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​चिरायु से मिली नई उड़ान- नन्हें सूर्या के टेढ़े पैरों को मिली राह

​चिरायु से मिली नई उड़ान- नन्हें सूर्या के टेढ़े पैरों को मिली राह अब आत्मविश्वास से दौड़ रहा 4 साल का मासूम ​आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की सजगता और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के समन्वय ने बदला सूर्या का जीवन ​रायपुर,   जन्म के साथ ही जिसके नन्हें कदमों पर दुखों का साया मंडरा रहा था, जो मासूम चलने-फिरने और दौड़ने के लिए तरसता था, आज वही 4 वर्षीय सूर्या यादव अपने हमउम्र बच्चों के साथ खुशी से दौड़-भाग रहा है। सरकार की संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाओं, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु योजना) और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की सतर्कता ने इस मासूम को नया जीवन प्रदान किया है। ​चिंता के बादलों से घिरी थी मासूमियत        ​सारंगढ़ के एक सामान्य परिवार में जन्मे सूर्या के दोनों पैर जन्मजात विकृति श्क्लबफुटश् से प्रभावित थे। पैर टेढ़े होने के कारण मासूम सूर्या ठीक से खड़ा भी नहीं हो पाता था। जैसे-जैसे सूर्या बड़ा हो रहा था, उसके माता-पिता के दिलों में उसके भविष्य को लेकर चिंता गहरी होती जा रही थी। आर्थिक तंगी और सही मार्गदर्शन के अभाव में परिवार खुद को असहाय महसूस कर रहा था। ​आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बनीं देवदूत, चिरायु टीम ने संभाली कमान        ​   मासूम सूर्या के जीवन में मोड़ तब आया जब स्थानीय आंगनबाड़ी केंद्र की सजग कार्यकर्ता श्रीमती रमाधि चौहान की नज़र बच्चे की स्थिति पर पड़ी। उन्होंने बिना देर किए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की चिरायु टीम (सारंगढ़) को इसकी सूचना दी।           ​सूचना मिलते ही चिरायु दल ने सूर्या का विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण किया और उसे निरूशुल्क व उच्च स्तरीय उपचार के लिए जिला अस्पताल रायगढ़ भेजा। वहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में प्लास्टर चढ़ाने तथा आवश्यक फिजियोथेरेपी व चिकित्सकीय प्रक्रियाओं के माध्यम से सूर्या का क्रमबद्ध एवं नियमित इलाज शुरू हुआ। ​रंग लाई मेहनत- सीधे हुए पैर, चेहरे पर लौटी मुस्कान       ​लगातार उपचार और उचित देखभाल का नतीजा यह हुआ कि सूर्या के पैरों का टेढ़ापन पूरी तरह ठीक हो गया। कभी जो बच्चा दो कदम चलने के लिए संघर्ष करता था, आज वह बिना किसी सहारे के आत्मनिर्भर होकर खेल रहा है, दौड़ रहा है और अपना बचपन जी रहा है। अपने कलेजे के टुकड़े को सामान्य बच्चों की तरह हंसते-खेलते देख माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू छलक आए। सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का वास्तविक ध्येय यही है कि पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचे। चिरायु योजना के माध्यम से मासूम सूर्या के जीवन में आया यह बदलाव सरकार की प्रतिबद्धता का परिणाम है। ‘सेवा की कहानी-कहानी बदलाव की        ​मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा संचालित चिरायु योजना राज्य के लाखों नौनिहालों के लिए वरदान साबित हो रही है। आंगनबाड़ी केंद्रों एवं स्कूलों में जाकर बच्चों में जन्मजात बीमारियों और कमियों की पहचान कर उनका समय पर निरूशुल्क इलाज सुनिश्चित किया जा रहा है।       ​सूर्या के सफल उपचार पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और चिरायु दल के प्रयासों की सराहना हो रही है। मासूम सूर्या के खिलखिलाते चेहरे और दौड़ते कदम इस बात का जीवंत प्रमाण हैं कि सही समय पर सही पहल किसी का पूरा जीवन बदल सकती है।

झारखंड में 1 नवंबर से बदलेगी डाक विभाग की व्यवस्था, 4 नए प्रमंडल और 3 उप प्रमंडल बनेंगे

रांची झारखंड में डाक विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। डाक विभाग ने राज्य में एक नए डाक रीजन के गठन के साथ चार नए डाक प्रमंडल और तीन उप डाक प्रमंडल बनाने की मंजूरी दी है। इसके तहत धनबाद में नया रीजन बनेगा, जबकि बोकारो, रामगढ़, चाईबासा और खूंटी में नए डाक प्रमंडल गठित किए जाएंगे। वहीं, इटखोरी, अमड़ापाड़ा और छिपादोहर में नए उप डाक प्रमंडल बनाए जाएंगे। केंद्रीय संचार मंत्रालय के डाक विभाग ने 12 अक्टूबर को इस संबंध में आदेश जारी किया है। नई व्यवस्था एक नवंबर 2026 से लागू होगी। डाक विभाग के अनुसार, प्रशासनिक कामकाज को बेहतर बनाने, कारोबार बढ़ाने और राजस्व में वृद्धि के उद्देश्य से यह पुनर्गठन किया गया है। अभी झारखंड सर्किल में एक ही रीजन है, जिसे रांची रीजन कहा जाता है। इसके विभाजन के बाद धनबाद रीजन अस्तित्व में आएगा। इसका मुख्यालय धनबाद में होगा। धनबाद रीजन में सात प्रमंडल नए धनबाद रीजन के अंतर्गत देवघर, धनबाद, गिरिडीह, हजारीबाग और संताल परगना के मौजूदा डाक प्रमंडलों के साथ नए बोकारो और रामगढ़ प्रमंडल शामिल होंगे। वहीं, रांची रीजन के अंतर्गत गुमला, पलामू और रांची के अलावा सिंहभूम तथा नवगठित चाईबासा और खूंटी प्रमंडल रहेंगे। बोकारो डाक प्रमंडल का मुख्यालय बोकारो और रामगढ़ प्रमंडल का मुख्यालय रामगढ़ कैंट प्रधान डाकघर में होगा। चाईबासा प्रमंडल का गठन मौजूदा सिंहभूम प्रमंडल को बांटकर किया जाएगा। वहीं, खूंटी प्रमंडल रांची डाक प्रमंडल के पुनर्गठन से बनेगा। इसका मुख्यालय खूंटी एमडीजी में होगा तीन उप डाक प्रमंडल भी बनेंगे विभाग ने हजारीबाग, संताल परगना और पलामू डाक प्रमंडलों के पुनर्गठन के तहत तीन नए उप डाक प्रमंडल बनाने की मंजूरी दी है। इटखोरी उप डाक प्रमंडल हजारीबाग प्रमंडल के बरही और चतरा क्षेत्रों के पुनर्गठन से बनेगा। अमड़ापाड़ा उप डाक प्रमंडल के गठन के लिए पाकुड़, दुमका सेंट्रल और साहिबगंज क्षेत्रों का पुनर्गठन होगा। वहीं, छिपादोहर उप डाक प्रमंडल पलामू प्रमंडल के लातेहार, सेंट्रल और पलामू ईस्ट क्षेत्रों के पुनर्गठन से बनेगा। मौजूदा बजट से होगा संचालन आदेश में नए प्रशासनिक कार्यालयों के संचालन के लिए अतिरिक्त बजट नहीं देने की बात कही गई है। जरूरी उपकरणों और अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च मौजूदा स्वीकृत बजट से किया जाएगा। कर्मचारियों की तैनाती उनकी सहमति और अनुरोध के आधार पर करने का निर्देश दिया गया है। नई व्यवस्था लागू होने के एक साल बाद संबंधित इकाइयों के कामकाज, कार्यभार और राजस्व की समीक्षा भी की जाएगी।   

फसल बीमा क्लेम पर बड़ा फैसला, डूंगरपुर के किसानों को मिलेंगे 7.69 करोड़ रुपये

जयपुर  पंचायतीराज चुनाव प्रक्रिया के बीच फसल खराब होने पर बीमा क्लेम के इंतजार में बैठे किसानों के लिए राहत की खबर है। फसल कटाई प्रयोगों और बीमित क्षेत्र को लेकर बीमा कंपनियों की ओर से दर्ज आपत्तियों के निस्तारण के बाद डूंगरपुर और जालोर के किसानों को करोड़ों रुपए का लाभ मिलेगा। अकेले डूंगरपुर में 155 फसल कटाई प्रयोगों पर दर्ज आपत्तियां दूर होने से किसानों को करीब 7.69 करोड़ रुपए का लाभ मिलेगा, जबकि जालोर में दो अलग-अलग प्रकरणों में 13 करोड़ रुपए से अधिक की राशि से जुड़ी आपत्तियों का निस्तारण किया गया। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों की शिकायतों के निस्तारण के लिए बुधवार को जयपुर स्थित कृषि पंत भवन में राज्य स्तरीय शिकायत निराकरण समिति (एसजीआरसी) की बैठक हुई। कृषि विभाग की शासन सचिव मंजू राजपाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में विभिन्न जिलों से मिले प्रकरणों की समीक्षा कर उनका निस्तारण किया गया। कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने कहा कि फसल बीमा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कृषि विभाग, बीमा कंपनियों और संबंधित वित्तीय संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। किसानों के बीमा संबंधी प्रकरणों में तथ्यों और अभिलेखों की समुचित जांच की गई है, ताकि पात्र किसानों को योजना का लाभ लेने में अनावश्यक परेशानी न हो। डूंगरपुर: एक साल से लंबित था भुगतान डूंगरपुर जिले में खरीफ मौसम 2025 के दौरान बीमा कंपनी ने 155 फसल कटाई प्रयोगों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। समिति ने इन आपत्तियों का निस्तारण किया, जिससे किसानों को करीब 7.69 करोड़ रुपए का लाभ मिलेगा। जालोर: दो साल से चक्कर काट रहे थे किसान जालोर जिले में रबी मौसम 2023-24 के दौरान चवरडा पटवार मंडल में सरसों की फसल के फसल कटाई प्रयोगों पर बीमा कंपनी की ओर से दर्ज आपत्तियों का निस्तारण किया गया। इसके बाद किसानों के लिए 1 करोड़ 22 लाख रुपए का बीमा क्लेम मंजूर किया गया। 13 पटवार मंडलों में 12.36 करोड़ रुपए की आपत्तियों का निस्तारण जालोर में खरीफ मौसम 2024 के दौरान गिरदावरी रिपोर्ट के अभिलेखों में दर्ज फसलों का बीमित क्षेत्र वास्तविक बोए गए क्षेत्र से अधिक होने से संबंधित मामला सामने आया था। इस संबंध में 13 पटवार मंडलों में करीब 12 करोड़ 36 लाख रुपए की राशि से जुड़ी आपत्तियों का निस्तारण किया गया, जिससे किसानों को लाभ मिलेगा।  

नुआखाई हमारी कृषि संस्कृति, अन्नदाता के परिश्रम और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का पर्व : मुख्यमंत्री

रायपुर   मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा है कि किसानों की खुशहाली और समृद्धि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था और संस्कृति के केंद्र में हमारे अन्नदाता हैं। राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। हमारा प्रयास है कि सुशासन और जनसेवा के माध्यम से विकास योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे और छत्तीसगढ़ का प्रत्येक परिवार प्रदेश की विकास यात्रा में सहभागी बने। मुख्यमंत्री  साय ने आज रायगढ़ के शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी स्टेडियम में आयोजित कोलता समाज के नुआखाई भेंटघाट एवं प्रतिभा सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री  साय का समाजजनों ने पारंपरिक गजमाला पहनाकर आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने माँ रणेश्वरी रामचण्डी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर समाज की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ग्राम कोतरलिया के चंडी डोंगरी में सर्वसुविधायुक्त सामुदायिक भवन के निर्माण के लिए 30 लाख रुपए तथा नगर पंचायत पुसौर में कोलता समाज के मंगल भवन के निर्माण के लिए 50 लाख रुपए प्रदान करने की घोषणा की। उन्होंने बाउंड्रीवॉल निर्माण की भी घोषणा की। नुआखाई अन्नदाता के परिश्रम और नई फसल की खुशियों का पर्व मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कोलता समाज सहित सभी प्रदेशवासियों को नुआखाई पर्व की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि नुआखाई हमारी समृद्ध कृषि संस्कृति से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। यह नई फसल के स्वागत, अन्नदाता के परिश्रम के सम्मान और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का उत्सव है। ऐसे पर्व हमारी परंपराओं को जीवंत रखने के साथ नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और जड़ों से जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान प्रदेश है और हमारी सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। किसानों को उनकी मेहनत का उचित प्रतिफल मिले, खेती की लागत कम हो, सिंचाई की सुविधा बढ़े और कृषि के माध्यम से परिवारों में समृद्धि आए, इसी सोच के साथ सरकार लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रायगढ़ अंचल के किसानों के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुँचाने के लिए केलो परियोजना का कार्य प्रारंभ किया गया है। यह परियोजना क्षेत्र के किसानों के लिए वरदान सिद्ध होगी। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से खेती की उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकास को नई गति देने के लिए 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक की नई परियोजनाएँ शुरू की गई हैं। सरकार का प्रयास है कि अधोसंरचना के विकास का सीधा लाभ आम नागरिकों, किसानों, युवाओं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिले। हर जरूरतमंद परिवार के पक्के घर का सपना हो रहा साकार मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गरीब और जरूरतमंद परिवारों के पक्के घर के सपने को तेजी से साकार किया जा रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में प्रतिदिन लगभग 1,600 आवासों का निर्माण हो रहा है। उन्होंने कहा कि अपना पक्का घर केवल चार दीवारें और छत नहीं, बल्कि गरीब परिवार के लिए सम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य का आधार है। हमारी सरकार का प्रयास है कि कोई भी पात्र जरूरतमंद परिवार पक्के आवास से वंचित न रहे। सुशासन, पारदर्शिता और जनसेवा सरकार की कार्यसंस्कृति मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार ने सुशासन, पारदर्शिता और जनसेवा को अपनी कार्यसंस्कृति का आधार बनाया है। आम नागरिक को अपनी समस्या के समाधान के लिए भटकना न पड़े और शासन तक उसकी पहुँच आसान हो, इसके लिए तकनीक और आधुनिक व्यवस्थाओं का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों की समस्याओं और शिकायतों के त्वरित तथा समयबद्ध निराकरण के लिए सुशासन एवं अभिसरण विभाग, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, सेवा सेतु और अटल डिजिटल सेवा केंद्र जैसी व्यवस्थाएँ प्रारंभ की गई हैं। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से नागरिकों की शिकायतों के समयबद्ध समाधान की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की गारंटी के अनुरूप राज्य सरकार ने अपने ढाई वर्षों के कार्यकाल में अधिकांश वादों को पूरा किया है। शासन की योजनाएँ तभी सार्थक होती हैं, जब उनका लाभ जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर पहुँचे। इसलिए सरकार की प्राथमिकता योजनाओं और सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है। नक्सलवाद के विरुद्ध मिली ऐतिहासिक सफलता, अब विकास की नई यात्रा मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रदेश में नक्सलवाद को समाप्त करने की दिशा में ऐतिहासिक सफलता मिली है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के दृढ़ संकल्प के साथ हमारे वीर सुरक्षा बलों के साहस तथा स्थानीय जनता के सहयोग से बस्तर में शांति और विश्वास का नया वातावरण बना है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद से जुड़े लोगों को हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में वापस आने का अवसर दिया जा रहा है। आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए 15 हजार आवास स्वीकृत किए गए हैं। हमारा उद्देश्य शांति की स्थापना के साथ प्रभावित परिवारों का पुनर्वास करना और उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अवसर प्रदान करना है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि नक्सलवाद की चुनौती से आगे बढ़ता छत्तीसगढ़ अब विकास, विश्वास और समृद्धि की नई पहचान बना रहा है। बस्तर सहित प्रदेश के हर क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री  साय ने समारोह में समाज के प्रतिभावान विद्यार्थियों को सम्मानित करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यक्ति, परिवार और समाज की प्रगति का सबसे सशक्त माध्यम है। आज का युवा अपनी मेहनत, प्रतिभा और आधुनिक शिक्षा के बल पर किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए परिश्रम करने का आह्वान करते हुए कहा कि युवा अपनी प्रतिभा से परिवार और समाज के साथ छत्तीसगढ़ का नाम भी देश-दुनिया में रोशन करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज द्वारा प्रतिभावान विद्यार्थियों का सम्मान करने की परंपरा सराहनीय है। इससे बच्चों और युवाओं को बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलती है तथा समाज में शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार होता है। कोलता समाज की संस्कृति और संस्कार … Read more

परगट सिंह के गढ़ जालंधर में AAP की नई नियुक्ति, दीपक बाली को मिली जिम्मेदारी

जालंधर. पंजाब की राजनीति में हलचल तेज करते हुए आम आदमी पार्टी ने जालंधर में एक बड़ा सांगठनिक फेरबदल किया है। हाईकमान ने जालंधर कैंट विधानसभा क्षेत्र में पार्टी को मजबूत करने के उद्देश्य से दीपक बाली को नया हलका इंचार्ज नियुक्त किया है। यह कदम पंजाब कांग्रेस के नए बनाए गए प्रधान परगट सिंह के गढ़ में पार्टी के आधार को और मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले जालंधर कैंट क्षेत्र की कमान पार्टी की वरिष्ठ नेता राजविंदर कौर थियाड़ा के हाथों में थी। अब पार्टी ने सांगठनिक बदलाव करते हुए उन्हें इस पद से हटाकर दीपक बाली को जिम्मेदारी सौंपी है। गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान इस सीट से पूर्व ओलंपियन सुरिंदर सिंह सोढ़ी ने आम आदमी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था। लंबे समय से जालंधर में सक्रीय दीपक बाली लंबे समय से जालंधर और आसपास के राजनीतिक व सामाजिक हलकों में काफी सक्रिय रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में पहले से ही चर्चा जोरों पर थी कि वे 2027 विधानसभा चुनावों में कैंट विधानसभा क्षेत्र से अपनी दावेदारी पेश कर सकते हैं। अब पार्टी द्वारा उन्हें हलका इंचार्ज बनाए जाने के बाद इस क्षेत्र से उनकी राजनीतिक दावेदारी को और अधिक मजबूत कर दिया है। परगट सिंह के सामने आप का दाव जांलधर कैंट के विधायक परगट सिंह के पंजाब कांग्रेस के प्रधान चुने जाने के बाद से ही ये सीट वीआईपी बन चुकी है और 2027 के चुनावों के लिए सबसे चर्चित सीटों में से एक है। ऐसे में आम आदमी पार्टी द्वारा एक मजबूत और सक्रिय चेहरे को हलका इंचार्ज बनाना यह साफ संकेत देता है कि आने वाले समय में इस सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प और कड़ा होने वाला है।

निकम के जीवन पर केन्द्रित फीचर फिल्म प्रहार के प्रमोशन से संबंधित

पद्मश्री निकम का राज्य सरकार की ओर से किया अभिनंदन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को सामाजिक संस्था 'सार्थक' द्वारा इंदौर में आयोजित एक समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित किया। यह समारोह देश के प्रसिद्ध विशेष लोक अभियोजक एवं वर्तमान में राज्यसभा सांसद पद्मश्री उज्ज्वल निकम के जीवनवृत पर केंद्रित फीचर फिल्म 'प्रहार' के प्रमोशन को लेकर आयोजित किया गया था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश के लिए जीना ही वास्तविक जीना है। निकम ने अपनी प्रखर राष्ट्रवादी एवं अत्यंत तर्कपूर्ण दलीलों से मुम्बई आतंकवादी हमले के जीवित आरोपी को अंततः सज़ा दिलाकर एक नई मिसाल कायम की। उन्होंने कहा कि इस केस में जीत हासिल कर निकम ने न्याय के प्रति देशवासियों की आस्था और विश्वास को और भी मजबूती दी। संघर्षपूर्ण जीवन के बावजूद निकम ने न केवल अपने नाम 'उज्ज्वल' को 'सार्थक' किया, अपितु न्याय सेवकों की भावी पीढ़ी (पब्लिक प्रासिक्यूटर्स) के लिए भी एक मानक स्थापित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पद्मश्री उज्ज्वल निकम का व्यक्तिश: और पूरी सरकार की ओर से मध्यप्रदेश की धरती पर स्वागत एवं अभिनंदन किया। कार्यक्रम को उज्ज्वल निकम एवं अन्य ने भी संबोधित किया। उल्लेखनीय है कि उज्ज्वल निकम ने सालों पहले देश की कमर्शियल कैपिटल मुम्बई पर हुए सुनियोजित आतंकी हमले में मुठभेड़ के बाद जीवित पकड़े गए आतंकवादी अज़मल कसाब के विरुद्ध पैरवी कर उसे सज़ा दिलाई थी। इनके जीवन पर केंद्रित फीचर फिल्म प्रहार में प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता राजकुमार राव ने निकम का किरदार निभाया है। कार्यक्रम में पद्मश्री भालू मोंढे, जीतू जिराती, श्रीमती ज्योति उज्ज्वल निकम (ज्योतिजी मूलतः धार जिले से हैं), सार्थक संस्था के संस्थापक दीपक जैन (टीनू), राहुल सेठी एवं बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।  

छत्तीसगढ़ में भीषण सड़क हादसा, विधायक मोहले के भाई सहित तीन लोगों ने गंवाई जान

मुंगेली. छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में दर्दनाक सड़क हादसे में विधायक पुन्नूलाल मोहले के भाई अधीन मोहले समेत तीन लोगों की मौत हो गई। हादसा जरहागांव थाना क्षेत्र के दशरंगपुर गांव में हुआ। जानकारी के मुताबिक, तेज रफ्तार पिकअप वाहन तीनों को टक्कर मारने के बाद मौके से फरार हो गया। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान तीनों ने दम तोड़ दिया। इस हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान अधीन मोहले निवासी आवासपारा दशरंगपुर, बल्लू बघेल पिता तिजऊ राम और गंगा राम निवासी रेहुंटा के रूप में हुई है। घटना की खबर मिलते ही क्षेत्र में शोक का माहौल है। अपने भाई अधीन मोहले समेत तीन लोगों की मौत की खबर मिलते ही विधायक पुन्नूलाल मोहले जिला अस्पताल पहुंचे। पोस्टमार्टम के बाद उन्होंने तीनों मृतकों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान विधायक के समर्थकों के साथ भाजपा नेता और कार्यकर्ता भी जिला अस्पताल पहुंचने लगे। आज गृह ग्राम में होगा अधीन मोहले का अंतिम संस्कार विधायक पुन्नूलाल मोहले के भाई अधीन मोहले का अंतिम संस्कार आज दोपहर 3 बजे उनके गृह ग्राम दशरंगपुर में किया जाएगा। हादसे के बाद मृतकों के परिजनों और परिचितों में शोक व्याप्त है। तेज रफ्तार पिकअप की टक्कर से हुए इस हादसे ने क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। हादसे के बाद वाहन चालक फरार है। पुलिस मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई में जुटी है।

‘2027 में हारेंगे, इसलिए अभी से वोट चोरी का बहाना’… अखिलेश पर बरसे दयाशंकर सिंह

'जब अखिलेश CM थे तब 2014 में 73 और 2017 में 330 सीटें कैसे जीता NDA?',दयाशंकर सिंह ने सपा को घेरा 'अपनी हार छिपाने के लिए चुनाव आयोग पर ठीकरा फोड़ रहे अखिलेश'… दयाशंकर सिंह का हमला लखनऊ समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के चुनाव आयोग पर फर्जी वोट बनवाने और भाजपा पर फर्जी वोट डालने के आरोपों पर योगी सरकार के मंत्री दयाशंकर सिंह ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ही हार का बहाना तैयार करने में जुट गए हैं। इसलिए वो चुनाव आयोग पर भ्रामक आरोप लगा रहे हैं। दयाशंकर सिंह ने 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत का हवाला देते हुए सवाल किया कि उस समय अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे, तब क्या उन्होंने खुद वोट चोरी करवाकर भाजपा को जिताया था? '2027 में हारेंगे, इसलिए अभी से बना रहे बहाना' मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव चुनाव आयोग पर आरोप लगाकर अपनी हार छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सपा प्रमुख को पहले से ही 2027 के चुनाव में हार का डर सता रहा है, इसलिए वह अभी से ऐसी भूमिका तैयार कर रहे हैं कि चुनाव परिणाम उनके खिलाफ आए तो उसे वोट चोरी का नाम दिया जा सके। दयाशंकर सिंह ने कहा कि चुनाव हारने की खीझ में इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। उनके मुताबिक, अखिलेश यादव अपनी हार का ठीकरा चुनाव आयोग पर फोड़कर पहले से ही जनता और मीडिया के सामने सफाई तैयार करना चाहते हैं। 'अखिलेश मुख्यमंत्री थे, तब भाजपा कैसे जीती?' दयाशंकर सिंह ने अखिलेश यादव के आरोपों पर सवाल उठाते हुए 2014 और 2017 के चुनावों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2014 के लोकसभा चुनाव के समय अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए ने प्रदेश की 80 में से 73 सीटें जीती थीं। उन्होंने सवाल किया कि अगर चुनाव में वोट चोरी हो रही थी, तो उस समय भाजपा को इतनी बड़ी जीत कैसे मिली? दयाशंकर सिंह ने 2017 के विधानसभा चुनाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय भी अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे और भाजपा गठबंधन को 330 सीटें मिली थीं। मंत्री ने तंज कसते हुए पूछा कि क्या उस समय भी अखिलेश यादव ने वोट चोरी करवाकर भाजपा को जिताया था? कांग्रेस पर भी साधा निशाना, इमरजेंसी का किया जिक्र दयाशंकर सिंह ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाने के मुद्दे पर कांग्रेस को भी घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतंत्र को सबसे ज्यादा कांग्रेस ने बदनाम किया है। इमरजेंसी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश में आपातकाल कांग्रेस ने लगाया था और उसके शासनकाल में संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज पर राजनीतिक प्रभाव रहता था। दयाशंकर सिंह ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में सभी संस्थाएं स्वतंत्र रूप से अपना काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग अपना काम कर रहा है, लेकिन विपक्षी दलों को यह रास नहीं आ रहा है। मंत्री के मुताबिक, अखिलेश यादव और कांग्रेस चुनाव आयोग पर सवाल उठाकर अपनी राजनीतिक परेशानी जाहिर कर रहे हैं।

मध्य प्रदेश में औद्योगिक विकास को मिलेगी रफ्तार, 7 जिलों में बनेंगे इंडस्ट्रियल हब; रोजगार पर जोर

जबलपुर, भोपाल और इंदौर को जोड़ते हुए 7 जिलों में विकसित किए जाएंगे विश्वस्तरीय इंडस्ट्रियल हब जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरीडोर के समेकित विकास के लिए विशेष प्रयोजन कंपनी के गठन की स्वीकृति "हर अंचल में निवेश, हर जिले में रोजगार" के संकल्प के साथ आगे बढ़ेगा मध्यप्रदेश स्थानीय स्तर पर 6 लाख से अधिक रोजगार का होगा सृजन प्रदेश में संतुलित और तीव्र औद्योगिकीकरण के नए युग का सूत्रपात मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद का दूरगामी एवं ऐतिहासिक निर्णय भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के "हर अंचल में निवेश और हर जिले में रोजगार" के संकल्प को साकार करते हुए मंत्रि-परिषद ने प्रदेश के सर्वांगीण, समावेशी और संतुलित क्षेत्रीय विकास को अभूतपूर्व गति देने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक और युगांतरकारी निर्णय लिया है। प्रदेश के तीन सबसे बड़े आर्थिक, व्यापारिक और ज्ञान केंद्रों जबलपुर, भोपाल और इन्दौर जोड़ते हुए 'इंडस्ट्रियल कॉरीडोर' समेकित एवं योजनाबद्ध विकास को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस दूरगामी परियोजना के माध्यम से 7 प्रमुख जिलों इंदौर, भोपाल, जबलपुर, नरसिंहपुर, रायसेन, सीहोर और देवास में विश्वस्तरीय आर्थिक और औद्योगिक संकुलों की स्थापना की जाएगी। इससे महाकौशल, मध्य क्षेत्र और मालवा अंचल के जन-जीवन में व्यापक आर्थिक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा। शासन का यह प्रयास राज्य के औद्योगिक विकास को बड़े महानगरों तक सीमित न रखकर प्रदेश के शहरी और ग्रामीण अंचलों तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। स्थानीय युवाओं को मिलेंगे रोजगार के अवसर-जीवन स्तर में आयेगा गुणात्मक सुधार राज्य शासन की इस विकास पहल का सर्वोच्च ध्येय स्थानीय नागरिकों और युवाओं के जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार लाना है। जबलपुर से इन्दौर तक नियोजित औद्योगिक हब में यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि मध्यप्रदेश के हुनरमंद युवाओं को रोजगार अथवा आजीविका की तलाश में अपने गृह नगर और राज्य से पलायन न करना पड़े। कॉरीडोर के माध्यम से स्थानीय स्तर पर ही उच्च गुणवत्ता वाले आधुनिक रोजगार उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे युवा अपनी योग्यता के अनुरूप सम्मानजनक आजीविका प्राप्त कर सकेंगे और देश-दुनिया के बड़े निवेशक मध्यप्रदेश की धरती पर निवेश करने के लिए आकर्षित होंगे। किसानों की समृद्धि का आधार बनेगा नरसिंहपुर और रायसेन मे एग्री-प्रोसेसिंग क्लस्टर औद्योगिक कॉरीडोर में कृषक कल्याण को केंद्रीय प्राथमिकता दी गई है। नर्मदा घाटी की समृद्ध कृषि पट्टी से जुड़े नरसिंहपुर और रायसेन जिलों में आधुनिक फूड पार्क्स, उन्नत कृषि-प्रसंस्करण इकाइयां, वेयरहाउसिंग और कोल्ड चेन नेटवर्क स्थापित किए जाएंगे। इस पहल से स्थानीय किसानों द्वारा उत्पादित फसलों, दलहन, तिलहन, फल एवं सब्जियों का स्थानीय स्तर पर ही प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन सुनिश्चित होगा। किसानों को बिचौलियों से मुक्ति पाकर अपनी उपज का लाभकारी व बेहतर मूल्य सीधे प्राप्त होगा। साथ ही ग्रामीण युवाओं को अपने ही गांव व तहसील के निकट कृषि-आधारित उद्योगों में रोजगार प्राप्त होगा। जबलपुर में रक्षा व इंजीनियरिंग विनिर्माण को मिलेगी नई पहचान महाकौशल क्षेत्र में जबलपुर और उसके आसपास के भू-भाग को उन्नत विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए ठोस कार्य योजना बनाई गई है। इस क्षेत्र में भारी इंजीनियरिंग, आधुनिक विनिर्माण, रक्षा एवं एयरोस्पेस क्षेत्र की सहायक इकाइयों तथा लॉजिस्टिक्स हब का विकास किया जाएगा। क्लस्टर के विकास से न केवल स्थानीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को बड़े पैमाने पर काम मिलेगा बल्कि महाकौशल के तकनीकी व गैर-तकनीकी युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर हजारों नए रोजगार सृजित होंगे। भोपाल को आधुनिक ज्ञान और उच्च प्रौद्योगिकी के वैश्विक केंद्र के रूप में किया जाएगा विकसित राजधानी भोपाल और उसके समीपवर्ती क्षेत्र को आधुनिक ज्ञान और उच्च प्रौद्योगिकी के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यहाँ सूचना प्रौद्योगिकी, आईटी-सक्षम सेवाओं, नॉलेज सर्विसेज, इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग और अनुसंधान एवं विकास से जुड़े आधुनिक क्लस्टर्स स्थापित होंगे। इससे राजधानी के विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग और प्रबंधन संस्थानों से निकलने वाले उच्च-शिक्षित युवाओं को अत्याधुनिक और उच्च-वेतन वाले रोजगार के अवसर अपने शहर में ही उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही इस क्षेत्र में उच्च स्तरीय नागरिक व सामाजिक अधोसंरचना का भी विस्तार किया जाएगा जिससे संपूर्ण क्षेत्र का जीवन स्तर बेहतर होगा। मालवा-निमाड़ के औद्योगिक क्षेत्र का होगा सुदृढ़ीकरण मध्य और पश्चिमी मध्यप्रदेश के आर्थिक केंद्रों को जोड़ने वाले सीहोर एवं देवास क्षेत्र में बड़े पैमाने पर खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां, विनिर्माण उद्योग, वेयरहाउसिंग और रणनीतिक लॉजिस्टिक्स हब स्थापित किए जाएंगे। देश की वाणिज्यिक राजधानी इन्दौर को एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, आधुनिक आईटी सेवाओं और वैश्विक सेवा उद्योग के केंद्र के रूप में और अधिक विस्तार दिया जाएगा। इस नए कॉरीडोर का सीधा जुड़ाव देवास और पीथमपुर के पहले से विकसित सुदृढ़ औद्योगिक इको सिस्टम से किया जाएगा, जिससे समूचे मालवा-निमाड़ अंचल में परिवहन, होटल, खुदरा व्यापार और सहायक सेवाओं में अभूतपूर्व आर्थिक वृद्धि होगी। औद्योगिक टाउनशिप का श्रमिक कल्याण के साथ होगा निर्माण राज्य सरकार द्वारा इस कॉरीडोर के सड़क के किनारे सुनियोजित औद्योगिक टाउनशिप निर्माण का प्रारूप तैयार किया गया है। इन हबों के भीतर केवल कारखाने ही नहीं होंगे बल्कि कार्यरत श्रमिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और कर्मचारियों के लिए सर्वसुविधायुक्त आवासीय परिसर तैयार किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त कर्मचारियों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए टाउनशिप्स में अत्याधुनिक अस्पताल, उच्च गुणवत्ता वाले विद्यालय, डे-केयर केंद्र, आधुनिक कौशल विकास संस्थान, खेल परिसर और सघन हरित क्षेत्र अनिवार्य रूप से विकसित किए जाएंगे। इस तरह के प्रकल्प से श्रमिकों को कारखानों के समीप ही सुरक्षित, स्वस्थ और उच्च स्तरीय जीवन परिवेश प्राप्त होगा। उद्योगों के लिए 'प्लग-एंड-प्ले' मॉडल से सीधे उत्पादन की सुविधा होगी उपलब्ध निवेशकों और उद्यमियों को आकर्षित करने के लिए इस कॉरीडोर में अत्याधुनिक 'प्लग-एंड-प्ले' अधोसंरचना उपलब्ध कराई जाएगी। उद्योगपतियों को समतल व विकसित भूमि, चौड़ी आंतरिक सड़कें, 24 घंटे निर्बाध गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति, प्रचुर औद्योगिक जल, कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, वैज्ञानिक सीवरेज प्रणाली और हाई-स्पीड डिजिटल कनेक्टिविटी पहले से पूरी तरह तैयार मिलेगी। निवेशक इन बुनियादी सुविधाओं के साथ अपनी मशीनरी स्थापित कर तत्काल उत्पादन प्रारंभ कर सकेंगे। इससे परियोजनाओं की स्थापना अवधि में भारी कमी आएगी और उत्पादन लागत घटेगी। स्थानीय स्तर पर 6 लाख से अधिक रोजगार के अवसर का सृजन परियोजना के प्रथम चरण में 7 जिलों के रणनीतिक स्थानों पर लगभग 10 हजार एकड़ क्षेत्र में 3 से 5 प्राथमिक औद्योगिक हब विकसित किए जाएंगे। प्रारंभिक आंकलन और अध्ययन के अनुसार मार्च 2028 … Read more

IMF ने फिर जताया भारत की इकोनॉमी पर भरोसा, GDP ग्रोथ के अनुमान में बढ़ोतरी के बाद आई नई टिप्पणी

नई दिल्ली भारत रुकने वाला नहीं है और इंडियन इकोनॉमी की तेज रफ्तार का लोहा दुनियाभर की एजेंसियों ने माना है. हाल ही में भारत के जीडीपी ग्रोथ के अनुमान में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने बड़ा इजाफा किया था और अब अपने इस फैसले को सही ठहराते हुए भारत की इकोनॉमी की तारीफ की है. IMF ने कहा है कि इंडियन इकोनॉमी की तेज रफ्तार बरकरार है और ये तमाम ग्लोबल टेंशन के बीच भी 7% की रफ्तार से ग्रोथ करेगी।  वैश्विक निकायस ने कहा है कि दुनिया में ऊर्जा संकट और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत बनी हुई है और इसकी आर्थिक वृद्धि पर पूरा भरोसा है. IMF ने भारत की आर्थिक नीतियों, राजकोषीय सावधानी और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के आंकड़ों में किए गए हालिया बदलावों की भी तारीफ की है।  भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान क्यों बढ़ा? IMF के एशिया और प्रशांत विभाग के निदेशक कृष्णा श्रीनिवासन ने 15 अक्टूबर को बैंकॉक में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि भारत मौजूदा वैश्विक संकट में मजबूत आर्थिक बुनियाद और राजकोषीय सावधानी के साथ उतरा है. उनके मुताबिक, भारत ने वैश्विक झटकों का अच्छी तरह सामना किया है।  भारत की आर्थिक वृद्धि के बेहतर अनुमान के पीछे घरेलू डिमांड और सर्विस सेक्टर की अहम भूमिका है. सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि दर 7.8% रही. इसके बाद 2026 के आर्थिक वृद्धि अनुमान में अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की गई।  कैलेंडर वर्ष के आधार पर भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2026 में 7.4% और 2027 में 7% रहने का अनुमान है. वहीं, मध्यम अवधि में यह दर 6.9% के आसपास रह सकती है।  'रुपये पर दबाव आर्थिक कमजोरी नहीं' भारतीय रुपये पर दबाव को लेकर IMF ने अहम बात कही है. कृष्णा श्रीनिवासन के मुताबिक, रुपये पर दबाव और उतार-चढ़ाव को सीधे अर्थव्यवस्था की नाकामी से जोड़कर नहीं देखना चाहिए. इस पर वैश्विक ब्याज दरों, निवेशकों के जोखिम लेने की प्रवृत्ति और कच्चे तेल की कीमतों का भी असर पड़ता है।  भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के बड़े हिस्से के लिए कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से देश के आयात बिल और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है. इसके अलावा, विकसित अर्थव्यवस्थाओं में ऊंची ब्याज दरें भी पूंजी के प्रवाह और निवेशकों के फैसलों को प्रभावित करती हैं।  GDP के नए आंकड़ों पर IMF ने क्या कहा? भारत में GDP के आंकड़ों में हाल में किए गए बदलावों पर भी IMF ने प्रतिक्रिया दी है. कृष्णा श्रीनिवासन ने इन बदलावों को IMF की सलाह और सांख्यिकीय दिशानिर्देशों के अनुरूप बताया और संबंधित मंत्रालय की सराहना की।  भारत की नई GDP सीरीज में 2022-23 को आधार वर्ष बनाया गया है. यह सीरीज IMF के 2017 के दिशानिर्देशों के अनुरूप तैयार की गई है. हालांकि, श्रीनिवासन ने यह भी माना कि राष्ट्रीय आय के आंकड़ों की गुणवत्ता और उन्हें तैयार करने की प्रक्रिया में आगे सुधार की गुंजाइश बनी हुई है।  घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र से मिल रहा सहारा गौरतलब है कि IMF की 13 अक्टूबर को जारी अपनी रिपोर्ट में भारत को दुनिया की तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल किया था. इसमें कहा गया था कि मजबूत घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र आर्थिक वृद्धि को सहारा दे रहे हैं. भारत के पक्ष में युवा आबादी, बड़ा घरेलू बाजार और लगातार हो रहे ढांचागत सुधार जैसे कारक भी काम कर रहे हैं. IMF ने इन वजहों से भारत को क्षेत्र की दूसरी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले एक खास स्थिति में रखा है।  एशिया की विकास दर में सुस्ती का अनुमान जहां एक ओर आईएमएफ को भारत पर भरोसा है और इकोनॉमी की ग्रोथ संभावनाएं दिख रही हैं, वहीं इस बीच पूरे एशिया की अर्थव्यवस्था की रफ्तार कुछ धीमी पड़ने का अनुमान है. IMF के मुताबिक, एशिया की आर्थिक वृद्धि दर 2025 के 5% से घटकर 2026 में 4.8% और 2027 में 4.4% रह सकती है. इसके बावजूद एशिया की वृद्धि दर वैश्विक औसत से ऊपर रहने की संभावना है।  कुल मिलाकर, IMF का अनुमान भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती की ओर इशारा करता है. हालांकि, वैश्विक ऊर्जा संकट, रुपये पर दबाव और रोजगार से जुड़ी चुनौतियों पर नजर रखना भी उतना ही जरूरी होगा।