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‘संस्कारी बहू’ का बोल्ड अवतार, बिकिनी फोटो में निमृत अहलूवालिया ने बढ़ाया इंटरनेट का पारा

मुंबई  निमृत कौर अहलूवालिया टेलीविजन की लोकप्रिय एक्ट्रेसेस में से एक हैं. टीवी पर वो संस्कारी और सभ्य किरदार निभाने के लिए जानी जाती हैं। इन दिनों एक्ट्रेस फ्लोरिडा में वेकेशन पर हैं, जहां Beach पर फैन्स को उनका बोल्ड अवतार देखने को मिला।  समंदर किनारे निमृत कौर ब्राउन बिकीनी सेट में अपनी बोल्डनेस से पारा हाई करती नजर आईं। एक्ट्रेस बिकिनी में आत्मविश्वासी और स्टाइलिश दिख रही थीं. उन्होंने बिकीनी ब्रा के साथ मैचिंग बॉटम्स पहने थे, जिससे उनका लुक ग्लैमरस लग रहा था।          समुद्री एहसास बढ़ाने के लिए उन्होंने शेल चोकर नेकपीस भी पहना था, जो Beach के मूड से बिल्कुल मेल खा रहा था। लुक पूरा करने के लिए निमृत ने स्टाइलिश ब्राउन हैट भी पहना था, जिससे उनका Beach लुक ट्रेंडी और नैचुरल लग रहा था।          टीवी की संस्कारी बहू को बिकिनी में देखकर फैन्स के होश उड़ गए हैं. एक ने लिखा कि ये तो नहीं सोचा था. दूसरे ने कहा कि मैम गर्मी बढ़ा दी।  बिकिनी पहनकर निमृत ने अपना टोन्ड फिगर भी फ्लॉन्ट किया, जिसे देखकर फैन्स सन्न रह गए. एक ने लिखा कि आपने कितना वजन घटा लिया।  अन्य फैन ने कहा कि UFF… मार ही डाला. कई फैन्स ने फायर इमोजी बनाई. कुछ लोगों ने निमृत को ग्लैमरस बताकर उनकी तारीफ की। एक्ट्रेस के वर्कफ्रंट की बात करें, तो उन्हें टीवी पर छोटी सरदारनी शो के लिए जाना जाता है. वो बिग बॉस 16 का हिस्सा भी बनी थीं. आखिरी बार उन्हें 2022 में खतरा खतरा खतरा शो में देखा गया था. 

नायब सैनी बोले: पंजाब-हरियाणा सिर्फ पड़ोसी नहीं, एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं

 चंडीगढ़ हरियाणा के मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini ने पंजाब और हरियाणा के रिश्तों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दोनों राज्यों के संबंध को सिर्फ पड़ोसी राज्यों का रिश्ता नहीं, बल्कि “नाखून और उंगली” जैसा बताया। मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पंजाब की राजनीति को लेकर भी लगातार चर्चा तेज है। एक इंटरव्यू के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें पंजाब को करीब से समझने और देखने का मौका मिला है। उन्होंने बताया कि पंजाब ओबीसी मोर्चा का प्रभारी रहते हुए उन्होंने पूरे प्रदेश का दौरा किया और शायद ही कोई ऐसा चुनाव रहा हो, जहां उन्हें जाने का अवसर न मिला हो। इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने पंजाब और हरियाणा के सामाजिक व सांस्कृतिक जुड़ाव को बेहद मजबूत बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब और हरियाणा की जमीन एक है, छत एक है और दोनों का सफर भी एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा, “पंजाब-हरियाणा का रिश्ता सामान्य नहीं है, यह नाखून और उंगली का रिश्ता है।” उनके इस बयान को दोनों राज्यों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जुड़ाव से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने राजनीतिक स्तर पर पंजाब की मौजूदा सरकार पर निशाना साधने से भी परहेज नहीं किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की सोच आम आदमी पार्टी से अलग है। मुख्यमंत्री का आरोप था कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार ने आम लोगों को अपमानित करने का काम किया है। उन्होंने दावा किया कि पंजाब की जागरूक जनता भ्रष्टाचार में लिप्त आम आदमी पार्टी को बाहर का रास्ता दिखाएगी। साथ ही कहा कि अगर पंजाब में भाजपा की सरकार बनती है तो सभी फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने बातचीत के दौरान हरियाणा की उपलब्धियों का भी जिक्र किया और कहा कि प्रदेश ने खेल, कृषि, उद्योग और विकास के क्षेत्र में विश्व स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। वहीं, पंजाब और हरियाणा के रिश्ते पर दिया गया उनका “नाखून और उंगली” वाला बयान अब राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा का विषय बना हुआ है।

चुनाव होंगे समय पर या दिसंबर तक टलेंगे? राजस्थान हाईकोर्ट आज करेगा साफ

 जयपुर राजस्थान में पंचायत और स्थानीय निकाय (नगर पालिका/नगर निगम) के चुनाव समय पर होंगे या दिसंबर तक के लिए टल जाएंगे, इस पर आज तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकती है. राज्य सरकार और इलेक्शन कमिशन के चुनाव टालने वाले प्रार्थना पत्र पर राजस्थान हाईकोर्ट आज (22 मई) अपना बड़ा फैसला सुना सकता है. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने इस मामले में बीते 11 मई को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित (Reserve) रख लिया था, जो आज कोर्ट रूम में सुनाया जा सकता है. क्या है पूरा मामला और सरकार क्यों मांग रही है समय? दरअसल, हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को एक साथ 439 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सख्त आदेश दिए थे कि 15 अप्रैल 2026 तक हर हाल में पंचायत और निकाय चुनाव करा लिए जाएं. हालांकि, भजनलाल सरकार ने हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र लगाकर इस समय-सीमा में चुनाव कराने को व्यावहारिक रूप से असंभव बताया और दिसंबर 2026 तक का समय मांग लिया. सरकार ने चुनाव टालने के पीछे कोर्ट के सामने प्रशासनिक और व्यावहारिक दलीलों की पूरी लिस्ट रखी थी:- सरकार का तर्क है कि मई-जून में राजस्थान में भयंकर लू (Heatwave) चलती है, जबकि जुलाई से सितंबर तक भारी बारिश और कृषि कार्यों में ग्रामीण मतदाता व्यस्त रहते हैं.  शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर करीब 68 हजार से ज्यादा मतदान केंद्र बनेंगे, जिनके लिए 3.4 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों की आवश्यकता होगी, जो फिलहाल संभव नहीं है. महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने दलील दी कि वार्डों के आंतरिक सीमांकन पर दो अलग-अलग फैसलों और ओबीसी आयोग की रिपोर्ट न आने के कारण आरक्षण तय करने में देरी हुई. 11 मई की सुनवाई में कोर्ट ने लगाई थी कड़ी फटकार पिछली सुनवाई के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की बेंच ने सरकार की इन दलीलों पर सख्त नाराजगी जाहिर की थी. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था- 'सरकार का रवैया ठीक नहीं है और उन्हें चुनाव की तैयारियों के लिए पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका है.' जब सरकार ने मौसम और ओबीसी आयोग का हवाला दिया, तो बेंच ने साफ कहा कि आदेश निकायों को लेकर था, तो फिर पंचायत चुनाव क्यों नहीं कराए गए? और ओबीसी आयोग क्या कर रहा है, यह कोर्ट के सामने विषय नहीं है. कोर्ट ने सरकार के 'गर्मी-बरसात' वाले तर्कों को स्वीकार न करते हुए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. 'जनता परेशान, सिस्टम बेहाल: विपक्ष हमलावर दूसरी तरफ, पूर्व कांग्रेस विधायक संयम लोढ़ा और गिर्राज सिंह देवंदा ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कोर्ट के आदेश की अवहेलना का आरोप लगाया है. उन्होंने इस मामले में एक अवमानना याचिका (Contempt Petition) भी दायर की है, जिस पर जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल और जस्टिस अनिल कुमार उपमन की बेंच में अगली सुनवाई 26 मई को होनी है. संयम लोढ़ा ने कहा, 'राजस्थान की जनता को उनके वोट देने के संवैधानिक अधिकार से वंचित किया जा रहा है. चुनाव न होने से पंचायतों और निकायों में भारी अव्यवस्था है, स्थानीय स्तर पर विकास के सारे काम पूरी तरह ठप हैं। लोग परेशान हैं और पूरा सिस्टम बेहाल है.' आज के फैसले पर टिकी सबकी नजरें यदि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की बेंच आज सरकार के प्रार्थना पत्र को खारिज कर देती है, तो सरकार और राज्य चुनाव आयोग को तुरंत चुनाव कराने की दिशा में आगे बढ़ना होगा. वहीं, यदि कोर्ट से राहत मिलती है, तो प्रदेश में स्थानीय सरकार के गठन के लिए जनता को दिसंबर तक का इंतजार करना पड़ेगा.

LAC सुरक्षा को मिलेगी नई ताकत, लखनऊ में बनेगा उत्तरी थिएटर कमांड

लखनऊ चीन पर नजर रखने के लिए लखनऊ में स्थापित मध्य कमांड को ही उत्तरी थिएटर कमांड बनाया जाना तय है। लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश के किबिथू तक फैली वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के 3,488 किलोमीटर क्षेत्र की देखरेख की जिम्मेदार होगी। यह चीन के साथ भारत की वास्तविक सीमा है। दो दिन पूर्व सीडीएस अनिल चौहान की लखनऊ यात्रा को इस दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने सेवानिवृत्त सैन्य अफसरों के साथ थिएटराइजेशन पर गंभीर चर्चा की थी। उम्मीद जताई जा रही है कि तीन प्रस्तावित थिएटर कमांडों की स्थापना 30 मई को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) के रूप में जनरल अनिल चौहान का कार्यकाल समाप्त होने से पहले हो जाएगी। प्रस्ताव के अनुसार उत्तरी थिएटर कमांड का नेतृत्व एक सेना जनरल करेंगे। उत्तरी मोर्चे पर अधिक जमीनी सैनिकों की आवश्यकता होने की उम्मीद है, इसलिए सेना अधिकारी थिएटर का नेतृत्व कर सकता है। ठोस शुरुआत 2019 में थिएटर कमांड बनाने की आधिकारिक और ठोस शुरुआत 2019 में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद बनने और सशस्त्र बलों के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद हुई। जुलाई 2024 में रक्षा मंत्रालय ने लखनऊ को उत्तरी थिएटर कमांड के आधार के रूप में नामित किया। 4 और 5 सितंबर 2024 को पहला संयुक्त कमांडर सम्मेलन (जेसीसी) लखनऊ में आयोजित किया गया था। उसमें तय हुआ था कि थिएटर कमांड के कमांडर-इन-चीफ और वाइस चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, सेना प्रमुखों (जनरल, एयर चीफ मार्शल और एडमिरल) की तरह चार सितारा रैंक के अधिकारी होंगे। थिएटर कमांड के मुख्य चरण कारगिल समीक्षा समिति 1999- कारगिल युद्ध के तुरंत बाद बनी इस समिति ने तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल के लिए 'इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड' की सिफारिश की थी। अंडमान निकोबार कमांड 2001- इस सिफारिश के तहत पहला कदम 2001 में उठाया गया। भारत की एकमात्र त्रि-सेवा कमांड अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में स्थापित की गई। शेकातकर समिति 2016- इस समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में तीनों सेनाओं की एकजुटता और संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए उत्तर, पश्चिम और दक्षिण में थिएटर कमांड बनाने का सुझाव दिया था। सीडीएस की नियुक्ति वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेनाओं को एक साथ लाने की प्रक्रिया को हरी झंडी दी। देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने इन कमांड्स को धरातल पर उतारने की मूल योजना (प्रस्तावित 5 थिएटर कमांड) तैयार की।

वास्तु शास्त्र: तिजोरी रखने की सही दिशा और धन वृद्धि के महत्वपूर्ण नियम

हर व्यक्ति चाहता है कि उसका पर्स पैसों से भरा रहे. तिजोरी में हमेशा धन की वृद्धि होती रहे. लेकिन सभी के साथ ऐसा नहीं होता है. कई लोगों के पास धन प्राप्ति के अवसर ही नहीं होते तो कई के पास धन तो आता है, लेकिन टिकता नहीं है. वहीं, कुछ लोग अपनी मेहनत के अनुसार धन की प्राप्ति न होने से परेशान रहते हैं. तो चलिए जानते हैं कि कौन सी ऐसी दिशाएं हैं जो आपकी तिजोरी और पर्स को हमेशा धन से भरा रखने में आपकी मदद कर सकती हैं. और कौन सी ऐसी दिशाएं हैं जो आपकी जेब खाली करा सकती हैं. धन के लिए मुख्य दिशाएं धन के लिए प्रमुख रूप से तीन दिशाएं महत्वपूर्ण हैं. उत्तर, दक्षिण-पूर्व और पश्चिम दिशा. इन तीनों दिशाओं में यदि आप अपना पैसा या तिजोरी रखने हैं तो धन वृद्धि के लिए अच्छा है. उत्तर दिशा को हमेशा रोशनी से भरा रखना भी धन वृद्धि के लिए बेहतर उपाय है. वहीं, साउथ-ईस्ट दिशा में व्यक्ति को रोज के खर्चे के लिए कुछ पैसे अवश्य रखने चाहिए. धन वृद्धि के लिए पश्चिम दिशा में उत्तर दिशा की तरफ खुलने वाली तिजोरी का होना सबसे बेहतर है. पश्चिम आपकी इच्छा पूर्ति की दिशा है. ज्यादातर अमीर घरों में लोग इन्हीं तीन जगहों पर पैसा या मूल्यवान चीजें रखने के लिए तिजोरी बनवाते हैं. कहां न बनाएं तिजोरी? जहां तिजोरी गलती से भी नहीं बनानी चाहिए वह दिशा साउथ-साउथ-वेस्ट दिशा है. यहां रखा धन न तो सही समय पर आपके काम आएगा और व्यर्थ ही बर्बाद होगा. इसलिए इस दिशा में किसी भी व्यक्ति को तिजोरी या पैसा रखने की गलती नहीं करनी चाहिए.  वेस्ट-नॉर्थ-वेस्ट दिशा में भी कभी तिजोरी न बनाएं. यहां भी तिजोरी या किसी भी प्रकार से धन रखना ठीक नहीं है. तीसरी दिशा ईस्ट-साउथ-ईस्ट दिशा है जहां धन या तिजोरी का होना धन वृद्धि में बाधक बन सकता है.

जहां चलता था भतीजे का दबदबा, वहां TMC के झंडे तक नहीं बचे

कलकत्ता पश्चिम बंगाल के फलता को तृणमूल कांग्रेस का गढ़ कहा जाता था। यह लोकसभा सांसद और पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक के संसदीय क्षेत्र में भी आता है। इसकी बड़ी वजह यहां पर जहांगीर खान के प्रभाव को माना जाता था। अब नौबत यह है कि खुद जहांगीर अंत समय में चुनावी मैदान छोड़कर चले गए और नतीजा यह हुआ कि टीएमसी पूर्व सीएम बनर्जी के भवानीपुर के बाद एक और गढ़ गंवाने की कगार पर है। कुछ दिनों में बदले हालात 29 अप्रैल को जब पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण का मतदान होना था, तो उसमें फलता भी शामिल था। उस दौरान क्षेत्र के हर हिस्से में टीएमसी के झंडे और पार्टी कार्यकर्ता मौजूद थे। अब कुछ ही दिनों में स्थिति बदल गई है और अब जगह दूसरे दलों के झंडों से लदी हुई है। टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, पूरे विधानसभा क्षेत्र में टीएमसी एक झंडा भी नजर नहीं आ रहा था। वहीं, इस सीट पर बाहुबली छवि वाले जहांगीर खान भी चुनाव से हटने के बाद क्षेत्र से नदारद हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वह गुरुवार को हुए मतदान में भी शामिल नहीं हुए। अखबार से बातचीत में स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें आखिरी बार मंगलवार को देखा गया था। खास बात है कि मंगलवार को ही खान ने चुनाव से हटने का फैसला किया था। अभिषेक बनर्जी का चलता था सिक्का जहांगीर खान को डायमंड हार्बर सांसद अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता है। साल 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र से उन्हें 89 फीसदी से ज्यादा वोट मिले थे। अब जब खान ने चुनाव से नाम वापस लिया, तो टीएमसी ने इससे किनारा किया और खान का निजी फैसला बताया। बंपर वोटिंग हुई गुरुवार को सीट पर पुनर्मतदान शांतिपूर्ण तरीके से हुआ जहां 86 फीसदी से अधिक लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। इस दौरान केंद्रीय बलों की भारी तैनाती रही। यह पुनर्मतदान 29 अप्रैल के चुनाव से जुड़े विवाद के कारण हुआ, जब कई मतदान केंद्रों से शिकायतें सामने आईं कि ईवीएम पर इत्र जैसे पदार्थ और चिपकने वाली टेप लगाई गई थीं। भाजपा और लेफ्ट में मुकाबला खान के हटने के बाद इस सीट पर टीएमसी के पास दावेदारी ही नहीं बची। ऐसे में मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के देबांग्शु पांडा और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के शंभूनाथ कुर्मी के बीच माना जा रहा है। सीट पर कांग्रेस की तरफ से अब्दुर रज्जाक मोल्ला चुनाव लड़ रहे हैं। भवानीपुर गंवाया 4 मई को जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों में ममता बनर्जी के भवानीपुर सीट से हारने की खबर आई। खास बात है कि उन्हें अब बंगाल के मुख्यमंत्री बने शुभेंदु अधिकारी ने ही 15 हजार से ज्यादा मतों से हराया था। इससे पहले वह 2021 के चुनाव में अधिकारी के सामने नंदीग्राम सीट से भी हार का सामना कर चुकी हैं।

गजकेसरी और बुधादित्य योग 2026: 5 राशियों के लिए खुलेंगे सफलता और धन लाभ के द्वार

 द्रिक पंचांग के अनुसार, आज बनने वाले गजकेसरी योग और बुधादित्य योग का यह दुर्लभ संयोग बेहद शुभ और फलदायी माना जा रहा है. जब कुंडली में देवगुरु बृहस्पति और चंद्रमा की युति बनती है तो गजकेसरी योग बनता है. गजकेसरी योग मान-सम्मान और समृद्धि लाता है. वहीं, सूर्य और बुध की युति से बनने वाला बुधादित्य योग बुद्धि, करियर और व्यापार में अपार सफलता दिलाता है. इन दोनों महायोगों के प्रभाव से 5 भाग्यशाली राशियों के लंबे समय से अटके हुए काम पूरे होने वाले हैं, साथ ही धन लाभ और करियर में तरक्की के प्रबल संकेत हैं. आइए जानते हैं वो 5 राशियां कौन सी हैं. 1. मेष राशि (Aries) मेष राशि के जातकों के लिए यह समय किसी वरदान से कम नहीं है. करियर और व्यापार: ऑफिस में आपके काम की तारीफ होगी. सीनियर्स का पूरा सपोर्ट मिलेगा. व्यापार में कोई बड़ी डील फाइनल हो सकती है, जिससे लंबे समय से रुका हुआ मुनाफा वापस मिलेगा. अटके काम: यदि आपका कोई सरकारी काम या कोर्ट-कचहरी का मामला अटका हुआ था, तो उसमें गति आएगी और फैसला आपके पक्ष में हो सकता है. 2. मिथुन राशि (Gemini) बुध की इस स्थिति से मिथुन राशि के जातकों को सीधा फायदा होने जा रहा है. धन लाभ: आर्थिक स्थिति में जबरदस्त सुधार देखने को मिलेगा. आकस्मिक धन लाभ के योग बन रहे हैं. अगर आपने कहीं निवेश किया था, तो उससे बड़ा रिटर्न मिल सकता है. सफलता: नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या नई नौकरी के बेहतरीन अवसर मिल सकते हैं. आपकी निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होगी. 3. सिंह राशि (Leo) सूर्य के प्रभाव से सिंह राशि के जातकों का आत्मविश्वास और सामाजिक मान-सम्मान चरम पर होगा. करियर में ग्रोथ: जो लोग काफी समय से नौकरी बदलने का प्रयास कर रहे थे, उनकी तलाश अब खत्म हो सकती है. कार्यक्षेत्र में आपकी लीडरशिप क्वालिटी की सराहना होगी. अटके काम: प्रॉपर्टी या वाहन खरीदने की योजना जो पिछले कई महीनों से टल रही थी, वह अब धरातल पर आ सकती है. 4. तुला राशि (Libra) गजकेसरी योग तुला राशि के जातकों के जीवन में स्थिरता और खुशहाली लेकर आ रहा है. आर्थिक पक्ष: आपकी इनकम के नए सोर्स बनेंगे, जिससे पुराना कर्ज या उधार चुकाने में आप सफल रहेंगे. बैंक बैलेंस में बढ़ोतरी होगी. पारिवारिक जीवन: परिवार में चल रहा कोई पुराना मनमुटाव समाप्त होगा. पैतृक संपत्ति से जुड़े मामलों में सफलता मिलेगी. 5. धनु राशि (Sagittarius) धनु राशि के स्वामी गुरु (बृहस्पति) हैं, इसलिए गजकेसरी योग का सबसे शानदार प्रभाव आपकी राशि पर देखने को मिलेगा. भाग्य का साथ: किस्मत का पूरा साथ मिलने से आपके बिगड़े हुए काम अचानक बनने लगेंगे. विदेश यात्रा या उच्च शिक्षा से जुड़े प्रयास सफल होंगे. करियर: बिजनेस करने वाले जातकों को कोई नया प्रोजेक्ट या बड़ा ऑर्डर मिल सकता है, जिससे मार्केट में आपकी साख बढ़ेगी.

‘जीजा, अब क्या करना है…’ चैट से खुला राज, हनीट्रैप गैंग से जुड़ा पुलिसवाला पकड़ा गया

इंदौर मध्य प्रदेश में इंदौर के चर्चित हनीट्रैप 2026 मामले में अब जांच और भी गहरी होती जा रही है। इंदौर क्राइम ब्रांच द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने गुरुवार को इंटेलिजेंस शाखा में तैनात हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा को भी गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के मुताबिक विनोद शर्मा पर हनीट्रैप नेटवर्क की साजिश में शामिल होने और आरोपियों को रणनीतिक सलाह देने के गंभीर आरोप हैं। सूत्रों के अनुसार, आरोपी महिलाएं उसे ‘जीजा’ कहकर बुलाती थीं और कथित तौर पर आपत्तिजनक वीडियो, फोटो और चैट शेयर कर आगे की ब्लैकमेलिंग रणनीति पर सलाह लेती थीं। पुलिस अब उसके मोबाइल फोन, चैट रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा की फोरेंसिक जांच करवा रही है। SIT ने संभाली जांच, पांच मोबाइल जब्त डीसीपी (क्राइम) राजेश त्रिपाठी के अनुसार पूरे मामले की जांच के लिए SIT गठित की गई है। अब तक पांच मोबाइल फोन जब्त किए जा चुके हैं, जिनकी साइबर और फोरेंसिक एक्सपर्ट द्वारा जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह नेटवर्क किन-किन नेताओं, कारोबारियों और अफसरों तक पहुंचा था। साथ ही रेशु चौधरी से जुड़े जमीन खरीदी-बिक्री के एक अहम कॉन्ट्रैक्ट को भी जब्त करने की कोशिश की जा रही है। विदेश में पढ़ी रेशु ने बढ़ाईं राजनीतिक नजदीकियां जांच में सामने आया है कि मकरोनिया (सागर) निवासी रेशु चौधरी विदेश में पढ़ाई कर चुकी है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान वह दिल्ली में बड़े नेताओं के संपर्क में आई और बाद में इन्हीं संपर्कों का इस्तेमाल कर मध्य प्रदेश के प्रभावशाली लोगों तक पहुंच बनाई।बताया जा रहा है कि उसने राजनीति और हाईप्रोफाइल नेटवर्किंग के जरिये खुद को स्थापित करने की कोशिश की और धीरे-धीरे प्रॉपर्टी कारोबार से भी जुड़ गई। तीन साल में खड़ा हुआ हाईप्रोफाइल नेटवर्क पुलिस के अनुसार इस पूरे गिरोह की कथित मास्टरमाइंड अलका दीक्षित है। श्वेता जैन के साथ आने के बाद नेटवर्क तेजी से फैलता चला गया। UPSC-MPPSC प्रोफाइल से बनाई हाईप्रोफाइल पहचान रेशु सोशल मीडिया प्रोफाइल में खुद को कभी UPSC प्री क्वालिफाइड, तो कभी MPPSC प्री-2016 पास बताती थी। कुछ जगह उसने रेवेन्यू सर्विस में चयनित होने तक का दावा किया था। वर्ष 2016 में उसने “ब्रह्मपुत्र IAS एकेडमी” नाम से कोचिंग संस्थान भी शुरू किया था, जो बाद में बंद हो गया। राजनीति में एंट्री की तैयारी, लेकिन सपना अधूरा सूत्रों के मुताबिक, भोपाल के एक बड़े भाजपा नेता के संपर्क में आने के बाद रेशु ने नरयावली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी थी। उसने क्षेत्र में बड़े-बड़े होर्डिंग लगवाकर अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराई थी। हालांकि 2018 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने प्रदीप लारिया को प्रत्याशी बना दिया और रेशु की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं अधूरी रह गईं। अब SIT पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस हाईप्रोफाइल हनीट्रैप मामले में कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

जानलेवा आवारा कुत्तों के खिलाफ पंजाब में बड़ा एक्शन, सुप्रीम कोर्ट आदेश पर अमल शुरू

चंडीगढ़  पंजाब में आज जानलेवा लावारिस कुत्तों के खात्मे के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर इस संबंध में जानकारी दी थी कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार एक बड़ा अभियान शुरू करेगी। इसका उद्देश्य उन जानलेवा लावारिस कुत्तों को खत्म करना है, जो बच्चों और राहगीरों के जीवन के लिए खतरा पैदा करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अपने आदेश में कहा था कि रेबीज से संक्रमित, लाइलाज बीमारी से ग्रस्त या अत्यधिक आक्रामक व खतरनाक कुत्तों को कानून के तहत मृत्यु दी जा सकती है। कोर्ट ने कहा था कि संविधान के तहत गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार में कुत्ते के हमलों के डर या खतरे के बिना स्वतंत्र रूप से घूमने का हक भी शामिल है। प्रदेश में पिछले कुछ समय से लावारिस कुत्तों के काटने के मामले में वृद्धि होती जा रही है। सरकार ने जनवरी में लुधियाना में राज्य की पहली डॉग सैंक्चुअरी का उद्घाटन भी किया था जिसका उद्देश्य डॉग बाइट की बढ़ती घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण करना है। इसकी क्षमता लगभग 500 कुत्तों की है और इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है और प्रदेश के अन्य शहरों में भी इसी तर्ज पर डॉग सैंक्चुअरी स्थापित करने का फैसला लिया गया है। प्रदेश में लावारिस कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है। वर्ष 2025 में कुत्तों के काटने के ढाई लाख से अधिक मामले सामने आए जबकि वर्ष 2024 में डॉग बाइट के 2.13 लाख मामले रिपोर्ट किए गए थे।  सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कई संगठनों में मायूसी पेटा (PETA) इंडिया के मुताबिक देश में आवारा कुत्तों की अनुमानित संख्या 6.2 करोड़ है। इनकी संख्या बढ़ने की मुख्य वजह एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) रूल्स का सही पालन न होना है। इन नियमों के तहत कुत्तों की नसबंदी और रेबीज टीकाकरण होना चाहिए। पेटा ने एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया की एसओपी पर ऐतराज जताया है। संगठन का कहना है कि इस एसओपी में हर कुत्ते के लिए सिर्फ 20 वर्गफुट जगह तय है। इतने छोटे स्थान में इन्हें नीचलन रखना क्रूरता है। इससे बीमारियां फैल सकती हैं। इतने बड़े स्तर पर कुत्तों को बंद रखने के लिए न पर्याप्त जगह है और न ही बजट और न ही प्रशासनिक व्यवस्था है। एक दैनिक अखबार में प्रकाशित कुत्तों के आंकड़ों पर आयोग ने कहा था कि 3.34 लाख डॉग बाइट के मामले चौंकाने वाले हैं। लावारिस कुत्ते सार्वजनिक सुरक्षा के लिए बड़ी चिंता बन गए हैं। बता दें कि पंजाब में 2025 में डॉग बाइट के 3.34 लाख मामले रिपोर्ट हुए थे जबकि 2026 में अब तक 50 हजार से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं। जस्टिस संत प्रकाश और जस्टिस गुरबीर सिंह जता चुके चिंता पंजाब -चंडीगढ़ मानवाधिकार आयोग के चेयरपर्सन जस्टिस संत प्रकाश और सदस्य जस्टिस गुरबीर सिंह पर आधारित आयोग ने जालंधर, लुधियाना, पटियाला और संगरूर के नगर निगम कमिश्नरों सहित निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग पंजाब को नोटिस जारी कर कुत्तों के काटने के मामलों की रिपोर्ट पेश करने को कहा था। आयोग ने कहा था कि 2025 के 3.34 लाख मामलों में ही अगर पीड़ितों को मुआवजा दिया जाता है तो सूबा सरकार पर 2 हजार करोड़ रुपए से अधिक का वित्तीय बोझ पड़ेगा। अकेले संगरूर जिले में ही नगर कौंसिल को 10 करोड़ रुपए का खर्च उठाना पड़ सकता है। 5 साल में तीन गुना बढ़े कुत्तों के काटने के केस हेल्थ विभाग पंजाब के आंकड़ों के अनुसार पिछले 5 सालों में पंजाब में कुत्तों के काटने के मामले तीन गुना बढ़े हैं। साल 2020 में जहां 1 लाख 10 हजार 472 मामले दर्ज थे, वहीं यह बढ़कर 2021 में 1 लाख 26 हजार 842 हो गए। इसी तरह साल 2022 में 1 लाख 65 हजार 133 मामले रिकॉर्ड हुए और 2023 में भी यह आंकड़े 1 लाख 65 हजार 133 ही दर्ज किए गए। इसके बाद 2024 में यह मामले बढ़कर 2 लाख 13 हजार 521 हुए और 2025 में रिकॉर्ड तोड़ 3 लाख 34 हजार 736 तक पहुंच गए। 2026 की बात करें तो अब तक पंजाब में 5 महीने में 50 हजार से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं। SOP में हर कुत्ते के लिए सिर्फ 20 वर्गफुट जगह तय है ह्यूमन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया के एमडी आलोकवर्मा सेनगुप्ता ने कहा कि इंसानों और आवारा कुत्तों के बीच बढ़ते संघर्ष की असली वजह कुत्तों की मौजूदगी नहीं, बल्कि सालों से नसबंदी और रेबीज टीकाकरण कार्यक्रम का सही ढंग से लागू न होना है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि कानून और नियम पहले से मौजूद हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने उन्हें प्रभावी तरीके से लागू नहीं किया। संगठन ने अदालत के उस निर्देश का स्वागत किया, जिसमें उसने कहा है कि देश के हर जिले में कम से कम एक पूरी तरह काम करने वाला एबीसी सेंटर बनाया जाए। जबरन कार्रवाई से बढ़ सकती है आवारा कुत्तों की समस्या: संगठन संगठन ने कहा कि राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश ऐसे कदम न उठाएं जो कानून और वैधानिक प्रक्रिया से बाहर हो। इनमें कुत्तों को जबरन हटाने, बड़ी संख्या में पकड़कर बंद करने, मारना या हटाने की नीति अपनाने जैसे कदम शामिल हैं। उनका कहना है कि इससे समस्या कम नहीं होगी, बल्कि दोबारा आबादी बढ़ेगी और संघर्ष बढ़ सकता है। संगठनों ने क्या दिए सुझाव कुत्तों के लिए तय समय में बड़े स्तर पर वैज्ञानिक तरीके से नसबंदी अभियान चले, रेबीज टीकाकरण हो, अवैध ब्रीडर और पालतू पशु दुकानों पर कार्रवाई हो, विदेशी नस्ल के डॉग्स के अवैध प्रजनन पर रोक लगे, कुत्तों को खाना खिलाने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित हो, डॉग्स को गोद लेने को बढ़ावा दिया जाए और स्थानीय निकायो की जिम्मेदारी तय की जाए। कब-कब क्या हुआ? 28 जुलाई 2025 : SC ने टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार के में प्रकाशित समाचार 'आवारा कुत्तों से त्रस्त शहर, बच्चे भुगत रहे कीमत' (City hounded by strays and kids pay price) पर स्वतः संज्ञान (suo moto cognisance) लिया था। 11 अगस्त 2025 : कोर्ट ने दिल्ली और एमसीडी की अथॉरिटी को निर्देश जारी किया कि वे … Read more

जैविक खेती के लिये अध्ययन दल भेजे दंतेवाड़ा: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जनजातीय क्षेत्रों में जैविक खेती को दें प्रोत्साहन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव जैविक खेती के लिये अध्ययन दल भेजे दंतेवाड़ा: मुख्यमंत्री डॉ. यादव जनजातीय छात्रावासों में शैक्षणिक एवं आवासीय प्रबंधन करें बेहतर: मुख्यमंत्री डॉ. यादव विशेष पिछड़ी जातियों के समग्र विकास के लिये करें सतत कार्य मुख्यमंत्री ने मंत्रालय में की जनजातीय कार्य विभाग की समीक्षा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में जैविक खेती को प्रोत्साहन दिया जाये। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में भी जनजातीय कृषकों द्वारा जैविक खेती की जा रही है। इसका अध्ययन करने के लिए मध्यप्रदेश से दल भेजा जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को जनजातीय कार्य विभाग की समीक्षा बैठक में यह बात कही। बैठक में जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. विजय शाह, मुख्य सचिव अनुराग जैन, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त मनीष रस्तोगी, जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित विद्यालयों, आश्रम और छात्रावासों में शिक्षा और रहन सहन की गुणवत्ता बेहतर करें। जनजातीय क्षेत्रों में परंपरागत सामाजिक मूल्यों के संरक्षण और समग्र विकास के लिए समाज सेवी संगठनों का भी सहयोग लें। जनजातीय क्षेत्र में शासन के विभिन्न विभाग मिलकर कार्य करें। कन्वर्जेंस से जन सुविधाओं का विकास सुनिश्चित किया जाये। जनजातीय समाज में पशुपालन को बढ़ावा दें और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में इनका सहयोग ले। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की विशेष पिछड़ी जनजातियों बैगा, भारिया और सहारिया के समग्र विकास के लिए सतत् कार्य करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभाग द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिये आवश्यक कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया है कि हाई स्कूल एवं हायर सेकंडरी परीक्षा परिणाम 2026 में सर्वश्रेष्ठ 10 ज़िलों में से 7 जनजातीय जिले शामिल हैं। दिसम्बर 2023 से अब तक जनजातीय वर्ग के कक्षा 9 एवं 10 के कुल 3 लाख 65 हज़ार विद्यार्थियों को 137 करोड़ 52 लाख रुपये की छात्रवृत्ति का भुगतान किया गया है। इसी अवधि में पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत 4 लाख 28 हज़ार विद्यार्थियों को 673 करोड़ 64 लाख रुपये की राशि भुगतान की गई है। विभाग द्वारा 2671 छात्रावास और आश्रम शालाओं का संचालन किया जा रहा है। मंत्री डॉ. शाह ने बताया कि विशेष पिछड़ी जनजातियों की महिला मुखिया के बैंक खाते में प्रतिमाह 15 सौ रुपये की राशि शासन की आहार अनुदान योजना में प्रदान की जा रही है। दिसम्बर 2023 से अभी तक में 2 लाख 37 हजार 550 महिलाओं को कुल 432 करोड़ रुपये प्रदान किए गए हैं।