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उत्तर भारत की गर्मी से पहाड़ों की ओर उमड़ी भीड़, जोशीमठ में लगा लंबा ट्रैफिक जाम

जोशीमठ उत्तर भारत में लगातार बढ़ते तापमान और छुट्टियों के सीजन के चलते पहाड़ों पर भीड़ कम नहीं हो रही है. वहीं चारधाम यात्राएं भी जारी हैं, जिसके कारण प्रमुख रास्तों पर जाम लगना आम होता जा रहा है. शुक्रवार को जोशीमठ जिले में फिर से भयंकर जाम लगने की बात सामने आई है. ये जाम 7 किलोमीटर तक लंबा रहा, जिसके कारण यात्रा पर श्रद्धालुओं को अधिक समय जाम में फंसे रहना पड़ रहा है. ये सिलसिला देर रात तक रहता है।  जानकारी के मुताबिक, जोशीमठ में एक बार फिर से भयंकर जाम लग गया है. मारवाड़ी से टीसीपी जोशीमठ तक गाड़ियों की लंबी लाइन 6 से 7 किलोमीटर तक पहुंच गई और  पूरी कतार लगातार बढ़ती ही जा रही है. इस दौरान पुलिस मौके पर मौजूद रही, एक तरफ की गाड़ियों को छोड़ा जा रहा है लेकिन आधा घंटे के अंतराल में ही यहां 6 से 7 किलोमीटर की लंबी गाड़ियों की कतार देखने को मिल रही है, जो कि हर किसी के लिए मुसीबत बन रही है. ऐसे में चार धाम यात्रियों को भी अधिक से अधिक टाइम जाम में फंसे रहना पड़ रहा है. हालांकि एक साइड की गाड़ियां पूरी होने के बाद दूसरी साइड की गाड़ियां छोड़ी जाएंगी लेकिन यह सिलसिला रोजाना देर रात तक देखने को मिल रहा है।  असल में जोशीमठ के जीरो बेंड से लेकर मारवाड़ी तक सड़क कई जगहों पर बहुत संकरी हो गई है. सड़क संकरी होने के कारण लगातार जाम लग रहा है. इस समय बद्रीनाथ धाम से लौटने वाली गाड़ियों को निकाला जा रहा है, जिसकी वजह से बद्रीनाथ धाम जाने वाली गाड़ियों की लंबी कतार मारवाड़ी से टीसीपी जोशीमठ 6-7 किलोमीटर तक फैल गई है।  पिछले 2 साल से सड़क चौड़ीकरण का काम नहीं हुआ है. अब यही जाम यात्रियों के लिए बड़ी मुश्किल बन गया है. अभी तो सिर्फ बद्रीनाथ वाले यात्री आ रहे हैं लेकिन दो दिन बाद हेमकुंड साहिब की यात्रा भी शुरू हो जाएगी. जून महीना मुख्य सीजन का होता है, जब बद्रीनाथ, हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी में सबसे ज्यादा भीड़ होती है. अगर ऐसे ही लगातार जाम लगा रहा तो यात्रा कैसे सुचारू चलेगी? कहीं न कहीं अब इस समस्या का जल्दी समाधान निकालना बहुत जरूरी है. वरना अब रोजाना जाम यात्रियों. के लिए मुश्किल खड़ी कर रहा है। 

हादसा, पंचर या मेडिकल इमरजेंसी… हाईवे पर हर परेशानी का भरोसेमंद साथी है 1033

रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर संजीवनी बना डायल 1033 कल्पना कीजिए, आप एक खूबसूरत सफर पर हैं। खुली सड़क, रफ्तार पकड़ती गाड़ी और सुहाना मौसम—सब कुछ शानदार चल रहा है। लेकिन अचानक अगले ही मोड़ पर कोई हादसा हो जाए, तो पलभर में खुशियां मातम में बदल सकती हैं। ऐसे सुनसान हाईवे पर, जहां दूर-दूर तक कोई मदद नजर नहीं आती, वहां मोबाइल स्क्रीन पर चमकता एक नंबर उम्मीद की सबसे बड़ी किरण बनकर सामने आता है—1033। आज राष्ट्रीय राजमार्गों पर यह नंबर लाखों यात्रियों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। संकट की घड़ी में फरिश्ता बनती है एक कॉल हाइवे दुर्घटना के बाद का पहला घंटा चिकित्सा विज्ञान में “गोल्डन ऑवर” कहलाता है। इस दौरान घायल को सही इलाज मिल जाए तो उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। डायल 1033 इसी गोल्डन ऑवर का सबसे बड़ा सहारा बन चुका है। जैसे ही कोई व्यक्ति 1033 पर कॉल करता है, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) का कंट्रोल रूम तुरंत सक्रिय हो जाता है। जीपीएस तकनीक के जरिए हादसे की लोकेशन ट्रेस की जाती है और कुछ ही मिनटों में एम्बुलेंस, पेट्रोलिंग वाहन और जरूरत पड़ने पर क्रेन मौके पर पहुंच जाती है। घायलों को नजदीकी ट्रॉमा सेंटर पहुंचाने के साथ-साथ रास्ता भी साफ कराया जाता है। “7 से 10 मिनट में पहुंच गई एम्बुलेंस” रायपुर-बिलासपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर हादसे का शिकार हुए श्री नितिन वर्मा बताते हैं, “दोपहर करीब 2 बजे मेरी गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया। मोबाइल नेटवर्क भी कमजोर था और मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं कहां हूं। मैंने 1033 पर कॉल किया और महज 7 से 10 मिनट में एम्बुलेंस मौके पर पहुंच गई। मेरे लिए वह नंबर किसी संजीवनी से कम नहीं था।” सिर्फ एक्सीडेंट नहीं, हर परेशानी का साथी है 1033 अक्सर लोग समझते हैं कि 1033 सिर्फ सड़क हादसों में मदद करता है, जबकि यह हाइवे पर हर तरह की परेशानी में आपका भरोसेमंद साथी है। अगर रात में गाड़ी पंचर हो जाए, इंजन खराब हो जाए, सड़क पर पेड़ या मलबा गिर जाए, मवेशी आ जाएं, किसी सहयात्री की तबीयत बिगड़ जाए, टोल या फास्टैग संबंधी समस्या हो या हाइवे पर असुरक्षा महसूस हो—हर स्थिति में 1033 मदद के लिए उपलब्ध है। रात के सन्नाटे में 1033 बना सहारा ट्रक ड्राइवर श्री गुरदीप सिंह बताते हैं, “रात करीब 9:45 बजे रायपुर से बिलासपुर जाते समय ट्रक का टायर फट गया। सुनसान हाईवे पर भारी वाहन के साथ फंस जाना बहुत मुश्किल स्थिति थी। मैंने 1033 पर कॉल किया। कुछ ही देर में हाईवे पेट्रोलिंग टीम पहुंच गई। उन्होंने तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई और पूरी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा भी सुनिश्चित की।” जब जाम हो गया चक्का, पेट्रोलिंग टीम ने बढ़ाया हाथ बिलासपुर-नागपुर रूट पर सफर कर रहे श्री एस.पी. चौबे ने बताया कि उनकी कार पंचर होने के बाद स्टेपनी बदलने के दौरान पहिया जाम हो गया था। काफी कोशिशों के बावजूद चक्का नहीं खुल रहा था। तभी वहां से गुजर रही 1033 की रूट पेट्रोलिंग टीम रुकी और अपने हैवी टूल्स की मदद से चक्का खोलकर टायर बदला। टीम की तत्परता और मदद ने यात्रियों का दिल जीत लिया। मुस्तैदी से टला बड़ा हादसा बिलासपुर से महासमुंद जा रहे एक भारी ट्रेलर का ब्रेक अचानक जाम हो गया। बीच हाइवे पर इतने बड़े वाहन का रुकना बड़ा खतरा बन सकता था। सूचना मिलते ही 1033 टीम मौके पर पहुंची और ट्रेलर के पीछे से आने वाले वाहनों को सतर्क करने के लिए सेफ्टी कोन और चेवरॉन बोर्ड लगाए। टीम की मुस्तैदी से न केवल ट्रैफिक व्यवस्थित रहा, बल्कि एक बड़ा हादसा भी टल गया। 24 घंटे उपलब्ध, हर भाषा में मदद 1033 की सबसे बड़ी खासियत इसकी सरलता और उपलब्धता है। यह सेवा 24×7 सक्रिय रहती है। हिंदी, अंग्रेजी समेत कई स्थानीय भाषाओं में सहायता उपलब्ध है। सबसे अहम बात यह कि यह टोल-फ्री सेवा है, इसलिए मोबाइल में बैलेंस न होने पर भी कॉल किया जा सकता है। आज जब देश के हाईवे आधुनिक और हाई-स्पीड हो रहे हैं, तब सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है। ऐसे में हर यात्री को अपने मोबाइल में 1033 जरूर सेव रखना चाहिए। क्योंकि मुश्किल की घड़ी में यही चार अंक जिंदगी की रफ्तार को थमने नहीं देते।

अनाजों के भंडारण में क्षति कम करने भारतीय प्रबंध संस्थान मुंबई में प्रशिक्षण की पहल

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि खाद्य विभाग अन्य विभागों से बेहतर समन्वय स्थापित कर उपभोक्ता हित में कार्य करे। खाद्य विभाग ने अनेक नवाचार किए हैं जिनका लाभ उपभोक्ताओं को मिल रहा है। नवाचारों और उपभोक्ता हित का कार्य निरंतर किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को मंत्रालय में खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खाद्य विभाग ने उचित मूल्य दुकानों का जन पोषण मार्ट के रूप में उन्नयन किया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री अन्न सेवा जागरूकता कार्यक्रम के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को मोबाइल पर संदेश भेजकर राशन प्रदाय और वितरण की सूचना देने का प्रावधान किया गया है। यह नवाचार उपभोक्ताओं के कल्याण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना के परिवहनकर्ता के रूट ऑप्टिमाइजेशन के कार्य से परिवहन लागत में सरकार को 42 लाख रुपए प्रति माह की बचत हुई। मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना के वाहनों में जीपीएस के माध्यम से स्टेट लेवल कमांड कंट्रोल सेंटर से मॉनिटरिंग व्यवस्था की गई। इसी तरह सिविल सप्लाई कारपोरेशन ने सभी स्तरों पर ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था की है। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने गोदाम में स्कंध के भंडारण की क्षति को कम करने के लिए वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉरपोरेशन के अमले को भारतीय प्रबंध संस्थान मुंबई में प्रशिक्षण दिलवाने की पहल की भी प्रशंसा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निगम कर्मियों के कौशल उन्नयन की गतिविधियां जारी रखी जाएं।इसी तरह उपार्जन, मिलिंग और परिवहन के लिए उपयोग में लिए जा रहे वाहनों का यूलिप (ULIP) सॉफ्टवेयर से सत्यापन किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर खाद्यान्न उपार्जन के लिए जूट कमिश्नर से खाली बारदाने क्रय करने के लिए सीसी लिमिट से भुगतान की व्यवस्था लागू की गई है। यह व्यवस्था लागू करने वाला मध्यप्रदेश, उड़ीसा और पंजाब के पश्चात तीसरा प्रांत है। इस प्रणाली से 18 करोड़ रुपए की ब्याज राशि की बचत करने में सफलता मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गेहूं उपार्जन कार्य की भी जानकारी प्राप्त की। उन्होंने ऐसा मॉडल विकसित करने के निर्देश दिए जिससे गेहूं की जींस की प्रोसेसिंग, ग्रेडिंग आदि के कार्य लघु मध्यम और सूक्ष्म विभाग के सहयोग से किए जा सकें। इस कार्य में स्व-सहायता समूह की भूमिका भी हो सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री राशन आपके ग्राम योजना सहित अन्य योजनाओं की जानकारी प्राप्त की। बैठक में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली, शहरी गैस वितरण, नेटवर्क विकास और विस्तार नीति 2025 लागू करने, पीडीएस के हितग्राहियों का ई-केवाईसी किए जाने के कार्य और उपभोक्ता हित में किए गए अन्य प्रयासों की जानकारी भी प्रदान की गई। बैठक में खाद्य नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत, मुख्य सचिव  अनुराग जैन और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

निवेशकों को मिलेगा अटका पैसा, उपभोक्ता आयोग ने सहारा पर कसा शिकंजा

बोकारो  जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने सहारा क्रेडिट को-आपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड के मामले में फैसला सुनाते हुए निवेशकों को परिपक्व राशि भुगतान करने का निर्देश दिया है। आयोग के अध्यक्ष जय प्रकाश नारायण पांडेय व सदस्य बेबी कुमारी ने यह दिया है। जरीडीह बाजार निवासी राज कुमार प्रसाद एवं उनकी पुत्री रजनी कुमारी ने गोल्डन ए डबल एंड ग्लोबल योजना में राशि निवेश की थी। निवेश के एवज में में बांड और प्रमाणपत्र जारी किए गए थे। योजनाओं की अवधि पूरी होने के बाद भी निवेशकों को भुगतान नहीं किया गया। परिवादियों ने आयोग में शिकायत दर्ज कर 34 लाख 27 हजार 982 रुपये की परिपक्वता राशि, 12 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान का अनुरोध किया। एक लाख रुपये मुआवजा एवं 10 हजार रुपये वाद खर्च की मांग की थी। विपक्षी पक्ष की ओर से कहा गया कि मामला मल्टी स्टेट को-आपरेटिव सोसाइटी एक्ट के तहत आता है तथा भुगतान केंद्रीय रजिस्ट्रार, सहकारी समितियों के माध्यम से किया जाना है। दूसरा मामला चीरा चास निवासी मोहम्मद अलीमुद्दीन व इनके पुत्र दानिश हसन ने किया था। सहारा ई शाइन योजना के तहत पचास हजार रुपये जमा किया था। इसी परिपवक्ता राशि एक लाख 13 हजार और अलीमुद्दीन की पत्नी स्वर्गीय फहमिया बानो ने साठ हजार रुपये निवेश किया था। समय पूरा होने पर भुगतान नहीं हुआ। इसमें भी राशि को भुगतान का आदेश आयोग ने दिया। आयोग ने सुनवाई के दौरान पाया कि निवेश, परिपक्वता अवधि तथा देय राशि संबंधी तथ्यों को विपक्षी पक्ष ने विवादित नहीं किया। भुगतान नहीं करना सेवा में कमी आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि उपभोक्ता आयोग को ऐसे मामलों की सुनवाई का अधिकार है तथा भुगतान नहीं करना सेवा में कमी है। आयोग ने आदेश दिया कि राज कुमार प्रसाद को 19 लाख 92 हजार रुपये तथा रजनी कुमारी को दो लाख 90 हजार 684 रुपये 31 दिसंबर 2026 तक केंद्रीय रजिस्ट्रार, सहकारी समितियों के माध्यम से भुगतान किया जाए। निर्धारित समय सीमा में भुगतान नहीं होने पर छह प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा।  

RBI देगा सरकार को अब तक का सबसे बड़ा डिविडेंड; रिकॉर्ड 2.87 ट्रिलियन रुपये के ट्रांसफर को बोर्ड की मंजूरी

नई दिल्ली ग्लोबल टेंशन के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) सरकार के लिए संकटमोचक बनेगा । दरअसल, RBI की ओर से इस वर्ष सरकार को अब तक का सबसे अधिक डिविडेंड दिए जाने की दी मंजूरी । ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार सरकार को इस हफ्ते रिजर्व बैंक से रिकॉर्ड 2.87 ट्रिलियन रुपये रुपये का सरप्लस ट्रांसफरमिलेगा । RBI बोर्ड शुक्रवार को इस डिविडेंड को मंजूरी दी । बता दें कि RBI ने 2024-25 के लिए केंद्र सरकार को 2.69 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड डिविडेंड दिया था जो इससे पिछले वर्ष 2023-24 के 2.11 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 27 प्रतिशत अधिक था। बहुत से लोगों को लगता है कि आरबीआई किसी निजी कंपनी की तरह अपने शेयरधारकों को डिविडेंड देता होगा, लेकिन ऐसा नहीं है. आरबीआई पूरी तरह देश का केंद्रीय बैंक है और भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934 की धारा 47 के तहत यह तय है कि अपने खर्च और जरूरी रिजर्व फंड अलग रखने के बाद जो अतिरिक्त पैसा बचेगा, उसे केंद्र सरकार को ट्रांसफर किया जाएगा. इसी अतिरिक्त रकम को सरप्लस ट्रांसफर या डिविडेंड कहा जाता है. सरकार के लिए यह गैर कर राजस्व का सबसे बड़ा स्रोत माना जाता है. इस पैसे का इस्तेमाल वित्तीय घाटा कम करने, सड़क, रेलवे और हाईवे जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को फंड करने और कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च बढ़ाने के लिए किया जाता है।  RBI आखिर कमाई कैसे करता है आरबीआई आम बैंकों की तरह लोगों को लोन नहीं देता, लेकिन उसके पास कमाई के कई बड़े स्रोत होते हैं।      सबसे बड़ा जरिया विदेशी मुद्रा भंडार यानी फॉरेक्स रिजर्व है. आरबीआई अरबों डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार को अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड जैसी सुरक्षित जगहों पर निवेश करता है, जिससे उसे ब्याज के रूप में भारी कमाई होती है।      इसके अलावा डॉलर और रुपये की खरीद-बिक्री से भी केंद्रीय बैंक को फायदा होता है. जब बाजार में रुपये पर दबाव बढ़ता है, तब आरबीआई डॉलर बेचकर बाजार को स्थिर करने की कोशिश करता है. इसी तरह के फॉरेक्स ऑपरेशंस से भी मुनाफा कमाया जाता है।      सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला ब्याज और नोट छापने की लागत और उसकी वास्तविक वैल्यू के बीच का अंतर भी आरबीआई की कमाई का हिस्सा होता है।  इस बार रिकॉर्ड डिविडेंड की वजह क्या है वित्त वर्ष 2026 के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में करीब 10 प्रतिशत की कमजोरी देखने को मिली. इससे आरबीआई की विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों का मूल्य बढ़ा और उसकी बैलेंस शीट मजबूत हुई. इसके अलावा केंद्रीय बैंक ने रुपये की तेज गिरावट को रोकने के लिए डॉलर बेचकर बाजार में सक्रिय हस्तक्षेप किया. इससे भी आरबीआई को अच्छा फायदा हुआ. भारत का विदेशी मुद्रा भंडार भी बढ़कर करीब 688 अरब डॉलर तक पहुंच गया. निवेश से बेहतर रिटर्न और फॉरेक्स ऑपरेशंस की मजबूत कमाई ने केंद्रीय बैंक के सरप्लस को और बढ़ाने में मदद की।  सरकार के लिए क्यों अहम है यह रकम पिछले कुछ वर्षों में आरबीआई से मिलने वाला डिविडेंड तेजी से बढ़ा है और यह सरकार के लिए बेहद अहम राजस्व स्रोत बन चुका है. पिछले तीन वित्त वर्षों में यह रकम तीन गुना से ज्यादा बढ़ चुकी है. अगर इस बार सरकार को 3.5 लाख करोड़ रुपये तक का डिविडेंड मिलता है, तो इससे सरकार को उधारी कम लेने में मदद मिल सकती है. साथ ही वित्तीय घाटे को नियंत्रित रखने और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर खर्च जारी रखने में भी राहत मिलेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भी आरबीआई की ओर से सरकार को ऊंचे स्तर का डिविडेंड मिलता रह सकता है, हालांकि केंद्रीय बैंक ने अभी तक आधिकारिक तौर पर संभावित भुगतान पर कोई टिप्पणी नहीं की है।  रिजर्व बैंक केैसे करता है कमाई? RBI अपनी विदेशी मुद्रा संपत्तियों, सरकारी बॉन्ड निवेश और करेंसी छपाई से होने वाली आय के जरिए यह सरप्लस कमाता है। बहरहाल, यह सरप्लस ऐसे समय में मिलने जा रहा है जब अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जंग की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। इससे भारत का आयात बिल बढ़ने, चालू खाते के घाटे पर दबाव बनने और विदेशी निवेशकों की बिकवाली तेज होने की आशंका है। इसी दबाव के बीच RBI का यह बड़ा भुगतान सरकार के लिए राहत का काम करेगा। क्या कहते हैं एक्सपर्ट? PGIM इंडिया एसेट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड में फिक्स्ड इनकम के प्रमुख पुनीत पाल के मुताबिक बॉन्ड मार्केट पहले से ही RBI से मिलने वाले लगभग 3 ट्रिलियन रुपये के भुगतान को अपनी कीमतों में शामिल कर चुका है। उन्होंने कहा कि ज्यादा डिविडेंड राजकोषीय प्रबंधन में मदद कर सकता है लेकिन इसका तब तक कोई खास असर नहीं पड़ेगा जब तक कि यह काफी ज्यादा न हो।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हितग्राहियों को अपने हाथों से पहनाए नजर के चश्मे

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने हितग्राहियों को अपने हाथों से पहनाया नजर का चश्मा सुशासन तिहार शिविर में स्वास्थ्य विभाग के स्टॉल का किया निरीक्षण रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज बलौदाबाजार जिले के करहीबाजार में आयोजित सुशासन तिहार समाधान शिविर में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण कर योजनाओं और सेवाओं की जानकारी ली। स्वास्थ्य विभाग के स्टॉल में मुख्यमंत्री ने 76 वर्षीय श्री गोवर्धन ध्रुव, 65 वर्षीय श्रीमती अनुपकुंवर पाल तथा कक्षा छठवीं के छात्र संजय चक्रधारी एवं जयसेन को अपने हाथों से नजर का चश्मा पहनाया। हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें अब पढ़ने-लिखने और दैनिक कार्यों में काफी सुविधा होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य स्वास्थ्य सुविधाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है, ताकि जरूरतमंद लोगों को समय पर उपचार और आवश्यक सहायता मिल सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शासन की स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना सुनिश्चित करें।

आरक्षण व्यवस्था पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल, अफसरों के बच्चों को लाभ देने पर उठे सवाल

नई दिल्ली ओबीसी आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है. अदालत ने इस बात पर सवाल उठाया है कि यदि किसी बच्चे के माता-पिता दोनों भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी हैं, तो उन्हें आरक्षण का लाभ क्यों दिया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी पिछड़े वर्गों के क्रीमी लेयर से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की है. न्यायालय ने कहा कि ऐसे बच्चों को आरक्षण के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और क्रीमी लेयर के बीच के अंतर को भी स्पष्ट किया. अदालत ने जोर दिया कि EWS आरक्षण केवल आर्थिक आधार पर दिया जाता है, जबकि क्रीमी लेयर सामाजिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से सक्षम लोगों को पहचानता है।  ओबीसी आरक्षण और क्रीमी लेयर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान बड़ी टिप्पणी सामने आई है. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि अगर किसी उम्मीदवार के दोनों माता-पिता IAS अधिकारी हैं, तो उसे आरक्षण का लाभ क्यों मिलना चाहिए? कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद एक बार फिर क्रीमी लेयर और आरक्षण की सीमा को लेकर बहस तेज हो गई है।  मामले की सुनवाई जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की बेंच ने की. सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि आरक्षण का असली मकसद समाज के उन लोगों तक फायदा पहुंचाना है, जो वास्तव में पिछड़े और वंचित हैं. उन्होंने पूछा कि जब किसी परिवार के माता-पिता देश की सबसे ऊंची प्रशासनिक सेवाओं में पहुंच चुके हैं, तब उनके बच्चों को आरक्षण का लाभ देने की जरूरत क्यों होनी चाहिए? शोषित और वंचितों को मिले रिजर्वेशन सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाते हुए कहा- जिनके माता-पिता दोनों IAS अधिकारी हैं, उनके बच्चों को आरक्षण का लाभ क्यों लेना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा- आरक्षण का असली मकसद उन लोगों तक फायदा पहुंचाना है, जो वास्तविक रूप से शोषित और वंचित हैं। 'मां-बाप के पास अच्छी जॉब, उन्हें रिजर्वेशन से निकल जाना चाहिए' सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि एजुकेशनल और इकोनॉमिक प्रोग्रेस से सोशल मोबिलिटी आती है। जस्टिस नागरत्ना ने कहा-  बच्चों के माता-पिता अच्छी जॉब में है, अच्छा कमा रहे हैं, और उनके बच्चे फिर से रिजर्वेशन चाहते हैं। देखिये उन्हें रिजर्वेशन से बाहर आना चाहिए। EWS में आर्थिक पिछड़ापन सुप्रीम कोर्ट ने इकोनॉमिक वीक सेक्सशन (EWS) और सोशली बैकवार्ड कम्युनिटी के बीच रिजर्वेशन के अंतर को स्पष्ट किया। जस्टिस नागरत्ना ने कहा- EWS में सामाजिक पिछड़ापन नहीं है, लेकिन आर्थिक पिछड़ापन है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर संबंधित पक्षों से जवाब भी मांगा है। सुनवाई के दौरान वकील शशांक रत्नू ने कोर्ट में पक्ष रखते हुए कहा कि उन्हें वेतन के कारण नहीं, बल्कि उनकी स्थिति के कारण बर्खास्त किया गया था. वे ग्रुप ए के कर्मचारी हैं और इसलिए उन्हें बर्खास्त किया गया है. ग्रुप बी के कर्मचारियों को भी बर्खास्त किया जाता है. कर्मचारियों को सिर्फ वेतन के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी सामाजिक और प्रशासनिक स्थिति के आधार पर क्रीमी लेयर में रखा गया है।  उन्होंने कहा कि ग्रुप ए के कर्मचारियों को इसी वजह से क्रीमी लेयर के दायरे में रखा जाता है. वकील शशांक रत्‍नू ने यह भी कहा कि केवल ग्रुप ए ही नहीं, बल्कि कुछ मामलों में ग्रुप बी कर्मचारियों को भी क्रीमी लेयर के तहत बाहर किया जाता है. इस दौरान कोर्ट ने यह समझने की कोशिश की कि आखिर आरक्षण का लाभ किन लोगों तक सीमित होना चाहिए और किन्हें इससे बाहर रखा जाना चाहिए।  सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि लंबे समय से OBC आरक्षण में क्रीमी लेयर की सीमा और उसके मानकों को लेकर बहस चल रही है. कई विशेषज्ञों का मानना है कि आरक्षण का फायदा समाज के आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों तक पहुंचना चाहिए, जबकि कुछ लोग इसे सामाजिक प्रतिनिधित्व से जोड़कर देखते हैं। 

MP राज्यसभा चुनाव: 1 जून से नामांकन, 18 जून को वोटिंग; BJP-कांग्रेस ने बनाई रणनीति

भोपाल  मध्य प्रदेश की 3 राज्यसभा सीटों के लिए चुनावी बिगुल बज गया है. भारत निर्वाचन आयोग ने चुनाव के संबंध में कार्यक्रम जारी कर दिया है. 1 जून 2026 से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी. 18 जून को मतदान और उसी दिन मतगणना होगी. भाजपा और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख पार्टियों ने राज्यसभा चुनाव के लिए रणनीति बनाना शुरू कर दी है, लेकिन सबसे ज्यादा नजर कांग्रेस की उस एक सीट पर टिकी है, जिसे बचाए रखना पार्टी के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है. दिग्विजय सिंह के राज्यसभा जाने से मना करने के बाद सियासी हलचल और तेज हो गई है।  तीन सीटों पर मुकाबला, सबसे अधिक चर्चा कांग्रेस की वरिष्ठ पत्रकार अजय द्विवेदी के अनुसार "प्रदेश में खाली हो रही 3 सीटों में 2 सीटें भाजपा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी और जार्ज कुरियन की हैं, जबकि तीसरी सीट कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के पास है. भाजपा अपनी दोनों सीटों को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रही है, जबकि कांग्रेस की एकमात्र सीट को लेकर अंदरखाने चिंता बढ़ गई है।  दिग्विजय सिंह ने बनाई दूरी, नए चेहरों की लॉबिंग शुरू पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने साफ संकेत दे दिए हैं कि वे इस बार राज्यसभा नहीं जाना चाहते. उन्होंने पार्टी नेतृत्व से कहा है कि अब किसी नए चेहरे को मौका मिलना चाहिए. दिग्विजय सिंह ने यह भी इच्छा जताई है कि उनकी जगह अनुसूचित जाति वर्ग से किसी नेता को अवसर दिया जाए. इसके बाद कांग्रेस में दावेदारों की लंबी कतार लग गई है. कई वरिष्ठ और युवा नेता दिल्ली तक सक्रिय हो गए हैं।  कांग्रेस को सता रहा क्रॉस वोटिंग का डर संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस अपनी एक सीट निकाल सकती है, लेकिन पार्टी को क्रॉस वोटिंग का बड़ा खतरा दिखाई दे रहा है. भाजपा यदि तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारती है तो मुकाबला रोचक हो सकता है. कांग्रेस नेताओं को आशंका है कि कुछ विधायक पाला बदल सकते हैं या मतदान के दौरान रणनीतिक गच्चा हो सकता है।  2020 और 2022 का इतिहास बढ़ा रहा बेचैनी वरिष्ठ पत्रकार खिलावन चंद्राकर बताते हैं "राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की चिंता इसलिए भी बढ़ी हुई है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में मध्य प्रदेश की राजनीति में कई बार समीकरण अचानक बदले हैं. साल 2020 के राज्यसभा चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक विधायकों के इस्तीफे से पूरा गणित बदल गया था. वहीं 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में भी क्रॉस वोटिंग ने कांग्रेस को झटका दिया था. ऐसे में इस बार पार्टी कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही।  चुनाव का पूरा कार्यक्रम इस प्रकार है     नामांकन शुरू – 01 जून 2026     नामांकन की अंतिम तारीख – 08 जून 2026     नामांकन पत्रों की जांच – 09 जून 2026     नाम वापसी की आखिरी तारीख – 11 जून 2026     मतदान – 18 जून 2026, सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक     मतगणना – 18 जून 2026, शाम 5 बजे से

जैसलमेर-अहमदाबाद नई रेल सेवा का शुभारंभ, स्वर्णनगरी में बढ़ी कनेक्टिविटी

 जैसलमेर राजस्थान के सीमावर्ती जिले जैसलमेर को रेलवे की ओर से बड़ी दोहरी सौगात मिली है. जिसमें एक है कि स्वर्णनगरी में रेलवे स्टेशन पर करीब 67 करोड़ रुपये की लागत से बने अत्याधुनिक 'कोच केयर कॉम्प्लेक्स' का उद्घाटन किया गया है और साथ ही जैसलमेर-अहमदाबाद नई रेल सेवा की भी शुरुआत हुई है. जैसलमेर में ही होगा ट्रेनों का रखरखाव अब तक तकनीकी रखरखाव और सफाई के लिए ट्रेनों को अन्य बड़े स्टेशनों पर निर्भर रहना पड़ता था लेकिन अब जैसलमेर में ही अत्याधुनिक 'कोच केयर कॉम्प्लेक्स' के शुरू होने से ट्रेनों का रखरखाव, तकनीकी जांच और सफाई जैसलमेर में ही संभव हो सकेगी. इससे न केवल ट्रेनों का संचालन अधिक सुरक्षित और सुगम होगा बल्कि यात्रियों को बेहतर सुविधाएं भी मिलेंगी. अहमदाबाद तक अब सीधी रेल सेवा इसके अलावा जैसलमेर को अहमदाबाद से जोड़ने वाली नई रेल सेवा का भी शुभारंभ किया गया है. स्थानीय विधायक छोटूसिंह भाटी ने हरी झंडी दिखाकर इस ट्रेन को रवाना किया. कार्यक्रम में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत ने वर्चुअली हिस्सा लिया. इस नई रेल सेवा से सीमावर्ती जिले के लोगों, व्यापारियों और पर्यटकों को बड़ी राहत मिलेगी. अब गुजरात आना-जाना बेहद आसान हो जाएगा. इस सौगात से जैसलमेर के पर्यटन उद्योग को नई गति मिलने की उम्मीद है. विधायक छोटूसिंह भाटी ने कहा कि यह सुविधा हर तबके के लोगों के लिए फायदेमंद साबित होगी. कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे.

देवरिया-कसया फोरलेन से बदलेगी तस्वीर, कुशीनगर तक यात्रा होगी आसान

रामपुर कारखाना मुख्‍यमंत्री योगी आद‍ित्‍यनाथ ने शुक्रवार को 292 करोड़ 6 लाख 66 हजार की लागत से देवरिया-कसया मार्ग फोरलेन निर्माण लिए भव्य समारोह के बीच आधारशिला रखी। इसको लेकर लोगों में काफी उत्साह रहा। ग्रामीणों का कहना है कि देवरिया-कसया मार्ग फोरलेन बनने से नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त होगा। अंतर्राष्ट्रीय स्थल कुशीनगर को जोड़ने वाला देवरिया कसया मार्ग काफी दिनों से सिंगल मार्ग के रूप में था। जिस पर रोज हजारों की संख्या में दो पहिया चार पहिया वाहन चलते हैं। सिंगल मार्ग होने के चलते इस मार्ग पर आए दिन दुर्घटनाएं भी होती रहती थी। जिसको लेकर शासन ने इस मार्ग को फोरलेन में बदलने का निर्णय लिया। इसके निर्माण होने से जहां विकास को आयाम मिलेगा वहीं आसपास के लोगों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ होने का अवसर मिलेगा। शासन ने प्रथम किस्त के रूप में 102 .22 करोड़ रूपया अवमुक्त कर दिया है ।फोरलेन निर्माण होने पर इसकी चौड़ाई 15 मी होगी। जिसमें प्रत्येक लेने की चौड़ाई 7.50 मी होगी तथा बीच में दो मी चौड़ाई में डिवाइडर बनाने का कार्य किया जाएगा। इसके संपूर्ण निर्माण के लिए 292 करोड़ 06 लाख 66हजार की स्वीकृति प्रदान की गई है। नदी पर 106.88 मीटर लंबा तथा 11.50 मीटर चौड़ाई का पुल टू लेन में तैयार किया जाएगा। इसके निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम लिमिटेड को नामित किया गया है। क्षेत्रीय लोगों में फोर लेन निर्माण से यातायात सुगम होगा। जिसका सपना मुख्यमंत्री ने निर्माण की आधारशिला रख कर साकार कर दिया। फोर लेन निर्माण से व्यापार के दिशा में व्यवसाईयों को बहुत लाभ मिलेगा तथा आम जनमानस को गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर की दूरी तय करने में कम समय के साथ-साथ कम ईंधन भी लगेगा। अजीत सिंह, भाजपा नेता, बैकुंठपुर, रामपुर कारखाना फोर लेन पर चलना हम लोगों के लिए सपना जैसा था। मगर मुख्यमंत्री ने इस सपने को साकार करने का कार्य किया है।- पंकज सिंह,  ग्राम प्रधान, भगौतीपुर, रामपुर कारखाना देवरिया कसया फोर लेन मार्ग का निर्माण विकसित भारत की दिशा में एक अहम प्रयास है। जो भाजपा के शासन में पूरा होने जा रहा है।- रविंद्र सिंह, ग्रामीण, मुंडेरा बाबू तरकुलवा फोर लेन का निर्माण किसान, मजदूर, व्यापारी तथा आम लोगों के लिए हित में है। जिससे विकास को गति मिलेगी। बिहार तक की यात्रा सुगम होगी।- राजू सिंह, ग्राम प्रधान, रामपुर चंद्रभान, रामपुर कारखाना