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लार पुलिस ने शराब तस्करी पर कसा शिकंजा, बिहार बॉर्डर से लाखों की खेप बरामद

 देवरिया  वाहन चेकिंग के दौरान थाना लार पुलिस ने एक पिकअप वाहन से 55 पेटी अवैध अंग्रेजी शराब रायल स्टैग बरामद की है। बरामद शराब की अनुमानित कीमत लगभग 5,14,800 रुपये है। पुलिस ने एक तस्कर को गिरफ्तार किया है और वाहन पर लगे फर्जी नंबर प्लेट भी बरामद किया है। पुलिस ने आरोपित के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई की। 18 मई के अंक में दैनिक जागरण के अंक में पेज दो पर शराब तस्करों का गिरोह फिर सक्रिय, पहुंचने लगी हरियाणा से शराब शीर्षक से खबर को छह कालम में प्रकाशित किया था। जिसे एसपी अभिजीत आर शंकर ने गंभीरता से लिया और थानाध्यक्षों को निर्देश दिए। लार पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर मेहरौना चेक पोस्ट से बिहार ले जाई जा रही पिकअप को रोका गया। वाहन पर फर्जी नंबर प्लेट यूपी15 एफटी 3915 लगी थी। तलाशी में 40 पेटी रायल स्टैग, प्रत्येक बोतल 375 एमएल, कुल 960 बोतल 360 लीटर और 15 पेटी रायल स्टैग, प्रत्येक बोतल 180 एमएल, कुल 720 बोतल शराब बरामद हुई। गिरफ्तार तस्कर निशार खान पुत्र अयूब खान, उम्र करीब 32 वर्ष, निवासी मोदीपुरम पल्लवपुरम फेज-दो, थाना पल्लवपुरम, जनपद मेरठ के विरुद्ध थाना लार पर आबकारी अधिनियम व अन्य धाराओं के तहत पंजीकृत कर कार्रवाई में जुटी रही। अपर पुलिस अधीक्षक आनंद कुमार पांडेय ने बताया कि शराब तस्करी रोकने की दिशा में पुलिस लगातार कदम उठा रही है। शराब तस्करी में संलिप्त लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। जिले के सभी पुलिस अधिकारियों व थानाध्यक्षों को अलर्ट किया गया है।  

बसपा सुप्रीमो मायावती ने कांग्रेस नेता से मिलने से किया इनकार, सियासी गलियारों में बढ़ी चर्चा

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं सियासी गलियारों में अलग अलग तरह की हलचलें तेज हो रही हैं। एक तरफ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी दो दिनी दौरे पर यूपी पहुंचे तो दूसरी तरफ उनके खुछ खास लोग अचानक बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती के लखनऊ स्थित आवास पर मिलने पहुंच गए। चर्चा है कि ये नेता कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का कोई बेहद खास और गोपनीय संदेश लेकर मुलाकात करने पहुंचे थे। हालांकि, इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात की कोशिश पर उस समय पानी फिर गया, जब बसपा प्रमुख की ओर से नेताओं को अंदर आने की अनुमति नहीं मिली। पहले से अप्वाइंटमेंट न होने का हवाला देते हुए कांग्रेस नेताओं को गेट से ही वापस लौटा दिया गया। मायावती के आवास पर पहुंचने वाले नेताओं में कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम और बाराबंकी से कांग्रेस के युवा सांसद व अनुसूचित विभाग के प्रदेश अध्यक्ष तनुज पूनिया के साथ अन्य प्रमुख पदाधिकारी शामिल थे। गेट से लौटने के बाद दी सफाई भले ही सुरक्षाकर्मियों ने समय न होने की बात कहकर कांग्रेसी नेताओं को अंदर नहीं जाने दिया, लेकिन राजनीतिक पंडित इसे मायावती के कड़े स्टैंड के रूप में देख रहे हैं। वहीं, गेट से लौटने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजेंद्र पाल गौतम ने सोशल मीडिया पर सफाई देते हुए लिखा कि वे एक सामाजिक कार्यक्रम के सिलसिले में लखनऊ आए थे और शिष्टाचार के नाते बहनजी का कुशलक्षेम जानने उनके आवास गए थे। मायावती की तारीफ करते हुए यह भी कहा कि बहन जी के शासनकाल में उनकी उत्कृष्ट प्रशासनिक क्षमता और निर्णायक नेतृत्व को सभी वर्गों ने सराहा एवं स्वीकार किया है। यही कारण है कि उनके प्रति विशेष सम्मान और स्नेह का भाव सदैव बना रहता है। समय न मिलने के कारण उन्होंने दोबारा समय का अनुरोध किया है और उम्मीद जताई है कि जल्द ही मुलाकात होगी। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के यह नेता एक विशेष रणनीति के तहत मायावती से मिलने पहुंचे थे। राहुल की यूपी में मौजूदगी के दौरान कांग्रेस नेताओं का बसपा सुप्रीमो के घर पहुंचना कई चर्चाओं को जन्म दे रहा है। इस मुलाकात की कोशिश को आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन की नई कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस चाहती है भाजपा के खिलाफ सभी दल साथ आएं इस अचानक हुई कोशिश और कांग्रेस की मंशा पर सवाल उठने के बाद पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अंशु अवस्थी ने भारत समाचार से बातचीत में स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा, "कांग्रेस पूरी गंभीरता के साथ चाहती है कि देश और प्रदेश के हित में सभी राजनीतिक दल एक साथ आएं। यह विपक्ष और गठबंधन की ही ताकत थी कि साल 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को उत्तर प्रदेश के भीतर कड़े मुकाबले में रोका गया।" उन्होंने आगे कहा कि यूपी में इस समय बड़ा राजनीतिक बदलाव होने जा रहा है। देश में केवल कांग्रेस ही भाजपा के खिलाफ मजबूती से लड़ सकती है। राजनीतिक दलों के नेताओं का एक-दूसरे से मिलना बेहद सामान्य प्रक्रिया है। कांग्रेस ने नेताओं के कदम से खींचा हाथ वहीं, कांग्रेस अनुसूचित जाति के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम और कांग्रेस सांसद व कांग्रेस अनुसूचित विभाग के प्रदेश अध्यक्ष तनुज पुनिया के बसपा सुप्रीमो मायावती के घर पहुंचने के मामले को लेकर राजनीति गरमा गई है। हालांकि कांग्रेस प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय का कहना है कि कांग्रेस नेताओं का मायावती के आवास पर जाना उनका अपना व्यक्तिगत निर्णय था। पार्टी का इससे कोई सरोकार नहीं है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भी नेताओं का व्यक्तिगत मामला बताया।

गर्मी से भगवान को राहत! हिसार के मंदिरों में लगे एसी-कूलर, आइसक्रीम और ठंडे पेयों का भोग

हिसार. शहर में लगातार बढ़ रही गर्मी का असर अब मंदिरों की दैनिक सेवा-पूजा और व्यवस्थाओं पर भी साफ दिखाई देने लगा है। लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए शहर के विभिन्न मंदिरों में भगवान की सेवा बदली गई है। कहीं देवी-देवताओं को ठंडे पेय और शीतल भोग अर्पित किए जा रहे हैं तो कहीं गर्भगृह में एसी और कूलर की व्यवस्था कर ठंडा रखा जा रहा है। साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसरों में ठंडे पानी की छबील और वाटर कूलर लगाए गये हैं। सेक्टर 9-11 स्थित श्री शिव मंदिर में पुजारियों और श्रद्धालुओं द्वारा देवी-देवताओं को ठंडे पेयजल का भोग लगाया गया। मंदिर में श्रद्धालुओं ने भीषण गर्मी से राहत की कामना करते हुए विशेष पूजा-अर्चना की। मंदिरों में अब शिकंजी, ठंडाई, रसमलाई, मठा, दूध, फल-फ्रूट, खीर और आइसक्रीम जैसे शीतल व्यंजनों का विशेष भोग लगाया जा रहा है। श्री देवी भवन मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित सुरेश ने बताया कि गर्मी के मौसम को देखते हुए गर्भगृह में एयर कंडीशनर लगाए गए हैं, ताकि भगवान की प्रतिमाओं के आसपास का वातावरण शीतल बना रहे। उन्होंने बताया कि देवी-देवताओं को अब सूती और हल्के वस्त्र धारण कराए गये हैं। इसके अलावा श्रद्धालुओं के लिए भी मंदिर परिसर में ठंडे पानी की व्यवस्था की गई है। गर्मी के अनुरूप विशेष व्यवस्था: त्रिलोक सेक्टर 16-17 स्थित श्री श्याम मंदिर में भी गर्मी के अनुरूप विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। मंदिर के उपप्रधान त्रिलोक बंसल ने बताया कि श्री श्याम बाबा को ठंडाई, फल और हल्के भोग अर्पित किए जा रहे हैं। मंदिर में आरती के समय में भी बदलाव किया गया है ताकि श्रद्धालु सुबह और शाम के अपेक्षाकृत ठंडे समय में दर्शन कर सकें। शहर के एमसी कालोनी शिव मंदिर, राधा-कृष्ण बड़ा मंदिर, जवाहर नगर हनुमान मंदिर, पटेल नगर शिव मंदिर, मोती बाजार हनुमान मंदिर और बुधला संत हनुमान मंदिर सहित कई धार्मिक स्थलों पर भी विशेष शीतल भोग लगाए जा रहे हैं। मंदिर पुजारी रविकांत शर्मा ने बताया कि गर्मी के मौसम में भगवान की सेवा भी ऋतु के अनुसार की जाती है। सर्दियों में जहां गरम भोग और ऊनी वस्त्र अर्पित किए जाते हैं, वहीं गर्मियों में ठंडे भोग और हल्के वस्त्रों का प्रयोग किया जाता है।

पीडब्ल्यूडी सचिव ने केशकाल घाटी फोरलेन प्रोजेक्ट का लिया जायजा, निर्माण कार्य तेज करने के आदेश

केशकाल. रायपुर-जगदलपुर मार्ग के बहुप्रतीक्षित केशकाल घाटी फोरलेन बायपास को लेकर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है. लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने निर्माण स्थल का निरीक्षण कर अधिकारियों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए. उन्होंने निर्माण एजेंसी और विभागीय अधिकारियों के साथ बायपास के दोनों छोरों का जायजा लिया. निरीक्षण के दौरान शेष पेड़ों की कटाई जल्द पूरी करने के निर्देश वन विभाग को दिए गए. साथ ही लंबित मुआवजा प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करने पर भी जोर दिया गया. अधिकारियों ने बताया कि यह परियोजना बस्तर और छत्तीसगढ़ की यातायात व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. करीब 308 करोड़ रुपये की लागत से 11.38 किलोमीटर लंबा बायपास तैयार किया जा रहा है. परियोजना में दो बड़े और दो मध्यम पुलों का निर्माण भी शामिल है.घाटी क्षेत्र में लगातार लगने वाले जाम और दुर्घटनाओं को कम करने में यह बायपास अहम माना जा रहा है. सरकार ने इसे प्राथमिकता वाली परियोजना बताते हुए जल्द निर्माण पूरा करने के संकेत दिए हैं. निरीक्षण के दौरान प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी समेत कई अधिकारी मौजूद रहे. अब स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि वर्षों से लंबित यह परियोजना जल्द धरातल पर दिखाई देगी.

ऑनलाइन-ऑफलाइन शॉपिंग पर गहरी पड़ताल, डॉ. शिवानी सोनी को मिली डॉक्टरेट की उपाधि

बेटियों के जज्बे को मिली शोध की 'डिग्री': डॉ. शिवानी सोनी ने हासिल की PhD की उपाधि  ऑनलाइन बनाम ऑफलाइन शॉपिंग उपभोक्ता के मन की गहराई नापकर मिली सफलता  भोपाल  राजधानी के शैक्षणिक गलियारे में आज एक और गौरवशाली अध्याय जुड़ गया। अपनी विद्वत्ता और कड़े परिश्रम के दम पर डॉ. (श्रीमती) शिवानी यशोधर सोनी ने वाणिज्य के क्षेत्र में सफलता का परचम लहराया है। बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल के वाणिज्य विभाग ने उनके उत्कृष्ट शोध कार्य को स्वीकार करते हुए उन्हें 'डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी' (PhD) की मानद उपाधि से विभूषित किया है। बाजार के बदलते मिजाज पर की 'पीएचडी' डॉ. शिवानी ने आज के दौर के सबसे प्रासंगिक विषय "ए स्टडी ऑफ फैक्टर्स अफेक्टिंग कंज्यूमर बिहेवियर एंड इट्स सेटिस्फेक्शन टूवर्ड्स ऑनलाइन एंड ऑफलाइन शॉपिंग" पर अपना शोध प्रबंध प्रस्तुत किया। उन्होंने बारीकी से इस बात का विश्लेषण किया कि बदलते दौर में ग्राहक कब मोबाइल की स्क्रीन पर 'क्लिक' करना पसंद करता है और कब बाजार की गलियों में जाकर सामान की परख करना चाहता है। मार्गदर्शन का मिला साथ: डॉ. शिवानी ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने मार्गदर्शक डॉ. बी.एम.एस. भदौरिया (विभागाध्यक्ष, शासकीय एम.एल.बी. कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भोपाल) को दिया है, जिनके कुशल निर्देशन में यह जटिल शोध कार्य पूर्ण हुआ। संस्कार और शिक्षा का संगम गौरतलब है कि डॉ. शिवानी सोनी शहर के प्रतिष्ठित और संभ्रांत परिवार से ताल्लुक रखती हैं। वह वरिष्ठ शिक्षाविद और समाजसेवी डॉ. एम.एल. सोनी एवं श्रीमती गीता सोनी की पुत्रवधू हैं। परिवार के शैक्षणिक परिवेश ने उनकी इस उपलब्धि में नींव के पत्थर की तरह काम किया है। बधाइयों का तांता: समूचे सोनी परिवार में जश्न डॉ. शिवानी की इस सफलता की खबर लगते ही उनके शुभचिंतकों और परिजनों में हर्ष की लहर दौड़ गई। पति यशोधर सोनी सहित परिवार के सदस्यों ने इसे उनकी बरसों की तपस्या का प्रतिफल बताया। सफलता के इस विशेष अवसर पर सात समंदर पार से भी दुआएं पहुंचीं। शुभकामनाएं देने वालों में प्रमुख नाम: ऑस्ट्रेलिया से: डॉ. ऋतु वर्मा एवं रोहित वर्मा (मेलबर्न)। चिकित्सा एवं शिक्षा जगत: डॉ. ऋचा सोनी और डॉ. सिद्धार्थ सागर। नन्हे सितारे: काव्या, गर्वित, शिवांश और श्रीतिक। संस्थान: होटल दयालश्री पैराडाइज, होटल गीतकाव्या इन, और हिंद होप मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल, भोपाल। इसके साथ ही सोनी परिवार (लहार-भिंड) और भोपाल के समस्त मित्रों एवं परिजनों ने डॉ. शिवानी को इस गौरवशाली उपलब्धि पर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। क्यों खास है यह शोध? (बॉक्स आइटम) आज के दौर में जहां रिटेल मार्केट और ई-कॉमर्स कंपनियों के बीच जंग छिड़ी है, डॉ. शिवानी का यह शोध व्यापारिक जगत के लिए एक दिशा-निर्देश साबित हो सकता है। ग्राहकों की संतुष्टि के पैमानों को जिस तरह से उन्होंने रेखांकित किया है, वह आने वाले समय में मार्केटिंग स्ट्रेटेजी बनाने वालों के लिए भी उपयोगी होगा। संपादकीय नोट: डॉ. शिवानी सोनी की यह उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपना भविष्य संवारना चाहती हैं।

नवा रायपुर अटल नगर बन रहा नए भारत का स्मार्ट चेहरा, विकास और निवेश से बदल रही तस्वीर

नवा रायपुर अटल नगर: विकास, निवेश और आधुनिक भारत का उभरता स्मार्ट शहर नवा रायपुर अटल नगर: उपलब्धियों से नई ऊँचाइयों की ओर रायपुर छत्तीसगढ़ की आधुनिक और योजनाबद्ध राजधानी नवा रायपुर अटल नगर आज देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे स्मार्ट शहरों में शामिल है। सुव्यवस्थित अधोसंरचना, हरित विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, आईटी, पर्यटन और महिला सशक्तिकरण जैसे विविध क्षेत्रों में हुई उल्लेखनीय प्रगति ने नवा रायपुर को भविष्य के भारत का आदर्श शहरी मॉडल बना दिया है। यह केवल प्रशासनिक राजधानी नहीं, बल्कि निवेश, नवाचार और समावेशी विकास का उभरता हुआ केंद्र है। स्मार्ट अधोसंरचना और शहरी सेवाओं में बड़ी उपलब्धियाँ नवा रायपुर अटल नगर में 52 एमएलडी क्षमता की पाइपलाइन और अत्याधुनिक जल शोधन संयंत्र के माध्यम से पूरे शहर में दीर्घकालिक पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। इससे वर्तमान आबादी के साथ-साथ नए विकसित हो रहे सेक्टरों की आवश्यकताओं की भी पूर्ति हो सकेगी। वर्षाजल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देने के लिए 10.66 किलोमीटर लंबी बायोस्वेल्स, रिचार्ज पिट्स और प्राकृतिक जल निकासी तंत्र विकसित किए गए हैं। इन पहलों ने न केवल जल संरक्षण को मजबूत किया है, बल्कि शहर के पर्यावरणीय संतुलन को भी सुदृढ़ किया है। परिवहन और कनेक्टिविटी को मिला नया आयाम रायपुर-राजिम रेल सेवा का नवा रायपुर के सीबीडी स्टेशन तक विस्तार शहर की कनेक्टिविटी को नई गति प्रदान कर रहा है। महिलाओं की सुरक्षित आवाजाही और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए पिंक ई-रिक्शा सेवा शुरू की गई है। साथ ही, ई-बस संचालन के लिए आवश्यक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो चुका है और सेवा प्रारंभ होने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। यह पहल हरित और टिकाऊ शहरी परिवहन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। शिक्षा के क्षेत्र में विकसित हो रहा एडूसिटी नवा रायपुर के 13 सहकारी विद्यालयों का उन्नयन किया गया है और दो उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित किया गया है। लगभग 200 एकड़ क्षेत्र में एडूसिटी का विकास किया जा रहा है, जहाँ राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों जैसे National Institute of Fashion Technology (NIFT), National Institute of Electronics and Information Technology (NIELIT) और National Forensic Sciences University (NFSU), Narsee Monjee को भूमि आवंटित की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त सेक्टर-7 में 17 एकड़ भूमि पर आवासीय विद्यालय की स्थापना प्रस्तावित है। मेडिसिटी: स्वास्थ्य सेवाओं का नया केंद्र मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लगभग 500 एकड़ क्षेत्र में विश्वस्तरीय मेडिसिटी विकसित की जा रही है। यहाँ सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज, डायग्नोस्टिक सेंटर, धर्मशाला, होटल और आवासीय सुविधाएँ विकसित की जाएँगी। इस परियोजना के तहत Bombay Hospital को 300 बिस्तरों वाले सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के लिए भूमि आवंटित की जा चुकी है। साथ ही, लगभग 50 एकड़ भूमि पर आवासीय विकास हेतु निजी निवेशकों को भूखंड आवंटित किए गए हैं, जिनमें लगभग 350 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है। महिला सशक्तिकरण और श्रमिक कल्याण कार्यरत महिलाओं के लिए 1,000 क्षमता वाले वर्किंग वुमन हॉस्टल का निर्माण 109 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। यह परियोजना महिला सुरक्षा, सुविधा और आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगी। इसके अतिरिक्त, प्रवासी श्रमिकों के लिए 1,100 क्षमता वाला सर्वसुविधायुक्त श्रमिक आवास भवन 40 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है। पर्यटन, संस्कृति और MICE गंतव्य के रूप में उभार नवा रायपुर में 77 एकड़ भूमि पर सेवाग्राम तथा सेक्टर-39 में Art of Living Foundation को 40 एकड़ भूमि आवंटित की गई है, जहाँ सांस्कृतिक और सामुदायिक गतिविधियों के बड़े केंद्र विकसित हो रहे हैं। सेक्टर-4 और 10 में लगभग 120 एकड़ क्षेत्र में निजी निवेश के माध्यम से कन्वेंशन सेंटर कम स्पोर्ट्स सिटी विकसित की जा रही है। लगभग 800 करोड़ रुपये की इस परियोजना में विश्वस्तरीय कन्वेंशन सेंटर और टेनिस, तैराकी, कुश्ती, तीरंदाजी तथा स्क्वैश जैसी खेल सुविधाएँ शामिल होंगी। सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी का उभरता हब नवा रायपुर में राज्य का पहला SEZ आधारित एआई डेटा सेंटर पार्क स्थापित किया जा रहा है, जिसमें लगभग 4,000 करोड़ रुपये का निजी निवेश अपेक्षित है। यहाँ भारत का पहला GaN तकनीक आधारित सेमीकंडक्टर प्लांट स्थापित करने के लिए भी भूमि आवंटित की गई है। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) हेतु भारत सरकार से स्वीकृति प्राप्त हुई है, जहाँ PCB प्रोटोटाइपिंग, 3D प्रिंटिंग और EMC टेस्टिंग जैसी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। सीबीडी क्षेत्र में प्लग-एंड-प्ले मॉडल पर आईटी कंपनियों को सुसज्जित कार्यालय स्थान उपलब्ध कराए गए हैं। वर्तमान में लगभग 1,000 युवा कार्यरत हैं और 2,000 अतिरिक्त रोजगार सृजन की संभावना है। सतत विकास और हरित पहल “पीपल फॉर पीपल” अभियान के अंतर्गत 1 लाख से अधिक पौधे लगाए गए हैं, जिससे शहर के 26 प्रतिशत हरित क्षेत्र को संरक्षित और विस्तारित करने में मदद मिली है। बायोस्वेल्स, रिचार्ज सिस्टम और हरित कॉरिडोर जैसे उपाय नवा रायपुर को पर्यावरण-अनुकूल और जल-संवेदनशील शहर के रूप में स्थापित कर रहे हैं। प्राधिकरण की आगामी कार्ययोजना नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण आने वाले वर्षों में शहर को और अधिक आधुनिक एवं निवेश-आकर्षक बनाने हेतु कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर कार्य कर रहा है: सेरीखेड़ी और मंदिरहसौद क्षेत्र में लगभग 1,100 एकड़ पर 800 करोड़ रुपये की लागत से अधोसंरचना विकास। राज्य राजधानी क्षेत्र (SCR) के एकीकृत विकास हेतु विशेष प्राधिकरण गठन। 500 एकड़ में मेडिसिटी और 200 एकड़ में एडूसिटी का विस्तार। नवा रायपुर को IT, ITeS और AI हब के रूप में स्थापित करना। वार्षिक पूंजीगत व्यय क्षमता को 1,000 करोड़ रुपये तक बढ़ाना। वेलनेस सेंटर, वेडिंग डेस्टिनेशन, MICE कैपिटल और पर्यटन परियोजनाओं में निजी निवेश को प्रोत्साहन। प्रभावित ग्राम पंचायतों में ग्राम विकास योजना के आधार पर आधुनिक अधोसंरचना विकास। इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) का तकनीकी उन्नयन। सार्वजनिक परिवहन को सुदृढ़ करने हेतु 40 नई ई-बसों का संचालन। नई राजधानी, नए भारत की पहचान नवा रायपुर अटल नगर आज योजनाबद्ध विकास, आधुनिक सुविधाओं और सतत शहरीकरण का सशक्त उदाहरण बन चुका है। शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी, पर्यटन और हरित विकास के क्षेत्रों में निरंतर प्रगति इसे न केवल छत्तीसगढ़ की नई पहचान बना रही है, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरक मॉडल के रूप में स्थापित कर रही है। आने वाले वर्षों में नवा रायपुर अटल नगर निश्चित ही भारत … Read more

105 निकाय चुनावों से तय होगी पंजाब की सियासी दिशा, विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी हलचल

चंडीगढ़  पंजाब में विधानसभा चुनाव अगले साल है, लेकिन सियासी दलों ने अपनी-अपनी एक्सरसाइज शुरू कर दी. इससे पहले सियासी दलों की अग्निपरीक्षा निकाय चुनावों में होनी है, जिसके लिए राजनीतिक बिसात बिछ चुकी है. यही वजह है कि पंजाब में हो रहे स्थानीय निकाय चुनाव को 2027 के विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है।   पंजाब की 105 स्थानीय निकायों में चुनाव हो रहे हैं, जहां पर 26 मई को मतदान है.  इन निकाय चुनावों का सीधा असर पंजाब के 117 विधानसभा सीटों में से करीब 90 सीट के सियासी समीकरणों पर पड़ेगा. निकाय चुनावों के नतीजे राजनीतिक दलों के लिए आगामी चुनाव से पहले बहुत कुछ तय कर देंगे।  निकाय चुनाव के जरिए आम आदमी पार्टी अपने सियासी माहौल को बनाए रखने की कवायद करेगी, तो कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी जैसी पार्टियां अपनी खोई जमीन वापस पाने के लिए बेताब हैं. ऐसे में देखना है कि निकाय चुनाव में क्या किसका दबदबा रहता है?  पंजाब के 105 निकाय के लिए चुनाव  पंजाब के 105 सीटों के लिए निकाय चुनाव होने जा रहे हैं, जहां पर 26 मई को चुनाव जबकि नतीजे 29 मई को आएंगे. 105 नगर निकाय में 8 नगर निगमों, 76 नगर कौंसिल (नगर पालिका) और 21 नगर पंचायतों में चुनाव है. बठिंडा, मोहाली,होशियारपुर, मोगा, पठानकोट, बटाला, अबोहर और कपूरथला नगर निगम के पार्षद सीटों पर चुनाव है. ऐसे ही नगर पालिका और नगर पंचायत के लिए भी अलग-अलग वार्डों में चुनाव है।  चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 105 नगर निकाय के लिए कुल  10,809 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किए थे. इसमें 713 प्रत्याशियों के नामांकन रद्द कर दिए गए हैं, जिसके बाद  10096 उम्मीदवार ही मैदान में रह गए।  पंजाब के जिन 8 नगर निगमों में चुनाव हो रहे हैं, उसे अलग-अलग वार्डों (सीटों) पर पार्षदों के लिए 2003 उम्मीदवार बचे हैं.  76 नगर कौंसिल की सीटों के लिए 6,887 उम्मीदवार मैदान में है तो 21 नगर पंचायत के लिए मैदान में 1,206 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं.  हालांकि, नामांकन वापस लिए जाने के बाद उम्मीदवारों के अंतिम आंकड़े सामने आ सकेंगे।  2027 चुनाव का सेमीफाइनल  पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव है, जिसके चलते निकाय चुनाव को 2027 के सत्ता का सेमीफाइनल माना जा रहा है. पंजाब का निकाय चुनाव सिर्फ मेयर या पार्षद चुनने का जरिया नहीं है. यह पंजाब की राजनीति का वो थर्मामीटर है, जो यह मापेगा कि सूबे में राजनीतिक हवा किस तरफ बह रही है. निकाय चुनाव के बाद सीधे 2027 के विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में निकाय चुनाव के नतीजों से प्रदेश के सियासी माहौल का पता चल सकेगा।  निकाय चुनाव में मिलने वाली हार जीत को सियासी दल अपने-अपने हिसाब से पेस करेंगे.  निकाय चुनाव सभी दलों के लिए इसलिए अहम हैं, क्योंकि ये चुनाव सीधे तौर पर एक करोड़ से ज्यादा शहरी मतदाताओं से जुड़े हुए हैं. इन चुनावों में 90 विधानसभा क्षेत्रों में पार्टियों का टेस्ट होगा. सभी राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है ताकि चुनाव से पहले जीत मिल सके और उसका फायदा विधानसभा चुनाव में पार्टियों को मिले।  किसके लिए कितना अहम बना चुनाव बीजेपी अब पंजाब में सरकार बनाने का सपना देख रही है, जिसके लिए निकाय चुनाव काफी अहम है. राघव चड्डा सहित आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसदों को बीजेपी ने अपने साथ मिलाने के बाद सियासी समीकरण को साधने की कवायद की है, लेकिन इन नेताओं की पहली अग्निपरीक्षा निकाय चुनाव में होनी है।  वहीं, पंजाब की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी के लिए अपने सियासी साख को बचाए रखना के चुनाव माना जा रहा है.  'आप' प्रमुख शहरों के निगमों पर कब्जा बरकरार रखती है, तो 90 विधानसभा सीटों पर उसका कैडर मजबूत होगा. ऐसे में अगर नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे, तो पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ सकता है और विधायकों पर परफॉर्मेंस का दबाव दोगुना हो जाएगा।  कांग्रेस पंजाब में मुख्य विपक्षी दल है. लोकसभा चुनाव में अच्छे प्रदर्शन के बाद कांग्रेस के हौसले बुलंद हैं. शहरी इलाकों में कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक रहा है. इन चुनावों में अगर कांग्रेस अच्छा करती है, तो वह 90 विधानसभा सीटों पर खुद को 'आप' के एकमात्र विकल्प के रूप में स्थापित कर लेगी।  वहीं, शिरमणि अकाली दल इस समय अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है, पार्टी के भीतर अंतर्कलह और नेतृत्व संकट जगजाहिर है. अकाली दल के लिए अर्ध-शहरी और कस्बाई इलाकों की सीटें बेहद अहम हैं. इन निकाय चुनावों में अगर अकाली दल खाता खोलने या सम्मानजनक सीटें पाने में नाकाम रहता है, तो कम से कम 40-50 विधानसभा सीटों पर उसका वजूद खतरे में पड़ जाएगा।     

मध्यप्रदेश में ट्रांसफर सीजन की तैयारी, सरकार जल्द खोल सकती है तबादलों के द्वार

भोपाल  मध्यप्रदेश के सरकारी कर्मचारियों-अधिकारियों को आज बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। जी हां लंबे समय से कर्मचारियों के तबादलों पर लगी रोक हटाई जा सकती है। इसके बाद धड़ाधड़ ऑनलाइन ट्रांसफर किए जाएगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आज कैबिनेट बैठक आयोजित की गई है। जिसमें सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादलों पर रोक लेकर बड़ा ऐलान होने के उम्मीद है। जानकारी के अनुसार, आज बुधवार को आयोजित होने जा रही कैबिनेट बैठक में तबादला नीति-2026 लाने का प्रस्ताव रखा जा सकता है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने पहले ही तबादला नीति का ड्राफ्ट तैयार कर मुख्यमंत्री सचिवालय को भेज दिया है। अगर कैबिनेट इस प्रस्ताव को मंजूरी दे देती है, तो लंबे समय से तबादलों पर लगा रोक हटाया जा सकता है। इसके साथ ही नई ट्रांसफर पॉलिसी लागू होने का रास्ता भी साफ हो जाएगा। राज्य सरकार प्रदेश के सरकारी कर्मचारी-अधिकारियों के ट्रांसफर दो स्तर पर करती है। पहले स्तर में लंबे समय से एक ही स्थान पर काम करने वाले  अधिकारियों का तबादला किया जाता है। जबकि दूसरे स्तर में वो अधिकारी शामिल होते है, जिनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठते रहते हैं या जिसकी शिकायतें सामने आती रहती हैं। इसके अलावा कई कर्मचारी अधिकारी स्वेच्छिक आधार पर भी तबादला कराने के लिए आवेदन देते हैं। आपको बता दें कि राज्य में अब तबादलों की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए ऑनलाइन आवेदन व्यवस्था लागू की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, विभागीय मंत्री को एक जिले से दूसरे जिले में तबादला करने की अनुमति रहेगी, जबकि प्रभारी मंत्रियों को जिले के भीतर ही तबादले का अधिकार दिया जाएगा। कुछ विशेष मामलों में आवेदन पहले विभाग प्रमुखों के पास जाएंगे और फिर विभागीय मंत्री या प्रभारी मंत्री के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे। पिछले वर्ष 1 मई से तबादले शुरू किए गए थे, जिसमें पहली बार चार स्लैब बनाए गए और तबादलों का दायरा 2 से 3 प्रतिशत तक बढ़ाया गया था।

ममता के घर में TMC नेताओं की तीखी बयानबाजी, अभिषेक बनर्जी पर टिप्पणियों से बढ़ी सियासी हलचल

कोलकत्ता  तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायकों की मंगलवार को हुई आंतरिक बैठक में असहमति देखने को मिली। खबर है कि फालता सीट पर 21 मई को फिर से होने वाले चुनाव से पार्टी के उम्मीदवार जहांगीर खान के अचानक नाम वापस लेने से टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, कालीघाट में हुई इस बैठक में टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी और अभिषेक भी मौजूद थे। बैठक में विधायकों ने फालता में अचानक हुए राजनीतिक उथल-पुथल और पार्टी के संगठनात्मक कामकाज पर सवाल उठाए। इस घटनाक्रम की वजह जहांगीर खान हैं, जो फालता में राजनीतिक रस्साकशी के स्वघोषित 'पुष्पा' हैं। उन्होंने दिन में, फिर से होने वाले चुनाव से अपना नाम वापस लेने की घोषणा करके राज्य के राजनीतिक हलकों को चौंका दिया, जिससे हालिया विधानसभा चुनावों की सबसे विवादित सीटों में से एक पर भाजपा के लिए जीत की राह आसान होती दिख रही है। जहांगीर खान के खिलाफ TMC ने क्यों नहीं की कार्रवाई? पार्टी सूत्रों के अनुसार, कोलकाता के दो और हावड़ा के एक विधायक ने जहांगीर के नाम वापस लेने का हवाला देते हुए बैठक में सवाल उठाए। संयोगवश, तीनों विधायक कालीघाट की बैठक में एक ही वाहन से पहुंचे थे। टीएमसी सूत्रों ने बताया कि ये सवाल उठाए गए कि जहांगीर ने मतदान से दो दिन पहले चुनाव से नाम वापस ले लिया, फिर भी उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। अभिषेक बनर्जी पर निशाना कुछ टिप्पणियों को अभिषेक पर परोक्ष रूप से निशाना साधने के रूप में देखा गया, जिनके डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत फालता विधानसभा क्षेत्र आता है। दो वरिष्ठ विधायकों ने जहांगीर को 'केंद्रीय प्रशासन वाले क्षेत्र का नेता' कहकर कथित तौर पर व्यंग्य किया, जो यह डायमंड हार्बर क्षेत्र में कड़े नियंत्रण वाले राजनीतिक तंत्र की धारणा पर एक स्पष्ट कटाक्ष था। यह सवाल भी उठाया गया कि जहांगीर, जिन्हें कथित तौर पर काफी संगठनात्मक समर्थन प्राप्त है और जिनकी प्रभावशाली नेताओं से निकटता है, ने चुनाव से हटने का फैसला क्यों किया। हाल के हफ्तों में फालता सीट का राजनीतिक महत्व काफी बढ़ गया है। फालता सीट पर 29 अप्रैल को हुए चुनाव को बाद में रद्द कर दिया गया और दोबारा चुनाव कराने की घोषणा की गई थी। श्मशान घाट के मुद्दे पर तंज हालिया चुनाव से पहले, प्रचार के दौरान अभिषेक ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि जहांगीर ने उनसे इलाके में श्मशान घाट बनवाने का अनुरोध किया है। बाद में उन्होंने टिप्पणी की कि 4 मई को विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद, 'दिल का दौरा पड़ने से मरने वालों' का वहां अंतिम संस्कार किया जा सकेगा। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि मंगलवार की चर्चा के दौरान यह विवादास्पद टिप्पणी फिर से सामने आई और विधायकों ने कथित तौर पर पूछा कि अब श्मशान घाट कौन बनवाएगा और किसके लिए बनवाएगा। टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं ने इन टिप्पणियों को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के लिए ऐसे समय में एक व्यापक संदेश के रूप में देखा है, जब संगठन के कुछ वर्ग निजी तौर पर चुनाव के बाद की रणनीति पर चर्चा कर रहे हैं। अभिषेक की हालिया राजनीतिक उपस्थिति को लेकर उठ रहे सवालों के मद्देनजर भी इस चर्चा का महत्व बढ़ गया। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से ममता बनर्जी सार्वजनिक रूप से सक्रिय रही हैं – कार्यक्रमों में भाग लेती रहीं और चुनाव बाद हुई हिंसा के मुद्दों पर अदालतों का रुख किया। जबकि, अभिषेक अपेक्षाकृत कम सक्रिय रहे और फालता विधानसभा सीट उनके संसदीय क्षेत्र में आने के बावजूद चुनाव प्रचार के दौरान प्रमुखता से नजर नहीं आए।. ये विधायक हुए नाराज टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, कुणाल घोष, रिताब्रता बनर्जी और संदीपन साहा ने पार्टी नेतृत्व की खुलकर आलोचना की है। यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है, जब भारत निर्वाचन आयोग की तरफ से डेटा सामने आया है, जिसमें कहा गया है कि ममता बनर्जी भवानीपुर सीट के 267 में 207 बूथों पर पीछे चल रहीं थीं। यहां उन्हें शुभेंदु अधिकारी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। अभिषेक बनर्जी पर हुए नाराज सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया कि तीनों विधायकों ने आरोप लगाए हैं कि सांसद अभिषेक बनर्जी के फैसले पार्टी पर थोपे गए थे, जिसके चलते पार्टी को झटका लगा। साथ ही फालता से जहांगीर खान के नामांकन वापस लेने पर भी तंज कसा गया। क्या था रिएक्शन रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने कहा, 'बुआ और भतीजे की जोड़ी को समझ ही नहीं आया कि उनके साथ अचानक यह क्या हो गया। वे दोनों बिल्कुल चुपचाप बैठे सुनते रहे। उनके चेहरे पर गुस्सा साफ दिख रहा था, लेकिन वे कुछ बोले नहीं।' उन्होंने बताया ठीक इसके पहले ही पार्टी प्रमुख ने दावा किया था कि भाजपा भविष्य में केंद्र से चली जाएगी। अखबार से बातचीत में एक सूत्र ने कहा, 'कुणाल ने खुलकर कहा कि अब बहुत हो गया है और खुलकर बोलने की आजादी मांगी। उन्होंने कहा कि उनके कालीघाट वाले घर पर ऐसी बहुत सी बैठकें हो चुकी हैं, अब हमें उन बैठकों को छोड़कर सड़कों पर उतरना चाहिए ताकि बीजेपी की इस बुलडोजर आर्मी से गरीब और बेबस लोगों को बचाया जा सके।' लगातार दूसरी बार हारी हैं ममता बनर्जी साल 2021 में ममता बनर्जी को नंदीग्राम सीट से हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि, टीएमसी ने राज्य में 200 से ज्यादी सीटों पर जीत हासिल कर सरकार बरकरार रखने में सफलता हासिल की थी। वहीं, 2026 में उन्हें दोहरा झटका लगा। एक ओर जहां उन्होंने भवानीपुर सीट शुभेंदु अधिकारी के हाथों गंवाई। जबकि, टीएमसी भी महज 80 सीटें ही जीत सकी। भाजपा ने अधिकारी को मुख्यमंत्री बनाया। 15 विधायक गायब बैठक में विधायकों की उपस्थिति को लेकर भी चिंता जताई गई। पार्टी सूत्रों के अनुसार, लगभग 15 विधायक अनुपस्थित थे।कई विधायकों ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया, वहीं मालदा के एक विधायक ने नेतृत्व को कथित तौर पर सूचित किया कि वह काम के सिलसिले में दिल्ली में हैं। इससे राजनीतिक हलकों में उनके संभावित भावी कदम को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। LoP पर क्या … Read more

18 रिटायर्ड IAS और 4 IPS के बीच अजय सूरा की बाजी, हरियाणा सरकार ने किया बड़ा खुलासा

चंडीगढ़. हरियाणा में नये राज्य सूचना आयुक्त अजय सूरा की नियुक्ति के बाद प्रदेश सरकार ने पद की दौड़ में शामिल लोगों के नाम सार्वजनिक कर दिए हैं। राज्य सूचना आयोग में सदस्य बनने के लिए 349 हस्तियों ने ताल ठोकी थी, जिनमें 18 सेवानिवृत्त आइएएस, चार आइपीएस, एक आइआरएस और पांच सेवानिवृत्त एचसीएस अधिकारियों सहित कई पत्रकार, नौकरशाह, समाजसेवी, वकील और विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत लोग शामिल रहे। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के पूर्व चेयरमैन भोपाल सिंह खदरी और हरियाणा लोकसेवा आयोग की सदस्य रह चुकी डॉ. वंदना शर्मा भी सूचना आयुक्त बनने की दौड़ में शामिल थे। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज की छोटी बहन वंदना शर्मा भाजपा के टिकट पर सफीदों विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुकी हैं। वहीं, विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े 39 लोगों ने निर्धारित समय सीमा के बाद आवेदन किया था, जिस कारण उनके नामों पर विचार नहीं किया गया। आवेदन की सीमा 21 मार्च 2025 निर्धारित की गई थी। अब फिर से सूचना आयोग में नियुक्ति के लिए नए सिरे से आवेदन मांगे जा सकते हैं। पुराने आवेदनों में शामिल नामों पर ही विचार संभव यह भी संभव है कि पुराने आवेदनों में शामिल नामों पर ही विचार किया जाए। नये सूचना आयुक्त अजय सूरा के पदभार संभालने के बावजूद राज्य सूचना आयोग में सदस्यों के पांच पद अभी भी रिक्त हैं। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत राज्य स्तर पर एक मुख्य सूचना आयुक्त और अधिकतम 10 सूचना आयुक्तों की नियुक्ति का प्रविधान है, लेकिन वर्तमान में मुख्य सूचना आयुक्त टीवीएसएन प्रसाद के साथ आयोग में पांच सदस्य सेवाएं दे रहे हैं। पिछले साल मार्च में हरियाणा सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने मुख्य सूचना आयुक्त के एक और सात सूचना आयुक्तों के पदों के लिए आवेदन मांगे थे। इसके बाद मई 2025 में पूर्व मुख्य सचिव टीवीएसएन प्रसाद को मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्त किया गया, जबकि उनके साथ सेवानिवृत्त एचसीएस अधिकारी अमरजीत सिंह, कर्मवीर सैनी, नीता खेड़ा, संजय मदान और प्रियंका धूपड़ को राज्य सूचना आयुक्त बनाया गया। हालांकि, प्रियंका धूपड़ की नियुक्ति विवादों में आ गई थी, जिस कारण उन्होंने पदभार नहीं संभाला। बाकी सभी सदस्यों का कार्यकाल मई 2028 तक निर्धारित है। अप्रैल में दो राज्य सूचना आयुक्तों डॉ. कुलबीर छिकारा और डा. जगबीर सिंह का तीन साल का कार्यकाल पूरा हो गया। यह अधिकारी थे दौड़ में यहाँ दी गई जानकारी के आधार पर सेवानिवृत्त अधिकारियों की एक सुव्यवस्थित तालिका (Table) दी गई है:- श्रेणी                   सेवानिवृत्त अधिकारियों के नाम                                                                       विशेष टिप्पणी सेवानिवृत्त IAS     रेणु एस फुलिया, ज्योति अरोड़ा, भूपिंद्र सिंह, अमरजीत सिंह मान, महेश्वर शर्मा, डा. अंकुर गुप्ता,                          महावीर कौशिक, चोखा राम गर्ग, सुनील कुमार गुलाटी, अश्विनी कुमार, सुरजीत कौर, ललित के                          सिवाच, नरेश कुमार, धर्मवीर सिंह, राम सरूप वर्मा, आलोक निगम, अरुण कुमार मित्तल,                          शामलाल                                    (ज्योति अरोड़ा पूर्व में भी सूचना आयुक्त के पद पर रह चुकी हैं।) सेवानिवृत्त IPS     शिवचरण, डा. एलआर बिश्नोई, अरुण कुमार मित्तल, रमेश चंद्र       सेवानिवृत्त HCS     अमरजीत सिंह, अशोक कुमार, सतीश यादव, रामेश्वर मेहरा, चंद्रिका प्रसाद द्विवेदी       सेवानिवृत्त IRS     रणजीत कुमा