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मेडिकल स्टोर बंद होने से चंडीगढ़ में असर, राहत बनी PGI और सरकारी अस्पतालों की दवा व्यवस्था

चंडीगढ़. दवा बिक्रेताओं के राष्ट्रव्यापी बंद का असर आज चंडीगढ़ में भी देखने को मिलेगा। शहर की अधिकांश मेडिकल स्टोर बंद रहेंगे। मरीजों को परेशानी से बचाने के लिए प्रशासन ने पीजीआई, जीएमसीएच-32, जीएमएसएच-16 और विभिन्न सिविल अस्पतालों सहित 52 मेडिकल स्टोर खुले रखने का निर्णय लिया है। पीजीआई के न्यू ओपीडी, एडवांस ट्रामा सेंटर, कार्डियक सेंटर, एडवांस्ड आइ सेंटर और गोल मार्केट स्थित कई मेडिकल स्टोर शामिल हैं। इसके अलावा जीएमसीएच-32, जीएमएसएच-16, सेक्टर-22 और सेक्टर-45 स्थित सिविल अस्पतालों के मेडिकल स्टोर भी खुले रहेंगे। प्रशासन ने विभिन्न क्षेत्रों में स्थित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों को भी चालू रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि आम लोगों को सस्ती और जरूरी दवाएं आसानी से मिल सकें। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बंद के दौरान जिन मेडिकल स्टोरों को खुला रखने की अनुमति दी गई है, वे पूरे दिन कार्यरत रहेंगे। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि घबराने की जरूरत नहीं है और जरूरत पड़ने पर सूचीबद्ध मेडिकल स्टोरों से दवाएं प्राप्त की जा सकती हैं।

न्यायालय परिसर बना रणक्षेत्र, सुनवाई के बीच भिड़े दोनों पक्ष; प्रशासन ने लिया एक्शन

बलरामपुर. जमीन से जुड़े मामले में सुनवाई के लिए तहसील कार्यालय पहुंचे पक्षकार आपस में भिड़ गए. तहसील कार्यालय के पुलिस के निकाले जाने के बाद दोनों पक्ष तहसील परिसर में एक-दूसरे से मारपीट करने लगे. घटना पर वाड्रफनगर तहसीलदार गुरुदत्त पंचभावे की रिपोर्ट पर वाड्रफनगर चौकी पुलिस ने 18 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर धरपकड़ में जुटी है. दरअसल, वाड्रफनगर तहसीलदार के समक्ष मंगलवार को आवेदक इलियासुदीन पिता जलालूदीन विरूद्ध अनावेदकगण रसीद पिता इलियास, अफजल पिता इलियास और इलियास पिता इस्ताज के प्रकरण की सुनवाई हो रही थी. इसी दरम्यान अनावेदक पक्ष के पक्षकार एवं उनके साथ साक्ष्य के लिए उपस्थित गवाहों ने दूसरे पक्ष के अधिवक्ता सिद्वदकी के साथ गाली-गलौच करते हुए वाद-विवाद और मारपीट करने लगे. कोर्ट से निकाले जाने बाद तहसील एवं सिविल कोर्ट परिसर में दोनो पक्षों ने आपस में मारपीट की. घटना के मद्देनजर तहसीलदार पंचभोई ने न्यायालय की गरिमा को क्षति पहुंचाने के साथ शासकीय कार्य में बाधा डालने पर दोनो पक्षों के विरुद्ध शांति भंग करने पर बीएनएस की धारा 170 के तहत कार्रवाई करने पुलिस में नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई है. इसके साथ वीडियो भी संलग्न किया गया, जिससे पुलिस पूरे साक्ष्य के साथ मामले में कार्रवाई कर सके. मामले में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने के बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई शुरू कर दी है.

दवा दुकानों की बंदी से बुजुर्गों की चिंता बढ़ी, बोले- पत्नी को दवा नहीं मिली तो तबीयत बिगड़ जाएगी

भोपाल  मध्य प्रदेश में 41  हजार से ज्यादा मेडिकल स्टोर बंद, दवा व्यापार पर बड़ा असर Bhopal में देशभर के केमिस्टों की ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में हड़ताल का असर देखने को मिला है. ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट के आह्वान पर देशभर में मेडिकल स्टोर बंद रहे, जिसमें लाखों केमिस्ट, फार्मासिस्ट और दवा वितरक शामिल हुए. मध्य प्रदेश में भी लगभग 41 हजार से ज्यादा मेडिकल स्टोर बंद रहे. भोपाल केमिस्ट एसोसिएशन के अनुसार ऑनलाइन दवा व्यापार ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट का उल्लंघन है और इससे आम जनता के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है. केमिस्टों ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बिना फार्मासिस्ट निगरानी के दवाओं की सप्लाई कर रहे हैं, जिससे नकली और गलत दवाओं के वितरण की आशंका बढ़ जाती है. साथ ही भारी छूट और कम कीमत की वजह से छोटे और मध्यम मेडिकल स्टोर्स आर्थिक संकट में हैं. दवा विक्रेताओं ने GSR 220(E) और GSR 817(E)/870(E) जैसे प्रावधानों का विरोध करते हुए ऑनलाइन दवा व्यापार को तुरंत नियंत्रित करने की मांग की है।  अकेले भोपाल में 3 हजार से ज्यादा मेडिकल स्टोर्स इस बंद में शामिल हैं। सिर्फ अस्पतालों के अंदर संचालित मेडिकल स्टोर्स को ही खुला रखा गया है। यह बंद ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) की ओर से ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में बुलाया गया है। आईओएसीएडी को जनरल सेक्रेटरी राजीव सिंघल ने बताया कि प्रदेश के सभी रिटेल और थोक दवा व्यवसायियों ने इस बंद का समर्थन किया है। यह मुद्दा सीधे आम लोगों की सेहत से जुड़ा है। घर-घर पहुंच रही ऑनलाइन दवाओं की गुणवत्ता और निगरानी को लेकर अभी स्पष्ट सिस्टम नहीं है, जो गंभीर चिंता का विषय है। हड़ताल से मरीज परेशान, दवा नहीं मिलने पर बुजुर्ग भटकते रहे ग्वालियर के दवा बाजार में दवा लेने पहुंचे बुजुर्ग हरिओम कश्यप ने बताया कि वह अपनी 75 साल की पत्नी के लिए दवा लेने आए थे, लेकिन बाजार बंद होने के कारण उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। काफी देर भटकने पर भी उन्हें दवा नहीं मिलीं। उन्होंने कहा कि जिस दवा के लिए वह आए हैं, वह उनकी पत्नी के लिए बेहद जरूरी है। समय पर दवा नहीं मिलने से उनकी तबीयत और बिगड़ सकती है। अस्पतालों के मेडिकल स्टोर्स बंद से मुक्त     अस्पतालों के अंदर संचालित मेडिकल स्टोर्स को बंद से मुक्त रखा गया है, ताकि मरीजों को कोई परेशानी न हो।     इमरजेंसी मरीजों के लिए जिला स्तर पर टास्क फोर्स बनाई गई है। संपर्क के लिए नंबर जारी किए गए हैं, जिन पर कॉल कर मरीज दवा की मांग कर सकते हैं। टास्क फोर्स जरूरतमंदों तक दवाएं पहुंचाने का काम करेगी कोविड-19 के दौरान सरकार ने ई-फार्मा को छूट दी कोविड-19 महामारी के दौरान, भारत सरकार ने लॉकडाउन में लोगों तक जरूरी दवाइयां पहुंचाने के लिए ई-फार्मा स्टोर्स (ऑनलाइन मेडिकल स्टोर्स) को कई बड़ी रियायतें दी थीं। सरकार ने ई-फार्मा को आवश्यक सेवा का दर्जा दिया, जिससे लॉकडाउन में भी उनकी डिलीवरी बिना रोक-टोक जारी रही। इसके अलावा, नियमों में ढील देते हुए डॉक्टरों के डिजिटल प्रिसक्रिप्शन (व्हाट्सएप या ईमेल पर भेजी गई पर्ची) के आधार पर दवाइयां बेचने की मंजूरी दी गई। घर-घर जाकर दवाइयां पहुंचाने की प्रक्रियाओं को आसान बनाया गया ताकि लोग अस्पतालों या मेडिकल स्टोर पर भीड़ लगाने के बजाय सुरक्षित तरीके से घर बैठे ही अपनी रेगुलर और जरूरी दवाइयां मंगा सकें।

लुधियाना सहित पूरे पंजाब में मेडिकल स्टोर बंद, मरीजों को अस्पतालों का सहारा

लुधियाना. लुधियाना में बुधवार को केमिस्टों की हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। शहर के अधिकांश मेडिकल स्टोर बंद रहे, जिससे आम लोगों और मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सुबह से ही शहर के विभिन्न इलाकों में दवा दुकानों के शटर गिरे दिखाई दिए और दवाइयां खरीदने पहुंचे लोगों को निराश होकर लौटना पड़ा। सबसे अधिक परेशानी उन मरीजों को हुई जिन्हें रोजाना नियमित दवाइयों की आवश्यकता रहती है। कई बुजुर्ग मरीज और उनके परिजन एक मेडिकल स्टोर से दूसरे मेडिकल स्टोर तक भटकते दिखाई दिए। कुछ लोगों ने बताया कि उन्हें काफी दूर तक जाकर खुली दवा दुकानों की तलाश करनी पड़ी। केमिस्ट संगठनों का कहना है कि उनकी कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं और संबंधित विभागों द्वारा समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा। इसी के विरोध में यह हड़ताल की गई। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जा सकता है। सिविल अस्पताल के अंदर खुली दुकानें हालांकि राहत की बात यह रही कि सिविल अस्पताल और सीएमसी अस्पताल के भीतर संचालित फार्मेसियां खुली रहीं। वहां मरीजों को आवश्यक दवाइयां उपलब्ध करवाई जाती रहीं। अस्पतालों में भर्ती मरीजों और बाह्य रोगी विभाग में आने वाले लोगों को इससे काफी राहत मिली। अस्पताल प्रशासन की ओर से भी दवाइयों की उपलब्धता बनाए रखने के प्रयास किए गए, ताकि मरीजों को ज्यादा परेशानी न हो। मोगा में ऑनलाइन दवा नीति के खिलाफ केमिस्टों का हल्लाबोल – ऑल इंडिया आर्गेनाइजेशन ऑफ कैमिस्ट एंड ड्रगिस्ट की ओर से घोषित देशव्यापी हड़ताल के दौरान बुधवार को मोगा डिस्टिक केमिस्ट एसोसिएशन के बैनर तले जिले की करीब 800 होलसेल व रिटेल दवा दुकानें बंद रखी गई। हड़ताल को लेकर जिले भर के केमिस्ट मोगा के सिविल अस्पताल के बाहर एकत्रित हुए इस दौरान सभी ने केंद्र सरकार की गलत पॉलिसी और पंजाब सरकार के नियमों में बदलाव न करने के चलते रोष जताया। इस दौरान सिविल अस्पताल में दवाई लेने वाले आए मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान मोगा डिस्ट्रिक्ट कैमिस्ट एसोसिएशन के प्रधान राजीव गर्ग ,दीपक कुमार दीपू सचिव नवीन सूद व संजीव कुमार मिन्ना ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से चलाई गई ऑनलाइन स्कीम योजना उनके कारोबार के लिए एक बहुत बड़ी समस्या बनी हुई है, क्योंकि कोविड़ काल के दौरान केंद्र सरकार ने ऑनलाइन दवाई सप्लाई करने को लेकर प्रस्ताव पारित किया था। कारोबार बहुत हद तक प्रभावित हो रहा लेकिन कोविड़ खत्म होने के बाद उस प्रस्ताव को रद नहीं किया गया। जिसके कारण उनका कारोबार बहुत हद तक प्रभावित हो रहा है। उन्होंने बताया कि बड़ी कंपनियां ऑनलाइन माध्यम से दवाइयां 40 प्रतिशत तक कम कीमत पर बेच रही हैं, जिससे स्थानीय मेडिकल स्टोर और दवा सप्लायरों का कारोबार प्रभावित हो रहा है। हड़ताल के दौरान एसोसिएशन के प्रधान राजीव गर्ग ,दीपक कुमार दीपू सचिव नवीन सूद बताया कि ऑनलाइन कंपनियों को ज्यादा कमीशन दिया जाता है। इससे छोटे दुकानदार आर्थिक दबाव में आ गए हैं। यही नही ड्रग विभाग की गाइडलाइन बहुत सख्त है ऑनलाइन की आड़ में प्रतिबंधित दवाइया सप्लाई की जा रही हैं। लेकिन ऑनलाइन सप्लाई करने वाले कारोबारी पर कोई भी कार्रवाई नहीं होती है। अगर लोकल केमिस्ट कोई प्रतिबंधित दवाई बेचता है तो उसके खिलाफ ड्रग विभाग कार्रवाई कर देता है। इस मौके पर समस्त एग्जीक्यूटिव के सदस्य मौजूद थे।

नॉर्वे के अखबार में छपे कार्टून से मचा हंगामा, PM मोदी के दौरे के बाद उठे सवाल

नई दिल्ली नॉर्वे के एक बड़े अखबार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक कार्टून बनाया है जिस पर अब विवाद शुरू हो गया. इस कार्टून में पीएम मोदी को सपेरे की तरह दिखाया गया था. उनके हाथ में सांप जैसी दिखने वाली एक पेट्रोल पाइप भी दिखाई गई. कार्टून के साथ छपे लेख का शीर्षक था, "A clever and slightly annoying man" यानी "एक चालाक और थोड़ा परेशान करने वाला आदमी।  सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस कार्टून को नस्लवादी बताया. लोगों का कहना है कि पश्चिमी मीडिया अब भी भारत को "सपेरों का देश" वाली पुरानी सोच से देखता है. कई यूजर्स ने लिखा कि यह भारत की गलत और पुरानी छवि दिखाने की कोशिश है।  एक यूजर ने एक्स पर लिखा, "यह कार्टून रेसिस्ट लगता है. पीएम मोदी खुद कई बार कह चुके हैं कि पहले दुनिया भारत को सपेरों का देश मानती थी, लेकिन अब वही सोच फिर दिखाई जा रही है." कुछ लोगों ने इसे "औपनिवेशिक मानसिकता" भी बताया।  विवाद तब और बढ़ गया जब नॉर्वे की पत्रकार हेले लाइंग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल पूछा कि पीएम मोदी मीडिया से सवाल क्यों नहीं लेते. उन्होंने भारत में प्रेस फ्रीडम और मानवाधिकारों का मुद्दा भी उठाया. हालांकि पीएम मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनस गाहर बिना जवाब दिए वहां से चले गए. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।  इसके बाद भारत की तरफ से भी प्रतिक्रिया आई. भारतीय राजनयिक सिबि जॉर्ज ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और मीडिया को समझे बिना कुछ विदेशी संस्थाएं अधूरी जानकारी के आधार पर राय बना लेती हैं. उन्होंने कहा कि सिर्फ दिल्ली में ही 200 से ज्यादा न्यूज चैनल हैं और भारत जैसे बड़े देश को समझना आसान नहीं है।  इससे पहले भी कई विदेशी मीडिया संस्थानों पर भारत को पुराने "स्नेक चार्मर" वाले स्टीरियोटाइप में दिखाने के आरोप लग चुके हैं. पीएम मोदी ने 2014 में न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में कहा था कि दुनिया कभी भारत को "स्नेक चार्मर्स" यानी "सपेरों का देश" कहती थी, लेकिन आज भारत टेक्नोलॉजी और आईटी की ताकत बन चुका है। 

43 संपत्तियों के मामले में अभिषेक बनर्जी घिरे, नोटिस के बाद बढ़ी सियासी हलचल

 कोलकाता पश्चिम बंगाल BJP ने तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी से कथित रूप से जुड़ी 43 संपत्तियों की एक विस्तृत लिस्ट सार्वजनिक कर दी है. इनमें कई संपत्तियां अभिषेक बनर्जी के परिवार के सदस्यों और करीबी दोस्तों जैसे ममता बनर्जी, अमृता बनर्जी, सबिता बनर्जी, मिनाती बनर्जी, बाणानी बनर्जी और सायानी घोष के साथ संयुक्त रूप से मालिकाना हक (स्वामित्व)वाली बताई गई हैं।  इसके अलावा अर्पिता बनर्जी, सुदेष्णा बनर्जी, आकाश बनर्जी, सोमनथ बनर्जी और प्रियंका दास जैसे कई अन्य नाम भी अलग-अलग संपत्तियों के मालिकों या पर्सन लायबल टैक्स के रूप में सूची में शामिल हैं।  बीजेपी ने इन संपत्तियों की लिस्ट जारी करते हुए आरोप लगाया है कि इनका सीधा या अप्रत्यक्ष संबंध अभिषेक बनर्जी से जुड़ा हुआ है. सूची में शामिल संपत्तियों के स्वामित्व, स्थान और अन्य विवरणों को सार्वजनिक किया गया है, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।  इस सामने आए डॉक्यूमेंट्स के अनुसार, कोलकाता के विभिन्न स्ट्रीट और वॉर्डों में दर्ज ये संपत्तियां अलग-अलग लोगों के साथ ज्वाइंट ओनरशिप में हैं. लिस्ट में साफ तौर पर 58/3 बैरकपुर ट्रंक रोड पर स्थित ऑर्बिट ल्यूमियर, गरियाहाट रोड पर स्थित समिरन को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी और बेहला के बेचराम चटर्जी रोड स्थित 'साईं भवन' जैसी अचल संपत्तियों के असेसी नंबर और पते दर्ज दिखाई दे रहे हैं।  कोलकाता के कई पॉश इलाकों में फैली हैं संपत्तियां असेसमेंट विभाग की इस लिस्ट में कोलकाता के कई महत्वपूर्ण इलाकों जैसे डी गुप्ता लेन, धर्मतला रोड, देवेन्द्र घोष रोड, सर्वे पार्क, कालीपद मुखर्जी रोड और मोतीलाल गुप्ता रोड की संपत्तियों को 'एक्टिव' स्टेटस में दिखाया गया है. इनमें से अधिकांश संपत्तियों के साथ अलग-अलग मोबाइल नंबर भी दर्ज हैं, जिन्हें अब जांच और राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में लाया जा रहा है।  सूत्रों के अनुसार, शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार इन सभी 43 संपत्तियों के स्वामित्व विवरण की गहन जांच कराएगी. जांच में ये पता लगाया जाएगा कि इन संपत्तियों का वास्तविक स्वामित्व कौन है, इनकी खरीदारी के स्रोत क्या हैं और इनमें कोई अनियमितता तो नहीं है।  मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को कहा कि नगर मामलों के विभाग और कोलकाता नगर निगम की संपत्ति रिपोर्टों से पता चला है कि तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी की कथित तौर पर स्वामित्व वाली 24 संपत्तियों में से 14 उनकी कथित कंपनी 'लीप्स एंड बाउंड्स' के नाम पर, 4 सांसद के नाम पर और छह उनके पिता के नाम पर पंजीकृत हैं।  भवानीपुर में एक धन्यवाद सभा में बंगाल के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री ने तृणमूल के तीन और नेताओं या उनके करीबी सहयोगियों की संपत्तियों के बारे में विवरण का खुलासा किया और फिर जोर देकर कहा कि उनकी सरकार सभी भ्रष्ट व्यक्तियों को सलाखों के पीछे भेज देगी।  'मैंने संपत्ति खोजने का दिया था निर्देश' शुभेंदु ने लोगों को बताते हुए कहा कि मैंने नगर मामलों के विभाग के सचिव और कोलकाता नगर निगम के आयुक्त से 4 व्यक्तियों की संपत्ति का विवरण प्राप्त करने के लिए कहा था. क्या आप उनके नाम जानना चाहते हैं? सीएम ने बताया, 'पहले नंबर पर बेलेघाटा के राजू नस्कर हैं, जिनके पास 18 संपत्तियां हैं. दूसरे नंबर पर कस्बा की सोना पप्पू हैं, जिनके पास 24 संपत्तियां हैं. तीसरे नंबर पर भतीजा अभिषेक बनर्जी हैं. इनमें से 14 संपत्तियां 'लीप्स एंड बाउंड्स' कंपनी के नाम पर, चार उनके अपने नाम पर और छह उनके पिता के नाम पर पंजीकृत हैं. चौथे नंबर पर जावेद (अहमद) खान (तृणमूल के कस्बा विधायक) के बेटे हैं, जिनके पास 90 संपत्तियां हैं।  'सभी भ्रष्ट लोगों को भेजेंगे जेल' उन्होंने आगे कहा, 'जनता को लूटने वाले लुटेरे हैं. (पुलिस अधिकारी) शांतनु सिन्हा बिस्वास और (पूर्व मंत्री) सुजीत बोस की तरह, जिन्हें जेल भेजा गया था, बीजेपी सरकार निकट भविष्य में ये सुनिश्चित करेगी कि ऐसे सभी भ्रष्ट लोगों को सलाखों के पीछे भेजा जाए।  वहीं, सोमवार को अभिषेक बिधाननगर पुलिस द्वारा हाल ही में उनके खिलाफ दर्ज किए गए एक मामले में सुरक्षा की मांग करने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचे। 

पंजाब नगर निकाय चुनाव का बिगुल तेज, 7623 उम्मीदवारों की दावेदारी; 29 मई को होगा फैसला

चंडीगढ़. पंजाब में आठ नगर निगम, नगर कौंसिल और नगर पंचायत की 105 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में प्रत्याशियों का फाइनल लिस्ट सामने आ चुकी है। पंजाब राज्य चुनाव आयोग की ओर से बुधवार को नामांकन वापिस के बाद उम्मीदवारों की फाइनल लिस्ट जारी कर दी है। जानकारी अनुसार अब चुनावी मैदान में 7623 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला होगा। निकाय चुनाव के लिए 26 मई को पंजाब के जिलों में मतदान होगा। चुनाव आयोग की ओर से जारी प्रत्याशियों की फाइनल लिस्ट के तहत नगर निगम के लिए 386 लोगों ने नाम वापिस ले लिया साथ ही चार प्रत्याशी निर्विरोध चुन लिए गए हैं। अब नगर निगम में 1613 प्रत्याशियों के बीच मुकाबला होगा। उधर नगर कौंसिल चुनाव के लिए 1695 प्रत्याशियों ने पर्चा वापस ले लिया है। कौंसिल चुनाव में 47 उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए हैं। ऐसे में अब चुनावी मैदान में 5144 उम्मीदवारों के बीच ही मुकाबला होगा। नगर पंचायत की सीटों के लिए 312 प्रत्याशियों ने नाम वापस ले लिया है। 28 उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए हैं। नगर पंचायत की सीटों के लिए अब 866 प्रत्याशियों के बीच मुकाबला होगा। जानकारी अनुसार नगर निगम नगर कौंसिल और नगर पंचायत की 105 सीटों के लिए कुल 10809 आवेदन जमा हुए थे। स्क्रूटनी के बाद 10096 उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने के योग्य पाया गया। मंगलवार को नामांकन वापसी की अंतिम दििन था। चुनाव से जुड़ी खास बातें – 26 मई को सभी 105 सीटों के लिए मतदान होगा। 29 मई को मतगणना और रिजल्ट घोषित कर दिया जाएगा। नगर निगम की सीटों के लिए अब 1695 उम्मीदवार ही मैदान में नगर कौंसिल की सीटों के लिए 5144 उम्मीदवार ही बचे मैदान में नगर पंचायत के लिए अब 866 उम्मीदवार मैदान में हैं।

मोदी- मेलोनी की दोस्ती फिर चर्चा में, डिनर डेट के बाद साथ देखा रोम का ऐतिहासिक कोलोसियम

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पांच देशों के अहम कूटनीतिक दौरे के आखिरी पड़ाव पर मंगलवार को इटली की राजधानी रोम पहुंचे। रोम पहुंचने पर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने बेहद खास अंदाज में उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं ने डिनर के बाद रोम के ऐतिहासिक 'कोलोसियम' का एक साथ दौरा किया है। इसके बाद, सोशल मीडिया पर एक बार फिर 'मेलोडी' (Meloni+Modi = Melodi) ट्रेंड कर रहा है। तस्वीरों में 'मेलोडी' का खास अंदाज पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इन तस्वीरों को शेयर किया है। इन खास तस्वीरों में भारत-इटली की मजबूत होती दोस्ती और दोनों नेताओं के बीच की सहजता साफ देखी जा सकती है। पहली दो तस्वीरों में पीएम मोदी और जॉर्जिया मेलोनी एक बालकनी से रोम शहर के खूबसूरत नजारों को निहारते और गहरी बातचीत करते नजर आ रहे हैं। इस दौरान पीएम मोदी अपने चिर-परिचित नीले रंग के लिबास में हैं, जबकि मेलोनी पीच रंग के खूबसूरत और सौम्य परिधान में हैं। एक तस्वीर में दोनों नेता कार की पिछली सीट पर बैठे हैं और कैमरे की तरफ देखकर मुस्कुरा रहे हैं। यह तस्वीर दोनों के बीच की बेहतरीन व्यक्तिगत बॉन्डिंग को दर्शाती है। कोलोसियम का ऐतिहासिक नजारा: एक अन्य तस्वीर रात के समय की है, जहां दोनों नेता रोम की सबसे भव्य और प्राचीन इमारत 'कोलोसियम' के सामने खड़े होकर पोज दे रहे हैं। पीएम मोदी ने क्या कहा? प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, "रोम में उतरने के बाद, मुझे प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ रात्रिभोज पर मिलने का अवसर मिला, जिसके बाद मैंने मशहूर कोलोसियम का दौरा किया। हमने कई विषयों पर अपने विचार साझा किए। आज होने वाली हमारी बातचीत का मुझे बेसब्री से इंतजार है, जिसमें हम भारत-इटली की दोस्ती को और मजबूत बनाने के विषय पर अपनी चर्चा जारी रखेंगे।" मेलोनी ने क्या कहा? जॉर्जिया मेलोनी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रोम पहुंचने पर उनका स्वागत किया। उन्होंने एक्स पर पीएम मोदी के साथ तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “वेलकम टू रोम, माय फ्रेंड!" पहले भी वायरल हुईं मोदी-मेलोनी की तस्वीरें यह पहला मौका नहीं है जब पीएम मोदी और जॉर्जिया मेलोनी की तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोरी हों। इससे पहले साल 2023 में दुबई में हुए COP28 शिखर सम्मेलन के दौरान मेलोनी की 'Good friends at COP28' वाली सेल्फी काफी वायरल हुई थी। वहीं, साल 2024 में इटली के अपुलिया में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान 'मेलोडी टीम की तरफ से हैलो' वीडियो ने भी दुनियाभर में चर्चा बटोरी थी। दोनों नेताओं की यह आठवीं मुलाकात विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, साल 2023 के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जॉर्जिया मेलोनी के बीच यह आठवीं मुलाकात है। मार्च 2023 में मेलोनी की भारत यात्रा और जी-20 शिखर सम्मेलन में उनकी भागीदारी ने दोनों देशों के रिश्तों को नई मजबूती दी थी।   पीएम मोदी और मेलोनी का संदेश इन पलों को शेयर करते हुए पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "रोम में उतरने के बाद, प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ डिनर पर मुलाकात का अवसर मिला, जिसके बाद ऐतिहासिक कोलोसियम का दौरा किया। हमने कई विषयों पर अपने दृष्टिकोण साझा किए। आज होने वाली हमारी वार्ता को लेकर उत्सुक हूं, जहां हम भारत-इटली की दोस्ती को और मजबूत करने के तरीकों पर अपनी चर्चा जारी रखेंगे। वहीं, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने भी पीएम मोदी के साथ की तस्वीर साझा करते हुए गर्मजोशी से लिखा- रोम में आपका स्वागत है, मेरे दोस्त! इस मुलाकात का एक वीडियो भी सामने आया है जहां पीएम मेलोनी पीएम मोदी को रोम शहर के बारे में बता रही हैं। आज की द्विपक्षीय वार्ता का मुख्य एजेंडा यह यात्रा केवल इन शानदार तस्वीरों तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नए मुकाम पर ले जाने का एक बड़ा अवसर है। ताज़ा जानकारियों के अनुसार, आज होने वाली आधिकारिक मुलाकातों के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं: रणनीतिक साझेदारी (2025-2029): दोनों देश 'जॉइंट स्ट्रैटेजिक एक्शन प्लान 2025-2029' की समीक्षा करेंगे। इसके तहत व्यापार, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाया जाएगा। (आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 16.77 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है)। IMEC पर जोर: इस द्विपक्षीय वार्ता में 'भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे' (IMEC) को लेकर विशेष चर्चा होने की उम्मीद है। FAO मुख्यालय का दौरा: पीएम मोदी संयुक्त राष्ट्र के 'खाद्य और कृषि संगठन' (FAO) के मुख्यालय का भी दौरा करेंगे, जो वैश्विक खाद्य सुरक्षा और बहुपक्षवाद के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। राष्ट्रपति से मुलाकात: पीएम मोदी इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मटारेला से भी मुलाकात करेंगे। प्रवासी भारतीयों द्वारा भव्य स्वागत रोम पहुंचने पर पीएम मोदी का भारतीय समुदाय ने बेहद शानदार स्वागत किया। इस दौरान इतालवी कलाकारों ने भारतीय शास्त्रीय संगीत (राग हंसध्वनि) और कथक नृत्य प्रस्तुत किया। पीएम मोदी ने बच्चों को ऑटोग्राफ दिए, वाराणसी के घाटों की एक पेंटिंग देखी और भारतीय मूल के लोगों से खास बातचीत की। इसके अलावा, उन्होंने 'सनातन धर्म संघ' की इटली में आधिकारिक मान्यता को लेकर आध्यात्मिक गुरुओं से भी मुलाकात की। यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन और नॉर्वे के सफल दौरे के बाद, इटली में पीएम मोदी का यह स्वागत भारत की मजबूत होती वैश्विक पकड़ और इटली के साथ गहरी होती साझेदारी का एक स्पष्ट संकेत है। इन तस्वीरों ने कूटनीति के साथ-साथ दो वैश्विक नेताओं की व्यक्तिगत दोस्ती को भी बखूबी बयां किया है।

7.5 करोड़ खर्च फिर भी घटिया निर्माण, निरीक्षण में खुली नहर घोटाले की परतें

डोंगरगढ़. डोंगरगढ़ क्षेत्र में देवकट्टा जलाशय से बेलगांव तक बनाई गई करीब 7.5 करोड़ रुपए की नहर परियोजना में गंभीर तकनीकी गड़बड़ियां सामने आने से हड़कंप मच गया है. ताजा निरीक्षण में नहर लाइनिंग की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े हुए हैं. जांच के दौरान कई स्थानों पर लाइनिंग की मोटाई निर्धारित मानक से बेहद कम पाई गई, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और विभागीय निगरानी दोनों संदेह के घेरे में आ गई हैं. जानकारी के मुताबिक नहर लाइनिंग की मोटाई 4 इंच तय थी, लेकिन मौके पर कई हिस्सों में यह 2 इंच से भी कम मिली. कमजोर कंक्रीट और घटिया निर्माण के कारण डेढ़ साल के भीतर ही लाइनिंग उखड़ने लगी है. कई स्थानों पर बेस लेयर खुल चुकी है और नहर की स्थिति किसी टूटी नाली जैसी दिखाई दे रही है. नहर में जगह-जगह सिल्ट और कचरा जमा होने से जल प्रवाह भी प्रभावित हो रहा है. सिर्फ मुख्य नहर ही नहीं, उससे जुड़ी माइनर नहरों में भी भारी लापरवाही सामने आई है. किनारों की फिलिंग अधूरी बताई जा रही है और पर्याप्त कंपैक्शन नहीं होने से बरसात में कटाव का खतरा बढ़ गया है. कई हिस्सों में कंक्रीट की पतली परत उखड़ रही है, जिससे निर्माण में भ्रष्टाचार के आरोप और तेज हो गए हैं. बुधवार को विभागीय अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान खामियों को गंभीर मानते हुए ठेकेदार को कड़ी फटकार लगाई गई और दोषपूर्ण हिस्सों में तत्काल सुधार के निर्देश दिए गए. जानकारी यह भी सामने आई है कि मरम्मत कार्य शुरू करा दिया गया है. किसानों का बड़ा आरोप किसानों का कहना है कि निर्माण कार्य अधूरा और मानक से कम होने के बावजूद पूरा भुगतान कर दिया गया. उनका दावा है कि यदि माप पुस्तिका और भुगतान रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच हो जाए तो पूरी गड़बड़ी सामने आ सकती है. ग्रामीणों और किसानों ने चेतावनी दी है कि समय रहते गुणवत्ता सुधार नहीं किया गया तो आगामी बारिश में नहर की लाइनिंग बह सकती है, जिससे सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित होने का खतरा है.

पेट्रोल-डीजल बचाने की पहल, समर वेकेशन में ऑनलाइन होगी छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की सुनवाई

बिलासपुर. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने संसाधन बचाने और अदालती कामकाज को सुचारू रखने के लिए कई बड़े बदलाव किए हैं. चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा के निर्देश पर हाई कोर्ट प्रशासन ने समर वेकेशन के लिए एक विशेष सर्कुलर जारी किया है. अब छुट्टियों के दौरान मामलों की सुनवाई मुख्य रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी, ताकि भीषण गर्मी में अधिवक्ताओं और याचिकाकर्ताओं को बेवजह कोर्ट न आना पड़े. मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा के मार्गदर्शन में जारी परिपत्र के अनुसार, अवकाश अवधि में मामलों की सुनवाई सामान्यतः वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की जा सकेगी. इसका उद्देश्य अनावश्यक आवागमन कम करना और संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना बताया गया है. परिपत्र में हाईकोर्ट और जिला न्यायपालिका के कर्मचारियों को सप्ताह में अधिकतम दो दिन “वर्क फ्रॉम होम” सुविधा देने का भी प्रस्ताव रखा गया है. इसके लिए यह शर्त रखी गई है कि कार्यालय में कम से कम 50 प्रतिशत कर्मचारियों की उपस्थिति बनी रहे ताकि कामकाज प्रभावित न हो. घर से कार्य करने वाले कर्मचारियों को फोन और अन्य आधिकारिक माध्यमों से उपलब्ध रहना होगा. ईंधन बचत और सरकारी संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए न्यायिक अधिकारियों, रजिस्ट्री अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच कार-पूलिंग व्यवस्था अपनाने का सुझाव भी दिया गया है. साथ ही न्यायाधीशों को भी आवश्यकतानुसार कार-पूलिंग के लिए प्रोत्साहित किया गया है. हाईकोर्ट प्रशासन ने कहा है कि, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं को सुचारु बनाने के लिए संबंधित रजिस्ट्री अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे.