों के लिए टिकट खरीदना अब और आसान होने जा रहा है। अब QR कोड वाला डिजिटल टिकट लेने के लिए किसी मोबाइल ऐप को डाउनलोड करने की जरूरत नहीं होगी। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ( DMRC ) ने स्टेशन पर सेल्फ सर्विस मोबाइल टिकटिंग कियोस्क शुरू किए हैं, जिनकी मदद से यात्री सीधे अपने वॉट्सऐप पर टिकट प्राप्त कर सकेंगे। 12 मेट्रो स्टेशनों पर शुरू हुई सुविधा पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर यह सुविधा 12 मेट्रो स्टेशनों पर शुरू की गई है। इन कियोस्क को टिकट वेंडिंग मशीन के पास लगाया गया है। यहां से टिकट लेने के लिए यात्रियों को कोई ऐप डाउनलोड नहीं करना होगा। यात्री सिर्फ अपना डेस्टिनेशन स्टेशन चुनेंगे और अपना वट्सऐप वाला मोबाइल नंबर दर्ज करेंगे। यात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत इसके बाद टिकट सीधे उनके वॉट्सऐप पर भेज दिया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, अगर यह प्रयोग सफल रहता है तो आने वाले समय में इसे दूसरे मेट्रो स्टेशनों पर भी शुरू किया जाएगा। इससे यात्रियों को कई तरह की राहत मिलेगी। किन यात्रियों को मिलेगा सीधा फायदा DMRC के मुताबिक, अब लोगों को टिकट लेने के लिए अलग-अलग मोबाइल ऐप रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। खासकर उन यात्रियों को फायदा होगा जो कभी-कभार मेट्रो में सफर करते हैं और सिर्फ टिकट के लिए ऐप डाउनलोड नहीं करना चाहते। इसके अलावा कागज वाले QR टिकट की जरूरत भी कम होगी। ऐसे बुक होगा टिकट सेल्फ सर्विस मोबाइल टिकटिंग कियोस्क पर पहुंचने के बाद यात्री को अपना डेस्टिनेशन स्टेशन चुनना होगा। जिस स्टेशन पर कियोस्क लगा होगा, वही स्टेशन ऑटोमैटिक तौर पर सोर्स स्टेशन माना जाएगा। इसके बाद यात्री को टिकटों की संख्या दर्ज करनी होगी। फिर यात्री को अपना वट्सऐप मोबाइल नंबर भरना होगा। नंबर दर्ज करने के बाद सिस्टम एक UPI पेमेंट QR कोड जनरेट करेगा। पेमेंट के बाद मेट्रो QR टिकट तुरंत वट्सऐप पर भेज दिया जाएगा।